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                <title>Mohan Bhagwat - Loktej</title>
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                <description>Mohan Bhagwat RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राम मंदिर के लिए बलिदान देने वाले लोगों की आत्मा को आज ध्वजारोहण के बाद शांति मिली होगी: भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अयोध्या (उप्र), 25 नवंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर के लिए बलिदान देने वाले लोगों की आत्मा को आज मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के बाद शांति मिली होगी। उन्होंने कहा कि आज ध्वजारोहण के साथ मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के साथ मोहन भागवत ने मंगलवार को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। इस मौके पर खासतौर पर मौजूद आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''आज हम सबके लिए एक सार्थकता का दिवस है।''</p>
<p>उन्‍होंने कहा, ''इतने लोगों ने सपना देखा,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144241/the-souls-of-those-who-sacrificed-for-ram-temple-would"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>अयोध्या (उप्र), 25 नवंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर के लिए बलिदान देने वाले लोगों की आत्मा को आज मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के बाद शांति मिली होगी। उन्होंने कहा कि आज ध्वजारोहण के साथ मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के साथ मोहन भागवत ने मंगलवार को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। इस मौके पर खासतौर पर मौजूद आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''आज हम सबके लिए एक सार्थकता का दिवस है।''</p>
<p>उन्‍होंने कहा, ''इतने लोगों ने सपना देखा, प्रयास किया, प्राण अर्पण किये, आज उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। आज वास्तव में अशोक जी (राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख दिवंगत अशोक सिंघल) की आत्मा को वहां शांति मिली होगी।''</p>
<p>मोहन भागवत ने मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों को स्मरण करते हुए कहा, ''महंत रामचंद्र दास महाराज, डालमिया जी (विहिप प्रमुख दिवंगत विष्णु हरि डालमिया) कितने संतों, कितने विचारकों ने अपना पसीना बहाया, अपना प्राण अर्पित किया।''</p>
<p>उन्‍होंने कहा, ‘‘और जो उनके पीछे थे वे अपनी इच्छा व्यक्त करते रहे कि मंदिर बनेगा और आज मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। ध्वजारोहण हो गया।''</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने इसे गौरवमयी क्षण बताते हुए इस अवसर पर शामिल होने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘‘रामराज्य का ध्‍वज जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में सुख-शांति प्रदान करता था, वह ध्‍वज शिखर पर विराजमान होते हमने अपनी आंखों से देखा है।''</p>
<p>भागवत ने कहा, ''ध्वज प्रतीक होता है। ध्‍वज फहराने में समय लगा, मंदिर बनने में भी समय लगाा। उस मंदिर के रूप में हमने कुछ तत्वों को ऊपर पहुंचाया है।</p>
<p>सारा विश्‍व जिससे ठीक चलेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक जीवन से लेकर, सृष्टि जीवन ठीक से चलेगा, उस धर्म का प्रतीक भगवा रंग, वही इस धर्म ध्वज का रंग है और इस पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष देवगुणों का समुच्चय है और यह रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है।''</p>
<p>उन्‍होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर पर फहराया गया ध्वज उन सिद्धांतों का प्रतीक है जो व्यक्ति, परिवार और दुनिया भर में सद्भाव की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p>समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित थे।</p>
<p>भागवत ने कहा, ‘‘कई लोगों ने इस दिन का सपना देखा था और कई लोगों ने इसके लिए अपनी जान दे दी। आज उनकी आत्मा को शांति मिली होगी।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग हर दिन पृष्ठभूमि में काम करते थे, उन्होंने भी राम मंदिर का सपना देखा था, अब जब रस्में पूरी हो गई हैं तो 'राम राज्य' का झंडा फहराया गया है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, “इतना ऊंचा ध्वज फहराने में बहुत समय लगा है। आप सब जानते हैं कि मंदिर बनने में कितना समय लगा — अगर 500 साल को छोड़ भी दें, तो 30 साल लगे।”</p>
<p>संघ प्रमुख ने कहा कि इस ध्वज के माध्यम से कुछ बुनियादी मूल्यों को ऊपर उठाया गया है।</p>
<p>भागवत ने कहा, “ये वो मूल्य हैं जो दुनिया को रास्ता दिखाएंगे — निजी जीवन से लेकर पारिवारिक जीवन और पूरी सृष्टि के जीवन तक। धर्म ही सबकी भलाई सुनिश्चित करता है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि झंडे का केसरिया रंग धर्म को दिखाता है और इसलिए इसे ‘धर्म ध्वज’ कहा जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 15:14:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>काशी विश्वनाथ का संघ प्रमुख मोहन भागवत ने किया अभिषेक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाराणसी, 05 अप्रैल (वेब वार्ता)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत काशी प्रवास के तीसरे दिन शनिवार को काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ और काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के दरबार में पहुंचे।</p>
<p>संघ प्रमुख ने काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में बैठ कर बाबा के पावन ज्योर्तिलिंग का मंत्रोंच्चार के बीच अभिषेक किया। मंदिर के पुजारियों ने संघ प्रमुख को विधि विधान से बाबा का दर्शन पूजन कराया। संघ प्रमुख ने विश्वनाथ धाम का भी भ्रमण किया। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध रहे।</p>
<p>संघ प्रमुख इसके बाद कालभैरव मंदिर में पहुंचे और बाबा के विग्रह की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139874/sangh-chief-mohan-bhagwat-did-abhishek-of-kashi-vishwanath"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/lord-bhagvan-shiva-shivaji-bholenath.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी, 05 अप्रैल (वेब वार्ता)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत काशी प्रवास के तीसरे दिन शनिवार को काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ और काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के दरबार में पहुंचे।</p>
<p>संघ प्रमुख ने काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में बैठ कर बाबा के पावन ज्योर्तिलिंग का मंत्रोंच्चार के बीच अभिषेक किया। मंदिर के पुजारियों ने संघ प्रमुख को विधि विधान से बाबा का दर्शन पूजन कराया। संघ प्रमुख ने विश्वनाथ धाम का भी भ्रमण किया। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध रहे।</p>
<p>संघ प्रमुख इसके बाद कालभैरव मंदिर में पहुंचे और बाबा के विग्रह की विधिवत आरती उतारी। इस दौरान मंदिर और कालभैरव मार्ग पर सुरक्षा की किलेबंदी की गई थी। दर्शन पूजन के दौरान संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल, काशी प्रांत प्रचारक रमेश व अन्य पदाधिकारियों के साथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण,पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल भी मौजूद रहे।</p>
<p>यहां के बाद संघ प्रमुख तुलसीपुर महमूरगंज स्थित निवेदिता शिक्षा सदन में लौटे। यहां वे प्रबुद्धजन संग भी अलग-अलग बैठक कर संवाद करेंगे। छह अप्रैल को संघ प्रमुख मलदहिया लाजपत नगर जाएंगे और शाखा में शामिल होंगे। इसके बाद शहर के प्रबुद्धजनों से मिलेंगे। शाम को प्रांत टोली के साथ बैठक होगी। सात अप्रैल को लखनऊ के लिए प्रस्थान करने से पहले काशी प्रांत के अनुभवी कार्यकर्ताओं की टोली के साथ बैठक कर उनका मार्गदर्शन देंगे। इसके बाद प्रांत टोली के साथ भी बैठक कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Apr 2025 20:45:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व भारत की ओर देख रहा, मानवता की दिशा देनी होगी : भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भोपाल, 04 मार्च (वेब वार्ता)। विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने का कार्य नहीं करती, बल्कि समाज को सही दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विश्‍व भारत की ओर देख रहा है उसे मानवता की दिशा देनी होगी।</p>
<p>शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे व्यापक दृष्टिकोण से देखना होगा। मानवता को सही दिशा देने के लिए आवश्यक है कि हम अपने कार्य को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। परिवर्तन आवश्यक है, क्योंकि संसार स्वयं परिवर्तनशील है, लेकिन यह अधिक महत्वपूर्ण है कि परिवर्तन की दिशा क्या होनी चाहिए।</p>
<p>विद्या भारती द्वारा आयोजित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138986/bhagwat-will-have-to-give-direction-of-humanity-looking-towards"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल, 04 मार्च (वेब वार्ता)। विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने का कार्य नहीं करती, बल्कि समाज को सही दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विश्‍व भारत की ओर देख रहा है उसे मानवता की दिशा देनी होगी।</p>
<p>शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे व्यापक दृष्टिकोण से देखना होगा। मानवता को सही दिशा देने के लिए आवश्यक है कि हम अपने कार्य को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। परिवर्तन आवश्यक है, क्योंकि संसार स्वयं परिवर्तनशील है, लेकिन यह अधिक महत्वपूर्ण है कि परिवर्तन की दिशा क्या होनी चाहिए।</p>
<p>विद्या भारती द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पूर्णकालिक कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग 2025 का मंगलवार को विधिवत मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शुभारंभ हुआ है, जिसमें उक्‍त बातें राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी ने कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर कहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/138986/bhagwat-will-have-to-give-direction-of-humanity-looking-towards</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 17:55:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सभी समूहों के बीच मैत्री को बढ़ावा दें : भागवत ने संघ के स्वयंसेवकों से कहा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गुवाहाटी, 23 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को संगठन के सभी स्वयंसेवकों से जाति, पंथ, क्षेत्र और भाषा से परे विभिन्न समूहों के बीच मैत्री बढ़ाने की अपील की।</p>
<p>यहां एक बौद्धिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक समाज के कल्याण के लिए उत्प्रेरक का काम करते हैं।</p>
<p>संघ ने एक बयान में कहा, “भागवत ने स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच मैत्री को बढ़ावा दें, चाहे उनकी जाति, पंथ, क्षेत्र या भाषा कुछ भी हो।”</p>
<p>संगठन के सरसंघचालक भागवत ने यह भी कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/136701/promote-friendship-among-all-groups--bhagwat-asked-the-volunteers-of-the-sangh"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>गुवाहाटी, 23 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को संगठन के सभी स्वयंसेवकों से जाति, पंथ, क्षेत्र और भाषा से परे विभिन्न समूहों के बीच मैत्री बढ़ाने की अपील की।</p>
<p>यहां एक बौद्धिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक समाज के कल्याण के लिए उत्प्रेरक का काम करते हैं।</p>
<p>संघ ने एक बयान में कहा, “भागवत ने स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच मैत्री को बढ़ावा दें, चाहे उनकी जाति, पंथ, क्षेत्र या भाषा कुछ भी हो।”</p>
<p>संगठन के सरसंघचालक भागवत ने यह भी कहा कि सभी हिंदुओं को आपसी सम्मान और सहयोग की भावना से विभिन्न उपयोगों के लिए समान मंदिर, श्मशान और जल का इस्तेमाल करना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज में विभिन्न जातीय समूहों के बीच सतत सांप्रदायिक सद्भाव और रिश्तेदारों एवं कुलों के बीच सद्भावना ही राष्ट्र को सकारात्मक दिशा तथा परिणाम की ओर ले जाएगी।</p>
<p>बयान में यह भी कहा गया कि भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि पूरे समाज को पर्यावरण की रक्षा के लिए जल संरक्षण, पौधे लगाने और प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग न करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा, “प्रत्येक भारतीय को भोजन, आवास, यात्रा और यहां तक ​​कि अपनी अभिव्यक्ति के अनुरूप भाषा का प्रयोग करना चाहिए। सभी को अपने दैनिक कार्यों में विदेशी भाषाओं का उपयोग करने के बजाय मातृभाषा में बातचीत करनी चाहिए।”</p>
<p>संघ प्रमुख ने दोहराया कि नागरिकों को पारंपरिक सामाजिक मानदंडों का पालन करना चाहिए, भले ही कानूनी दृष्टिकोण से ऐसे सभी नियमों को कानून नहीं कहा जा सकता है।</p>
<p>भागवत शुक्रवार को छह दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुंचे, जहां वह सदस्यों से बातचीत करेंगे और संगठन को और मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श करेंगे। यह यात्रा देश के विभिन्न क्षेत्रों के उनके दौरे का हिस्सा है, जो संगठन के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हो रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 20:41:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंदू समाज देश का जिम्मेदार समाज, इसमें एकता जरूरी है: आरएसएस प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बर्धमान (पश्चिम बंगाल), 16 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को हिंदू समाज को एकजुट करने के महत्व पर जोर देते हुए इसे देश का "जिम्मेदार" समुदाय बताया, जो एकता को विविधता का मूर्त रूप मानते हैं।</p>
<p>बर्धमान के एसएआई ग्राउंड में आरएसएस के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘लोग अकसर पूछते हैं कि हम केवल हिंदू समाज पर ही ध्यान क्यों देते हैं, और मेरा जवाब है कि देश का जिम्मेदार समाज हिंदू समाज है।’’</p>
<p>भागवत ने कहा, ‘‘आज कोई विशेष कार्यक्रम नहीं है। जो लोग संघ के बारे में नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/134126/hindu-society-responsible-society-of-country--unity-is-necessary--%E2%80%8B%E2%80%8Brss-chief"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>बर्धमान (पश्चिम बंगाल), 16 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को हिंदू समाज को एकजुट करने के महत्व पर जोर देते हुए इसे देश का "जिम्मेदार" समुदाय बताया, जो एकता को विविधता का मूर्त रूप मानते हैं।</p>
<p>बर्धमान के एसएआई ग्राउंड में आरएसएस के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘लोग अकसर पूछते हैं कि हम केवल हिंदू समाज पर ही ध्यान क्यों देते हैं, और मेरा जवाब है कि देश का जिम्मेदार समाज हिंदू समाज है।’’</p>
<p>भागवत ने कहा, ‘‘आज कोई विशेष कार्यक्रम नहीं है। जो लोग संघ के बारे में नहीं जानते, वे अकसर सवाल करते हैं कि संघ क्या चाहता है। अगर मुझे जवाब देना होता, तो मैं कहता कि संघ हिंदू समाज को संगठित करना चाहता है, क्योंकि यह देश का जिम्मेदार समाज है।’’</p>
<p>उन्होंने विश्व की विविधता को स्वीकार करने के महत्व पर भी जोर दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘भारतवर्ष केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं है; इसका आकार समय के साथ बढ़ या घट सकता है। इसकी एक अद्वितीय प्रकृति है। भारत का अपना अंतर्निहित चरित्र है। जिन लोगों को लगा कि वे इस प्रकृति के साथ सामंजस्य में नहीं रह सकते, उन्होंने अपने अलग देश बना लिए।”</p>
<p>उन्होंने कहा, "स्वाभाविक रूप से, जो लोग बचे रहे, वे चाहते थे कि भारत का मूलतत्व बचा रहे। और मूलतत्व क्या है? यह 15 अगस्त, 1947 से भी अधिक पुराना है। यह हिंदू समाज है, जो दुनिया की विविधता को अपनाकर फलता-फूलता है। यह प्रकृति दुनिया की विविधताओं को स्वीकार करती है और उनके साथ आगे बढ़ती है। एक शाश्वत सत्य है जो कभी नहीं बदलता।"</p>
<p>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू समाज की नींव विविधता को अपनाने की उसकी क्षमता पर टिकी है, जो 'वसुधैव कुटुम्बकम' (विश्व एक परिवार है) के सिद्धांत संस्कृत वाक्यांश में निहित है।</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने कहा, "हम कहते हैं 'विविधता में एकता', लेकिन हिंदू समाज मानता है कि विविधता ही एकता है।"</p>
<p>भागवत ने कहा कि भारत में, कोई भी सम्राटों और महाराजाओं को याद नहीं करता, बल्कि अपने पिता का वचन पूरा करने के उद्देश्य से 14 साल के लिए वनवास जाने वाले राजा (भगवान राम) और उस व्यक्ति (भरत) को याद रखता है जिसने अपने भाई की पादुकाएं सिंहासन पर रख दीं, और वनवास से लौटने पर राजपाट उसे सौंप दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ये विशेषताएं भारत को परिभाषित करती हैं। जो लोग इन मूल्यों का पालन करते हैं, वे हिंदू हैं और वे पूरे देश की विविधता को एकजुट रखते हैं।”</p>
<p>हिंदुओं के बीच एकता की आवश्यकता दोहराते हुए भागवत ने कहा कि अच्छे समय में भी चुनौतियां हमेशा सामने आती रहेंगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, “समस्याओं की प्रकृति क्या है, इसके बजाए यह महत्व रखता है कि हम उनका सामना करने के लिए कितने तैयार हैं।’’</p>
<p>पश्चिम बंगाल पुलिस ने पहले रैली आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद रैली आयोजित की गई।</p>
<p>सिकंदर के समय से लेकर अब तक हुए ऐतिहासिक आक्रमणों पर भागवत ने कहा कि "चंद बर्बर लोगों ने, जो गुणों में श्रेष्ठ नहीं थे, भारत पर शासन किया।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि "इसके लिए समाज के आंतरिक विश्वासघात को जिम्मेदार ठहराया गया।"</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने कहा कि किसी राष्ट्र की नियति बदलने के लिए सामाजिक भागीदारी जरूरी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत का निर्माण अंग्रेजों ने नहीं किया था और भारत के विखंडित होने की धारणा अंग्रेजों ने लोगों के मन में डाली थी।</p>
<p>भागवत ने कहा, "यहां तक ​​कि महात्मा गांधी ने भी कहा था कि अंग्रेजों ने हमें यह दिखाने की कोशिश की कि उन्होंने भारत का निर्माण किया है, और उन्होंने (गांधी) कहा था कि यह गलत है। भारत सदियों से अस्तित्व में है - विविधतापूर्ण है, फिर भी एकजुट है। इस देश में रहने वाले सभी लोग विविधता में एकता के इस विचार में विश्वास करते हैं। आज, अगर हम इस बारे में बात करते हैं, तो हम पर हिंदुत्व की बात करने का आरोप लगाया जाता है।"</p>
<p>वर्ष 1925 में स्थापित आरएसएस की स्थापना के सौ साल पूरे होने पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने संगठन की यात्रा और उद्देश्य पर विचार व्यक्त किए।</p>
<p>भागवत ने आरएसएस के विशाल आकार का उल्लेख करते हुए कहा, “संघ एक बड़ा संगठन है, जिसकी देशभर में लगभग 70,000 शाखाएं हैं।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “हमें दुनिया का सबसे बड़ा संगठन कहा जाता है। लेकिन हम क्यों और बड़ा होना चाहते हैं? अपने लिए नहीं। अगर हमारा नामोनिशान नहीं भी होगा तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर समाज एकजुट होगा तो इससे देश और दुनिया का भला होगा।”</p>
<p>उन्होंने दोहराया कि आरएसएस का मुख्य मिशन लोगों को एक साथ लाना है।</p>
<p>भागवत ने कहा, “आरएसएस का एकमात्र कार्य समाज को एकजुट करना है।”</p>
<p>उन्होंने लोगों से संगठन से सीधे जुड़ने का आग्रह किया।</p>
<p>भागवत ने कहा, “मेरी अपील है कि संघ को समझें, उसके करीब आएं। इसके लिए कोई शुल्क नहीं है। सदस्यता की आवश्यकता नहीं है। आप अपनी इच्छा से यहां आ सकते हैं और अगर आपको पसंद नहीं है तो जा सकते हैं।”</p>
<p>उन्होंने स्वीकार किया कि आरएसएस को समझने में समय लगता है, क्योंकि इसका एकमात्र लक्ष्य पूरे "हिंदू समाज" को एकजुट करके "आत्मीयता" विकसित करना है।</p>
<p>भागवत ने लोगों को दूर से राय बनाने के बजाय सीधे संगठन से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “जब लोग दूर से संगठन को समझने की कोशिश करते हैं तो गलतियां और गलतफहमियां पैदा होती हैं। संघ के निकट संपर्क में आएं, इसे स्वयं देखें।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Feb 2025 20:10:28 +0530</pubDate>
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                <title>मतभेदों का सम्मान करें, सद्भाव से रहें : मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 26 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि मतभेदों का सम्मान किया जाना चाहिए और एकजुटता सद्भाव से रहने की कुंजी है।</p>
<p>भागवत ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भिवंडी शहर के एक कॉलेज में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रध्वज फहराने के बाद कहा कि किसी को दबाया नहीं जाना चाहिए और सभी को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस एक उत्सव के साथ-साथ ‘‘राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को याद करने’’ का अवसर भी है।</p>
<p>भागवत ने विविधता के संदर्भ में कहा कि मतभेदों का सम्मान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/125770/respect-differences--live-in-harmony--mohan-bhagwat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 26 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि मतभेदों का सम्मान किया जाना चाहिए और एकजुटता सद्भाव से रहने की कुंजी है।</p>
<p>भागवत ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भिवंडी शहर के एक कॉलेज में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रध्वज फहराने के बाद कहा कि किसी को दबाया नहीं जाना चाहिए और सभी को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस एक उत्सव के साथ-साथ ‘‘राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को याद करने’’ का अवसर भी है।</p>
<p>भागवत ने विविधता के संदर्भ में कहा कि मतभेदों का सम्मान किया जाना चाहिए और ‘‘सद्भाव से रहने की कुंजी एकजुटता है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, "विविधता के कारण भारत के बाहर संघर्ष हो रहे हैं। हम विविधता को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा मानते हैं। आपकी अपनी विशेषताएं हो सकती हैं, लेकिन आपको एक-दूसरे के प्रति अच्छा व्यवहार करना चाहिए। यदि आप जीना चाहते हैं, तो आपको एकजुटता से जीना चाहिए। यदि आपका परिवार दुखी है, तो आप खुश नहीं रह सकते।"</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हम विविधता को जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा मानते हैं। आपकी अपनी विशेषताएं हो सकती हैं, लेकिन आपको एक-दूसरे से अच्छा व्यवहार करना चाहिए। अगर आप जीना चाहते हैं, तो आपको एक सामंजस्यपूर्ण जीवन जीना चाहिए। अगर आपका परिवार दुखी है, तो आप खुश नहीं रह सकते। इसी तरह, अगर शहर में कोई परेशानी है तो कोई परिवार खुश नहीं रह सकता।’’</p>
<p>भागवत ने ज्ञान और समर्पण से काम करने के महत्व पर जोर दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘उद्यमशील होना महत्वपूर्ण है, लेकिन आपको हमेशा ज्ञान के साथ अपना काम करना चाहिए। बिना सोचे-समझे किए गए किसी भी काम का फल नहीं मिलता बल्कि ऐसा काम परेशानी पैदा करता है।’’</p>
<p>भागवत ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए चावल पकाने की तुलना किसी भी काम में ज्ञान की आवश्यकता से की।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप चावल पकाना जानते हैं, तो आपको पानी, गर्मी और चावल की जरूरत होगी। लेकिन अगर आप नहीं जानते कि इसे कैसे पकाना है और इसके बजाय आप सूखे चावल खाते हैं, पानी पीते हैं और घंटों धूप में खड़े रहते हैं, तो यह भोजन नहीं बन पाएगा। ज्ञान और समर्पण जरूरी हैं।’’</p>
<p>संघ प्रमुख ने रोजमर्रा की जिंदगी में भरोसे और समर्पण के महत्व पर भी बात की।</p>
<p>भागवत ने कहा, ‘‘अगर आप किसी होटल में पानी पीते हैं और चले जाते हैं, तो आपको अपमानित होना पड़ सकता है या नीचा दिखाने वाली निगाहों से देखा जा सकता है। लेकिन अगर आप किसी के घर में पानी मांगते हैं, तो आपको किसी खाद्य वस्तु के साथ एक जग भर कर पानी दिया जाता है। क्या अंतर है? घर में भरोसा और समर्पण होता है। ऐसे काम का फल मिलता है।’’</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने व्यक्ति और राष्ट्र के विकास के लिए समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के महत्व पर भी बल दिया और राष्ट्रीय ध्वज पर 'धम्मचक्र' (धर्म का पहिया) के प्रतीकात्मक महत्व पर प्रकाश डाला।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वैयक्तिकता के प्रति सम्मान और दमन से मुक्ति के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।</p>
<p>भागवत ने कहा, "हम चाहते हैं कि व्यक्ति आगे बढ़े और इसके लिए हमें स्वतंत्रता व समानता की आवश्यकता है। किसी को दबाया नहीं जाना चाहिए। सभी को अवसर मिलना चाहिए और भाईचारे के साथ लोग आगे बढ़ेंगे और समाज में अपनी सफलता का प्रसार करेंगे।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले 78 वर्षों में समाज ने बड़ी प्रगति की है, व्यक्तियों ने स्वयं में सुधार किया है तथा ऐसी व्यवस्था में योगदान दिया है जो सभी को प्रगति करने में सक्षम बनाती है।</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज पर धम्मचक्र समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का शक्तिशाली संदेश देता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "तिरंगे पर धम्मचक्र सिर्फ एक प्रतीक नहीं है, बल्कि एक संदेश है जिसे हमें अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए। यह डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा परिभाषित पारस्परिक सम्मान व सहयोग के मूल्यों का प्रतीक है और राष्ट्र की प्रगति के लिए हमारी साझा जिम्मेदारी की याद दिलाता है।"</p>
<p>तिरंगे के महत्व पर भागवत ने कहा कि झंडे का डिजाइन सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "इसके रंगों का चयन काफी विचार-विमर्श के बाद किया गया है। सबसे ऊपर का केसरिया रंग त्याग औव समर्पण का प्रतीक है, जबकि सफेद रंग शुद्धता और काम करने के स्वच्छ तरीके का प्रतीक है। बीच में स्थित धम्मचक्र आपसी सम्मान का प्रतीक है, जो हमारी संस्कृति का सार है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jan 2025 19:13:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान देश की ‘सच्ची स्वतंत्रता’ प्रतिष्ठित हुई : भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इंदौर, 13 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि अयोध्या में भगवान राम के मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के रूप में मनाई जानी चाहिए, क्योंकि कई सदियों से परचक्र (दुश्मन का आक्रमण) झेलने वाले भारत की सच्ची स्वतंत्रता इस दिन प्रतिष्ठित हुई थी।</p>
<p>भागवत ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय को इंदौर में ‘राष्ट्रीय देवी अहिल्या पुरस्कार’ प्रदान करने के बाद एक समारोह में यह बात कही।</p>
<p>राय को यह पुरस्कार ऐसे वक्त प्रदान किया गया, जब अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/120999/the-country-s--true-independence--was-established-during-the-consecration-of-ram-temple-in-ayodhya--bhagwat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर, 13 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि अयोध्या में भगवान राम के मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के रूप में मनाई जानी चाहिए, क्योंकि कई सदियों से परचक्र (दुश्मन का आक्रमण) झेलने वाले भारत की सच्ची स्वतंत्रता इस दिन प्रतिष्ठित हुई थी।</p>
<p>भागवत ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय को इंदौर में ‘राष्ट्रीय देवी अहिल्या पुरस्कार’ प्रदान करने के बाद एक समारोह में यह बात कही।</p>
<p>राय को यह पुरस्कार ऐसे वक्त प्रदान किया गया, जब अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर बने मंदिर में राम लला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा को हिंदू पंचांग के मुताबिक 11 जनवरी को एक साल पूरा हुआ है।</p>
<p>संघ प्रमुख ने पुरस्कार समारोह में कहा कि राम मंदिर आंदोलन किसी का विरोध करने के लिए शुरू नहीं किया गया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह आंदोलन भारत का ‘स्व’ जागृत करने के लिए शुरू किया गया था, ताकि देश अपने पैरों पर खड़ा होकर दुनिया को रास्ता दिखा सके।</p>
<p>भागवत ने यह भी कहा कि पिछले साल अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान देश में कोई कलह नहीं हुआ।</p>
<p>वहीं, राय ने पुरस्कार ग्रहण करने के बाद कहा कि वह यह पुरस्कार राम मंदिर आंदोलन में शामिल उन सभी ज्ञात-अज्ञात लोगों को समर्पित करते हैं, जिन्होंने अयोध्या में यह मंदिर बनाने में सहयोग किया।</p>
<p>उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के अलग-अलग संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि अयोध्या में बना यह मंदिर ‘हिंदुस्तान की मूंछ’ (राष्ट्रीय गौरव) का प्रतीक है और वह इस मंदिर के निर्माण के निमित्त मात्र हैं।</p>
<p>‘राष्ट्रीय देवी अहिल्या पुरस्कार’ इंदौर की सामाजिक संस्था ‘श्री अहिल्योत्सव समिति’ की ओर से हर साल दिया जाता है। लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन इस संस्था की अध्यक्ष हैं।</p>
<p>महाजन ने पुरस्कार समारोह में कहा कि इंदौर के पूर्व होलकर राजवंश की शासक देवी अहिल्याबाई का शहर में भव्य स्मारक बनाया जाएगा, ताकि लोग उनके जीवन चरित्र से परिचित हो सकें।</p>
<p>इससे पहले, ‘राष्ट्रीय देवी अहिल्या पुरस्कार’ नानाजी देशमुख, विजयाराजे सिंधिया, रघुनाथ अनंत माशेलकर और सुधा मूर्ति जैसी हस्तियों को दिया जा चुका है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/120999/the-country-s--true-independence--was-established-during-the-consecration-of-ram-temple-in-ayodhya--bhagwat</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 21:16:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात: संघ प्रमुख भागवत ने धरमपुर में पशु चिकित्सा महाविद्यालय की आधारशिला रखी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वलसाड, दो जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को गुजरात के वलसाड जिले की धरमपुर तालुका में एक पशु चिकित्सा महाविद्यालय की आधारशिला रखी और एक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन किया।</p>
<p>आरएसएस की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक, भागवत ने सबसे पहले धरमपुर में श्रीमद राजचंद्र मिशन के परिसर का दौरा किया।</p>
<p>इस दौरान मिशन के आध्यात्मिक गुरु गुरुदेवश्री राकेशजी भी मौजूद थे।</p>
<p>विज्ञप्ति में बताया गया कि भागवत ने पशु चिकित्सा महाविद्यालय की आधारशिला रखी और फिर धरमपुर में श्रीमद राजचंद्र अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य जांच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/117176/gujarat--sangh-chief-bhagwat-lays-the-foundation-stone-of-veterinary-college-in-dharampur"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>वलसाड, दो जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को गुजरात के वलसाड जिले की धरमपुर तालुका में एक पशु चिकित्सा महाविद्यालय की आधारशिला रखी और एक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन किया।</p>
<p>आरएसएस की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक, भागवत ने सबसे पहले धरमपुर में श्रीमद राजचंद्र मिशन के परिसर का दौरा किया।</p>
<p>इस दौरान मिशन के आध्यात्मिक गुरु गुरुदेवश्री राकेशजी भी मौजूद थे।</p>
<p>विज्ञप्ति में बताया गया कि भागवत ने पशु चिकित्सा महाविद्यालय की आधारशिला रखी और फिर धरमपुर में श्रीमद राजचंद्र अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का उद्घाटन किया।</p>
<p>विज्ञप्ति के मुताबिक, सभी प्रकार की बीमारियों के निदान एवं उपचार के लिए आयोजित इस चार दिवसीय शिविर में दुनिया भर से करीब 150 चिकित्सक निशुल्क सेवाएं देंगे।</p>
<p>विज्ञप्ति में बताया गया कि भागवत ने धरमपुर के बारुमल गांव में सद्गुरुधाम का भी दौरा किया और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विद्यानंद सरस्वती से चर्चा की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/117176/gujarat--sangh-chief-bhagwat-lays-the-foundation-stone-of-veterinary-college-in-dharampur</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Jan 2025 22:12:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत को अल्पसंख्यकों के बारे में दी जाती है सलाह, दूसरे देशों में जो हो रहा है हम देख रहे हैं: भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पुणे, 19 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को अक्सर अपने अल्पसंख्यकों के मुद्दों का समाधान करने की सलाह दी जाती है, लेकिन अब हम देख रहे हैं कि दूसरे देशों में अल्पसंख्यक समुदाय किस स्थिति का सामना कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने यहां 'हिंदू सेवा महोत्सव' की शुरुआत के अवसर पर यह भी कहा कि विश्व शांति की बात करके आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “विश्व शांति के बारे में बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं। हमें (भारत) विश्व शांति के बारे में सलाह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/112122/india-is-given-advice-regarding-minorities--we-are-seeing-what-is-happening-in-other-countries--bhagwat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>पुणे, 19 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को अक्सर अपने अल्पसंख्यकों के मुद्दों का समाधान करने की सलाह दी जाती है, लेकिन अब हम देख रहे हैं कि दूसरे देशों में अल्पसंख्यक समुदाय किस स्थिति का सामना कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने यहां 'हिंदू सेवा महोत्सव' की शुरुआत के अवसर पर यह भी कहा कि विश्व शांति की बात करके आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “विश्व शांति के बारे में बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं। हमें (भारत) विश्व शांति के बारे में सलाह भी दी जा रही है, लेकिन साथ ही, युद्ध भी नहीं रुक रहे। हमें अक्सर अपने देश में अल्पसंख्यकों के बारे में चिंता करने के लिए कहा जाता है जबकि हम देख रहे हैं बाहर अल्पसंख्यक किस तरह की स्थिति का सामना कर रहे हैं।”</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने पड़ोसी बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का कोई उल्लेख नहीं किया, हालांकि आरएसएस ने शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति के बारे में चिंता व्यक्त की है।</p>
<p>भागवत ने कहा, “मानव धर्म सभी धर्मों का शाश्वत धर्म है, जो विश्व धर्म है। इसे हिंदू धर्म भी कहा जाता है। हालांकि, दुनिया इस धर्म को भूल गई है। उनका धर्म एक ही है लेकिन वे भूल गए, और उसके कारण, आज हम पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं समेत विभिन्न प्रकार की समस्याएं देख रहे हैं।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमारे देश के बाहर बहुत से लोग सोचते हैं कि भारत के भूमिका निभाए बिना विश्व शांति संभव नहीं है।</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने कहा, “उनका मानना ​​है कि यह केवल भारत और इसकी समृद्ध परंपरा ही है जो ऐसा कर सकती है और 3,000 वर्षों से ऐसा होता आया है। दुनिया की इस आवश्यकता को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/112122/india-is-given-advice-regarding-minorities--we-are-seeing-what-is-happening-in-other-countries--bhagwat</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 17:38:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अहंकार को दूर रखें, नहीं तो गड्ढे में गिर सकते हैं : आरएसएस प्रमुख भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पुणे, 16 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि व्यक्ति को अहंकार को दूर रखना चाहिए, अन्यथा वह गड्ढे में गिर सकता है।</p>
<p>भारत विकास परिषद के विकलांग केंद्र के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने अहंकार के बारे में अपनी बात रखने के लिए रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं का हवाला दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में एक ‘सर्वशक्तिमान ईश्वर’ होता है, जो समाज की सेवा करने की प्रेरणा देता है, लेकिन साथ ही अहंकार भी होता है।</p>
<p>भागवत ने यह भी कहा कि भारत के विकास को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/111154/keep-ego-away--otherwise-you-may-fall-into-the-pit--rss-chief-bhagwat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>पुणे, 16 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि व्यक्ति को अहंकार को दूर रखना चाहिए, अन्यथा वह गड्ढे में गिर सकता है।</p>
<p>भारत विकास परिषद के विकलांग केंद्र के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने अहंकार के बारे में अपनी बात रखने के लिए रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं का हवाला दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में एक ‘सर्वशक्तिमान ईश्वर’ होता है, जो समाज की सेवा करने की प्रेरणा देता है, लेकिन साथ ही अहंकार भी होता है।</p>
<p>भागवत ने यह भी कहा कि भारत के विकास को सुनिश्चित करने के लिए समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति केवल सेवा तक सीमित नहीं है।</p>
<p>संघ प्रमुख ने कहा कि सेवा का उद्देश्य नागरिकों को विकास में योगदान देने में सक्षम बनाना होना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Dec 2024 11:57:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे गई तो समाज नष्ट हो जाएगा: भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नागपुर, एक दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने परिवार के महत्व पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि अगर किसी समाज की जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वह समाज अपने आप नष्ट हो जाएगा।</p>
<p>नागपुर में ‘कठाले कुलसम्मेलन’ में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज का हिस्सा है और हर परिवार एक इकाई है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘जनसंख्या में कमी चिंता का विषय है, क्योंकि जनसंख्या विज्ञान कहता है कि अगर जनसंख्या दर 2.1 से नीचे चली गई तो वह समाज नष्ट हो जाएगा, कोई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/105707/if-population-growth-rate-goes-below-21-society-will-be"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>नागपुर, एक दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने परिवार के महत्व पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि अगर किसी समाज की जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वह समाज अपने आप नष्ट हो जाएगा।</p>
<p>नागपुर में ‘कठाले कुलसम्मेलन’ में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज का हिस्सा है और हर परिवार एक इकाई है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘जनसंख्या में कमी चिंता का विषय है, क्योंकि जनसंख्या विज्ञान कहता है कि अगर जनसंख्या दर 2.1 से नीचे चली गई तो वह समाज नष्ट हो जाएगा, कोई उसे नष्ट नहीं करेगा, वह अपने आप नष्ट हो जाएगा।’’</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘हमारे देश की जनसंख्या नीति, जो 1998 या 2002 के आसपास तय की गई थी, कहती है कि जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे नहीं होनी चाहिए।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमें दो से अधिक अर्थात तीन (जनसंख्या वृद्धि दर) की आवश्यकता है, यही जनसंख्या विज्ञान कहता है। यह संख्या महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे (समाज को) कायम रहना चाहिए।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Dec 2024 19:20:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संघ प्रमुख भागवत से देवरहा बाबा बोले 'कैलाश मानसरोवर फिर से मिलेगा वापस, ऐसी बन रही स्थितियां'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मीरजापुर, 02 जुलाई (हि.स.)। विंध्याचल महुआरी स्थित आश्रम में त्रिकालदर्शी देवरहा हंस बाबा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत को संगठित होकर रहने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि भारत में एक होकर रहना है। भारत का ही होकर रहना है।<br /><br />उन्होंने कहा कि जिसने भाई-भाई कहकर देश के साथ छल किया और भाई-भाई कहकर देश पर चढ़ाई कर दी, उसको उसके किए का फल जरूर मिलेगा। भगवान शंकर जब प्रसन्न होंगे तो कैलाश मानसरोवर फिर से वापस मिलेगा। ऐसी स्थितियां बन रही हैं। उन्होंने कहा कि आज भी मानसरोवर के चारों तरफ सिद्ध पुरुष गुफाओं में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102889/devraha-baba-said-to-sangh-chief-bhagwat-that-kailash-mansarovar"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>मीरजापुर, 02 जुलाई (हि.स.)। विंध्याचल महुआरी स्थित आश्रम में त्रिकालदर्शी देवरहा हंस बाबा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत को संगठित होकर रहने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि भारत में एक होकर रहना है। भारत का ही होकर रहना है।<br /><br />उन्होंने कहा कि जिसने भाई-भाई कहकर देश के साथ छल किया और भाई-भाई कहकर देश पर चढ़ाई कर दी, उसको उसके किए का फल जरूर मिलेगा। भगवान शंकर जब प्रसन्न होंगे तो कैलाश मानसरोवर फिर से वापस मिलेगा। ऐसी स्थितियां बन रही हैं। उन्होंने कहा कि आज भी मानसरोवर के चारों तरफ सिद्ध पुरुष गुफाओं में विचरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व गुरु है, शीघ्र ही इसका लोगों को प्रमाण मिलेगा।<br /><br />राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो दिवसीय दौरे पर सोमवार को मीरजापुर आए थे और मंगलवार को आदिशक्ति जगत जननी मां विंध्यवासिनी का दर्शन कर उनसे अखंड भारत की कामना कर प्रस्थान कर गए।<br /><br />डॉ. भागवत ने देवरहा आश्रम पर रामदूत हनुमान को 51 मन लड्डू का भोग लगाकर दर्शन-पूजन किया। साथ ही देवरहा हंस बाबा का आशीर्वाद लिया और कैलाश मानसरोवर को भारत में मिलाने को लेकर हवन-पूजन भी किया। श्रीधाम वृंदावन के आचार्य मयंक, पंकज व विंध्याचल के एक आचार्य ने संघ प्रमुख को पूजन कराया।<br /><br />आश्रम के ट्रस्टी अतुल सक्सेना ने बताया कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कैलाश मानसरोवर भारत में मिले, इसके लिए पांचवीं बार संकल्प के साथ त्रिकालदर्शी देवरहा हंस बाबा का आशीर्वाद लिया। मंगलवार को सुबह देवरहा हंस बाबा के सत्संग में शामिल हुए और बाबा से आशीर्वाद लेने के बाद पौधरोपण किया, फिर मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने विंध्यधाम पहुंचे। मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट विंध्य कॉरिडोर को निहारा, फिर वाराणसी प्रस्थान कर गए।<br /><br />सुरक्षा के लिहाज से छावनी में तब्दील था आश्रम<br /><br />सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन मुस्तैद दिखा और तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। आश्रम को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/102889/devraha-baba-said-to-sangh-chief-bhagwat-that-kailash-mansarovar</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/102889/devraha-baba-said-to-sangh-chief-bhagwat-that-kailash-mansarovar</guid>
                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 12:49:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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