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                <title>Prayagraj - Loktej</title>
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                <description>Prayagraj RSS Feed</description>
                
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                <title>माघ मेले में 15 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की उम्मीद: योगी आदित्यनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रयागराज (उप्र) 22 नवंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को यहां कहा कि प्रयागराज में तीन जनवरी से प्रारंभ हो रहे माघ मेले का दायरा 2024 के मेले की तुलना में बढ़ाया गया है और इस बार मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की उम्मीद है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने यहां मेला प्राधिकरण के सभागार में समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘माघ मेला 2026 की तैयारी प्रारंभ हो गई है। इस बार इसका (माघ मेले का) दायरा 2024 की तुलना में बढ़ाया गया है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आमतौर पर देखा गया है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144196/yogi-adityanath-expects-15-crore-devotees-to-take-bath-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/uttar-pradesh-chief-minister-yogi-adityanath-1.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज (उप्र) 22 नवंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को यहां कहा कि प्रयागराज में तीन जनवरी से प्रारंभ हो रहे माघ मेले का दायरा 2024 के मेले की तुलना में बढ़ाया गया है और इस बार मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की उम्मीद है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने यहां मेला प्राधिकरण के सभागार में समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘माघ मेला 2026 की तैयारी प्रारंभ हो गई है। इस बार इसका (माघ मेले का) दायरा 2024 की तुलना में बढ़ाया गया है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आमतौर पर देखा गया है कि मेले में 20-25 लाख कल्पवासी एक माह तक यहां प्रवास करते हैं। हमारा अनुमान है कि इस डेढ़ महीने के दौरान प्रयागराज में 12 से 15 करोड़ लोग संगम पर स्नान करेंगे जिसमें प्रतिदिन स्नान करने वाले कल्पवासी शामिल हैं।’’</p>
<p>योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘इस बार माघ मेला पंद्रह दिन पहले है। तीन जनवरी को पौष पूर्णिमा है, 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंत पंचमी, पहली फरवरी को माघी पूर्णिमा और 15 फरवरी को महाशिवरात्रि है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘प्रदेश के सभी विभागों को इस आयोजन से जोड़ा गया है। सिंचाई विभाग यहां जल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।’’</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वहीं बिजली विभाग नियमित बिजली आपूर्ति के साथ ही बिजली की सुरक्षा की भी व्यवस्था करेगा। लोक निर्माण विभाग संपर्क मार्गों के साथ ही सात अस्थायी पुल का निर्माण करेगा।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि जल निगम द्वारा पेयजल की 242 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई जाएगी। साथ ही 85 किलोमीटर की सीवर लाइन भी बिछाई जाएगी ताकि एक बूंद भी दूषित जल गंगा या यमुना में ना जाने पाए।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘विद्युत निगम मेला क्षेत्र में 25 अस्थायी उपकेंद्र बनाएगा। श्रद्धालुओं को त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के लिए 20-20 बिस्तरों के दो अस्पताल बनाए जा रहे हैं। साथ ही लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जाएंगे। एक वेक्टर नियंत्रण इकाई, पांच आयुर्वेदिक और पांच होम्योपैथिक चिकित्सालय की स्थापना एवं 50 एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जा रही है।’’</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘नगर विकास विभाग पर्याप्त संख्या में शौचालय और ‘स्ट्रीट लाइट’ की व्यवस्था कर रहा है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मेले का दायरा 800 हेक्टेयर क्षेत्र में सात सेक्टर में फैला होगा। वहीं अलग-अलग मार्गों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 42 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था होगी। मेला सकुशल संपन्न कराने के लिए क्षेत्र में 17 थाने, 42 पुलिस चौकियां, 20 दमकल गाड़ियां, सात अग्निशमन चौकियां और 20 अग्निशमन निगरानी टावर, एक जल पुलिस थाना, एक जल पुलिस नियंत्रण कक्ष और चार जल पुलिस उप नियंत्रण कक्ष होंगे।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) से युक्त 400 सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से मेले पर नजर रखी जाएगी। यातायात और भीड़ नियंत्रण के लिए भी अंतरजनपदीय और अंतरराज्यीय कार्ययोजना विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि परिवहन के लिए 3,800 बस मेले के दौरान चलाई जाएंगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इस दौरान ‘टेंट सिटी’ का भी निर्माण किया जा रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि माघ मेला नयी ऊंचाइयों को छुएगा और हम इस पूरे आयोजन को पूरी भव्यता एवं दिव्यता के साथ संपन्न कराएंगे।’’</p>
<p>बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां गंगा का पूजन किया और लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर में पूजा अर्चना की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 14:31:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेडिसन होटल: प्रयागराज को मिला पांच सितारा होटल, पर्यटन मंत्री बोले-पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, अक्टूबर 15: रेडिसन होटल ग्रुप और प्रेसिडेंसी इंटरनेशनल होटल्स प्राइवेट लिमिटेड ने सोमवार को प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित सरोजिनी नायडू मार्ग पर रेडिसन होटल का भव्य उद्घाटन किया।</p>
<p>सांस्कृतिक मंत्री जयवीर सिंह किसी कारणवश इस कार्यक्रम में नहीं आ सके लेकिन उन्होंने वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रैडिसन होटल जैसी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की उपस्थिति प्रयागराज की गरिमा एवं आकर्षण को और बढ़ाएगी।</p>
<p>देश-विदेश से संगमनगरी आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों एवं अतिथियों को आधुनिक, आरामदायक एवं विश्वस्तरीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि रैडिसन होटल आतिथ्य सेवा के क्षेत्र में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143641/radisson-hotel-prayagraj-gets-five-star-hotel-tourism-minister-said"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-10/b15102025-05.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, अक्टूबर 15: रेडिसन होटल ग्रुप और प्रेसिडेंसी इंटरनेशनल होटल्स प्राइवेट लिमिटेड ने सोमवार को प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित सरोजिनी नायडू मार्ग पर रेडिसन होटल का भव्य उद्घाटन किया।</p>
<p>सांस्कृतिक मंत्री जयवीर सिंह किसी कारणवश इस कार्यक्रम में नहीं आ सके लेकिन उन्होंने वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रैडिसन होटल जैसी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की उपस्थिति प्रयागराज की गरिमा एवं आकर्षण को और बढ़ाएगी।</p>
<p>देश-विदेश से संगमनगरी आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों एवं अतिथियों को आधुनिक, आरामदायक एवं विश्वस्तरीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि रैडिसन होटल आतिथ्य सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक नया मानदंड स्थापित करेगा और उत्तर प्रदेश को भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गंतव्य बनाने के संकल्प को और सशक्त करेगा।</p>
<p>प्रेसिडेंसी इंटरनेशनल होटल्स प्रा.लि. के प्रबंध निदेशक ओवैस उस्मानी ने मीडिया से कहा कि हमें प्रयागराज में पहला अंतरराष्ट्रीय पांच सितारा होटल प्रस्तुत करते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है। यह होटल सेवा, सुरक्षा और डिज़ाइन के नए मानक स्थापित करेगा। यह 108 कमरों वाला लक्जरी होटल प्रयागराज का पहला अंतरराष्ट्रीय पांच सितारा होटल है, जो शहर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र में विश्वस्तरीय आतिथ्य सेवा प्रदान करता है।</p>
<p>रेडिसन होटल ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीओओ (दक्षिण एशिया) निखिल शर्मा ने कहा, “हमें रेडिसन होटल प्रयागराज का उद्घाटन करते हुए गर्व है — यह हमारे समूह के लिए भारत के सबसे जीवंत, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक शहरों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह होटल शहर के लिए मूल्यवर्धन साबित होगा, जो स्थानीय धरोहर का सम्मान करते हुए विश्वस्तरीय सुविधा प्रदान करता है।”</p>
<p>रेडिसन होटल प्रयागराज में एक विशाल ऑल-डे डायनिंग रेस्टोरेंट, विशेष लाउंज, चाय लाउंज और पेस्ट्री शॉप मौजूद हैं। व्यवसायिक यात्रियों के लिए लचीले मीटिंग रूम और अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक से युक्त विशाल बॉलरूम उपलब्ध है। सुरक्षा के लिए 24 घंटे निगरानी और व्यापक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। अपनी सुविधाजनक लोकेशन और विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ, रेडिसन होटल प्रयागराज शीघ्र ही शहर का प्रतिष्ठित गंतव्य बन जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 20:54:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरु पूर्णिमा पर अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी में उमड़े श्रद्धालु, लगाई आस्था की डुबकी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आज देश भर से श्रद्धा, भक्ति और आस्था की तस्वीरें सामने आईं। अयोध्या का सरयू तट हो, प्रयागराज का त्रिवेणी संगम या काशी का गंगा घाट, हर जगह श्रद्धालु उमड़ पड़े। स्नान, पूजन और गुरु वंदना के माध्यम से लोगों ने अपने श्रद्धाभाव को प्रकट किया।</p>
<p>अयोध्या धाम में इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व बेहद भव्य और ऐतिहासिक रहा। सरयू नदी के पवित्र घाटों पर श्रद्धालु तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही जुटने लगे। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्नान कर मां सरयू का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141825/devotees-gathered-in-ayodhya-prayagraj-and-varanasi-on-guru-purnima"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/ganga-vilas.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आज देश भर से श्रद्धा, भक्ति और आस्था की तस्वीरें सामने आईं। अयोध्या का सरयू तट हो, प्रयागराज का त्रिवेणी संगम या काशी का गंगा घाट, हर जगह श्रद्धालु उमड़ पड़े। स्नान, पूजन और गुरु वंदना के माध्यम से लोगों ने अपने श्रद्धाभाव को प्रकट किया।</p>
<p>अयोध्या धाम में इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व बेहद भव्य और ऐतिहासिक रहा। सरयू नदी के पवित्र घाटों पर श्रद्धालु तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही जुटने लगे। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्नान कर मां सरयू का आशीर्वाद लिया। इसके बाद श्रद्धालु मठ-मंदिरों में पहुंचकर अपने गुरुओं के दर्शन व आशीर्वाद प्राप्त करते नजर आए। चारों ओर हर-हर महादेव और जय गुरु देव के जयकारे गूंजते रहे।</p>
<p>प्रयागराज में भी गुरु पूर्णिमा पर भक्तों का जनसैलाब त्रिवेणी संगम पर उमड़ा। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान कर पुण्य लाभ कमा रहे हैं। स्नान के बाद लोग दान-दक्षिणा देकर अपने मठों और संतों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त से ही त्रिवेणी की पावन धारा में आस्था की डुबकी लगाने के साथ-साथ दान पूर्ण कर रहे हैं। प्रयागराज में सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए। घाटों पर पुलिस और स्वयंसेवकों की तैनाती रही।</p>
<p>श्रद्धालु राकेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन गंगा में डुबकी लगाकर मां गंगा का आशीर्वाद लिया और पंडित जी को दान-दक्षिणा दी। अब अपने संत-महात्माओं से आशीर्वाद लेंगे और सत्संग में भाग लेंगे। वहीं, एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि गुरु पूर्णिमा आत्मा की जागृति का दिन है। गुरु ही वह शक्ति है जो हमें परमात्मा से जोड़ती है और सही मार्ग दिखाती है।</p>
<p>गुरु पूर्णिमा को लेकर पुरोहित गोपाल दास ने कहा कि गुरु की महिमा का उत्सव मनाने का दिन ही गुरु पूर्णिमा है। गुरु ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं।</p>
<p>अयोध्या और प्रयागराज के अलावा, वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और घाट की सीढ़ियां जलमग्न हो चुकी हैं, लेकिन श्रद्धा में कोई कमी नहीं दिखी। लोग सुरक्षित स्थानों से गंगा स्नान कर रहे थे। कई श्रद्धालु पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते और गंगा जल से पूजन करते नजर आए। प्रशासन ने यहां भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम कर रखे हैं। एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें भी सतर्क रहीं। बनारस में स्नान के बाद श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए निकल पड़े।</p>
<p>मध्य प्रदेश के विदिशा से आए जय राम पटेल ने कहा कि हम गुरु पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने आए हैं। इसके बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे। वहीं, कमलेश मिश्रा ने कहा कि काशी का महत्व अवर्णनीय है। यह हमारा सौभाग्य है कि हम यहां आकर स्नान कर सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 16:10:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गंगा दशहरा पर काशी, प्रयागराज में हजारों की संख्या में आए श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाराणसी/प्रयागराज, 05 जून (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के काशी और प्रयागराज में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर गुरुवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। यह उत्‍सव ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाता है। मान्‍यता है कि इस दिन मां गंगा का अवतरण स्‍वर्ग लोक से धरती पर हुआ था। गुरुवार की सुबह तड़के से ही दशाश्वमेध घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।</p>
<p>दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा की आराधना और पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित किया। गंगा स्नान के साथ ही श्रद्धालुओं ने दीपदान, गंगा आरती और मंत्रोच्चार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141157/thousands-of-devotees-came-to-kashi-prayagraj-on-ganga-dussehra"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/ganga-vilas.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी/प्रयागराज, 05 जून (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के काशी और प्रयागराज में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर गुरुवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। यह उत्‍सव ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाता है। मान्‍यता है कि इस दिन मां गंगा का अवतरण स्‍वर्ग लोक से धरती पर हुआ था। गुरुवार की सुबह तड़के से ही दशाश्वमेध घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।</p>
<p>दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा की आराधना और पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित किया। गंगा स्नान के साथ ही श्रद्धालुओं ने दीपदान, गंगा आरती और मंत्रोच्चार के माध्यम से गंगा मैया से सुख-शांति और मोक्ष की कामना की। घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन मुस्तैद रहा।</p>
<p>एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें भी घाटों पर तैनात की गईं। काशी की गलियों से लेकर घाटों तक आज का दिन भक्ति भाव और गंगा मैया की जयकारों से गुंजायमान रहा।</p>
<p>श्रद्धालुओं का कहना है कि गंगा दशहरा पर काशी में गंगा स्नान का विशेष महत्व है, जिससे सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगा दशहरा वह दिन है जब गंगा नदी का धरती पर अवतरण हुआ था, और इसी दिन को मां गंगा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।</p>
<p>दशाश्वमेध घाट के तीर्थपुरोहित विवेकानंद ने कहा कि ज्येष्ठ माह का शुक्ल पक्ष है। इस दिन को गंगा दशहरा के उत्‍सव के रूप में मनाया जाता है। भागीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए मां गंगा की आराधना कर उनको प्रसन्न किया और मां गंगा को धरती पर लेकर आए।</p>
<p>श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं और मोक्ष पाने के लिए गंगा जी में डुबकी लगाते हैं। गुजरात के राजकोट से आए महंत विजय महाराज ने बताया कि सनातन धर्म में गंगा दशहरा का बहुत महत्‍व है। आज ही के दिन गंगा जी धरती पर अवतरित हुईं थीं।</p>
<p>इसी क्रम में गंगा दशहरा का पर्व संगम नगरी प्रयागराज में भी पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर प्रयागराज में गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु आए हुए हैं और ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के साथ ही पूजा अर्चना और दान पुण्य भी कर रहे हैं।</p>
<p>श्रद्धालु महंत गोपाल ने कहा कि गंगा दशहरा के दिन भागीरथ के पूर्वजों के मोक्ष के लिए मां गंगा स्‍वर्ग लोक से मृत्युलोक में आईं। हम सब भाग्‍यशाली है जो इस दिन गंगा मां की पूजा अर्चना कर मोक्ष की याचना करते हैं। इस उत्‍सव के दौरान लोगों के 10 तरह के पाप से मुक्ति मिलती है।</p>
<p>इसलिए इस दिन को गंगा दशहरा नाम दिया गया है। गंगा स्‍थान करने वाले श्रद्धालु के पितरों को भी मुक्ति मिलती है। प्रयागराज में एक रुपये के दान का लाभ एक लाख रुपये के बराबर माना जाता है। सीता जी ने मां गंगा को जगत जननी का नाम दिया है।</p>
<p>एक श्रद्धालु का कहना है, “हम गंगा दशहरा के अवसर पर पवित्र स्नान करने के लिए संगम में मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के तट पर आए हैं। इस स्नान से पितर भी प्रसन्न होते हैं। महाकुंभ के आयोजन के बाद से लोगों में अध्यात्म बढ़ा हुआ है।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jun 2025 15:48:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज महाकुंभ ड्यूटी का अनुभव हरिद्वार कुंभ में आएगा काम, एसडीआरएफ ने बखूबी निभाई जिम्मेदारी: धामी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देहरादून, 04 मार्च (वेब वार्ता)। हरिद्वार कुंभ में प्रयागराज महाकुंभ के अनुभव काम आयेंगे। एसडीआरएफ टीम ने महाकुंभ में अपनी दक्षता का कुशल परिचय देकर उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। यह बात सीएम श्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम आवास में एसडीआरएफ के 112 कार्मिकों के वापस आने पर आयोजित महाकुंभ प्रयागराज 2025 अभिनन्दन कार्यक्रम में बात कही। इस मौके पर उन्होंने एसडीआरएफ की टीम को पुरस्कार स्वरूप 5 लाख रुपए का चेक भी सौंपा।</p>
<p>मुख्यमंत्री धामी ने महाकुंभ प्रयागराज में बेहतर सेवाएं देने पर एसडीआरएफ की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये अनुभव हरिद्वार के 2027 कुंभ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138987/prayagraj-mahakumbh-duty-experience-haridwar-kumbh-will-work-in-kumbh"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025-01.jpg" alt=""></a><br /><p>देहरादून, 04 मार्च (वेब वार्ता)। हरिद्वार कुंभ में प्रयागराज महाकुंभ के अनुभव काम आयेंगे। एसडीआरएफ टीम ने महाकुंभ में अपनी दक्षता का कुशल परिचय देकर उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। यह बात सीएम श्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम आवास में एसडीआरएफ के 112 कार्मिकों के वापस आने पर आयोजित महाकुंभ प्रयागराज 2025 अभिनन्दन कार्यक्रम में बात कही। इस मौके पर उन्होंने एसडीआरएफ की टीम को पुरस्कार स्वरूप 5 लाख रुपए का चेक भी सौंपा।</p>
<p>मुख्यमंत्री धामी ने महाकुंभ प्रयागराज में बेहतर सेवाएं देने पर एसडीआरएफ की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये अनुभव हरिद्वार के 2027 कुंभ में काम आयेंगे। कुंभ को भव्य रूप से आयोजित करने में मदद भी मिलेगी। इस महाकुंभ से हमारे जवानों का आत्मविश्वास बढ़ा है तथा भीड़ का कुशल प्रबंधन करने में सफल होंगे।</p>
<p>सीएम श्री धामी ने कहा कि सनातन धर्म के महासंगम की चुनौती को संभालना चुनौतीपूर्ण कार्य था। बेहतर व्यवस्थाओं और प्रबंधन से यूपी के साथ ही उत्तराखंड सरकार का सर ऊंचा हुआ है। यही अनुभव 2027 के कुंभ में मददगार साबित होंगे। हमारा प्रयास है कि वाहनों के लिए सुनियोजित पार्किंग व्यवस्था हो जिसके लिए सरकार पूरी तरह से प्रयासरत है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए एसडीआरएफ द्वारा सराहनीय कार्य किए गए हैं। श्रेष्ठ आपदा प्रबंधन में एसडीआरएफ की अहम भूमिका रही है। आपदा प्रबंधन के लिए क्विक रिस्पॉन्स और अत्याधुनिक उपकरणों से राज्य में आपदा के प्रभाव को कम करने में काफी मदद मिली है।</p>
<p>इस मौके पर उपाध्यक्ष राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति विनय रोहिला, सचिव गृह शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, एडीजी अमित सिन्हा, वी मुरुगेशन, ए. पी अंशुमन, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, आईजी एसडीआरएफ रिद्धिम अग्रवाल, कमांडेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी, एसडीआरएफ के अधिकारी और जवान उपस्थित थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 17:58:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : पुनर्मिलन का संगम बना प्रयागराज महाकुम्भ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रयागराज, 02 मार्च (वेब वार्ता)। महाकुम्भ 2025 अपने दिव्य ,भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप के साथ 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व उपस्थिति से ऐतिहासिक आयोजन बन गया। संगम के तट पर आयोजित प्रयागराज महाकुम्भ में 144 साल बाद बने पुण्य संयोग में देश दुनिया से श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ा। इस जन सैलाब के कारण कई लोग कुछ पलों के लिए अपनों से बिछड़ गए, लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शिता और बिछड़ों को अपनों से मिलाने के लिए किए गए प्रयासों की मदद से महाकुम्भ के इस विराट मेले में कुल 54,357 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138806/prayagraj-maha-kumbh-became-the-confluence-of-prayagraj-reunion"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज, 02 मार्च (वेब वार्ता)। महाकुम्भ 2025 अपने दिव्य ,भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप के साथ 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व उपस्थिति से ऐतिहासिक आयोजन बन गया। संगम के तट पर आयोजित प्रयागराज महाकुम्भ में 144 साल बाद बने पुण्य संयोग में देश दुनिया से श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ा। इस जन सैलाब के कारण कई लोग कुछ पलों के लिए अपनों से बिछड़ गए, लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शिता और बिछड़ों को अपनों से मिलाने के लिए किए गए प्रयासों की मदद से महाकुम्भ के इस विराट मेले में कुल 54,357 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता मिली है। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की रही। यही नहीं पुलिस द्वारा देश के विभिन्न राज्यों और नेपाल से आए श्रद्धालुओं का उनके परिवारों से सफलतापूर्वक पुनर्मिलन कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।</p>
<p>पुनर्मिलन का साक्षी बना प्रयागराज महाकुम्भ<br />इस दिव्य आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने कई अनुकरणीय पहल कीं, जो उपयोगी साबित हुईं। इस बार महाकुम्भ में खोए हुए लोगों को शीघ्रता से उनके परिवारों से मिलाने के लिए योगी सरकार ने डिजिटल खोया-पाया केंद्रों की स्थापना की। महाकुम्भ में इनसे 35 हजार से श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाने का कार्य किया गया। अमृत स्नान पर्व मकर संक्रांति पर्व (13, 14 और 15 जनवरी) को खोए हुए 598 श्रद्धालु, मौनी अमावस्या के दौरान (28, 29 और 30 जनवरी) 8725 लोगों और बसंत पंचमी (2, 3 और 4 फरवरी) को डिजिटल खोया-पाया केंद्र की मदद से 864 लोगों को उनके परिवारों से मिलवाया गया। इसके अलावा अन्य स्नान पर्वों और सामान्य दिनों में खोए हुए 24,896 लोगों का भी उनके परिवारों के साथ पुनर्मिलन कराया गया। इस तरह महाकुम्भ के समापन पर 35,083 लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया।</p>
<p>निजी संस्थाओं ने भी किया पूरा सहयोग<br />मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर संपूर्ण महाकुम्भ क्षेत्र में 10 डिजिटल खोया-पाया केंद्र स्थापित किए गए। इनमें अगर अत्याधुनिक एआई आधारित चेहरा पहचान प्रणाली, मशीन लर्निंग और बहुभाषीय समर्थन जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं का संगम देखने को मिला तो वहीं गैर सरकारी सामाजिक संस्थाओं के प्रयास में मानवता और सेवा का अद्भुत मेल देखने को मिला। इनमें सबसे पुराना भारत सेवा केंद्र एवं हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति भी शामिल हैं। भारत सेवा केंद्र के भूले भटकों के शिविर के संचालक उमेश चंद्र तिवारी के मुताबिक, महाकुम्भ के समापन तक शिविर ने 19,274 बिछड़े महिला और पुरुष को अपनों से मिलाया। इसके अलावा कुम्भ मेले में बिछड़ गए सभी 18 बच्चों को भी उनके परिजनों से मिलाया गया। शिविर के माध्यम से न सिर्फ खोए हुए लोगों को खोजा गया, बल्कि उनके घरों तक पहुंचाने में भी मदद की गई।</p>
<p>समापन के आखिरी दिन तक होता रहा पुनर्मिलन<br />महाकुम्भ के आखिरी स्नान पर्व महा शिवरात्रि तक खोया पाया केंद्रों और भूले भटके शिविरों में मेले में बिछड़ गए लोगों को उनके अपनों से मिलाने की प्रक्रिया पूरी हो गई। खोया पाया केंद्र विशेष रूप से कारगर रहे। उन्होंने न सिर्फ बिछड़े लोगों का परिजनों से मिलन कराया, बल्कि बिछड़े लोगों की ट्रैकिंग भी की और जब तक वो परिवार से मिल नहीं गए तब तक प्रक्रिया को रिपीट किया गया। मुजफ्फरपुर धरकरी बिहार के कपलेश्वर साहनी की सास कृष्णा देवी को केंद्र ने आखिरी दिन परिजनों से मिलाया। इसी तरह रायपुर छत्तीसगढ़ के बृजलाल चौहान की पत्नी की जंगी देवी भी अपने घर पहुंच गईं। नेपाल के बांके जिला जगजन्नन धारू के खोने की शिकायत उनके बेटे मनोज थारू ने लिखाई थी, लेकिन मनोज थारू का मोबाइल बंद मिला। इसी तरह सप्तरी नेपाल के सीताराम शाह ने पत्नी बिंदी के खो जाने की शिकायत दर्ज की थी, लेकिन सीताराम शाह ने जो मोबाइल नंबर शिकायत में दर्ज कराया वह गलत निकला। खोया पाया केंद्र की इस पहल से हर कोई संतुष्ट नजर आया और परिजनों के मिलने पर सभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताना नहीं भूले।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Mar 2025 19:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उप्र : महाकुंभ मेला संपन्न होने के बाद भी बड़ी संख्या में संगम स्नान कर रहे श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाकुंभ नगर, 28 फरवरी (भाषा) धार्मिक समागम महाकुंभ 2025 बुधवार को संपन्न हो गया, लेकिन मेले के दौरान भारी भीड़ की वजह से संगम में डुबकी लगाने से वंचित रह गए श्रद्धालु अब भीड़ कम होने से यहां आ रहे हैं और संगम में स्नान कर रहे हैं।</p>
<p>जल पुलिस के प्रभारी जनार्दन साहनी ने बताया कि आम दिनों की तुलना में संगम में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ है और लोग आनंद के साथ संगम में डुबकी लगा रहे हैं। जल पुलिस के साथ ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी सुरक्षा में तैनात है।</p>
<p>साहनी ने कहा कि 45</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138325/up--even-after-the-conclusion-of-mahakumbh-mela--devotees-are-taking-a-large-number-of-sangam-bath"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-01/first-bath-mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>महाकुंभ नगर, 28 फरवरी (भाषा) धार्मिक समागम महाकुंभ 2025 बुधवार को संपन्न हो गया, लेकिन मेले के दौरान भारी भीड़ की वजह से संगम में डुबकी लगाने से वंचित रह गए श्रद्धालु अब भीड़ कम होने से यहां आ रहे हैं और संगम में स्नान कर रहे हैं।</p>
<p>जल पुलिस के प्रभारी जनार्दन साहनी ने बताया कि आम दिनों की तुलना में संगम में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ है और लोग आनंद के साथ संगम में डुबकी लगा रहे हैं। जल पुलिस के साथ ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी सुरक्षा में तैनात है।</p>
<p>साहनी ने कहा कि 45 दिनों तक चले महाकुंभ में रिकॉर्ड 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई, लेकिन कई लोग भारी भीड़ को देखते हुए यहां आने की हिम्मत नहीं जुटा सके और अब वे पुण्य लाभ अर्जित करने संगम आ रहे हैं।</p>
<p>चेन्नई से आए आशीष कुमार सिंह ने कहा कि वह बृहस्पतिवार को रात साढ़े 11 बजे प्रयागराज पहुंचे और आज उन्होंने संगम में डुबकी लगाई। भीड़ की वजह से उन्होंने मेला समाप्त होने के बाद आने का मन बनाया।</p>
<p>कक्षा 11 के विद्यार्थी सिंह ने बताया कि उनका जन्म बिहार में हुआ, लेकिन वह पले बढ़े चेन्नई में, इसलिए वह हिंदी और भोजपुरी के साथ ही तमिल भाषा में भी बात कर लेते हैं।</p>
<p>वहीं, जयपुर से आए योगेंद्र गंगवार ने कहा कि वह भी मेले में आने से चूक गए क्योंकि बस और ट्रेनों में जगह नहीं थी। उन्होंने कहा कि अब वह बड़े आराम से जयपुर से प्रयागराज आए हैं और उनकी योजना दिन में संगम में डुबकी लगाने की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/138325/up--even-after-the-conclusion-of-mahakumbh-mela--devotees-are-taking-a-large-number-of-sangam-bath</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Feb 2025 15:11:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाकुंभ: महाशिवरात्रि पर संगम पर एक साथ दिखे भारत के विविध रंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाकुंभ नगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में पिछली 13 जनवरी को शुरू हुए आस्था के सबसे बड़े संगम महाकुंभ के अंतिम दिन महाशिवरात्रि पर देश के विभिन्न भागों से तीर्थयात्री पवित्र संगम स्थल पर डुबकी लगाने के लिए एकत्र हुए और झांझ की झंकार, पवित्र मंत्र और भारत के विविध रूप दिखाने वाले रंग त्रिवेणी संगम पर एक दूसरे में घुल-मिल गये।</p>
<p>प्रयागराज में महाकुंभ पिछली 13 जनवरी (पौष पूर्णिमा) को शुरू हुआ था और इसमें नागा साधुओं के भव्य जुलूस और तीन 'अमृत स्नान' हुए। इस विशाल धार्मिक समागम में अब तक रिकॉर्ड 64 करोड़ से अधिक तीर्थयात्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137740/mahakumbh--diverse-colors-of-india-were-seen-together-at-the-confluence-on-mahashivaratri"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-01/first-bath-mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>महाकुंभ नगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में पिछली 13 जनवरी को शुरू हुए आस्था के सबसे बड़े संगम महाकुंभ के अंतिम दिन महाशिवरात्रि पर देश के विभिन्न भागों से तीर्थयात्री पवित्र संगम स्थल पर डुबकी लगाने के लिए एकत्र हुए और झांझ की झंकार, पवित्र मंत्र और भारत के विविध रूप दिखाने वाले रंग त्रिवेणी संगम पर एक दूसरे में घुल-मिल गये।</p>
<p>प्रयागराज में महाकुंभ पिछली 13 जनवरी (पौष पूर्णिमा) को शुरू हुआ था और इसमें नागा साधुओं के भव्य जुलूस और तीन 'अमृत स्नान' हुए। इस विशाल धार्मिक समागम में अब तक रिकॉर्ड 64 करोड़ से अधिक तीर्थयात्री शामिल हुए हैं।</p>
<p>महाकुंभ के अंतिम शुभ स्नान की वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आधी रात के करीब संगम के तट पर एकत्र होने लगे थे। उनमें से अनेक लोग 'ब्रह्म मुहूर्त' में डुबकी लगाने के लिए धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर रहे थे, जबकि उनमें से कई ने नियत समय से बहुत पहले ही स्नान अनुष्ठान कर लिया था। उनमें पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के रहने वाले चार दोस्त भी थे, जिन्होंने स्नान अनुष्ठान के लिए घाट पर जाने से पहले चमकीले पीले रंग की धोती पहनी थी।</p>
<p>बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाले आकाश पाल, कंटेंट राइटर अभिजीत चक्रवर्ती, फार्मास्युटिकल क्षेत्र में काम करने वाले राजा सोनवानी और वकील अभिषेक पाल के अलग-अलग करियर हैं, लेकिन वे "महाकुंभ में महाशिवरात्रि" का त्योहार मनाने की इच्छा में एकजुट हैं।</p>
<p>आकाश पाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "हम दोस्त हैं और हम पश्चिम बंगाल से प्रयागराज तक कार से गए और फिर जहां वाहन ले जाने की अनुमति नहीं थी वहां से हम संगम स्थल तक पैदल गए। इस शानदार आध्यात्मिक जमावड़े का हिस्सा बनना अद्भुत लगता है, खासकर इस शुभ दिन पर।"</p>
<p>पश्चिम बंगाल के तीर्थयात्री दुर्गापुर और कूच बिहार जैसे स्थानों से भी आए थे। साथ ही, 'जय गंगा मैया', 'हर हर महादेव', 'सीता राम' के जयकारे हवा में गूंज रहे थे। साथ ही कई भक्तों द्वारा बजाए जा रहे झांझ की मधुर झंकार भी गूंज रही थी।</p>
<p>दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम के रूप में स्थापित हो चुके इस विशाल धार्मिक उत्सव ने अपने अंतिम दिन न केवल देश के चारों कोनों से बल्कि पड़ोसी नेपाल से भी तीर्थयात्रियों को आकर्षित किया।</p>
<p>नेपाल के चार किशोरों ने तीन अन्य सदस्यों के साथ महाशिवरात्रि मनाने के लिए पवित्र डुबकी लगाई। मनीष मंडल, रब्बज मंडल, अर्जुन मंडल और दीपक साहनी और उनके चाचा डोमी साहनी ने भगवान शिव नाम वाली अंगरखी पहनी थी।</p>
<p>साहनी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "हम नेपाल के जनकपुर से हैं, जो माता सीता से जुड़ा स्थान है। हमारा शहर जानकी मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। महाकुंभ में पवित्र स्नान के बाद हम भगवान राम के दर्शन के लिए अयोध्या जाएंगे।"</p>
<p>नेपाल से आए समूह के सदस्य पहले अपने गृह नगर से जयनगर गए और फिर ट्रेन से प्रयागराज पहुंचे।</p>
<p>साहनी ने कहा, "अयोध्या से हम वापस जयनगर जाएंगे और फिर कुंभ और अयोध्या दोनों देखने के बाद जनकपुर जाएंगे।"</p>
<p>कई तीर्थयात्रियों ने यह भी कहा कि वे "144 फैक्टर" के कारण इस कुंभ मेले में आए हैं। कुछ लोगों का दावा है कि यह विशाल धार्मिक उत्सव किसी दुर्लभ ग्रह के संरेखण के समय हो रहा है और ऐसा अवसर 144 साल बाद आता है।</p>
<p>महाशिवरात्रि पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए कर्नाटक, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश से भी तीर्थयात्री आए हैं। संगम स्थल पर या उसके आस-पास के विभिन्न घाटों पर तीर्थयात्रियों के आने और पवित्र स्नान करने के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने सतर्क नजर रखी और किसी भी स्थान पर लंबे समय तक भीड़ नहीं लगने दी। महाकुंभ मेला क्षेत्र में विशाल प्रवेश द्वार बनाए गए हैं, जैसे नंदी द्वार और संगम प्रिय।</p>
<p>संगम स्थल के पास संगम द्वार के शीर्ष पर माँ गंगा, माँ यमुना और माँ सरस्वती की एक-एक तस्वीर अंकित है। संगम की ओर जाते समय कई तीर्थयात्री इस प्रवेश द्वार के साथ एक तस्वीर लेने के लिए कुछ समय के लिए रुके।</p>
<p>कई भक्त भगवा वस्त्र पहनकर मेले में आए, जबकि कई अन्य भगवान शिव का नाम लेते हुए और हवा में हाथ उठाते हुए आए।</p>
<p>महाशिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन का स्मरण कराती है और कुंभ मेले के संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।</p>
<p>हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने समुद्र मंथन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके कारण अमृत कुंभ (अमृत से भरा घड़ा) का उद्भव हुआ। यह कुंभ मेले का सार है। ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पिया था और अपने कंठ में उसे रोक लिया था जिसकी वजह से उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, मंगलवार को संगम और मेला क्षेत्र के अन्य घाटों पर कुल 1.33 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। इसके साथ ही प्रयागराज महाकुंभ में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या संख्या 64 करोड़ से अधिक हो गई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 17:07:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रिकॉर्ड 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान के साथ महाकुंभ मेला संपन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाकुंभ नगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में 45 दिनों तक विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक एवं आध्यात्मिक समागम- महाकुंभ 2025, बुधवार को अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि के साथ संपन्न हो गया।</p>
<p>तेरह जनवरी से प्रारंभ हुए इस मेले में देश विदेश से 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई।</p>
<p>मेला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को शाम छह बजे तक 1.44 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई तथा 13 जनवरी से अब तक स्नान करने वालों की संख्या 66.21 करोड़ पहुंच गई है।</p>
<p>श्रद्धालुओं की यह संख्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137717/mahakumbh-mela-concluded-with-a-record-of-more-than-66"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>महाकुंभ नगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में 45 दिनों तक विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक एवं आध्यात्मिक समागम- महाकुंभ 2025, बुधवार को अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि के साथ संपन्न हो गया।</p>
<p>तेरह जनवरी से प्रारंभ हुए इस मेले में देश विदेश से 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई।</p>
<p>मेला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को शाम छह बजे तक 1.44 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई तथा 13 जनवरी से अब तक स्नान करने वालों की संख्या 66.21 करोड़ पहुंच गई है।</p>
<p>श्रद्धालुओं की यह संख्या चीन और भारत को छोड़कर अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों समेत सभी देशों की आबादी से अधिक है। साथ ही यह मक्का और वेटिकन सिटी जाने वाले श्रद्धालुओं से भी अधिक है।</p>
<p>महाकुंभ अपनी स्वच्छता को लेकर भी चर्चा में रहा जिसमें स्वच्छता कर्मियों की अहम भूमिका रही। महाकुंभ मेले में स्वच्छता प्रभारी डाक्टर आनंद सिंह ने ‘पीटीआई- भाषा’ को बताया कि पूरे मेले में 15,000 स्वच्छताकर्मी चौबीसों घंटे ड्यूटी पर तैनात रहे। कई पालियों में उन्होंने साफ सफाई की जिम्मेदारी बखूबी निभाई और मेले में शौचालयों और घाटों को पूरी तरह से साफ रखा। सभी ने उनके कार्यों की सराहना की।</p>
<p>महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या को हुई भगदड़ की घटना से इसकी छवि थोड़ी धूमिल हुई, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था पर इस घटना का कोई खास असर नहीं पड़ा और लोगों का आगमन अनवरत जारी रहा। भगदड़ में 30 लोगों की मृत्यु हो गई थी।</p>
<p>महाकुंभ मेले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, फिल्मी सितारों और खेल जगत, उद्योग जगत की हस्तियों तक ने संगम में डुबकी लगाई और प्रदेश सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की।</p>
<p>इस महाकुंभ में नदियों के संगम के साथ ही प्राचीनता और आधुनिकता का भी संगम देखने को मिला जिसमें एआई से युक्त कैमरों, एंटी ड्रोन जैसी कई अत्याधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया गया और मेला पुलिस को इन प्रणालियों का प्रशिक्षण दिया गया।</p>
<p>हालांकि, यह मेला कई विवादों को लेकर भी चर्चा में रहा जैसे फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी का महामंडलेश्वर बनना और उनको लेकर विवाद खड़ा होना। इसके अलावा, गंगा जल की शुद्धता को लेकर राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एनपीसीबी) की रिपोर्ट और फिर उस पर सरकार के हवाले से कई वैज्ञानिकों द्वारा गंगा जल की शुद्धता की पुष्टि करना भी चर्चा में रहा।</p>
<p>हिंदुओं की मान्यता है कि ग्रह नक्षत्रों के विशेष संयोग से कुंभ और महाकुंभ में गंगा और संगम में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<p>परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश के प्रमुख चिदानंद सरस्वती ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “मेरे लिए महाकुंभ तब संपन्न होगा जब अंतिम श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा लेगा। आप कह सकते हैं कि बृहस्पतिवार को ब्रह्म मुहूर्त शुरू होने के साथ मेला समाप्त होगा।”</p>
<p>इस मेले के लिए एक नया जिला-महाकुंभ नगर अधिसूचित किया गया और मेला संचालन के लिए जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत पुलिस और प्रशासन की नियुक्ति की गई। यह प्रदेश का 76वां अस्थायी जिला है।</p>
<p>महाकुंभ मेले में सभी 13 अखाड़ों ने तीन प्रमुख पर्वों- मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर अमृत स्नान किया। हालांकि, मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ की घटना के बाद अखाड़ों का अमृत स्नान अधर में लटक गया था, लेकिन अंततः अखाड़ों के साधु संतों ने अमृत स्नान किया और बसंत पंचमी स्नान के साथ वे मेला से विदा हो गए।</p>
<p>मौनी अमावस्या को हुए हादसे को लेकर नेताओं ने सरकार पर निशाना साधना शुरू किया जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाकुंभ को ‘मृत्युकुंभ’ करार दिया। हालांकि, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसका तगड़ा जवाब दिया। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर भगदड़ में मृतकों की संख्या छिपाने का आरोप लगाया।</p>
<p>सपा समेत विपक्षी दलों ने श्रद्धालुओं की संख्या पर भी सवाल खड़ा किया, लेकिन सरकार ने 1,800 एआई कैमरों समेत 3,000 से अधिक कैमरों, ड्रोन और 60,000 कर्मचारियों के हवाले से श्रद्धालुओं की सही संख्या बताने की बात कही।</p>
<p>एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘श्रद्धालुओं की संख्या का मिलान करने के लिए एआई कैमरों के साथ ही हम रोडवेज, रेलवे और हवाईअड्डे के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में रहे।’’</p>
<p>महाकुंभ मेले में अग्निशमन विभाग ने आग की घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाई और आग लगने की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई किए जाने से जनहानि की एक भी सूचना नहीं आई। इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 37,000 पुलिसकर्मी, 14,000 होमगार्ड के जवान तैनात रहे। इसके अलावा, तीन जल पुलिस थाने, 18 जल पुलिस कंट्रोल रूम और 50 ‘वाच टावर’ स्थापित किए गए थे।</p>
<p>महाकुंभ में आने वाले अति विशिष्ट लोगों में भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी, एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल, ब्रिटेन के रॉक बैंड कोल्डप्ले के क्रिस मार्टिन प्रमुख रूप से शामिल थे।</p>
<p>इनके अलावा, सोशल मीडिया के चर्चित चेहरों में हर्षा रिछारिया, माला बेचने वाली युवती मोनालिसा भोसले और ‘आईआईटी बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध अभय सिंह ने भी इस मेले में सुर्खियां बटोरी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 16:14:28 +0530</pubDate>
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                <title>उप्र : महाकुंभ में अपनों से बिछड़ने से बचने के लिए रस्सियां, गांठ और घुंघरू बांधकर चल रहे श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(कुणाल दत्त)</p>
<p>महाकुंभनगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में लाखों लोगों की भीड़ के बीच श्रद्धालु अपने परिवार के अन्य सदस्यों से आसानी से बिछड़ सकने की आशंका के बीच, संगम तक जाते समय और वापस आते समय अपने परिचितों के साथ-साथ चलने के लिए अलग-अलग उपाय अपना रहे हैं।</p>
<p>जहां कुछ लोग लंबी रस्सी लाए हैं और उन्होंने उससे एक ‘सुरक्षा घेरा’ बनाया है जिसमें वे चल सकें, वहीं कई अन्य लोग एक-दूसरे के कपड़ों से गांठ बांधकर चल रहे हैं ताकि वे बिछड़ न जाएं।</p>
<p>बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर शुभ स्नान के साथ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137621/up--devotees-walking-with-ropes--lumps-and-ghungroo-to-avoid-separation-from-their-loved-ones-in-mahakumbh"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>(कुणाल दत्त)</p>
<p>महाकुंभनगर (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में लाखों लोगों की भीड़ के बीच श्रद्धालु अपने परिवार के अन्य सदस्यों से आसानी से बिछड़ सकने की आशंका के बीच, संगम तक जाते समय और वापस आते समय अपने परिचितों के साथ-साथ चलने के लिए अलग-अलग उपाय अपना रहे हैं।</p>
<p>जहां कुछ लोग लंबी रस्सी लाए हैं और उन्होंने उससे एक ‘सुरक्षा घेरा’ बनाया है जिसमें वे चल सकें, वहीं कई अन्य लोग एक-दूसरे के कपड़ों से गांठ बांधकर चल रहे हैं ताकि वे बिछड़ न जाएं।</p>
<p>बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर शुभ स्नान के साथ 45 दिवसीय महाकुंभ का समापन होगा। हर 12 साल बाद आयोजित होने वाले महाकुंभ का अंतिम स्नान पर्व बुधवार को ‘हर हर महादेव’ के घोष के साथ प्रारंभ हो गया। बुधवार तड़के से ही श्रद्धालुओं का गंगा और संगम में डुबकी लगाने का सिलसिला जारी है। इस बीच, सरकार ने श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि सुबह आठ बजे तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। इस तरह से 13 जनवरी से आरंभ हुए महाकुंभ में अब तक 65.37 करोड़ से अधिक श्रद्धालु गंगा और संगम में डुबकी लगा चुके हैं और शाम तक यह आंकड़ा 66 करोड़ को पार करने की संभावना है।</p>
<p>सोमवार रात से लेकर कई लोग अपने प्रियजन और मित्रों से नदी किनारों या मेला क्षेत्र के अन्य हिस्सों में बिछड़ चुके हैं। इनमें से कई लोगों को मानवीय सहायता और डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से अपने परिजन से मिलाया जा चुका है।</p>
<p>सेक्टर तीन, अक्षय वट रोड स्थित ‘खोया-पाया’ केंद्र पर सोमवार देर रात तीन बजे भी चहल-पहल थी।</p>
<p>मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से आए 34 तीर्थयात्रियों ने अपने समूह के चारों तरफ रस्सी का घेरा बनाया जिसे विभिन्न ओर से समूह के कुछ सदस्यों ने थाम रखा था।</p>
<p>समूह में शामिल सोमदत्त शर्मा (34) ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने यह सुरक्षा घेरा इसलिए बनाया है ताकि हम एक-दूसरे से बिछड़ न जाएं। हम पहली बार किसी कुंभ में आए हैं और हम एक-दूसरे से अलग होने के खतरों से वाकिफ हैं इसलिए हमने यह व्यवस्था की है।’’</p>
<p>कई अन्य लोग एक दूसरे के कपड़ों में गांठ बांधकर चल रहे हैं।</p>
<p>पीली कोठी क्षेत्र के स्थानीय निवासी अजय कुमार कुंभ मेला शुरू होने के बाद से रोजाना अपने घर से तीर्थयात्रियों की भीड़ को गुजरते देखते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘गांवों के लोग गांठ बांधकर चलते हैं। पुरुष तीर्थयात्री अपनी धोती के साथ अपने साथ आई महिला की साड़ी के पल्लू को बांधते हैं या दो महिलाएं एक-दूसरे के शॉल का उपयोग करके गांठ बांध लेती हैं।’’</p>
<p>उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ ये कहा कि दरअसल कई लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखते और उन्हें संपर्क नंबर भी मुश्किल से याद रहता है इसलिए एक बार बिछड़ जाने पर उनका फिर से मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर वे गांठ बांधकर चलते हैं।</p>
<p>एक अन्य श्रद्धालु अक्षत लाल ने कहा, ‘‘कुछ लोग तो एक पैर में घुंघरू बांधकर चल रहे हैं, ताकि भीड़ में खो जाने पर उनकी आवाज से एक-दूसरे को खोज सकें।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 12:30:33 +0530</pubDate>
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                <title>महाशिवरात्रि : शिवालयों में उमड़ी भीड़, बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार पहुंचे अखाड़े के संत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लखनऊ, 26 फरवरी (भाषा) महाशिवरात्रि के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश भर में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। वाराणसी में भव्य जुलूस से लेकर छोटे शहरों में शांतिपूर्ण अनुष्ठानों तक लोग भगवान शिव से आशीर्वाद लेने के लिए एकत्र हुए।</p>
<p>महाशिवरात्रि के पर्व पर वाराणसी में नागा साधुओं और अखाड़ों के साधु- संतों ने शोभा यात्रा निकाल कर बाबा श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया।</p>
<p>इस शोभा यात्रा में अखाड़ों के महामंडलेश्वर शाही रथ पर विराजमान हुए थे। काशी के लोगों ने ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। शोभा यात्रा में नागा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137623/mahashivaratri--crowds-gathered-in-pagoda--baba-kashi-vishwanath-s-court-reached-the-court"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/lord-bhagvan-shiva-shivaji-bholenath.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ, 26 फरवरी (भाषा) महाशिवरात्रि के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश भर में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। वाराणसी में भव्य जुलूस से लेकर छोटे शहरों में शांतिपूर्ण अनुष्ठानों तक लोग भगवान शिव से आशीर्वाद लेने के लिए एकत्र हुए।</p>
<p>महाशिवरात्रि के पर्व पर वाराणसी में नागा साधुओं और अखाड़ों के साधु- संतों ने शोभा यात्रा निकाल कर बाबा श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया।</p>
<p>इस शोभा यात्रा में अखाड़ों के महामंडलेश्वर शाही रथ पर विराजमान हुए थे। काशी के लोगों ने ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। शोभा यात्रा में नागा साधु हाथ में त्रिशूल, गदा और तलवार लिए बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे और जलाभिषेक किया। इस दौरान डमरू की ध्वनि और ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष से पूरा इलाका भक्तिमय रहा।</p>
<p>शोभा यात्रा में शामिल निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानन्द गिरि महाराज ने कहा, "साधु-सन्यासी महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का दर्शन करके कुंभ को पूर्ण मानते है। हम सब साधु-संत अपने भगवान के चरणों में उपस्थिति दर्ज कराने जा रहे है। महादेव ने महाकुंभ को विशाल और भव्य बनाया।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हम सब साधु-संत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सफल महाकुंभ की बधाई देते हैं। इस बार कुंभ के स्वरूप को पूरी दुनिया ने देखा। सनातन को मानने वाले सभी लोगों ने कुंभ में डुबकी लगाई। 60 से 62 करोड़ लोगों ने यहां स्नान किया। यही राम राज्य की परिकल्पना है। अराजक लोगों को कुंभ अच्छा नहीं लगा।"</p>
<p>कैलाशानन्द ने कहा, "सबसे पहले मैं महाकुंभ का निमंत्रण देने महादेव के पास आया था। आज उस महाकुंभ की पूर्णाहुति होने जा रही है। हम सब आज महादेव के चरणों में दर्शन पूजन कर महाकुंभ का समापन करने जा रहे हैं। आज सात अखाड़े काशी में उपस्थित हैं।"</p>
<p>कैलाशानन्द ने कहा कि सभी साधु-संत महादेव से नासिक और उज्जैन में होने वाले आगामी कुंभ के सकुशल सम्पन्न होने की कामना लेकर आये हैं।</p>
<p>श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रशासन के मुताबिक, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम रंग-बिरंगी रोशनी से चमक रहा है और विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से महक रहा है। महाशिवरात्रि के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दिव्य प्रांगण की भव्य आभा देखते ही बन रही है। श्री काशी विश्वनाथ धाम के द्वार से लेकर सभी मंडपों, विग्रहों के मंदिरों की फूलों से आकर्षक सजावट की गई है।</p>
<p>मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि गेट नंबर- चार से लेकर गंगा द्वार तक की गई मनभावन सजावट को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए 25 फरवरी से 27 फरवरी तक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सभी तरह के प्रोटोकॉल पर रोक लगायी गई है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता, छाया समेत सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं जिससे श्रद्धालु कतारबध्य होकर सुगमता से श्री काशी विश्वनाथ महादेव का दर्शन कर सकें।</p>
<p>मिश्रा ने कहा कि इस बार काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के भक्तों की संख्या का नया रिकार्ड बन सकता है। महाशिवरात्रि के पर्व पर बाबा विश्वनाथ पूरी रात अपने भक्तों को दर्शन देंगे। यह क्रम 27 फरवरी की सुबह तक चलेगा।</p>
<p>सम्भल में 46 साल बाद खुले प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में इतने लम्बे अर्से बाद आज पहली महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मंदिर में जलाभिषेक कर रहे लोगों में श्रद्धा, उत्साह और भावना का संगम देखने को मिल रहा है। इस प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में सम्भल से ही नहीं, अन्य शहरों से भी श्रद्धालु कांवड़ में जल ले कर भगवान शिव को चढ़ाने और उनका जलाभिषेक करने आ रहे है।</p>
<p>श्रद्धालु अमन कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ''इस महाशिवरात्रि पर ब्रजघाट से कांवड़ लेकर आया हूं और इस प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर पर जीवन की पहली कांवड़ चढ़ाई है। मुझे बहुत खुशी की अनुभूति हो रही है।</p>
<p>श्रद्धालु संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने 46 साल बाद खुले इस प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में जल चढ़ाया है। ‘‘मेरे लिए यह बड़ी खुशी की बात है।’’</p>
<p>अलीगढ़ में हजारों की संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु सिद्धपीठ खेरेश्वर धाम महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए एकत्र हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हुए 'ओम नमः शिवाय' का जाप किया।</p>
<p>प्रशासन ने भीड़ के लिए मंदिर तक सुगम पहुंच की व्यवस्था की है।</p>
<p>रायबरेली में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मंदिरों में 'हर हर महादेव' के नारे लगाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। शिव मंदिरों में लंबी कतारें लग गईं। लोग भगवान शिव की पूजा करने के लिए अपनी बारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।</p>
<p>कानपुर में लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा आनंदेश्वर मंदिर में दर्शन किये। इसे 'कानपुर की छोटी काशी' के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर का महाभारत से ऐतिहासिक संबंध है और यह आस्था का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर गंगा जल और बेलपत्र चढ़ाए।</p>
<p>राजधानी लखनऊ में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। लोग पूजा-अर्चना के लिए शिव मंदिरों के बाहर कतारों में खड़े नजर आये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 12:29:47 +0530</pubDate>
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                <title>सुबह से शाम तक, सूर्यास्त से सूर्योदय तक... त्रिवेणी संगम पर चौबीसों घंटे होता है स्नान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाकुंभनगर, 25 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में गंगा नदी के तटों पर चौबीसों घंटे तीर्थयात्रियों की भीड़ लगी रहती है, पूजा सामग्री बेचने वाले तथा संगम स्थल पर उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर जगह सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहते हैं - त्रिवेणी संगम वह स्थान है जहां दिन और रात का अंतर नज़र नहीं आता।</p>
<p>सुबह से शाम तक और आधी रात से भोर तक, इस पवित्र नगरी में मानवता के विशाल समागम में आध्यात्मिक स्नान का चक्र बिना रुके चलता रहता है।</p>
<p>दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव महाकुंभ का बुधवार को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम 'स्नान'</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137394/from-morning-to-evening--sunset-from-sunset-to-sunrise-----bath-is-round-the-clock-at-triveni-sangam"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>महाकुंभनगर, 25 फरवरी (भाषा) प्रयागराज में गंगा नदी के तटों पर चौबीसों घंटे तीर्थयात्रियों की भीड़ लगी रहती है, पूजा सामग्री बेचने वाले तथा संगम स्थल पर उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर जगह सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहते हैं - त्रिवेणी संगम वह स्थान है जहां दिन और रात का अंतर नज़र नहीं आता।</p>
<p>सुबह से शाम तक और आधी रात से भोर तक, इस पवित्र नगरी में मानवता के विशाल समागम में आध्यात्मिक स्नान का चक्र बिना रुके चलता रहता है।</p>
<p>दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव महाकुंभ का बुधवार को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम 'स्नान' के साथ समापन हो जाएगा। अब हर समय महाकुंभ मेला क्षेत्र में लोगों के सैलाब को आता-जाता देखा जा सकता है। कई लोग पवित्र डुबकी के लिए दिन के समय होने वाली भारी भीड़ से बचने के लिए रात का वक्त चुनते हैं।</p>
<p>सोमवार देर रात करीब 1.30 बजे, जब देश का अधिकांश हिस्सा सो रहा था, संगम के घाट तथा उस स्थान के पास जन-जीवन गुलजार था, तथा लोगों का सैलाब केवल एक ही उद्देश्य से उमड़ रहा था कि गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के संगम पर 'कुंभ स्नान' करना है।</p>
<p>हर घंटे भीड़ बढ़ती गई। तीर्थयात्री नदी के किनारे पहुंचने के लिए एक-दूसरे से धक्का-मुक्की करते रहे और पवित्र स्नान करने वाले लोग अपने कपड़े बदलने के लिए जगह ढूंढने के लिए संघर्ष करते रहे। घाट श्रद्धालुओं से अटे पड़े थे जिसमें हर आयु वर्ग के लोग शामिल थे।</p>
<p>झारखंड के साहिबगंज से आए एक तीर्थयात्री ने अपनी पत्नी और बेटे के साथ रात करीब दो बजे स्नान किया। उन्होंने कहा, "जय गंगा मैया, मैंने स्नान कर लिया और मुझे नया उत्साह महसूस हो रहा है। मैं पहली बार कुंभ मेले में आया हूं, मुझे खुशी है कि मैं इसका हिस्सा बन सका।”</p>
<p>जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, कई लोग त्रिवेणी संगम के पास बैठे गए। इस बीच पुलिसकर्मी घाट के किनारे घूम रहे थे और लोगों को निर्देश दे रहे थे कि वे घाट के किनारे जमीन पर बैग न रखें और जगह बनाने के लिए धक्का-मुक्की न करें।</p>
<p>पुलिस कर्मी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लोगों से कहते रहे कि “आगे बढ़िए, आगे बढ़िए।”</p>
<p>भीड़ बढ़ती जा रही थी। कई लोग अपने प्रियजनों और दोस्तों से या तो तटों पर या मेला क्षेत्र के अन्य हिस्सों पर बिछड़ गए।</p>
<p>सेक्टर 3, अक्षय वट रोड स्थित 'खोया-पाया' केंद्र में देर रात तीन बजे भी चहल-पहल थी।</p>
<p>मध्य प्रदेश के रमेश कैदन अपनी पत्नी से बिछड़ गए थे और वह बेसब्री से केंद्र पर उनका इंतजार कर रहे थे। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के मुन्नीलाल ठाकुर भी अपने भाई, भाभी और पोते की प्रतीक्षा कर रहे थे।</p>
<p>मेला क्षेत्र में लाउडस्पीकरों पर बार बार घोषणाएं की जा रही थीं, जबकि केंद्र में एक डिजिटल स्क्रीन पर खो गए या मिल गए व्यक्तियों के नाम (ज्यादातर फोटो के साथ) प्रदर्शित किए जा रहे थे।</p>
<p>शिवलिंग, रुद्राक्ष की माला, नदी का पानी ले जाने के लिए बोतल आदि और अनुष्ठान के धागे बेचने वाले विक्रेता पूरी रात कारोबार करते देखे जा सकते हैं।</p>
<p>राजस्थान की रहने वाली और अनुष्ठान के धागे बेचने वाली मनीषा ने कहा, "इस स्थान पर पूरे दिन तीर्थयात्रियों की भीड़ लगी रहती है, घाट पूरी रात भरे रहते हैं। संगम पर हमेशा लोगों की आवाजाही रहती है।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 19:08:12 +0530</pubDate>
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