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                <title>Doctor - Loktej</title>
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                <description>Doctor RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दुखद : क्या हुआ जब एक अविवाहित लड़की पहुंची गर्भपात कराने?</title>
                                    <description><![CDATA[एक महिला ने साझा की अपनी कहानी, जब पैसों के चक्कर मे डॉक्टरों ने दिखाई थी असंवेदनशीलता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>माँ बनने का सुख किसी भी स्त्री के लिए एक नए जन्म जैसा होता है। लेकिन विवाह के पहले मां बनना किसी दूसरे से कम नहीं होता आज भी भारतीय समाज में किसी स्त्री का विवाह के पहले गर्भवती होना बहुत बड़ा अपराध माना जाता है। इतना ही नहीं अविवाहित लड़की को गर्भपात कराने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विवाह से पहले गर्भवती होने वाली लड़कियों के मजबूरी का फायदा क्लीनिक और डॉक्टर भी उठाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ 19 साल की एक लड़की के साथ जिसे अचानक एक दिन पता चला कि वो प्रेग्नेंट है। जिसके बाद वह डॉक्टर के पास गई। लेकिन वहां उसके साथ जो हुआ उसने डॉक्टरों पर से विश्वास खो दिया।</div><div><br /></div><h2>क्या है इस लड़की की कहानी?</h2><div><br /></div><div>जब लड़की के साथ यह घटना हुई तब वह कॉलेज की छात्रा थी। अपनी कहानी बताते हुए उन्होंने कहा, "पहली बार जब मैं गर्भवती हुई, तब मैं 19 साल की थी। मुझे पहले से ही यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन था, इसलिए मैंने बार-बार टॉयलेट जाने को नजरअंदाज कर दिया, जो कि गर्भावस्था के मुख्य लक्षणों में से एक है। मुझे मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी या जी-मचलने जैसी कोई समस्या नहीं थी। लेकिन जब कई हफ्तों के बाद मेरा मासिक नहीं आया , तो मैं चिंतित हो गई। उस समय मैं एक प्रेम-संबंध में थी और मुझे डर था कि मैं गर्भवती हो सकती हूं। मेरा प्रेमी उस समय मुंबई में था और मैं कॉलेज की छुट्टियों के लिए गुवाहाटी गया था। मेरे लिए, उसके और मेरे कुछ करीबी लोगों के बिना इस स्थिति से बाहर निकलना आसान नहीं था।"</div><div><br /></div><div><br /></div><div>लड़की ने आगे कहा, "मुझे अनियमित पीरियड्स आते थे इसलिए शुरू में मैंने और मेरे बॉयफ्रेंड ने इसे नजरअंदाज कर दिया। एक महीना बीत गया और दूसरा महीना शुरू हो गया लेकिन मुझे पीरियड्स नहीं आए। इसके बाद मुझे इसकी चिंता होने लगी। इसलिए मैंने इसे खुद इसका टेस्ट लिया। कई गर्भावस्था परीक्षण किए जो सभी सकारात्मक थे। पांच से छह सप्ताह के बाद मुझे पता चला कि मैं गर्भवती थी और यह मेरे लिए बहुत डरावना था। मैं उस समय अपने परिवार के साथ रह रही थी।"</div><div><br /></div><h2>डॉक्टरों ने जबरन किया सर्जिकल गर्भपात</h2><p><br /></p><div>आगे अपनी आपबीती सुनाते हुए लड़की ने बताया 'जब मैंने इस बारे में अपने साथी से बात की तो उसने मुझे कुछ डॉक्टरों के नाम बताए जिनसे वह पहले ही बात कर चुका था और स्थिति के बारे में बता चुका था। मैं अपने दोस्त के साथ डॉक्टर के पास पहुंची। वहां पहुंचकर डॉक्टर ने मुझ पर सर्जिकल अबॉर्शन के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। हालांकि यह बिना सर्जरी के दवाओं से भी संभव था। लेकिन उन्होंने इसका जिक्र तक नहीं किया। लेकिन मैंने खुद इस बारे में जानकारी इकट्ठा की। मुझे जानकारी मिली और मैंने फैसला किया कि मुझे यह सब कैसे करना है। जब उसने मुझे सर्जिकल गर्भपात के बारे में बताया, उसकी फीस का क्या करना है या नहीं, आदि, तो मैंने उससे कहा कि मैं इसे दवा के जरिए करना चाहती हूं। वह यह सुनकर खुश नहीं थे कि मैं दवाओं के बारे में जानती थी और उसके माध्यम से गर्भपात करवाना चाहती थी। वो खुश नहीं थे क्योंकि शायद उसने सोचा था कि अब उन्हें वह पैसा नहीं मिलेगा जो उसने सोचा था।</div><div><br /></div><h2>दवाइयों के दाम ज्यादा बताए</h2><p><br /></p><div>इसके बाद जब उन्होंने मुझे जो दवाएं बताईं, उनकी कीमत केमिस्ट स्टोर से तीन गुना ज्यादा थी। जो मुझे अपने दूसरे गर्भपात के दौरान पता चला। डॉक्टर ने मुझे बताया कि इसे कैसे खाना है और मुझे कैसा लगेगा। दवा लेने के बाद पहला दिन मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक दिन निकला। मैं अत्यधिक रक्त प्रवाह और कष्टदायी दर्द का अनुभव कर रही थी। मेरा शरीर शिथिल हो गया और मुझे उस दिन मुंबई के लिए फ्लाइट पकड़नी थी।</div><div><br /></div><h2>कुछ पैसे के लालच ने मुझे सदमे में छोड़ दिया</h2><p><br /></p><div>अपने दुःखद अनुभव के बारे में महिला ने कहा, "मैं उस समय सोच रही थी कि अगर डॉक्टर पैसे का लालची न होता तो मुझे इतना दर्द न झेलना पड़ता। मैं जवान थी, स्वस्थ थी और मुझे कोई परेशानी नहीं थी, इसलिए मैंने यह रास्ता चुना। लेकिन डॉक्टर ने मुझे इस फैसले पर एक बुरी समीक्षा दी जिससे मुझे बहुत तनाव हुआ। दरअसल जब मैंने उसे सर्जिकल गर्भपात के लिए मना कर दिया, तो उसका व्यवहार पूरी तरह से बदल गया। इससे मुझे बहुत तनाव हुआ। मुझे पूरी घटना से उबरने में 20 से 25 दिन लगे। मैं दिन-रात यह सोचकर रोती रही कि शायद मुझपर बच्चा पैदा करने का दबाव बनाया जा रहा है।"</div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Sep 2022 12:59:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>युद्ध और कोरोना के कारण स्वदेश लौटे मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी खबर, जानकार मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने युद्ध और कोरोना के कारण विदेश से लौटे छात्रों को 'विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा' में राहत देने का फैसला किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/81541/big-news-for-medical-students-who-returned-home-due-to-war-and-corona-knowledgeable-will-get-relief"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/3198_news9.jpg" alt=""></a><br /><div>विदेश के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर युद्ध-कोरोना की वजह से लौटे छात्रों में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा को लेकर काफी हंगामा हुआ। एमबीबीएस पूरा करने के बाद की जाने वाली इंटर्नशिप को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इस बीच, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने ऐसे छात्रों को विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा के लिए योग्य मानने का फैसला किया है। इस संबंध में चिकित्सा आयोग द्वारा एक आधिकारिक परिपत्र जारी किए जाने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।</div><div>गौरतलब है कि कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग के कारण विदेशों में मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों का शैक्षणिक कार्य प्रभावित हुआ है। कोरोना के चलते चीन, कनाडा, रूस समेत देशों में पढ़ने वाले छात्रों को लॉकडाउन के चलते वहीं लौटना पड़ा। जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी कई छात्रों की पढ़ाई को नुकसान पहुंचाया है। इस बीच, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने युद्ध और कोरोना के कारण विदेश से लौटे छात्रों को 'विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा' में राहत देने का फैसला किया है। जो छात्र दोनों कारणों से भारत लौट आए हैं और 30 जून-2022 से पहले एमबीबीएस-स्नातक पाठ्यक्रम पूरा नहीं किया है, वे फोरई मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे।</div><div>नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक, जिन्होंने पिछले एक साल में विदेशी कॉलेजों से मेडिकल ग्रेजुएशन का कोर्स पूरा किया है और 30 जून से पहले कोर्स पूरा किया है, वे फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इस परीक्षा को पास करने के बाद अनिवार्य रूप से दो साल के लिए रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप करनी होती है। तभी वे भारत में पंजीकरण के लिए पात्र होंगे। इससे पहले, विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों को विदेश में एक साल की इंटर्नशिप और भारत में एक साल की इंटर्नशिप प्रदान की जाती थी। हालांकि अभी तक सिर्फ एक बार छात्रों को राहत दी गई है। भविष्य में छात्रों को ऐसी कोई राहत नहीं दी जाएगी।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Jul 2022 21:59:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गुजरात सरकार नरम पड़ी, डॉक्टरों के लिए छूट, प्रावधानों की घोषणा की</title>
                                    <description><![CDATA[<div>10,000 से अधिक चिकित्सा शिक्षकों और डॉक्टरों की राज्यव्यापी हड़ताल के चौथे दिन, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने छूट और वेतन प्रावधानों सहित विभिन्न उपायों की घोषणा की और डॉक्टरों से जल्द से जल्द ड्यूटी फिर से शुरू करने की अपील की. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के एसीएस मनोज अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि डॉक्टरों को जून 2019 से 20% गैर-अभ्यास भत्ता ( एनपीए ) मिलेगा। राशि का भुगतान दो वर्षों में पांच समान किश्तों में किया जाएगा।</div><div><span style="font-size:1rem;">“मूल ​​और एनपीए के लिए ऊपरी सीमा, जैसा कि केंद्र ने तय किया है, 2.37 लाख रुपये है। जिन लोगों ने</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/68616/gujarat-government-softens-announces-provisions-exemptions-for-doctors"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/9255_s15-080422.jpg" alt=""></a><br /><div>10,000 से अधिक चिकित्सा शिक्षकों और डॉक्टरों की राज्यव्यापी हड़ताल के चौथे दिन, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने छूट और वेतन प्रावधानों सहित विभिन्न उपायों की घोषणा की और डॉक्टरों से जल्द से जल्द ड्यूटी फिर से शुरू करने की अपील की. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के एसीएस मनोज अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि डॉक्टरों को जून 2019 से 20% गैर-अभ्यास भत्ता ( एनपीए ) मिलेगा। राशि का भुगतान दो वर्षों में पांच समान किश्तों में किया जाएगा।</div><div><span style="font-size:1rem;">“मूल ​​और एनपीए के लिए ऊपरी सीमा, जैसा कि केंद्र ने तय किया है, 2.37 लाख रुपये है। जिन लोगों ने GPSC परीक्षा पास कर ली है और उन्हें नियुक्त किया गया है, उन्हें सेवा में निरंतरता के उद्देश्य से माना जाएगा। बाकी के लिए एड हॉक सेल बनाया जाएगा। बोंडेड विशेषज्ञों को वर्तमान में 84,000 रुपये की तुलना में 95,000 रुपये प्रति माह मिलेगा। इसके अलावा, बोंडेड एमबीबीएस डॉक्टरों को भी मौजूदा 63,000 रुपये की तुलना में 75,000 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा क्लास 1 डॉक्टरों को आठ साल की सेवा पूर्ण करने के बाद टिकु आयोग के तहत लाभ मिलेगा। </span><br /></div><div>अधिकारियों ने यह भी कहा कि सरकारी सेवा में एमबीबीएस डॉक्टरों को पीजी सीटों पर 10% आरक्षण मिलेगा। GMERS के चिकित्सा शिक्षक नई पेंशन योजना, यात्रा भत्ता, महंगाई भत्ता और चिकित्सा भत्ता जैसे लाभों का लाभ उठा सकेंगे। अधिकारियों ने कहा कि बांड अवधि के तहत GMERS की सेवाओं पर भी विचार किया जाएगा। “ट्यूटर सातवें वेतन आयोग का लाभ उठा सकेंगे। सीधी भर्ती और प्रोन्नति भी ली जाएगी। लगभग 15% वरिष्ठ ट्यूटर टीकू आयोग के प्रावधानों का लाभ उठा सकते हैं, और 10% वरिष्ठ प्रोफेसरों को उच्च प्रशासनिक ग्रेड (HAG) मिलेगा।”अग्रवाल ने कहा।</div><div>वरिष्ठ डॉक्टरों ने कहा कि जब तक सरकार द्वारा नए उपायों को प्रकाशित नहीं किया जाता है, तब तक उनकी हड़ताल वापस लेने की योजना नहीं है। गुजरात मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के सचिव डॉ जेसी मकवाना ने कहा, "समूह शुक्रवार को उपायों पर चर्चा करेगा और हड़ताल पर अंतिम निर्णय लेगा। "</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Apr 2022 21:44:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सूरत : इस वृद्ध महिला की आँखों से निकलीं 40 कैटरपिलर (इल्लियां), डॉक्टर भी हुए हैरान</title>
                                    <description><![CDATA[सूरत के सागबारा तालुका के ओपाडवाव इलाके में रहने वाली दितुबेन को काफी समय से थी आँखों की समस्या]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/73380/surat-as-many-as-40-caterpillars-came-out-of-the-eyes-of-this-old-lady-doctors-were-also-surprised"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/8534_1.png" alt=""></a><br /><div>आज के दौर में अनोखी बीमारियों के बारे में पता चल रहा है। नई-नई बीमारियां और वायरस धरती पर सामने आ रहे हैं, जिनका नाम सुनते ही हालत ख़राब हो जाती है। ऐसा ही एक मामला सूरत से सामने आया जहाँ एक बुजुर्ग महिला की आंख से सर्जरी कर करीब 40 इल्लियां या कैटरपिलर निकाले गए।</div><div>प्राप्त जानकारी के अनुसार, सूरत के सागबारा तालुका के ओपाडवाव इलाके में रहने वाली दितुबेन सुरजीभाई अपने बेटे के साथ रहती हैं। उनकी आंख में सुजन हो गई थी, जहां से खून आ रहा था। आंखों के दर्द से बचने के लिए वे धूप में बैठती थींं। लेकिन जब मामले की जानकारी बेटे को हुई तो वे मां को अस्पताल ले गए, जहां पता चला कि वृद्ध दितुबेन की आंखों में कैटरपिलर या कहिये ‌इल्लियों की भरमार थी। अगर आंख में एक या दो इल्ली होतीं तो समझ आता, लेकिन बूढ़ी औरत की आंख में लगभग 40 से अधिक कैटरपिलर निकालीं गईं। उनका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर भी सहम गए। </div><div>इस ऑपरेशन को करने वाले तेजश अस्पताल के डॉ. उदय गाजीवाला का कहना है कि यह अच्छा है कि आंख की सड़न मस्तिष्क तक नहीं फैली वरना और नुकसान हो सकता था। क्या इसका असर दिमाग तक हुआ है ये पता लगाने के लिए सीटी स्कैन किया। लेकिन हमें ये जानकर राहत मिली कि सड़न दिमाग तक नहीं पहुंची थी।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 30 Jan 2022 10:43:40 +0530</pubDate>
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                <title>सूरत : नन्हे बच्चे की सुझबुझ ने बचाई माँ की जान, किया कुछ ऐसा ही अब हर कोई कर रहा है तारीफ</title>
                                    <description><![CDATA[माँ को आया था हार्ट अटैक, बच्चे ने सही समय पर बुलाई एबुलेंस, सही समय पर मिला इलाज तो बाख सकी माँ की जान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/73129/surat-little-child-s-understanding-saved-mother-s-life-did-something-similar-now-everyone-is-praising"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/4656_ambulance1.jpg" alt=""></a><br /><div>कहते है कि समझदारी और उम्र का कोई संबंध नहीं होता। कभी कभी बड़े भी ऐसी ऐसी गलतियाँ कर जाते है जिसके बारे मी कल्पना भी नहीं की जा सकती तो कभी कभी कई बार बच्चे ऐसा काम कर जाते हैं कि उनकी सूझ-बूझ पर हैरानी होती है। ऐसा ही एक मामला गुजरात के सूरत शहर में देखने को मिला। यहां एक 7 साल के बच्चे ने समझदारी दिखाते हुए अपनी मां की जान बचा ली। अब माँ का इलाज कर रहे डॉक्टर भी बच्चे की समझदारी की तारीफ कर रहे हैं। हुआ ऐसा था कि बच्चे की माँ को हार्ट अटैक आ गया और महिला बेहोश हो गई थी। माँ को बेहोश पा कर 7 साल के बेटे ने तुरंत मोबाइल से 108 नंबर पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाई जिससे उसकी मां की जान बच सकी, अगर देर हो जाती तो महिला की जान भी जा सकती थी!</div>
<div>जानकारी के अनुसार यूपी के अयोध्या की रहने वाली मंजू पांडे फिलहाल अपने पति और 7 साल के बेटे राहुल के साथ गुजरात के सूरत शहर पथरी के इलाज के लिए आई हुई हैं। बुधवार को जब मंजू पांडे अपने घर पर थी तभी उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई और उल्टियां होने और हाथ पैर कांपने के बाद वह बेहोश हो गईं। उसके साथ रहे उसके 7 साल के राहुल ने गजब की समझदारी दिखाते हुए तुरंत मोबाइल फोन से 108 नंबर पर कॉल करके एंबुलेंस बुला ली। जिसके बाद मंजू पांडे को अस्पताल में भर्ती कराया गया। समय पर इलाज मिलने पर मंजू पांडे की जान बच गई। डॉक्टर्स का कहना है कि अगर मंजू को लाने में थोड़ी और देर हो जाती तो उनकी जान बचानी मुश्किल हो जाती। </div>
<div>दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, राहुल को इस बात की जानकारी उसकी बहन ने दी थी। बहन ने उसे एक बार बताया था कि अगर किसी की तबीयत खराब हो तो इमरजेंसी नंबर 108 पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाई जाती है। बहन की बात को सही समय पर काम में लाते हुए बच्चे ने अपनी मां की जान बचा ली। माँ का इलाज करने वाले डॉक्टर्स ने भी बच्चे की समझदारी की तारीफ की। डॉक्टर्स ने कहा कि बच्चों को मोबाइल का सही इस्तेमाल सिखाना भी बेहद जरूरी है। ऐसा करने पर ऐसी बातें सामने आती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jan 2022 18:52:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राजकोट : चार साल के बच्चे के नाक में फंसा बोल्ट, फिर हुआ ये</title>
                                    <description><![CDATA[बिना किसी सर्जरी के डॉक्टरों को बोल्ट निकालने में मिली सफलता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/87624/rajkot-bolt-stuck-in-the-nose-of-a-four-year-old-child-then-this-happened"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-12/1162_orphan-anath-child-boy1.jpg" alt=""></a><br /><div>कहते है कि छोटे बच्चे के साथ रहते हुए बहुत चौकन्ना रहना पड़ता है। ऐसा ही कुछ राजकोट में एक बच्चे के साथ हुआ। खेल खेलने के दौरान बच्चे के साथ अजीबोगरीब घटना घटी। बच्चे की नाक में एक धातु का बोल्ट फंसा गया। हालांकि, बिना किसी सर्जरी के बच्चे की नाक से बोल्ट को निकाल दिया गया। इससे बच्चे के माता-पिता ने राहत की सांस ली।</div>
<div>जानकारी के अनुसार राजकोट में रहने वाले मनोज जोशी के परिवार में उनका एक चार साल का बेटा है जिसका नाम मोनित है। खेलते समय मोनित ने अपनी नाक के अंदर एक धातु का बोल्ट घुसा लिया। इसके बाद जैसे ही उसने सांस लिया वैसे ही धातु का बोल्ट ऊपर चढ़ गया और अंदर जाकर फंस गया। जब बच्चे को सांस लेने में कठिनाई हुई तो उसके माता-पिता उसे अस्पताल ले गए। आखिरकार मोनित की नाक में फंसा एक धातु का बोल्ट बिना किसी सर्जरी के बाहर निकाल दिया।</div>
<div>गौरतलब है कि इस उद्देश्य के लिए दूरबीन का उपयोग किया गया था। जिसमें कुछ ही मिनटों में बोल्ट बाहर आ गया। इस बोल्ट का आकार नासिका छिद्रों से भी बड़ा था। जिससे मिनीत की नाक से खून बहने लगा। अगर यह बोल्ट नाक से निकला नहीं होता तो शायद गले में फंस जाता। इसमें मिनी की जान भी जा सकती थी। हालांकि समय पर बोल्ट के उतरते ही परिजनों ने राहत की सांस ली।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजकोट</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jan 2022 18:40:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ब्रिटेन : अपने जन्म के समय मां की डिलीवरी करने वाले डॉक्टर की भूली की सजा भुगत रही लड़की ने जीता डॉक्टर पर किया गया केस</title>
                                    <description><![CDATA[महिला का कहना उनके जन्म के समय डॉक्टर की गलत सलाह के असर के कारण गंभीर बीमारी से जूझ रही है वो, मुआवजे में मिली मोटी रकम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/84346/britain-the-girl-who-was-suffering-for-the-mistake-of-the-doctor-who-delivered-the-mother-at-the-time-of-her-birth-won-the-case-against-the-doctor"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/5060_1.jpg" alt=""></a><br /><div>ब्रिटेन की एक महिला जो जन्म से ही एक खतरनाक बीमारी से ग्रसित है उसने अपने इस हालात के लिए उसकी डिलीवरी करने वाले डॉक्टर को जिम्मेदार मानते हुए उस पर केस दर्ज किया था। इस मामलें में सुनवाई के बाद अदालत ने महिला को सही पाते हुए फैसला उसके पक्ष में सुनाया है और वह केस जीत गई है। केस हारने के बाद हर्जाने के तौर पर डॉक्टर ने उस महिला को लाखों पाउंड दिए। </div><div>आपको बता दें कि साल 2001 में स्पाइना बिफिडा नाम की दु्र्लभ बीमारी के साथ जन्मी 20 वर्षीय एवी टॉम्ब्स अपनी इस खतरनाक बीमारी के लिए वह डॉक्टर को ही जिम्मेदार मानती है। एबी का मानना है कि उनके जन्म के समय डॉक्टर की गलत सलाह के असर के कारण उनकी स्थिति ऐसी है। ऐसा इसलिए क्योंकि क्योंकि उस डॉक्टर ने उनकी मां को दवा को लेकर सही सलाह नहीं दी थी, जिसकी वजह से वह विकलांग पैदा हुईं। इसी वजह से उन्होंने डॉक्टर पर गर्भाधान का केस किया। </div><div>इस बारे में एवी टॉम्ब्स कहती हैं कि उन्हें पैदा ही नहीं होना था। उन्हें जो बीमारी है वह फॉलिक ऐसिड की दवा की सही खुराक न लेने की वजह से है। ऐसे में यदि डॉक्टर ने उनकी मां को फॉलिक एसिड दवा लेने को कहते तो उसनके साथ परिस्थितियां अलग होती मगर डॉक्टर ने उनकी मां से कहा कि यदि वह अच्छी डाइट लेती रहेंगी तो उन्हें फॉलिक ऐसिड की गोली लेने की जरूरत नहीं है। </div><div>आपको बता दें कि एवी के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके मां गर्भधारण नहीं करना चाहती थीं, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बाद उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया। यदि डॉक्टर उन्हें फॉलिक एसिड का कोर्स पूरा करने के बाद गर्भ धारण करने की सलाह देते तो शायद उनका बच्चा स्वस्थ पैदा होता। डॉक्टर की सलाह पर ही उनकी मां ने गोली नहीं ली जिसका नतीजा यह हुआ कि आज वह स्पाइना बिफिडा नाम की बीमारी से जूझ रही हैं। क्या है स्पाइना बिफिडा दरअसल इस दुर्लभ बीमारी की वजह से उन्हें कभी कभी पूरे चौबीस घंटे के लिए ट्यूब्स का सहारा लेना पड़ता है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चे की रीढ़ की हड्डी गर्भ में विकसित नहीं होती। </div><div>इस मामले में लंदन हाईकोर्ट ने एवी के हक में फैसला सुनाते हुए उन्हें मुआवजे के तौर पर भारी रकम देने का आदेश दिया है। हालांकि यह राशि कितनी है इसका खुलासा नहीं हुआ है लेकिन एवी के वकील ने कहा कि यह राशि इतनी है कि वह उनकी जीवनभर की जरूरतों को पूरा करेगी। </div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sat, 04 Dec 2021 10:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जानें क्यों भगवान कृष्ण की मूर्ति पर डॉक्टरों को बांधनी पड़ी पट्टी!?</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के आगरा की घटना, जीव-अजीव के बीच के स्नेह का उत्कृष्ट उदाहरण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/79625/know-why-doctors-had-to-tie-a-bandage-on-the-idol-of-lord-krishna"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-11/7225_1.png" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">ये दुनिया अनोखी घटनों से भरी हुई है। आये दिन कोई न कोई ऐसी ऐसी घटना सामने आती है जिस पर एक बार में भरोसा नहीं होता। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के आगरा में देखने को मिला जहाँ इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया कि अगर मन में प्रेम-स्नेह और आस्था हो तो एक इंसान एक बेजान मूर्ति से जुड़ जाता है। यहाँ आगरा में एक पुजारी 'लड्डू गोपाल' की मूर्ति को लेकर अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर्स से मूर्ति को बैंडेज लगाने की जिद करने लगे।</span><br /></div><div>पूरी घटनाक्रम के अनुसार आगरा के जिला अस्पताल में डॉक्टर्स व अन्यम स्टाफ उस वक्त हैरान रह गए, जब उनके पास एक पुजारी 'लड्डू-गोपाल' की मूर्ति लेकर पहुंचे और मूर्ति के हाथों पर पट्टी लगाने की जिद करने लगे। दरअसल सुबह के समय जब पुजारी भगवान को पूजा के लिए नहला रहे थे उस समय मूर्ति उनके हाथों से फिसलकर गिर गई जिससे लड्डू गोपाल का हाथ टूट गया। शुरू में अस्पूताल स्टाफ ने उसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन पुजारी बेतहाशा रो रहे थे, जिसे देखकर अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टर मूर्ति के बैंडेज के लिए तैयार हो गए।</div><div>आपको बता दें कि जब अस्पताल के डॉक्टर ने मूर्ति पर पट्टी बांधने वाले बात को गंभीरता से नहीं लिया और पुजारी अपने जिद पर अड़े रहे तो अस्पेताल के स्टाफ ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इसकी जानकारी दी। उन्होंने पुजारी की भावना को ध्यान में रखते हुए मेडिकल स्टाफ को 'लड्डू गोपाल' की मूर्ति का बैंडेज करने के लिए कहा, जिसके बाद ही पुजारी को शांति मिली। अस्पताल में मरीज के नाम की जगह 'श्री कृष्ण ' लिखा गया और फिर इलाज की प्रक्रिया शुरू की गई।</div><div>इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जिसमें 'लड्डू-गोपाल' की मूर्ति के हाथों पर बैंडेज लगा नजर आ रहा है। पुजारी का कहना है कि वह बीते 30 साल से इस मूर्ति की पूजा करते आ रहे हैं और ऐसे में जब यह टूट गई तो उन्हें बहुत बुरा लगा इसीलिए वो भगवान को उपचार के लिए अस्पसताल ले आए।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Nov 2021 19:39:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रात भर लाशों के बीच मुर्दाघर में रखा, सुबह पुलिस आई तो पता चला बंदा जिंदा है!</title>
                                    <description><![CDATA[एक नहीं दो-दो अस्पतालों ने जिंदा व्यक्ति को बताया मुर्दा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/83070/kept-in-the-morgue-among-the-dead-bodies-overnight-when-the-police-came-in-the-morning-it-came-to-know-that-the-man-is-alive"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-11/4420_dead-body.jpg" alt=""></a><br /><div>डॉक्टर होना एक बहुत जिम्मेदारी का काम है। लोग डॉक्टर पर बहुत भरोसा करते है। इतना ही नहीं इन्हें तो धरती का भगवान कहा जाता है। ऐसे में अगर कोई डॉक्टर काम को लेकर लापरवाही करें तो उसका परिणाम बहुत भारी साबित हो सकता है। डॉक्टर द्वारा लापरवाही का ऐसा ही एक मामला मुरादाबाद में देखने को मिला है जहां पर एक्सीडेंट के पीड़ित व्यक्ति को जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने मृत घोषित कर रात भर मुर्दाघर में रखा।</div><div>आपको बता दें कि इसके बाद सुबह जब पुलिस पंचनामा और जांच करने के लिए पहुंची तो देखा कि व्यक्ति की सांसे चल रही है। इसके बाद तो आनन-फानन में पुलिस व परिजनों ने पीड़ित को जिला अस्पताल के इमरजेंसी में दोबारा भर्ती कर उसका इलाज शुरू किया गया। बाद में पीड़ित को मेरठ रेफर कर दिया गया है।</div><div>जानकारी के अनुसार संभल जनपद के निवासी और नगर निगम में लाइन मैन लाइट के पद पर काम करने वाले श्रीकेश गुरुवार रात 9:30 बजे डेयरी से दूध खरीदने जा रहे थे तभी बाइक में टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद परिजन घायल श्रीकेश को लेकर विवेकानंद अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, इसके बाद जब सभी जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां भी डॉ मनोज यादव ने श्रीकेश को मृत घोषित कर उनके शव को मुर्दाघर में रखवा दिया। अगले दिन सुबह 10:30 बजे दरोगा मोर्चरी पहुंचे और पंचनामा भरने की प्रक्रिया शुरू की इस दौरान देखा कि श्रीकेश की सांसे चल रही हैं। फिर श्रीकेश को अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Nov 2021 17:05:14 +0530</pubDate>
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                <title>वायरल वीडियो : अब ये डॉक्टर लोगों को दे रहे हैं ‘गोबर’ खाने की सलाह, जानिए क्या है पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा के करनाल जिले में एक डॉक्टर का गोबर खाता हुआ वीडियो हो रहा है वायरल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/79619/viral-video-now-these-doctors-are-giving-advice-to-people-to-eat-dung-know-what-is-the-whole-matter"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-11/6673_1.jpg" alt=""></a><br /><div>सोशल मीडिया पर कब क्या और कैसे देखने को मिल जाये ये कहा नहीं जा सकता। सोशल मीडिया पर आये दिन कुछ न कुछ अजीबोगरीब और हैरतअंगेज देखने को मिल हो जाता है। ऐसे ही इन दिनों हरियाणा के करनाल जिले में एक डॉक्टर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि यह वीडियो 4-5 दिन पुराना है पर सोशल मीडिया पर इस वीडियो को खूब शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में एक डॉक्टर गाय का गोबर खाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में डॉक्टर कहते हैं कि एक चम्मच गाय का गोबर खाने से तन और मन की शुद्धि होती है। डॉक्टर कह रहे हैं कि गाय भारत की राष्ट्रीय पशु होनी चाहिए।</div><div>आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो में गाय का गोबर खाने वाले डॉक्टर का नाम मनोज मित्तल है। डॉ मनोज मित्तल एक बच्चों के चिकित्सक हैं हालाँकि, उन्हें आयुर्वेद में बहुत रुचि है। वायरल वीडियो में डॉक्टर कह रहे हैं कि भारत का राष्ट्रीय पशु गौ माता होना चाहिए। भारत का राष्ट्रीय पशु हिंसक पशु नहीं होना चाहिए। गायों में पाए जाने वाले पंचद्रव का एक हिस्सा मानव जाति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।</div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Dr. Manoj Mittal MBBS MD's prescription. Via <a href="https://twitter.com/ColdCigar?ref_src=twsrc%5Etfw">@ColdCigar</a> <a href="https://t.co/SW2oz5ao0v">pic.twitter.com/SW2oz5ao0v</a> <a href="https://t.co/Gzww80KiSs">https://t.co/Gzww80KiSs</a></p>— Rofl Gandhi 2.0 ???????? (@RoflGandhi_) <a href="https://twitter.com/RoflGandhi_/status/1460559424813080577?ref_src=twsrc%5Etfw">November 16, 2021</a></blockquote> <div>इस वायरल हो रहे वीडियो में डॉक्टर साहब कहते नजर आ रहे हैं कि मेरी मां अग्यारस के व्रत में हमेशा गाय का गोबर खाती हैं। एक चम्मच गाय का गोबर खाने से हमारा तन और मन पवित्र हो जाता है, हमारी आत्मा पवित्र हो जाती है। अगर यह हमारे गर्भ में चला जाए तो यह पूरे शरीर को शुद्ध कर देगा। डॉ। मित्तल का कहना है कि अगर कोई महिला गाय का गोबर खाएगी तो उसकी नॉर्मल डिलीवरी होगी और उसे सिजेरियन की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका कहना है कि हम 9 भाई-बहन हैं और मेरी मां की सभी डिलीवरी सामान्य हुई है। गाय का गोबर खाने से कभी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिलहाल इस वायरल वीडियो में यूजर्स तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Nov 2021 21:45:20 +0530</pubDate>
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                <title>अहमदाबाद : सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने किया कमाल, तीन घंटे के जटिल ऑपरेशन से 15 साल पुरानी समस्या को किया दूर</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टरों की एक टीम ने 32 वर्षीय तन्वीबेन का एक दुर्लभ बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/86102/ahmedabad-doctors-of-civil-hospital-did-wonders-solved-a-15-year-old-problem-with-a-complex-operation-of-three-hours"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/3889_1.jpg" alt=""></a><br /><div>अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम ने 32 वर्षीय तन्वीबेन का एक दुर्लभ बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज कर एक बार फिर इतिहास रच दिया है। युवती पिछले 15 साल से असहनीय दर्द से गुजर रही थी। जटिल इलाज के बाद सिविल अस्पताल के स्पाइन सर्जनों ने दर्द से निजात दिला दी है।</div><div>जानकारी के अनुसार अहमदाबाद के हाथीजान इलाके की रहने वाली तन्वीबेन को  रीढ़ की हड्डी की समस्या के कारण काफी समय से चलने-फिरने और सोने में दिक्कत हो रही थी। धीरे-धीरे समस्या विकराल होने लगी। उनके पति ने इस समस्या के इलाज के लिए कई निजी अस्पतालों से संपर्क किया लेकिन कहीं भी कोई संतोषजनक परिणाम नहीं मिला। कुछ जगहों पर सर्जरी की गारंटी होने पर पैसे बहुत बड़ा सवाल बन गया।</div><div>इस प्रकार की सर्जरी बेहद जटिल थी और इसमें 3 लाख रुपये खर्च होने थे, जिससे तन्वीबेन के परिवार के लिए यह असंभव हो गया। इन सभी स्थितियों से बाहर निकलने का एक ही रास्ता था और वह था सिविल अस्पताल। तन्वीबेन को इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन सहित परीक्षणों से पता चला कि तनवीबेन को एंकिलॉजिंग स्पोंडिलोसिस नामक एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी थी। सिविल अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ पीयूष मित्तल और उनकी टीम ने तन्वीबेन के ऑपरेशन का फैसला किया। 3 घंटे की सर्जरी के दौरान नस में चोट लगने की स्थिति में लकवे की आशंका के बीच लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग की मदद से मरीज ने एक जटिल और जोखिम भरा ऑपरेशन किया गया। वर्तमान में तन्वीबेन आसानी से चल-फिर सकती हैं।</div><div>इस जटिल ऑपरेशन के बारे में डॉ पीयूष मित्तल का कहना है कि सर्जरी के दौरान हड्डी को काटा गया था। इस बीच हड्डियों को इस तरह से काटना था कि रीढ़ को नुकसान न पहुंचे और मनके को पूर्ववत करने के लिए पेंच को पिंजरे के साथ फिट करना पड़ा। इस समय सावधानी न बरतने पर रीढ़ की हड्डी के पास की नस कटने या घायल होने का खतरा था। फिलहाल न्यूरोमॉनिटरिंग की मदद से ये ऑपरेशन सफल रहा हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Oct 2021 20:29:47 +0530</pubDate>
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                <title>अजीबोगरीब: किसी के साथ ऐसा ना हो जो हुआ इस शख्स के साथ</title>
                                    <description><![CDATA[अपने निजी अंग में पहन ली अंगूठी, फिर हुआ ऐसा कि पड़ गए जान के लाले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>शरीर पर इंफेक्शन होना कोई बड़ी या नई बात नहीं। चोट लगने या कटने की वजह से इन्फेक्शन होना आम बात है। पर अभी हम जिस घटना के बारे में बताने जा रहे हैं उसमें एक शख्स ने जानबूझकर कर इंफेक्शन को गले लगाया है। दरअसल ब्रिटेन से सामने आये एक अजीबोगरीब मामले में एक शख्स ने अपने प्राइवेट पार्ट में अंगूठी पहन ली जो बाद में उसके दर्द का बहुत बड़ा कारण बन गई।</div><div>ये बेहद सामान्य सी बात है कि अंगूठी (Ring) उंगलियों में पहनी जाती है और ये बात सभी जानते हैं, लेकिन ब्रिटेन के एक शख्स को पता नहीं क्या सुझा और उसने इसे अपने प्राइवेट पार्ट में पहन लिया। लेकिन इस मामले में उसे लेने के देने पड़ गए। दरअसल इस शख्स ऐसा करने के बाद रिंग उसके निजी अंग में फंस गयी, जिसकी वजह से उसे भयंकर दर्द का सामना करना पड़ा।</div><div> दर्द से निजात पाने के लिए और इस इंसान के प्राइवेट पार्ट में फंसी अंगूठी को काटने के लिए ब्रिटेन के एक अस्पताल में फायर क्रू को बुलाया गया।</div><div>आपको बता दें कि भयंकर दर्द से परेशान इस शख्स को हडर्सफील्ड रॉयल इनफ़र्मरी अस्पताल में लाया गया जहां के डॉक्टरों ने हॉस्पिटल में एडमिट हुए इस व्यक्ति की मदद के लिए वेस्ट यॉर्कशायर फायर एंड रेस्क्यू सर्विस की तकनीकी बचाव सेवा को बुलाया। बड़ी मसक्कत के बाद उस शख्स के प्राइवेट पार्ट में फंसी रिंग निकली और उसे दर्द से राहत मिली। हालांकि इस अजीब मामले पर बात करते हुए डॉक्टर्स ने कहा कि इसने ऐसा क्यों किया होगा, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है पर यक़ीनन ये एक बेहद दर्दनाक अनुभव रहा होगा। डॉक्टर ने आगे बताया कि ज्यादा देर तक अंगूठी फंसे रहने से गैंग्रीन विकसित होने की संभावना थी। फिलहाल ये शख्स दर्द और खतरे से बाहर है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/79581/peculiar-this-should-not-happen-to-anyone-what-happened-to-this-person</link>
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                <pubDate>Tue, 27 Jul 2021 19:31:53 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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