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                <description>Inflation RSS Feed</description>
                
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                <title>वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडर दिल्ली में 195 रुपये महंगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">01 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति संबंधी बाधाओं के बीच तेल विपणन कंपनियों ने बुधवार से </span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोग्राम वाले वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी-भरकम बढ़ोतरी की घोषणा की है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पहली अप्रैल से </span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोग्राम वाला एलपीजी सिलेंडर </span>2,078.50<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये का मिलेगा। इसकी कीमत गत </span>07<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च को बढ़ाकर </span>1,883<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये की गयी थी। इस प्रकार अब यह </span>195<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये यानी </span>10.38<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत महंगा हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस साल एक जनवरी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146353/commercial-lpg-cylinder-costlier-by-rs-195-in-delhi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-05/7194_gas-cylinder.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">01 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति संबंधी बाधाओं के बीच तेल विपणन कंपनियों ने बुधवार से </span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोग्राम वाले वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी-भरकम बढ़ोतरी की घोषणा की है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पहली अप्रैल से </span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोग्राम वाला एलपीजी सिलेंडर </span>2,078.50<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये का मिलेगा। इसकी कीमत गत </span>07<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च को बढ़ाकर </span>1,883<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये की गयी थी। इस प्रकार अब यह </span>195<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये यानी </span>10.38<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत महंगा हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस साल एक जनवरी से वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इस दौरान दिल्ली में यह </span>498<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये महंगा हो चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू इस्तेमाल वाले </span>14<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोग्राम के रसोई गैस सिलेंडर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें </span>07<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च को </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये की वृद्धि की गयी थी और फिलहाल दिल्ली में इसकी कीमत </span>913<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति सिलेंडर है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोलकाता में पहली अप्रैल से वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर </span>218<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये (</span>10.95<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत) महंगा होकर </span>2,208<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये का और मुंबई में </span>196<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये (</span>10.68<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत) की बढ़ोतरी के साथ </span>2,031<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये का हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">चेन्नई में इसकी कीमत </span>203<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये (</span>9.93<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत) बढ़कर अब </span>2,246.50<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति सिलेंडर पर पहुंच गयी है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 15:59:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शाकाहारी थाली सात प्रतिशत महंगी, टमाटर-आलू की महंगाई ने बिगाड़ा बजट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई (भाषा) टमाटर और आलू की कीमतें बढ़ने से नवंबर के महीने में घरेलू शाकाहारी भोजन साल भर पहले की तुलना में सात प्रतिशत तक महंगा हो गया।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की मासिक 'रोटी चावल दर' रिपोर्ट कहती है कि नवंबर महीने में शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर सात प्रतिशत बढ़कर 32.7 रुपये हो गई। वहीं मांसाहारी थाली के दाम दो प्रतिशत बढ़े हैं।</p>
<p>शाकाहारी थाली महंगी होने का मुख्य कारण टमाटर की कीमतों में 35 प्रतिशत और आलू की कीमतों में 50 प्रतिशत की उच्च बढ़ोतरी है। पिछले महीने टमाटर के दाम 53 रुपये प्रति किलो और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/106946/vegetarian-thali-becomes-seven-percent-more-expensive--tomato-potato-inflation-spoils-budget"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k06122024-03.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई (भाषा) टमाटर और आलू की कीमतें बढ़ने से नवंबर के महीने में घरेलू शाकाहारी भोजन साल भर पहले की तुलना में सात प्रतिशत तक महंगा हो गया।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की मासिक 'रोटी चावल दर' रिपोर्ट कहती है कि नवंबर महीने में शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर सात प्रतिशत बढ़कर 32.7 रुपये हो गई। वहीं मांसाहारी थाली के दाम दो प्रतिशत बढ़े हैं।</p>
<p>शाकाहारी थाली महंगी होने का मुख्य कारण टमाटर की कीमतों में 35 प्रतिशत और आलू की कीमतों में 50 प्रतिशत की उच्च बढ़ोतरी है। पिछले महीने टमाटर के दाम 53 रुपये प्रति किलो और आलू के दाम 37 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए।</p>
<p>इसके अलावा, दालों की कीमतों में भी 10 प्रतिशत का उछाल देखने को मिला।</p>
<p>हालांकि रिपोर्ट कहती है कि दिसंबर महीने में नई फसलों की आवक आने से इन उत्पादों के दाम गिरने की संभावना है।</p>
<p>नवंबर में आयात शुल्क में बढ़ोतरी की वजह से वनस्पति तेल की कीमतें भी 13 प्रतिशत तक बढ़ गईं।</p>
<p>राहत की बात यह रही कि एलपीजी की कीमतों में कटौती से ईंधन लागत 11 प्रतिशत घट गई। इससे घरेलू थाली की लागत पर दबाव कम करने में मदद मिली।</p>
<p>बीते महीने मांसाहारी थाली की कीमत भी दो प्रतिशत बढ़कर 61.5 रुपये हो गई। इस दौरान ब्रॉयलर मुर्गे की कीमत तीन प्रतिशत बढ़ी। मांसाहारी थाली की गणना में ब्रॉयलर का भारांक 50 प्रतिशत है।</p>
<p>अक्टूबर की तुलना में शाकाहारी थाली की कीमत में दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जिसके पीछे टमाटर की कीमतों में 17 प्रतिशत की मासिक गिरावट की अहम भूमिका रही। वहीं मांसाहारी थाली की कीमत स्थिर रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 14:00:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्‍ली : जुलाई महीने में थोक महंगाई दर घटकर 2.04 फीसदी पर आई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्‍ली, 14 अगस्‍त (हि.स.)। महंगाई के र्मोचे पर लोगों के लिए राहत देने वाली खबर है। खुदरा महंगाई के बाद थोक महंगाई दर में भी गिरावट दर्ज हुई है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित थोक महंगाई दर जुलाई में घटकर 2.04 फीसदी पर आ गई है। जून में ये बढ़कर 16 माह के उच्‍चतम स्‍तर 3.36 फीसदी पर पहुंच गई थी। वहीं, मई में थोक महंगाई दर 2.61 फीसदी थी।<br /><br />वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों में बताया कि जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित थोक महंगाई की दर घटकर 2.04 फीसदी रही है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103795/new-delhi-wholesale-inflation-rate-came-down-to-204-percent"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-08/b14082024-03.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्‍ली, 14 अगस्‍त (हि.स.)। महंगाई के र्मोचे पर लोगों के लिए राहत देने वाली खबर है। खुदरा महंगाई के बाद थोक महंगाई दर में भी गिरावट दर्ज हुई है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित थोक महंगाई दर जुलाई में घटकर 2.04 फीसदी पर आ गई है। जून में ये बढ़कर 16 माह के उच्‍चतम स्‍तर 3.36 फीसदी पर पहुंच गई थी। वहीं, मई में थोक महंगाई दर 2.61 फीसदी थी।<br /><br />वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों में बताया कि जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित थोक महंगाई की दर घटकर 2.04 फीसदी रही है। आंकड़ों के मुताबिक डब्ल्यूपीआई के प्राथमिक उत्पादों (रोजाना की जरूरत वाले सामानों) की महंगाई दर सालाना दर जुलाई, 2024 में 3.08 फीसदी रही है, जबकि जून 2024 में यह दर 8.80 फीसदी थी। मंत्रालय के मुताबिक खाने-पीने की चीजों की महंगाई 8.68 फीसदी से घटकर 3.55 फीसदी हो गई।<br /><br />मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक के मैन्युफैक्चरिंग उत्‍पादों की सलाना थोक महंगाई दर जून 2024 में 1.43 फीसदी के मुकाबले जुलाई 2024 में बढ़कर 1.58 फीसदी हो गई है। हालांकि, ईंधन तथा बिजली की महंगाई दर बढ़कर 1.72 फीसदी पर पहुंच गई है, जो जून 2024 में 1.03 फीसदी रही थी।<br /><br />उल्‍लेखनीय है कि जुलाई में खुदरा महंगाई की दर घटकर 3.54 फीसदी पर आ गई है, जो कि 59 महीने का निचला स्तर है। ये रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के चालू वित्‍त वर्ष 2024-25 के लिए तय दायरे के भीतर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Aug 2024 13:37:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्‍ली : जून महीने में खुदरा महंगाई दर उछलकर 5.08 फीसदी पर पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महंगाई के र्मोचे पर झटका देने वाली खबर है। उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जून में सालाना आधार पर उछलकर चार माह के उच्‍चतम स्‍तर 5.08 फीसदी पर पहुंच गई है। इससे पिछले महीने मई में खुदरा महंगाई दर 4.75 फीसदी रही थी। यह 12 महीने का निचला स्‍तर था।<br /><br />सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि जून में सब्जी, दालों और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से खुदरा महंगाई दर बढ़ी है। राष्‍ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बताया कि जून में खुदरा महंगाई दर 5.08 फीसदी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103101/retail-inflation-jumped-to-508-percent-in-the-month-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b12072024-24.jpg" alt=""></a><br /><p>महंगाई के र्मोचे पर झटका देने वाली खबर है। उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जून में सालाना आधार पर उछलकर चार माह के उच्‍चतम स्‍तर 5.08 फीसदी पर पहुंच गई है। इससे पिछले महीने मई में खुदरा महंगाई दर 4.75 फीसदी रही थी। यह 12 महीने का निचला स्‍तर था।<br /><br />सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि जून में सब्जी, दालों और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से खुदरा महंगाई दर बढ़ी है। राष्‍ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बताया कि जून में खुदरा महंगाई दर 5.08 फीसदी रही है। इससे पिछले महीने मई में यह 4.75 फीसदी रही थी।<br /><br />खाद्य महंगाई दर जून महीने में बढ़कर 9.36 फीसदी हो गई, जो मई में 8.69 फीसदी रही थी। जून में सब्जियों की महंगाई दर 29.32 फीसदी रही है, जो मई में 27.33 फीसदी रही थी। दालों की महंगाई दर जून में 16.07 फीसदी रही है, जो मई में 17.14 फीसदी रही थी। हालांकि, जून में दालों की महंगाई में मामूली कमी आई है। जून में फलों की महंगाई दर 7.1 फीसदी रही है, जो मई महीने में 6.68 फीसदी रही थी।<br /><br />आंकड़ों के मुताबिक अनाज और उससे जुड़े उत्‍पादों की महंगाई दर भी 8.75 फीसदी रही है, जो मई में 8.69 फीसदी रही थी। चीनी की महंगाई दर 5.83 फीसदी रही, जो मई में 5.70 फीसदी रही थी। हालांकि, अंडों की महंगाई दर घटकर 3.99 फीसदी रही है, जो मई में 7.62 फीसदी रही थी। शहरी महंगाई भी 4.21 फीसदी से बढ़कर 4.39 फीसदी पर पहुंच गई है। इसके अलावा ग्रामीण महंगाई दर 5.34 फीसदी से बढ़कर 5.66 फीसदी पर पहुंच गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jul 2024 21:52:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>थोक महंगाई दर घटकर 29 महीनों के निचले स्तर 1.34 फीसदी पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 17 अप्रैल (हि.स.)। महंगाई के र्मोचे पर आम आदमी को राहत देने वाली खबर है। खुदरा महंगाई के बाद थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर में बड़ी गिरावट आई है। मार्च में थोक महंगाई दर घटकर 29 महीनों के निचले स्तर 1.34 फीसदी पर आ गई है। फरवरी में यह 3.85 फीसदी और जनवरी में 4.73 फीसदी पर रही थी। हालांकि मार्च, 2022 में थोक महंगाई दर 14.62 फीसदी रही थी।<br /><br />वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को जारी आंकड़ों में बताया कि मार्च में थोक महंगाई दर घटकर 1.34 फीसदी रही है। डब्ल्यूपीआई पर आधारित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91368/wholesale-inflation-fell-to-a-29-month-low-of-134-per"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/news-photo-(27).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 17 अप्रैल (हि.स.)। महंगाई के र्मोचे पर आम आदमी को राहत देने वाली खबर है। खुदरा महंगाई के बाद थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर में बड़ी गिरावट आई है। मार्च में थोक महंगाई दर घटकर 29 महीनों के निचले स्तर 1.34 फीसदी पर आ गई है। फरवरी में यह 3.85 फीसदी और जनवरी में 4.73 फीसदी पर रही थी। हालांकि मार्च, 2022 में थोक महंगाई दर 14.62 फीसदी रही थी।<br /><br />वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को जारी आंकड़ों में बताया कि मार्च में थोक महंगाई दर घटकर 1.34 फीसदी रही है। डब्ल्यूपीआई पर आधारित थोक महंगाई दर में ये गिरावट मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में कमी की वजह से आई है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की महंगाई मार्च महीने में बढ़कर 5.48 फीसदी पर पहुंच गई है, जो फरवरी में 3.81 फीसदी रही थी।<br /><br />आंकड़ों के मुताबिक गेहूं और दालों की थोक महंगाई मार्च महीने में क्रमशः 9.16 फीसदी और 3.03 फीसदी रही है। सब्जियों की महंगाई दर 2.22 फीसदी रही है, जबकि तिलहन की थोक महंगाई मार्च में 15.05 फीसदी रही है। हालांकि, ईंधन और पावर की थोक महंगाई दर मार्च में घटकर 8.96 फीसदी पर आ गई है, जबकि फरवरी महीने में यह 14.82 फीसदी रही थी। मार्च महीने में खाद्य महंगाई 2.32 फीसदी रही है। इसके पिछले महीने फरवरी में खाद्य महंगाई 2.76 फीसदी रही थी।<br /><br />मंत्रालय के मुताबिक विनिर्माण उत्पादों की थोक महंगाई मार्च में घटकर 0.77 फीसदी पर आ गई है, जबकि फरवरी महीने में यह 1.94 फीसदी पर रही थी। आलू की थोक महंगाई दर मार्च में घटकर -23.67 फीसदी पर आ गई है, जबकि फरवरी में यह -14.30 फीसदी पर रही थी। हालांकि, प्याज की थोक महंगाई दर मार्च में थोड़ी बढ़कर -36.83 फीसदी रही है, जबकि फरवरी में यह -40.14 फीसदी रही थी।<br /><br />उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई दर मार्च में घटाकर 15 महीने के निचले स्तर 5.66 फीसदी पर आ गई थी, जो फरवरी महीने में 6.44 फीसदी रही थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Apr 2023 21:35:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान : महंगाई से तोड़ी आम जनता की कमर, 210 रुपये प्रति लीटर बिक रहा दूध, अन्य दैनिक जरूरतों के सामान भी हुए महंगे</title>
                                    <description><![CDATA[रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है पाकिस्तान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>भारत का पडोसी देश और आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान का आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि आम आदमी के लिए गुज़ारा करना मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान आर्थिक संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ कर्ज समझौते को अंतिम रूप देना चाहता है। इस सौदे को अंतिम रूप दिए जाने से पहले पाकिस्तानी उपभोक्ताओं को दूध और चिकन सहित दैनिक जरूरतों की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>दूध,चिकन, मांस सबके दाम बढ़े</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार पिछले दो दिनों में पाकिस्तान में खुदरा दूध की कीमत 190 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 210 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है और ब्रायलर चिकन में 30-40 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे इसकी कीमत में इजाफा हुआ है। अब बढ़कर 480-500 रुपए प्रति किलो हो गया है मुर्गे का मांस अब 700-780 पाकिस्तानी रुपए प्रति किलो बिक रहा है, जबकि पहले यह 620-650 रुपए प्रति किलो था। हड्डी रहित मांस कथित तौर पर 1,000-1,100 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है।</p>
<p><strong>अभी और बढ़ेंगे दूध के दाम </strong></p>
<p>इसी तरह दूध के दाम में भी बड़ा उछाल आया है। कराची मिल्क रिटेलर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता वहीद गद्दी ने कहा कि 1,000 से अधिक दुकानदार अत्यधिक कीमतों पर दूध बेच रहे हैं। उन्होंने कहा, ये थोक विक्रेताओं या डेयरी किसानों की दुकानें हैं न कि हमारे सदस्यों की। उन्होंने आगे कहा कि डेयरी किसानों और थोक विक्रेताओं द्वारा घोषित मूल्य वृद्धि को वापस नहीं लिया गया तो दूध की कीमत 210 रुपये के बजाय 220 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो जाएगी।ऐसे में साफ़ है कि पाकिस्तान रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/89718/pakistan-broke-the-back-of-common-people-due-to-inflation</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Feb 2023 14:14:51 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : मध्यमवर्गीय परिवार पर एक बार फिर गिरी महंगाई की मार, खाद्य तेल की कीमत में हुई बढ़ोत्तरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज के समय मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवार के लिए लगातार बढ़ती महंगाई का सामना करना एक बड़ी चुनौती है। गुजरात में लगातार बढ़ती मंदी के कारण आम आदमी का बजट गड़बड़ा रहा है। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से जीना मुश्किल हो गया है, आज लोगों पर महंगाई की एक और मार पड़ी है. पिछले दो दिनों में एक बार फिर मूंगफली तेल के भाव में तेजी हुई है। जिससे एक बार फिर गृहणियों का बजट गड़बड़ा गया है।</p>
<p><strong>एक केन पर बढ़े 30 रुपये</strong></p>
<p>आपको बता दें कि राज्य में बढ़ती महंगाई ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89115/inflation-hits-gujarat-middle-class-family-once-again-increase-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-09/6800_oil.jpg" alt=""></a><br /><p>आज के समय मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवार के लिए लगातार बढ़ती महंगाई का सामना करना एक बड़ी चुनौती है। गुजरात में लगातार बढ़ती मंदी के कारण आम आदमी का बजट गड़बड़ा रहा है। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से जीना मुश्किल हो गया है, आज लोगों पर महंगाई की एक और मार पड़ी है. पिछले दो दिनों में एक बार फिर मूंगफली तेल के भाव में तेजी हुई है। जिससे एक बार फिर गृहणियों का बजट गड़बड़ा गया है।</p>
<p><strong>एक केन पर बढ़े 30 रुपये</strong></p>
<p>आपको बता दें कि राज्य में बढ़ती महंगाई ने लोगों को चिंतित कर दिया है। पिछले दो दिनों में अरंडी के तेल की एक केन में 30 रुपए की तेजी आई है। कीमतों में हुए बदलाव में बढ़ 2700 रुपये प्रति कैन अरंडी तेल की कीमत 2730 हो गई है और कपासिया तेल की कीमतों में भी 5 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jan 2023 19:45:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महंगाई डायन खाए जाते है! आम आदमी को लगा एक और बड़ा झटका, रेपो रेट फिर हुआ महंगा</title>
                                    <description><![CDATA[मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के आखिरी दिन हुआ ये फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>मंहगाई की मार झेल रहे आम आदमी को एकबार फिर बड़ा झटका लगा है। देश में लगातार बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक ने एक बार फिर से रेपो रेट को बढ़ा दिया है। आरबीआई ने रेपो रेट में 0.50 की बढ़ोतरी की है।<span style="font-size:1rem;"> रेपो रेट में RBI द्वारा की गई यह लगतार चौथी बार बढ़ोतरी है। रिजर्व बैंक के अध्यक्ष शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के आखिरी दिन शुक्रावर को रेपो रेट में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी का ऐलान किया। इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.40 से बढ़कर 5.90 फीसद हो गया है। </span></div><div><br /></div><h2>बढ़ जाएगी ईएमआई, महंगा हो जाएगा लोन </h2><div><br /></div><div>रेपो रेट में बढ़ोतरी का सीधा मतलब है कि लोन की ब्याज दर बढ़ेगी। ऐसे में होम लोन समेत सभी तरह के लोन महंगे हो जाएंगे। आरबीआई के इस ऐलान का अर्थ यह है कि अगर आप भी लोनधारक है तो उकी ईएमआई काफी बढ़ने वाली है। इसका असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन पर पड़ेगा।</div><div><br /></div><h2><span style="font-size:1rem;">क्या है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट ?</span></h2><div><br /></div><div>रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI द्वारा बैंकों को कर्ज दिया जाता है और बैंक इसी कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट बढ़ने का मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के लोन महंगे हो जाएंगे। रिवर्स रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंकों की ओर से जमा राशि पर RBI से उन्हें ब्याज मिलता है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80788/inflation-witches-are-eaten-another-big-blow-to-the-common-man-repo-rate-became-expensive-again</link>
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                <pubDate>Fri, 30 Sep 2022 22:29:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>त्योहार पर भी महंगाई की मार, रक्षाबंधन से पहले जरुरी चीजों की कीमतों में 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल बाजार में खरीदारी कम है, लेकिन उम्मीद भी है कि आने वाले तीन-चार दिन बाद मांग अच्छी होगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/69101/inflation-hit-even-on-festival-increase-in-prices-of-essential-things-by-20-to-25-percent-before-raksha-bandhan"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-08/4512_news25.jpg" alt=""></a><br /><div>आम आदमी इस समय महंगाई की मार से  जूझ रहा है।  इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर त्योहारों तक पर देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में  भाई-बहनों के त्योहार रक्षा बंधन पर भी  महंगाई का असर देखने को मिल रहा है। राखी बनाने के लिए धागा, मोती समेत जरूरी सामान के दाम में 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल बाजार में खरीदारी कम है, लेकिन उम्मीद भी है कि आने वाले तीन-चार दिन बाद मांग अच्छी होगी।</div><div>आपको बता दें कि सूरत के बाहर दूसरे शहरों में रहने वाले भाइयों को राखी भेजने के लिए बहनों ने राखी खरीदना शुरू कर दिया है। मानो दो साल तक कोरोना के चलते रक्षा बंधन के पर्व पर भी लॉकडाउन लगा हुआ था। हालांकि इस साल कोरोना का असर कम होने के साथ ही उम्मीद लगाई जा रही हैं कि इस बार रक्षा बंधन का त्योहार अच्छे से मनाया जाएगा। इसी के मद्देनजर शहर के हर क्षेत्र में राखी के स्टॉल लग गए हैं।</div><div>दुकानदारों ने बच्चों के लिए रंग-बिरंगी और कार्टून और लाइट-अप राखियां लगाई हैं। ऐसे में ज्वैलर्स को भी सोने-चांदी की राखी बनाने का ऑर्डर मिला है। हालांकि इस साल बढ़ती महंगाई का असर राखी की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि राखी के लिए आवश्यक सूती धागे, मोती, रंग और श्रम और परिवहन की लागत में वृद्धि के कारण राखी की कीमत में सीधे 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले साल की तुलना में इस साल अचानक कीमत बढ़ने से थोक बाजार में भी मांग कम है।</div><div>आमतौर पर राखी उत्पादक हर साल बाजार में नई किस्में उतारते हैं। इस साल भाई और भाभी को भी राखी बांधने के लिए एक जोड़ी राखी बनाई गई है। जिसे कपाल राखी नाम दिया गया है। जोड़ी राखी में भाभी के लिए झुमके भी रखे जाते हैं। कपास की कीमतों में वृद्धि के कारण धागे की कीमत में वृद्धि के अलावा, चीन से मोती की कीमतों और श्रम सहित अन्य सभी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने राखी की कीमत में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि की है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/69101/inflation-hit-even-on-festival-increase-in-prices-of-essential-things-by-20-to-25-percent-before-raksha-bandhan</link>
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                <pubDate>Thu, 04 Aug 2022 22:00:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया भर के सीईओ का मानना, अगले एक से डेढ़ साल में आएगी भयंकर मंदी</title>
                                    <description><![CDATA[कॉन्फ्रेंस बोर्ड द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार अगले 12 से 18 महीनों में भयंकर मंदी देखने को मिलेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/84608/ceos-around-the-world-believe-there-will-be-a-severe-recession-in-the-next-one-to-one-and-a-half-years"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/3405_inflation-dollor-share1.jpg" alt=""></a><br /><div>इस समय भारत समेत दुनिया भर के देशों में मंहगाई बढ़ रही है. इसी बीच एक सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) का मानना है कि अगले 12 से 18 महीनों में भयंकर मंदी देखने को मिलेगी। पैंसठ प्रतिशत सीईओ का मानना है कि जिस क्षेत्र में उनकी कंपनी काम करती है वह पहले से ही मंदी में है। इस सर्वेक्षण में 750 सीईओ ने भाग लिया था।</div><div>आपको बता दें कि कॉन्फ्रेंस बोर्ड द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, यूरोजोन में अब तक जीडीपी में वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या यह वृद्धि जारी रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है, "बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण लोगों की क्रय शक्ति घट रही है।" दूसरी ओर, यूक्रेन में युद्ध का माल की आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इन दोनों कारकों के कारण मंदी की संभावना है।</div><div>इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका में मंदी की संभावना बढ़ गई है। बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक, अगले साल अमेरिका में मंदी की 40 फीसदी संभावना है। दूसरी ओर, 70 प्रतिशत प्रमुख अकादमिक अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अमेरिका अगले साल मंदी की चपेट में आएगा। फेडरल रिजर्व के मुताबिक, जीडीपी 2021 की चौथी तिमाही से 2022 की चौथी तिमाही तक 1.7 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। जो मार्च में 2.8 फीसदी रहने का अनुमान था।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 19:59:02 +0530</pubDate>
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                <title>भारत से भी अधिक महंगवाई अमेरिका में है, 40 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा है!</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व बाजार पर दिखाई दे रहा है अमेरिकी मंहगाई का असर, भारत में भी शेयर बाजार की स्थिति बिगड़ती हुई, रुपया हो रहा कमजोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/84606/america-has-more-inflation-than-india-the-record-of-40-years-has-been-broken"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/3405_inflation-dollor-share.jpg" alt=""></a><br /><div>इस समय देश में आम जनता बढ़ती महंगाई से त्रस्त है। पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ने के कारण हर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर असर हुआ है। वहीं रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हाल ही आरबीआई ने अपने रेपो रेट पर बढ़ोतरी की जिससे मासिक क़िस्त की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसबप्रकार से हम पूरी तरह से मंहगाई से जूझ रहे हैं। पर ऐसा नहीं है कि ये हालात सिर्फ भारत में है। अन्य देशों से तुलना की जाए तो पता चलेगा कि बाकी देशों की भी हालत ऐसी ही है। हम अमेरिका की बात करें तो वहां मंहगाई बीते 40 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है।</div><div>आपको बता दें कि  अमेरिका में महंगाई का मई महीने के लिएबडेटा सामने आ गया है। अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट की तरफ से जारी डेटा के मुताबिक, मई के महीने में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी रिटेल इंफ्लेशन 4 दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इन आंकड़ों के अनुसार मई महीने में सीपीआई सालाना आधार पर 8.6 फीसदी रहा। जबकि अप्रैल के महीने में खुदरा महंगाई दर 8.3 फीसदी रही थीम मार्च के मुकाबले मई में महंगाई दर में 0.3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। मार्च 2022 में उपभोक्ता मूल्य आधारित महंगाई 1982 के बाद पहली बार 8.5 फीसदी पर पहुंची थी।</div><div>बढ़ती मंहगाई के बीच खानपान एवं अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से किसी भीबअमेरिकी परिवार के लिए जीवन-निर्वाह काफी मुश्किल हो गया है। इसकी सबसे ज्यादा मार अश्वेत समुदाय एवं निम्न-आय वर्ग के लोगों को झेलनी पड़ रही है। कुछ विश्लेषकों ने ऐसी संभावना जताई है कि आने वाले कुछ महीनों में महंगाई में थोड़ी राहत मिल सकती है पर इसके बावजूद महंगाई के साल के अंत में सात फीसदी से नीचे आने की संभावना कम ही है।</div><div>शेयर बाजार की बात करें तो इन आंकड़ों के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई है। डाउ जोन्स में 880 अंक यानी 2.73 फीसदी, नैसडैक में 414 अंक यानी 3.52 फीसदी और एस एंड पी 500 में 117 अंक यानी 2.91 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसका असर ग्लोबल मार्केट पर भी पड़ा है। अमेरिका की दशा के कारण भारतीय बाजार में भी 1000 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई।</div><div>इस महंगाई के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में अगर फेडरल रिजर्व इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी करता है तो विदेशी निवेशको को और नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही भारतीय शेयर बाजार में अभी और कमी देखी जा सकती है। इसके अलावा हाई इंट्रेस्ट रेट से रुपए की वैल्यु और घटेगी जो पहले ही 78 रुपए के स्तर पर पहुंच चुकी है। कमजोर रुपए से इंपोर्ट बिल महंगा होगा और इंपोर्टेड इंफ्लेशन रेट बढ़ जाएगा। ऐसे में रिजर्व बैंक पर रुपए में मजबूती लाने के लिए इंट्रेस्ट रेट बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने बजट 2022 में फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 6.9 फीसदी रखा है। इसके लिए कच्चे तेल का औसत भाव 75 डॉलर रखा है। रिजर्व बैंक ने इसी सप्ताह हुई MPC की बैठक में कच्चे तेल के लिए औसत भाव को बढ़ाकर 105 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sat, 18 Jun 2022 07:59:01 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने मंहगाई के बारे में जो कहा उससे बिलकुल भी खुश नहीं होगी आम जनता</title>
                                    <description><![CDATA[रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की माने तो आने वाले दिनों में बढ़ेगी मंहगाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80695/the-general-public-will-not-be-happy-at-all-with-what-former-rbi-governor-raghuram-rajan-said-about-inflation"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/8271_raghuram-rajan-rbi.jpg" alt=""></a><br /><div>इन दिनों आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है. ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने जो जानकारी दी उससे आम जनता बहुत खुश नहीं होने वाली। रघुराम ने मंहगाई को लेकर कहा कि अभी तो देश में मुद्रास्फीति बढ़ती रहेगी। राजन अमेरिका में महंगाई के आंकड़े जारी होने के बाद बोल रहे थे। अमेरिका में मई के मुद्रास्फीति के आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। अप्रैल में रही 8.3 फीसदी मुद्रास्फीति मई में बढ़कर 8.6 फीसदी हो गई। वहीं, अमेरिका में महंगाई चार दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।</div><div>रघुराम राजन ने कहा, "निश्चित रूप से मंदी से बचा जा सकता है, लेकिन निकट भविष्य में मंदी से इंकार नहीं किया जा सकता है।" उन्होंने अमेरिकी गठबंधन के समर्थन में बात की, लेकिन कहा कि कुछ स्वतंत्रता बनाए रखना फेडरल रिजर्व के लिए महत्वपूर्ण था। उन्होंने यूरोपियन सेंट्रल बैंक से यह भी कहा कि उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। यूरो में कमजोरी ने आयातित मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ा दिया है और ईसीबी को उचित समय पर कार्रवाई करनी होगी।</div><div>आपको बता दें कि राजन ने आगे कहा, 'कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का अभी कोई असर नहीं पड़ा है। जबकि वित्तीय बाजार गिर गए हैं और ऐसा जारी रखेगा। रघुराम राजन वर्तमान में शिकागो विश्वविद्यालय के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में वित्त के प्रोफेसर हैं। उन्होंने पहली बार 2008 में वित्तीय संकट का संकेत दिया था। उन्होंने भारत में आरबीआई गवर्नर के पद पर रहते हुए बैंकों के फंसे कर्ज की समस्या पर भी प्रकाश डाला।</div><div>मई में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अप्रैल में बढ़कर 7.79 प्रतिशत हो गया, जो उच्च खुदरा मुद्रास्फीति का संकेत है। यह मई 2014 के बाद सबसे ज्यादा सीपीआई है। इन सबके बीच आरबीआई ने महंगाई पर लगाम लगाने के लिए मई से जून तक रेपो रेट दो बार बढ़ाया है। आरबीआई ने 4 मई से रिपोर्ट में 0.40 फीसदी और 8 जून को रिपोर्ट में 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, आरबीआई निकट भविष्य में दरें बढ़ाना जारी रखेगा।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 22:59:01 +0530</pubDate>
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