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                <title>Rajnath Singh - Loktej</title>
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                <description>Rajnath Singh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डीआरडीओ जल्द करेगा सुदर्शन चक्र का निर्माण : रक्षामंत्री राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 02 जनवरी (वेब वार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजधानी स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर सबसे पहले पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को दिए गए भारत के मुंहतोड़ जवाब यानी ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के इस सैन्य अभियान के दौरान संगठन द्वारा विकसित किए गए हथियारों ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। जो हमारे राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के प्रति डीआरडीओ की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने स्वतंत्रता दिवस-2025 के मौके पर लालकिले की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144974/drdo-will-soon-manufacture-sudarshan-chakra-defense-minister-rajnath-singh"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 02 जनवरी (वेब वार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजधानी स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर सबसे पहले पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को दिए गए भारत के मुंहतोड़ जवाब यानी ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के इस सैन्य अभियान के दौरान संगठन द्वारा विकसित किए गए हथियारों ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। जो हमारे राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के प्रति डीआरडीओ की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने स्वतंत्रता दिवस-2025 के मौके पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित सुदर्शन चक्र को लेकर विश्वास जताते हुए कहा कि डीआरडीओ जल्द ही इसका निर्माण कर लेगा। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान के जरिए यह जानकारी दी है।</p>
<p>यहां बता दें कि सुदर्शन चक्र पहल के तहत संगठन अगले दस वर्षों में पूर्ण हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमारे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को वायु रक्षा प्रणाली से लैस करने के लिए जिम्मेदार है। ऑपरेशन सिंदूर में हमने आधुनिक युग में वायु रक्षा के महत्व को देखा था।</p>
<p>नवाचार संग निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाएं रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से निरंतर नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने वाले अधिक क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि संगठन को तेजी से विकसित हो रहे प्रौद्योगिकीय इकोसिस्टम के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ते रहने और बदलते वक्त के हिसाब से उत्पाद लाते रहने का अनुरोध भी किया।</p>
<p>गहन प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों की दिशा में जारी प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस दिशा में प्रगति से न केवल राष्ट्र की क्षमताओं में वृद्धि होगी। बल्कि रक्षा इकोसिस्टम भी मजबूत होगा।</p>
<p>वहीं डीआरडीओ सचिव और अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने रक्षा मंत्री को वर्तमान में जारी अनुसंधान, विकास गतिविधियों, 2025 की उपलब्धियों, उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षा जगत को बढ़ावा देने वाली विभिन्न पहलों के साथ ही 2026 के रोडमैप के बारे में जानकारी दी है।</p>
<p>जिसमें तय किए गए प्रमुख लक्ष्यों, संगठन की बेहतरी के लिए किए जा रहे तमाम सुधारों से उन्हें अवगत कराया गया। इस बातचीत के दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, महानिदेशक, कॉर्पोरेट निदेशक और अन्य वरिष्ठ डीआरडीओ वैज्ञानिक, अधिकारी मौजूद थे।</p>
<p>इस मौके पर रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज का युग केवल विज्ञान का नहीं है। बल्कि इसमें लगातार विकास और सीखने की आवश्यकता है। बदलती हुई इस दुनिया में प्रौद्योगिकी स्कैनिंग, क्षमता आकलन और भविष्य की तैयारी अब महज शब्द नहीं हैं।</p>
<p>दुनिया के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा नए युद्ध क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जिसे कल का ज्ञान अप्रचलित हो रहा है। रक्षा मंत्री ने बताया कि हमें कभी ये नहीं मानना चाहिए कि सीखने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। बल्कि हमें निरंतर सीखते रहना चाहिए और खुद को चुनौती देते रहने चाहिए। जिससे नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 16:06:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस और भारत के रक्षा मंत्रियों के बीच बृहस्पतिवार को होगी महत्वपूर्ण वार्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव के बीच बृहस्पतिवार को होने वाली वार्ता में एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद, सुखोई 30 लड़ाकू विमानों के उन्नयन और रूस से अन्य महत्वपूर्ण सैन्य साजो सामान खरीदने में भारत की रुचि एजेंडे में रहेगी।</p>
<p>शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने बताया कि समग्र ध्यान दोनों देशों के बीच पहले से ही घनिष्ठ रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और विस्तारित करने पर होगा, जिसमें रूस से भारत को सैन्य साजो सामान की शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p>बेलौसोव रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144386/important-talks-will-be-held-between-the-defense-ministers-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव के बीच बृहस्पतिवार को होने वाली वार्ता में एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद, सुखोई 30 लड़ाकू विमानों के उन्नयन और रूस से अन्य महत्वपूर्ण सैन्य साजो सामान खरीदने में भारत की रुचि एजेंडे में रहेगी।</p>
<p>शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने बताया कि समग्र ध्यान दोनों देशों के बीच पहले से ही घनिष्ठ रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और विस्तारित करने पर होगा, जिसमें रूस से भारत को सैन्य साजो सामान की शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p>बेलौसोव रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे। राजनाथ सिंह और आंद्रे बैलोसोव के बीच यह वार्ता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पुतिन के बीच शिखर बैठक से एक दिन पहले होगी।</p>
<p>बेलौसोव के साथ बैठक में, भारतीय पक्ष द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर सैन्य साजो सामान की आपूर्ति पर ज़ोर दिए जाने की संभावना है।</p>
<p>सशस्त्र बलों की यह लंबे समय से शिकायत रही है कि रूस से महत्वपूर्ण पुर्जों और उपकरणों की आपूर्ति में लंबा समय लगता है, जिससे उस देश से खरीदी गई सैन्य प्रणालियों का रखरखाव प्रभावित होता है।</p>
<p>ऐसा माना जा रहा है कि भारत रूस से सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल प्रणालियों की अतिरिक्त खेप खरीदने पर विचार कर रहा है, क्योंकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ये हथियार बेहद कारगर साबित हुए थे।</p>
<p>एक अधिकारी ने बताया कि रक्षा वार्ता में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।</p>
<p>अक्टूबर 2018 में, भारत ने रूस के साथ एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की पांच इकाइयों को खरीदने के लिए पांच अरब अमरीकी डालर के समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अनुबंध पर आगे बढ़ने से ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (सीएएटीएसए) के प्रावधानों के तहत अमेरिकी प्रतिबंध लग सकते हैं।</p>
<p>तीन स्क्वाड्रन की आपूर्ति पहले ही हो चुकी है।</p>
<p>एस-400 प्रणालियों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।</p>
<p>भारत रूस से एस-500 मिसाइल प्रणाली खरीदने पर भी विचार कर सकता है। रूसी सत्ता प्रतिष्ठान ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि रूस द्वारा भारत को एसयू-57 लड़ाकू विमान की आपूर्ति की संभावना पर चर्चा हो सकती है।</p>
<p>भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की एक खेप खरीदने की प्रक्रिया में है। दसॉ एविएशन का राफेल, लॉकहीड मार्टिन का एफ-21, बोइंग का एफ/ए-18 और यूरोफाइटर टाइफून मुख्य दावेदार हैं।</p>
<p>मोदी-पुतिन शिखर बैठक में भारत-रूस के समग्र रक्षा संबंधों की समीक्षा होने की भी संभावना है।</p>
<p>भारत और रूस संबंधों के संपूर्ण आयाम की समीक्षा के लिए प्रतिवर्ष भारत के प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति के बीच एक शिखर बैठक आयोजित होती है। अब तक भारत और रूस में बारी-बारी से 22 वार्षिक शिखर बैठकें हो चुकी हैं।</p>
<p>रूस के राष्ट्रपति ने आखिरी बार 2021 में नयी दिल्ली का दौरा किया था। पिछले साल जुलाई में, प्रधानमंत्री मोदी वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए मॉस्को गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Dec 2025 18:38:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर शांति की भाषा नहीं समझने वालों को भारत के करारा जवाब का प्रमाण: राजनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वडोदरा, दो दिसंबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है कि भारत उन लोगों को करारा जवाब देता है जो शांति और सद्भावना की भाषा नहीं समझते। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व से की।</p>
<p>सिंह ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सार्वजनिक धन से ‘‘बाबरी मस्जिद’’ बनवाना चाहते थे, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने उनकी योजना सफल नहीं होने दी।</p>
<p>सिंह ने पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत मेरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144370/operation-sindoor-is-proof-of-indias-befitting-reply-to-those"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>वडोदरा, दो दिसंबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है कि भारत उन लोगों को करारा जवाब देता है जो शांति और सद्भावना की भाषा नहीं समझते। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व से की।</p>
<p>सिंह ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सार्वजनिक धन से ‘‘बाबरी मस्जिद’’ बनवाना चाहते थे, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने उनकी योजना सफल नहीं होने दी।</p>
<p>सिंह ने पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत मेरा युवा (एमवाई) भारत द्वारा आयोजित ‘‘एकता मार्च’’ के तहत गुजरात के वडोदरा जिले के साधली गांव में ‘सरदार सभा’ ​​को संबोधित किया।</p>
<p>ऑपरेशन सिंदूर के सफल क्रियान्वयन के लिए सशस्त्र बलों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि आज विश्व भारतीय सैनिकों की बहादुरी और क्षमताओं को स्वीकार कर रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पटेल समस्याओं का समाधान हमेशा बातचीत के जरिये करने में विश्वास रखते थे। सिंह ने पटेल के भारत के पहले गृहमंत्री के रूप में कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा, “हालांकि जब सभी रास्ते बंद हो गए, तो वह कठोर रुख अपनाने में नहीं हिचकिचाये। जब हैदराबाद के विलय की आवश्यकता पड़ी, तो पटेल ने वही रुख अपनाया। यदि उन्होंने कठोर रुख नहीं अपनाया होता, तो शायद हैदराबाद भारत का हिस्सा नहीं बन पाता।”</p>
<p>सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने भी ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से इस मूल्य को कायम रखा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने दुनिया को यह दिखाया कि वह उन लोगों को उचित जवाब देने में सक्षम है जो शांति और सद्भाव की भाषा नहीं समझते। ऑपरेशन सिंदूर ना केवल भारतीय जमीन पर, बल्कि विश्व के अन्य देशों में भी चर्चा का विषय बन गया है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने स्पष्ट संदेश दिया कि ‘‘हम एक शांतिप्रिय राष्ट्र हैं जो कभी किसी देश को उकसाता नहीं है, लेकिन अगर उकसाया जाता है, तो बुरी नजर डालने की कोशिश करने वालों को छोड़ता नहीं है।’’</p>
<p>सिंह ने देश के पहले प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘पंडित जवाहरलाल नेहरू सार्वजनिक धन से बाबरी मस्जिद (अयोध्या में) बनाना चाहते थे। अगर किसी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, तो वह सरदार वल्लभभाई पटेल थे। उन्होंने सार्वजनिक धन से बाबरी मस्जिद का निर्माण नहीं होने दिया।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब नेहरू ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का मुद्दा उठाया तो पटेल ने स्पष्ट किया कि मंदिर एक अलग मामला है, क्योंकि इसके जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक 30 लाख रुपये आम लोगों द्वारा दान किए गए थे।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सिंह ने कहा, ‘‘एक ट्रस्ट का गठन किया गया था और इस (सोमनाथ मंदिर) कार्य पर सरकार का एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया। इसी तरह, सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक भी रुपया नहीं दिया। पूरा खर्च देश की जनता ने वहन किया। इसे ही असली धर्मनिरपेक्षता कहते हैं।’’</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पटेल का ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का दृष्टिकोण और मजबूत हुआ है।’’</p>
<p>सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाना कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी और वह प्रधानमंत्री मोदी थे जिन्होंने (जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करके) कश्मीर को भारत से जोड़ दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “सरदार पटेल ने उस कमजोरी को ताकत में बदलकर, जिसको लेकर विश्व उस समय हमारा मखौल उड़ाता था, देश को आगे का रास्ता दिखाया। और उसी रास्ते पर चलते हुए, भारत अब विश्व से अपने नियमों पर बात करता है, दूसरों के नियमों पर नहीं।”</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि भारत तेजी से दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक और रणनीतिक शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार सरदार पटेल के राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रही है, जिन्होंने रक्षा आधुनिकीकरण और हथियारों एवं गोला-बारूद के स्वदेशी उत्पादन पर जोर दिया था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आज ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल के कारण हम रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर हो रहे हैं और मित्र देशों को सैन्य उपकरण निर्यात कर रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में हमारा रक्षा निर्यात लगभग 34 गुना बढ़ा है। हमारा लक्ष्य 2029 तक तीन लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है।’’</p>
<p>सिंह ने कहा कि पटेल का पूरा जीवन शुचिता और ईमानदारी का प्रतीक था और इन्हीं उच्च आदर्शों से प्रेरित था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य संसद में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 पारित कराना है, जिसके तहत सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध नैतिक आचरण करना अनिवार्य है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इसका अर्थ यह है कि यदि किसी पदस्थ व्यक्ति को किसी गंभीर आरोप में गिरफ्तार किया जाता है और उसे 30 दिनों के भीतर जमानत नहीं मिलती है, तो वह स्वतः ही अपने पद से हट जाएगा।’’</p>
<p>सिंह ने कहा कि सरदार पटेल प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन उन्होंने कभी किसी पद की लालसा नहीं की। रक्षा मंत्री ने कहा कि नेहरू के साथ वैचारिक मतभेदों के बावजूद, उन्होंने उनके साथ काम किया क्योंकि उन्होंने महात्मा गांधी को एक वचन दिया था।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि 1946 में नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष इसलिए बने क्योंकि पटेल ने गांधी की सलाह पर अपना नामांकन वापस ले लिया था।</p>
<p>सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें पटेल की विरासत को मिटाना चाहती थीं। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका ने पटेल को इतिहास के पन्नों में एक चमकते सितारे के रूप में फिर से स्थापित किया।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘पटेल के निधन के बाद आम लोगों ने उनके स्मारक के निर्माण के लिए धन इकट्ठा किया, लेकिन जब यह जानकारी नेहरू जी तक पहुंची तो उन्होंने कहा कि सरदार पटेल किसानों के नेता थे, इसलिए यह धन गांव में कुएं और सड़कें बनाने पर खर्च किया जाना चाहिए।’’</p>
<p>सिंह ने कहा, ‘‘क्या ढोंग था। कुएं और सड़कें बनवाना सरकार की जिम्मेदारी है। स्मारक निधि का इस्तेमाल इसके लिए करने का सुझाव बेतुका था।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि उस समय की सरकार पटेल की महान विरासत को हर कीमत पर छिपाना और दबाना चाहती थी।</p>
<p>सिंह ने कहा, ‘‘नेहरूजी ने खुद को भारत रत्न प्रदान किया, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल को उस समय भारत रत्न से सम्मानित क्यों नहीं किया गया? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण करके सरदार पटेल को उचित सम्मान देने का फैसला किया। यह हमारे प्रधानमंत्री का सचमुच सराहनीय कार्य है।’’</p>
<p>सिंह ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि प्रधानमंत्री बनने के लिए पटेल की आयु बहुत अधिक थी। सिंह ने कहा, “यह पूरी तरह गलत है। मोरारजी देसाई 80 वर्ष से अधिक के थे। अगर वे भारत के प्रधानमंत्री बन सकते थे, तो सरदार पटेल, जो 80 वर्ष से कम थे, क्यों नहीं बन सकते थे?”</p>
<p>कश्मीर मुद्दे का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि यदि कश्मीर के विलय के समय पटेल द्वारा उठाए गए सुझावों को माना गया होता, तो भारत को लंबे समय तक कश्मीर समस्या से जूझना नहीं पड़ता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Dec 2025 21:20:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण: राजनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पुणे, 16 अक्टूबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए कहा कि इस मिशन के दौरान सशस्त्र बलों द्वारा इस्तेमाल किए गए अधिकतर उपकरण स्वदेशी थे।</p>
<p>सिंह ने कहा कि भारत ने अब ‘‘उस बाधा को तोड़ दिया है’’ जो आजादी के बाद से बनी हुई थी और सरकार ने देश के भीतर हथियारों के निर्माण को जोर शोर से बढ़ावा दिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143644/operation-vermillion-rajnath-is-a-great-example-of-self-reliance-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>पुणे, 16 अक्टूबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए कहा कि इस मिशन के दौरान सशस्त्र बलों द्वारा इस्तेमाल किए गए अधिकतर उपकरण स्वदेशी थे।</p>
<p>सिंह ने कहा कि भारत ने अब ‘‘उस बाधा को तोड़ दिया है’’ जो आजादी के बाद से बनी हुई थी और सरकार ने देश के भीतर हथियारों के निर्माण को जोर शोर से बढ़ावा दिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2029 तक घरेलू रक्षा विनिर्माण को तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने पुणे में ‘सिम्बायोसिस स्किल्स एंड प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी’ के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। शुरुआती दौर में यह मुश्किल था क्योंकि हम पूरी व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहे थे। आजादी के बाद से हम हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर थे। हमारे लिए विदेशों से रक्षा उपकरण खरीदना एक जरूरत बन गई थी और स्वदेशी उत्पादन लगभग न के बराबर था।’’</p>
<p>मंत्री ने कहा कि भारत ने अब ‘‘उस बाधा को तोड़ दिया है’’ जो आजादी के बाद से बनी हुई थी।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमने देश में ही हथियारों के निर्माण को जोर शोर से बढ़ावा दिया है। यह बिल्कुल भी आसान नहीं था क्योंकि देश रक्षा खरीद के मामले में एक सुविधाजनक स्थिति में पहुंच गया था। हम दूसरे देशों से हथियार खरीदने के आदी हो गए थे।’’</p>
<p>सिंह ने कहा कि न तो घरेलू स्तर पर हथियारों का उत्पादन करने की ‘‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’’ थी और न ही रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कोई कानूनी ढांचा था।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने बताया कि देश के युवाओं में इस क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करने की प्रेरणा का भी अभाव था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘स्थिति हमारे लिए अनुकूल नहीं बल्कि प्रतिकूल थी। लेकिन ऐसी परिस्थितियों में भी हम रुके नहीं। हमने रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव कदम उठाए और आज उन प्रयासों के स्पष्ट परिणाम सामने आ रहे हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आपने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सशस्त्र बलों की बहादुरी देखी होगी। ऑपरेशन सिंदूर भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सबसे बेहतरीन उदाहरण है क्योंकि सशस्त्र बलों द्वारा इस्तेमाल किए गए अधिकतर उपकरण स्वदेशी थे।’’</p>
<p>पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस वर्ष मई में नियंत्रण रेखा के पार और पाकिस्तान के भीतर आतंकी ढांचे को ध्वस्त करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी।</p>
<p>सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘‘करिश्माई नेतृत्व’’ स्पष्ट तौर पर उभरकर सामने आया था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, की अवधारणा को बढ़ावा देता रहा है और यह एकमात्र देश है जो इस संदेश का प्रसार करता है। हम जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करते।’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन पड़ोसी देश के आतंकवादियों ने पहलगाम में भारतीय नागरिकों का धर्म पूछकर उनकी हत्या कर दी। फिर भी भारतीय सशस्त्र बलों का संयम देखिए, जब हमने उन्हें मारा तो वह धर्म के आधार पर नहीं बल्कि उनके कर्मों के आधार पर मारा।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान 33,000 करोड़ रुपये है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य 2029 तक घरेलू रक्षा विनिर्माण को तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना और साथ ही रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।’’</p>
<p>सिंह ने वर्तमान समय में कौशल के महत्व पर जोर दिया और कहा कि युवा वैश्विक परिवर्तन के केंद्र में हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इस निरंतर बदलती दुनिया में जहां हर दिन नयी तकनीकें उभरती हैं और पुरानी चीजों की जगह ले रही हैं, ऐसे में कौशल ही सबसे जरूरी है। वर्तमान परिदृश्य में केवल कौशल होना ही काफी नहीं है, उस कौशल को आजमाने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि ज्ञान का वास्तविक जीवन में उपयोग किया जाना चाहिए। सिंह ने कहा, ‘‘भारत को एक युवा राष्ट्र होने का फायदा है और अगर हमारे युवाओं के पास सही कौशल है, तो भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। अगर कौशल का साथ मिले तो हमारा जनसांख्यिकीय लाभांश और भी मजबूत हो जाएगा।’’</p>
<p>मंत्री ने बताया कि 2014 के बाद भारत ‘‘नए भारत’’ के दृष्टिकोण की ओर बढ़ा और प्रधानमंत्री मोदी लगातार स्किल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसी पहलों की बात करते रहे।</p>
<p>सिंह ने कहा, ‘‘उन्होंने (प्रधानमंत्री ने) समझा कि अगर भारत को आत्मनिर्भर बनना है, तो उसके युवाओं को कुशल होना होगा। 2014 में सत्ता में आने के बाद हमने एक समर्पित मंत्रालय की स्थापना करके कौशल विकास को बढ़ावा दिया।’’</p>
<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी दीक्षांत समारोह में उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Oct 2025 15:46:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र में सुधार जरूरी, भारत नियम आधारित व्यवस्था का पक्षधर : राजनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (वेब वार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों की पुरजोर वकालत करते हुए कहा है कि विश्वास के संकट का सामना कर रही यह संस्था मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं होने के कारण चुनौतियों से निपटने में विफल रही है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश खुलेआम अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>सिंह ने मंगलवार को यहां भारतीय सेना द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में यह बात कही। सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र में शांति सैनिकों का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143609/reforms-are-necessary-in-the-united-nations-india-is-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (वेब वार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों की पुरजोर वकालत करते हुए कहा है कि विश्वास के संकट का सामना कर रही यह संस्था मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं होने के कारण चुनौतियों से निपटने में विफल रही है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश खुलेआम अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>सिंह ने मंगलवार को यहां भारतीय सेना द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में यह बात कही। सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र में शांति सैनिकों का योगदान देने वाले देशों के सेना प्रमुखों को संबोधित करते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के पुराने बहुपक्षीय ढांचे पर सवाल उठाते हुए इसमें सुधारों की वकालत की।</p>
<p>उन्होंने कहा, “हम आज की चुनौतियों का सामना पुराने बहुपक्षीय ढांचों से नहीं कर सकते। व्यापक सुधारों के बिना, संयुक्त राष्ट्र विश्वास के संकट का सामना कर रहा है। आज की परस्पर जुड़ी दुनिया के लिए, हमें एक सुधारित बहुपक्षवाद की आवश्यकता है, जो आज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करे, सभी हितधारकों की आवाज बनें, समकालीन चुनौतियों का समाधान करे और मानव कल्याण पर केंद्रित हो।”</p>
<p>कुछ देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नियमों की खुेलआम धज्जी उडाये जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संरचनाओं में सुधार की वकालत करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को मज़बूती से कायम रखने में मज़बूती से खड़ा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “आजकल, कुछ देश खुलेआम अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, कुछ उन्हें कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुछ अपने नियम बनाकर अगली सदी पर अपना दबदबा बनाना चाहते हैं। इन सबके बीच, भारत पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संरचनाओं में सुधार की वकालत करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को मज़बूती से कायम रखने में मज़बूती से खड़ा है।”</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुरूप सैन्य योगदान देने वाले देशों की अधिक भूमिका की वकालत करने वाली एक आवाज़ है। उन्होंने कहा, “जो लोग क्षेत्र में सेवा करते हैं और जोखिम उठाते हैं, उन्हें अपने मिशनों का मार्गदर्शन करने वाली नीतियों को आकार देने में एक सार्थक आवाज़ मिलनी चाहिए।”</p>
<p>श्री सिंह ने कहा कि भारत मानता है कि शांति स्थापना की सफलता केवल संख्या पर ही नहीं, बल्कि तैयारियों पर भी निर्भर करती है। यहां स्थित हमारे संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र (सीयूएनपीके) ने 90 से अधिक देशों के प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया है।</p>
<p>यह केंद्र व्यापक परिदृश्य-आधारित शिक्षा प्रदान करता है इसमें सशस्त्र समूहों के साथ बातचीत, खतरे में मानवीय अभियानों और संकट के दौरान नागरिक सुरक्षा का अनुकरण शामिल है।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में भारत का विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “भारत के लिए, यह सिर्फ़ बातचीत का विषय नहीं है, हज़ारों भारतीय संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले शांति और विकास के लिए काम करते हैं। यह एक प्रमुख उदाहरण है जो भारत के वादों को प्रदर्शन के साथ जोड़ने के सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” </p>
<p> सिंह ने कहा कि भारत के लिए शांति स्थापना कभी भी एक विकल्प का कार्य नहीं रहा है, बल्कि एक आस्था का विषय रहा है। उन्होंने कहा, “अपनी स्वतंत्रता के आरंभ से ही, भारत अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने मिशन में संयुक्त राष्ट्र के साथ दृढ़ता से खड़ा रहा है।”</p>
<p>सिंह ने कहा कि भारत महात्मा गांधी की भूमि है, जहां शांति हमारे अहिंसा और सत्य के दर्शन में गहराई से निहित है। महात्मा गांधी के लिए, शांति केवल युद्ध का अभाव नहीं, बल्कि न्याय, सद्भाव और नैतिक शक्ति की एक सकारात्मक स्थिति थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 14:42:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है : राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सिडनी/नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (वेब वार्ता)। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत का रक्षा उत्पादन पिछले वित्तीय वर्ष में 1.51 लाख करोड़ रुपये (लगभग 18 अरब डॉलर) तक पहुंचा, जो अब तक का सबसे अधिक है और पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।</p>
<p>रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये (लगभग 2.76 अरब डॉलर) तक पहुंचा है, और भारत अब लगभग 100 देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है। यह जानकारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया में दी।</p>
<p>सिडनी में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143542/india-is-the-fastest-growing-and-fourth-largest-economy-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>सिडनी/नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (वेब वार्ता)। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत का रक्षा उत्पादन पिछले वित्तीय वर्ष में 1.51 लाख करोड़ रुपये (लगभग 18 अरब डॉलर) तक पहुंचा, जो अब तक का सबसे अधिक है और पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।</p>
<p>रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये (लगभग 2.76 अरब डॉलर) तक पहुंचा है, और भारत अब लगभग 100 देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है। यह जानकारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया में दी।</p>
<p>सिडनी में शुक्रवार 10 अक्टूबर को पहली ‘इंडिया-ऑस्ट्रेलिया डिफेंस इंडस्ट्री बिजनेस राउंड टेबल’ आयोजित की गई। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह राउंड टेबल केवल एक संवाद नहीं, बल्कि एक ऐसा घोषणा-पत्र है जो भारत और ऑस्ट्रेलिया को व्यवसाय, उद्योग और नवाचार के स्वाभाविक साझेदार के रूप में स्थापित करने का इरादा दर्शाता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री के मुताबिक भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंध तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित हैं। ये स्तंभ सरकार से सरकार के बीच सहयोग, जन-से-जन का जुड़ाव, और व्यावसायिक हितों का सामंजस्य हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राउंड टेबल को संबोधित करते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक, औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ते सामंजस्य को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “2020 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत हम एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं, जहां हम अपने रक्षा संबंधों को केवल भागीदारी से आगे बढ़ाकर एक सुरक्षित और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सह-निर्माता के रूप में पुनर्स्थापित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।” गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ऑस्ट्रेलिया यात्रा का आज अंतिम दिन।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने पिछले वर्षों में हुए कई उच्च-स्तरीय संवादों का उल्लेख किया, जिनसे द्विपक्षीय संबंध मजबूत हुए हैं। उन्होंने नवंबर 2024 का भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन, अक्टूबर 2024 की 2 प्लस 2 मंत्री स्तरीय वार्ता, जून 2025 में ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री की भारत यात्रा और उनकी मौजूदा ऑस्ट्रेलिया यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों की नींव साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थागत समानताओं पर आधारित है। उन्होंने कहा, “भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के सदस्य हैं। हमारे साझा इतिहास में लोकतंत्र, विविधता, स्वतंत्रता और समान शासन ढांचे की गूंज है।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “हमारे पास ऑस्ट्रेलिया में बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय है, वहीं भारत में ऑस्ट्रेलियाई उपस्थिति बढ़ रही है। हालांकि रक्षा उद्योग साझेदारी के क्षेत्र में अभी भी अपार संभावनाएं बाकी हैं।” राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से एक परिवर्तनशील यात्रा पर है, विशेषकर विनिर्माण क्षेत्र में।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं इस फोरम को भारत और ऑस्ट्रेलिया को व्यापार और उद्योग में स्वाभाविक सहयोगी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखता हूं। यह साझेदारी आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी और परस्पर हितकारी है।”</p>
<p>उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया क्वांटम सिस्टम, स्वायत्त जल-निमग्न वाहन और उन्नत समुद्री निगरानी जैसी तकनीकों में अग्रणी है, जबकि भारत बड़े पैमाने पर विनिर्माण, सॉफ्टवेयर, जहाज निर्माण, मिसाइल तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी विशेष ताकत रखता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “यह राउंड टेबल रक्षा उद्योग में हमारी साझेदारी की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए एक उत्प्रेरक साबित हो सकती है।” रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’, उत्पादन आधारित योजनाओं और डिजिटल परिवर्तन ने नवाचार और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि सरकार ने एफडीआई नीति को उदार बनाया है, जिससे 74 प्रतिशत तक निवेश ऑटोमेटिक रूट से और उससे अधिक निवेश सरकारी अनुमति से किया जा सकता है, विशेषकर जब आधुनिक तकनीक शामिल हो।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को आमंत्रित करता है कि वे प्रोपल्शन तकनीक, स्वायत्त अंडरवाटर वाहन, फ्लाइट सिमुलेटर और एडवांस्ड मटेरियल्स जैसे उच्च-स्तरीय प्रणालियों के सह-विकास और सह-उत्पादन में भाग लें।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ऐसे उपक्रम दोनों देशों के रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म तैयार करने में मदद करेंगे। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के पास जहाज निर्माण में मजबूत क्षमता, विविध विनिर्माण आधार और नवाचार करने वाले निजी क्षेत्र का बढ़ता पारिस्थितिकी तंत्र है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “हमारे शिपयार्ड्स नौसेना के विभिन्न प्लेटफार्मों के निर्माण और रखरखाव में उत्कृष्ट अनुभव रखते हैं। भारतीय शिपयार्ड्स रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी और ऑस्ट्रेलिया के पैसिफिक मैरीटाइम सिक्योरिटी प्रोग्राम के तहत जहाजों के रिफिट, अपग्रेड और अन्य सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।”</p>
<p>यह राउंड टेबल भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय, ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विभाग, न्यूलैंड ग्लोबल ग्रुप और ऑस्ट्रेलिया-इंडिया बिजनेस काउंसिल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Oct 2025 14:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनाथ ने सर क्रीक के प्रति आक्रामक रुख के खिलाफ पाकिस्तान को चेतावनी दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली/भुज, दो अक्टूबर (भाषा) पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को उसे सर क्रीक क्षेत्र के प्रति किसी भी आक्रामकता के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि इस तरह के किसी भी कदम का ‘‘कड़ा जवाब’’ दिया जाएगा जो ‘‘इतिहास और भूगोल’’ बदल सकता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने यह टिप्पणी गुजरात के सीमावर्ती शहर भुज के निकट एक सैन्य अड्डे पर सैनिकों के साथ दशहरा मनाते हुए की तथा इस अवसर पर शस्त्र पूजा भी की।</p>
<p>सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143384/rajnath-warns-pakistan-against-an-aggressive-stance-towards-sir-creek"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली/भुज, दो अक्टूबर (भाषा) पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को उसे सर क्रीक क्षेत्र के प्रति किसी भी आक्रामकता के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि इस तरह के किसी भी कदम का ‘‘कड़ा जवाब’’ दिया जाएगा जो ‘‘इतिहास और भूगोल’’ बदल सकता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने यह टिप्पणी गुजरात के सीमावर्ती शहर भुज के निकट एक सैन्य अड्डे पर सैनिकों के साथ दशहरा मनाते हुए की तथा इस अवसर पर शस्त्र पूजा भी की।</p>
<p>सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है और तनाव बढ़ाकर पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू करना उसका उद्देश्य नहीं था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान द्वारा की गई किसी भी आक्रामकता का करारा जवाब दिया जाएगा, जो इतिहास और भूगोल दोनों को बदल देगा।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘1965 के युद्ध में भारतीय सेना ने लाहौर तक पहुंचने की क्षमता का प्रदर्शन किया था। आज 2025 में पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची जाने का एक रास्ता इसी क्रीक से होकर गुजरता है।’’</p>
<p>सर क्रीक गुजरात के कच्छ के रण और पाकिस्तान के बीच 96 किलोमीटर लंबा ज्वारीय मुहाना है। दोनों पक्षों द्वारा समुद्री सीमा रेखाओं की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण इसे एक विवादित क्षेत्र माना जाता है।</p>
<p>सिंह ने कहा, ‘‘आजादी के 78 साल बाद भी सर क्रीक क्षेत्र में सीमा विवाद जारी है। भारत ने बार-बार बातचीत के ज़रिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की है, लेकिन पाकिस्तान की नीयत खोखली और अस्पष्ट है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘सर क्रीक से सटे इलाकों में उसके सैन्य बुनियादी ढांचे का हालिया विस्तार उसकी नीयत को दर्शाता है।’’</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) सतर्कतापूर्वक भारत की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं।</p>
<p>‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सिंह ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी।</p>
<p>सिंह ने कहा कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की रक्षा प्रणाली को भेदने का असफल प्रयास किया, लेकिन भारतीय सेना ने पाकिस्तानी वायु रक्षा तंत्र को ‘‘बेनकाब’’ कर दिया और दुनिया को संदेश दिया कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने लेह से लेकर सर क्रीक तक भारत की रक्षा प्रणाली को भेदने की असफल कोशिश की।’’</p>
<p>सिंह ने कहा, ‘‘अपनी जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया और दुनिया को यह संदेश दिया कि भारतीय सेनाएं जब चाहें और जहां चाहें, पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।’’</p>
<p>सिंह ने कहा कि भारत ने संयम बरता क्योंकि उसकी सैन्य कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ थी।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इसे बढ़ाना और युद्ध छेड़ना ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य नहीं था। मुझे खुशी है कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी सैन्य उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। लेकिन आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है।’’</p>
<p>पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति के साथ समाप्त हुईं।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
<p>सिंह ने कहा, ‘‘यह हमारे सशस्त्र बलों की एकजुटता ही थी जिसने ऑपरेशन सिंदूर को रिकॉर्ड समय में अंजाम दिया। आज इस अवसर पर, मैं ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए हमारे बहादुर सैनिकों और अधिकारियों को विशेष बधाई देना चाहता हूं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आपकी रणनीति, आपके साहस और आपके सामर्थ्य ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत हर परिस्थिति में दुश्मन को परास्त करने में सक्षम है। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी का साहस, आप सभी का पराक्रम भारत की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करता रहेगा।’’</p>
<p>रक्षा मंत्री ने थलसेना, वायुसेना और नौसेना को भारत की ताकत के ‘‘तीन स्तंभ’’ बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘जब ये तीनों सेवाएं मिलकर काम करेंगी, तभी हम हर चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना कर पाएंगे।’’</p>
<p>सिंह पिछले कई वर्षों से दशहरा पर शस्त्र पूजा करते आ रहे हैं। उन्होंने पिछली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में भी शस्त्र पूजा की थी।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए हथियार सिर्फ़ औज़ार नहीं हैं। हथियार सिर्फ़ शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं हैं बल्कि, हमारा मानना ​​है कि हथियार धर्म की स्थापना का एक साधन हैं।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 14:43:28 +0530</pubDate>
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                        url="https://www.loktej.com/media/2022-01/rajnath-singh.jpg"                         length="112493"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीनों सेनाओं का एकीकरण सिर्फ नीतिगत मामला नहीं, बल्कि अस्तित्व के लिए भी अहम : राजनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान प्रदर्शित एकीकृत, तत्क्षण अभियानगत समन्वय के साथ तीनों सेनाओं का तालमेल निर्णायक परिणाम देने का एक "जीवंत उदाहरण" है, और इसे भविष्य की सभी सैन्य कार्रवाइयों के लिए मानक बनना चाहिए।</p>
<p>एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार भारतीय वायु सेना की एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली ने सेना की आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली और भारतीय नौसेना की त्रिगुण के साथ मिलकर काम किया और यह भारत और पाकिस्तान के बीच सात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143355/integration-of-the-three-armies-is-not-only-a-policy"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान प्रदर्शित एकीकृत, तत्क्षण अभियानगत समन्वय के साथ तीनों सेनाओं का तालमेल निर्णायक परिणाम देने का एक "जीवंत उदाहरण" है, और इसे भविष्य की सभी सैन्य कार्रवाइयों के लिए मानक बनना चाहिए।</p>
<p>एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार भारतीय वायु सेना की एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली ने सेना की आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली और भारतीय नौसेना की त्रिगुण के साथ मिलकर काम किया और यह भारत और पाकिस्तान के बीच सात से 10 मई तक चले संघर्ष के दौरान संयुक्त अभियान की रीढ़ बना।</p>
<p>तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि एकजुटता का मार्ग संवाद, समझ और परंपराओं के प्रति सम्मान में निहित है। उन्होंने कहा कि सेनाओं को एक-दूसरे की चुनौतियों का सम्मान करते हुए एक साथ मिलकर नई प्रणालियां बनानी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद तीनों सेनाओं के एकीकरण को और बढ़ावा देना है और यह न केवल नीतिगत मामला है, बल्कि तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल में अस्तित्व का मामला भी है।</p>
<p>सिंह ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तीनों सेनाओं के तालमेल ने एक एकीकृत, तत्क्षण संचालन की तस्वीर तैयार की। इसने कमांडरों को समय पर निर्णय लेने, स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ाने और अपने नुकसान के जोखिम को कम करने में सक्षम बनाया। यह निर्णायक परिणाम देने वाली एकजुटता का जीवंत उदाहरण है और यह सफलता भविष्य के सभी अभियानों के लिए एक मानक बननी चाहिए।’’</p>
<p>सिंह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि युद्ध के बदलते स्वरूप और पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक खतरों के जटिल अंतर्संबंध के कारण, संयुक्तता एक विकल्प के बजाय एक प्रमुख अभियानगत आवश्यकता बन गई है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा, "आज संयुक्तता हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और अभियानगत प्रभावशीलता के लिए एक मूलभूत आवश्यकता बन गई है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हालांकि हमारी प्रत्येक सेना में स्वतंत्र रूप से जवाबी कार्रवाई की क्षमता रखती है, लेकिन भूमि, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस की आपस में जुड़ी प्रकृति सहयोगात्मक ताकत को जीत की सच्ची गारंटी बनाती है।"</p>
<p>सिंह ने हाल में कोलकाता में आयोजित संयुक्त कमांडर सम्मेलन को याद किया, जहां स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्तता और एकीकरण के महत्व पर जोर दिया था।</p>
<p>उन्होंने रेखांकित किया, "हमारी सरकार का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और एकीकरण को और बढ़ावा देना है। यह केवल नीतिगत मामला नहीं है, बल्कि तेजी से बदलते सुरक्षा परिवेश में अस्तित्व का प्रश्न भी है।"</p>
<p>सिंह ने बताया कि दशकों से प्रत्येक सेना ने विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अपने विशिष्ट अनुभवों के आधार पर अभियानगत पद्धतियां, निरीक्षण ढांचे और ऑडिट प्रणालियां विकसित की हैं।</p>
<p>उन्होंने बर्फ से ढकी चोटियों से लेकर रेगिस्तान, घने जंगलों, गहरे समुद्र और खुले आसमान तक विविध परिस्थितियों में सशस्त्र बलों के कार्य करने के लचीलेपन की सराहना की।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस तरह के कठिन परिश्रम से अर्जित ज्ञान अक्सर एक ही सेना तक सीमित रह जाता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज की सुरक्षा परिस्थितियों में सेनाओं के बीच कामकाज को अलग-अलग खानों में बांटकर रखने की बजाय मुक्त आदान-प्रदान और सामूहिक रूप से सीखने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा, "दुनिया तेज़ी से बदल रही है। ख़तरे कहीं ज़्यादा जटिल हो गए हैं और हमें यह स्वीकार करना होगा कि कोई भी सेना अलग-थलग होकर काम नहीं कर सकती। किसी भी संघर्ष में सफलता के लिए अब अंतर-संचालन और संयुक्तता ज़रूरी है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/143355/integration-of-the-three-armies-is-not-only-a-policy</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 18:33:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिग-21 ने भारतीय आसमान में आखिरी बार उड़ान भरी, राजनाथ ने इसे ‘राष्ट्रीय गौरव’ बताया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>चंडीगढ़, 26 सितंबर (भाषा) छह दशकों से भी अधिक समय से भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े की ताकत रहे प्रसिद्ध लड़ाकू विमान मिकोयान-गुरेविच मिग-21 ने शुक्रवार को अंतिम बार भारतीय आकाश में उड़ान भरी और इसकी विदाई इतिहास और स्मृतियों में दर्ज हो गई।</p>
<p>इस मौके पर सूरज चमक रहा था, आसमान साफ और चमकदार नीला था, जो 1960 के दशक में भारतीय वायुसेना में शामिल किए गए रूसी मूल के युद्धक विमान को भव्य विदाई देने के लिए एक आदर्श नजारा था।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिग-21 को एक शक्तिशाली विमान और राष्ट्रीय गौरव बताते हुए कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143285/mig-21-flew-in-the-indian-sky-for-the-last-time"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़, 26 सितंबर (भाषा) छह दशकों से भी अधिक समय से भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े की ताकत रहे प्रसिद्ध लड़ाकू विमान मिकोयान-गुरेविच मिग-21 ने शुक्रवार को अंतिम बार भारतीय आकाश में उड़ान भरी और इसकी विदाई इतिहास और स्मृतियों में दर्ज हो गई।</p>
<p>इस मौके पर सूरज चमक रहा था, आसमान साफ और चमकदार नीला था, जो 1960 के दशक में भारतीय वायुसेना में शामिल किए गए रूसी मूल के युद्धक विमान को भव्य विदाई देने के लिए एक आदर्श नजारा था।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिग-21 को एक शक्तिशाली विमान और राष्ट्रीय गौरव बताते हुए कहा कि इस विमान के प्रति गहरा लगाव है, जिसने हमारे आत्मविश्वास को आकार दिया है।</p>
<p>मंत्री ने कहा, ‘‘मिग-21 केवल एक विमान या मशीन ही नहीं है, बल्कि यह भारत-रूस के मजबूत संबंधों का प्रमाण भी है।’’</p>
<p>सिंह ने समारोह में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘सैन्य विमानन का इतिहास अद्भुत है। मिग-21 ने हमारी सैन्य विमानन यात्रा में कई गौरवपूर्ण क्षण जोड़े।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘विश्व के सैन्य विमानन के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में कोई लड़ाकू विमान नहीं बनाया गया है।’’</p>
<p>सिंह ने कहा कि विश्व में 11,500 से अधिक मिग-21 विमान बनाये गये और उनमें से 850 लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने। उन्होंने कहा, ‘‘यह संख्या इस विमान की लोकप्रियता, विश्वसनीयता और बहुआयामी क्षमता का प्रमाण है।’’</p>
<p>उन्होंने पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध, 1999 के कारगिल संघर्ष और 2019 के बालाकोट हवाई हमलों में इस विमान की भूमिका को याद किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं जब मिग-21 ने अपनी निर्णायक क्षमता साबित की है।</p>
<p>इस मौके पर राजनाथ सिंह के अलावा वायुसेना के पूर्व प्रमुख ए वाई टिपनिस, एस पी त्यागी और बी एस धनोआ तथा वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी मौजूद थे।</p>
<p>एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने ‘बादल 3’ कॉल साइन वाले मिग-21 बाइसन विमान से उड़ान भरी। वर्ष 1981 में भारतीय वायुसेना प्रमुख बने दिलबाग सिंह ने 1963 में यहां पहली मिग-21 स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया था।</p>
<p>मिग-21 विमानों के परिचालन का समापन एक औपचारिक फ्लाईपास्ट और भव्य समारोह के साथ हुआ, जो भारत की वायु शक्ति में एक ऐतिहासिक अध्याय के समापन का प्रतीक है।</p>
<p>देश के पहले सुपरसोनिक लड़ाकू और इंटरसेप्टर विमान को चंडीगढ़ में सेवामुक्त कर दिया गया, जहां इसे पहली बार शामिल किया गया था।</p>
<p>इस मौके पर भारतीय वायुसेना की विशिष्ट स्काईडाइविंग टीम ‘आकाश गंगा’ ने 8,000 फुट की ऊंचाई से ‘स्काईडाइविंग’ का शानदार प्रदर्शन किया।</p>
<p>इसके बाद मिग-21 विमानों की शानदार उड़ान के साथ वायु योद्धा ड्रिल टीम की सटीक प्रस्तुतियां और हवाई सलामी दी गई।</p>
<p>लड़ाकू पायलटों ने तीन विमानों वाले ‘बादल’ फॉर्मेशन में और चार विमानों वाले ‘पैंथर’ फॉर्मेशन में मिग-21 विमानों के साथ अंतिम बार आसमान में उड़ान भरी।</p>
<p>सूर्य किरण एरोबैटिक टीम ने भी अपने अद्भुत करतबों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>
<p>तेइसवें स्क्वाड्रन के मिग-21 जेट विमानों ने फ्लाईपास्ट समारोह में भाग लिया। जगुआर और तेजस विमानों ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया।</p>
<p>पहली बार शामिल होने के बाद, भारतीय वायुसेना ने अपनी समग्र लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने के लिए 870 से अधिक मिग-21 विमान खरीदे।</p>
<p>मिग-21 विमानों ने औपचारिक रूप से सेवामुक्त होने से एक महीने पहले राजस्थान के बीकानेर स्थित नाल वायुसेना स्टेशन पर अपनी अंतिम उड़ान भरी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/143285/mig-21-flew-in-the-indian-sky-for-the-last-time</link>
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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 15:24:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौजूदा दौर में युद्ध केवल बंदूकों और गोलियों से नहीं जीते जाते : राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 27 जुलाई (वेब वार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि मौजूदा दौर में युद्ध केवल बंदूकों और गोलियों से नहीं जीते जाते, बल्कि विभिन्न रणनीतियों से जीते जाते हैं।</p>
<p>ऑपरेशन 'सिंदूर' की सफलता के पीछे विभिन्न एजेंसियों की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि इस दौरान रसद प्रबंधन करके हमारी सेनाओं को जुटाने से लेकर उनके प्रशिक्षण के साजो-सामान को समय और स्थान पर सलाह दी गई। रसद प्रबंधन को केवल सामान पहुंचाने की प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि इसे एक रणनीतिक महत्व के रूप में देखा जाना चाहिए।</p>
<p>चाहे हम सीमा पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142180/in-the-current-era-war-is-not-won-by-only"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 27 जुलाई (वेब वार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि मौजूदा दौर में युद्ध केवल बंदूकों और गोलियों से नहीं जीते जाते, बल्कि विभिन्न रणनीतियों से जीते जाते हैं।</p>
<p>ऑपरेशन 'सिंदूर' की सफलता के पीछे विभिन्न एजेंसियों की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि इस दौरान रसद प्रबंधन करके हमारी सेनाओं को जुटाने से लेकर उनके प्रशिक्षण के साजो-सामान को समय और स्थान पर सलाह दी गई। रसद प्रबंधन को केवल सामान पहुंचाने की प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि इसे एक रणनीतिक महत्व के रूप में देखा जाना चाहिए।</p>
<p>चाहे हम सीमा पर लड़ रहे सैनिकों की बात करें या आपदा प्रबंधन में जुटे कर्मियों की, अगर आपसी तालमेल नहीं होगा, अगर संसाधन का सही इस्तेमाल नहीं होगा, तो मजबूत से मजबूत इरादे भी कमजोर पड़ जाएंगे। </p>
<p>रक्षा मंत्री वडोदरा (गुजरात) में गति शक्ति विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत में अभूतपूर्व बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है।</p>
<p>इस बदलाव की बुनियाद में एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण के साथ महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार और मिशन-मोड परियोजनाएं चल रही हैं। इसका प्रभाव केवल भौतिक कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि हुई है, लॉजिस्टिक लागत में कमी आई है और सेवा वितरण भी बेहतर हुआ है।</p>
<p>पिछले 11 वर्षों में भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के क्षेत्र में एक युगांतकारी परिवर्तन देखा है। पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत रेलवे, सड़क, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, जन परिवहन और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विकास के सात शक्तिशाली स्तंभ समूह भारत की अर्थव्यवस्था को एक मजबूत नींव दे रहे हैं। </p>
<p>उन्होंने यह गति शक्ति विश्वविद्यालय के बारे में कहा कि यह सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि यह अपने आप में एक विचार है, एक गति है, एक मिशन है। यह भारत को तेज, संगठित और समन्वित रूप से आगे बढ़ाने की राष्ट्रीय आकांक्षा को मूर्त रूप दे रहा है। यह विश्वविद्यालय अपने नाम की तरह ही ‘गति’ और ‘शक्ति’ दोनों का सजीव उदाहरण है।</p>
<p>आज देश में यदि कोई उत्पाद उत्तर पूर्व में तैयार होता है और वह समय पर दिल्ली या मुंबई के बाजार तक पहुंचता है, तो यह रसद प्रणाली की दक्षता का ही प्रमाण है। यह संस्थान शुद्ध रूप से व्यावहारिक ज्ञान पर जोर देता है। यहां केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि वास्तविक समस्याओं के समाधान सिखाए जाते हैं। यही विशेषता इसे देश के अन्य विश्वविद्यालयों से अलग बनाती है। </p>
<p>रक्षा मंत्री ने दीक्षांत समारोह में शामिल छात्रों से कहा कि यह केवल आपके डिग्री लेने का क्षण नहीं है, बल्कि यह एक संकल्प लेने का भी क्षण है कि आप देश को अधिक सुरक्षित और अधिक सक्षम बनाने की इस यात्रा में अपनी भूमिका निभाएंगे। गति शक्ति विश्वविद्यालय से निकलने वाले आप सभी विद्यार्थी देश की रीढ़ को मजबूत करेंगे।</p>
<p>आप अपनी गति से देश को शक्ति प्रदान करेंगे ऐसी मेरी कामना है। यहां से निकलने वाले छात्र अपने ज्ञान को केवल नौकरी की सीमा में मत बांधें। आप समस्या समाधानकर्ता बनिए। भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है, उसके लिए हमें स्मार्ट लॉजिस्टिक सिस्टम की भी जरूरत है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                            <category>वड़ोदरा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Jul 2025 18:18:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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                <title>राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री से मुलाकात की, कहा- दोनों पक्षों को सकारात्मक गति बनाए रखनी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>किंगदाओ/नई दिल्ली, 27 जून (वेब वार्ता)। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट के दौरान भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री डॉन की मुलाकात हुई। राजनाथ सिंह ने खुद इसकी जानकारी दी। बैठक के बारे में जानकारी साझा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि हमने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर रचनात्मक और दूरदर्शी विचारों का आदान-प्रदान किया। रक्षा मंत्री ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने पर खुशी जताई।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “किंगदाओ में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141574/rajnath-singh-met-the-chinese-defense-minister-and-said-both"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>किंगदाओ/नई दिल्ली, 27 जून (वेब वार्ता)। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट के दौरान भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री डॉन की मुलाकात हुई। राजनाथ सिंह ने खुद इसकी जानकारी दी। बैठक के बारे में जानकारी साझा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि हमने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर रचनात्मक और दूरदर्शी विचारों का आदान-प्रदान किया। रक्षा मंत्री ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने पर खुशी जताई।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “किंगदाओ में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डॉन जून के साथ बातचीत की। हमने द्विपक्षीय संबंधों से संबंधित मुद्दों पर रचनात्मक और दूरदर्शी विचारों का आदान-प्रदान किया।</p>
<p>लगभग 6 साल के अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने पर अपनी खुशी व्यक्त की। दोनों पक्षों के लिए ये जरूरी है कि वो इस सकारात्मक गति को बनाए रखें और द्विपक्षीय संबंधों में नई जटिलताओं को जोड़ने से बचें।”</p>
<p>राजनाथ सिंह एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के लिए गुरुवार को चीन पहुंचे। उनके आगमन पर एडमिरल डॉन जून ने उनका स्वागत किया। राजनाथ सिंह, डॉन जून और अन्य नेताओं ने रक्षा मंत्रियों की बैठक से पहले एक ग्रुप फोटो करवाया।</p>
<p>एससीओ सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री सिंह ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें एक नेपाली नागरिक सहित 26 नागरिक मारे गए थे। उन्होंने कहा कि भारत ने सीमा पार आतंकी ढांचे को नष्ट करने के लिए “ऑपरेशन सिंदूर” के माध्यम से आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया।</p>
<p>उन्होंने एससीओ देशों से दोहरे मानदंडों को अस्वीकार करने और आतंकवाद की मदद करने वालों को जवाबदेह ठहराने का भी आग्रह किया। भारत ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में संयुक्त घोषणापत्र का समर्थन करने से इनकार कर दिया, क्योंकि इस घोषणापत्र में आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं को बाहर रखा गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jun 2025 16:12:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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                <title>राजनाथ सिंह का एससीओ बैठक में ‘संयुक्त बयान’ पर हस्ताक्षर से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>किंगदाओ, 26 जून (वेब वार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को चीन में शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) रक्षा मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए, जहां उन्होंने ‘संयुक्त बयान’ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। राजनाथ सिंह ने एसीओ बैठक में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही उन्होंने दोषियों को न्याय के दायरे में लाने की अपील करते हुए भारत के आतंकवाद विरोधी रुख पर जोर दिया।</p>
<p>भारत की तरफ से राजनाथ सिंह का साफ कहना है कि यह संयुक्त बयान आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत स्टैंड को नहीं दिखाता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141552/rajnath-singh-refuses-to-sign-a-joint-statement-in-sco"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>किंगदाओ, 26 जून (वेब वार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को चीन में शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) रक्षा मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए, जहां उन्होंने ‘संयुक्त बयान’ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। राजनाथ सिंह ने एसीओ बैठक में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही उन्होंने दोषियों को न्याय के दायरे में लाने की अपील करते हुए भारत के आतंकवाद विरोधी रुख पर जोर दिया।</p>
<p>भारत की तरफ से राजनाथ सिंह का साफ कहना है कि यह संयुक्त बयान आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत स्टैंड को नहीं दिखाता है। ऐसा लगता है कि पहलगाम को इस बयान से बाहर करना पाकिस्तान के इशारे पर किया गया है क्योंकि उसका सदाबहार सहयोगी चीन अभी संगठन का अध्यक्ष है। इसमें न सिर्फ पहलगाम हमले का कोई जिक्र नहीं है बल्कि उसकी जगह डॉक्यूमेंट में बलूचिस्तान का उल्लेख किया गया है, और भारत पर वहां बिना नाम लिए अशांति पैदा करने का आरोप लगाया गया है।</p>
<p>इससे पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किंगदाओ में इस बैठक के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में बदलाव की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके साथ ही सदस्य देशों से सामूहिक सुरक्षा और संरक्षा के लिए इस खतरे को खत्म करने के लिए एकजुट होने की अपील की।</p>
<p>रक्षा मंत्रियों, एससीओ महासचिव, एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे (आरएटीएस) के निदेशक और अन्य प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से संबंधित हैं। इसके साथ ही उन्होंने बढ़ती कट्टरता, उग्रवाद और आतंकवाद को इन समस्याओं का मूल कारण बताया है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, ताकि आतंकवाद से बचाव और सीमा पार से होने वाले हमलों को रोकने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया जा सके।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने बैठक में कहा, “पहलगाम आतंकी हमले के दौरान, पीड़ितों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर गोली मार दी गई थी। आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक प्रतिनिधि ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने हमले की जिम्मेदारी ली है। पहलगाम हमले का पैटर्न भारत में एलईटी के पिछले आतंकी हमलों से मिलता है।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, “आतंकवाद के प्रति भारत का जीरो टॉलरेंस उसके कार्यों के माध्यम से प्रदर्शित हुआ। इसमें आतंकवाद के खिलाफ खुद का बचाव करने का अधिकार भी शामिल है। हमने यह दिखाया है कि अब आतंकवाद के केंद्र सुरक्षित नहीं हैं। हम उन्हें निशाना बनाने में कोई संकोच नहीं करेंगे।”</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/141552/rajnath-singh-refuses-to-sign-a-joint-statement-in-sco</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 15:42:32 +0530</pubDate>
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