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                <title>Festival - Loktej</title>
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                <description>Festival RSS Feed</description>
                
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                <title>सूरत : होली पर रेलवे की विशेष तैयारी,  उधना और सूरत स्टेशन से चलेंगी 20 स्पेशल ट्रेनें</title>
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                        <![CDATA[<p>सूरत। होली के महापर्व पर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों की ओर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए पश्चिम रेलवे (वेस्टर्न रेलवे) ने कमर कस ली है।</p>
<p>सूरत और उधना स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए 'दिवाली मॉडल' पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि हर यात्री सुरक्षित अपने परिवार के साथ त्योहार मना सके।</p>
<p>होली के त्योहार पर घर जाने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वेस्टर्न रेलवे के अंतर्गत सूरत और उधना स्टेशनों पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145800/special-preparations-of-railways-on-surat-holi-20-special-trains"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/4981_surat-railway-station-1.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत। होली के महापर्व पर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों की ओर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए पश्चिम रेलवे (वेस्टर्न रेलवे) ने कमर कस ली है।</p>
<p>सूरत और उधना स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए 'दिवाली मॉडल' पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि हर यात्री सुरक्षित अपने परिवार के साथ त्योहार मना सके।</p>
<p>होली के त्योहार पर घर जाने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वेस्टर्न रेलवे के अंतर्गत सूरत और उधना स्टेशनों पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए विशेष इंतज़ाम किए हैं।</p>
<p>दो दिन में 20 ट्रेनें, पांच पूरी तरह जनरल</p>
<p>रेलवे विभाग के अनुसार, 28  फरवरी और 1 मार्च दो दिनों में कुल 20 ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इनमें छह से अधिक स्पेशल अनारक्षित (अनरिज़र्व्ड) ट्रेनें शामिल हैं। साथ ही पांच ट्रेनों के सभी कोच जनरल श्रेणी में परिवर्तित किए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक यात्री अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।</p>
<p>उधना रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 को हाई-लेवल प्लेटफॉर्म में अपग्रेड किया गया है। यहां नए शेड, पर्याप्त लाइटिंग और पंखों की व्यवस्था की गई है।</p>
<p>गर्मी को ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म पर वॉटर कूलर लगाए गए हैं। यात्रियों के बैठने के लिए स्थायी होल्डिंग एरिया की क्षमता दोगुनी कर दी गई है। इसके अलावा, एक बड़ा अस्थायी टेंट एरिया भी बनाया गया है, जहां यात्री आराम कर सकेंगे। स्थायी और अस्थायी शौचालयों की भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।</p>
<p>भीड़ नियंत्रण के लिए Railway Protection Force (RPF), Government Railway Police (GRP) और सिटी पुलिस के जवान तैनात रहेंगे। टिकट जांच और यात्री सुविधा के लिए अतिरिक्त कमर्शियल स्टाफ लगाया गया है।</p>
<p>हर 8 घंटे में एक वरिष्ठ अधिकारी स्टेशन पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। रेलवे प्रशासन ने भरोसा जताया है कि विशेष ट्रेनों और अतिरिक्त सुविधाओं के चलते यात्री सुरक्षित और समय पर अपने घर पहुंच सकेंगे।</p>
<p>रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे शांति और अनुशासन बनाए रखें तथा व्यवस्था में सहयोग करें, ताकि सभी लोग सुरक्षित तरीके से होली का त्योहार मना सकें।</p>]]>
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                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 17:15:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Bhatu Patil]]>
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            <item>
                <title>देश में महाशिवरात्रि पर चौतरफा हर-हर गंगे, ॐ नमः शिवाय की गूंज</title>
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                        <![CDATA[<p>नई दिल्ली, 15 फरवरी (वेब वार्ता)। शिव उपासना के महापर्व महाशिवरात्रि पर आज सारे देश के मंदिरों खासतौर पर शिवालयों, मां गंगा- यमुना और अन्य पावन नदियों, सरोवरों के तटों पर ब्रह्म मुहूर्त लगते ही हर-हर गंगे और ॐ नमः शिवाय की गूंज होने लगी। वाराणसी और उज्जैन के साथ भगवान राम की नगरी शिवमय हो गई है।</p>
<p>मध्य प्रदेश में उज्जैन के महाकाल मंदिर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए लोगों की कतार लगी हुई है। लोग जलाभिषेक कर ॐ नमः शिवाय का उद्घोष</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145592/echo-of-har-har-gange-om-namah-shivay-all-around-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/lord-bhagvan-shiva-shivaji-bholenath.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 15 फरवरी (वेब वार्ता)। शिव उपासना के महापर्व महाशिवरात्रि पर आज सारे देश के मंदिरों खासतौर पर शिवालयों, मां गंगा- यमुना और अन्य पावन नदियों, सरोवरों के तटों पर ब्रह्म मुहूर्त लगते ही हर-हर गंगे और ॐ नमः शिवाय की गूंज होने लगी। वाराणसी और उज्जैन के साथ भगवान राम की नगरी शिवमय हो गई है।</p>
<p>मध्य प्रदेश में उज्जैन के महाकाल मंदिर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए लोगों की कतार लगी हुई है। लोग जलाभिषेक कर ॐ नमः शिवाय का उद्घोष कर रहे हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चांदनी चौक के गौरीशंकर मंदिर और छतरपुर के श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ में पूजा-अर्चना के लिए सैलाब उमड़ पड़ा है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर में भी ऐसा ही दृश्य है। ओडिशा में तो कलाकार सुदर्शन पटनायक ने पुरी के समुद्र तट पर 17,000 रुद्राक्ष से शिवलिंग की कलाकृति तैयार कर महाशिवरात्रि को रेत में जीवंत कर दिया है।</p>
<p>अयोध्या में आज राम की पैड़ी में स्थित प्राचीन नागेश्वर नाथ मंदिर से भव्य शिव बरात निकलेगी। बरात में हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।</p>
<p>बैंड-बाजा, रथ, भगवान के स्वरूप आकर्षण बढ़ाएंगे। इस बरात का क्षीरेश्वरनाथ मंदिर पर स्वागत किया जाएगा। रात में भगवान भोलेनाथ का धूमधाम से विवाह होगा।</p>
<p>शनिवार को यहां पारंपरिक विधि-विधान के साथ भोले बाबा को हल्दी अर्पित की गई। वैदिक मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच विवाह के लोकाचार पूरे किए गए।</p>
<p>प्रशासन के अनुसार पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें।</p>]]>
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                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/145592/echo-of-har-har-gange-om-namah-shivay-all-around-the</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 16:39:46 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Bhatu Patil]]>
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            <item>
                <title>सरकार छठ पूजा को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत: प्रधानमंत्री</title>
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                        <![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि सरकार छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है और जब ऐसा होगा तो दुनिया के हर कोने में लोग इस त्योहार की भव्यता और दिव्यता का अनुभव कर सकेंगे।</p>
<p>अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मोदी ने यह भी बताया कि कुछ समय पहले सरकार के इसी तरह के प्रयासों के कारण कोलकाता की दुर्गा पूजा भी यूनेस्को की सूची का हिस्सा बन गई थी।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारे त्योहार और उत्सव भारत की संस्कृति को जीवित</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143324/prime-minister-trying-to-include-chhath-puja-in-unesco-cultural"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-11/7515_chhathpuja.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि सरकार छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है और जब ऐसा होगा तो दुनिया के हर कोने में लोग इस त्योहार की भव्यता और दिव्यता का अनुभव कर सकेंगे।</p>
<p>अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मोदी ने यह भी बताया कि कुछ समय पहले सरकार के इसी तरह के प्रयासों के कारण कोलकाता की दुर्गा पूजा भी यूनेस्को की सूची का हिस्सा बन गई थी।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारे त्योहार और उत्सव भारत की संस्कृति को जीवित रखते हैं। छठ पूजा दिवाली के बाद आने वाला एक पवित्र त्योहार है। सूर्य देव को समर्पित यह भव्य त्योहार बहुत खास है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, "इसमें हम डूबते सूर्य को भी अर्घ्य देते हैं और उसकी पूजा करते हैं। छठ न केवल देश के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है, बल्कि इसकी भव्यता पूरी दुनिया में देखी जाती है। अब यह एक वैश्विक त्योहार बनता जा रहा है।"</p>
<p>मोदी ने कहा, "मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि भारत सरकार भी छठ पूजा से जुड़े एक बड़े प्रयास में लगी हुई है। भारत सरकार छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब छठ पूजा को यूनेस्को की सूची में शामिल किया जाएगा तो दुनिया के हर कोने में लोग इसकी भव्यता और दिव्यता का अनुभव कर सकेंगे।</p>
<p>मोदी ने कहा, "कुछ समय पहले, भारत सरकार के ऐसे ही प्रयासों के कारण, कोलकाता की दुर्गा पूजा भी यूनेस्को की इस सूची का हिस्सा बन गई। अगर हम अपने सांस्कृतिक आयोजनों को ऐसी वैश्विक मान्यता देंगे, तो दुनिया भी उनके बारे में जानेगी, उन्हें समझेगी और उनमें भाग लेने के लिए आगे आएगी।"</p>
<p>दिवाली के कुछ दिन बाद छठ मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान, श्रद्धालु डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और अपने परिवार और बच्चों के लिए आशीर्वाद और समृद्धि की कामना करते हैं। यह बिहार के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।</p>]]>
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                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/143324/prime-minister-trying-to-include-chhath-puja-in-unesco-cultural</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Sep 2025 20:13:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Loktej]]>
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                <title>यश-राधिका ने प्रशंसकों को दीं उगादी की शुभकामनाएं, बोले – ‘आपको मिलें ढेरों खुशियां’</title>
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                        <![CDATA[<p>मुंबई, 30 मार्च (वेब वार्ता)। उगादी (हिंदू नववर्ष) के अवसर पर रविवार को कन्नड़ सुपरस्टार यश और उनकी पत्नी राधिका पंडित ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर प्रशंसकों को ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कामना की कि यह साल उनकी जिंदगी में ढेर सारी खुशियां और मिठास लेकर आए।</p>
<p>इंस्टाग्राम पर साझा पोस्ट में उन्होंने लिखा, “यह नया साल आपके और आपके परिवार के लिए ढेरों खुशियां, शांति और समृद्धि लेकर आए। उगादी ‘बेवू बेला’ (नीम के पत्ते और गुड़) कड़वे-मीठे रसों से भरे जीवन के जैसा है। आपको उगादी और गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं।”</p>
<p>केजीएफ फ्रेंचाइजी के स्टार</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139711/yash-radhika-gave-the-fans-wishing-ugadi-you-get-a-lot-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-03/b27032025-03.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई, 30 मार्च (वेब वार्ता)। उगादी (हिंदू नववर्ष) के अवसर पर रविवार को कन्नड़ सुपरस्टार यश और उनकी पत्नी राधिका पंडित ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर प्रशंसकों को ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कामना की कि यह साल उनकी जिंदगी में ढेर सारी खुशियां और मिठास लेकर आए।</p>
<p>इंस्टाग्राम पर साझा पोस्ट में उन्होंने लिखा, “यह नया साल आपके और आपके परिवार के लिए ढेरों खुशियां, शांति और समृद्धि लेकर आए। उगादी ‘बेवू बेला’ (नीम के पत्ते और गुड़) कड़वे-मीठे रसों से भरे जीवन के जैसा है। आपको उगादी और गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं।”</p>
<p>केजीएफ फ्रेंचाइजी के स्टार यश और राधिका ने इंस्टाग्राम पर एक साझा पोस्ट डाली। तस्वीर में यश ग्रे पैंट के साथ शर्ट पहने हुए हैं, जबकि उनकी पत्नी गुलाबी, क्रीम और नीले रंग की साड़ी में दिखाई दीं।</p>
<p>इससे पहले 9 मार्च को राधिका ने एक पोस्ट शेयर किया था, जिसमें यश उनके लिए ‘जोतेयाली जोतेयाली’ गाना गाते नजर आए थे। ‘केजीएफ’ स्टार यश ने पत्नी राधिका को उनके 41वें जन्मदिन के मौके पर यह प्यारा सा सरप्राइज दिया, जिसकी झलक अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर दिखाई थी। वीडियो में यश भीड़ से भरे एक हॉल में पत्नी राधिका के लिए गाना गाते नजर आए।</p>
<p>राधिका ने अपने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया, जिसमें यश गाना गाते नजर आए। यश के दिल को छू लेने वाले प्रदर्शन की फैंस ने खूब सराहना की। वीडियो में देखा जा सकता है कि गाना गाने के बाद यश मंच से नीचे उतरे और राधिका के साथ भीड़ में शामिल हो गए।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि यश और राधिका की पहली मुलाकात साल 2004 में आए एक कन्नड़ शो ‘नंदागोकुल’ के सेट पर हुई थी। हालांकि, राधिका ने शूटिंग के दौरान उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें लगा कि यश का रवैया सही नहीं है। इसके बाद दोनों दोस्त बन गए और साथ में कई प्रोजेक्ट में काम भी किया, जिसमें ‘मिस्टर एंड मिसेज रामचारी’ के साथ अन्य नाम भी शामिल हैं।</p>
<p>धीरे-धीरे यश और राधिका की दोस्ती प्यार में बदल गई और दोनों ने 9 दिसंबर 2016 में शादी कर ली। यश और राधिका को दो बच्चे हैं। जोड़े ने बेटी का नाम आयरा और बेटे का नाम यथर्व रखा है।</p>
<p>वर्कफ्रंट की बात करें तो यश जल्द ही बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ में नजर आएंगे। फिल्म में उनके साथ कियारा आडवाणी और नयनतारा मुख्य भूमिकाओं में हैं।</p>
<p>फिल्म का निर्माण कन्नड़ और अंग्रेजी दोनों में होगा। जानकारी के अनुसार, गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी फिल्म हिंदी, तेलुगू, तमिल, मलयालम समेत अन्य कई भाषाओं में डब की जाएगी।</p>
<p>फिल्म का निर्माण वेंकट के. नारायण और यश ने केवीएन प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के तहत संयुक्त रूप से किया है। गोवा की पृष्ठभूमि पर आधारित ‘टॉक्सिक’ एक ड्रग कार्टेल की अंधेरी दुनिया के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।</p>
<p>इसके अलावा, यश के पास अभिनेता रणबीर कपूर और साई पल्लवी के साथ फिल्म ‘रामायण’ भी है। जानकारी के अनुसार, नितेश तिवारी की फिल्म में यश लंकापति रावण की भूमिका में नजर आएंगे।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Mar 2025 18:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Bhatu Patil]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम रेलवे होली और ग्रीष्मकाल के लिए चलाएगी 11 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>यात्रियों की सुविधा और होली एवं ग्रीष्मकालीन यात्रा मांग को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने विभिन्न गंतव्यों के लिए 11 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। ये ट्रेनें विशेष किराए पर संचालित होंगी और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।</p>
<p><strong>स्पेशल ट्रेनों का विवरण:</strong></p>
<p>1. मुंबई सेंट्रल - खातीपुरा त्रि-साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल (09001/09002)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 3 मार्च से 30 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>मुंबई सेंट्रल: प्रत्येक सोमवार, बुधवार, शनिवार (रात्रि 22:20 बजे)</li>
<li>खातीपुरा: प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार, रविवार (शाम 19:05 बजे)</li>
<li>रूट: मुंबई सेंट्रल, बोरीवली, वडोदरा, जयपुर सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 2 टियर और एसी 3 टियर</li></ul>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138826/western-railway-will-run-11-pair-special-trains-for-holi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/track-indian-railways.jpg" alt=""></a><br /><p>यात्रियों की सुविधा और होली एवं ग्रीष्मकालीन यात्रा मांग को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने विभिन्न गंतव्यों के लिए 11 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। ये ट्रेनें विशेष किराए पर संचालित होंगी और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।</p>
<p><strong>स्पेशल ट्रेनों का विवरण:</strong></p>
<p>1. मुंबई सेंट्रल - खातीपुरा त्रि-साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल (09001/09002)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 3 मार्च से 30 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>मुंबई सेंट्रल: प्रत्येक सोमवार, बुधवार, शनिवार (रात्रि 22:20 बजे)</li>
<li>खातीपुरा: प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार, रविवार (शाम 19:05 बजे)</li>
<li>रूट: मुंबई सेंट्रल, बोरीवली, वडोदरा, जयपुर सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 2 टियर और एसी 3 टियर</li>
</ul>
<p>2. बांद्रा टर्मिनस - बीकानेर साप्ताहिक स्पेशल (09035/09036)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 5 मार्च से 26 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>बांद्रा टर्मिनस: प्रत्येक बुधवार (सुबह 11:00 बजे)</li>
<li>बीकानेर: प्रत्येक शुक्रवार (सुबह 10:00 बजे)</li>
<li>रूट: वडोदरा, जोधपुर, नागौर, नोखा सहित प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 3 टियर और एसी चेयर कार</li>
</ul>
<p>3. बांद्रा टर्मिनस - रीवा अनारक्षित साप्ताहिक स्पेशल (09129/09130)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 6 मार्च से 27 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>बांद्रा टर्मिनस: प्रत्येक गुरुवार (प्रातः 04:30 बजे)</li>
<li>रीवा: प्रत्येक शुक्रवार (प्रातः 11:00 बजे)</li>
<li>रूट: भुसावल, जबलपुर, सतना सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: द्वितीय श्रेणी के सामान्य कोच</li>
</ul>
<p>4. वलसाड - दानापुर साप्ताहिक स्पेशल (09025/09026)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 3 मार्च से 1 जुलाई 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>वलसाड: प्रत्येक सोमवार (सुबह 08:40 बजे)</li>
<li>दानापुर: प्रत्येक मंगलवार (दोपहर 14:30 बजे)</li>
<li>रूट: इटारसी, प्रयागराज, बक्सर, आरा सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 2 टियर, एसी 3 टियर, स्लीपर क्लास और सामान्य कोच</li>
</ul>
<p>5. वलसाड - खातीपुरा साप्ताहिक स्पेशल (09007/09008)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 6 मार्च से 27 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>वलसाड: प्रत्येक गुरुवार (दोपहर 13:50 बजे)</li>
<li>खातीपुरा: प्रत्येक शुक्रवार (शाम 19:05 बजे)</li>
<li>रूट: वडोदरा, रतलाम, अजमेर, जयपुर सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 2 टियर, एसी 3 टियर, स्लीपर क्लास और सामान्य कोच</li>
</ul>
<p>6. उधना - पटना सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल (09045/09046)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 7 मार्च से 28 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>उधना: प्रत्येक शुक्रवार (सुबह 08:35 बजे)</li>
<li>पटना: प्रत्येक शनिवार (दोपहर 13:05 बजे)</li>
<li>रूट: इटारसी, जबलपुर, प्रयागराज सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: फर्स्ट एसी, एसी 2 टियर, एसी 3 टियर, स्लीपर क्लास और सामान्य कोच</li>
</ul>
<p>7. उधना - मंगलुरु द्वि-साप्ताहिक स्पेशल (09057/09058)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 2 मार्च से 30 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>उधना: प्रत्येक बुधवार, रविवार (रात्रि 20:00 बजे)</li>
<li>मंगलुरु: प्रत्येक गुरुवार, सोमवार (रात्रि 22:10 बजे)</li>
<li>रूट: वलसाड, पुणे, गोवा, कर्नाटक के विभिन्न स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 2 टियर, एसी 3 टियर, स्लीपर क्लास और सामान्य कोच</li>
</ul>
<p>8. उधना - सूबेदारगंज साप्ताहिक स्पेशल (09117/09118)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 7 मार्च से 28 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>उधना: प्रत्येक शुक्रवार (सुबह 05:45 बजे)</li>
<li>सूबेदारगंज: प्रत्येक शनिवार (शाम 19:25 बजे)</li>
<li>रूट: वडोदरा, उज्जैन, ग्वालियर, भिंड सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 3 टियर, स्लीपर क्लास और सामान्य कोच</li>
</ul>
<p>9. अहमदाबाद - ग्वालियर साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल (09411/09412)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 1 मार्च से 29 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>अहमदाबाद: प्रत्येक शनिवार (रात्रि 20:25 बजे)</li>
<li>ग्वालियर: प्रत्येक रविवार (दोपहर 16:30 बजे)</li>
<li>रूट: वडोदरा, नागदा, उज्जैन, गुना, शिवपुरी सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 2 टियर, एसी 3 टियर, स्लीपर क्लास और सामान्य कोच</li>
</ul>
<p>10. राजकोट - महबूबनगर साप्ताहिक स्पेशल (09575/09576)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 3 मार्च से 1 जुलाई 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>राजकोट: प्रत्येक सोमवार (दोपहर 13:45 बजे)</li>
<li>महबूबनगर: प्रत्येक मंगलवार (रात्रि 22:10 बजे)</li>
<li>रूट: अहमदाबाद, सूरत, नांदेड़, हैदराबाद सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 2 टियर, एसी 3 टियर, स्लीपर क्लास और सामान्य कोच</li>
</ul>
<p>11. इंदौर - पुणे साप्ताहिक स्पेशल (09324/09323)</p>
<ul>
<li>चलने की अवधि: 5 मार्च से 26 जून 2025<br />प्रस्थान:</li>
<li>इंदौर: प्रत्येक बुधवार (सुबह 11:15 बजे)</li>
<li>पुणे: प्रत्येक गुरुवार (सुबह 05:10 बजे)</li>
<li>रूट: वडोदरा, सूरत, वसई रोड, लोनावला सहित अन्य प्रमुख स्टेशन</li>
<li>कोच: एसी 2 टियर, एसी 3 टियर, स्लीपर क्लास और सामान्य कोच</li>
</ul>
<p><strong>बुकिंग की जानकारी</strong></p>
<p>इन ट्रेनों की बुकिंग विभिन्न तिथियों से शुरू होगी और इसे आईआरसीटीसी की वेबसाइट और पीआरएस काउंटरों से किया जा सकता है। विस्तृत जानकारी के लिए यात्री www.enquiry.indianrail.gov.in पर देख सकते हैं।</p>]]>
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                                                            <category>गुजरात</category>
                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 13:03:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Loktej]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाशिवरात्रि : शिवालयों में उमड़ी भीड़, बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार पहुंचे अखाड़े के संत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>लखनऊ, 26 फरवरी (भाषा) महाशिवरात्रि के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश भर में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। वाराणसी में भव्य जुलूस से लेकर छोटे शहरों में शांतिपूर्ण अनुष्ठानों तक लोग भगवान शिव से आशीर्वाद लेने के लिए एकत्र हुए।</p>
<p>महाशिवरात्रि के पर्व पर वाराणसी में नागा साधुओं और अखाड़ों के साधु- संतों ने शोभा यात्रा निकाल कर बाबा श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया।</p>
<p>इस शोभा यात्रा में अखाड़ों के महामंडलेश्वर शाही रथ पर विराजमान हुए थे। काशी के लोगों ने ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। शोभा यात्रा में नागा</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/137623/mahashivaratri--crowds-gathered-in-pagoda--baba-kashi-vishwanath-s-court-reached-the-court"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/lord-bhagvan-shiva-shivaji-bholenath.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ, 26 फरवरी (भाषा) महाशिवरात्रि के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश भर में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। वाराणसी में भव्य जुलूस से लेकर छोटे शहरों में शांतिपूर्ण अनुष्ठानों तक लोग भगवान शिव से आशीर्वाद लेने के लिए एकत्र हुए।</p>
<p>महाशिवरात्रि के पर्व पर वाराणसी में नागा साधुओं और अखाड़ों के साधु- संतों ने शोभा यात्रा निकाल कर बाबा श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया।</p>
<p>इस शोभा यात्रा में अखाड़ों के महामंडलेश्वर शाही रथ पर विराजमान हुए थे। काशी के लोगों ने ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। शोभा यात्रा में नागा साधु हाथ में त्रिशूल, गदा और तलवार लिए बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे और जलाभिषेक किया। इस दौरान डमरू की ध्वनि और ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष से पूरा इलाका भक्तिमय रहा।</p>
<p>शोभा यात्रा में शामिल निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानन्द गिरि महाराज ने कहा, "साधु-सन्यासी महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का दर्शन करके कुंभ को पूर्ण मानते है। हम सब साधु-संत अपने भगवान के चरणों में उपस्थिति दर्ज कराने जा रहे है। महादेव ने महाकुंभ को विशाल और भव्य बनाया।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हम सब साधु-संत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सफल महाकुंभ की बधाई देते हैं। इस बार कुंभ के स्वरूप को पूरी दुनिया ने देखा। सनातन को मानने वाले सभी लोगों ने कुंभ में डुबकी लगाई। 60 से 62 करोड़ लोगों ने यहां स्नान किया। यही राम राज्य की परिकल्पना है। अराजक लोगों को कुंभ अच्छा नहीं लगा।"</p>
<p>कैलाशानन्द ने कहा, "सबसे पहले मैं महाकुंभ का निमंत्रण देने महादेव के पास आया था। आज उस महाकुंभ की पूर्णाहुति होने जा रही है। हम सब आज महादेव के चरणों में दर्शन पूजन कर महाकुंभ का समापन करने जा रहे हैं। आज सात अखाड़े काशी में उपस्थित हैं।"</p>
<p>कैलाशानन्द ने कहा कि सभी साधु-संत महादेव से नासिक और उज्जैन में होने वाले आगामी कुंभ के सकुशल सम्पन्न होने की कामना लेकर आये हैं।</p>
<p>श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रशासन के मुताबिक, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम रंग-बिरंगी रोशनी से चमक रहा है और विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से महक रहा है। महाशिवरात्रि के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दिव्य प्रांगण की भव्य आभा देखते ही बन रही है। श्री काशी विश्वनाथ धाम के द्वार से लेकर सभी मंडपों, विग्रहों के मंदिरों की फूलों से आकर्षक सजावट की गई है।</p>
<p>मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि गेट नंबर- चार से लेकर गंगा द्वार तक की गई मनभावन सजावट को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए 25 फरवरी से 27 फरवरी तक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सभी तरह के प्रोटोकॉल पर रोक लगायी गई है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता, छाया समेत सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं जिससे श्रद्धालु कतारबध्य होकर सुगमता से श्री काशी विश्वनाथ महादेव का दर्शन कर सकें।</p>
<p>मिश्रा ने कहा कि इस बार काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के भक्तों की संख्या का नया रिकार्ड बन सकता है। महाशिवरात्रि के पर्व पर बाबा विश्वनाथ पूरी रात अपने भक्तों को दर्शन देंगे। यह क्रम 27 फरवरी की सुबह तक चलेगा।</p>
<p>सम्भल में 46 साल बाद खुले प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में इतने लम्बे अर्से बाद आज पहली महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मंदिर में जलाभिषेक कर रहे लोगों में श्रद्धा, उत्साह और भावना का संगम देखने को मिल रहा है। इस प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में सम्भल से ही नहीं, अन्य शहरों से भी श्रद्धालु कांवड़ में जल ले कर भगवान शिव को चढ़ाने और उनका जलाभिषेक करने आ रहे है।</p>
<p>श्रद्धालु अमन कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ''इस महाशिवरात्रि पर ब्रजघाट से कांवड़ लेकर आया हूं और इस प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर पर जीवन की पहली कांवड़ चढ़ाई है। मुझे बहुत खुशी की अनुभूति हो रही है।</p>
<p>श्रद्धालु संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने 46 साल बाद खुले इस प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में जल चढ़ाया है। ‘‘मेरे लिए यह बड़ी खुशी की बात है।’’</p>
<p>अलीगढ़ में हजारों की संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु सिद्धपीठ खेरेश्वर धाम महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए एकत्र हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हुए 'ओम नमः शिवाय' का जाप किया।</p>
<p>प्रशासन ने भीड़ के लिए मंदिर तक सुगम पहुंच की व्यवस्था की है।</p>
<p>रायबरेली में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मंदिरों में 'हर हर महादेव' के नारे लगाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। शिव मंदिरों में लंबी कतारें लग गईं। लोग भगवान शिव की पूजा करने के लिए अपनी बारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।</p>
<p>कानपुर में लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा आनंदेश्वर मंदिर में दर्शन किये। इसे 'कानपुर की छोटी काशी' के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर का महाभारत से ऐतिहासिक संबंध है और यह आस्था का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर गंगा जल और बेलपत्र चढ़ाए।</p>
<p>राजधानी लखनऊ में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। लोग पूजा-अर्चना के लिए शिव मंदिरों के बाहर कतारों में खड़े नजर आये।</p>]]>
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                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/137623/mahashivaratri--crowds-gathered-in-pagoda--baba-kashi-vishwanath-s-court-reached-the-court</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 12:29:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Loktej]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वरुथिनी एकादशी व्रत 16 अप्रैल को, ये है इस व्रत की विशेषता</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>भोपाल, 15 अप्रैल (हि.स.) । वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी वरुथिनी एकादशी के नाम से जानी जाती है। इस बार यह 16 अप्रैल (रविवार) को पड़ रही है। वरूथिनी एकादशी 15 अप्रैल (शनिवार) रात्रि 08 बजकर 46 पर शुरू होगी और 16 अप्रैल (रविवार) शाम 06 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। वरुथिनी एकादशी व्रत पारण का समय 17 अप्रैल सोमवार को सुबह 05 बजकर 42 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। 16 अप्रैल को श्रीवल्लभाचार्य जी जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा।<br /><br />एकादशी व्रत को लेकर श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के प्रधान</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91288/varuthini-ekadashi-fast-on-16th-april-this-is-the-specialty"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/k15042023-06.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल, 15 अप्रैल (हि.स.) । वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी वरुथिनी एकादशी के नाम से जानी जाती है। इस बार यह 16 अप्रैल (रविवार) को पड़ रही है। वरूथिनी एकादशी 15 अप्रैल (शनिवार) रात्रि 08 बजकर 46 पर शुरू होगी और 16 अप्रैल (रविवार) शाम 06 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। वरुथिनी एकादशी व्रत पारण का समय 17 अप्रैल सोमवार को सुबह 05 बजकर 42 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। 16 अप्रैल को श्रीवल्लभाचार्य जी जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा।<br /><br />एकादशी व्रत को लेकर श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के प्रधान महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया कि एक वर्ष में 24 एकादशी होती हैं, लेकिन जब तीन साल में एक बार अधिकमास (मलमास) आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। धर्मग्रंथों के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली वरुथिनी एकादशी पर विधि पूर्वक पूजा करने और व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जिन लोगों के जीवन में मृत तुल्य कष्ट बन हुआ है, उनके कष्ट दूर होते हैं और विष्णु भगवान हर संकट से भक्तों की रक्षा करते हैं। व्रती को अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है। जो भी व्यक्ति ये व्रत रखता है उसके सारे पाप नष्ट का हो जाते हैं।<br /><br />महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि एकादशी का व्रत करने वाले व्रती को अपने चित, इंद्रियों और व्यवहार पर संयम रखना आवश्यक है। एकादशी व्रत जीवन में संतुलन कैसे बनाए रखना है, सिखाता है। इसको करने वाला व्यक्ति अपने जीवन में अर्थ और काम से ऊपर उठकर धर्म के मार्ग पर चलकर मोक्ष को प्राप्त करता है। यह व्रत पुरुष और महिलाओं दोनों द्वारा किया जा सकता है। कोरोना महामारी के चलते घर में ही पूजन, स्नान एंव दान करें।<br /><br /><strong>व्रत पूजन विधि :</strong><br /><br />एकादशी व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है। दशमी तिथि को सात्विक भोजन ग्रहण कर अगले दिन एकादशी पर सुबह जल्दी उठें और शुद्ध जल से स्नान के बाद सूर्यदेव को जल का अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन घर के मंदिर में श्रीगणेश जी, श्रीलक्ष्मीनारायण, भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण तथा महादेव की भी पूजा की जाती है। श्री लक्ष्मीनारायण की कथा एवं आरती अवश्य करें अथवा कथा पक्का सुनें, एकादशी व्रत का मात्र धार्मिक महत्त्व ही नहीं है, इसका मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के नज़रिए से भी बहुत महत्व है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की अराधना को समर्पित होता है। व्रत मन को संयम सिखाता है और शरीर को नई ऊर्जा देता है।<br /><br />धार्मिक शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल एवं किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इस दिन सात्विक चीजों का सेवन किया जाता है। इस दिन ब्राह्माणों एवं जरूरतमंद लोगों को स्वर्ण, भूमि, फल, वस्त्र, मिष्ठानादि,अन्न दान,विद्या, दान दक्षिणा एवं गौदान आदि यथाशक्ति दान करें एवं अगर आपका स्वस्थ ठीक है तो ही व्रत करें नहीं तो मात्र पूजा पाठ दान करने से आपको इस व्रत का पूरा फल प्राप्त होगा।</p>]]>
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                <pubDate>Sat, 15 Apr 2023 14:02:07 +0530</pubDate>
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                <title>नाचो-गाओ, खुशियां मनाओ कि आई बैसाखी</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>योगेश कुमार गोयल</strong><br /><br />कृषि प्रधान देश भारत में बैसाखी पर्व का संबंध फसलों के पकने के बाद उसकी कटाई से जोड़कर देखा जाता रहा है। इसे विशेष तौर पर पंजाब का प्रमुख त्योहार माना जाता है। वैसे देशभर में बैसाखी को बड़ी धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन सिख समुदाय बैसाखी से ही नए साल की शुरूआत मानते हैं। इस दिन एक-दूसरे को बधाइयां दी जाती हैं। पंजाब में किसान अपने खेतों को फसलों से लहलहाते देखता है तो इस दिन खुशी से झूम उठता है। खुशी के इसी आलम में शुरू होता है गिद्दा और भांगड़ा</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91180/dance-and-sing-and-celebrate-the-arrival-of-baisakhi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/baisakhi-festival.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>योगेश कुमार गोयल</strong><br /><br />कृषि प्रधान देश भारत में बैसाखी पर्व का संबंध फसलों के पकने के बाद उसकी कटाई से जोड़कर देखा जाता रहा है। इसे विशेष तौर पर पंजाब का प्रमुख त्योहार माना जाता है। वैसे देशभर में बैसाखी को बड़ी धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन सिख समुदाय बैसाखी से ही नए साल की शुरूआत मानते हैं। इस दिन एक-दूसरे को बधाइयां दी जाती हैं। पंजाब में किसान अपने खेतों को फसलों से लहलहाते देखता है तो इस दिन खुशी से झूम उठता है। खुशी के इसी आलम में शुरू होता है गिद्दा और भांगड़ा का मनोहारी दौर। पंजाब में ढोल-नगाड़ों की धुन पर पारम्परिक पोशाक में युवक-युवतियां नाचते-गाते और जश्न मनाते हैं। सभी गुरुद्वारों को फूलों तथा रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया जाता है।<br /><br />उत्तर भारत और विशेषतः पंजाब तथा हरियाणा में गिद्दा और भांगड़ा की धूम के साथ मनाए जाने वाले बैसाखी पर्व के प्रति भले ही काफी जोश देखने को मिलता है लेकिन वास्तव में यह त्योहार विभिन्न धर्म एवं मौसम के अनुसार देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। पर्व की खूब धूम रहती है। पश्चिम बंगाल में इसे ‘नबा वर्ष’ के नाम से मनाया जाता है तो केरल में ‘विशू’ नाम से तथा असम में यह ‘बीहू’ के नाम से मनाया जाता है। बंगाल में ‘पोइला बैसाखी’ भी कहा जाता है और वे अपने नए साल की शुरुआत मानते हैं। हिन्दू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हजारों साल पहले इसी दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इसीलिए इस दिन गंगा आरती करने तथा पवित्र नदियों में स्नान की भी परम्परा है।<br /><br />13 अप्रैल 1919 का बैसाखी का दिन आज भी चीख-चीखकर अंग्रेजों के जुल्मों की दास्तान बयान करता है। दरअसल रॉलेट एक्ट के विरोध में अपनी आवाज उठाने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर इस दिन हजारों लोग जलियांवाला बाग में इकट्ठा हुए थे क्योंकि ‘रॉलेट एक्ट’ के तहत न्यायाधीशों और पुलिस को किसी भी भारतीय को बिना कोई कारण बताए और उन पर बिना कोई मुकद्दमा चलाए जेलों में बंद करने का अधिकार दिया गया था। महात्मा गांधी के आह्वान पर भारतवासियों में इस कानून के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश उमड़ पड़ा। इस काले कानून के विरोध में अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों लोगों की विशाल जनसभा चल रही थी, अचानक अंग्रेज सरकार का बर्बर अफसर जनरल डायर वहां पहुंचा और अपने सिपाहियों को सभा के लिए जमा निहत्थी भीड़ पर गोलियां बरसाने आदेश दिया। जलियांवाला बाग में एकत्रित लोगों को चारों ओर से घेरकर बिना किसी पूर्व चेतावनी के उनपर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी। उस खौफनाक हत्याकांड में सैंकड़ों भारतवासी शहीद हो गए थे। हालांकि बाद में उस नृशंस हत्याकांड के सूत्रधार जनरल डायर की हत्या कर उसका बदला ले लिया गया था।<br /><br />बैसाखी को सूर्य वर्ष का प्रथम दिन माना गया है क्योंकि इसी दिन सूर्य अपनी पहली राशि मेष में प्रविष्ट होता है और इसीलिए इस दिन को ‘मेष संक्रांति’ भी कहा जाता है। यह मान्यता रही है कि सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ ही सूर्य अपनी कक्षा के उच्चतम बिन्दुओं पर पहुंच जाता है और सूर्य के तेज के कारण शीत की अवधि खत्म हो जाती है। इस प्रकार सूर्य के मेष राशि में आने पर पृथ्वी पर नवजीवन का संचार होने लगता है। इस तरह बैसाखी खुशियों का त्योहार है। बैसाखी का पवित्र दिन हमें गुरु गोबिन्द सिंह जैसे महापुरुषों के महान् आदर्शों एवं संदेशों को अपनाने तथा उनके पद्चिह्नों पर चलने के लिए प्रेरित करता है। हमें यह संदेश भी देता है कि हमें अपने राष्ट्र में शांति, सद्भावना एवं भाईचारे के नए युग का शुभारंभ करने की दिशा में सार्थक पहल करनी चाहिए।<br /><br />(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)</p>]]>
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                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Apr 2023 15:06:23 +0530</pubDate>
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                <title>जानिए क्यों मनाया जाता है पोंगल का त्यौहार, क्या है इसके पीछे की मान्यता और क्या है इसका महत्व</title>
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                        <![CDATA[14 जनवरी से देशभर में त्यौहारों का सीजन शुरू होने वाली है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/88926/know-why-pongal-festival-is-celebrated-what-is-the-belief"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-01/pongal.jpg" alt=""></a><br /><p>कल यानि 14 जनवरी से देशभर में त्यौहारों का सीजन शुरू होने वाली है। गुजरात समेत पश्चिम-उत्तर भारत में उतरायण, दक्षिण भारत में पोंगल, पंजाब समेत उत्तर भारत के अन्य राज्यों में लोहड़ी और असम समेत पूर्वी भारत में बिहू मनाया जायेगा।</p>
<p>पोंगल भारत के दक्षिणी क्षेत्र, विशेष रूप से तमिलनाडु में एक बहुत बड़ा त्योहार है। उत्तर भारत, विशेषतः पंजाब में जो महत्व लोहड़ी का होता है, वही महत्व पोंगल का दक्षिण भारत में होता है। लोहड़ी की तरह इस त्योहार का संबंध भी किसानों से है। पोंगल फसल के मौसम का उत्सव है। इस समय लोग एक खुशहाल और स्वस्थ जीवन में उनके योगदान के लिए धरती माँ, प्रकृति और खेत, जानवरों का जश्न मनाने के लिए एक साथ आते हैं। इस साल पोंगल 15 जनवरी से 18 जनवरी तक मनाया जाएगा।</p>
<p><strong>ऐसे मनाया जाता है ये त्योहार</strong></p>
<p>आपको बता दें कि दक्षिण भारत में नए साल के रूप मनाए जाने वाला ये त्योहार संपन्नता को समर्पित है। माना जाता है कि इसका इतिहास 1000 साल से भी पुराना है। इस त्योहार को चार दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें पहले दिन भेगी पोंगल, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कन्या पोंगल के रूप में मनाते हैं। इसी से नए साल की शुरुआत होना भी मानते हैं।</p>
<p><strong>क्या है पोंगल का इतिहास</strong></p>
<p>हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि भगवान शिव ने अपने बैल नंदी को हर दिन तेल मालिश करने और महीने में एक बार स्नान और भोजन करने के लिए पृथ्वी पर भेजा था। लेकिन नंदी ने एक बार पृथ्वी पर पहुंचने की घोषणा की कि वह प्रतिदिन भोजन करेगा और महीने में एक बार तेल से स्नान करेगा। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने नंदी को हमेशा के लिए पृथ्वी पर रहने और मनुष्यों को उनके क्षेत्र में मदद करने का श्राप दिया। इसीलिए लोग फसल कटने के बाद फसलों और मवेशियों के साथ इस त्योहार को मनाते हैं। विशेष बात यह है कि इस पर्व में बनने और खाने वाले पकवान का नाम भी पोंगल है। यह उबले हुए मीठे चावल का मिश्रण होता है। यह तमिल शब्द पोंगु से लिया गया है, जिसका अर्थ है "उबालना"।</p>
<p><strong>क्या है पोंगल का महत्व</strong></p>
<p>आपको बता दें कि यह गन्ना, हल्दी और चावल जैसी फसलों की कटाई का मौसम है। लोगों का यह भी मानना ​​है कि पोंगल विवाह, सगाई और अन्य धार्मिक गतिविधियों जैसे शुभ समारोह करने का समय भी होता है।</p>]]>
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                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jan 2023 10:51:47 +0530</pubDate>
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                <title>अहमदाबाद : बड़े धूमधाम से नगर निगम द्वारा आयोजित होने जा रहा है कांकरिया कार्निवल 2022, कोरोना के कारण दो साल बाद हो रहा है आयोजित</title>
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                        <![CDATA[कार्निवल में इस बार की थीम आज़ादी का अमृत महोत्सव, जी-20 समिट, आजादी अमृत काल, आयुर्वेदिक, खेल सहित अन्य विषयों पर कार्यक्रम]]>
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                        <![CDATA[<br /><div>इस वर्ष नगर निगम द्वारा अहमदाबाद के सबसे बड़े उत्सव कांकरिया कार्निवल-2022 का आयोजन किया गया है। कोरोना महामारी के चलते दो साल तक कार्निवाल का आयोजन नहीं हो सका था, लेकिन इस साल नगर निगम द्वारा कांकरिया कार्निवाल को भव्य तरीके से आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। कार्निवाल का आयोजन 4.50 करोड़ की लागत से होने जा रहा है। इसमें लेजर शो, मल्टीमीडिया शो आदि मनोरंजक चीजों समेत छोटे बच्चे से लेकर बड़े तक कांकरिया कार्निवल का भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं। कार्निवाल में साईंराम दवे, आदित्य गढ़वी, काजल महरिया सहित मनोनीत कलाकार लोगों का मनोरंजन करेंगे। इस आयोजन में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने हैं। खेल का आनंद लेने के लिए बच्चों का खेल का मैदान भी बनाया जाएगा।</div><div><br /></div><h2>"आजादी का अमृत महोत्सव" की थीम पर कार्निवाल</h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि कांकरिया कार्निवल 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक आयोजित जाएगा। इस कार्निवल का उद्घाटन मुख्यमंत्री 25 दिसंबर की शाम को करेंगे। इस बार "आजादी का अमृत महोत्सव" थीम पर कांकरिया कार्निवल आयोजित किया जाएगा। 31 दिसंबर यानी साल और कार्निवल के अंतिम दिन 15 राज्यों के कलाकार "एक भारत श्रेष्ठ भारत" थीम पर प्रस्तुति देंगे। इस बार कार्निवाल 4.50 करोड़ की लागत से होगा। इसके अलावा कार्निवाल में स्पॉन्सरशिप भी दी जाएगी। कांकरिया कार्निवाल में पुष्पकुंज, बालवाटिका और व्यायामशाला विद्यालय गेट पर तीन स्थानों पर मंच बनाए जाएंगे। जहां नगर निगम के स्कूलों व निजी स्कूलों के बच्चों के साथ-साथ विभिन्न कलाकारों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इस वर्ष कांकरिया कार्निवाल में विभिन्न पेशेवर समूहों और दिव्यांगजनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे।</div><div><br /></div><h2>कलाकार विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे</h2><div><br /></div><div>बच्चों के लिए विशेष रूप से कांकरिया कार्निवाल की भी योजना बनाई गई है जिसमें बच्चों का शहर बनाया जाएगा। बालनगरी ने बच्चों के खेलने के लिए विभिन्न खेलों और सूचनाओं का आयोजन किया है। इसके अलावा बच्चे स्केटिंग भी करेंगे। 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक हर शाम लोग नामांकित कलाकारों द्वारा गुजराती और हिंदी पार्श्व गायन और रॉक बैंड का आनंद ले सकते हैं। लोक डायरा में साईराम दवे, आदित्य गढ़वी, योगेश गढ़वी सहित प्रख्यात लेखक मनोरंजन करेंगे। </div><div><br /></div><h2>फूडी लोगों के लिए 'फूड फेस्टिवल'</h2><div><br /></div><div>इस कार्निवाल में लाइव चरित्र, जादूगर शो, बहुरुपिया, हॉर्स शो, डॉग शो और कठपुतली शो भी आयोजित किए जाएंगे। कांकरिया कार्निवाल में आने वाले लोगों के लिए फूड फेस्टिवल का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें साइकिल रैली, रक्तदान शिविर, लाफिंग क्लब कार्यक्रम, योग एरोबिक्स, जुंबा और मल्टीमीडिया शो भी आयोजित किए जाते हैं। कार्निवल इतने भव्य तरीके से आयोजित किया जाता है। तो जो लोग तीन साल तक कार्निवल का लुत्फ नहीं उठा पाए, वे इस साल इसका लुत्फ उठा सकेंगे।</div><div><br /></div><h2>फ्लावर शो में 20 से ज्यादा सेल्फी प्वाइंट</h2><div><br /></div><div>हर बार निगम द्वारा कांकरिया कार्निवल और फ्लावर शो की थीम बनाई जाती है। इस बार जी-20 समिट, आजादी अमृत काल, आयुर्वेदिक, खेल सहित अन्य विषयों पर कांकरिया कार्निवल और फ्लावर शो आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। 200 से अधिक प्रजातियों के 5 लाख से अधिक देशी विदेशी फूलों के पौधे देखने को मिलेंगे। इसके अलावा 20 से अधिक सेल्फी प्वाइंट, विभिन्न पशु पक्षी और विषय की आकर्षक फूलों की मूर्तियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।</div><div><br /></div><h2>12 साल से कम उम्र के बच्चों की एंट्री फ्री</h2><div><br /></div><div>इस फ्लावर शो में 30 रुपये एंट्री फीस ली जाएगी। जिसमें स्कूल और 12 साल से कम उम्र के बच्चों की एंट्री फ्री होगी। 14 दिनों तक चलने वाले पुष्प प्रदर्शनी के दौरान रिवरफ्रंट पर बने अटल ब्रिज को दोपहर 2 बजे के बाद बंद कर दिया जाएगा। फ्लावर शो में आने वाली भीड़ को देखते हुए प्रबंधन द्वारा अटल ब्रिज को बंद करने का निर्णय लिया गया है।</div><div><br /></div><h2>सभी के लिए प्रवेश निःशुल्क</h2><div><br /></div><div>गौरतलब है कि कांकरिया कार्निवल में हर साल 20 लाख से ज्यादा लोग आते हैं। इस बार दो साल बाद कांकरिया कार्निवल का आयोजन किया जा रहा है। उस समय प्रतिदिन ढाई लाख लोगों के कांकरिया आने की संभावना जताई जा रही है और व्यवस्था की जा रही है। सात दिनों तक चलने वाले इस कार्निवाल में हर साल की तुलना में इस साल ज्यादा लोगों के आने की उम्मीद है। कांकरिया कार्निवल के दौरान सात दिनों तक कांकरिया लेकफ्रंट में सभी के लिए प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।</div>                                                                            ]]>
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                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Dec 2022 09:57:01 +0530</pubDate>
                
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                <title>करवा चौथ : आज देश भर में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखेंगी व्रत</title>
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                        <![CDATA[जानिए किस समय निकलेगा चांद और क्या है इस व्रत के पीछे की कहानी]]>
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                        <![CDATA[<br /><div>उत्तर भारत में विवाहित स्त्री के जीवन में विशेष स्थान रखने वाले करवा चौथ व्रत का उत्तर भारतीय और राजस्थानी समुदाय में बहुत महत्व है। आज गुरुवार को देश भर में इसे पूरे विधि विधान से मनाया जाएगा। विभिन्न समुदायों, समाजों में पति-पत्नी की लंबी उम्र के लिए उपवास रखने की परंपरा दशकों से चली आ रही है।  गुजरात की महिलाओं में वट सावित्री व्रत का पालन किया जाता है, जबकि उत्तर भारत और राजस्थानी समुदाय की महिलाएं चौथ करती हैं। उत्तर भारतीय, राजस्थानी समुदाय की महिलाओं ने गुरुवार को करवा चौथ की तैयारी कर ली है।  दूसरी ओर, अब गुजराती महिलाओं में भी ऐसा करना आम हो गया है।</div><div><br /></div><h2>क्यों मनाया जाता है ये पर्व</h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का व्रत करवा चौथ सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को रखा जाने वाला इस व्रत के अवसर पर इस साल विशिष्ट संयोग बन रहे हैं, जो इस व्रत का महत्व और बढ़ा रहा है। करवा चौथ के दिन चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र में उदय होंगे। मान्यता है कि इस नक्षत्र में व्रत रखना बेहद शुभ होता है। इस नक्षत्र में चंद्र देव के दर्शन से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।</div><div><br /></div><h2>क्या है करवा चौथ मनाने की कहानी</h2><div><br /></div><div>पौराणिक कथा के अनुसार, करवा नाम की पतिव्रता स्त्री थी। जिसके पति को एक दिन नदी में स्नान करते समय एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ा लिया। पत्नी करवा ने अपने पति के पास पहुंचकर अपने तपोबल से उस मगरमच्छ को बांध दिया। फिर करवा मगरमच्छ को लेकर यमराज के पास पहुंची। जहां करवा ने को यमराज ने अपनी शक्ति से उस मगरमच्छ को मृत्युदंड देने की बात कही। यम के मना करने पर करवा ने  यमराज को मृत्युदंड देने की बात कहने लगी। पास खड़े चित्रगुप्त सोच में पड़ गए। उन्होंने मगर को यमलोक भेज दिया और उसके पति को चिरायु का आशीर्वाद दे दिया। साथ ही चित्रगुप्त ने करवा को आशीर्वाद दिया कि तुम्हारा जीवन सुख-समृद्धि से भरपूर होगा।</div><div><br /></div><h2>इसलिए पड़ा ये नाम, द्रोपदी ने भी किया था व्रत</h2><div><br /></div><div>उस दिन कार्तिक मास की चतुर्थी होने के कारण करवा और चौथ मिलने से इसका नाम करवा चौथ पड़ा। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने भी इस व्रत को किया था, जिसका उल्लेख वारह पुराण में मिलता है।</div><div><br /></div><h2>कब होगा चंद्रोदय</h2><div><br /></div><div>महाराज किरीदत्त शुक्ल ने कहा, गुरुवार को रात 8.41 बजे तक कृतिका नक्षत्र और फिर चंद्रोदय के समय रोहिणी नक्षत्र रहेगा। दोपहर 1.54 बजे तक सिद्धि योग और फिर व्यतिपात योग है।  कौलवकरण का आयोजन देर शाम छद्रोदय के समय होगा।  चंद्रोदय अदाजन रात 8.50 बजे होगा।  इसी दिन वक्रतुंड संकट चतुर्थी मनाई जाएगी।</div>                                                                            ]]>
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                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80797/karva-chauth-today-married-women-across-the-country-will-observe-a-fast-for-the-long-life-of-their-husbands</link>
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                <pubDate>Thu, 13 Oct 2022 09:27:22 +0530</pubDate>
                
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                <title>पारंपरिक मिठाई वाले सतर्क हो जाएं, देश में चॉकलेट का चलन बढ़ रहा है!</title>
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                        <![CDATA[पिछले वर्ष की एक अंक की वृद्धि की तुलना में चॉकलेट के आयात में इस साल 25 प्रतिशत की वृद्धि]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80751/traditional-sweets-beware-chocolate-is-on-the-rise-in-the-country"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/4972_chocolate1.jpg" alt=""></a><br /><div>जल्द ही अब भारत में त्याहौरों का सीजन शुरू होने जा रहा है। त्यौहार मतलब मज़े करना और जमकर मिठाई खाना! त्यौहार बिना मीठे के अधुरा ही है। अब भारतीय पारंपरिक मिठाइयों के बजाय चॉकलेट का सेवन कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश ने वित्त वर्ष 22 के दौरान चॉकलेट के आयात में पिछले वर्ष की एक अंक की वृद्धि की तुलना में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।</div><div>आपको बता दें कि भारत में त्योहारों पर मिठाई की जगह चॉकलेट देने का चलन बढ़ता जा रहा है। चॉकलेट के आयात में वृद्धि का एक अन्य कारण देश में कोको का कम उत्पादन है जो चॉकलेट की बढ़ती मांग को पूरा करने में विफल रहा है। भारतीयों के बदलते स्वाद और बदलती जीवन शैली के कारण चॉकलेट तेजी से भारत में पारंपरिक मिठाइयों की जगह ले रही है। इनमें भारतीयों को इंपोर्टेड चॉकलेट खाने का बहुत शौक होता है। भारत का चॉकलेट बाजार, दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक, 2021 में 2।2 बिलियन अमरीकी डालर को छू गया, जो अब 2027 तक 3।8 बिलियन अमरीकी डालर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 9।1 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ रहा है।</div><div>काजू और कोको विकास निदेशालय (DCCD) के अनुसार, भारत पिछले कई वर्षों से चॉकलेट की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोको आयात पर निर्भर है। जिसका आयात 10 साल पहले 50,000 टन था, तीन साल पहले 5 से 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ 80,000 टन को पार कर गया। पिछले साल पहली बार इसका आयात 1 लाख टन को पार कर गया था।</div><div>एक रिपोर्ट के मुताबिक चॉकलेट इंडस्ट्री पर कोरोना महामारी का कोई असर नहीं पड़ा है। खुदरा दुकानों के बंद होने से जहां ऑफलाइन बिक्री प्रभावित हुई वहीं दूसरी ओर घरेलू खपत में भारी इजाफा देखने को मिला। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता का लाभ उठाते हुए, चॉकलेट कंपनियां अभिनव विपणन के माध्यम से उपभोक्ताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं।</div>                                                                            ]]>
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                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 Jul 2022 07:59:01 +0530</pubDate>
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