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                <title>Sasan Gir - Loktej</title>
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                <description>Sasan Gir RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पीएम मोदी ने पहली बार ‘नदी डॉल्फिन’ अनुमान रिपोर्ट जारी की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गिर/नई दिल्ली, 03 मार्च (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश में पहली बार ‘नदी डॉल्फिन’ अनुमान रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश में ‘नदी डॉल्फिन’ की कुल संख्या 6,327 है। इस अग्रणी प्रयास में आठ राज्यों की 28 नदियों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 8,500 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को कवर करने के लिए 3,150 दिनों का समय लगा। वहीं, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई, उसके बाद बिहार, पश्चिम बंगाल और असम का स्थान रहा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोगों और ग्रामीणों की भागीदारी से डॉल्फिन संरक्षण के बारे में जागरुकता के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138864/pm-modi-released-river-dolphin-estimate-report-for-the-first"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-06/narendra-modi.jpg" alt=""></a><br /><p>गिर/नई दिल्ली, 03 मार्च (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश में पहली बार ‘नदी डॉल्फिन’ अनुमान रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश में ‘नदी डॉल्फिन’ की कुल संख्या 6,327 है। इस अग्रणी प्रयास में आठ राज्यों की 28 नदियों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 8,500 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को कवर करने के लिए 3,150 दिनों का समय लगा। वहीं, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई, उसके बाद बिहार, पश्चिम बंगाल और असम का स्थान रहा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोगों और ग्रामीणों की भागीदारी से डॉल्फिन संरक्षण के बारे में जागरुकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने डॉल्फिन के आवास क्षेत्रों में स्कूली बच्चों के लिए जागरुकता यात्राएं भी आयोजित करने की सलाह दी। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान का दौरा किया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 7वीं बैठक की अध्यक्षता की।</p>
<p>राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने वन्यजीव संरक्षण में सरकार की विभिन्न पहलों की समीक्षा की, जिसमें नए संरक्षित क्षेत्रों के निर्माण और प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट, प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड जैसे प्रजाति-विशिष्ट प्रमुख कार्यक्रमों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।</p>
<p>बोर्ड ने डॉल्फिन और एशियाई शेरों के संरक्षण संबंधी प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट्स एलायंस की स्थापना पर भी चर्चा की। एशियाई शेरों की जनसंख्या का अनुमान हर पांच साल में एक बार किया जाता है। पिछली बार ऐसा 2020 में किया गया था। प्रधानमंत्री ने 2025 में आयोजित होने वाले शेरों की संख्या का अनुमान करने के 16वें चक्र की शुरुआत की घोषणा की।</p>
<p>यह देखते हुए कि एशियाई शेरों ने अब प्राकृतिक फैलाव के माध्यम से बर्दा वन्यजीव अभयारण्य को अपना घर बना लिया है, प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि बर्दा में शेर संरक्षण को समर्थन दिया जाएगा। वन्यजीव आवासों के विकास और संरक्षण के साधन के रूप में इको-टूरिज्म के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वन्यजीव पर्यटन के लिए यात्रा और कनेक्टिविटी में आसानी होनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने फ्रंटलाइन वन कर्मचारियों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए मोटरसाइकिलों को भी हरी झंडी दिखाई। उन्होंने गिर में फील्ड स्तर के अधिकारियों से भी बातचीत की, जिसमें फ्रंटलाइन कर्मचारी, इको गाइड और ट्रैकर शामिल थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 22:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता की, शेरों की अनुमानित आबादी की घोषणा की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सासण (गुजरात)/नई दिल्ली, 03 मार्च (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर सोमवार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की सातवीं बैठक की अध्यक्षता की और इस साल मई में एशियाई शेरों की अनुमानित आबादी की घोषणा की।</p>
<p>गिर राष्ट्रीय उद्यान में सुबह अपनी लॉयन सफारी पूरी करने के तुरंत बाद, मोदी गुजरात के जूनागढ़ जिले के सासण में एनबीडब्ल्यूएल की बैठक के लिए रवाना हुए, जिसमें केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और अन्य सदस्यों ने भाग लिया।</p>
<p>इस मौके पर मोदी ने जूनागढ़ में राष्ट्रीय रेफरल केंद्र-वन्यजीव की आधारशिला रखी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/138842/prime-minister-announced-an-estimated-population-of-lions-chaired-by"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-03/b03032025-05.jpg" alt=""></a><br /><p>सासण (गुजरात)/नई दिल्ली, 03 मार्च (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर सोमवार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की सातवीं बैठक की अध्यक्षता की और इस साल मई में एशियाई शेरों की अनुमानित आबादी की घोषणा की।</p>
<p>गिर राष्ट्रीय उद्यान में सुबह अपनी लॉयन सफारी पूरी करने के तुरंत बाद, मोदी गुजरात के जूनागढ़ जिले के सासण में एनबीडब्ल्यूएल की बैठक के लिए रवाना हुए, जिसमें केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और अन्य सदस्यों ने भाग लिया।</p>
<p>इस मौके पर मोदी ने जूनागढ़ में राष्ट्रीय रेफरल केंद्र-वन्यजीव की आधारशिला रखी और इस साल मई में एशियाई शेरों के 16वें जनसंख्या अनुमान की घोषणा की। उन्होंने तमिलनाडु के कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन उत्कृष्टता केंद्र एसएसीओएन की स्थापना की भी घोषणा की और नदी डॉल्फिन पर एक पुस्तक का विमोचन किया।</p>
<p>वन्यजीव संरक्षण पर सरकार को सलाह देने वाली वैधानिक संस्था एनबीडब्ल्यूएल में 47 सदस्य हैं, जिनमें सेना प्रमुख, विभिन्न राज्यों के सदस्य, इस क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, मुख्य वन्यजीव वार्डन और विभिन्न राज्यों के सचिव शामिल हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री एनबीडब्ल्यूएल के पदेन अध्यक्ष होते हैं और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री बोर्ड के उपाध्यक्ष होते हैं।</p>
<p>सफारी के बाद मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि सामूहिक प्रयासों के कारण एशियाई शेरों की आबादी में लगातार वृद्धि देखी गई है। उन्होंने एशियाई शेरों के आवास को संरक्षित करने में आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों और महिलाओं के योगदान की सराहना की।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘आज सुबह विश्व वन्यजीव दिवस पर मैं गिर में सफारी पर गया। जैसा कि हम सभी जानते हैं, गिर एशियाई शेरों का घर है। गिर आकर मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान किए गए सामूहिक कार्यों की कई यादें भी ताज़ा हो गईं।’’</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई वर्षों में, सामूहिक प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया है कि एशियाई शेरों की आबादी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई शेरों के आवास को संरक्षित करने में आदिवासी समुदायों और आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं की भूमिका भी उतनी ही सराहनीय है।’’</p>
<p>प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘पिछले एक दशक में बाघ, तेंदुए, गैंडों की आबादी भी बढ़ी है, जो यह दर्शाता है कि हम वन्यजीवों को कितनी गहराई से संजोते हैं और जानवरों के लिए स्थायी आवास बनाने के लिए काम कर रहे हैं।’’</p>
<p>एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने एशियाई शेरों के संरक्षण के वास्ते ‘प्रोजेक्ट लायन’ के लिए 2,900 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में एशियाई शेर गुजरात के 9 जिलों के 53 तालुकों में करीब 30,000 वर्ग किलोमीटर में रह रहे हैं। एशियाई शेर का वैज्ञानिक नाम पैंथेरा लियो पर्सिका है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, एक राष्ट्रीय परियोजना के हिस्से के रूप में, जूनागढ़ जिले के न्यू पिपल्या में 20.24 हेक्टेयर भूमि पर वन्यजीव के लिए एक राष्ट्रीय रेफरल केंद्र स्थापित किया जा रहा है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से सासण में वन्यजीव ट्रैकिंग के लिए एक उच्च तकनीक निगरानी केंद्र और एक अत्याधुनिक अस्पताल भी स्थापित किया गया है।</p>
<p>राज्य सरकार ने ग्रेटर गिर क्षेत्र में रेलवे पटरियों पर शेरों की आवाजाही के कारण होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे के सहयोग से एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की है। विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘इससे ऐसी घटनाओं में काफी कमी आई है।’’</p>
<p>गुजरात की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के तहत मोदी ने रविवार को गिर सोमनाथ जिले के सोमनाथ मंदिर में पूजा की और रिलायंस जामनगर रिफाइनरी परिसर में स्थित ‘वनतारा’ का दौरा किया। वनतारा वन्यजीवों के कल्याण के लिए समर्पित बचाव केंद्र है। यह दुर्व्यवहार और शोषण से बचाए गए पशुओं को अभयारण्य, पुनर्वास व चिकित्सा देखभाल प्रदान करता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 16:30:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोमनाथ : दिवाली के मिनी-वेकेशन में शेरों को देखने आने वाले प्रवासियों की संख्या बहुत ज्यादा, ५ नवंबर तक सारे परमिट जारी</title>
                                    <description><![CDATA[आसपास के इलाकों में सभी छोटे-बड़े होटल और रिसॉर्ट और फार्म हाउस 31 तारीख तक पूरी तरह बुक ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>पिछले दो साल की तुलना में इस साल कोरोना का खौफ नहीं होने से लोग दीपावली और नव वर्ष के मौके पर निडर होकर पर्यटन केंद्रों पर जाने को तैयार हो गए हैं. जिसमें सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा प्रबंधित आवास ऑनलाइन बुकिंग में पहले ही बुक हो चुका है। ऐसी ही भीड़ वेरावल पाटन के होटलों और हाईवे पर देखने को मिल रही है।वहीं  तलाला पंथक के प्रवेश द्वार सासन गिर में शेरों को देखने के लिए सासन क्षेत्र में पर्यटकों का हुजूम उमड़ रहा है। वन विभाग ने कहा है कि गिर के खुले जंगल में शेरों को घूमते हुए देखने के सभी परमिट 5 नवंबर तक भरे हुए हैं।</div><div><br /></div><h2>5 नवंबर तक परमिटों की बुकिंग पूरी</h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि वन विभाग द्वारा जारी एक परमिट में छह पर्यटक अभयारण्य के भ्रमण के लिए जा सकते हैं। ऐसे 180 परमिट प्रतिदिन जारी किए जाते हैं। इन सभी परमिटों की बुकिंग 5 तारीख तक के लिए हो चुकी है।इसके अलावा देवलिया सफारी पार्क में प्रतिदिन दो हजार से अधिक पर्यटक शेर के दर्शन करने आ रहे हैं। मंगलवार से देवलिया पार्क में पर्यटकों की संख्या पांच हजार से अधिक होने की संभावना है. ऐसे में पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने आवश्यक बसों और जिप्सियों की व्यवस्था की है.</div><div><br /></div><h2>होटल और फार्म हाउस बुक</h2><div><br /></div><div>गौरतलब है कि तलाला पंथक सहित सासांगीर में सभी छोटे-बड़े होटल और रिसॉर्ट और फार्म हाउस 31 तारीख तक पूरी तरह से बुक हैं। सासन गिर सिंह की जन्मभूमि में दिवाली मनाने के लिए पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है, पूरा तलाला पंथक पर्यटकों की आवाजाही से गुलजार है। शेरों के साथ दीवाली को पर्यटकों के लिए यादगार बनाने के लिए वन विभाग का पूरा स्टाफ तैयारियां शुरू कर देता है।</div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/69260/somnath-the-number-of-migrants-coming-to-see-the-lions-in-the-mini-vacation-of-diwali-is-very-high-all-permits-issued-till-november-5</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Oct 2022 22:14:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गिर के जंगल की सैर करनी है तो तैयार हो जाईये, 16 अक्टूबर से फिर खुल रहा है सिंहों का आशियाना!</title>
                                    <description><![CDATA[चार महीने की छुट्टी के बाद सिंह दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>अगर आप घूमने फिरने के शौक़ीन है और दिवाली की छुट्टियों में किसी अच्छे जगह की तलाश में है तो बैग पैक लीजिये और बुकिंग करा लीजिये गीर के जंगलों की! बरसात के कारण होने वाली मानसून की चार महीने की छुट्टी खत्म होने में बमुश्किल चार दिन बचे हैं। इसके बाद जंगल और इसकी सुविधाएँ पर्यटकों के लिए खुल जाएंगी।  ऐसे में पर्यटक पहले से ही जंगल में शेरों को देखने के लिए बेताब हैं।</div><div><br /></div><h2>16 अक्टूबर से सासन गिर और गिरनार के जंगल फिर से पर्यटकों को प्रवेश</h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि मानसून में हर साल 15 जून से 15 अक्टूबर (4 महीने) तक सासन में गिर के जंगल और गिरनार के जंगल में रहने वाले शेरों समेत जंगली जानवरों की छुट्टी होती है, इस छुट्टी को पूरा होने में अब सिर्फ 4 दिन बचे हैं, अगले 16 अक्टूबर से आधिकारिक तौर पर पर्यटकों को शेरों की छुट्टी के बाद जंगल में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी।</div><div><br /></div><h2>वन विभाग ने पूरी की तैयारी</h2><div><br /></div><div>इसके लिए वन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। मानसून के दौरान हुई भारी बारिश के कारण जंगल में कई सड़कें जर्जर हो गईं, उन सभी सड़कों का काम पूरा हो गया है. पिछले साल सासन जंगल की जिप्सी सफारी में 1.90 लाख पर्यटकों ने सफर किया था। इससे वन विभाग को दो करोड़ की आय हुई।</div><div><br /></div><h2>ऑनलाइन बुकिंग शुरू</h2><div><br /></div><div>मानसूनी बारिश से गिर के जंगल और गिरनार के जंगल का प्राकृतिक वातावरण बेहद हरा-भरा हो गया है। नदियों, नालों के बहने और हरियाली से घिरे पेड़ों के साथ, आगामी दिवाली उत्सव के लिए जंगल में विहारता सिंह सहित जंगली जानवरों को देखने के लिए ऑनलाइन बुकिंग जोरों पर है। जिससे सासन गांव में फिर हलचल होगी।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/69243/if-you-want-to-visit-the-forest-of-gir-then-get-ready-the-lion-s-home-is-opening-again-from-october-16</link>
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                <pubDate>Wed, 12 Oct 2022 15:48:27 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : ग्रीष्म काल में पानी की तलाश में गिर के जंगलों से बाहर आ जाते थे शेर; अब नहीं आएंगे, जानिए क्यों</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">गर्मी में पानी कि कमी होने पर मनुष्य तो कहीं से भी अपने लिए पानी कि व्यवस्था कर लेता है। हालांकि जंगल में बसने वाले जंगली जानवर पानी के लिए कहीं नहीं जा पाते। ऐसे में वह गांवों की और रुख करते है। जिसके चलते कई बार गांवों में शेर, तेंदुए तथा अन्य जंगली जानवरों के घुसने की खबरें आती ही रहती है। हालांकि वन विभाग द्वारा जानवरों के लिए खास व्यवस्था की गई है। जिसके चलते अब जंगली जानवरों को जंगल से बाहर नहीं आना पड़ेगा। </span><br /></div><div>उल्लेखनीय है कि गर्मी की सीजन शुरू होते ही गिर और जूनागढ़ के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div><span style="font-size:1rem;">गर्मी में पानी कि कमी होने पर मनुष्य तो कहीं से भी अपने लिए पानी कि व्यवस्था कर लेता है। हालांकि जंगल में बसने वाले जंगली जानवर पानी के लिए कहीं नहीं जा पाते। ऐसे में वह गांवों की और रुख करते है। जिसके चलते कई बार गांवों में शेर, तेंदुए तथा अन्य जंगली जानवरों के घुसने की खबरें आती ही रहती है। हालांकि वन विभाग द्वारा जानवरों के लिए खास व्यवस्था की गई है। जिसके चलते अब जंगली जानवरों को जंगल से बाहर नहीं आना पड़ेगा। </span><br /></div><div>उल्लेखनीय है कि गर्मी की सीजन शुरू होते ही गिर और जूनागढ़ के जंगल पानी की कमी के कारण सुख जाते है। यहीं कारण है कि जंगली जानवरों के लिए पीने के पानी की भी समस्या सर्जित होती है। ऐसे में यह जानवर गाँव की और आकर्षित होते है। हालांकि अब से जंगल के जानवर जंगल की और ही रहे इस लिए वन-विभाग ने जंगल इलाकों में विभिन्न पॉइंट बनाकर उनके लिए पानी के कुंड बनाए गए है। जिससे की जानवरों को आसानी से पानी मिल सके।</div><div>एशियाई सिंहों के घर माने जाने वाले गिर में, जहां सिंहों को देखने के लिए हजारों की संख्या में पर्यटक आते है। वहाँ पानी के कुंड की इस योजना के कारण पर्यटकों को भी सिंह देखने मिल रहे है। कई इलाकों में तो टेनकर द्वारा पानी के कुंड भरे जाते है तो कई इलाकों में विंड पावर की मदद से पानी भरा जाता है। गर्मी के कारण पूरे दिन तो जानवर कोई छाँव वाली जगह ढूंढकर वहाँ बैठे रहते है और रात को ही खाने और पानी के लिए निकलते है। पर वन विभाग के इस कार्य से दिन के दौरान भी जंगली जानवरों को पानी मिलता है, जिससे की वह जंगल की और कम आते है और गाँव वालों पर हमले की घटना भी कम आती है।</div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/68602/gujarat-lions-used-to-come-out-of-gir-forests-in-search-of-water-during-summers-will-not-come-now-know-why</link>
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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 17:59:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कछुए के सामने खरगोश ही नहीं, जंगल का राजा शेर भी हार गया, देखें वीडियो</title>
                                    <description><![CDATA[सासन गिर जंगल से घटी एक दुर्लभ घटना, तीन शेर मिलकर भी नहीं कर पाए एक कछुए का शिकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/68331/not-only-the-rabbit-in-front-of-the-tortoise-the-king-of-the-jungle-also-lost-the-lion-watch-the-video"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/9094_1.jpg" alt=""></a><br /><div>आपने बचपन में कछुए और खरगोश की कहानी पढ़ी या सुनी होगी। इस कहानी में खरगोश कछुए से दौड़ में हार गया था। हालांकि कुछ लोग इसे सही नहीं मानते पर गुजरात के सासन गिर जंगल से एक ऐसी ही दुर्लभ घटना सामने आई है जिसके बारे में एक बार में विश्वास करना संभव नहीं है। दरअसल एक कछुए ने एक साथ तीन तीन शेरों को मात दे दी। तीनों शेरों ने मिलकर कछुओं का शिकार करने की कोशिश की पर वो उसमें सफल नहीं हुए। घटना का वीडियो वन विभाग के कैमरों में कैद हो गया।</div><div>जानकारी के अनुसार ये दृश्य सासन गिर जंगल में कमलेश्वर बांध के पास हैं, जहां तीन शेरों को कछुए का शिकार करने की कोशिश करते देखा गया था। कुछ दिन पहले सासन गिर के जंगल में कमलेश्वर बांध के आसपास तीन जवान शेर घूम रहे थे। तब सासन गिर उप वन संरक्षक डॉ। मोहन राम नियमित ड्यूटी के लिए क्षेत्र में आए। ट्रेकर ने उसे सूचित किया कि तीन शेर बांध के चारों ओर घूम रहे हैं। सासन डॉ। मोहन राम ने इन तीनों शेरों को देखना शुरू किया। इतने में एक शेर अचानक दौड़ा और शिकार के इरादे से बांध के किनारे बैठे कछुए को पकड़ लिया। उसके बाद जो कुछ भी हुआ वह हैरान और हैरान करने वाला था। डॉ मोहन राम ने पूरी घटना को कैमरे में कैद कर लिया।</div><iframe src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?height=308&amp;href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2FAkilaNews%2Fvideos%2F688365075621535%2F&amp;show_text=false&amp;width=560&amp;t=0" width="560" height="308" style="border:none;" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe><div>गौरतलब है कि सासन गिर उप वन संरक्षक और एशियाई शेर विशेषज्ञ डॉ मोहन राम खुद को बहुत भाग्यशाली मानते हैं। सासन गिर के डीएफओ मोहन राम ने कहा कि ऐसी घटना कम ही होती है और होती भी है तो इसका दस्तावेजीकरण नहीं किया जा सकता है। लेकिन मैं भाग्यशाली हूं कि मैंने ऐसी अद्भुत घटना ना सिर्फ देखी बल्कि उसे अपने साधन में कैद भी कर लिया।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Feb 2022 15:20:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>गुजरात : अब खुली जीप में बैठकर हो सकेंगे सासणगीर के सिंह दर्शन, ड्राईवर कैबिन हटाने की दी गई सूचना</title>
                                    <description><![CDATA[खुली जीपों में प्रकृति की खूबसूरती को और भी अधिक से देखने मिलेगा मौका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67945/now-singh-darshan-can-be-done-sitting-in-open-jeep-information-given-to-remove-driver-s-cabin"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-10/8280_s20-191021.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">दुनिया भर में मात्र गुजरात के सासणगिर में एशियाटिक सिंह देखने मिलते है। ऐसे में दूर-दूर से उन्हें देखने आने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छे समाचार सामने आए है। अब से यात्री खुली जीप में भी एशियाटिक सिंहों को देख सकेंगे। हर साल लाखों यात्री सिंह दर्शन और सफारी पार्क का आनंद लेते थे। हालांकि कई बार प्रवासियों द्वारा बंद जीप में सिंहों को ठीक से ना देख पाने की शिकायत की गई थी। इसके अलावा साथ में आए हुये गाइड के पास से भी यदि कोई जानकारी लेनी होती थी, तो बीच में आने वाली ड्राईवर कैबिन के चलते दिक्कत होती थी।</span><br /></div><div>इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुये नियमनतंत्र द्वारा इन परेशानियों को दूर करने का निर्णय लिया गया था और अब से प्रवासियों को खुली जीप में भी घूमने का आनंद मिलेगा। इसके अलावा सफारी पार्क जाने वाली जीप में से भी ड्राईवर कैबिन अलग रखने की सूचना दी गई है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए गिर लायन सफारी पार्क में खुली जिप्सी की खबर से पर्यटकों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों में खुशी है। सासन में भी लगभग 180 जिप्सी हैं, जिनमें से अधिकांश ने जिप्सियों से अपने ड्राइवर की कैब हटा दी हैं और पर्यटक खुली जिप्सी में शेरों को खूबसूरती से देख सकते हैं। इस फैसले से गिर सेंचुरी ने वैश्विक क्षेत्र में धूम मचा दी है।</div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 19:44:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गीर: मानसून के कारण चार माह तक बंद रहे ये स्थल आज से पर्यटकों के लिए खुले</title>
                                    <description><![CDATA[गिर अभ्यारण्य और गिरनार अभयारण्य चार महीने के मानसून अवकाश के बाद आज से शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>कोरोना के कारण बीते दो साल से बंद के बाद नियमित रूप से शुरू हुए गिर अभ्यारण्य और गिरनार अभयारण्य चार महीने के मानसून अवकाश के चलते फिलहाल बंद थे। आज यानी 16 अक्टूबर से दोनों फिर से पर्यटकों के लिए खुल गए हैं। अब पर्यटक इस दर्शनीय स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। वर्तमान में सिर्फ देवलिया सफारी पार्क और धारी आंबरडी पार्क ही खुले हैं।</div><div>आपको बता दें कि शेरों के लिए चार महीने की मानसून छुट्टी के बाद विश्व प्रसिद्ध सासन गिर अभयारण्य आज फिर से खुल गया। दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए 16 अक्टूबर से 29 फरवरी तक सर्दी का मौसम माना जाता है।इस मौसम में, जब दर्शनीय स्थलों की यात्रा का समय जल्दी होता है, तो सुबह की यात्रा सुबह 6.45 बजे से 9.45 बजे तक और शाम को भी देर से होगी, ताकि पर्यटक अधिक समय तक आनंद ले सकें।</div><div>आपको बता दें कि  आज से दर्शनीय स्थलों की यात्रा शुरू हो गई है, जिसमें पर्यटकों को सरकार की कोरोना गाइडलाइन के साथ सभी नियमों का पालन करना होगा। पर्यटकों के लिए सामाजिक दूरी, मास्क, सैनिटाइजर अनिवार्य है और जंगल में प्लास्टिक की बोतलें या वेफर पैकेट ले जाना प्रतिबंधित है। इन सभी नियमों के साथ पर्यटकों को पहले की तरह प्रवेश दिया जाएगा। इस पर्यटन स्थल के वापस शुरू होने से सासन के 178 गाइड और 70 से अधिक जिप्सी ड्राइवरों के व्यवसाय को नई जान मिलेगी, जिससे सासन के स्थानीय होटलों और रिसॉर्ट्स को बढ़ावा मिलेगा।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/67936/gir-these-places-remained-closed-for-four-months-due-to-monsoon-these-places-are-open-for-tourists-from-today</link>
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                <pubDate>Sat, 16 Oct 2021 21:55:11 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : जब जंगल के राजा को परेशान करने लगा ट्रेक्टर चालक, जानें फिर क्या हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[पानी पीने जा रहे वनराज को किसान ने परेशान करना शुरू किया, लोगों ने की कड़ी सजा देने की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67659/gujarat-when-the-tractor-driver-started-harassing-the-king-of-the-forest-find-out-what-happened-again"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-08/2654_s6-140821.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">गुजरात के जूनागढ़ में ट्रेक्टर चालक द्वारा जंगल के राजा शेर को परेशान किए जाने का एक वीडियो वायरल हुआ था। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस वीडियो में पानी पीने जा रहे शेर को एक ट्रेक्टर चालक द्वारा हैरान किया जा रहा है। मीडिया में वायरल हो रहा यह वीडियो गिर के जंगल का होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ट्रेक्टर चालक शेर का पीछा करते हुये उसे परेशान कर रहा है। </span><br /></div><div>उल्लेखनीय है कि पिछले कई समय से गिर के जंगलों में शेरों की सुरक्षा को लेकर काफी सवाल उठ रहे है। इसके पहले भी कई बार शेरों को परेशान करने के कई वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे है। बता दे की शेरों को इस तरह परेशान करना काफी गंभीर गुना माना जाता है। इसके चलते कई लोग इस तरह से शेरों को परेशान करने वाले लोगों को कड़ी सजा देने की मांग की जा रही है, जिससे की अन्य लोगों को एक सीख मिल सके।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Aug 2021 17:15:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व शेर दिवस : सिंहो के संवर्धन और रक्षण के लिए लोगों में जागरूकता अभियान का मुख्यमंत्री रूपाणी ने किया आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[2015 के मुक़ाबले अब तक काफी बढ़ चुकी है शेरों की संख्या, भारतीय संस्कृति में सिंहों के महत्व का किया उल्लेख]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने आज राज्य वन विभाग द्वारा आयोजित विश्व सिंह दिवस के उपलक्ष्य में गांधीनगर से वीडियो कॉन्फ्रेंस में भाग लेते हुए एशिया की शान माने गए सिंह के संवर्धन, संरक्षण और स्वीकृति के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रेरक आह्वान किया। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात भाग्यशाली और गौरवान्वित है कि गुजरात के पास एशियाई शेर की विरासत है। स्थानीय लोगों सहित सोरथ-गिर क्षेत्र के साथ सभी के भावनात्मक संबंध, शेर संरक्षण में योगदान और सार्थक प्रयासों के परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में राज्य में शेरों की संख्या में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि शेरों की संख्या 2015 में 529 से बढ़कर अब 674 हो गई है।</div><div><span style="font-size:1rem;">मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वृद्धि स्पष्ट रूप से बताती है कि सौराष्ट्र में मानव आबादी के साथ-साथ शेरों का पालन-पोषण, सार्वजनिक जीवन में स्वीकृति की व्यवस्था एक मानसिकता बन गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विश्व सिंह दिवस का उत्सव इस मानसिकता को जगाने और बच्चों और युवाओं सहित सभी को शेरों के संरक्षण, प्रजनन और संरक्षण के लिए प्रेरित करने के लिए उचित होगा। अपनी संस्कृति में सिंह की महानता का वर्णन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु सिंह ही है, इसके अलावा शेर को माता शाकित के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं, भारत के राजचिन्ह-एम्बलम में भी शेर के चेहरे की प्रतिकृति है।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">मुख्यमंत्री ने कहा कि इस शेर परियोजना के तहत आने वाले वर्षों में ढांचागत सुविधाओं, रेडियो कॉलर और आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग कर बचाव केंद्रों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं, प्रजनन केंद्रों, शेरों के उपचार केंद्रों के बीच की कड़ी को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2019 में विश्व शेर दिवस के उपलक्ष्य में 5,000 स्कूलों और 11 लाख से अधिक लोगों को शामिल करके गुजरात ने वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाई है। </span><br /></div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Aug 2021 19:01:11 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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