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                <description>Ujjain RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वर्ष 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले प्रदूषण से मुक्त होगी क्षिप्रा : मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इंदौर, 29 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि उज्जैन में वर्ष 2028 के दौरान लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले क्षिप्रा नदी को प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त किया जाएगा और इस विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान लाखों श्रद्धालु इसके शुद्ध जल में स्नान करेंगे।</p>
<p>सिंहस्थ कुंभ मेला भगवान शिव के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग वाली धार्मिक नगरी उज्जैन में हर 12 साल में क्षिप्रा नदी के तट पर लगता है।</p>
<p>यादव ने इंदौर जिले के चित्तौड़ा गांव में एक श्रीमद् भागवत कथा कार्यक्रम के समापन समारोह में कहा, ‘‘सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालु</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144907/kshipra-mohan-yadav-will-be-free-from-pollution-before-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-01/first-bath-mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर, 29 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि उज्जैन में वर्ष 2028 के दौरान लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले क्षिप्रा नदी को प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त किया जाएगा और इस विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान लाखों श्रद्धालु इसके शुद्ध जल में स्नान करेंगे।</p>
<p>सिंहस्थ कुंभ मेला भगवान शिव के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग वाली धार्मिक नगरी उज्जैन में हर 12 साल में क्षिप्रा नदी के तट पर लगता है।</p>
<p>यादव ने इंदौर जिले के चित्तौड़ा गांव में एक श्रीमद् भागवत कथा कार्यक्रम के समापन समारोह में कहा, ‘‘सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालु क्षिप्रा नदी के शुद्ध जल में स्नान करेंगे। इसके लिए बारिश के दौरान एक जलाशय में पानी जमा किया जाएगा जिसे धीरे-धीरे क्षिप्रा में छोड़ा जाएगा। इससे इस नदी में सतत प्रवाह बना रहेगा।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि श्रद्धालु सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान क्षिप्रा नदी के जल से पूरी श्रद्धा के साथ आचमन भी करते हैं, इसलिए इस नदी के पानी की शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।</p>
<p>यादव ने जोर देकर कहा कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ेगा।</p>
<p>उज्जैन में पिछला सिंहस्थ कुम्भ मेला 2016 के दौरान लगा था। इसके लिए प्रदेश सरकार ने नर्मदा-क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना के जरिये नर्मदा नदी का जल लम्बी दूरी की पाइपलाइन के जरिये क्षिप्रा नदी में छोड़ा था और श्रद्धालुओं ने इस जल में स्नान किया था।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसी व्यवस्था कर रही है कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले में श्रद्धालु क्षिप्रा नदी के ही शुद्ध जल में स्नान करेंगे।</p>
<p>बहरहाल, क्षिप्रा नदी को प्रदूषण से मुक्त करना प्रदेश सरकार के सामने बड़ी चुनौती की तरह है और कई साधु-संत भी इस विषय में चिंता जता चुके हैं।</p>
<p>इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र से निकलने वाली क्षिप्रा बहते-बहते उज्जैन पहुंचती है जहां हर 12 साल में लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले में लाखों श्रद्धालु इस नदी में स्नान करते हैं। क्षिप्रा को हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं में ‘मोक्षदायिनी नदी’ भी कहा जाता है।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में गंदे नाले में तब्दील कान्ह और सरस्वती नदियों का पानी भी आगे जाकर क्षिप्रा में मिलता है और इसमें होने वाले प्रदूषण में इजाफा करता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर क्षिप्रा नदी को कान्ह और सरस्वती नदियों के गंदे पानी से बचाने के लिए अलग योजना बनाई गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 21:08:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गायिका किंजल दवे ने किए महाकाल के दर्शन, भस्म आरती में हुईं शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन, 16 अप्रैल (वेब वार्ता)। गायिका और अभिनेत्री किंजल दवे बुधवार को उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के द्वार पहुंचीं, जहां उन्होंने महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में शामिल हुईं। गुजराती गायिका महाकाल की भक्ति में डूबी नजर आईं।</p>
<p>किंजल दवे ने नंदी हॉल में बैठ भगवान महाकालेश्वर की साधना की। चांदी द्वार से दर्शन पूजन कर उन्होंने भगवान का आशीर्वाद लिया। श्रीराम पुजारी ने पूजन सम्पन्न करवाया। उन्होंने भगवान महाकालेश्वर के दर्शन के बाद खुशी जाहिर की।</p>
<p>दर्शन-पूजन के पश्चात गायिका ने मंदिर समिति और मध्य प्रदेश सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह बाबा के मंदिर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140157/singer-kinjal-dave-attended-mahakals-darshan-bhasma-aarti"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/9150_kinjal-dave.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन, 16 अप्रैल (वेब वार्ता)। गायिका और अभिनेत्री किंजल दवे बुधवार को उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के द्वार पहुंचीं, जहां उन्होंने महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में शामिल हुईं। गुजराती गायिका महाकाल की भक्ति में डूबी नजर आईं।</p>
<p>किंजल दवे ने नंदी हॉल में बैठ भगवान महाकालेश्वर की साधना की। चांदी द्वार से दर्शन पूजन कर उन्होंने भगवान का आशीर्वाद लिया। श्रीराम पुजारी ने पूजन सम्पन्न करवाया। उन्होंने भगवान महाकालेश्वर के दर्शन के बाद खुशी जाहिर की।</p>
<p>दर्शन-पूजन के पश्चात गायिका ने मंदिर समिति और मध्य प्रदेश सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह बाबा के मंदिर पहली बार आई हैं और उन्हें अच्छे से दर्शन हुए। उन्होंने कहा कि मैं भगवान महाकालेश्वर के दर्शन कर काफी खुश हूं। मैं यहां पहली बार आई हूं, पहली बार भस्म आरती में शामिल होकर काफी खुशी मिली है। बाबा का आशीर्वाद सभी पर बना रहे। पुजारी श्रीराम ने गायिका को नीले रंग का पटका प्रसाद स्वरूप भेंट किया।</p>
<p>बता दें, किंजल दवे महाकाल पर भक्ति गीत ‘जिसे मोह न माया जाल का वो भक्त है महाकाल का’ भी गा चुकी हैं। कई गुजराती फिल्मों में गाने गा चुकीं किंजल दवे का जन्म गुजरात के पाटण जिले में हुआ है। गायन के साथ ही किंजल अभिनय में भी निपुण हैं, वह कुछ फिल्मों में अभिनय भी कर चुकी हैं। किंजल दवे गायिका और अभिनेत्री के साथ ही राजनीति में भी सक्रिय हैं। वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हैं।</p>
<p>महाकाल के दर्शन को उज्जैन पहुंचने वाले सितारों की लिस्ट काफी लंबी हो चुकी है। 30 मार्च को अभिनेता विंदु दारा सिंह महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में भी शामिल हुए। उनके साथ परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे।</p>
<p>महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती लोकप्रिय है और इसमें शामिल होने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। भस्म आरती का काफी पौराणिक महत्व है। आरती में श्मशान से लाई गई चिता के भस्म से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाता है। चिता भस्म के अलावा इसमें गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल के लकड़ियों की राख को भी मिलाया जाता है।</p>
<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म आरती के दौरान महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डाल लेती हैं। मान्यता है कि उस वक्त महाकालेश्वर निराकार स्वरूप में होते हैं इसलिए महिलाओं को आरती में शामिल न होने और न ही देखने की अनुमति होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Apr 2025 15:36:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश : उज्जैन में बैकुंठ चतुर्दशी पर हुआ हरि-हर मिलन, महाकाल ने श्रीहरि को सौंपा सृष्टि का भार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन (मध्य प्रदेश) , 15 नवंबर (हि.स.)। 'अब सौंप दिया इस सृष्टि का सब भार तुम्हारे हाथों में...’ कुछ इसी तरह के भजनों के मध्य ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में हरि-हर मिलन की अद्भुत परंपरा निभाई गई। यहां कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (बैकुंठ चतुर्दशी) के अवसर पर मध्य रात्रि को हरि (भगवान विष्णु) का हर (भगवान शिव) से मिलन हुआ। अवंतिकानाथ राजा महाकाल ठाठ के साथ सवारी लिए भगवान विष्णु के स्वरूप गोपाल जी से भेंट करने पहुंचे। चातुर्मास समापन पर भगवान महाकाल ने सृष्टि का भार फिर से भगवान श्रीहरि को सौंप दिया। यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/105402/hari-har-meeting-took-place-on-baikuntha-chaturdashi-in-ujjain-mahakaal"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-11/b15112024-06.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन (मध्य प्रदेश) , 15 नवंबर (हि.स.)। 'अब सौंप दिया इस सृष्टि का सब भार तुम्हारे हाथों में...’ कुछ इसी तरह के भजनों के मध्य ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में हरि-हर मिलन की अद्भुत परंपरा निभाई गई। यहां कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (बैकुंठ चतुर्दशी) के अवसर पर मध्य रात्रि को हरि (भगवान विष्णु) का हर (भगवान शिव) से मिलन हुआ। अवंतिकानाथ राजा महाकाल ठाठ के साथ सवारी लिए भगवान विष्णु के स्वरूप गोपाल जी से भेंट करने पहुंचे। चातुर्मास समापन पर भगवान महाकाल ने सृष्टि का भार फिर से भगवान श्रीहरि को सौंप दिया। यह दिव्य दृश्य देखने के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।<br /><br />परम्परा के मुताबिक गुरुवार को महाकालेश्वर मंदिर से रात करीब 11 बजे भगवान महाकाल चांदी की पालकी में सवार होकर हरि-हर मिलन के लिए रवाना हुए। भगवान महाकाल की सवारी निर्धारित मार्ग से होते हुए रात बजे गोपाल मंदिर पहुंची। यहां भगवान महाकाल का जगत के पालन कर्ता भगवान विष्णु से मिलन हुआ। इस अद्भुत मिलन के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सवारी‎ मार्ग के दोनों ओर इकट्ठे हुए। इस दौरान भक्तों ने महाकाल के नारे लगाए। हरि-हर मिलन में भक्तो की भारी भीड़ देखने को मिली।<br /><br />मान्यता के अनुसार, वामन अवतार के समय भगवान विष्णु ने राजा बलि को उनका आतिथ्य स्वीकार करने का वचन दिया था। उसी वचन को निभाने के लिए भगवान विष्णु चातुर्मास के चार माह पाताल लोक में राजा बलि के यहां अतिथि बनकर व्यतित करते हैं। इस दौरान सृष्टि के संचालन का भार भगवान शिव के हाथ में रहता है। देव प्रबोधिनी एकादशी पर चातुर्मास का समापन होता है और भगवान विष्णु पुन: वैकुंठ पधारते हैं। इसके तीन दिन बाद भगवान शिव बैकुंठ चतुर्दशी पर भगवान श्री हरि विष्णु को पुन: सृष्टि का भार सौंपने के लिए गोलोक जाते हैं। हर के हरि से मिलने जाने के इसी धर्म प्रसंग को हरि हर मिलन कहा जाता है।<br /><br />महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पं. महेश गुरु ने बताया सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट के श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन की परंपरा 100 साल से पुरानी है। सिंधिया रियासत के समय से ही हर साल यहां मध्य रात्रि 12 बजे हरि हर-मिलन कराया जाता है। इस अद्भुत मिलन के दौरान दोनों देवों ‎को अपने-अपने स्वभाव के ‎विपरीत मालाएं धारण करवाई गईं। इस मिलन में भगवान महाकाल ने प्रभु‎ द्वारकाधीश को बिल्वपत्र की माला धारण करवाई। वहीं ‎प्रभु द्वारकाधीश ने भगवान ‎महाकाल को तुलसी पत्र की माला‎ धारण करवाई। इस मिलन के दौरान भक्तों ने देवों की महाआरती की। विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया गया। इस अद्भुत मिलन को देखने के लिए देश भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। पूजन के बाद भगवान महाकाल अपनी सवारी के साथ देर रात वापस अपने धाम महाकालेश्वर‎ ज्योतिर्लिंग पहुंचे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Nov 2024 14:23:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन : राष्ट्रपति मुर्मू ने भगवान महाकाल के दर्शन कर पूजन-अभिषेक किया, नंदी हॉल में लगाया ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन, 19 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने मप्र के दो दिवसीय प्रवास के दूसरे दिन गुरुवार को उज्जैन में ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में दर्शन कर पूजन-अभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर ध्यान भी लगाया। राष्ट्रपति के आगमन पर महाकाल मंदिर का विशेष शृंगार किया गया है।</p>
<p>उज्जैन में झांझ-डमरू की ध्वनि से उनका स्वागत किया गया। इसके पहले स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ महाकाल मंदिर में झाड़ू लगाकर सफाई की। राष्ट्रपति ने स्वच्छता मित्रों का सम्मान किया। इस अवसर पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/104445/ujjain-president-murmu-had-darshan-of-lord-mahakal-worshiped-and"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-09/b19092024-08.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन, 19 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने मप्र के दो दिवसीय प्रवास के दूसरे दिन गुरुवार को उज्जैन में ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में दर्शन कर पूजन-अभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर ध्यान भी लगाया। राष्ट्रपति के आगमन पर महाकाल मंदिर का विशेष शृंगार किया गया है।</p>
<p>उज्जैन में झांझ-डमरू की ध्वनि से उनका स्वागत किया गया। इसके पहले स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ महाकाल मंदिर में झाड़ू लगाकर सफाई की। राष्ट्रपति ने स्वच्छता मित्रों का सम्मान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मैं स्वच्छता मित्रों को सभी देशवासियों की ओर से धन्यवाद देती हूं। आपकी ही वजह से यह स्वच्छता अभियान व्यापक हुआ है।<br /><br />राष्ट्रपति ने कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन में सदियों से संस्कृति और सभ्यता की परंपरा निरंतर अस्तित्व में बनी हुई है। उज्जैन अंतरराष्ट्रीय व्यापार का केंद्र भी रहा है। मैंने अपनी जनसेवा की यात्रा स्वच्छता के कार्य से ही की थी। नोटिफाइडड एरिया काउंसिल की अध्यक्ष रहने के दौरान मैं प्रति दिन एक वार्ड से दूसरे वार्ड जाती थी। सफाई कार्य का निरीक्षण करती थी। इस दौरान अच्छे कामों को देखकर खुशी होती थी। पिछले 10 वर्षों में स्वच्छता अभियान देशव्यापी अभियान बन गया है। इससे देश में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि मध्यप्रदेश के कई शहरों को सफाई मित्र सुरक्षित शहर घोषित किया गया है।<br /><br />उज्जैन आने वालीं 10वीं राष्ट्रपति<br /><br />द्रौपदी मुर्मू उज्जैन आने वाली वाली देश की 10वीं राष्ट्रपति हैं। उनके पहले क्रमश: रामनाथ कोविन्द, प्रणब मुखर्जी, प्रतिभा पाटिल, केआर नारायणन, शंकरदयाल शर्मा, आर वेंकटरमन, ज्ञानी जेल सिंह, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डा. राजेन्द्र प्रसाद उज्जैन आ चुके हैं। पिछली बार 29 मई, 2022 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द आए थे। उनके साथ पत्नी सविता और बेटी स्वाति भी थीं। वे अपने विवाह की 48वीं वर्षगांठ से एक दिन पहले कालिदास संस्कृत अकादमी में रखे अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के 59वें अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुए थे। तीनों ने महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह से ज्योतिर्लिंग महाकाल का अभिषेक-पूजन किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/104445/ujjain-president-murmu-had-darshan-of-lord-mahakal-worshiped-and</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Sep 2024 16:37:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन : आज निकलेगी भगवान महाकाल की शाही सवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन, 2 सितंबर (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की श्रावण-भादौ मास में निकलने वाली सवारियों के क्रम में सातवीं और अंतिम शाही सवारी आज (सोमवार को) शाम धूमधाम से निकाली जाएगी। अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में सवार होकर नगर का भ्रमण कर अपनी प्रजा का हाल जानेंगे। इस दौरान भगवान महाकाल सात स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन देंगे। रजत पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद, घटाटोप मुखोटा स्वरूप और सप्तम सवारी में सप्तधान का मुखारविंद सम्मिलित रहेगा।<br /><br />मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/104128/the-royal-ride-of-lord-mahakal-will-take-place-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-09/b02092024-09.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन, 2 सितंबर (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की श्रावण-भादौ मास में निकलने वाली सवारियों के क्रम में सातवीं और अंतिम शाही सवारी आज (सोमवार को) शाम धूमधाम से निकाली जाएगी। अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में सवार होकर नगर का भ्रमण कर अपनी प्रजा का हाल जानेंगे। इस दौरान भगवान महाकाल सात स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन देंगे। रजत पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद, घटाटोप मुखोटा स्वरूप और सप्तम सवारी में सप्तधान का मुखारविंद सम्मिलित रहेगा।<br /><br />मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ ने बताया कि सावन-भादौ मास में भगवान महाकाल की सात सवारी निकाली जाती है। आज भाद्रपद मास के दूसरे सोमवार को भगवान महाकाल की शाही सवारी निकलेगी। सवारी निकलने के पूर्व महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में विधिवत भगवान चन्द्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन होगा और तत्पश्चात भगवान रजत पालकी में विराजित होकर अपनी प्रजा के हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के द्वारा पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमौलेश्वर को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी जाएगी।<br /><br />उन्होंने बताया कि भगवान महाकाल की सवारी अपने निर्धारित समय शाम चार बजे से प्रारंभ होकर कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षीबाजार चौराहा, कहारवाड़ी, हरसिद्धी पाल से रामघाट पहुंचेगी, जहां पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर एवं गजराज पर आरुढ़ मनमहेश का मां क्षिप्रा के जल से अभिषेक और पूजन-अर्चन होगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, बंबई वाले की धर्मशाला, गणगौर दरवाजा, खाती समाज का जगदीश मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, कमरी मार्ग, टंकी चौराहा, तेलीवाडा, कंठाल, सतीमाता मंदिर, छत्री चौक, गोपाल मंदिर पर पहुंचेगी, जहाँ सिंधिया स्टेट द्वारा पररम्परानुसार पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन किया जाएगा। केन्द्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इस मौके पर मौजूद रहेंगे और भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन करेंगे। उसके बाद सवारी पटनी बाज़ार, गुदरी चौराहा, कोट मोहल्ला, महाकाल चौराहा होते हुए मंदिर परिसर में पहुंचेगी।<br /><br />शाही सवारी के चल समारोह का स्वरूप इस प्रकार रहेगा<br /><br />भगवान महाकाल की शाही सवारी के चल समारोह में सबसे आगे मंदिर का प्रचार वाहन चलेगा। उसके बाद यातायात पुलिस, तोपची, भगवान महाकालेश्वर का रजत ध्वज, घुडसवार, विशेष सशस्त्र बल सलामी गार्ड, स्काउट/गाइड सदस्य, कांग्रेस सेवा दल, सेवा समिति बैंड के बाद उज्जैन के अतिरिक्त मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से परंपरागत रूप से सवारी सम्मिलित होने वाली 70 भजन मंडलियां चल समारोह में प्रभु का गुणगान करते हुए व अपनी सेवाए देती हुई चलेंगी। भजन मंडलियों के बाद नगर के साधू-संत व गणमान्य नागरिक, पुलिस बैंड, नगर सेना के सलामी गार्ड की टुकड़ी, महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी व पुरोहितगण सवारी के साथ रहेगे। उनके बाद महाकालेश्वर भगवान (चंद्रमौलेश्वर) की प्रमुख पालकी, भारत बैंड, गरुड़ रथ पर शिव-तांडव, रमेश बैंड, नंदी रथ पर उमा महेश स्वरुप, गणेश बैंड, रथ पर होल्कर स्टेट मुखारविंद, आर.के.बैंड, रथ पर घटाटोप, रथ पर सप्तधान मुखारविंद के पश्यात राजकाल म्युजिकल ग्रुप बैंड व मनमहेश स्वरुप हाथी पर विराजित होंगे।<br /><br />शाही सवारी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मप्र संस्कृति परिषद के माध्यम से भगवान महाकालेश्वर की सवारी में जनजातीय कलाकारों का दल भी सहभागिता करेगा। शाही सवारी में लालपुर, डिंडोरी जिले का आदिवासी धुलिया जनजाति गुदुम बाजा लोक नर्तक दल दिनेश कुमार भार्वे के नेतृत्व में पालकी के आगे भजन मंडलियों के साथ अपनी प्रस्तुति देते हुए चलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Sep 2024 16:04:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन : भगवान महाकाल की नगरी में 1500 लोगों ने एक साथ 10 मिनट तक डमरू बजाकर बनाया विश्व रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन/भोपाल, 5 अगस्त (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर की नगरी में आज सावन के तीसरे सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी निकलने से पहले विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। यहां महाकाल लोक के पास शक्ति पथ पर 1500 लोगों ने एक साथ 10 मिनट तक डमरू बजाया। इसके साथ ही उज्जैन का नाम सबसे अधिक लोगों के डमरू बजाने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। गिनीज बुक से आए ऋषिनाथ ने इसका सर्टिफिकेट सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक सतीश मालवीय और संतों को सौंपा।<br /><br />उज्जैन में सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103616/in-ujjain-the-city-of-lord-mahakal-1500-people-created"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-08/b05082024-02.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन/भोपाल, 5 अगस्त (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर की नगरी में आज सावन के तीसरे सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी निकलने से पहले विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। यहां महाकाल लोक के पास शक्ति पथ पर 1500 लोगों ने एक साथ 10 मिनट तक डमरू बजाया। इसके साथ ही उज्जैन का नाम सबसे अधिक लोगों के डमरू बजाने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। गिनीज बुक से आए ऋषिनाथ ने इसका सर्टिफिकेट सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक सतीश मालवीय और संतों को सौंपा।<br /><br />उज्जैन में सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए सुबह से भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। तड़के भस्म आरती में महाकाल का विशेष शृंगार हुआ। भस्म आरती के लिए रविवार-सोमवार की मध्यरात्रि 2.30 बजे महाकालेश्वर मंदिर के पट खोले गए। भस्म आरती के दौरान भांग, चंदन, सूखे मेवों और आभूषणों से बाबा महाकाल का राजा स्वरूप दिव्य शृंगार किया गया। भस्म आरती के 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मंदिर में बाबा के दर्शन का सिलसिला रात 10.30 बजे तक चलेगा।<br /><br />वहीं, सावन मास के प्रत्येक सोमवार को शाम चार बजे भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है। इसमें भगवान अवंतिकानाथ नगर का भ्रमण कर अपनी प्रजा का हाल जानते हैं। आज महाकालेश्वर मंदिर से अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में सवार होकर निकलेंगे। साथ ही दो अन्य स्वरूपों में भी भक्तों को दर्शन देंगे। महाकाल का एक स्वरूप मनमहेश के रूप में हाथी पर सवार होगा, वहीं गरुड़ रथ पर शिव तांडव के रूप में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। महाकाल मंदिर से शाम चार बजे सवारी शुरू होकर मोक्षदायिनी शिप्रा के तट पर पहुंचेगी।<br /><br />महाकाल मंदिर प्रशासक मृणाल मीणा ने बताया कि आज एक साथ 1500 डमरू बजाने का विश्व रिकॉर्ड बना है। सवारी शुरू होने से पहले श्री महाकाल महालोक के सामने शक्ति पथ पर वादक भस्म आरती की धुन पर 10 मिनट की प्रस्तुति दी। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम ड्रोन तथा कैमरों से प्रस्तुति की निगरानी की। शक्ति पथ पर प्रस्तुति के बाद अब शाम को सभी डमरू वादक भगवान महाकाल की सवारी में भी शामिल होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/103616/in-ujjain-the-city-of-lord-mahakal-1500-people-created</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 14:39:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन : सवा लाख बिल्व पत्रों से सजे भगवान महाकाल, हजारों भक्तों ने किए दिव्य स्वरूप के दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन, 4 अगस्त (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर का श्रावण मास में प्रतिदिन अनूठा शृंगार किया जा रहा है। इसी कड़ी में हरियाली अमावस्या पर रविवार को भस्म आरती में बिल्व पत्रों से अद्भुत शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को सवा लाख बिल्व पत्र की माला पहनाई गई। इसके बाद भस्म आरती की गई। हजारों श्रद्धालु इस अद्भुत पल के साक्षी बने।<br /><br />महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आशीष गुरु ने बताया कि श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) पर रविवार सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद सबसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103612/ujjain-thousands-of-devotees-saw-the-divine-form-of-lord"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-08/b04082024-14.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन, 4 अगस्त (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर का श्रावण मास में प्रतिदिन अनूठा शृंगार किया जा रहा है। इसी कड़ी में हरियाली अमावस्या पर रविवार को भस्म आरती में बिल्व पत्रों से अद्भुत शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को सवा लाख बिल्व पत्र की माला पहनाई गई। इसके बाद भस्म आरती की गई। हजारों श्रद्धालु इस अद्भुत पल के साक्षी बने।<br /><br />महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आशीष गुरु ने बताया कि श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) पर रविवार सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद सबसे पहले भगवान का शुद्ध जल से स्नान, पंचामृत स्नान करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। अमावस्या पर आज बाबा महाकाल का भांग और चंदन से शृंगार किया गया और उन्हें बिल्व पत्र की माला से सजाया गया। शृंगार के दौरान उनके मस्तक पर बिल्व पत्र लगाया गया और नवीन मुकुट भी पहनाया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। इसके बाद पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हो गया।<br /><br />श्रावण मास में देश-दुनिया से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु महाकाल के दर्शन करने के लिए तीर्थनगरी उज्जैन पहुंच रहे हैं। सोमवार को यहां लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। दरअसल, उज्जैन में श्रावण के प्रत्येक सोमवार को राजाधिराज महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं और प्रजा का हालचाल जानते हैं। इसे महाकाल की सवारी कहा जाता है। सोमवार को श्रावण मास की तीसरी सवारी निकलेगी, जिसमें महाकाल पालकी में सवार होकर मोक्षदायिनी शिप्रा के तट पर पहुंचेंगे और शिप्रा तट पर पूजन के पश्चात पुन: अपने मंदिर लौटेंगे।<br /><br />भगवान महाकाल सोमवार को निकलने वाली तीसरी सवारी में तीन स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। सवारी के दौरान अवंतिका नाथ चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में, हाथी पर मनमहेश तथा गरुड़ रथ पर शिव तांडव रूप में सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे। महाकाल मंदिर से शाम 04 बजे शाही ठाट बाट के साथ भगवान महाकाल की सवारी शुरू होगी। सवारी में मुख्यमंत्री मोहन यादव के शामिल होने की भी संभावना है।<br /><br />मंदिर प्रशासक मृणाल मीणा ने बताया कि श्रावण मास की तीसरी सवारी में एक साथ 1500 डमरू बजाने का विश्व रिकार्ड भी बनने जा रहा है। सवारी शुरू होने से पहले महाकाल महलोक के सामने शक्तिपथ पर वादक भस्म आरती की धुन पर 10 मिनट की प्रस्तुति देंगे। गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड की टीम ड्रोन तथा कैमरा से प्रस्तुति की निगरानी करेगी। विश्व रिकार्ड बनने के बाद संस्था द्वारा प्रमाण पत्र दिया जाएगा। शक्ति पथ पर प्रस्तुति के बाद सभी डमरु वादक भगवान महाकाल की सवारी में भी शामिल होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/103612/ujjain-thousands-of-devotees-saw-the-divine-form-of-lord</link>
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                <pubDate>Sun, 04 Aug 2024 20:59:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन : सोमवार को निकलेगी भगवान महाकाल की श्रावण मास की प्रथम सवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन, 21 जुलाई (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक दक्षिणमुखी भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में श्रावण माह के पहले दिन सोमवार, 22 जुलाई को पहली सवारी निकाली जाएगी। इस दौरान भगवान महाकाल पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे और अपने भक्तों को मनमहेश स्वरूप में दर्शन देंगे।<br /><br />महाकालेश्वोर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक मृणाल मीना ने रविवार को बताया कि भगवान महाकालेश्वर की प्रथम सवारी ठाठ-बाट से परम्परागत मार्ग से निकाली जाएगी। भगवान महाकालेश्वर के मनमहेश स्वरूप का विधिवत पूजन-अर्चन महाकाल मन्दिर के सभा मण्डप में होने के पश्चात शाम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103257/ujjain-the-first-ride-of-lord-mahakal-in-the-month"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/‍b21072024-06.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन, 21 जुलाई (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक दक्षिणमुखी भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में श्रावण माह के पहले दिन सोमवार, 22 जुलाई को पहली सवारी निकाली जाएगी। इस दौरान भगवान महाकाल पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे और अपने भक्तों को मनमहेश स्वरूप में दर्शन देंगे।<br /><br />महाकालेश्वोर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक मृणाल मीना ने रविवार को बताया कि भगवान महाकालेश्वर की प्रथम सवारी ठाठ-बाट से परम्परागत मार्ग से निकाली जाएगी। भगवान महाकालेश्वर के मनमहेश स्वरूप का विधिवत पूजन-अर्चन महाकाल मन्दिर के सभा मण्डप में होने के पश्चात शाम चार बजे भगवान मनमहेश पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। उन्होंने बताया कि मन्दिर के मुख्यद्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवान पालकी में विराजमान भगवान मनमहेश को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) देंगे। भगवान महाकालेश्वर की पालकी मन्दिर से निकलने के बाद महाकाल रोड, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट पहुंचेगी, जहां शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन किया जायेगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मन्दिर, सत्यनारायण मन्दिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्रीचौक, गोपाल मन्दिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार से होती हुई पुन: श्री महाकालेश्वकर मन्दिर पहुंचेगी।<br /><br />प्रशासक मृणाल मीना ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के माध्यम से भगवान महाकालेश्वर की सवारी में जनजातीय कलाकारों का दल भी सहभागिता करेगा। धार के भील जनजातीय भगोरिया नृत्य के सदस्यों का दल सवारी में प्रस्तुति हेतु सम्मिलित होगा। उन्होंने बताया कि दो चलित रथ के माध्यम से बाबा महाकाल की सवारी का लाइव प्रसारण किया जाएगा। इस चलित रथ की विशेषता यह है कि इसमें लाइव बॉक्स रहेगा, जिससे लाइव प्रसारण निर्बाध रूप से होगा। उन्हाेंने श्रद्धालुओं से अपील की कि कृपया सवारी मार्ग में सड़क की ओर व्यापारीगण भट्टी चालू न रखें और न ही तेल का कड़ाव रखें। दर्शनार्थी सवारी की उल्टी दिशा में न चलें और सवारी निकलने तक अपने स्थान पर खड़े रहें। मंदिर के जिस मुख्यद्वार से राजाधिराज महाकाल की पालकी नगर भ्रमण के लिए निकलेगी, केवल पारंपरिक नौ भजन मंडलियां व झांझ डमरू दल को सवारी में शामिल किया जाएगा।<br /><br /><strong>सात स्वरूपों में भी भक्तों को दर्शन देंगे महाकालेश्वर</strong><br /><br />प्रशासक मृणाल मीना ने बताया कि श्रावण माह की पांच और भाद्रपद माह की दो सवारियां मिलाकर कुल सात सवारियों में भगवान महाकालेश्वर विविध मोहक रूपों में भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। दूसरी सवारी 29 जुलाई 2024 को निकलेगी। इसमें पालकी में भगवान चन्द्रमौलेश्वर के स्वरूप में और हाथी पर मनमहेश के स्वरूप में विराजित होंगे। तीसरी सवारी 5 जुलाई 2024 को निकाली जायेगी। इस दौरान पालकी में भगवान चन्द्रमौलेश्वर के स्वरूप में रहेंगे, हाथी पर मनमहेश के स्वरूप में और गरुड़ रथ पर शिवतांडव के स्वरूप में विराजित होंगे। इसी प्रकार चौथी सवारी 12 जुलाई 2024 को निकाली जायेगी, जिसमें पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव और नन्दी रथ पर उमा.महेश के स्वरूप में विराजित होंगे। पंचम सवारी 19 अगस्त 2024 को निकलेगी। इस दौरान पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद सम्मिलित रहेगा।<br /><br />उन्हाेंने बताया कि षष्ठम सवारी 26 अगस्त 2024 को निकलेगी। इस दौरान पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद के साथ घटाटोप मुखोटा सम्मिलित रहेगा। सप्तम सवारी 2 सितंबर 2024 (प्रमुख व शाही सवारी) को निकलेगी। इस दौरान पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा.महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद, घटाटोप मुखोटा व सप्तधान मुखारविंद सम्मिलित रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jul 2024 21:12:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन : भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी में 2000 से अधिक का पुलिस बल रहेगा तैनात</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन, 20 जुलाई (हि.स.)। भगवान श्री महाकाल की सवारियों के संबंध में उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने शनिवार को प्रशासनिक संकुल भवन में मीडिया से चर्चा की। प्रशासक श्री महाकालेश्वर मंदिर मृणाल मीना ने पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन से व्यवस्थाओं के संबंध विस्तृत जानकारी दी।<br /><br />कलेक्टर श्री सिंह ने बताया कि निर्धारित रेट लिस्ट से अधिक पैसा लेने वाले होटलों को सील किया जाएगा। साथ ही उनके पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशानुरूप बाबा महाकाल की सवारी में जनजातीय कलाकारों का दल भी सहभागिता करेगा। दो चलित रथ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103239/more-than-2000-police-force-will-be-deployed-in-ujjain"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b20072024-09.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन, 20 जुलाई (हि.स.)। भगवान श्री महाकाल की सवारियों के संबंध में उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने शनिवार को प्रशासनिक संकुल भवन में मीडिया से चर्चा की। प्रशासक श्री महाकालेश्वर मंदिर मृणाल मीना ने पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन से व्यवस्थाओं के संबंध विस्तृत जानकारी दी।<br /><br />कलेक्टर श्री सिंह ने बताया कि निर्धारित रेट लिस्ट से अधिक पैसा लेने वाले होटलों को सील किया जाएगा। साथ ही उनके पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशानुरूप बाबा महाकाल की सवारी में जनजातीय कलाकारों का दल भी सहभागिता करेगा। दो चलित रथ के माध्यम से बाबा महाकाल की सवारी का लाइव प्रसारण किया जाएगा। इस चलित रथ की विशेषता यह है कि इसमें लाइव बॉक्स रहेगा, जिससे लाइव प्रसारण निर्बाध रूप से होगा। श्रावण मास की सवारियों के दृष्टिगत नगर निगम सिमा में शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में अध्यनरत कक्षा 1 से कक्षा 12वीं तक के सभी विद्यार्थियों का सोमवार को अवकाश रहेगा।<br /><br />पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि बाबा महाकाल की सवारियों के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए 2000 से अधिक का पुलिस बल और वॉलिंटियर्स तैनात रहेंगे। सवारी मार्ग पर पड़ने वाली विभिन्न गलियों का वेरिफिकेशन किया जा चुका है। रविवार सुबह से भौतिक सत्यापन की कार्रवाई भी की जाएगी। पांच ड्रोन के माध्यम से संपूर्ण सवारी मार्ग की निगरानी होगी। श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और यातायात प्रबंधन के लिए डबल लेयर बैरिकेडिंग की गई है। इसी के साथ कम समय में यातायात सुचारु करने के लिए बफर जोन भी बनाया गया है।<br /><br />कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संदिग्ध लोगों की जांच कर बाउंड ओवर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि पार्किंग व्यवस्था में प्रभारी अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे जो यह सुनिश्चित करेंगे कि श्रद्धालुओं से निर्धारित शुल्क से अधिक न लिया जाए। अल्कोहल टेस्ट डिवाइस के माध्यम से वाहन चालकों की चेकिंग की जाएगी नियमों के उल्लंघन पर ई रिक्शा वाहनों पर भी कार्रवाई होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jul 2024 16:27:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन : देव शयनी एकादशी, 'हरि सौपेंगे 'हर को सृष्टि का भार, चले जाएंगे क्षीरसागर में शयन करने</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन, 16 जुलाई (हि.स.)। आगामी बुधवार को देवशयनी एकादशी है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु सृष्टि का भार भगवान शिव को सौंपकर क्षीरसागर में चार माह तक शयन करने चले जाते हैं। इन चार माहों में भगवान शिव सृष्टि का भार उठाते हैं। चार माह बाद देवउठनी एकादशी पर जब भगवान विष्णु जागते हैं, तब वैकुंठ चतुर्दशी पर भगवान शिव सृष्टि का भार भगवान विष्णु को सौपकर कैलाश पर्वत चले जाते हैं।<br /><br />दरअसल, इस परंपरा को लेकर उज्जैन में पौराणिक मान्यताएं हैं। इसी के चलते हर वर्ष वैकुंठ चतुर्दशी पर महाकाल मंदिर से भगवान शिव की पालकी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103167/ujjain-dev-shayan-ekadashi-hari-will-hand-over-the-burden"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b16072024-10.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन, 16 जुलाई (हि.स.)। आगामी बुधवार को देवशयनी एकादशी है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु सृष्टि का भार भगवान शिव को सौंपकर क्षीरसागर में चार माह तक शयन करने चले जाते हैं। इन चार माहों में भगवान शिव सृष्टि का भार उठाते हैं। चार माह बाद देवउठनी एकादशी पर जब भगवान विष्णु जागते हैं, तब वैकुंठ चतुर्दशी पर भगवान शिव सृष्टि का भार भगवान विष्णु को सौपकर कैलाश पर्वत चले जाते हैं।<br /><br />दरअसल, इस परंपरा को लेकर उज्जैन में पौराणिक मान्यताएं हैं। इसी के चलते हर वर्ष वैकुंठ चतुर्दशी पर महाकाल मंदिर से भगवान शिव की पालकी रात्रि 11 बजे द्वारकाधीश मंदिर, जिसे आम बोलचाल में गोपाल मंदिर कहा जाता है, जाती है और रात्रि में गोपाल मंदिर में हरि और हर का मिलन होता है। भगवान शिव सृष्टि का भार भगवान विष्णु को सौंपकर रात्रि में ही अपने महल में(महाकाल मंदिर)लौट जाते हैं। देश-दुनिया में इस परंपरा को सोशल मीडिया के माध्यम से लाखो भक्त निहारते हैं।<br /><br />उज्जैन में इस रात्रि हजारों भक्त इस परंपरा को देखने के लिए जुटते हैं। जब हरि -हर मिलन होता है तो शैव एवं वैष्णव परंपरानुसार भगवान शिव का तुलसी की माला से और भगवान विष्णु का आंकड़े की माला से क्रमश: अभिषेक पूजन होता है। ऐसी भी मान्यता है कि तत्कालिन समय रियासतकालीन दौर था, तब शैव एवं वैष्णवों के बीच होनेवाले मतभेदों को दूर करने के लिए यह परंपरा प्रारंभ हुई। हालांकि इस परंपरा का एक सिरा आज भी अधूरा है। जब देव शयनी एकादशी आती है और भगवान शिव को भगवान विष्णु सृष्टि का भार सौंपकर क्षीरसागर में विश्राम करने जाते हैं तो उज्जैन सहित देशभर में ऐसा कोई आयोजन नहीं होता है।<br /><br />इनका कहना है-<br /><br />ज्योतिषाचार्य पं.हरिहर पण्ड्या के अनुसार देवशयनी एकादशी बुधवार को है। हरि-हर मिलन को लेकर जो पौराणिक मान्यता है,उस अनुसार देश-दुनिया में केवल उज्जैन में ही वैकुंठ चतुर्दशी को भव्य आयोजन होता है, जिसे हरि - हर मिलन कहते हैं। जब भगवान शिव को भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी को सृष्टि का भार सौंपकर क्षीरसागर में विश्राम हेतु जाते हैं, तो उज्जैन में कोई आयोजन नहीं होता है। स्कंद पुराण के अवंति खण्ड में सप्तपुरियों में क्षीरसागर का उल्लेख जरूर है, जो उज्जैन शहर में स्थित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jul 2024 16:03:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन: आईपीएल सटोरिये के यहां मिला 15 करोड़ कैश, रातभर से मशीन ने गिने नोट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">उज्जैन, 14 जून (हि.स.)। उज्जैन पुलिस ने मुसद्दीपुरा में शुक्रवार को आईपीएल का ऑनलाइन सट्टा खिलाने वालों के यहां बड़ी छापामार कार्यवाई की है। यहां से करीब करीब 15 करोड़ रुपए जब्त किए हैं। यहां बैंक की नोट गिनने की मशीन रातभर लगी रही । इस पूरे मामले में तीन सटोरिये भी गिरफ्तार हुए हैं।<br /><br />उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने शुक्रवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया है कि पुलिस को गुरूवार रात गुप्त सूचना मिली थी कि मुसद्दीपुरा के पीयूष चोपड़ा नामक सटोरिये के घर अकूत सम्पत्ति जमा की जा रही हैं। जिसके बाद नीलगंगा थाने की पुलिस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102436/15-crore-cash-found-at-ujjain-ipl-bookie-machine-counted"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d14062024-03.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उज्जैन, 14 जून (हि.स.)। उज्जैन पुलिस ने मुसद्दीपुरा में शुक्रवार को आईपीएल का ऑनलाइन सट्टा खिलाने वालों के यहां बड़ी छापामार कार्यवाई की है। यहां से करीब करीब 15 करोड़ रुपए जब्त किए हैं। यहां बैंक की नोट गिनने की मशीन रातभर लगी रही । इस पूरे मामले में तीन सटोरिये भी गिरफ्तार हुए हैं।<br /><br />उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने शुक्रवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया है कि पुलिस को गुरूवार रात गुप्त सूचना मिली थी कि मुसद्दीपुरा के पीयूष चोपड़ा नामक सटोरिये के घर अकूत सम्पत्ति जमा की जा रही हैं। जिसके बाद नीलगंगा थाने की पुलिस और क्राइम ब्रांच को अलर्ट किया गया। इसके बाद संयुक्त रूप से दोनों ने वहां छापेमारी की। यहां नोटों का अंबार देखकर पुलिस भी दंग रह गई और जानकारी मिलने के बाद इसी के एक और मकान कृष्णा पार्क में भी छापा मारा गया वहां पर भी नोटों का ढ़ेर मिलने के बाद पुलिस रातभर से नोट गिन रही भी कि बाद में बैंक से मशीन बुलाकर करीब 10 से अधिक बैगों में 300 गड्डीयां 15 करोड़ से अधिक के नोट गिने हैं। साथ ही 3.5 करोड़ की विदेशी मुद्रा और सोने के बिस्कुट भी बरामद किए गए हैं। घटना के बाद आरोपितों के मकानों पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है। किसी को भी बाहर और अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है।<br /><br />पुलिस ने इस मामले में पीयूष चोपड़ा के तीन सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है जिनसे पूछताछ की जा रही है। पीयूष चोपड़ा अभी फरार हो गया है। जिसकी तलाश के लिए पुलिस टीम लगा दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/102436/15-crore-cash-found-at-ujjain-ipl-bookie-machine-counted</link>
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                <pubDate>Fri, 14 Jun 2024 19:49:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>भगवान महाकाल का हुआ विशेष श्रृंगार, सूर्य-चंद्र और चंदन का तिलक लगाकर पहनाई मखाने की माला</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">उज्जैन, 26 मार्च (हि.स.)। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के भगवान महाकाल का सबसे पहले जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का भांग चंदन और आभूषणों से श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल के मस्तक पर ॐ और त्रिशूल के साथ चन्दन का त्रिपुंड अर्पित कर श्रृंगार किया गया है।<br /><br />खास बात यह रही कि आज प्रतिपदा की भस्मआरती में बाबा महाकाल का नवीन मुकुट पहनाकर सूर्य, चंद्र और चंदन का तिलक लगाकर बाबा महाकाल का श्रृंगार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/100475/lord-mahakal-was-specially-adorned-with-sun-moon-and-sandalwood-tilak"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d26032024-03.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उज्जैन, 26 मार्च (हि.स.)। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के भगवान महाकाल का सबसे पहले जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का भांग चंदन और आभूषणों से श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल के मस्तक पर ॐ और त्रिशूल के साथ चन्दन का त्रिपुंड अर्पित कर श्रृंगार किया गया है।<br /><br />खास बात यह रही कि आज प्रतिपदा की भस्मआरती में बाबा महाकाल का नवीन मुकुट पहनाकर सूर्य, चंद्र और चंदन का तिलक लगाकर बाबा महाकाल का श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांक कर भस्मी रमाई गई और फल और मिष्ठान का भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गयी। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शनों का लाभ लिया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान श्रद्धालु महाकाल की जयकारे भी लगा रहे थे। पूरा मंदिर बाबा की जयकारे से गुंजायमान हो गया।<br /><br /><strong>आज से बदला आरती का समय</strong><br /><br />परम्परानुसार ज्योर्तिलिंग भगवान महाकाल की आरतियों के समय में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से अश्विन पूर्णिमा तक परिवर्तन होता है। इसमें प्रथम भस्मार्ती प्रात: 04:00 से 06:00 बजे तक, द्वितीय दद्योदक आरती प्रात: 07:00 से 07:45 बजे तक, तृतीय भोग आरती प्रात: 10:00 से 10:45 बजे तक, चतुर्थ संध्या पूजन सायं 05:00 से 05:45 बजे तक, पंचम संध्या आरती सायं 07:00 से 07:45 बजे व शयन आरती रात्रि 10:30 ये 11:00 बजे तक होगी। वहीं भस्मार्ती, संध्या पूजन एवं शयन आरती अपने निर्धारित समय होगी।<br /><br />महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि उड़ीसा के नवरंगपुर में रहने वाली सौभाग्यवती जैन ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और दान में 36 हजार 169 की राशि दी है। दान राशि देने पर महाकालेश्वर प्रबंध समिति की ओर से सौभाग्यवती जैन और उनके साथ आए अन्य श्रद्धालुओं का सम्मान किया गया। इसी तरह छत्तीसगढ़ के रिंकू शर्मा द्वारा मंदिर के पुरोहित रूपम शर्मा व नवनीत शर्मा की प्रेरणा से एमआई कंपनी का एक नग एलईडी टीवी (65 इंच) भगवान महाकाल को अर्पित किया गया। मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी द्वारा प्राप्त कर विधिवत रसीद प्रदान की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Mar 2024 09:05:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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