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                <description>Bhopal RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सेवा और साधना की जीवंत मिसाल: प्रशांत महाराज जी का शिवशक्ति अनुग्रह पीठ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल (मध्य प्रदेश), फरवरी 28: मौन साधना से जनसेवा तक, समाज परिवर्तन का एक दिव्य अभियान</p>
<p>पहाड़ों की गुफाओं में की गई दीर्घकालीन मौन साधना और समाज सेवा का दृढ़ संकल्प — यही शिवशक्ति अनुग्रह पीठ की पहचान है। प्रशांत महाराज जी आज भी अपना अधिकांश समय साधना में व्यतीत करते हैं, किंतु उनकी साधना का प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से पीठ द्वारा संचालित निःशुल्क सेवाओं में स्पष्ट दिखाई देता है।</p>
<p>प्रशांत महाराज जी का स्पष्ट संदेश है — “सेवा ही शिवत्व है।” उनका मानना है कि संत का कर्तव्य लेना नहीं, बल्कि देना होता है। इसी विचारधारा के साथ शिवशक्ति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145803/shivshakti-anugrah-peeth-of-prashant-maharaj-ji-a-living-example"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-02/b28022026-05.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल (मध्य प्रदेश), फरवरी 28: मौन साधना से जनसेवा तक, समाज परिवर्तन का एक दिव्य अभियान</p>
<p>पहाड़ों की गुफाओं में की गई दीर्घकालीन मौन साधना और समाज सेवा का दृढ़ संकल्प — यही शिवशक्ति अनुग्रह पीठ की पहचान है। प्रशांत महाराज जी आज भी अपना अधिकांश समय साधना में व्यतीत करते हैं, किंतु उनकी साधना का प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से पीठ द्वारा संचालित निःशुल्क सेवाओं में स्पष्ट दिखाई देता है।</p>
<p>प्रशांत महाराज जी का स्पष्ट संदेश है — “सेवा ही शिवत्व है।” उनका मानना है कि संत का कर्तव्य लेना नहीं, बल्कि देना होता है। इसी विचारधारा के साथ शिवशक्ति अनुग्रह पीठ समाज के जरूरतमंद वर्ग के लिए अनेक निःशुल्क सेवाएँ संचालित कर रहा है।</p>
<p>प्रशांत महाराज जी कई बार लगातार 41 दिनों तक मौन व्रत के साथ कठोर साधना कर चुके हैं। उन्होंने पहाड़ों, जंगलों और एकांत स्थलों में वर्षों तक ध्यान साधना की है। कुछ वर्ष पूर्व उन्होंने अन्न का त्याग भी किया।</p>
<p>उनका जीवन त्याग, अनुशासन और आत्मसंयम का जीवंत उदाहरण माना जाता है। पीठ की गतिविधियाँ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, वृद्ध सेवा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में व्यापक रूप से कार्य कर रही हैं।</p>
<p>नियमित रूप से निःशुल्क मेडिकल कैंप आयोजित किए जाते हैं। अन्नपूर्णा रसोई के माध्यम से निर्धन एवं असहाय लोगों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जाता है। गौ सेवा हेतु गोशाला संचालित की जा रही है। असहाय व्यक्तियों के लिए आवास की व्यवस्था भी की गई है।</p>
<p>बालकों के लिए वात्सल्य बालधाम, बुजुर्गों के लिए “पूज्य ज्येष्ठजन धाम “, तथा संस्कृत एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु विद्यापीठ संचालित किया जा रहा है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त सामूहिक विवाह, महिलाओं को स्वरोजगार हेतु सहायता, साइकिल वितरण तथा ग्रामीण विकास से जुड़े अनेक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।</p>
<p>पीठ ने आधुनिक तकनीक को भी अपनाया है। स्वास्थ्य सेवाओं एवं सेवा कार्यों को सुव्यवस्थित करने हेतु डिजिटल प्रणाली विकसित की गई है। आने वाले समय में 108 से अधिक गाँवों में सेवा केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएँ सुलभ हो सकें।</p>
<p>पीठ की एक विशेष नीति यह है कि सहायता लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान सर्वोपरि है। कागजी प्रक्रिया को सरल रखा जाता है, ताकि किसी को अपमान या संकोच का अनुभव न हो। पीठ का विश्वास है कि सेवा तभी पूर्ण होती है जब उसमें सम्मान जुड़ा हो।</p>
<p>प्रशांत महाराज जी के विचार उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देते हैं। वे कहते हैं — “सच्ची सेवा में ही ईश्वर की कृपा स्वतः प्राप्त होती है।”<br />साथ ही उनका दिव्य संदेश है — “सेवा से करुणा जन्म लेती है और साधना से आत्मा प्रकाशित होती है। यही शिवशक्ति अनुग्रह पीठ का दिव्य संदेश है।”</p>
<p>शिवशक्ति अनुग्रह पीठ का संकल्प है — “इन कुरीतियों को ज्ञान के प्रकाश से मिटाना और वैदिक सनातन की पुनः स्थापना करना।<br />जहाँ धर्म भय नहीं, बल्कि प्रेम और ज्ञान बने।”</p>
<p>छोटे स्तर से प्रारंभ हुआ यह सेवा कार्य आज हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। किसी को भोजन मिला, किसी को उपचार, किसी बच्चे को शिक्षा का अवसर मिला, तो किसी गाँव को नई दिशा प्राप्त हुई।</p>
<p>आने वाले समय में शिवशक्ति अनुग्रह पीठ का उद्देश्य और अधिक लोगों तक पहुँच बनाकर समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाना है।<br />शिवशक्ति अनुग्रह पीठ यह सिद्ध कर रहा है कि — सच्ची भक्ति वही है जो किसी के जीवन में प्रकाश बनकर प्रवेश करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 18:41:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>द लास्ट सेल्फी - डिजिटल कर्ज़ और परिवारों का विनाश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल (मध्य प्रदेश), फरवरी 16: Orchestro.AI, के संस्थापक और CEO शेखर नटराजन इस लेख में डिजिटल कर्ज़ और सूदखोरों के प्रभाव को समझाते हैं।</p>
<p>12 जुलाई 2023 को भूपेंद्र विश्वकर्मा ने अपने परिवार को एक तस्वीर के लिए एकत्र किया। उस तस्वीर में, जो बाद में पूरे भारत में वायरल हो गई, 38 वर्षीय बीमा एजेंट अपनी 35 वर्षीय पत्नी ऋतु और अपने दो बेटों — 9 वर्षीय ऋषिराज और 3 वर्षीय रितुराज — के साथ खड़े हैं। वे किसी भी मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार की तरह दिखते हैं — साधारण, सामान्य, पूर्ण।</p>
<p>भूपेंद्र ने तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा: "हमारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145611/the-last-selfie-digital-debt-and-the-destruction-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-02/b16022026-02.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल (मध्य प्रदेश), फरवरी 16: Orchestro.AI, के संस्थापक और CEO शेखर नटराजन इस लेख में डिजिटल कर्ज़ और सूदखोरों के प्रभाव को समझाते हैं।</p>
<p>12 जुलाई 2023 को भूपेंद्र विश्वकर्मा ने अपने परिवार को एक तस्वीर के लिए एकत्र किया। उस तस्वीर में, जो बाद में पूरे भारत में वायरल हो गई, 38 वर्षीय बीमा एजेंट अपनी 35 वर्षीय पत्नी ऋतु और अपने दो बेटों — 9 वर्षीय ऋषिराज और 3 वर्षीय रितुराज — के साथ खड़े हैं। वे किसी भी मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार की तरह दिखते हैं — साधारण, सामान्य, पूर्ण।</p>
<p>भूपेंद्र ने तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा: "हमारी आखिरी पारिवारिक तस्वीर।" तस्वीर लेने के बाद उन्होंने अपने बेटों को ज़हर मिला पेय पिला दिया। फिर उन्होंने और ऋतु ने रतिबड़ की शिव विहार कॉलोनी स्थित अपने घर में फांसी लगा ली।</p>
<p>अपने चार पन्नों के सुसाइड नोट में भूपेंद्र ने बताया कि Tata AIG में स्थायी नौकरी और एक स्नेही परिवार होने के बावजूद आखिर उन्हें ऐसा कदम उठाने पर क्या मजबूर कर गया: "उसे कह दो कि कर्ज़ चुका दे, नहीं तो आज उसे नंगा करके सोशल मीडिया पर डाल दूंगा।"</p>
<p>यह अंतिम संदेश था जो उन्हें एक डिजिटल लोन ऐप के रिकवरी एजेंट से मिला था — उन सैकड़ों संदेशों में से एक, जिन्होंने महीनों तक उन्हें प्रताड़ित किया। एजेंटों ने उनका फोन हैक कर लिया, उनके संपर्कों और फोटो गैलरी तक पहुंच बनाई, उनकी तस्वीरों को अश्लील सामग्री में मॉर्फ कर दिया और उन्हें उनके परिवार, मित्रों और सहकर्मियों को भेज दिया।</p>
<p>उन्होंने उनके बुजुर्ग माता-पिता को फोन किया। उनकी पत्नी को धमकियां दीं। यह सब इसलिए किया गया क्योंकि वे कर्ज़ की एक किस्त समय पर नहीं चुका पाए थे।</p>
<p>जाल<br />भूपेंद्र विश्वकर्मा हमेशा से हताश नहीं थे। वे एक बीमा एजेंट के रूप में काम करते थे और ऑनलाइन काम से अतिरिक्त आय अर्जित करते थे। अप्रैल 2023 में उन्हें व्हाट्सऐप पर एक पार्ट-टाइम नौकरी का संदेश मिला — एक ई-कॉमर्स कंपनी, जो कथित रूप से कोलंबिया में COVID के बाद स्थापित हुई थी।</p>
<p>"अतिरिक्त पैसा कमाने की सोचकर मैंने घर से काम करने के लिए हामी भर दी," उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा। कंपनी की वेबसाइट विश्वसनीय लग रही थी। इसके बाद एक सुनियोजित धोखाधड़ी शुरू हुई।</p>
<p>"नौकरी" के तहत उन्हें विभिन्न ऐप्स से लोन लेने के लिए कहा गया, जो कथित रूप से काम का हिस्सा था। इन लोन की राशि उन खातों में ट्रांसफर की गई जिन पर उनका नियंत्रण नहीं था। जब तक उन्हें सच्चाई का एहसास हुआ, वे 17 लाख रुपये के कर्ज़ में डूब चुके थे।</p>
<p>"मैं इस पैसे का उपयोग घर में भी नहीं कर पाया," उन्होंने लिखा। "मुझे पता भी नहीं चला और काम का दबाव बढ़ता गया। जब मेरे पास पैसे खत्म हो गए, तो कंपनी ने लोन और एग्रीमेंट की मांग शुरू कर दी।" जब उन्होंने रुकने की कोशिश की, तो उत्पीड़न शुरू हो गया।</p>
<p>एल्गोरिदमिक आतंक<br />भूपेंद्र को जाल में फंसाने वाले लोन ऐप्स अब एक महामारी का रूप ले चुके हैं। सेवदेहम इंडिया फाउंडेशन के निदेशक प्रवीण कलाईसेलवन के अनुसार, लोन ऐप उत्पीड़न की शिकायतें 2020 में 29,000 से बढ़कर 2021 में 76,000 हो गईं, और 2022 के पहले नौ महीनों में ही 46,000 से अधिक दर्ज हुईं।</p>
<p>सिर्फ एक वर्ष में कम से कम 64 लोगों ने लोन ऐप उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की। वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है — कई मामलों को व्यक्तिगत समस्या मानकर दर्ज ही नहीं किया जाता।</p>
<p>इन ऐप्स की कार्यप्रणाली अब “एल्गोरिदमिक आतंक” में बदल चुकी है:<br />•    2020: खुलासा करने की धमकी, लेकिन संपर्कों को कॉल नहीं।<br />•    2021: रिकवरी एजेंटों ने सीधे पीड़ितों के संपर्कों को कॉल करना शुरू किया।<br />•    2022: आधार और पैन कार्ड की जानकारी संपर्कों को भेजकर पीड़ितों को चोर बताया गया।<br />•    2023: मॉर्फ की गई नग्न तस्वीरें बनाकर संपर्कों में प्रसारित की गईं, एडल्ट वेबसाइट्स पर पोस्ट की गईं।</p>
<p>जब कोई उधारकर्ता ऐप को संपर्क और फोटो तक पहुंच की अनुमति देता है — जो लोन पाने की शर्त होती है — तो वह अपने विनाश के उपकरण खुद सौंप देता है। ऐप्स फोन नंबर, तस्वीरें, लोकेशन डेटा सब कॉपी कर लेते हैं। वे चेहरे की पहचान तकनीक और एआई का उपयोग करके मॉर्फ तस्वीरें बनाते हैं।दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम से संचालित कॉल सेंटर — जिनमें कई मामलों में चीनी निवेशकों की भूमिका पाई गई — इस उत्पीड़न को अंजाम देते हैं।</p>
<p>संकट के चेहरे<br />भूमि सिन्हा, मुंबई: वेतन में देरी के कारण छोटा लोन लिया। सात दिन में चुकाने की उम्मीद थी। देरी होते ही उत्पीड़न शुरू हो गया।<br />"मैं सुन्न हो गई थी… मेरी मॉर्फ की गई नग्न तस्वीरें मेरी बेटी और परिवार के परिचितों को भेज दी गईं।"<br />किरनी मौनिका, 24, तेलंगाना: कई ऐप्स से लोन लिया। लगातार उत्पीड़न के बाद आत्महत्या कर ली।<br />22 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र, बेंगलुरु: सुसाइड नोट में लिखा — "सॉरी, मां-पापा…"<br />कोच्चि का एक परिवार: 12 सितंबर 2023 को एक ही परिवार के चार सदस्यों ने आत्महत्या कर ली।<br />29 वर्षीय टेक कर्मचारी, हैदराबाद: 30 से अधिक ऐप्स से लोन लिया। 400 से अधिक कॉल, 10 व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर सार्वजनिक अपमान।</p>
<p>अंडरकवर जांच<br />BBC की एक डॉक्यूमेंट्री जांच में दिल्ली और नोएडा के दो कॉल सेंटरों में अंडरकवर ऑपरेशन किया गया। वहां पाया गया कि यह व्यक्तिगत क्रूरता नहीं, बल्कि व्यवस्थित उत्पीड़न था।</p>
<p>एक मैनेजर, विशाल चौरसिया, ने कहा कि वह वसूली के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। एक अन्य एजेंट ने सुझाव दिया कि पीड़ित “अपनी बहन, घर या जमीन बेच दें।”जांच में परशुराम तकवे का नाम सामने आया, जो कई कॉल सेंटर संचालित करता था। आत्महत्या के मामलों के बढ़ने के बाद वह और उसकी चीनी पत्नी फरार हो गए।</p>
<p>प्रतिक्रिया की विफलता<br />भूपेंद्र ने मदद मांगने की कोशिश की। उन्होंने भोपाल के साइबर क्राइम कार्यालय का दौरा किया, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली। भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर Shaktikanta Das ने स्वीकार किया कि कई डिजिटल लेंडिंग ऐप्स केंद्रीय बैंक के नियामक दायरे में नहीं हैं।</p>
<p>आरबीआई ने 600 से अधिक अवैध लोन ऐप्स की पहचान की है। Google ने अपने प्ले स्टोर से 2,200 से अधिक ऐप्स हटा दिए हैं। लेकिन ये ऐप्स नए नामों से फिर सक्रिय हो जाते हैं। भूपेंद्र के मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई और 200 से अधिक बैंक खातों का पता चला। लेकिन मुख्य संचालक अब भी फरार हैं।</p>
<p>क्रूरता की संरचना<br />शेखर नटराजन इसे “मूल्यों के बिना अनुकूलन” कहते हैं। "ये सिस्टम सिर्फ एक चीज़ के लिए ऑप्टिमाइज़ हैं — वसूली। हर फीचर उसी उद्देश्य की पूर्ति करता है। कोई संतुलन नहीं, कोई नैतिक रोक नहीं।" यदि सिस्टम में करुणा (मैत्री), धैर्य (सहन), अहिंसा और विवेक जैसे मूल्य होते, तो शायद परिणाम अलग होता।</p>
<p>"भूपेंद्र विश्वकर्मा इसलिए नहीं मरे क्योंकि किसी ने उन्हें नष्ट करने का फैसला किया," नटराजन कहते हैं। "वे इसलिए मरे क्योंकि किसी ने उन्हें बचाने का निर्णय नहीं लिया। सिस्टम दया के लिए बना ही नहीं था।" शिव विहार कॉलोनी में आज एक पारिवारिक तस्वीर खाली घर की दीवार पर टंगी है — चार मुस्कुराते चेहरे, जिन्हें एल्गोरिदम ने मिटा दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 18:10:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमें भी समाज और देश की सेवा के लिए समर्पित रहना चाहिए : पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल, 31 मई (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मध्य प्रदेश के दतिया और सतना हवाई अड्डों सहित कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्मजयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से मध्य प्रदेश में सुविधाएं बढ़ेंगी, विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने अपने संबोधन में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई भारत की सांस्कृतिक विरासत की महान संरक्षक थीं। 250-300 साल पहले,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141061/we-should-also-be-devoted-to-the-service-of-society"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-06/narendra-modi.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल, 31 मई (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मध्य प्रदेश के दतिया और सतना हवाई अड्डों सहित कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्मजयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से मध्य प्रदेश में सुविधाएं बढ़ेंगी, विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने अपने संबोधन में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई भारत की सांस्कृतिक विरासत की महान संरक्षक थीं। 250-300 साल पहले, जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, तब उन्होंने काशी विश्वनाथ सहित देशभर के मंदिरों और तीर्थ स्थलों का पुनर्निर्माण कराया। यह उनके दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति का प्रतीक है। काशी विश्वनाथ मंदिर में आज उनकी मूर्ति स्थापित है, जो उनकी विरासत को दर्शाता है।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई ने प्रभु सेवा और जनसेवा को कभी अलग नहीं माना। वे हमेशा शिवलिंग अपने साथ रखती थीं और चुनौतीपूर्ण समय में भी अपने राज्य को समृद्धि को नई दिशा दी। उनकी सोच थी कि शासन का अर्थ जनता की सेवा करना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है। आज शुरू की गई परियोजनाएं उनकी इस सोच को साकार करती हैं।”</p>
<p>इन परियोजनाओं में इंदौर मेट्रो की शुरुआत और दतिया व सतना को हवाई सेवा से जोड़ना शामिल है। उन्होंने कहा कि ये कदम मध्य प्रदेश के विकास को नई गति देंगे। आज का दिन 140 करोड़ भारतीयों के लिए प्रेरणा का अवसर है। लोकमाता की 300वीं जन्मजयंती हमें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में मातृशक्ति को नमन करते हुए कहा, “मैं मां भारती और देश की माताओं, बहनों और बेटियों को प्रणाम करता हूं। आज यहां इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें-बेटियां हमें आशीर्वाद देने आई हैं। उनके दर्शन से मैं धन्य महसूस कर रहा हूं।”</p>
<p>उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उस दौर में, जब देश पर संकट मंडरा रहा था, न केवल धार्मिक स्थलों का संरक्षण किया, बल्कि अपने शासनकाल में जनता के कल्याण के लिए कई कार्य किए। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व आज भी प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी विरासत को संजोना और उनके आदर्शों पर चलना हम सभी का कर्तव्य है।</p>
<p>उन्होंने मध्य प्रदेश की जनता को इन विकास कार्यों के लिए बधाई दी और कहा कि यह राज्य के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और कहा कि उनकी तरह हमें भी समाज और देश की सेवा के लिए समर्पित रहना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने पहलगाम हमले पर कहा, “पहलगाम में आतंकियों ने केवल भारतीयों का खून ही नहीं बहाया, उन्होंने हमारी संस्कृति पर प्रहार करने की कोशिश की। उन्होंने हमारे समाज को बांटने की कोशिश की। आतंकवादियों ने भारत की नारी शक्ति को चुनौती दी है। ये चुनौती आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए काल बन गई है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंकवादियों के खिलाफ भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और सफल ऑपरेशन है। जहां पाकिस्तान की सेना ने सोचा तक नहीं था, वहां आतंकी ठिकानों को हमारी सेना ने मिट्टी में मिला दिया।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 18:58:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अदाणी समूह, एनटीपीसी, रिलायंस समेत 10 से ज्यादा कंपनियां चार लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल, 24 फरवरी (भाषा) गौतम अदाणी की अगुवाई वाले अदाणी समूह, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली उत्पादक एनटीपीसी समेत 10 से अधिक कंपनियों ने सोमवार को मध्यप्रदेश में करीब चार लाख करोड़ रुपये निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई।</p>
<p>अदाणी ने पंप भंडारण, सीमेंट, खनन, स्मार्ट-मीटर और तापीय ऊर्जा में 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का वादा किया, जबकि रिलायंस ने राज्य में जैव ईंधन परियोजनाएं स्थापित करने के लिए 60,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई।</p>
<p>राज्य के वैश्विक निवेशक सम्मेलन ‘इन्वेस्ट मध्यप्रदेश’ के दौरान अदाणी ने एक नयी स्मार्ट सिटी,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137082/more-than-10-companies-including-adani-group--ntpc--reliance-will-invest-four-lakh-crore-rupees"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/real-estate-business-industry-house-home-smart-city-infrastructure.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल, 24 फरवरी (भाषा) गौतम अदाणी की अगुवाई वाले अदाणी समूह, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली उत्पादक एनटीपीसी समेत 10 से अधिक कंपनियों ने सोमवार को मध्यप्रदेश में करीब चार लाख करोड़ रुपये निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई।</p>
<p>अदाणी ने पंप भंडारण, सीमेंट, खनन, स्मार्ट-मीटर और तापीय ऊर्जा में 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का वादा किया, जबकि रिलायंस ने राज्य में जैव ईंधन परियोजनाएं स्थापित करने के लिए 60,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई।</p>
<p>राज्य के वैश्विक निवेशक सम्मेलन ‘इन्वेस्ट मध्यप्रदेश’ के दौरान अदाणी ने एक नयी स्मार्ट सिटी, एक हवाई अड्डा परियोजना और एक कोयला-गैसीकरण परियोजना में 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की घोषणा की।</p>
<p>उन्होंने कहा,"आज मुझे पंप भंडारण, सीमेंट, खनन, स्मार्ट मीटर और तापीय ऊर्जा के क्षेत्रों में 1,10,000 करोड़ रुपये से अधिक के नये निवेश की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है। ये बहु-क्षेत्रीय निवेश 2030 तक मध्यप्रदेश में 1,20,000 से अधिक नौकरियां पैदा करेंगे।"</p>
<p>अदाणी ने इन परियोजनाओं को ‘मध्यप्रदेश के विकास की साझा यात्रा के मील के पत्थर’ करार देते हुए कहा कि ये परियोजनाएं राज्य को औद्योगिक और आर्थिक तरक्की में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाएंगी।</p>
<p>एनटीपीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) गुरदीप सिंह ने कहा कि उनकी कंपनी, इसकी सहायक कंपनियां और संयुक्त उद्यमों में इसके भागीदार मध्यप्रदेश में दो गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिए 1.20 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।</p>
<p>एनटीपीसी राज्य में नये परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के दो स्थलों में 80,000 करोड़ रुपये का निवेश करने पर भी विचार करेगी।</p>
<p>नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की अवादा के चेयरमैन विनीत मित्तल ने कहा कि कंपनी ने राज्य में सौर, पवन और पंप भंडारण तथा बैटरी भंडारण परियोजनाओं और सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल विनिर्माण सुविधा विकसित करने में 50,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है।</p>
<p>मित्तल ने कहा,"हम अगले तीन से पांच वर्षों की अवधि में सौर, पवन, पंप स्टोरेज और बैटरी में 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।"</p>
<p>अहमदाबाद स्थित टॉरेंट पावर ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में राज्य में 26,500 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई। पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) ने राज्य में आगामी परियोजनाओं के लिए क्रमशः 26,800 करोड़ रुपये और 21,000 करोड़ रुपये की ऋण सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई।</p>
<p>ओपीजी पावर जनरेशन प्राइवेट लिमिटेड ने राज्य में बैटरी स्टोरेज सिस्टम, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और हाइब्रिड (एक ही जगह पर सौर और पवन) बिजली उत्पादन के लिए विनिर्माण सुविधा की स्थापना में 13,400 करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया।</p>
<p>सनदेव रिन्यूएबल्स के संस्थापक सुनील जैन ने राज्य में 750 मेगावॉट का नया डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए अगले पांच वर्षों में 4,330 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की इच्छा व्यक्त की।</p>
<p>भोपाल में जारी दो दिवसीय वैश्विक निवेशक सम्मेलन के मंगलवार को आयोजित समापन समारोह में राज्य सरकार द्वारा अलग-अलग कंपनियों की प्रतिबद्धताओं की पूरी सूची जारी किए जाने के बाद निवेश का अंतिम आंकड़ा सामने आएगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 21:17:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विमान में ‘टूटी’ सीट को लेकर शिवराज ने की एअर इंडिया की आलोचना, जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल/मुंबई, 22 फरवरी (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को एअर इंडिया की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें ‘टूटी और धंसी हुई’ सीट आवंटित की गई।</p>
<p>शिवराज चौहान ने साथ ही कहा कि यात्रियों से पूरा पैसा वसूलने के बाद एयरलाइन का उन्हें खराब और कष्टदायक सीट पर बैठाना अनैतिक है।</p>
<p>चौहान द्वारा ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिये अपना अनुभव साझा करने के बाद एअर इंडिया ने ‘असुविधा’ के लिए माफी मांगी है और घटना की 'गहन' जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p>चौहान ने कहा कि वह पूसा किसान मेले का उद्घाटन करने, कुरुक्षेत्र में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/136302/shivraj-ordered-a-criticism-of-air-india-regarding-broken-seat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/shivraj-singh-chauhan.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल/मुंबई, 22 फरवरी (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को एअर इंडिया की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें ‘टूटी और धंसी हुई’ सीट आवंटित की गई।</p>
<p>शिवराज चौहान ने साथ ही कहा कि यात्रियों से पूरा पैसा वसूलने के बाद एयरलाइन का उन्हें खराब और कष्टदायक सीट पर बैठाना अनैतिक है।</p>
<p>चौहान द्वारा ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिये अपना अनुभव साझा करने के बाद एअर इंडिया ने ‘असुविधा’ के लिए माफी मांगी है और घटना की 'गहन' जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p>चौहान ने कहा कि वह पूसा किसान मेले का उद्घाटन करने, कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक खेती मिशन की बैठक में भाग लेने और चंडीगढ़ में किसान संगठन के प्रतिनिधियों से चर्चा करने के लिए भोपाल से दिल्ली जा रहे थे।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह भोपाल से दिल्ली जाने वाली एअर इंडिया की उड़ान एआई436 में सवार हुए थे।</p>
<p>मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "मुझे सीट क्रमांक 8सी आवंटित हुई। मैं जाकर सीट पर बैठा, सीट टूटी और अंदर धंसी हुई थी। बैठना तकलीफदायक था। जब मैंने विमानकर्मियों से पूछा कि खराब सीट थी तो आवंटित क्यों की? उन्होंने बताया कि प्रबंधन को पहले सूचित कर दिया था कि ये सीट ठीक नहीं है, इसका टिकट नहीं बेचना चाहिए। ऐसी एक नहीं और भी सीटें हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा,‘‘ सहयात्रियों ने बहुत आग्रह किया कि मैं उनसे सीट बदल कर अच्छी सीट पर बैठ जाऊं लेकिन मैं अपने लिए किसी और मित्र को तकलीफ क्यों दूं, मैंने फैसला किया कि मैं इसी सीट पर बैठकर अपनी यात्रा पूरी करूंगा। मेरी धारणा थी कि टाटा प्रबंधन के हाथ में लेने के बाद एअर इंडिया की सेवा बेहतर हुई होगी, लेकिन ये मेरा भ्रम निकला।’’</p>
<p>उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, ‘‘मुझे बैठने में कष्ट की चिंता नहीं है लेकिन यात्रियों से पूरा पैसा वसूलने के बाद उन्हें खराब और कष्टदायक सीट पर बैठाना अनैतिक है। क्या ये यात्रियों के साथ धोखा नहीं है? क्या आगे किसी यात्री को ऐसा कष्ट न हो, इसके लिए एअर इंडिया प्रबंधन कदम उठाएगा या यात्रियों की जल्दी पहुंचने की मजबूरी का फायदा उठाता रहेगा।’’</p>
<p>केंद्रीय मंत्री को हुई असुविधा के लिए "खेद" व्यक्त करते हुए, एअर इंडिया के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, "हम इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "एअर इंडिया माननीय केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी को भोपाल से दिल्ली की उड़ान में हुई असुविधा के लिए गहरा खेद व्यक्त करता है।"</p>
<p>एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, "यह उस सेवा के मानक को नहीं दर्शाता है जिसे हम अपने मेहमानों को प्रदान करने का प्रयास करते हैं, और हम इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।"</p>
<p>चौहान के पोस्ट पर एअर इंडिया ने ‘एक्स’ पर जवाब दिया, "प्रिय महोदय, आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है। कृपया आश्वस्त रहें कि हम भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए इस मामले पर ध्यान दे रहे हैं। हम आपसे बात करने का अवसर चाहते हैं कृपया हमें संदेश भेजें कि आपसे कब बात हो सकती है।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/136302/shivraj-ordered-a-criticism-of-air-india-regarding-broken-seat</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2025 15:19:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सैफ और परिवार को विरासत में मिली 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के भविष्य पर अनिश्चितता: वकील</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल, 23 जनवरी (भाषा) अभिनेता सैफ अली खान और उनके परिवार को विरासत में मिली भोपाल के पूर्व शासकों की 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का भविष्य अधर में लटका हुआ है, क्योंकि शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उनके वकीलों ने यह जानकारी दी।</p>
<p>वकीलों ने बुधवार को कहा कि अगर भोपाल के नवाब के उत्तराधिकारियों द्वारा भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर नहीं की जाती है, तो संपत्ति केंद्र के नियंत्रण में आ सकती हैं।</p>
<p>अभी यह स्पष्ट नहीं है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/124498/uncertainty-over-future-of-property-worth-rs-15-000-crore-inherited-by-saif-and-family--lawyer"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/7354_court-advocate-vakil-justice.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल, 23 जनवरी (भाषा) अभिनेता सैफ अली खान और उनके परिवार को विरासत में मिली भोपाल के पूर्व शासकों की 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का भविष्य अधर में लटका हुआ है, क्योंकि शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उनके वकीलों ने यह जानकारी दी।</p>
<p>वकीलों ने बुधवार को कहा कि अगर भोपाल के नवाब के उत्तराधिकारियों द्वारा भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर नहीं की जाती है, तो संपत्ति केंद्र के नियंत्रण में आ सकती हैं।</p>
<p>अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 13 दिसंबर, 2024 के आदेश के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले मुंबई स्थित शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के समक्ष अपील दायर की है या नहीं।</p>
<p>सैफ अली खान की मां और मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर (पटौदी) और अन्य ने भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक के 24 फरवरी, 2015 के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसमें भोपाल नवाब की संपत्ति को ‘‘शत्रु संपत्ति’’ कहा गया था।</p>
<p>गृह मंत्रालय के अधीन प्राधिकरण ने इस आधार पर अपना फैसला सुनाया था कि नवाब मुहम्मद हमीदुल्ला खान की सबसे बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान बेगम विभाजन के बाद पाकिस्तान चली गई थीं। इसलिए, ऐसी सभी संपत्ति जो उन्हें विरासत में मिलनी थीं, शत्रु संपत्ति हैं और भारत के शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक के संरक्षण में हैं।</p>
<p>हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता और नवाबों की संपत्ति के विलय के विशेषज्ञ जगदीश छावनी ने 10 जनवरी, 1962 के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि 1960 में हमीदुल्लाह खान की मृत्यु के बाद भारत सरकार ने साजिदा सुल्तान बेगम को ‘‘ऐसी शासक के रूप में मान्यता दी, जो नवाब हमीदुल्लाह की सभी निजी संपत्ति, चल और अचल, की एकमात्र उत्तराधिकारी हैं और भारत सरकार को ऐसी संपत्ति को साजिदा सुल्तान बेगम को हस्तांतरित करने पर कोई आपत्ति नहीं है।’’</p>
<p>उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि साजिदा सुल्तान बेगम नवाब हमीदुल्लाह की दूसरी बेटी हैं और चूंकि सबसे बड़ी बेटी (आबिदा) पाकिस्तान चली गईं, इसलिए साजिदा ऐसी सभी संपत्ति की मालिक बन गईं।</p>
<p>बाद में साजिदा के बेटे मंसूर अली खान पटौदी (टाइगर पटौदी) इन संपत्ति के उत्तराधिकारी बने और उनके बाद सैफ अली खान इन संपत्ति के मालिक हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 15,000 करोड़ रुपये है।</p>
<p>लेकिन शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक के आदेश के बाद स्वामित्व का अधिकार विवादित हो गया, जिसे शर्मिला टैगोर (सैफ अली खान की की मां और मंसूर अली खान पटौदी की पत्नी) ने 2015 में उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।</p>
<p>सरकारी वकील ने 13 दिसंबर, 2024 को सुनवाई के दौरान बताया, ‘‘वर्ष 2017 में शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 को पूर्वप्रभावी तिथि से निरस्त कर दिया गया है और शत्रु संपत्ति के संबंध में विवादों के निपटारे के लिए अपीलीय प्राधिकरण का गठन किया गया है।’’</p>
<p>न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने 13 दिसंबर, 2024 को अपने आदेश में कहा, ‘‘यह निर्देश दिया जाता है कि अगर आज (13 दिसंबर) से 30 दिनों के भीतर अभिवेदन दायर किया जाता है, तो अपीलीय प्राधिकरण सीमा के पहलू पर ध्यान नहीं देगा और अपील को उसके गुण-दोष के आधार पर निपटारा करेगा।’’</p>
<p>इसमें कहा गया है, ‘‘उक्त शर्तों के साथ याचिकाओं का निपटारा किया जाता है।’’</p>
<p>हालांकि, भोपाल के जिलाधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालय का आदेश नहीं देखा है और सभी प्रासंगिक विवरण मिलने के बाद ही कोई टिप्पणी करेंगे।</p>
<p>अधिवक्ता छावनी ने कहा कि अगर सैफ अली खान के परिवार ने आदेश की तारीख से 30 दिनों की निर्धारित अवधि के दौरान अपील दायर नहीं की है, तो वे (खान परिवार) अब भी अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं और हाल में हुई घटना (अभिनेता पर उनके मुंबई आवास पर हमला) सहित विभिन्न आकस्मिक कारणों का हवाला देते हुए समय विस्तार का अनुरोध कर सकते हैं।</p>
<p>सैफ अली खान और उनके परिवार को विरासत में मिली संपत्ति में नूर-उस-सबा पैलेस, दार-उस-सलाम, हबीबी का बंगला, अहमदाबाद पैलेस और फ्लैग स्टाफ हाउस शामिल हैं।</p>
<p>भारत-पाकिस्तान युद्ध (1965) के बाद संसद में शत्रु संपत्ति अधिनियम पारित किया गया था, ताकि पाकिस्तान चले गए लोगों द्वारा भारत में छोड़ी गई संपत्ति को विनियमित किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 14:05:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>40 साल बाद, भोपाल की यूनियन कार्बाइड कारखाने से जहरीला कचरा निपटान के लिए ले जाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>धार (मध्य प्रदेश), दो जनवरी (भाषा) भोपाल गैस त्रासदी के चालीस साल बाद, बंद हो चुके यूनियन कार्बाइड कारखाने से 377 टन खतरनाक कचरे को निपटान के लिए धार जिले में स्थित पीथमपुर की एक इकाई में ले जाया गया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>बुधवार रात करीब नौ बजे जहरीले कचरे को 12 सीलबंद कंटेनर ट्रकों में 'ग्रीन कॉरिडोर' के जरिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में ले जाया गया।</p>
<p>धार के पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने पीटीआई-भाषा को फोन पर बताया कि कड़ी सुरक्षा के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/116970/after-40-years--toxic-waste-from-bhopal-s-union-carbide-factory-taken-for-disposal"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-09/5782_cortpi.jpg" alt=""></a><br /><p>धार (मध्य प्रदेश), दो जनवरी (भाषा) भोपाल गैस त्रासदी के चालीस साल बाद, बंद हो चुके यूनियन कार्बाइड कारखाने से 377 टन खतरनाक कचरे को निपटान के लिए धार जिले में स्थित पीथमपुर की एक इकाई में ले जाया गया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>बुधवार रात करीब नौ बजे जहरीले कचरे को 12 सीलबंद कंटेनर ट्रकों में 'ग्रीन कॉरिडोर' के जरिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में ले जाया गया।</p>
<p>धार के पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने पीटीआई-भाषा को फोन पर बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच बृहस्पतिवार सुबह करीब 4.30 बजे वाहन पीथमपुर स्थित एक फैक्ट्री पहुंचे, जहां कचरे का निपटान किया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ट्रक फिलहाल पीथमपुर स्थित फैक्ट्री परिसर में खड़े हैं।</p>
<p>भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने बुधवार को बताया, "धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र तक वाहनों की करीब सात घंटे की यात्रा के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था।"</p>
<p>उन्होंने बताया कि रविवार से करीब 100 लोगों ने 30 मिनट की शिफ्ट में काम करके कचरे को पैक कर ट्रकों में रखा।</p>
<p>सिंह ने बताया, "उनकी स्वास्थ्य जांच की गई और हर 30 मिनट में उन्हें आराम दिया गया।"</p>
<p>दो और तीन दिसंबर, 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड कीटनाशक कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था, जिसमें कम से कम 5,479 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग गंभीर और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।</p>
<p>मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने तीन दिसंबर को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद भोपाल में यूनियन कार्बाइड स्थल को खाली न करने के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उच्च न्यायालय ने कचरे को हटाने के लिए चार सप्ताह की समयसीमा तय करते हुए कहा कि गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी अधिकारी "निष्क्रियता की स्थिति" में हैं।</p>
<p>उच्च न्यायालय की पीठ ने सरकार को चेताया था कि अगर उसके निर्देश का पालन नहीं किया गया तो उसके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p>सिंह ने कहा, "अगर सब कुछ ठीक पाया गया तो कचरा तीन महीने के भीतर जला दिया जाएगा। अन्यथा, इसमें नौ महीने भी लग सकते हैं।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि शुरुआत में कुछ कचरे को पीथमपुर में निपटान इकाई में जलाया जाएगा और अवशेष (राख) की जांच की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि कोई हानिकारक तत्व बचा है या नहीं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भस्मक (भट्ठी) से निकलने वाला धुआं विशेष चार-परत फिल्टर से होकर गुजरेगा ताकि आसपास की हवा प्रदूषित न हो। एक बार जब यह पुष्टि हो जाती है कि जहरीले तत्वों का कोई निशान नहीं बचा है, तो राख को दो-परत वाली झिल्ली से ढक दिया जाएगा और यह सुनिश्चित करने के लिए इसे गहरे गड्ढे में डाल दिया जाएगा कि यह किसी भी तरह से मिट्टी और पानी के संपर्क में न आए।</p>
<p>सिंह ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की देखरेख में विशेषज्ञों की एक टीम इस प्रक्रिया को अंजाम देगी।</p>
<p>कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि 2015 में पीथमपुर में परीक्षण के तौर पर 10 टन यूनियन कार्बाइड कचरे को जलाया गया था, जिसके बाद आस-पास के गांवों की मिट्टी, भूमिगत जल और जल स्रोत प्रदूषित हो गए।</p>
<p>सिंह ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि पीथमपुर में कचरे के निपटान का फैसला 2015 के परीक्षण की रिपोर्ट और सभी आपत्तियों की जांच के बाद ही लिया गया है। उन्होंने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है।</p>
<p>करीब 1.75 लाख की आबादी वाले शहर पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड कचरे के निपटान के विरोध में रविवार को बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध मार्च निकाला।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jan 2025 14:59:29 +0530</pubDate>
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                <title>भोपाल गैस त्रासदी: 28 न्यायाधीशों के सुनवाई करने के बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(लेमुएल लाल )</p>
<p>भोपाल, चार दिसंबर (भाषा) भोपाल गैस त्रासदी के चालीस साल बाद भी इसके पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया है। इस मामले में करीब 25 साल तक 19 न्यायाधीशों ने सुनवाई की और 2010 के फैसले के खिलाफ अपील पर अब तक नौ न्यायाधीश सुनवाई कर चुके हैं।</p>
<p>वर्ष 1984 में दो और तीन दिसंबर की दरमियानी रात ‘यूनियन कार्बाइड’ के कीटनाशक संयंत्र से अत्यधिक जहरीली गैस ‘मिथाइल आइसोसाइनेट’ (एमआईसी) का रिसाव होने से 5,479 लोगों की मौत हो गई और पांच लाख से अधिक लोग अपंग हो गए।</p>
<p>मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/106302/bhopal-gas-tragedy--victims-could-not-get-justice-even-after-hearing-by-28-judges"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k02122024-09.jpg" alt=""></a><br /><p>(लेमुएल लाल )</p>
<p>भोपाल, चार दिसंबर (भाषा) भोपाल गैस त्रासदी के चालीस साल बाद भी इसके पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया है। इस मामले में करीब 25 साल तक 19 न्यायाधीशों ने सुनवाई की और 2010 के फैसले के खिलाफ अपील पर अब तक नौ न्यायाधीश सुनवाई कर चुके हैं।</p>
<p>वर्ष 1984 में दो और तीन दिसंबर की दरमियानी रात ‘यूनियन कार्बाइड’ के कीटनाशक संयंत्र से अत्यधिक जहरीली गैस ‘मिथाइल आइसोसाइनेट’ (एमआईसी) का रिसाव होने से 5,479 लोगों की मौत हो गई और पांच लाख से अधिक लोग अपंग हो गए।</p>
<p>मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि सात जून 2010 को अधीनस्थ अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए सात लोगों में से तीन की मृत्यु हो चुकी है जिनमें ‘यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड’ (यूसीआईएल) के पूर्व अध्यक्ष केशुब महिंद्रा, यूसीआईएल के पूर्व प्रबंध निदेशक विजय प्रभाकर गोखले और यूसीआईएल भोपाल के एक डिविजन के अधीक्षक केवी शेट्टी शामिल हैं।</p>
<p>इन दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए (लापरवाही से मौत), 304-द्वितीय (गैर इरादतन हत्या), 336, 337 और 338 (घोर लापरवाही) के तहत दोषी ठहराया गया था।</p>
<p>अदालत ने सात दोषियों को दो साल कैद की सजा सुनाई और उन पर 1,01,750 रुपये का जुर्माना लगाया।</p>
<p>मामले में फैसले के बाद अभियोजन एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय में सुधारात्मक याचिका दायर की लेकिन शीर्ष अदालत ने इसे खारिज कर दिया।</p>
<p>जमानत पर रिहा दोषियों ने 2010 के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की जिसमें कहा गया था कि वे निर्दोष हैं उन्हें बरी किया जाना चाहिए।</p>
<p>वकील ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने भी प्रत्येक मौत के आधार पर दोषियों की सजा बढ़ाने का अनुरोध करते हुए अपील दायर की।</p>
<p>फोन पर संपर्क करने पर सीबीआई के वकील सियाराम मीणा ने मामले की स्थिति पर बात करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें मीडिया के साथ कोई भी विवरण साझा करने का अधिकार नहीं है।</p>
<p>अपील की सुनवाई 2010 में शुरू हुई।</p>
<p>जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष काकड़े ने 2011 तक अपील की सुनवाई की। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में उनकी पदोन्नति के बाद सत्र न्यायाधीश सुषमा खोसला ने सेवानिवृत्त होने से पहले 2015 तक अपीलीय न्यायालय की अध्यक्षता की।</p>
<p>उनके बाद, न्यायाधीश राजीव दुबे ने उच्च न्यायालय में पदोन्नत होने से पहले अप्रैल 2015 से अक्टूबर 2016 तक मामले में सुनवाई की। इसके बाद, सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र शुक्ला आए और उन्होंने उच्च न्यायालय में पदोन्नत होने से पहले नवंबर 2018 तक अपीलों की सुनवाई की।</p>
<p>उनके बाद, सत्र न्यायाधीश राजेंद्र वर्मा ने जून 2021 तक सुनवाई की और फिर वह भी उच्च न्यायालय में पदोन्नत हो गए। उनके बाद, गिरिबाला सिंह ने सेवानिवृत्त होने से पहले फरवरी 2023 तक मामले की सुनवाई की।</p>
<p>सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के रूप में नियुक्त होने से पहले नवंबर 2023 तक मामले की सुनवाई की। उनके बाद सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्रा अक्टूबर 2024 तक सुनवाई करते रहे, उसके बाद उनका कटनी जिला न्यायालय में तबादला कर दिया गया।</p>
<p>फिलहाल जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने उच्च न्यायालय से भोपाल जिला न्यायालय में वापस आकर मामले की सुनवाई फिर से शुरू कर दी है।</p>
<p>अपील पर 2010 की सुनवाई से पहले, दिसंबर 1987 में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद भोपाल गैस त्रासदी मामले में 19 न्यायाधीशों ने सुनवाई की थी।</p>
<p>सीबीआई ने एक दिसंबर 1987 को यहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ए सिसोदिया की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।</p>
<p>सीजेएम आर सी मिश्रा ने 30 सितंबर 1988 से मामले की सुनवाई की। उनके बाद लाल सिंह भाटी ने जुलाई 1989 से नवंबर 1991 तक मामले की सुनवाई की। इसके बाद सीजेएम गुलाब शर्मा ने 22 जून 1992 को इसे सत्र न्यायालय को भेज दिया।</p>
<p>इसके बाद, 13 जुलाई 1992 से सत्र न्यायाधीश एस पी खरे ने इसकी सुनवाई की।</p>
<p>यह मामला 17 जुलाई 1992 और 29 नवंबर 1995 को दो और न्यायाधीशों के समक्ष आया। सत्र न्यायाधीश आर.जी. फड़के ने 24 सितंबर 1996 से मामले की सुनवाई की और उच्चतम न्यायालय द्वारा 1996 में आरोपों को हल्का किए जाने के बाद मामले को सीजेएम की अदालतों में वापस भेज दिया गया।</p>
<p>न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहन पी तिवारी के समक्ष 21 फरवरी 2009 को आने से पहले सात और न्यायाधीशों ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने आठ आरोपियों को दोषी करार दिया।</p>
<p>तत्कालीन सीजेएम मोहन पी तिवारी ने सातों आरोपियों को दो साल की कैद की सजा सुनाई और उन पर 1,01,750 रुपये का जुर्माना लगाया।</p>
<p>भोपाल गैस त्रासदी में प्राथमिकी तीन दिसंबर 1984 को दर्ज की गई थी और मामला छह दिसंबर 1984 को सीबीआई को सौंप दिया गया था।</p>
<p>फैसला आने के कुछ ही मिनटों बाद, तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने नयी दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में फैसला आने में लगे इतने लंबे समय को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई और उचित जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।</p>
<p>उन्होंने उस समय कहा था, ‘‘यह एक ऐसा मामला है जहां न्याय में देरी हुई और व्यावहारिक रूप से न्याय नहीं मिला।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि उचित जांच करके दोषियों को सजा मिलनी चाहिए तथा अधिकतम सजा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि त्वरित अदालतों की जरूरत है।</p>
<p>मंत्री ने इस त्रासदी को एक विशेष उद्योग की गलती के कारण गंभीर आपदा बताया था।</p>
<p>इस बीच, भोपाल के एक प्रसिद्ध वकील ने कहा कि उच्च न्यायालय को अपील के लिए एक न्यायाधीश नियुक्त करना चाहिए, ताकि इसका जल्द निपटारा हो सके।</p>
<p>खारी</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Dec 2024 16:50:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भोपाल गैस त्रासदी : डकैतों के मिर्च जलाने की अफवाह से लेकर हजारों लोगों की दर्दनाक मौत का मंजर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>(मनीष श्रीवास्तव)</strong></p>
<p>भोपाल, दो दिसंबर (भाषा) भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने के एक पूर्व वैज्ञानिक के लिए तीन दिसंबर, 1984 एक सामान्य कार्य दिवस था। इस दिन की शुरुआत बस के इंतजार से होती है, सूचना के सीमित स्रोतों के दिनों में उन्हें सबसे भयानक गैस रिसाव त्रासदी के बारे में उस सुबह पता ही नहीं था।</p>
<p>नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर वैज्ञानिक ने बताया कि उस दिन वह सुबह लगभग आठ बजे अरेरा कॉलोनी में अपने घर से निकले और उम्मीद की कि वह यूनियन कार्बाइड कारखाने तक पहुंचने के लिए अपनी बस पकड़ लेंगे हालांकि, जैसे-जैसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/105794/bhopal-gas-tragedy-from-rumor-of-dacoits-burning-chilli-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k02122024-09.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>(मनीष श्रीवास्तव)</strong></p>
<p>भोपाल, दो दिसंबर (भाषा) भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने के एक पूर्व वैज्ञानिक के लिए तीन दिसंबर, 1984 एक सामान्य कार्य दिवस था। इस दिन की शुरुआत बस के इंतजार से होती है, सूचना के सीमित स्रोतों के दिनों में उन्हें सबसे भयानक गैस रिसाव त्रासदी के बारे में उस सुबह पता ही नहीं था।</p>
<p>नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर वैज्ञानिक ने बताया कि उस दिन वह सुबह लगभग आठ बजे अरेरा कॉलोनी में अपने घर से निकले और उम्मीद की कि वह यूनियन कार्बाइड कारखाने तक पहुंचने के लिए अपनी बस पकड़ लेंगे हालांकि, जैसे-जैसे मिनट बीतते गए और सुबह 8:30 बजे तक बस नहीं पहुंची, तो उनकी बेचैनी बढ़ने लगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उस वक्त इंटरनेट, मोबाइल फोन या सोशल मीडिया की अनुपस्थिति में, लोग अपने शहर और देश में होने वाली घटनाओं के बारे में जानकारी के लिए लैंडलाइन फोन, टेलीग्राम, रेडियो बुलेटिन, समाचार पत्र, पान और चाय की दुकानों पर निर्भर रहते थे।</p>
<p>वैज्ञानिक ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘जब हम बस का इंतजार कर रहे थे, तो एक राहगीर ने हमें घबराहट में बताया कि गैस लीक हो गई है, जिससे कई लोगों की मौत हो गई है। मैंने पान की दुकान पर गैस त्रासदी के बारे में सुना। अफवाहें जंगल में आग की तरह फैल रही थीं, और हमें कुछ समझ नहीं आ रहा था।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मैंने और अन्य लोगों ने ऑटो-रिक्शा में कारखाने जाने का फैसला किया। हमने देखा कि लोग श्यामला हिल्स के ऊपर स्थित कार्यालय के रास्ते में इधर-उधर भाग रहे थे।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘यूनियन कार्बाइड कारखाने में, हमने गेट पर पुलिस की तैनाती देखी। पुलिस ने हमें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी।’’</p>
<p>वैज्ञानिक ने कहा कि उन्होंने सुना कि संयंत्र से गैस लीक हो गई है और सरकारी हमीदिया अस्पताल में ‘‘शवों का ढेर लगा हुआ है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार, कंपनी प्रबंधन ने हमें एक संदेश के माध्यम से सूचित किया कि कारखाना दिन भर बंद रहेगा और हमें घर जाने के लिए कहा गया।’’</p>
<p>वैज्ञानिक ने कहा कि वह सुबह करीब 9:45 बजे के आसपास घर लौट आए। कारखाने के कर्मचारियों को अपने घरों से बाहर न निकलने के लिए कहा गया था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘लोगों के बीच गुस्से को देखते हुए हमें अपनी सुरक्षा के मद्देनजर कार्बाइड में काम करने वाले अपने नाम-पट्टिका हटाने के लिए भी कहा गया।’’</p>
<p>वरिष्ठ प्रेस फोटोग्राफर गोपाल जैन ने कहा कि किसी को नहीं पता था कि वास्तव में क्या हुआ और अफवाहें तेजी से उड़ रही थीं।</p>
<p>उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘रात करीब 2:30 बजे, एक महिला रिश्तेदार लाल और सूजी आंखों के साथ टीन शेड इलाके में मेरे घर आई। उसने हमें बताया कि डकैतों ने बड़ी संख्या में लाल मिर्च जलाकर पुराने भोपाल इलाके पर हमला किया है। उसने कहा कि पूरा इलाका धुएं में डूबा हुआ है।’’</p>
<p>जैन तुरंत अपने घर से बाहर निकले और देखा कि कई लोग पुराने भोपाल इलाके से नए भोपाल की ओर भागे चले आ रहे हैं।</p>
<p>जैन ने याद करते हुए कहा, ‘‘तीन दिसंबर की सुबह जब मैं हमीदिया अस्पताल गया, तो बात साफ हो गई। वहां अफरा-तफरी का माहौल था। अस्पताल में कई शव पड़े थे।’’</p>
<p>उन्होंने बताया कि उन्हें अस्पताल में गैस रिसाव की त्रासदी के बारे में पता चला।</p>
<p>दो-तीन दिसंबर, 1984 की मध्यरात्रि को यूनियन कार्बाइड संयंत्र से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक हुई, जिसमें 5,474 लोग मारे गए और पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/105794/bhopal-gas-tragedy-from-rumor-of-dacoits-burning-chilli-to</link>
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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 20:27:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भोपाल : पंडित धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा में शामिल हुए यूपी के पूर्व मंत्री राजा भैया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>निवाड़ी/भोपाल, 28 नवंबर (हि.स.)। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा निकाली जा रही सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा आठवें दिन गुरुवार सुबह निवाड़ी जिला मुख्यालय से बरुआ सागर के लिए रवाना हुई। पदयात्रा में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक यात्रा से सब कुछ बदलना मुश्किल है। समाज में जागरुकता के लिए यह एक शुरुआत है। ऐसी और यात्राओं की जरूरत है, ताकि समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सके।<br /><br />राजा भैया ने कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/105614/bhopal-former-up-minister-raja-bhaiya-joins-pandit-dhirendra-shastris"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-11/b28112024-03.jpg" alt=""></a><br /><p>निवाड़ी/भोपाल, 28 नवंबर (हि.स.)। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा निकाली जा रही सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा आठवें दिन गुरुवार सुबह निवाड़ी जिला मुख्यालय से बरुआ सागर के लिए रवाना हुई। पदयात्रा में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक यात्रा से सब कुछ बदलना मुश्किल है। समाज में जागरुकता के लिए यह एक शुरुआत है। ऐसी और यात्राओं की जरूरत है, ताकि समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सके।<br /><br />राजा भैया ने कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से यह बहुत ही सकारात्मक और सराहनीय पहल है। कुछ नेता जानबूझकर जातिवाद फैला रहे हैं, जिससे हमारा राष्ट्र कमजोर हो। जातिवाद न तो देश हित में है और न ही हिंदू हित में है। उसका निर्मूलन होना ही चाहिए। ये यात्रा धर्म हित और राष्ट्रहित में है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा हिंदू समाज को एकजुट करने का एक बड़ा प्रयास है। जब हिंदू समाज संगठित होगा, तो न केवल धर्म, बल्कि राष्ट्र भी मजबूत होगा। इस तरह की यात्राओं का सिलसिला जारी रहना चाहिए, ताकि हिंदू समाज और राष्ट्र दोनों को नई दिशा मिल सके।<br /><br />निवाड़ी के रेस्ट एरिया में रात्रि विश्राम के बाद यात्रा गुरुवार सुबह बरुआ सागर के लिए रवाना हुई। इस यात्रा में मप्र सरकार के मंत्री राव उदय प्रताप सिंह एवं पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी शामिल हुए और पंडित धीरेंद्र शास्त्री के साथ चल रहे हैं। यात्रा रवाना होने से पहले निवाड़ी रेस्ट एरिया में ध्वज फहराने के साथ राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इस दौरान यूपी के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, मप्र के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, निवाड़ी विधायक अनिल जैन भी मौजूद रहे।<br /><br />गौरतलब है कि हिंदुओं के बीच मौजूद जाति भेदभाव, छुआछूत मिटाने और समाज में जागरुकता लाने के लिए उद्देश्य से पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री यह नौ दिवसीय पदयात्रा निकाली जा रही है। गत 21 नवंबर को बागेश्वर धाम से शुरू हुई 160 किमी की यह यात्रा 29 नवंबर को प्रसिद्ध पर्यटन नगरी ओरछा के रामराजा सरकार के मंदिर में समाप्त हो गई। गुरुवार को यात्रा का आठवां दिन है।<br /><br />यात्रा में एक रथ पर श्रीराम की धनुष-बाण लिए हुए, अयोध्या समेत अन्य झांकियां भी शामिल हैं। यह यात्रा आज 15 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर रात में ओरछा के करीब ग्राम तिगेला पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम होगा। शुक्रवार सुबह यह यात्रा ओरछा के लिए रवाना होगी और करीब आठ किलोमीटर की यात्रा पूरा कर रामराजा दरबार में यात्रा का विधि-विधान से समापन होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Nov 2024 15:53:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल : मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फिर बढ़ा चीतों का कुनबा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल, 25 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान से एक खुशखबरी आई है। यहां केन्द्र सरकार द्वारा चीता प्रोजेक्ट के तहत बसाए गए चीतों का कुनबा एक बार फिर बढ़ गया है। दरअसल, दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता निर्वा ने कूनो में चार शावकों को जन्म दिया है। इसके बाद यहां चीतों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। इनमें 12 वयस्क और 12 शावक शामिल हैं।<br /><br />सिंह परियोजना के सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दक्षिण अफ्रीका से लाई मादा चीता निर्वा ने गत 22 नवंबर को चार शावकों को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/105571/bhopal-the-population-of-leopards-increased-again-in-kuno-national"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-11/b25112024-09.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल, 25 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान से एक खुशखबरी आई है। यहां केन्द्र सरकार द्वारा चीता प्रोजेक्ट के तहत बसाए गए चीतों का कुनबा एक बार फिर बढ़ गया है। दरअसल, दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता निर्वा ने कूनो में चार शावकों को जन्म दिया है। इसके बाद यहां चीतों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। इनमें 12 वयस्क और 12 शावक शामिल हैं।<br /><br />सिंह परियोजना के सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दक्षिण अफ्रीका से लाई मादा चीता निर्वा ने गत 22 नवंबर को चार शावकों को जन्म दिया है।<br /><br />गौरतलब है कि भारत सरकार ने चीता प्रोजेक्ट के तहत कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीते लाकर बसाए थे। इनमें से प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2022 में अपने जन्मदिन पर नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनों नेशनल पार्क के बाड़ों में रिलीज किया था। इसके बाद 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से लाए गए थे। इनमें मादा चीता निर्वा भी शामिल है। साउथ अफ्रीका से लाई गई निर्वा को मई 2023 में पहली बार कूनो के खुले जंगल में छोड़ा गया था। इसके पहले निर्वा को बाड़े में ही दूसरे चीतों के साथ रखा गया था।<br /><br />मादा चीता निर्वा के पिछले दिनों गर्भवती होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद से पार्क प्रबंधन ने इस पर निगरानी बढ़ा दी थी। अब निर्वा द्वारा शावकों के जन्म दिए जाने के बाद से चीता प्रोजेक्ट को एक बड़ी सफलता मिली है। चार शावकों के जन्म के बाद अब कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। इनमें 12 शावक भी शामिल हैं। इन सभी शावकों का जन्म कूनों में ही हुआ है।<br /><br />कूनो नेशनल पार्क में लगातार हो रहे चीतों के जन्म के बाद यह ब्रीडिंग सेंटर बन गया है। अब धीरे-धीरे देश में चीतों की संख्या बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में विदेश से चीतों को लाकर बसाने के प्रोजेक्ट को मिल रही सफलता के बाद अब मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में भी इन्हें लाने की तैयारी है। अब यहां भी चीतों को लाकर बसाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए टीम यहां निरीक्षण भी कर चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/105571/bhopal-the-population-of-leopards-increased-again-in-kuno-national</link>
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                <pubDate>Mon, 25 Nov 2024 15:54:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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                <title>भोपाल : कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फिर बढ़ेगा चीतों का कुनबा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><br />भोपाल, 21 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता प्रोजेक्ट के तहत दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाकर बसाए गए चीतों का कुनबा एक बार फिर बढ़ने वाला है। दरअसल, दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘वीरा’ गर्भवती है और वह जल्द ही मां बनने वाली है। कूनो पार्क प्रबंधन ने इसकी पुष्टि की है। फिलहाल प्रबंधन मादा चीता ‘वीरा’ के देखभाल में जुट गया है।<br /><br />सिंह परियोजना के संचालक एवं कूनो के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) उत्तम कुमार शर्मा ने सोमवार को बताया कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/105065/leopard-population-will-increase-again-in-bhopal-kuno-national-park"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-10/b21102024-08.jpg" alt=""></a><br /><p><br /><br />भोपाल, 21 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता प्रोजेक्ट के तहत दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाकर बसाए गए चीतों का कुनबा एक बार फिर बढ़ने वाला है। दरअसल, दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘वीरा’ गर्भवती है और वह जल्द ही मां बनने वाली है। कूनो पार्क प्रबंधन ने इसकी पुष्टि की है। फिलहाल प्रबंधन मादा चीता ‘वीरा’ के देखभाल में जुट गया है।<br /><br />सिंह परियोजना के संचालक एवं कूनो के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) उत्तम कुमार शर्मा ने सोमवार को बताया कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा मां बनने वाली है। वह कभी भी मां बन सकती है। उसकी विशेष देखभाल की जा रही है। निगरानी के लिए 24 घंटे दो लोगों की टीम लगाई गई है। उसके मूवमेंट वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे बढ़ाए गए हैं।<br /><br />उन्होंने बताया कि भारतीय धरती पर मां बनने वाली वीरा चौथी मादा चीता होगी। इससे पूर्व आशा, गामिनी और ज्वाला कूनों में शावकों को जन्म दे चुकी हैं। आशा ने भारतीय धरती पर 26 दिसंबर को तीन शावकों को जन्म दिया था। यह शावक अब दस माह के हो चुके हैं। इसके बाद ज्वाला ने जनवरी में चार शावकों को जन्म दिया, जबकि गामिनी ने इतिहास रचते हुए भारतीय धरती पर छह शावकों को मार्च में जन्म दिया था। हालांकि इनमें से दो शावकों की मौत हो चुकी है। कूनो में फिलहाल 12 वयस्क चीते हैं, इनमें पांच नर और सात मादा चीता शामिल हैं। इनके अलावा यहां 12 शावक हैं और सभी स्वस्थ हैं।<br /><br />मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस खुशखबरी पर वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि “कूनो में आने वाली हैं खुशियां…देश के ‘चीता स्टेट’ मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में जल्द ही मादा चीता नए शावकों को जन्म देने वाली है। यह खबर ‘चीता प्रोजेक्ट’ की बड़ी उपलब्धि का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट पारिस्थितिक संतुलन को निरन्तर बेहतर बनाने वाला सिद्ध हो रहा है।”<br /><br />गौरतलब है कि चीता पुनर्स्थापना प्रोजक्ट के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2022 को अपने जन्मदिन के अवसर पर नामीबिया से आठ चीतों को लाकर श्योपुर के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा था। इसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाकर कूनो में बसाया गया था। इनमें से अभी तक कूनों में आठ चीतों की मौत हो चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Oct 2024 15:50:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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