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                <description>Agriculture RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसानों को कोई नुकसान नहीं : शिवराज सिंह चौहान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल, , 08 फरवरी (वेब वार्ता)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते का ढांचा भारतीय किसानों के हितों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस समझौते में अमेरिका ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाकर शून्य कर दिया है, जबकि भारत ने अपने किसानों और कृषि क्षेत्र की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की है।</p>
<p>भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने साफ कहा कि इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145486/there-is-no-harm-to-farmers-due-to-india-us-trade"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/shivraj-singh-chauhan.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल, , 08 फरवरी (वेब वार्ता)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते का ढांचा भारतीय किसानों के हितों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस समझौते में अमेरिका ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाकर शून्य कर दिया है, जबकि भारत ने अपने किसानों और कृषि क्षेत्र की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की है।</p>
<p>भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने साफ कहा कि इस डील के तहत किसी भी प्रमुख फसल, फल, डेयरी उत्पाद या मसाले को अमेरिकी आयात के लिए नहीं खोला गया है। यानी भारत के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों पर कोई समझौता नहीं किया गया है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर औसतन टैरिफ घटकर 8 प्रतिशत रह गया है। वहीं अमेरिका का दावा है कि इस समझौते से उसे भारत में अपने कृषि उत्पादों के निर्यात में मदद मिलेगी, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने दो टूक कहा कि भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों को कोई विशेष रियायत नहीं दी है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह देश को झुकने नहीं देंगे और किसानों के हितों को नुकसान नहीं होने देंगे। इस व्यापार समझौते में इन दोनों बातों का पूरा ध्यान रखा गया है। अगर हम कृषि और कृषि उत्पादों को देखें तो ऐसा कोई भी उत्पाद शामिल नहीं किया गया है जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो।”</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने विस्तार से उन उत्पादों का जिक्र किया, जिन पर किसी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, अनाज, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, एथनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है। इसके अलावा दूध, पाउडर, क्रीम, दही, छाछ, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर और चीज जैसे किसी भी डेयरी उत्पाद का आयात भारत में नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय मसाले भी पूरी तरह सुरक्षित हैं।</p>
<p>कृषि मंत्री ने बताया कि कई भारतीय कृषि उत्पाद अब अमेरिका में शून्य शुल्क पर निर्यात किए जा रहे हैं, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में ऐसी कोई छूट नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया है, जिससे भारत के निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिला है।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि भारत के मसाला निर्यात में 88 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और भारतीय मसाले व मसाला उत्पाद दुनिया के करीब 200 देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। इससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। टेक्सटाइल सेक्टर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का टैरिफ प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में काफी कम, यानी 8 प्रतिशत है। इस समझौते से महिला स्वयं सहायता समूहों की आय और जीवन स्तर में भी सुधार होगा।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब तक अमेरिका सहित कुल नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए जा चुके हैं और कई अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि ये सभी समझौते 2047 तक ‘विकसित भारत’ और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होंगे।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि अंतरिम समझौते के सफल होने पर अमेरिका कई वस्तुओं पर लगाए गए पारस्परिक टैरिफ हटा देगा। इनमें जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे तथा विमान के पुर्जे जैसे उत्पाद शामिल हैं। इससे भारत के उद्योग और निर्यात को और मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 19:53:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उत्तर प्रदेश : गंगा ही नहीं, स्थानीय नदियों के किनारे भी तय दायरे में होगी प्राकृतिक खेती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लखनऊ, 01 मार्च (वेब वार्ता)। जन, जमीन और जल के लिए संजीवनी है रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती। इन सबका हित, खेती बाड़ी के स्थाई और टिकाऊ विकास पहले कार्यकाल से ही योगी सरकार की प्राथमिकता रही है। सरकार इसे लगातार विस्तार देने के साथ इसके लिए भरपूर पैसा और किसानों को प्रोत्साहन भी दे रही है।</p>
<p>इसके लिए बीज से लेकर बाजार तक सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के साथ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद हर संभव मंच से किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करते हैं।</p>
<p>इसी क्रम में सरकार ने तय किया है कि अब सिर्फ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138750/natural-farming-will-be-in-the-prescribed-scope-on-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/uttar-pradesh-chief-minister-yogi-adityanath-1.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ, 01 मार्च (वेब वार्ता)। जन, जमीन और जल के लिए संजीवनी है रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती। इन सबका हित, खेती बाड़ी के स्थाई और टिकाऊ विकास पहले कार्यकाल से ही योगी सरकार की प्राथमिकता रही है। सरकार इसे लगातार विस्तार देने के साथ इसके लिए भरपूर पैसा और किसानों को प्रोत्साहन भी दे रही है।</p>
<p>इसके लिए बीज से लेकर बाजार तक सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के साथ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद हर संभव मंच से किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करते हैं।</p>
<p>इसी क्रम में सरकार ने तय किया है कि अब सिर्फ गंगा ही नहीं, स्थानीय नदियों के दोनों किनारे पर 5/5 किलोमीटर के दायरे में सिर्फ प्राकृतिक खेती होगी। इस बाबत 1886 क्लस्टर बनाए जाएंगे। सरकार इस पर 270.62 करोड़ रुपए खर्च करेगी।</p>
<p>हाल में हुई राज्य स्तरीय कृषि समिति की बैठक में इस कार्ययोजना को मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके पूर्व कैबिनेट में भी प्राकृतिक खेती और खेत तालाब योजना के लिए 1191.51 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली थी। हाल ही में योगी सरकार की ओर से प्रस्तुत बजट में भी नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए 124 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।</p>
<p>सरकार की योजना है कि प्रदेश में गंगा सहित सभी स्थानीय नदियों, जिन जिलों से गुजरती हैं, उनके दोनों किनारों पर एक दायरे में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन दिया जाए। ऐसी खेती जिसमें रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों की जगह उपज बढ़ाने और फसलों के सामयिक संरक्षण के लिए पूरी तरह जैविक उत्पादों का प्रयोग हो ताकि लीचिंग रिसाव के जरिए रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों का जहर इन नदियों में घुलकर उन्हें प्रदूषित न कर सके।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि गंगा के तटवर्ती 27 जनपदों में पहले से ही नमामि गंगे योजना चलाई जा रही है, जिसके अंतर्गत रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। अद्यतन आंकड़ों के अनुसार गंगा के किनारे के 1000 से अधिक गांवों में प्राकृतिक खेती हो रही है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 54 जनपदों में परंपरागत कृषि विकास योजना संचालित की जा रही है। सरकार की मंशा निराश्रित गोवंश के नाते सबसे प्रभावित बुंदेलखंड को प्राकृतिक खेती के लिहाज से उत्तर प्रदेश का हब बनाना है।</p>
<p>योगी सरकार-1 से ही यह सिलसिला शुरू हो चुका है। जिन करीब 5000 क्लस्टर्स में 18000 से अधिक किसान लगभग 10 हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, उनमें नमामि गंगा योजना के तहत करीब 3300 क्लस्टर्स में लगभग 6500 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती हो रही है। इस खेती से जुड़े किसानों की संख्या एक लाख से अधिक है। इस तरह देखा जाए तो जैविक खेती का सर्वाधिक रकबा गंगा के मैदानी इलाके का ही है।</p>
<p>इंडो-गंगेटिक मैदान का यह इलाका दुनिया की सबसे उर्वर भूमि में शुमार होता है। इसी नाते ऑर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से नवंबर 2017 में इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट ग्रेटर नोएडा में आयोजित जैविक कृषि कुंभ में विशेषज्ञों ने यह संस्तुति की थी कि गंगा के मैदानी इलाकों को जैविक खेती के लिए आरक्षित किया जाए। चूंकि हर साल आने वाली बाढ़ के कारण इस क्षेत्र की मिट्टी बदलकर उर्वर हो जाती है, इस नाते पूरे क्षेत्र में जैविक खेती की बहुत संभावना है। यही वजह है कि योगी सरकार-2 में गंगा के किनारे के सभी जिलों में जैविक खेती को विस्तार दिया गया। अब सरकार इसे और विस्तार देने जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 14:53:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल पर विचार कर रही है महाराष्ट्र सरकार: अजित पवार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, तीन फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की लागत कम करने के लिए प्रायोगिक आधार पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल पर विचार कर रही है।</p>
<p>यहां एक समीक्षा बैठक के दौरान पवार ने राज्य कृषि विभाग को परियोजना की तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए सहकारिता विभाग के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया।</p>
<p>बैठक में राज्य के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे, कृषि राज्य मंत्री आशीष जायसवाल, सहकारिता राज्य मंत्री पंकज भोयर, अखिल भारतीय अंगूर उत्पादक संघ के अध्यक्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/129146/maharashtra-government-is-considering-the-use-of-ai-in-agriculture--ajit-pawar"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-06/plough-ox-farmer-field-agriculture-land.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, तीन फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की लागत कम करने के लिए प्रायोगिक आधार पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल पर विचार कर रही है।</p>
<p>यहां एक समीक्षा बैठक के दौरान पवार ने राज्य कृषि विभाग को परियोजना की तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए सहकारिता विभाग के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया।</p>
<p>बैठक में राज्य के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे, कृषि राज्य मंत्री आशीष जायसवाल, सहकारिता राज्य मंत्री पंकज भोयर, अखिल भारतीय अंगूर उत्पादक संघ के अध्यक्ष कैलास पाटिल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।</p>
<p>पवार ने कहा, ‘‘चूंकि फसलों की स्थिति, मृदा कार्बन स्तर और मृदा की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण कारकों की निगरानी एआई का उपयोग करके की जा सकती है, इसलिए हम उत्पादकता बढ़ाने और किसानों के लिए उत्पाद लागत को कम करने के लिए कृषि क्षेत्र में प्रयोगात्मक आधार पर इसका उपयोग कर सकते हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन किसानों के लिए व्यावहारिक और आर्थिक रूप से व्यवहारिक होना चाहिए।</p>
<p>उपमुख्यमंत्री पवार ने कहा, ‘‘एआई दुनिया भर के क्षेत्रों में क्रांति ला रहा है और कृषि को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। आने वाले वर्षों में, एआई किसानों के लिए अपरिहार्य होगा क्योंकि वे बदलते मौसम, बेमौसम बारिश, कीटों के हमले और श्रम की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि एआई उत्पादन लागत को कम करते हुए उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<p>पवार ने कहा, ‘‘हम मिट्टी में कार्बन के स्तर को मापने और कीटों, बीमारियों और यहां तक ​​कि खरपतवार के प्रकारों की पहचान करने में सक्षम होंगे, जिससे किसानों को उनकी फसलों और भूमि के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी। ये प्रगति अधिक सटीक खेती के तरीके और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेगी।’’</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि एआई के उपयोग से आपूर्ति श्रृंखला में अधिक दक्षता आएगी और कुल लागत में कमी आएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘कटाई की दक्षता में सुधार, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करने और रोग प्रबंधन को बढ़ाने से, एआई किसानों को श्रम और लागत बचाने में मदद करेगा। कृषि में एआई का एकीकरण केवल पैदावार में सुधार करने के बारे में नहीं है, बल्कि खेती के लिए अधिक टिकाऊ और लागत प्रभावी दृष्टिकोण सुनिश्चित करना भी है।’’</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/129146/maharashtra-government-is-considering-the-use-of-ai-in-agriculture--ajit-pawar</link>
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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 15:27:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट में छह नई योजनाओं की घोषणा के बाद कृषि शेयरों में सात प्रतिशत तक की तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आम बजट में कृषि क्षेत्र के लिए छह नयी योजनाओं की घोषणाओं और सब्सिडी वाले किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा को मौजूदा तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने के बाद शनिवार को कृषि से जुड़े शेयरों में सात प्रतिशत की तेजी आई।</p>
<p>इन योजनाओं से 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों को लाभ होगा।</p>
<p>बीएसई पर कावेरी सीड कंपनी का शेयर 6.99 प्रतिशत बढ़कर 962.25 रुपये पर बंद हुआ। पारादीप फॉस्फेट्स 3.41 प्रतिशत बढ़कर 116.65 रुपये पर, मंगलम सीड्स 3.23 प्रतिशत बढ़कर 214 रुपये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/128525/agricultural-stocks-rose-by-seven-percent-after-the-announcement-of-six-new-schemes-in-the-budget"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/6947_kisanbijali.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आम बजट में कृषि क्षेत्र के लिए छह नयी योजनाओं की घोषणाओं और सब्सिडी वाले किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा को मौजूदा तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने के बाद शनिवार को कृषि से जुड़े शेयरों में सात प्रतिशत की तेजी आई।</p>
<p>इन योजनाओं से 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों को लाभ होगा।</p>
<p>बीएसई पर कावेरी सीड कंपनी का शेयर 6.99 प्रतिशत बढ़कर 962.25 रुपये पर बंद हुआ। पारादीप फॉस्फेट्स 3.41 प्रतिशत बढ़कर 116.65 रुपये पर, मंगलम सीड्स 3.23 प्रतिशत बढ़कर 214 रुपये पर, नाथ बायो-जीन्स (इंडिया) 2.78 प्रतिशत बढ़कर 173.55 रुपये पर और बेयर क्रॉपसाइंस 0.55 प्रतिशत बढ़कर 5141.95 रुपये पर बंद हुआ।</p>
<p>इसके अलावा पीआई इंडस्ट्रीज का शेयर 0.34 प्रतिशत बढ़कर 3,494.25 रुपये पर और यूपीएल का शेयर 0.17 प्रतिशत बढ़कर 604.30 रुपये पर बंद हुआ।</p>
<p>दूसरी ओर, चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स 2.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 490.05 रुपये पर, धानुका एग्रीटेक 2.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,403.45 रुपये पर, टाटा केमिकल्स 2.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 964.45 रुपये पर और कोरोमंडल इंटरनेशनल 1.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,783.50 रुपये पर बंद हुआ।</p>
<p>बीएसई पर राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स का शेयर 1.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 161.05 रुपये पर और मेंगलोर केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स का शेयर 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 167.10 रुपये पर बंद हुआ।</p>
<p>बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 5.39 अंक या 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 77,505.96 अंक पर बंद हुआ।</p>
<p>बजट में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के मकसद से छह नई योजनाओं की घोषणा की गई तथा सब्सिडी वाले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से ऋण प्राप्त करने की सीमा को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया।</p>
<p>सीतारमण ने कृषि को ‘विकास का पहला इंजन’ बताया और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का प्रस्ताव किया। यह सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य कम उत्पादकता, कम उपज वाले क्षेत्र (जिन स्थानों पर दो या तीन की जगह कम या केवल एक ही फसल ली जाती हो) और ऋण लेने के औसत मापदंडों से कम ऋण लेने वाले 100 कृषि-जिलों को लक्षित करना है।</p>
<p>ग्रामीण बेरोजगारी को दूर करने के लिए सरकार एक व्यापक ‘ग्रामीण समृद्धि और मजबूती’ कार्यक्रम लागू करेगी।</p>
<p>दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए एक बड़े कदम के रूप में छह साल का मिशन अरहर, उड़द और मसूर उत्पादन को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगा।</p>
<p>बिहार के मखाना क्षेत्र के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में सुधार के लिए एक समर्पित मखाना बोर्ड की स्थापना की जाएगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/128525/agricultural-stocks-rose-by-seven-percent-after-the-announcement-of-six-new-schemes-in-the-budget</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 19:13:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र 3.5 से चार प्रतिशत की दर से बढ़ेगा : शिवराज सिंह चौहान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि देश के कृषि और संबद्ध क्षेत्र के चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 3.5-4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह 2023-24 में दर्ज 1.4 प्रतिशत की वृद्धि से उल्लेखनीय सुधार होगा।</p>
<p>सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर नए साल के संदेश में चौहान ने पिछले छह महीनों में लागू की गई विभिन्न ग्रामीण कल्याण पहल पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के विकास पथ पर विश्वास व्यक्त किया।</p>
<p>चौहान ने कहा, ‘‘नया साल अच्छी खबर लेकर आया है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/116743/agriculture-sector-will-grow-at-the-rate-of-3-5-to-4-percent-in-the-current-financial-year--shivraj-singh-chauhan"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/1945_farmer-agriculture-crop-field-village-saurashtra.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि देश के कृषि और संबद्ध क्षेत्र के चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 3.5-4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह 2023-24 में दर्ज 1.4 प्रतिशत की वृद्धि से उल्लेखनीय सुधार होगा।</p>
<p>सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर नए साल के संदेश में चौहान ने पिछले छह महीनों में लागू की गई विभिन्न ग्रामीण कल्याण पहल पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के विकास पथ पर विश्वास व्यक्त किया।</p>
<p>चौहान ने कहा, ‘‘नया साल अच्छी खबर लेकर आया है कि इस साल कृषि और संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 से चार प्रतिशत रहने की संभावना है।’’</p>
<p>मंत्री ने किसानों की उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए जारी प्रयासों पर जोर दिया और गरीबों के लिए आवास, गांव की सड़क संपर्क, कौशल विकास और ग्रामीण आजीविका में सुधार के उद्देश्य से लखपति दीदी अभियान सहित कई ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का उल्लेख किया।</p>
<p>उन्होंने ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jan 2025 19:11:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खुद को फसल सुरक्षा उत्पाद विक्रेता से व्यापक समाधान प्रदाता में बदल रही है यूपीएल-एसएएस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(लक्ष्मी देवी ऐरे)</p>
<p>नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) यूपीएल-सस्टेनेबल एग्रीसॉल्यूशंस (यूपीएल-एसएएस) भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण लेकर चल रही है।</p>
<p>कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आशीष डोभाल ने पीटीआई-भाषा के साथ विशेष बातचीत में कहा कि यूपीएल-एसएएस देश के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के सामने आने वाली जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रौद्योगिकी, डिजिटल नवोन्मेषण और एक समग्र रणनीति का इस्तेमाल कर रही है।</p>
<p>देश में 40 करोड़ एकड़ में खेती होती है, जिसमें 13 करोड़ किसान शामिल हैं। इनमें से 80-85 प्रतिशत छोटी जोत वाले किसान हैं। ऐसे में कंपनी खुद को फसल सुरक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/110469/upl-sas-is-transforming-itself-from-a-crop-protection-product-seller-to-a-comprehensive-solutions-provider"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-06/plough-ox-farmer-field-agriculture-land.jpg" alt=""></a><br /><p>(लक्ष्मी देवी ऐरे)</p>
<p>नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) यूपीएल-सस्टेनेबल एग्रीसॉल्यूशंस (यूपीएल-एसएएस) भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण लेकर चल रही है।</p>
<p>कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आशीष डोभाल ने पीटीआई-भाषा के साथ विशेष बातचीत में कहा कि यूपीएल-एसएएस देश के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के सामने आने वाली जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रौद्योगिकी, डिजिटल नवोन्मेषण और एक समग्र रणनीति का इस्तेमाल कर रही है।</p>
<p>देश में 40 करोड़ एकड़ में खेती होती है, जिसमें 13 करोड़ किसान शामिल हैं। इनमें से 80-85 प्रतिशत छोटी जोत वाले किसान हैं। ऐसे में कंपनी खुद को फसल सुरक्षा उत्पाद विक्रेता से एक व्यापक समाधान प्रदाता के रूप में बदल रही है।</p>
<p>भारतीय कृषि के जटिल परिदृश्य को रेखांकित करते हुए डोभाल ने बताया, ‘‘प्रत्येक राज्य की अपनी बारीकियां, फसल का तरीका और खेती की सांस्कृतिक स्थितियां हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि उद्योग चुनौतीपूर्ण दौर से उबर चुका है। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि उद्योग का मंदी का दौर पीछे छूट गया है।</p>
<p>यूपीएल लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी यूपीएल-एसएएस प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं के साथ अपने प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति को लागू कर रही है।</p>
<p>इन प्राथमिकताओं में उभरती हुई कीट समस्याओं के लिए फसल सुरक्षा समाधान विकसित करना, जलवायु-स्मार्ट प्रौद्योगिकियों का विस्तार करना, जैव कीटनाशकों और जैव कवकनाशियों में निवेश करना और कृषि मशीनीकरण का दोहन करना तथा सूक्ष्म-बाजार रणनीतियों के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा विश्लेषण का लाभ उठाना शामिल हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और कृषि में बहुत बदलाव आया है और चार साल पहले उपयोगी समाधान अगले चार वर्षों में उपयोगी नहीं रह सकते हैं....हमारा दृष्टिकोण फसल सुरक्षा समाधान बेचने से कहीं आगे जाता है।’’</p>
<p>डोभाल ने कहा, ‘‘हम किसानों की समस्याओं को सूक्ष्म स्तर पर हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी कृषि प्रौद्योगिकियों और फसल सुरक्षा समाधान में नवोन्मेषण को गति देने के लिए अबू धाबी निवेश प्राधिकरण (एडीआईए), ब्रुकफील्ड और टीपीजी से दो साल पहले प्राप्त 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर के निवेश का लाभ उठाएगी।</p>
<p>डोभाल ने इस बात पर जोर दिया कि यह निवेश अल्पकालिक लाभ के बारे में नहीं है। बल्कि इसका इस्तेमाल डेटा विश्लेषण और प्रौद्योगिकी नवोन्मेषण के माध्यम से कृषि की चुनौतियों को गहराई से समझने और उनका समाधान करने के लिए किया जाएगा।</p>
<p>इस निवेश को डोभाल ने डेटा, विश्लेषण और प्रौद्योगिकी इस्तेमाल के नवीनतम रुझानों में वैश्विक विशेषज्ञता लाने के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि हम मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन से प्रेरित कीट प्रकोप और पानी की कमी सहित उभरती हुई कृषि चुनौतियों को हल करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।</p>
<p>डोभाल ने कहा कि कंपनी का रणनीतिक रुख सटीक, स्थानीयकृत समाधान विकसित करने के लिए उन्नत विश्लेषण और कृत्रिम मेधा का लाभ उठाने का है। इस रणनीति में एक महत्वपूर्ण माध्यम डिजिटल मंच का इस्तेमाल है, जिसे डोभाल ने किसानों के लिए एक व्यापक समाधान के रूप में वर्णित किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हम एक बटन दबाकर फसल सलाह, बीमा और मशीन की जानकारी प्रदान कर सकते हैं। एक छोटे से भूमिधारक पारिस्थितिकी तंत्र में प्रौद्योगिकी आवश्यक हो जाती है। डिजिटल मंच अभूतपूर्व पहुंच प्रदान करता है, जो सातों दिन चौबीसों घंटे किसानों से प्रभावी रूप से जुड़ता है।’’</p>
<p>कंपनी के सीईओ ने कृषि समाधानो के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए रासायनिक और जैव-आधारित हस्तक्षेपों के बीच मिश्रित रणनीति की वकालत की।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हम पूरी तरह से रासायनिक या पूरी तरह से जैविक नहीं हो सकते...सही दृष्टिकोण एक मिश्रित रणनीति है जो पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए फसलों की रक्षा करती है।’’</p>
<p>कृषि को नया रूप देने में प्रमुख रुझानों को रेखांकित करते हुए डोभाल ने कहा कि पिछले साल की चुनौतियों की वजह से पूरे क्षेत्र ने नवोन्मेषण पर ध्यान दिया है। प्रमुख उभरते रुझानों में टिकाऊ खेती पर अधिक ध्यान, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों का विकास, भारत में दूसरी, तीसरी और चौथी श्रेणी के शहरों में आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के लिए नवीन समाधान तथा बाजार पहुंच में सुधार के लिए तकनीकी हस्तक्षेप शामिल है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले साल की चुनौतियों की वजह से अब कंपनियां अलग तरीके से सोचने लगी हैं। ‘‘हम कृषि की बुनियादी चुनौतियों से निपटने के लिए नवोन्मेषण की ‘लहर’ देख रहे हैं।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2024 11:36:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजब-गजब : कुछ इस तरह अब हवा में होगी आलू की खेती, जानिए पूरी कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[अफ्रीका से नौकरी छोड़कर यहां काम कर रहे डॉ राहुल की यह पहल उन्नत किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89352/strange-something-like-this-now-potato-farming-will-be-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/a20230130.jpg" alt=""></a><br /><p>अगर आपको खेती-बाड़ी का अनुभव है या सामान्य सी जानकारी है तो आप जानते होंगे की आलू कैसे पैदा होती है। जमीन के अंदर उगने वाली ये सब्जी अब हवा में उगेगी। भले ही सुनने में मजाक लग रहा हो पर उत्तर प्रदेश के फारूकाबाद में अब हवा में होगी आलू की खेती। फरूखाबाद से आलू की फसल उगा रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर है। किसानों को ऐसे आलू के बीज मिलेंगे, जिससे फसल हवा में खराब नहीं होगी। शृंगीरामपुर स्थित टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला में बीज आलू की ऐरोपोनिक विधि तैयार की जा रही है। एरोपोनिक विधि आलू के बीज तैयार करने की नवीनतम तकनीक है। यह बीज की फसल में रोग और रोग की संवेदनशीलता को बहुत कम कर देता है। इसके साथ आलू की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।</p>
<p><strong>अफ्रीका से नौकरी छोड़कर आये कृषि वैज्ञानिक डॉ राहुल पाल का प्रयोग</strong></p>
<p>आपको बता दें कि  श्रींगीरामपुर की प्रयोगशाला में कृषि वैज्ञानिक डॉ राहुल पाल अब बिना मिट्टी के एरोपोनिक विधि से आलू के बीज तैयार कर रहे हैं। अफ्रीका से नौकरी छोड़कर यहां काम कर रहे डॉ राहुल की यह पहल उन्नत किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक तकनीक से खेती करने वाले किसान अक्सर आलू में चेचक, घुघिया और अन्य बीमारियों से पीड़ित रहते हैं। रोग के कारण उपज कम होने से आलू किसानों को आर्थिक नुकसान होता है। हालाँकि, आलू की बीमारी का एक प्रमुख कारण प्रदूषण है</p>
<p><strong>एक पौधे की जड़ में 50 से 60 आलू के बीज होंगे</strong></p>
<p>डॉ राहुल पाल के सहयोगी नीरज शर्मा ने बताया कि ग्रोथ चेंबर में बॉक्स के अंदर जड़ें तीन फीट तक बढ़ती हैं। पत्तियाँ ऊपर खुली हवा में रहती हैं। एक पौधे की जड़ में 50 से 60 आलू के बीज पैदा हो जाते हैं। मिट्टी की कमी के कारण इसमें कवक, जीवाणु नहीं होते हैं। इस प्रकार रोगमुक्त बीज तैयार हो जाते हैं। बॉक्स के नीचे पाइपलाइन से जुड़े स्वचालित स्प्रिंकलर से पौधों को पोषक तत्व प्राप्त होते रहते हैं। फव्वारे से हर पांच मिनट में 30 सेकंड के लिए प्रोटीन, विटामिन, हार्मोन, सूक्ष्म पोषक तत्व आदि का घोल निकलता है। अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। जिले में करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती होती है।</p>
<p><strong>क्या है एरोपोनिक तकनीक जिससे हवा में होगी आलू की खेती</strong></p>
<p>एरोपोनिक ऐसी तकनीक है जिसमें पौधों को हवा में उगाया जाता है। एरोपोनिक तकनीक में नर्सरी में आलू के पौधे तैयार किए जाते हैं। रोपाई विशेष एरोपोनिक यूनिट में की जाती है। ये जमीन की सतह से ऊपर बनाई जाती है, जिसमें पानी और न्यूट्रिशन तत्वों की मदद से आलू उत्पादन लिया जाता है। पौधों की जड़ों का उपचार करते हैं, जिससे फंगस का खतरा न रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/89352/strange-something-like-this-now-potato-farming-will-be-in</link>
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                <pubDate>Mon, 30 Jan 2023 22:36:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानें किसान नेता राकेश ‌टिकैत किस ग्लोबल एवॉर्ड के लिये हुए नामित, बढ़ रही ख्याति</title>
                                    <description><![CDATA[ कृषि कानून बिल के खिलाफ शुरू किये आंदोलन को इतना लंबा चलाने और आंदोलन को जीवंत रखने की वजह से मिल रहा सम्मान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कृषि कानून की वापसी के साथ भारत में लंबे वक्त से चले आ रहे किसान आंदोलन अंत की ओर है। इस आंदोलन के मुख्य नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। ब्रिटेन के स्कवॉयर वाटरमेलन द्वारा दिए जाने वाले 21वीं सदी के आइकन अवार्ड-2021के लिए राकेश टिकैत को चुना गया है। टीवी 9 भारतवंश के अनुसार कृषि कानून बिल के खिलाफ शुरू किये आंदोलन को इतना लंबा चलाने और आंदोलन को जीवंत रखने की वजह से उन्हें इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। 10 दिसंबर को विजेताओं की घोषणा लंदन में की जाएगी। लंदन की स्क्वेयरड वाटरमेलन कंपनी दुनिया के लिए मिसाल बनने वाली शख्सियतों को हर साल आइकॉन अवॉर्ड देती है। इसी कड़ी में 2021 के अवॉर्ड के लिए नामांकन लिस्ट में किसान नेता राकेश टिकैत का नाम भी शामिल किया गया है।</div><div>राकेश टिकैत की बात करें तो राकेश महेंद्र सिंह टिकैत के दूसरे बेटे और नरेश टिकैत के भाई हैं। मुजफ्फरनगर जनपद के सिसौली गांव में 4 जून 1969 को जन्में राकेश टिकैत की पहचान ऐसे व्यवहारिक नेता की रही है जो धरना-प्रदर्शनों, आंदोलनों के साथ-साथ किसानों के व्यवहारिक हित की बात सरकार के सामने रखते रहे हैं। इस वक्त भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संगठन की कमान संभालने वाले राकेश ही हैं। वहीं इस संगठन की बात करें तो ये उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत समेत पूरे देश में फैला हुआ है। केंद्र के तीन कृषि कानूनों और अन्य मांगों को लेकर पिछले एक साल से किसान आंदोलन चल रहा है। जिस की अगवाई मुख्य रूप से राकेश टिकैत ने की।</div><div>वहीं कृषि कानून वापस लिए जाने के बाद लंदन की कंपनी ने अवार्ड के लिए राकेश टिकैत का नामांकन किया है। 10 दिसंबर को लंदन में ही विजेताओं की घोषणा की जाएगी। लंबा आंदोलन चलाने और आंदोलन को जीवंत रखने की वजह से टिकैत का चयन किया गया है। कंपनी की ओर से इससे पहले पार्श्व गायक सोनू निगम, शंकर महादेवन, फैशन के लिए राघवेंद्र राठौर, तकनीकि क्षेत्र के लिए धीरज मुखर्जी को यह अवार्ड मिल चुका है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80347/know-which-farmer-leader-rakesh-tikait-was-nominated-for-global-award-increasing-fame</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Dec 2021 22:26:35 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजकोट: खेतों में ये लगाकर इस किसान ने सुरक्षित किया अपना भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[खेतों में लगाया चंदन का पौधा, 120 रूपये के लागत से कमाने वाले हैं लाखों]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/87522/rajkot-by-planting-this-in-the-fields-this-farmer-has-secured-his-future"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/3664_1.png" alt=""></a><br /><div>गुजरात के किसान दिन-ब-दिन प्रगतिशील होते जा रहे हैं और कृषि में कुछ नया करके अधिक आय अर्जित करने का प्रयास कर रहे हैं। धोराजी के ऐसे ही एक किसान ने गुजरात में असंभव चंदन की खेती करके अपनी भविष्य की आय दर्ज की है और कुछ ही निवेश से लाखों का लाभ कमा लिया। राजकोट जिले के धोराजी के 55 वर्षीय किसान भगवानजीभाई चावड़िया अपनी खेती में कुछ अलग करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ समय पहले भगवानजीभाई को YouTube पर चंदन की खेती के बारे में पता चला और उन्हें अपने खेत में चंदन लगाने का विचार आया और इसके लिए उन्होंने शुरुआत की। उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में चंदन के पेड़ लगाए।</div><div>आज से चार साल पहले उन्होंने मात्र 120 रुपये में एक चंदन का पौधा खरीदा और अपने खेत में लगभग 600 पौधे लगाए और आज 4 साल बाद यह बहुत अच्छा और विकसित हो गया है। चंदन के पेड़ लगाने के फायदे बताते हुए भगवानजीभाई ने कहा कि एक बार चंदन के पेड़ लगाने के बाद उन्हें केवल 2 साल तक थोड़ी सी देखभाल की जरूरत होती है और उसके बाद उन्हें किसी जरूरी देखभाल की जरूरत नहीं होती है। एक बार जब यह एक पेड़ बन जाता है तो इसे तब तक देखभाल की आवश्यकता नहीं होती जब तक इसे काटा नहीं जाता है।</div><div>इधर-उधर निराई-गुड़ाई के अलावा कोई काम नहीं है। जब आय की बात आती है, भगवानजीभाई ने अपना भविष्य बहुत सुरक्षित कर लिया है, क्योंकि चंदन के पौधे की कीमत केवल 120 रुपये है और इसे लगाने के बाद 15 साल तक कोई रखरखाव नहीं होता है और 15 साल बाद एक पेड़ कम से कम 2 लाख रुपये का हो जाता है। अगर देखा जाए तो भगवानजीभाई बहुत कम प्रयास और निवेश से भविष्य में लाखों रुपये कमाएंगे। इसके साथ ही भगवानजीभाई अन्य किसानों को भी चंदन की खेती करने के लिए कहते हैं। सरकार भी किसानों को चंदन की खेती के लिए प्रोत्साहित करते हुए प्रति पेड़ 30 रुपये की सब्सिडी देती है।</div><div>कई किसान भवनजीभाई द्वारा की गई चंदन की खेती को देखने और इसके बारे में जानने के लिए आते हैं और भगवानजीभाई उन्हें इस मामले की सारी जानकारी देते हैं। सरकार की चंदन की खेती नीति से किसान प्रभावित हो रहे हैं और ऐसे में निकट भविष्य में सब्सिडी और चंदन की खेती बढ़ने की संभावना है। सोशल मीडिया पर तकनीक और सूचनाओं के प्रवाह से किसान भी नई जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और अपनी पारंपरिक खेती को छोड़कर दूसरी खेती पर जा रहे हैं। किसानों को अब उन्हें विकसित करने के लिए केवल समर्पण और कड़ी मेहनत की जरूरत है जबकि अन्य किसानों को भी भगवानजीभाई जैसे किसान से प्रेरणा लेने की जरूरत है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजकोट</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jul 2021 21:12:17 +0530</pubDate>
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