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                <title>Books - Loktej</title>
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                <description>Books RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारतीय मूल की पद्मा विश्वनाथन अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार-2026 की दौड़ में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">02 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय मूल की कनाडाई-अमेरिकी लेखिका पद्मा विश्वनाथन ने पुर्तगाली भाषा के एक उपन्यास के अंग्रेजी अनुवादक के रूप में </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2026</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की दौड़ में जगह बनायी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्राजील की लेखिका एना पाउल माइया की रचना ‘ऑन अर्थ एज़ इट इज बिनीथ’</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे ज्यूरी ने ‘‘ब्राजील की दूरदराज की एक कॉलोनी के इर्दगिर्द घूमते एक क्रूर</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्मिक और सम्मोहक लघु उपन्यास’’ के रूप में वर्णित किया है</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां न्याय और क्रूरता के बीच की सीमाएं ध्वस्त हो जाती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये उपन्यास प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान के लिए दुनिया भर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146384/padma-viswanathan-of-indian-origin-included-in-the-race-for"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-04/k03042026-140.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">02 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय मूल की कनाडाई-अमेरिकी लेखिका पद्मा विश्वनाथन ने पुर्तगाली भाषा के एक उपन्यास के अंग्रेजी अनुवादक के रूप में </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2026</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की दौड़ में जगह बनायी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्राजील की लेखिका एना पाउल माइया की रचना ‘ऑन अर्थ एज़ इट इज बिनीथ’</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे ज्यूरी ने ‘‘ब्राजील की दूरदराज की एक कॉलोनी के इर्दगिर्द घूमते एक क्रूर</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्मिक और सम्मोहक लघु उपन्यास’’ के रूप में वर्णित किया है</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां न्याय और क्रूरता के बीच की सीमाएं ध्वस्त हो जाती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये उपन्यास प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान के लिए दुनिया भर के छह दावेदारों में से एक है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेखक और अनुवादक के बीच समान रूप से विभाजित होने वाला </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">50,000</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> पाउंड का वार्षिक पुरस्कार पिछले वर्ष कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक और अनुवादक दीपा भास्थी ने लघु कहानी संग्रह ‘हार्ट लैंप’ के लिए जीता था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रत्येक चयनित पुस्तक को </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">5,000</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> पाउंड का पुरस्कार मिलना तय है</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे पुस्तक के लेखक और अंग्रेजी अनुवादक के बीच </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">50-50</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अनुपात में विभाजित किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मंगलवार को घोषित इस सूची में महिलाओं का दबदबा है</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें छह लेखकों में से पांच और छह अनुवादकों में से चार महिलाएं हैं। ये लेखक और अनुवादक आठ देशों – ब्राजील</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बुल्गारिया</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कनाडा</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रांस</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जर्मनी</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ताइवान</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिटेन और अमेरिका का प्रतिनिधित्व करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">विजेता पुस्तक की घोषणा </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">19</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को लंदन के टेट मॉडर्न में आयोजित एक समारोह में की जाएगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/146384/padma-viswanathan-of-indian-origin-included-in-the-race-for</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 13:42:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बुकर फाउंडेशन ने नये चिल्ड्रन बुकर पुरस्कार की शुरूआत की, विजेता को मिलेगा 50,000 पाउंड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लंदन, 24 अक्टूबर (भाषा) बुकर प्राइज फाउंडेशन ने शुक्रवार को काल्पनिक कहानियों के लिए एक नया ‘चिल्ड्रन बुकर पुरस्कार’ शुरू करने की घोषणा की जिसका चयन बाल और वयस्क निर्णायकों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।</p>
<p>यह प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कार प्रदान करने वाले बुकर प्राइज फाउंडेशन ने कहा कि इस पुरस्कार के पहले संस्करण के नामांकन की शुरूआत 2026 में होगी और 2027 से यह प्रतिवर्ष प्रदान किया जाएगा। इसके तहत विजेता को 50,000 पाउंड (करीब 59 लाख रुपये) दिया जाएगा।</p>
<p>फाउंडेशन ने कहा कि यह पुरस्कार आठ से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ समकालीन कथा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143713/booker-foundation-launches-new-childrens-booker-prize-the-winner-will"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-10/k24102025-730.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन, 24 अक्टूबर (भाषा) बुकर प्राइज फाउंडेशन ने शुक्रवार को काल्पनिक कहानियों के लिए एक नया ‘चिल्ड्रन बुकर पुरस्कार’ शुरू करने की घोषणा की जिसका चयन बाल और वयस्क निर्णायकों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।</p>
<p>यह प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कार प्रदान करने वाले बुकर प्राइज फाउंडेशन ने कहा कि इस पुरस्कार के पहले संस्करण के नामांकन की शुरूआत 2026 में होगी और 2027 से यह प्रतिवर्ष प्रदान किया जाएगा। इसके तहत विजेता को 50,000 पाउंड (करीब 59 लाख रुपये) दिया जाएगा।</p>
<p>फाउंडेशन ने कहा कि यह पुरस्कार आठ से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ समकालीन कथा साहित्य के क्षेत्र में ऐसी रचना को दिया जाएगा, जो अंग्रेजी में लिखी गई या अनुवादित हो तथा ब्रिटेन और/या आयरलैंड में प्रकाशित हुई हो।</p>
<p>बुकर प्राइज फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी गैबी वुड ने कहा, ‘‘बाल बुकर पुरस्कार 20 वर्षों में हमारा सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास है और हमें उम्मीद है कि इसका प्रभाव आने वाले दशकों तक बना रहेगा।’’</p>
<p>वुड ने कहा कि यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं है बल्कि यह एक आंदोलन का हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘एक ऐसा उद्देश्य जिसके पीछे बच्चे, माता-पिता, शिक्षक और किस्सागोई करने वाला दुनिया का हर व्यक्ति खड़ा हो सकता है।’’</p>
<p>एकेओ फाउंडेशन के सहयोग से, चयनित एवं विजेता पुस्तकों की कम से कम 30,000 प्रतियां उपहार में दी जाएंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिक से अधिक बच्चे विश्व की सर्वश्रेष्ठ कहानियों को पढ़ सकें।</p>
<p>ब्रिटिश लेखिका पेनेलोप लाइवली 10 नवंबर को लंदन में आयोजित होने वाले इस वर्ष के बुकर पुरस्कार समारोह में नये बाल पुरस्कार पर मुख्य भाषण देंगी।</p>
<p>लेखिका किरण देसाई को उनके उपन्यास 'द लोनलीनेस ऑफ सोनिया एंड सनी' के लिए अंतिम सूची में शामिल किया गया है। इससे पहले उन्होंने 2006 में 'द इनहेरिटेंस ऑफ लॉस' के लिए यह पुरस्कार जीता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Oct 2025 19:30:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘एक क्रिकेटर की पत्नी की डायरी’ : चेतेश्वर पुजारा की पत्नी ने लिखे अपने संस्मरण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) अपनी तरह के अनूठे संस्मरण में भारत के अनुभवी क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा की पत्नी पूजा पुजारा ने क्रिकेटर की पत्नी के रूप में अपने जीवन के अनुभव कलमबद्ध किये हैं जिनमें मैदान के भीतर और बाहर के उतार चढावों और क्रिकेट के दीवाने देश में अपार अपेक्षाओं के बारे में बेबाक ढंग से लिखा है ।</p>
<p>हार्परकोलिंस इंडिया द्वारा प्रकाशित यह किताब ‘ द डायरी ऑफ अ क्रिकेटर्स वाइफ : अ वेरी अनयूजुअल मेमोयर’ को पूजा और नमिता काला ने लिखा है जिसका विमोचन 29 अप्रैल को होगा ।</p>
<p>पूजा ने एक बयान में कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140173/diary-of-a-cricketers-wife-wife-of-cheteshwar-pujara-wrote"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-04/k16042025-11.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) अपनी तरह के अनूठे संस्मरण में भारत के अनुभवी क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा की पत्नी पूजा पुजारा ने क्रिकेटर की पत्नी के रूप में अपने जीवन के अनुभव कलमबद्ध किये हैं जिनमें मैदान के भीतर और बाहर के उतार चढावों और क्रिकेट के दीवाने देश में अपार अपेक्षाओं के बारे में बेबाक ढंग से लिखा है ।</p>
<p>हार्परकोलिंस इंडिया द्वारा प्रकाशित यह किताब ‘ द डायरी ऑफ अ क्रिकेटर्स वाइफ : अ वेरी अनयूजुअल मेमोयर’ को पूजा और नमिता काला ने लिखा है जिसका विमोचन 29 अप्रैल को होगा ।</p>
<p>पूजा ने एक बयान में कहा ,‘‘ चेतेश्वर पुजारा जिद्दी लेकिन सहयोग करने वाले इंसान है जो ज्यादा बोलते नहीं लेकिन उनके पास छिपाने के लिये भी कुछ नहीं है । वह आध्यात्मिक हैं लेकिन पाखंडी नहीं और उन्हें मूर्खतापूर्ण लतीफे सुनाना पसंद है । राजकोट की गलियों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक उनका सफर अनूठा रहा है और मुझे इसे करीब से देखने का मौका मिला है ।’’</p>
<p>उन्होंने कहा ,‘‘ मेरा विश्वास है कि चेतेश्वर पुजारा की कहानी में सभी के लिये कुछ न कुछ है और यही वजह है कि मैने यह किताब लिखी ।’’</p>
<p>जीवन में कभी क्रिकेट नहीं देखने वाली पूजा पाबारी ने 2013 में चेतेश्वर पुजारा से शादी की और उसके बाद से एक क्रिकेटर के दैनंदिनी जीवन का उन्हें अनुभव मिला ।</p>
<p>उसके बाद कुछ साल उन्होंने खेल की बारीकियों को समझा और अपने शाकाहारी पति के लिये पोषक खुराक बनाने की जिम्मेदारी भी ले ली ।</p>
<p>किताब में चेतेश्वर के माता पिता के बलिदानों का भी जिक्र है ।</p>
<p>महान क्रिकेटरों अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने किताब की तारीफ की है । कुंबले और लक्ष्मण ने इसे बेहद बेबाकी और ईमानदारी से लिखी गई किताब कहा तो द्रविड़ ने कहा कि इसे जरूर पढ़ना चाहिये ।</p>
<p>द्रविड़ ने कहा ,‘‘ पुजारा के सफर को पूजा ने करीब से देखा है । इस किताब से भारत के सबसे अनूठे बल्लेबाज के दिमाग को पढने का दुर्लभ मौका मिलेगा । कड़ी मेहनत और दृढता में विश्वास रखने वाले हर इंसान को यह किताब पढनी चाहिये ।’’</p>
<p></p><div class="pbwidget wid6a14bd1438a55 imagewidget"><div class="pbwidget-body"><img src="https://www.loktej.com/media/2025-03/loktej-pr-ad-slide-hindi.jpg" alt=""></img></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                            <category>क्रिकेट</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Apr 2025 20:14:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बानू मुश्ताक की किताब अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की होड़ में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लंदन, 25 फरवरी (भाषा) कर्नाटक की लेखिका, कार्यकर्ता और वकील बानू मुश्ताक के कहानी संग्रह 'हार्ट लैंप' को मंगलवार को यहां अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2025 के लिए संभावित पुस्तकों की सूची में शामिल किया गया।</p>
<p>दीपा भास्थी ने कन्नड़ से अंग्रेजी में इसका अनुवाद किया है।</p>
<p>पहली बार किसी कन्नड़ पुस्तक को प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार 2025 के लिए संभावित पुस्तकों की सूची में शामिल किया गया है।</p>
<p>मुश्ताक और भास्थी की 'हार्ट लैंप' के बारे में निर्णायकों ने कहा, "समाज में हाशिये पर रहने वाले लोगों के जीवन को दर्शाती ये जीवंत कहानियां बहुत भावनात्मक और नैतिक महत्व रखती हैं।"</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137584/banu-mushtaq-s-book-international-booker-award"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/9789_books-fair1.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन, 25 फरवरी (भाषा) कर्नाटक की लेखिका, कार्यकर्ता और वकील बानू मुश्ताक के कहानी संग्रह 'हार्ट लैंप' को मंगलवार को यहां अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2025 के लिए संभावित पुस्तकों की सूची में शामिल किया गया।</p>
<p>दीपा भास्थी ने कन्नड़ से अंग्रेजी में इसका अनुवाद किया है।</p>
<p>पहली बार किसी कन्नड़ पुस्तक को प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार 2025 के लिए संभावित पुस्तकों की सूची में शामिल किया गया है।</p>
<p>मुश्ताक और भास्थी की 'हार्ट लैंप' के बारे में निर्णायकों ने कहा, "समाज में हाशिये पर रहने वाले लोगों के जीवन को दर्शाती ये जीवंत कहानियां बहुत भावनात्मक और नैतिक महत्व रखती हैं।"</p>
<p>दक्षिण भारत के मुस्लिम समुदायों पर आधारित 12 कहानियां मूल रूप से 1990 से 2023 के बीच प्रकाशित हुईं।</p>
<p>लेखिका ने इसे "कन्नड़ भाषा के साहित्य के लिए बहुत बड़ा सम्मान" बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/137584/banu-mushtaq-s-book-international-booker-award</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 12:38:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गीता प्रेस ने 87 वर्षों बाद 'श्री कृष्ण लीला दर्शन' का पुनर्मुद्रण किया, रंगीन चित्र हैं उसमें</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गोरखपुर, (उप्र) 11 फरवरी (भाषा) गोरखपुर के विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस ने 87 वर्षों के बाद प्रतिष्ठित पुस्तक ‘श्रीकृष्ण लीला दर्शन’ को पुनः प्रकाशित किया है, जो मूल रूप से 1938 में छपी थी। गीता प्रेस प्रबंधन ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उसने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले ‘आर्ट पेपर’ पर मुद्रित नए संस्करण में पहली बार जीवंत रंग चित्रण शामिल है, जो भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं को एक आकर्षक तरीके से जीवंत करता है।</p>
<p>गीता प्रेस के अधिकारियों ने कहा कि कुल 3,000 प्रतियां छापी गई हैं, जिनमें से 50 नेपाल भेजी गई हैं।</p>
<p>संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/132430/geeta-press-reprinted--shri-krishna-leela-darshan--after-87-years--there-are-colorful-pictures-in-it"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-02/k11022025-05.jpg" alt=""></a><br /><p>गोरखपुर, (उप्र) 11 फरवरी (भाषा) गोरखपुर के विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस ने 87 वर्षों के बाद प्रतिष्ठित पुस्तक ‘श्रीकृष्ण लीला दर्शन’ को पुनः प्रकाशित किया है, जो मूल रूप से 1938 में छपी थी। गीता प्रेस प्रबंधन ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उसने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले ‘आर्ट पेपर’ पर मुद्रित नए संस्करण में पहली बार जीवंत रंग चित्रण शामिल है, जो भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं को एक आकर्षक तरीके से जीवंत करता है।</p>
<p>गीता प्रेस के अधिकारियों ने कहा कि कुल 3,000 प्रतियां छापी गई हैं, जिनमें से 50 नेपाल भेजी गई हैं।</p>
<p>संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी द्वारा लिखित यह पुस्तक भगवान कृष्ण की बचपन का लीलाओं का विस्तार से वर्णन करती है। पहला संस्करण 1938 में छपा था और तब उसकी कीमत मात्र 2.50 रुपये थी।</p>
<p>गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि इस बार, उच्च-गुणवत्ता वाली छवियों को शामिल करके इसकी अपील को बढ़ाया है, जिससे पाठकों के लिए कथन अधिक प्रभावशाली हो गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 256 पृष्ठों वाली यह पुस्तक कृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों, उनके जन्म से लेकर उनके चंचल बचपन के प्रसंगों को शब्दों और उत्कृष्ट कलाकृति दोनों के माध्यम से चित्रित करती है।</p>
<p>तिवारी ने कहा कि पिछले संस्करणों के विपरीत, जो पूरी तरह से पाठ-आधारित थे, यह सचित्र संस्करण युवा पाठकों और भक्तों को समान रूप से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गीता प्रेस ने भारत भर में अपनी शाखाओं में उसकी प्रतियां वितरित की हैं और मांग के आधार पर अतिरिक्त प्रिंट पर विचार कर सकता है।</p>
<p>तिवारी ने कहा, “यह पुस्तक हमेशा पाठकों द्वारा पसंद की गई है। मांग को देखते हुए, हमने इसे एक नए, अधिक आकर्षक प्रारूप में वापस लाने का फैसला किया। अगर दिलचस्पी बढ़ती रही तो हम और प्रतियां छापेंगे।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Feb 2025 20:28:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2025 : एक फरवरी से सजेगी किताबों की हाट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2025 का आयोजन एक फरवरी से भारत मंडपम में होगा। इस वर्ष पुस्तक मेले का विषय 75वें गणतंत्र दिवस पर केंद्रित होगा और आयोजन में 50 देशों की भागीदारी रहेगी। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) ने बृहस्पतिवार को यह घोषणा की।</p>
<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को मेले का उद्घाटन करेंगी। इस दौरान 2,000 से अधिक प्रकाशक और 1,000 से ज्यादा वक्ता मेले में आएंगे। आयोजकों के अनुसार, इस साल रूस को मुख्य देश के रूप में चुना गया है।</p>
<p>एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक ने कहा कि यह मेला भारत की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/127449/new-delhi-world-book-fair-2025--books-will-be-adorned-from-february-1"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/9789_books-fair1.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2025 का आयोजन एक फरवरी से भारत मंडपम में होगा। इस वर्ष पुस्तक मेले का विषय 75वें गणतंत्र दिवस पर केंद्रित होगा और आयोजन में 50 देशों की भागीदारी रहेगी। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) ने बृहस्पतिवार को यह घोषणा की।</p>
<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को मेले का उद्घाटन करेंगी। इस दौरान 2,000 से अधिक प्रकाशक और 1,000 से ज्यादा वक्ता मेले में आएंगे। आयोजकों के अनुसार, इस साल रूस को मुख्य देश के रूप में चुना गया है।</p>
<p>एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक ने कहा कि यह मेला भारत की सांस्कृतिक विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं को जोड़ने का मंच बनेगा। उन्होंने कहा, "यह पुस्तक मेला न केवल भारतीय लेखकों, विचारों और चर्चाओं को स्थान देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संवाद का अवसर प्रदान करेगा।"</p>
<p>रूसी लेखक अलेक्सी वारलामोव ने बताया कि रूसी प्रकाशक मेले में 1,500 से अधिक पुस्तकें प्रदर्शित करेंगे, जो रूस के इतिहास, संस्कृति और साहित्य को प्रस्तुत करेंगी।</p>
<p>'इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर' में पुस्तक विमोचन, सामूहिक चर्चा, वाचन सत्र, फिल्म प्रदर्शन और कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जिसमें विभिन्न देशों के लेखक और वक्ता भाग लेंगे।</p>
<p>अभिनेता पंकज त्रिपाठी, लेखक शशि थरूर, कवि कुमार विश्वास, फिल्मकार प्रकाश झा, भोजन समीक्षक पुष्पेश पंत और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जैसी हस्तियां भी मेले में भाग लेंगी।</p>
<p>इसके अलावा, 'ब्रह्मपुत्र साहित्य उत्सव', 'प्रभात प्रकाशन', 'भारत साहित्य महोत्सव', 'एपीजे कोलकाता लिटरेरी फेस्टिवल', 'पेंगुइन डायलॉग्स' और 'ग्रेट इंडियन बुक टूर' जैसे कई साहित्यिक आयोजन मेले के दौरान समानांतर रूप से आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p>इस साल मेले में 'लेखक लाउंज' और 'चिल्ड्रन कॉर्नर' जैसी नयी पहल की गई हैं। चिल्ड्रन कॉर्नर में कहानी सुनाने, साहित्य, कला, नृत्य और शिल्प कार्यशालाएं होंगी, जिससे बच्चों को किताबों के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p>मेला नौ फरवरी तक चलेगा। आयोजकों ने बताया कि स्कूल के कपड़ो में आने वाले छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/127449/new-delhi-world-book-fair-2025--books-will-be-adorned-from-february-1</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Jan 2025 18:58:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सलमान रुश्दी की 'द सैटेनिक वर्सेज' 36 साल के प्रतिबंध के बाद भारत लौटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 25 दिसंबर (भाषा) ब्रिटिश-भारतीय उपन्यासकार सलमान रुश्दी की विवादास्पद पुस्तक “द सैटेनिक वर्सेज” राजीव गांधी सरकार द्वारा प्रतिबंधित किये जाने के करीब 36 साल बाद खामोशी से भारत वापस आ गयी है।</p>
<p>पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय राजधानी स्थित ‘बाहरीसन्स बुकसेलर्स’ में इस पुस्तक का “सीमित स्टॉक” बिक रहा है। इस किताब की विषय-वस्तु और लेखक के विरुद्ध काफी हंगामा हुआ और दुनिया भर के मुस्लिम संगठनों ने इसे ईशनिंदा वाला माना था।</p>
<p>‘बाहरीसन्स बुकसेलर्स’ की मालिक रजनी मल्होत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हमें किताब मिले कुछ दिन हो गए हैं और अब तक प्रतिक्रिया बहुत अच्छी रही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नयी दिल्ली, 25 दिसंबर (भाषा) ब्रिटिश-भारतीय उपन्यासकार सलमान रुश्दी की विवादास्पद पुस्तक “द सैटेनिक वर्सेज” राजीव गांधी सरकार द्वारा प्रतिबंधित किये जाने के करीब 36 साल बाद खामोशी से भारत वापस आ गयी है।</p>
<p>पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय राजधानी स्थित ‘बाहरीसन्स बुकसेलर्स’ में इस पुस्तक का “सीमित स्टॉक” बिक रहा है। इस किताब की विषय-वस्तु और लेखक के विरुद्ध काफी हंगामा हुआ और दुनिया भर के मुस्लिम संगठनों ने इसे ईशनिंदा वाला माना था।</p>
<p>‘बाहरीसन्स बुकसेलर्स’ की मालिक रजनी मल्होत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हमें किताब मिले कुछ दिन हो गए हैं और अब तक प्रतिक्रिया बहुत अच्छी रही है। अच्छी बिक्री हो रही है।”</p>
<p>किताब की कीमत 1,999 रुपये है और यह पुस्तक केवल दिल्ली-एनसीआर में ‘बाहरीसन्स बुकसेलर्स’ स्टोर पर उपलब्ध है।</p>
<p>किताब विक्रेता ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “ सलमान रुश्दी की ‘द सैटेनिक वर्सेज’ अब बाहरीसन्स बुकसेलर्स पर उपलब्ध है। इस अभूतपूर्व और विचारोत्तेजक उपन्यास ने अपनी कल्पनाशील कहानी और ‘बोल्ड’ थीम के साथ दशकों से पाठकों को आकर्षित किया है। यह अपने विमोचन के बाद से ही वैश्विक विवाद के केंद्र में रही है, जिसने अभिव्यक्ति की आजादी, आस्था और कला पर बहस छेड़ दी है।”</p>
<p>‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ की प्रधान संपादक मानसी सुब्रमण्यम ने भी सोशल मीडिया मंच पर रुश्दी का उद्धरण देते हुए पोस्ट किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “भाषा साहस देती है, किसी विचार को ग्रहण करने और व्यक्त करने की काबिलियत पैदा करती है और इस हिम्मत के साथ सच्चाई आकार लेती है।' आखिरकार। सलमान रुश्दी की ‘द सैटेनिक वर्सेज’ को 36 साल के प्रतिबंध के बाद भारत में बेचने की अनुमति मिल गई है। यह किताब दिल्ली के बाहरीसन्स बुकस्टोर पर उपलब्ध है।”</p>
<p>‘मिडलैंड बुक शॉप’ और ‘ओम बुक शॉप’ सहित अन्य बुकस्टोर ने इस पुस्तक को आयात करने की योजना नहीं बनाई है।</p>
<p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने नवंबर में उपन्यास के आयात पर राजीव गांधी सरकार के प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर कार्यवाही बंद कर दी थी और कहा था कि चूंकि अधिकारी प्रासंगिक अधिसूचना पेश करने में विफल रहे हैं, इसलिए यह “मान लिया जाना चाहिए कि वह मौजूद ही नहीं है।”</p>
<p>यह आदेश तब आया जब सरकारी अधिकारी पांच अक्टूबर 1988 की अधिसूचना प्रस्तुत करने में विफल रहे जिसमें पुस्तक के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया था।</p>
<p>किताब प्रकाशन के कुछ समय बाद ही मुश्किल में पड़ गई, जिसके कारण ईरानी नेता रूहोल्लाह खोमैनी ने एक फतवा जारी कर मुसलमानों से रुश्दी और उसके प्रकाशकों की हत्या करने को कहा था। रुश्दी ने लगभग 10 साल ब्रिटेन और अमेरिका में छिपकर बिताए।</p>
<p>जुलाई 1991 में उपन्यासकार के जापानी अनुवादक हितोशी इगाराशी की उनके कार्यालय में हत्या कर दी गयी।</p>
<p>लेबनानी-अमेरिकी हादी मतर ने 12 अगस्त 2022 को एक व्याख्यान के दौरान मंच पर रुश्दी पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे उनकी एक आंख की रोशनी चली गई।</p>
<p>भले ही यह पुस्तक बाहरीसन्स बुकसेलर्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध है, फिर भी पाठकों की ओर से इसे मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है, विशेषकर इसकी कीमत के कारण।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/114526/salman-rushdie-s--the-satanic-verses--returns-to-india-after-36-years-of-ban</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2024 17:57:52 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साहित्यिक समीक्षकों के अनुसार 2024 के दस सर्वश्रेष्ठ उपन्यास</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(साहित्यिक समीक्षकों मनजीत रिडॉन, एलिस केली, अंखी मुखर्जी, डेबरा बेनिता शॉ, एडवर्ड सुगडेन, एमिली ज़ोबेल मार्शल, जेन मैकब्राइड, ऑरलैथ डार्लिंग, सारा एन्स ब्राउन और स्कारलेट बैरन के नजरिये से )</p>
<p>लंदन, 17 दिसंबर (द कन्वरसेशन) सामंथा हार्वे की मंत्रमुग्ध कर देने वाली बुकर विजेता ऑर्बिटल से लेकर पर्सिवल एवरेट की हकलबेरी फिन, जेम्स तक -ये वे पुस्तकें हैं जिन्होंने हमारे विशेषज्ञ समीक्षकों पर सबसे स्थायी प्रभाव डाला।</p>
<p>1. द सेफकीप (येल वैन डेर वूडेन)</p>
<p>डे मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी के कला, डिजाइन और मानविकी संकाय के एसोसिएट डीन इंटरनेशनल, मनजीत रिडॉन द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>द सेफकीप, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदी संपत्ति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/111418/the-ten-best-novels-of-2024-according-to-literary-critics"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/books-reading-study-library-novel-poem.jpg" alt=""></a><br /><p>(साहित्यिक समीक्षकों मनजीत रिडॉन, एलिस केली, अंखी मुखर्जी, डेबरा बेनिता शॉ, एडवर्ड सुगडेन, एमिली ज़ोबेल मार्शल, जेन मैकब्राइड, ऑरलैथ डार्लिंग, सारा एन्स ब्राउन और स्कारलेट बैरन के नजरिये से )</p>
<p>लंदन, 17 दिसंबर (द कन्वरसेशन) सामंथा हार्वे की मंत्रमुग्ध कर देने वाली बुकर विजेता ऑर्बिटल से लेकर पर्सिवल एवरेट की हकलबेरी फिन, जेम्स तक -ये वे पुस्तकें हैं जिन्होंने हमारे विशेषज्ञ समीक्षकों पर सबसे स्थायी प्रभाव डाला।</p>
<p>1. द सेफकीप (येल वैन डेर वूडेन)</p>
<p>डे मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी के कला, डिजाइन और मानविकी संकाय के एसोसिएट डीन इंटरनेशनल, मनजीत रिडॉन द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>द सेफकीप, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदी संपत्ति के अधिग्रहण और चोरी के बारे में एक उपन्यास है, जो डच इतिहास के एक काले अध्याय को फिर से दर्शाता है।</p>
<p>निर्वासित होने से पहले, डच यहूदियों से उनका घर और सामान छीन लिया गया था और उन्हें जो कुछ भी वे ले जा सकते थे, उसके साथ एम्स्टर्डम से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।</p>
<p>वैन डेर वूडेन का पहला उपन्यास उन चीजों को रखने या बनाए रखने के कार्य पर एक विडंबनापूर्ण प्रकाश डालता है, जिन्हें उनके असली मालिकों द्वारा पुनः प्राप्त किया जाना था, लेकिन जो युद्ध में खो गए या चोरी हो गए। इस इतिहास का आघात तीन भाई-बहनों के जीवन पर मंडराता है, जो अपनी मां को खोने का शोक मना रहे हैं।</p>
<p>उपन्यास की अकेली नायिका इसाबेल, परिवार के घर में अकेली रहती है, और उसे अपनी दिवंगत मां की इच्छा के अनुसार व्यवस्थित रखती है। इस दौरान उसे संदेह होता है कि उनकी नौकरानी रसोई से चोरी कर रही है। लेकिन अपने भाई की प्रेमिका, ईवा के आने के बाद, इसाबेल को घर की सच्चाई का पता चलता है और वह ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने का प्रयास करती है।</p>
<p>2. ऑर्बिटल (सामंथा हार्वे)</p>
<p>डेबरा बेनिता शॉ ,सांस्कृतिक सिद्धांत में रीडर, यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>बुकर पुरस्कार विजेता, सामंथा हार्वे की ऑर्बिटल ने जलवायु संकट की तात्कालिकता के विरुद्ध अंतरिक्ष उड़ान की मानवीय लागत को कुशलतापूर्वक उजागर किया है। ऐसे समय में जब दक्षिण-पूर्व एशिया में जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाला तूफान आ रहा है, छह अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं। बेस्वाद भोजन और प्रयोगशाला के काम की उनकी रोज़मर्रा की दिनचर्या, नीले ग्रह के भयानक तमाशे के बिल्कुल विपरीत है, जो रात और दिन, अंधेरे और उजाले के बीच झूल रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय सीमाएं अर्थहीन हैं।</p>
<p>हार्वे ने दुनिया के अंत के बारे में उपन्यास लिखा है। यह आशा प्रदान करता है कि हम इसे अलग तरीके से जानना सीख सकते हैं।</p>
<p>3. ग्लिफ़ (अली स्मिथ द्वारा)</p>
<p>एंग्लिया रस्किन विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य की प्रोफेसर सारा एन्स ब्राउन द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>ग्लिफ में स्मिथ की हालिया ‘सीजनल क्वार्टेट’ (2016-20) जैसी ही कई चिंताएं हैं: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, शरणार्थियों की दुर्दशा और असहिष्णुता और अधिनायकवाद का विकास। लेकिन यह उपन्यास एक ऐसे काल्पनिक ब्रिटेन की परिकल्पना पर केंद्रित है जहां ये सभी समस्याएं भयावह तरीकों से बढ़ गई हैं।</p>
<p>ग्लिफ ने उपन्यासकार के रूप में स्मिथ की विशिष्ट शक्तियों को प्रदर्शित किया है। कथा सुलभ और आकर्षक है, फिर भी एक ही समय में जटिल और सूक्ष्म है। पाठक के लिए कई पहेलियां रखी गई हैं - केवल कुछ ही हल की गई हैं।</p>
<p> </p>
<p>4. इंटरमेज़ो ( सैली रूनी द्वारा)</p>
<p>यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन में समकालीन अंग्रेजी साहित्य और आलोचनात्मक सिद्धांत में पोस्टडॉक्टरल फेलो, ऑरलैथ डार्लिंग द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>इंटरमेज़ो शायद रूनी का सबसे परिपक्व प्रतिबिंब है कि कैसे रिश्ते एक दूसरे के प्रति और दुनिया में आशावाद के रूप में काम करते हैं। उपन्यास रिश्तों में होने वाले वादों और उनके द्वारा बनाए गए पारस्परिक, स्वैच्छिक भावनात्मक ऋणों पर उल्लेखनीय और उत्साहवर्धक है।</p>
<p>इन ऋणों को जाहिर सी बात है कि हमेशा चुकाया नहीं जा सकता। और बात इतनी सी है कि प्यार के दांव ऊंचे होते हैं और फिर भी हम चूक जाने का जोखिम उठाते हैं।</p>
<p>रूनी की दुनिया ऐसी है जिसमें रिश्ते हमें सहारा देते हैं और जिसमें छोटे-छोटे दैनिक चमत्कार जीवन को कहीं अधिक सहने योग्य बनाते हैं।</p>
<p> </p>
<p>5. जेम्स (पर्सीवल एवरेट द्वारा)</p>
<p>लीड्स बेकेट विश्वविद्यालय में उत्तर औपनिवेशिक साहित्य में रीडर एमिली ज़ोबेल मार्शल द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>जेम्स, मार्क ट्वेन की 1884 की अमेरिकी क्लासिक द एडवेंचर्स ऑफ हकलबेरी फिन का एक अविश्वसनीय पुनर्लेखन है। मूल पुस्तक की तरह, यह भी गृहयुद्ध से पहले के बागान पर केंद्रित है। यह 1861 है, युद्ध चल रहा है, और जेम्स को पता चलता है कि उसे न्यू ऑरलियन्स में एक नए मालिक को बेचा जा सकता है और उसके परिवार से अलग किया जा सकता है।</p>
<p>एवरेट ने अपनी कथा में अश्वेत साहित्यिक आलोचना और सिद्धांत को कुशलता से बुना है, साथ ही उन पुस्तकों के कलात्मक संकेत भी दिए हैं जिन्होंने अमेरिकी विद्वत्तापूर्ण और साहित्यिक परंपराओं को आकार दिया है।</p>
<p>जेम्स की कहानी आपको बदल देगी। आप अपने द्वारा पढ़े गए सभी अन्य क्लासिक उपन्यासों पर सवाल उठाने लगेंगे और आश्चर्य करेंगे कि किसकी कहानी को दबाया जा रहा है।</p>
<p>6. बटर (असाको युज़ुकी द्वारा)</p>
<p>गैलवे विश्वविद्यालय में साहित्य में पीएचडी शोधार्थी जेन मैकब्राइड द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>असाको युज़ुकी का बटर आपके दिमाग में बेचैनी से पिघलता है। भोजन, सेक्स और हिंसा का वर्णन पारलौकिक हो जाता है, लगभग किसी भी भौतिक चीज़ से अलग हो जाता है। गद्य गहन लेकिन स्पष्ट है।</p>
<p>पत्रकार रीका हत्यारे मनको काजी के साथ जेल में साक्षात्कार करती है, जो एक ऐसी महिला है जो अपने स्वादिष्ट और जानलेवा लजीज भोजन से अकेले पुरुषों को लुभाती है। जब रीका इस अजीब महिला से बात करती है, तो वह खुद को उसकी दुनिया में और भी गहराई से खिंचता हुआ पाती है।</p>
<p> </p>
<p>7. शहीद (कावेह अकबर द्वारा)</p>
<p>एलिस केली द्वारा अनुशंसित, साहित्य और इतिहास की सहायक प्रोफेसर, वारविक विश्वविद्यालय।</p>
<p>हम मृत्यु से कैसे अर्थ निकालते हैं, खासकर जब यह हिंसक और निरर्थक हो? यह सवाल ईरानी-अमेरिकी कवि कावेह अकबर के पहले उपन्यास, शहीद के नायक साइरस शम्स को परेशान करता है। साइरस अपनी मां रोया की मौत का अर्थ समझने की कोशिश कर रहा है, जो फारस की खाड़ी के ऊपर अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा मार गिराए गए एक विमान में सवार थी। उसकी मौत के बाद, साइरस और उसके पिता अली ईरान से अमेरिका चले जाते हैं।</p>
<p>आखिरकार यह सवाल उसे ऐतिहासिक शहीदों के बारे में एक किताब पर काम करने के लिए प्रेरित करता है</p>
<p>8. परेड (राहेल कस्क द्वारा)</p>
<p>यूसीएल के अंग्रेजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर स्कारलेट बैरन द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>परेड एक खोजपूर्ण पुस्तक है। यह कला की उत्पत्ति और ग्रहण में लैंगिकता की भूमिका की खोज है - एक उपन्यास जिसमें आत्म-सम्मान, रचनात्मकता और पारिवारिक संबंधों की विश्लेषणात्मक पड़ताल की गई है।</p>
<p>पुस्तक के चार अध्याय कलाकारों के जीवन पर केंद्रित हैं, जिनमें से प्रत्येक को ‘जी’ के रूप में संदर्भित किया जाता है। स्टंटमैन एक कलाकार की कहानी बताता है, जो ‘शायद इसलिए कि उसे इतिहास में अपने समय और स्थान को समझने का कोई और तरीका नहीं मिला और उसने उल्टा चित्र बनाना शुरू कर दिया।</p>
<p>9. ब्रदरलेस नाइट (वी.वी. गणेशनंथन द्वारा)</p>
<p>ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अंग्रेजी और विश्व साहित्य की प्रोफेसर अंखी मुखर्जी द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>गृहयुद्ध (1983 से 2009) के दौरान जाफना, श्रीलंका में केंद्रित इस उपन्यास में मुख्य पात्र, शशिकला कुलेंथिरेन, एक तमिल किशोरी है, जो अपने भाइयों के साथ मेडिकल या इंजीनियरिंग की डिग्री की ओर कदम बढ़ा रही है। जब सरकार के अत्याचार और उग्रवाद का आह्वान प्रायद्वीप से एक के बाद एक लड़के को गायब करना शुरू कर देता है, तो शशि इतिहास की एक छोटी-सी भूमिका निभाती है। वह महिलाओं के एक समूह के साथ जीवित रहती है और आंदोलन करती है। गणेशनंथन बिना एक बार भी इसकी संगठित हिंसा का महिमामंडन किए एक अलगाववादी आंदोलन का विश्लेषण करते हैं।</p>
<p>10. कैरोस (जेनी एर्पेनबेक द्वारा)</p>
<p>किंग्स कॉलेज लंदन में अमेरिकी अध्ययन के वरिष्ठ व्याख्याता एडवर्ड सुगडेन द्वारा अनुशंसित।</p>
<p>जेनी एर्पेनबेक के कैरोस में, एक पात्र पूछता है कि क्या मनुष्य ‘समय द्वारा भरा जाने वाला एक कंटेनर है जो उसके पास जो कुछ भी हो, उससे भरा जा सकता है’ या क्या इतिहास से परे जीवन हो सकता है। पूरा उपन्यास इस प्रश्न को नाटकीय रूप से प्रस्तुत करता है।</p>
<p>पुस्तक, जिसने 2024 का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीता, जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य (1949-90) के अंतिम वर्षों पर केंद्रित है, जब पश्चिमी पूंजीवाद एक ढहते हुए समाजवाद को नष्ट कर रहा था।</p>
<p>इस संदर्भ में, दो प्रेमी, वृद्ध लेखक हैंस और दिवंगत किशोरी कैथरीना एक बरसात की शाम को बस में मिले थे।</p>
<p>किताब में बेवफाई के सांसारिक धोखे हैं - हैंस और कैथरीना कैफ़े में मिलते हैं, फ़िल्में देखते हैं, संगीत सुनते हैं, खरीदारी करते हैं, छुट्टियाँ मनाते हैं - जैसे-जैसे कथानक अपने अंत की ओर बढ़ता है, इतिहास और भावनात्मक तीव्रता से भरता जाता है।</p>
<p>द कन्वरसेशन</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/111418/the-ten-best-novels-of-2024-according-to-literary-critics</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 12:57:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रणब को 2012 में प्रधानमंत्री, मनमोहन को राष्ट्रपति बनाया जाना चाहिए था: मणिशंकर अय्यर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने अपनी नयी पुस्तक में कहा है कि 2012 में जब राष्ट्रपति पद रिक्त हुआ था तब प्रणब मुखर्जी को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)-दो सरकार की बागडोर सौंपी जानी चाहिए थी और मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति बनाया जाना चाहिए था।</p>
<p>अय्यर (83) ने पुस्तक में लिखा है कि यदि उस समय ऐसा किया गया होता तो संप्रग सरकार ‘‘शासन के पंगु बनने’’ की स्थिति में नहीं पहुंचती।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में बनाए रखने और प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति भवन भेजने के निर्णय ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/110477/pranab-should-have-been-made-prime-minister--manmohan-as-president-in-2012--mani-shankar-aiyar"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/politics.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने अपनी नयी पुस्तक में कहा है कि 2012 में जब राष्ट्रपति पद रिक्त हुआ था तब प्रणब मुखर्जी को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)-दो सरकार की बागडोर सौंपी जानी चाहिए थी और मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति बनाया जाना चाहिए था।</p>
<p>अय्यर (83) ने पुस्तक में लिखा है कि यदि उस समय ऐसा किया गया होता तो संप्रग सरकार ‘‘शासन के पंगु बनने’’ की स्थिति में नहीं पहुंचती।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में बनाए रखने और प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति भवन भेजने के निर्णय ने संप्रग के तीसरी बार सरकार गठित करने की संभावनाओं को ‘‘खत्म’’ कर दिया।</p>
<p>अय्यर ने अपनी पुस्तक ‘ए मैवरिक इन पॉलिटिक्स’ में ये विचार रखे हैं। इस पुस्तक को ‘जगरनॉट’ ने प्रकाशित किया है।</p>
<p>पुस्तक में अय्यर ने राजनीति में अपने शुरुआती दिनों, पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के शासनकाल, संप्रग-एक में मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल, राज्यसभा में अपने कार्यकाल और फिर अपनी स्थिति में ‘‘गिरावट...परिदृश्य से बाहर होने...पतन’’ का जिक्र किया है।</p>
<p>अय्यर ने लिखा, ‘‘2012 में प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) को कई बार ‘कोरोनरी बाइपास सर्जरी’ करानी पड़ी। वह शारीरिक रूप से कभी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो पाए। इससे उनके काम करने की गति धीमी हो गई और इसका असर शासन पर भी पड़ा। जब प्रधानमंत्री का स्वास्थ्य खराब हुआ, लगभग उसी समय (तत्कालीन) कांग्रेस अध्यक्ष (सोनिया गांधी) भी बीमार पड़ी थीं लेकिन पार्टी ने उनके स्वास्थ्य के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि दोनों कार्यालयों - प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष - में गतिहीनता थी, शासन का अभाव था जबकि कई संकटों, विशेषकर अन्ना हजारे के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन से या तो प्रभावी ढंग से निपटा नहीं गया या फिर उनसे निपटा ही नहीं गया।</p>
<p>उन्होंने लिखा, ‘‘...व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि जब 2012 में राष्ट्रपति पद खाली हुआ था तो प्रणब मुखर्जी को सरकार की बागडोर सौंपी जानी चाहिए थी और डॉ. मनमोहन सिंह को भारत का राष्ट्रपति बनाया जाना चाहिए था।’’</p>
<p>अय्यर ने कहा, ‘‘...प्रणब के संस्मरणों से पता चलता है कि वास्तव में इस पर विचार किया गया था।’’</p>
<p>अय्यर ने कहा, ‘‘...किन्हीं कारणों से, जिनकी जानकारी न तो मुझे और न ही संभवत: किसी और थी, डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में बनाए रखने और प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति के रूप में ऊपर भेजने का निर्णय लिया गया।’’</p>
<p>उन्होंने मुखर्जी को 2012 में प्रधानमंत्री बनाए जाने के अपने विचार को लेकर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘...मुझे लगता है कि अगर डॉ. मनमोहन सिंह राष्ट्रपति और प्रणब प्रधानमंत्री बन गए होते, तो भी हमें 2014 में हार का सामना करना पड़ता लेकिन यह हार इतनी अपमानजनक नहीं होती कि हम मात्र 44 सीट पर सिमट जाते।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि 2013 में हर कोई बीमारी से उबर रहा था और इसलिए हमारे खिलाफ कई आरोप लगाए गए जो अदालत में कभी साबित नहीं हुए थे।</p>
<p>अय्यर ने अपनी किताब में कहा कि सरकार और पार्टी की ऐसी विश्वसनीयता नहीं रह सकी कि वे मामलों को स्पष्ट रूप से सनसनीखेज तरीके से दिखाने के भूखे मीडिया के आरोपों का जवाब दे सकें और उन्होंने सोचा कि संबंधित मंत्रियों के इस्तीफे से मुद्दों को खत्म किया जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इससे कुछ भी हल नहीं निकला और अप्रमाणित आरोपों ने सरकार की प्रतिष्ठा को और नुकसान पहुंचाया।<br /><br /></p><div class="pbwidget wid6a14bd142a042 htmlwidget"><div class="pbwidget-body">(अस्वीकरण: उपरोक्त समाचार/लेख समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा की ऑटो जनरेटेड  सिंडिकेटेड फीड से प्राप्त हुई है और लोकतेज टीम द्वारा संपादित नहीं की गई है। लोकतेज इस सामग्री के लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होगा।)</div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2024 22:00:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एनएसजी के पूर्व महानिदेशक गणपति ने लघु कथाओं का संग्रह लिखा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के पूर्व महानिदेशक एम ए गणपति द्वारा लिखित लघु कहानियों का संग्रह पुलिस घटनाओं और असाधारण घटनाओं का मिश्रण है।</p>
<p>'व्हिसपर्स इन द शैडोज' नामक शीर्षक से लिखा गया कहानियों का यह संग्रह अविनाश नामक एक साधारण और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के साहसिक कारनामों से संबंधित हैं।</p>
<p>कई कहानियों में अविनाश पीड़ितों को न्याय दिलाने में असफल रहता है या संघर्ष करता है, लेकिन घटनाओं के अचानक और चौंकाने वाले मोड़ के परिणामस्वरूप अपराधियों को सजा मिल जाती है।</p>
<p>भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी द्वारा लिखी गई ये कहानियां</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/110306/former-nsg-director-general-ganpati-wrote-a-collection-of-short-stories"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k14122024-04.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के पूर्व महानिदेशक एम ए गणपति द्वारा लिखित लघु कहानियों का संग्रह पुलिस घटनाओं और असाधारण घटनाओं का मिश्रण है।</p>
<p>'व्हिसपर्स इन द शैडोज' नामक शीर्षक से लिखा गया कहानियों का यह संग्रह अविनाश नामक एक साधारण और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के साहसिक कारनामों से संबंधित हैं।</p>
<p>कई कहानियों में अविनाश पीड़ितों को न्याय दिलाने में असफल रहता है या संघर्ष करता है, लेकिन घटनाओं के अचानक और चौंकाने वाले मोड़ के परिणामस्वरूप अपराधियों को सजा मिल जाती है।</p>
<p>भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी द्वारा लिखी गई ये कहानियां कानून प्रवर्तन के त्रुटिपूर्ण पक्ष को चित्रित करती हैं, लेकिन घटनाओं में अजीब और रहस्यमय मोड़ भी हैं।</p>
<p>अधिकांश कहानियां उत्तर भारत में घटित होने वाली घटनाओं पर आधारित हैं, जिनमें दिल्ली के लोधी गार्डन और जेएनयू जैसे आसानी से पहचाने जाने वाले स्थान भी शामिल हैं।</p>
<p>पूर्वोत्तर में घटित एक छोटे बच्चे की कहानी विशेष रूप से डरावनी और मार्मिक है।</p>
<p>गणपति के काम को पाठकों के लिए जो चीज अलग बनाती है वह यह है कि उनकी कहानियां पुलिस की जीत के बारे में नहीं हैं, बल्कि अपराध के पीड़ितों की मदद करने के बारे में हैं। इन पीड़ितों को अक्सर न्याय नहीं मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/110306/former-nsg-director-general-ganpati-wrote-a-collection-of-short-stories</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2024 09:00:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>हिंदी लेखिका सूर्यबाला को 34वां व्यास सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 11 दिसंबर (भाषा) हिंदी की जानी-मानी लेखिका सूर्यबाला को 34वें व्यास सम्मान से नवाज़े जाने का बुधवार को ऐलान किया गया।</p>
<p>केके बिड़ला फाउंडेशन ने एक बयान में बताया कि लेखिका को 2018 में आए उनके उपन्यास ‘कौन देस को वासी: वेणु की डायरी” के लिए 2024 का व्यास सम्मान दिया जा रहा है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, 25 अक्टूबर 1943 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्मी सूर्यबाला को इस सम्मान के तहत चार लाख रुपये की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट किया जाएगा।</p>
<p>फाउंडेशन ने बताया कि यह पुरस्कार भारतीय नागरिक की हिंदी की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/109133/34th-vyas-award-to-hindi-writer-suryabala"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k11122024-12.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 11 दिसंबर (भाषा) हिंदी की जानी-मानी लेखिका सूर्यबाला को 34वें व्यास सम्मान से नवाज़े जाने का बुधवार को ऐलान किया गया।</p>
<p>केके बिड़ला फाउंडेशन ने एक बयान में बताया कि लेखिका को 2018 में आए उनके उपन्यास ‘कौन देस को वासी: वेणु की डायरी” के लिए 2024 का व्यास सम्मान दिया जा रहा है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, 25 अक्टूबर 1943 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्मी सूर्यबाला को इस सम्मान के तहत चार लाख रुपये की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट किया जाएगा।</p>
<p>फाउंडेशन ने बताया कि यह पुरस्कार भारतीय नागरिक की हिंदी की उस उत्कृष्ट साहित्यिक रचना को दिया जाता है जिसका प्रकाशन पिछले 10 साल के दौरान हुआ हो।</p>
<p>बयान के मुताबिक, प्रतिष्ठित साहित्यकार प्रोफेसर रामजी तिवारी की अगुवाई वाली चयन समिति ने 34वें व्यास सम्मान के लिए सूर्यबाला के उपन्यास का चयन किया।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि काशी विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाली सूर्यबाला करीब साढ़े चार दशकों से हिंदी साहित्य को समृद्ध कर रही हैं।</p>
<p>बयान के मुताबिक, उनके 50 से ज्यादा उपन्यास, कहानी, जीवनी, व्यंग्य, विदेश संस्मरण और बाल उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा उनकी कई रचनाएं भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में अनूदित भी हुई हैं तथा उन्हें विभिन्न पुरस्कारों से नवाज़ा भी गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/109133/34th-vyas-award-to-hindi-writer-suryabala</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Dec 2024 21:03:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पढ़ने में अच्छे पाठकों की मस्तिष्क संरचना भी अलग होती है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(माइकल रोल, लुंड विश्वविद्यालय)</p>
<p>लुंड (स्वीडन), 10 दिसंबर (द कन्वरसेशन) रीडिंग एजेंसी के शोध में पाया गया है कि मनोरंजन के लिए पढ़ने वाले लोगों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। ब्रिटेन के 50 प्रतिशत वयस्कों का कहना है कि वे नियमित रूप से नहीं पढ़ते (2015 में यह संख्या 42 प्रतिशत थी) और 16-24 वर्ष की आयु के लगभग चार में से एक युवा का कहना है कि पढ़ना कभी भी उनका शौक नहीं रहा।</p>
<p>लेकिन इसके क्या निहितार्थ हैं? क्या लोगों द्वारा पढ़ने के बजाय वीडियो को प्राथमिकता देने से हमारे मस्तिष्क या प्रजाति के रूप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108617/the-brain-structure-of-good-readers-is-also-different"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/books-reading-study-library-novel-poem.jpg" alt=""></a><br /><p>(माइकल रोल, लुंड विश्वविद्यालय)</p>
<p>लुंड (स्वीडन), 10 दिसंबर (द कन्वरसेशन) रीडिंग एजेंसी के शोध में पाया गया है कि मनोरंजन के लिए पढ़ने वाले लोगों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। ब्रिटेन के 50 प्रतिशत वयस्कों का कहना है कि वे नियमित रूप से नहीं पढ़ते (2015 में यह संख्या 42 प्रतिशत थी) और 16-24 वर्ष की आयु के लगभग चार में से एक युवा का कहना है कि पढ़ना कभी भी उनका शौक नहीं रहा।</p>
<p>लेकिन इसके क्या निहितार्थ हैं? क्या लोगों द्वारा पढ़ने के बजाय वीडियो को प्राथमिकता देने से हमारे मस्तिष्क या प्रजाति के रूप में हमारे विकास पर असर पड़ेगा? अच्छे पाठकों की मस्तिष्क संरचना वास्तव में किस प्रकार की होती है? ‘न्यूरोइमेज’ में प्रकाशित मेरे नए अध्ययन में इन पर प्रकाश डाला गया है।</p>
<p>मैंने 1,000 से अधिक प्रतिभागियों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिससे पता चला कि अलग-अलग क्षमताओं वाले पाठकों की मस्तिष्क संरचना में अलग-अलग विशेषताएं थीं।</p>
<p>जो लोग पढ़ने में अच्छे थे उनमें मस्तिष्क के बाएं हिस्से के दो क्षेत्रों की संरचना भिन्न थी, जो भाषा के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनमें से एक ‘टेम्पोरल लोब’ (मस्तिष्क का हिस्सा) का अग्र भाग था। बायां ‘टेम्पोरल पोल’ विभिन्न प्रकार की सार्थक सूचनाओं को जोड़ने और वर्गीकृत करने में मदद करता है।</p>
<p>पैर जैसे शब्द का अर्थ समझने के लिए, यह मस्तिष्क क्षेत्र विभिन्न जानकारी को जोड़ता है, जो यह बताता है कि पैर कैसे दिखते हैं और कैसे चलते हैं।</p>
<p>इसी तरह, दूसरा हिस्सा है ‘हेशल गाइरस’, जो ऊपरी ‘टेम्पोरल लोब’ पर स्थित एक तह है, जिसमें ‘कॉर्टेक्स’ (मस्तिष्क की सबसे बाहरी परत) स्थित होती है।</p>
<p>बेहतर पढ़ने की क्षमताओं का संबंध मस्तिष्क के दाएं हिस्से की तुलना में बाएं हिस्से में ‘टेम्पोरल लोब’ के बड़े अग्र भाग से पाया गया। इससे यह समझ में आता है कि एक बड़े मस्तिष्क क्षेत्र के अर्थ के लिए समर्पित होने से शब्दों को समझना और इसलिए पढ़ना आसान हो जाता है।</p>
<p>आकार क्यों मायने रखता है</p>
<p>क्या मोटा होना हमेशा बेहतर होता है? जब ‘कॉर्टेक्स’ संरचना की बात आती है, तो नहीं, ये जरूरी नहीं है। हम जानते हैं कि अधिकांश लोगों के बाएं गोलार्ध में श्रवण ‘कॉर्टेक्स’ में अधिक ‘माइलिन’ होता है। माइलिन एक वसायुक्त पदार्थ है जो तंत्रिका तंतुओं के लिए एक वाहक के रूप में कार्य करता है। यह तंत्रिका संचार की गति को बढ़ाता है और मस्तिष्क कोशिकाओं के स्तंभों को एक दूसरे से अलग भी कर सकता है। माना जाता है कि तंत्रिका स्तंभ छोटी प्रसंस्करण इकाइयों के रूप में कार्य करते हैं।</p>
<p>तो क्या पतला होना बेहतर है? फिर से, जवाब है नहीं, ये जरूरी नहीं है। जटिल क्षमताएं जिनमें सूचना को एकीकृत करने की आवश्यकता होती है, उन्हें मोटे ‘कॉर्टेक्स’ से लाभ मिलता है। सूचना को एकीकृत करने के अपने जटिल तरीके के कारण अग्र ‘टेम्पोरल लोब’ वास्तव में सभी कॉर्टेक्स क्षेत्रों में सबसे मोटी संरचना है।</p>
<p>ध्वनि विज्ञान एक अत्यधिक जटिल कौशल है, जहां विभिन्न ध्वनि और विशेषताओं को भाषण ध्वनियों में एकीकृत किया जाता है। इसका बाएं ‘हेशल गाइरस’ के पास के क्षेत्र में एक मोटे कॉर्टेक्स के साथ संबंध प्रतीत होता है।</p>
<p>(द कन्वरसेशन)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Dec 2024 11:43:21 +0530</pubDate>
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