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                <title>Mango - Loktej</title>
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                <description>Mango RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई की मंडी में अल्फांसो की आवक बढ़ने से कीमतों में भारी गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 27 अप्रैल (वेब वार्ता)। मुंबई कृषि मंडी में हापुस आम (अल्फांसो) की आवक में जोरदार उछाल आने से इसकी कीमतों में गिरावट आई है, जिससे खरीदारों को बड़ी राहत मिली है।</p>
<p>बाजार से प्राप्त विवरण के अनुसार, हापुस की दैनिक आवक बढ़कर लगभग 70,000 बॉक्स तक पहुंच गई है। मंडी में कोंकण के रत्नागिरी, देवगढ़, सिंधुदुर्ग और रायगढ़ जिलों के साथ-साथ कर्नाटक और अन्य राज्यों से भी भारी मात्रा में आम पहुंच रहे हैं। भारी आवक के चलते क्रेट की कीमतों में कमी आई है।</p>
<p>हापुस आम का जो बॉक्स पहले 2,000 से 5,000 रुपये के बीच बिक रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146823/heavy-fall-in-prices-due-to-increase-in-arrival-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-03/9641_mango-1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 27 अप्रैल (वेब वार्ता)। मुंबई कृषि मंडी में हापुस आम (अल्फांसो) की आवक में जोरदार उछाल आने से इसकी कीमतों में गिरावट आई है, जिससे खरीदारों को बड़ी राहत मिली है।</p>
<p>बाजार से प्राप्त विवरण के अनुसार, हापुस की दैनिक आवक बढ़कर लगभग 70,000 बॉक्स तक पहुंच गई है। मंडी में कोंकण के रत्नागिरी, देवगढ़, सिंधुदुर्ग और रायगढ़ जिलों के साथ-साथ कर्नाटक और अन्य राज्यों से भी भारी मात्रा में आम पहुंच रहे हैं। भारी आवक के चलते क्रेट की कीमतों में कमी आई है।</p>
<p>हापुस आम का जो बॉक्स पहले 2,000 से 5,000 रुपये के बीच बिक रहा था, उसकी कीमत अब गिरकर 1,500 से 3,000 रुपये प्रति बॉक्स रह गई है। आमतौर पर एक बॉक्स में पांच से आठ दर्जन आम होते हैं, जिससे गुणवत्ता और आकार के आधार पर थोक दर लगभग 190 से 600 रुपये प्रति दर्जन हो गई है।</p>
<p>व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में आने वाले लगभग 80 प्रतिशत आम छोटे आकार के हैं, क्योंकि भीषण गर्मी के कारण उन्हें समय से पहले ही तोड़ लिया गया है। मंडी में केवल 20 प्रतिशत आम ही बड़े आकार के उपलब्ध हैं।</p>
<p>फल बाजार के निदेशक संजय पानसरे ने बताया कि थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कम कीमत वाले आम निम्न गुणवत्ता के हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल हुई बेमौसम बारिश के कारण इस साल आम के उत्पादन में गिरावट आई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 16:43:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आम पकने के पहले ही क्यों गिर जाते हैं ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(सोफी जोन्स, द यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड )</p>
<p>क्वींसलैंड, 25 दिसंबर (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया में हर मौसम में आम उत्पादकों को उस समय भारी नुकसान होता है, जब पेड़ों से बड़ी संख्या में फल पकने से पहले ही गिर जाते हैं। ये आम न तो ठीक से पकते हैं, न ही उपभोक्ताओं तक पहुंच पाते हैं, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों तरह की क्षति होती है।</p>
<p>शोधकर्ताओं के अनुसार, समय से पहले फल गिरना आम की कम पैदावार का एक बड़ा कारण है, क्योंकि केवल करीब 0.1 प्रतिशत फल ही परिपक्व हो पाते हैं। इससे उत्पादकों को खासा नुकसान होता है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144815/why-do-mangoes-fall-before-ripening"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/news-photo-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>(सोफी जोन्स, द यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड )</p>
<p>क्वींसलैंड, 25 दिसंबर (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया में हर मौसम में आम उत्पादकों को उस समय भारी नुकसान होता है, जब पेड़ों से बड़ी संख्या में फल पकने से पहले ही गिर जाते हैं। ये आम न तो ठीक से पकते हैं, न ही उपभोक्ताओं तक पहुंच पाते हैं, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों तरह की क्षति होती है।</p>
<p>शोधकर्ताओं के अनुसार, समय से पहले फल गिरना आम की कम पैदावार का एक बड़ा कारण है, क्योंकि केवल करीब 0.1 प्रतिशत फल ही परिपक्व हो पाते हैं। इससे उत्पादकों को खासा नुकसान होता है और संसाधनों की बर्बादी भी होती है।</p>
<p>लगातार जलवायु परिवर्तन के साथ यह समस्या वैश्विक महत्व की हो गई है, जो खाद्य सुरक्षा से लेकर किसानों की आय तक को प्रभावित करती है। ऑस्ट्रेलिया में आम एक उच्च-मूल्य वाली फसल है, जहां हर साल 63,000 टन से अधिक उत्पादन होता है, जो अर्थव्यवस्था में लगभग 22 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का योगदान देता है।</p>
<p>हालांकि, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के कारण आम की फसल को अस्थिर जलवायु में अधिक जोखिम है। सूखा, लू और पत्तियों का झड़ना जैसी स्थितियां उस प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, जिसके कारण फल गिरते हैं।</p>
<p>शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि तनाव के दौरान पेड़ों में हार्मोनल असंतुलन और कार्बोहाइड्रेट की कमी पैदा हो जाती है। फल के विकास के लिए आवश्यक शर्करा की आपूर्ति बाधित होने पर पेड़ अपने अस्तित्व को प्राथमिकता देता है और फल गिर जाता है।</p>
<p>शोधकर्ताओं ने इसे एक आणविक “क्विट सिग्नल” बताया है, जो पेड़ को फल का साथ छोड़ने का संदेश देता है। यह संकेत जीन गतिविधि और हार्मोनल संकेतों के जटिल नेटवर्क से जुड़ा है।</p>
<p>इस प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिक आम के डंठल (पेडिसल) के ऊतकों में जीन गतिविधियों का अध्ययन कर रहे हैं, जहां पेड़ और फल के बीच पोषक तत्वों और संकेतों का आदान-प्रदान होता है।</p>
<p>फल झड़ने की समस्या के लिए शोध में पौध वृद्धि नियामकों (प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर्स) के उपयोग को एक प्रभावी उपाय बताया गया है। ये हार्मोन के कृत्रिम रूप होते हैं, जो तनाव की स्थिति में पेड़ों में संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।</p>
<p>परीक्षणों में पाया गया कि फूल आने के शुरुआती चरण में इनका प्रयोग अधिक प्रभावी रहा, जिससे पैदावार में 17 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई।</p>
<p>शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन अभी जारी है और समीक्षा के बाद अगले वर्ष प्रकाशित किया जाएगा। इसका उद्देश्य आम की नई किस्में विकसित करना नहीं, बल्कि अपरिपक्व फल गिरने की प्राकृतिक प्रक्रिया को समझकर किसानों को बेहतर प्रबंधन के उपाय सुझाना है।</p>
<p>वैज्ञानिकों ने कहा कि इस शोध का लाभ केवल आम तक सीमित नहीं रहेगा। सेब, संतरा और एवोकाडो जैसी अन्य फसलों में भी पर्यावरणीय तनाव के कारण फल झड़ने की समस्या होती है। आम में इस प्रक्रिया की बेहतर समझ से वैश्विक स्तर पर कई फसलों को लाभ मिल सकता है।</p>
<p>( द कन्वरसेशन )</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 15:31:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोवा के इस विशेष आम की कीमत सुनकर हैरान रह जायेंगे आप, मंकुराडो आम की कीमत 6,000 रुपये प्रति दर्जन</title>
                                    <description><![CDATA[मंकुराडो गर्मियों के दौरान गोवा में सबसे अधिक मांग वाली आम की किस्मों में से एक है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89820/you-will-be-surprised-to-hear-the-price-of-this"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/news-photo-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>गर्मियों के आने के साथ ही बाजार में  आमों का आगमन होने लगता है। विभिन्न तरह की प्रजातियों वाले इस फल के राजा का हर कोई दीवाना हैं। बाजार में अब छोटे स्तर पर ही सही, कच्चे रूप में ही सही पर आम बिकने लगे हैं। वहीं गोवा का मंकुराडो आम तटीय राज्य के मुख्य बाजारों में आ गया है और इसकी कीमत सुनकर आप ईरान रह जाओगे। इस मंकुराडो आम की कीमत 6,000 रुपये प्रति दर्जन है। मंकुराडो गर्मियों के दौरान गोवा में सबसे अधिक मांग वाली आम की किस्मों में से एक है और किसी भी शख्स के बगीचे में मंकुराडो का पेड़ होना घर के मालिक के लिए गर्व की बात मानी जाती है। कई आम किसानों के लिए, इस मौसम में मंकुराडो आय का स्रोत है।</p>
<p><strong>फसल कम होने के कारण बढ़ी कीमतें</strong></p>
<p>आपको बता दें कि दक्षिण गोवा के मडगांव के आम के थोक व्यापारी राजेश नाइक ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि फसल कम होने के कारण कीमतें बढ़ गई हैं। नाइक ने कहा, "आम के आकार के अनुसार उसकी कीमत तय की जाती है। वर्तमान में बड़े आकार के मंकुराडो की कीमत लगभग 6,000 रुपये प्रति दर्जन है और छोटे आकार की कीमत 4800 रुपये है।" उन्होंने कहा कि मडगांव बाजार में पूरे राज्य से विक्रेता थोक भाव पर खरीदारी करने आते हैं और फिर अपने क्षेत्रों में बेचते हैं। उनके अनुसार, यह बाजार सुबह 3 बजे खुलता है और विक्रेता के वहां से चले जाने के तुरंत बाद बंद हो जाता है।</p>
<p><strong>कीमत ज्यादा होने से बिक्री पर हो रहा है असर</strong></p>
<p>इससे आगे बताते हुए उन्होंने कहा, "वर्तमान में मंकुराडो आम की कटाई कम है, लेकिन अप्रैल तक हमें बड़ी मात्रा में मिल सकता है। राज्य के कई क्षेत्रों से आम के किसान मडगांव में मंकुराडो बेचने आते हैं। वहीं पणजी बाजार की विक्रेता शुभांगी गौडे ने कहा कि मंकुराडो का रेट महंगा होने के कारण लोग कम खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा, "लागत अधिक होने के कारण वे दर्जन भर आम नहीं खरीदते हैं। उनमें से कई दो या चार आम खरीदते हैं। वर्तमान में आपूर्ति कम है इसलिए दर महंगी है।"</p>
<p><strong>पिछले साल मुख्यमंत्री ने भी किया था इस आम का जिक्र</strong></p>
<p>इस आम के बारे में कुछ राजनीतिक स्मृति याद करें तो पिछले साल, मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने महाराष्ट्र के ग्रीष्मकालीन गौरव, अल्फोंसो आम पर कटाक्ष किया था, जिसमें जोर देकर कहा गया कि गोवा की एक देशी किस्म, मनकुराडो आम का स्वाद अपने समकक्ष से बेहतर है। पणजी के पास एक कृषि सम्मेलन में बोलते हुए सावंत ने यह भी कहा था कि गोवा सरकार आम की किस्म के लिए जीआई (भौगोलिक संकेत) टैगिंग प्राप्त करने के प्रयास कर रही है, जो गोवा के लिए अद्वितीय है। आगे सावंत ने कहा था, "हम सभी कहते हैं कि अल्फांसो आम लोकप्रिय है, लेकिन मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि मंकुराडो आम ज्यादा स्वादिष्ट है। मैं इसे बहुत गर्व के साथ कह सकता हूं।" 2020 में प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने के बाद से गोवा पिछले दो वर्षों से मंकुराडो आम के लिए जीआई टैग का इंतजार कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Feb 2023 09:47:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ये है दुनिया का सबसे कीमती आम, रखवाली के लिए 24 घंटे बगीचे में तैनात रहते हैं कुत्ते और गार्ड्स</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक किलो आम की कीमत 2 लाख 70 हजार, पहले इस आम की खेती केवल जापान में की जाती थी लेकिन अब भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड के किसान भी इस आम को उगा रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/79770/this-is-the-world-s-most-precious-mango-dogs-and-guards-are-stationed-in-the-garden-24-hours-a-day-for-guarding"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/4241_news15.jpg" alt=""></a><br /><div>भारत एक कृषि प्रधान देश है। इस देश में फलों की बहुत सी प्रजातियाँ पाई जाती है। आम के मामले में भी हम भारतीय भाग्यशाली हैं क्योंकि भारत में आम की कई अलग-अलग प्रजातियों की खेती की जाती है। आम किसे नहीं पसंद होते, हर कोई इसके दीवाने हैं। गर्मियों की शुरुआत के साथ ही आम का मौसम शुरू हो जाता है। इस मौसम में आम के दीवाने छक के आम खाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी एक आम की कीमत लाखों में हो? हम जिस आम की बात कर रहे है उस आम का नाम मियाज़ाकी है। इस एक आम की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2 लाख 70 हजार रुपये बताई जा रही है। ऐसे में इस आम की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किये गये हैं।</div><div>पहले इस आम की खेती केवल जापान में की जाती थी लेकिन अब भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड के किसान भी इस आम को उगा रहे हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर में रहने वाले किसान संकल्प परिहार को अब इस बगीचे में लगे आम की रखवाली के लिए कुत्ते और गार्ड्स 24 घंटे बगीचे में तैनात रहते हैं। जबलपुर में रानी और उनके पति संकल्प परिहार ने यह कीमती आम लगाया है। इस आम का छिलका नारंगी नहीं बल्कि बैंगनी रंग का होता है। मियाज़ाकी दुनिया के सबसे महंगे आमों में से एक है। इस जापानी आम का नाम टाइयो नो टमैंगो है, इसे एग ऑफ सन यानी सूर्य का अंडा भी कहा जाता हैं। </div><div>जानकारों का मानना है कि जब यह आम पूरी तरह से पक जाता है तो हर आम का वजन 900 ग्राम तक होता है।इसका रंग हल्का लाल और पीला हो जाता है और इसकी मिठास ऐसी होती है कि लोग इसकी कीमत चुकाने को तैयार हो जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक एक किलो मियाजाकी आम की कीमत करीब 2.70 लाख रुपये है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/79770/this-is-the-world-s-most-precious-mango-dogs-and-guards-are-stationed-in-the-garden-24-hours-a-day-for-guarding</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 10:04:01 +0530</pubDate>
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