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                <title>अफ्रीका का बदतर होता खाद्यान्न संकट, यह कृषि क्षेत्र में क्रांति का समय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(विलियम जी मोसले, मैकलेस्टर कॉलेज)</p><p>मिनेसोटा (अमेरिका), नौ दिसंबर (द कन्वरसेशन) अफ्रीका में भूख की दर अस्वीकार्य रूप से ऊंची है और यह बदतर होती जा रही है।</p><p>संयुक्त राष्ट्र की विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण स्थिति-2024 की रिपोर्ट से पता चलता है कि अफ्रीका में खाद्य असुरक्षा विश्व के किसी भी क्षेत्र की तुलना में सर्वाधिक है। अल्पपोषण की व्यापकता 20.4 प्रतिशत (लगभग 29.84 करोड़ अफ्रीकी) है जो वैश्विक औसत की दोगुनी है। वर्ष 2015 के बाद से यह आंकड़ा लगातार बढ़ा है।</p><p>जलवायु परिवर्तन और संघर्ष भी इस समस्या के कारक हैं। लेकिन मेरी राय में इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108217/africa-s-food-crisis-is-worsening--it-is-time-for-revolution-in-agriculture-sector"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k09122024-17.jpg" alt=""></a><br /><p>(विलियम जी मोसले, मैकलेस्टर कॉलेज)</p><p>मिनेसोटा (अमेरिका), नौ दिसंबर (द कन्वरसेशन) अफ्रीका में भूख की दर अस्वीकार्य रूप से ऊंची है और यह बदतर होती जा रही है।</p><p>संयुक्त राष्ट्र की विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण स्थिति-2024 की रिपोर्ट से पता चलता है कि अफ्रीका में खाद्य असुरक्षा विश्व के किसी भी क्षेत्र की तुलना में सर्वाधिक है। अल्पपोषण की व्यापकता 20.4 प्रतिशत (लगभग 29.84 करोड़ अफ्रीकी) है जो वैश्विक औसत की दोगुनी है। वर्ष 2015 के बाद से यह आंकड़ा लगातार बढ़ा है।</p><p>जलवायु परिवर्तन और संघर्ष भी इस समस्या के कारक हैं। लेकिन मेरी राय में इस चुनौती के मूल में कुछ और मौलिक बातें निहित हैं: उत्तर-औपनिवेशिक काल के बाद यह मार्गदर्शन करने के लिए अपनाई गई विचारधारा और योजनाएं कि अफ्रीका कैसे खाद्यान्न का उत्पादन करेगा और कुपोषण कम करने का प्रयास करेगा।</p><p>हालांकि, पूरे महाद्वीप में खाद्य असुरक्षा की दरें अलग-अलग हैं और मध्य और पश्चिम अफ्रीका में ये बदतर हैं, यह एक क्षेत्र-व्यापी चुनौती है।</p><p>मैं अफ्रीकी खाद्य सुरक्षा और कृषि का विशेषज्ञ हूं। एक नई किताब ‘डिकोलोनाइजिंग अफ्रीकन एग्रीकल्चर: फूड सिक्योरिटी, एग्रोइकोलॉजी एंड द नीड फॉर रेडिकल ट्रांसफॉर्मेशन’ में मैंने तर्क दिया है कि अफ्रीका के बेहतर भरण-पोषण के लिए निर्णय लेने वालों और दान दाताओं को ये करना चाहिए :-</p><p>-खाद्य असुरक्षा का समाधान करने के उपाय के रूप में वाणिज्यिक कृषि उत्पादन पर कम ध्यान दें।</p><p>-यह सोचना बंद करें कि कृषि विकास केवल खेती के व्यावसायीकरण और अन्य उद्योगों को समर्थन देने के बारे में है।</p><p>-एक कृषि-पारिस्थितिकी दृष्टिकोण अपनाएं जो उर्वरकों जैसी बाहर की कम चीजों के साथ अधिक विकास करने के लिए किसानों के ज्ञान और प्राकृतिक पारिस्थितिकी प्रक्रियाओं का उपयोग करता है।</p><p>विभिन्न संदर्भों और देशों में पारंपरिक दृष्टिकोण विफल रहे हैं। मैं देखता हूं कि सरकारें कृषि के बारे में कैसे सोचती हैं और इसमें क्या गलत हो रहा है - और अफ्रीका के भूख के संकट से निपटने के लिए कहां ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।</p><p>उत्पादन कृषि पर ध्यान केंद्रित करें</p><p>कृषि से संबंधित कई मूल विचार औपनिवेशिक युग के हैं। आधुनिक फसल विज्ञान, या कृषि विज्ञान, औपनिवेशिक हितों की पूर्ति के लिए यूरोप में विकसित किया गया था। लक्ष्य उन फसलों का उत्पादन करना था जो यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएं। हालांकि, इस दृष्टिकोण की आलोचना की गई है, फिर भी यह आज तक कृषि को बहुत अधिक प्रभावित करता है। विचार यह है कि अधिक खाद्यान्न पैदा करने से खाद्य असुरक्षा का समाधान हो जाएगा।</p><p>खाद्य सुरक्षा के छह आयाम हैं। खाद्य उत्पादन में बढ़ोतरी इन आयामों में से जिस एक से निपट सकती है वह-भोजन की उपलब्धता है। लेकिन यह अक्सर अन्य पांच आयाम से निपटने में विफल रहती है जिसमें पहुंच, स्थिरता, उपयोग, टिकाऊपन और एजेंसी शामिल हैं।</p><p>खाद्य असुरक्षा हमेशा भोजन की पूर्ण कमी के बारे में नहीं है, बल्कि लोगों की उस उस खाद्यान्न को प्राप्त करने में असमर्थता के बारे में भी है जो वहां मौजूद है।</p><p>अस्थिर कीमतें एक कारण हो सकती हैं, या फिर लोगों के पास खाना पकाने का ईंधन नहीं होगा। कृषि पद्धतियां गैर टिकाऊ हो सकती हैं। ऐसा अक्सर तब होता है जब किसानों का इस बात पर सीमित नियंत्रण होता है कि वे कैसे और किसी चीज की खेती करेंगे।</p><p>उदाहरण के लिए पश्चिम अफ्रीकी देश माली ने इस विचार के आधार पर कपास निर्यात पर ध्यान केंद्रित किया है कि इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और कपास किसान अधिक खाद्यान्न उगाने के लिए अपने नए उपकरण और उर्वरक का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि, शोध से पता चलता है कि इससे मिट्टी जैसे संसाधनों का विनाश हुआ, किसानों पर कर्ज़ का बोझ बढ़ा और बाल कुपोषण की दर चिंताजनक हो गई।</p><p>एक अन्य उदाहरण दक्षिण अफ्रीका की भूमि सुधार पहल है, जिसने बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक कृषि मॉडल को अपनाया। इससे परियोजना के विफल होने की दर काफी ऊंची हो गई और कुपोषण की उच्च दर के हल के लिए कुछ नहीं किया गया।</p><p>पहले कदम के रूप में कृषि</p><p>अफ्रीका में उच्च कुपोषण दर से निपटने में दूसरी बड़ी चुनौती यह है कि कई देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन अपने लिए कृषि विकास को महत्व नहीं देते हैं। इसे औद्योगीकरण की दिशा में पहले कदम के रूप में देखा जाता है।</p><p>व्यावसायिक कृषि सर्वोपरि हो गई है। इसमें महंगे इनपुट (जैसे उर्वरक) और दूर-दराज के बाजारों से संपर्क के साथ, एक ही फसल पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। घरेलू उपभोग और स्थानीय बाजारों के लिए उत्पादन पर केंद्रित छोटे खेतों को कम महत्व दिया जाता है। हो सकता है कि ये खेत महत्वपूर्ण तरीके से राष्ट्रीय आर्थिक विकास में योगदान न देते हों, लेकिन ये गरीबों को खाद्य सुरक्षा हासिल करने में मदद करते हैं।</p><p>‘एग्रोइकोलॉजी’ आगे बढ़ने की राह</p><p>विफलता के बढ़ते प्रमाण सुझाते हैं कि अब अफ्रीका की खाद्य सुरक्षा समस्याओं को दूर करने का एक अलग तरीका आजमाने का समय आ गया है।</p><p>‘एग्रोइकोलॉजी’ (प्रकृति के साथ खेती) में वैज्ञानिकों के औपचारिक शोध और खेतों में प्रयोग करने वाले किसानों के अनौपचारिक ज्ञान को शामिल किया जाता है।</p><p>कृषिविज्ञानी विभिन्न फसलों, फसलों और कीड़ों तथा फसलों और मिट्टी के बीच परस्पर क्रिया का अध्ययन करते हैं। इससे कम महंगे बाहरी कारकों के साथ अधिक उत्पादन करने के तरीके सामने आ सकते हैं। यह अधिक टिकाऊ और सस्ता विकल्प है।</p><p>एक क्रांति की शुरुआत</p><p>अफ्रीका के बिगड़ते खाद्यान्न संकट को दूर करने के लिए ‘एग्रोइकोलॉजी’ (कृषि पारिस्थितिकी) एक आशाजनक तरीका है। इसे कई अफ्रीकी नागरिक समाज संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है, जैसे ‘अलायंस फॉर फूड सावेरिनटी इन अफ्रीका’ और ‘नेटवर्क ऑफ वेस्ट अफ्रीका फॉर्मर ऑर्गेनाइजेशंस एंड एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर’।</p><p>अफ्रीकी सरकार के नेताओं और दानदाताओं ने एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता को पहचानने में तेजी नहीं दिखाई। हालांकि, हमें बदलाव के संकेत दिखने लगे हैं। उदाहरण के लिए सेनेगल के पूर्व कृषि मंत्री पापा अब्दुलाये सेक एक पारंपरिक कृषि विज्ञानी के रूप में प्रशिक्षित हैं। अब वह ‘एग्रोइकोलॉजी’ को अपने देश के लिए आगे बढ़ने का एक बेहतर तरीका मानते हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ ने भी कुछ प्रायोगिक ‘एग्रोइकोलॉजी’ कार्यक्रमों का वित्तीय पोषण करना शुरू कर दिया है।</p><p>(द कन्वरसेशन) </p><p><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 21:58:21 +0530</pubDate>
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                <title>अजीब गजब : 10 पत्नियां, 98 बच्चे और पांच सौ से अधिक पोते-पोतियां, मिलिए दुनिया के सबसे बड़े परिवार के मुखिया से</title>
                                    <description><![CDATA[जितने लोग एक सोसाइटी में नहीं होते उससे ज्यादा इस परिवार में, 700 लोगों के इस परिवार की कहानी है रोचक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/79817/ajeeb-gajab-10-wives-98-children-and-more-than-five-hundred-grandchildren-meet-the-head-of-the-world-s-largest-family"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-11/7853_jpg202211202056240000.jpg" alt=""></a><br /><div>कुछ दिन पहले ही दुनिया की आबादी 8 अरब हो गई है। इस समय समाज में अधिकांश परिवार एक या दो बच्चों वाली परंपरा पर चलते है पर आज के समय में भी कुछ परिवार ऐसे है जिनमें दो से अधिक बच्चें होते है। हम आपको एक ऐसे परिवार के बारे में बताने जा रहे हैं जो इतना बड़ा है कि परिवार के मुखिया को अपने पोते पोतियों के नाम तक याद नहीं रहते। हम जिस शख्स की बात कर रहे है उसका नाम है मूसा हसादजी। इनके परिवार में इतने लोग हैं कि ये परिवार दुनिया में सबसे बड़ा परिवार बन गया।</div><div><br /></div><h2>इस परिवार में है इतने लोग</h2><div><br /></div><div>आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अफ्रीकी देश यूगांडा के बूटालेजा डिस्ट्रिक्ट में रहने वाले मूसा हसादजी के एक या दो नहीं बल्कि 10 पत्नियां, 98 बच्चे और 568 पोते-पोतियां है. ऐसे में 700 सदस्यों वाले परिवार में हर किसी का नाम याद रखना भी मुखिया मूसा हसादजी के लिए एक बहुत मुश्किल काम है। बहुविवाह को भगवान का आशीर्वाद मानने वाले मूसा हसादजी ने एक के बाद एक कुल 10 शादियां की। जिनसे उनके 98 बच्चे 568 पोते पोतियां भी हैं। मूसा की सभी पत्नियां एक ही घर में साथ रहती हैं। जबकि बच्चों के लिए उन्होंने पास में ही अलग अलग झोपड़ियां बनवाई हैं। मूसा की सबसे छोटी पत्नी काकाजी मूसा के कई पोते पोतियों से भी कम है। इस पर मूसा की पत्नियों का कहना है कि अगर उनके पति चाहें तो और शादियां कर सकते हैं।</div><div><br /></div><h2>बड़ी मेहनत से परिवार को संभाला</h2><div><br /></div><div>अपनी जीवन यात्रा के बारे में मूसा ने बताया कि पहली शादी के लिए पत्नी से उन्हें दहेज के तौर पर तीन गाय और चार बकरियां मिली। ये सिलसिला तीन शादियों तक चलता रहा लेकिन जब जानवरों की तादाद तेजी से घटने लगी तो उन्होंने दहेज की संख्या भी कम कर दी। इस समय परिवार पर भारी संकट ले आया। परिवार में आई भुखमरी के समय कड़ी मेहनत से परिवार को संभला। कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच मूसा और परिवार ने बाजरा का बिज़नेस शुरू किया, जो सफल हो गया।फिर क्या था, धीरे धीरे इलाके में एक सफल और समृद्ध व्यक्ति के तौर पर उनकी पहचान बन गई। स्थिति मजबूत होने के बाद मूसा ने और शादियां करना शुरू कर दिया।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Nov 2022 21:00:32 +0530</pubDate>
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                <title>अफ्रीका में पुरातत्वविदों को मिला 18 लाख साल पुराना मानव दांत</title>
                                    <description><![CDATA[अफ्रीकी उपमहाद्वीप के बाहर पाया जाने वाला अब तक का सबसे पुराना मानव जीवाश्म]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/84646/archaeologists-find-1-8-million-year-old-human-teeth-in-africa"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/9592_news381.jpg" alt=""></a><br />                                        <div>कभी रूस का हिस्सा रहे जॉर्जिया में 1.8 मिलियन साल पुराना एक मानव दांत पाया गया है। इस प्रकार यह अफ्रीकी उपमहाद्वीप के बाहर पाया जाने वाला अब तक का सबसे पुराना मानव जीवाश्म है। पुरातत्वविदों का मानना है कि यह दांत होमो इरेक्टस प्रजाति का हो सकता है, जिसे हमारा सबसे करीबी पूर्वज माना जाता है। </div><div><br /></div><div><br /></div><div>आपको बता दें कि जॉर्जिया के पुरातत्व और प्रागैतिहासिक काल के राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र के अनुसार राजधानी तिब्लिसी से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में उरोजमानी गांव के पास एक प्राचीन दांत की खोज की गई थी। दांत ब्रिटिश पुरातत्व के छात्र जैक पर्ट को मिला, जो ओरोजमानी गांव के बाहर काम कर रहा था। इन उत्खनन के दौरान जानवरों की हड्डियाँ, पत्थर के औजार और उस समय के पत्थर के टुकड़े मिले हैं, जिन्हें पत्थर से औजार बनाने के लिए तैयार किया गया था। उरोजमानी के प्राचीन खंडहरों में पाषाण युग के औजार और जानवरों के अवशेष पहले भी मिले हैं, लेकिन यह पहली बार है जब होमो इरेक्टस के अवशेष वहां मिले हैं।</div><div><br /></div><h2>18 लाख पुराना मानव दांत</h2><div><br /></div><div>उरोजमानी गांव दमानीसी शहर के पास स्थित है, जहां 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में 18 लाख साल पुरानी मानव खोपड़ी मिली थी। टीम के वैज्ञानिक नेता जॉर्ज बिडज़िनास्विली का कहना है कि उनका मानना है कि दांत ज़ेज़वा और एम्फ़िया के चचेरे भाई हैं। उन्होंने ऐसा दमानीसी में मिली एक मानव खोपड़ी के आधार पर, जो लगभग 18 वर्ष की थी, ऐसा विश्वास किया। 1990 और 2000 के दशक में खोजी गई दानिधि की मानव खोपड़ी 18 लाख वर्ष पुरानी मानी जा रही है। दुनिया में मिला सबसे पुराना मानव जीवाश्म 28 लाख साल पुराना है। 28 वर्षीय मानव अवशेष आधुनिक इथियोपिया में पाए गए थे।</div><div><br /></div><p></p><h2>चीन में भी मिले 21 लाख साल पुराने औजार </h2><p><br /></p><div>पुरातत्वविदों का कहना है कि हाल ही में दमानीसी से 20 किलोमीटर दूर एक मानव दांत की खोज इस बात का और सबूत देती है कि दक्षिण काकेशस पर्वत उन पहले स्थानों में से एक हो सकता है जहां शुरुआती इंसान अफ्रीका में बसे थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रारंभिक मानव, होमो इरेक्टस, मुख्य रूप से शिकारी थे। उन्होंने लगभग 2 मिलियन वर्ष पहले अफ्रीका से बाहर जाना शुरू किया। आधुनिक चीन में भी 21 लाख साल पुराने औजार मिले हैं। लेकिन यह जॉर्जियाई साइट अफ्रीका के बाहर मानव निर्मित सबसे पुराना पदचिह्न है। शोधकर्ता 1978 से स्पेन में एक पुरातात्विक स्थल पर काम कर रहे थे, जहाँ 2007 में उन्होंने एक 1।2 मिलियन साल पुराने आधे की खोज की थी</div><div><br /></div><div><br /></div><div>उरोजमानी में दांत की खोज करने वाले ब्रिटिश पुरातत्व के छात्र जैक पर्ट कहते हैं, "इस खोज का न केवल क्षेत्र और जॉर्जिया के लिए, बल्कि प्रारंभिक मनुष्य के इतिहास के लिए भी प्रभाव पड़ेगा।" उन्होंने कहा, "यह मानव इतिहास में जॉर्जिया के स्थान को मजबूत करेगा।"</div><div><br /></div>                                                                                                                ]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 20 Sep 2022 10:36:12 +0530</pubDate>
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                <title>अफ्रीका : पुरातत्वविदों को मिला 18 लाख साल पुराना मानव दांत</title>
                                    <description><![CDATA[अफ्रीकी उपमहाद्वीप के बाहर पाया जाने वाला अब तक का सबसे पुराना मानव जीवाश्म]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/84645/africa-archaeologists-find-1-8-million-year-old-human-teeth"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/9592_news38.jpg" alt=""></a><br /><div>कभी रूस का हिस्सा रहे जॉर्जिया में 1.8 मिलियन साल पुराना एक मानव दांत पाया गया है। इस प्रकार यह अफ्रीकी उपमहाद्वीप के बाहर पाया जाने वाला अब तक का सबसे पुराना मानव जीवाश्म है। पुरातत्वविदों का मानना है कि यह दांत होमो इरेक्टस प्रजाति का हो सकता है, जिसे हमारा सबसे करीबी पूर्वज माना जाता है। </div><div><br /></div><div><br /></div><div>आपको बता दें कि जॉर्जिया के पुरातत्व और प्रागैतिहासिक काल के राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र के अनुसार राजधानी तिब्लिसी से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में उरोजमानी गांव के पास एक प्राचीन दांत की खोज की गई थी। दांत ब्रिटिश पुरातत्व के छात्र जैक पर्ट को मिला, जो ओरोजमानी गांव के बाहर काम कर रहा था। इन उत्खनन के दौरान जानवरों की हड्डियाँ, पत्थर के औजार और उस समय के पत्थर के टुकड़े मिले हैं, जिन्हें पत्थर से औजार बनाने के लिए तैयार किया गया था। उरोजमानी के प्राचीन खंडहरों में पाषाण युग के औजार और जानवरों के अवशेष पहले भी मिले हैं, लेकिन यह पहली बार है जब होमो इरेक्टस के अवशेष वहां मिले हैं।</div><div><br /></div><h2>18 लाख पुराना मानव दांत</h2><div><br /></div><div>उरोजमानी गांव दमानीसी शहर के पास स्थित है, जहां 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में 18 लाख साल पुरानी मानव खोपड़ी मिली थी। टीम के वैज्ञानिक नेता जॉर्ज बिडज़िनास्विली का कहना है कि उनका मानना है कि दांत ज़ेज़वा और एम्फ़िया के चचेरे भाई हैं। उन्होंने ऐसा दमानीसी में मिली एक मानव खोपड़ी के आधार पर, जो लगभग 18 वर्ष की थी, ऐसा विश्वास किया। 1990 और 2000 के दशक में खोजी गई दानिधि की मानव खोपड़ी 18 लाख वर्ष पुरानी मानी जा रही है। दुनिया में मिला सबसे पुराना मानव जीवाश्म 28 लाख साल पुराना है। 28 वर्षीय मानव अवशेष आधुनिक इथियोपिया में पाए गए थे।</div><div><br /></div><p></p><h2>चीन में भी मिले 21 लाख साल पुराने औजार </h2><p><br /></p><div>पुरातत्वविदों का कहना है कि हाल ही में दमानीसी से 20 किलोमीटर दूर एक मानव दांत की खोज इस बात का और सबूत देती है कि दक्षिण काकेशस पर्वत उन पहले स्थानों में से एक हो सकता है जहां शुरुआती इंसान अफ्रीका में बसे थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रारंभिक मानव, होमो इरेक्टस, मुख्य रूप से शिकारी थे। उन्होंने लगभग 2 मिलियन वर्ष पहले अफ्रीका से बाहर जाना शुरू किया। आधुनिक चीन में भी 21 लाख साल पुराने औजार मिले हैं। लेकिन यह जॉर्जियाई साइट अफ्रीका के बाहर मानव निर्मित सबसे पुराना पदचिह्न है। शोधकर्ता 1978 से स्पेन में एक पुरातात्विक स्थल पर काम कर रहे थे, जहाँ 2007 में उन्होंने एक 1।2 मिलियन साल पुराने आधे की खोज की थी</div><div><br /></div><div><br /></div><div>उरोजमानी में दांत की खोज करने वाले ब्रिटिश पुरातत्व के छात्र जैक पर्ट कहते हैं, "इस खोज का न केवल क्षेत्र और जॉर्जिया के लिए, बल्कि प्रारंभिक मनुष्य के इतिहास के लिए भी प्रभाव पड़ेगा।" उन्होंने कहा, "यह मानव इतिहास में जॉर्जिया के स्थान को मजबूत करेगा।"</div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 20 Sep 2022 10:34:59 +0530</pubDate>
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                <title>अजीबोगरीब परंपरा : यहां सुहागरात में दूल्हा-दुल्हन के साथ सोती है दुल्हन की माँ</title>
                                    <description><![CDATA[अफ्रीका महाद्वीप में मनाई जाती है ये अजीबोगरीब परंपरा, अगले दिन दुल्हन की माँ देती है गवाही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>हर इन्सान के जीवन में कुछ दिन बहुत अहम होते हैं। इनमें शादी और शादी से जुड़े कुछ दिन है, जैसे कि सुहागरात! इस दिन के लिए लोग तरह तरह की तैयारियां करते है। दुनिया में सुहागरात को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। लेकिन अब हम आपको जो बताने जा रहे हैं, उसे सबसे अजीब परंपरा कहा जा सकता है। क्योंकि इस शादी की पहली रात को दूल्हा-दुल्हन लड़की या युवक की मां के साथ ही सोते हैं। वजह जानकर आप हैरान रह जाएंगे।</div><div><br /></div><div><br /></div><div>अफ्रीका महाद्वीप अपने आप में एक अलग दुनिया है। वन्य जीवन हो या यहां का आदिवासी जीवन, सब कुछ अलग, अनोखा और अद्भुत है। आज भी यहां कई अजीबोगरीब रीति-रिवाज और अजीबोगरीब मान्यताएं प्रचलन में हैं, जिनके बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है। खासकर जब शादी की बात आती है तो शादी में एक अजीब सी मान्यता होती है, जो हर किसी को परेशान करती है।</div><div><br /></div><h2>सुहागरात में साथ रहता है मेंटर</h2><div><br /></div><div>समय के साथ जहां परंपराएं बदल रही हैं, वहीं दूसरी ओर यहां के लोग आज भी सदियों पुरानी परंपराओं को जी रहे हैं। कई जनजातियाँ जीवन के प्रत्येक चरण में विभिन्न नियमों का पालन करती हैं। ऐसा ही एक नियम सुहागरात के साथ भी है। यहां सुहागरात के दौरान दुल्हन की मां दूल्हा-दुल्हन के साथ सोती है।</div><div><br /></div><h2>मेंटर देरी है दंपत्ति को सुखी वैवाहिक जीवन जीने का मंत्र</h2><div><br /></div><div>एक रिपोर्ट के मुताबिक,सुहागरात पर दामाद की सासू मां कमरे में साथ रहती और सोती है। अगर वो नहीं होती है तो इस स्थिति में परिवार या आस-पड़ोस की किसी अन्य बुजुर्ग महिला को वहां पर जरूर भेजा जाता है। दरअसल ऐसा होने की मान्यता ये है कि पहली रात को मां या फिर बुजुर्ग महिला कपल को खुशहाल वैवाहिक जीवन की सीख देती है। यही मेंटर यानी मां दुल्हन को यह बताती है कि उसे रात में क्या करना है। अगली सुबह दूल्हा-दुल्हन के कमरे में मौजूद महिला ने परिवार के बाकी लोगों से पुष्टि की कि रात में सब ठीक हो गया। इस गुरु की उपस्थिति यहां शर्म से नहीं, बल्कि परंपरा से जुड़ी हुई दिखाई देती है। जिसका पालन आज भी किया जा रहा है। इस प्रकार यह माना जाता है कि नवविवाहितों ने अपने विवाहित जीवन की अच्छी शुरुआत की है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/84642/weird-tradition-here-the-bride-s-mother-sleeps-with-the-bride-and-groom-in-the-honeymoon</link>
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                <pubDate>Sun, 18 Sep 2022 19:59:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>कोरोना वायरस के बीच पश्चिम आफ्रिका में देखा गया एक और घातक वायरस</title>
                                    <description><![CDATA[आफ्रिका के मारबर्ग में देखा गया खतरनाक गिनी वायरस, 88 प्रतिशत जितना है मृत्युदर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div><span style="font-size:1rem;">एक और जहां दुनिया कोरोना वायरस से लड़ रही है वहीं एक और चुनौती अब दुनिया के सामने आकार खड़ी हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गिनी में मारबर्ग वायरस के फैलने की जानकारी दी है। WHO ने कहा की पश्चिमी आफ्रिका में मारबर्ग वायरस का पहला केस सामने आया है। यह एक जानलेवा वायरस है, जो इबोला से संबंधित है और कोरोना की तरह ही जानवरों में से इंसान में आती है। </span><br /></div><div>WHO द्वारा कहा गया कि यह वायरस चमगादड़ में से इंसान में फैलता है। इस बीमारी का मृत्युदर 88 प्रतिशत तक का है। 2 अगस्त को दक्षिणी गुएकडौ प्रांत में एक मरीज की इस वायरस के संक्रमण से मौत हुई थी। पोस्ट्मॉर्टेम के दौरान व्यक्ति में से मारबर्ग वायरस मिल आया था। आफ्रिका के क्षेत्रीय WHO अध्यक्ष डॉ मात्शिदिसो मोएती ने कहा कि इस वायरस को जल्द से जल्द रोक देने कि जरूरत है। </div><div>यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब दो महीने पहले ही डबल्यूएचओ ने इस इलाके में से इबोला वायरस के खतम हो गए होने की घोषणा की थी। पिछले साल शुरू हुये इबोला के कारण यहाँ 12 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद इस वायरस के खतरों के लेकर डबल्यूएचओ काफी चिंतित है। मोएती ने कहा कि वह सभी स्वास्थ्य अधिकारियों से बात कर रहा है और इस से इबोला के प्रबंधन में गिनी के पिछले अनुभव और विशेषज्ञों कि स्थिति के आधार पर वायरस को रोकने के लिए कम कर सकते है। </div><div>गिनी सरकार द्वारा भी अपने एक निवेदन में मारबर्ग केस की पुष्टि की है। WHO द्वारा कहा गया कि मारबर्ग वायरस आम तौर पर गुफाओं में और खाइयों में मौजूद होते है, जहां रोसेट्स चमगादड़ रहते है। एक बार जब व्यक्ति इस वायरस के संपर्क में आ जाता है, उसके बाद शरीर में से निकलने वाले प्रवाही, दूषित सतह के संपर्क में आने से फैलता है। </div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/84163/another-deadly-virus-seen-in-west-africa-amid-corona-virus</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Aug 2021 18:31:49 +0530</pubDate>
                
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