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                <title>Indian Railways - Loktej</title>
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                <description>Indian Railways RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारतीय रेलवे को जल्द मिलेंगी 120 नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 13 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय रेलवे की सबसे महत्वाकांक्षी ‘वंदे भारत स्लीपर ट्रेन’ परियोजना को लेकर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने महत्वपूर्ण घोषणा की है।</p>
<p>रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के स्थापना दिवस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अत्याधुनिक स्लीपर ट्रेन का पहला प्रारूप यानी प्रोटोटाइप अगले एक वर्ष के भीतर परीक्षण के लिए तैयार हो जाएगा।</p>
<p>इस परियोजना के तहत कुल 120 ट्रेनों की खेप तैयार की जानी है, जो लंबी दूरी की यात्रा को सेमी-हाई-स्पीड और बेहतर सुविधाओं के साथ सुलभ बनाएगी। रेलवे बोर्ड के अनुसार, यह प्रोजेक्ट देश के रेल ढांचे को आधुनिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146560/indian-railways-will-soon-get-120-new-vande-bharat-sleeper"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-08/1932_vande-bharat-train.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 13 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय रेलवे की सबसे महत्वाकांक्षी ‘वंदे भारत स्लीपर ट्रेन’ परियोजना को लेकर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने महत्वपूर्ण घोषणा की है।</p>
<p>रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के स्थापना दिवस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अत्याधुनिक स्लीपर ट्रेन का पहला प्रारूप यानी प्रोटोटाइप अगले एक वर्ष के भीतर परीक्षण के लिए तैयार हो जाएगा।</p>
<p>इस परियोजना के तहत कुल 120 ट्रेनों की खेप तैयार की जानी है, जो लंबी दूरी की यात्रा को सेमी-हाई-स्पीड और बेहतर सुविधाओं के साथ सुलभ बनाएगी। रेलवे बोर्ड के अनुसार, यह प्रोजेक्ट देश के रेल ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।</p>
<p>हालांकि निर्माण कार्य तेज गति से जारी है, लेकिन इसके लॉन्च की निश्चित तारीख को लेकर अलग- अलग कयास लगाए जा रहे हैं। RVNL के प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने इसके जून 2026 तक तैयार होने के संकेत दिए हैं, जबकि कुछ तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि जटिल डिजाइन और कड़े सुरक्षा मानकों के कारण अंतिम परीक्षण में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।</p>
<p>गौरतलब है कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को इसी वर्ष 17 जनवरी को कामाख्या और हावड़ा के बीच शुरू किया जा चुका है।</p>
<p>अब रेलवे का पूरा ध्यान शेष ट्रेनों के प्रोटोटाइप को जल्द से जल्द ट्रैक पर उतारने पर है।</p>
<p>इन नई स्लीपर ट्रेनों को विशेष रूप से रात के सफर और लंबी दूरी के यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। इनमें बेहतर एर्गोनॉमिक्स, आधुनिक इंटीरियर और उन्नत सुरक्षा फीचर्स शामिल होंगे, जो वर्तमान राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से भी बेहतर अनुभव प्रदान करेंगे।</p>
<p>फिलहाल रेल मंत्रालय ने भविष्य के अन्य रूट्स को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन चर्चा है कि प्रमुख मेट्रो शहरों को जोड़ने वाले व्यस्त मार्गों पर इन ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<p>इस परियोजना से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं भी मिल सकेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:26:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अहमदाबाद-रतलाम रेल मंडलों के लिए 398.36 करोड़ की ओएफसी बैकबोन परियोजना को मंज़ूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi"> 04 अप्रैल (वेब वार्ता)। रेलवे ने पश्चिमी रेल में संचार अवसंरचना को मज़बूत करने के लिए 398.36 करोड़ की ऑप्टिकल फाइबर केबल बैकबोन परियोजना को मंजूरी प्रदान की है। रेलवे ने शनिवार को बताया कि इस परियोजना तहत अहमदाबाद और रतलाम मंडलों में 4</span>×<span lang="hi" xml:lang="hi">48 ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बैकबोन लगाने की मंज़ूरी प्रदान की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर कुल 398.36 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रेलवे के अनुसार इस परियोजना को </span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय रेलवे के बाकी बचे मार्गों पर दीर्घकालिक विकास (एलटीई ) के संचार बैकबोन के साथ ‘कवच’ की व्यवस्था (अम्ब्रेला वर्क 2024–25)</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi"> 04 अप्रैल (वेब वार्ता)। रेलवे ने पश्चिमी रेल में संचार अवसंरचना को मज़बूत करने के लिए 398.36 करोड़ की ऑप्टिकल फाइबर केबल बैकबोन परियोजना को मंजूरी प्रदान की है। रेलवे ने शनिवार को बताया कि इस परियोजना तहत अहमदाबाद और रतलाम मंडलों में 4</span>×<span lang="hi" xml:lang="hi">48 ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बैकबोन लगाने की मंज़ूरी प्रदान की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर कुल 398.36 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रेलवे के अनुसार इस परियोजना को </span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय रेलवे के बाकी बचे मार्गों पर दीर्घकालिक विकास (एलटीई ) के संचार बैकबोन के साथ ‘कवच’ की व्यवस्था (अम्ब्रेला वर्क 2024–25)</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> नाम के अम्ब्रेला वर्क के तहत मंज़ूर किया गया है। इस अम्ब्रेला वर्क के लिए ‘कार्य कार्यक्रम 2024–25 (पीएच-33)’ के तहत कुल 27,693 करोड़ रुपये की लागत से मंज़ूर की गई है। पश्चिमी रेलवे के लिए भी 2,800 करोड़ रुपये की लागत से एक सब-अम्ब्रेला वर्क मंज़ूर किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत इस परियोजना शुरू की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रेलवे ने बताया कि इस परियोजना के तहत पश्चिमी रेलवे में 1929 रूट किलोमीटर (आरकेएम) के दायरे में 2</span>×<span lang="hi" xml:lang="hi">48 फाइबर वाली ओएफसी केबल बिछाई जाएंगी। इसमें अहमदाबाद मंडल में 1456 आरकेएम और रतलाम मंडल में 473 आरकेएम शामिल है। रेलवे ने बताया कि संचार बैकबोन में इस अहम बढ़ोतरी से रेलवे संचार प्रणालियों की क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वसनीयता और कार्यकुशलता बढ़ेगी। यह आधुनिक सिग्नलिंग प्रणालियों को भी मदद देगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें ‘कवच’ को लागू करना भी शामिल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पूरे नेटवर्क में डेटा का बिना किसी रुकावट के ट्रांसमिशन हो सकेगा। रेलवे के अनुसार यह पहल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा बढ़ाने और डिजिटल बदलाव की दिशा में एक और कदम है। इससे यात्रियों और माल ढुलाई के कामों में बेहतर परिचालन क्षमता और बेहतर सेवा वितरण सुनिश्चित होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 12:07:30 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेलवे के लोको पायलट्स ने खोला मोर्चा, 27 मार्च को जंतर-मंतर पर महाआंदोलन का एलान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 14 मार्च (वेब वार्ता)। इंडियन रेलवे के लोको पायलट्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 27 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।</p>
<p>ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के अनुसार, ड्राइवर असुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्यधिक प्रशासनिक दबाव के कारण तनाव में हैं।</p>
<p>नियमों के विपरीत लोको पायलटों को लगातार छह से सात रातों तक ड्यूटी करने पर मजबूर किया जा रहा है, जबकि नियम अधिकतम चार रात की ही अनुमति देते हैं। इस स्थिति के कारण ड्राइवरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे रेल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146016/railway-loco-pilots-opened-the-front-and-announced-a-great"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d15032024-13-railway.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 14 मार्च (वेब वार्ता)। इंडियन रेलवे के लोको पायलट्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 27 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।</p>
<p>ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के अनुसार, ड्राइवर असुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्यधिक प्रशासनिक दबाव के कारण तनाव में हैं।</p>
<p>नियमों के विपरीत लोको पायलटों को लगातार छह से सात रातों तक ड्यूटी करने पर मजबूर किया जा रहा है, जबकि नियम अधिकतम चार रात की ही अनुमति देते हैं। इस स्थिति के कारण ड्राइवरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे रेल सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p>रेलवे में लोको रनिंग स्टाफ के लगभग 31,000 पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण मौजूदा कर्मचारियों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा है। एसोसिएशन का दावा है कि ड्राइवरों को अनिवार्य 16 घंटे के बजाय महज 14 घंटे के आराम के बाद ड्यूटी पर बुला लिया जाता है।</p>
<p>इसके अलावा, कई रेल इंजनों में अब भी वॉशरूम जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जिससे महिला ड्राइवरों को लंबी यात्रा के दौरान भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोको पायलट्स अब किलोमीटर भत्ते (KMA) में 25 फीसदी की बढ़ोतरी और स्टाफ की तुरंत भर्ती की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>सिस्टम की अनदेखी से नाराज होकर पिछले महीने 70 से अधिक लोको पायलटों ने सामूहिक रूप से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) की मांग की है।</p>
<p>पायलटों का कहना है कि रनिंग रूम में खराब गुणवत्ता वाले भोजन और असुरक्षित कार्य वातावरण की वजह से उनका पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है।</p>
<p>हालांकि रेलवे प्रशासन का दावा है कि उन्होंने रनिंग रूम में एयर-कंडीशनर और योग कक्ष जैसी सुविधाएं दी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ड्राइवरों का संघर्ष जारी है।</p>
<p>27 मार्च का यह प्रदर्शन रेलवे के परिचालन और सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़ा विरोध साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 16:54:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली के लिए रेलवे चला रहा है 30 अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें: मुंबई से पूर्वांचल और बिहार के लिए बढ़ाई गई सेवाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 19 फरवरी (वेब वार्ता)। होली के त्योहार पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने 30 अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन सेवाएं शुरू करने का फैसला किया है।</p>
<p>इनमें से 8 ट्रेनें लोकमान्य तिलक टर्मिनस मुंबई से सुल्तानपुर और वाराणसी के बीच चलाई जा रही हैं, जबकि 22 ट्रेनें रक्सौल, सहरसा और धनबाद के लिए पहले से चल रही सेवाओं का विस्तार हैं। यह व्यवस्था यात्रियों को बेहतर सुविधा देने और भीड़ कम करने के लिए की गई है।</p>
<p>लोकमान्य तिलक टर्मिनस मुंबई से सुल्तानपुर के बीच चार स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। ट्रेन नंबर 04211 होली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145665/railways-is-running-30-additional-special-trains-for-holi-services"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/9832_indian-railways-train.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 19 फरवरी (वेब वार्ता)। होली के त्योहार पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने 30 अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन सेवाएं शुरू करने का फैसला किया है।</p>
<p>इनमें से 8 ट्रेनें लोकमान्य तिलक टर्मिनस मुंबई से सुल्तानपुर और वाराणसी के बीच चलाई जा रही हैं, जबकि 22 ट्रेनें रक्सौल, सहरसा और धनबाद के लिए पहले से चल रही सेवाओं का विस्तार हैं। यह व्यवस्था यात्रियों को बेहतर सुविधा देने और भीड़ कम करने के लिए की गई है।</p>
<p>लोकमान्य तिलक टर्मिनस मुंबई से सुल्तानपुर के बीच चार स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। ट्रेन नंबर 04211 होली स्पेशल 27.02.2026 और 03.03.2026 को मुंबई से दोपहर 14:35 बजे रवाना होगी और अगले दिन रात 23:00 बजे सुल्तानपुर पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर 04212 26.02.2026 और 02.03.2026 को सुल्तानपुर से सुबह 04:00 बजे निकलेगी और अगले दिन दोपहर 12:20 बजे मुंबई पहुंचेगी।</p>
<p>इसी तरह वाराणसी के लिए चार स्पेशल ट्रेनें हैं। ट्रेन नंबर 04225 26.02.2026 और 02.03.2026 को मुंबई से दोपहर 14:35 बजे रवाना होगी और तीसरे दिन सुबह 02:05 बजे वाराणसी पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर 04226 25.02.2026 और 01.03.2026 को वाराणसी से सुबह 01:35 बजे निकलेगी और अगले दिन दोपहर 12:20 बजे मुंबई पहुंचेगी।</p>
<p>इन ट्रेनों में ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, चालीसगांव, पचोरा, भुसावल, खंडवा, इटारसी जंक्शन, रानी कंपलपति, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, ओराई, कानपुर सेंट्रल और लखनऊ जैसे प्रमुख स्टेशन पड़ाव हैं। वाराणसी वाली ट्रेनों में सुल्तानपुर और जौनपुर सिटी भी शामिल हैं। प्रत्येक ट्रेन में 16 एसी थ्री-टियर इकोनॉमी कोच और 2 जनरेटर वैन हैं।</p>
<p>इसके अलावा रक्सौल, सहरसा और धनबाद के लिए पहले से चल रही ट्रेनों को होली स्पेशल के रूप में बढ़ाया गया है। मुंबई से रक्सौल के बीच ट्रेन नंबर 05558 पहले हर गुरुवार को चलती थी, अब इसे 12.03.2026 से 02.04.2026 तक बढ़ाया गया है। वापसी में ट्रेन नंबर 05557 10.03.2026 से 31.03.2026 तक चलेगी। कुल 8 स्पेशल सेवाएं हैं। इनमें 1 फर्स्ट कम एसी टू-टियर, 2 एसी टू-टियर, 6 एसी थ्री-टियर, 7 स्लीपर क्लास, 4 जनरल सेकंड क्लास, 1 सेकंड सीटिंग कम गार्ड ब्रेक वैन और 1 जनरेटर कार हैं।</p>
<p>मुंबई से सहरसा के बीच ट्रेन नंबर 05586 हर रविवार को चलती है: अब इसे 08.03.2026 से 29.03.2026 तक बढ़ाया गया है। वापसी में ट्रेन नंबर 05585 06.03.2026 से 27.03.2026 तक चलेगी। कुल 8 स्पेशल सेवाएं हैं। इनमें 2 एसी टू-टियर, 6 एसी थ्री-टियर, 2 एसी थ्री-टियर इकोनॉमी, 6 स्लीपर क्लास, 4 जनरल सेकंड क्लास, 1 सेकंड सीटिंग कम गार्ड ब्रेक वैन और 1 जनरेटर कार हैं।</p>
<p>धनबाद के लिए ट्रेन नंबर 03380 हर गुरुवार को चलती है और अब 12.03.2026 से 26.03.2026 तक बढ़ाई गई है। वापसी में ट्रेन नंबर 03379 10.03.2026 से 24.03.2026 तक चलेगी। कुल 6 स्पेशल सेवाएं हैं। इनमें 2 एसी टू-टियर, 2 एसी थ्री-टियर, 6 एसी थ्री-टियर इकोनॉमी, 6 स्लीपर क्लास, 4 जनरल सेकंड क्लास, 1 सेकंड सीटिंग कम गार्ड ब्रेक वैन और 1 जनरेटर कार हैं।</p>
<p>इन ट्रेनों के समय और पड़ाव में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरक्षण की जानकारी: ट्रेन नंबर 05558, 05586 और 03380 के विस्तारित सफर के लिए बुकिंग 20.02.2026 से शुरू हो गई है। एसी स्पेशल ट्रेन नंबर 04211 और 04225 के लिए बुकिंग 22.02.2026 से खुलेगी।</p>
<p>रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे समय पर बुकिंग करें और स्पेशल ट्रेनों का लाभ उठाएं। यह व्यवस्था होली के दौरान पूर्वांचल, बिहार और झारखंड जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 20:56:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में बीते 11 वर्षों में दोगुनी हुई हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक की संख्या: केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 18 जनवरी (वेब वार्ता)। भारत में हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक की लंबाई बीते 11 वर्षों में दोगुनी से अधिक बढ़कर 84,244 किलोमीटर हो गई है, जो कि 2014 में 31,445 किलोमीटर थी। यह बयान रेल मंत्रालय की ओर से रविवार को दिया गया।</p>
<p>मंत्रालय ने बताया कि समीक्षा अवधि में देश में कुल रेलवे ट्रैक नेटवर्क में हाई-स्पीड ट्रैक की हिस्सेदारी बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है, जो कि पहले 40 प्रतिशत पर थी। इससे ट्रेन ऑपरेशन पहले के मुकाबले अधिक तेज हो गए हैं।</p>
<p>मंत्रालय ने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे ने बीते 11 वर्षों में ट्रैक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145158/the-number-of-high-speed-railway-tracks-in-india-has-doubled"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/track-indian-railways.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 18 जनवरी (वेब वार्ता)। भारत में हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक की लंबाई बीते 11 वर्षों में दोगुनी से अधिक बढ़कर 84,244 किलोमीटर हो गई है, जो कि 2014 में 31,445 किलोमीटर थी। यह बयान रेल मंत्रालय की ओर से रविवार को दिया गया।</p>
<p>मंत्रालय ने बताया कि समीक्षा अवधि में देश में कुल रेलवे ट्रैक नेटवर्क में हाई-स्पीड ट्रैक की हिस्सेदारी बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है, जो कि पहले 40 प्रतिशत पर थी। इससे ट्रेन ऑपरेशन पहले के मुकाबले अधिक तेज हो गए हैं।</p>
<p>मंत्रालय ने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे ने बीते 11 वर्षों में ट्रैक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को बढ़ाने पर तेजी से ध्यान केंद्रित किया है, जिससे ट्रैक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा मानकों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। इन प्रयासों से देश भर में सुरक्षित, तेज और अधिक विश्वसनीय रेल संचालन में योगदान मिला है।</p>
<p>बयान में आगे बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, भारतीय रेलवे ने 6,851 किलोमीटर से अधिक पटरियों का नवीनीकरण किया। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक पटरियों के नवीनीकरण का कार्य चल रहा है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, 2026-27 के लिए 7,900 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण की योजना बनाई गई है, जो परिसंपत्ति की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर निरंतर फोकस को दर्शाता है।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाने का काम भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया गया है ताकि मवेशियों के कुचले जाने और अतिक्रमण की घटनाओं को कम किया जा सके और समग्र सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर की बाड़ लगाई जा<br />चुकी है, जिससे उन खंडों पर सुरक्षा में सुधार हुआ है जहां ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से चलती हैं।</p>
<p>रेलगाड़ियों की सुचारू आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण टर्नआउट रिन्यूएबल में भी मजबूत प्रगति हुई है। 2024-25 में 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस (कास्ट मैंगनीज स्टील) क्रॉसिंग स्थापित किए गए। 2025-26 में 8,000 से अधिक थिक वेब स्विच और 3,000 से अधिक वेल्डेबल<br />सीएमएस क्रॉसिंग स्थापित किए जा रहे हैं।</p>
<p>बयान में बताया गया है कि ट्रैक की स्थिरता बनाए रखने और राइड की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक गिट्टी की मशीनीकृत गहन स्क्रीनिंग लगातार की जा रही है। 2024-25 के दौरान 7,442 किलोमीटर ट्रैक की गहन स्क्रीनिंग पूरी की गई, जबकि 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक<br />ट्रैक की गहन स्क्रीनिंग का काम जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 18:16:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय रेलवे ने 2025 में सबसे दुर्गम इलाकों तक विस्तार किया, सुरक्षा और आधुनिकीकरण को बढ़ावा दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 30 दिसंबर (भाषा) भारतीय रेलवे ने 2025 में कुछ सबसे दुर्गम इलाकों तक अपना विस्तार किया, जिसमें तमिलनाडु के पंबन में देश के पहले ‘वर्टिकल-लिफ्ट’ पुल और चिनाब नदी पर दुनिया के सबसे ऊंचे पुल जैसी ऐतिहासिक परियोजनाएं शामिल रहीं।</p>
<p>इस वर्ष बिरबी-सैरांग लाइन के चालू होने से मिजोरम में भी रेल संपर्क स्थापित हो गया, जिससे पूर्वोत्तर के दूरस्थ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने का लंबे समय से प्रतीक्षित प्रयास पूरा हुआ। इन परियोजनाओं के जरिए दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया।</p>
<p>रेल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144916/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%87-2025-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%AE-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d15032024-13-railway.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 30 दिसंबर (भाषा) भारतीय रेलवे ने 2025 में कुछ सबसे दुर्गम इलाकों तक अपना विस्तार किया, जिसमें तमिलनाडु के पंबन में देश के पहले ‘वर्टिकल-लिफ्ट’ पुल और चिनाब नदी पर दुनिया के सबसे ऊंचे पुल जैसी ऐतिहासिक परियोजनाएं शामिल रहीं।</p>
<p>इस वर्ष बिरबी-सैरांग लाइन के चालू होने से मिजोरम में भी रेल संपर्क स्थापित हो गया, जिससे पूर्वोत्तर के दूरस्थ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने का लंबे समय से प्रतीक्षित प्रयास पूरा हुआ। इन परियोजनाओं के जरिए दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया।</p>
<p>रेल मंत्रालय ने 2025 में देश में 42 परियोजनाएं शुरू कीं, जिनका कुल मूल्य 25,000 करोड़ रुपये से अधिक है।</p>
<p>रेलवे ने इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में विशेष ट्रेनें भी चलाईं और 15 नई ट्रेनों की शुरुआत के साथ वंदे भारत सेवाओं का तेजी से विस्तार किया। रेल मंत्रालय ने वर्ष के अंत की अपनी समीक्षा में बताया कि देश में अब कुल 164 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें सेवाएं दे रही हैं।</p>
<p>रेल मंत्रालय के अनुसार, देश के रेल नेटवर्क में 13 अमृत भारत ट्रेनें भी जोड़ी गईं, जिससे ऐसी सेवाओं की कुल संख्या 30 हो गई। दो नमो भारत रैपिड रेल सेवाएं भी शुरू हो गईं, जो गुजरात के भुज और अहमदाबाद तथा बिहार के मधुबनी जिले के जयनगर को राज्य की राजधानी पटना से जोड़ती हैं।</p>
<p>भारतीय रेलवे ने 2025 में त्योहारों के मौसम और व्यस्त यात्रा अवधि के दौरान भारी यातायात को संभालने के लिए रिकॉर्ड 43,000 विशेष ट्रेन यात्राएं भी संचालित कीं।</p>
<p>रेल मंत्रालय का मुख्य ध्यान बुनियादी ढांचे के निर्माण पर भी रहा, जिसके तहत अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच 900 किलोमीटर से अधिक नई रेल लाइनें चालू की गईं और मौजूदा पटरियों का बड़े पैमाने पर नवीनीकरण किया गया ताकि ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और तेज हो सके।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि ‘ब्रॉड गेज’ नेटवर्क का विद्युतीकरण लगभग पूरा होने की ओर अग्रसर है और लगभग 99.2 प्रतिशत मार्ग पूरे हो चुके हैं।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि देश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना ने 30 नवंबर, 2025 तक 55.63 प्रतिशत प्रगति हासिल कर ली है।</p>
<p>भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए 2025 में ‘रेलवन’ ऐप भी प्रारंभ किया। मंत्रालय ने बताया कि यह ऐप एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 14:46:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय रेलवे की 2030 तक 48 प्रमुख शहरों में ट्रेन क्षमता को दोगुना करने की योजना: मंत्रालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 26 दिसंबर (भाषा) रेल मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि यात्रा में तेज और लगातार हो रही वृद्धि के मद्देनजर अगले पांच वर्षों में प्रमुख शहरों से नयी ट्रेन के प्रस्थान की क्षमता को दोगुना करने की आवश्यकता है।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा बुनियादी ढांचे को बढ़ाने की जरूरत है ताकि आगामी वर्षों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।</p>
<p>वर्ष 2030 तक क्षमता को दोगुना करने के लिए आवश्यक कदमों को रेखांकित करते हुए, योजना में मौजूदा टर्मिनल का अतिरिक्त प्लेटफार्मों के साथ विस्तार, शहरी क्षेत्र के भीतर और आसपास नए टर्मिनल की पहचान और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144853/indian-railways-plans-to-double-train-capacity-in-48-major"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d15032024-13-railway.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 26 दिसंबर (भाषा) रेल मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि यात्रा में तेज और लगातार हो रही वृद्धि के मद्देनजर अगले पांच वर्षों में प्रमुख शहरों से नयी ट्रेन के प्रस्थान की क्षमता को दोगुना करने की आवश्यकता है।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा बुनियादी ढांचे को बढ़ाने की जरूरत है ताकि आगामी वर्षों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।</p>
<p>वर्ष 2030 तक क्षमता को दोगुना करने के लिए आवश्यक कदमों को रेखांकित करते हुए, योजना में मौजूदा टर्मिनल का अतिरिक्त प्लेटफार्मों के साथ विस्तार, शहरी क्षेत्र के भीतर और आसपास नए टर्मिनल की पहचान और शुरुआत, मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स सहित रखरखाव सुविधाओं का निर्माण तथा ट्रैफिक सुविधा संबंधी कार्यों के माध्यम से खंड की क्षमता में वृद्धि जैसे उपाय शामिल हैं।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा, "टर्मिनल की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाते समय, टर्मिनल के आसपास के स्टेशनों पर भी विचार किया जाएगा ताकि क्षमता समान रूप से संतुलित हो। उदाहरण के लिए, पुणे शहर के लिए हडपसर, खड़की और आलंदी पर प्लेटफॉर्म को बढ़ाने और लाइन को सुगम करने के साथ-साथ क्षमता बढ़ाने पर विचार किया गया है।"</p>
<p>मंत्रालय ने कहा, "उपरोक्त कवायद उपनगरीय और गैर-उपनगरीय यातायात दोनों खंडों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। "</p>
<p>मंत्रालय 48 प्रमुख शहरों में स्टेशनों के लिए एक व्यापक कार्यक्रम योजना निदेशालय को प्रस्तुत करेगा। इनमें से कुछ शहर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, पटना, पुणे, मथुरा, आगरा और लुधियाना समेत अन्य हैं।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा, 'इस योजना में समयबद्ध तरीके से ट्रेन के परिचालन की क्षमता को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए योजनाबद्ध, प्रस्तावित या पहले से स्वीकृत कार्य शामिल होंगे।'</p>
<p>रेल मंत्रालय ने कहा, "क्षमता को 2030 तक दोगुना करने की योजना है, लेकिन उम्मीद है कि अगले पांच वर्षों में क्षमता में उत्तरोत्तर वृद्धि की जाएगी ताकि क्षमता वृद्धि का लाभ तुरंत उठाया जा सके।</p>
<p>इससे वर्षों में यातायात की आवश्यकता को उत्तरोत्तर पूरा करने में मदद मिलेगी। योजना तीन श्रेणियों के तहत यानी, तत्काल, अल्पकालिक और दीर्घकालिक कार्यों को वर्गीकृत करेगी।"</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित योजना स्पष्ट समयसीमा और परिभाषित परिणामों के साथ विशिष्ट होनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144853/indian-railways-plans-to-double-train-capacity-in-48-major</link>
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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 21:20:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेलवे: 215 किमी से अधिक यात्रा पर किराया बढ़ा, नयी दरें 26 दिसंबर से प्रभावी होंगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 21 दिसंबर (भाषा) रेल मंत्रालय ने रविवार को घोषणा की कि 215 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए साधारण श्रेणी के टिकट में प्रति किलोमीटर एक पैसा और मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की गैर-वातानुकूलित श्रेणी व सभी ट्रेन की वातानुकूलित श्रेणियों में प्रति किलोमीटर दो पैसे की वृद्धि की जाएगी।</p>
<p>नयी दरें 26 दिसंबर 2025 से प्रभावी होंगी।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा, “उपनगरीय रेलगाड़ियों के मासिक सीजन टिकट और अन्य ट्रेन में 215 किलोमीटर तक की साधारण श्रेणी की यात्रा के किराए में कोई वृद्धि नहीं की गई है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि किराए में इस बढ़ोतरी से रेलवे को 31</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144749/railways-increased-fares-for-journeys-more-than-215-km-new"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d15032024-13-railway.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 21 दिसंबर (भाषा) रेल मंत्रालय ने रविवार को घोषणा की कि 215 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए साधारण श्रेणी के टिकट में प्रति किलोमीटर एक पैसा और मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की गैर-वातानुकूलित श्रेणी व सभी ट्रेन की वातानुकूलित श्रेणियों में प्रति किलोमीटर दो पैसे की वृद्धि की जाएगी।</p>
<p>नयी दरें 26 दिसंबर 2025 से प्रभावी होंगी।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा, “उपनगरीय रेलगाड़ियों के मासिक सीजन टिकट और अन्य ट्रेन में 215 किलोमीटर तक की साधारण श्रेणी की यात्रा के किराए में कोई वृद्धि नहीं की गई है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि किराए में इस बढ़ोतरी से रेलवे को 31 मार्च 2026 तक करीब 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>रेल मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2025 में की गई किराया वृद्धि से अब तक लगभग 700 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 14:43:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो हजार किलोमीटर रेल मार्ग पर कवच का काम पूरा हुआ, हादसों में कमी आई: वैष्णव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) रेल दुर्घटनाओं और कवच सुरक्षा प्रणाली को लेकर द्रमुक के एक सांसद के दावों को खारिज करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि आज दो हजार किलोमीटर से अधिक रेल मार्ग पर कवच सुरक्षा प्रणाली लगाने का काम पूरा हो चुका है और देश में यह काम तेजी से चल रहा है।</p>
<p>लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान द्रमुक सदस्य कलानिधि वीरस्वामी ने एक अखबार की खबर के हवाले से आरोप लगाया कि कवच सुरक्षा प्रणाली पर काम शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक एक भी किलोमीटर मार्ग पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144649/armor-work-completed-on-two-thousand-kilometer-railway-route-accidents"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d15032024-13-railway.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) रेल दुर्घटनाओं और कवच सुरक्षा प्रणाली को लेकर द्रमुक के एक सांसद के दावों को खारिज करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि आज दो हजार किलोमीटर से अधिक रेल मार्ग पर कवच सुरक्षा प्रणाली लगाने का काम पूरा हो चुका है और देश में यह काम तेजी से चल रहा है।</p>
<p>लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान द्रमुक सदस्य कलानिधि वीरस्वामी ने एक अखबार की खबर के हवाले से आरोप लगाया कि कवच सुरक्षा प्रणाली पर काम शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक एक भी किलोमीटर मार्ग पर यह पूरा नहीं हुआ है।</p>
<p>उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लगभग ढाई साल पहले ओडिशा के बालासोर में हुई ट्रेन दुर्घटना में सरकार की ओर से ट्रेन के लोको पायलट पर आक्षेप लगाया गया और उनके परिवार को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ी, जबकि बाद में रिपोर्ट आई कि यह हादसा प्रणाली की विफलता की वजह से हुआ था।</p>
<p>वीरास्वामी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि द्रमुक सांसद ने सदन में पूरी तरह गलत बयान दिया है और उन्हें बालासोर दुर्घटना के बारे में अपने बयान को यहां प्रमाणित करना चाहिए और ‘‘गलत आक्षेप नहीं लगाने चाहिए’’।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘दुर्घटना की जांच पूरी तरह की गई, सभी कार्रवाई की गईं। एक बार भी लोको पायलट को इस मामले में जवाबदेह नहीं ठहराया गया। सदस्य (वीरास्वामी) को अपने बयान को वापस लेना चाहिए। यह पूरी तरह गलत बयान है, जिसे सदन स्वीकार नहीं कर सकता।’’</p>
<p>रेल मंत्री ने कहा कि बालासोर हादसा बहुत दुखद था जिसकी जांच पहले तकनीकी दल ने, फिर रेलवे सुरक्षा आयोग (सीआरएस) ने और बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘सभी तीनों रिपोर्ट जमा कर दी गई हैं। जांच के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किये गये। मैं आरोपियों के नाम नहीं लूंगा, नहीं तो (विपक्षी) सदस्य कहेंगे कि इसमें सामुदायिक एंगल निकाला जा रहा है।’’</p>
<p>परिणामी (कांसिक्वेंशियल) रेल दुर्घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए वैष्णव ने कहा कि 2014-15 में जहां ऐसे रेल हादसों की संख्या 135 थी और इसमें 90 प्रतिशत कमी के साथ संख्या इस साल 11 रह गई।</p>
<p>रेल मंत्री ने कवच प्रणाली के संदर्भ में द्रमुक सदस्य के बयानों को गलत ठहराते हुए कहा, ‘‘सदस्य ने इस संबंध में इस सदन में दिए गए उत्तरों और बयानों को सही से नहीं पढ़ा है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि कवच जटिल प्रणाली है जिसमे ऑप्टिकल फाइबर तार (ओएफसी) पूरी लाइन पर बिछाने, हर स्टेशन पर एक छोटा डेटा केंद्र बनाने, पटरियों पर उपकरण बनाने और सारे लोकोमोटिव में उपकरण लगाने सहित पांच प्रणालियां होती हैं।</p>
<p>वैष्णव ने बताया, ‘‘हमने अब तक 7,129 किलोमीटर ओएफसी लाइन पूरी कर ली है, 860 दूरसंचार टॉवर लगाए जा चुके हैं, 767 स्टेशन पर डेटा सेंटर बन चुके हैं और 3,413 पटरियों पर उपकरण लग चुके हैं। 4,154 लोकोमोटिव में इसके उपकरण लग चुके हैं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आज दो हजार किलोमीटर से अधिक रेल लाइन पर कवच प्रणाली लगाने का काम पूरा हो चुका है। प्रगति तेज है और कवच का काम रफ्तार से चल रहा है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसके अलावा 40,000 टेक्नीशियन और ऑपरेटर को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।</p>
<p>वैष्णव ने विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि स्वचालित रेल सुरक्षा प्रणाली के संबंध में बाकी देशों ने 1970 और 80 के दशक में ही काम कर लिया था, लेकिन भारत में तब की सरकारों ने क्या किया?</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमने 2014 में सरकार बनने के बाद तुरंत इस पर काम चालू किया। 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके विकास की शुरुआत की। 2019 तक कवच का पहला संस्करण विकसित हुआ। अंतिम और चौथा संस्करण 2024 तक विकसित हुआ। इस काम की पूरी दुनिया प्रशंसा कर रही है।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144649/armor-work-completed-on-two-thousand-kilometer-railway-route-accidents</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 14:53:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मंत्रिमंडल ने गुजरात और महाराष्ट्र में 2,781 करोड़ रुपये की दो रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 26 नवंबर (भाषा) सरकार ने बुधवार को गुजरात में द्वारका-कानालुस रेल लाइन के दोहरीकरण और मुंबई महानगर क्षेत्र में बदलापुर और कर्जत के बीच तीसरी एवं चौथी लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी।</p>
<p>सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में 2,781 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।</p>
<p>देवभूमि द्वारका (ओखा)-कानालुस रेल लाइन से द्वारकाधीश मंदिर तक ‘कनेक्टिविटी’ बेहतर होगी और कोयला, नमक, सीमेंट समेत अन्य सामानों के परिवहन में भी सुविधा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144277/cabinet-approves-two-rail-projects-worth-rs-2781-crore-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d15032024-13-railway.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 26 नवंबर (भाषा) सरकार ने बुधवार को गुजरात में द्वारका-कानालुस रेल लाइन के दोहरीकरण और मुंबई महानगर क्षेत्र में बदलापुर और कर्जत के बीच तीसरी एवं चौथी लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी।</p>
<p>सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में 2,781 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।</p>
<p>देवभूमि द्वारका (ओखा)-कानालुस रेल लाइन से द्वारकाधीश मंदिर तक ‘कनेक्टिविटी’ बेहतर होगी और कोयला, नमक, सीमेंट समेत अन्य सामानों के परिवहन में भी सुविधा होगी। वैष्णव ने कहा, "क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 18 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी।"</p>
<p>मंत्री ने कहा कि बदलापुर-कर्जत खंड मुंबई उपनगरीय गलियारे का हिस्सा है और तीसरी और चौथी लाइन परियोजना से क्षेत्र में ‘कनेक्टिविटी’ में सुधार होगा। इस लाइन से दक्षिण भारत से भी ‘कनेक्टिविटी’ बढ़ेगी।</p>
<p>एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बढ़ी हुई लाइन क्षमता से भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा।</p>
<p>बयान में कहा, ‘‘ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव रेल संचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'नए भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में व्यापक विकास करना है।’’</p>
<p>इसमें कहा गया कि ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत नियोजित की गई हैं, जिसका मुख्य ध्यान एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।</p>
<p>महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के 4 जिलों को कवर करने वाली ये दो परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 224 किलोमीटर का विस्तार करेंगी। अनुमोदित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 585 गांवों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी आबादी लगभग 32 लाख है।</p>
<p>बयान में कहा गया, ‘‘कानालुस से ओखा (देवभूमि द्वारका) तक अनुमोदित दोहरीकरण परियोजना, प्रमुख तीर्थ स्थल द्वारकाधीश मंदिर तक बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और इससे पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में मदद मिलेगी।’’</p>
<p>इसमें कहा गया, बदलापुर–कर्जत खंड मुंबई उपनगरीय गलियारे का एक अभिन्न अंग है। तीसरी और चौथी लाइन की यह परियोजना मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी और यात्रियों की भविष्य की मांगों को पूरा करेगी, साथ ही दक्षिण भारत के लिए भी संपर्क सुविधा प्रदान करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144277/cabinet-approves-two-rail-projects-worth-rs-2781-crore-in</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 21:21:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वंदे भारत के निर्माता की पहली यात्रा: भोजन स्वच्छ पर यात्रियों की संख्या कम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 26 नवंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2019 में पहली वंदे भारत ट्रेन शुरू किए जाने के सात साल बाद, देश की पहली स्वदेशी ‘सेमी हाई-स्पीड’ ट्रेन के उत्पादन का नेतृत्व करने वाले सुधांशु मणि को हाल ही में एक यात्री के रूप में इसमें यात्रा करने का अवसर मिला।</p>
<p>लखनऊ के चारबाग स्टेशन से प्रयागराज के लिए ट्रेन में सवार हुए मणि ने अपने अनुभव को मिला-जुला बताया। उन्होंने ट्रेन के बाहरी रूप, ‘एक्जीक्यूटिव क्लास’ में साफ-सफाई और स्वच्छ भोजन की सराहना की लेकिन साथ ही यात्रियों की कम संख्या और कोच के फर्श पर बिछे "अनावश्यक"</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144264/vande-bharat-manufacturers-first-journey-food-number-of-passengers-on"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-08/1932_vande-bharat-train.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 26 नवंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2019 में पहली वंदे भारत ट्रेन शुरू किए जाने के सात साल बाद, देश की पहली स्वदेशी ‘सेमी हाई-स्पीड’ ट्रेन के उत्पादन का नेतृत्व करने वाले सुधांशु मणि को हाल ही में एक यात्री के रूप में इसमें यात्रा करने का अवसर मिला।</p>
<p>लखनऊ के चारबाग स्टेशन से प्रयागराज के लिए ट्रेन में सवार हुए मणि ने अपने अनुभव को मिला-जुला बताया। उन्होंने ट्रेन के बाहरी रूप, ‘एक्जीक्यूटिव क्लास’ में साफ-सफाई और स्वच्छ भोजन की सराहना की लेकिन साथ ही यात्रियों की कम संख्या और कोच के फर्श पर बिछे "अनावश्यक" लाल कालीन पर भी आपत्ति जताई।</p>
<p>मणि ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, "बाहरी रूप काफी हद तक वैसा ही दिखा जैसा हमने बनाया था।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि ‘एक्जीक्यूटिव क्लास’ का कोच "उचित रूप से साफ" था, हालांकि एक अनावश्यक लाल कालीन की पट्टी से वह निराश थे।</p>
<p>सीटों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वे ‘प्रोटोटाइप’ से अधिक आरामदायक थीं। उन्होंने शौचालय को "साफ और कार्यात्मक" बताया लेकिन कहा कि फिटिंग पर लागत कटौती और खरीद प्रणाली की खामियों की छाप स्पष्ट थी।</p>
<p>उन्होंने आंतरिक सज्जा को "सुखद" और भोजन की गुणवत्ता को "स्वच्छ और उचित रूप से स्वादिष्ट" पाया।</p>
<p>हालांकि, कम यात्री संख्या ने उन्हें निराश किया।</p>
<p>मणि ने कहा, "सच कहूं तो यात्रियों की संख्या कम थी - ‘एक्जीक्यूटिव क्लास’ में 25 प्रतिशत से कम और चेयर कार मुश्किल से आधी क्षमता पर थी।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने बहुत पहले ही अनुमान लगा लिया था: चूंकि यह केवल 'डे-ट्रेन मॉडल' (दिन के समय यात्रा का मॉडल) है, इसलिए स्लीपर संस्करण (वेरिएंट) के बिना यह उन मार्गों पर यात्री संख्या के लिए संघर्ष करने पर मजबूर होगी जहां प्रीमियम सुविधाओं के बावजूद ग्राहकों की संख्या कम है।"</p>
<p>वंदे भारत की अधिकतम गति 160 किमी प्रति घंटा होने के बावजूद इसे 130 किमी प्रति घंटा की गति से चलाए जाने पर भी उन्होंने असंतोष व्यक्त किया।</p>
<p>मणि ने 2018 में प्रोटोटाइप ट्रेन 18 (जिसे बाद में वंदे भारत नाम दिया गया) के परीक्षण के दौरान इसमें यात्रा की थी। वह 38 साल के करियर के बाद 31 दिसंबर 2018 को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई के महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144264/vande-bharat-manufacturers-first-journey-food-number-of-passengers-on</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 16:16:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वचालित रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ ​​सितंबर 2025 तक 654 किलोमीटर मार्ग पर काम करने लगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 24 नवंबर (भाषा) स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ सितंबर 2025 तक 654 किलोमीटर रेलमार्ग पर काम करने लगी है। रेल मंत्रालय ने यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत किये गए आवेदन के जवाब में दी है।</p>
<p>मंत्रालय ने बताया कि कवच प्रणाली 155 रेलवे स्टेशन और 2,892 इंजन पर स्थापित की गई है।</p>
<p>रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि देश भर के सभी 18 रेलवे जोन में व्यापक कार्य चल रहा है तथा बहुत जल्द ही और अधिक क्षेत्रों में इस प्रणाली को स्थापित करने का काम शुरू हो जाएगा।</p>
<p>‘कवच’ लोको पायलट को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144239/automated-railway-protection-system-%E2%80%98kavach%E2%80%99-to-become-operational-on-654"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/track-indian-railways.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 24 नवंबर (भाषा) स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ सितंबर 2025 तक 654 किलोमीटर रेलमार्ग पर काम करने लगी है। रेल मंत्रालय ने यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत किये गए आवेदन के जवाब में दी है।</p>
<p>मंत्रालय ने बताया कि कवच प्रणाली 155 रेलवे स्टेशन और 2,892 इंजन पर स्थापित की गई है।</p>
<p>रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि देश भर के सभी 18 रेलवे जोन में व्यापक कार्य चल रहा है तथा बहुत जल्द ही और अधिक क्षेत्रों में इस प्रणाली को स्थापित करने का काम शुरू हो जाएगा।</p>
<p>‘कवच’ लोको पायलट को निर्धारित गति सीमा के भीतर ट्रेन चलाने में मदद करता है, यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो यह स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देता है।</p>
<p>इसे देश में ही डिजाइन, विकसित और तैयार किया गया है। इसका यात्री ट्रेनों में पहला क्षेत्र परीक्षण फरवरी 2016 में शुरू हुआ और जुलाई 2020 में इसे राष्ट्रीय स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली के रूप में अपनाया गया।</p>
<p>आरटीआई के तहत पूछे गए प्रश्न के उत्तर में रेल मंत्रालय ने बताया कि 324 किलोमीटर के कोटा-मथुरा खंड पर 30 जुलाई, 2025 को यह प्रणाली चालू कर दी गई। इसके बाद 225 किमी के कोटा-नागदा खंड पर इस प्रणाली को सात अक्टूबर, 2025 को चालू किया गया।</p>
<p>मंत्रालय ने बताया, ‘‘इसके साथ ही, पूरे मथुरा-नागदा (549 मार्ग किमी) खंड को कवच 4.0 से लैस कर दिया गया है।’’</p>
<p>उसने बताया कि कवच 4.0 को पूर्व रेलवे के 105 किमी हावड़ा-बर्धमान खंड पर भी चालू कर दिया गया है।</p>
<p>चंद्रशेखर गौड़ ने आरटीआई आवेदन कर सितंबर 2025 तक उन स्टेशनों और इंजन की संख्या के बारे में भी जानकारी मांगी, जहां कवच प्रणाली स्थापित की गयी है।</p>
<p>कवच एक जटिल प्रणाली है जिसमें कई घटक होते हैं, जैसे लोको कवच, स्टेशन कवच, दूरसंचार टावर, ट्रैक की पूरी लंबाई में आरएफआईडी टैग आदि।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा, ‘‘31 अक्टूबर 2025 तक कुल 2,892 इंजन को कवच प्रणाली से सुसज्जित किया जा चुका है।’’</p>
<p>उसने बताया कि पश्चिम रेलवे के अंतर्गत मथुरा-कोटा के बीच 77 स्टेशन और कोटा-नागदा के बीच 53 स्टेशन पर, पूर्वी रेलवे में हावड़ा-बर्धमान के बीच 26 स्टेशन को स्टेशन कवच से सुसज्जित किया गया है, इस वर्ष सितंबर तक कुल 155 स्टेशन को स्टेशन कवच से सुसज्जित किया चुका है।</p>
<p>मंत्रालय ने 2020 से कवच पर वर्षवार व्यय की भी जानकारी दी है। इसने 2020-2021 में 66.04 करोड़ रुपये, 2021-22 में 98.42 करोड़ रुपये, 2022-23 में 156.26 करोड़ रुपये, 2023-24 में 669.76 करोड़ रुपये और 2024-25 में 926.37 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144239/automated-railway-protection-system-%E2%80%98kavach%E2%80%99-to-become-operational-on-654</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 21:22:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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