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                <title>Gyanvapi Masjid - Loktej</title>
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                <title>वाराणसी ज्ञानवापी मस्जिद और विश्वेश्वर मंदिर मामले में सभी याचिकाएं खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रयागराज, 19 दिसम्बर (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद और विश्वेश्वर मंदिर विवाद मामले में सुनवाई करते हुए दाखिल सभी याचिकाएं खारिज कर दी।</p>
<p>कोर्ट ने सर्वे जारी रखने की छूट दी है और कहा है कि सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल हो। यह आदेश सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने दिया है। कोर्ट ने कहा है कि वाराणसी जिला अदालत में चल रहा वाद सिविल वाद प्लेसेस आफ वर्शिप एक्ट से बाधित नहीं।<br /><br />इसके पूर्व हाईकोर्ट ने हिन्दू पक्ष के 1991 के मुकदमे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/97981/all-petitions-rejected-in-varanasi-gyanvapi-mosque-and-vishveshwar-temple"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/4227_gyanvapi-masjid.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज, 19 दिसम्बर (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद और विश्वेश्वर मंदिर विवाद मामले में सुनवाई करते हुए दाखिल सभी याचिकाएं खारिज कर दी।</p>
<p>कोर्ट ने सर्वे जारी रखने की छूट दी है और कहा है कि सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल हो। यह आदेश सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने दिया है। कोर्ट ने कहा है कि वाराणसी जिला अदालत में चल रहा वाद सिविल वाद प्लेसेस आफ वर्शिप एक्ट से बाधित नहीं।<br /><br />इसके पूर्व हाईकोर्ट ने हिन्दू पक्ष के 1991 के मुकदमे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। वाराणसी कोर्ट में सिविल वाद दायर है। कुल 5 याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। दो याचिकाएं सिविल वाद की पोषणीयता और तीन याचिकाएं एएसआई सर्वे आदेश के खिलाफ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Dec 2023 12:25:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>ज्ञानवापी सर्वे रिपोर्ट जिला न्यायालय में दाखिल करेगी एएसआई, दस दिन की मिली मोहलत समाप्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाराणसी, 11 दिसम्बर (हि.स.)। ज्ञानवापी सर्वे रिपोर्ट एएसआई टीम अपने अधिवक्ता के जरिए सोमवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में पेश करेगी। न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए जिला जज ने दस दिन की मोहलत देते हुए सुनवाई के लिए 11 दिसम्बर की तिथि तय की थी। न्यायालय के सख्त रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि सर्वे रिपोर्ट एएसआई दाखिल कर सकती है।<br /><br />एएसआई के अधिवक्ता ने पिछली तारीख पर जिला न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर तीन सप्ताह और समय देने की मांग की थी। एएसआई ने प्रार्थना पत्र के जरिए कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/97826/asi-will-file-gyanvapi-survey-report-in-the-district-court"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/4227_gyanvapi-masjid.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी, 11 दिसम्बर (हि.स.)। ज्ञानवापी सर्वे रिपोर्ट एएसआई टीम अपने अधिवक्ता के जरिए सोमवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में पेश करेगी। न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए जिला जज ने दस दिन की मोहलत देते हुए सुनवाई के लिए 11 दिसम्बर की तिथि तय की थी। न्यायालय के सख्त रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि सर्वे रिपोर्ट एएसआई दाखिल कर सकती है।<br /><br />एएसआई के अधिवक्ता ने पिछली तारीख पर जिला न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर तीन सप्ताह और समय देने की मांग की थी। एएसआई ने प्रार्थना पत्र के जरिए कहा था कि पुरातत्वविदों, पुरालेखविदों, रसायनज्ञों, सर्वेक्षणकर्ताओं, भू- भौतिकी विशेषज्ञों आदि ने सर्वे करके महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। उसकी रिपोर्ट तैयार हो रही है। जीपीआर तकनीक से हुए सर्वे की रिपोर्ट बनाने में समय लग रहा है। इसलिए पूरी रिपोर्ट पेश करने के लिए समय चाहिए। इस पर न्यायालय ने फटकार लगाते हुए दस दिन की मोहलत दी थी। एएसआई के प्रार्थनापत्र पर जिला न्यायालय अब तक तीन बार अवधि बढ़ा चुकी है।<br /><br />बनारस बार के पूर्व महामंत्री वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि पांच महींने के लम्बे इंतजार के बाद बहुप्रतिक्षित एएसआई की सर्वे रिपोर्ट सोमवार को अदालत में दाखिल होगी। तीन बार में एएसआई ने कुल 35 दिन का समय रिपोर्ट तैयार करने के लिए लिया। वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि इस रिपोर्ट से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Dec 2023 12:00:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा अधिकार को लेकर मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रयागराज, 31 मई (हि.स.)। वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा अधिकार मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया कमेटी की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी वाराणसी की तरफ से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज की। इस मामले में तीन महीने की लंबी बहस और दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है।<br /><br />श्रीमती राखी सिंह व 9 अन्य महिलाओं ने श्रृंगार गौरी में पूजा के अधिकार को लेकर वाराणसी की जिला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/92094/muslim-sides-petition-regarding-regular-worship-rights-of-shringar-gauri"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/4227_gyanvapi-masjid.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज, 31 मई (हि.स.)। वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा अधिकार मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया कमेटी की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी वाराणसी की तरफ से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज की। इस मामले में तीन महीने की लंबी बहस और दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है।<br /><br />श्रीमती राखी सिंह व 9 अन्य महिलाओं ने श्रृंगार गौरी में पूजा के अधिकार को लेकर वाराणसी की जिला अदालत में सिविल वाद दायर किया। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी वाराणसी ने वाद की पोषणीयता पर आपत्ति करते हुए अर्जी दाखिल की कि कोर्ट को प्लेसेस आफ वर्शिप एक्ट 1991के उपबंधों के तहत अदालत को वाद सुनने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कमेटी की अर्जी खारिज कर दी थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।<br /><br />याची का तर्क था कि उपासना स्थल अधिनियम से नियमित पूजा प्रतिबंधित है। क्योंकि पूजा से स्थल की धार्मिक प्रकृति से छेड़छाड़ होगी, जो कानूनन नहीं किया जा सकता। इसलिए यहां नियमित पूजा की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। मर्यादा कानून के आधार पर सिविल वाद को मियाद बाधित करार दिया। कहा गया कि चालाकी से पूजा के अधिकार की मांग में दाखिल सिविल वाद से विपक्षी के अधिकारों में हस्तक्षेप करने की कोशिश की गई है। जिससे 1991के कानून का उल्लघंन होगा। इसलिए जिला अदालत में श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा के लिए हिन्दू महिलाओं द्वारा वाद सुनवाई योग्य नहीं है।<br /><br />याचिवका में यह भी कहा गया कि मंदिर पक्ष यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि पूजा 1990 में रोकी गई या 1993 में रोकी गई। अगर इन दोनों ही तिथियों में नियमित पूजा रोकी गई तो यह लिमिटेशन एक्ट से प्रतिबंधित है। सिविल वाद उपासना स्थल अधिनियम से भी प्रतिबंधित है। क्योंकि, 15 अगस्त 1947 से ज्ञानवापी मस्जिद का वही स्टेट्स बरकरार रहना चाहिए। स्थल की धार्मिक स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह विवाद काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट अधिनियम के अंतर्गत नहीं आता है। क्योंकि मस्जिद वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति है और बोर्ड की सम्पत्ति के विवाद की सुनवाई वक्फ अधिकरण को करने का अधिकार है। सिविल कोर्ट को अधिकार नहीं है।<br /><br />वहीं हिन्दू पक्ष की तरफ से कहा गया कि पौराणिक साक्ष्यों एवं 15 अगस्त 1947 के पहले से श्रृंगार गौरी, हनुमान व कृति वासेश्वर की पूजा होती आ रही है। इसलिए, 1991 का प्लेसेस आफ वर्शिप एक्ट इस मामले में लागू नहीं होगा। इनका कहना था कि मंदिर में मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा होने के बाद उस जमीन का स्वामित्व मूर्ति में निहित हो जाता है। हिन्दू विधि में मंदिर ध्वस्त होने के बाद भी अप्रत्यक्ष मूर्ति का अस्तित्व बना रहता है।<br /><br />हिन्दू पक्ष ने कहा औरंगजेब ने स्वयं भू विश्वेश्वर नाथ मंदिर तोड़ा और मंदिर की दीवार पर मस्जिद का आकार दिया गया है। इस्लामिक कानून के तहत इसे मस्जिद नहीं माना जा सकता। विवादित स्थल पर नमाज कबूल नहीं होती। 1937 के दीन मोहम्मद केस का हवाला देते हुए कहा कि इस केस में केवल वादी को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई है। मुस्लिम समाज को नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है।<br /><br />उन्होंने कहा कि जहां आज तीन गुंबद है वहीं पर श्रृंगार गौरी, हनुमान व कृतिवास मंदिर था। एक नक्शा भी पेश किया तथा कहा कि किसी इस्लामिक इतिहासकार ने ज्ञानवापी मस्जिद का जिक्र नहीं किया है। यह साफ हो गया है कि आलमगीर मस्जिद विवादित स्थल से तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित है। उस काल में कई मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई।<br /><br />अधिवक्ता जैन ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर एक्ट पहले का है। समवर्ती सूची के कारण प्लेसेस आफ वर्शिप एक्ट पर प्रभावी होगा।इस कानून के तहत ज्ञानवापी परिसर की भूमि विश्वनाथ मंदिर की है। मस्जिद का किसी भूमि पर स्वामित्व नहीं है। मंदिर की संपत्ति या हिंदू मुस्लिम का विवाद वक्फ अधिकरण को सुनने का अधिकार नहीं है।वह मुस्लिमो के बीच विवाद ही सुन सकता है। स्कंद पुराण के आधार पर कहा कि पंचकोसी परिक्रमा मार्ग में आने वाले मंदिरों का उल्लेख किया गया है। उनमें से कुछ पर मस्जिद बनी हुई है। ज्ञानवापी कूप में स्नान कर श्रृंगार गौरी के पूजन का विधान है। विवादित ढांचे की तस्वीर पेश कर कहा कि साफ दिखाई दे रहा है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद का आकार दिया गया है। परिक्रमा मार्ग में 11 मंदिरों का उल्लेख है। सबकी अलग पूजा पद्धति दी गई है। तीन महीने की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को याचिका खारिज कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 20:16:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ज्ञानवापी : ‌‘शिवलिंग’ की कार्बन डेटिंग जांच की मांग खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">वाराणसी स्थिति ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में कार्बन डेटिंग और ‘शिवलिंग’ की वैज्ञानिक जांच नहीं होगी। आज वाराणसी जिला जज कृष्‍ण विश्वेश द्वारा शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग के संबंध की गई याचिका को खारिज कर दिया। अदालत द्वारा दिये गये इस निर्णय से हिंदू पक्ष को झटका लगा है। </span><br /></div><div><br /></div><p></p><div class="twitter-tweet twitter-tweet-rendered" style="max-width:550px;width:100%;margin-top:10px;margin-bottom:10px;"></div>

<p></p><div><br /></div><div>आपको बता दें कि कार्बन डेटिंग वो वैज्ञानिक पद्धति है जिसकी मदद से किसी भी पुरानी वस्तु की उम्र आंकी जा सकती है। ये तकनिक 1949 में शिकागो युनिवर्सिटी के वैज्ञानिक विलियर्ड लिब्बी ने ढूंढी थी। हिंदू पक्ष की ओर से ज्ञानवापी मामले में कार्बन डेटिंग के द्वारा शिवलिंग कितना</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/81602/gyanvapi-demand-for-carbon-dating-investigation-of-shivling-rejected"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/4227_gyanvapi-masjid.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">वाराणसी स्थिति ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में कार्बन डेटिंग और ‘शिवलिंग’ की वैज्ञानिक जांच नहीं होगी। आज वाराणसी जिला जज कृष्‍ण विश्वेश द्वारा शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग के संबंध की गई याचिका को खारिज कर दिया। अदालत द्वारा दिये गये इस निर्णय से हिंदू पक्ष को झटका लगा है। </span><br /></div><div><br /></div><p></p><div class="twitter-tweet twitter-tweet-rendered" style="max-width:550px;width:100%;margin-top:10px;margin-bottom:10px;"><iframe frameborder="0" allowfullscreen="" style="width:550px;height:624px;" title="Twitter Tweet" src="https://platform.twitter.com/embed/Tweet.html?dnt=false&amp;embedId=twitter-widget-0&amp;features=eyJ0ZndfdGltZWxpbmVfbGlzdCI6eyJidWNrZXQiOlsibGlua3RyLmVlIiwidHIuZWUiLCJ0ZXJyYS5jb20uYnIiLCJ3d3cubGlua3RyLmVlIiwid3d3LnRyLmVlIiwid3d3LnRlcnJhLmNvbS5iciJdLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X2hvcml6b25fdGltZWxpbmVfMTIwMzQiOnsiYnVja2V0IjoidHJlYXRtZW50IiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH0sInRmd190d2VldF9lZGl0X2JhY2tlbmQiOnsiYnVja2V0Ijoib24iLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X3JlZnNyY19zZXNzaW9uIjp7ImJ1Y2tldCI6Im9uIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH0sInRmd19jaGluX3BpbGxzXzE0NzQxIjp7ImJ1Y2tldCI6ImNvbG9yX2ljb25zIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH0sInRmd190d2VldF9yZXN1bHRfbWlncmF0aW9uXzEzOTc5Ijp7ImJ1Y2tldCI6InR3ZWV0X3Jlc3VsdCIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0Zndfc2Vuc2l0aXZlX21lZGlhX2ludGVyc3RpdGlhbF8xMzk2MyI6eyJidWNrZXQiOiJpbnRlcnN0aXRpYWwiLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X2V4cGVyaW1lbnRzX2Nvb2tpZV9leHBpcmF0aW9uIjp7ImJ1Y2tldCI6MTIwOTYwMCwidmVyc2lvbiI6bnVsbH0sInRmd19kdXBsaWNhdGVfc2NyaWJlc190b19zZXR0aW5ncyI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdmlkZW9faGxzX2R5bmFtaWNfbWFuaWZlc3RzXzE1MDgyIjp7ImJ1Y2tldCI6InRydWVfYml0cmF0ZSIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdHdlZXRfZWRpdF9mcm9udGVuZCI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9fQ%3D%3D&amp;frame=false&amp;hideCard=false&amp;hideThread=false&amp;id=1580850409174085632&amp;lang=en&amp;origin=https%3A%2F%2Fwww.loktej.com%2Fadmin_panel%2FNews%2Fadd&amp;partner=tweetdeck&amp;sessionId=0ffb3446e7c416154124f94bac6423ece9b60306&amp;theme=light&amp;widgetsVersion=1c23387b1f70c%3A1664388199485&amp;width=550px"></iframe></div>

<p></p><div><br /></div><div>आपको बता दें कि कार्बन डेटिंग वो वैज्ञानिक पद्धति है जिसकी मदद से किसी भी पुरानी वस्तु की उम्र आंकी जा सकती है। ये तकनिक 1949 में शिकागो युनिवर्सिटी के वैज्ञानिक विलियर्ड लिब्बी ने ढूंढी थी। हिंदू पक्ष की ओर से ज्ञानवापी मामले में कार्बन डेटिंग के द्वारा शिवलिंग कितना पुराना है इसकी पड़ताल करने की मांग की गई थी। </div><div><br /></div><div><br /></div><div>अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार परिसर में जिस जगह पर शिवलिंग मिला है, उसकी हिफाजत की जाए। परंतु कार्बन डेटिंग किये जाने से उसे संभवतया नुकसान हो सकता है और इस कारण लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसलिये कार्बन डेटिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती।</div><div><br /></div><div><br /></div><div>अदालत के फैसले के बाद हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमारी कार्बन डेटिंग की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि शिवलिंग के साथ कोई छेड़छाड़ ना हो। अभी इसकी आवश्यकता नहीं है। हम उच्च न्यायालय में भी अपनी बात रखेंगे क्योंकि विज्ञान की कसौटी पर जीवन जिया जा सकता है। </div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Oct 2022 15:45:32 +0530</pubDate>
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                <title>औरंगजेब ने ही दिया था काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने का आदेश, इस किताब में मिला प्रमाण</title>
                                    <description><![CDATA[औरंगजेब की किताब 'मासिर-ए-आलमगिरी' से काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस की जानकारी सामने आई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80652/aurangzeb-had-given-the-order-to-demolish-kashi-vishwanath-temple-the-evidence-found-in-this-book"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-05/2208_loktej14.jpg" alt=""></a><br /><div>ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग नुमा पत्थर निकलने के बाद देश भर में राजनीति गरमा गई है। जिसके मिलने के बाद हिन्दू धर्म के लोगों का कहना है कि मस्जिद में मिला पत्थर शिवलिंग है। वहीं मुस्लिम समुदाय ने उस पत्थर को फब्बारे होने का दावा किया है। पत्थर मिलने के बाद मामला न्यायालय में पहुंच गया है और उस पत्थर को जांच एजेंसियों के हवाले करते हुए मामला न्यायलय में विचाराधीन है। ऐसे में काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस के बारे में साहित्यिक प्रमाण मिल रहे हैं। लोग विभिन्न साहित्य के सहारे इस मंदिर के इतिहास को बताने की कोशिश कर रहे है। इस बीच औरंगजेब की किताब 'मासिर-ए-आलमगिरी' से काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस की जानकारी सामने आई है।</div><div>इस किताब के मुताबिक, औरंगजेब ने 8 अप्रैल 1669 को बनारस में सभी पाठशालाओं और मंदिरों को तोड़ने का आदेश जारी किया था। इस किताब के अनुसार 2 सितंबर को औरंगजेब को काशी विश्वनाथ मंदिर टूट जाने की जानकारी मिल रही है। इस तथ्य के अनुसार 8 अप्रैल 1669 से 2 सितंबर 1669 के बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर को बीच तोड़ा गया था।</div><div>आपको बता दें कि मुस्ताईद खान द्वारा लिखी फारसी में लिखी गई मुगल शासक औरंगजेब की किताब 'मासिर-ए-आलमगिरी' को औरंगजेब की सबसे भरोसेमंद किताब माना जाता है। इस किताब में औरंगजेब के शासन के 1658 से लेकर 1707 तक की घटनाओं का जिक्र है। मुस्ताईद खान ने इसे 1710 ईस्वी में पूरा कर दिया था। </div><div>सर जदुनाथ सरकार ने फारसी में लिखी गई इस किताब का अनुवाद किया था जो एशियाटिक सोसाइटी कोलकाता में भी उपलब्ध है। किताब के मुताबिक, औरंगजेब ने 8 अप्रैल 1669 को बनारस में सभी पाठशालाओं और मंदिरों को तोड़ने का आदेश जारी किया था। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर टूट जाने की जानकारी भी इस किताब में दी गई है। किताब 'मासिर-ए-आलमगिरी' का पहला भाग औरंगजेब के जिंदा रहते हुए लिखा गया था। औरंगजेब की मौत के बाद किताब को पूरा किया गया था। ब्रिटिश शासन के दौरान प्रसिद्ध इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार ने इसका अनुवाद किया था।</div><div>इस किताब के अनुसार मंगलवार 8 अप्रैल 1669 को जब ग्रहण लगा था तो प्रथा के मुताबिक, प्रार्थना सभा की गई और फिर भिक्षा का वितरण किया गया। इस दौरान जब औरंगजेब को पता चला कि बनारस में ब्राह्मण अपने गुरुकुल में अपनी झूठी किताब पढ़ाते थे। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के छात्र दूर-दूर से इनके पास शिक्षा लेने के लिए आते थे। इसके बाद इस्लाम की स्थापना में जुटे औरंगजेब ने सभी प्रांतों के गवर्नरों को हिंदुओं (काफिरों) के स्कूलों और मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश दे दिया। साथ ही हिंदुओं के धर्म के शिक्षण संस्थानों को बंद करने को कहा।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 11:02:51 +0530</pubDate>
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                <title>ज्ञानवापी मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट आज पेश होगी</title>
                                    <description><![CDATA[वजू खाने के नीचे की दीवार गिराने की अर्जी में कुछ समय लगेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/81503/survey-report-of-gyanvapi-masjid-will-be-presented-today"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/4227_gyanvapi-masjid.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद में विगत 14 से 16 मई के दौरान कमीशन किये गये सर्वे की रिपोर्ट आज गुरुवार को दोपहर अदालत के समक्ष पेश कर दी जायेगी। यह जानकारी असिस्टेंट कोर्ट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह ने मीडिया को दी। उधर अधिवक्ता विशेष आयुक्त, वाराणसी विशाल सिंह ने बताया है कि 6-7 मई को पूर्व अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा ने ज्ञानवापी परिसर के बाहर जो अकेले सर्वे कमीशन किया था उसकी रिपोर्ट पहले ही फाइल की जा चुकी है। </span></div>
<div>वहीं ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्‍णु जैन ने मीडिया को बताया है कि हमने अभी कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया है। मामले को सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई के लिये रखा था। इसमें अतिरिक्त गतिविधियां हुई हैं, कई अतिरिक्त दस्तावेज हैं जिसे कोर्ट के रिकॉर्ड पर लाना है। इसके लिये हम कोर्ट से कुछ वक्त की मोहलत मांगेंगे। उन्होंने कहा कि हमने वाराणसी में भी कुछ समय मांगा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला लंबित है और हमें दस्तावेज को रिकॉर्ड में रखने की जरूरत है। एक साथ दो कार्रवाई तो नहीं चल सकती। </div>
<div>वकील विष्‍णु जैन ने कहा कि जहां तक वजू खाने के नीचे की दीवार गिराने की अर्जी का सवाल है, हमें कुछ समय लगेगा। मुझे लगता है कि मुस्लिम पक्ष भी हमारे आवेदन पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिये कुछ समय की मांग करेंगे। </div>
<div>ज्ञातव्य है कि मस्जिद के अंदर वजूखाने वाले इलाके में कुएं में शिवलिंग मिला है जिसके बाद अदालत उसे क्षेत्र को सील कर दिया है। मुस्लिम पक्ष शिवलिंग होने की बात नकारते हुए उसे फव्वारा बता रहा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 May 2022 10:53:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ज्ञानवापी मस्जिद में मिला शिवलिंग, जानिये अदालत ने क्या आदेश जारी किया</title>
                                    <description><![CDATA[मुस्लिम पक्ष ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का द्वार, मंगलवार को सुनवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/81500/shivling-found-in-gyanvapi-mosque-know-what-order-has-been-issued-by-the-court"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/4227_gyanvapi-masjid.jpg" alt=""></a><br /><div>ज्ञानवापी मस्जिद के चल रहे सर्वे के दौरान सोमवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। सर्वे के दौरान मस्जिद के हुए वाले इलाके में शिवलिंग मिला है। कोर्ट ने इस घटनाक्रम के बाद किसी भी व्यक्ति को संबंधित इलाके में प्रवेश करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने डीएम पुलिस कमिश्नर और सीआरपीएफ कमांडेंट को यह आदेश दिया है कि उक्त जगहों को सुरक्षित और संरक्षित रखने की व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदारी रहेगी।</div>
<div>गौरतलब है कि सोमवार को सर्वे के दौरान जैसे ही टीम को शिवलिंग नजर आया सर्वे टीम में शामिल हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने तुरंत वाराणसी कोर्ट में आवेदन कर दिया। आवेदन में मांग की गई कि चुंकि शिवलिंग का मिलना एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है इसलिए तुरंत उस जगह को सील करना चाहिए। डीएम ने भी इस संबंधी आदेश जारी कर दिए।</div>
<div>सर्वे के बाद हिंदू पक्ष के पैरोकार डॉक्टर सोहनलाल ने परिसर से बाहर आने के बाद कहा कि अंदर बाबा मिल गए। जिन खोजा... तिन पाइयां। यह वही बाबा है जिनकी नंदी प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही मंदिर परिसर में शिवलिंग मिला वहां हर हर महादेव के नारे लगने लगे। लोग खुशी से नाचने लगे। उन्होंने कहा कि जो खोजा जा रहा था उससे कहीं अधिक मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि अब पश्चिमी दीवार के पास जो 75 फीट लंबा 30 फीट चौड़ा और 15 फीट ऊंचा मलबा है उसके सर्वे की मांग उठाई जाएगी। कुएं वाली बात पर मीडिया द्वारा प्रश्न किए जाने पर हिंदू पक्ष की तरफ से मोहन यादव ने कहा कि ज्ञानवापी में वजू खाने या तालाब में 12 फीट 8 इंच व्यास का शिवलिंग मिला है जो अंदर काफी गहरा हो सकता है। कहा गया है कि इस शिवलिंग का मुंह नंदी की तरफ है और वजू खाने का पूरा पानी निकालकर इसे देखा गया था।</div>
<div>उधर मुस्लिम पक्ष की एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है जिस पर मंगलवार को सुनवाई होनी है। अंजुमन इंतजा मियां मसाजिद कमेटी ने वाराणसी कोर्ट के सर्वे के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मंगलवार की सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच करेगी। मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष के दावों को खारिज किया है। उनके वकील का कहना है कि मस्जिद से ऐसा कुछ भी नहीं मिला है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 14:26:50 +0530</pubDate>
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