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                <title>Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) - Loktej</title>
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                <description>Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मेरे जैसे लाखों लोगों को आरएसएस ने देश के लिए जीने की प्रेरणा दी है: प्रधानमंत्री मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 21 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि 100 वर्ष पहले जिस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का बीज बोया गया था, वह आज एक वट वृक्ष के रूप में भारत की महान संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है और यह उनका सौभाग्य है कि उनके जैसे लाखों लोगों को इस संगठन ने देश के लिए जीने की प्रेरणा दी है।</p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी स्थित विज्ञान भवन में आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि मराठी भाषा अमृत से भी बढ़कर मीठी है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/136100/rss-has-inspired-millions-of-people-like-me-to-live-for-the-country--prime-minister-modi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/7698_narendra-modi1.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 21 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि 100 वर्ष पहले जिस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का बीज बोया गया था, वह आज एक वट वृक्ष के रूप में भारत की महान संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है और यह उनका सौभाग्य है कि उनके जैसे लाखों लोगों को इस संगठन ने देश के लिए जीने की प्रेरणा दी है।</p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी स्थित विज्ञान भवन में आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि मराठी भाषा अमृत से भी बढ़कर मीठी है और वह इस भाषा को बोलने का प्रयास और इसके नए शब्दों को सीखने की कोशिश निरंतर करते रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आरएसएस के कारण ही उन्हें मराठी भाषा और मराठी परंपरा से जुड़ने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350 वर्ष पूरे हुए हैं, जब अहिल्याबाई होल्कर की जयंती का 300वां वर्ष है और कुछ ही समय पहले बाबा साहेब आंबेडकर के प्रयासों से बने देश के संविधान ने भी अपने 75 वर्ष पूरे किए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आज हम इस बात पर भी गर्व करेंगे कि महाराष्ट्र की धरती पर मराठी भाषी एक महापुरुष ने 100 वर्ष पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बीज बोया था। आज ये एक वट वृक्ष के रूप में अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘वेद से विवेकानंद तक भारत की महान परंपरा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक संस्कार यज्ञ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से चला रहा है। मेरा सौभाग्य है कि मेरे जैसे लाखों लोगों को आरएसएस ने देश के लिए जीने की प्रेरणा दी है। संघ के ही कारण मुझे मराठी भाषा और मराठी परंपरा से जुड़ने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ है।’’</p>
<p>डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने युवाओं के एक चुनिंदा समूह के साथ वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की थी। हेडगेवार का जन्म नागपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। इसका मुख्यालय नागपुर में ही है। आरएसएस को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का वैचारिक संरक्षक माना जाता है।</p>
<p>पिछले दिनों राजधानी स्थित झंडेवालान में आरएसएस के पुराने कार्यालय के पुन:निर्माण के बाद उद्घाटन किया गया था। पौने चार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैले नव निर्मित परिसर में तीन 13-मंजिला टॉवर और करीब 300 कक्ष एवं कार्यालय हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान पिछले दिनों मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि देश और दुनिया में 12 करोड़ मराठी भाषी लोगों को इसका दशकों से इंतजार था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘यह काम पूरा करने का अवसर मुझे मिला। मैं इसे अपने जीवन का बड़ा सौभाग्य मानता हूं।’’</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन एक भाषा या राज्य तक सीमित आयोजन नहीं है, मराठी साहित्य के इस सम्मेलन में आजादी की लड़ाई की महक है। उन्होंने कहा कि इसमें महाराष्ट्र और राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Feb 2025 19:04:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आरएसएस के नए कार्यालय में आयोजित सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे शाह और नड्डा समेत भाजपा नेता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा प्रमुख जे.पी. नड्डा समेत पार्टी के कई नेता बुधवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में आयोजित संघ के सम्मेलन में भाग लेने यहां संघ के नए कार्यालय पहुंचे।</p>
<p>आरएसएस के राष्ट्रीय महासचिव दत्तात्रेय होसबाले भी झंडेवालान स्थित कार्यालय में 'कार्यकर्ता सम्मेलन' में संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ उपस्थित थे।</p>
<p>नवनिर्मित कार्यालय केशव कुंज का निर्माण लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से आठ वर्षों में किया गया है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, लगभग 300 कमरों और कार्यालयों वाले 13 मंजिला तीन टावरों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/135210/bjp-leaders-including-shah-and-nadda-arrived-to-attend-the-conference-held-in-the-new-office-of-rss"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-05/amit-shah.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा प्रमुख जे.पी. नड्डा समेत पार्टी के कई नेता बुधवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में आयोजित संघ के सम्मेलन में भाग लेने यहां संघ के नए कार्यालय पहुंचे।</p>
<p>आरएसएस के राष्ट्रीय महासचिव दत्तात्रेय होसबाले भी झंडेवालान स्थित कार्यालय में 'कार्यकर्ता सम्मेलन' में संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ उपस्थित थे।</p>
<p>नवनिर्मित कार्यालय केशव कुंज का निर्माण लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से आठ वर्षों में किया गया है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, लगभग 300 कमरों और कार्यालयों वाले 13 मंजिला तीन टावरों को आरएसएस की विचारधारा और उसके काम के प्रति सहानुभूति रखने वाले 75,000 से अधिक लोगों के योगदान से बनाया गया था।</p>
<p>आरएसएस का दिल्ली कार्यालय और उससे जुड़े कुछ संगठन पिछले कुछ महीनों में धीरे-धीरे नए बहुमंजिला परिसर में स्थानांतरित हो गए हैं।</p>
<p>आरएसएस 2016 से एक किराए के परिसर में अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहा था। झंडेवालान स्थित कार्यालय से संघ 1962 से काम कर रहा है।</p>
<p>नया परिसर पहले की दो मंजिला इमारत से एक बड़ा बदलाव है, इसे हवादार और पर्याप्त सूर्य के प्रकाश के संपर्क में लाने के लिए प्राचीन वास्तुशिल्प प्रथाओं के साथ आधुनिक तकनीक का मिश्रण किया गया है।</p>
<p>तीन टावरों (भूतल और 12 मंजिल) के नाम साधना, प्रेरणा और अर्चना हैं। इसके सबसे बड़े सभागारों में से एक का नाम विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के एक प्रमुख पदाधिकारी अशोक सिंघल के नाम पर रखा गया है, जो राम मंदिर आंदोलन से निकटता से जुड़े हुए थे। इस आधुनिक सभागार में 463 व्यक्ति बैठ सकते हैं। एक अन्य हॉल में 650 लोग बैठ सकते हैं।</p>
<p>आरएसएस कार्यालय में एक पुस्तकालय, स्वास्थ्य क्लिनिक और एक सीवेज उपचार संयंत्र के अलावा अपने पदाधिकारियों और सदस्यों के लिए आवास सुविधाएं हैं। इसकी कुल बिजली जरूरतों का एक हिस्सा प्रदान करने के लिए इसमें सौर ऊर्जा सुविधाएं भी हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Feb 2025 20:22:18 +0530</pubDate>
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                <title>आरएसएस के ‘‘खामोशी से किए गए प्रचार अभियान’’ ने भाजपा के लिए समर्थन मजबूत करने में मदद की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सूत्रों ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान आरएसएस ने मतदाताओं को राष्ट्रीय राजधानी की प्रगति की खातिर एक ‘‘प्रभावी और जवाबदेह’’ सरकार चुनने के लिए जागरूक करने का हर संभव प्रयास किया, जिससे चुनावों में भाजपा को शानदार जीत हासिल करने में मदद मिली।</p>
<p>राजनीतिक दलों के जोर-शोर से किए गए चुनाव प्रचार के बीच आरएसएस स्वयंसेवकों ने खामोशी से ‘‘मतदाता जागरूकता’’ अभियान चलाया, जिसके तहत दिल्ली में ‘‘हजारों बैठकें’’ की गईं और इनमें स्वच्छता की कमी, पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ वायु प्रदूषण और यमुना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/131383/rss-s-%22silent-campaign-campaign%22-helped-strengthen-support-for-bjp"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-09/rss.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सूत्रों ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान आरएसएस ने मतदाताओं को राष्ट्रीय राजधानी की प्रगति की खातिर एक ‘‘प्रभावी और जवाबदेह’’ सरकार चुनने के लिए जागरूक करने का हर संभव प्रयास किया, जिससे चुनावों में भाजपा को शानदार जीत हासिल करने में मदद मिली।</p>
<p>राजनीतिक दलों के जोर-शोर से किए गए चुनाव प्रचार के बीच आरएसएस स्वयंसेवकों ने खामोशी से ‘‘मतदाता जागरूकता’’ अभियान चलाया, जिसके तहत दिल्ली में ‘‘हजारों बैठकें’’ की गईं और इनमें स्वच्छता की कमी, पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ वायु प्रदूषण और यमुना नदी की सफाई जैसे ‘‘जरूरी’’ सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा की गई।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि ऐसी बैठकों में आरएसएस ने ‘‘आम आदमी पार्टी (आप) के भ्रष्टाचार तथा अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी द्वारा 10 साल के शासन के दौरान किए गए कई वादों को पूरा नहीं करने’’ के मुद्दे को उठाया।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इन बैठकों में दिल्ली में अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर भी चर्चा की गई।</p>
<p>आरएसएस के एक सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अकेले द्वारका में कम से कम 500 ‘ड्राइंग रूम’ (छोटे समूह की) बैठकें आयोजित की गईं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी बैठकों में आरएसएस स्वयंसेवक केवल लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर प्रकाश डालते हैं और उन पर चर्चा करते हैं। वे उनसे किसी विशेष राजनीतिक दल के समर्थन में वोट डालने के लिए स्पष्ट रूप से नहीं कहते। लोगों को सिर्फ मुद्दों के बारे में जागरूक किया जाता है और एक प्रभावी एवं जवाबदेह सरकार चुनने की खातिर वोट देने के लिए प्रेरित किया जाता है।’’</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, आरएसएस स्वयंसेवकों ने चुनाव से एक महीने पहले ही अपना अभियान शुरू कर दिया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उन झुग्गी-झोपड़ियों और अनधिकृत मोहल्लों में भी छोटे-छोटे समूह की बैठकें आयोजित की गईं, जहां ‘आप’ को काफी समर्थन प्राप्त था।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि आरएसएस कार्यकर्ताओं ने जागरूकता फैलाने के लिए इन क्षेत्रों में समान विचारधारा वाले व्यक्तियों और संगठनों के साथ भी हाथ मिलाया।</p>
<p>भाजपा के वैचारिक स्रोत के रूप में आरएसएस को ऐसे मतदाता संपर्क अभियान चलाने के लिए जाना जाता है।</p>
<p>वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के अपेक्षाकृत खराब प्रदर्शन के बाद आरएसएस ने हरियाणा और महाराष्ट्र पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए इस तरह के अभियान शुरू किए। इन दोनों राज्यों में भाजपा ने हाल के महीनों में भारी जीत के साथ सत्ता बरकरार रखी है।</p>
<p>दिल्ली में भाजपा ने आरएसएस के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया।</p>
<p>सूत्रों ने जोर देकर कहा कि संघ श्रेय पाने के लिए काम नहीं करता और वह पर्दे के पीछे से काम करने में विश्वास रखता है।</p>
<p>दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में से 47 सीटें जीत चुकी भाजपा 26 साल से अधिक समय के बाद दिल्ली में सत्ता में वापसी करने वाली है, जबकि आप को बड़ा झटका लगा है जो 22 सीटों पर सिमट गई है। कांग्रेस का दिल्ली में लगातार तीसरी बार खाता भी नहीं खुला।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Feb 2025 21:42:05 +0530</pubDate>
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                <title>जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे गई तो समाज नष्ट हो जाएगा: भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नागपुर, एक दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने परिवार के महत्व पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि अगर किसी समाज की जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वह समाज अपने आप नष्ट हो जाएगा।</p>
<p>नागपुर में ‘कठाले कुलसम्मेलन’ में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज का हिस्सा है और हर परिवार एक इकाई है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘जनसंख्या में कमी चिंता का विषय है, क्योंकि जनसंख्या विज्ञान कहता है कि अगर जनसंख्या दर 2.1 से नीचे चली गई तो वह समाज नष्ट हो जाएगा, कोई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/105707/if-population-growth-rate-goes-below-21-society-will-be"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>नागपुर, एक दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने परिवार के महत्व पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि अगर किसी समाज की जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वह समाज अपने आप नष्ट हो जाएगा।</p>
<p>नागपुर में ‘कठाले कुलसम्मेलन’ में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज का हिस्सा है और हर परिवार एक इकाई है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘जनसंख्या में कमी चिंता का विषय है, क्योंकि जनसंख्या विज्ञान कहता है कि अगर जनसंख्या दर 2.1 से नीचे चली गई तो वह समाज नष्ट हो जाएगा, कोई उसे नष्ट नहीं करेगा, वह अपने आप नष्ट हो जाएगा।’’</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘हमारे देश की जनसंख्या नीति, जो 1998 या 2002 के आसपास तय की गई थी, कहती है कि जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे नहीं होनी चाहिए।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमें दो से अधिक अर्थात तीन (जनसंख्या वृद्धि दर) की आवश्यकता है, यही जनसंख्या विज्ञान कहता है। यह संख्या महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे (समाज को) कायम रहना चाहिए।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Dec 2024 19:20:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्र के साथ विश्व कल्याण है भारत का उद्देश्यः मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जबलपुुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। भारत सनातन काल से है। भारतवर्ष का प्रयोजन अमर है। हर राष्ट्र के अस्तित्व का कुछ न कुछ कारण होता है। सृष्टि के आरम्भ से ही भारत वर्ष का प्रयोजन है। अपना-अपना प्रयोजन प्राप्त करने के बाद सभी की इति हो जाती है। भारत का प्रयोजन राष्ट्र के साथ विश्व कल्याण है इसलिए इसकी इति असंभव है। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार को कही। वे ब्रह्मलीन जगद्गुरु श्यामदेवाचार्य की द्वितीय पुण्यतिथि के कार्यक्रम में बोल रहे थे।</p>
<p>डॉ. भागवत ने इस अवसर पर नरसिंह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जबलपुुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। भारत सनातन काल से है। भारतवर्ष का प्रयोजन अमर है। हर राष्ट्र के अस्तित्व का कुछ न कुछ कारण होता है। सृष्टि के आरम्भ से ही भारत वर्ष का प्रयोजन है। अपना-अपना प्रयोजन प्राप्त करने के बाद सभी की इति हो जाती है। भारत का प्रयोजन राष्ट्र के साथ विश्व कल्याण है इसलिए इसकी इति असंभव है। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार को कही। वे ब्रह्मलीन जगद्गुरु श्यामदेवाचार्य की द्वितीय पुण्यतिथि के कार्यक्रम में बोल रहे थे।</p>
<p>डॉ. भागवत ने इस अवसर पर नरसिंह मंदिर में डॉ. श्यामदेवाचार्य के श्रीविग्रह का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि भारत एकमात्र देश है जिसने भगवान के हर स्वरूप को माना, कभी भी किसी भगवान के स्वरूप को लेकर लड़ाई नहीं की। एकमात्र भारत है जो सारी दुनिया को एक मानता है। सनातन संस्कृति सबको जोड़ती है। सनातन धर्म के आधार पर सारा विश्व चल रहा है। सत्य पर आधारित आचरण के कारण ही भारत आज भी जीवंत है। भाषा, धर्म, पंथ संप्रदाय के नाम पर देश बने, लेकिन भारत के साथ ऐसा नहीं रहा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वैभव के शिखर पर जाकर भी जब भारत को संतोष नहीं मिला तो उसने अपने अंदर देखना शुरू किया। अंततः उसे फिर वो मिला जिसे सत्य और अनंत आनंद कहा जाता है। यह ज्ञान मिला कि सभी एक ईश्वर की चराचर रचना हैं इसलिए कोई अलग नहीं है। भारत वर्ष के संतों ने सोचा कि यह जो हमें ज्ञान मिला है, वह सभी को मिलना चाहिए। तब उन्होंने धर्म की धारणा करते हुए इसकी स्थापना की, इसलिए इसे धर्म कहा गया।</p>
<p>डॉ. भागवत ने कहा कि हर चार वर्ष बाद एक नई परंपरा आती है, जिसमें अलग-अलग बातें होती हैं। भारत ही है जो यह बताता है कि सभी एक हैं। आज भारत जीवंत है। इस कारण से विश्व के कोने-कोने की परापंराएं भारत में अपने आप को सुरक्षित पाती हैं। यह भावना एवं दृष्टि हमारे हिन्दू, सनातन धर्म से मिली है, जिसमें सर्व कल्याण का भाव है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि परंपरा के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अपना-अपना प्रयोजन पूरा करने के बाद वह राष्ट्र अंतर्धान हो जाता है, लेकिन भारतवर्ष का प्रयोजन अमर है, उसके होने के स्वर अलग हैं, इसलिए भारत वर्ष ऐसा है। भारत के अतिरिक्त सभी राष्ट्रों में यह चिंता बनी रहती है कि हमको जीना है, हमको मरना नहीं है। वैसे भी मनुष्य दुर्बल जीव है। एक छोटा सा मच्छर भी हमें परेशान करता है। दुर्बल होने के कारण ही मनुष्य ने मिलकर रहने में अपना हित समझा। इसलिए उसने समूह बनाया, जिसे कबीला कहा जाता है। कबिले में रहने से शत्रु डरता है। मनुष्य सबसे दुर्बल है, यह सच है लेकिन भगवान ने उसे तेज बुद्धि दी, इसलिए सब प्राणियों का वह राजा बन गया। कबीले लड़ते थे, रक्तपात होता था इसलिए राजा बना दिया गया। हम सभी को मिलकर रहना चाहिए, जिससे ताकत बढ़ती है।</p>
<p><strong>महापुरुष को होता है भगवान का साक्षात्कार</strong></p>
<p>डॉ. भागवत ने कहा कि भगवान का साक्षात्कार महापुरुष को होता है। संतों के उपदेशों को ग्रहण करते हुए हम सब धर्म के मार्ग पर चलें। श्यामदेवाचार्य जैसी हस्तियां जाने के बाद भी पार्थिव रूप में हमारे साथ रहती हैं। तब ये संभव होता है कि आज हम ही क्या, सारी दुनिया कह रही है कि भारत होने वाली महाशक्ति है। शक्ति के बिना भगवान शिव भी शव हैं, लेकिन हमारी शक्ति दुर्बलों की रक्षा करेगी। डॉ. भागवत ने कहा कि हम सभी को पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मत होना चाहिए। सनातन धर्म ही हिंदू राष्ट्र, हिंदू संस्कृति है। भारत विश्व गुरु बनने जा रहा है और हमें यह बनना ही है। सनातन धर्म के अनुसार अपने जीवन के तरीके को खड़ा करो। उल्लेखनीय है कि डॉ. भागवत ने नरसिंह मंदिर परिसर में ब्रह्मलीन जगद्गुरु श्यामादेवाचार्य की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद साधु संतों का आशीर्वाद लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Apr 2023 18:25:44 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सम्पूर्ण समाज को अपना मानता है संघः डॉ. मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बुरहानपुर, 17 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ, संपूर्ण समाज को अपना मानता है। संघ एक दिन बढ़ते-बढ़ते समाज रूप हो जाएगा तो संघ नाम भी हट जाएगा, हिन्दू समाज ही संघ बन जाएगा।<br /><br />सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दूसरे दिन सोमवार को ब्रह्मपुर (बुरहानपुर) में डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के नवनिर्मित कार्यालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपस्थित जनों और स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यालय हिन्दू समाज का केंद्र है। यह समाज के सहयोग से खड़ा हुआ है और समाज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91366/sangh-considers-the-whole-society-as-its-own-dr-mohan"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3843_mohan-bhagwat-rss.jpg" alt=""></a><br /><p>बुरहानपुर, 17 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ, संपूर्ण समाज को अपना मानता है। संघ एक दिन बढ़ते-बढ़ते समाज रूप हो जाएगा तो संघ नाम भी हट जाएगा, हिन्दू समाज ही संघ बन जाएगा।<br /><br />सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दूसरे दिन सोमवार को ब्रह्मपुर (बुरहानपुर) में डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के नवनिर्मित कार्यालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपस्थित जनों और स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यालय हिन्दू समाज का केंद्र है। यह समाज के सहयोग से खड़ा हुआ है और समाज को ही समर्पित है।<br /><br />उन्होंने कहा कि कार्यालय से संघ कार्य में अधिक सुविधा तथा यहां कोई नया व्यक्ति भी आया तो संघ कार्य की सभी विशेषताओं का अनुभव उसे इस भवन में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य स्वार्थ तथा भय से नहीं चलता, आत्मीयता से चलता है, क्योंकि स्वार्थ और भय स्थायी नहीं है। इसीलिए कार्यालय पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उस आत्मीयता का दर्शन होना चाहिए, साथ ही कार्यालय के अनुशासन का पालन भी होना चाहिए।<br /><br />सरसंघचालक ने कहा कि संघ का कार्य लोक संग्रह का कार्य है। संघ का कार्य ईश्वरीय कार्य है और ईश्वरीय कार्य को भगवान करेगा, लेकिन उसका निमित्त हमें बनना है, इसलिए शाखा चलती है। अपने इस ईश्वरीय और पवित्र कार्य का अनुभव कार्यालय के वातावरण से होना चाहिए। समाज की इस संगठित शक्ति से अच्छे कार्य होंगे। इस शक्ति से सज्जन लोगों की सुरक्षा होगी और धर्म की रक्षा के लिए शक्ति का उपयोग होगा।<br /><br />डॉ. भागवत ने कहा कि आज संघ का कार्य बढ़ रहा है। संघ के हितैषी बढ़ रहे हैं, इसलिए जगह-जगह पर कार्यालय बन रहे हैं, लेकिन जब कार्यालय नहीं थे, तब भी संघ था। इसलिए सुविधाओं के कारण क्षमता कम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे समाज को संगठित होकर अपने देश के लिए जीने-मरने को तत्पर होकर, एक होकर, भेद और स्वार्थ भूलकर जीना पड़ता है, तब देश आगे बढ़ता है। देश को आगे बढ़ाने का कार्य ठेके पर नहीं दिया जा सकता। संघ को भी नहीं दिया जा सकता। पूरे 130 करोड़ के समाज को संगठित होना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Apr 2023 21:27:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
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                <title>भारत धर्म के मार्ग पर चलकर ही बनेगा विश्व गुरु: डॉ. मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बुरहानपुर, 16 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही भारत विश्व गुरु बनेगा। यदि हम सब धर्म का पालन करते रहे तो आने वाले बीस-तीस साल में भारत दुनिया को नया रास्ता दिखाने वाला विश्व गुरु बन जाएगा। उन्होंने कहा कि धर्म का मतलब सारी सृष्टि के कल्याण की भावना है। सत्य के मार्ग पर चलकर हमें अपना कर्तव्य निभाना होगा। भारत को महाशक्ति नहीं बनना है बल्कि दुनिया को धर्म सिखाना है।<br /><br />सरसंघचालक डॉ. भागवत रविवार को बुरहानपुर प्रवास के दौरान यहां आयोजित धर्म संस्कृति सभा को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91316/dr-mohan-bhagwat-will-become-world-guru-only-by-following"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/k16042023-03.jpg" alt=""></a><br /><p>बुरहानपुर, 16 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही भारत विश्व गुरु बनेगा। यदि हम सब धर्म का पालन करते रहे तो आने वाले बीस-तीस साल में भारत दुनिया को नया रास्ता दिखाने वाला विश्व गुरु बन जाएगा। उन्होंने कहा कि धर्म का मतलब सारी सृष्टि के कल्याण की भावना है। सत्य के मार्ग पर चलकर हमें अपना कर्तव्य निभाना होगा। भारत को महाशक्ति नहीं बनना है बल्कि दुनिया को धर्म सिखाना है।<br /><br />सरसंघचालक डॉ. भागवत रविवार को बुरहानपुर प्रवास के दौरान यहां आयोजित धर्म संस्कृति सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग भाषा, संप्रदाय और धर्म के लोग रहते हैं। अलग-अलग होने के बावजूद हम जानते हैं कि पूरी सृष्टि एक है। इसलिए हम हिंदू हैं। हमें परस्पर एक-दूसरे का सम्मान करते हुए सबको साथ लेकर चलना है। शाश्वत धर्म का पालन करने से सारी सृष्टि सुखी रहेगी।<br /><br />डॉ. भागवत ने कहा कि संत और मुनियों की बातों का अनुसरण करें। सनातन काल से वे हमें अच्छाई का मार्ग दिखाते आए हैं। सृष्टि के कल्याण का बोझ हम सबको मिलकर उठाना होगा। उन्होंने सत्य को भी प्रिय भाषा में बोलने और छह बुराइयों काम, क्रोध, मोह, लोभ, दंभ व सत्सर से दूर रहने की बात कही है।<br /><br />धर्म संस्कृति सभा का आयोजन महाराष्ट्र के अमरावती में स्थित नाथ पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी जितेंद्र नाथ ने किया था। धर्म संस्कृति सभा में स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर हरिहरानदं महाराज, काशी के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, शिवाजी महाराज के वंशज राजे मुधोजी भोंसले भी मौजूद रहे।<br /><br />सभा से पहले सरसंघचालक ताप्ती तट स्थित नाथ मंदिर पहुंचे। यहां स्वामी गोविंदनाथ महाराज की समाधि पर पुष्प अर्पित किए और श्रीराम दरबार के दर्शन किए। यहां उन्होंने गोविंदनाथ महाराज के समाधि स्थल के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमारे यहां विविधता है लेकिन हम सबका एक नाम दुनिया जानती है, हम हिन्दू हैं।<br /><br />डॉ. भागवत ने कहा कि बहुत से राष्ट्र दुनिया में आए और चले गए। भारत तब भी था आज भी है और कल भी रहेगा क्योंकि यहां धर्म का काम सबल बनाते रहना है, यह वही करने का समय है। हमें देश में भारतीय मतों को मानने वाले लोगों में जो विचलन आ गया है, उन्हें धर्म की जड़ों में स्थापित करना है। यही सत्य कार्य है। धर्म में जाग्रत करना ईश्वरीय कार्य है। हम सब मिलकर प्रयास करेंगे।<br /><br />उन्होंने कहा कि हम बाहर की परिस्थिति का विचार करते हैं तो बौखला जाते हैं। बौखलाने की जरूरत नहीं है। हम सब जितने सक्रिय होंगे, सब उतना जल्दी ठीक होगा। हमारे पास सत्य, करूणा, सुचिता, तपस है। हमें अपनों को जागृत करना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि लोभ, लालच, जबरदस्ती से मतांतरण ठीक नहीं है। जैसे-जैसे देश खड़ा हो रहा है, वैसे-वैसे जो नुकसान हुआ है, वह पूरा होने के आसार दिख रहे हैं। धर्म देने वाला भारत है। लोगों को धर्म, संस्कृति, नीति से जोड़ना है। सौ साल की अवधि में सबकुछ बदल देने वाले लोग यहां आए, लेकिन जो सैकड़ों साल से काम कर रहे हैं उनके हाथों में कुछ नहीं लग रहा है।<br /><br />सरसंघचालक ने कहा कि समाज को ज्ञान रहे तो वह छल कपट को पहचान सकेगा। इसलिए उसमें आस्था पक्की करना चाहिए। हमारे व्यक्ति को रामायण तो पता है लेकिन उसका भाव नहीं पता। उसे तैयार करना पड़ेगा ताकि सवाल पूछने वाले को सही जवाब दे सके। उसका यह कच्चापन हमें दुख देता है। हमारे पूर्वजों ने हमारी जड़ें पक्की की, उसे उखाड़ने का आज तक प्रयास होता रहा। हमारे लोग नहीं बदलते। जब उनका विश्वास उठ जाता है कि हमारा समाज हमारे साथ नहीं तब ऐसा होता है। उन्होंने कहा कि मप्र में 150 साल पहले पूरा का पूरा गांव ईसाई बना था। बाद में पूरा गांव वापस आ गया। हजारों मील दूर से मिशनरी आकर उनका खाता-पीता है और उसे ही बदलता है। बहुत शीघ्र धर्म के मूल्यों के आधार पर दुनिया चलने वाली है और सबसे पहले भारत चलेगा। 20-30 साल में यह परिवर्तन हम सभी के प्रयासों से देखने को मिलेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Apr 2023 19:02:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>देश से जाति-वर्ण व्यवस्था दूर करने की आवश्यकता है; बोले मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि अगर आपको लगता है कि हमारे पूर्वजों ने गलतियां की हैं, तो गलतियों को स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने वर्ण और जाति जैसी अवधारणाओं को पूरी तरह से खत्म करने की वकालत की है। शुक्रवार को मोहन भागवत ने कहा कि आज के समय में वर्ण और जाति जैसी अवधारणाओं का पूरी तरह से त्याग कर देना चाहिए। भागवत का कहना था कि भेदभाव का कारण बनने वाली हर चीज ताला, स्टॉक और बैरल से बाहर हो जानी चाहिए. एक पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए भगवत ने कहा कि इन चीजों की अब कोई प्रासंगिकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म होना चाहिए।</div><div><br /></div><h2>गलतियों को स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं</h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि नागपुर में पुस्तक विमोचन समारोह में संघ प्रमुख ने कहा, भले ही सामाजिक समानता भारतीय परंपरा का एक हिस्सा थी, लेकिन इसे भुला दिया गया। इसलिए इसके हानिकारक परिणाम हुए। उन्होंने कहा कि जाति अतीत है और अब इसे भूल जाओ। संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि अगर आपको लगता है कि हमारे पूर्वजों ने गलतियां की हैं, तो गलतियों को स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। सभी के पूर्वजों ने गलतियां की हैं।</div><div><br /></div><h2>जनसंख्या असंतुलन को लेकर कही बात</h2><div><br /></div><div>गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को संघ प्रमुख ने जनसंख्या असंतुलन को लेकर एक बात कही थी जिस पर एक विशेष समुदाय के लोगों को खूब आपत्ति हो रही है। उन्होंने कहा था कि राष्ट्र को सभी सामाजिक समूहों पर समान रूप से लागू एक व्यापक जनसंख्या नियंत्रण नीति तैयार करनी चाहिए और समुदाय आधारित 'जनसंख्या असंतुलन' एक महत्वपूर्ण विषय है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संघ प्रमुख के इस बयान की कई राजनीतिक दलों ने आलोचना भी की थी।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/81596/there-is-a-need-to-remove-the-caste-varna-system-from-the-country-said-mohan-bhagwat</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Oct 2022 22:29:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सूरत : कामरेज में आरएसएस शिविर का हुआ समापन</title>
                                    <description><![CDATA[2025 में जब आरएसएस की 100 वीं वर्षगांठ पुर्ण होने जा रही है तभी राष्ट्रजागरण ने समाज की कोमल शक्ति के सहयोग पर जोर देते हुए प्रबुद्ध लोगों को सही दिशा में चर्चा करने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/74866/surat-rss-camp-program-concludes-in-kamrej"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-05/7327_story-27052022-b07jpg.jpg" alt=""></a><br /><div><b style="font-size:1rem;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गुजरात प्रांत ने सूरत के कामरेज में प्रथम वर्ष में 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (शिविर) का आयोजन किया था </b><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गुजरात प्रांत ने सूरत के कामरेज में प्रथम वर्ष में 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (शिविर) का आयोजन किया। शिविर के समापन कार्यक्रम में आज बैंड के विभिन्न वाद्ययंत्रों, छड़ी के प्रयोगों, कराटे, परेड और योगासन का सुंदर प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि और समाज के सेवाभावी सदस्य केशुभाई गोटी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय भावना की प्रशंसा करते हुए समाज से देशभक्ति को अपनी प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया।कार्यवाहक मनसुखभाई पटेल शिविर के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि 300 छात्रों के 20 दिनों के प्रशिक्षण में सुबह 9.30 बजे से रात 10.00 बजे तक एक निश्चित दिनचर्या में रहने से अनुशासन, सामूहिकता और देशभक्ति की भावना जागृत होती है। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कैलाशभाई त्रिवेदी ने आजादी के अमृत महोत्सव यानी 75 साल के जश्न के दौरान देश के लिए बलिदान और कष्ट सहने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने आगे कहा कि स्वतंत्रता के संदर्भ में "स्वयं ही देश की पहचान है"। और उन्होंने "स्व" को जानने और सच्चे भारतीय विचारों और मूल्यों के आधार पर देश की व्यवस्था को चलाने की आवश्यकता पर बल दिया। 2025 में जब आरएसएस की 100 वीं वर्षगांठ पुर्ण होने जा रही है तभी राष्ट्रजागरण ने समाज की कोमल शक्ति के सहयोग पर जोर देते हुए प्रबुद्ध लोगों को सही दिशा में चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन में पर्यावरण, सामाजिक सद्भाव के साथ-साथ पारिवारिक जागरूकता की भूमिका पर जोर दिया। विश्व पटल पर भारत की प्रभावशाली भूमिका के सन्दर्भ में देशवासियों ने एकजुट होकर राष्ट्र की प्रबल भावना को प्रकट कर राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। इस कार्यक्रम में सूरत शहर और दक्षिण गुजरात से बड़ी संख्या में भाई-बहन शामिल हुए।</span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 May 2022 02:04:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने वाले हिंदुओं को लेकर मोहन भागवत ने कहा कुछ ऐसा</title>
                                    <description><![CDATA[हिंदू जागेंगे तभी देश जागेगा, शादी जैसी चीजों के लिए धर्म परिवर्तन करना गलत - आरएसएस अध्यक्ष]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/81334/mohan-bhagwat-said-something-like-this-about-hindus-who-converted-for-marriage"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/7008_s3-111021.jpg" alt=""></a><br /><div>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अध्यक्ष मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू युवाओं का शादी जैसी चीजों के लिए धर्म परिवर्तन करना गलत है। साथ ही भागवत ने जोर देकर कहा कि परिवार के सदस्यों को अपने (युवाओं) के मन में धर्म के प्रति गर्व पैदा करना चाहिए। मोहन भागवत ने उत्तराखंड के हल्दानी में संघ कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। </div><div><span style="font-size:1rem;">कार्यक्रम के दौरान संघ अध्यक्ष ने कहा, 'धर्मांतरण कैसे होता है? क्षुद्र स्वार्थ के लिए, शादी के लिए? हिंदू लड़कियां और लड़के दूसरे धर्मों को कैसे अपनाते हैं? ऐसा करने वाले लोग गलत करते हैं, लेकिन यह दूसरी बात है। क्या हम अपने बच्चों की ठीक से देखभाल नहीं करते? इन सभी चीजों की शिक्षा हमें अपने बच्चों को घर पर देनी होती है। हमें उनमें धर्म के प्रति सम्मान, गौरव की भावना पैदा करनी होगी।'</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">आरएसएस अध्यक्ष ने कहा कि धर्म से जुड़े सवालों के जवाब लोगों को खुद ही ढूँढने  चाहिए। जिससे की यदि हमारा बालक कुछ भी आकर पूछे तो हमें कोई शंका ना रहे। हमें अपने बच्चों को तैयार करना होगा, इसके लिए हमें खुद चीजें सीखनी होंगी। संघ अध्यक्ष ने लोगों से भारतीय पर्यटन स्थलों की यात्रा करने, घर का बना खाना खाने और पारंपरिक पोशाक पहनने का आग्रह किया।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">भागवत ने कहा कि भारतीय संस्कृति से जुड़े रहने के 6 मंत्र हैं। इनमें भाषा, भोजन, भक्ति गीत, यात्रा, पोशाक और घर शामिल हैं। भागवत ने लोगों से पारंपरिक रीति-रिवाज अपनाने को कहा। साथ ही उन्होंने खुद को अस्पृश्यता जैसी चीजों से दूर रखने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न करें। </span><span style="font-size:1rem;">संघ अध्यक्ष ने लोगों से पर्यावरण आदि मुद्दों पर बात करने को कहा ताकि पानी, पौधों को बचाया जा सके। साथ ही उन्होंने कहा, ''हिंदू जब जागेंगे, दुनिया जागेगी।"</span></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Oct 2021 15:15:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आज आरएसएस विश्व की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक : मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[उदयपुर में एक कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/82869/today-rss-is-one-of-the-largest-organizations-in-the-world-mohan-bhagwat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-09/rss.jpg" alt=""></a><br /><div>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का कहना है कि जहां विभिन्न कारणों से हिंदुओं की आबादी कम हुई है वहां समस्याएं पैदा हो गई हैं। आपको बता दें कि उदयपुर में एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि आस्था का कल्याण हिंदू राष्ट्र से ही होगा। कोरोना काल में संघ के स्वयंसेवकों ने जिस तरह नि:स्वार्थ भाव से लोगों की सेवा की है, वह सच्चा हिंदुत्व है। भारत की समस्याओं के समाधान के लिए हिंदू समाज का एकजुट होना जरूरी है। हम सब भारत माता की संतान हैं और हिन्दू यानी सनातन संस्कृति को मानने वाले लोग। सनातन संस्कृति के संस्कार विश्व का कल्याण कर सकते हैं। शांति और सत्य हिंदुओं की विचारधारा है। हम हिंदू नहीं हैं यह अभियान देश और समाज को कमजोर करने के लिए चलाया जा रहा है।</div><div>आपको बता दें कि भागवत ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने महसूस किया कि भारत की विविधता में एकता की भावना है। हम उन पूर्वजों के वंशज हैं जो इस पवित्र भूमि पर युगों से रहते आए हैं और हम सभी हिंदू हैं।  इस तरह की भावना ही हिंदुत्व है। डॉ. हेडगेवार ने अपने निजी हितों को दरकिनार करते हुए देश के लिए काम करने का फैसला किया। शुरू में उन्हें लगा कि आजादी के बाद हमें फिर से आश्रित होने के बारे में सोचना होगा। संघ की स्थापना के पीछे यही विचार है।</div><div>आपको बता दें कि मोहन भागवत ने कहा कि संघ विश्व भाईचारे की भावना के साथ काम करता है। संघ के लिए सारा विश्व अपना है। संघ को अपना नाम बनाने की कोई इच्छा नहीं है। संघ में क्रेडिट और लोकप्रियता की कोई आवश्यकता नहीं है। 80 के दशक तक हिंदू शब्द का इस्तेमाल भी सभी करते थे। ऐसी स्थिति में भी संघ ने काम किया है। आज आरएसएस दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में से एक है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Sep 2021 20:33:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जैविक खेती और भूमि पूजन के बहाने देशभर में किसानों से संवाद करेगा आरएसएस</title>
                                    <description><![CDATA[13 अप्रैल से लेकर 24 जुलाई तक चलेगी ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80915/rss-will-communicate-with-farmers-across-the-country-on-the-pretext-of-organic-farming-and-land-worship"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/8448_rss-logo.jpg" alt=""></a><br /><div>नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े 'अक्षय कृषि परिवार' ने देशभर में जैविक खेती की तरफ किसानों को प्रेरित करने की बड़ी योजना बनाई है। इसके लिए 13 अप्रैल को शुरू हो रहे हिंदू नववर्ष से 24 जुलाई तक अभियान चलाने की तैयारी है। देशभर के किसानों से संवाद के अभियान को भूमि सुपोषण एवं संरक्षण राष्ट्रीय जन अभियान नाम दिया गया है। खास बात यह है कि भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान की शुरुआत, भूमि पूजन से होगी। राष्ट्रीय और राज्य स्तर से लेकर गांवों तक 13 अप्रैल को भूमि पूजन कर इस अभियान का शुभारंभ होगा।</div><div><span style="font-size:1rem;">अभियान के राष्ट्रीय संयोजक जयराम सिंह पाटीदार और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भगवती प्रकाश ने बताया कि इस जन अभियान का संचालन कृषि एवं पर्यावरण क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं की ओर से होगा। देशभर के किसानों से संवाद कर उन्हें मिट्टी के पोषण के बारे में जानकारी देकर रासायनिक उत्पादों के प्रयोग से बचने की सलाह दी जाएगी। खेती के परंपरागत साधनों की तरफ लौटने के लाभ बताए जाएंगे। उन्होंने बताया कि यह भ्रम है कि जैविक खेती से उत्पादन कम होता है। जैविक खेती से जहां मिट्टी की उत्पादकता बनी रहती है, वहीं इससे रासायनिक उत्पादों की तुलना में दोगुनी पैदावार प्राप्त की जा सकती है।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">उन्होंने बताया कि खेती में लागत निरंतर बढ़ रहा है। आर्गनिक कार्बन की मात्रा कम होने से उत्पादन भी घट रहा है। भूमि की जल धारण क्षमता और जलस्तर भी अधिकांश स्थानों पर घट रहा है। कुपोषित भूमि के कारण लोग रोगों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में तीन महीने तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से भारतीय कृषि चिंतन को स्थापित करने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि यह जन अभियान गत चार वर्षों से किए जा रहे व्यापक परामर्श प्रक्रिया का परिणाम है।</span><br /></div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Apr 2021 01:58:01 +0530</pubDate>
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