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                <description>Katch RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भुज: कच्छ के रणोत्सव में 28 फरवरी तक लाखों सैलानी उठाएंगे ‘रण के रंगों’ का लुत्फ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भुज, 14 नवंबर (हि.स.)। गुजरात के कच्छ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने वाले रणोत्सव का आगाज हो चुका है। कच्छ जिले के धाेरडो में बनी टेंट सिटी पर्यटकों के लिए खुल गई हैं। कच्छ के सफेद रण की सुंदरता को दिखाने के लिए रण में हर साल टेंट सिटी का निर्माण किया जाता है। किसी समय जो रण एक बंजर जमीन के रूप में जाना जाता था, उस स्थान पर आज चार महीने तक चलने वाले रणोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस बार यह रणोत्सव 28 फरवरी तक चलेगा। इस वर्ष ‘रण के रंग’ नामक थीम पर रणोत्सव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/105389/lakhs-of-tourists-will-enjoy-the-colors-of-battle-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-11/‍b14112024-08.jpg" alt=""></a><br /><p>भुज, 14 नवंबर (हि.स.)। गुजरात के कच्छ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने वाले रणोत्सव का आगाज हो चुका है। कच्छ जिले के धाेरडो में बनी टेंट सिटी पर्यटकों के लिए खुल गई हैं। कच्छ के सफेद रण की सुंदरता को दिखाने के लिए रण में हर साल टेंट सिटी का निर्माण किया जाता है। किसी समय जो रण एक बंजर जमीन के रूप में जाना जाता था, उस स्थान पर आज चार महीने तक चलने वाले रणोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस बार यह रणोत्सव 28 फरवरी तक चलेगा। इस वर्ष ‘रण के रंग’ नामक थीम पर रणोत्सव का आयोजन किया गया है।<br /><br />गुजरात के पर्यटन विभाग के मुताबिक रणोत्सव का मुख्य आकर्षण यहां बसाई गई टेंट सिटी है। इस वर्ष सैलानियों के लिए सफेद रण में 3-स्टार होटल और रिसॉर्ट जैसी सुविधाओं से सुसज्जित 400 टेंट लगाए गए हैं। इस वर्ष 11 नवंबर से शुरू हुई टेंट सिटी 28 फरवरी तक चलेगी। टेंट सिटी में रहते हुए पर्यटक नमक के सफेद रेगिस्तान के लुभावने सौंदर्य, लोक संस्कृति और परंपरागत व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं। रणोत्सव के दौरान पर्यटकों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा विभिन्न एडवेंचर स्पोर्ट्स एक्टिविटी का भी आयोजन किया जाता है। गुजरात का पर्यटन उद्योग पिछले 20 वर्षों में खूब फला-फूला है। भौगोलिक विविधता वाले गुजरात में ऐसे अनेक स्थल हैं, जो दुनिया भर के सैलानियों को आकर्षित करते हैं। विशेष रूप से क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़े और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से उबरने के बाद पटरी पर लौटे कच्छ जिले में स्थित दुनिया के एकमात्र सफेद रण (रेगिस्तान) को देखने के लिए भारी संख्या में पर्यटक उमड़ते हैं। कच्छ की कला, रंग-बिरंगी संस्कृति, आतिथ्य, परंपरा और संगीत के बेजोड़ संगम वाले कच्छ रणोत्सव को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।<br /><br />गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सर्वप्रथम 2005 में कच्छ रणोत्सव की शुरुआत की थी, जिससे गुजरात के पर्यटन उद्योग को तो गति मिली थी। नरेन्द्र मोदी ने विनाशक भूकंप के बाद कच्छ की तस्वीर को पूर्ण रूप से बदलने का दृढ़ संकल्प किया और इस भूमि को पुनर्जीवित करने के मिशन को साकार भी किया। इसमें कच्छ के सफेद रण में शुरू हुए रणोत्सव ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने चमचमाते सफेद रण के अंतहीन क्षितिज को देखने के बाद इस स्थान पर दुनिया का सबसे बड़ा और एकमात्र सफेद रण का उत्सव- कच्छ रणोत्सव आयोजित करने का फैसला किया। इस तरह, भुज से 80 किमी की दूरी पर स्थित धोरडो में तीन दिवसीय रणोत्सव की शुरुआत हुई, जो आज 4 महीने तक चलने वाला उत्सव बन चुका है। इस वर्ष रणोत्सव के आयोजन में टिकाऊ पर्यटन पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है, जैसे कि-प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग, सफेद रण में जाने के लिए बाइसिकल राइड, टेंट सिटी में अपशिष्ट पृथक्करण और निपटान की व्यवस्था आदि।<br /><br />दिसंबर, 2023 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सफेद रण के वॉच टावर पर लाइट एंड साउंड शो का अनावरण किया था, जिससे यात्रियों के लिए एक नया आकर्षण जुड़ गया। इस वर्ष पर्यटन विभाग ने धोलावीरा में भी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर 44 कमरों वाले रिसॉर्ट का निर्माण किया है, जहां पर्यटकों की भीड़ देखी जा रही है। रणोत्सव की शुरुआत के बाद साल दर साल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो रही है। रणोत्सव में आने वाले लाखों पर्यटकों के कारण स्थानीय लोग, विशेषकर हस्तकला क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत विकसित हुआ है। रणोत्सव से रोगन कला, ओरीभरत, मीना काम, अजरख ब्लॉक प्रिंट, बांधनी, जरदोशी कला और काष्ठ कला आदि में पारंगत कारीगरों को रोजगार तो मिलता ही है, साथ ही कच्छी हस्तशिल्प के कलाकारों को अपनी कलाकृतियों की बिक्री के लिए एक वैश्विक बाजार भी उपलब्ध होता है।<br /><br />स्थानीय कारीगरों को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से टेंट सिटी में हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट के लाइव डेमो के साथ दुकानों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, रणोत्सव में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया है, जहां स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जाएगा। वर्ष 2023-24 के रणोत्सव में लगभग 2 लाख लोग क्राफ्ट और फूड स्टॉल पहुंचे थे, जिससे क्राफ्ट स्टॉल धारकों को अनुमानित 6.65 करोड़ रुपये और फूड स्टॉल धारकों को अनुमानित 1.36 करोड़ रुपये की आय हुई थी। इस वर्ष क्राफ्ट और फूड स्टॉल की शुरुआत एक दिसंबर, 2024 से होगी। धोरडो टेंट सिटी में प्रतिवर्ष अलग-अलग थीम पर रणोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष ‘रण के रंग’ नामक थीम पर रणोत्सव का आयोजन किया गया है। क्या दिन और क्या रात, चमकते रण का अद्भुत नजारा देख पर्यटक अचरज में पड़ जाते हैं। धोरडो गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के पुरस्कार से नवाजा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Nov 2024 16:21:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अहमदाबाद : बारिश-बाढ़ की मार झेल रहे गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ पर चक्रवात का साया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अहमदाबाद, 30 अगस्त (हि.स.)। मूसलाधार बारिश और बाढ़ की विभीषिका से घिरे गुजरात पर अब चक्रवात का साया मंडरा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की ताजा सूचना में कहा गया है कि सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र पर एक चक्रवात बन रहा है। इस बीच भारी बारिश ने गुजरात के लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। वडोदरा समेत कई शहरों में तो बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। इतना ही नहीं मगरमच्छ नदियों से बहकर घरों की छतों पर पहुंच गए हैं।<br /><br />भारत मौसम विज्ञान विभाग के राष्ट्रीय बुलेटिन में कहा गया है कि सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र पर बन रहे चक्रवात के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/104072/ahmedabad-shadow-of-cyclone-on-saurashtra-kutch-of-gujarat-which-is"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-08/b30082024-03.jpg" alt=""></a><br /><p>अहमदाबाद, 30 अगस्त (हि.स.)। मूसलाधार बारिश और बाढ़ की विभीषिका से घिरे गुजरात पर अब चक्रवात का साया मंडरा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की ताजा सूचना में कहा गया है कि सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र पर एक चक्रवात बन रहा है। इस बीच भारी बारिश ने गुजरात के लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। वडोदरा समेत कई शहरों में तो बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। इतना ही नहीं मगरमच्छ नदियों से बहकर घरों की छतों पर पहुंच गए हैं।<br /><br />भारत मौसम विज्ञान विभाग के राष्ट्रीय बुलेटिन में कहा गया है कि सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र पर बन रहे चक्रवात के आज अरब सागर के ऊपर उभरने और ओमान तट की ओर बढ़ने की उम्मीद है। यही नहीं, इसके आज चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की संभावना है। बुलेटिन में कहा गया है कि 1976 के बाद अगस्त में अरब सागर के ऊपर उठने वाला यह पहला चक्रवाती तूफान होगा। 1976 में चक्रवात ओडिशा के ऊपर विकसित हुआ। पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा। अरब सागर में उभरा। एक लूपिंग ट्रैक बनाया और ओमान तट के पास उत्तर-पश्चिम अरब सागर पर कमजोर हो गया।<br /><br />साथ ही अगस्त के महीने में अरब सागर के ऊपर चक्रवाती तूफान का विकसित होना एक दुर्लभ गतिविधि है। 1944 का चक्रवात भी अरब सागर में उभरने के बाद तीव्र हो गया और बाद में समुद्र के मध्य में कमजोर हो गया। पिछले 132 वर्षों के दौरान बंगाल की खाड़ी के ऊपर अगस्त के महीने में कुल 28 ऐसे सिस्टम बने हैं।<br /><br />एक मौसम वैज्ञानिक ने कहा कि मौजूदा तूफान के बारे में असामान्य बात यह है कि पिछले कुछ दिनों से इसकी तीव्रता समान बनी हुई है। उष्णकटिबंधीय तूफान दो प्रतिचक्रवातों के बीच स्थित है। एक तिब्बती पठार के ऊपर और दूसरा अरब प्रायद्वीप के ऊपर। सौराष्ट्र और कच्छ पर बने गहरे दबाव के कारण इस क्षेत्र में भारी वर्षा हुई है।<br /><br />विभाग के अनुसार, इस साल पहली जून से 29 अगस्त के बीच सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों में 799 मिलीमीटर बारिश हुई है। इस अवधि में सामान्य 430.6 मिलीमीटर बारिश होती है। इस अवधि में सामान्य से 86 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। बुलेटिन में कहा गया है कि चक्रवात पिछले छह घंटों के दौरान तीन किलोमीटर प्रति घंटे की गति के साथ पश्चिम की ओर और केंद्रित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Aug 2024 15:24:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : भारत का सबसे बड़ा स्मारक और संग्रहालय ‘स्मृति वन’,  4 महीने में पहुंचे 2.80 लाख से अधिक आगंतुक</title>
                                    <description><![CDATA[कच्छ के भुज शहर में 2001 के भूकंप में जान गंवाने वालों की स्मृति में बना है विशेष वन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/89218/gujarat-indias-largest-monument-and-museum-smriti-van-more-than"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/d24012023-03.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 अगस्त, 2022 को कच्छ के भुज शहर में स्मृति वन का लोकार्पण किया था। 26 जनवरी, 2001 को आए विनाशक भूकंप ने कच्छ को पूरी तरह से तबाह कर दिया था। उस भूकंप का शिकार बने लोगों (नागरिकों) की याद में इस स्मृति वन का निर्माण किया गया है। 20 जनवरी तक केवल चार महीनों की अवधि में ही 2 लाख 80 हजार लोग इस स्मारक को देख चुके हैं, जबकि इसी दौरान संग्रहालय को देखने के लिए 1 लाख 10 हजार से अधिक लोग पहुंचे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य में विकासोन्मुखी विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य जारी है। इससे समाज की पायदान पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक खुशहाली पहुंची है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>फिटनेस, योग क्लास, ओपन माइक और संगीत के कार्यक्रम</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भुज और राज्य के नागरिकों को एक साथ लाने के उद्देश्य से यहां योग क्लास और वर्कशॉप, ओपन माइक, स्केटिंग के कार्यक्रम, जुम्बा गेट टुगेदर, मतदान जागरूकता कार्यक्रम, संगीत के कार्यक्रम और 21,000 से अधिक दीयों से भूकंप में दिवंगतों की शांति के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके चलते स्मृति वन एक सांस्कृतिक केंद्र भी बना है, जहां भुज सहित आसपास के क्षेत्रों से लोग आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संग्रहालय देख अभिभूत हुईं जानी-मानी हस्तियां</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अपने-अपने क्षेत्र के कई दिग्गजों ने भुजिया डूंगर (पहाड़ी) पर बने इस संग्रहालय की प्रशंसा की है। इसमें प्रसिद्ध राजनेता, सशस्त्र बलों के अधिकारी, सफल सीईओ, क्रिकेटर, अभिनेता, पूर्व मुख्यमंत्री, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर सहित अन्य महानुभाव शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आगंतुकों की प्रतिक्रियाएं</strong></p>
<p style="text-align:justify;">“मैं अपने देशवासियों से विनम्रतापूर्वक कहना चाहता हूं कि हमारा स्मृति वन दुनिया के कुछ श्रेष्ठ स्मारकों और संग्रहालयों की तुलना में एक कदम भी पीछे नहीं है। मैं कच्छ के लोगों से निवेदन करना चाहता हूं कि जब कभी आपके घर में कोई मेहमान आए, तो कृपया उन्हें स्मृति वन दिखाए बिना वापस न जाने दें। मैं कच्छ के शिक्षा विभाग से भी निवेदन करना चाहूंगा कि जब भी शैक्षिक प्रवास का आयोजन किया जाए, तब स्कूल के बच्चों को यहां लाया जाए।”<br />- <strong>नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री</strong></p>
<p style="text-align:justify;">“2001 के भूकंप के सार को जितने अच्छे तरीके से यहां ग्रहण किया गया है, यह एक विनम्र अनुभव है। यह हमें प्रकृति का आदर करना सिखाता है और यह भी सिखाता है कि प्रकृति हमारे जीवन में कितनी अहम भूमिका निभाती है। हमने जो जीवन गंवाया, वह बहुत ही दुःख का क्षण था। मैं भूकंप से प्रभावित हुए लोगों के पुनर्वास के लिए अथक मेहनत करने वाली टीम को बधाई देता हूं। मैं स्मृति वन के निर्माण से जुड़ी टीम की भी प्रशंसा करना चाहता हूं। प्रभावित लोगों की स्मृति को चिरंजीवी बनाए रखने और भावी पीढ़ी को आपदा की तैयारी के महत्व को लेकर शिक्षित करने के संग्रहालय के प्रयासों की  <br />सराहना करता हूं।”<br /><strong> - शक्तिकांत दास, गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक</strong><br /><br />“म्यूजियम के हरेक छोटे कोने में एक कहानी मौजूद है, जिसका प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक बार अनुभव करना चाहिए। अवश्य जाना चाहिए।”<br />- <strong>शुभम, चेन्नई से आए आगंतुक</strong></p>
<p style="text-align:justify;">“यह एक सुंदर अनुभव था। इतनी खूबसूरत इमारत, और उसके भीतर जो है, वह उससे भी अधिक सुंदर है। कच्छ के लोगों के जज्बे को सुंदर तरीके से दर्शाया गया है और यह काफी सम्माननीय है। आपको अवश्य पसंद आएगा।”<br />- <strong>रशेल, स्पेन से आए आगंतुक </strong></p>
<img src="https://www.loktej.com/media/2023-01/d24012023-04.jpg" alt="D24012023-04"></img>
2001 के भूकंप में जान गंवाने वालों की स्मृति में बना है विशेष वन

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>470 एकड़ क्षेत्र में फैला है स्मृति वन प्रोजेक्ट</strong></p>
<p style="text-align:justify;">यह प्रोजेक्ट भुज के भुजिया डूंगर पर 470 एकड़ क्षेत्र में बना है। यहां दुनिया का सबसे विशाल मियावाकी जंगल है जिसमें 3 लाख पेड़ लगे हैं। इसके अलावा, यहां 50 चेकडैम हैं, जिसकी दीवारों पर श्रद्धांजलि के रूप में 12,932 मृतक नागरिकों के नाम उकेरे गए हैं। अन्य आकर्षणों में सन पॉइंट (उगते सूर्य को देखने का स्थान), 8 किमी लंबा ओवरऑल पाथ-वे, 1.2 किमी आंतरिक सड़क, 1 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट, 3 हजार आगंतुकों के लिए पार्किंग सुविधा, 300 वर्ष से अधिक पुराने किले का नवीनीकरण, 3 लाख पौधारोपण, समूचे क्षेत्र में इलेक्ट्रिक लाइटिंग और 11,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले भूकंप को समर्पित संग्रहालय का समावेश होता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भूकंप का अनुभव करने के लिए विशेष थियेटर</strong></p>
<p style="text-align:justify;">2001 में आए भूकंप का अनुभव करने के लिए एक विशेष थियेटर का निर्माण किया गया है। यहां कंपन तथा ध्वनि एवं प्रकाश के संयोजन से एक विशेष परिस्थिति का अनुभव कराया जाता है। 360 डिग्री पर प्रोजेक्शन की मदद से 2001 में आए भूकंप की अनुभूति की जा सकती है। संग्रहालय में कुल 8 ब्लॉक हैं, जिन्हें पुनर्जन्म, पुनः खोज, पुनर्स्थापना, पुनर्निर्माण, पुनर्विचार, पुनर्जीवन और नवीनीकरण नाम दिया गया है। यहां ऐतिहासिक हड़प्पा सभ्यता की बस्तियों, भूकंप से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी, गुजरात की कला और संस्कृति, चक्रवात का विज्ञान, रियल टाइम आपातकालीन स्थिति के संबंध में कंट्रोल रूम द्वारा सलाह एवं सुझाव और भूकंप के बाद भुज की सफलता गाथाओं एवं राज्य की विकास यात्रा को वर्कशॉप एवं प्रेजेंटेशन के माध्यम से दर्शाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Jan 2023 20:51:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : सेना पर देश की रक्षा कर रहे जवानों के लिए राखी लेकर जाएंगी पांच लड़कियां</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षाबंधन के नजदीक आने के साथ ही देश की बेटियां हर साल देश के जवानों की रक्षा के लिए राखी भेजती है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/75709/surat-five-girls-will-carry-rakhi-for-the-soldiers-who-are-protecting-the-country-on-the-army"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-08/6709_rakhi-loktej1.jpg" alt=""></a><br /><div>देश भर में आजादी के 75 साल पूरे होने पर 75वां 'आजादी का अमृत महोत्सव' चल रहा है, ऐसे में पूरे राज्य में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। हर घर में तिरंगा फहराने की भी योजना बनाई जा रही है। रक्षाबंधन के नजदीक आने के साथ ही देश की बेटियां हर साल देश के जवानों की रक्षा के लिए राखी भेजती है। फिर इस बार सूरत से 5 लड़कियां बाइक से नडाबेट के लिए निकली हैं।</div><div>आपको बता दें कि सूरत की 5 युवतियां 'एक राखी सैनिकों के नाम' के मकसद से नडाबेट के लिए रवाना हुई हैं। ये लड़कियां सूरत से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के जरिए कच्छ के नडाबेट पहुंचेगी। इस बीच रास्ते के गांवों और कस्बों में 'हर घर तिरंगा' के हिस्से के रूप में तिरंगा वितरित भी किया जायेगा।</div><div>गौरतलब है कि देश के 75वें 'आजादी का अमृत महोत्सव' के अंतर्गत अगली तिथि देशभर में आयोजित की जाएगी। 13 से 15 अगस्त तक 'हर घर तिरंगा अभियान' शुरू किया गया है। जिसे पूरे गुजरात में काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। कुछ दिन पहले बनासकांठा जिले में भी 'हर घर तिरंगा अभियान' के तहत लोगों में काफी उत्साह और देशभक्ति देखने को मिली थी. उस समय जिले के सीमावर्ती क्षेत्र और पर्यटन केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले नडाबेट में 'हर घर तिरंगा अभियान' मनाने का अच्छा माहौल देखा जा रहा है। नडाबेट सीमा पर भारतीय सेना के हाथों में एक बान और शान का राष्ट्रीय तिरंगा लहराता हुआ दिखाई दे रहा है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Aug 2022 20:00:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कच्छ : एक मामूली बात पर छोटे भाई ने बड़े भाई की हत्या की</title>
                                    <description><![CDATA[<div>कच्छ के रापर में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। रापर में एक भाई ने दूसरे भाई की हत्या कर दी है। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार एक मामूली सी बात पर छोटे भाई ने बड़े भाई की हत्या कर लाश को कुएं में फेंक दिया।</div><div>घटना के विवरण के अनुसार, पुलिस सूत्रों के अनुसार, रापर तालुका के किदियानगर के एकतानगर के 50 वर्षीय ऊंट पालक रायमलभाई शानाभाई रबारी ने अपनी बेटी की शादी लोद्रानी में अपने छोटे भाई आरोपी नीलाभाई से की थी। लेकिन चूंकि वह अपनी बेटी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>कच्छ के रापर में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। रापर में एक भाई ने दूसरे भाई की हत्या कर दी है। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार एक मामूली सी बात पर छोटे भाई ने बड़े भाई की हत्या कर लाश को कुएं में फेंक दिया।</div><div>घटना के विवरण के अनुसार, पुलिस सूत्रों के अनुसार, रापर तालुका के किदियानगर के एकतानगर के 50 वर्षीय ऊंट पालक रायमलभाई शानाभाई रबारी ने अपनी बेटी की शादी लोद्रानी में अपने छोटे भाई आरोपी नीलाभाई से की थी। लेकिन चूंकि वह अपनी बेटी को ससुर के पास वापस भेजने में देरी कर रहा था, इसलिए दोनों भाइयों के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे।  अंतत: ऊबे हुए छोटे भाई ने बड़े भाई को मार डाला और लाश को कुएं में फेंक दिया।  फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। रायमलभाई की पत्नी की 11 महीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी। अपनी पत्नी की मृत्यु के कारण, वह बच्चों की देखभाल के लिए अपनी बेटी सीता को अपने ससुर के पास लौटने में देरी कर रहा था। वहीं दूसरी ओर, छोटा भाई अपने बड़े भाई को बेटी को उसके ससुर भेजने के लिए लगातार बोलता रहता था।</div><div>आखिर इस बात से कंटाल कर छोटे भाई ने बड़े भाई की हत्या कर दी। इसके बाद भाई भाई का शव पास के कुएं में फैंक दिया।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/68914/kutch-younger-brother-killed-elder-brother-over-a-minor-issue</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 10:59:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : केंद्र सरकार के गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध से कांडला बंदरगाह पर गेहूं की हजारों ट्रक फंसी</title>
                                    <description><![CDATA[13 मई को डीजीएफटी ने देश और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में गेहूं की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर भारत में तत्काल प्रभाव से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया। फरवरी के अंत में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद काला सागर क्षेत्र से निर्यात में गिरावट के कारण वैश्विक खरीदारों ने गेहूं की आपूर्ति के लिए भारत की ओर रुख करने के बाद से कई देशों में गेहूं की कीमतें आसमान छू गई हैं। ऐसे में हाल ही में गेहूं के निर्यात में विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले कांडला दीनदयाल बंदरगाह पर हजारों ट्रकों में लाखों मीट्रिक टन गेहूं फंस गया है जिससे बंदरगाह के बाहर लंबा ट्रैफिक जाम हो गया।</div><div>कांडला बंदरगाह के अंदर और बाहर डीपीए अनुमानित 20 लाख टन गेहूं के निर्यात की प्रतीक्षा कर रहा है। 13 मई को डीजीएफटी ने देश और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में गेहूं की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। चार दिनों से बर्थ, जहाज और लोडिंग के ठप होने से निर्यातकों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और हजारों ट्रक इंतजार कर रहे हैं।</div><div>कांडला बंदरगाह पर लगभग 5 जहाजों पर लंगर डाला गया था और कस्टम लोडिंग ने नए सर्कुलर के कार्यान्वयन को रोक दिया। जिसे कल शाम दो जहाजों में लोड करना फिर से शुरू हुआ। कल शाम जारी एक सर्कुलर के अनुसार सीमा शुल्क निरीक्षण के अनुसार उन्हीं सामानों को लोड करने की अनुमति दी गई है. पांच जहाजों में से लगभग 0.80 मीट्रिक टन वर्तमान में बंदरगाह के अंदर हैं। और इसका निरीक्षण किया गया है इसलिए इस मात्रा का निर्यात किया जाएगा लेकिन बंदरगाह के बाहर और जिन ट्रकों का निरीक्षण नहीं किया गया है उनमें 12 से 16 लाख मीट्रिक टन माल का निर्यात बंद हो जाएगा।</div><div>सर्कुलर के बाद गेहूं की लोडिंग शुरू हो गई है लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में बंदरगाह से बाहर पड़ा हुआ है जिसका भविष्य अंधकारमय हो गया है। निर्यातकों, परिवहन आदि की स्थिति भी खराब हुई है। एक ओर गोदाम का किराया देना होगा और दूसरी ओर यदि यह राशि राज्य को वापस भेजी जाती है तो परिवहन किराया भी देना होगा। गांधीधाम शहर और तालुका के आसपास के 75% गोदामों में गेहूं भरा गया है। अगर इतनी मात्रा में गेहूं सड़ने लगे तो यह एक और बड़ी समस्या खड़ी कर देगा और निर्यातकों को करोड़ों का नुकसान होगा।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/68858/gujarat-thousands-of-trucks-of-wheat-stuck-at-kandla-port-due-to-ban-on-export-of-wheat-by-the-central-government</link>
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                <pubDate>Thu, 19 May 2022 08:59:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कच्छ : गुजरात में पहली बार कैमरे में कैद हुआ ये दुर्लभ ‘शाकाहारी’ समुद्री जीव</title>
                                    <description><![CDATA[पूरी तरह से शाकाहारी डुगोंग नाम का ये समुद्री जीव एक लुप्तप्राय प्रजाति, भारत में लगभग 200 जीवित डगोंग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>समुद्री पारिस्थितिकी विविधता से भरी है। लेकिन इस विविधता में एक ही प्राणी है जो पूरी तरह से शाकाहारी है। डुगोंग नाम के इस समुद्री जीव को अत्यंत दुर्लभ माना जाता है क्योंकि यह एक लुप्तप्राय प्रजाति है। जबकि भारत में इस समुद्री गाय की आबादी बहुत कम है, सरकार द्वारा इसके प्रजनन के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। गुजरात में पहली बार डुगोंग का अस्तित्व कैमरे में कैद हुआ है। कच्छ की खाड़ी में समुद्री शोधकर्ताओं की कड़ी मेहनत के बाद ये दुर्लभ तस्वीरें सामने आई हैं।</div><div>आपको बता दें कि डगोंग एकमात्र शाकाहारी समुद्री स्तनपायी है जो पूरी तरह से समुद्री शैवाल पर निर्भर है। मछली पकड़ने के अत्यधिक दबाव और अन्य तटीय विकास गतिविधियों के परिणामस्वरूप, भारत में समुद्री घास के आवास घट रहे हैं। और उसके कारण डुगोंग की आबादी घट रही है। डुगोंग अनुसूची 1, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है। डुगोंग समुद्री आवासों, विशेष रूप से समुद्री घास पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने में एक मौलिक पारिस्थितिक भूमिका निभाता है।</div><div>भारत में 2016 से भारतीय वन्यजीव संस्थान, कैम्पा और मोइएफसीसी के एकीकृत भागीदारी दृष्टिकोण के माध्यम से इस दुर्लभ समुद्री गाय की प्रजाति और उसके आवास को बचाएं रखने के लिए भारतीय तट के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में, तमिलनाडु में मुन्नार की खाड़ी और पाल्क खाड़ी के साथ साथ गुजरात के कच्छ में काम चल रहा है। वर्तमान में भारत में लगभग 200 जीवित डगोंग हैं, जिनमें से गुजरात के तट पर डुगोंग की आबादी बहुत कम है।</div><div>गुजरात वन विभाग के सक्रिय सहयोग से भारतीय वन्यजीव संस्थान के डॉ. जे.ए. जॉनसन एंड पांडिचेरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. के. शिवकुमार के मार्गदर्शन में, समिहा पठान, सागर राजपुरकर, शिवानी पटेल, प्राची हटकर, क्रिश्चियन और उजैर कुरैशी जैसे शोधकर्ता डूंगर के जीव विज्ञान, उसके आवास और निगरानी को समझने और खाड़ी में इस उल्लेखनीय प्रजाति के लिए संरक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए काम कर रहे हैं। अतीत में शोधकर्ताओं ने कच्छ की खाड़ी के कुछ संरक्षित हिस्सों में फीडिंग ट्रेल्स के माध्यम से अपने अप्रत्यक्ष सबूत पाए हैं। इसके अलावा 2018 में, मृत डुगोंग स्ट्रैंडिंग के अस्तित्व ने उनके अस्तित्व की पुष्टि की। इसके अलावा, मछुआरों के एक सर्वेक्षण से पता चला कि क्षेत्र में डगोंग देखे गए थे। लेकिन इससे पहले गुजरात के तट पर डुगोंग के जीवित रहने का कोई फोटोग्राफिक सबूत नहीं मिला था।</div><div>शोधकर्ता सागर राजपुरकर ने हाल ही में एक सर्वेक्षण के दौरान, गुजरात वन विभाग के सहयोग से पहली बार ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए कच्छ की खाड़ी में अपने प्राकृतिक आवास में पहला जीवित डुगोंग दर्ज किया। ये हवाई ड्रोन छवियां डुगोंग आबादी के आंदोलनों और पारिस्थितिकी के साथ-साथ कच्छ की खाड़ी में डुगोंग आवास और इसकी आबादी के आकार को जानने के लिए प्रबंधन कार्य योजना को समझने में मदद करेंगी।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/68850/kutch-this-rare-vegetarian-sea-creature-was-caught-on-camera-for-the-first-time-in-gujarat</link>
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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 14:59:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कच्छ : अंतिम शासक की पत्नी ने पूरी की उनकी अंतिम इच्छा, चडवा रखाल में बनवाया माताजी का मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर भुज से 25 किमी दूर चडवा राखल जंगल में बना है और 12000 एकड़ में फैला है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>ऐतिहासिक धरोहर वाले कच्छ के सीमावर्ती जिले में तीर्थ स्थल के रूप में एक और स्थान जुड़ गया है। कच्छ के शाही परिवार द्वारा 7.5 करोड़ रुपये की लागत से चडवा राखाल में प्रवासंधम के समान 51 शक्तिपीठों के साथ मोमाया माताजी के मंदिर का निर्माण किया गया था। जिसकी प्राण प्रतिष्ठा आज विधि विधान से सम्पन्न हुई। कच्छ के अंतिम शासक, महाराजा प्रगमलजी तृतीय ने माताजी के मंदिर का निर्माण करने का फैसला किया और वर्ष 2017 में इसका निर्माण शुरू किया, जो महारानी प्रीतिदेवीबा के मार्गदर्शन में साढ़े चार साल की अवधि में पूरा हुआ।</div><div>कच्छ के अंतिम शासक, महाराजा प्रगमलजी तृतीय, भुज तालुका में समात्रा गांव के पास चडवा राखल में श्री महामाया माताजी का एक शानदार मंदिर बनाना चाहते थे। उन्होंने खुद मंदिर डिजाइन करने का काम शुरू किया और उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी उनकी इच्छा पूरी कर रही हैं। साथ ही लोग इस मंदिर के प्रांगण में स्थित 51 शक्तिपीठों के दर्शन कर सकेंगे।</div><div>आपको बता कि मंदिर भुज से 25 किमी दूर चडवा राखल जंगल में बना है और 12000 एकड़ में फैला है। मंदिर में श्री मोमाई माताजी, श्री त्रिपुर सुंदरी माताजी, श्री हिंगलाज माताजी, श्री कालिका माताजी, श्री रुद्रानी माताजी की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और खाने की भी व्यवस्था होगी। इसलिए निकट भविष्य में इस धार्मिक स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए उधन सहित आयामों का निर्माण किया जाएगा। 7.50 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बने 51 शक्तिपीठ मंदिर के आसपास के 51 छोटे मंदिरों में देखे जाएंगे। कच्छ के शाही परिवार द्वारा निर्माणाधीन इस मंदिर की प्रतिष्ठा में गुजरात के विभिन्न शाही परिवारों के साथ त्रिपुरा, गोंडल और जयपुर के शाही परिवार भी मौजूद थे।</div><div>उल्लेखनीय है कि यहां पांच देवी और 51 शक्तिपीठों सहित अर्धनारीश्वर का मंदिर भी बनाया गया है। वहीं, मंदिर के तल पर एक ध्यान केंद्र स्थापित किया गया है। तो कच्छ के राजशाही इतिहास में कच्छ की साम्राज्ञियों द्वारा कई मंदिरों का निर्माण किया गया है। कच्छ राज्य के भुज शहर को अपना निवास स्थान और प्रशासन बनाने वाले शाही परिवारों के कई ऐतिहासिक स्मारक आज भी यहां मौजूद हैं। पूरे कच्छ में महलों का निर्माण करने वाले शासकों के अलावा यहां की साम्राज्ञियों ने भी कई मंदिरों का निर्माण कराया है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/68838/kutch-the-wife-of-the-last-ruler-fulfilled-her-last-wish-built-mataji-s-temple-in-chadwa-rakhal</link>
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                <pubDate>Sun, 15 May 2022 12:31:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : इस शख्स ने जेल में पूरी की अपनी पढ़ाई, डिप्लोमा-पोस्ट डिप्लोमा सहित पास किये 20 सर्टिफिकेट कोर्स</title>
                                    <description><![CDATA[1990 के दशक में रापर के सुरबावांध मर्डर केस के एक मुख्य आरोपी नरसिम्हाभाई कारावास के समय को खुद को बेहतर बनाते हुए बिताया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/68744/gujarat-this-person-completed-his-studies-in-jail-passed-20-certificate-courses-including-diploma-post-diploma"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/1949_image.jpg" alt=""></a><br /><div>ऐसा माना जाता हैं कि पढ़ाई ही एक ऐसा हथियार हैं जिसके सहारे समाज में से अपराध और आपराधिक मानसिकता वाले लोगों के अंदर से ये बुरे ख़त्म की जा सकती हैं. कारागार एक ऐसी जगह है जहां समय के साथ सबसे जिद्दी व्यक्ति भी हिम्मत हार जाता है। पहली नजर में गलत लगने वाली यहीं जेल अपराधिक लोगों के लिए सबसे बड़ा सुधार केंद्र बनी हुई है। ऐसा ही मामला कच्छ से सामने आया हैं जहाँ के एक जेल में एक 40 वर्षीय अपराधी ने ना सिर्फ अपराध से मुंह मोड़ लिया बल्कि अपने आप को सुधारने की दिशा में एक कदम उठाया हैं. कच्छ के एक जेल में बंद नरसिम्हाभाई ने अपने जीवन के 21 साल जेल में बिताए, इस दौरान उन्होंने जेल से ही अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की और विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 20 सर्टिफिकेट कोर्स के साथ-साथ एक डिप्लोमा और एक पोस्ट-ग्रेजुएशन डिप्लोमा भी पूरा किया। आज यह व्यक्ति अपने अपराध की सजा पाकर एक सज्जन व्यक्ति के रूप में समाज में रहता है। जेल से आने के बाद नरसिंह में आये परिवर्तन के बाद हम एक बार में ये नहीं मान सकते कि यह व्यक्ति अब तक के सबसे बड़े कच्छ हत्याकांड कच्छ सुरबावांध मर्डर केस के आरोपियों में से एक था।</div><div>आपको बता दें कि भुज की पलारा स्पेशल जेल एक कैदी पुनर्वास केंद्र के रूप में कार्य कर रही है। इसका प्रमाण ये हैं कि कच्छ सुरबावांध हत्याकांड का एक आरोपी। 1990 के दशक में रापर के सुरबावांध मर्डर केस में दो अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच झड़पों में नौ लोग मारे गए थे, जिसके बाद 16 आरोपियों को 20 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में सभी आरोपियों की शेष सजा को कम करने के बाद सर्वेक्षण के आरोपियों को जमानत दे दी गई थी।</div><div>इन तमाम आरोपियों में से एक, नरसिम्हा मकवाना ने अपने 20 साल के कारावास के दौरान आध्यात्मिकता और कौशल सहित अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों में 20 डिग्री प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए समय का अच्छा उपयोग किया। अपनी सजा से पहले, वह भुज के ललन कॉलेज में बीए के प्रथम वर्ष में पढ़ रहे थे। उनके स्वीकार करने के कुछ समय बाद, अदालत ने सुरबवंध घटना में शामिल नरसिम्हा <span style="font-size:1rem;">सहित लगभग 20 लोगों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। उन्होंने एक ओपन विश्वविद्यालय के माध्यम से जेल में अधूरी स्नातक की डिग्री पूरी की, साथ ही आध्यात्मिकता में डिप्लोमा और स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी पूरा किया। उन्हें हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की राहत के चलते पलारा जेल से रिहा किया गया है। जिस समय उसने अपनी कैद पूरी की, उसके पास लगभग 20 अलग-अलग पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र थे।</span></div><div>नरसिम्हा मकवाना ने C.C.C., CIC, CIG, CDM, CAFE, CTS, CDM, CHR, CES, CPSC, सर्टिफिकेट इन गाइडेंस, सर्टिफिकेट इन एचआईवी एंड फैमिली एजुकेशन, नेशनल सर्टिफिकेट इन मॉड्यूलर एम्प्लॉयबल स्किल, कंप्यूटर फंडामेंटल्स, MS जैसे विषयों में परीक्षा उत्तीर्ण की है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 19:01:01 +0530</pubDate>
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                <title>कच्छ के निलंबित पुलिसकर्मियों के सपोर्ट में आई ये अभिनेत्री, कही बड़ी बात</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में कच्छ के चार पुलिसकर्मियों का वर्दी में एक फ़िल्मी गाने पर मस्ती करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/68261/this-actress-came-in-support-of-the-suspended-policemen-of-kutch-said-a-big-thing"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/5934_1.jpg" alt=""></a><br /><div>हाल ही में पूर्वी कच्छ से एक पुलिस वैन में यात्रा करते समय संगीत पर नृत्य करते हुए पुलिसकर्मियों के वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। पुलिसकर्मियों का वीडियो वायरल होने के बाद पूर्वी कच्छ के एसपी ने तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। अब इस मामले में अब एक जानकारी सामने आई है। बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन पुलिस की मदद के लिए सामने आई हैं।</div><div>आपको बता दें कि मशहूर अभिनेत्री रवीना टंडन ने ट्वीट किया है कि इन तीनों गांधीधाम पुलिसकर्मियों की सजा को खत्म कर देना चाहिए। प्रसिद्ध अभिनेत्री रवीना टंडन ने गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में एक पुराने हिंदी गाने पर नाचते हुए वायु सेना के जवानों का एक वीडियो साझा किया है और टिप्पणी की है कि तीन पुलिसकर्मियों को माफ कर दिया जाना चाहिए।</div><div>रवीना टंडन से पहले छत्तीसगढ़ के आईपीएस और परिवहन आयुक्त दीपांशु काबरा ने भी निलंबित कच्छ पुलिसकर्मियों को सजा न देने की बात कही थी। अब दिग्गज बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों के बाद पुराने हिंदी गीतों के एक बैंड पर नाचते हुए वायु सेना के एक जवान की सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए कहा, "पुलिसवालों को माफ कर देना चाहिए कि, वो भी एक आदमी है। निलंबित जवानों को दोबारा ऐसा न करने का निर्देश दिया जाए। आगे रवीना ने ये भी लिखा कि हमारे जवानों को भी रिलैक्स होने की जरूरत है।</div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">So good to see the band do a chilled out rendition of a70s hit,and let themselves go! They are human too!Way to go boys!let the naysayers go hang themselves!Wish the cops who were suspended in Kutch,are let off with a”don’t do it again”.Our boys also need to destress at times!♥️ <a href="https://t.co/99Dlu4aJ8C">https://t.co/99Dlu4aJ8C</a></p>— Raveena Tandon (@TandonRaveena) <a href="https://twitter.com/TandonRaveena/status/1485188524467191811?ref_src=twsrc%5Etfw">January 23, 2022</a></blockquote> <div>बता दें कि हाल ही में कच्छ के चार पुलिसकर्मियों का वर्दी में एक फ़िल्मी गाने पर मस्ती करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में कच्छ के गांधीधाम ए-डिवीजन थाने में ड्यूटी पर तैनात जगदीश खेताभाई सोलंकी, राजा महेंद्र हीरागर और हरेश ईश्वरभाई चौधरी ने वर्दी में होते हुए भी अपनी सीट बेल्ट नहीं बांधी थी। पूर्वी कच्छ के एसपी मयूर पाटिल द्वारा यह पता चलने के बाद कि उन्होंने अपनी सीट बेल्ट नहीं बांधकर यातायात नियमों का उल्लंघन किया है, ड्यूटी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jan 2022 13:51:42 +0530</pubDate>
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                <title>कहानी बनासकांठा के एक ऐसे गैर-सैनिक शख़्स की जिसने अंतिम समय तक अपनी सरजमीं की सेवा की</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान एक नहीं बल्कि दो बार भारतीय सेना की मदद करके पाकिस्तान पर दिलाई जीत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80072/the-story-of-a-non-military-man-from-banaskantha-who-served-his-land-till-the-last"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-08/3994_1.jpg" alt=""></a><br /><div>स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के दौरान 1971 के भारत विजय के इतिहास को दर्शाने वाली अजय देवगन की फिल्म 'भुज: प्राइड ऑफ इंडिया' 13 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। गुजरात के बनासकांठा के सीमावर्ती इलाकों में आज भी 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान की लड़ाई के समय सुई गांव के एक योद्धा रणछोड़दास रबारी उर्फ पागी को युद्धों में सेना की मदद करने और पाकिस्तान पर कब्जा करने में उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है। है। भुज: प्राइड ऑफ इंडिया, 1971 के युद्ध की घटनाओं को दर्शाती एक हिंदी फिल्म, बनास के लोगों के लिए गर्व का स्रोत है।</div><div>हम बात कर रहे हैं एक ऐसे हीरो की जिसने हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान के खिलाफ एक नहीं बल्कि दो बार जंग जीतने में अहम भूमिका निभाई। वो हीरो हैं रणछोड़भाई रबारी उर्फ पागी। रणछोड़ रबारी, उर्फ़ पगिना ने कई बार भारतीय सेना की मदद की। युद्ध के दौरान जब सेना के पास गोला-बारूद ख़त्म हो गया था तो रणछोड़ रबारी ने एक ऊंट पर गोला-बारूद लाकर सेना की मदद की। पागी यानी 'मार्गदर्शक', वो व्यक्ति जो रेगिस्तान में रास्ता दिखाए। 'रणछोड़दास रबारी' को जनरल सैम मानिक शॉ इसी नाम से बुलाते थे। गुजरात के बनासकांठा ज़िले के पाकिस्तान सीमा से सटे गाँव पेथापुर गथड़ों के थे रणछोड़दास। भेड़, बकरी व ऊँट पालन का काम करते थे। जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें 58 वर्ष की आयु में बनासकांठा के पुलिस अधीक्षक वनराज सिंह झाला ने उन्हें पुलिस के मार्गदर्शक के रूप में रख लिया। हुनर इतना कि ऊँट के पैरों के निशान देखकर बता देते थे कि उस पर कितने आदमी सवार हैं। इन्सानी पैरों के निशान देखकर वज़न से लेकर उम्र तक का अन्दाज़ा लगा लेते थे। कितनी देर पहले का निशान है तथा कितनी दूर तक गया होगा सब एकदम सटीक आँकलन जैसे कोई कम्प्यूटर गणना कर रहा हो।</div><div>उन्होंने गांव में चौकीदार के रूप में अपना काम शुरू किया। चूँकि उनके पास उस समय पैरों के निशान पहचानने की अद्भुत कला थी, इसलिए उन्होंने यहाँ कई चोरी को सुलझाया। इसके बाद 1962 में, उन्हें पुलिस विभाग में नियुक्त किया गया था। भारतीय सेना को भी उनकी कला के बारे में पता चला। उस समय 1965 के युद्ध में भी जब पाकिस्तानी सेना विघाकोट आई थी तो रणछोड़ पागी ने मरुभूमि में भूली हुई सेना की बहुत मदद की और पाकिस्तानी सेना में कितने लोग हैं और वे कहां छिपे हैं, इसकी भी पूरी जानकारी दी। .</div><div>इसके अलावा 1971 के युद्ध के दौरान, भारतीय सैनिकों ने भारतीय सेना को समय पर ऊंटों द्वारा गोला-बारूद पहुंचाकर धोरा और भलवा स्टेशनों पर कब्जा कर लिया। भारतीय सेना ने अंततः 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान पर विजय प्राप्त की। पाकिस्तान में तीन पुलिसकर्मियों को मार कर बैरक में लौटने के बाद पाकिस्तान को बार-बार धूल चटाने में माहिर रणछोड़ रबारी ने रु. पचास हजार के इनाम की भी घोषणा की गई। इस प्रकार, सुइगाम पुलिस स्टेशन को जंबाज रणछोड़ रबारी के रूप में  एक मुखबिर, एक पथप्रदर्शक, रेगिस्तान का एक जमींदार, चोरों और घुसपैठियों के लिए संकट और सीमा पार पाकिस्तानियों की आवाजाही की सटीक जानकारी देने वाला विश्वसनीय सूत्र मिल गया था।</div><div>रणछोड़ पागी के पोते विष्णु रबारी ने कहा कि पुलिस अक्सर दादा रणछोड़भाई सावाभाई रबारी के आदमी, जानवरों और पक्षियों के कदमों की पहचान करने में उनकी कुशलता के कारण उनसे मदद मांगते थे। 1962 में, डीवाईएसपी वनराज जाला साहब ने पाकिस्तान के एक निजी काम में रणछोड़भाई की मदद लेनी पड़ी। वहीं पुलिस को रेगिस्तान में होने वाली घटनाओं को समझने के लिए पागी की बहुत जरूरत थी। 1965 युद्ध की आरम्भ में पाकिस्तान सेना ने भारत के गुजरात में कच्छ सीमा स्थित विधकोट पर कब्ज़ा कर लिया, इस मुठभेड़ में लगभग 100 भारतीय सैनिक हत हो गये थे तथा भारतीय सेना की एक 10000 सैनिकोंवाली टुकड़ी को तीन दिन में छारकोट पहुँचना आवश्यक था। तब आवश्यकता पड़ी थी पहली बार रणछोडदास पागी की! रेगिस्तानी रास्तों पर अपनी पकड़ की बदौलत उन्होंने सेना को तय समय से 12 घण्टे पहले मञ्ज़िल तक पहुँचा दिया था। सेना के मार्गदर्शन के लिए उन्हें सैम साहब ने खुद चुना था तथा सेना में एक विशेष पद सृजित किया गया था 'पागी' अर्थात पग अथवा पैरों का जानकार। भारतीय सीमा में छिपे 1200 पाकिस्तानी सैनिकों की लोकेशन तथा अनुमानित संख्या केवल उनके पदचिह्नों से पता कर भारतीय सेना को बता दी थी, तथा इतना काफ़ी था भारतीय सेना के लिए वो मोर्चा जीतने के लिए।</div><div><br /></div><div>1971 युद्ध में सेना के मार्गदर्शन के साथ-साथ अग्रिम मोर्चे तक गोला-बारूद पहुँचवाना भी पागी के काम का हिस्सा था। पाकिस्तान के पालीनगर शहर पर जो भारतीय तिरंगा फहरा था उस जीत में पागी की भूमिका अहम थी। सैम साब ने स्वयं ₹300 का नक़द पुरस्कार अपनी जेब से दिया था। 1971 के युद्ध में रणछोड़भाई पागी बोरियाबेट से ऊंट पर सवार होकर पाकिस्तान गए और धोरा इलाके में पाकिस्तानी सेना के छिपे होने की जानकारी भारतीय सेना को दी। इसलिए भारतीय सैनिकों ने धोरा पर चढ़ाई की और हमला किया। भारतीय सैनिकों के काफिले के सामने दोपहर के तुरंत बाद बमवर्षक मारा गया। ताकि भारतीय सेना की 50 किमी. एक अन्य दूर के शिविर से, रणछोड़ पागी एक ऊंट पर गोला-बारूद लाकर सेना को सौंप दिया। जब रणछोड़भाई समय पर गोला-बारूद पहुंचा रहे थे, भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने धोरा और भलवा स्टेशनों पर कब्जा कर लिया। हालांकि, ऊंट को समय पर गोला बारूद पहुंचाकर भारत-पाकिस्तान दोनों युद्धों में भारतीय सेना की मदद के दौरान रणछोड़भाई राबारी खुद घायल हो गए थे। </div><div>27 जून 2008 को सैम मानिक शॉ की मृत्यु हुई तथा 2009 में पागी ने भी सेना से 'स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति' ले ली। तब पागी की उम्र 108 वर्ष थी ! जी हाँ, आपने सही पढ़ा... 108 वर्ष की उम्र में 'स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति'! सन् 2013 में 112 वर्ष की आयु में पागी का निधन हो गया।</div><iframe src="https://www.facebook.com/plugins/post.php?href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2Fkathaankan%2Fposts%2F1752961534843263&amp;show_text=true&amp;width=500" width="500" height="671" style="border:none;" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe><div>रणछोड़भाई के 31 साल 2 महीने और 26 दिनों के सफल प्रदर्शन की मान्यता में, भारतीय सेना द्वारा तीन पदक प्रदान किए गए, जिनमें संग्राम सेवा पदक, मेरिटोरियम सेवा के लिए पुलिस पदक भारतीय पुलिस पदक और ग्रीष्मकालीन सेवा स्टार शामिल हैं।  इसके अलावा बी.एस.एफ. स्तंभ संख्या 990 पर रणछोड़ दास बी.ओ.पी. पूरी चौकी को खड़ा कर दिया गया है, वहीं उनकी प्रतिमा भी स्थापित कर दी गई है। रणछोड़भाई रबारी का 18 जनवरी 2013 को निधन हो गया। उनकी दो अंतिम इच्छाएं पूरी हुईं। उनकी इच्छा थी कि उनके शव के सिर पर पगड़ी रखी जाए और दाह संस्कार केवल खेत में ही किया जाए। दोनों की इच्छा के अनुसार गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम संस्कार किया गया।</div><div>युवा इतिहासकार प्रो. प्रकाश सुथार ने कहा कि इतिहास को देखने से ऐसा लगता है कि भारत-पाकिस्तान युद्ध 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान द्वारा भारत के विभिन्न शहरों पर हवाई हमले शुरू करने के बाद शुरू हुआ और केवल 13 दिनों तक चला। 16 दिसंबर को भारत की जीत हो गई। 1965 और 1971 के दोनों युद्धों में अहम भूमिका निभाने वाले सुई और बनासरत्न के सीमावर्ती गांव के योद्धा रणशोधभाई पागी का अहम योगदान रहा है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 12 Aug 2021 19:30:55 +0530</pubDate>
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