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                <title>Technology - Loktej</title>
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                <description>Technology RSS Feed</description>
                
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                <title>6जी तकनीक में हम दुनिया का नेतृत्व करेंगे :सिंधिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि संचार की 5जी तकनीक के मामले में भारत की सफलता केवल देश की नहीं बल्कि पूरे विश्व की कहानी बन गई है और भारत 6जी में दुनिया का नेतृत्व करेगा।</p>
<p>उन्होंने प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में 5जी तकनीक देश की ही नहीं, विश्वव्यापी सफलता की कहानी बन गई है। भारत ने 4जी में दुनिया का अनुसरण किया, 5जी में दुनिया के साथ चला और हम 6जी में विश्व का नेतृत्व करेंगे।’’</p>
<p>सिंधिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144648/scindia-will-lead-the-world-in-6g-technology"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/4150_jyotiraditya-sindhia1.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि संचार की 5जी तकनीक के मामले में भारत की सफलता केवल देश की नहीं बल्कि पूरे विश्व की कहानी बन गई है और भारत 6जी में दुनिया का नेतृत्व करेगा।</p>
<p>उन्होंने प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में 5जी तकनीक देश की ही नहीं, विश्वव्यापी सफलता की कहानी बन गई है। भारत ने 4जी में दुनिया का अनुसरण किया, 5जी में दुनिया के साथ चला और हम 6जी में विश्व का नेतृत्व करेंगे।’’</p>
<p>सिंधिया ने जनता दल (यू) के दिलेश्वर कामैत के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह भी कहा कि 2023 में 5जी का क्रियान्वयन शुरू होने से लेकर आज तक करीब 5 लाख बीटीएस (बेस ट्रांसीवर स्टेशनत) लग चुके हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देश के 778 जिलों में से 767 जिलों में 5जी की कनेक्टिविटी उपलब्ध है। सिंधिया के मुताबिक आज देश में कुल मिलाकर 36 करोड़ 5जी उपभोक्ता हैं जिनकी संख्या 2026 तक बढ़कर 42 करोड़ होने और 2030 तक 100 करोड़ होने का पूर्वानुमान है।</p>
<p>मंत्री ने कहा, ‘‘5जी के आधार पर ही हम 6जी की दिशा में निरंतर चल रहे हैं।’’</p>
<p>ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्या के संबंध में द्रमुक सदस्य कलानिधि मारन के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए सिंधिया ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में सेटेलाइट कनेक्टिविटी की जरूरत है, जहां सामान्य दूरसंचार संपर्क नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे नागरिकों को हम सेटकॉम के माध्यम से संपर्क प्रदान करते हैं। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। दूरसंचार मंत्री के रूप में मेरा लक्ष्य सभी उपभोक्ताओं को सारे विकल्प उपलब्ध कराने का है।’’</p>
<p>सिंधिया ने कहा कि सेटकॉम के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित होने वाले हैं और इसके लिए स्टारलिंक, वनवेब तथा रिलायंस को लाइसेंस दिए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने विमानों में दूरसंचार संपर्क नहीं रहने संबंधी मारन के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘दूरसंचार विभाग की बात करें तो हम उड़ानों में दूरसंचार संपर्क को लेकर नियम बना रहे हैं। हमने इसके लिए रूपरेखा चिह्नित की है। दूरसंचार विभाग की ओर से सारी तैयारी है।’’</p>
<p>सिंधिया ने कहा कि इसके लिए नागर विमानन मंत्रालय को नियम परिभाषित करने होंगे और विमानन कंपनियों को हर विमान पर ट्रांसपोंडर लगाने होंगे ताकि सिग्नल मिलें।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ट्रांसपोंडर लगाना विमानन कंपनियों पर निर्भर है।</p>
<p>जब मारन ने विमान यात्राओं के दौरान मोबाइल नेटवर्क में व्यवधान का विषय उठाया तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, ‘‘अच्छा है ढाई घंटे मोबाइल से बचोगे। जितनी कोशिश हो, मोबाइल से बचो। ढाई घंटे बच रहे हो, यही अच्छी बात है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्ष में भारत के दूरसंचार उपकरणों के निर्यात में वृद्धि हुई है और यह आंकड़ा 2020-21 में 10 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 18,406 करोड़ रुपये हो चुका है, यानी निर्यात में 72 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वहीं, आयात का क्षेत्र थम गया है और जो आयात 2020-21 में 51 हजार करोड़ रुपये का था, वह आज भी उतना ही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 14:26:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सैन्य मिशनों के लिए मानव रोबोट बनाने पर काम कर रहे डीआरडीओ के वैज्ञानिक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="content-profession">
<p>पुणे, 10 मई (भाषा) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक एक मानव रोबोट बनाने पर काम कर रहे हैं जिसे अग्रिम मोर्चे पर सैन्य मिशन का हिस्सा बनाया जा सकता है।</p>
<p>अधिकारी ने बताया कि डीआरडीओ के अंतर्गत आने वाली प्रमुख प्रयोगशाला अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर्स) एक ऐसी मशीन बना रही है, जो सीधे तौर पर मानव निर्देश के तहत जटिल कार्य को अंजाम दे सकती है। इसका उद्देश्य उच्च जोखिम वाले वातावरण में सैनिकों के लिए खतरों को कम करना है।</p>
<p>अनुसंधान एवं विकास (इंजीनियर्स) के अंतर्गत आने वाले ‘सिस्टम एंड टेक्नोलॉजीज फॉर एडवांस्ड रोबोटिक्स सेंटर’</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140670/drdo-scientists-working-on-creating-human-robots-for-military-missions"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/5323_artificial-intelligence-brain-think-mental-power.jpg" alt=""></a><br /><div class="content-profession">
<p>पुणे, 10 मई (भाषा) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक एक मानव रोबोट बनाने पर काम कर रहे हैं जिसे अग्रिम मोर्चे पर सैन्य मिशन का हिस्सा बनाया जा सकता है।</p>
<p>अधिकारी ने बताया कि डीआरडीओ के अंतर्गत आने वाली प्रमुख प्रयोगशाला अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर्स) एक ऐसी मशीन बना रही है, जो सीधे तौर पर मानव निर्देश के तहत जटिल कार्य को अंजाम दे सकती है। इसका उद्देश्य उच्च जोखिम वाले वातावरण में सैनिकों के लिए खतरों को कम करना है।</p>
<p>अनुसंधान एवं विकास (इंजीनियर्स) के अंतर्गत आने वाले ‘सिस्टम एंड टेक्नोलॉजीज फॉर एडवांस्ड रोबोटिक्स सेंटर’ के समूह निदेशक एस. ई. तलोले ने कहा कि टीम चार साल से इस परियोजना पर काम कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने ऊपरी और निचले हिस्से के लिए अलग-अलग प्रोटोटाइप विकसित किए हैं और आंतरिक परीक्षणों के दौरान कुछ कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।”</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि यह रोबोट जंगल जैसे कठिन इलाकों में भी काम करने में सक्षम होगा। इस रोबोट को हाल ही में पुणे में आयोजित ‘एडवांस्ड लेग्ड रोबोटिक्स’ से संबंधित राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रदर्शित किया गया।</p>
<p>इसे बनाने वाली टीम फिलहाल ऑपरेटर के आदेशों को समझने और उन्हें निष्पादित करने की रोबोट की क्षमता को निखारने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।</p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 May 2025 15:32:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>2028 तक 98% पीसी होंगे AI-सक्षम: डेल के कार्यकारी की भविष्यवाणी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2025: वैश्विक कंप्यूटिंग परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आने वाला है, क्योंकि डेल टेक्नोलॉजीज के एक वरिष्ठ कार्यकारी ने भविष्यवाणी की है कि 2028 तक सभी पीसी का 98% हिस्सा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से सक्षम होगा। डेल टेक्नोलॉजीज इंडिया के क्लाइंट सॉल्यूशंस ग्रुप के वरिष्ठ निदेशक और महाप्रबंधक, इंद्रजीत बेलगुंडी ने यह बात कही।</p>
<p>बेलगुंडी ने पीटीआई को बताया कि AI पीसी की मांग सभी आयु समूहों, उद्योगों और श्रेणियों में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "2028 तक, लगभग 98% पीसी AI पीसी होंगे, जो न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट्स (NPUs) से लैस होंगे। ये यूनिट्स</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140020/by-2028-98-pcs-will-be-ai-competent-dells-executive"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-11/8243_work-from-home.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2025: वैश्विक कंप्यूटिंग परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आने वाला है, क्योंकि डेल टेक्नोलॉजीज के एक वरिष्ठ कार्यकारी ने भविष्यवाणी की है कि 2028 तक सभी पीसी का 98% हिस्सा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से सक्षम होगा। डेल टेक्नोलॉजीज इंडिया के क्लाइंट सॉल्यूशंस ग्रुप के वरिष्ठ निदेशक और महाप्रबंधक, इंद्रजीत बेलगुंडी ने यह बात कही।</p>
<p>बेलगुंडी ने पीटीआई को बताया कि AI पीसी की मांग सभी आयु समूहों, उद्योगों और श्रेणियों में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "2028 तक, लगभग 98% पीसी AI पीसी होंगे, जो न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट्स (NPUs) से लैस होंगे। ये यूनिट्स डिवाइस पर ही AI कार्यों को तेजी से, सुरक्षित रूप से और ऊर्जा-कुशल तरीके से चलाएंगे। इससे कार्यदिवस में उत्पादकता, रचनात्मकता और सहयोग नए स्तरों पर पहुंचेगा। यह एक बड़ा बदलाव होगा।"</p>
<p>यह भविष्यवाणी डेल की नई AI पीसी लाइनअप के लॉन्च के मौके पर की गई, जिसमें डेल प्रो और डेल प्रो मैक्स जैसे मॉडल शामिल हैं। ये पीसी इंटेल कोर अल्ट्रा, AMD राइजेन प्रोसेसर और क्वालकॉम स्नैपड्रैगन कोपायलट+ AI पीसी जैसे विविध सिलिकॉन विकल्पों के साथ आते हैं।</p>
<p><strong>एज कंप्यूटिंग की बढ़ती भूमिका</strong></p>
<p>बेलगुंडी ने बताया कि AI अब एज कंप्यूटिंग की ओर बढ़ रहा है। एज कंप्यूटिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसमें डेटा को उसके स्रोत के पास, जैसे डिवाइस या स्थानीय सर्वर पर प्रोसेस किया जाता है, न कि दूरस्थ डेटा सेंटर या क्लाउड पर। इससे डेटा प्रोसेसिंग में देरी कम होती है, बैंडविड्थ की बचत होती है और रीयल-टाइम जानकारी तेजी से मिलती है। उन्होंने कहा, "भारत और दुनिया भर के ग्राहकों के लिए सही AI पीसी या AI क्लाइंट डिवाइस अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं।"</p>
<p><strong>भारत में AI पीसी की मांग में उछाल</strong></p>
<p>भारत में उपभोक्ता पीसी बाजार में वृद्धि देखी जा रही है, जिसमें गेमिंग और AI-सक्षम पीसी की मांग प्रमुख है। बेलगुंडी ने कहा कि भारत डेल टेक्नोलॉजीज के लिए शीर्ष पांच वैश्विक बाजारों में से एक है। उन्होंने जोर देकर कहा, "भारत न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक ऐसा बाजार है जहां हम हाइपर-ग्रोथ हासिल करना चाहते हैं।"</p>
<p>डेल ने भारत की इस वृद्धि को समर्थन देने में सक्रिय भूमिका निभाई है। कंपनी ने आईटी हार्डवेयर के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के पहले चरण में भाग लिया और नई कंपोनेंट योजना के लिए एक प्रस्ताव भी जमा किया है।</p>
<p><strong>डेल का प्रदर्शन और बाजार हिस्सेदारी</strong></p>
<p>मार्केट रिसर्च फर्म IDC के अनुसार, डेल टेक्नोलॉजीज भारत के पीसी बाजार में 16.1% हिस्सेदारी रखती है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में 95.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 8% अधिक है। डेल ने पूरे साल के लिए 8% राजस्व वृद्धि का अनुमान भी दिया है।</p>
<p><strong>AI हार्डवेयर में वैश्विक रुझान</strong></p>
<p>AI हार्डवेयर के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है। ओपनएआई के डेटा के अनुसार, 2012 से 2017 तक डीप लर्निंग के लिए कंप्यूटिंग पावर में 300,000 गुना वृद्धि हुई है। 2023 तक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) ने बाजार पर कब्जा कर लिया था, जो जटिल एल्गोरिदम को संभालने में अपनी बेहतर क्षमता के लिए जाने जाते हैं।</p>
<p>डेल की यह भविष्यवाणी और नए AI पीसी की लॉन्चिंग तकनीकी नवाचार की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो भारत और वैश्विक स्तर पर कंप्यूटिंग के भविष्य को नया आकार दे सकता है।</p>
<p>(द इकोनॉमिक टाइम्स से इनपुट के साथ)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 01:44:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;हॉटमेल के सह-संस्थापक सबीर भाटिया ने भारतीय इंजीनियरिंग सिस्टम पर उठाए सवाल, कहा- '99% इंजीनियर बन जाते हैं ज्ञानदाता'&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 9 अप्रैल 2025: हॉटमेल के सह-संस्थापक सबीर भाटिया ने हाल ही में भारतीय इंजीनियरिंग सिस्टम और शिक्षा व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी की है। एक पॉडकास्ट में बोलते हुए भाटिया ने कहा कि भारत में 99% इंजीनियर वास्तविक इंजीनियरिंग कार्य नहीं करते, बल्कि वे प्रबंधन की भूमिकाओं में चले जाते हैं और "ज्ञान देने" में लग जाते हैं। उन्होंने भारत में नवाचार की कमी के लिए देश की "ट्रेडर मानसिकता" को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें लोग नया बनाने के बजाय पहले से हो चुके काम को दोहराने पर ध्यान देते हैं।</p>
<p>भाटिया ने भारत को एक नवाचार केंद्र बनने से रोकने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139957/hotmail-co-founder-sabir-bhatia-said-questions-raised-on-indian-engineering"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-03/loktej-defult-news-image.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 9 अप्रैल 2025: हॉटमेल के सह-संस्थापक सबीर भाटिया ने हाल ही में भारतीय इंजीनियरिंग सिस्टम और शिक्षा व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी की है। एक पॉडकास्ट में बोलते हुए भाटिया ने कहा कि भारत में 99% इंजीनियर वास्तविक इंजीनियरिंग कार्य नहीं करते, बल्कि वे प्रबंधन की भूमिकाओं में चले जाते हैं और "ज्ञान देने" में लग जाते हैं। उन्होंने भारत में नवाचार की कमी के लिए देश की "ट्रेडर मानसिकता" को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें लोग नया बनाने के बजाय पहले से हो चुके काम को दोहराने पर ध्यान देते हैं।</p>
<p>भाटिया ने भारत को एक नवाचार केंद्र बनने से रोकने वाली इस मानसिकता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "भारत में उन लोगों को सम्मान दिया जाता है जो बिजनेस की बात करते हैं, न कि उन लोगों को जो कोड लिखते हैं या सॉफ्टवेयर बनाते हैं।" उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को अपनी विशेषज्ञता का क्षेत्र चुनना होगा और रचनात्मकता पर ध्यान देना होगा। इसके साथ ही, उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था की लागत पर भी सवाल उठाए। भाटिया ने बताया कि जहां चीन में शिक्षा को सब्सिडी दी जाती है और अधिक लोग इसे हासिल कर सकते हैं, वहीं भारत में यह अमीरों तक सीमित हो गई है, जिससे व्यापक स्तर पर प्रतिभा का विकास रुक रहा है।</p>
<p>यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में तकनीकी शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने की बात जोर-शोर से हो रही है। भाटिया की यह बात उन लाखों इंजीनियरिंग छात्रों और पेशेवरों के लिए एक चेतावनी है जो तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने की उम्मीद रखते हैं। उनकी यह सलाह कि भारत को रचनात्मकता और मूल सॉफ्टवेयर निर्माण पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल आउटसोर्सिंग पर, देश के तकनीकी भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण हो सकती है।</p>
<p>सबीर भाटिया की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मुंबई की एक तस्वीर के साथ ट्विटर पर इस मुद्दे को उठाने वाले यूजर @schandrabxr ने लिखा, "💭 नवाचार की कमी का कारण हमारी ‘ट्रेडर माइंडसेट’ है — जो नया बनाए उससे ज़्यादा जो पहले हो चुका है वही दोहराते हैं।" इस पोस्ट ने कई लोगों का ध्यान खींचा है और भारतीय इंजीनियरिंग सिस्टम पर बहस को तेज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/139957/hotmail-co-founder-sabir-bhatia-said-questions-raised-on-indian-engineering</link>
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                <pubDate>Wed, 09 Apr 2025 08:07:00 +0530</pubDate>
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                <title>नयी प्रौद्योगिकी अपनाने के वैश्विक सूचकांक में भारत 170 देशों में 36वें स्थान पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(योषिता सिंह)</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र, चार अप्रैल (भाषा) अग्रणी प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तत्परता के मामले में दुनियाभर के 170 देशों की रैंकिंग में भारत 36वें स्थान पर है। संयुक्त राष्ट्र ने इस बारे में रिपोर्ट जारी की है।</p>
<p>विश्व निकाय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की रैंकिंग में पिछले वर्षों की तुलना में सुधार हुआ है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (यूएनसीटीएडी) द्वारा जारी प्रौद्योगिकी और नवाचार रिपोर्ट 2025 में कहा गया है कि भारत 2024 में ‘अग्रणी प्रौद्योगिकी के लिए तत्परता’ सूचकांक में 36वें स्थान पर है, जो 2022 में उसके प्रदर्शन से बेहतर है। 2022 में भारत इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139832/india-ranks-36th-in-170-countries-in-the-global-index"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-11/8243_work-from-home.jpg" alt=""></a><br /><p>(योषिता सिंह)</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र, चार अप्रैल (भाषा) अग्रणी प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तत्परता के मामले में दुनियाभर के 170 देशों की रैंकिंग में भारत 36वें स्थान पर है। संयुक्त राष्ट्र ने इस बारे में रिपोर्ट जारी की है।</p>
<p>विश्व निकाय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की रैंकिंग में पिछले वर्षों की तुलना में सुधार हुआ है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (यूएनसीटीएडी) द्वारा जारी प्रौद्योगिकी और नवाचार रिपोर्ट 2025 में कहा गया है कि भारत 2024 में ‘अग्रणी प्रौद्योगिकी के लिए तत्परता’ सूचकांक में 36वें स्थान पर है, जो 2022 में उसके प्रदर्शन से बेहतर है। 2022 में भारत इस सूचकांक में 48वें स्थान पर था।</p>
<p>इस रैंकिंग में उन देशों को शामिल किया गया है, जो नयी एवं अहम तकनीकों को अपनाने में तत्परता दिखाते हैं।</p>
<p>सूचकांक में आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) परिनियोजन, कौशल, अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) गतिविधि, औद्योगिक क्षमता और वित्त तक पहुंच के संकेतकों को शामिल किया गया है।</p>
<p>भारत आईसीटी के लिए 99वें, कौशल के लिए 113वें, आरएंडडी के लिए तीसरे, औद्योगिक क्षमता के लिए 10वें और वित्त के लिए 70वें स्थान पर है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव संसाधन के मामले में भूटान, भारत, मोरक्को, मालदोवा गणराज्य और तिमोर-लेस्ते की रैंकिंग में सुधार हुआ है।</p>
<p>इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्राजील, चीन, भारत और फिलीपीन विकासशील देश हैं जो प्रौद्योगिकी तत्परता में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘उम्मीद की जा सकती है कि प्रति व्यक्ति उच्च जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वाले देश अत्याधुनिक तकनीकों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं। लेकिन... कुछ देश अपनी आय के स्तर से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हैं, जैसा कि प्रति व्यक्ति जीडीपी पर सूचकांक स्कोर से संकेत मिलता है।’’</p>
<p>इसमें यह भी कहा गया है, ‘‘विकासशील देशों को एक ऐसी दुनिया के लिए खुद को तैयार रखने की जरूरत है जो बदलती तकनीक और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) द्वारा तेजी से नया रूप ले रही है। विकसित देश इस रैंकिंग में शीर्ष पर हैं, लेकिन कुछ विकासशील देशों जैसे सिंगापुर, चीन और भारत ने भी शीर्ष स्थान हासिल किया है।’’</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, चीन, जर्मनी, भारत, ब्रिटेन और अमेरिका ने एआई के क्षेत्र में अपनी वैज्ञानिक ताकत दिखाई है।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि एआई में निवेश के मामले में अमेरिका सबसे आगे है और साल 2023 में अमेरिका ने एआई में 67 अरब डॉलर का निवेश किया था। यह पूरी दुनिया में एआई के क्षेत्र में हुए निवेश का 70 प्रतिशत है। इसके बाद चीन ने एआई में 7.8 अरब डॉलर निवेश किए हैं और वह दूसरे स्थान पर है। 1.4 अरब डॉलर के निवेश के साथ भारत इस मामले में 10वें स्थान पर है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2033 तक दुनियाभर में एआई बाजार 4.8 खरब डॉलर का होगा और डिजिटल बदलाव में इसकी अहम भूमिका होगी।</p>
<p>हालांकि एआई बुनियादी ढांचे और विशेषज्ञता तक पहुंच कुछ ही अर्थव्यवस्थाओं तक केंद्रित है। एआई के क्षेत्र में 100 प्रमुख कंपनियां काम कर रही हैं और इनमें से अधिकतर अमेरिका और चीन में ही हैं। ये दोनों देश एआई में अनुसंधान और विकास में कुल व्यय का 40 फीसदी खर्च कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Apr 2025 14:29:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अब डिजिलॉकर के जरिये डीमैट, म्यूचुअल फंड का विवरण ले सकेंगे उपयोगकर्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) निवेशक दस्तावेज संग्रह के डिजिटल मंच ‘डिजिलॉकर’ के जरिये अब अपने डीमैट खाते का विवरण और म्यूचुअल फंड से संबंधित जानकारी को स्टोर करने के साथ उसे देख सकते हैं। यह व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो गई है।</p>
<p>इस पहल से भारतीय प्रतिभूति बाजार में बिना दावे वाली संपत्तियों में कमी आएगी और निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।</p>
<p>डिजिलॉकर सरकार की एक अहम डिजिटल सेवा है, जो नागरिकों को डिजिटल रूप में दस्तावेज़ों को सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने और साझा करने की सुविधा देती है।</p>
<p>सरकार ने डिजिलॉकर पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139769/now-users-will-be-able-to-take-details-of-demat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-03/telephone-wifi-hotspot-social-media-smart-phone-internet-mobile-sms-chat-crime1.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) निवेशक दस्तावेज संग्रह के डिजिटल मंच ‘डिजिलॉकर’ के जरिये अब अपने डीमैट खाते का विवरण और म्यूचुअल फंड से संबंधित जानकारी को स्टोर करने के साथ उसे देख सकते हैं। यह व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो गई है।</p>
<p>इस पहल से भारतीय प्रतिभूति बाजार में बिना दावे वाली संपत्तियों में कमी आएगी और निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।</p>
<p>डिजिलॉकर सरकार की एक अहम डिजिटल सेवा है, जो नागरिकों को डिजिटल रूप में दस्तावेज़ों को सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने और साझा करने की सुविधा देती है।</p>
<p>सरकार ने डिजिलॉकर पर उपलब्ध सेवाओं का विस्तार कर दिया है, जिसमें पहले से ही बैंक खाता विवरण, बीमा पॉलिसी प्रमाणपत्र और एनपीएस खाता विवरण शामिल हैं।</p>
<p>डिजिलॉकर उपयोगकर्ता अब अपने डीमैट खातों के साथ अपने समेकित खाता विवरण (सीएएस) के जरिये शेयरों और म्यूचुअल फंड इकाइयों का विवरण प्राप्त और संग्रहीत कर सकते हैं।</p>
<p>इसके अलावा, उपयोगकर्ता अपने डिजिलॉकर खातों में नॉमित व्यक्ति को भी जोड़ सकते हैं। इससे उपयोगकर्ता के निधन के बाद उपयोगकर्ता के दस्तावेजों तक पहुंच मिल सकेगी। इससे परिवार के सदस्यों या कानूनी उत्तराधिकारियों को मृतक की वित्तीय संपत्तियों का अधिक आसानी से प्रबंधन करने में मदद मिलती है।</p>
<p>इसके अलावा, डिजिलॉकर प्रणाली मृत्यु प्रमाण पत्र या केवाईसी पंजीकरण एजेंसियों (केआरए) से मिले विवरण से प्राप्त सूचना का उपयोग करके किसी उपयोगकर्ता की मृत्यु पर उसके खाते की स्थिति को भी अद्यतन कर सकती है।</p>
<p>उपयोगकर्ता की मृत्यु के बाद डिजिलॉकर स्वचालित रूप से नामित व्यक्तियों को एसएमएस और ईमेल के माध्यम से सूचित करता है, जिससे उन्हें मृतक की संपत्ति का प्रबंधन करने में मदद मिलती है।</p>
<p>परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां (एएमसी), आरटीए और डिपॉजिटरी संस्थान डिजिलॉकर के साथ पंजीकरण करेंगी ताकि निवेशक अपने म्यूचुअल फंड एवं डीमैट खाते का विवरण प्राप्त कर सकें।</p>
<p>इस तरह से बाजार नियामक सेबी निष्क्रिय खातों, संपर्क या बैंक विवरण की कमी जैसे मुद्दों पर ध्यान देकर प्रतिभूति बाजार में बिना दावे वाली संपत्तियों को कम करना चाहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 20:37:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लम्बी दूरी के परिवहन के दौरान फल-सब्जियों और मछलियों को खराब होने से बचाएगा ‘‘शिवाय’’</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इंदौर (मध्यप्रदेश), 20 फरवरी (भाषा) इंदौर के राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (आरआर-कैट) ने फल-सब्जियों और मछलियों सरीखे जल्द खराब हो जाने वाले खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखकर लम्बी दूरी तक इनके परिवहन के लिए एक प्रशीतक कंटेनर की पर्यावरण हितैषी तकनीक विकसित की है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ‘‘शिवाय’’ (शीतल वाहक यंत्र) नाम के इस कंटेनर की खास बात यह है कि यह कंटेनर द्रव नाइट्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करता है जिससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होता।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रमुख संस्थान आरआर-कैट ने इस कंटेनर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/135421/during-long-distance-transport--fruits-and-vegetables-and-fish-will-save-%22shivaay%22"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-02/k20022025-03.jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर (मध्यप्रदेश), 20 फरवरी (भाषा) इंदौर के राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (आरआर-कैट) ने फल-सब्जियों और मछलियों सरीखे जल्द खराब हो जाने वाले खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखकर लम्बी दूरी तक इनके परिवहन के लिए एक प्रशीतक कंटेनर की पर्यावरण हितैषी तकनीक विकसित की है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ‘‘शिवाय’’ (शीतल वाहक यंत्र) नाम के इस कंटेनर की खास बात यह है कि यह कंटेनर द्रव नाइट्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करता है जिससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होता।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रमुख संस्थान आरआर-कैट ने इस कंटेनर की तकनीक सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की एक निजी कम्पनी को हस्तांतरित की है। इंदौर की कम्पनी ने इस तकनीक को अमली जामा पहनाते हुए कंटेनर बनाया है।</p>
<p>केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद की मौजूदगी में आरआर-कैट में बुधवार देर शाम आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस कंटेनर को इसके पहले ग्राहक को सौंपा गया।</p>
<p>आरआर-कैट के वैज्ञानिक प्रशांत खरे ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ को बताया, ‘‘द्रव नाइट्रोजन से चलने वाले इस कंटेनर में तापमान और नमी को अलग-अलग उत्पादों के मुताबिक नियंत्रित किया जा सकता है।’’</p>
<p>खरे ने बताया कि फल-सब्जियों और मछलियों को इस कंटेनर में रखकर 1,000 किलोमीटर की दूरी तक ताजा बनाए रखने में महज एक रुपये प्रति किलोग्राम का खर्च आता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि कंटेनर की तकनीक बेहद किफायती लागत में विकसित की गई है जिसका पेटेंट भारत सरकार के पास है।</p>
<p>खरे ने यह भी बताया कि "इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग" ने इस तकनीक को इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्वतंत्र भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों में शामिल किया है।</p>
<p>भाषा हर्ष मनीषा</p>
<p>मनीषा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Feb 2025 13:55:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्यप्रदेश: किसानों की फल-सब्जियों का रक्षा कवच बनेगी एलईडी लाइट वाली तकनीक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इंदौर (मध्यप्रदेश), चार दिसंबर (भाषा) इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने किसानों की फल-सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए एलईडी लाइट आधारित खास भंडारण तकनीक विकसित की है। आईआईटी के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>अधिकारी ने बताया कि तीन साल के अनुसंधान के बाद विकसित यह तकनीक ‘‘फोटोडाइनेमिक इनेक्टिवेशन’’ (पीडीआई) विधि का उपयोग करते हुए फल-सब्जियों को पूरी तरह रोगाणुमुक्त करती है और उन पर सूक्ष्मजीवों को पनपने से रोकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह तकनीक खासकर छोटे खेतों वाले उन किसानों के लिए बड़ी फायदेमंद साबित हो सकती है जो अपनी उपज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/106303/madhya-pradesh--led-light-technology-will-become-the-protective-shield-for-farmers--fruits-and-vegetables"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-06/plough-ox-farmer-field-agriculture-land.jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर (मध्यप्रदेश), चार दिसंबर (भाषा) इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने किसानों की फल-सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए एलईडी लाइट आधारित खास भंडारण तकनीक विकसित की है। आईआईटी के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>अधिकारी ने बताया कि तीन साल के अनुसंधान के बाद विकसित यह तकनीक ‘‘फोटोडाइनेमिक इनेक्टिवेशन’’ (पीडीआई) विधि का उपयोग करते हुए फल-सब्जियों को पूरी तरह रोगाणुमुक्त करती है और उन पर सूक्ष्मजीवों को पनपने से रोकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह तकनीक खासकर छोटे खेतों वाले उन किसानों के लिए बड़ी फायदेमंद साबित हो सकती है जो अपनी उपज को बेहतर दाम मिलने तक अपने घर में सुरक्षित रखना चाहते हैं।</p>
<p>आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर देबायन सरकार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया,‘‘हमारी तकनीक की मदद से 10 गुणा 10 वर्ग फुट के कमरे में हर माह केवल 1,000 रुपये के खर्च में बिना शीत भंडारण के फल-सब्जियों को 30 से 40 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है।’’</p>
<p>आईआईटी के प्रोफेसर ने बताया कि इस तकनीक के तहत फल-सब्जियों पर विशेष तरंगदैर्ध्य वाली नीली और हरी एलईडी लाइट डाली जाती है और उन पर प्रकाश के अवशोषक के तौर पर विटामिन बी2 का खास छिड़काव किया जाता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि तकनीक को एक मोबाइल ऐप से जोड़ा गया है जिससे किसान अपने भंडार कक्ष से दूर रहकर भी फल-सब्जियों की निगरानी कर सकते हैं।</p>
<p>सरकार ने बताया कि इस तकनीक की मदद से खुले खाद्य पदार्थों के साथ ही डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों को भी रोगाणुमुक्त रखा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/106303/madhya-pradesh--led-light-technology-will-become-the-protective-shield-for-farmers--fruits-and-vegetables</link>
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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 08:00:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MBIG के CEO शुभम पारखेड़कर और अमन बंसोड़ ने दिया फ्री इंटर्नशिप ओम पॉलिटेक्निक कॉलेज उमरेड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भंडारा की एमबीआईजी कंपनी ने उमरेड के ओम पॉलिटेक्निक कॉलेज में 7 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया.</p>
<p>इस कार्यशाला में कंपनी ने छात्रों को फुल स्टैक वेब डेवलपर्स के रूप में प्रशिक्षित किया। कार्यशाला के अंत में कंपनी ने छात्रों का साक्षात्कार लिया और 10 छात्रों को मुफ्त इंटर्नशिप के लिए चुना।</p>
<p>  MBiG कंपनी ने फ्री इंटर्नशिप का ऑफर देकर छात्रों को उनके करियर की शुरुआत में ही अच्छा अनुभव देने की कोशिश की है। इंटर्नशिप छात्रों को किसी कंपनी की वास्तविक कार्यप्रणाली का अनुभव करने और अपने कौशल विकसित करने का अवसर देती है।</p>
<p><strong>  चयनित छात्रों की सूची:</strong></p>
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<p> <strong>कार्यशाला</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/95957/mbig-ceo-shubham-parkhedkar-and-aman-bansod-gave-free-internship"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-09/img-20230928-wa0267.jpg" alt=""></a><br /><p>भंडारा की एमबीआईजी कंपनी ने उमरेड के ओम पॉलिटेक्निक कॉलेज में 7 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया.</p>
<p>इस कार्यशाला में कंपनी ने छात्रों को फुल स्टैक वेब डेवलपर्स के रूप में प्रशिक्षित किया। कार्यशाला के अंत में कंपनी ने छात्रों का साक्षात्कार लिया और 10 छात्रों को मुफ्त इंटर्नशिप के लिए चुना।</p>
<p> MBiG कंपनी ने फ्री इंटर्नशिप का ऑफर देकर छात्रों को उनके करियर की शुरुआत में ही अच्छा अनुभव देने की कोशिश की है। इंटर्नशिप छात्रों को किसी कंपनी की वास्तविक कार्यप्रणाली का अनुभव करने और अपने कौशल विकसित करने का अवसर देती है।</p>
<p><strong> चयनित छात्रों की सूची:</strong></p>
<ol>
<li>    अश्विनी फरकाड़े</li>
<li>    संस्कृति सहारे</li>
<li>    मानसी सोनघरे</li>
<li>    सानिध्य गजभिए</li>
<li>    वृषाली पडोले</li>
<li>    प्रियांशु उके</li>
<li>    प्रणिता भांडे</li>
<li>    अहसान अंशारी</li>
<li>    अंजलि कोकाडे</li>
<li>    अथर्व धांडे</li>
</ol>
<p> <strong>कार्यशाला के उद्देश्य:</strong></p>
<p>छात्रों को कंपनी के प्रोग्रामिंग विभागों की कार्यप्रणाली से परिचित कराना।</p>
<p>ताकि छात्रों को कंपनी की तकनीक की बेहतर समझ हो सके।</p>
<p>छात्रों को अपने कौशल विकसित करने का अवसर देना।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 21:49:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजपाल यादव, ईस्टर्न पे के ब्रॉन्ड एम्बेसडर बने, लोगों से की जुड़ने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हिंदुस्तान में मशहूर कॉमेडियन बॉलीवुड फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ईस्टर्न पे डिजिटल प्लेटफॉर्म के ब्रांड एम्बेसडर बनाये गए। इस ईस्टर्न पे के बारे में बात करते हुए ईस्टर्न हाईलैंड्स ग्रुप के फाउंडर व चेयरमैन रूपेश आर पांडेय ने बताया कि अब आप ईस्टर्न पे से भी डिजिटल लेन देन कर सकते हैं। आप कहीं भी पैसा भेज सकते हैं, किसी भी जगह से शॉपिंग कर सकते हैं। किसी भी साइट से टिकट बुकिंग कर सकते हैं। यानी एक और यूपीआई आईडी का विकल्प आपके पास आ गया है ।</p>
<p>यह ईस्टर्न पे ठीक उसी तरह से काम करता है जैसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91636/rajpal-yadav-became-the-brand-ambassador-of-eastern-pay-appealed"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/k27042023-04.jpg" alt=""></a><br /><p>हिंदुस्तान में मशहूर कॉमेडियन बॉलीवुड फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ईस्टर्न पे डिजिटल प्लेटफॉर्म के ब्रांड एम्बेसडर बनाये गए। इस ईस्टर्न पे के बारे में बात करते हुए ईस्टर्न हाईलैंड्स ग्रुप के फाउंडर व चेयरमैन रूपेश आर पांडेय ने बताया कि अब आप ईस्टर्न पे से भी डिजिटल लेन देन कर सकते हैं। आप कहीं भी पैसा भेज सकते हैं, किसी भी जगह से शॉपिंग कर सकते हैं। किसी भी साइट से टिकट बुकिंग कर सकते हैं। यानी एक और यूपीआई आईडी का विकल्प आपके पास आ गया है ।</p>
<p>यह ईस्टर्न पे ठीक उसी तरह से काम करता है जैसे गूगल पे, फोन पे पेटीएम और भीम ऐप काम करते हैं। अगर कोई भी नया कस्टमर ईस्टर्न पे से जुड़ता है वो इस समय उसे शानदार रिवॉर्ड मिलेंगे। कम्पनी अपने ग्राहकों की सुविधाओं का बेहद खास ख्याल रखेगी। कम्पनी ने राजपाल यादव को अपना ब्रांड अम्बेस्डर बनाया है।</p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2023-04/k27042023-04.jpg" alt="k27042023-04"></img><br /><br />मशहूर कॉमेडियन व अभिनेता राजपाल यादव ने बताया कि ईस्टर्न पे बेहद शानदार डिजिटल पे प्लेटफॉर्म है। इससे जुड़कर उन्हें बेहद अच्छा लगा कि एक शानदार इंसान जो पहले से ही बैंकिंग और फाइनेंशियल मार्किट को रिप्रेजेंट कर रहा है, वह यदि इस तरह के डिजिटल ई पे जैसे प्लेटफॉर्म को लेकर आते हैं तो इसका इम्पैक्ट लोगों पर बहुत अनुकूल पड़ेगा। राजपाल यादव ने आम लोगों से भी इस ई पे प्लेटफॉर्म ईस्टर्न पे को डाउनलोड करने और इस्तेमाल करने की अपील की।</p>
<p>राजपाल यादव ने बताया की इस ऐड को निर्देशक राजीव श्रीवास्तव ने निर्देशित किया है जिन्होंने कई ऐड को पहले ही सुपर हिट कर चुके है। छायांकन अशोक मेहता, प्रोडक्शन चंद्र भूषण और प्रचारक संजय भूषण पटियाला हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/91636/rajpal-yadav-became-the-brand-ambassador-of-eastern-pay-appealed</link>
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                <pubDate>Thu, 27 Apr 2023 12:33:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व : इस देश ने लगाया चैटजीपीटी पर प्रतिबंध, बताया लोगों की निजता के लिए खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">ओपन एआई OpenAI द्वारा 30 नवंबर को रिलीज हुआ चैट जीपीटी ने इन दिनों लगातार चर्चा में बना हुआ है। केवल एक हफ्ते में, इस चैटजीपीटी ने वह कर दिखाया जो बड़े तकनीकी दिग्गज नहीं कर सके। ChatGPT एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल है, जिसमें कंपनी द्वारा फीड किए गए सभी डेटा हैं। इस AI टूल का इस्तेमाल आज पूरी दुनिया में हो रहा है और लोग इस पर काफी हद तक निर्भर हो गए हैं। हालांकि, दुनियाभर में लोकप्रियता हासिल कर रहा यह चैटबॉट हाल ही में कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया है।</p>
<p dir="ltr"><strong>इटली सरकार ने चैटजीपीटी</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90923/this-country-banned-chatgpt-said-it-was-a-threat-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/news-photo.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">ओपन एआई OpenAI द्वारा 30 नवंबर को रिलीज हुआ चैट जीपीटी ने इन दिनों लगातार चर्चा में बना हुआ है। केवल एक हफ्ते में, इस चैटजीपीटी ने वह कर दिखाया जो बड़े तकनीकी दिग्गज नहीं कर सके। ChatGPT एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल है, जिसमें कंपनी द्वारा फीड किए गए सभी डेटा हैं। इस AI टूल का इस्तेमाल आज पूरी दुनिया में हो रहा है और लोग इस पर काफी हद तक निर्भर हो गए हैं। हालांकि, दुनियाभर में लोकप्रियता हासिल कर रहा यह चैटबॉट हाल ही में कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया है।</p>
<p dir="ltr"><strong>इटली सरकार ने चैटजीपीटी को कर दिया है प्रतिबंधित</strong></p>
<p dir="ltr">आपको बता दें कि इटली सरकार ने चैटजीपीटी को प्रतिबंधित कर दिया है। सरकार का मानना है कि यह चैटबॉट लोगों की निजी जानकारियां जुटा रहा है जो नियमों के खिलाफ है। इटली के डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी का मानना ​​है कि ये चैटबॉट सबसे पहले लोगों की निजी जानकारियां कलेक्ट करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह लोगों की निजता के लिए खतरा है।</p>
<p dir="ltr"><strong>क्या है ये चैटजीपीटी और क्यों हैं ये गूगल के लिए खतरा</strong></p>
<p dir="ltr">चैट जीपीटी का फुल फॉर्म Generative Pre-trained Transformer है। जनरेटिव का मतलब कुछ जनरेट करने वाला या बनाने वाला, ट्रेनेड का मतलब जो पहले से ट्रेन किया गया है। वहीं, ट्रांसफार्मर का मतलब ऐसा मशीन लर्निंग मॉडल जो दिए गए टेक्स्ट को आसानी से समझ लेता है। चैट जीबीटी एक चैटबॉट है जिसे ओपन एआई (OpenAI) के द्वारा तैयार किया गया है। ओपन एआई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में रिसर्च करने वाली एक कंपनी है जिसकी शुरुआत 2015 में एलन मस्क और सैम अल्टमैन ने की थी। चैट जीपीटी का चैटबॉट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बेस्ड है जो आपके किसी भी सवाल का जवाब आपको गूगल से बेहतर तरीके में समझा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Apr 2023 19:30:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Google ने शुरू किया जीमेल और गूगल डॉक्स में जनरेटिव AI सुविधाओं का परीक्षण </title>
                                    <description><![CDATA[<p>गूगल ने जीमेल और डॉक्स में अपनी जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सुविधाओं का सार्वजनिक परीक्षण शुरू किया है। वर्तमान यूएस में परीक्षण कार्यक्रम 18 वर्ष से अधिक आयु वाले उपभोक्ता, उद्यम और शिक्षा उपयोगकर्ताओं के लिए शुरू किया गया है। इसके साथ ही टेक जायंट ने कार्यक्रम में भाग लेने के लिए एक "छोटे समूह" को आमंत्रित किया गया है। इसके लिए उपयोगकर्ताओं को साइन अप और ऑप्ट-इन करना होगा। असुविधा होने पर किसी भी समय परीक्षक कार्यक्रम छोड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>एआई से मिलेगी ये सारी सुविधाएँ</strong></p>
<p>आपको बता दें कि जीमेल में जनरेटिव एआई फीचर उपयोगकर्ताओं को जन्मदिन कार्यक्रम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90873/google-starts-testing-generative-ai-features-in-gmail-and-google"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-03/news-photo2.jpg" alt=""></a><br /><p>गूगल ने जीमेल और डॉक्स में अपनी जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सुविधाओं का सार्वजनिक परीक्षण शुरू किया है। वर्तमान यूएस में परीक्षण कार्यक्रम 18 वर्ष से अधिक आयु वाले उपभोक्ता, उद्यम और शिक्षा उपयोगकर्ताओं के लिए शुरू किया गया है। इसके साथ ही टेक जायंट ने कार्यक्रम में भाग लेने के लिए एक "छोटे समूह" को आमंत्रित किया गया है। इसके लिए उपयोगकर्ताओं को साइन अप और ऑप्ट-इन करना होगा। असुविधा होने पर किसी भी समय परीक्षक कार्यक्रम छोड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>एआई से मिलेगी ये सारी सुविधाएँ</strong></p>
<p>आपको बता दें कि जीमेल में जनरेटिव एआई फीचर उपयोगकर्ताओं को जन्मदिन कार्यक्रम के निमंत्रण से लेकर जॉब कवर लेटर तक विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों का मसौदा तैयार करने की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त, Google लेखन को अधिक विस्तृत या छोटा कर सकता है, जिसमें इसे बुलेट बिंदुओं में बदलना भी शामिल है। Google डॉक्स में, एआई टेक्स्ट को और अधिक विस्तृत बना देगा या फिर उपयोगकर्ताओं को ब्लॉग पोस्ट या गीत के बोलों का मसौदा तैयार करने में मदद करने के लिए साथ साथ इसे फिर से लिखने में मदद करेगे।</p>
<p>गौरतलब है कि परीक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागी जीमेल और डॉक्स के माध्यम से प्रतिक्रिया भेज सकते हैं। इसकी मदद से गूगल समय के साथ जनरेटिव एआई सुविधाओं की उपलब्धता का विस्तार करने की योजना पर बेहतर काम कर सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/90873/google-starts-testing-generative-ai-features-in-gmail-and-google</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/90873/google-starts-testing-generative-ai-features-in-gmail-and-google</guid>
                <pubDate>Fri, 31 Mar 2023 19:41:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
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