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                <title>Monsoon - Loktej</title>
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                <description>Monsoon RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत में इस साल सामान्य से कमजोर रह सकता है मॉनसून, अल नीनो का दिखेगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 15 अप्रैल (वेब वार्ता)। देश की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर चिंताजनक खबर सामने आई है।</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपने नवीनतम पूर्वानुमान में कहा है कि इस साल मॉनसून के कुल मिलाकर सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है।<br />साल 2023 के बाद यह पहला मौका है जब मौसम विभाग ने कम बारिश का अनुमान जताया है।</p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार, इस साल जून से सितंबर के दौरान बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की लगभग 92 फीसदी रहने के आसार हैं। विभाग ने इस पूर्वानुमान में 5 फीसदी की मॉडल त्रुटि की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146611/monsoon-may-be-weaker-than-normal-in-india-this-year"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/4769_monsoon.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 15 अप्रैल (वेब वार्ता)। देश की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर चिंताजनक खबर सामने आई है।</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपने नवीनतम पूर्वानुमान में कहा है कि इस साल मॉनसून के कुल मिलाकर सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है।<br />साल 2023 के बाद यह पहला मौका है जब मौसम विभाग ने कम बारिश का अनुमान जताया है।</p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार, इस साल जून से सितंबर के दौरान बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की लगभग 92 फीसदी रहने के आसार हैं। विभाग ने इस पूर्वानुमान में 5 फीसदी की मॉडल त्रुटि की गुंजाइश भी रखी है।</p>
<p>इस कम बारिश का मुख्य कारण प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो की स्थितियों को माना जा रहा है, जो अक्सर भारतीय मॉनसून को प्रभावित करती हैं।</p>
<p>आंकड़ों के लिहाज से देखें तो चार महीने के मॉनसून सत्र के लिए एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित है। यदि पूर्वानुमान सटीक बैठता है, तो देश भर में औसत वर्षा मात्र 80.04 सेंटीमीटर के आसपास सिमट सकती है।</p>
<p>मौसम विभाग के मानदंडों के अनुसार, एलपीए के 90 से 95 फीसदी के बीच की बारिश को सामान्य से कम श्रेणी में रखा जाता है। विभाग ने संभावना जताई है कि देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की कमी खलेगी, हालांकि पूर्वोत्तर, पश्चिमोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में स्थिति थोड़ी बेहतर रह सकती है।</p>
<p>विश्लेषण के मुताबिक, मॉनसून के कमजोर रहने की 35 फीसदी और सामान्य से कम रहने की 31 फीसदी संभावना है।</p>
<p>हालांकि, राहत की बात यह है कि कम बारिश का मतलब हमेशा खराब फसल नहीं होता। यदि वर्षा का समय और वितरण सही रहा, तो खरीफ उत्पादन पर असर कम हो सकता है।</p>
<p>फिर भी, गैर- सिंचित क्षेत्रों में उगाई जाने वाली दलहन और तिलहन की फसलों के लिए जोखिम बढ़ गया है। यदि इन फसलों का उत्पादन घटता है, तो आयात बिल बढ़ने और खाद्य मुद्रास्फीति में उछाल आने का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे देश की आर्थिक विकास दर प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>वर्तमान में भारत का 55 फीसदी कृषि क्षेत्र सिंचित है, जो सूखे जैसी स्थितियों से लड़ने में मदद करता है। मौसम विभाग मई के अंत में अपना अपडेटेड पूर्वानुमान जारी करेगा, जिसमें मॉनसून की सटीक तारीख की जानकारी दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 15:47:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश की बूंदों को अपनी गठरी में समेट दक्षिण-पश्चिम मानसून वापस चला गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) रिमझिम फुहारों से देश के पूरे हिस्से को भिगोने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 अक्टूबर की सामान्य तिथि के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को पूरे देश से वापस चला गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी।</p>
<p>विभाग ने बताया कि इसी समय पूर्वोत्तर मानसून तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल-माहे में दस्तक दे चुका है।</p>
<p>इस वर्ष मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था जो 2009 के बाद से भारतीय मुख्य भूमि पर इसका सबसे जल्दी आगमन था। यह 2009 में 23 मई को भारत पहुंचा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143647/the-south-west-monsoon-retreated-with-the-raindrops-in-its-bundle"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-05/9923_rain-rain-monsoon-umbrella-baby-water-drop.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) रिमझिम फुहारों से देश के पूरे हिस्से को भिगोने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 अक्टूबर की सामान्य तिथि के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को पूरे देश से वापस चला गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी।</p>
<p>विभाग ने बताया कि इसी समय पूर्वोत्तर मानसून तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल-माहे में दस्तक दे चुका है।</p>
<p>इस वर्ष मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था जो 2009 के बाद से भारतीय मुख्य भूमि पर इसका सबसे जल्दी आगमन था। यह 2009 में 23 मई को भारत पहुंचा था।</p>
<p>मानसून ने आठ जुलाई की सामान्य तिथि से नौ दिन पहले पूरे देश को कवर कर लिया। मानसून पूरे भारत में 2020 के बाद सबसे जल्दी पहुंचा है। मानसून ने 2020 में 26 जून तक पूरे देश को कवर कर लिया था।</p>
<p>मानसून आमतौर पर एक जून तक केरल में प्रवेश करता है और आठ जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापस जाना शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से चला जाता है।</p>
<p>भारत में 30 सितंबर तक मानसून के दौरान चार महीने में सामान्य 868.6 मिमी के मुकाबले 937.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई जो आठ प्रतिशत अधिक है।</p>
<p>आईएमडी ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि उत्तर-पश्चिम के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर भारत के अधिकतर क्षेत्रों में अक्टूबर से दिसंबर तक के मानसून के बाद के मौसम के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।</p>
<p>आईएमडी महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि जून-सितंबर के दौरान हुई भरपूर बारिश के बाद, अक्टूबर में वर्षा सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक होने की संभावना है।</p>
<p>पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 1089.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश 1367.3 मिलीमीटर से 20 प्रतिशत कम है।</p>
<p>महापात्र ने कहा, ‘‘इस मानसून में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश 1901 के बाद से दूसरी बार सबसे कम रही। इस क्षेत्र में मानसून के दौरान सबसे कम बारिश (1065.7 मिलीमीटर) 2013 में दर्ज की गई थी। अध्ययनों से पता चलता है कि पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में वर्षा में कमी आई है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि पश्चिमोत्तर भारत में 747.9 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य बारिश से 27.3 प्रतिशत अधिक है। महापात्र ने कहा कि यह 2001 के बाद से सबसे अधिक और 1901 के बाद से छठी सबसे अधिक बारिश है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के सभी जिलों में जून, अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई।</p>
<p>पंजाब में दशकों की सबसे भीषण बाढ़ आई तथा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं जम्मू कश्मीर में बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की खबरें आईं, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और लोग विस्थापित हुए।</p>
<p>आईएमडी ने अतिरिक्त बारिश का श्रेय सक्रिय मानसून को दिया जिससे लगातार पश्चिमी विक्षोभों का समर्थन मिला और क्षेत्र में बारिश में वृद्धि हुई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मध्य भारत में 1125.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई जो सामान्य बारिश से 15.1 प्रतिशत अधिक है जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में 9.9 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।</p>
<p>भारत में जून में सामान्य से 8.9 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई, जुलाई में 4.8 प्रतिशत, अगस्त में 5.2 प्रतिशत तथा सितंबर में 15.3 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।</p>
<p>मानसून कृषि के लिए महत्वपूर्ण है जो लगभग 42 प्रतिशत आबादी का समर्थन करती है और सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 प्रतिशत का योगदान देती है। यह पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को भी भरता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Oct 2025 15:52:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फडणवीस ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद किसानों को सहायता का दिया आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 24 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने बुधवार को बाढ़ एवं बारिश से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सरकार ने यहां दिवाली से पहले किसानों को सहायता देने का वादा किया।</p>
<p>उन्होंने नुकसान तथा जारी राहत प्रयासों के बारे में जानकारी प्राप्त की।</p>
<p>पश्चिमी महाराष्ट्र के सोलापुर जिले और मराठवाड़ा क्षेत्र के लातूर का दौरा करने वाले फडणवीस ने कहा कि सरकार मुआवजे के मानदंडों में ढील देगी तथा राज्य मंत्रिमंडल द्वारा 2,200 करोड़ रुपये से अधिक के राहत पैकेज को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है जबकि आवश्यकता पड़ने पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143253/fadnavis-assured-help-to-farmers-after-visiting-flood-affected-areas"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/devendra-fadnavis.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 24 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने बुधवार को बाढ़ एवं बारिश से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सरकार ने यहां दिवाली से पहले किसानों को सहायता देने का वादा किया।</p>
<p>उन्होंने नुकसान तथा जारी राहत प्रयासों के बारे में जानकारी प्राप्त की।</p>
<p>पश्चिमी महाराष्ट्र के सोलापुर जिले और मराठवाड़ा क्षेत्र के लातूर का दौरा करने वाले फडणवीस ने कहा कि सरकार मुआवजे के मानदंडों में ढील देगी तथा राज्य मंत्रिमंडल द्वारा 2,200 करोड़ रुपये से अधिक के राहत पैकेज को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है जबकि आवश्यकता पड़ने पर और सहायता दी जाएगी।</p>
<p>प्राधिकारियों ने बारिश से प्रभावित मराठवाड़ा में बचाव कार्य जारी रखा है। यहां राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और रक्षा बलों की टीम ने धाराशिव जिले में 50 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है जबकि नांदेड़ शहर के निचले इलाकों से सैकड़ों लोगों को निकाला कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।</p>
<p>सोलापुर में फडणवीस ने माधा तालुका के निमगांव और दरफाल सिना गांवों में हुए नुकसान का निरीक्षण किया। इन गांवों में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, कई पशुओं की मौत हो गई, घरों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है।</p>
<p>उन्होंने स्थानीय निवासियों से बातचीत की और उनसे धैर्य बनाए रखने का आग्रह किया तथा आश्वासन दिया कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।</p>
<p>उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार मुआवजे के मानदंडों में ढील देगी जबकि सूखा और अत्यधिक वर्षा की स्थिति में सहायता प्रदान करने के लिए अपनाए जाने वाले मानदंडों के तहत सहायता प्रदान करेगी।</p>
<p>बाद में फडणवीस ने औसा तालुका के बाढ़ प्रभावित गांव उजानी और मराठवाड़ा के लातूर जिले के औरद शाहजानी गांव का दौरा किया तथा प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
<p>उन्होंने किसानों से बातचीत भी की।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं पिछली बार सात साल पहले जलयुक्त शिवार (जल संरक्षण योजना) के काम के लिए गांव (उजानी) आया था। हम सभी मानदंडों को एक तरफ रखकर किसानों की मदद करेंगे। हम मदद प्रदान करने में उन मानदंडों का पालन करेंगे जो हम आमतौर पर सूखे के दौरान करते हैं। सरकार किसानों के साथ-साथ उन लोगों की भी मदद करेगी जिनके घरों को नुकसान पहुंचा है।’’</p>
<p>औराद शाहजानी में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लातूर जिले में कृषि भूमि जलमग्न हो गई है और भूमि कटाव हुआ है।</p>
<p>किसानों की मदद के लिए फडणवीस ने कहा कि सरकार बैंकों से कहेगी कि वे पुराने ऋणों के भुगतान पर जोर न दें क्योंकि किसान इस समय नुकसान का सामना कर रहे हैं।</p>
<p>उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठवाड़ा के धाराशिव जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया।</p>
<p>बाद में शिंदे ने पत्रकारों से कहा कि सरकार बाढ़ और हाल में हुई मूसलाधार बारिश के कारण नुकसान झेलने वाले किसानों की मदद करेगी।</p>
<p>दूसरे उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने सोलापुर जिले के करमाला तालुका का दौरा किया और किसानों तथा स्थानीय अधिकारियों से बातचीत की।</p>
<p>कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने छत्रपति संभाजीनगर में कहा कि सितंबर में हुई भारी बारिश से पिछली बारिश की तुलना में अधिक नुकसान हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 21:13:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में मानसून मेहरबान, जुलाई में 77 प्रतिशत अधिक बारिश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर, एक अगस्त (भाषा) राजस्थान में इस साल मानसून मेहरबान है और लगभग पूरे राज्य में अच्छी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई माह में राज्य में औसत से 77 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।</p>
<p>मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार राजस्थान में जुलाई माह के दौरान 285 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह दीर्घकालीन औसत (एलपीए) से 77 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले राज्य में जुलाई माह के दौरान सर्वाधिक बारिश 1956 में 308 मिलीमीटर दर्ज की गई थी।</p>
<p>दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस साल सामान्य से सात दिन पहले 18 जून को राज्य में दस्तक दी थी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142295/monsoon-kind-in-rajasthan-77-percent-more-rainfall-in-july"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-05/9923_rain-rain-monsoon-umbrella-baby-water-drop.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर, एक अगस्त (भाषा) राजस्थान में इस साल मानसून मेहरबान है और लगभग पूरे राज्य में अच्छी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई माह में राज्य में औसत से 77 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।</p>
<p>मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार राजस्थान में जुलाई माह के दौरान 285 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह दीर्घकालीन औसत (एलपीए) से 77 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले राज्य में जुलाई माह के दौरान सर्वाधिक बारिश 1956 में 308 मिलीमीटर दर्ज की गई थी।</p>
<p>दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस साल सामान्य से सात दिन पहले 18 जून को राज्य में दस्तक दी थी। उसके बाद से ही राज्य में दो तीन दौर में अच्छी बारिश हो चुकी है।</p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार अगस्त महीने में राज्य के दक्षिणी व दक्षिण पश्चिमी भागों में सामान्य से कम बारिश होने तथा शेष अधिकांश भागों में सामान्य बारिश होने की संभावना है।</p>
<p>हालांकि आज शुक्रवार को शेखावाटी क्षेत्र व बीकानेर संभाग में कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं शेष अधिकांश भागों में भारी बारिश से राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p>दो अगस्त को राज्य के अधिकांश भागों में भारी बारिश से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, उत्तर-पूर्वी राजस्थान के भरतपुर व जयपुर संभाग के कुछ भागों में 3 से 6 अगस्त के दौरान मध्यम से भारी बारिश होगी।</p>
<p>शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे तक के चौबीस घंटे में लगभग पूरे राज्य में बारिश हुई। कई जगह भारी से अति भारी बारिश भी दर्ज की गई। सबसे अधिक 185.0 मिलीमीटर वर्षा तारानगर (चूरू) में हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/142295/monsoon-kind-in-rajasthan-77-percent-more-rainfall-in-july</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Aug 2025 14:35:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सामान्य से अधिक मानसून के चलते जून में ऊर्जा की मांग 1.9 प्रतिशत कम हुई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 09 जुलाई (वेब वार्ता)। भारत में बिजली की मांग जून में सालाना आधार पर 1.9 प्रतिशत घटकर 150 अरब यूनिट (बीयू) रह गई, यह लगातार दूसरा महीना है, जब बिजली की मांग में कमी देखने को मिली है।</p>
<p>इसकी वजह सामान्य से अधिक मानसूनी वर्षा के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान कम होना है। यह जानकारी क्रिसिल द्वारा बुधवार को जारी की गई रिपोर्ट में दी गई।</p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में 1 से 25 जून के बीच लंबी अवधि के औसत की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। पिछले मानसून में इसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141810/energy-demand-decreased-by-19-percent-in-june-due-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/electricity.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 09 जुलाई (वेब वार्ता)। भारत में बिजली की मांग जून में सालाना आधार पर 1.9 प्रतिशत घटकर 150 अरब यूनिट (बीयू) रह गई, यह लगातार दूसरा महीना है, जब बिजली की मांग में कमी देखने को मिली है।</p>
<p>इसकी वजह सामान्य से अधिक मानसूनी वर्षा के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान कम होना है। यह जानकारी क्रिसिल द्वारा बुधवार को जारी की गई रिपोर्ट में दी गई।</p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में 1 से 25 जून के बीच लंबी अवधि के औसत की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। पिछले मानसून में इसी अवधि में 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, रियल-टाइम मार्केट (आरटीएम) में एवरेज मार्केट क्लियरिंग प्राइस (एमसीपी) जून में 26 प्रतिशत घटकर 3.73 रुपए प्रति यूनिट रह गया, जो कम बिजली की आवश्यकता और पर्याप्त उपलब्धता को दर्शाता है। मांग की कमी के चलते जून में बिजली उत्पादन भी 0.8 प्रतिशत कम होकर 161 बीयू हो गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी क्षेत्र में बिजली की मांग में सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि जून 2024 में इसमें 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया, “उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में वर्षा सामान्य से 37 प्रतिशत अधिक थी, जबकि जून 2024 में लू चली थी और वर्षा सामान्य से 33 प्रतिशत कम थी।”</p>
<p>हालांकि, दक्षिणी क्षेत्र में बिजली की मांग में पिछले वर्ष की तुलना में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो इस जून में दक्षिणी प्रायद्वीप में 5 प्रतिशत की वर्षा की कमी के अनुरूप है।</p>
<p>इस वर्ष, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने सामान्य तिथि 8 जुलाई के बजाय 29 जून तक पूरे देश को कवर कर लिया था। उन्होंने कहा, “हालांकि बारिश ने बिजली की मांग में वृद्धि को सीमित कर दिया, लेकिन विनिर्माण गतिविधि ने समर्थन प्रदान किया हैं।”</p>
<p>भारत में बिजली उत्पादन के लिए कोयला अभी भी मुख्य ईंधन है। 30 जून तक, ताप विद्युत संयंत्रों के पास 62 मिलियन टन (एमटी) कोयले का भंडार था, जो अप्रैल 2021 के बाद का उच्चतम स्तर है। एक साल पहले यह भंडार 47 मिलियन टन था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jul 2025 21:10:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानसून ने पकड़ा जोर, देशभर में अगले 5 दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 23 जून (वेब वार्ता)। देशभर में मानसून ने जोर पकड़ लिया है। कई हिस्सों में हुई बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया है। मौसम विभाग ने 23 से 27 जून तक के लिए सम्पूर्ण भारत के मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें कई जगहों पर भारी तो कहीं अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। </p>
<p>भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 25 जून के बाद से उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141508/monsoon-caught-up-warning-of-heavy-rain-for-the-next"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/4769_monsoon.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 23 जून (वेब वार्ता)। देशभर में मानसून ने जोर पकड़ लिया है। कई हिस्सों में हुई बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया है। मौसम विभाग ने 23 से 27 जून तक के लिए सम्पूर्ण भारत के मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें कई जगहों पर भारी तो कहीं अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। </p>
<p>भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 25 जून के बाद से उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश के आसार हैं। वहीं, 23 और 24 जून को पश्चिम मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश यानी 20 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा हो सकती है।</p>
<p>मध्य और पूर्वी भारत की बात करें तो 23 से 27 जून के बीच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के अधिकांश हिस्सों में तेज़ बारिश की संभावना जताई गई है। बिहार में 23 और 24 जून को, ओडिशा में 25 और 26 को, जबकि झारखंड में 26 जून को भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही विदर्भ में 25 और 26 जून को बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस पूरे क्षेत्र में गरज, बिजली और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका भी जताई गई है।</p>
<p>पश्चिम भारत में भी मानसून ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। 23 से 29 जून के बीच कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात और मराठवाड़ा में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। कोंकण और गोवा में 23 और 24 जून को बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि गुजरात राज्य में भी 23 जून को तीव्र वर्षा की चेतावनी दी गई है।</p>
<p>पूर्वोत्तर भारत में मानसून की सक्रियता बनी हुई है। 23 जून को असम, मेघालय और नगालैंड में भारी बारिश हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश में 23 और 24 जून को तेज़ वर्षा की चेतावनी है। अगले सात दिनों तक इस पूरे क्षेत्र में गरज, बिजली और भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी।</p>
<p>दक्षिण भारत की बात करें तो 23 से 27 जून के बीच केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और लक्षद्वीप में गरज-चमक और 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है। विशेष रूप से केरल, माहे और तटीय कर्नाटक में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jun 2025 21:24:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेंगलुरु में जलभराव और यातायात बाधित, आईएमडी ने फिर जारी किया ‘यलो अलर्ट’</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बेंगलुरु, 19 मई (वेब वार्ता)। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के बेंगलुरु केंद्र के निदेशक एन. पुवियारसु ने कहा कि बेंगलुरु सहित कर्नाटक के कुछ इलाकों के लिए 18 मई को जारी किया गया ‘यलो अलर्ट’ सोमवार और मंगलवार के लिए भी प्रभावी रहेगा। निदेशक ने कहा कि विभाग वायु परिसंचरण की वर्तमान स्थिति का अध्ययन कर रहा है और बाद में मौसम की अद्यतन जानाकारी जारी करेगा।</p>
<p>पुवियारासु ने कहा, ‘‘चक्रवाती हवाओं की वर्तमान स्थिति के अनुसार, कर्नाटक में, विशेषकर तटीय भागों में भारी वर्षा होगी। अगले दो दिनों तक बेंगलुरू में भी भारी बारिश होने की संभावना है।’’</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140853/waterlogging-and-traffic-disrupted-imd-again-released-yellow-alert-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/8510_monsoon.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु, 19 मई (वेब वार्ता)। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के बेंगलुरु केंद्र के निदेशक एन. पुवियारसु ने कहा कि बेंगलुरु सहित कर्नाटक के कुछ इलाकों के लिए 18 मई को जारी किया गया ‘यलो अलर्ट’ सोमवार और मंगलवार के लिए भी प्रभावी रहेगा। निदेशक ने कहा कि विभाग वायु परिसंचरण की वर्तमान स्थिति का अध्ययन कर रहा है और बाद में मौसम की अद्यतन जानाकारी जारी करेगा।</p>
<p>पुवियारासु ने कहा, ‘‘चक्रवाती हवाओं की वर्तमान स्थिति के अनुसार, कर्नाटक में, विशेषकर तटीय भागों में भारी वर्षा होगी। अगले दो दिनों तक बेंगलुरू में भी भारी बारिश होने की संभावना है।’’ बेंगलुरू में रविवार को भारी बारिश हुई, जिसके कारण कई निचले इलाके जलमग्न हो गए। आईएमडी ने चेतावनी दी है कि ‘यलो अलर्ट’ के बीच कुछ क्षेत्रों में अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है, यातायात में मामूली बाधा आ सकती है और कमजोर पेड़ एवं शाखाएं उखड़ सकती हैं।</p>
<p>मौसम विभाग देश में मौसम संबंधी अलर्ट जारी करने के लिए चार रंगों का उपयोग करता है। ये रंग और इनके संदेश…. ग्रीन (किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं), येलो (नजर रखें और निगरानी करते रहें), ऑरेंज (तैयार रहें) और रेड (कार्रवाई/सहायता की जरूरत) हैं। आईएमडी ने रविवार को बेंगलुरु सहित कर्नाटक के 23 जिलों में बृहस्पतिवार तक भारी बारिश को लेकर ‘यलो अलर्ट’ जारी किया।</p>
<p>अलर्ट के तहत गरज के साथ मध्यम से भारी बारिश होन, बिजली चमकने और 50 से 60 किमी प्रतिघंटा की गति से तेज़ हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। पूरे सप्ताह बादलों की गरज के साथ तेज बारिश के आसार हैं। प्रभावित जिलों में बेंगलुरु शहरी, बेंगलुरु ग्रामीण, कोलार, चिक्कबल्लापुरा, तुमकुरु, मांड्या, मैसूरु, हसन, कोडागु, बेलगावी, बीदर, रायचूर, यादगीर, दावणगेरे और चित्रदुर्ग शामिल हैं।</p>
<p>आईएमडी द्वारा आज सुबह जारी अलर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के अलावा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों पर ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण के वजह से मौसम में यह परिवर्तन हुआ है। इसके साथ ही तेलंगाना से उत्तरी तमिलनाडु तक कम दबाव वाली पट्टी बनी हुई है, जो महत्वपूर्ण नमी खींच रही है और पूरे दक्षिण भारत में तेज बारिश की वजह भी यही है। आईएमडी बुलेटिन के अनुसार, सिर्फ बेंगलुरु शहर में पिछले 24 घंटों में 103 मिलीमीटर बारिश हुई।</p>
<p>बेंगलुरू के होरमावु में साई लेआउट अब तक सबसे ज़्यादा बारिश से प्रभावित इलाकों में से एक है। बरसात से पहले हुई बारिश के कारण लेआउट में चार से पांच फुट पानी भर गया। मीडिया में आई कुछ खबरों के अनुसार, लोगों ने जाम हुई नालियों को जलजमाव के लिए जिम्मेदार ठहराया और दावा किया है कि अधिकारियों से बार-बार शिकायत करने के बावजूद नालियों की सफाई नहीं की गई।</p>
<p>टेनरी रोड स्थित एनसी कॉलोनी में पानी लोगों के घरों में भी घुस गया। हालांकि इससे किसी के घायल होने की खबर नहीं है। जयनगर में भारी बारिश के कारण एक पेड़ उखड़ कर वहां खड़ी कार और एक जीप पर गिर गया, जिससे वे क्षतिग्रस्त हो गईं। जलजमाव की वजह से कुछ सड़कों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 16:20:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस, थोड़ी सी और सहन करनी है गर्मी; इस बार मानसून शायद जल्दी आ जाए!</title>
                                    <description><![CDATA[इस साल सामान्य से 4 दिन पहले आएगा मानसून]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80644/just-have-to-bear-a-little-more-heat-this-time-the-monsoon-may-come-early"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-05/9502_rain-monsoon-boy-umbrella.jpg" alt=""></a><br /><div>एक तरफ देश में भीषण गर्मी पड़ रही है। वहीं, मौसम विभाग ने मानसून का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग ने इस साल मानसून के जल्दी ही आने की संभावना है। मानसून 15 मई तक अंडमान-निकोबार और 26 मई को केरल पहुंचेगा। इस साल सामान्य से 4 दिन पहले मानसून आएगा।</div><div>आपको बता दें, देश के 70 फीसदी हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मानसून से बारिश होती है। देश के लगभग 40 प्रतिशत किसान अपनी फसलों के लिए वर्षा पर निर्भर हैं। केरल से मानसून शुरू हो चुका है और पूरे देश में फैल रहा है। देश में पिछले 15 दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। लेकिन इस साल की शुरुआत में मानसून लोगों को गर्मी से निजात दिलाएगा। अंडमान द्वीप समूह में 14 से 16 मई के बीच पहली बारिश का अनुमान है। वहीं केरल में भी इस बार मानसून सामान्य से 4 दिन पहले आएगा। मानसून आमतौर पर 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है। लेकिन इस साल मौसम विभाग का कहना है कि अगले पांच दिनों तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।</div><div>उल्लेखनीय है कि चक्रवात आसनी के कारण उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में मौसम बदल गया है। आईएमडी ने गुरुवार को उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने कहा कि अगले 24 घंटों के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश में छिटपुट बौछारें पड़ने की संभावना है। उड़ीसा के कुछ हिस्सों में गुरुवार सुबह से शुक्रवार सुबह तक गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80644/just-have-to-bear-a-little-more-heat-this-time-the-monsoon-may-come-early</link>
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                <pubDate>Fri, 13 May 2022 14:29:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना से हटकर एक आशावादी खबर; इस बार देश में अच्छा रहेगा मॉनसून</title>
                                    <description><![CDATA[103 प्रतिशत रहेगा बारिश का ज़ोर, खेती के अनुसार रहेगा मॉनसून]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80928/an-optimistic-news-out-of-corona-this-time-the-monsoon-will-be-good-in-the-country"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/6316_rain-forest-monsoon-trees-park.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश भर में जहां कोरोना के संक्रमण का खतरा हर तरफ छाया हुआ है। इस बीच में हवामान एजंसी द्वारा एक अच्छी खबर लोगों के साथ साझा की है, जिसके अनुसार इस बार मॉनसून का सीजन नॉर्मल रहेगा। हवामान एजंसी के अनुसार, पिछले साले के मुक़ाबले इस बार बारिश 103 प्रतिशत जितनी रहेगी। </span><br /></div><div>निजी हवामान एजंसी स्कायमेट द्वारा बताए गए वेधर रिपोर्ट में कहा गया की साल 2021 का मॉनसून काफी अच्छा रहेगा। एजंसी की धारणाओं के अनुसार, इस साल देश में जून, जुलाई, ऑगस्ट और सितंबर महीने में पिछले साले के मुक़ाबले अच्छी बारिश होगी। स्कायमेट के अनुसार, उत्तर भारत के मैदानी इलाके में और पूर्व भारत के इलाकों में कम बारिश होगी, हालांकि जून तथा सितंबर के महीने में देश के अधिकतर इलाकों में भारी बारिश होगी। </div><div>हवामान विभाग के सूत्रों का कहना है की सामान्य तौर पर देश में पिछले कुछ सीजन से मॉनसून के दौरान बारिश का ज़ोर 96 प्रतिशत से 104 प्रतिशत रहा है। बता दे की भारत में सबसे पहले केरल राज्य में बारिश की शुरुआत होती है, जिसके बाद वह दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रवेश करता है और अंत में राजस्थान होकर निकल जाता है। स्कायमेट के अनुसार, पिछले साल से ही प्रशांत महासागर में ला-नीना की स्थिति मौजूद है। मॉनसून के मध्य तक प्रशांत महासागर के मध्यभागो में समंदर की सतह का तापमान कम होना शुरू होगा। एजंसी के अनुसार, इस बार बारिश खेती के लायक रहेगा। </div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Apr 2021 19:03:59 +0530</pubDate>
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