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                            <item>
                <title>ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ में 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत, 365 घायल: पेंटागन</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वाशिंगटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">04 अप्रैल (वेब वार्ता)। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने पहली बार ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में हुए सैन्य नुकसान के आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। ये आंकड़े रक्षा विभाग के ‘डिफेंस कैजुएल्टी एनालिसिस सिस्टम’ (डीसीएएस) में जोड़े गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे इस अभियान में हताहतों की पुष्टि अब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">पेंटागन के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">28 फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर शुरू हुए इस संयुक्त सैन्य अभियान में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि 365 सैनिक घायल हुए हैं। यह पहली बार है जब इस ऑपरेशन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वाशिंगटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">04 अप्रैल (वेब वार्ता)। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने पहली बार ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में हुए सैन्य नुकसान के आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। ये आंकड़े रक्षा विभाग के ‘डिफेंस कैजुएल्टी एनालिसिस सिस्टम’ (डीसीएएस) में जोड़े गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे इस अभियान में हताहतों की पुष्टि अब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">पेंटागन के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">28 फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर शुरू हुए इस संयुक्त सैन्य अभियान में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि 365 सैनिक घायल हुए हैं। यह पहली बार है जब इस ऑपरेशन से जुड़े हताहतों का आधिकारिक और सत्यापित विवरण सामने आया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">डीसीएएस में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घायल सैनिक विभिन्न सैन्य शाखाओं से हैं। इनमें सबसे अधिक 247 सैनिक अमेरिकी थलसेना (आर्मी) से हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि नौसेना (नेवी) के 63</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु सेना (एयर फोर्स) के 36 और मरीन कॉर्प्स के 19 जवान घायल हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी और यह अभियान ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच शुरू किया गया था। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस ऑपरेशन के उद्देश्यों और जमीनी स्थिति को लेकर अब तक सीमित जानकारी ही सार्वजनिक की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधिकारिक आंकड़ों के जारी होने से इस संघर्ष की वास्तविक गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब तक हताहतों के बारे में केवल अनुमान ही लगाए जा रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पेंटागन द्वारा पुष्टि के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">डीसीएएस का रखरखाव डिफेंस मैनपावर डाटा सेंटर करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यह ‘डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस’ के लिए मारे गए सैनिकों का सत्यापित डेटा प्रस्तुत करता है। यह उसके आधिकारिक भंडार के रूप में कार्य करता है। जिसमें उन अमेरिकी कर्मियों का नाम होता है जो सैन्य अभियानों में मारे गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घायल हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लापता हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या किसी अन्य प्रकार से चोटिल हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रणाली अलग-अलग सेवाओं से प्राप्त रिपोर्टों को एकत्रित करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सार्वजनिक रूप से जारी किए गए आंकड़े पुष्ट और तय मानकों के अनुरूप हों। यह डेटाबेस संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हताहत के प्रकार और वर्ष के आधार पर विस्तृत विवरण प्रदान करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें संदर्भ के लिए परिभाषाएं और व्याख्यात्मक टिप्पणियां भी उपलब्ध हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विश्व</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:03:51 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज के रास्ते नहीं मिल रहा तो अमेरिका से खरीदें तेल: ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाशिंगटन, 31 मार्च (वेब वार्ता)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एक प्रस्ताव रखा है। मंगलवार को ट्रुथ पोस्ट में उन्होंने जेट ईंधन की कमी से जूझ रहे देशों से कहा की कि अगर होर्मुज से तेल नहीं मिल पा रहा तो अमेरिका का रुख कर सकते हैं। दो अलग-अलग पोस्ट्स में उन्होंने फ्रांस और ब्रिटेन को जबरदस्त फटकार भी लगाई है।</p>
<p>ट्रंप ने तेल को लेकर कहा, “ब्रिटेन जैसे देश (जिसने ईरान को सत्ताच्युत करने की कार्रवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया था) और जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए जेट फ्यूल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146337/trump-will-buy-oil-from-america-if-he-cannot-get"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-03/iran.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन, 31 मार्च (वेब वार्ता)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एक प्रस्ताव रखा है। मंगलवार को ट्रुथ पोस्ट में उन्होंने जेट ईंधन की कमी से जूझ रहे देशों से कहा की कि अगर होर्मुज से तेल नहीं मिल पा रहा तो अमेरिका का रुख कर सकते हैं। दो अलग-अलग पोस्ट्स में उन्होंने फ्रांस और ब्रिटेन को जबरदस्त फटकार भी लगाई है।</p>
<p>ट्रंप ने तेल को लेकर कहा, “ब्रिटेन जैसे देश (जिसने ईरान को सत्ताच्युत करने की कार्रवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया था) और जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए जेट फ्यूल नहीं हासिल कर पा रहे हैं, उनको मैं दो नसीहत दूंगा।</p>
<p>इसके बाद ट्रंप ने वो दो नसीहतें देते हैं। उन्होंने आगे लिखा, “पहली, चाहूंगा कि उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है।”</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने दूसरी नसीहत हौसला और हिम्मत दिखाने की कही। लिखा कि मेरी दूसरी सलाह है कि देर से ही सही लेकिन थोड़ी हिम्मत दिखाएं, होर्मुज जाएं और अपना हक ले लें।</p>
<p>ट्रंप आगे लिखते हैं कि आपको खुद के लिए लड़ना सीखना होगा। दावा किया कि हमेशा अमेरिका उनका साथ देने के लिए मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे आप उसके साथ खड़े नहीं हैं।</p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2026-03/iran-usa-war.jpg" alt="Iran-USA-War" width="1280" height="720"></img></p>
<p>दुनिया को ललकारते और अपनी पीठ थपथपाते हुए ट्रंप ने अंत में लिखा, “ईरान कमजोर हो चुका है, वो तबाह कर दिया गया है। सबसे मुश्किल काम हमने कर दिया है। अब आप जाकर अपना तेल हासिल करने का हौसला दिखाना चाहिए।”</p>
<p>इसकी अगली पोस्ट में ट्रंप ने फ्रांस को फटकार लगाई है। नाराजगी जाहिर करते हुए उसे कोसा है। लिखा- फ्रांस ने इजरायल जा रहे उन विमानों को अपने इलाके के ऊपर से उड़ने नहीं दिया, जो सैन्य सामान से लदे हुए थे। “ईरान के कसाई” को खत्म करने के मामले में फ्रांस बिल्कुल भी मददगार साबित नहीं हुआ, जिसे आखिरकार हमने मार गिराया और इस रवैए को अमेरिका याद रखेगा!!!</p>
<p>ट्रंप ने उन यूरोपीय सहयोगियों के प्रति अपनी नाराजगी लगातार जाहिर की है, जिन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है—खास तौर पर तब, जब उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए फिर से खोलने के बेहद खतरनाक प्रयासों में शामिल होने को लेकर अपनी आशंकाएं व्यक्त की थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 20:44:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-अमेरिका 4 से 5 दिन में द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देकर संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर कर सकते हैं:गोयल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 05 फरवरी (वेब वार्ता)। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर संयुक्त बयान को चार से पांच दिन में अंतिम रूप देने और उस पर हस्ताक्षर करने की संभावना है।</p>
<p>संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिका, भारत पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करने का कार्यकारी आदेश जारी करेगा। भारतीय वस्तुओं पर वर्तमान में 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क और रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगता है।</p>
<p>गोयल ने पत्रकारों को बताया कि समझौते के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145428/india-america-can-finalize-bilateral-trade-agreement-in-4-to-5"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-04/india-usa.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 05 फरवरी (वेब वार्ता)। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर संयुक्त बयान को चार से पांच दिन में अंतिम रूप देने और उस पर हस्ताक्षर करने की संभावना है।</p>
<p>संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिका, भारत पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करने का कार्यकारी आदेश जारी करेगा। भारतीय वस्तुओं पर वर्तमान में 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क और रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगता है।</p>
<p>गोयल ने पत्रकारों को बताया कि समझौते के पहले चरण के लिए कानूनी समझौते पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान के बाद एक विस्तृत कानूनी समझौता किया जाएगा।</p>
<p>गोयल ने साथ ही बताया कि इस समझौते में किसी भी प्रकार के निवेश की प्रतिबद्धता नहीं है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि एक बार बयान पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, यह एक कानूनी समझौते में तब्दील हो जाएगा और मार्च के मध्य तक, ‘‘हमें उस कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।’’</p>
<p>कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क में कटौती करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:15:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप ने ईरान से व्यापार पर 25 फीसदी टैरिफ थोपा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वाशिंगटन/नई दिल्ली</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, 13 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जनवरी (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात ईरान में महंगाई और सत्ता के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के सशस्त्र दमन के मद्देनजर कार्रवाई करते हुए ईरान से किसी भी तरह का व्यापार करने पर रोक लगाने का फरमान जारी कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान से व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ अपने हर व्यापार पर </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">25</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी टैरिफ देगा। उन्होंने कहा कि यह आदेश अंतिम है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। ट्रंप के इस कदम को ईरान</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145103/trump-imposed-25-percent-tariff-on-trade-with-iran"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/usa-flag.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वाशिंगटन/नई दिल्ली</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, 13 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जनवरी (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात ईरान में महंगाई और सत्ता के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के सशस्त्र दमन के मद्देनजर कार्रवाई करते हुए ईरान से किसी भी तरह का व्यापार करने पर रोक लगाने का फरमान जारी कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान से व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ अपने हर व्यापार पर </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">25</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी टैरिफ देगा। उन्होंने कहा कि यह आदेश अंतिम है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। ट्रंप के इस कदम को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश के तहत देखा जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान में दो हफ्ते से ज्यादा समय से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप बार-बार प्रदर्शनों में दखल देने की धमकी ईरान सरकार को दे रहे हैं। ट्रंप का यह कदम सीधे तौर पर ईरान की सरकार पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। भारत</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चीन</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रूस</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई देश ईरान के बड़े व्यापारिक भागीदार हैं। ऐसे में इन देशों को अब अमेरिका और ईरान के बीच किसी एक को चुनने की मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत पर अमेरिका ने पहले ही </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">50</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी टैरिफ लगा हुआ है। नया टैरिफ भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि इस नीति को कैसे लागू किया जाएगा। ऐसे में इस आदेश ने दुनिया के बड़े हिस्से में हलचल पैदा कर दी है। ईरान के साथ </span><span lang="en-gb" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="en-gb">₹</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">1.52</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख करोड़ का व्यापार भारत-ईरान के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध हैं। बीते कुछ समय में ईरान के कच्चे तेल पर प्रतिबंध बाद दोनों देशों के बीच व्यापार का स्वरूप बदला है। <br /></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत-ईरान के बीच व्यापार का दायरा अब गैर तेल उत्पादों में बढ़ा है। वित्त वर्ष </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2024-25</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में भारत और ईरान के बीच कुल व्यापार लगभग </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">1.68</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> बिलियन डॉलर रहा था। भारत का सबसे बड़ा बासमती चावल खरीदार ईरान भारत का सबसे बड़ा बासमती चावल खरीदार है। भारत ने वित्त वर्ष </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2025-26</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अप्रैल-नवंबर के दौरान ईरान को </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">468.10</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अमेरिकी डॉलर का बासमती चावल निर्यात किया जिसकी कुल मात्रा </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">5.99</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख टन थी। भारत से ईरान जाने वाले उत्पाद भारत से ईरान को मुख्य रूप से कृषि और उपभोक्ता उत्पाद भेजे जाते हैं। इसमें बासमती चावल एक अहम उत्पाद है। इसके अलावा चाय और चीनी की भी ईरान में अच्छी खासी मांग है। भारतीय दवाइयों की भी वहां मार्केट में मजबूत हिस्सेदारी है। फल और अन्य खाद्य उत्पाद भी भारत के प्रमुख निर्यात उत्पाद हैं। ईरान से भारत आने वाले उत्पाद ईरान से भारत मुख्य रूप से खजूर और सूखे मेवे आयात करता है इसमें पिस्ता और बादाम शामिल हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अलावा कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पाद भी भारत आते हैं। पहले ईरान भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते तेल आयात लगभग बंद हो गया। दोनों देशों का व्यापार वर्ष निर्यात आयात द्विपक्षीय व्यापार </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2018-19 3.51 13.53 17.03 2019-20 3.38 1.39 4.77 2020-21 1.77 0.33 2.10 2021-22 1.45 0.46 1.91 2022-23 1.66 0.67 2.33 2023-24 1.22 0.62 1.85 2024-25 1.24 0.44 1.68 (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर में) इन देशों पर सबसे ज्यादा </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">असर चीन:ईरान का सबसे बड़ा तेल और व्यापारिक साझेदार। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूरोपीय यूनियन: जर्मनी और इटली जैसे यूरोपीय देश ईरान से करते हैं व्यापार </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">तुर्किये: ईरान से तेल और गैस आयात करता है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त अरब अमीरात: ईरान का दूसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रूस: सैन्य</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं। इराक</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अफगानिस्तान</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान जैसे देश भी ईरान से व्यापार करते हैं। चाबहार को लेकर दुविधा बढ़ेगी भारत-ईरान संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू चाबहार बंदरगाह का संयुक्त विकास है। ऊर्जा से भरपूर ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित इस बंदरगाह का विकास भारत और ईरान द्वारा संपर्क एवं व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। पहले अमेरिका इस पर सख्त था</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हाल ही में भारत को चाबहार बंदरगाह पर परिचालन जारी रखने के लिए छह महीने छूट दी गई थी। यह प्रतिबंध छूट </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">29</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अक्तूबर से प्रभावी है। इस छूट को भारत के लिए एक कूटनीतिक जीत के रूप में देखा गया लेकिन अब डोनाल्ड ट्रंप के </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">25%</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> टैरिफ के ऐलान ने भारत को इस दिशा में बड़ा झटका दिया है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/145103/trump-imposed-25-percent-tariff-on-trade-with-iran</link>
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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 20:18:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का सख्त फरमान; ग्रीन कार्ड का आवेदन कर रहे कपल की हो रही बारीकी से जांच</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वॉशिंगटन, 03 जनवरी (वेब वार्ता)। अमेरिका में परमानेंट रेजीडेंसी यानी ग्रीन कार्ड को नागरिकता की दिशा में बड़ा कदम समझा जाता है। यह अप्रवासियों को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। हालांकि, ग्रीन कार्ड होल्डर को अमेरिकी नागरिक के सभी अधिकार नहीं मिलते, लेकिन यह उन्हें कई जरूरी फायदे दिलाता है। इसकारण इस परमिट की भारी डिमांड रहती है। अभी तक ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए किसी अमेरिकी नागरिक से शादी करने को सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने जा रहा है। इमिग्रेशन जानकारों का कहना है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144996/trumps-strict-order-the-couple-applying-for-green-card-is"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/usa-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन, 03 जनवरी (वेब वार्ता)। अमेरिका में परमानेंट रेजीडेंसी यानी ग्रीन कार्ड को नागरिकता की दिशा में बड़ा कदम समझा जाता है। यह अप्रवासियों को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। हालांकि, ग्रीन कार्ड होल्डर को अमेरिकी नागरिक के सभी अधिकार नहीं मिलते, लेकिन यह उन्हें कई जरूरी फायदे दिलाता है। इसकारण इस परमिट की भारी डिमांड रहती है। अभी तक ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए किसी अमेरिकी नागरिक से शादी करने को सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने जा रहा है। इमिग्रेशन जानकारों का कहना है कि सिर्फ अमेरिकी नागरिक से शादी अब परमानेंट रेजिडेंसी की गारंटी नहीं बचा है।</p>
<p>अमेरिकी कानून के अनुसार, किसी अमेरिकी नागरिक के पति या पत्नी को निकट संबंधी माना जाता है। इससे वे अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के जरिए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि योग्यता का मतलब मंजूरी नहीं है। एक रिपोर्ट में इमिग्रेशन वकील ब्रैड बर्नस्टीन के हवाले से कहा गया कि सिर्फ शादी करने से ग्रीन कार्ड नहीं मिल जाता।</p>
<p>बर्नस्टीन ने कहा कि अब शादी पर आधारिक ग्रीन कार्ड आवेदनों को बहुत ज्यादा बारीकी से जांचा जा रहा है। खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान इसमें तेजी आई है। अधिकारी शादी की कानूनी स्थिति पर कम और इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं कि क्या यह असल में सच्ची शादी है। ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन को लेकर सख्त नीति अपना रखी है, जिसमें डायवर्सिटी वीजा लॉटरी को सस्पेंड करना भी शामिल है। इससे हर साल करीब 50000 आप्रवासियों को वीजा दिया जाता था।</p>
<p>बर्नस्टीन ने बताया कि शादी के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए अब साथ रहना एक निर्णायक फैक्टर बन गया है। उन्होंने कहा, सिर्फ रिलेशनशिप में होने से आपको ग्रीन कार्ड नहीं मिलता। साथ रहने से मिलता है। इसके साथ ही चेतावनी दी कि जो कपल शादी कर चुके हैं लेकिन अलग रहते हैं, उनके आवेदन खारिज होने का खतरा सबसे ज्यादा है।</p>
<p>बर्नस्टीन के अनुसार, अगर पति-पत्नी एक ही घर में नहीं रहते हैं, तब उनका ग्रीन कार्ड केस पहले ही खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारी अलग रहने के लिए काम, पढ़ाई, पैसे या सुविधा जैसी वजहों को नहीं सुनते हैं। अलग रहने वाले जोड़ों की ज्यादा जांच होती है। इसमें शादी में धोखाधड़ी की संभावना, मुश्किल इंटरव्यू और कई बार आवेदन को सीधे खारिज कर दिया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 19:39:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने न्यूयॉर्क के मेयर पद के लिए हुए चुनाव में ममदानी की जीत पर खुशी जताई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क, छह नवंबर (भाषा) भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों ने न्यूयॉर्क शहर के मेयर पद के चुनाव में जोहरान ममदानी की ऐतिहासिक जीत का स्वागत करते हुए इसे एक नयी उपलब्धि और इस बात का संकेत बताया कि प्रवासी समुदाय अब अमेरिका में नयी पहचान बना रहा है।</p>
<p>न्यूयॉर्क में स्थित शैक्षिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘द कल्चर ट्री’ की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनु सहगल ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “पिछली रात एक नए युग की शुरुआत जैसी थी। जोहरान ममदानी की ऐतिहासिक जीत के साथ न्यूयॉर्क को भारतीय मूल का पहला मेयर मिलने के बाद हम इस शहर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143894/indian-american-community-expressed-happiness-over-mamdanis-victory-in-the-election"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-04/india-usa.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क, छह नवंबर (भाषा) भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों ने न्यूयॉर्क शहर के मेयर पद के चुनाव में जोहरान ममदानी की ऐतिहासिक जीत का स्वागत करते हुए इसे एक नयी उपलब्धि और इस बात का संकेत बताया कि प्रवासी समुदाय अब अमेरिका में नयी पहचान बना रहा है।</p>
<p>न्यूयॉर्क में स्थित शैक्षिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘द कल्चर ट्री’ की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनु सहगल ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “पिछली रात एक नए युग की शुरुआत जैसी थी। जोहरान ममदानी की ऐतिहासिक जीत के साथ न्यूयॉर्क को भारतीय मूल का पहला मेयर मिलने के बाद हम इस शहर की पहचान, अपनापन और सत्ता को देखने के नजरिए में बदलाव देख रहे हैं।”</p>
<p>सहगल ने कहा कि ममदानी के विजय भाषण में प्रवासियों के प्रति दृढ़ विश्वास झलक रहा था — यह विश्वास कि न्यूयॉर्क उन लोगों से बना है जो यहां आते हैं, मेहनत करते हैं और आगे बढ़ते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, “उनके भाषण में हमारी संस्कृति के कई पहलू झलक रहे थे। नेहरू का जिक्र और धूम फिल्म के गीत के साथ समारोह का समापन, यह सब हमारे समुदाय के लिए खास मायने रखता है।”</p>
<p>सहगल ने कहा कि आगे चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन यह निर्विवाद है कि “दक्षिण एशियाई और प्रवासी समुदाय की कहानियां अब हकीकत में बदल रही हैं।”</p>
<p>दक्षिण एशियाई समुदाय के नेता और नासाउ काउंटी के पूर्व उप नियंत्रक दिलीप चौहान ने ममदानी को बधाई दी और कहा कि उन्हें यह देखकर प्रसन्नता हुई कि एक दक्षिण एशियाई-अमेरिकी सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पित होकर शहर के विकास के लिए कार्य करने का वादा कर रहा है।</p>
<p>ममदानी के समर्थक चौहान ने कहा कि उनकी जीत उनके नेतृत्व में लोगों के विश्वास को दर्शाती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “उन्होंने एक उज्जवल भविष्य की आशा जगाई है और हर प्रवासी के लिए प्रेरणा हैं। उन्हें हमारे समुदायों की सेवा और प्रगति के लिए काम करते रहने के लिए शुभकामनाएं।”</p>
<p>‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड’ नामक सामुदायिक संगठन ने कहा कि मंगलवार के चुनाव परिणामों ने यह साबित किया है कि “चाहे वह सिटी काउंसिल हो, मेयर का पद या कोई राज्य स्तरीय पद — दक्षिण एशियाई-अमेरिकी अब इस देश के राजनीतिक भविष्य का हिस्सा हैं।”</p>
<p>संस्था ने बताया कि अमेरिका में उसका समर्थन प्राप्त 19 उम्मीदवार विजयी हुए हैं, जिनमें वर्जीनिया की पहली दक्षिण एशियाई मूल की महिला लेफ्टिनेंट गवर्नर गजाला हाशमी और न्यूयॉर्क के पहले दक्षिण एशियाई मेयर जोहरान ममदानी शामिल हैं।</p>
<p>इनके अलावा सिनसिनाटी के मेयर आफताब पुरेवाल ने एक बार फिर इस पद के लिए चुनाव जीता है और पेंसिल्वेनिया के बक्स काउंटी में जो खान जिला अटॉर्नी का चुनाव जीते हैं।</p>
<p>‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड’ के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने सभी विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए कहा कि जिन्होंने चुनाव लड़ा, वे भी सराहना के पात्र हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 06 Nov 2025 15:11:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका के केंटुकी में हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से सात लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लुइसविले, पांच नवंबर (एपी) अमेरिका में केंटुकी के लुइसविले में हवाई अड्डे से उड़ान भरते समय एक विशाल मालवाहक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से सात लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए।</p>
<p>केंटुकी के गवर्नर एंडी बेशियर ने कहा का मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>संघीय विमानन प्रशासन ने कहा कि दुर्घटना मंगलवार को स्थानीय समयानुसार शाम 5:15 हुई जब विमान लुइसविले के मुहम्मद अली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से होनोलुलू के लिए रवाना हो रहा था।</p>
<p>घटना से जुड़े बताए जा रहे एक वीडियो में विमान के बाईं ओर आग की लपटें और घना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143880/seven-people-killed-after-plane-crashes-at-airport-in-kentucky"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/sad-death-tragic-news-candle-condolence-tribute.jpg" alt=""></a><br /><p>लुइसविले, पांच नवंबर (एपी) अमेरिका में केंटुकी के लुइसविले में हवाई अड्डे से उड़ान भरते समय एक विशाल मालवाहक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से सात लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए।</p>
<p>केंटुकी के गवर्नर एंडी बेशियर ने कहा का मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>संघीय विमानन प्रशासन ने कहा कि दुर्घटना मंगलवार को स्थानीय समयानुसार शाम 5:15 हुई जब विमान लुइसविले के मुहम्मद अली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से होनोलुलू के लिए रवाना हो रहा था।</p>
<p>घटना से जुड़े बताए जा रहे एक वीडियो में विमान के बाईं ओर आग की लपटें और घना धुआं दिखाई दे रहा है। इस दौरान विमान जमीन से थोड़ा ऊपर उठता है और फिर दुर्घटनाग्रस्त होकर गिर जाता है।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार रात तक मृतकों की संख्या कम से कम सात हो गई। उन्होंने कहा कि मृतकों में से चार लोग विमान में सवार नहीं थे।</p>
<p>केंटुकी के गवर्नर एंडी बेशियर ने कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 11 लोग घायल भी हुए हैं, जिनमें से कुछ को ‘‘काफी गंभीर’’ चोट आई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 14:08:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लॉबिंग के लिए भारत की ओर से रखी गई फर्म के प्रमुख ने ट्रंप से मुलाकात की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाशिंगटन, सात सितंबर (भाषा) व्यापार और टैरिफ (शुल्क) पर वाशिंगटन की नीति को लेकर भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में आए तनाव की पृष्ठभूमि में, राजनीतिक लॉबिस्ट जेसन मिलर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के कुछ अधिकारियों से मुलाकात की है।</p>
<p>मिलर एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी के प्रमुख हैं। भारतीय दूतावास ने अप्रैल में एक साल के लिए इसकी सेवा ली है और इसके लिए कथित तौर पर 18 लाख अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया जाना तय हुआ था।</p>
<p>मिलर ने ट्रंप और अन्य अधिकारियों के साथ अपनी मुलाकात का उद्देश्य तो नहीं बताया, लेकिन सोशल मीडिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142941/68bd8a3d3c08a"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-04/india-usa.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन, सात सितंबर (भाषा) व्यापार और टैरिफ (शुल्क) पर वाशिंगटन की नीति को लेकर भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में आए तनाव की पृष्ठभूमि में, राजनीतिक लॉबिस्ट जेसन मिलर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के कुछ अधिकारियों से मुलाकात की है।</p>
<p>मिलर एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी के प्रमुख हैं। भारतीय दूतावास ने अप्रैल में एक साल के लिए इसकी सेवा ली है और इसके लिए कथित तौर पर 18 लाख अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया जाना तय हुआ था।</p>
<p>मिलर ने ट्रंप और अन्य अधिकारियों के साथ अपनी मुलाकात का उद्देश्य तो नहीं बताया, लेकिन सोशल मीडिया पर ट्रंप के साथ वाली एक तस्वीर सहित कई तस्वीरें पोस्ट कीं।</p>
<p>उन्होंने पोस्ट किया, ‘‘वाशिंगटन में बहुत ही शानदार सप्ताह रहा, जहां बहुत सारे दोस्त शहर में थे, और सबसे बढ़िया बात यह रही कि हमें यहां रुकने और अपने राष्ट्रपति को काम करते हुए देखने का अवसर मिला!’’</p>
<p>ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को दोगुना करके कुल 50 प्रतिशत कर दिए जाने के बाद, नयी दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंधों में खटास आ गई है। भारत ने अमेरिकी कार्रवाई को ‘‘अनुचित, और अविवेकपूर्ण’’ बताया है।</p>
<p>हालांकि, संबंधों में आए तनाव दूर करने के प्रयासों के संकेत उस वक्त मिले जब राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को भारत-अमेरिका संबंधों को ‘‘विशेष’’ बताया और कहा कि वह हमेशा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘मित्र’’ रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sun, 07 Sep 2025 19:08:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप के अहंकार को भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को नष्ट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती: अमेरिकी सांसद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क, दो सितंबर (भाषा) अमेरिका के एक सांसद और दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उठाये कदम भारत के साथ साझेदारी को नष्ट कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने आगाह किया कि अमेरिका के शीर्ष नेता के ‘‘अहंकार’’ को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ रणनीतिक संबंध को नष्ट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।</p>
<p>भारतीय मूल के अमेरिकी कांग्रेसी रो खन्ना ने कहा कि वह अमेरिका और भारत की साझेदारी को ‘नष्ट’ करने के लिए ट्रंप द्वारा किए जा रहे कार्यों से हक्के-बक्के हैं।</p>
<p>रो खन्ना ‘यूएस-इंडिया कॉकस’ के सह-अध्यक्ष भी हैं।</p>
<p>खन्ना ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142860/trumps-ego-cannot-be-allowed-to-destroy-strategic-relations-with"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/usa-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क, दो सितंबर (भाषा) अमेरिका के एक सांसद और दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उठाये कदम भारत के साथ साझेदारी को नष्ट कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने आगाह किया कि अमेरिका के शीर्ष नेता के ‘‘अहंकार’’ को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ रणनीतिक संबंध को नष्ट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।</p>
<p>भारतीय मूल के अमेरिकी कांग्रेसी रो खन्ना ने कहा कि वह अमेरिका और भारत की साझेदारी को ‘नष्ट’ करने के लिए ट्रंप द्वारा किए जा रहे कार्यों से हक्के-बक्के हैं।</p>
<p>रो खन्ना ‘यूएस-इंडिया कॉकस’ के सह-अध्यक्ष भी हैं।</p>
<p>खन्ना ने ट्रंप पर अमेरिका-भारत गठबंधन को मजबूत करने के लिए 30 वर्षों के कार्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया, जिसमें रूस से तेल की खरीद पर 25 फीसदी सहित भारतीय वस्तुओं पर 50 फीसदी ‘टैरिफ’ लगाना शामिल है।</p>
<p>खन्ना ने कहा कि ट्रंप की नीतियां ‘‘भारत को चीन और रूस के नजदीक ले जा रही हैं’’, जो अमेरिका के लिए एक रणनीतिक झटका है।</p>
<p>खन्ना ने कहा कि भारत पर लगाए गए ‘टैरिफ’ ब्राजील को छोड़कर किसी भी अन्य देश की तुलना में ज्यादा हैं यहां तक की रूसी ऊर्जा के सबसे बड़ा खरीदार चीन पर लगाए गए ‘टैरिफ’ से भी अधिक।</p>
<p>उन्होंने कहा, “इससे अमेरिका में भारत का चमड़ा व कपड़ा निर्यात प्रभावित हो रहा है और यह अमेरिकी निर्माताओं व भारत में हमारे निर्यात को भी नुकसान पहुंचा रहा है। यह भारत को चीन और रूस के करीब ले जा रहा है।”</p>
<p>खन्ना ने इस मुद्दे की मूल वजह बताते हुए कहा कि कारण ‘‘बहुत छोटा’’ है। खन्ना ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने से इनकार कर दिया जबकि पाकिस्तान ने ऐसा किया, जिससे दोनों देशों (भारत-अमेरिका) के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 03 Sep 2025 15:18:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने के लिए ट्रंप ने भारत पर पाबंदियां लगाईं : व्हाइट हाउस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क, 20 अगस्त (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए भारत पर पाबंदियां लगाई हैं।</p>
<p>ट्रंप ने अमेरिका आने वाली भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगा रखा है। रूसी तेल की खरीद को लेकर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त से प्रभावी होगा। इससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो जाएगा।</p>
<p>प्रेस वार्ता में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए लेविट ने कहा कि ट्रंप ने करीब चार साल से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142617/trump-imposed-restrictions-on-india-to-stop-russia-ukraine-war"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/usa-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क, 20 अगस्त (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए भारत पर पाबंदियां लगाई हैं।</p>
<p>ट्रंप ने अमेरिका आने वाली भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगा रखा है। रूसी तेल की खरीद को लेकर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त से प्रभावी होगा। इससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो जाएगा।</p>
<p>प्रेस वार्ता में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए लेविट ने कहा कि ट्रंप ने करीब चार साल से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए ''जबर्दस्त सार्वजनिक दबाव'' डाला है। उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि आपने देखा है उन्होंने भारत पर पाबंदियों सहित कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस युद्ध को समाप्त होते देखना चाहते हैं।'' लेविट ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति जल्द से जल्द इस युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं।''</p>
<p>रूस ने फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इससे पहले 'सीएनबीसी' के साथ साक्षात्कार में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत पर रूस से तेल खरीद उसे अन्य स्थान पर फिर से बेचकर ''मुनाफाखोरी'' करने का आरोप लगाया था।</p>
<p>भारत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क को ''अनुचित'' बताया है। उसने कहा है कि किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह, वह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 20 Aug 2025 21:28:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शुल्क का मुद्दा हल होने तक भारत के साथ व्यापार वार्ता की संभावना नहीं : ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, आठ अगस्त (भाषा) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ शुल्क का मुद्दा हल होने तक उसके साथ व्यापार वार्ता की संभावना से इनकार किया है।</p>
<p>ट्रंप से बृहस्पतिवार को ओवल कार्यालय में पूछा गया था कि क्या उन्हें भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा करने के बाद व्यापार वार्ता आगे बढ़ने की उम्मीद है, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘ तब तक नहीं जबतक यह मुद्दा हल नहीं हो जाता।’’</p>
<p>पिछले सप्ताह, ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जो सात अगस्त से लागू हो गया।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142412/trump-is-not-likely-to-talk-with-india-until-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-11/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, आठ अगस्त (भाषा) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ शुल्क का मुद्दा हल होने तक उसके साथ व्यापार वार्ता की संभावना से इनकार किया है।</p>
<p>ट्रंप से बृहस्पतिवार को ओवल कार्यालय में पूछा गया था कि क्या उन्हें भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा करने के बाद व्यापार वार्ता आगे बढ़ने की उम्मीद है, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘ तब तक नहीं जबतक यह मुद्दा हल नहीं हो जाता।’’</p>
<p>पिछले सप्ताह, ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जो सात अगस्त से लागू हो गया।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक कार्यकारी आदेश पर भी हस्ताक्षर किए, जिसके तहत रूस से तेल की खरीद के लिए भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया गया। इसके साथ ही कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया, जो अमेरिका द्वारा किसी भी देश पर लगाए गए सबसे अधिक शुल्कों में से एक है।</p>
<p>अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क 21 दिनों बाद यानी 27 अगस्त से लागू होगा।</p>
<p>शुल्क पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नयी दिल्ली को निशाना बनाना ‘‘अनुचित और अविवेकपूर्ण’’ है।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा, ‘‘किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।’’</p>
<p>भारत और अमेरिका के मौजूदा हालात पर बात करते हुए प्रमुख भारतीय-अमेरिकी अटॉर्नी रवि बत्रा ने कहा कि ट्रंप के शुल्क के बीच ‘‘काफी कुछ दांव पर लगा है।’’</p>
<p>उन्होंने इसे ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप की इच्छा के अनुसार यूक्रेन के साथ युद्धविराम स्वीकार नहीं किया।</p>
<p>बत्रा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारत को नुकसान पहुंचाना रूस को नुकसान पहुंचाने के बराबर है। लेकिन इससे हमें भी बहुत अधिक नुकसान होता है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि रूसी राष्ट्रपति यूक्रेन के साथ ‘‘वास्तविक’’ युद्धविराम करें, ‘‘जिसमें किसी भी तरह की चालबाजी न हो, और फिर पुतिन के साथ चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अमेरिकी सहयोगी बनें।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘अब एक परिपक्व पुन: नियोजन का समय है, वरना हम एक ऐसे ‘डोमिनो प्रभाव’ के जोखिम में हैं जो सभी को नुकसान पहुंचा सकता है।’’</p>
<p>‘डोमिनो इफेक्ट’ किसी एक घटना के बाद उसके प्रभाव से लगातार होने वाली घटनाओं को कहा जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 12:34:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अगले 24 घंटे में भारत पर शुल्क में भारी बढ़ोतरी करेंगे: राष्ट्रपति ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क, पांच अगस्त (भाषा) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा है और वह अगले 24 घंटों में इस दक्षिण एशियाई देश पर शुल्क को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे।</p>
<p>ट्रंप ने 'सीएनबीसी स्क्वॉक बॉक्स' को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘भारत के बारे में लोग जो कहना पसंद नहीं करते, वह यह है कि वह सबसे ज्यादा शुल्क लगाने वाला देश है। उसका शुल्क किसी भी देश से ज्यादा है। हम भारत के साथ बहुत कम व्यापार करते हैं क्योंकि उसके शुल्क बहुत ज्यादा हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142371/president-trump-will-increase-the-duty-on-india-in-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-11/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क, पांच अगस्त (भाषा) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा है और वह अगले 24 घंटों में इस दक्षिण एशियाई देश पर शुल्क को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे।</p>
<p>ट्रंप ने 'सीएनबीसी स्क्वॉक बॉक्स' को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘भारत के बारे में लोग जो कहना पसंद नहीं करते, वह यह है कि वह सबसे ज्यादा शुल्क लगाने वाला देश है। उसका शुल्क किसी भी देश से ज्यादा है। हम भारत के साथ बहुत कम व्यापार करते हैं क्योंकि उसके शुल्क बहुत ज्यादा हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा है। वह हमारे साथ काफी व्यापार करता है, लेकिन हम उसके साथ व्यापार नहीं करते। इसलिए हमने 25 प्रतिशत शुल्क पर समझौता किया, लेकिन मुझे लगता है कि मैं अगले 24 घंटों में इसे काफी बढ़ा दूंगा, क्योंकि वे रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं। वे जंगी मशीन को ईंधन मुहैया करा रहे हैं। और अगर वे ऐसा करने जा रहे हैं, तो मुझे खुशी नहीं होगी।’’</p>
<p>भारत के साथ व्यापार समझौते के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ ‘अड़चन’ यह है कि उसके शुल्क बहुत ज्यादा हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘अब मैं यह कहूंगा कि भारत अबतक के सबसे ऊंचे शुल्क से आगे बढ़कर, हम पर शून्य शुल्क लगाएगा... लेकिन वे जो तेल के साथ कर रहे हैं, उसको देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है।’’</p>
<p>ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही भारत से आयातित उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इसके अलावा उन्होंने रूस से तेल एवं गैस खरीदने की वजह से भारत पर अलग से जुर्माना लगाने की बात भी कही थी।</p>
<p>इससे पहले, सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वह भारत पर अमेरिकी शुल्क में खासी बढ़ोतरी करेंगे। उन्होंने भारत पर भारी मात्रा में रूसी तेल खरीदने और उसे बड़े मुनाफे पर बेचने का आरोप लगाया था।</p>
<p>ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों बाद, भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद के लिए उसे ‘अनुचित और अविवेकपूर्ण’ तरीके से निशाना बनाने को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ पर पलटवार किया।</p>
<p>भारत ने आलोचना को पुरजोर तरीके खारिज करते हुए अमेरिका और यूरोपीय संघ के रूस के साथ जारी व्यापारिक संबंधों की ओर ध्यान दिलाते हुए दोहरे मानदंड अपनाने की बात कही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 20:05:34 +0530</pubDate>
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