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                <description>Food RSS Feed</description>
                
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                <title>क्या आप भी महसूस करते हैं लगातार थकान? सावधान! ये हो सकती है प्रोटीन की कमी; जानें शरीर के ये गुप्त संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रोटीन हमारे शरीर के लिए केवल एक पोषक तत्व नहीं, बल्कि वह आधार है जिस पर हमारी पूरी शारीरिक संरचना टिकी है। मांसपेशियों के निर्माण से लेकर हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने तक, प्रोटीन हर स्तर पर अनिवार्य है। हालांकि, अक्सर लोग कैलोरी और फैट गिनने के चक्कर में पर्याप्त प्रोटीन लेना भूल जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप शरीर कई तरह के चेतावनी संकेत देने लगता है।</p>
<p>प्रोटीन की कमी केवल गंभीर कुपोषण का मामला नहीं है, बल्कि यह आधुनिक जीवनशैली में एक आम समस्या बनती जा रही है। इन रिपोर्टों में विशेषज्ञों ने उन 9</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>प्रोटीन हमारे शरीर के लिए केवल एक पोषक तत्व नहीं, बल्कि वह आधार है जिस पर हमारी पूरी शारीरिक संरचना टिकी है। मांसपेशियों के निर्माण से लेकर हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने तक, प्रोटीन हर स्तर पर अनिवार्य है। हालांकि, अक्सर लोग कैलोरी और फैट गिनने के चक्कर में पर्याप्त प्रोटीन लेना भूल जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप शरीर कई तरह के चेतावनी संकेत देने लगता है।</p>
<p>प्रोटीन की कमी केवल गंभीर कुपोषण का मामला नहीं है, बल्कि यह आधुनिक जीवनशैली में एक आम समस्या बनती जा रही है। इन रिपोर्टों में विशेषज्ञों ने उन 9 प्रमुख लक्षणों की पहचान की है जो यह दर्शाते हैं कि आपका शरीर पर्याप्त प्रोटीन न मिलने के कारण संघर्ष कर रहा है।</p>
<p><strong>मांसपेशियों और हड्डियों पर असर</strong></p>
<p>जब शरीर को डाइट से पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मांसपेशियों (Muscles) से प्रोटीन लेना शुरू कर देता है। इससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और शरीर की बनावट बिगड़ने लगती है। इसके अलावा, प्रोटीन की कमी से हड्डियों का घनत्व (Density) कम हो जाता है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा काफी बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>बाहरी सुंदरता और त्वचा की समस्याएं</strong></p>
<p>प्रोटीन की कमी का सबसे पहला असर आपकी त्वचा, बाल और नाखूनों पर दिखता है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रोटीन की कमी से बाल पतले होकर झड़ने लगते हैं, नाखून कमजोर होकर टूटने लगते हैं और त्वचा रूखी होकर फटने लगती है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर के बाहरी ऊतकों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है।</p>
<p><strong>एडिमा और फैटी लिवर का खतरा</strong></p>
<p>एक गंभीर लक्षण 'एडिमा' है, जिसमें रक्त में एल्ब्यूमिन प्रोटीन की कमी के कारण पैरों, हाथों और पेट में तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे सूजन आ जाती है। इसके अलावा, प्रोटीन की कमी से लिवर की कोशिकाओं में वसा (फैट) जमा होने लगता है, जिसे 'फैटी लिवर' कहा जाता है। यदि इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह लिवर की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।</p>
<p><strong>भूख, थकान और कमजोर इम्यूनिटी</strong></p>
<p>क्या आपको बार-बार भूख लगती है या मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है? यह भी प्रोटीन की कमी का एक संकेत हो सकता है, क्योंकि प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। इसके साथ ही, लगातार थकान महसूस होना और बार-बार बीमार पड़ना यह दर्शाता है कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर हो गई है। प्रोटीन की कमी से घाव भरने में भी सामान्य से अधिक समय लगता है।</p>
<p>विशेषज्ञों का सुझाव है कि बच्चों के शारीरिक विकास और वयस्कों की कार्यक्षमता के लिए प्रोटीन अनिवार्य है। एक औसत वयस्क को अपने वजन के प्रति किलोग्राम पर कम से कम 0.8 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। अपनी डाइट में दालें, अंडे, डेयरी उत्पाद, मांस और नट्स जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करके इन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 18:57:43 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी करेंगे ‘वर्ल्ड फुड इंडिया’ का उद्घाटान, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 सितंबर को ‘वर्ल्ड फूड इंडिया’ के चौथे संस्करण का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य घरेलू खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अधिक निवेश आकर्षित करना और भारत को खाद्य क्षेत्र में नवोन्मेष के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।</p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस आयोजन में रूस के उप-प्रधानमंत्री दिमित्री पत्रिशेव के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (सड़क परिवहन), चिराग पासवान (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) और राज्यमंत्री (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) रवनीत सिंह बिट्टू भी भाग लेंगे।</p>
<p>पासवान ने इस आयोजन के बारे में संवाददाताओं को जानकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143218/modi-will-do-world-food-india-inaugurated-on-increasing-investment"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/india-food-indian-meal-thali-roti-chapati-punjabi.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 सितंबर को ‘वर्ल्ड फूड इंडिया’ के चौथे संस्करण का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य घरेलू खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अधिक निवेश आकर्षित करना और भारत को खाद्य क्षेत्र में नवोन्मेष के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।</p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस आयोजन में रूस के उप-प्रधानमंत्री दिमित्री पत्रिशेव के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (सड़क परिवहन), चिराग पासवान (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) और राज्यमंत्री (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) रवनीत सिंह बिट्टू भी भाग लेंगे।</p>
<p>पासवान ने इस आयोजन के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा, ‘‘वर्ल्ड फूड इंडिया केवल एक व्यापार प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि भारत को खाद्य नवोन्मेष, निवेश और पर्यावरण अनुकूल उपायों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का एक परिवर्तनकारी मंच है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार को पिछले संस्करणों की सफलता को देखते हुए इस वर्ष निवेश प्रतिबद्धताओं में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 2023 में हुए इस कार्यक्रम के दौरान, 33,000 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जबकि 2024 में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर ध्यान दिया गया था।</p>
<p>पासवान ने भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उपलब्ध क्षमता का उल्लेख किया जिसका उपयोग नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के प्रमुख फसलों के शीर्ष पांच उत्पादकों में शामिल होने के बावजूद, देश का खाद्य प्रसंस्करण स्तर अभी भी निचले स्तर पर है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘भारी उत्पादन के बावजूद, हम उच्च प्रसंस्करण स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। कटाई के बाद होने वाले नुकसान को लेकर चिंता है, जिसे प्रसंस्करण के माध्यम से दूर किया जा सकता है।’’</p>
<p>मंत्रालय ने प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बारे में गलत धारणाओं को दूर करने के लिए ‘‘खाद्य प्रसंस्करण की विभिन्न अवधारणाओं पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न’’ शीर्षक से एक पुस्तिका जारी की।</p>
<p>पासवान ने कहा, ‘‘ऐसी गलत धारणाएं और भ्रामक विज्ञापन और सोशल मीडिया पर चल रही खबरें हैं कि प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ वजन बढ़ाते हैं और कई बीमारियों का कारण बनते हैं। पुस्तिका में इन चिंताओं का समाधान किया गया है।’’</p>
<p>उद्योग से जुड़े विभिन्न पक्षों के परामर्श से तैयार की गई यह पुस्तिका, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करते हुए, उपभोक्ताओं को जानकारी के साथ विकल्प चुनने में मदद करने के लिए विज्ञान-आधारित जानकारी प्रदान करती है।</p>
<p>‘वर्ल्ड फूड इंडिया’ 2025, एक लाख वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्र में आयोजित होने वाला भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों का सबसे बड़ा सम्मेलन होगा।</p>
<p>इस आयोजन में 21 से अधिक देश भाग ले रहे हैं। इनमें न्यूजीलैंड और सऊदी अरब भागीदार देश हैं जबकि जापान, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम ‘फोकस’ देश हैं।</p>
<p>इस चार दिवसीय आयोजन में लगभग 21 भारतीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 10 केंद्रीय मंत्रालयों और पांच संबद्ध सरकारी संगठनों के 1,700 से अधिक प्रदर्शकों के भाग लेने की उम्मीद है।</p>
<p>इस मौके पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सचिव ए.पी. दास जोशी और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 15:34:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिर्फ़ एक बार नहीं: कैसे एक जगह चुपचाप रेस्तरां संस्कृति को नया आकार दे रही है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>क्या आप कभी ऐसी जगह पर गए हैं जो आपको अलग लगे लेकिन सबसे बेहतरीन तरीके से? </p>
<p>शायद इसकी वजह वहाँ की ऊर्जा है, स्टाफ़ का बातचीत करने का तरीका है, या सब कुछ कितना स्वाभाविक लगता है, जैसे कि यह लेन-देन के बारे में कम और अनुभव के बारे में ज़्यादा है। लॉस एंजिल्स में नोसा कैपिरिन्हा बार लोगों पर बिल्कुल इसी तरह की छाप छोड़ता है। सतह पर, यह एक खूबसूरती से डिज़ाइन किए गए पड़ोस के बार की तरह लग सकता है, लेकिन असली कहानी इस बात में छिपी है कि यह आतिथ्य, कार्य संस्कृति और एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139985/not-just-once-how-one-is-giving-a-new-shape"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-04/k08042025-01.jpg" alt=""></a><br /><p>क्या आप कभी ऐसी जगह पर गए हैं जो आपको अलग लगे लेकिन सबसे बेहतरीन तरीके से? </p>
<p>शायद इसकी वजह वहाँ की ऊर्जा है, स्टाफ़ का बातचीत करने का तरीका है, या सब कुछ कितना स्वाभाविक लगता है, जैसे कि यह लेन-देन के बारे में कम और अनुभव के बारे में ज़्यादा है। लॉस एंजिल्स में नोसा कैपिरिन्हा बार लोगों पर बिल्कुल इसी तरह की छाप छोड़ता है। सतह पर, यह एक खूबसूरती से डिज़ाइन किए गए पड़ोस के बार की तरह लग सकता है, लेकिन असली कहानी इस बात में छिपी है कि यह आतिथ्य, कार्य संस्कृति और एक आधुनिक सभा स्थल के बारे में हमारे सोचने के तरीके को कैसे बदल रहा है।</p>
<p><strong>एक सभा स्थल, न कि केवल एक बार</strong></p>
<p>नोसा कैपिरिन्हा बार लॉस फ़ेलिज़ के दिल में हिलहर्स्ट एवेन्यू पर स्थित है, जो अपने उदार आकर्षण और रचनात्मक भावना के लिए जाना जाता है। लेकिन यह बार सिर्फ़ बढ़िया ड्रिंक्स और अच्छी वाइब्स से कहीं ज़्यादा प्रदान करता है। यह दक्षिणी ब्राज़ील की सामाजिक ऊर्जा से प्रेरित था - जहाँ बार और रेस्तराँ घर के विस्तार की तरह काम करते हैं, जहाँ लोग इकट्ठा होते हैं, आराम करते हैं और जुड़ते हैं।</p>
<p>नोसा में, आप सिर्फ़ कॉकटेल के लिए नहीं आ रहे हैं (हालाँकि कैपिरिन्हास के बारे में बात करने के लिए कुछ है)। आप एक ऐसे माहौल में कदम रख रहे हैं जो गर्मजोशी, विचारशील और समावेशी लगता है। संगीत सहज है, प्रकाश व्यवस्था सुनहरे घंटे की तरह लगती है, और लोग, कर्मचारी और मेहमान दोनों, आराम से सामुदायिक लय में शामिल होते हैं जो स्थान को परिभाषित करता है।</p>
<p><strong>अतिथि अनुभव की पुनर्कल्पना</strong></p>
<p>नोसा कैपिरिन्हा बार के बारे में सबसे दिलचस्प बातों में से एक यह है कि मेहमानों का अनुभव जबरदस्ती या बहुत ज़्यादा पॉलिश वाला नहीं लगता। यह मानवीय लगता है। चीजें कैसे काम करती हैं, इसमें एक स्वाभाविक लय है। कर्मचारी सिर्फ़ सेवा नहीं करते; वे इतनी सहजता से पेश आते हैं कि आपको ऐसा लगता है कि आप नियमित रूप से यहाँ आते हैं, भले ही आप पहली बार ही क्यों न आए हों।</p>
<p>यह सुविधा जानबूझकर दी गई है। बार के संस्थापक ऐसी जगह डिजाइन करना चाहते थे जो औपचारिकता से ज़्यादा वास्तविक जुड़ाव को महत्व दे। यह आतिथ्य की एक ऐसी शैली है जो न केवल ब्राज़ीलियाई सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाती है बल्कि आधुनिक भोजन करने वालों की वास्तविक ज़रूरतों की गहरी समझ भी दर्शाती है: प्रामाणिकता, गर्मजोशी और निरंतरता।</p>
<p><strong>आतिथ्य के प्रति प्रगतिशील दृष्टिकोण</strong></p>
<p>खाने-पीने की चीज़ों से परे, नोसा पर्दे के पीछे चुपचाप कुछ क्रांतिकारी कर रहा है। यह आज के समय में रेस्तराँ की दुनिया में सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक को संबोधित कर रहा है: आप एक निष्पक्ष, टिकाऊ और सशक्त कार्यस्थल कैसे बना सकते हैं?</p>
<p>टीम को फ्रंट-ऑफ़-हाउस (FOH) और बैक-ऑफ़-हाउस (BOH) जैसी कठोर भूमिकाओं में विभाजित करने के बजाय, नोसा एक अधिक एकीकृत प्रणाली बनाता है। हर कोई एक ही टीम का हिस्सा है, और काम में स्वामित्व की साझा भावना है। लक्ष्य सिर्फ़ नौकरी पाना नहीं है; यह एक ऐसा करियर पथ बनाना है जो नेतृत्व और अंततः स्वामित्व में विकसित हो सके।<br />यह बदलाव ताज़ा करने वाला है क्योंकि यह उस चीज़ की बात करता है जो बहुत से लोग अभी चाहते हैं: अपने काम में उद्देश्य। नोसा में, उस उद्देश्य को उन प्रणालियों द्वारा समर्थित किया जाता है जो लोगों के समान वेतन, विकास के अवसरों और साझा मिशन की भावना के लिए सार्थक हैं।</p>
<p><strong>पारंपरिक टिपिंग को अलविदा कहें</strong></p>
<p>नोसा ने पारंपरिक टिपिंग मॉडल से भी दूर जाने का फैसला किया है। अपने सर्वर की वित्तीय भलाई का निर्धारण करने के लिए मेहमानों पर निर्भर रहने के बजाय, बार ने सेवा शुल्क प्रणाली को अपनाया है। इसका मतलब है कि मेहमानों को अभी भी बेहतरीन सेवा मिलती है, लेकिन कर्मचारियों की आय अधिक स्थिर है और उतार-चढ़ाव वाले टिप पर कम निर्भर है।</p>
<p><strong>मेनू में क्या है?</strong></p>
<p>बेशक, खाने-पीने की चीजों के बारे में बात किए बिना यह पूरी तस्वीर नहीं होगी। नोसा कैपिरिन्हा बार एक ऐसा मेनू पेश करता है जो कैलिफ़ोर्निया ट्विस्ट के साथ ब्राज़ीलियाई सामग्री और स्वाद का जश्न मनाता है। यह सिर्फ़ प्रामाणिकता के बारे में नहीं है; </p>
<p>यह क्लासिक्स को एक ऐसे तरीके से फिर से कल्पना करने के बारे में है जो आधुनिक और रोमांचक लगता है। स्टार, स्वाभाविक रूप से, कैपिरिन्हा है, जो ब्राजील का राष्ट्रीय कॉकटेल है, जिसे कैचाका, चीनी और नींबू से बनाया जाता है। लेकिन मेनू मौसमी कॉकटेल और छोटी प्लेटों पर आविष्कारशील व्यंजन भी प्रदान करता है जो पेय के साथ खूबसूरती से मेल खाते हैं।</p>
<p><strong>उद्योग द्वारा मान्यता प्राप्त</strong></p>
<p>नोसा के बारे में चर्चा किसी की नज़र से नहीं छूटी है। फोर्ब्स, ईटर एलए, द इनफैचुएशन और थ्रिलिस्ट जैसे प्रकाशनों में इस बार को दिखाया गया है। ये उल्लेख अक्सर न केवल बेहतरीन भोजन और पेय पदार्थों पर प्रकाश डालते हैं, बल्कि बार के मूल्यों और अभिनव संरचना पर भी प्रकाश डालते हैं। ऐसी जगह मिलना दुर्लभ है जो प्रेस और समुदाय दोनों द्वारा समान रूप से पसंद की जाती हो, और नोसा उस रेखा पर शालीनता से चलने में कामयाब होता है।</p>
<p><strong>यह क्यों मायने रखती है</strong></p>
<p>रेस्तरां और बार हमेशा से खाने-पीने की जगहों से कहीं बढ़कर रहे हैं। वे ऐसी जगहें हैं जहाँ लोग जश्न मनाने, जुड़ने या बस आराम करने के लिए इकट्ठा होते हैं। नोसा कैपिरिन्हा बार जो इतना बढ़िया करता है, वह है उस भावनात्मक भूमिका को भुनाना और मेहमानों और कर्मचारियों दोनों के लिए अच्छा महसूस कराने वाली जगह बनाकर उसे ऊपर उठाना।<br />इस तरह का संतुलन दुर्लभ है। और यह कुछ ऐसा है जिसकी ओर उद्योग तेजी से बढ़ रहा है: न केवल अच्छी सेवा बल्कि हर तरफ अच्छा अनुभव कैसे प्रदान किया जाए। मुआवज़ा मॉडल से लेकर करियर विकास और सांस्कृतिक प्रेरणा तक, नोसा रुझान स्थापित करने से कहीं ज़्यादा कर रहा है। यह दिखा रहा है कि जब लोग पहले आते हैं तो आतिथ्य कैसा दिख सकता है।<br />अगर आप जानना चाहते हैं कि यह सब व्यक्तिगत रूप से कैसे एक साथ आता है, तो <a href="https://caipirinhala.com/"><strong>https://caipirinhala.com/</strong></a> पर जाकर देखें। चाहे आप ड्रिंक्स के लिए जाएं, डिज़ाइन के लिए या सिर्फ़ यह देखने के लिए कि इस बारे में इतनी चर्चा क्यों है, आप सिर्फ़ एक बढ़िया भोजन से ज़्यादा कुछ लेकर जाएँगे - आप यह समझकर जाएँगे कि चीज़ें कैसे अलग और बेहतर तरीके से की जा सकती हैं।</p>
<p><strong>आगे देख रहा</strong></p>
<p>नोसा कैपिरिन्हा बार कोई बयानबाज़ी या सामाजिक आंदोलन बनने की कोशिश नहीं कर रहा है। यह सिर्फ़ यह दिखा रहा है कि विचारशील डिज़ाइन, सांस्कृतिक प्रशंसा और लोगों को प्राथमिकता देने वाली व्यावसायिक प्रथाएँ एक ही स्थान पर एक साथ आ सकती हैं। और भले ही यह लॉस फ़ेलिज़ के एक आरामदायक कोने में स्थित हो, लेकिन इसका प्रभाव आसानी से पड़ोस से बाहर भी फैल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Apr 2025 06:28:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>च्युइंग गम : माइक्रोप्लास्टिक के आपके शरीर में पहुंचने का एक और तरीका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(माइकल रिचर्डसन और मीरू वांग, लीडेन विश्वविद्यालय)</p>
<p>लीडेन (नीदरलैंड), 29 मार्च (द कन्वरसेशन) हम माइक्रोप्लास्टिक से भरे पड़े हैं। यह हमारे रक्तप्रवाह में है, हमारे फेफड़ों में है, हमारे लीवर में है। मानव शरीर में जहां भी आप देखेंगे, आपको प्लास्टिक के छोटे-छोटे कण मिल जाएंगे।</p>
<p>इन छोटे-छोटे टुकड़ों को निगलने, सांस में लेने या किसी और तरीके से सोखने के हमारे पास कई तरीके हैं। उदाहरण के लिए, एक प्लास्टिक टी बैग एक कप चाय में 10 अरब से ज़्यादा माइक्रोप्लास्टिक कण छोड़ता है।</p>
<p>अगर आप अपने घर को फिर से सजाते हैं और पुराने पेंटवर्क को हटाते हैं,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139701/chewing-gum-microplastic-another-way-to-reach-your-body"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-03/k29032025-21.jpg" alt=""></a><br /><p>(माइकल रिचर्डसन और मीरू वांग, लीडेन विश्वविद्यालय)</p>
<p>लीडेन (नीदरलैंड), 29 मार्च (द कन्वरसेशन) हम माइक्रोप्लास्टिक से भरे पड़े हैं। यह हमारे रक्तप्रवाह में है, हमारे फेफड़ों में है, हमारे लीवर में है। मानव शरीर में जहां भी आप देखेंगे, आपको प्लास्टिक के छोटे-छोटे कण मिल जाएंगे।</p>
<p>इन छोटे-छोटे टुकड़ों को निगलने, सांस में लेने या किसी और तरीके से सोखने के हमारे पास कई तरीके हैं। उदाहरण के लिए, एक प्लास्टिक टी बैग एक कप चाय में 10 अरब से ज़्यादा माइक्रोप्लास्टिक कण छोड़ता है।</p>
<p>अगर आप अपने घर को फिर से सजाते हैं और पुराने पेंटवर्क को हटाते हैं, तो पेंट में मौजूद प्लास्टिक बाइंडर हवा में माइक्रोप्लास्टिक छोड़ सकते हैं, जो सांस के जरिए शरीर के भीतर पहुंच सकते हैं। जब आप एकल इस्तेमाल प्लास्टिक की पानी की बोतलों से पीते हैं, तो आप उन्हें निगल सकते हैं। अब शरीर में माइक्रोप्लास्टिक का एक और स्रोत खोजा गया है: च्युइंग गम।</p>
<p>च्युइंग गम में लंबे अणु होते हैं जिन्हें पॉलिमर कहा जाता है। गम के कुछ ब्रांड में पेड़ के रस से प्राकृतिक पॉलिमर होते हैं। अन्य में पेट्रोलियम उद्योग से प्राप्त सिंथेटिक पॉलिमर होते हैं। ये विभिन्न पॉलिमर प्लास्टिक के समान हैं- और कुछ वास्तव में प्लास्टिक हैं। च्युइंग गम पॉलिमर, प्राकृतिक और सिंथेटिक दोनों, चबाने से घिस जाने पर सूक्ष्म कण छोड़ सकते हैं।</p>
<p>च्युइंग गम के अध्ययन में एक अकेले स्वयंसेवक ने दस ब्रांड की च्युइंग गम चबाई-पांच प्राकृतिक और पांच सिंथेटिक। इस अध्ययन को 25 मार्च को अमेरिकन केमिकल सोसाइटी की बैठक में प्रस्तुत किया गया था। स्वयंसेवक के मुंह से लार के नमूने लिए गए और माइक्रोस्कोप के नीचे रखे गए। आश्चर्यजनक रूप से, प्राकृतिक और सिंथेटिक दोनों च्युइंग गम में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए।</p>
<p>कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स के शोधकर्ताओं ने गणना की कि एक च्युइंग गम का टुकड़ा मुंह में सैकड़ों या कुछ हजार माइक्रोप्लास्टिक कण छोड़ सकता है, जहां संभवतः उन्हें निगल लिया जाता है।</p>
<p>गम्स में पाए जाने वाले प्लास्टिक के प्रकार थे पॉलीस्टाइरीन (जिसका उपयोग खाद्य कंटेनर जैसी चीजों के लिए किया जाता है), पॉलीथिलीन (जैसे कि प्लास्टिक किराने की थैलियां बनाने के लिए उपयोग किया जाता है) और पॉलीप्रोपाइलीन (जिसका उपयोग अन्य चीजों के अलावा कार बम्पर और दवा की बोतलें बनाने के लिए किया जाता है)।</p>
<p>लेकिन, इससे पहले कि हम च्युइंग गम से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक के बारे में चिंता करना शुरू करें, हमें यह जानना होगा कि वे कितने बड़े थे।</p>
<p>आकार मायने रखता है</p>
<p>च्युइंग गम चबाने वाले स्वयंसेवक की लार में पाए गए माइक्रोप्लास्टिक का आकार 20 माइक्रोमीटर या उससे ज़्यादा था। यह सबसे पतले मानव बाल के व्यास के बराबर है। लेकिन मानव शरीर में एक कोशिका के दृष्टिकोण से, 20 माइक्रोन बहुत बड़ा है (उदाहरण के लिए, एक लाल रक्त कोशिका का व्यास लगभग सात माइक्रोन होता है)।</p>
<p>यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कोशिकाओं और भ्रूणों को नुकसान पहुंचाने में सक्षम माइक्रोप्लास्टिक उससे 500 से 1,000 गुना छोटे होते हैं (20 से 500 नैनोमीटर। इन अति-छोटे माइक्रोप्लास्टिक को नैनोप्लास्टिक कहा जाता है।</p>
<p>नैनोप्लास्टिक छोटे होते हैं कि एंडोसाइटोसिस नामक प्रक्रिया के माध्यम से जीवित कोशिकाओं द्वारा अवशोषित किए जा सकते हैं। जब नैनोप्लास्टिक कोशिकाओं में अवशोषित हो जाते हैं, तो वे सभी प्रकार की परेशानी पैदा कर सकते हैं, जैसे कि कोशिका को रिएक्टिव ऑक्सीजन प्रजाति नामक विषाक्त अणुओं का उत्पादन करने के लिए प्रेरित करना। ये विषाक्त पदार्थ कोशिका को पूरी तरह से नहीं मार सकते हैं, लेकिन वे इसे कमजोर कर सकते हैं।</p>
<p>इसी प्रकार, प्लास्टिक के कण जो पशु भ्रूणों में जन्म दोष उत्पन्न करते हैं, वे भी बहुत छोटे होते हैं (नैनोप्लास्टिक), न कि वे बहुत बड़े माइक्रोप्लास्टिक जो च्युइंग गम चबाने वालों की लार में पाए जाते हैं।</p>
<p>च्युइंग गम पर किया गया अध्ययन दिलचस्प है। यह दिखाता है कि हम कितनी आसानी से अनजाने में खुद को सैकड़ों माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में ला सकते हैं। हालांकि, हम च्युइंग गम से किसी भी तरह के स्वास्थ्य जोखिम के बारे में पूरे भरोसे के साथ नहीं कह सकते।</p>
<p>कुछ टिप्पणीकारों का मानना ​​है कि माइक्रोप्लास्टिक के संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, जबकि अन्य माइक्रोप्लास्टिक पर कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों की गुणवत्ता की आलोचना करते हैं। हम इन आलोचनाओं से सहमत होने के लिए इच्छुक हैं। उम्मीद है कि यह बहुत लंबा समय नहीं होगा जब हम वास्तव में समझ पाएंगे कि माइक्रोप्लास्टिक का डर उचित साबित होगा या सिर्फ़ प्रचार-प्रसार।</p>
<p>(द कन्वरसेशन)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 19:28:58 +0530</pubDate>
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                <title>वॉव! मोमो कप नूडल्स के साथ इंस्टेंट नूडल्स बाजार में उतरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) घरेलू क्यूएसआर श्रृंखला परिचालक, वॉव! मोमो कप नूडल्स के साथ इंस्टेंट नूडल्स बाजार में उतर गई है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो तेजी से बढ़ रहा है।</p>
<p>कंपनी ने एक बयान में कहा कि वॉव! मोमो फूड्स का उद्देश्य, 24 माह के भीतर वॉव नूडल्स से 100 करोड़ रुपये का राजस्व सृजित करना है। मौजूदा समय में कंपनी 60 से अधिक शहरों में 700 से अधिक बिक्री केन्द्रों का संचालन करती है।</p>
<p>पारंपरिक खुदरा अवसरों के अलावा, वॉव! नूडल्स अकासा एयर, एयर इंडिया एक्सप्रेस और स्पाइस जेट के इनफ्लाइट मेन्यु में अवसरों का भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139205/instant-noodles-with-wow-momo-cup-noodles-landed-in-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-03/ks11032025-01.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) घरेलू क्यूएसआर श्रृंखला परिचालक, वॉव! मोमो कप नूडल्स के साथ इंस्टेंट नूडल्स बाजार में उतर गई है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो तेजी से बढ़ रहा है।</p>
<p>कंपनी ने एक बयान में कहा कि वॉव! मोमो फूड्स का उद्देश्य, 24 माह के भीतर वॉव नूडल्स से 100 करोड़ रुपये का राजस्व सृजित करना है। मौजूदा समय में कंपनी 60 से अधिक शहरों में 700 से अधिक बिक्री केन्द्रों का संचालन करती है।</p>
<p>पारंपरिक खुदरा अवसरों के अलावा, वॉव! नूडल्स अकासा एयर, एयर इंडिया एक्सप्रेस और स्पाइस जेट के इनफ्लाइट मेन्यु में अवसरों का भी पता लगाएंगे।</p>
<p>वॉव! मोमो ने कहा कि यह सभी त्वरित वाणिज्य (क्यू-कॉम) और ऑनलाइन चैनल के साथ 200 शहरों में सभी प्रमुख आधुनिक व्यापार चैनल पर उपलब्ध होगा।</p>
<p>समूह के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और संस्थापक सागर दरियानी ने कहा, ‘‘वॉव! नूडल्स के साथ, हम एक प्रारूप में देसी और एशियाई जायके के सही मिश्रण को लाकर कप नूडल्स श्रेणी में हलचल पैदा कर रहे हैं, जो कि सुविधाजनक और रोमांचक दोनों है।’’</p>
<p>देश के इंस्टेंट नूडल्स बाजार में नेस्ले की मैगी का वर्चस्व है, इसके बाद आईटीसी के यिप्पी और सीजी फूड्स वाई वाई हैं।</p>
<p></p><div class="pbwidget wid6a13e34f9beb9 imagewidget"><div class="pbwidget-body"><img src="https://www.loktej.com/media/2025-03/loktej-pr-ad-slide-hindi.jpg" alt=""></img></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Mar 2025 20:42:51 +0530</pubDate>
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                <title>शादी में विषाक्त भोजन खाने के बाद करीब 40 लोग बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुरादाबाद (उप्र), 11 फरवरी (भाषा) मुरादाबाद जिले में एक शादी की दावत में कथित रूप से विषाक्त भोजन खाने के बाद करीब 40 लोग बीमार हो गए।</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक यह घटना उत्तराखंड की सीमा से लगे ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र के फरीदपुर गांव में हुई। अधिकारियों ने बताया कि उनमें से कुछ को इलाज के लिए उत्तराखंड के उधम सिंह नगर ले जाया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है।</p>
<p>ठाकुरद्वारा की उपजिलाधिकारी प्रीति सिंह ने मंगलवार को बताया कि घटना सोमवार रात करीब साढ़े आठ बजे की है, जब उन्हें सूचना मिली कि गांव के शिक्षक राजपाल सिंह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/132253/about-40-people-sick-after-eating-toxic-food-in-marriage"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-02/chaat-cuisine-food-street.jpg" alt=""></a><br /><p>मुरादाबाद (उप्र), 11 फरवरी (भाषा) मुरादाबाद जिले में एक शादी की दावत में कथित रूप से विषाक्त भोजन खाने के बाद करीब 40 लोग बीमार हो गए।</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक यह घटना उत्तराखंड की सीमा से लगे ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र के फरीदपुर गांव में हुई। अधिकारियों ने बताया कि उनमें से कुछ को इलाज के लिए उत्तराखंड के उधम सिंह नगर ले जाया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है।</p>
<p>ठाकुरद्वारा की उपजिलाधिकारी प्रीति सिंह ने मंगलवार को बताया कि घटना सोमवार रात करीब साढ़े आठ बजे की है, जब उन्हें सूचना मिली कि गांव के शिक्षक राजपाल सिंह के बेटे विपिन कुमार की शादी सोमवार शाम ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र के फरीदपुर गांव में हो रही है, जिसके लिए दावत का आयोजन किया गया था।</p>
<p>उन्होंने बताया कि दावत के बाद करीब 40 लोगों को अचानक पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत हुई ।</p>
<p>मौके पर पहुंची पुलिस ने विषाक्त भोजन खाने से पीड़ित लोगों को निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया।</p>
<p>एसडीएम ने यह भी बताया कि बीमार लोगों को दवा देने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Feb 2025 16:46:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भोजन आपकी आंत से कितनी तेजी से गुजरता है? इसका जवाब आपके स्वास्थ्य के लिए है महत्वपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(निक इलॉट, ऑक्सफोर्ड सेंटर फॉर माइक्रोबायोम स्टडीज, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय)</p>
<p>आक्सफोर्ड (ब्रिटेन), 10 फरवरी (द कन्वरसेशन) हममें से कई लोग खाये जाने वाले खाद्य पदार्थों पर ध्यान देते हैं और स्वयं से पूछते हैं कि क्या वे हमारे लिए पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक हैं।</p>
<p>लेकिन क्या आपने कभी स्वयं से यह पूछा है कि यह भोजन आपके पेट से कितनी तेजी से गुजर रहा है? इस सवाल का जवाब वाकई बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भोजन जिस गति से आपके पाचन तंत्र से गुजरता है, उसका असर आपके स्वास्थ्य और सेहत पर कई तरह से पड़ता है।</p>
<p>एक बार जब आप अपना भोजन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/131898/how-fast-does-food-pass-through-your-intestine"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/india-food-indian-meal-thali-roti-chapati-punjabi.jpg" alt=""></a><br /><p>(निक इलॉट, ऑक्सफोर्ड सेंटर फॉर माइक्रोबायोम स्टडीज, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय)</p>
<p>आक्सफोर्ड (ब्रिटेन), 10 फरवरी (द कन्वरसेशन) हममें से कई लोग खाये जाने वाले खाद्य पदार्थों पर ध्यान देते हैं और स्वयं से पूछते हैं कि क्या वे हमारे लिए पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक हैं।</p>
<p>लेकिन क्या आपने कभी स्वयं से यह पूछा है कि यह भोजन आपके पेट से कितनी तेजी से गुजर रहा है? इस सवाल का जवाब वाकई बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भोजन जिस गति से आपके पाचन तंत्र से गुजरता है, उसका असर आपके स्वास्थ्य और सेहत पर कई तरह से पड़ता है।</p>
<p>एक बार जब आप अपना भोजन चबाकर निगल लेते हैं, तो यह भोजन जठरांत्र मार्ग से होकर अपनी यात्रा शुरू करता है - एक लंबा और घुमावदार मार्ग जो मुंह से शुरू होकर गुदा पर समाप्त होता है।</p>
<p>रास्ते में, यह विशेष अंगों तक पहुंचता है, जो उसे पचाते हैं (पेट), पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं (छोटी आंत) और पानी और लवणों को अवशोषित करते हैं (बड़ी आंत)।</p>
<p>भोजन के पाचन तंत्र के माध्यम से गुजरने को आंत की गतिशीलता के रूप में जाना जाता है। यह प्रक्रिया आंशिक रूप से हमारे आंत में मौजूद खरबों बैक्टीरिया द्वारा नियंत्रित होती है। आंत माइक्रोबायोम बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये बैक्टीरिया हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित करने और भोजन विघटित करने में मदद करते हैं।</p>
<p>इसलिए, जब हम खाते हैं, तो हम सिर्फ़ खुद को ही नहीं खिलाते हैं - हम आंत में मौजूद सूक्ष्म सहायकों को भी खिलाते हैं। हमें धन्यवाद देने के लिए, बैक्टीरिया मेटाबोलाइट्स नामक छोटे अणु बनाते हैं, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते हैं और आंतों की नसों को उत्तेजित करके हमारे पेट को गतिशील रखते हैं, ताकि वे सिकुड़ें और भोजन को आगे की ओर ले जाएं।</p>
<p>इन बैक्टीरिया और उनके मेटाबोलाइट्स के बिना, हमारी आंतें भोजन को जठरांत्र संबंधी मार्ग से ले जाने में कम सक्षम होंगी, जिससे कब्ज और असुविधा हो सकती है।</p>
<p>आंत पारगमन समय</p>
<p>भोजन को जठरांत्र संबंधी मार्ग के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में लगने वाले समय को आंत पारगमन समय कहा जाता है।</p>
<p>आंत के पारगमन का समय एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होता है। हाल के अनुमानों से पता चलता है कि भोजन को शरीर से गुजरने में 12 से 73 घंटे लग सकते हैं - औसत 23-24 घंटे के आसपास है।</p>
<p>आंत के पारगमन में यह भिन्नता लोगों के बीच देखे जाने वाले आंत माइक्रोबायोम के कुछ अंतरों को समझाती है - और परिणामस्वरूप उनके आंत के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।</p>
<p>कई कारक हमारे प्राकृतिक आंत पारगमन समय को प्रभावित कर सकते हैं - जिसमें आनुवंशिकी, आहार और हमारे आंत माइक्रोबायोम शामिल हैं।</p>
<p>यदि आंत पारगमन समय लंबा है (जिसका अर्थ है कि आपकी आंत की गतिशीलता धीमी है), तो बड़ी आंत में बैक्टीरिया अलग मेटाबोलाइट्स का उत्पादन करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, हमारी तरह ही, हमारी आंत में बैक्टीरिया को भी भोजन की आवश्यकता होती है। ये बैक्टीरिया फाइबर का आनंद लेते हैं। लेकिन, अगर आंत पारगमन समय लंबा है और फाइबर को बड़ी आंत तक पहुँचने में बहुत अधिक समय लग रहा है, तो इन बैक्टीरिया को वैकल्पिक खाद्य स्रोत का रुख करना पड़ता है। इसलिए, वे प्रोटीन की ओर रुख करते हैं।</p>
<p>प्रोटीन पर रुख करने से विषाक्त गैसों का उत्पादन हो सकता है, जिससे सूजन जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।</p>
<p>आंत में खाद्य पदार्थ के धीमे पारगमन के कारण आंशिक रूप से पचा हुआ भोजन छोटी आंत में फंस सकता है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य परिणाम भी होते हैं - जैसे कि छोटी आंत के बैक्टीरिया की अधिक वृद्धि, जिससे पेट में दर्द, मतली और सूजन जैसे लक्षण हो सकते हैं।</p>
<p>तेज़ आंत पारगमन स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p>किसी व्यक्ति के तेज़ आंत पारगमन का अनुभव करने के कई कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, चिंता, इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डीजीज (आईबीडी)।</p>
<p>(द कन्वरसेशन) अमित दिलीप</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Feb 2025 19:30:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टमाटर, आलू की ऊंची कीमतों से दिसंबर में महंगा हुआ घर का बना खाना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, छह जनवरी (भाषा) टमाटर और आलू जैसी रसोई के आम इस्तेमाल वाली खाद्य वस्तुओं के महंगा होने से दिसंबर में घर का बना खाना महंगा हो गया। सोमवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।</p>
<p>साख निर्धारक (रेटिंग) एजेंसी, क्रिसिल की एक इकाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि शाकाहारी थाली तैयार करने की औसत लागत दिसंबर में छह प्रतिशत बढ़कर 31.6 रुपये प्रति प्लेट हो गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 29.7 रुपये प्लेट थी। हालांकि, यह कीमत नवंबर महीने की 32.7 रुपये की दर से कम है।</p>
<p>रोटी, चावल, दर रिपोर्ट में,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/118471/homemade-food-becomes-costlier-in-december-due-to-high-prices-of-tomatoes-and-potatoes"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/india-food-indian-meal-thali-roti-chapati-punjabi.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, छह जनवरी (भाषा) टमाटर और आलू जैसी रसोई के आम इस्तेमाल वाली खाद्य वस्तुओं के महंगा होने से दिसंबर में घर का बना खाना महंगा हो गया। सोमवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।</p>
<p>साख निर्धारक (रेटिंग) एजेंसी, क्रिसिल की एक इकाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि शाकाहारी थाली तैयार करने की औसत लागत दिसंबर में छह प्रतिशत बढ़कर 31.6 रुपये प्रति प्लेट हो गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 29.7 रुपये प्लेट थी। हालांकि, यह कीमत नवंबर महीने की 32.7 रुपये की दर से कम है।</p>
<p>रोटी, चावल, दर रिपोर्ट में, जो आम आदमी के भोजन पर खर्च का आकलन करती है, में क्रिसिल ने पाया कि मांसाहारी थाली की लागत दिसंबर में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत और मासिक आधार पर तीन प्रतिशत बढ़कर 63.3 रुपये हो गई।</p>
<p>खाद्य पदार्थों के महंगे होने के कारणों की व्याख्या करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में टमाटर की कीमतें 24 प्रतिशत बढ़कर 47 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, जबकि आलू 50 प्रतिशत बढ़कर 36 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया।</p>
<p>रिपोर्ट कहती है कि सरकार द्वारा आयात शुल्क में बढ़ोतरी के कारण वनस्पति तेल की कीमत में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे आम आदमी के लिए परेशानी बढ़ गई है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि सालाना परिप्रेक्ष्य से, एलपीजी ईंधन की दरों में 11 प्रतिशत की गिरावट ने उच्च लागत के प्रभाव को कम करने में मदद की है।</p>
<p>मांसाहारी थाली के मामले में, ब्रॉयलर की कीमत में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका समग्र भोजन लागत की गणना में 50 प्रतिशत भार होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पॉल्ट्री की कीमतों में उछाल पूर्व के निचले आधार की वजह से है।</p>
<p>नवंबर की तुलना में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से ताजा आपूर्ति के बीच टमाटर की कीमतों में 12 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे शाकाहारी थाली की लागत तीन प्रतिशत कम करने में मदद मिली।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि प्याज की कीमतों में 12 प्रतिशत और आलू की कीमतों में दो प्रतिशत की गिरावट ने नवंबर और दिसंबर के बीच कीमतों में कमी लाने में मदद की।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि शीत लहर से उत्पादन में गिरावट, त्योहारी और शादी-ब्याह की मांग में वृद्धि और चारे की ऊंची लागत के कारण ब्रॉयलर की कीमतों में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे दिसंबर में मांसाहारी थाली की लागत में तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 20:47:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>ज्यादातर हवाई यात्रियों की राय, हवाई अड्डों पर खाने-पीने का सामान काफी महंगा : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई, 12 दिसंबर (भाषा) ज्यादातर हवाई यात्रियों का मानना है कि हवाई अड्डों पर बेचे जाने वाले भोजन और पेय पदार्थ बहुत महंगे हैं। एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि बड़ी संख्या में हवाई यात्री हवाई अड्डों पर संगठित खुदरा दुकानों और रेलवे स्टेशनों की तुलना में 200 प्रतिशत तक अधिक भुगतान करते हैं।</p>
<p>ऑनलाइन सोशल प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल्स के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 60 प्रतिशत एयरलाइन यात्रियों का कहना है कि उन्हें रेलवे स्टेशनों की तुलना में हवाई अड्डों पर भोजन और पेय पदार्थों के लिए 100-200 प्रतिशत अधिक खर्च करना पड़ता है।</p>
<p>हाल ही में किए गए सर्वेक्षण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/109587/opinion-of-most-air-passengers--food-items-at-airports-are-very-expensive--report"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-03/whatsapp-image-2023-03-01-at-14.11.20.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 12 दिसंबर (भाषा) ज्यादातर हवाई यात्रियों का मानना है कि हवाई अड्डों पर बेचे जाने वाले भोजन और पेय पदार्थ बहुत महंगे हैं। एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि बड़ी संख्या में हवाई यात्री हवाई अड्डों पर संगठित खुदरा दुकानों और रेलवे स्टेशनों की तुलना में 200 प्रतिशत तक अधिक भुगतान करते हैं।</p>
<p>ऑनलाइन सोशल प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल्स के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 60 प्रतिशत एयरलाइन यात्रियों का कहना है कि उन्हें रेलवे स्टेशनों की तुलना में हवाई अड्डों पर भोजन और पेय पदार्थों के लिए 100-200 प्रतिशत अधिक खर्च करना पड़ता है।</p>
<p>हाल ही में किए गए सर्वेक्षण में भारत के 309 जिलों में स्थित एयरलाइन यात्रियों से 28,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। इनमें से 61 प्रतिशत उत्तरदाता पुरुष और 39 प्रतिशत महिलाएं थीं। लगभग 43 प्रतिशत उत्तरदाता देश के पहली श्रेणी के शहरों से थे। 30 प्रतिशत दूसरी श्रेणी से और शेष 27 प्रतिशत छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से थे।</p>
<p>यात्रियों ने बताया कि हवाई अड्डों पर समोसा या पैटीज का दाम 200 रुपये से अधिक हो सकता। वहीं थाली की कीमत 500 रुपये से अधिक हो सकती है। इसके अलावा कॉफी और ठंडे पेय का दाम 200 से 300 रुपये होता है। यह मॉल में किसी खाद्य बिक्री केंद्र पर चुकाई जाने वाली कीमत से दो से तीन गुना अधिक है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोहरे या अन्य कारणों से देरी के समय यात्रियों की परेशानी बढ़ जाती है और वे बिना किसी किफायती भोजन के उड़ान भरने के लिए घंटों तक इंतजार करते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह परिदृश्य रेलवे स्टेशनों, विशेष रूप से दिल्ली और मुंबई के बड़े स्टेशनों के विपरीत है, जहां यात्रियों के पास छोटे खाद्य स्टॉल/बिक्री केंद्र, छोटे विक्रेताओं और बड़े फ्रेंचाइजी बिक्री केंद्र के बीच चयन करने का विकल्प होता है।</p>
<p>अधिकांश हवाई अड्डों पर महंगे खाद्य पदार्थ उपलब्ध होने के कारण कई यात्री हवाई अड्डों पर भोजन पर खर्च करने से पहले दो बार सोचते हैं और कुछ मामलों में तो अपना नाश्ता या भोजन भी साथ लेकर चलते हैं। हालांकि, सुरक्षा और वजन संबंधी सीमा के चलते उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।</p>
<p>सरकार की महत्वाकांक्षा है कि हवाई यात्रा को और अधिक किफायती बनाया जाए और कुल यातायात का 70 प्रतिशत हिस्सा कम लागत वाली एयरलाइंस के पास हो। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हवाई अड्डों पर कम लागत वाले खाद्य विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। लोकलसर्किल्स ने कहा कि कीमत और मात्रा के समीकरण को फिर से काम करने की जरूरत है ताकि खाद्य स्टॉल उच्च कीमतों और कम मात्रा के बजाय अधिक मात्रा और कम कीमत पर चलें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Dec 2024 10:40:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय मसाला की दुनिया दीवानी, विश्व फलक पर किसानों का जलवा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में मसाला उद्योग की असीम सम्भावनाएं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/97869/the-world-is-crazy-about-indian-spices-farmers-glory-on"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-12/spices-masala.jpg" alt=""></a><br /><p>मीरजापुर, 12 दिसम्बर (हि.स.)। भारतीय मसाले की पूरी दुनिया दीवानी है। भारतीय मसाला भोजन की थाली का जायका बढ़ाने के साथ किसानों का जलवा भी कायम किया है। भारत मसाला का बड़ा उपभोक्ता और निर्यातक भी है। भारत का मसाला पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मसाला भारत की विविधता का प्रतीक है। भारत का मसाला उद्योग प्रचीनकाल से ही विश्व में अग्रणी रहा है। वर्षाें से भारत मसाला उत्पादन, उपभोक्ता और निर्यातक के साथ प्रंसस्करण और मूल्यवर्धन में शीर्ष पर है। वर्ष 2022-23 पर गौर करें तो दुनिया भर के विभिन्न स्थानों पर 31,761 करोड़ रुपये (3.95 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का कुल 14,04,357 टन मसाला और मसाला उत्पादों का निर्यात किया गया था।<br /><br /><strong>2030 तक 10 बिलियन डालर का मसाला निर्यात करने का लक्ष्य</strong><br /><br />भारत के मसाला उद्योग में असीम संभावनाएं हैं। मसाला उद्योग ने मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित कर 2030 तक 10 बिलियन डालर के मसाला उत्पादों के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए मसाला उद्योग के पास अपार क्षमताएं हैं।<br /><br /><strong>पाक कौशल की कहानी कहती है कश्मीरी केसर व पश्चिमी घाट की इलायची</strong><br /><br />सरकार की सोच है कि देश के प्रत्येक जनपद को वहां के उत्पाद के हिसाब से बढ़ावा देकर उसको निर्यात हब बनाया जाए। मसाला भोजन का स्वाद बढ़ाते हैं, जिसे किसान हमेशा उगाते आए हैं और उपयोग कर रहे हैं। दुनिया में भी भारत के मसालों की बड़ी मांग है। अंतरराष्ट्रीय मशाला बाजार में भारत का विशिष्ट स्थान है। भारत में न केवल बड़ी मात्रा में मसाला उत्पादन होता है बल्कि भारत के मसालों की विविधता और उत्तम गुणवत्ता इन्हें विशेष बनाते हैं। कश्मीर के सुगंधित केसर से लेकर पश्चिमी घाट की इलायची की मंत्रमुग्ध करने वाली सुगंध देश की पाक कौशल की कहानी कहती है।<br /><br /><strong>मसाला उद्योग की प्रगति में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका</strong><br /><br />पवित्र गंगा और उसकी सहायक नदियों से समृद्ध उत्तर प्रदेश उपजाऊ मिट्टी और पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता के कारण कृषि के फलने-फूलने में सहायक है। देश में खाद्यान्न के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश पुदीना, हींग, लहसुन, मिर्च और मशाला बास्केट में कई अन्य मसालों के उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए जाना जाता है। उत्तर प्रदेश में मसालों की खेती योग्य कुल क्षेत्र 4,03,518 हेक्टेयर हैं, जो 2,77,650 टन का उत्पादन करता है। उप्र में सबसे अधिक उत्पादित मसाला लहसुन है। इसके बाद मिंट और लाल मिर्च है। पुदीना (मेंथा अरर्वेसिस) और पुदीने के उत्पाद भारतीय मशालों के निर्यात बास्केट से शीर्ष पांच सबसे अधिक निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में से एक है। मिंट उत्पादों का देश से 26,708 टन निर्यात किया जाता है। इसकी कीमत 3,574 करोड़ रुपये है। उत्तर प्रदेश मेंथा उत्पादन में भी अग्रणी है। मिंट की खेती 3,00,000 हेक्टेयर से अधिक होती है।<br /><br /><strong>हाथरस के हींग को जीआई का तमगा</strong><br /><br />उत्तर प्रदेश में मसाला खंड में एक और प्रमुख उद्योग है, वह है हाथरस में प्रसंस्कृत हींग। हींग के बिना पूरे भारत में व्यंजनों की कल्पना नहीं की जा सकती। हींग अचार, कचौड़ी से लेकर सांभर तक के स्वाद को दोगुना कर देता है। हाथरस के हींग को हाल ही में जीआई टैग का तमगा मिला है।<br /><br /><strong>मसाला उद्योग में बेहतर बाजार पहुंच और आर्थिक अवसर</strong><br /><br />केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि मसाला बोर्ड, एपीडा, आईसीएआर-आईआईवीआर और सीएसआईआर-सीमैप जैसे विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से पैदावार में वृद्धि, बेहतर बाजार पहुंच और बेहतर आर्थिक अवसरों में समन्वय स्थापित कर मसाला क्षेत्र में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। यह सामंजस्य समग्र आर्थिक विकास में योगदान देगा ही, मसाला क्षेत्र के समृद्ध अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।<br /><br /><strong>युवाओं के लिए नवीन बेहतर अवसर, मशाला की खेती को मिलेगा बढ़ावा</strong><br /><br />सरकार किसानों को ऐसी सुविधा उपलब्ध करा रही है, जिससे आवश्यकताओं के मद्देनजर किसान भी ऐसे फसलों की खेती कर समृद्ध बने। यह युवाओं के लिए नवीन बेहतर अवसर है। इससे मसाला की खेती को बढ़ावा मिलेगा। किसान स्वयं अपने उत्पाद को विदेशों में भी निर्यात कर सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/97869/the-world-is-crazy-about-indian-spices-farmers-glory-on</link>
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                <pubDate>Tue, 12 Dec 2023 19:18:12 +0530</pubDate>
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                <title>भारत विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक, 9 साल में दूध उत्पादन 61 प्रतिशत बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर, 01 जून (हि.स.)। कृषि और पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था कहा जाने वाला भारत आज पशुपालन के क्षेत्र में भी बेहतर मुकाम बना चुका है। पशुपालन में डेयरी क्षेत्र भारत के लिए विभिन्न मायनों में बहुत अधिक महत्व रखता है। एक उद्योग के रूप में यह 80 मिलियन से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार मुहैया करा रहा है। इनमें अधिकतर छोटे और सीमांत किसानों के साथ-साथ भूमिहीन लोग भी शामिल हैं। खास बात यह है कि हमारे देश में महिलाएं इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहीं हैं। यह क्षेत्र विशेष रूप से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर, 01 जून (हि.स.)। कृषि और पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था कहा जाने वाला भारत आज पशुपालन के क्षेत्र में भी बेहतर मुकाम बना चुका है। पशुपालन में डेयरी क्षेत्र भारत के लिए विभिन्न मायनों में बहुत अधिक महत्व रखता है। एक उद्योग के रूप में यह 80 मिलियन से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार मुहैया करा रहा है। इनमें अधिकतर छोटे और सीमांत किसानों के साथ-साथ भूमिहीन लोग भी शामिल हैं। खास बात यह है कि हमारे देश में महिलाएं इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहीं हैं। यह क्षेत्र विशेष रूप से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण में भी अग्रणी भूमिका निभाता है।<br /><br />भारत में बीते नौ वर्षों में दुग्ध व डेयरी उत्पादों के उत्पादन और खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में भारत दुनिया में दूध का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला देश है, जो कि वैश्विक दूध उत्पादन में 24 प्रतिशत का योगदान देता है। पिछले नौ सालों के भीतर देश में दूध उत्पादन में 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जहां देश में 2013-14 में 137.7 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता था, वहीं 2021-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 221.1 मिलियन टन हो गया। यही नहीं, इस क्षेत्र के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख क़दमों का नतीजा है कि 9 सालों में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में 1.5 गुना वृद्धि हुई है। दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 2013-14 में 303 ग्राम प्रति दिन से बढ़कर साल 2021-22 में 444 ग्राम प्रति दिन हो गई। आंकड़ों की मानें तो 15 मार्च 2023 तक राजस्थान देश का सर्वाधिक दूध उत्पादक राज्य है। राजस्थान देश के कुल दूध उत्पादन में 15.05 प्रतिशत का योगदान देता है।<br /><br />भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में डेयरी क्षेत्र का बड़ा योगदान रहा है। सरकार ने अपनी विभिन्न पहलों के माध्यम से डेयरी फार्मिंग के बुनियादी ढांचे को सुविधाजनक बनाया है। केंद्र सरकार, डेयरी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए ‘डेयरी प्रसंस्करण और बुनियादी ढांचा विकास निधि’, किसानों को पर्याप्त और समय पर ऋण सहायता प्रदान करने के लिए ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार द्वारा दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ लॉन्च किया गया है। इस प्रकार भारत सरकार डेयरी सेक्टर को किसानों के लिए लाभदायक बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/92507/india-is-the-largest-producer-of-milk-in-the-world</link>
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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 20:32:48 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेहत : गर्मियों में रखें अपने शरीर का ध्यान, डाइट में जरुर शामिल करें इन दस चीजों को</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में आपके लिए अपना ख्याल रखना बेहद जरूरी है। गर्मियां हमेशा अपने साथ डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक, सनबर्न और हीट रैश जैसी समस्याओं को लेकर आती हैं। हालांकि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और अच्छी डाइट पर ध्यान देकर आप इन स्वास्थ्य समस्याओं से खुद को बचा सकते हैं। गर्मियां आते ही कुछ फलों और सब्जियों की खपत बढ़ जाती है। क्योंकि ये न केवल हमें हाइड्रेटेड और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं बल्कि आवश्यक पोषक तत्व और इलेक्ट्रोलाइट्स भी प्रदान करते हैं। तो आइए जानते हैं उन 10 चीजों के बारे में जो हमें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p dir="ltr">गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में आपके लिए अपना ख्याल रखना बेहद जरूरी है। गर्मियां हमेशा अपने साथ डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक, सनबर्न और हीट रैश जैसी समस्याओं को लेकर आती हैं। हालांकि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और अच्छी डाइट पर ध्यान देकर आप इन स्वास्थ्य समस्याओं से खुद को बचा सकते हैं। गर्मियां आते ही कुछ फलों और सब्जियों की खपत बढ़ जाती है। क्योंकि ये न केवल हमें हाइड्रेटेड और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं बल्कि आवश्यक पोषक तत्व और इलेक्ट्रोलाइट्स भी प्रदान करते हैं। तो आइए जानते हैं उन 10 चीजों के बारे में जो हमें गर्मी के मौसम में भी ठंडा रखेगी।</p>
<p dir="ltr"><strong>गर्मी में जरूर खाएं ये 10 हेल्दी चीजें</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>1. तरबूज</strong> : तरबूज पानी से भरपूर होता है। इससे गर्मियों में इसे खाने से शरीर में पानी की कमी की समस्या नहीं होती है। इसमें आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स भी होते हैं जो शरीर को हाइड्रेटेड और ठंडा रखने में मदद करते हैं। तरबूज में लाइकोपीन भी होता है जिसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। ये त्वचा को धूप से होने वाले नुकसान से बचाने में भी मददगार होते हैं।</p>
<p dir="ltr"><strong>2. खीरा</strong> :- गर्मियों में खीरा खाना बहुत लाभदायक होता है। खीरा पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का अच्छा स्रोत है। इसमें विटामिन सी की उपस्थिति भी होती है, जिसका शरीर पर ठंडा प्रभाव पड़ता है। खीरा खाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।</p>
<p dir="ltr"><strong>3. नारियल पानी:- </strong>नारियल पानी एक नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक है जो शरीर को डीहाइड्रेट होने से बचाता है और भरपूर मात्रा में पोषक तत्व भी प्रदान करता है। यह पोटेशियम का भी एक अच्छा स्रोत है जो हृदय गति और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।</p>
<p dir="ltr"><strong>4. पुदीना:-</strong> पुदीने का शरीर पर कूलिंग इफेक्ट होता है और यह आपको तरोताजा भी महसूस कराता है।</p>
<p dir="ltr"><strong>5. दही : </strong>दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और पाचन में भी सुधार करते हैं। दही को कैल्शियम और अन्य जरूरी पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है।</p>
<p dir="ltr"><strong>6. अनन्नास :-</strong> अनन्नास में ब्रोमेलैन नामक एंजाइम होता है, जिसमें जलनरोधी गुण होते हैं। यह फल शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है। अनानास विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्रोत है, जो त्वचा को धूप से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है।</p>
<p dir="ltr"><strong>7. टमाटर:-</strong> टमाटर लाइकोपीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो त्वचा को धूप से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। इन्हें विटामिन सी का सबसे अच्छा स्रोत भी माना जाता है।</p>
<p dir="ltr"><strong>8. हरी पत्तेदार सब्जियां:- </strong>हरी पत्तेदार सब्जियों में केल, पालक, मेथी और हरी पत्तेदार सब्जियां आदि शामिल हैं। इन सभी में आवश्यक विटामिन और खनिज होते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों का शरीर पर ठंडा प्रभाव पड़ता है और यह शरीर के तापमान को भी नियंत्रित कर सकती हैं।</p>
<p dir="ltr"><strong>9. नींबू:-</strong> नींबू के रस में साइट्रिक एसिड होता है, जो शरीर के पीएच संतुलन को विनियमित करने में मदद करता है और शरीर से गर्मी को भी दूर करता है।</p>
<p dir="ltr"><strong>10. सौंफ के बीज :- </strong>सौंफ के बीज भी शरीर पर ठंडक पहुंचाते हैं। सौंफ का सेवन करने से पाचन तंत्र बेहतर होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Apr 2023 20:13:37 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
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