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                <title>Mount Everest - Loktej</title>
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                <description>Mount Everest RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एक ही दिन में 274 पर्वतारोहियों ने फतह किया एवरेस्ट, टूट गया सालों पुराना रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>काठमांडू, 22 मई (वेब वार्ता)। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर एक ही दिन में 274 पर्वतारोहियों के पहुंचने का नया एवरेस्ट रिकॉर्ड बना है।</p>
<p>गुरुवार को नेपाल के दक्षिणी मार्ग से सफल चढ़ाई करके इन सभी साहसी लोगों ने शिखर को चूमा है। इतनी बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों का एक साथ वहां सुरक्षित पहुंचना एक बहुत ही ऐतिहासिक क्षण है।</p>
<p>नेपाल एक्सपेडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अनुसार लंबे समय तक मार्ग बंद रहने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस सीजन के लिए करीब 500 पर्वतारोहण परमिट नेपाल सरकार द्वारा जारी किए गए थे।</p>
<p>मौसम साफ होते ही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/147248/274-climbers-conquered-everest-in-a-single-day-years-old"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/mount-everest.jpg" alt=""></a><br /><p>काठमांडू, 22 मई (वेब वार्ता)। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर एक ही दिन में 274 पर्वतारोहियों के पहुंचने का नया एवरेस्ट रिकॉर्ड बना है।</p>
<p>गुरुवार को नेपाल के दक्षिणी मार्ग से सफल चढ़ाई करके इन सभी साहसी लोगों ने शिखर को चूमा है। इतनी बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों का एक साथ वहां सुरक्षित पहुंचना एक बहुत ही ऐतिहासिक क्षण है।</p>
<p>नेपाल एक्सपेडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अनुसार लंबे समय तक मार्ग बंद रहने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस सीजन के लिए करीब 500 पर्वतारोहण परमिट नेपाल सरकार द्वारा जारी किए गए थे।</p>
<p>मौसम साफ होते ही बेस कैंप से सभी पर्वतारोहियों ने एक साथ शिखर की ओर अपनी चढ़ाई शुरू कर दी। इसी भारी भीड़ के कारण एक ही दिन में फतह का यह विश्व रिकॉर्ड संभव हो पाया है।</p>
<p>पुराना 2019 का रिकॉर्ड टूटा<br />यह नेपाली रूट से एक दिन में एवरेस्ट फतह करने वालों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या बन गई है। इससे पहले 22 मई 2019 को 223 पर्वतारोही दक्षिणी फेस से शिखर तक सुरक्षित रूप से पहुंचे थे। उस ऐतिहासिक दिन कुल वैश्विक संख्या काफी अधिक थी क्योंकि दोनों तरफ से चढ़ाई हो रही थी। उस समय तिब्बत वाले उत्तरी मार्ग से भी पर्वतारोहियों की चढ़ाई सुचारू रूप से चल रही थी।</p>
<p>इस बार चीन की ओर से पर्वतारोहियों के लिए कोई भी नया परमिट बिल्कुल जारी नहीं किया गया है। इस सख्त पाबंदी की वजह से तिब्बत की तरफ वाला उत्तरी मार्ग पूरी तरह से बंद रहा है। उत्तरी रास्ता बंद होने के कारण दुनियाभर के सभी पर्वतारोहियों को सिर्फ नेपाली रूट का इस्तेमाल करना पड़ा। इसी वजह से दक्षिणी मार्ग पर चढ़ाई करने वालों की बहुत ज्यादा भीड़ एक साथ जमा हो गई थी।</p>
<p>मार्ग खुलने में हुई भारी देरी<br />इस सीजन में लगातार खराब मौसम के कारण लंबे समय तक चढ़ाई का रास्ता पूरी तरह बंद ही रहा। ‘आइसफॉल डॉक्टर’ कहलाने वाले हिमालई श्रमिकों को विशाल सेराक हटाने में कई हफ्तों का वक्त लग गया।</p>
<p>इसलिए मुख्य मार्ग 13 मई तक किसी भी पर्वतारोही के लिए पूरी तरह से नहीं खुल सका था। बेस कैंप में इंतजार कर रहे लोगों की भारी भीड़ जमा होने का यही सबसे बड़ा और मुख्य कारण था।</p>
<p>इस नए कीर्तिमान के साथ ही 8,848 मीटर ऊंचे शिखर पर लोगों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। अत्यधिक भीड़ के कारण संकरे बर्फीले रास्तों पर लोगों को काफी लंबे समय तक रुकना पड़ता है।</p>
<p>इन पर्वतारोहियों को खतरनाक ‘डेथ जोन‘ में इंतजार करना पड़ता है जहां ऑक्सीजन बेहद कम होती है। मानव शरीर के लिए यह स्थिति बहुत ही ज्यादा खतरनाक और कई बार जानलेवा भी मानी जाती है।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि चढ़ाई के लिए बेहद कम समय की अनुकूल मौसम खिड़की मिल पाई थी। सप्ताहांत में तेज हवाओं का भारी अनुमान था जिससे बचने के लिए पहले ही लोग शिखर की ओर बढ़ पड़े।</p>
<p>इसी जल्दबाजी और बड़ी संख्या में वहां मौजूद पर्वतारोहियों ने भीड़भाड़ की स्थिति को बहुत गंभीर बना दिया। फिर भी इतनी बड़ी संख्या में सफल चढ़ाई करना पर्वतारोहण के इतिहास में बहुत बड़ा कदम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 15:02:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>माउंट एवरेस्ट पर बर्फीले तूफान के बाद 200 से अधिक पर्वतारोही फंसे, 350 बचाए गए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बीजिंग, छह अक्टूबर (भाषा) माउंट एवरेस्ट के तिब्बती ढलानों पर बर्फीले तूफान के बाद 200 से अधिक पर्वतारोही फंस गए हैं, जबकि 350 अन्य को ग्रामीणों और बचाव दलों ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है।</p>
<p>रविवार को शिविर स्थलों पर फंसे पर्वतारोहियों की स्थिति हिमपात होने के कारण और भी खराब हो गई। सैकड़ों स्थानीय ग्रामीण और बचावकर्मी आवश्यक सामान लेकर घटनास्थल की ओर पहुंचे, जहां शुक्रवार से लगातार हिमपात हो रहा है।</p>
<p>‘बीबीसी’ ने सोमवार को सरकारी चैनल सीसीटीवी के हवाले से बताया कि 200 से अधिक पर्वतारोही अब भी बर्फीले तूफान में फंसे हुए हैं। लगभग 350 पर्वतारोहियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143451/more-than-200-climbers-stranded-350-after-icy-storm-on"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/5072_everest-himalaya-nepal-india-mountain.jpg" alt=""></a><br /><p>बीजिंग, छह अक्टूबर (भाषा) माउंट एवरेस्ट के तिब्बती ढलानों पर बर्फीले तूफान के बाद 200 से अधिक पर्वतारोही फंस गए हैं, जबकि 350 अन्य को ग्रामीणों और बचाव दलों ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है।</p>
<p>रविवार को शिविर स्थलों पर फंसे पर्वतारोहियों की स्थिति हिमपात होने के कारण और भी खराब हो गई। सैकड़ों स्थानीय ग्रामीण और बचावकर्मी आवश्यक सामान लेकर घटनास्थल की ओर पहुंचे, जहां शुक्रवार से लगातार हिमपात हो रहा है।</p>
<p>‘बीबीसी’ ने सोमवार को सरकारी चैनल सीसीटीवी के हवाले से बताया कि 200 से अधिक पर्वतारोही अब भी बर्फीले तूफान में फंसे हुए हैं। लगभग 350 पर्वतारोहियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।</p>
<p>पहले की खबरों में कहा गया था कि चीन की ओर स्थित कर्मा घाटी में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की ढलानों पर 1,000 से अधिक पर्यटक पर्वतारोही फंसे हुए हैं।</p>
<p>फंसे पर्वतारोहियों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से पता चलता है कि रविवार को दूरस्थ क्षेत्र में बादलों की गरज के बीच, तेज हवाओं और लगातार बर्फबारी के कारण रास्ते पूरी तरह से बर्फ में दब गए।</p>
<p>चीन में माउंट एवरेस्ट को माउंट क्योमोलंग्मा कहा जाता है, जिसकी ऊंचाई 8,849 मीटर से अधिक है और यह दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।</p>
<p>इस बीच, दक्षिण चीन के ग्वांगदोंग प्रांत के झानजियांग शहर के शूवेन काउंटी के पूर्वी तट पर रविवार को तूफान मैत्मो ने दस्तक दी।</p>
<p>स्थानीय सरकारों ने ग्वांगदोंग और हैनान के दक्षिणी प्रांतों से लगभग 3,47,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 14:54:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>माउंट एवरेस्ट पर 31वीं बार चढ़ने का प्रयास करेंगे प्रसिद्ध शेरपा गाइड कामी रीता, तोड़ेंगे अपना ही रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>काठमांडू, 20 अप्रैल (एपी) दुनिया के सबसे प्रख्यात पर्वतारोहण मार्गदर्शकों में शामिल एक गाइड 31वीं बार विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने का प्रयास करेंगे- और संभवत: वह 32वीं बार भी ऐसा करें- और खुद का रिकॉर्ड तोड़ेंगे।</p>
<p>कामी रीता (55) रविवार को काठमांडू से माउंट एवरेस्ट के लिए रवाना हुए। वह पर्वतारोहियों के एक समूह का नेतृत्व करेंगे जो वसंत ऋतु में पर्वतारोहण के मौसम में 8,849 मीटर (29,032 फुट) ऊंचे शिखर पर पहुंचने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>काठमांडू हवाई अड्डे पर ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से बात करते हुए कामी रीता ने कहा, “मैं मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140246/famous-sherpa-guide-kami-rita-will-break-his-own-record"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/5072_everest-himalaya-nepal-india-mountain.jpg" alt=""></a><br /><p>काठमांडू, 20 अप्रैल (एपी) दुनिया के सबसे प्रख्यात पर्वतारोहण मार्गदर्शकों में शामिल एक गाइड 31वीं बार विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने का प्रयास करेंगे- और संभवत: वह 32वीं बार भी ऐसा करें- और खुद का रिकॉर्ड तोड़ेंगे।</p>
<p>कामी रीता (55) रविवार को काठमांडू से माउंट एवरेस्ट के लिए रवाना हुए। वह पर्वतारोहियों के एक समूह का नेतृत्व करेंगे जो वसंत ऋतु में पर्वतारोहण के मौसम में 8,849 मीटर (29,032 फुट) ऊंचे शिखर पर पहुंचने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>काठमांडू हवाई अड्डे पर ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से बात करते हुए कामी रीता ने कहा, “मैं मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से पर्वत पर चढ़ने के लिए तैयार हूं। फिलहाल मेरी शारीरिक स्थिति सर्वश्रेष्ठ स्तर पर है।”</p>
<p>माउंट एवरेस्ट पर सबसे ज्यादा 30 बार चढ़ने का रिकॉर्ड उनके नाम है। पिछले साल मई में उन्होंने दो बार इस चोटी पर चढ़ाई की थी।</p>
<p>उन्होंने कहा, “मेरी पहली प्राथमिकता अपने साथियों को चोटी के शिखर तक पहुंचाना है। उसके बाद मैं तय करूंगा कि मैं सीजन के दौरान एक से ज्यादा बार चोटी पर चढूंगा या नहीं। यह मौसम और पहाड़ की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।”</p>
<p>माउंट एवरेस्ट पर सर्वाधिक बार चढ़ाई करने के मामले में उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और साथी शेरपा गाइड पासंग दावा हैं, जिन्होंने पर्वत पर 27 बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की है।</p>
<p>कामी रीता ने पहली बार 1994 में एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी और तब से वह लगभग हर साल ऐसा करते आ रहे हैं। वह कई शेरपा गाइडों में से एक हैं जिनकी विशेषज्ञता व कौशल हर साल पहाड़ की चोटी पर चढ़ने की इच्छा रखने वाले विदेशी पर्वतारोहियों की सुरक्षा व सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Apr 2025 18:16:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का शुल्क बढ़ाकर 15,000 अमेरिकी डॉलर किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(शिरीष बी प्रधान)</p>
<p>काठमांडू, 23 जनवरी (भाषा) नेपाल ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए परमिट शुल्क में 36 प्रतिशत की भारी वृद्धि की है और दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर कचरा फैलने से रोकने के लिए कई कदम भी उठाए हैं।</p>
<p>संशोधित पर्वतारोहण नियमों के तहत वसंत ऋतु (मार्च-मई) में सामान्य दक्षिण मार्ग से एवरेस्ट पर चढ़ने वाले विदेशियों के लिए परमिट शुल्क मौजूदा 11,000 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति से बढ़ाकर 15,000 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है।</p>
<p>शरद ऋतु (सितंबर-नवंबर) के लिए चढ़ाई का शुल्क 5,500 अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 7,500 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/124534/nepal-increases-the-fee-to-climb-mount-everest-to-us---15-000"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/mount-everest.jpg" alt=""></a><br /><p>(शिरीष बी प्रधान)</p>
<p>काठमांडू, 23 जनवरी (भाषा) नेपाल ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए परमिट शुल्क में 36 प्रतिशत की भारी वृद्धि की है और दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर कचरा फैलने से रोकने के लिए कई कदम भी उठाए हैं।</p>
<p>संशोधित पर्वतारोहण नियमों के तहत वसंत ऋतु (मार्च-मई) में सामान्य दक्षिण मार्ग से एवरेस्ट पर चढ़ने वाले विदेशियों के लिए परमिट शुल्क मौजूदा 11,000 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति से बढ़ाकर 15,000 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है।</p>
<p>शरद ऋतु (सितंबर-नवंबर) के लिए चढ़ाई का शुल्क 5,500 अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 7,500 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है। वहीं, सर्दियों (दिसंबर-फरवरी) और मानसून (जून-अगस्त) के लिए प्रति व्यक्ति परमिट शुल्क 2,750 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 3,750 अमेरिकी डॉलर हो गया है।</p>
<p>पर्यटन बोर्ड की निदेशक आरती न्यूपाने ने कहा कि इस संबंध में कैबिनेट का निर्णय पहले ही हो चुका है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 8848.86 मीटर ऊंची चोटी पर चढ़ने के लिए शुल्क की नयी दरें एक सितंबर 2025 से प्रभावी होंगी।</p>
<p>नेपाल राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद कैबिनेट द्वारा अनुमोदित संशोधित नियम प्रभावी हो जाएंगे।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने कहा कि शरद ऋतु के लिए एवरेस्ट पर चढ़ने के इच्छुक नेपाली पर्वतारोहियों के वास्ते परमिट शुल्क को मौजूदा 75,000 रुपये से बढ़ाकर दोगुना यानी 1,50,000 रुपये कर दिया जाएगा।</p>
<p>परमिट शुल्क में आखिरी बार संशोधन एक जनवरी 2015 को किया गया था।</p>
<p>इसके अलावा, चढ़ाई के लिए परमिट की 75 दिनों की अवधि को 55 दिन कर दिया जाएगा। दैनिक अखबार ‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार चढ़ाई की अवधि को कम करने का उद्देश्य गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना है।</p>
<p>पर्यटन मंत्रालय में संयुक्त सचिव इंदु घिमिरे ने कहा, ‘‘वसंत 2025 के लिए पहले से ही स्वीकार की गई बुकिंग पर इस बदलाव का असर नहीं पड़ेगा।’’</p>
<p>घिमिरे के अनुसार कचरा प्रबंधन, ऊंचाई वाले क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सरकारी राजस्व को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर इस बदलाव को किया गया है।</p>
<p>नए नियमों के अनुसार पर्वतारोही अपने साथ सिर्फ वही वस्तु ले जा सकेंगे जो पर्यटन विभाग द्वारा जारी किए गए परमिट दस्तावेज में सूचीबद्ध होंगी।</p>
<p>पिछले साल वसंत ऋतु में 421 परमिट जारी किए गए थे। दो सौ विदेशियों सहित लगभग 600 पर्वतारोही शिखर पर पहुंचे थे और लगभग 2,000 लोग आधार शिविर में जुटे।</p>
<p>खबर में कहा गया है कि आठ पर्वतारोहियों की मौत की घटनाएं भी सामने आईं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/124534/nepal-increases-the-fee-to-climb-mount-everest-to-us---15-000</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 13:50:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल: माउंट एवरेस्ट के पास हिमस्खलन में तीन शेरपा गाइडों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>काठमांडू, 12 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल के माउंट एवरेस्ट के पास हिमस्खलन में तीन शेरपा गाइडों की बर्फ में दबकर मौत हो गई है। हिमस्खलन के बाद गम हुए तीनों गाइडों को खोजने के लिए हेलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन उनके शव बरामद नहीं हो सके हैं।<br /><br />सोलुखुम्बु जिला प्रशासन कार्यालय के सूचना अधिकारी सीता अधिकारी ने बताया कि हिमस्खलन की घटना आज बुधवार सुबह 11 बजे हुई। हेलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाने पर तीन लापता शेरपा गाइडों की मौत होने की पुष्टि हुई है। मरने वालों में तेंबा तेनजी शेरपा, लक्पा रीता शेरपा और बदुरे शेरपा हैं। यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91205/avalanche-kills-three-sherpa-guides-near-nepals-mount-everest"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/mount-everest.jpg" alt=""></a><br /><p>काठमांडू, 12 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल के माउंट एवरेस्ट के पास हिमस्खलन में तीन शेरपा गाइडों की बर्फ में दबकर मौत हो गई है। हिमस्खलन के बाद गम हुए तीनों गाइडों को खोजने के लिए हेलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन उनके शव बरामद नहीं हो सके हैं।<br /><br />सोलुखुम्बु जिला प्रशासन कार्यालय के सूचना अधिकारी सीता अधिकारी ने बताया कि हिमस्खलन की घटना आज बुधवार सुबह 11 बजे हुई। हेलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाने पर तीन लापता शेरपा गाइडों की मौत होने की पुष्टि हुई है। मरने वालों में तेंबा तेनजी शेरपा, लक्पा रीता शेरपा और बदुरे शेरपा हैं। यह तीनों माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले दल के सदस्यों के लिए आवश्यक सामग्री पहुंचाने में कार्यरत थे। वे इमेजिन ट्रैक से एवरेस्ट पर चढ़ने वाले गाइड थे। इनके शव बरामद नहीं हो सके हैं, क्योंकि वे काफी गहराई (खोच) में दबे हुए हैं।<br /><br />घटना स्थल एवरेस्ट के पास नामचे बाजार से तीन दिन की पैदल दूरी पर है। पर्यटन विभाग ने बताया है कि यह जगह 5,700 मीटर की ऊंचाई पर है। तीनों मृतक एवरेस्ट पर चढ़ने से पहले अभ्यास कर रहे थे। एवरेस्ट चढ़ाई का मौसम शुरू हो रहा है। इससे पहले पर्वतारोही और सहायक पूर्व प्रशिक्षण के लिए एवरेस्ट के निकट पहुंचते हैं। नेपाल के पर्यटन विभाग ने पहले ही इस सीजन में 66 पर्वतारोही समूहों के 559 लोगों को अनुमति दे दी है। एवरेस्ट पर चढ़ने वाली 24 पर्वतारोही टीमों में 41 महिलाओं सहित 243 लोग हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 12 Apr 2023 21:47:21 +0530</pubDate>
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                <title>गुजरात के कच्छ के रहने वाले जतिन चौधरी ने माउंट एवरेस्ट फतह किया</title>
                                    <description><![CDATA[जतिन रामसिंह चौधरी ने 12 मई को माउंट एवरेस्ट की 8848 मीटर की कठिन चढ़ाई पूरी की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>किसी भी बड़ा काम पूरा करने के लिए अद्वितीय साहस की जरूरत होती है। ऐसे ही अपने जीवन की परवाह किए बिना विपरीत परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करते हुए मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले और कच्छ को कर्मभूमि बनाने वाले भुज के एक युवक जतिन रामसिंह चौधरी ने 12 मई को माउंट एवरेस्ट की 8848 मीटर की कठिन चढ़ाई पूरी की और अपने परिवार के साथ-साथ कच्छ का नाम रोशन किया।</div><div>जानकारी के अनुसार यूपी के मूल निवासी और और कच्छ से सेवानिवृत्त पीएसआई रामसिंह चौधरी के 42 वर्षीय बेटे जतिन ने 14 अप्रैल को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना शुरू किया। लुकला से बेस कैंप तक पहुंचने में उन्हें 10 से 15 दिन लगे। 9 तारीख को अंतिम चढ़ाई करते हुए एवरेस्ट की चोटी पर स्वामीनारायण मंदिर का ध्वज फहराया। इस पर्वतारोहण के दौरान एसपीओ-द्वितीय यानी ऑक्सीजन स्तर 53 तक पहुंच गया।  आम तौर पर उस स्तर के किसी अन्य व्यक्ति को अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखने की आवश्यकता होती है।  अमेजन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले जतिन चौधरी को फिलहाल कंपनी की ओर से वर्क फ्रॉम होम ऑफर किया जा रहा है। इसी बीच उन्होंने अपने दोस्तों के साथ पहाड़ियों में ट्रेकिंग शुरू की, जिसके बाद उन्होंने पर्वतारोहण में लग गए और इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी और विभिन्न जगहों पर ट्रेकिंग का अभ्यास करने लगे। वो छह महीने पहले नेपाल के 6800 मीटर ऊंचे अमदाबलम पर्वत पर चढ़ी थी, जहां गिने-चुने लोग ही जाते हैं।</div><div>चढ़ाई के दौरान रास्ते में कठिनाइयों का सामना करने वाले तीन पर्वतारोहियों को हेलीकॉप्टर द्वारा बचाना पड़ा। हालांकि जतिन ने बिना हिम्मत हारे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की।  एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए पर्वतारोहियों के साथ नेपाल से विशेष शेरपा आते हैं, इन शेरपाओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है।  जतिन ने यह प्रशिक्षण नेपाल में पूरा किया है, इसलिए नेपाल सरकार के सचिव द्वारा उन्हें समूह का नेता बनाया गया।  समूह में 50 अन्य पर्वतारोही शामिल हुए, जिनकी सभी जिम्मेदारियां सवाया कच्छ को सौंपी गईं, जिनमें से 25 लोग एवरेस्ट पर पहुँच चुके है बाकी अभी भी रास्ते पर हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/68827/jatin-chaudhary-a-resident-of-kutch-gujarat-scaled-mount-everest</link>
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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 06:59:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>कोरोना काल में दो बार एवरेस्ट फतह कर इस नेपानी पर्वतारोही ने भारतीय का रिकॉर्ड तोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">नेपाल के 43 वर्षीय पर्वत गाइड मिंगमा तेन्जी शेरिया ने एक सीजन में सबसे कम समय में दो बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। पूर्व नेपाल के शंखुवासभा जिला के निवासी शेरपा पहली बार 7 मई को एवरेस्ट शिखर पर चढ़े थे और इसके बाद उन्होंने 11 मई को माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। </span></div>
<div><span style="font-size:1rem;">पर्वतारोहण का आयोजन करने वाले सेवन समिट ट्रेक्स के अध्यक्ष मिंगमा शेरपा ने इस बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि मिंगमा शेरपा सिर्फ 4 दिन में दो बार माउंट एवरेस्ट शिखर पर चढ़े थे जो कि एक</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/83969/this-nepani-climber-broke-the-indian-record-by-conquering-everest-twice-in-the-corona-period"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/5072_everest-himalaya-nepal-india-mountain.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">नेपाल के 43 वर्षीय पर्वत गाइड मिंगमा तेन्जी शेरिया ने एक सीजन में सबसे कम समय में दो बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। पूर्व नेपाल के शंखुवासभा जिला के निवासी शेरपा पहली बार 7 मई को एवरेस्ट शिखर पर चढ़े थे और इसके बाद उन्होंने 11 मई को माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। </span></div>
<div><span style="font-size:1rem;">पर्वतारोहण का आयोजन करने वाले सेवन समिट ट्रेक्स के अध्यक्ष मिंगमा शेरपा ने इस बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि मिंगमा शेरपा सिर्फ 4 दिन में दो बार माउंट एवरेस्ट शिखर पर चढ़े थे जो कि एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है।  </span><span style="font-size:1rem;">इसके पहले भारत के पर्वता रोहक अंशु जामसेंपा ने 2017 में 118 घंटे 5 मिनट में दो बार यह एवरेस्ट सर किया था। हालांकि वह महिला थी इसलिए महिला धावक के तौर पर यह वर्ल्ड रिकॉर्ड अभी भी उनके ही नाम पर रहेगा।</span></div>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 14 May 2021 12:51:56 +0530</pubDate>
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