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                <title>United Nations (UN) - Loktej</title>
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                <description>United Nations (UN) RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गुटेरेस ने अमेरिका, इज़रायल से युद्ध समाप्त करने का किया आग्रह, वैश्विक परिणामों की दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ब्रुसेल्स, 20 मार्च (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को अमेरिका और इज़रायल से ईरान युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया और सैन्य कार्रवाई के स्थान पर कूटनीति अपनाने पर बल दिया।</p>
<p>यूरोपीय परिषद की बैठक के दौरान यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए गुटेरेस ने कहा कि इस युद्ध को समाप्त करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए इस संघर्ष का पूरी तरह से बेकाबू होने का खतरा है, साथ ही नागरिकों को भारी पीड़ा पहुंच रही है।</p>
<p>गुटेरेस ने यह भी कहा कि युद्ध का प्रभाव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146118/guterres-urges-america-and-israel-to-end-war-warns-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स, 20 मार्च (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को अमेरिका और इज़रायल से ईरान युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया और सैन्य कार्रवाई के स्थान पर कूटनीति अपनाने पर बल दिया।</p>
<p>यूरोपीय परिषद की बैठक के दौरान यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए गुटेरेस ने कहा कि इस युद्ध को समाप्त करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए इस संघर्ष का पूरी तरह से बेकाबू होने का खतरा है, साथ ही नागरिकों को भारी पीड़ा पहुंच रही है।</p>
<p>गुटेरेस ने यह भी कहा कि युद्ध का प्रभाव युद्धक्षेत्र से कहीं अधिक दूर तक फैल रहा है। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे दुष्प्रभाव की चेतावनी दी, जिसके संभावित रूप से दुखद परिणाम हो सकते हैं, विशेष रूप से सबसे कम विकसित देशों के लिए। उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि युद्ध पर कूटनीति विजय प्राप्त करे।</p>
<p>यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने गुरुवार को ब्रुसेल्स में बैठक की, जिसमें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से यूरोपीय ऊर्जा कीमतों, ऊर्जा सुरक्षा एवं क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके प्रभाव पर चर्चा की गई।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिससे वैश्विक नौवहन बाधित हुई, तेल की कीमतें आसमान छू गईं और वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा गई। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में यूरोपीय गैस एवं तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया।</p>
<p>यूरोपीय गैस आपूर्ति अनुबंधों के लिए एक प्रमुख संदर्भ सूचकांक, डच टीटीएफ खुलने पर 30 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 70.7 यूरो (लगभग 76.8 अमेरिकी डॉलर) प्रति मेगावाट-घंटा हो गया लेकिन बाद में घटकर लगभग 67 यूरो प्रति मेगावाट-घंटा पर आ गया।</p>
<p>ईरान युद्ध शुरू होने से पहले कीमत लगभग 32 यूरो प्रति मेगावाट-घंटा थी जो अब दोगुनी से भी अधिक हो गई है। तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। शुरुआती कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 15:04:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका के विरोध के बावजूद संयुक्त राष्ट्र ने एआई पर 40 सदस्यीय वैज्ञानिक पैनल को मंजूरी दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र, 13 फरवरी (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभाव और जोखिमों का आकलन करने के लिए 40 सदस्यीय वैश्विक वैज्ञानिक पैनल के गठन को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी, जबकि अमेरिका ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।</p>
<p>इस पैनल का गठन करने वाले, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इसे “एआई की वैश्विक वैज्ञानिक समझ की दिशा में एक बुनियादी कदम” बताया।</p>
<p>गुतारेस ने बृहस्पतिवार को कहा, “ऐसे समय में जब एआई तेजी से आगे बढ़ रहा है, यह पैनल कठोर, स्वतंत्र वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा ताकि सभी सदस्य देश, भले ही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145558/despite-us-opposition-un-approves-40-member-scientific-panel-on-ai"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र, 13 फरवरी (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभाव और जोखिमों का आकलन करने के लिए 40 सदस्यीय वैश्विक वैज्ञानिक पैनल के गठन को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी, जबकि अमेरिका ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।</p>
<p>इस पैनल का गठन करने वाले, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इसे “एआई की वैश्विक वैज्ञानिक समझ की दिशा में एक बुनियादी कदम” बताया।</p>
<p>गुतारेस ने बृहस्पतिवार को कहा, “ऐसे समय में जब एआई तेजी से आगे बढ़ रहा है, यह पैनल कठोर, स्वतंत्र वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा ताकि सभी सदस्य देश, भले ही उनकी प्रौद्योगिकी क्षमता जो भी हो, समान आधार पर भागीदारी कर सकें।”</p>
<p>उन्होंने इसे एआई के वास्तविक आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों का आकलन करने के लिए पहला पूर्णतः स्वतंत्र वैश्विक वैज्ञानिक निकाय बताया।<br />एआई पैनल के पक्ष में, 193 सदस्यीय महासभा में 117 देशों ने मतदान किया, जबकि दो ने विरोध में वोट डाला।</p>
<p>अमेरिका और पराग्वे ने इसके विरोध में मतदान किया, जबकि ट्यूनीशिया और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। वहीं, अमेरिका के कई सहयोगियों ने रूस, चीन और कई विकासशील देशों के साथ प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन की काउंसलर लॉरेन लवलेस ने पैनल को “संयुक्त राष्ट्र के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन” बताया और कहा कि “एआई शासन संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्देशित किए जाने का विषय नहीं है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि एआई के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी के रूप में अमेरिका नवाचार को तेजी से बढ़ाने और अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन “समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर साझा मूल्यों के अनुरूप एआई के विकास को प्रोत्साहित करने” का समर्थन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 16:45:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ट्रंप की गाजा शांति योजना को मंजूरी दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र, 18 नवंबर (भाषा) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना का समर्थन करने वाला मसौदा प्रस्ताव पारित कर दिया है और गाजा पट्टी में एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल स्थापित करने की अनुमति दे दी है। ट्रंप ने इसे ‘‘वास्तव में ऐतिहासिक महत्व का क्षण’’ बताया है।</p>
<p>यह अमेरिकी मसौदा प्रस्ताव सोमवार शाम 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में 13 मतों के साथ पारित हुआ। किसी देश ने विरोध में वोट नहीं दिया, जबकि चीन और रूस ने मतदान से दूरी बनायी।</p>
<p>प्रस्ताव ने ट्रंप की ‘गाज़ा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144127/un-security-council-approves-trumps-gaza-peace-plan"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र, 18 नवंबर (भाषा) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना का समर्थन करने वाला मसौदा प्रस्ताव पारित कर दिया है और गाजा पट्टी में एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल स्थापित करने की अनुमति दे दी है। ट्रंप ने इसे ‘‘वास्तव में ऐतिहासिक महत्व का क्षण’’ बताया है।</p>
<p>यह अमेरिकी मसौदा प्रस्ताव सोमवार शाम 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में 13 मतों के साथ पारित हुआ। किसी देश ने विरोध में वोट नहीं दिया, जबकि चीन और रूस ने मतदान से दूरी बनायी।</p>
<p>प्रस्ताव ने ट्रंप की ‘गाज़ा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना’ को मंजूरी दी, जिसे 29 सितंबर को प्रस्तुत किया गया था। इस योजना में गाजा को एक ‘‘कट्टरपंथ मुक्त आतंक मुक्त क्षेत्र’’ के रूप में विकसित करने की बात है, जो अपने पड़ोसियों के लिए खतरा न बने और जिसकी पुनर्निर्माण गतिविधियां स्थानीय लोगों की भलाई के लिए हों।</p>
<p>प्रस्ताव में एक ‘शांति बोर्ड’ की स्थापना का भी प्रावधान है। इस बोर्ड को अंतरराष्ट्रीय कानूनी दर्जा दिया गया है और यह गाजा के पुनर्निर्माण के लिए ढांचा तैयार करेगा तथा वित्तीय समन्वय करेगा।</p>
<p>ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस प्रस्ताव के पारित होने का स्वागत किया और इसे ‘‘ऐतिहासिक महत्व का क्षण’’ बताया।</p>
<p>उन्होंने लिखा, ‘‘यह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास की सबसे बड़ी मंज़ूरियों में से एक के रूप में जाना जाएगा और दुनिया भर में और अधिक शांति लाएगा।’’</p>
<p>यह मतदान ऐसे समय में हुआ है जब एक दिन बाद राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस में सऊदी अरब के शहजादे और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान की मेजबानी करेंगे।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने एक बयान में कहा कि गाजा पर पारित यह प्रस्ताव युद्धविराम को मजबूत करने की दिशा में एक ‘‘महत्वपूर्ण कदम’’ है और उन्होंने सभी पक्षों से इसका पालन करने की अपील की।</p>
<p>ट्रंप की व्यापक योजना के अनुसार, यदि दोनों पक्ष प्रस्ताव पर सहमत हो जाते हैं, तो ‘‘युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा।’’</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान की सेना ने ही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संघर्ष रोकने की अपील की थी: भारत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र, 27 सितंबर (भाषा) भारत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सेना ने ही संघर्ष रोकने की “अपील की” थी और नयी दिल्ली व इस्लामाबाद के बीच किसी भी मुद्दे पर “किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।”</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में भारत के जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा, “इस सभा में आज सुबह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बेतुका बयान सुनने को मिला। शरीफ ने एक बार फिर आतंकवाद का महिमामंडन किया, जो उनकी विदेश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143304/pakistans-army-had-appealed-to-india-to-stop-conflict-during"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र, 27 सितंबर (भाषा) भारत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सेना ने ही संघर्ष रोकने की “अपील की” थी और नयी दिल्ली व इस्लामाबाद के बीच किसी भी मुद्दे पर “किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।”</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में भारत के जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा, “इस सभा में आज सुबह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बेतुका बयान सुनने को मिला। शरीफ ने एक बार फिर आतंकवाद का महिमामंडन किया, जो उनकी विदेश नीति के केंद्र में है।”</p>
<p>गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हालिया संघर्ष को लेकर एक “अजीब” कहानी पेश की, जबकि भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 आम नागरिकों की मौत के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।</p>
<p>इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली थी।</p>
<p>भारत ने कहा, ‘‘नौ मई तक पाकिस्तान भारत पर और हमले करने की धमकी दे रहा था। लेकिन 10 मई को उसकी सेना ने सीधे हमसे संघर्ष रोकने की अपील की। इस बीच भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस नष्ट कर दिए थे। उस तबाही की तस्वीरें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।”</p>
<p>भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की। शरीफ ने अपने भाषण में दावा किया कि हालिया संघर्ष में उनका देश “युद्ध जीत गया।” उन्होंने संघर्ष रोकने को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता का परिणाम बताया और साथ ही कश्मीर मुद्दा भी उठाया।</p>
<p>शरीफ ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए यह भी दावा किया कि मई में चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान “भारत के सात विमान क्षतिग्रस्त हुए थे।”</p>
<p>भारत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर तबाह हुए रनवे और राख में बदल चुके हैंगर (हवाई जहाज रखने की जगह) पाकिस्तान को जीत लगते हैं, जैसा कि उसके प्रधानमंत्री ने दावा किया है, तो पाकिस्तान खुश हो सकता है।”</p>
<p>गहलोत ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं द्वारा बहावलपुर और मुरिदके में स्थित आतंकी ठिकानों में मारे गए आतंकवादियों की कई तस्वीरें सामने आई हैं।”</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा, “जब पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी खुलेआम इन कुख्यात आतंकवादियों का महिमामंडन करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं, तो इस सरकार की मानसिकता पर कोई शक रह ही नहीं जाता।”</p>
<p>गहलोत ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी हाफिज अब्दुल रऊफ मुरिदके में स्थित लश्कर मुख्यालय पर हुए हमलों में मारे गए लोगों के जनाजे में नमाज अदा करवा रहा था। इस जनाजे में पाकिस्तान सेना के सदस्य भी मौजूद थे।</p>
<p>उन्होंने कहा, “याद दिला दें कि पाकिस्तान ने एक दशक तक ओसामा बिन लादेन को पनाह दी, जबकि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझेदार बनने का दिखावा करता रहा। इसके मंत्रियों ने हाल ही में खुद स्वीकार किया है कि वे दशकों से आतंकी शिविर संचालित कर रहे हैं।”</p>
<p>भारत ने दोहराया कि दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच के मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई जगह नहीं है। गहलोत ने कहा, “भारत और पाकिस्तान लंबे समय से इस बात पर सहमत हैं कि उनके बीच के किसी भी लंबित मुद्दे को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाया जाएगा। इस प्रक्रिया में किसी तीसरे पक्ष के लिए कोई स्थान नहीं है।”</p>
<p>भारत लगातार यह कहता आया है कि संघर्षविराम पर सहमति दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के बाद बनी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 14:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयशंकर ने संरा महासभा से इतर कई द्विपक्षीय बैठकें कीं; रणनीतिक, वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क, 24 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र से इतर दुनिया भर के अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक संघर्षों सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।</p>
<p>उन्होंने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट कर इन बैठकों के बारे में जानकारी साझा की।</p>
<p>न्यूयॉर्क में मंगलवार शाम को नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वैन वील के साथ बैठक में जयशंकर ने ‘‘यूरोप की रणनीतिक स्थिति और भारत के दृष्टिकोण के बारे में गहन बातचीत’’ की।</p>
<p>उन्होंने डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन से भी मुलाकात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143239/jaishankar-discussed-strategic-global-issues-on-many-bilateral-meetings-other"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-07/jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क, 24 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र से इतर दुनिया भर के अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक संघर्षों सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।</p>
<p>उन्होंने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट कर इन बैठकों के बारे में जानकारी साझा की।</p>
<p>न्यूयॉर्क में मंगलवार शाम को नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वैन वील के साथ बैठक में जयशंकर ने ‘‘यूरोप की रणनीतिक स्थिति और भारत के दृष्टिकोण के बारे में गहन बातचीत’’ की।</p>
<p>उन्होंने डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ‘‘यूरोप में हालिया घटनाक्रमों और जारी यूक्रेन संघर्ष पर उनके विचार की सराहना की। दोनों मंत्रियों ने डेनमार्क की अध्यक्षता में यूरोपीय संघ परिषद और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों एवं सहयोग पर भी चर्चा की।</p>
<p>श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ के साथ जयशंकर ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की।</p>
<p>विदेश मंत्री ने मॉरीशस के विदेश मंत्री रितेश रामफुल से भी मुलाकात की और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम की भारत की हालिया राजकीय यात्रा के बाद की कार्रवाई पर चर्चा की।</p>
<p>मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील के साथ बैठक में, जयशंकर ने मालदीव के विकास के लिए भारत के "दृढ़" समर्थन को दोहराया।</p>
<p>लेसोथो के विदेश मंत्री लेजोन मपोटजोआना, सूरीनाम के मेल्विन बौवा, सोमालिया के विदेश मंत्री अब्दिसलाम अली, सेंट लूसिया के अल्वा बैप्टिस्ट और जमैका की कामिना जे. स्मिथ के साथ अलग-अलग बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई।</p>
<p>जयशंकर ने जमैका के विदेश मंत्री के रूप में पुन: नियुक्त किए जाने पर स्मिथ को बधाई दी और भारत-जमैका साझेदारी को मजबूत करने के प्रति आशा व्यक्त की।</p>
<p>उन्होंने समान विचारधारा वाले ‘ग्लोबल साउथ’ देशों की उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के साथ भी ‘‘बातचीत’’ की।</p>
<p>अपने मंत्रिस्तरीय कार्यक्रमों के अलावा जयशंकर ने दुबई स्थित बहुराष्ट्रीय ‘लॉजिस्टिक्स’ कंपनी डीपी वर्ल्ड के ग्रुप चेयरमैन और सीईओ सुल्तान अहमद बिन सुलेयम से मुलाकात की और ‘‘अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में वर्तमान विकास और सम्पर्क एवं साजो सामान पर उनके प्रभावों’’ पर चर्चा की।</p>
<p>इससे पहले, उन्होंने यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की एक अनौपचारिक बैठक में भाग लिया, जिसकी मेजबानी यूरोपीय संघ के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने की थी।</p>
<p>जयशंकर ने कहा कि इस बैठक ने ‘‘बहुपक्षवाद, भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी, यूक्रेन संघर्ष, गाजा, ऊर्जा और व्यापार पर विचारों के मुक्त आदान-प्रदान’’ का अवसर प्रदान किया।</p>
<p>विदेश मंत्री 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 14:44:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत ने गाजा में तत्काल, स्थायी युद्धविराम की मांग वाले प्रस्ताव पर यूएनजीए में मतदान से परहेज किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="content-profession">
<p>संयुक्त राष्ट्र, 13 जून (भाषा) संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाजा में ‘‘तत्काल, बिना शर्त और स्थायी’’ युद्धविराम की मांग वाले मसौदा प्रस्ताव पर मतदान से भारत ने परहेज किया है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्पेन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इस प्रस्ताव में तत्काल, बिना शर्त तथा स्थायी युद्धविराम और हमास तथा अन्य समूहों द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों की तत्काल तथा बिना शर्त रिहाई की मांग की गई।</p>
<p>भारत समेत 19 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया, जबकि 12 देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और पक्ष में 149 वोट पड़े।</p>
<p>‘नागरिकों की सुरक्षा और</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141293/india-avoided-voting-in-unga-on-a-proposal-demanding-immediate"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><div class="content-profession">
<p>संयुक्त राष्ट्र, 13 जून (भाषा) संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाजा में ‘‘तत्काल, बिना शर्त और स्थायी’’ युद्धविराम की मांग वाले मसौदा प्रस्ताव पर मतदान से भारत ने परहेज किया है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्पेन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इस प्रस्ताव में तत्काल, बिना शर्त तथा स्थायी युद्धविराम और हमास तथा अन्य समूहों द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों की तत्काल तथा बिना शर्त रिहाई की मांग की गई।</p>
<p>भारत समेत 19 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया, जबकि 12 देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और पक्ष में 149 वोट पड़े।</p>
<p>‘नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी एवं मानवीय दायित्वों को कायम रखना’ शीर्षक वाले प्रस्ताव पर मतदान की व्याख्या में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि यह प्रस्ताव गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति की पृष्ठभूमि में लाया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत गहराते मानवीय संकट से बहुत चिंतित है और नागरिकों की मौत की घटना की निंदा करता है।</p>
<p>हरीश ने कहा कि भारत पहले भी इजराइल-फलस्तीन मुद्दे पर प्रस्तावों से दूर रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आज मानना है कि संघर्षों को बातचीत और कूटनीति से ही हल किया जा सकता है। दोनों पक्षों को करीब लाने के लिए एक संयुक्त प्रयास किया जाना चाहिए। इन कारणों से हम इस प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहेंगे।’’</p>
<p>प्रस्ताव में मांग की गई कि इजराइल तुरंत नाकाबंदी खत्म करे, सभी सीमा पार मार्ग खोले और यह सुनिश्चित करे कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के तहत दायित्वों के अनुरूप गाजा पट्टी में फलस्तीनी नागरिकों तक तुरंत और बड़े पैमाने पर सहायता पहुंचाई जाए।</p>
</div>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 13 Jun 2025 12:24:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता के साथ भारत यूएन आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के लिए निर्वाचित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र, 05 जून (वेब वार्ता)। भारत को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) के लिए 2026 से शुरू होने वाले तीन साल के कार्यकाल के लिए चुना गया है। भारत को 187 में से 181 वोट मिले।</p>
<p>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत विकास के मुद्दों को बढ़ावा देने और ईसीओएसओसी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समर्थन देने वाले देशों और भारत के यूएन मिशन के राजनयिकों को धन्यवाद दिया।</p>
<p>यह भारत का ईसीओएसओसी में कम से कम 18वां कार्यकाल होगा। भारत 2008 से 2020 तक चार कार्यकाल पूरे कर चुका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141152/india-elected-to-un-economic-and-social-council-with-commitment"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र, 05 जून (वेब वार्ता)। भारत को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) के लिए 2026 से शुरू होने वाले तीन साल के कार्यकाल के लिए चुना गया है। भारत को 187 में से 181 वोट मिले।</p>
<p>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत विकास के मुद्दों को बढ़ावा देने और ईसीओएसओसी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समर्थन देने वाले देशों और भारत के यूएन मिशन के राजनयिकों को धन्यवाद दिया।</p>
<p>यह भारत का ईसीओएसओसी में कम से कम 18वां कार्यकाल होगा। भारत 2008 से 2020 तक चार कार्यकाल पूरे कर चुका है।</p>
<p>ईसीओएसओसी यूएन का मुख्य निकाय है, जिसमें 193 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है। यह सतत विकास और आर्थिक मामलों पर काम करता है। इसमें 54 सदस्य हैं, जिनमें से एक-तिहाई हर तीन साल में बदलते हैं। इस साल 18 सीटों के लिए चुनाव हुआ।</p>
<p>एशिया-प्रशांत क्षेत्र की चार सीटों के लिए भारत, चीन, लेबनान और तुर्कमेनिस्तान चुने गए। चीन को 180, लेबनान और तुर्कमेनिस्तान को 183-183 वोट मिले।</p>
<p>पूर्वी यूरोप ग्रुप में यूक्रेन ने रूस को पछाड़ दिया, जिसके कारण उसे पहले मतदान में क्षेत्र की तीन सीटों में से एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त वोट नहीं मिल पाए। ऐसे में उसे दूसरे चरण में हिस्सा लेना पड़ा।</p>
<p>चूंकि क्षेत्र ने तीन सीटों के लिए कोई सूची नहीं बनाई थी, इसलिए तीन सीटों के लिए पांच उम्मीदवार थे। यूक्रेन 130, जबकि क्रोएशिया 140 वोटों के साथ पहले चरण में चुने गए, जिन्होंने दो-तिहाई वोट जीते।</p>
<p>रूस 108 वोटों के साथ अपने सहयोगी बेलारूस के खिलाफ दूसरे चरण में हिस्सा लेने के लिए मजबूर हुआ। उसे 96 वोट मिले, जबकि सबसे कम वोट पाने वाला उत्तरी मैसेडोनिया 59 वोटों के साथ बाहर हो गया।</p>
<p>23 देशों ने रनऑफ में मतदान से परहेज किया, जिससे दो-तिहाई बहुमत की सीमा कम हो गई और रूस ने बेलारूस के 46 के मुकाबले 115 वोटों से जीत हासिल की।</p>
<p>अमेरिका और जर्मनी ने इटली और लिकटेंस्टीन के अपने सीटों से इस्तीफा देने के कारण ईसीओएसओसी के लिए उप-चुनाव जीते।</p>
<p>भारत अपने पड़ोसियों पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ ईसीओएसओसी में शामिल होगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jun 2025 15:31:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व को इस तरह के आतंकवाद की सार्वजनिक रूप से निंदा करनी चाहिए: संरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(योषिता सिंह)</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र, 25 अप्रैल (भाषा) संयुक्त राष्ट्र और भारत के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि नागरिकों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है, जिसे किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस भी भारत और पाकिस्तान के बीच की स्थिति पर ‘बहुत बारीकी से और बहुत चिंता के साथ’ नजर रख रहे हैं। उनके प्रवक्ता ने बताया कि वह दोनों सरकारों से अधिकतम संयम बरतने और यह सुनिश्चित करने की अपील करते हैं कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140357/the-world-should-publicly-condemn-such-terrorism"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>(योषिता सिंह)</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र, 25 अप्रैल (भाषा) संयुक्त राष्ट्र और भारत के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि नागरिकों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है, जिसे किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस भी भारत और पाकिस्तान के बीच की स्थिति पर ‘बहुत बारीकी से और बहुत चिंता के साथ’ नजर रख रहे हैं। उनके प्रवक्ता ने बताया कि वह दोनों सरकारों से अधिकतम संयम बरतने और यह सुनिश्चित करने की अपील करते हैं कि स्थिति और न बिगड़े।</p>
<p>महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बृहस्पतिवार को दैनिक प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘हम जम्मू कश्मीर में दो दिन पहले 22 तारीख को हुए आतंकवादी हमले की निंदा करते हैं।’’</p>
<p>दुजारिक इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या गुतारेस ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद बढ़ते तनाव के बीच भारत और पाकिस्तान की सरकारों से कोई संपर्क किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गुतारेस ने कोई सीधा संपर्क नहीं किया है, ‘‘लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि वह स्पष्ट रूप से स्थिति पर बहुत बारीकी से और बहुत चिंता के साथ नज़र रख रहे हैं।’’</p>
<p>महासचिव ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से अपील की है कि वे संयम बरतें और यह सुनिश्चित करें कि स्थिति न बिगड़े।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने बृहस्पतिवार को ‘एम्पॉवरिंग द डिजिटल सिटीजन ऑफ द फ्यूचर: टुवर्ड्स एन इंटीग्रेटेड डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई)’ शीर्षक से एक विशेष कार्यक्रम की मेजबानी की, जहां संयुक्त राष्ट्र के दूतों और नेताओं ने पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए अपने वक्तव्य की शुरुआत की।</p>
<p>जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए इस हमले में 26 लोग मारे गए थे जिनमें एक नेपाली नागरिक शामिल था। मारे गए लोगों में ज्यादातर पर्यटक थे।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र के अध्यक्ष फिलेमोन यांग ने कहा, ‘‘सबसे पहले, मैं जम्मू कश्मीर में हाल ही में हुए हमलों के पीड़ितों के परिजनों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं।’’</p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, ‘‘आज की शुरुआत करने से पहले मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं भारत के कश्मीर में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के पीड़ितों के परिजनों के साथ हैं।’’</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. ​​हरीश ने कहा कि भारत, जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए क्रूर आतंकवादी हमले में हुई जानमाल की हानि पर शोक व्यक्त करता है।</p>
<p>प्रौद्योगिकियों संबंधी मामलों पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत अमनदीप सिंह गिल ने अपने संबोधन की शुरुआत पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में अपने प्रियजनों को खोने वाले लोगों और भारत सरकार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए की।</p>
<p>इस हमले के बाद भारत ने ‘आतंकवादी हमले की सीमा-पार से कड़ियों’ को उजागर किया और इसके जवाब में भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को ‘तत्काल प्रभाव से स्थगित’ करने समेत कई अन्य निर्णय लिए, ये निर्णय उस समय तक के लिए हैं जब तक कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के अपने समर्थन को बंद नहीं कर देता।</p>
<p>भारत ने अटारी में एकीकृत जांच चौकी को भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है और नयी दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में रक्षा, सैन्य, नौसेना और वायु सलाहकारों को अवांछित घोषित कर दिया गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत हर आतंकवादी, उसके आकाओं और उसके समर्थकों की पहचान करेगा और उन्हें दंडित करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 25 Apr 2025 13:04:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉ. आंबेडकर के विचार भारत की सीमाओं से परे भी गूंजते हैं : अठावले ने संयुक्त राष्ट्र में कहा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र, 15 अप्रैल (वेब वार्ता)। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने समानता, प्रतिनिधित्व और मानवाधिकार के जिन सिद्धांतों के लिए लड़ाई लड़ी, वह आज 2030 के सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।</p>
<p>वह संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।</p>
<p>अठावले ने कहा, ‘‘डॉ. आंबेडकर का जीवन केवल भारत के लिए नहीं, संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने जाति, गरीबी और औपनिवेशिक उत्पीड़न की सीमाओं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140116/dr-ambedkars-views-also-resonate-beyond-indias-borders-athawale-said"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र, 15 अप्रैल (वेब वार्ता)। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने समानता, प्रतिनिधित्व और मानवाधिकार के जिन सिद्धांतों के लिए लड़ाई लड़ी, वह आज 2030 के सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।</p>
<p>वह संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।</p>
<p>अठावले ने कहा, ‘‘डॉ. आंबेडकर का जीवन केवल भारत के लिए नहीं, संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने जाति, गरीबी और औपनिवेशिक उत्पीड़न की सीमाओं को पार करते हुए वैश्विक मानवाधिकार आंदोलन में अहम भूमिका निभाई।’’</p>
<p>संबंधित कार्यक्रम भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित किया गया जिसमें भारतीय प्रवासी, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी और नागरिक समाज के सदस्य शामिल हुए।</p>
<p>अठावले ने कहा कि मंत्रालय डॉ. आंबेडकर की विरासत को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए कई योजनाएं चला रहा है जिनमें अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए ‘नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप’, ‘पीएम-दक्ष योजना’ और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए ‘स्माइल स्कीम’ शामिल हैं।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि डॉ. आंबेडकर लोकतंत्र को जीवनशैली मानते थे और संविधान की नैतिकता को लागू करने के लिए संस्थागत ढांचे को माध्यम मानते थे।</p>
<p>‘फाउंडेशन फॉर ह्यूमन होराइजन’ के अध्यक्ष दिलीप म्हसके और हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल के ‘विजिटंग प्रोफेसर’ संतोष राऊत ने भी डॉ. आंबेडकर के विचारों की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित किया।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 14:49:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने यूक्रेन पर अमेरिका-रूस की सहमति का स्वागत किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र, 20 मार्च (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने यूक्रेन पर अमेरिका-रूस की सहमति का स्वागत किया है। पत्रकारों के लिए जारी एक बयान में यह जानकारी दी गयी।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ऊर्जा अवसंरचना युद्ध विराम के संबंध में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी संघ के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की घोषणाओं का स्वागत किया है, साथ ही काले सागर में नौवहन की सुरक्षा से संबंधित पहल को लागू करने की दिशा में बातचीत की है।</p>
<p>उन्होंने इस घोषणा का भी स्वागत किया है कि श्री ट्रम्प और यूक्रेन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139435/united-nations-secretary-general-welcomed-the-consent-of-us-russia-on-ukraine"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र, 20 मार्च (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने यूक्रेन पर अमेरिका-रूस की सहमति का स्वागत किया है। पत्रकारों के लिए जारी एक बयान में यह जानकारी दी गयी।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ऊर्जा अवसंरचना युद्ध विराम के संबंध में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी संघ के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की घोषणाओं का स्वागत किया है, साथ ही काले सागर में नौवहन की सुरक्षा से संबंधित पहल को लागू करने की दिशा में बातचीत की है।</p>
<p>उन्होंने इस घोषणा का भी स्वागत किया है कि श्री ट्रम्प और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने ऊर्जा के खिलाफ आंशिक युद्ध विराम पर सहमति व्यक्त की है और तकनीकी टीमें युद्ध विराम को काला सागर तक बढ़ाने पर चर्चा करेंगी। बयान के अनुसार, ये कदम महत्वपूर्ण विश्वास-निर्माण उपायों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो तनाव कम करने की दिशा में आगे की चर्चाओं को सुविधाजनक बना सकते हैं।</p>
<p>बयान में कहा गया है, "उन्हें उम्मीद है कि यह यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह से सम्मान करने वाली एक न्यायसंगत, व्यापक और स्थायी शांति प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।"</p>
<p>रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के अनुसार, पुतिन और  ट्रम्प ने मंगलवार को एक फोन कॉल के दौरान यूक्रेन संघर्ष के समाधान पर चर्चा की तथा विश्व में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अपनी विशेष जिम्मेदारी के आलोक में संबंधों को सामान्य बनाने में पारस्परिक रुचि व्यक्त की।  पुतिन ने  ट्रम्प के इस प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की कि संघर्षरत पक्ष 30 दिन के लिए ऊर्जा अवसंरचना पर हमले बंद कर दें।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 20 Mar 2025 16:22:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत, चीन के व्यापार में दिसंबर तिमाही में मजबूत वृद्धि: संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र, 15 मार्च (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों, विशेष रूप से भारत और चीन ने 2024 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में औसत से बेहतर व्यापार विस्तार देखा। रिपोर्ट में हालांकि, आगामी तिमाहियों में वैश्विक स्तर पर ‘आर्थिक मंदी की संभावना’ की चेतावनी दी गई है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (यूएनसीटीएडी) द्वारा नवीनतम वैश्विक व्यापार अपडेट, जो मार्च की शुरुआत तक के आंकड़ों को कवर करता है, ने कहा कि 2024 में वैश्विक व्यापार लगभग 1,200 अरब डॉलर यानी नौ प्रतिशत के विस्तार के साथ 33,000 अरब डॉलर तक पहुंच गया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139299/indias-strong-growth-in-december-quarter-in-indias-trade-united"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र, 15 मार्च (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों, विशेष रूप से भारत और चीन ने 2024 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में औसत से बेहतर व्यापार विस्तार देखा। रिपोर्ट में हालांकि, आगामी तिमाहियों में वैश्विक स्तर पर ‘आर्थिक मंदी की संभावना’ की चेतावनी दी गई है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (यूएनसीटीएडी) द्वारा नवीनतम वैश्विक व्यापार अपडेट, जो मार्च की शुरुआत तक के आंकड़ों को कवर करता है, ने कहा कि 2024 में वैश्विक व्यापार लगभग 1,200 अरब डॉलर यानी नौ प्रतिशत के विस्तार के साथ 33,000 अरब डॉलर तक पहुंच गया।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया, “विकासशील देशों, विशेषकर चीन और भारत में औसत से बेहतर व्यापार विस्तार हुआ, जबकि कई विकसित देशों में व्यापार संकुचन हुआ।”</p>
<p>इसमें कहा गया है कि चीन और भारत ने 2024 की चौथी तिमाही में मजबूत व्यापार गति देखी, जबकि अमेरिका एक प्रमुख चालक बना रहा।</p>
<p>साल 2024 की चौथी तिमाही में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक व्यापार ने मिश्रित रुझान दिखाए। चीन और भारत के व्यापार में, विशेष रूप से निर्यात में वृद्धि जारी रही।</p>
<p>इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया में निर्यात वृद्धि में कमी आई, हालांकि यह वार्षिक आधार पर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक रही।</p>
<p>अमेरिका में, 2024 की चौथी तिमाही में आयात वृद्धि सकारात्मक रही, जबकि निर्यात वृद्धि घट गई। जापान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूरोपीय संघ के लिए तिमाही और वार्षिक दोनों आधार पर आयात वृद्धि के रुझान नकारात्मक रहे।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने 2024 की चौथी तिमाही में माल व्यापार में तिमाही आधार पर आठ प्रतिशत की आयात वृद्धि दर्ज की और वार्षिक आयात में छह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि वस्तुओं में तिमाही निर्यात वृद्धि सात प्रतिशत और वार्षिक निर्यात वृद्धि दो प्रतिशत रही।</p>
<p>साल 2024 की चौथी तिमाही में सेवा व्यापार में वृद्धि जारी रही। हालांकि, यह वार्षिक आंकड़ों की तुलना में धीमी गति रही। यह दर्शाता है कि सेवा व्यापार में सकारात्मक रुझान अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्थिर हो सकता है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के लिए सेवा व्यापार में वृद्धि मजबूत रही।</p>
<p>वार्षिक आधार पर, कई सबसे बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए सेवा व्यापार वृद्धि दहाई अंक के आंकड़े तक पहुंच गई, जबकि अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह बहुत उच्च स्तर पर रही।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने पिछली तिमाही की तुलना में चौथी तिमाही में सेवाओं में सात प्रतिशत की तिमाही आयात वृद्धि और 10 प्रतिशत की वार्षिक आयात वृद्धि दर्ज की, जबकि तिमाही निर्यात वृद्धि तीन प्रतिशत और सेवाओं में वार्षिक निर्यात वृद्धि 10 प्रतिशत रही।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 18:20:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सभी को नुकसान होगा: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने बढ़ते वैश्विक व्यापार युद्ध के बीच चेतावनी दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र, 13 मार्च (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा कथित तौर पर शुरू किए गए व्यापार युद्ध की पृष्ठभूमि में चेतावनी दी है कि जब देश व्यापार युद्ध करेंगे तो ‘‘सभी को नुकसान होगा’’।</p>
<p>गुतारेस ने बुधवार को यहां कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हम एक वैश्विक अर्थव्यवस्था में रह रहे हैं जहां सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है और जाहिर है, मुक्त व्यापार की स्थिति का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे सभी देशों को लाभ होने की स्थिति बनती है। जब हम व्यापार युद्ध में उतरते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139264/everyone-will-be-harmed-by-united-nations-chief-warned-amid"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-05/united-nations-un.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र, 13 मार्च (वेब वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा कथित तौर पर शुरू किए गए व्यापार युद्ध की पृष्ठभूमि में चेतावनी दी है कि जब देश व्यापार युद्ध करेंगे तो ‘‘सभी को नुकसान होगा’’।</p>
<p>गुतारेस ने बुधवार को यहां कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हम एक वैश्विक अर्थव्यवस्था में रह रहे हैं जहां सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है और जाहिर है, मुक्त व्यापार की स्थिति का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे सभी देशों को लाभ होने की स्थिति बनती है। जब हम व्यापार युद्ध में उतरते हैं तो मेरा मानना ​​है कि इसमें सभी को नुकसान होगा।’’</p>
<p>उन्होंने बढ़ते वैश्विक व्यापार युद्ध पर एक सवाल के जवाब में यह बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल में कहा है कि अमेरिका उन देशों पर जवाबी शुल्क लगाएगा जो अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाते हैं।</p>
<p>इस्पात और एल्युमीनियम पर ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए वैश्विक शुल्क लागू हो गए हैं, जिसके बाद यूरोपीय संघ (ईयू) और कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क लगाने की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन ने कनाडा, मेक्सिको और चीन से आयात होनी वाली वस्तुओं पर भी शुल्क लगाने की घोषणा की है। जवाबी कार्रवाई में इन देशों ने भी अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर शुल्क लगाने कीघोषणा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 21:09:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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