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                <title>दावोस बैठक में केंद्र, राज्यों ने मंडपों में दिखाई भारत की एकजुट तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दावोस, 20 जनवरी (भाषा) स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक में भारत की तरफ से केंद्र एवं राज्यों ने अपने राजनीतिक मतभेदों को परे रखते हुए मंडपों में एकजुट होकर शिरकत की है।</p>
<p>दावोस की मशहूर प्रोमेनेड स्ट्रीट के एक तरफ कुछ ही ब्लॉक की दूरी पर दो भारतीय मंडप मौजूद हैं। इन मंडप में केंद्रीय मंत्रियों, केंद्र सरकार के विभागों और राज्य सरकारों के लिए बैठक एवं सम्मेलन कक्ष मौजूद हैं।</p>
<p>एक में केरल, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के मंडप हैं। वहीं दूसरे में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के मंडप स्थित हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/123529/center-and-svos"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/switzerland-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>दावोस, 20 जनवरी (भाषा) स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक में भारत की तरफ से केंद्र एवं राज्यों ने अपने राजनीतिक मतभेदों को परे रखते हुए मंडपों में एकजुट होकर शिरकत की है।</p>
<p>दावोस की मशहूर प्रोमेनेड स्ट्रीट के एक तरफ कुछ ही ब्लॉक की दूरी पर दो भारतीय मंडप मौजूद हैं। इन मंडप में केंद्रीय मंत्रियों, केंद्र सरकार के विभागों और राज्य सरकारों के लिए बैठक एवं सम्मेलन कक्ष मौजूद हैं।</p>
<p>एक में केरल, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के मंडप हैं। वहीं दूसरे में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के मंडप स्थित हैं।</p>
<p>दोनों मंडप अलग-अलग समय पर पांच केंद्रीय मंत्रियों की मेजबानी भी करेंगे, जबकि उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और इन्वेस्ट इंडिया भी मौजूद हैं।</p>
<p>उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) भी कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) और अन्य कारोबारी दिग्गजों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां मौजूद है।</p>
<p>मंडप में शामिल हो रहे राज्यों में से केरल में वाम मोर्चा, तेलंगाना में कांग्रेस, उत्तर प्रदेश में भाजपा, आंध्र प्रदेश में एन चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई में राजग, महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति और तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार है।</p>
<p>डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक में भाग लेने वाले केंद्रीय मंत्री भी विभिन्न दलों से संबंध रखते हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और सी आर पाटिल भाजपा से संबंधित हैं जबकि चिराग पासवान लोजपा (रामविलास) से, जयंत चौधरी रालोद से और के राम मोहन नायडू तेदेपा से संबंधित हैं।</p>
<p>यहां मौजूद भारतीय कंपनियों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के साथ विप्रो, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा भी शामिल हैं।</p>
<p>डब्ल्यूईएफ शिखर सम्मेलन को संबोधित करने के लिए कई भारतीय नेताओं का कार्यक्रम रखा गया है। सम्मेलन के दौरान आयोजित नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात के खाने के सत्रों में भी भारतीयों की खासी मौजूदगी होगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 20 Jan 2025 21:49:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्विट्जरलैंड के भारत का एमएफएन का दर्जा वापस लेने का हम पर कोई असर नहीं : नेस्ले इंडिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) रोजमर्रा के उपभोग का सामान (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि स्विट्जरलैंड द्वारा भारत को दिए गए एमएफएन (सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र) के दर्जे को निलंबित करने का कंपनी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p>एफएमसीजी कंपनी ने बयान में कहा, दोहरे कराधान बचाव समझौते (डीटीएए) के तहत एमएफएन दर्जे का निलंबन भारत और स्विट्जरलैंड सरकार के बीच एक नीतिगत मुद्दा है। इसका सीधे तौर पर नेस्ले से कोई नाता नहीं है।</p>
<p>नेस्ले इंडिया के पास मैगी, नेस्कैफे और किटकैट जैसे लोकप्रिय ब्रांड का स्वामित्व है।</p>
<p>कंपनी पहले से ही सीमापार भुगतान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/112144/switzerland-s-withdrawal-of-india-s-mfn-status-has-no-impact-on-us--nestle-india"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/business-news-update.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) रोजमर्रा के उपभोग का सामान (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि स्विट्जरलैंड द्वारा भारत को दिए गए एमएफएन (सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र) के दर्जे को निलंबित करने का कंपनी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p>एफएमसीजी कंपनी ने बयान में कहा, दोहरे कराधान बचाव समझौते (डीटीएए) के तहत एमएफएन दर्जे का निलंबन भारत और स्विट्जरलैंड सरकार के बीच एक नीतिगत मुद्दा है। इसका सीधे तौर पर नेस्ले से कोई नाता नहीं है।</p>
<p>नेस्ले इंडिया के पास मैगी, नेस्कैफे और किटकैट जैसे लोकप्रिय ब्रांड का स्वामित्व है।</p>
<p>कंपनी पहले से ही सीमापार भुगतान पर ‘‘10 प्रतिशत ‘विदहोल्डिंग कर’ की कटौती’’ कर रही है।</p>
<p>स्विट्जरलैंड ने 11 दिसंबर को दोहरे कराधान से बचाव के लिए भारत के साथ हुए समझौते में ‘सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र’ (एमएफएन) के प्रावधान को निलंबित कर दिया था।</p>
<p>स्विट्जरलैंड के वित्त मंत्रालय ने 11 दिसंबर को बयान में एमएफएन दर्जा वापस लेने की जानकारी देते हुए कहा था कि यह कदम भारत के उच्चतम न्यायालय के पिछले साल आए एक फैसले के संदर्भ में उठाया गया है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि अगर किसी देश के 'आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन' (ओईसीडी) में शामिल होने से पहले भारत सरकार ने उस देश के साथ कर संधि पर हस्ताक्षर किए हैं तो एमएफएन प्रावधान अपने-आप लागू नहीं होता है।</p>
<p>इससे स्विट्जरलैंड में परिचालन करने वाली भारतीय कंपनियों की कर देनदारियां बढ़ गई थीं।</p>
<p>नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ यह मामला नेस्ले से संबंधित नहीं है, बल्कि यह भारत तथा स्विट्जरलैंड के बीच नीतिगत मामला है। हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि नेस्ले इंडिया पहले ही 10 प्रतिशत ‘विदहोल्डिंग टैक्स’ की कटौती कर रही है और इसका हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ’’</p>
<p>स्विट्जरलैंड की एफएमसीजी कंपनी नेस्ले एसए के लिए भारत शीर्ष 10 बाजारों में से एक है, जहां यह 112 साल से परिचालन कर रही है।</p>
<p>कंपनी अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय बाजार में 2020-2025 की अवधि में 6,000-6,500 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है।</p>
<p>नेस्ले इंडिया यहां नौ कारखानों का परिचालन करती है। कंपनी ओडिशा में 10वां कारखाना स्थापित करने की प्रक्रिया में है। वित्त वर्ष 2023-24 में इसका राजस्व 24,393.9 करोड़ रुपये था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 20:18:07 +0530</pubDate>
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                <title>स्विट्जरलैंड के फैसले का ईएफटीए-भारत समझौते पर असर नहीं होगाः वाणिज्य सचिव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) सरकार ने सोमवार को कहा कि दोहरे कराधान से बचाव के समझौते में ‘सर्वाधिक तरजीही देश’ (एमएफएन) का प्रावधान निलंबित करने के स्विट्जरलैंड के फैसले का भारत और ईएफटीए समूह के बीच व्यापार समझौते में जताई गई प्रतिबद्धताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।</p>
<p>स्विट्जरलैंड सरकार ने भारत को दिया गया एमएफएन दर्जा पिछले हफ्ते निलंबित कर दिया। इस कदम से भारत में स्विस निवेश प्रभावित होने और वहां पर सक्रिय भारतीय कंपनियों पर अधिक कर लगाए जाने की आशंका बढ़ी है।</p>
<p>स्विट्जरलैंड चार यूरोपीय देशों के समूह ईएफटीए का भी हिस्सा है जिसने भारत के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/111071/switzerland-s-decision-will-not-affect-efta-india-agreement--commerce-secretary"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/switzerland-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) सरकार ने सोमवार को कहा कि दोहरे कराधान से बचाव के समझौते में ‘सर्वाधिक तरजीही देश’ (एमएफएन) का प्रावधान निलंबित करने के स्विट्जरलैंड के फैसले का भारत और ईएफटीए समूह के बीच व्यापार समझौते में जताई गई प्रतिबद्धताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।</p>
<p>स्विट्जरलैंड सरकार ने भारत को दिया गया एमएफएन दर्जा पिछले हफ्ते निलंबित कर दिया। इस कदम से भारत में स्विस निवेश प्रभावित होने और वहां पर सक्रिय भारतीय कंपनियों पर अधिक कर लगाए जाने की आशंका बढ़ी है।</p>
<p>स्विट्जरलैंड चार यूरोपीय देशों के समूह ईएफटीए का भी हिस्सा है जिसने भारत के साथ मार्च में व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्यों में आइसलैंड, लीकटेंस्टीन और नॉर्वे भी शामिल हैं।</p>
<p>स्विट्जरलैंड इस समूह में शामिल देशों में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।</p>
<p>वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने एमएफएन दर्जा निलंबित किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘ईएफटीए पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’’</p>
<p>भारत के साथ मार्च में हुए व्यापार समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने 100 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता जताई थी। वहीं भारत ने स्विस घड़ियों, चॉकलेट और कटे एवं पॉलिश किए गए हीरों जैसे कई उत्पादों को कम या शून्य शुल्क पर आयात की अनुमति दी थी।</p>
<p>हालांकि, भारत और ईएफटीए समझौते को अभी लागू किया जाना बाकी है।</p>
<p>इसके साथ ही बर्थवाल ने कहा कि ब्रिटेन ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत का सिलसिला अगले साल जनवरी में दोबारा शुरू करने का सुझाव दिया है।</p>
<p>प्रस्तावित एफटीए पर दोनों देशों के बीच बातचीत जनवरी, 2022 में शुरू हुई थी। इस साल दोनों देशों में आम चुनाव होने की वजह से 14वें दौर की बातचीत थम गई थी।</p>
<p>वाणिज्य सचिव ने कहा, ‘‘ब्रिटेन जनवरी में बातचीत शुरू करना चाहता है। हमारा प्रतिनिधिमंडल वहां जाएगा। हम उन सभी मुद्दों को उठाएंगे, जहां हमने छोड़ा है। इसकी तारीख तय होने का काम जारी है।’’</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 20:16:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्विट्जरलैंड ने भारत का एमएफएन दर्जा निलंबित किया, अब देना होगा अधिक कर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) स्विट्जरलैंड ने दोहरे कराधान से बचाव के लिए भारत के साथ हुए समझौते में 'सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र' (एमएफएन) के प्रावधान को निलंबित कर दिया है।</p>
<p>इस फैसले के बाद स्विट्जरलैंड में काम करने वाली भारतीय कंपनियों पर अधिक कर लगने के साथ भारत में स्विस निवेश पर असर पड़ने की आशंका है।</p>
<p>स्विट्जरलैंड के वित्त विभाग ने 11 दिसंबर को अपने एक बयान में एमएफएन दर्जा वापस लेने की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम भारत के उच्चतम न्यायालय के पिछले साल आए एक फैसले के संदर्भ में उठाया गया है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/109967/switzerland-removed-india-s-mfn-status--now-you-will-have-to-pay-more-taxes"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/switzerland-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) स्विट्जरलैंड ने दोहरे कराधान से बचाव के लिए भारत के साथ हुए समझौते में 'सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र' (एमएफएन) के प्रावधान को निलंबित कर दिया है।</p>
<p>इस फैसले के बाद स्विट्जरलैंड में काम करने वाली भारतीय कंपनियों पर अधिक कर लगने के साथ भारत में स्विस निवेश पर असर पड़ने की आशंका है।</p>
<p>स्विट्जरलैंड के वित्त विभाग ने 11 दिसंबर को अपने एक बयान में एमएफएन दर्जा वापस लेने की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम भारत के उच्चतम न्यायालय के पिछले साल आए एक फैसले के संदर्भ में उठाया गया है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि अगर किसी देश के 'आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन' (ओईसीडी) में शामिल होने से पहले भारत सरकार ने उस देश के साथ कर संधि पर हस्ताक्षर किए हैं तो एमएफएन प्रावधान अपने-आप लागू नहीं होता है।</p>
<p>भारत ने कोलंबिया और लिथुआनिया के साथ कर संधियों पर हस्ताक्षर किए थे, जो कुछ तरह की आय पर कम कर दरें प्रदान करती थीं। ये दोनों देश बाद में ओईसीडी का हिस्सा बन गए।</p>
<p>स्विटजरलैंड ने 2021 में कहा था कि कोलंबिया और लिथुआनिया के ओईसीडी सदस्य बनने का मतलब है कि भारत-स्विट्जरलैंड कर संधि पर एमएफएन प्रावधान के तहत लाभांश पर पांच प्रतिशत की दर ही लागू होगी, न कि समझौते में उल्लिखित 10 प्रतिशत की दर।</p>
<p>हालांकि अब एमएफएन का दर्जा हट जाने के बाद स्विट्जरलैंड एक जनवरी, 2025 से रिफंड का दावा करने वाले भारतीय कर निवासियों और विदेशी कर क्रेडिट का दावा करने वाले स्विस कर निवासियों के लिए लाभांश पर 10 प्रतिशत कर लगाएगा।</p>
<p>स्विस वित्त विभाग ने अपने बयान में आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान से बचने के लिए दोनों देशों के बीच हुए समझौते के एमएफएन प्रावधान को निलंबित करने की घोषणा की।</p>
<p>स्विट्जरलैंड ने अपने इस निर्णय के लिए 2023 में नेस्ले से संबंधित एक मामले में आए उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया। डिब्बाबंद खाद्य उत्पादों के कारोबार में लगी नेस्ले का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के वेवे शहर में है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, नेस्ले मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2021 में दोहरे कराधान से बचाव संधि (डीटीएए) में एमएफएन खंड को ध्यान में रखते हुए बकाया कर दरों के अनुप्रयोग को बरकरार रखा था। लेकिन उच्चतम न्यायालय ने 19 अक्टूबर, 2023 के एक फैसले में इस फैसले को पलट दिया था।</p>
<p>स्विस सरकार के इस फैसले पर कर परामर्शदाता नांगिया एंडरसन में कर साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा कि अब स्विट्जरलैंड में काम करने वाली भारतीय इकाइयों की कर देनदारियां बढ़ सकती हैं।</p>
<p>एकेएम ग्लोबल फर्म में कर साझेदार अमित माहेश्वरी ने कहा कि इससे भारत में स्विस निवेश प्रभावित हो सकता है क्योंकि एक जनवरी, 2025 या उसके बाद अर्जित आय पर मूल दोहरे कराधान संधि में उल्लिखित दरों पर कर लगाया जा सकता है।</p>
<p></p><div class="pbwidget wid6a13aa8394735 htmlwidget"><div class="pbwidget-body">(अस्वीकरण: उपरोक्त समाचार/लेख समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा की ऑटो जनरेटेड  सिंडिकेटेड फीड से प्राप्त हुई है और लोकतेज टीम द्वारा संपादित नहीं की गई है। लोकतेज इस सामग्री के लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होगा।)</div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Dec 2024 19:48:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा स्विट्जरलैंड पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ज्यूरिख, 23 जून (हि.स.)। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख पहुंच गए हैं। दलाई लामा अपने घुटने की सर्जरी करवाने के लिए ज्यूरिख से अमेरिका के लिए रवाना होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा घुटने की सर्जरी के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका जाने के लिए 21 जून को धर्मशाला से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। बड़ी संख्या में तिब्बती उन्हें शुभकामनाएं देने के लिए कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचे थे। एक दिन दिल्ली में रहने के बाद वे स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख पहुंच गए। यहां से आज अमेरिका के लिए रवाना होंगे।<br /><br />ज्यूरिख पहुंचने पर एक होटल में पारंपरिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102659/tibetan-spiritual-leader-dalai-lama-arrives-in-switzerland"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d23062024-10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ज्यूरिख, 23 जून (हि.स.)। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख पहुंच गए हैं। दलाई लामा अपने घुटने की सर्जरी करवाने के लिए ज्यूरिख से अमेरिका के लिए रवाना होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा घुटने की सर्जरी के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका जाने के लिए 21 जून को धर्मशाला से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। बड़ी संख्या में तिब्बती उन्हें शुभकामनाएं देने के लिए कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचे थे। एक दिन दिल्ली में रहने के बाद वे स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख पहुंच गए। यहां से आज अमेरिका के लिए रवाना होंगे।<br /><br />ज्यूरिख पहुंचने पर एक होटल में पारंपरिक तिब्बती तरीके से उनका स्वागत करते हुए गानों और नृत्य की प्रस्तुति दी गई। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु को देखने के लिए होटल की लॉबी में उनके शुभचिंतकों बड़ी संख्या में पहुंचे। बड़ी संख्या में सड़कों पर उनके शुभचिंतक देखे गए।<br /><br />उल्लेखनीय है कि इसी हफ्ते की शुरुआत में माइकल मैककॉल के नेतृत्व में एक द्विदलीय अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहीं पूर्व अमेरिकी सदन अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने तिब्बत के लोगों के लिए कांग्रेस के समर्थन की दृढ़ता से पुष्टि की।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sun, 23 Jun 2024 20:06:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महंगाई के दौर में कम लागत पर दौड़ने वाली ये वन सिटर ‘बबल कार’ बड़ी वायरल हो रही है, आप भी जानिये कुछ रोचक तथ्य</title>
                                    <description><![CDATA[माइक्रोलिनो नाम की यह कार 13,000 पाउंड में उपलब्ध है, जो अन्य महंगी इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में काफी सस्ती है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/79807/in-the-era-of-inflation-this-one-seater-bubble-car-running-at-a-low-cost-is-becoming-very-viral-you-should-also-know-some-interesting-facts"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/6916_jpg202210211106370000.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">वर्तमान में ब्रिटेन भारी ऊर्जा संकट से गुजर रहा है।  ऐसे में ऊर्जा की बचत करने के लिए बहुत से तरीकों को अपनाया जा रहा है। ऐसे में ऊर्जा बचाने के लिए कम लागत वाले वाहन से ओर कौन आकर्षित नहीं होगा जो अपने शहरी क्षेत्रों में परिवहन में क्रांति लाएगा। स्विट्जरलैंड की एक इलेक्ट्रिक कार कंपनी काफी चर्चा में है। इस कंपनी ने एक ऐसा इलेक्ट्रिक व्हीकल तैयार किया है जो दिखने में तो कार जैसा है लेकिन ये कार नहीं कुछ और है। इस नई छोटी और एक सीटर कार को बबल कार के नाम से जाना जाता है। इसे देखकर ही कोई भी समझ सकता है कि इसे बबल कार क्यों कहा जाता है। </span><br /></div><div><br /></div><h2>यह है एक इलेक्ट्रिक कार</h2><div><br /></div><div>यह बबल कार इलेक्ट्रिक होने के साथ-साथ बड़ी, सख्त, तेज, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल है। दरअसल माइक्रो मोबिलिटी सिस्टम्स नाम की कंपनी ने एक अनूठा प्रयोग किया है और मोटरसाइकिल और कार के डिजाइन का मिश्रण कर ये अद्भुत इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाया है। खास बात ये है कि ये देखने में टाटा नैनो से भी छोटा इलेक्ट्रिक व्हीकल है।</div><div><br /></div><h2>अन्य महंगी इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में काफी सस्ती</h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि माइक्रोलिनो नाम की यह कार 13,000 पाउंड में उपलब्ध है, जो अन्य महंगी इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में काफी सस्ती है। इसके रेट्रो ठाठ स्टाइल को भी टेस्ट ड्रिवेन किया गया है। अपने बेहद दिलचस्प डिजाइन और अनूठे फीचर्स के चलते ये इलेक्ट्रिक व्हीकल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।</div><div><br /></div><h2>30 हजार लोगों ने कराई बुकिंग</h2><div><br /></div><div>इस व्हीकल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ये इलेक्ट्रिक वाहन अभी फुल-स्टेज प्रोडक्शन में भी नहीं पहुंचा और अभी से ही 30 हजार लोगों ने इस इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर एडवांस बुकिंग कर दी है।इस कार को एक स्विस परिवार ने विकसित किया है। विम ऑबोटर को स्विस मस्क कहा जाता है। वे ज्यूरिख के बाहरी इलाके में रहते हैं। वह एक पूर्व बैंकर हैं जो स्कूटर बनाते थे और अब बबल कार बनाना चाहते हैं।</div><div><br /></div><h2>ये है कार के फीचर्स</h2><div><br /></div><div>यह कार एक इलेक्ट्रिक कार है लेकिन इसमें एक सामान्य कार के सभी फीचर्स हैं। इस कार के अगर फीचर्स की बात करें तो कंपनी ने अपनी वेबसाइट्स पर कुछ डिटेल्स जारी किए हैं। इन डिटेल्स के अनुसार, इस वाहन में दो लोग एक साथ बैठकर यात्रा कर सकते हैं। इस छोटी सी कार को 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया जा सकता है। इस कार में इग्निशन नहीं है, इसलिए ड्राइविंग का कोई शोर नहीं होगा। कार स्टार्ट करते समय ड्राइवर को केवल एक शब्द सुनाई देता है। उसके बाद, गाड़ी आगे बढ़ने लगती है। महज 535 किलो वजनी इस इलेक्ट्रिक वाहन को एक बार चार्ज करने के बाद 235 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है। हालांकि इस वाहन के बेस मॉडल की रेंज सिर्फ 115 किलोमीटर के आसपास ही है। इस इलेक्ट्रिक वाहन में 230 लीटर ट्रंक स्पेस है।</div><div><br /></div><h2>इतनी रहेगी इसकी कीमत</h2><p><br /></p><div>गौरतलब है कि कंपनी वे प्लांट की क्षमता को 1,500 व्हीकल सालाना से बढ़ाकर करीब 10 हजार करने की तैयारी में है। स्विट्जरलैंड के ग्राहकों के लिए इस इलेक्ट्रिक व्हीकल की शुरुआती कीमत 15,340 डॉलर यानी करीब 12 लाख रुपये रखी गई है। वहीं अगर यूरोप की बात करें तो इसकी शुरुआती कीमत 13,400 डॉलर लिस्ट की गई है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Oct 2022 11:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'महज 11 मिनट ही तो हुआ है दुष्कर्म' ऐसा कहते हुए महिला जज ने कम की आरोपियों की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों में इस फैसले का जबरजस्त विरोध, सड़कों पर प्रदर्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80068/the-woman-judge-reduced-the-punishment-of-the-accused-saying-that-rape-has-happened-only-for-11-minutes"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-08/violent-woman-man-hand-beat-child-slap-crime-rape1.jpg" alt=""></a><br /><div>अपराध तो अपराध होता है और उसे जस्टिफाई नहीं किया जा सकता पर ऐसे में भी किसी नाबालिग के साथ दुष्कर्म करना जघन्य अपराध है। ऐसे में किसी नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने वाले को किसी भी तरह माफ नहीं किया जा सकता। ऐसे में स्विट्जरलैंड में रेप के मामले में एक जज ने एक ऐसा तर्क देकर आरोपी की सजा में कमी करने की बात कही जिसके बाद लोगों ने इसके खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन किया। <span style="font-size:1rem;">दरअसल स्विट्जरलैंड के एक दुष्कर्म के मामले में 'रेप सिर्फ 11 मिनट तक हुआ' का तर्क देते हुए एक जज ने रेप के आरोपी की सजा में कमी कर दी।</span></div><div>आपको बता दें कि पिछले साल हुए एक मामले में कोर्ट ने रेपिस्ट की सज़ा ये कहते हुए कम कर दी कि उसने महिला के साथ सिर्फ 11 मिनट तक रेप किया। जज के इस फैसले के खिलाफ स्विट्जरलैंड की सड़कों पर लोगों का प्रदर्शन हो रहा है, जिसमें महिला प्रदर्शनकारियों संख्या सबसे अधिक है।</div><div>अगर मामले की बात करें तो ये मामला 20 जून 2020 का है। बेसल में रहने वाली 33 साल की महिला ने दो पुर्तगालियों पर आरोप लगाया कि उसके घर के बाहर  ने अटैक किया और उसे बंधक बनाकर रेप किया। आरोपियों में एक की उम्र 17 साल है और दूसरा 32 साल का बताया गया है। इस मामले पर फैसला सुनाते हुए महिला जज ने कहा कि सिर्फ 11 मिनट तक रेप हुआ। फिलहाल कोर्ट ने नाबालिग को सजा नहीं सुनाई है। मगर दूसरे दोषी की सजा को 51 महीने से घटाकर 36 महीने कर दिया गया है। यही नहीं, महिला जज ने पीड़िता को लेकर भी कुछ आपत्तिजनक बात कही। जज ने कहा कि पीड़िता ने आरोपियों को उतेजित किया होगा। जज ने इसे बहुत मामूली गलती बताते हुए ये सब कहा। महिला जज के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करने वाली ज्यादातर महिलाएं ही थीं। उन्होंने इस दौरान 11 मिनट का मौन रखा। महिलाएं '11 मिनट बहुत ज्यादा होते हैं' लिखे बैनर के साथ प्रदर्शन कर रही थीं।अब लोग इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Aug 2021 17:37:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिर क्यों इस देश की महिला सैनिकों को भी पहननी पड़ती थी पुरुष सैनिकों जैसी ही अंडरवियर</title>
                                    <description><![CDATA[सेना में महिलाओं का अनुपात बढ़ाने के लिए लिया गया निर्णय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/83899/after-all-why-did-the-women-soldiers-of-this-country-also-had-to-wear-the-same-underwear-as-the-male-soldiers"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/6214_s12-02042021.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">स्विट्ज़रलैंड की सेना में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। शुरुआत से ही एकदम अजीबोगरीब ढंग से चली आ रही इस व्यवस्था में महिला सैनिकों को भी पुरुष सैनिकों जैसे जेन्ट्स अंडरवियर पहनने पड़ते थे। पर अब इसमें बदलाव होने जा रहा है। 'लोको' मीडिया रिपोर्टस की माने तो इस नए बदलाव के कारण महिलाओं की सेना में भागीदारी बढ़ेगी। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">स्विस आर्मी के प्रवक्ता काज गोनर ने मीडिया से बातचीत करते हुये बताया की मिलिट्री द्वारा जो चीजें उपलब्ध करवाई जाती है। वह काफी आउटडेटेड और पुराने जमाने की है। अब उसमें कुछ मॉडर्न बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा की इसके पहले आर्मी के कपड़े मात्र और मात्र पुरुष सैनिकों के हिसाब से बनते थे। पर अब उसमें काफी बदलाव किए जाएंगे। गर्मी के लिए शॉर्ट और ठंडी के लिए लॉन्ग अंडरवियर की व्यवस्था की जाएगी। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">इसके अलावा कोम्बेट क्लोधींग, प्रोटेक्टिव वेस्ट और बेकपेक को भी और अच्छा बनाने की कोशिस की जा रही है। उनका पूरा ध्यान फंकशनल यूनिफ़ोर्म पर रहेगा। स्विट्ज़रलैंड की रक्षा मंत्री वायोला एमहर्ड ने भी इस कदम का स्वागत किया है। स्विस इन्फो की रिपोर्ट के अनुसार, 80 के दशक के बाद से अब तक एक ही तरह के कपड़े इस्तेमाल किए जा रहे थे। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">बता दे की स्विस आर्मी में मात्र 1 प्रतिशत महिलाएं है। उन्हें आर्मी में सभी काम पुरुषों की तरह करना पड़ा है। स्विस आर्मी के डिफेंस चीफ को आशा है की महिलाओं के आर्मी में इस बदलाव के कारण यह अनुपात 2030 तक बढ़ जाएगा। </span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 02 Apr 2021 19:18:40 +0530</pubDate>
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