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                <title>राजस्थान : परिवार समेत पेड़ के नीचे गुजारे एक साल, आज किसानी से देश-विदेश में बनाया बड़ा नाम</title>
                                    <description><![CDATA[जानिए सीकर के कान सिंह निर्वाण की कहानी, कान सिंह : किसान ही भारत को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बना सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/83528/rajasthan-a-year-spent-under-a-tree-with-family-today-a-big-name-has-been-made-in-the-country-and-abroad-by-farming"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-05/7384_loktej27.jpg" alt=""></a><br /><div>देखने में आता है कि मजबूत दिमाग वाले लोग कठोर मेहनत करने से नहीं कतराते। जबकि विरले ही ऐसे होते हैं जो संघर्ष और दृढ़ संकल्प के साथ उनका पूरे परिवार उनके साथ खड़ा होता हैं। सीकर के कान सिंह निर्वाण भी उन्हीं की धुन के साधक हैं। जिसने करीब 1 साल पेड़ के नीचे बिताया। उनके साथ उनकी पत्नी, बच्चे, गाय और घोड़े पेड़ के नीचे थे। इसकी कोई छत नहीं थी। पूरे 1 साल तक ये लोग सर्दी, गर्मी और बारिश को सहते रहे।</div><div>जिसके बाद जब कान सिंह निर्वाण ने अपना घर बनाया तो उन्होंने अपना 80 प्रतिशत सामान अपने खेत से लिया। आज कान सिंह निर्वाण पूरे देश में ग्रामीण पर्यटन के लिए एक आदर्श के रूप में उभरा कर सामने आये हैं। सीकर के कटराथल गांव के कान सिंह निर्वाण आज पूरे देश में एक जाना-पहचाना नाम हैं। एक समय था जब केवल पढ़े-लिखे कान सिंह को तय करना था कि उन्हें क्या करना है। कान सिंह ने भीड़ में शामिल नहीं होने और अपनी एक अलग पहचान बनाने का फैसला किया था। कान सिंह का मानना था कि एक ऐसी रेखा खींची जानी चाहिए जिसका पालन पीढि़यां कर सकें और यह काम उसकी जड़ों से जोड़कर किया जा सकता है। कान सिंह का मानना है कि मनुष्य अपनी जड़ें त्याग कर कुछ भी सार्थक नहीं कर सकता।</div><div>कान सिंह निर्वाण का मानना है कि प्रकृति, पृथ्वी और गाय एक ही हैं और यही मानव की माता है। उन्होंने यह सब समझने की कोशिश की है। इसकी अपनी बोली और भाषा है। कान सिंह निर्वाण का घर 48 से 50 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी आरामदायक हो सकता है और -5 डिग्री सेल्सियस पर भी हमें ठंड नहीं लगती है। इसे देखने के लिए रोजाना देश-विदेश से करीब 50 लोग आते हैं। कान सिंह ऐसे सभी लोगों को प्रकृति की भाषा दिखाते, सिखाते और संप्रेषित करते हैं और साथ ही प्रकृति आधारित जीवन शैली अपनाने की बात करते हैं। इससे लाखों लोग लाभान्वित हुए हैं। जीवन के इस प्राकृतिक तरीके को अपनाने से उनके परिवार में तीन काम हुए हैं। पहले उनके जानवरों को कभी डॉक्टर की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि जानवर कभी बीमार नहीं पड़ते थे। डॉक्टर उनके परिवार के पास नहीं आए हैं क्योंकि किसी भी सदस्य को कोई बीमारी नहीं हुई है। उनका खेत कभी संक्रमित नहीं हुआ।</div><div>दुनिया में कृषि और पर्यावरण से जुड़ी कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसे गाय के साथ जोड़कर हल नहीं किया जा सकता है। ऐसा कोई रोग नहीं है जो गाय के गोबर से ठीक न हो सके। कान सिंह का कहना है कि अगर भारत को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनना है, तो वह ताकत देश के किसानों से आ सकती है, न कि सेना, वैज्ञानिकों या कॉरपोरेट्स से। एक किसान ही भारत को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बना सकता है।</div><div>कान सिंह निर्वाण अभी भी अपने परिवार के साथ एक शानदार जीवन जी रहे हैं। फिर भी उसे पैसे के बारे में बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। इनके तीन बेटे और एक बेटी है। इनकी आमदनी इतनी ज्यादा है कि ये इन सबको महंगे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। पारिवारिक किसान का विचार रखने वाले वे देश के पहले किसान हैं। आज उनके घर देश से डेढ़ से तीन सौ परिवार आते हैं। अपने सामान का उपयोग करने वाले परिवारों में किसी को भी कोई बीमारी नहीं होती है। उन्होंने 300 स्थायी ग्राहक बनाए हैं। सरकार को फैमिली डॉक्टर की तरह ही फैमिली किसान के आइडिया को बढ़ावा देने में मदद करनी चाहिए।</div><div>कान सिंह निर्वाण कहते हैं कि लोगों को प्रकृति, पृथ्वी और गायों की शरण लेनी चाहिए। क्योंकि जो भी गाय का घी पीएगा उसकी आयु लंबी होगी। ग्राम पर्यटन को लेकर कान सिंह का कहना है कि अगर सरकार अपनी नीति और किसानों के संकल्प को सही रखे तो इस दिशा में बहुत कुछ किया जा सकता है। अब पूरे विश्व में फाइव स्टार टूरिज्म की करेंसी घट रही है। लोगों ने पहले सुविधा देखी फिर माहौल फिर खाना। अब यह आदेश उलट दिया गया है। लोग पहले खाने के बाद पर्यावरण को देखते हैं और फिर सुविधाओं को देखते हैं। इसलिए ग्राम पर्यटन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे गांव में रोजगार बढ़ेगा, किसानों की आय बढ़ेगी। साथ ही इससे संस्कृति और ज्ञान का आदान-प्रदान होगा।</div><div>कान सिंह निर्वाण चाहते हैं कि नई पीढ़ी देसी परंपरा में रुचि ले और नौकरी के पीछे न भागे। अपने पूर्वजों के कार्यों को उत्साह से अपनाता है और उसमें नवीनता लाता है। अगर युवा अपने पूर्वजों के काम के लिए हीन महसूस करते हैं तो इसे छोड़ दें। युवा अपनी जड़ों की ओर लौटकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 May 2022 15:59:01 +0530</pubDate>
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                <title>प्रेरक कहानी : अपना लक्ष्य हासिल करने अब तक 9 सरकारी नौकरियों को ना कर चुकी हैं प्रमिला</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">भारत में हर किसी को सरकारी नौकरी हासिल करने की चाहत होती है। पर काफी कम लोगों को ही वह मिल पाती है। पर यदि हम आपको कहे की एक महिला ने एक बार नहीं, दो बार नहीं पर 9 - 9 बार सरकारी नौकरी को ना कह चुकी है। बता दे की राजस्थान की रहने वाली प्रमिला नेहरा की अब तक 9 बार अलग-अलग सरकारी नौकरी लग चुकी है। जिसमें से साल 2013 से 2018 के बीच 5 साल में उसने 7 सरकारी नौकरी छोड़ दी थी और अब साल 2021 में 8वीं बार वह नौकरी छोडने जा रही</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/82347/motivational-story-pramila-has-not-done-9-government-jobs-till-now-to-achieve-her-goal"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/2690_s8-25052021.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">भारत में हर किसी को सरकारी नौकरी हासिल करने की चाहत होती है। पर काफी कम लोगों को ही वह मिल पाती है। पर यदि हम आपको कहे की एक महिला ने एक बार नहीं, दो बार नहीं पर 9 - 9 बार सरकारी नौकरी को ना कह चुकी है। बता दे की राजस्थान की रहने वाली प्रमिला नेहरा की अब तक 9 बार अलग-अलग सरकारी नौकरी लग चुकी है। जिसमें से साल 2013 से 2018 के बीच 5 साल में उसने 7 सरकारी नौकरी छोड़ दी थी और अब साल 2021 में 8वीं बार वह नौकरी छोडने जा रही है। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">प्रमिला मूल रूप से सीकर जिले के एक छोटे से गाँव सिंहोट की रहने वाली है। प्रमिला के पिता किसान और माता गृहिणी है। इसके अलावा भाई महेश पुलिस में सिपाही और फिलहाल चुरू में सेवा दे रहा है। प्रमिला की शादी सीकर जिले के राजेंद्र रनवाना के साथ हुई थी। जो की दिल्ली में पुलिस कॉन्स्टेबल है। प्रमिला ने कहा की उसकी पहली नौकरी साल 2013 में एसएससी जिडी और राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल के तौर पर मिली थी। पर इन दोनों परीक्षा देने का मुख्य हेतु सरकारी नौकरी का नहीं पर प्रतियोगी परीक्षाएँ पास करने का था। सद्भाग्य से उनका चयन दोनों में हो गया पर उन्होंने नौकरी जॉइन नहीं की। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">उनका लक्ष्य आरएएस और यूपीएससी परीक्षा पास करना था। इसलिए उन्होंने अन्य परीक्षाएँ देना शुरू किया। साल 2016-17 में उनका चयन एक साथ पटवारी, ग्रामसेवक, एलडीसी, महिला सुपरवाइजर में एक साथ नंबर आ गया। पर उन्होंने कही जॉइन नहीं किया। साल 2015 में उन्होंने कुछ समय के लिए सरकारी स्कूल में थर्ड ग्रेड के टीचर के तौर में काम किया था। जिसके बाद उन्होंने पटवारी, ग्रामसेवक, एलडीसी और महिला सुपरवाइजर की परीक्षा पास की। हालांकि साल 2020 में राज्य सेवा आयोग की तरफ से होने वाली व्याख्याता भर्ती में उन्होंने प्रथम श्रेणी शिक्षक की परीक्षा पास कर ली। इसके अलावा प्रमिला ने राज्य की सीटेट और दो बार आरएएस प्री की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली है। </span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 May 2021 16:32:06 +0530</pubDate>
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