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                <title>Scotland - Loktej</title>
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                <description>Scotland RSS Feed</description>
                
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                <title>स्कॉटलैंड में भारतीय मूल का डॉक्टर दोषी पाया गया; महिलाओं की छेड़खानी करते-करते इलाज करता था!</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टर ने बताया इन सबको अपने परिक्षण का हिस्सा बताया, कहा भारत में सीखा ये सब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80605/indian-origin-doctor-found-guilty-in-scotland-used-to-treat-women-while-molesting-them"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/violent-woman-man-hand-beat-child-slap-crime-rape.jpg" alt=""></a><br />                                        <div>दुनिया में कुछ अपराधिक मामले ऐसे है जो जब तक सामने नहीं आते उन पर विश्वास कर पाना असंभव होता है. इन अजीबोगरीब चीजें पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। ऐसा ही एक मामला स्कॉटलैंड से सामने आया है जहाँ 72 वर्षीय भारतीय मूल के प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर को गुरुवार को 48 महिला मरीजों का 35 साल तक यौन शोषण करने का दोषी पाया गया, जबकि हजारों महिलाओं को हर दिन शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार होना पड़ा। जनरल प्रैक्टिशनर कृष्णा सिंह पर चुंबन, शरीर के अंगों को गलत तरीके से छूने, गलत तरीके से जांच करने और गंदी बातें करने का आरोप है। हालांकि, उन्होंने ग्लासगो उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान आरोपों से इनकार किया।</div><div>डॉक्टर ने अपने बचाव में कहा कि मरीज जिन आरोपों के बारे में बात कर रहे थे, वे कुछ जांच थे, जो मुझे भारत में चिकित्सा प्रशिक्षण के दौरान सिखाया गया था, इसलिए मरीजों के आरोप झूठे हैं। पीड़िता की वकील एंजेला ग्रे ने अदालत को बताया कि डॉ. सिंह नियमित रूप से महिलाओं का यौन उत्पीड़न करते हैं। यौन उत्पीड़न उनके कामकाजी जीवन का एक हिस्सा था। कभी-कभी वह किसी और वजह से महिला मरीजों का खुलेआम यौन शोषण करता था। निचली अदालत अब मामले की सुनवाई अगले महीने करेगी। हालांकि सुनवाई के दौरान जज ने दोषी डॉ. सिंह को पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत दी गई है। गौरतलब है कि डॉ. कृष्णा सिंह को समुदाय के एक सम्मानित सदस्य के रूप में माना जाता था और उन्हें चिकित्सा सेवाओं में उनके योगदान के लिए रॉयल मेंबर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (एमबीई) से सम्मानित किया गया था।</div><div>दरअसल 2018 में एक महिला ने डॉ. सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद उनके व्यवहार की जांच शुरू की गई थी. इसके बाद, डॉक्टर को 54 ऐसे मामलों में दोषी ठहराया गया, जिनमें मुख्य रूप से कई सेक्स और अश्लील प्रयास शामिल थे। हालांकि, उनके खिलाफ कुछ आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।</div>                                                                                                                ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Apr 2022 13:50:56 +0530</pubDate>
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                <title>एक्सरे रिपोर्ट बताएगी कोरोना है या नहीं!</title>
                                    <description><![CDATA[वेस्ट स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने खोजा नया तरीका, एक्स-रे का उपयोग कर पता कर सकेंगे कोरोना का संक्रमण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80467/x-ray-report-will-tell-whether-corona-is-there-or-not"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/2332_x-ray.jpg" alt=""></a><br /><div>कोरोना के आने के साथ ही दुनिया भर के वैज्ञानिक और डॉक्टर्स इस बीमारी का पता लगाने और इसका इलाज खोजने में लग गये। बीते दो सालों में कोरोना को पहचानने के कई तरीकों का इजाद हो चुका है। अभी भी डॉक्टर्स और वैज्ञानिक मानव शरीर में रहे कोरोना को पहचानने के आसान और प्रभावी तरीकों को ढूंढने में लगे हुए है। इसी बीच स्कॉटलैंड में वैज्ञानिकों के एक समूह ने किसी व्यक्ति के शरीर में रहे कोरोना वायरस रोग संक्रमण की उपस्थिति का पता लगाने का एक अनोखा तरीका खोज निकाला है। वैज्ञानिक इसके लिए एक्स-रे का उपयोग कर रहे हैं। इस परीक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई किसी व्यक्ति के अंदर रहे वायरस की उपस्थिति की जानकारी देता है।</div><div>आपको बता दें कि ये परिक्षण वेस्ट स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय (यूडब्ल्यूएस) के वैज्ञानिकों ने किया है और उनका दावा है कि यह 98 प्रतिशत प्रभावी है। इस परिक्षण को पीसीआर परीक्षण से तेज और अधिक प्रभावशाली बताया है। यूडब्ल्यूएस में तीन-व्यक्ति टीम का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर नईम रमजान ने कहा, "लंबे समय से एक त्वरित और विश्वसनीय उपकरण की आवश्यकता थी जो कोविड-19 का पता लगा सके, और यह ओमिक्रॉन वेरिएंट के आने के साथ और भी सच हो गया है।"</div><div>इस परिक्षण का शोध करने वाले यूडब्ल्यूएस के शोधकर्ताओं के अनुसार इस नई तकनीक स्कैन की तुलना लगभग 3,000 छवियों के डेटाबेस से करने के लिए एक्स-रे तकनीक का उपयोग करती है, जो कोविड -19 के रोगियों, स्वस्थ व्यक्तियों और वायरल निमोनिया से संबंधित हैं। इसमें डीप कन्वेन्शनल न्यूरल नेटवर्क के रूप में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रक्रिया दृश्य इमेजरी का विश्लेषण करने और निदान करने के लिए एक एल्गोरिथ्म का उपयोग करता है। यूडब्ल्यूएस के वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को 98 प्रतिशत से अधिक सटीक पाया हुई। हालांकि परिक्षण करने वाले वैज्ञानिकों के समूह का कहना है कि संक्रमण के शुरुआती चरणों के दौरान एक्स-रे में कोविड-19 लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं, इसलिए यह पीसीआर परीक्षणों को पूरी तरह से बदल नहीं सकता है।</div><div>आपको बता दें कि प्रोफेसर रमज़ान ने कहा, "वायरस के गंभीर मामलों का निदान करते समय यह महत्वपूर्ण और संभावित रूप से जीवन रक्षक साबित हो सकता है, यह निर्धारित करने में मदद करता है कि किस उपचार की आवश्यकता हो सकती है।" अब यूडब्ल्यूएस में रिसर्च, इनोवेशन एंड एंगेजमेंट के वाइस प्रिंसिपल प्रोफेसर मिलन राडोसावलजेविक और टीम के एक अन्य सदस्य ने कहा कि वे अब अध्ययन का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jan 2022 14:48:27 +0530</pubDate>
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