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                <title>Cyber Security - Loktej</title>
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                <description>Cyber Security RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>स्टारलिंक 30-31 अक्टूबर को मुंबई में सुरक्षा, तकनीकी परीक्षण आयोजित करेगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) एलन मस्क की अगुवाई वाली स्टारलिंक 30 और 31 अक्टूबर को मुंबई में उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए सुरक्षा और तकनीकी शर्तों के अनुपालन का परीक्षण करेगी।</p>
<p>सूत्रों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष किया जाने वाला यह परीक्षण, स्टारलिंक को आवंटित अस्थायी स्पेक्ट्रम पर आधारित होगा।</p>
<p>यह कदम भारतीय उपग्रह ब्रॉडबैंड बाजार में इसके नियोजित प्रवेश से पहले एक महत्वपूर्ण कदम होगा। ये परीक्षण स्टारलिंक के लिए व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले मंजूरी पाने की एक अनिवार्य आवश्यकता है।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि स्टारलिंक जीएमपीसीएस प्राधिकरण की सुरक्षा और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143764/starlink-to-conduct-security-technical-trials-in-mumbai-on-october"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/2596_crime-criminal-security-hacker-code-fraud-technology-cyber.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) एलन मस्क की अगुवाई वाली स्टारलिंक 30 और 31 अक्टूबर को मुंबई में उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए सुरक्षा और तकनीकी शर्तों के अनुपालन का परीक्षण करेगी।</p>
<p>सूत्रों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष किया जाने वाला यह परीक्षण, स्टारलिंक को आवंटित अस्थायी स्पेक्ट्रम पर आधारित होगा।</p>
<p>यह कदम भारतीय उपग्रह ब्रॉडबैंड बाजार में इसके नियोजित प्रवेश से पहले एक महत्वपूर्ण कदम होगा। ये परीक्षण स्टारलिंक के लिए व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले मंजूरी पाने की एक अनिवार्य आवश्यकता है।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि स्टारलिंक जीएमपीसीएस प्राधिकरण की सुरक्षा और तकनीकी शर्तों के अनुपालन को प्रदर्शित करने के लिए एक परीक्षण करेगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि यह परीक्षण 30 और 31 अक्टूबर को मुंबई में आयोजित किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 15:06:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूरोपीय देशों में कई हवाई अड्डों पर दूसरे दिन भी दिखाई दिया साइबर हमले का असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ब्रसेल्स, 21 सितंबर (एपी) कई यूरोपीय हवाई अड्डों पर ‘चेक-इन’ प्रणालियों को प्रभावित करने वाले साइबर हमले का असर रविवार को दूसरे पूरे दिन भी जारी रहा। कई यात्री उड़ान रद्द या विलंबित करनी पड़ीं और हवाई अड्डों को यात्रा योजनाओं को होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<p>शुक्रवार देर रात से ब्रसेल्स, लंदन और बर्लिन के प्रमुख हवाई अड्डों पर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में व्यवधान शुरू हो गया था, जिससे ‘चेक-इन’ में बाधा आई और कर्मचारियों को हाथ से बोर्डिंग पास बनाने या बैकअप लैपटॉप का इस्तेमाल करने जैसे विकल्प आजमाने पड़े। कई अन्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143185/several-airports-in-european-countries-also-showed-the-impact-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/cyberattack-cyber-crime-hacking4.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्रसेल्स, 21 सितंबर (एपी) कई यूरोपीय हवाई अड्डों पर ‘चेक-इन’ प्रणालियों को प्रभावित करने वाले साइबर हमले का असर रविवार को दूसरे पूरे दिन भी जारी रहा। कई यात्री उड़ान रद्द या विलंबित करनी पड़ीं और हवाई अड्डों को यात्रा योजनाओं को होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<p>शुक्रवार देर रात से ब्रसेल्स, लंदन और बर्लिन के प्रमुख हवाई अड्डों पर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में व्यवधान शुरू हो गया था, जिससे ‘चेक-इन’ में बाधा आई और कर्मचारियों को हाथ से बोर्डिंग पास बनाने या बैकअप लैपटॉप का इस्तेमाल करने जैसे विकल्प आजमाने पड़े। कई अन्य यूरोपीय हवाई अड्डे इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ा।</p>
<p>अभी यह स्पष्ट नहीं है कि साइबर हमले में किसका हाथ है, हालांकि विशेषज्ञों ने हैकर्स और आपराधिक संगठनों पर संदेह जताया है।</p>
<p>साइबर हमले ने कॉलिन्स एयरोस्पेस के सॉफ्टवेयर को प्रभावित किया, जिससे चेक-इन, बोर्डिंग पास और बैग टैग प्रिंटिंग और सामान भेजने में मदद मिलती है। अमेरिकी कंपनी ने शनिवार को यूरोप के "कुछ" हवाई अड्डों पर उसके सॉफ्टवेयर में "साइबर संबंधी व्यवधान" की बात कही।</p>
<p>रविवार को लंदन के हीथ्रो और बर्लिन के ब्रांडेनबर्ग हवाई अड्डों के प्रस्थान बोर्ड पर आगमन और प्रस्थान के सुचारू होने के संकेत दिखाई दे रहे थे, लेकिन ब्रुसेल्स हवाई अड्डे पर अब भी काफी समस्याएं थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/143185/several-airports-in-european-countries-also-showed-the-impact-of</link>
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                <pubDate>Sun, 21 Sep 2025 17:57:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी और ‎निजी कंपनियों को हर साल कराना होगा साइबर सिक्योरिटी ऑडिट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई ‎दिल्ली, 28 जुलाई (वेब वार्ता)। भारत सरकार की डिजिटल जोखिम विश्लेषण एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमर्जेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन) ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।</p>
<p>अब सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संगठनों को साल में कम-से-कम एक बार थर्ड पार्टी साइबर सुरक्षा ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। यह पहली बार है जब निजी क्षेत्र के लिए ऐसा निर्देश जारी किया गया है।</p>
<p>नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यह नियम उन सभी संगठनों पर लागू होगा जिनके पास डिजिटल सिस्टम, प्रक्रियाएं या इंफ्रास्ट्रक्चर है, या वे उसका संचालन करते हैं। इसके अलावा, किसी भी बड़े</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142222/government-and-private-companies-will-have-to-get-cyber-security"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/2596_crime-criminal-security-hacker-code-fraud-technology-cyber.jpg" alt=""></a><br /><p>नई ‎दिल्ली, 28 जुलाई (वेब वार्ता)। भारत सरकार की डिजिटल जोखिम विश्लेषण एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमर्जेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन) ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।</p>
<p>अब सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संगठनों को साल में कम-से-कम एक बार थर्ड पार्टी साइबर सुरक्षा ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। यह पहली बार है जब निजी क्षेत्र के लिए ऐसा निर्देश जारी किया गया है।</p>
<p>नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यह नियम उन सभी संगठनों पर लागू होगा जिनके पास डिजिटल सिस्टम, प्रक्रियाएं या इंफ्रास्ट्रक्चर है, या वे उसका संचालन करते हैं। इसके अलावा, किसी भी बड़े तकनीकी बदलाव, सिस्टम ओवरहॉल या कॉन्फ़िग्रेशन बदलाव से पहले भी साइबर ऑडिट जरूरी होगा।</p>
<p>सीईआरटी-इन ने कहा है कि ऑडिट प्रक्रिया जोखिम आधारित और डोमेन-विशिष्ट होनी चाहिए, जो संबंधित कंपनी के कार्य क्षेत्र, खतरे की स्थिति और परिचालन जरूरतों के अनुरूप हो। संगठनों को अब जोखिम मूल्यांकन, पेनिट्रेशन टेस्टिंग, नेटवर्क और सूचना सुरक्षा ऑडिट, सोर्स कोड समीक्षा, और एप्लिकेशन सुरक्षा परीक्षण जैसे उपायों को अपनाना होगा।</p>
<p>इसके साथ ही न्यूनतम विशेषाधिकार नीति को लागू करना भी जरूरी होगा, ताकि कर्मचारियों को केवल उनकी भूमिका के अनुसार ही सीमित पहुंच दी जा सके। रिमोट एक्सेस देने वाले संगठनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी एक्सेस एन्क्रिप्टेड, टनल्ड और लॉग की गई हो।</p>
<p>यह निर्णय बढ़ते साइबर खतरों और संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के मद्देनज़र लिया गया है। इससे साइबर स्वच्छता को देशभर में एक नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 21:38:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पिछले वर्ष 72 प्रतिशत भारतीय कंपनियों पर एआई आधारित साइबर हमले हुए: रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बेंगलुरु, 09 जून (वेब वार्ता)। भारत में पिछले वर्ष करीब 72 प्रतिशत संगठनों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित साइबर हमले हुए हैं। एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।</p>
<p>साइबरसिक्योरिटी फर्म फोर्टिनेट और ग्लोबल रिसर्च एजेंसी आईडीसी की एक लेटेस्ट रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि साइबर अपराधियों के लिए एआई अब एक नया हथियार बन गया है, जिसकी मदद से वे अब पहले से ज्यादा गुप्त और खतरनाक हमले कर सकते हैं।</p>
<p>निष्कर्षों से पता चलता है कि एआई आधारित इन हमलों की न केवल संख्या बढ़ रही है बल्कि इनका पता लगाना भी मुश्किल होता जा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141220/ai-based-cyber-attack-report-on-72-percent-indian-companies"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/2596_crime-criminal-security-hacker-code-fraud-technology-cyber.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु, 09 जून (वेब वार्ता)। भारत में पिछले वर्ष करीब 72 प्रतिशत संगठनों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित साइबर हमले हुए हैं। एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।</p>
<p>साइबरसिक्योरिटी फर्म फोर्टिनेट और ग्लोबल रिसर्च एजेंसी आईडीसी की एक लेटेस्ट रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि साइबर अपराधियों के लिए एआई अब एक नया हथियार बन गया है, जिसकी मदद से वे अब पहले से ज्यादा गुप्त और खतरनाक हमले कर सकते हैं।</p>
<p>निष्कर्षों से पता चलता है कि एआई आधारित इन हमलों की न केवल संख्या बढ़ रही है बल्कि इनका पता लगाना भी मुश्किल होता जा रहा है।</p>
<p>एआई आधारित हमले उन क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां पुराने ट्रेडिशनल साइबर सिक्योरिटी टूल्स भी अप्रभावी बन जाते हैं।</p>
<p>भारत में सबसे आम एआई-इनेबल्ड खतरों में क्रेडेंशियल स्टफिंग, ब्रूट फोर्स अटैक, बिजनेस ईमेल में डीपफेक प्रतिरूपण, एआई-जनरेटेड फिशिंग स्कैम और पॉलीमॉर्फिक मालवेयर शामिल हैं।</p>
<p>इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि भारतीय फर्मों में तैयारी की कमी है। केवल 14 प्रतिशत संगठनों का कहना है कि वे इस तरह के एडवांस अटैक से बचाव करने की अपनी क्षमता को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं।</p>
<p>इस बीच, 36 प्रतिशत संगठनों ने माना कि एआई-आधारित खतरों की पहचान करना उनकी क्षमता से बाहर हो गया है। वहीं, 21 प्रतिशत संगठनों के पास इस तरह के अटैक को ट्रैक करने के लिए कोई सिस्टम नहीं है।</p>
<p>आईडीसी के एशिया/प्रशांत (एपी) क्षेत्र के अनुसंधान उपाध्यक्ष साइमन पिफ ने कहा, “साइबर क्रिमिनल टूलकिट में एआई का उदय अब भविष्य का खतरा नहीं है। यह वर्तमान में मौजूद है।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “संगठनों को आगे रहने के लिए रिएक्टिव रणनीतियों से आगे बढ़ने और प्रीडिक्टिव, इंटेलिजेंस-ड्रिवन साइबर सिक्योरिटी मॉडल अपनाने की जरूरत है।”</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि साइबर जोखिम भारतीय व्यवसायों के जीवन में एक स्थायी समस्या बन गया है। इस तरह के अटैक अब क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन को टारगेट कर रहे हैं।</p>
<p>फिशिंग और रैनसमवेयर जैसे पुराने खतरे अभी भी मौजूद हैं, लेकिन नए अधिक जटिल हमले जैसे कि अंदरूनी खतरे और क्लाउड मिसकॉन्फिगरेशन को अधिक नुकसानदायक माना जाता है।</p>
<p>फोर्टिनेट में भारत और एसएएआरसी के कंट्री मैनेजर विवेक श्रीवास्तव ने कहा, “एआई अब सबसे बड़ा खतरा भी है और सबसे पावरफुल डिफेंस भी है।”</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/141220/ai-based-cyber-attack-report-on-72-percent-indian-companies</link>
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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 15:20:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एयरटेल ने ढाई महीने में आठ अरब स्पैम कॉल को किया चिह्नित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) दूरसंचार सेवाप्रदाता भारती एयरटेल ने उसके नेटवर्क पर स्पैम-रोधी एआई-संचालित समाधान पेश करने के ढाई महीने के भीतर आठ अरब स्पैम कॉल को चिह्नित किया है और 80000 करोड़ स्पैम संदेश रोके हैं।</p>
<p>‘स्पैम’ कॉल व संदेश से तात्पर्य धोखाधड़ी व फर्जी कॉल व संदेश से है।</p>
<p>एयरटेल साइबर धोखाधड़ी के तरीकों का विश्लेषण तथा धोखेबाजों की पहचान करने के लिए काम कर रही है। उसके ग्राहकों को ऐसे कॉल आने पर फोन पर ‘संदिग्ध स्पैम’ का संदेश लिखा दिखाई देता है।</p>
<p>कंपनी ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, उन्नत ‘एल्गोरिदम’ का लाभ उठाते हुए, एआई-संचालित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/108061/airtel-marked-eight-billion-spam-calls-in-two-and-a-half-months"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-11/airtel.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) दूरसंचार सेवाप्रदाता भारती एयरटेल ने उसके नेटवर्क पर स्पैम-रोधी एआई-संचालित समाधान पेश करने के ढाई महीने के भीतर आठ अरब स्पैम कॉल को चिह्नित किया है और 80000 करोड़ स्पैम संदेश रोके हैं।</p>
<p>‘स्पैम’ कॉल व संदेश से तात्पर्य धोखाधड़ी व फर्जी कॉल व संदेश से है।</p>
<p>एयरटेल साइबर धोखाधड़ी के तरीकों का विश्लेषण तथा धोखेबाजों की पहचान करने के लिए काम कर रही है। उसके ग्राहकों को ऐसे कॉल आने पर फोन पर ‘संदिग्ध स्पैम’ का संदेश लिखा दिखाई देता है।</p>
<p>कंपनी ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, उन्नत ‘एल्गोरिदम’ का लाभ उठाते हुए, एआई-संचालित नेटवर्क ने हर दिन करीब 10 लाख धोखाधड़ी भरे फोन व संदेश की पहचान की है। उल्लेखनीय रूप से एयरटेल नेटवर्क पर सभी कॉल में से छह प्रतिशत और सभी संदेश (एसएमएस) में से दो प्रतिशत को स्पैम के तौर पर चिह्नित किया गया। दिल्ली में सबसे अधिक स्पैम कॉल के मामले सामने आए।</p>
<p>इसमें कहा गया, ‘‘ भारत के पहले स्पैम-रोधी नेटवर्क भारती एयरटेल ने अपने एआई-संचालित स्पैम-रोधी समाधान को पेश करने के ढाई महीने के भीतर ही आठ अरब स्पैम कॉल और 8000 करोड़ स्पैम संदेश को चिन्हित किया है।’’</p>
<p>एयरटेल ने पाया कि आश्चर्यजनक रूप से ऐसे 35 प्रतिशत मामलोमें ने लैंडलाइन टेलीफोन का इस्तेमाल किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 14:29:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>मोबाइल मैलवेयर हमलों के मामले में भारत सबसे आगे: जेडस्केलर रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) भारत में किसी भी अन्य देश की तुलना में मोबाइल मैलवेयर हमले सबसे अधिक हो रहे हैं। अमेरिका और कनाडा भी इस मामले में उससे पीछे हैं।</p>
<p>‘जेडस्केलर थ्रेटलैब्ज 2024 मोबाइल, आईओटी एंड ओटी थ्रेट रिपोर्ट’ में जून 2023 से मई 2024 के बीच खतरे से संबंधित मोबाइल लेनदेन और संबंधित साइबर खतरों वाले 20 अरब से अधिक ‘डेटासेट’ का विश्लेषण किया गया।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘ भारत मोबाइल मैलवेयर हमलों का सबसे बड़ा निशाना बन गया है। इस दौरान किए कुल हमलों में से 28 प्रतिशत भारत में किए गए। इसके बाद अमेरिका में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/105818/india-leads-in-mobile-malware-attacks-zscaler-report"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/3318_cyber-crime-victim-hacked.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) भारत में किसी भी अन्य देश की तुलना में मोबाइल मैलवेयर हमले सबसे अधिक हो रहे हैं। अमेरिका और कनाडा भी इस मामले में उससे पीछे हैं।</p>
<p>‘जेडस्केलर थ्रेटलैब्ज 2024 मोबाइल, आईओटी एंड ओटी थ्रेट रिपोर्ट’ में जून 2023 से मई 2024 के बीच खतरे से संबंधित मोबाइल लेनदेन और संबंधित साइबर खतरों वाले 20 अरब से अधिक ‘डेटासेट’ का विश्लेषण किया गया।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘ भारत मोबाइल मैलवेयर हमलों का सबसे बड़ा निशाना बन गया है। इस दौरान किए कुल हमलों में से 28 प्रतिशत भारत में किए गए। इसके बाद अमेरिका में 27.3 प्रतिशत और कनाडा में 15.9 प्रतिशत हमले हुए। भारत इस सूची में पिछले साल तीसरे स्थान पर था इसके अब इस सूची में शीर्ष पर होना भारतीय उद्यमों के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों को अपनाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करता है। खासकर तेजी से डिजिटल बदलाव और बढ़ते साइबर खतरों के बीच...।’’</p>
<p>‘मैलवेयर’ एक सॉफ्टवेयर है जिसका इस्तेमाल मोबाइल या कंप्यूटर पर किसी की पहचान चोरी करने या गोपनीय जानकारी में सेंध लगाने के लिए किया जाता है।</p>
<p>रिपोर्ट में बैंकिंग मैलवेयर हमलों में 29 प्रतिशत की वृद्धि और मोबाइल स्पाइवेयर हमलों में 111 प्रतिशत की चौंका देने वाली वृद्धि का खुलासा किया गया है।</p>
<p>स्पाइवेयर, मैलवेयर का ही एक प्रकार है। इससे किसी व्यक्ति की जानकारी के बिना उसकी निजी जानकारी हासिल की जाती है।</p>
<p>थ्रेटलैब्ज के विश्लेषकों के अनुसार, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस जैसे प्रमुख भारतीय बैंकों के मोबाइल ग्राहकों को निशाना बनाने के फिशिंग प्रयासों में वृद्धि हुई है। ये हमले मोबाइल उपयोगकर्ताओं को वास्तविक बैंकिंग वेबसाइट की हूबहू नकल वाली बैंकिंग वेबसाइट का इस्तेमाल कर निशाना बनाया जाता है।</p>
<p>इससे पहले इसी प्रकार की रणनीति का इस्तेमाल फर्जी कार्ड अपडेट साइट के जरिये एंड्रॉयड-आधारित फिशिंग मैलवेयर फैलाने के लिए किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी हुई।</p>
<p>फिशिंग वास्तव में सॉफ्टवेयर नहीं है, यह जानकारी प्राप्त करने का एक तरीका है। इसमें मैलवेयर का इस्तेमाल करना शामिल हो सकता है। इसमें अक्सर ऐसे ईमेल शामिल होते हैं जिनमें मैलवेयर से संक्रमित वेबसाइटों के लिंक होते हैं।</p>
<p>जेडस्केलर के सीआईएसओ-इंडिया के सुवब्रत सिन्हा ने कहा, ‘‘ लीगेसी सिस्टम और असुरक्षित आईओटी/ओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स/ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी) परिवेश साइबर अपराधियों का प्रमुख निशाना बन रहे हैं। हम इनको लक्षित कर हैकिंग प्रयासों में उल्लेखनीय वृद्धि देख रहे हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ भारतीय उद्यमों के लिए अपने मुख्य परिचालन परिवेश को सुरक्षित करने के लिए एक मजबूत तथा किसी पर भरोसा न करने वाले सुरक्षा ढांचे को अपनाना आवश्यक है। यह न केवल महत्वपूर्ण प्रणालियों की सुरक्षा करेगा, बल्कि तेजी से जुड़ती दुनिया में व्यापार निरंतरता भी सुनिश्चित करेगा’’</p>
<p>रिपोर्ट में एक चिंताजनक वैश्विक प्रवृत्ति का भी संकेत दिया गया है, जिसमें गूगल प्ले स्टोर पर 200 से अधिक ऐसे ऐप मिले जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक थे। वहीं आईओटी मैलवेयर लेनदेन में वार्षिक आधार पर 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो आज साइबर खतरों की व्यापक प्रकृति को रेखांकित करता है।</p>
<p>सकारात्मक बात यह है कि मैलवेयर उत्पत्ति स्थल के रूप में भारत ने सुधार किया है। वह एपीएसी (एशिया-प्रशांत) क्षेत्र में 5वें स्थान से 7वें स्थान पर पहुंच गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Dec 2024 14:49:54 +0530</pubDate>
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                <title>साइबर जगत में महिलाएं और बच्चे कैसे रहें सुरक्षित? सूरत पुलिस कर रही जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">इंटरनेट के वर्तमान दौर में आपराधिक गतिविधियां भी ऑनलाइन हो गई है। पहले जब इंटरनेट के शुरुआती दिन थे तब लोग वेबसाइट सर्फ करने तक ही ऑनलाइन जाया करते थे। लेकिन अब अर्थतंत्र ही ऑनलाइन हो गया है। लोग ई-कॉमर्स वेबसाइट के माध्यम से खरीदारी करने लगे हैं। ऐसे में जहां आर्थिक अपराध भी ऑनलाइन हुए हैं वही लोगों की निजी जानकारियां चुराने वाले शातिर भी ऑनलाइन ब्लैकमलिंग करने लगे हैं। इन्हीं सारे मुद्दों पर आम लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए सूरत शहर पुलिस ने साइबर सुरक्षा हेतु अभियान शुरू किया है।</span><br /></div><div>सूरत शहर पुलिस आगामी 1 सप्ताह तक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/73859/how-do-women-and-children-stay-safe-in-the-cyber-world-surat-police-is-aware"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-03/9956_09032022-01.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">इंटरनेट के वर्तमान दौर में आपराधिक गतिविधियां भी ऑनलाइन हो गई है। पहले जब इंटरनेट के शुरुआती दिन थे तब लोग वेबसाइट सर्फ करने तक ही ऑनलाइन जाया करते थे। लेकिन अब अर्थतंत्र ही ऑनलाइन हो गया है। लोग ई-कॉमर्स वेबसाइट के माध्यम से खरीदारी करने लगे हैं। ऐसे में जहां आर्थिक अपराध भी ऑनलाइन हुए हैं वही लोगों की निजी जानकारियां चुराने वाले शातिर भी ऑनलाइन ब्लैकमलिंग करने लगे हैं। इन्हीं सारे मुद्दों पर आम लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए सूरत शहर पुलिस ने साइबर सुरक्षा हेतु अभियान शुरू किया है।</span><br /></div><div>सूरत शहर पुलिस आगामी 1 सप्ताह तक साइबर जगत में कैसे सचेत होकर काम किया जाए, इस पर लोगों के साथ आवश्यक जानकारियां साझा करेगी। खास उद्देश्य यह है कि महिलाओं और बच्चों को साइबर जगत में सुरक्षित किया जाए। इस बाबत सूरत शहर पुलिस आयुक्त अजय तोमर ने एक खास संदेश वीडियो के माध्यम से सोशल मीडिया पर साझा किया है। आप भी यह संदेश सुनिए और इसमें बताई गई जानकारियों का खुद भी पालन करें और अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके बारे में बताएं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 18:41:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सावधान : कहीं आपके स्मार्ट फोन का की-बोर्ड चुरा तो नहीं रहा आपका डेटा</title>
                                    <description><![CDATA[कीबोर्ड के लिए थर्ड पार्टी एप डाऊनलोड करना पड़ सकता है भारी, बरते ये सावधानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80377/beware-if-your-smartphone-keyboard-is-stolen-your-data-will-not-remain"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/telephone-wifi-hotspot-social-media-smart-phone-internet-mobile-sms-chat-crime.jpg" alt=""></a><br /><div>जैसे-जैसे स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ता है, वैसे-वैसे इसके लिए अलग-अलग ऐप्स की संख्या भी बढ़ती जाती है। आपको गूगल प्ले स्टोर पर एक ही कैटेगरी में बहुत से एप्लीकेशन मिल जाएंगे। कई स्मार्टफोन यूजर्स हैं जो अपने फोन के डिफॉल्ट कीबोर्ड को छोड़कर टाइपिंग के लिए थर्ड पार्टी एप डाउनलोड कर लेते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। वास्तव में इस प्रकार का थर्ड पार्टी टाइपिंग ऐप आपके फोन और आपकी प्राइवेसी के लिए सुरक्षित नहीं है।  आपका डेटा चोरी होने और आपका फोन हैक होने का खतरा है।</div><div>जानकारी के अनुसार ऐसे ऐप्स के जरिए हैकर्स मैलवेयर और वायरस फैलाते हैं। फिर वे फोन हैक कर लेते हैं और फिर आपका व्यक्तिगत डेटा के साथ-साथ आपके बैंकिंग विवरण भी चुरा लेते हैं। कुछ मामलों में, हैकर्स डेटा चोरी भी करते हैं और ब्लैकमेल भी करते हैं। इसके अलावा आपका फोन वायरस की वजह से भी खराब हो सकता है।</div><div>दरअसल, जब आप ऐसे की-बोर्ड डाउनलोड करते हैं, तो वे आपसे ढेर सारी परमिशन ले लेते हैं, जिनमें से बहुत सी अनुमति की जरूरत नहीं होती। उदाहरण के लिए, वे आपसे मीडिया फ़ाइलों, संपर्कों, कॉल लॉग्स, स्थानों आदि की अनुमति मांगते हैं। इसके जरिए इसके बाद ये ऐप्स आप पर कड़ी नजर रखते हैं। अगर हैकर्स द्वारा कोई ऐप चलाया जा रहा है तो वे सीधे आपको नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं अगर कोई छोटी कंपनी इस तरह का ऐप चला रही है तो वह आपका डेटा चुराकर किसी थर्ड पार्टी को बेच देती है। कंपनी ने देने के समय भले ही आपका डेटा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए दिया हो, लेकिन अगर डेटा गलत हाथों में चला जाता है तो इसका दुरुपयोग भी किया जा सकता है।</div><div>ऐसे में ऐसे खतरों से बचने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जा सकते है। आप टाइपिंग के लिए फोन के डिफॉल्ट कीबोर्ड का इस्तेमाल करें। यदि आप फोन के कीबोर्ड से संतुष्ट नहीं हैं और कोई अन्य कीबोर्ड इंस्टॉल करना चाहते हैं, तो आप Google कीबोर्ड का उपयोग कर सकते हैं। थर्ड पार्टी कीबोर्ड ऐप के इस्तेमाल से बचें। यदि आप ऐसा कोई कीबोर्ड डाउनलोड करते है, तो ऐसा करने से पहले आपको प्ले स्टोर पर ऐप द्वारा प्राप्त टिप्पणियों को पढ़ना चाहिए। यह भी देखें कि ऐप को कितनी बार डाउनलोड किया गया है, इसकी रेटिंग क्या है?</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 15 Dec 2021 19:15:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>सूरत : साइबर पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार बने लोगों को अब तक 2.6 लाख रूपये रिफंड कराए</title>
                                    <description><![CDATA[किसी भी ऑनलाइन फ्रॉड की स्थिति में उठाएं ये जरुरी कदम, 24 घंटे के भीतर 100 पर करें कॉल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>मौजूदा समय में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जब भी आपके साथ इस तरह की कोई ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है और एक खाते से दूसरे खाते में पैसा निकाला या स्थानांतरित किया जाता है, तो 24 घंटे के भीतर साइबर पुलिस से संपर्क करें। अधिकांश तया पैसा रोक दिया जाता है और पैसे वापस लाने में पुलिस भी मदद करती है। <span style="font-size:1rem;">सूरत की बात करें तो सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के विभिन्न मामलों में कुल 2,60,142 रूपये रिफंड करवाये हैं। अब सूरत शहर के पुलिस आयुक्त अजय तोमर द्वारा विशेष रूप से साइबर पुलिस में अधिक स्टाफ आवंटित किया गया है।</span></div><div>आपको बता दें कि ऑनलाइन हो रही धोखाधड़ी को रोकने या जल्द से जल्द अपराधियों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं और सूरत पुलिस आयुक्त द्वारा सूरत शहर में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं जिसपर पुलिस लगातार काम कर रही है।</div><div>ऐसे फ्रॉड के मामले में शिकायतकर्ताओं को भी पूरी बात पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सूरत में ऐसी किसी घटना का शिकार बने आवेदकों ने सही समय पर 100 नंबर पर कॉल किया और अपना विवरण दिया जिससे तकनीकी टीम ने आवश्यक कार्रवाई की और तकनीकी निगरानी पर आधारित एक विश्लेषण विभिन्न आवेदकों से कुल 2,91,182 रुपये वापस पा लिए, जिसमें से कुल 2,60,142 रुपये आवेदक को 01/10/2021 को बैंक खाते में वापस कर दिए गए।</div><div>इस प्रकार के मामलों में धोखाधड़ी करने वाले गिरोह एटीएम धोखाधड़ी, ऋण-लॉटरी धोखाधड़ी, नौकरी धोखाधड़ी, खरीदारी धोखाधड़ी और  सेना के नाम पर ओएलएक्स/फेसबुक विज्ञापन से सामान की खरीद से संबंधित धोखाधड़ी करते हैं। इसके अलावा कार्ड के सत्यापन को लेकर, पेटीएम कंपनी के केवाईसी को अपडेट करने के लिए मोबाइल में "क्विक सपोर्ट" या "एनीडेस्क" नामक एप्लिकेशन इंस्टॉल करा कर फ्रॉड किया जाता है  और ऐसे वित्तीय लेनदेन के नाम पर धोखाधड़ी करने के लिए अलग-अलग बहाने से ई-सिम पंजीकरण किया जाता है।</div><div>आपको बता दें कि ऐसी किसी भी घटना के मामले में घटना के 24 घंटे के अंदर पहले 100 नंबर पर संपर्क करना अनिवार्य है, फिर निकटतम पुलिस स्टेशन या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें या तुरंत साइबर अपराध पुलिस स्टेशन और अपराध शाखा सूरत शहर से संपर्क करें। <span style="font-size:1rem;">ताकि आवेदक को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की जा सके। इस प्रकार, कोरोना महामारी की विकट स्थिति में लोगों के साथ हो रहे साइबर अपराध के ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पिछले एक साल में अपराध शाखा से 21,21,300 रुपये रिफंड करवाए हैं।</span></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/71892/surat-cyber-police-has-so-far-returned-2-6-lakh-rupees-to-the-victims-of-online-fraud</link>
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                <pubDate>Sun, 03 Oct 2021 23:08:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>अगर आप के मोबाइल में भी है ये एप तो कर दीजिये डिलीट, हो सकती है फोन की हेकिंग</title>
                                    <description><![CDATA[फेसबुक क्रेडेंशियल के माध्यम से मेलेशियस एप्स को करता है फोन की हेकिंग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div><span style="font-size:1rem;">Zimperium zLabs मोबाइल थ्रेट रिसर्च टीम के अनुसार, मार्च 2021 में Google Play Store के मेलेशियस ऐप, थर्ड पार्टी ऐप स्टोर और साइडलोड किए गए ऐप्स के कारण मैलवेयर फैला है। यह मैलवेयर बहुत ही आसान ट्रिक से काम करता है। पीड़ित पहले अपने फेसबुक क्रेडेंशियल के माध्यम से मेलेशियस ऐप में लॉग इन करता है और बाद में उपयोगकर्ताओं का डेटा चुराता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, फ्लाईट्रैप नेटफ्लिक्स कूपन कोड, गूगल ऐडवर्ड्स कूपन कोड और बेस्ट फुटबॉल टीम वोटिंग और प्लेयर जैसे मोबाइल ऐप का अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल करता है। ये ऐप डाउनलोड करने के बाद यूजर्स को बेवकूफ बनाते हैं और कई तरह के सवाल भी पूछते हैं।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">इनमें से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने के बाद, यह उपयोगकर्ताओं को फेसबुक लॉगिन पेज पर निर्देशित करता है जिसके लिए उन्हें वोट करने के लिए फेसबुक पर लॉगिन करने के लिए कहा जाता है। मैलवेयर जावास्क्रिप्ट इंजेक्शन का उपयोग करता है, जिसके माध्यम से यह उपयोगकर्ता की फेसबुक आईडी, स्थान, ईमेल पता, आईपी पता आदि तक पहुंच प्राप्त करता है और बाद में डेटा चुरा लेता है। यहाँ हमने आपको 10 ऐसे एप्स की लिस्ट दी है जिसे आपके फोन में से आपको तुरंत ही निकाल देना चाहिए। </span><br /></div><ul><li><span style="font-size:1rem;">GG Voucher (com.luxcarad.cardid)</span></li><li>Vote European Football (com.gardenguides.plantingfree)</li><li>GG Coupon Ads (com.free_coupon.gg_free_coupon)</li><li>GG Voucher Ads (com.m_application.app_moi_6)</li><li>GG Voucher (com.free.voucher)</li><li>Chatfuel (com.ynsuper.chatfuel)</li><li>Net Coupon (com.free_coupon.net_coupon)</li><li>Net Coupon (com.movie.net_coupon)</li><li>EURO 2021 Official (com.euro2021)</li></ul>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80071/if-you-have-this-app-in-your-mobile-too-then-delete-it-it-may-be-hacking-of-the-phone</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Aug 2021 19:13:25 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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