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                <title>Nirmala Sitharaman - Loktej</title>
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                <description>Nirmala Sitharaman RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिकी शुल्क में बदलाव के प्रभाव पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी : सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 23 फरवरी (वेब वार्ता)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी शुल्क में किए गए बदलावों के प्रभाव पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी और वाणिज्य मंत्रालय इस स्थिति की समीक्षा कर रहा है।</p>
<p>अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा व्यापार साझेदार देशों पर लगाए गए व्यापक आयात शुल्क के खिलाफ शुक्रवार को फैसला दिया था।</p>
<p>इसके बाद ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए भारत सहित सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। बाद में शनिवार को इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था।</p>
<p>भारतीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145731/it-is-too-early-to-comment-on-the-impact-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 23 फरवरी (वेब वार्ता)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी शुल्क में किए गए बदलावों के प्रभाव पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी और वाणिज्य मंत्रालय इस स्थिति की समीक्षा कर रहा है।</p>
<p>अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा व्यापार साझेदार देशों पर लगाए गए व्यापक आयात शुल्क के खिलाफ शुक्रवार को फैसला दिया था।</p>
<p>इसके बाद ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए भारत सहित सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। बाद में शनिवार को इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था।</p>
<p>भारतीय अर्थव्यवस्था पर शुल्क में इन बदलावों के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर सीतारमण ने कहा कि इस पर टिप्पणी करना अभी ‘‘ जल्दबाजी ’’ होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ समग्र भारतीय अर्थव्यवस्था से परे विशेष रूप से व्यापार के मुद्दे पर, वाणिज्य मंत्रालय स्थिति की समीक्षा कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल को यह तय करना होगा कि आगे की वार्ताओं के लिए वे कब जाएंगे। इसलिए मेरे लिए अभी टिप्पणी करना थोड़ी जल्दबाजी होगी।’’</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार से वॉशिंगटन में होने वाली मुख्य वार्ताकारों की प्रस्तावित बैठक को पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया है।</p>
<p>वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव दर्पण जैन इस समझौते के लिए भारत के मुख्य वार्ताकार हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय निदेशक मंडल को यहां संबोधित करने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में सीतारमण ने कहा कि भारत व्यापार समझौतों के प्रति स्पष्ट रुख रखता है और वह ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, ओमान, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ समझौते कर चुका है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ इसलिए देशों के साथ व्यापार समझौते करने का हमारा प्रयास जारी रहेगा।’’मंत्री ने साथ ही कहा कि भारत चाहता है कि उसकी अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर व्यापार करने और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने का लाभ मिले।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 21:13:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोने की कीमतों में तेजी विश्व भर के केंद्रीय बैंकों की खरीद के चलते: सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 23 फरवरी (वेब वार्ता)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सोने की कीमतों में इस समय चल रही तेजी मुख्य रूप से दुनिया के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने-चांदी की खरीद बढ़ाये जाने के कारण है।</p>
<p>श्रीमती सीतारमण ने कहा कि देश में सोने के निवेश और उपभोग मांग को देख कर ऐसा नहीं लगता कि स्थिति चिंता के स्तर पर है फिर भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बाजार पर निगाह बनी हुई है।</p>
<p>श्रीमती सीतारमण आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की बजट पश्चात बैठक में भाग लेने के बाद संवाददाताओं को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145730/gold-prices-rise-due-to-purchases-by-central-banks-around"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d26032024-11-nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 23 फरवरी (वेब वार्ता)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सोने की कीमतों में इस समय चल रही तेजी मुख्य रूप से दुनिया के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने-चांदी की खरीद बढ़ाये जाने के कारण है।</p>
<p>श्रीमती सीतारमण ने कहा कि देश में सोने के निवेश और उपभोग मांग को देख कर ऐसा नहीं लगता कि स्थिति चिंता के स्तर पर है फिर भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बाजार पर निगाह बनी हुई है।</p>
<p>श्रीमती सीतारमण आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की बजट पश्चात बैठक में भाग लेने के बाद संवाददाताओं को संबोधित कर रही थी।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा, आजकल अधिकांश देश, विशेष रूप से उनके केंद्रीय बैंक, सोना और चांदी खरीदकर भंडारित कर रहे हैं। जब आप भारतीय उपभोक्ता बाजार की बात करते हैं, तो यह एक प्रवृत्ति के रूप में दिखता है।</p>
<p>हर केंद्रीय बैंक के पास कुछ न कुछ भंडार होता है, लेकिन हाल के दिनों में आपने देखा होगा कि कई अन्य देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं।  उन्होंने कहा,   कीमतों में जो उछाल आया है, वह मुख्य रूप से केंद्रीय बैंकों द्वारा सोना खरीदने और उसे संग्रहित करने के कारण है। </p>
<p>श्रीमती सीतारमण ने घरेलू उपभोग के बारे में कहा कि यह हर मौसम और हर त्योहार के साथ जुड़ी एक सामान्य स्थिति रहती है। लेकिन सोनेऔर चांदी की वैश्विक कीमतों में जो असामान्य और सामान्य उतार-चढ़ाव से कहीं अधिक वृद्धि हुई है, उसका प्रभाव हर घरेलू खरीद पर पड़ रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा , कीमती धातुओं के मामले में हमारी निर्भरता लगभग पूरी तरह बाहरी स्रोतों पर है। हमारे पास सोने की खोज और उसके खनन का पर्याप्त घरेलू स्रोत नहीं है। इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन वे हमारी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। </p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में सोना हमेशा से परिवारों के लिए एक पसंदीदा निवेश रहा है। घरेलू उपभोग की उच्च मांग में त्योहारों के मौसम के दौरान मौसमी उछाल भी देखने को मिलता है।</p>
<p>उन्होंने कहा,   हम इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह किसी चिंताजनक स्तर तक पहुंचा है। मेरा मानना है कि यह एक निश्चित सीमा से आगे नहीं गया है। हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक भी इस पर निगरानी रखे हुए है। </p>
<p>रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस वर्ष अप्रैल- दिसंबर 2025 तक के स्वर्ण आयात के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें एक साल पहले की तुलना में मूल्य के हिसाब से कोई बड़ा फर्क नहीं दिखता।</p>
<p>ताजा आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में सोने का आयात 1.83 प्रतिशत 49.39 अरब डॉलर के बराबर रहा जो इससे पिछले साल इसी अवधि में 48.51अरब डालर के बराबर था। इस दौरान सोने के आयात की मात्रा 18.29 प्रतिशत घटकर 5,22,380 किलोग्राम रह गई।</p>
<p>वाणिज्य मंत्रालय के पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार इसी दौरान चांदी के आयात मूल्य के हिसाब से 128.95 प्रति के उछाल के साथ 7.77 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले इसी दौरान 3.39 अरब डॉलर था। इस दौरान चांदी के आयात की मात्रा भी 56.07 प्रतिशत बढ़कर 5727 टन हो गयी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 21:10:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संकल्पों के बजट में विनिर्माण, अवसंरचना क्षेत्र को भारी प्रोत्साहन, व्यक्तिगत आयकर की दरें यथावत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 01 फरवरी (वेब वार्ता)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 53,47,315 करोड़ रुपये का बजट पेश किया जिसमें अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के मुकाबले के लिए मजबूत करने के साथ-साथ विकसित भारत की ओर अग्रसर करने के लिए विनिर्माण, आर्थिक और सामाजिक अवसंरचना विकास के लिए 17,14,523 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p>बजट में व्यक्तिगत आयकर की दरों में कोई राहत नहीं दी गयी है, लेकिन उद्योगों पर न्यूनतम वैकल्पिक आयकर (मैट) की दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145346/big-boost-to-manufacturing-infrastructure-sector-in-budget-resolutions-personal"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 01 फरवरी (वेब वार्ता)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 53,47,315 करोड़ रुपये का बजट पेश किया जिसमें अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के मुकाबले के लिए मजबूत करने के साथ-साथ विकसित भारत की ओर अग्रसर करने के लिए विनिर्माण, आर्थिक और सामाजिक अवसंरचना विकास के लिए 17,14,523 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p>बजट में व्यक्तिगत आयकर की दरों में कोई राहत नहीं दी गयी है, लेकिन उद्योगों पर न्यूनतम वैकल्पिक आयकर (मैट) की दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है। बजट में निवेशकों और आयातकों के लिए प्रक्रिया और अनुपालन आसान बनाने के विस्तृत उपायों की घोषणा की गयी है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने एक घंटे 25 मिनट के अपने भाषण में बजट में पूंजीगत व्यय बढ़ाने के बावजूद राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 4.5 प्रतिशत की तुलना में 4.4 प्रतिशत रहा है।</p>
<p>वित्त मंत्री के बजट भाषण के बाद शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गयी और एक समय बीएसई का सेंसेक्स 2300 अंक तक लुढ़क गया था लेकिन बाद में इसने काफी हद तक वापसी की। वित्त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष से ऋण को जीडीपी की तुलना में सीमित करने की योजना के तहत ऋण- जीडीपी अनुपात को 2030-31 तक 50 प्रतिशत के आसपास रखने का लक्ष्य रखा है जिसके 2026- 27 में 55.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी कर्ज कम होने से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए ऋण का उपलब्धता बढ़ेगी, सरकार पर ब्याज भुगतान कम होगा और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने की घोषणा की और कहा कि केंद्र की विभाज्य प्राप्तियों में राज्यों का हिस्सा 41 प्रतिशत बना रहेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की वृद्धि दर सात प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है जिससे सरकार विकास और कल्याण के लिए संसाधनों को जुटाने में सफल रही है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व बाजार से जुड़े रहना है ताकि देश निर्यात बाजार और विदेशी पूंजी तथा प्रौद्योगिकी का लाभ हासिल करता रहे।</p>
<p>उन्होंने सरकार में विश्वास बनाये रखने के लिए जनता का आभार व्यक्त करते हुए कि हमारा लक्ष्य लोगों की आकांक्षाओं को मूर्त रूप देना है और आर्थिक वृद्धि को युवाओं, किसानों, गरीबों, महिलाओं और समाज के अन्य जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचाना है।</p>
<p>केंद्र सरकार के नये कार्यालय क्षेत्र कर्तव्य भवन में तैयार इस पहले बजट को पेश करते हुए वित्त मंत्री ने इसे युवाओं से प्रेरित बताया और कहा कि इस बजट को तैयार करने में जनता से बहुमूल्य सुझाव प्राप्त हुए। </p>
<p>उन्होंने इस बजट को सरकार के तीन कर्तव्यों पर केंद्रित बजट बताते हुए कहा कि सरकार का पहला कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को बढ़ाना, दूसरा कर्तव्य आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लोगों को समर्थ बनाना और तीसरा कर्तव्य सबका साथ सबका विकास के अनुरूप सामाजिक कल्याण की योजनाओं को आगे बढ़ाना है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने नीतियों और कार्यक्रमों में सुधार की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि गत अगस्त में प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद से वस्तु एवं सेवा कर सहित 350 से अधिक सुधारों को लागू किया जा चुका है। उन्होंने आर्थिक वृद्धि को तेज करने के लिए बायो फार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, दुर्लभ खनिजों और कपड़ा जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए नई पहलों की घोषणा की।</p>
<p>उन्होंने 200 से अधिक पारंपरिक औद्योगिक संकुलों को पुनर्जीवित करने और चार नये आर्थिक क्षेत्रों के विकास का भी प्रस्ताव किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूंजीगत वस्तुओं के निर्माण में क्षमता निर्माण के लिए सार्वजनिक उपक्रमों की सहायता से दो स्थानों पर हाईटेक टूल रूम का निर्माण किया जायेगा जो कम लागत पर हाई प्रीसीजन कंपोनेंट का डिजाइन, परीक्षण और विनिर्माण करेंगे। विनिर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए उपकरण निर्माण के लिए भी एक योजना की घोषणा की गयी।</p>
<p>वित्त मंत्री ने टीयर-2 और 3 शहरों में अवसंरचना क्षेत्र के विकास के लिए पश्चिम बंगाल के दानकुनी से गुजरात के सूरत के बीच नया माल परिवहन गलियारा और बनारस और पटना में घरेलू जलमार्गों के लिए पोत निर्माण की सुविधाओं की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने बिजली, इस्पात, एल्युमीनियम, कपड़ा जैसे क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए दो हजार करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया।</p>
<p>बजट में नई राष्ट्रीय फाइबर योजना शुरू करने, हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र के लिए समस्त योजना का विस्तार तथा खादी ग्रामोद्योग के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना की घोषणा की गयी है। उन्होंने सूक्ष्म लघु और मझौले क्षेत्र के लिए वित्तपोषण को सरल और सुलभ बनाने के कई पहलों की घोषणा की है।</p>
<p>बैंकिंग क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की घोषणा की गयी है। इसमें पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और ग्रामीण विद्युत निगम के पुनर्गठन का भी प्रस्ताव है।</p>
<p>नगर निगमों को विकास के लिए धन जुटाने में मदद के लिए 1,000 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉन्ड निर्गम पर 100 करोड़ रुपये प्रोत्साहन के रूप में देने की घोषणा की गयी है। दो सौ करोड़ रुपये तक के ऐसे निर्गमों के लिए प्रोत्साहन की वर्तमान योजना जारी रहेगी।</p>
<p>उन्होंने दूसरे कर्तव्य के तहत सेवा क्षेत्र को नया आयाम देने की पहलों की घोषणा की जिसमें शिक्षा, कौशल विकास, चिकित्सा सेवा, पशु चिकित्सा, बड़े महानगरों के समीप पांच नये यूनिवर्सिटी टाउनशिप, गणित और विज्ञान पढ़ने वाली छात्राओं के लिए हर जिले में एक छात्रावास, खगोल विज्ञान के लिए नई वेधशालाओं की स्थापना, गाइडों के प्रशिक्षण के लिए 20 जगह केंद्र बनाने, डिजिटल नॉलेज गृह और 50 पुरातात्विक स्थलों के विकास और संवर्धन जैसी पहलों की घोषणा की।</p>
<p>तीसरे कर्तव्य के तहत महिलाओं, किसानों, दिव्यांग जनों और अन्य वंचित वर्गों के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए विभिन्न पहलों की घोषणा की। मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए उत्तर भारत में एक नया निमहांस संस्थान स्थापित करने तथा रांची और तेजपुर के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में अपग्रेड करने का प्रस्ताव किया।</p>
<p>बजट में 50 प्रतिशत जिला अस्पतालों में आपात चिकित्सा तथा ट्रॉमा केंद्रों की सुविधाएं स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। दिव्यांग सहारा योजना के तहत बजट में भारतीय कृत्रिम मानवअंग विनिर्माण निगम को अपनी विनिर्माण सुविधाओं के विस्तार और अनुसंधान तथा विकास के लिए सहायता दी जायेगी।</p>
<p>श्रीमती सीतारमण ने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास के लिए योजना की घोषणा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 18:19:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करेंगी, पीएम मोदी बोले-यह संसदीय इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 29 जनवरी (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि निर्मला सीतारमण देश की संसदीय इतिहास में लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करने वाली पहली महिला बन गई हैं। इसे उन्होंने एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।</p>
<p>संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को ब्रीफिंग देते हुए कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। यह दूसरे चौथाई का प्रारंभ हो रहा है।</p>
<p>2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए अगले 25 साल बहुत अहम हैं और इस सदी के दूसरे चरण का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145308/finance-minister-nirmala-sitharaman-will-present-the-budget-for-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d26032024-11-nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 29 जनवरी (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि निर्मला सीतारमण देश की संसदीय इतिहास में लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करने वाली पहली महिला बन गई हैं। इसे उन्होंने एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।</p>
<p>संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को ब्रीफिंग देते हुए कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। यह दूसरे चौथाई का प्रारंभ हो रहा है।</p>
<p>2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए अगले 25 साल बहुत अहम हैं और इस सदी के दूसरे चरण का पहला बजट अब पेश होने जा रहा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं, जिन्होंने संसद में लगातार नौ बार बजट पेश किया है। उन्होंने इसे देश के संसदीय इतिहास का गर्व का क्षण बताया।</p>
<p>निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को मोदी सरकार का 15वां बजट पेश करेंगी। यह 2024 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के बाद दूसरा पूर्ण बजट भी होगा। केंद्रीय बजट 2026 के लिए वित्त मंत्री के साथ अनुभवी अफसरों और अर्थशास्त्रियों की एक मजबूत टीम काम कर रही है, जिसमें कई नए चेहरे भी शामिल हैं।</p>
<p>आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर को बजट की पूरी रूपरेखा तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है। वह बजट डिवीजन का नेतृत्व करती हैं, जो मुख्य दस्तावेज तैयार करता है और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक रणनीति बनाता है। उनकी जिम्मेदारी संसाधनों का सही बंटवारा करना, सरकारी खर्च की सीमा तय करना और विकास व आर्थिक स्थिरता में संतुलन बनाए रखना है।</p>
<p>मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन बजट के लिए आर्थिक विश्लेषण उपलब्ध कराते हैं। उनका कार्यालय वैश्विक जोखिमों का आकलन करता है, आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाता है और कृषि, उद्योग व सेवा क्षेत्रों के रुझानों का अध्ययन करता है। साथ ही वह बड़े सुधारों, वित्तीय नीतियों और लंबी अवधि की आर्थिक योजना पर वित्त मंत्री को सलाह देते हैं।</p>
<p>राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव प्रत्यक्ष करों जैसे आयकर और कॉरपोरेट टैक्स के साथ-साथ अप्रत्यक्ष करों जैसे जीएसटी और सीमा शुल्क की देखरेख करते हैं। बजट 2026-27 उनके लिए राजस्व सचिव के रूप में पहला बजट होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 17:31:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : बजट 2026-27, नायलॉन बुनकरों की वित्त मंत्री से गुहार—&quot;इम्पोर्टेड यार्न पर न लगे MIP या एंटी-डंपिंग ड्यूटी&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत।आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले सूरत के टेक्सटाइल वीविंग सेक्टर ने केंद्र सरकार के सामने अपनी अस्तित्व की लड़ाई छेड़ दी है।</p>
<p>'नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन सूरत', 'वेडरोड वीवर्स एसोसिएशन' और 'सचिन इंडस्ट्रियल सोसाइटी' के प्रमुखों ने एक संयुक्त पत्र लिखकर सरकार को चेतावनी दी है कि यदि चंद बड़े नायलॉन स्पिनरों के दबाव में आकर आयातित नायलॉन यार्न पर MIP (Minimum Import Price) या एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) लगाई गई, तो सूरत की वीविंग इंडस्ट्री पूरी तरह तबाह हो जाएगी।</p>
<p>मयूर गोलवाला (सचिव, सचिन इंडस्ट्रियल सोसाइटी), मयूर चेवली (अध्यक्ष, नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन, सूरत), भूपेंद्रभाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145163/surat-budget-2026-27-nylon-weavers-appeal-to-the-finance-minister"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/6526_surat-textiles-waving-looms-industry.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत।आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले सूरत के टेक्सटाइल वीविंग सेक्टर ने केंद्र सरकार के सामने अपनी अस्तित्व की लड़ाई छेड़ दी है।</p>
<p>'नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन सूरत', 'वेडरोड वीवर्स एसोसिएशन' और 'सचिन इंडस्ट्रियल सोसाइटी' के प्रमुखों ने एक संयुक्त पत्र लिखकर सरकार को चेतावनी दी है कि यदि चंद बड़े नायलॉन स्पिनरों के दबाव में आकर आयातित नायलॉन यार्न पर MIP (Minimum Import Price) या एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) लगाई गई, तो सूरत की वीविंग इंडस्ट्री पूरी तरह तबाह हो जाएगी।</p>
<p>मयूर गोलवाला (सचिव, सचिन इंडस्ट्रियल सोसाइटी), मयूर चेवली (अध्यक्ष, नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन, सूरत), भूपेंद्रभाई चाहवाला (अध्यक्ष, वेडरोड वीवर्स एसोसिएशन) द्वारा वित्त मंत्री को दिए गए ज्ञापन की  प्रमुख मांगें और चिंताएं इस प्रकार है। </p>
<p>1. "मोनोपॉली और कार्टेल" का खतरा: वीवर्स नेता मयूर गोलवाला और मयूर चेवली ने वित्त मंत्री को बताया कि साल 2023 में पॉलिएस्टर यार्न पर BIS और QCO जैसे नियंत्रणों के कारण घरेलू स्पिनरों ने 'सिंडिकेट' बना लिया था, जिससे बुनकरों का शोषण हुआ। यदि नायलॉन पर भी ऐसी ही ड्यूटी लगती है, तो बिजनेस मोनोपॉली फिर से स्पिनरों के हाथ में चली जाएगी।</p>
<p>2. रोजगार पर संकट: वर्तमान में वैश्विक मंदी और अमेरिकन टैरिफ के कारण सूरत की टेक्सटाइल यूनिट्स सप्ताह में केवल 4 दिन चल रही हैं। बुनकर संगठनों का कहना है कि अगर कच्चे माल (इम्पोर्टेड धागे) की लागत बढ़ी, तो हजारों फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी और लाखों कारीगर बेरोजगार हो जाएंगे। बुनकर पहले ही नुकसान के कारण अपनी मशीनें 'स्क्रैप' में बेचने को मजबूर हैं।</p>
<p>3. घरेलू उत्पादन की कमी: वेडरोड वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपेंद्र चाहवाला ने तर्क दिया कि घरेलू नायलॉन स्पिनर देश की कुल मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, आधुनिक हाई-स्पीड मशीनों के लिए जिस उच्च गुणवत्ता वाले धागे की आवश्यकता होती है, वह घरेलू स्तर पर उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>बुनकर नेताओं ने मांग की है कि सरकार को कुछ मुट्ठी भर कॉर्पोरेट स्पिनरों को लाभ पहुँचाने के बजाय, लाखों लोगों को रोजगार देने वाली वीविंग इंडस्ट्री के लिए विशेष 'इंसेंटिव स्कीम' का ऐलान करना चाहिए।</p>
<p>बुनकरों ने नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत के उस बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि "QCO और भारी ड्यूटी स्ट्रक्चर भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री का गला घोंट रहे हैं।</p>
<p>ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि स्पिनर झूठे आंकड़े पेश कर सरकार को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि बजट में MIP या ADD का प्रावधान किया गया, तो सूरत की छोटी और मध्यम वीविंग यूनिट्स 'युद्ध स्तर' पर बंद होने लगेंगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 20:16:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पान मसाला पर उपकर से मिले राजस्व का हिस्सा राज्यों के साथ साझा किया जाएगा: सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, चार दिसंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि पान मसाला के उत्पादन पर उपकर लगाने के प्रावधान का मकसद स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना है तथा इससे मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा राज्यों के साथ साझा किया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने सदन में ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’ को चर्चा और पारित कराने के लिए रखते हुए यह भी कहा कि इस विधेयक का माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा तथा पान मसाला के उपभोग पर 40 प्रतिशत की जीएसटी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144400/part-of-the-revenue-from-cess-on-pan-masala-will"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d26032024-11-nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, चार दिसंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि पान मसाला के उत्पादन पर उपकर लगाने के प्रावधान का मकसद स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना है तथा इससे मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा राज्यों के साथ साझा किया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने सदन में ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’ को चर्चा और पारित कराने के लिए रखते हुए यह भी कहा कि इस विधेयक का माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा तथा पान मसाला के उपभोग पर 40 प्रतिशत की जीएसटी बरकरार रहेगा।</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य दो प्रमुख आयामों स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संसाधनों का स्रोत तैयार करना है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरत होती है कि सतत निवेश हो। यह उपकर आवश्यक वस्तुओं पर नहीं लगाया जाएगा। यह सिर्फ ऐसी हानिकारक वस्तुओं पर लगाया जाएगा, जो स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालती हैं।’’</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘इस उपकर को लगाने से पान मसाला का दाम बढ़ेगा तो इन्हें खाने में रुकावट पैदा होगी। इससे जो राजस्व मिलेगा उसमें से एक हिस्सा राज्यों को भी देने का प्रावधान किया गया है ताकि वे स्वास्य संबंधी योजनाओं में इसका उपयोग कर सकें।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘पान मसाला को लेकर जीएसटी की जो व्यवस्था है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। जीएसटी के तहत पान मसाला के उपभोग पर सबसे ज्यादा 40 प्रतिशत कर भी लगाया जा रहा है।’’</p>
<p>‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’ पान मसाला पर लगाए जाने वाले क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगा। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना है। इसके तहत उन मशीनों या प्रक्रियाओं पर उपकर लगाया जाएगा, जिनके माध्यम से उक्त वस्तुओं का निर्माण या उत्पादन किया जाता है।</p>
<p>जब एक जुलाई 2017 को जीएसटी की शुरूआत हुई थी तो जीएसटी कार्यान्वयन के कारण राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए 30 जून 2022 तक पांच वर्षों के लिए क्षतिपूर्ति उपकर की व्यवस्था लागू की गई थी।</p>
<p>क्षतिपूर्ति उपकर की व्यवस्था को बाद में 31 मार्च 2026 तक चार साल के लिए बढ़ा दिया गया था और इसके संग्रह का उपयोग उस ऋण को चुकाने के लिए किया जा रहा है जो केंद्र ने राज्यों को कोविड महामारी की अवधि के दौरान जीएसटी राजस्व हानि की भरपाई के लिए लिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 14:50:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीतारमण ने ‘गिफ्ट सिटी’ में विदेशी मुद्रा निपटान प्रणाली की शुरुआत की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, सात अक्टूबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘गिफ्ट आईएफएससी’ में विदेशी मुद्रा निपटान प्रणाली की मंगलवार को शुरुआत की जो वास्तविक समय में निर्बाध लेनदेन की सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही यह नगदी प्रबंधन को बेहतर बनाएगी और अनुपालन सुनिश्चित करेगी।</p>
<p>विदेशी मुद्रा लेनदेन वर्तमान में आमतौर पर 36 से 48 घंटों के अंतराल में पूरा हो पाता है।</p>
<p>‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025’ में वित्त मंत्री ने कहा कि विदेशी मुद्रा निपटान प्रणाली के संचालन के साथ ‘गिफ्ट सिटी’ हांगकांग, तोक्यो, मनीला सहित कुछ अन्य चुनिंदा वित्तीय केंद्रों की सूची में शामिल हो गई है जिनके पास स्थानीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143472/sitharaman-introduced-foreign-exchange-settlement-system-in-gift-city"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, सात अक्टूबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘गिफ्ट आईएफएससी’ में विदेशी मुद्रा निपटान प्रणाली की मंगलवार को शुरुआत की जो वास्तविक समय में निर्बाध लेनदेन की सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही यह नगदी प्रबंधन को बेहतर बनाएगी और अनुपालन सुनिश्चित करेगी।</p>
<p>विदेशी मुद्रा लेनदेन वर्तमान में आमतौर पर 36 से 48 घंटों के अंतराल में पूरा हो पाता है।</p>
<p>‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025’ में वित्त मंत्री ने कहा कि विदेशी मुद्रा निपटान प्रणाली के संचालन के साथ ‘गिफ्ट सिटी’ हांगकांग, तोक्यो, मनीला सहित कुछ अन्य चुनिंदा वित्तीय केंद्रों की सूची में शामिल हो गई है जिनके पास स्थानीय स्तर पर विदेशी मुद्रा लेनदेन को पूरा करने का बुनियादी ढांचा है।</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि वित्तीय प्रौद्योगिकी ने देश में वित्त का लोकतंत्रीकरण किया है।</p>
<p>मंत्री ने कहा कि भारत वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों में तीसरे स्थान पर है और दुनिया के आधे वास्तविक समय के डिजिटल लेनदेन करता है। सरकार की नीति संतुलित दृष्टिकोण के माध्यम से वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) क्षेत्र को बढ़ाने में भूमिका निभाने की रही है।</p>
<p>सीतारमण ने कहा, ‘‘ हम एक कोने में रहकर देखना पसंद करेंगे। हम कोने में रहकर मदद करना पसंद करेंगे... हमें व्यवसायों को सक्षम बनाना है, उनकी प्रगति में बाधा नहीं डालनी।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि देश में वित्तीय प्रौद्योगिकी ने न केवल भुगतान को डिजिटल बनाया है बल्कि वित्त का लोकतंत्रीकरण भी किया है। इससे लाखों लोगों को पारदर्शिता के साथ बचत करने, निवेश करने, उधार लेने एवं बीमा करने का अधिकार मिला है।</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि देश ने 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर के ‘इंडिया एआई मिशन’ के साथ कृत्रिम मेधा (एआई) के वैश्विक क्षेत्र में दृढ़ता के साथ कदम रखा है जो नवाचार एवं प्रौद्योगिकी के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रौद्योगिकी को हथियार बनाने से बचना चाहिए और इसका इस्तेमाल जनहित में करना चाहिए।</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) ने वित्त और कामकाज करने के तरीके को बदल दिया है लेकिन इस प्रौद्योगिकी के कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ यद्यपि एआई असाधारण संभावनाओं के द्वार खोलता है, हमें इसके अंधकारमय पक्ष का सामना करना होगा। नवाचार को शक्ति प्रदान करने वाले उन्हीं उपकरणों का उपयोग धोखे एवं धोखाधड़ी के लिए भी किया जा सकता है। मैं इसे व्यक्तिगत नहीं बना रही हूं, लेकिन मैं कह सकती हूं कि मैंने अपने कई ‘डीपफेक’ वीडियो देखे हैं जिन्हें ऑनलाइन प्रसारित किया जा रहा है..नागरिकों को गुमराह करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के लिए उनका इस्तेमाल किया जा रहा है।’’</p>
<p>‘डीपफेक’ में अकसर कृत्रिम मेधा के जरिये किसी व्यक्ति की तस्वीर, वीडियो या आवाज को इस तरह बदला जाता है कि वह असली लगे लेकिन असल में वह नकली होती है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने साथ ही बताया कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से सरकार ने 4.31 लाख करोड़ रुपये की बचत की है। सार्वजनिक धन अब उन लोगों तक पहुंचता है जो इसके हकदार हैं, न कि किसी छद्म संस्था तक।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/143472/sitharaman-introduced-foreign-exchange-settlement-system-in-gift-city</link>
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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 14:41:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैश्विक अनिश्चितता में भी भारत का जुझारूपन मजबूत आर्थिक बुनियाद से बना रहाः सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पुणे, 25 सितंबर (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के जुझारूपन के पीछे मजबूत वृहद-आर्थिक बुनियादी पहलुओं की अहम भूमिका रही है।</p>
<p>सीतारमण ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के 91वें स्थापना दिवस समारोह में कहा कि बीते वर्ष के दौरान वैश्विक परिदृश्य में अनिश्चितता बढ़ी है और इसका असर कई देशों पर दिख रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इन परिस्थितियों के बीच में भी भारत की मजबूती सामने आती है। मजबूत आर्थिक आधार, युवा आबादी और घरेलू मांग पर निर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था की मुख्य ताकत है।’’</p>
<p>सीतारमण ने बताया कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143276/indias-combination-remained-strong-economic-foundation-even-in-global-uncertainty"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d26032024-11-nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>पुणे, 25 सितंबर (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के जुझारूपन के पीछे मजबूत वृहद-आर्थिक बुनियादी पहलुओं की अहम भूमिका रही है।</p>
<p>सीतारमण ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के 91वें स्थापना दिवस समारोह में कहा कि बीते वर्ष के दौरान वैश्विक परिदृश्य में अनिश्चितता बढ़ी है और इसका असर कई देशों पर दिख रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इन परिस्थितियों के बीच में भी भारत की मजबूती सामने आती है। मजबूत आर्थिक आधार, युवा आबादी और घरेलू मांग पर निर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था की मुख्य ताकत है।’’</p>
<p>सीतारमण ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भी भारत की मजबूती जारी रही और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘यह महज संयोग नहीं है। यह सक्रिय राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों, बड़े पैमाने पर भौतिक और डिजिटल ढांचे के निर्माण, बेहतर शासन और बढ़ी प्रतिस्पर्धा का नतीजा है।’’</p>
<p>सीतारमण ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों द्वारा भारत की साख में किए गए हाल के सुधारों का भी उल्लेख किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगस्त 2025 में एसएंडपी ने 18 साल बाद भारत की रेटिंग ‘बीबीबी-’ से बढ़ाकर ‘बीबीबी’ कर दी। इसी साल मई में मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस ने भी भारत को ‘बीबीबी (लो)’ से ‘बीबीबी’ किया जबकि जापानी एजेंसी आरएंडआई ने भारत की रेटिंग ‘बीबीबी’ से बढ़ाकर ‘बीबीबी प्लस’ कर दी।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बीच बैंकों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘बैंक सिर्फ बचत के संरक्षक नहीं बल्कि वृद्धि के इंजन भी हैं। उन्हें कारोबार और उद्यमियों को वित्त और सहयोग देकर अवसरों का लाभ उठाने और नवाचार को आगे बढ़ाने में मदद करनी होगी।’’</p>
<p>वित्त मंत्री ने इस पर बल दिया कि बैंकिंग का मूल आधार ग्राहक का विश्वास है और हर शिकायत को सुधार और नवाचार के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि एकीकृत भुगतान व्यवस्था यूपीआई की सफलता यह दर्शाती है कि सभी बैंकों और ऐप में आपस में जुड़ाव और तालमेल कितना असरदार हो सकता है।</p>
<p>हालांकि उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ डिजिटलीकरण पर्याप्त नहीं है। ईमानदारी, सहानुभूति और मानवीय निर्णय क्षमता भी उतनी ही जरूरी है।’’</p>
<p>इस मौके पर वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कहा कि वे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और शिक्षा ऋण पर अधिक ध्यान दें तथा कृषि क्षेत्र में भी कर्ज प्रवाह बढ़ाएं। उन्होंने साथ ही ऋण गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 21:11:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीएसटी सुधारों का लाभ दिन की शुरुआत से रात को सोने जाने तक, सभी उत्पादों पर मिलेगा : सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>चेन्नई, 14 सितंबर (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार देश के प्रत्येक नागरिक के लिए एक बड़ी जीत है।</p>
<p>सीतारमण ने रविवार को चेन्नई में एक कार्यक्रम में कहा कि भारत के प्रत्येक राज्य के अपने त्योहारों को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दीपावली से पहले जीएसटी सुधारों को लागू करने के निर्देश से बहुत पहले ही इन्हें लागू करने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>चेन्नई सिटीजन्स फोरम द्वारा आयोजित ‘उभरते भारत के लिए कर सुधार’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में सीतारमण ने कहा कि माल एवं सेवा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143060/the-benefit-of-gst-reforms-will-be-available-on-all"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d26032024-11-nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई, 14 सितंबर (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार देश के प्रत्येक नागरिक के लिए एक बड़ी जीत है।</p>
<p>सीतारमण ने रविवार को चेन्नई में एक कार्यक्रम में कहा कि भारत के प्रत्येक राज्य के अपने त्योहारों को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दीपावली से पहले जीएसटी सुधारों को लागू करने के निर्देश से बहुत पहले ही इन्हें लागू करने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>चेन्नई सिटीजन्स फोरम द्वारा आयोजित ‘उभरते भारत के लिए कर सुधार’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में सीतारमण ने कहा कि माल एवं सेवा कर का लाभकारी प्रभाव सुबह की शुरुआत से लेकर रात के सोने तक सभी उत्पादों पर रहेगा।</p>
<p>कुछ प्रमुख पहल का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि जिन 99 प्रतिशत वस्तुओं पर पहले जीएसटी के तहत 12 प्रतिशत कर लगता था, अब उनपर सिर्फ पांच प्रतिशत कर लगेगा।</p>
<p>नए जीएसटी सुधार (2.0) 22 सितंबर से लागू होंगे।</p>
<p>जीएसटी परिषद द्वारा 350 से ज़्यादा वस्तुओं पर कर की दरों में कटौती का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पहले अलग-अलग स्लैब के तहत कर लगाने की प्रथा के बजाय केवल पांच और 18 प्रतिशत के स्लैब लागू किए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमने व्यापारियों के लिए भी प्रक्रिया को सरल बनाया है। किसी भी उत्पाद पर 28 प्रतिशत जीएसटी कर नहीं है।’’</p>
<p>व्यापारियों के कर दायरे में वृद्धि का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2017 में जीएसटी लागू होने से पहले केवल 66 लाख व्यापारी ही कर दाखिल करते थे। लेकिन आज, पिछले आठ साल में 1.5 करोड़ व्यवसाय जीएसटी के दायरे में आ गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स कहा था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद, पिछले आठ साल में कर चुकाने वाले व्यवसायों की संख्या बढ़कर 1.5 करोड़ हो गई है क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि वे इससे लाभान्वित हो पाएंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पिछले आठ साल में जीएसटी दाखिल करने वाले 1.5 करोड़ व्यापारियों की यह संख्या भविष्य में और बढ़ेगी।’’ उन्होंने आगे कहा कि इस वृद्धि के कारण केंद्र और राज्य सरकारों को मिलने वाला राजस्व बढ़ा है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने बताया कि 2017 में कर संग्रह 7.19 लाख करोड़ रुपये था और अब सकल जीएसटी संग्रह 22 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा औसतन 1.8 लाख से दो लाख करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया जाता है। उदाहरण के लिए, 1.80 लाख करोड़ रुपये के सकल राजस्व को आधा-आधा बांटा जाता है, जिसमें राज्यों को 90,000 करोड़ रुपये और केंद्र को 90,000 करोड़ रुपये मिलते हैं। केंद्र के हिस्से के उस 90,000 करोड़ रुपये के राजस्व में से भी लगभग 41 प्रतिशत राज्यों को वापस जाता है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इससे हम समझ सकते हैं कि जीएसटी के कार्यान्वयन से जनता और राज्य सरकार को लाभ होगा।’’</p>
<p>जीएसटी सुधारों के लागू होने से पहले कुछ व्यापारियों द्वारा उठाए गए वर्गीकरण के मुद्दे पर सीतारमण ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि पॉपकॉर्न की बिक्री के लिए एक वर्गीकरण किया गया है। अगर नमकीन पॉपकॉर्न बेचा जाता है, तो ‘नमकीन’ श्रेणी में बेचे जाने पर पांच प्रतिशत कर लगेगा, जबकि मीठे पॉपकॉर्न पर 18 प्रतिशत कर लगाया जाता था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘सड़क किनारे बिकने वाले पॉपकॉर्न पर कोई कर नहीं है। लेकिन जब वही पॉपकॉर्न ब्रांडेड होता है और किसी कारखाने में बनता है, तो यह वर्गीकरण लागू होता है। लेकिन, नवीनतम जीएसटी सुधारों में इसे सरल बना दिया गया है। अब, सभी खाद्य उत्पाद पांच प्रतिशत के स्लैब में आते हैं या उन पर कोई कर नहीं लगाया गया है। इसलिए, अब वर्गीकरण की कोई समस्या नहीं है। यह पॉपकॉर्न आप सभी के लिए समझने योग्य एक उदाहरण है।’’</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत के दृष्टिकोण को गति देने के लिए इस प्रकार के उपाय किए गए हैं।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि लोग इस कदम का स्वागत करेंगे। दरअसल, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, गोदरेज जैसी कई कंपनियों ने मुझे भरोसा दिलाया है कि वे इसका लाभ जनता तक पहुंचाएंगी।’’</p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने अंग्रेजी और तमिल में एक पुस्तक का भी विमोचन किया, जिसमें जीएसटी सुधारों के कार्यान्वयन से तमिलनाडु को मिलने वाले लाभों को दर्शाया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘पहले क्या कराधान था और नया क्या है और इन जीएसटी सुधारों से तमिलनाडु को कैसे लाभ होगा? यहां इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है और मैं आप सभी से इस पुस्तक को पढ़ने का आग्रह करती हूं, जो अंग्रेजी और तमिल दोनों भाषाओं में उपलब्ध है।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Sep 2025 21:19:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीएसटी सुधार से सभी को फायदा, विपक्षी दलों की आलोचना ‘गलत जानकारी’ पर आधारित: सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी में व्यापक बदलाव ‘लोगों के लिए सुधार है’ और इस कदम से देश के गरीब-से-गरीब लोगों को भी लाभ होगा।</p>
<p>उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जीएसटी सुधारों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना ‘गलत जानकारी’ पर आधारित है। वास्तव में देश को बेहतर विपक्षी दल और अच्छे विपक्षी नेताओं की जरूरत है।</p>
<p>जीएसटी सुधारों और अन्य मुद्दों पर पीटीआई-भाषा के साथ वित्त मंत्री की विस्तृत बातचीत के मुख्य अंश।</p>
<p>सवाल: बजट में आपने आयकर छूट सीमा बढ़ायी और अब जीएसटी दर में कटौती</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142945/gst-reform-benefits-everyone-criticism-of-opposition-parties-based-on"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी में व्यापक बदलाव ‘लोगों के लिए सुधार है’ और इस कदम से देश के गरीब-से-गरीब लोगों को भी लाभ होगा।</p>
<p>उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जीएसटी सुधारों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना ‘गलत जानकारी’ पर आधारित है। वास्तव में देश को बेहतर विपक्षी दल और अच्छे विपक्षी नेताओं की जरूरत है।</p>
<p>जीएसटी सुधारों और अन्य मुद्दों पर पीटीआई-भाषा के साथ वित्त मंत्री की विस्तृत बातचीत के मुख्य अंश।</p>
<p>सवाल: बजट में आपने आयकर छूट सीमा बढ़ायी और अब जीएसटी दर में कटौती की है। आप इन दोनों फैसलों का पूरी अर्थव्यवस्था, निजी उपभोग के साथ महंगाई पर क्या प्रभाव देखती हैं?</p>
<p>जवाब: मुद्रास्फीति पहले से ही काफी हद तक नियंत्रण में है। पिछले कुछ समय से यह काबू में ही है। यह कटौती, या जीएसटी में बड़ा सुधार, वास्तव में लोगों को ज्यादा उपभोग के लिए प्रेरित करेगा। इसमें कोई संदेह नहीं है। लोग यह समझते हैं कि आज वे 100 रुपये में जो चीजें खरीद रहे हैं, उतने ही पैसे में अब ज्यादा खरीद सकते हैं। वास्तव में जीएसटी में व्यापक बदलाव ‘लोगों के लिए सुधार है’ और इस कदम से देश के हर परिवार को, गरीब-से-गरीब लोगों लाभ होगा।</p>
<p>दरों में इस कमी से मासिक घरेलू राशन और चिकित्सा बिलों में कमी आएगी। साथ ही यह पुरानी कार की जगह नई कार लेने, रेफ्रिजरेटर या वॉशिंग मशीन जैसी पुरानी वस्तुओं की जगह नई चीजें खरीदने जैसी आकांछाओं को भी पूरा करने में मददगार होगी। इससे उपभोग में वृद्धि होगी और इसके परिणामस्वरूप, मेरा मानना ​​है कि वृद्धि का एक अच्छा चक्र शुरू होगा।</p>
<p>सवाल: लगभग 395 वस्तुओं की कीमतें कम होने वाली हैं। आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगी कि कर दरों में कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को मिले।</p>
<p>जवाब: हम दरों में कटौती का लाभ आम लोगों को देने के लिए उद्योगों से बातचीत कर रहे हैं। वे सभी खुलकर कह रहे हैं कि हम इस कटौती का लाभ ग्राहकों को देंगे। कई कंपनियों ने दाम में कटौती की घोषणा भी की है। 22 सितंबर से मेरा पूरा ध्यान इसी पर होगा कि लोगों को इसका लाभ मिले।</p>
<p>सवाल: जीएसटी परिषद का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था, लेकिन फैसले के बाद विपक्षी राज्यों ने मुद्दे उठाए। कांग्रेस दावा कर रही है कि यह जीएसटी- दो नहीं, बल्कि डेढ़ है। वे यह भी दावा कर रहे हैं कि हम पिछले आठ सालों से यही कह रहे थे। आप इस आलोचना को कैसे देखते हैं?</p>
<p>जवाब: जीएसटी सुधारों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना ‘गलत जानकारी’ पर आधारित है। वास्तव में देश को बेहतर विपक्षी दल और बेहतर विपक्षी नेताओं की जरूरत है। कर की चार दरें रखने का फैसला भाजपा का नहीं था...कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्री भी इस फैसले में शामिल थे। क्या उन्हें (विपक्ष को) इसकी जानकारी नहीं है?”</p>
<p>देश को पेड़ कटाई जैसे मुद्दों के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन की तर्ज पर बेहतर विपक्ष और बेहतर विपक्षी नेताओं के लिए भी मुहिम चलाने की जरूरत है।</p>
<p>सवाल: जीएसटी में सुधार एक सराहनीय कदम है। लेकिन राजस्व नुकसान के मुद्दे पर कुछ राज्यों खासकर आठ विपक्षी शासित राज्यों ने चिंता जतायी थी। ऐसे में आम सहमति बनाना कितना मुश्किल रहा।</p>
<p>जवाब: जीएसटी परिषद में इस बात को लेकर आम सहमति थी कि लोगों को लाभ मिलना चाहिए... हालांकि कुछ राज्य जरूर राजस्व को लेकर चिंतित थे। लेकिन इस बात को लेकर आमसहमति थी कि दरों में कटौती से सभी को फायदा होना चाहिए। जीएसटी दरों में कमी से वस्तुओं के दाम कम होंगे और खपत बढ़ेगी और इससे राजस्व बढ़ने के साथ कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।</p>
<p>सवाल: जीएसटी दर में कटौती के बाद क्या ऐसा कोई अनुमान लगाया गया है कि मध्यम वर्ग के परिवारों के घर के खर्च में मासिक आधार पर कितनी बचत होगी?</p>
<p>उत्तर: अभी नहीं। लेकिन हम दो-तीन महीने बाद इस बारे में कुछ कह पाएंगे। हमें सकारात्मक के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा। 22 सितंबर से लोग खरीदारी शुरू कर देंगे, ठीक वैसे ही जैसे कोविड के बाद तेजी से खरीदारी शुरू हुई थी। यह एक सकारात्मक बात होगी। लेकिन, यह एक चुनौती भी होगी। दिसंबर के बाद, जनवरी-मार्च तिमाही में शायद यही उछाल बरकरार न रहे। इसलिए, यह जानने के बाद ही मैं कह सकती हूं कि जीएसटी दरों में कटौती से किसी परिवार को कितना फायदा होगा।</p>
<p>सवाल: जैसा कि आपने बताया, राज्यों ने राजस्व हानि की चिंता जताई है। घोषणा के दिन आपने कहा था कि इसके परिणामस्वरूप 48,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा। क्या इससे आपके बजट में तय किए गए राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर कोई बाधा आएगी?</p>
<p>जवाब: जीएसटी दरों में कमी के कारण राजस्व में कमी के अनुमान से राजकोषीय घाटे को नीचे लाने की योजना पर असर नहीं पड़ेगा। जो अनुमान है वह एक स्थिर संख्या है जो आधार वर्ष पर आधारित है, लेकिन जब इसे लागू किया जाता है, तो आधार स्थिति बदल जाती है, आधार वर्ष की स्थिर संख्या बदल जाती है। ऐसे में मुझे लगता है कि 22 सितंबर से खपत में वृद्धि आय को बढ़ाएगी। काफी हद तक, यह 48,000 करोड़ रुपये की राशि हम इसी वर्ष पूरी कर पाएंगे। इसलिए मुझे अपने राजकोषीय घाटे या राजकोषीय प्रबंधन पर कोई प्रभाव नहीं दिखता। मैं अपने आंकड़ों पर कायम रहूंगी।’’</p>
<p>सवाल: इस बार सरकार ने अपने पहले पूर्ण बजट में आयकर में छूट दी और अब जीएसटी में सुधार किया। सुधारों के मोर्चे पर आने वाले दिनों में और क्या देखने को मिल सकता है?</p>
<p>सवाल: प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड के समय भी संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाया है। वो हमेशा सुधारों की बात करते हैं, लोगों के जीवन को सुगम बनाने की बात उन्होंने ही कही है। और सुधार उनकी प्राथमिकता है। यह जारी रहेगा।</p>
<p>सवाल: जीएसटी दर घटने के बाद उपभोग में वृद्धि होगी। पहली तिमाही की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। इसको देखते हुए क्या चालू वित्त वर्ष के लिए 6.3-6.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाया जा सकता है?</p>
<p>जवाब: संभव है। बहुत हद तक संभव है।</p>
<p>सवाल: पिछले सप्ताह निर्यातकों ने आपसे मुलाकात की थी, पैकेज की उनकी मांग पर कोई प्रगति हुई है?</p>
<p>जवाब: सरकार में इस पर काम चल रहा है। कई विभाग हैं, हर विभाग संबंधित पक्षों से जुड़े हैं। इसलिए हम उनके सुझाव ले रहे हैं। 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क से प्रभावित निर्यातकों की मदद के लिए कुछ योजनाएं बनाई जा रही हैं।</p>
<p>सवाल: डॉलर के मुकाबले रुपये निचले स्तर पर आ गया है। यह कितनी चिंता की बात है?</p>
<p>जवाब: हम इस पर नजर रख रहे हैं। रुपये में गिरावट केवल डॉलर के संदर्भ में है। यह केवल रुपये का मामला नहीं है और दूसरे मुद्रा में भी है। यह सभी देशों के मामले में है।</p>
<p>सवाल: चीन के साथ स्थिति सामान्य होने के बात देखी जा रही है। हमने उनकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसमें आगे क्या देखने को मिलेगा?</p>
<p>जवाब: चीनी बाजार तक पहुंच के लिए भारत लगातार प्रयास कर रहा है, बातचीत हो रही है। हम पहले से इस पर काम कर रहे हैं। इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। यह पूरी तरह से व्यापार वार्ता है। इसका प्रेस नोट तीन से कोई लेना-देना नहीं है।’’</p>
<p>सवाल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड्र ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच अच्छे ‘मूड’ में संदेश का आदान-प्रदान हुआ है। अमेरिका से भारत के खिलाफ कड़े रुख के बाद यह हुआ है। इससे क्या संबंध बेहतर होने और शुल्क का मुद्दा दूर होने की उम्मीद है?</p>
<p>जवाब: हम केवल उम्मीद कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Sep 2025 19:22:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जीएसटी में बदलाव ‘लोगों के लिए सुधार’, देश की 140 करोड़ आबादी को होगा लाभ: सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि जीएसटी में व्यापक बदलाव ‘लोगों के लिए सुधार है’ और इस कदम से देश की 140 करोड़ आबादी पर सकारात्मक असर होगा।</p>
<p>सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिये साक्षात्कार में यह भी कहा कि हम दरों में कटौती का लाभ आम लोगों को देने के लिए उद्योगों से बातचीत कर रहे हैं और 22 सितंबर से (जीएसटी दरों में कटौती के लागू होने की तिथि) ‘हमारा पूरा ध्यान इसी पर होगा कि लोगों का इसका लाभ मिले।’</p>
<p>केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों की भागीदारी वाली जीएसटी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142923/changes-in-gst-improvement-for-people-140-crore-population-will"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d26032024-11-nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि जीएसटी में व्यापक बदलाव ‘लोगों के लिए सुधार है’ और इस कदम से देश की 140 करोड़ आबादी पर सकारात्मक असर होगा।</p>
<p>सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिये साक्षात्कार में यह भी कहा कि हम दरों में कटौती का लाभ आम लोगों को देने के लिए उद्योगों से बातचीत कर रहे हैं और 22 सितंबर से (जीएसटी दरों में कटौती के लागू होने की तिथि) ‘हमारा पूरा ध्यान इसी पर होगा कि लोगों का इसका लाभ मिले।’</p>
<p>केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों की भागीदारी वाली जीएसटी परिषद ने बुधवार को जीएसटी के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी जबकि विलासिता एवं सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी।</p>
<p>दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत टेलीविजन एवं एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता वस्तुओं के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामानों पर दरें कम की गयी हैं।</p>
<p>सीतारमण ने कहा, ‘‘जीएसटी में व्यापक बदलाव लोगों के लिए सुधार है और इस कदम से देश के 140 करोड़ लोगों पर सकारात्मक असर होगा। गरीब से गरीब लोगों पर कुछ-न-कुछ इसका सकारात्मक असर होगा।’’</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा, ‘‘यह केवल दर में कटौती का मामला नहीं है बल्कि कंपनियों के लिए भी चीजें आसान होंगी। चाहे रिफंड का मामला हो या फिर अनुपालन का या पंजीकरण का, उनके लिए चीजें और सुगम होंगी।’’</p>
<p>सीतारमण ने कहा, ‘‘एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने पर, 90 प्रतिशत रिफंड स्वतः ही निश्चित समय के भीतर क्लियर हो जाएंगे। साथ ही तीन दिनों के भीतर कंपनियां सफलतापूर्वक अपना पंजीकरण करा सकेंगी।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, इसका लोगों और कंपनियों पर, विशेष रूप से छोटे उद्यमों, किसानों पर चौतरफा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि वे जो उपकरण खरीदेंगे, वे जो कीटनाशक खरीदेंगे, वे सभी सस्ते होने जा रहे हैं।’’</p>
<p>एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘ जीएसटी परिषद में इस बात को लेकर आम सहमति थी कि लोगों को लाभ मिलना चाहिए...। हालांकि कुछ राज्य जरूर राजस्व को लेकर चिंतित थे। लेकिन इस बात को लेकर एक सहमति थी कि दरों में कटौती को लेकर सभी को फायदा होना चाहिए।’’</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि जीएसटी दरों में कमी से वस्तुओं के दाम कम होंगे और खपत बढ़ेगी और इससे राजस्व बढ़ने के साथ कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।</p>
<p>एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘हम दरों में कटौती का लाभ आम लोगों को देने के लिए उद्योगों से बातचीत कर रहे हैं। कई कंपनियों ने दाम में कटौती की घोषणा भी की है।’’</p>
<p>सीतारमण ने कहा, ‘‘22 सितंबर से मेरा पूरा ध्यान इसी पर होगा कि लोगों का इसका लाभ मिले।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Sep 2025 16:21:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीएसटी परिषद ने दरों में व्यापक बदलाव को दी मंजूरी; रोटी, टीवी, छोटी कार होंगी सस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) जीएसटी परिषद ने बुधवार को आम सहमति से माल एवं सेवा कर में व्यापक सुधारों को मंजूरी दे दी। इस निर्णय से रोटी, पराठा से लेकर हेयर ऑयल, आइसक्रीम और टीवी तक आम उपयोग की वस्तुएं सस्ती होंगी। वहीं व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर कर से पूरी तरह से राहत मिलेगी।</p>
<p>जीएसटी में पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय कर संरचना को मंजूरी दी गयी है। नई दरें 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू होंगी।</p>
<p>व्यक्तिगत उपयोग की लगभग सभी वस्तुओं पर दरों में कटौती की गयी है। दरअसल,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142875/gst-council-approved-extensive-change-in-rates-roti-tv-will"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d26032024-11-nirmala-sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) जीएसटी परिषद ने बुधवार को आम सहमति से माल एवं सेवा कर में व्यापक सुधारों को मंजूरी दे दी। इस निर्णय से रोटी, पराठा से लेकर हेयर ऑयल, आइसक्रीम और टीवी तक आम उपयोग की वस्तुएं सस्ती होंगी। वहीं व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर कर से पूरी तरह से राहत मिलेगी।</p>
<p>जीएसटी में पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय कर संरचना को मंजूरी दी गयी है। नई दरें 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू होंगी।</p>
<p>व्यक्तिगत उपयोग की लगभग सभी वस्तुओं पर दरों में कटौती की गयी है। दरअसल, सरकार घरेलू खर्च को बढ़ावा देने और अमेरिकी शुल्क के आर्थिक प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रही है। यह उसी दिशा में उठाया गया कदम है।</p>
<p>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिन भर चली जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा, ‘‘सभी फैसले सर्वसम्मति से किए गए और किसी भी राज्य से कोई असहमति नहीं थी।’’</p>
<p>परिषद ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को मौजूदा चार स्लैब (पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत) की जगह सिर्फ दो दरें (पांच और 18 प्रतिशत) रखने को मंजूरी दे दी। महंगी कारों, तंबाकू और सिगरेट जैसी कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर 40 प्रतिशत के विशेष स्लैब का प्रस्ताव किया गया है।</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, जर्दा जैसे तंबाकू उत्पाद एवं बीड़ी को छोड़कर बाकी सभी उत्पादों के लिए नई दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी।</p>
<p>दैनिक उपयोग की खाद्य वस्तुओं पर कर की दर शून्य होगी। वहीं दूध (अत्यधिक तापमान वाले), छेना, पनीर, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, सादी चपाती या रोटी पर कर की दर पांच प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दी गई है।</p>
<p>पराठे पर भी कर शून्य होगा जबकि अभी यह 18 प्रतिशत है। आम उपयोग के खाद्य और पेय पदार्थों... मक्खन और घी से लेकर सूखे मेवे, कंडेंस्ड दूध, पनीर, अंजीर, खजूर, एवोकाडो, खट्टे फल, सॉसेज और मांस, चीनी से बनी कन्फेशनरी, जैम और फलों की जेली, नारियल पानी, नमकीन, 20 लीटर की बोतल में पैक पेयजल, फलों का गूदा या रस, दूध, आइसक्रीम, पेस्ट्री और बिस्कुट, कॉर्न फ्लेक्स और अनाज युक्त पेय पदार्थ और चीनी से बनी मिठाइयों पर कर की दर को मौजूदा के 12 प्रतिशत या 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत किया जाएगा।</p>
<p>रबड़, मानचित्र, पेंसिल, शार्पनर और अभ्यास पुस्तिकाओं पर पांच प्रतिशत की जगह शून्य शुल्क लगेगा।</p>
<p>‘टूथ पाउडर’, दूध की बोतलें, रसोई के बर्तन, छाते, बर्तन, साइकिल, बांस के फर्नीचर और कंघी जैसी उपभोक्ता वस्तुओं पर कर की दर 12 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत कर दी गई है। शैम्पू, टैल्कम पाउडर, टूथपेस्ट, टूथब्रश, फेस पाउडर, साबुन और हेयर ऑयल पर कर की दरें 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गई हैं।</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद ने व्यक्तिगत जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम भुगतान पर जीएसटी को हटाने का फैसला किया है। इससे लोगों के लिये बीमा पॉलिसी लेना सस्ता हो जाएगा।</p>
<p>जीएसटी परिषद ने सीमेंट पर कर की दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।</p>
<p>इसके साथ 1,200 सीसी इंजन से कम और 4,000 मिमी से कम लंबाई वाले पेट्रोल, एलपीजी एवं सीएनजी वाहनों और 1,500 सीसी एवं 4,000 मिमी तक लंबाई वाले डीजल वाहनों पर कर की दर मौजूदा 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगी।</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें और एयर कंडीशनर, डिशवॉशर एवं टीवी जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर भी कर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।</p>
<p>1,200 सीसी से ज्यादा और 4,000 मिमी से ज्यादा लंबी सभी गाड़ियों, 350 सीसी से ज्यादा क्षमता वाली मोटरसाइकिल और निजी उपयोग वाले विमानों एवं रेसिंग कारों पर 40 प्रतिशत कर लगेगा। अतिरिक्त चीनी वाले शीतल पेय पदार्थों पर 40 प्रतिशत कर लगेगा।</p>
<p>वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले की तरह पांच प्रतिशत कर लगता रहेगा।</p>
<p>राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि जीएसटी दरों में बदलाव से पड़ने वाला वित्तीय प्रभाव करीब 48,000 करोड़ रुपये का होगा लेकिन राजकोषीय नजरिये से इसका कोई खास असर नहीं होगा।</p>
<p>जीएसटी परिषद के इस फैसले से कुल प्रीमियम में कमी आएगी क्योंकि कर अब काफी कम हो गया है।</p>
<p>कर व्यवस्था को सरल बनाने का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका को भारत के निर्यात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया जा रहा है। यह किसी देश पर लगाया गया सबसे ज्यादा शुल्क है।</p>
<p>भारतीय अर्थव्यवस्था उपभोग पर बहुत अधिक निर्भर है। पिछले वित्त वर्ष में निजी उपभोग का बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद में 61.4 प्रतिशत का योगदान रहा।</p>
<p>अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जीएसटी सुधारों से इसके कार्यान्वयन के दूसरे वर्ष तक अर्थव्यवस्था में 0.5 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि होने की संभावना है। इससे अमेरिकी शुल्क का पूरा प्रभाव बेअसर हो जाएगा।</p>
<p>सीतारमण ने कहा कि राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई को लिए गए ऋणों का पूरा भुगतान होने तक तंबाकू, गुटखा, तंबाकू उत्पादों और सिगरेट पर वर्तमान 28 प्रतिशत कर और क्षतिपूर्ति उपकर लागू रहेगा।</p>
<p>रेस क्लब, पट्टा या किराये की सेवाओं और कसीनो/ जुआ/ घुड़दौड़/ लॉटरी/ ऑनलाइन मनी गेमिंग पर भी 40 प्रतिशत कर लगाया जाएगा।</p>
<p>माल ढुलाई के तृतीय-पक्ष बीमा की सेवा की आपूर्ति पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ अब 12 प्रतिशत के बजाय पांच प्रतिशत कर लगेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Sep 2025 14:44:34 +0530</pubDate>
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