<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.loktej.com/tag/4728/inspirational-story" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Loktej RSS Feed Generator</generator>
                <title>Inspirational story - Loktej</title>
                <link>https://www.loktej.com/tag/4728/rss</link>
                <description>Inspirational story RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मध्य प्रदेश : न अपने जान की और न ही आठ माह के बच्चे की थी परवाह, डूब रहे किसान को देखकर नाले में लगा दी छलांग और बचा लाई एक जान, जानिए बहादुर रवीना की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल के पास के एक गांव नजीराबाद में रहने वाली एक 32 साल की महिला रवीना ने साहस का ऐसा नमूना पेश किया कि आज हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/83701/madhya-pradesh-did-not-care-for-his-life-nor-for-his-eight-month-old-child-seeing-the-drowning-farmer-jumped-into-the-drain-and-saved-a-life-know-the-story-of-brave-raveena"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/6818_news76.jpg" alt=""></a><br /><div>मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पास के एक गांव नजीराबाद में रहने वाली एक 32 साल की महिला रवीना ने साहस का ऐसा नमूना पेश किया कि आज हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। रवीना ने ना सिर्फ अपनी जान की परवाह की और न ही अपने 8 महीने के बेटे की, रवीना ने बड़े सहस के साथ तेज धार पानी में डूब रहे एक किसान की जान बचाई है।</div><div>मामले में मिली जानकारी के अनुसार हुआ ऐसा था कि गुरुवार की शाम नजीराबाद के पास बहने वाले नाले में 'बाढ़' आ जाने से पानी का प्रवाह बहुत तेज हो गया। पानी की इस तेज धारा में दो किसान बहने लगे। रवीना ने इन्हें डूबता देख, उन्हें बचाने के लिए 32 साल की विवाहिता अपने 8 महीने के बेटे को नाले के पास जमीन पर रख नाले में छलांग लगा दी। उसने बहुत प्रयास किया लेकिन वह केवल एक ही किसान को बचा सकी जबकि दूसरा 25 वर्षीय किसान पानी में डूब गया। किसान का शव शुक्रवार सुबह स्थानीय गोताखोरों की मदद से नजीराबाद पुलिस ने नाले से बरामद किया। अब पुलिस समेत स्थानीय लोग महिला के साहस की सराहना कर रहे है। एसएचओ नजीराबाद ने महिला रवीना को पुरस्कृत किया। वहीं महिला का कहना है कि अगर मौके पर मौजूद लोगों ने उसकी मदद की होती तो वह दूसरे किसान को भी बचा लेती।</div><div>इस बारे में एसएचओ नजीराबाद बीपी सिंह बैंस ने बताया कि नजीराबाद के गांव कढैयाशाह निवासी 25 वर्षीय राजू अहिरवार और 23 वर्षीय जितेंद्र अहिरवार सुबह नजीराबाद के खजुरिया गांव स्थित अपने खेत में सोयाबीन की फसल में कीटनाशक का छिड़काव करने गये थे। दोनों गांव के बीच एक नाला बहता है। जब वे अपने खेत को गए थे, तो नाले में कम पानी था। उन्होंने कढैयाशाह गांव के किनारे अपनी बाइक खड़ी की और पैदल ही नाले को पार किया। दोपहर में नजीराबाद में जोरदार बारिश होने के कारण शाम तक पानी से नाला उफना रहा था। नाले में पानी का बहाव तेज था। जितेंद्र और राजू ने नाले को पार करने की कोशिश की। स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें चेतावनी भी दी लेकिन राजू और जितेंद्र ने उनकी एक नहीं सुनी और नाले को पार करने की कोशिश की।</div><div>इसके बाद राजू और जितेंद्र तेज धारा में बहने लगे। पास ही कंजर टपरा झोंपड़ी में रहने वाली 32 वर्षीय रवीना घटना को देख रही थी। जैसे ही उसने राजू और जितेंद्र को तेज धारा में बहते हुए देखा, उसने अपने 8 महीने के बेटे को जमीन के ऊपर घास पर रख दिया और बचाने के लिए नाले में कूद पड़ी। रवीना ने अपनी हिम्मत से जितेंद्र को तो बचा लिया लेकिन राजू को नहीं बचा सकी। राजू पानी में डूब गया। घटना के बाद राजू के भाई सुरेश अहिरवार ने नजीराबाद पुलिस को मामले की सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और राजू की तलाश शुरू की। अगले दिन राजू का शव 15 फीट गहरे पानी से बरामद किया गया।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/83701/madhya-pradesh-did-not-care-for-his-life-nor-for-his-eight-month-old-child-seeing-the-drowning-farmer-jumped-into-the-drain-and-saved-a-life-know-the-story-of-brave-raveena</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/83701/madhya-pradesh-did-not-care-for-his-life-nor-for-his-eight-month-old-child-seeing-the-drowning-farmer-jumped-into-the-drain-and-saved-a-life-know-the-story-of-brave-raveena</guid>
                <pubDate>Sun, 04 Sep 2022 09:29:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2022-09/6818_news76.jpg"                         length="61829"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ठुकराई 55 लाख की नौकरी और पहले प्रयास में UPSC में उत्तीर्ण हुए, जानिये IAS अधिकारी की प्रेरणादायी कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[अपने कॉलेज के दिनों से ही आईएएस बनना चाहते थे भविष्य]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80745/rejected-55-lakh-job-and-cleared-upsc-in-first-attempt-know-the-inspirational-story-of-an-ias-officer"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/8648_jpg202207181536100000.jpg" alt=""></a><br /><div><div>यूपीएससी परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद ही उम्मीदवारों की प्रेरक कहानियां सामने आती हैं। ऐसी ही है राजस्थान के भविष्य देसाई की कहानी। भविष्य देसाई ने यूपीएससी परीक्षा में पूरे भारत में 29वां स्थान प्राप्त किया। भविष्य ने यूपीएससी के लिए गुरुग्राम में एक ट्रेडिंग कंपनी द्वारा दिये गए 55 लाख रुपये के सालाना पैकेज को ठुकरा दिया था।</div><div>भविष्य ने आईएएस बनने के लिए 55 लाख के सैलरी पैकेज की नौकरी छोड़ दी। वह एक आईएएस अधिकारी बनने के लिए इतने दृढ़ थे कि उन्होंने पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा को पास कर लिया। यूपीएससी परीक्षा में भविष्य देसाई को 29 AIR मिला है। </div><div>राजस्थान के अजमेर शहर के रहने वाले देसाई ने अपने कॉलेज के दिनों से ही यूपीएससी की परीक्षा पास करने की योजना बना ली थी। हालांकि लाखों रुपए की नौकरी छोड़ना किसी के लिए भी बड़ी बात होती है। लेकिन भविष्य ने यूपीएससी क्रैक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका अध्ययन कार्यक्रम बहुत सटीक था। नतीजतन, उन्होंने देश में सबसे कठिन परीक्षा को पहले प्रयास क्रैक कर लिया। भविष्य चाहते थे कि पढ़ाई के दौरान उनका ध्यान पूरी तरह से केंद्रित रहे। इसलिए उन्होंने स्मार्टफोन और सोशल मीडिया से दूरी बना ली। भविष्य ने कॉलेज में दाखिला लेते वक्त ही तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सर्विसेज में जाना है। इसकी प्रेरणा उन्हें विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से मिली। उनका टारगेट था कि उन्हें 100 के अंदर रैंक चाहिए थी। अपने लक्ष्य पर फोकस कर दिन-रात पढ़ाई कर तैयारी में जुटे रहे और उम्मीद से ज्यादा बड़ी सफलता हासिल की।</div><div>गौरतलब है कि लगभग 2 साल तक भविष्य स्मार्टफोन और सोशल मीडिया से दूर रहे और खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। उन्होंने दो साल तक बहुत मेहनत की और आज नतीजा उनके सामने है। भविष्य ने अजमेर और कोटा से अपनी पढ़ाई पूरी की है। इसके बाद उन्होंने IIT-JEE Exan को क्रैक किया और IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की।</div></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80745/rejected-55-lakh-job-and-cleared-upsc-in-first-attempt-know-the-inspirational-story-of-an-ias-officer</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/80745/rejected-55-lakh-job-and-cleared-upsc-in-first-attempt-know-the-inspirational-story-of-an-ias-officer</guid>
                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 17:59:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2022-07/8648_jpg202207181536100000.jpg"                         length="57836"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : 70 साल की उम्र में भी बरफ का गोला बेच रहा है ये जोड़ा, प्रतिदिन की कमाई है 12 हजार</title>
                                    <description><![CDATA[जेतपुर के मेवासा गांव में रहने वाला ये जोड़ा वृद्धावस्था में आराम करने के बजाय, गोला बेचकर जीविकोपार्जन करते हैं। दंपति की उम्र 70 साल है और वे पिछले 40 सालों से ये काम कर रहे हैं ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/68967/gujarat-even-at-the-age-of-70-this-couple-is-selling-snowballs-their-daily-earnings-are-12-thousand"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/8242_news37.jpg" alt=""></a><br /><div>गर्मियों में लोग आइस क्यूब या बर्फ का गोला खाना पसंद करते हैं। बहुत से लोग जीवनयापन करने के लिए बर्फ का गोला ही बेचा करते है. आज हम आपको एक ऐसे ही बुजुर्ग जोड़े के बारे में बताने जा रहे हैं जो बर्फ के गोले बनाकर मशहूर हो गए हैं। ये दंपति  बर्फ के गोले बेचकर दिन के 12 हजार रुपये कमाते हैं। जेतपुर के मेवासा गांव में रहने वाला ये जोड़ा वृद्धावस्था में आराम करने के बजाय, गोला बेचकर जीविकोपार्जन करते हैं। दंपति की उम्र 70 साल है और वे पिछले 40 सालों से ये काम कर रहे हैं और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दंपति प्रतिदिन 12 हजार रुपये से अधिक की कमाई करता है।</div><div>जानकारी के मुताबिक, जेतपुर के मेवासा गांव में 70 वर्षीय मुक्ताबेन और प्रेमजीभाई जेठवा परिवार के साथ रह रहे थे. 70 साल की उम्र में भी ये दंपत्ति अपने गांव में बर्फ का गोला बनाकर बेचते हैं। खास बात यह है कि दंपति के बच्चे सूरत में गोला बेचने का काम करते हैं। बुजुर्ग दंपत्ति के गोले इतने प्रसिद्ध हैं कि दूर-दूर से लोग इस जोड़े के गोले खाने के लिए विशेष रूप से आते हैं और लोग अपने दादा-दादी के हाथों के गोले खाते हैं और उनकी पूरी प्रशंसा करते हैं। बुजुर्ग दंपत्ति कैटबरी, संतरा, राजभोग, काला खट्टा, पाइनएप्पल फ्लेवर के गोले बनाते हैं। ये गोले लोगों के बीच बहुत प्रसिद्ध हैं। दंपति दोपहर 3 बजे से रात 2 बजे तक अपनी दुकान खोलते हैं और बुढ़ापे में भी इस तरह से कमाई कर आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं। खास बात यह है कि बुजुर्ग दंपति ने यह भी कहा कि वे अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं और उन्हें साथ रखना चाहते हैं लेकिन बुजुर्ग दंपति का भी मानना है कि जब तक हाथ-पैर चल रहे हैं तब तक बैठकर खाने में मजा नहीं आता। फिलहाल यह बुजुर्ग दंपत्ति बुढ़ापे में भी इसी तरह मेहनत कर 12 हजार रुपये में कमाते है।</div><div>70 साल की मुक्ताबेन के मुताबिक, वह 40 साल से इस धंधे में है और उसका पति सारा सामान लेने बाजार जाते है और उसकी दुकान पर रोजाना 40 से 50 लोग गोला खाने आते हैं. मुक्ताबेन ने लोगों से बुढ़ापे में भी ज्यादा से ज्यादा काम करने और फिर भक्ति करने की अपील की है। एक ग्राहक ने बताया कि वे पिछले 12 से 13 साल से इस बुजुर्ग दंपत्ति का गोला खाने आ रहे हैं। बुजुर्ग दंपत्ति बहुत अच्छे गोला बनाते हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/68967/gujarat-even-at-the-age-of-70-this-couple-is-selling-snowballs-their-daily-earnings-are-12-thousand</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/68967/gujarat-even-at-the-age-of-70-this-couple-is-selling-snowballs-their-daily-earnings-are-12-thousand</guid>
                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 18:59:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2022-06/8242_news37.jpg"                         length="93949"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्यप्रदेश : घर आई बेटियों के स्वागत में हुआ महोत्सव, सजाए गए रथ में मां और बेटियों को कस्बे में घुमाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[गणेश चतुर्थी के दिन दो जुड़वां बेटियों ने लिया जन्म, नाम रखा गया रिद्धि-सिद्धि]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/83246/madhya-pradesh-festival-held-to-welcome-daughters-who-came-home-mothers-and-daughters-were-driven-around-the-town-in-decorated-chariots"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/2292_1.jpg" alt=""></a><br /><div>एक समय था जब लोगों में बेटियों के जन्म पर दुखी होते थे और मातम मानते थे. बेटियों से ज्यादा बेटों की चाहत रखने वाले लोगों के लिए बेटी का पैदा होना किसी भी प्रकार से ख़ुशी की बात नहीं होती थी लेकिन अब समय बदल रहा है. अब समाज में कुछ लोग ऐसे भी है जो बेटा-बेटी में फर्क नहीं करते. लोग तो अब बेटियों के जन्म को भी उत्सव की तरह मनाते है. ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के धार जिले से सामने आया है, जहां दो जुड़वां बेटियों का जन्म होने पर पूरा घर इतना खुश हुआ कि दोनों बेटियों को रथ में बैठाकर घर में प्रवेश कराया गया. मध्य प्रदेश के धार जिले के कुक्षी तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम कोण्दा में जुड़वां बेटियों के घर आगमन पर परिवार बहुत खुश था और दोनों बेटियों और उनकी मां को सजाए गए रथ में घर लाया गया। इससे पहले दोनों बेटियों और मां के रथ को ढोल-नगाड़ों से दो घंटे तक कस्बे में घुमाया गया। इस दौरान बेटियों के दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों ने रथ के आगे जमकर डांस किया। और फिर दुल्हन की तरह उनके पैरों को रोली में भिगोकर घर में छापे गए।</div><div>जानकारी के अनुसार धार के रहने वाले मयूर भायल की पत्नी गर्भावस्था में अपने मायके गई हुई थी, जहां उन्होंने 11 सितंबर 2021 को गणेश चतुर्थी के दिन दो जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था. जन्म के बाद से चार महीने अपने नाना के यहां रहने के बाद जब दोनों बेटियां अपने घर पहुंची तो उनके स्वागत के लिए शानदार तैयारियां की गई. ससुराल वालों ने बहू को दोनों बेटियों के साथ रथ में बैठाया और ढोल-नगाड़ों के साथ घर तक लाए. कोनंदा की रहने वाली मयूर भायाल की पत्नी अपने पिता के घर डोगांव गांव गई थी।</div><iframe src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2FNaiDunia%2Fvideos%2F3090469384509693%2F&amp;show_text=0&amp;width=560" width="560" height="308" style="border:none;" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe><div>गांव के लोगों ने बेटियों के दादा जगदीश भायाल के विचार की सराहना की। डेढ़ साल पहले जगदीश ने अपने बेटे की शादी धूमधाम से मनाई थी। गणेश चतुर्थी के दिन वाहू ने दो पुत्रियों को जन्म दिया। बेटी के पिता मयूर भयाल की कुक्षी में कपड़े की दुकान है। दादा जगदीश भायाल के 6 विधा फार्म हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/83246/madhya-pradesh-festival-held-to-welcome-daughters-who-came-home-mothers-and-daughters-were-driven-around-the-town-in-decorated-chariots</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/83246/madhya-pradesh-festival-held-to-welcome-daughters-who-came-home-mothers-and-daughters-were-driven-around-the-town-in-decorated-chariots</guid>
                <pubDate>Sun, 16 Jan 2022 21:32:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2022-01/2292_1.jpg"                         length="82033"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संघर्ष की कहानी : फर्श से अर्श तक पहुंचा ये आदमी, कभी बेचा करता था संतरे आज है करोड़ों का मालिक</title>
                                    <description><![CDATA[कभी बेचा करता था सड़क पर संतरे,आज है सालाना 400 करोड़ रुपये का टर्नओवर करने वाले अश्मी रोड ट्रांसपोर्ट नाम की ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक,
कोरोना काल में लोगों तक ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए पानी की तरह बहाया पैसा!]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>आपने बहुत से सफल लोगों के बारे में  पढ़ा और सुना होगा। ऐसे लोग अपने जीवन में कठिन से कठिन समय में खुद के हौसले को बुलंद रखते हुए जीवन में बड़ा मुकाम हासिल किया। ऐसे ही लोगों में एक बड़ा नाम है कभी रेलवे स्टेशन पर संतरा बेचने वाले और आज सालाना 400 करोड़ रुपये का टर्नओवर करने वाले अश्मी रोड ट्रांसपोर्ट नाम की ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक और नागपुर के एक बिजनेसमैन प्यारे खान की।</div><div>आपको बता दें कि 1995 में नागपुर रेलवे स्टेशन के बाहर संतरे बेचने वाले प्यारे खान आज एक बड़े ट्रांसपॉर्टर हैं। 400 करोड़ कीमत की कंपनी के मालिक प्यारे के पास लगभग 300 ट्रकें हैं। प्यारे करीब 2 हजार ट्रकों के नेटवर्क को मैनेज करते हैं, जिसके दफ्तर नेपाल, भूटान, बांग्लादेश में हैं। प्यारे खान का कहना है कि वह और उनके 2 भाई, बहन और माता-पिता नागपुर के एक स्लम एरिया में रहते थे। पिताजी गाँव- गाँव जाकर कपड़े बेचते थे लेकिन इसमें ज्यादा कमाई नहीं होने से उन्होंने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद मां ने हमारी परवरिश के लिए किराने की दुकान शुरू की। हमने जब से होश संभाला है तब से खुद को पालने के लिए पैसा कमाया। प्यारे खान आगे बताते है “जब मैं सिर्फ 13 साल का था तब से मैंने काम करना शुरू कर दिया था। 2 महीने गर्मी की छुट्टी में मैं रेलवे स्टेशन पर संतरा बेचने का काम करता था जिसमें प्रतिदिन 50-60 रुपये की बचत होती थी। मैंने कारों की सफाई जैसे बहुत सारे काम किये है। घर की स्थिति ऐसी थी कि मैं पढ़ नहीं सकता था इसलिए दसवीं में फेल होने के बाद मैंने पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया। जब मुझे अपना ड्राइविंग लाइसेंस मिला, तो मैंने एक कूरियर कंपनी में ड्राइवर के रूप में काम करना शुरू कर दिया। इस दौरान जब मेरा एक्सीडेंट हुआ तो मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी।”</div><div>आगे प्यारे खान कहते है “मैंने 2005 में एक ट्रक खरीदा था और 2007 तक मेरे पास 12 ट्रक थे। फिर मैंने कंपनी को अश्मी रोड ट्रांसपोर्ट के रूप में पंजीकृत किया। मैंने उन जगहों पर काम करना शुरू किया जहां दूसरे लोग काम करने से डरते थे। जोखिम उठाते हुए बड़े समूहों ने काम ढूंढना शुरू किया। कुछ साल पहले दो पेट्रोल पंप भी खोले गए थे। फिलहाल कंपनी का कुल कारोबार 400 करोड़ रुपये है। यहां कुल 700 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। हमने अगले दो साल में कंपनी के लिए 1,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। मैं कभी भी सफलता के पीछे नहीं भागा। यही मेरी सफलता का राज है।”</div><div>गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर में जब लोगों के बीच ऑक्सीजन की भारी अछत थी तब प्यारे ने अनगिनत रोगियों के जीवन को बचाने के लिए कड़ी मेहनत की। प्यारे खान ने नागपुर और उसके आसपास के सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे रोगियों को 400 मीट्रिक टन से बहुत अधिक तरल मेडिकल ऑक्सीजन मुहैया कराया था। उन्होंने मरीजों को ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए करोड़ो रुपये खर्च किए थे। </div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80456/story-of-struggle-this-man-reached-the-floor-level-once-used-to-sell-oranges-today-he-is-the-owner-of-crores</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/80456/story-of-struggle-this-man-reached-the-floor-level-once-used-to-sell-oranges-today-he-is-the-owner-of-crores</guid>
                <pubDate>Sat, 15 Jan 2022 21:51:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करनी है यूपीएससी की तैयारी पर वर्तमान नौकरी को लेकर है परेशान तो सुनिए इस आईएस की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[2019 में में ऑल इंडिया रैंक 57 हासिल करने वाली इस अधिकारी ने नौकरी के साथ साथ पास की यूपीएससी की परीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80282/have-to-prepare-for-upsc-but-are-worried-about-the-current-job-then-listen-to-the-story-of-this-is"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-11/4384_yashni-nagrajan.jpg" alt=""></a><br /><div>आज के समय महत्वाकांक्षी युवाओं में यूपीएससी एक बहुत बड़ा लक्ष्य बना हुआ है। यूपीएससी के लिए बहुत ही कठिन परिश्रम की जरुरत होती है और बहुत से युवा यूपीएससी करना चाहते है पर घर की जिम्मेदारी और नौकरी के चक्कर में पढाई को पूरा समय नहीं दे पाते। ऐसे में अगर आप भी नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करने की सोच रहे हैं, तो आपको आईएएस अधिकारी यशनी नागराजन की कहानी जरुर जाननी चाहिए। आपको जानकर हैरानी होगी कि याशनी पूरे दिन नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करती रही। साल 2019 में बेहतर टाइम मैनेजमेंट के चलते उन्होंने चौथे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 57 हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनका मानना है कि यूपीएससी की तैयारी के लिए आपको नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं है। आप कड़ी मेहनत करके नौकरी के साथ अपने सपने को भी पूरा कर सकते हैं।</div><div>अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी में सफलता पाने वाली यशनी के मुताबिक, वह हफ्ते के ज्यादातर समय रोजाना 4 से 5 घंटे पढ़ाई करती थीं। इसके अलावा, वह सप्ताह के अंत में (मुख्यतः शनिवार और रविवार) पूरे दिन पढ़ने की कोशिश करती थी। उनका मानना है कि अगर आप नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं तो आपको वीकेंड पर ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। आपको वीकेंड पर ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहिए और इससे आपकी तैयारी मजबूत होगी। उनका मानना है कि अगर आप सही समय सारिणी बनाते हैं, तो आप रोजाना 4 से 5 घंटे पढ़ाई में लगा सकते हैं।</div><div>यशनी ने लोगों को अपने पसंद के विषय को वैकल्पिक विषय के रूप में चुनने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि शुरू में दूसरों को देखकर भूगोल को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा और उन्होंने शुरुआती प्रयास में इस विषय में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। जब वह असफल हुई और उसने अपना विकल्प बदल लिया। वैकल्पिक विषय यूपीएससी में सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</div><div>यशनी कहती हैं, ''निबंध और नैतिकता ऐसे पेपर हैं जिनमें आप सबसे ज्यादा अंक हासिल कर सकते हैं। इसलिए इन दोनों विषयों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। यशनी का मानना है कि नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन इससे आपको फायदा भी होता है। जब आप काम कर रहे हों, तो असफल होने पर अपने करियर के बारे में ज्यादा चिंता न करें। उनका कहना है कि आप इस परीक्षा को अच्छे समय प्रबंधन और कड़ी मेहनत के साथ पास कर सकते हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80282/have-to-prepare-for-upsc-but-are-worried-about-the-current-job-then-listen-to-the-story-of-this-is</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/80282/have-to-prepare-for-upsc-but-are-worried-about-the-current-job-then-listen-to-the-story-of-this-is</guid>
                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 20:58:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2021-11/4384_yashni-nagrajan.jpg"                         length="51977"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रेरणादायक: नहीं है बाइक तो साईकल से ही फ़ूड डिलीवरी का काम करता है ये युवक</title>
                                    <description><![CDATA[रोजाना साईकल से करता है 16-18 डिलीवरी, रोजाना होता है 100-120 किलोमीटर जितना सफर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/86126/inspirational-if-there-is-no-bike-this-young-man-does-the-work-of-food-delivery-by-bicycle"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/2736_1.png" alt=""></a><br /><div>अगर लगन और मेहनत की जाए तो किसी भी स्थिति में काम किया जा सकता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अहमदाबाद के नवरंगपुरा का एक युवक है जो साइकिल पर खाना पहुंचाता है। इस युवक का नाम अशोक है और वह अभी 20 साल का है पर अभी से ही जितना हो सके उतना कमाना शुरू किया।</div><div>आपको बता दें कि आज कल ऑनलाइन फूड डिलीवरी बहुत लोकप्रिय है। आमतौर पर डिलीवरी बॉय घर पर गर्म खाना पहुंचाने के लिए बाइक का सहारा लेते हैं, लेकिन अगर कोई साइकिल से स्विगी या जोमैटो ऑर्डर करने आए तो हैरानी होगी न! अहमदाबाद के नवरंगपुरा में फूड डिलीवरी वर्कर अशोक एक साल से ज्यादा समय से स्विगी डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम कर रहे हैं। उसके पास वाहन नहीं है, इसलिए उसने साइकिल से डिलीवरी का रास्ता खोज लिया है। वो रोजाना साईकल से 16-18 डिलीवरी करता है।</div><div>एक ओर हम मानते हैं कि भोजन गर्म होने पर ही मज़ेदार रहेगा और अगर कोई भोजन साइकिल पर लेकर आएगा तो खाना बिल्कुल ठंडा हो जाएगा। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि अहमदाबाद ट्रैफिक में बाइक हर बार जल्दी पहुंच जाए। इसलिए एक साल से ज्यादा समय से साइकिल की डिलीवरी कर रहे अशोक को देर से आने की कोई विशेष शिकायत नहीं मिली है। इसके विपरीत कुछ सड़कों पर साइकिल से डिलीवर आसानी से हो सकता हैं।  इसके अलावा, अशोक लंबी दूरी के लिए बीआरटीएस का उपयोग करता है। इसके साथ साथ अशोक बीएससी की पढ़ाई भी करता है।  उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी।  अशोक ने कहा, "मुझे पढ़ाई करनी है और कमाई भी करनी है, इसलिए मैंने दोनों को जारी रखा है।"  अशोक ने यह भी बताया कि कुछ डिलीवरी बॉय साइकिल पर डिलीवरी करते रहे हैं, लेकिन कुछ घंटे काफी हैं। जबकि मैं पूरे दिन यानी सुबह 11 बजे से रात 11-12 बजे तक साइकिल से डिलीवरी करती हूं।  मैं हर दिन 100-120 किलोमीटर साइकिल चलाता हूं और मुझे इससे एक समस्या है।  साइकिल का फायदा यह है कि अन्य डिलीवरी बॉय लंबी दूरी के ऑर्डर नहीं लेते हैं लेकिन अशोक अपने क्षेत्र में 12 से 15 किलोमीटर के लिए ऑर्डर स्वीकार करता है।  साइकिल पर डिलीवरी देखकर ग्राहक भी खुश हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/86126/inspirational-if-there-is-no-bike-this-young-man-does-the-work-of-food-delivery-by-bicycle</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/86126/inspirational-if-there-is-no-bike-this-young-man-does-the-work-of-food-delivery-by-bicycle</guid>
                <pubDate>Tue, 26 Oct 2021 21:54:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2021-10/2736_1.png"                         length="102114"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रेरणादायक: एक ही घर की दो बेटियां सेना में शामिल, पिता टेम्पो चलाकर करते थे गुजारा</title>
                                    <description><![CDATA[बचपन में मां की छत्रछाया खोने के बाद पिता ने संभाला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67949/inspirational-two-daughters-of-the-same-house-joined-the-army-father-used-to-live-by-driving-tempo"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/1270_1.png" alt=""></a><br /><div>आज के समय बेटियां वो सब करके दिखा रही है जो बेटे करते है। आज के समय में लड़कियां कठिन से कठिन काम करके परिवार का नाम रोशन कर रही है। बोटाद में टेम्पो चलाने वाले पिता की दो बेटियों ने उनका नाम रोशन किया है। दोनों बेटियों का सेना में चयन होने से गांव में इस समय खुशी का माहौल है।</div><div>आपको बता दें कि बोटाद के रहने वाले परबतभाई दिन-रात मेहनत कर अपना परिवार चलाते हैं। इस समय इस घर में खुशियों का माहौल है। खुशी का यह माहौल इसलिए है क्योंकि उनकी दोनों बेटियों ने अपना नाम रोशन किया है। परिवार की दोनों बेटियों ने दिन-रात मेहनत की और आज उन्हें देश की सेवा करने का मौका मिला है। ये दोनों बहनें बचपन से ही खेलों में अच्छी रही हैं। दोनों बहनें बचपन से ही देश के लिए कुछ करना चाहती थीं। बचपन में मां की छत्रछाया खोने के बावजूद दोनों बेटियां आत्मविश्वास से भरी थीं। उनके पिता ने बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। ये पिता दोनों बेटियों के भरण-पोषण के लिए रिक्शा चलाते थे। बेटियां सेना में शामिल होना चाहती थीं इसलिए उन्होंने बेटियों को प्रेरित करने के लिए दिन-रात मेहनत की। दोनों बेटियों ने भी पिता की तरह मेहनत की जो अंत में रंग लाई।</div><div>दोनों बहनों की मेहनत रंग लाई है और उनका चयन सेना में हो गया है। ऐसे में परिवार में अब खुशी का माहौल है। वहीं समाज ने भी उन्हें बधाई दी है और खुशी जाहिर की है. दोनों बहनों के चयन से गोरखड़ा गांव के साथ-साथ जिले का भी गौरव बढ़ा है। वहीं ये दोनों युवतियां अब दूसरी युवतियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/67949/inspirational-two-daughters-of-the-same-house-joined-the-army-father-used-to-live-by-driving-tempo</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/67949/inspirational-two-daughters-of-the-same-house-joined-the-army-father-used-to-live-by-driving-tempo</guid>
                <pubDate>Thu, 21 Oct 2021 21:41:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2021-10/1270_1.png"                         length="42804"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रेरणादायक: मजबूर हालात में भी मजबूती से खड़ी है ये बुजुर्ग महिला, भीख मांगने के बदले बेच रही है कलम</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पर रतन की कहानी ने जीता लोगों के दिल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80237/inspirational-this-elderly-woman-is-standing-strong-even-in-forced-circumstances-instead-of-begging-she-is-selling-pens"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/2460_images78.jpg" alt=""></a><br /><div>बहुत से युवाओं को ट्रैफिक सिग्नल पर और सड़कों पर भीख मांगते हुए देखा होगा। हट्टे कट्टे और काम करने में सक्षम होने पर भी ऐसे लोगों को लोगों से भीख मांगना, पैसा कमाने का सबसे आसान तरीका लगता है। हालांकि ऐसे भी कुछ लोग होते हैं जो मुश्किल समय में भी काम करने को वरीयता देते है और भीख नहीं मांगते। उसकी अंतरात्मा इसकी इजाजत नहीं देती। ये लोग कड़ी मेहनत करके दो जून की रोटी खाते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बुरे पलों में भी मेहनत करना नहीं छोड़ते, वो बता देते हैं कि जीवन चलने का नाम है और इसे वो अपनी शर्तों पर जीने का दम रखते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई लोगों की कहानियां सामने आती हैं। महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाली रतन नाम की एक बूढ़ी औरत इस बात का जीता-जागता उदाहरण है।</div><div>महाराष्ट्र के पुणे के एमजी रोड पर पेन बेचने वाली रतन बॉक्स में पेन रखकर लोगों को बेचती हैं। लेकिन इस बॉक्स में एक बड़ी खूबसूरत लाइन लिखी है, ‘मैं भीख नहीं मांगना चाहती। प्लीज 10 रुपये में नीला पेन खरीद लीजिए, शुक्रिया, आशीर्वाद।’ सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद बहुत से लोगों ने रतन की फोटो साझा की है। रतन की की यह कहानी सीखा राठी नाम की एक लड़की ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की है। उन्होंने रतन की एक स्माइल करते हुए बेहद प्यारी तस्वीर शेयर की है। साथ की कैप्शन में रतन की कहानी को बताया है। </div><div class="twitter-tweet twitter-tweet-rendered" style="max-width:550px;width:100%;margin-top:10px;margin-bottom:10px;"><iframe frameborder="0" allowfullscreen="" style="width:550px;height:849px;" title="Twitter Tweet" src="https://platform.twitter.com/embed/Tweet.html?dnt=false&amp;embedId=twitter-widget-0&amp;features=eyJ0ZndfZXhwZXJpbWVudHNfY29va2llX2V4cGlyYXRpb24iOnsiYnVja2V0IjoxMjA5NjAwLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X2hvcml6b25fdHdlZXRfZW1iZWRfOTU1NSI6eyJidWNrZXQiOiJodGUiLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X3NwYWNlX2NhcmQiOnsiYnVja2V0Ijoib2ZmIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH19&amp;frame=false&amp;hideCard=false&amp;hideThread=false&amp;id=1449614652480974853&amp;lang=en&amp;origin=https%3A%2F%2Fwww.loktej.com%2Fadmin_panel%2FNews%2Fadd&amp;sessionId=e023408472f7291e51889a4232b30da3fc24c8fd&amp;theme=light&amp;widgetsVersion=f001879%3A1634581029404&amp;width=550px"></iframe></div> <div>इसी क्रम में सांसद विजया साई रेड्डी वी ने रतन की तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए  लिखा कि रतन मेहनत करके कमाई कर रही है। ईमानदारी से जीने की उनकी कोशिश सभी के लिए प्रेरणादायक है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80237/inspirational-this-elderly-woman-is-standing-strong-even-in-forced-circumstances-instead-of-begging-she-is-selling-pens</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/80237/inspirational-this-elderly-woman-is-standing-strong-even-in-forced-circumstances-instead-of-begging-she-is-selling-pens</guid>
                <pubDate>Wed, 20 Oct 2021 20:01:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2021-10/2460_images78.jpg"                         length="53445"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रेरणादायक कहानी : 20 साल से पिता करते हैं पेट्रोल पंप पर काम, बेटी ने क्रैक किया आईआईटी</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोल पंप पर काम करने वाले पिता की बेटी को मिला आईआईटी कानपुर में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन में दाखिला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80210/inspirational-story-father-works-at-petrol-pump-for-20-years-daughter-cracks-iit"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/2146_1.jpg" alt=""></a><br /><div>हिंदी के एक बड़े कवि दुष्यंत कुमार ने बहुत पहले लिखा है “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों!” आज इस वाक्य को सही सिद्ध किया है पेट्रोल पंप पर काम करने वाले श्री राजगोपालन और उनकी बेटी ने। पिता पेट्रोल पंप पर काम करते हैं और लड़की ने आईआईटी कानपुर में परचम लहरा दिया है। आर्या राजगोपाल नाम की इस लड़की को आईआईटी कानपुर में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन में दाखिला मिल गया है। आर्या को उसकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उसके पिता श्री राजगोपाल पिछले 20 साल से पेट्रोल पंप पर काम कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी आर्या की उपलब्धि को न्यू इंडिया और उनके पिता के लिए रोल मॉडल बताया है।</div><div>आपको बता दें कि केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आर्या और उनके पिता श्री राजगोपालन की तस्वीर के साथ ट्वीट किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, "यह दिल को छू लेने वाली खबर है। आर्या राजगोपाल ने अपने पिता श्री राजगोपालन के साथ-साथ देश के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को इस सफलता पर गौरवान्वित किया है। यह पिता-पुत्री की जोड़ी सभी के लिए एक आदर्श है। हमें और हमें इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।"</div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Heartwarming indeed.<br />Arya Rajagopal has done her father Sh Rajagopal Ji &amp; indeed all of us associated with the country’s energy sector immensely proud. <br />This exemplary father-daughter duo are an inspiration &amp; role models for Aspirational New India. <br />My best wishes.<a href="https://twitter.com/IndianOilcl?ref_src=twsrc%5Etfw">@IndianOilcl</a> <a href="https://t.co/eiU3U5q5Mj">https://t.co/eiU3U5q5Mj</a> <a href="https://t.co/eDTGFhFTcS">pic.twitter.com/eDTGFhFTcS</a></p>— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) <a href="https://twitter.com/HardeepSPuri/status/1445764337755254787?ref_src=twsrc%5Etfw">October 6, 2021</a></blockquote> <div>वहीं आईओसीएल के अध्यक्ष श्रीकांत माधव वैद्य ने भी आर्या और उनके पिता श्री राजगोपालन की एक तस्वीर अपने ट्विटर पर पोस्ट की है और शुभकामनाएं भेजी हैं। उन्होंने ट्वीट किया, "आज मैं आपके साथ आर्या की सफलता की कहानी साझा करूंगा। उनके पिता श्री राजगोपालन इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर काम करते हैं। आर्या ने आईआईटी कानपुर में प्रवेश लेकर हमें गौरवान्वित किया है। आर्या को हमारी शुभकामनाएं।"</div><div>इसके अलावा तमाम लोगों ने आर्या राजगोपाल की इस सफलता को शेयर करते हुए उन्हें बधाई दी है। 'द बेटर इंडिया' ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि आर्या राजगोपाल की कहानी सिर्फ अकादमिक सफलता ही नहीं बल्कि धैर्य और दृढ़ संकल्प की भी कहानी है। उनके पिता पिछले 20 वर्षों से पेट्रोल पंप पर लगातार काम कर रहे हैं ताकि उनकी बेटी का भविष्य उज्जवल हो सके। जैसे ही आर्या राजगोपाल की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तमाम लोग इसे शेयर करने लगे और आर्या के बारे में खोजने लगे। हालांकि अभी तक इतनी ही जानकारी आर्या राजगोपाल के बारे में सामने आई है।</div>                                                                           ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80210/inspirational-story-father-works-at-petrol-pump-for-20-years-daughter-cracks-iit</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/80210/inspirational-story-father-works-at-petrol-pump-for-20-years-daughter-cracks-iit</guid>
                <pubDate>Fri, 08 Oct 2021 19:06:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.loktej.com/media/2021-10/2146_1.jpg"                         length="150389"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        