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                <title>वैज्ञानिकों ने मंगल पर तीन अरब साल पुराने समुद्र तट की खोज की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(ऐरन जे कैवोसी, कर्टिन विश्वविद्यालय)</p>
<p>पर्थ, 25 फरवरी (द कन्वरसेशन) अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ‘मैरिनर-9’ अंतरिक्ष यान से 1970 के दशक में हासिल तस्वीरों ने मंगल पर पानी से बनी सतहों की मौजूदगी का खुलासा किया था। इसी के साथ वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से अबूझ पहेली रही यह गुत्थी सुलझ गई थी कि लाल ग्रह पर कभी पानी मौजूद था या नहीं।</p>
<p>तब से इस बात के कई प्रमाण मिले हैं कि मंगल पर एक दौर में पानी की अहम भूमिका हुआ करती थी। उदाहरण के लिए, मंगल ग्रह के उल्कापिंडों के अध्ययन में वहां 4.5 अरब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>(ऐरन जे कैवोसी, कर्टिन विश्वविद्यालय)</p>
<p>पर्थ, 25 फरवरी (द कन्वरसेशन) अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ‘मैरिनर-9’ अंतरिक्ष यान से 1970 के दशक में हासिल तस्वीरों ने मंगल पर पानी से बनी सतहों की मौजूदगी का खुलासा किया था। इसी के साथ वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से अबूझ पहेली रही यह गुत्थी सुलझ गई थी कि लाल ग्रह पर कभी पानी मौजूद था या नहीं।</p>
<p>तब से इस बात के कई प्रमाण मिले हैं कि मंगल पर एक दौर में पानी की अहम भूमिका हुआ करती थी। उदाहरण के लिए, मंगल ग्रह के उल्कापिंडों के अध्ययन में वहां 4.5 अरब साल पहले पानी की मौजूदगी के सबूत मिले हैं। पिछले कुछ वर्षों में लाल ग्रह पर बने ‘इंपैक्ट क्रेटर’ (किसी क्षुद्रग्रह या उल्कापिंड के किसी ग्रह या चंद्रमा जैसी ‍विशाल ठोस वस्तु की सतह से टकराने पर बनने वाला गड्ढा) भी वहां सतह के नीचे बर्फ की मौजूदगी के संकेत देते हैं।</p>
<p>आज के समय में मंगल को लेकर सबसे ज्यादा कौतुहल का विषय यह है कि लाल ग्रह पर पानी कब आया, यह कितनी मात्रा में उपलब्ध था और वहां कितने समय तक रहा। वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिशों में भी जुटे हैं कि क्या लाल ग्रह पर कभी महासागर हुआ करते थे?</p>
<p>‘पीएनएएस’ पत्रिका में मंगलवार को छपे एक नये अध्ययन में ऐसे कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई है। गुआंगझाउ विश्वविद्यालय के जियानहुई ली के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में चीनी और अमेरिकी शोधकर्ताओं की एक टीम ने चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन के मंगल यान ‘झुरोंग’ से मिले डेटा का विश्लेषण किया।</p>
<p>यह डेटा लाल ग्रह पर अरबों साल पुरानी संभावित तटरेखा के पास मौजूद चट्टानों के बारे में अभूतपूर्व जानकारी प्रदान करता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि उन्हें मंगल ग्रह पर एक प्राचीन समुद्र के तट पर पाई जाने वाली चट्टानों के नमूने मिले हैं।</p>
<p>लाल ग्रह पर पानी की मौजूदगी</p>
<p>-मंगल से जुड़े रहस्य खंगालने वाले यान ग्रह के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करते हैं, जिसमें भूविज्ञान, मिट्टी और वायुमंडल शामिल है। वे अक्सर पानी की मौजूदगी के किसी भी निशान की तलाश में रहते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि पानी यह निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण कारक है कि क्या मंगल पर कभी जीवन पनपा था।</p>
<p>अवसादी चट्टानें अक्सर अध्ययन के केंद्र में होती हैं, क्योंकि उनमें मंगल ग्रह पर पानी की मौजूदगी के प्रमाण मिल सकते हैं। मिसाल के तौर पर, नासा का ‘पर्सिवियरेंस’ यान ‘डेल्टा’ में जमा गाद में जीवन की तलाश कर रहा है। डेल्टा उस त्रिकोणीय क्षेत्र को कहते हैं, जो तेज गति से बहने वाले पानी के स्थिर पानी वाले विशाल जल निकाय में मिलने पर रेत, खनिज और आसपास की घाटी से कटाव के कारण गाद के कण जमा होने की वजह से बनता है। पृथ्वी पर डेल्टा के उदाहरणों में अमेरिका स्थित मिसिसिपी डेल्टा और मिस्र स्थित नील डेल्टा शामिल हैं।</p>
<p>‘पर्सिवियरेंस’ यान जिस डेल्टा के अध्ययन में जुटा है, वह लगभग 45 किलोमीटर चौड़े जेजेरो इंपैक्ट क्रेटर के भीतर स्थित है। माना जाता है कि इस इंपैक्ट क्रेटर के स्थान पर कभी एक झील हुआ करती थी।</p>
<p>वहीं, चीन के ‘झुरोंग’ यान की नजरें पानी के एक बहुत ही अलग स्रोत-मंगल ग्रह के उत्तरी गोलार्ध में स्थित एक प्राचीन महासागर के अवशेष-पर टिकी हुई हैं।</p>
<p>प्राचीन महासागर के अवशेष खोजता ‘झुरोंग’</p>
<p>-‘झुरोंग’ यान का नामकरण एक पौराणिक अग्नि देवता के नाम पर किया गया है। चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन ने 2020 में इसे प्रक्षेपित किया था और यह 2021 से 2022 तक लाल ग्रह की सतह पर सक्रिय था। ‘झुरोंग’ लगभग 3,300 किलोमीटर व्यास क्षेत्र में फैले ‘यूटोपिया प्लेनिटिया’ में उतरा था, जो मंगल ग्रह पर मौजूद सबसे विशाल ज्ञात ‘इंपैक्ट बेसिन’ है।</p>
<p>‘झुरोंग’ मंगल ग्रह पर हजारों किलोमीटर के दायरे में फैली ‘पैलियोशोरलाइन’ के पास के एक क्षेत्र का अध्ययन कर रहा है। ‘पैलियोशोरलाइन’ की व्याख्या एक वैश्विक महासागर के अवशेषों के रूप में की गई थी, जो मंगल के उत्तरी गोलार्ध के एक-तिहाई क्षेत्र में मौजूद था।</p>
<p>सतह के 100 मीटर नीचे की संरचना का अध्ययन</p>
<p>-यह निर्धारित करने के लिए कि क्या ‘यूटोपिया प्लेनिटिया’ में पाई जाने वाली चट्टानें उन चट्टानों से मेल खाती हैं, जो समुद्र के बहने के दौरान जमा गाद से बनती हैं, ‘जुरोंग’ ने घाटी के किनारे 1.3 किलोमीटर लंबी रेखा ‘ट्रांसेक्ट’ के आसपास का डेटा एकत्र किया। ‘ट्रांसेक्ट’ पैलियोशोरलाइन के लंबवत थी। इस अध्ययन का लक्ष्य यह पता लगाना था कि वहां किस तरह की चट्टानें मौजूद हैं और वे क्या कहानी बयां करती हैं।</p>
<p>‘झुरोंग’ ने ‘ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार’ की मदद से सतह के 100 मीटर नीचे की संरचना का विश्लेषण किया। इस दौरान वहां मौजूद चट्टानों की कई विशेषताओं का पता चला, जिसमें उनका अभिविन्यास भी शामिल है।</p>
<p>‘ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार’ ने ‘ट्रांसेक्ट’ के आसपास मौजूद चट्टानों में कई परावर्तक परतें पाईं, जो सतह से लगभग 30 मीटर नीचे तक दिखाई देती हैं। ये सभी परतें ‘पैलियोशोरलाइन’ से दूर बेसिन में गहराई में व्याप्त हैं। यह ज्यामिति बिल्कुल उसी तरह है, जिस तरह पृथ्वी पर समुद्र के किनारे जमा गाद की होती है।</p>
<p>‘झुरोंग’ ने ‘यूटोपिया प्लेनिटिया’ से जो डेटा एकत्र किया था, शोधकर्ताओं ने उसकी तुलना पृथ्वी पर जलाशयों में जमी गाद से जुड़े डेटा से की। उन्होंने पाया कि ‘झुरोंग’ ने जिन चट्टानों का अध्ययन किया, उनकी संरचना समुद्र के किनारे जमा तटीय गाद से मेल खाती है। इसका मतलब यह है कि ‘झुरोंग’ लाल ग्रह पर मौजूद प्राचीन समुद्र तट का पता लगाने में सफल रहा है।</p>
<p>पानी की मौजूदगी के निशान कितने पुराने</p>
<p>-मंगल के इतिहास के नोआचियन काल (4.1 से 3.7 अरब वर्ष पहले) में वहां पानी की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। घाटी नेटवर्क और खनिज मानचित्रों की कक्षीय छवियों के विश्लेषण से पता चलता है कि नोआचियन काल में मंगल की सतह पर पानी बहता था।</p>
<p>हालांकि, 3.7 से 3 अरब साल पहले के हेस्पेरियन काल के दौरान सतही जल के साक्ष्य कम हैं। हेस्पेरियन भू-आकृतियों में विशाल बहिर्वाह चैनलों के कक्षीय चित्रों के विश्लेषण से ऐसा प्रतीत होता है कि इनका निर्माण स्थिर जल के बजाय भूजल के विनाशकारी रिसाव से हुआ होगा।</p>
<p>इस लिहाज से ऐसा लगता है कि हेस्पेरियन काल तक मंगल ग्रह ठंडा होकर सूख गया था।</p>
<p>(द कन्वरसेशन) </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/137393/scientists-discover-three-billion-year-old-beach-on-mars</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 19:07:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंसान जल्द ही चंद्रमा पर खनन कार्य कर सकेंगे, पर क्या हमें ऐसा करना चाहिए?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मेलबर्न, 31 दिसंबर (द कन्वरसेशन) इस दशक के अंत तक, विभिन्न देश और निजी कंपनियां संभवतः चंद्रमा की सतह पर खनन कार्य कर रही होंगी।</p>
<p>लेकिन जैसे-जैसे अंतरिक्ष तक ज्यादा से ज्यादा देशों और कंपनियों की पहुंच होती जाएगी, हमें रुककर स्वयं से यह पूछना होगा कि हमे चंद्रमा के साथ साथ और कहां, किन वाणिज्यिक गतिविधियों की अनुमति देनी चाहिए।</p>
<p>अब समय आ गया है कि ऐसे नियम बनाए जाएं जो अंतरिक्ष में मानवता के साझा भविष्य की रक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि चंद्रमा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रतीक और प्रेरणा बना रहे।</p>
<p>1. चांद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/116389/humans-may-soon-be-able-to-mine-the-moon--but-should-we"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-03/moon-surface-imaginary-pic.jpg" alt=""></a><br /><p>मेलबर्न, 31 दिसंबर (द कन्वरसेशन) इस दशक के अंत तक, विभिन्न देश और निजी कंपनियां संभवतः चंद्रमा की सतह पर खनन कार्य कर रही होंगी।</p>
<p>लेकिन जैसे-जैसे अंतरिक्ष तक ज्यादा से ज्यादा देशों और कंपनियों की पहुंच होती जाएगी, हमें रुककर स्वयं से यह पूछना होगा कि हमे चंद्रमा के साथ साथ और कहां, किन वाणिज्यिक गतिविधियों की अनुमति देनी चाहिए।</p>
<p>अब समय आ गया है कि ऐसे नियम बनाए जाएं जो अंतरिक्ष में मानवता के साझा भविष्य की रक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि चंद्रमा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रतीक और प्रेरणा बना रहे।</p>
<p>1. चांद पर खनन क्यों?</p>
<p>नासा का अरबों डॉलर का ‘आर्टेमिस’ कार्यक्रम सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने को लेकर नहीं है। यह खनन कार्यों के लिए रास्ता बनाने को लेकर भी है। चीन भी इसी राह पर है।</p>
<p>इस सबने एक नई ‘चंद्र दौड़’ शुरू कर दी है, जिसमें निजी कंपनियां यह पता लगाने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं कि चंद्रमा के संसाधनों को कैसे निकाला जाए और इसे ब्रह्मांडीय आपूर्ति श्रृंखला में सरकारों को बेचा जाए।</p>
<p>फिलहाल, अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए सभी सामग्रियां पृथ्वी से भेजी जाती हैं, जिससे पानी और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुएं अत्यधिक महंगी हो जाती हैं।</p>
<p>जब एक लीटर पानी चंद्रमा पर पहुंचता है तो उसकी कीमत सोने से भी अधिक हो जाती है।</p>
<p>लेकिन चंद्रमा पर मौजूद पानी की बर्फ को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बदलकर हम अंतरिक्ष यान में ईंधन भर सकते हैं। इससे अंतरिक्ष की गहराई में जाने वाली यात्राएं, खास तौर पर मंगल ग्रह पर जाने वाली यात्राएं कहीं ज़्यादा संभव हो सकती हैं।</p>
<p>चंद्रमा पर पृथ्वी में काम आने वाली दुर्लभ धातुओं का भंडार है जो स्मार्टफोन जैसी प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक है। इसका अर्थ यह भी है कि चंद्रमा पर खनन से पृथ्वी के घटते भंडार पर दबाव कम हो सकता है।</p>
<p>निजी कंपनियां अंतरिक्ष एजेंसियों को मात दे सकती हैं। नासा द्वारा अपना अगला अंतरिक्ष यात्री उतारने से पहले ही कोई स्टार्टअप चंद्रमा पर खनन कार्य शुरू कर सकता है।</p>
<p>2. क्या खनन से पृथ्वी से चंद्रमा को देखने का हमारा नजरिया बदल सकता है?</p>
<p>जब चंद्रमा से सामग्री निकाली जाएगी, तो धूल उड़ेगी। इसे दबाने के लिए उचित वातावरण नहीं होने से यह धूल बहुत दूर तक जा सकती है।</p>
<p>चांद पर धूल निकलेगी तो उसके वह हिस्से अधिक चमकीले दिख सकते हैं जहां से धूल हटी है जबकि वह हिस्से धूसर दिख सकते हैं जहां धूल आकर बैठी है।</p>
<p>यहां तक कि छोटे पैमाने पर किए गए अभियान भी इतनी धूल पैदा कर सकते हैं कि समय के साथ दृश्य परिवर्तन हो जाए।</p>
<p>स्थायी और न्यूनतम विघटनकारी खनन प्रथाओं को सुनिश्चित करने के लिए चंद्रमा की धूल का प्रबंधन एक महत्वपूर्ण कारक होगा।</p>
<p>3. चंद्रमा का मालिक कौन है?</p>
<p>बाहरी अंतरिक्ष संधि (1967) यह स्पष्ट करती है कि कोई भी देश चंद्रमा पर अपना “स्वामित्व” होने का दावा नहीं कर सकता है।</p>
<p>हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि चंद्रमा से संसाधन निकालने वाली कंपनी इस गैर-विनियोग प्रावधान का उल्लंघन करती है या नहीं।</p>
<p>बाद में हुए दो समझौतों में इस मुद्दे को उठाया गया है।</p>
<p>साल 1979 की चंद्रमा संधि में चांद और उसके प्राकृतिक संसाधनों को “मानव जाति की साझा विरासत” बताया गया है। इसे अक्सर चांद पर वाणिज्यिक खनन पर स्पष्ट प्रतिबंध के रूप में समझा जाता है।</p>
<p>हालांकि, 2020 के ‘आर्टेमिस’ समझौते में खनन की अनुमति दी गई है, साथ ही बाह्य अंतरिक्ष संधि में चंद्रमा पर स्वामित्व के किसी भी दावे को अस्वीकार करने की पुष्टि की गई है।</p>
<p>4. चांद पर खनिकों का जीवन कैसा होगा?</p>
<p>कल्पना कीजिए कि आपने लगातार 12 घंटे गर्म और गंदे वातावरण में काम किया है। आपके अंदर पानी की कमी हो गई है तथा आप भूखे भी हैं। आपके कुछ सहकर्मी थकावट के कारण बेहोश हो गए हैं या घायल हो गए हैं। आप सभी चाहते हैं कि आपको अच्छे सुरक्षा मानकों, उचित वेतन और उचित कार्य घंटों वाली कोई दूसरी नौकरी मिल जाए। लेकिन आप ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि आप अंतरिक्ष में फंस गए हैं।</p>
<p>यह निराशाजनक दृष्टिकोण, श्रमिकों के लिए जोखिम का समाधान किए बिना, चंद्र पर खनन कार्रवाई करने में जल्दबाजी के संभावित खतरों को उजागर करते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Dec 2024 18:31:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कीटाणुनाशक केवल 99.9% कीटाणुओं को ही क्यों मार पाते हैं,  जानिए इसका विज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मेलबर्न, 30 दिसंबर (द कन्वरसेशन ) क्या आपने कभी सोचा है कि ज़्यादातर कीटाणुनाशक यह क्यों कहते हैं कि वे 99.9 फीसदी या 99.99 फीसदी कीटाणुओं को मार देते हैं, लेकिन ये कीटनाशक कभी भी 100 फीसदी कीटाणुओं को खत्म कर देने का वादा नहीं करते? शायद यह विचार आपके दिमाग में रसोई या बाथरूम की सफ़ाई करते समय आया हो।</p>
<p>निश्चित रूप से, हर तरह के अद्भुत काम करने में सक्षम विज्ञान की दुनिया में लोग ऐसा कीटाणुनाशक ज़रूर चाहेंगे जो 100 फीसदी कारगर हो। इस पहेली का जवाब पाने के लिए माइक्रोबायोलॉजी और गणित की थोड़ी समझ की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>मेलबर्न, 30 दिसंबर (द कन्वरसेशन ) क्या आपने कभी सोचा है कि ज़्यादातर कीटाणुनाशक यह क्यों कहते हैं कि वे 99.9 फीसदी या 99.99 फीसदी कीटाणुओं को मार देते हैं, लेकिन ये कीटनाशक कभी भी 100 फीसदी कीटाणुओं को खत्म कर देने का वादा नहीं करते? शायद यह विचार आपके दिमाग में रसोई या बाथरूम की सफ़ाई करते समय आया हो।</p>
<p>निश्चित रूप से, हर तरह के अद्भुत काम करने में सक्षम विज्ञान की दुनिया में लोग ऐसा कीटाणुनाशक ज़रूर चाहेंगे जो 100 फीसदी कारगर हो। इस पहेली का जवाब पाने के लिए माइक्रोबायोलॉजी और गणित की थोड़ी समझ की ज़रूरत है।</p>
<p>कीटाणुनाशक क्या है?</p>
<p>कीटाणुनाशक एक ऐसा पदार्थ है जिसका इस्तेमाल निर्जीव वस्तुओं पर बैक्टीरिया, वायरस और अन्य रोगाणुओं को मारने या निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है।</p>
<p>हमारे घरेलू वातावरण में सतहों और वस्तुओं पर अनगिनत रोगाणु होते हैं। ज़्यादातर रोगाणु हानिकारक नहीं होते (और कुछ हमारे लिए अच्छे भी होते हैं), लेकिन उनका एक छोटा सा हिस्सा हमें बीमार कर सकता है।</p>
<p>कीटाणुशोधन में भौतिक हस्तक्षेप जैसे गर्मी संबंधी उपचार या यूवी प्रकाश का उपयोग शामिल हो सकता है। सामान्यत: जब हम कीटाणुनाशकों के बारे में सोचते हैं तो हम सतहों या वस्तुओं पर रोगाणुओं को मारने के लिए रसायनों के उपयोग का उल्लेख कर रहे होते हैं।</p>
<p>रासायनिक कीटाणुनाशकों में अक्सर अल्कोहल, क्लोरीन यौगिक और हाइड्रोजन पैरॉक्साइड जैसे सक्रिय तत्व होते हैं जो विभिन्न रोगाणुओं के महत्वपूर्ण घटकों को लक्षित करके उन्हें मार सकते हैं।</p>
<p>सूक्ष्मजीव उन्मूलन का गणित</p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में हम सभी कोविड मामलों के प्रसार के संदर्भ में घातीय वृद्धि (एवर एक्सीलेरेटिंग रेट) की अवधारणा से परिचित हैं। इसमें संख्याएँ लगातार बढ़ती हैं, जिससे स्थिति खतरनाक हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि 100 बैक्टीरिया की कॉलोनी हर घंटे दोगुनी हो जाती है, तो 24 घंटे में बैक्टीरिया की आबादी 1.5 अरब से अधिक हो जाएगी।</p>
<p>इसके विपरीत, रोगाणुओं को मारना या निष्क्रिय करना एक लघुगणकीय क्षय (लॉगरिदमिक डिके) पैटर्न का अनुसरण करता है, जो अनिवार्य रूप से घातीय वृद्धि के विपरीत है। यहाँ, समय के साथ रोगाणुओं की संख्या कम हो जाती है, मृत्यु की दर धीमी हो जाती है क्योंकि रोगाणुओं की संख्या कम हो जाती है।</p>
<p>उदाहरण के लिए, यदि कोई विशेष कीटाणुनाशक हर मिनट 90 फीसदी बैक्टीरिया को मारता है, तो एक मिनट के बाद, मूल बैक्टीरिया का केवल 10 फीसदी ही बचेगा। अगले मिनट के बाद, शेष 10 फीसदी का 10 फीसदी बचेगा जो मूल मात्रा का मात्र एक फीसदी होगा। यह सिलसिला आगे चलता रहेगा।</p>
<p>इस लघुगणकीय क्षय पैटर्न के कारण, यह दावा करना कभी भी संभव नहीं है कि किसी भी सूक्ष्मजीव आबादी को 100 फीसदी मारा जा सकता है। आप केवल वैज्ञानिक रूप से कह सकते हैं कि आप प्रारंभिक आबादी के अनुपात से सूक्ष्मजीव भार को कम करने में सक्षम हैं।</p>
<p>यही कारण है कि घरेलू उपयोग के लिए बेचे जाने वाले अधिकांश कीटाणुनाशक संकेत देते हैं कि वे 99.9 फीसदी कीटाणुओं को मारते हैं। अन्य उत्पाद जैसे हैंड सैनिटाइज़र और कीटाणुनाशक वाइप्स, जो अक्सर 99.9 फीसदी कीटाणुओं को मारने का दावा करते हैं, उसी सिद्धांत का पालन करते हैं।</p>
<p>वास्तविक दुनिया के निहितार्थ</p>
<p>विज्ञान के बहुत से मामलों की तरह, प्रयोगशाला की तुलना में वास्तविक दुनिया में चीजें थोड़ी अधिक जटिल हो जाती हैं। यह आकलन करते समय कई अन्य कारकों पर विचार करना होता है कि कीटाणुनाशक किसी सतह से सूक्ष्मजीवों को कितनी अच्छी तरह से हटा सकता है।</p>
<p>इन कारकों में से एक प्रारंभिक सूक्ष्मजीव आबादी का आकार है जिससे आप छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे हैं। यानी, सतह जितनी अधिक दूषित होगी, सूक्ष्मजीवों को खत्म करने के लिए कीटाणुनाशक को उतनी ही अधिक मेहनत करनी होगी।</p>
<p>उदाहरण के लिए, यदि आप किसी सतह या वस्तु पर केवल 100 सूक्ष्मजीवों के साथ शुरुआत करते हैं, और आप कीटाणुनाशक का उपयोग करके उनमें से 99.9 फीसदी को हटा देते हैं, तो आप इस बात को लेकर बहुत आश्वस्त हो सकते हैं कि आपने उस सतह या वस्तु से सभी सूक्ष्मजीवों को प्रभावी ढंग से हटा दिया है (जिसे स्टरलाइज़ेशन कहा जाता है)।</p>
<p>इसके विपरीत, यदि आपके पास सतह को दूषित करने वाले सैकड़ों करोड़ या अरब सूक्ष्मजीवों की एक बड़ी आबादी है, तो सूक्ष्मजीव भार को 99.9 फीसदी तक कम करने का मतलब यह हो सकता है कि सतह पर संभावित रूप से लाखों सूक्ष्मजीव बचे हुए हैं।</p>
<p>समय एक महत्वपूर्ण कारक है जो यह निर्धारित करता है कि सूक्ष्मजीवों को कितने प्रभावी रूप से मारा जाता है। इसलिए अत्यधिक दूषित सतह को लंबे समय तक कीटाणुनाशक के संपर्क में रखना यह सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि आप अधिक सूक्ष्मजीवों को मार सकें।</p>
<p>यही कारण है कि यदि आप कई आम घरेलू कीटाणुनाशकों के लेबल को ध्यान से देखें, तो वे अक्सर सुझाव देंगे कि कीटाणुरहित करने के लिए आपको उत्पाद का उपयोग करना चाहिए और फिर साफ करने से पहले एक निर्दिष्ट समय तक प्रतीक्षा करनी चाहिए। इसलिए हमेशा उस उत्पाद के लेबल को देखें जिसका आप उपयोग कर रहे हैं।</p>
<p>तापमान, आर्द्रता और सतह के प्रकार जैसे अन्य कारक भी प्रभावित करते हैं कि प्रयोगशाला के बाहर कीटाणुनाशक कितनी अच्छी तरह काम करता है। इसी तरह, वास्तविक दुनिया में सूक्ष्मजीव प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए उपयोग किए जाने वाले कीटाणुशोधन के प्रति अधिक या कम संवेदनशील हो सकते हैं।</p>
<p>कीटाणुनाशक संक्रमण नियंत्रण का एक हिस्सा हैं। कीटाणुनाशकों का समझदारी से उपयोग हमारे दैनिक जीवन में रोगजनकों यानी बीमारी का कारण बनने वाले सूक्ष्मजीवों के संपर्क को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए वे हमारे बीमार होने की संभावनाओं को कम कर सकते हैं।</p>
<p>यह तथ्य कि कीटाणुनाशक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से 100 फीसदी प्रभावी साबित नहीं हो सकते हैं, किसी भी तरह से संक्रमण नियंत्रण में उनके महत्व को कम नहीं करता है। लेकिन संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए उनके उपयोग को हमेशा अन्य संक्रमण नियंत्रण प्रथाओं, जैसे हाथ धोने, द्वारा पूर्ण किया जाना चाहिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/116010/why-disinfectants-kill-only-99-9--germs--know-the-science-behind-it</link>
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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2024 16:35:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल : आसमान में आज दिखेगा दुर्लभ नजारा, चंद्रमा की ओट में छिपेगा शनि</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल, 24 जुलाई (हि.स.)। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों को आज रात आसमान में दुर्लभ खगोलीय घटना देखने का अवसर मिलने जा रहा है। सूर्य और चंद्र ग्रहण की घटनाएं हर साल चार-पांच बार देखने को मिलती हैं, लेकिन आज शनि को ग्रहण लगने जा रहा है। भारत में यह घटना 18 साल बाद दिखाई देगी।<br /><br />नेशनल अवार्ड प्राप्‍त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि 24 जुलाई की रात करीब 9 बजकर 30 मिनिट पर चंद्रमा पूर्व में उदित होकर जब आगे बढ़ेगा तो मध्‍यरात्रि को 11 बजकर 57 मिनिट पर वह रिंग वाले सौरमंडल के छटवें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103329/a-rare-sight-will-be-seen-in-bhopal-sky-today"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b24072024-06.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल, 24 जुलाई (हि.स.)। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों को आज रात आसमान में दुर्लभ खगोलीय घटना देखने का अवसर मिलने जा रहा है। सूर्य और चंद्र ग्रहण की घटनाएं हर साल चार-पांच बार देखने को मिलती हैं, लेकिन आज शनि को ग्रहण लगने जा रहा है। भारत में यह घटना 18 साल बाद दिखाई देगी।<br /><br />नेशनल अवार्ड प्राप्‍त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि 24 जुलाई की रात करीब 9 बजकर 30 मिनिट पर चंद्रमा पूर्व में उदित होकर जब आगे बढ़ेगा तो मध्‍यरात्रि को 11 बजकर 57 मिनिट पर वह रिंग वाले सौरमंडल के छटवें ग्रह शनि को अपने आगोश में ले लेगा। चंद्रमा, शनि और पृथ्‍वी के बीच में आकर पृथ्‍वी के एक सीमित भू-भाग से शनिदर्शन में बाधक बनेगा। शनि और पृथ्‍वी के बीच चंद्रमा आकर ग्रहण की स्थिति बनाएगा। उन्होंने बताया कि इसे शनि का चंद्रग्रहण कहा जा रहा है, जबकि यह खगोल विज्ञान में लुनार आकल्‍टेशन ऑफ सेटर्न कहलाता है।<br /><br />सारिका ने बताया कि यह घटना बुधवार विश्‍वस्‍तर पर मध्‍यरात्रि 11 बजकर 57 मिनिट से आरंभ होकर रात्रि 3 बजकर 57 मिनिट पर समाप्‍त होगी। भारत में इसे मध्‍यरात्रि 12 बजकर 50 मिनिट से 3 बजकर 10 मिनट तक अलग-अलग स्‍थानों में देखा जा सकेगा। दिल्‍ली सहित भारत के उत्‍तरी पश्चिमी राज्‍यों में यह नहीं दिखाई देगा, लेकिन मध्‍य प्रदेश सहित दक्षिणी एवं पूर्वी भारत में देखा जा सकेगा।<br /><br />सारिका ने बताया कि इसके पहले भारत में इस घटना को 2 फरवरी 2007 को देखा गया था। इस तरह लगभग 18 साल बाद भारत में इसे देखा जा सकेगा। इस समय चंद्रमा पृथ्‍वी से लगभग 3,64,994 किलो मीटर दूर होगा, तो शनि की पृथ्‍वी से दूरी लगभग 134 करोड़ किलोमीटर होगी। दूरी में इतना अंतर होते हुए भी आकाश में इनकी स्थिति इस प्रकार होगी कि पृथ्‍वी के एक निश्चित भू-भाग से देखने पर चंद्रमा, शनि ग्रह को ढ़कता सा नजर आएगा। उन्होंने कहा कि बादलों के कारण अगर आप इस अद्भुत खगोलीय घटना को नहीं देख पाते हैं तो निराश मत होइए, आगामी 14 अक्‍टूबर के स्‍वच्‍छ आकाश में इसे फिर देखा जा सकेगा और वह भी पूरे भारत में।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/103329/a-rare-sight-will-be-seen-in-bhopal-sky-today</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Jul 2024 15:05:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फीचर : आज के दिन जन्मा था वो शख्स जिसने रखी थी आधुनिक विज्ञान की नींव, जिसके दिमाग के हुए थे 200 टुकड़े</title>
                                    <description><![CDATA[14 मार्च 1879 को जर्मनी के उल्म में अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म हुआ था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90426/the-person-who-laid-the-foundation-of-modern-science-was"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-03/news-photo-(6)2.jpg" alt=""></a><br /><p>आज 14 मार्च विज्ञान के लिए एक बहुत ही अहम दिवस है। आज ही के दिन 1879 को जर्मनी के उल्म में अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म हुआ था। आइंस्टीन का दिमाग इतना तेज था कि आज भी लोग उसकी मिसाल देते हैं। आइंस्टीन 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली भौतिकशास्त्रियों में से एक थे, जिनके दिमाग की चर्चा दुनिया के कोने-कोने में होती थी। आइंस्टीन की मृत्यु 18 अप्रैल 1955 को प्रिंसटन अस्पताल में हुई थी। उनकी मृत्यु के बाद, उनके परिवार की अनुमति के बिना, पैथोलॉजिस्ट हार्वे ने उनका मस्तिष्क चुरा लिया। लेकिन जब मामला सामने आया तो पैथोलॉजिस्ट ने आइंस्टीन के बेटे से इजाजत ले ली। लेकिन ये समझौता किया गया कि इसका इस्तेमाल सिर्फ विज्ञान के हित में होगा। हालाँकि इसके बाद डॉक्टर थॉमस ने आइंस्टीन के मस्तिष्क को 200 टुकड़ों में विभाजित किया।</p>
<p><strong>क्या सामने आया शोध में?</strong></p>
<p>आपको बता दें कि थॉमस ने आइंस्टीन के मस्तिष्क के टुकड़े कई वैज्ञानिकों को दिए, जिसके कारण उन्हें अस्पताल से बर्खास्त कर दिया गया। उसी समय, रिचर्स ने खुलासा किया कि सामान्य लोगों की तुलना में, आइंस्टीन के मस्तिष्क में असामान्य कोशिका संरचना थी, जो उनकी धारणा और सोच को बाकियों से अलग बनाती थी।</p>
<p><strong>कैसा था इस महान वैज्ञानिक का आखिर दिन?</strong><br /> <br />18 अप्रैल 1955 को एक बजकर पंद्रह मिनट हुए थे। एक प्रिंसटन अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए, एक बुजुर्ग अल्बर्ट आइंस्टीन जर्मन में कुछ शब्द बोलते हैं। दो लंबी सांस लेने के बाद उसकी सांस रुक जाती है। उसका इलाज कर रही नर्स जर्मन भाषा नहीं जानती थी, इसलिए दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली वैज्ञानिक के आखिरी शब्द हवा में उड़ गए। उनके आखिरी शब्द कहां थे? दुनिया इसे कभी नहीं जान पाएगी। अस्पताल के डॉक्टरों ने आइंस्टीन पर एक शव परीक्षण करने के लिए थॉमस हार्वे नामक रोगविज्ञानी को बुलाया। पोस्ट-मॉर्टम के बाद थॉमस हार्वे ने रिपोर्ट में लिखा कि 'आइंस्टीन की मौत उनके दिल के पास फटी रक्त वाहिका से हुई थी।' थॉमस हार्वे ने तब चुपके से अल्बर्ट आइंस्टीन के मस्तिष्क को चुरा लिया और इसे कांच के जार में सुरक्षित रूप से रख दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने आइंस्टीन की आंखें निकाल कर उन्हें आइंस्टीन के नेत्र विशेषज्ञ को सौंप दिया। अल्बर्ट आइंस्टीन की मौत की खबर से पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/90426/the-person-who-laid-the-foundation-of-modern-science-was</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Mar 2023 20:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानिये OpenAI के CEO ने ChatGPT जैसे आर्टिफिश्यिल इंटेलिजंस टूल के बारे में क्या चेतावनी दी है!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। एआई भाषा मॉडल चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के सीईओ सैम अल्टमैन ने चेतावनी दी है कि दुनिया संभावित रूप से एआई टूल्स के खतरों से रूबरू होने से दूर नहीं है। उनका मानना है कि यह महत्वपूर्ण है कि एआई चैटबॉट्स को जनता के लिए जारी करने से पहले स्वतंत्र रूप से ऑडिट किया जाए। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) के दुरुपयोग, गंभीर दुर्घटनाएं और सामाजिक व्यवधान सहित गंभीर जोखिम हैं।</p>
<p>ऑल्टमैन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि जबकि समाज एजीआई के विकास को हमेशा के लिए नहीं रोक सकता है, यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नई दिल्ली। एआई भाषा मॉडल चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के सीईओ सैम अल्टमैन ने चेतावनी दी है कि दुनिया संभावित रूप से एआई टूल्स के खतरों से रूबरू होने से दूर नहीं है। उनका मानना है कि यह महत्वपूर्ण है कि एआई चैटबॉट्स को जनता के लिए जारी करने से पहले स्वतंत्र रूप से ऑडिट किया जाए। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) के दुरुपयोग, गंभीर दुर्घटनाएं और सामाजिक व्यवधान सहित गंभीर जोखिम हैं।</p>
<p>ऑल्टमैन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि जबकि समाज एजीआई के विकास को हमेशा के लिए नहीं रोक सकता है, यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि इसे कैसे ठीक किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी बिंदु पर, भविष्य की प्रणालियों को प्रशिक्षित करने से पहले स्वतंत्र समीक्षा प्राप्त करना महत्वपूर्ण हो सकता है। ऑल्टमैन का यह भी मानना है कि सार्वजनिक मानकों के बारे में जब एक एजीआई प्रयास को एक प्रशिक्षण रन को रोकना चाहिए, यह तय करना चाहिए कि एक मॉडल जारी करने के लिए सुरक्षित है, या एक मॉडल को उत्पादन उपयोग से हटा दें।</p>
<p>OpenAI के ChatGPT का उपयोग वर्तमान में कंपनियों द्वारा कोड लिखने, कॉपी राइटिंग और सामग्री निर्माण, ग्राहक सहायता और मीटिंग सारांश तैयार करने जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। इस बीच, आम जनता निबंध, परीक्षा और यहां तक कि कविताएं लिखने के लिए एआई चैटबॉट्स का उपयोग कर रही है। Altman का कहना है कि OpenAI तेजी से संरेखित और चलाने योग्य मॉडल बनाने की दिशा में काम कर रहा है और संभावित जोखिमों को कम करने के लिए लगातार सीख रहा है और अनुकूलन कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/90044/know-what-the-ceo-of-openai-has-warned-about-artificial</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Feb 2023 17:38:20 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैज्ञानिकों ने एक यंत्र की खोज की जो अलर्ट करता है कि कब आवाज़ को विराम देने का वक्त आ गया है!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक स्मार्ट पहनने योग्य उपकरण विकसित किया है जो यह ट्रैक करता है कि लोग अपनी आवाज़ का कितना उपयोग करते हैं और संभावित अति प्रयोग और थकान के प्रति सचेत करते हैं। डिवाइस अपनी तरह का पहला यंत्र है जो बात करने और गाने से जुड़े सूक्ष्म कंपन को महसूस करता है, और फिर कैप्चर किए गए डेटा को ब्लूटूथ के माध्यम से ऐप में स्ट्रीम करता है, जहां मशीन-लर्निंग एल्गोरिदम दोनों के बीच अंतर कर सकते हैं। उपयोगकर्ता तब वैयक्तिकृत मुखर थ्रेसहोल्ड सेट कर सकते हैं और अपने स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, या कलाई पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक स्मार्ट पहनने योग्य उपकरण विकसित किया है जो यह ट्रैक करता है कि लोग अपनी आवाज़ का कितना उपयोग करते हैं और संभावित अति प्रयोग और थकान के प्रति सचेत करते हैं। डिवाइस अपनी तरह का पहला यंत्र है जो बात करने और गाने से जुड़े सूक्ष्म कंपन को महसूस करता है, और फिर कैप्चर किए गए डेटा को ब्लूटूथ के माध्यम से ऐप में स्ट्रीम करता है, जहां मशीन-लर्निंग एल्गोरिदम दोनों के बीच अंतर कर सकते हैं। उपयोगकर्ता तब वैयक्तिकृत मुखर थ्रेसहोल्ड सेट कर सकते हैं और अपने स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, या कलाई पर एक अलग डिवाइस पर हैप्टिक फीडबैक प्राप्त कर सकते हैं, जब वे अपनी सीमा तक पहुंचते हैं या उन्हें पार करते हैं, जिससे उन्हें ब्रेक लेने और अपनी आवाज़ को आराम करने की अनुमति मिलती है।</p>
<p>डिवाइस पेशेवर गायकों, शिक्षकों, कॉल-सेंटर के कर्मचारियों, राजनेताओं, प्रशिक्षकों और संवाद करने और जीवनयापन करने के लिए अपनी आवाज़ पर निर्भर रहने वाले किसी भी व्यक्ति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। चिकित्सक अपने उपचार के दौरान आवाज विकारों वाले रोगियों की दूरस्थ रूप से निगरानी भी कर सकते हैं। डिवाइस के निर्माता जॉन ए रोजर्स जो एक बायोइलेक्ट्रॉनिक्स अग्रणी, ने कहा कि डिवाइस बोलने और गायन के लिए आयाम और आवृत्ति को सटीक रूप से मापता है, जो वोकल फोल्ड्स पर समग्र भार को निर्धारित करने में सबसे महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/KDCwDGYK-RQ" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p>पहनने योग्य डिवाइस का एल्गोरिथ्म गायन को 95% से अधिक सटीकता के साथ बोलने और गाने को अलग कर सकता है। अध्ययन का सह-नेतृत्व करने वाली एक आवाज विशेषज्ञ थेरेसा ब्रांकाशियो ने कहा कि कुछ लोग, विशेष रूप से कम प्रशिक्षण वाले लोग, जैसे गायक, शिक्षक, राजनेता और खेल प्रशिक्षक, अक्सर यह महसूस नहीं करते हैं कि वे अपनी आवाज़ को कितना आगे बढ़ाते हैं। पहनने योग्य उपकरण उन्हें चोट को रोकने में मदद करने के लिए अधिक जागरूकता देगा। अध्ययन नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की कार्यवाही में प्रकाशित हुआ था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/89916/scientists-invent-a-device-that-alerts-when-its-time-to</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Feb 2023 19:00:00 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लो, अब ChatGPT ने इंग्लैंड के पीएम ऋषि सुनक और माइक्रोसोफ्ट के बिल गेट्स का इंटरर्व्यू ले डाला!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एआई चैटबॉट चैटजीपीटी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के साथ एक विशेष साक्षात्कार आयोजित किया। साक्षात्कार में वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य और नौकरी के बाजार से लेकर व्यक्तिगत कैरियर सलाह तक कई विषयों को शामिल किया गया।</p>
<p>अगले दशक में अर्थव्यवस्था और नौकरी बाजार पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव के बारे में पूछे जाने वाले चैटजीपीटी के साथ साक्षात्कार शुरू हुआ। गेट्स ने जवाब दिया कि एआई जैसी तकनीक स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा को अधिक कुशल बनाने में मदद कर सकती है, जिससे उन क्षेत्रों में श्रम की कमी को दूर किया जा सके।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89856/now-chatgpt-has-taken-the-interview-of-rishi-sunak-pm"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/chatgpt-ai.jpg" alt=""></a><br /><p>एआई चैटबॉट चैटजीपीटी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के साथ एक विशेष साक्षात्कार आयोजित किया। साक्षात्कार में वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य और नौकरी के बाजार से लेकर व्यक्तिगत कैरियर सलाह तक कई विषयों को शामिल किया गया।</p>
<p>अगले दशक में अर्थव्यवस्था और नौकरी बाजार पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव के बारे में पूछे जाने वाले चैटजीपीटी के साथ साक्षात्कार शुरू हुआ। गेट्स ने जवाब दिया कि एआई जैसी तकनीक स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा को अधिक कुशल बनाने में मदद कर सकती है, जिससे उन क्षेत्रों में श्रम की कमी को दूर किया जा सके।</p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2023-02/chatgpt-ai.jpg" alt="ChatGPT-AI"></img></p>
<p>एआई चैटबॉट ने सुनक और गेट्स से यह भी पूछा कि वे अपने करियर की शुरुआत करते समय अपने से छोटे बच्चों को क्या सलाह देंगे। गेट्स ने कहा कि वह चाहते हैं कि उन्हें अपने करियर में पहले ही कार्य-जीवन संतुलन के महत्व का एहसास हो गया था, जबकि सुनक ने वर्तमान क्षण में जीने के मूल्य पर विचार किया।</p>
<p>अंत में, चैटजीपीटी ने पूछा कि उनकी नौकरियों का एक पहलू क्या है जो वे चाहते हैं कि एआई उनके लिए कर सके। गेट्स ने साझा किया कि वह नोट्स और यहां तक कि गाने और कविताएं लिखने के लिए एआई का उपयोग करते हैं, जबकि सुनक ने सुझाव दिया कि एआई हर हफ्ते उनके लिए पीएम के प्रश्नकाल का ख्याल रख सकता है।</p>
<p>साक्षात्कार का वीडियो गेट्स ने लिंक्डइन पर साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके और सुनक के बीच भविष्य के बारे में बहुत अच्छी बातचीत हुई, जो उनका मानना है कि यह उज्ज्वल है।</p>
<p>कुल मिलाकर, चैटजीपीटी साक्षात्कार ने दो प्रभावशाली नेताओं को प्रौद्योगिकी, करियर और सामान्य रूप से जीवन पर उनके दृष्टिकोण के बारे में सुनने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया।</p>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/sZJqDNI-rmo" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 19 Feb 2023 14:55:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>पीकिंग यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट : पृथ्वी के आंतरिक कोर ने न सिर्फ घूमना बंद किया बल्कि अपनी दिशा भी उलट रहा!</title>
                                    <description><![CDATA[अध्ययन के अनुसार कोर का घूमना दिन की लंबाई में बदलाव से प्रभावित होता है और पृथ्वी को अपनी धुरी पर घूमने में कितना समय लगता है, इसमें मामूली बदलाव कर सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89207/peking-university-reports-that-the-earths-inner-core-not-only"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/earth-inner-core.jpg" alt=""></a><br /><p>एक नए अध्ययन में पाया गया है कि पृथ्वी के आंतरिक कोर ने हाल ही में घूमना बंद कर दिया है। इतना ही नहीं उसने अपने घूमने की दिशा को उलट दिया है। यह पृथ्वी की आंतरिक गतिशीलता और इसकी परतों के बीच की अंतःक्रियाओं की हमारी समझ के लिए एक महत्वपूर्ण खोज है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के अनुसार क्रस्ट, मेंटल और कोर परतों के तीन समूह हैं जो पृथ्वी को बनाते हैं। भूकंपीय तरंगों के अध्ययन के माध्यम से ग्रह के केंद्र में स्थित आंतरिक कोर की पहली बार 1936 में पहचान की गई थी। इसकी चौड़ाई लगभग 7,000 किलोमीटर है और यह एक एक तरल लोहे के खोल के चारों ओर एक ठोस लोहे की सतह से बना है। 1996 के नेचर के अध्ययन के अनुसार, पिछले तीन दशकों के दौरान भूकंपीय तरंगों को पृथ्वी के आंतरिक कोर के माध्यम से गति करने में लगने वाले समय में थोड़ा लेकिन लगातार परिवर्तन हुआ है। आंतरिक कोर का घूमाव, जो मेंटल और क्रस्ट की तुलना में लगभग 1 डिग्री प्रति वर्ष तेज है, को इस विचरण का कारण माना जाता है।</p>
<p>पीकिंग यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन के अनुसार, आंतरिक कोर ने 2009 में घूमना बंद कर दिया है और अपने घूमने की दिशा बदलने की प्रक्रिया में हो सकता है। नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार कोर का घूमना दिन की लंबाई में बदलाव से प्रभावित होता है और पृथ्वी को अपनी धुरी पर घूमने में कितना समय लगता है, इसमें मामूली बदलाव कर सकता है।</p>
<p>शोध दल के मुताबिक, पृथ्वी की परतों के बीच गतिशील अंतःक्रियाएं दृष्टिगोचर होती हैं, जो गुरुत्वाकर्षण युग्मन और कोर एवं मैटल से सतह पर कोणीय गति के हस्तांतरण के कारण हो सकती हैं।</p>
<p>पीकिंग यूनिवर्सिटी की शोध टीम का अनुमान है कि उनके निष्कर्ष पृथ्वी की परतों के बीच गतिशील अंतःक्रियाओं और वह ग्रह के अतीत, वर्तमान और भविष्य को कैसे प्रभावित कर सकती हैं, इस बारे में अतिरिक्त जांच को प्रेरित करेंगे। इन अंतःक्रियाओं को समझना पूरे ग्रह को समझने के लिए आवश्यक है, भले ही वर्तमान में यह सुझाव देने के लिए कोई सबूत नहीं है कि आंतरिक कोर के घूर्णन में परिवर्तन सतह पर रहने वाले व्यक्तियों को नुकसान पहुंचाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Jan 2023 14:25:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>वैज्ञानिकों ने तैयार किया अनोखा रोबोट, शरीर के अंदर जाकर पूरे करेगा दिए गए टास्क</title>
                                    <description><![CDATA[<p><font face="Nirmala UI, sans-serif"><span lang="hi" style="line-height:115%;" xml:lang="hi">आज का समय तकनीक का समय है। आज के समय विज्ञान के विभिन्न अविष्कारों ने मानव जीवन को सरल बनाकर रखा है। आज के समय नए नए रोबोट्स बनाये जा रहे है जो घर के कामों से लेकर ऑफिस और साफ़ सफाई से लेकर खेल-कूद जैसे सारे काम में सक्षम है। अब वैज्ञानिक ऐसे रोबोट बनाने में लगे है जो चिकित्सा के क्षेत्र में मददगार हो। अब ऐसे ही एक रोबोट की खोज हुई है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रोबोट खोज निकाला जो हर मामले में अलग है।</span></font></p><p><font face="Nirmala UI, sans-serif"><span lang="hi" style="line-height:115%;" xml:lang="hi">कस्टर्ड जैसी स्थिरता के साथ चुंबकीय कीचड़ से बना रोबोट संकीर्ण मार्गों</span></font></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/79703/scientists-have-prepared-a-unique-robot-will-go-inside-the-body-and-complete-the-given-task"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/4658_image17.jpg" alt=""></a><br /><p><font face="Nirmala UI, sans-serif"><span lang="hi" style="line-height:115%;" xml:lang="hi">आज का समय तकनीक का समय है। आज के समय विज्ञान के विभिन्न अविष्कारों ने मानव जीवन को सरल बनाकर रखा है। आज के समय नए नए रोबोट्स बनाये जा रहे है जो घर के कामों से लेकर ऑफिस और साफ़ सफाई से लेकर खेल-कूद जैसे सारे काम में सक्षम है। अब वैज्ञानिक ऐसे रोबोट बनाने में लगे है जो चिकित्सा के क्षेत्र में मददगार हो। अब ऐसे ही एक रोबोट की खोज हुई है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रोबोट खोज निकाला जो हर मामले में अलग है।</span></font></p><p><font face="Nirmala UI, sans-serif"><span lang="hi" style="line-height:115%;" xml:lang="hi">कस्टर्ड जैसी स्थिरता के साथ चुंबकीय कीचड़ से बना रोबोट संकीर्ण मार्गों पर खुद बा खुद आगे बढ़ सकता है। इसके अलावा वस्तुओं को पकड़ सकता है और टूटे सर्किट को ठीक भी कर सकता है। इसे दुर्घटना से निगली गई वस्तुओं को आसानी से निकाला जा सकता है। ऐसे कई कठिन कामों को करने के लिए इस रोबोट को शरीर के अंदर भेजा जा सकता है।</span></font></p><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">A robot made of magnetic slime could be deployed inside the body to perform tasks such as retrieving objects swallowed by accident.<a href="https://t.co/EYpnx56vNO">https://t.co/EYpnx56vNO</a> <a href="https://t.co/zA3hMO80xQ">pic.twitter.com/zA3hMO80xQ</a></p>— New Scientist (@newscientist) <a href="https://twitter.com/newscientist/status/1509599345255100417?ref_src=twsrc%5Etfw">March 31, 2022</a></blockquote> <p><font face="Nirmala UI, sans-serif"><span lang="hi" style="line-height:115%;" xml:lang="hi">हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय में ली झांग और उनके सहयोगियों ने बोरेक्स, एक आम घरेलू डिटर्जेंट, और पॉलीविनाइल अल्कोहल, एक प्रकार का राल के साथ मिश्रित नियोडिमियम चुंबक कणों को एक कीचड़ बनाने के लिए मिश्रित किया जिसे नियंत्रित किया जा सकता है। वैसे तो लोचदार रोबोट वस्तुओं में हेरफेर करने में सक्षम और द्रव-आधारित रोबोट जो तंग स्थानों को नेविगेट कर सकते हैं, दोनों पहले से मौजूद हैं, लेकिन दोनों के गुणों के संयोजन वाले रोबोट कम आम हैं।</span></font></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 22:59:01 +0530</pubDate>
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