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                <title>UNESCO - Loktej</title>
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                <description>UNESCO RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दीपावली उत्सव यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) भारत के प्रमुख उत्सव दीपावली को बुधवार को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया गया। दिल्ली में लाल किले पर आयोजित यूनेस्को की एक अहम बैठक में यह फैसला लिया गया।</p>
<p>यह पहली बार है कि भारत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) के संरक्षण के लिए अंतरसरकारी समिति के सत्र की मेजबानी कर रहा है। इस समिति का 20वां सत्र लाल किले में आठ से 13 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p>यूनेस्को द्वारा दीपावली उत्सव को प्रतिष्ठित सूची में शामिल किए जाने की घोषणा के बाद ‘वंदे मातरम’</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144502/diwali-festival-included-in-unescos-intangible-cultural-heritage-of-humanity"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/baisakhi-festival.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) भारत के प्रमुख उत्सव दीपावली को बुधवार को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया गया। दिल्ली में लाल किले पर आयोजित यूनेस्को की एक अहम बैठक में यह फैसला लिया गया।</p>
<p>यह पहली बार है कि भारत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) के संरक्षण के लिए अंतरसरकारी समिति के सत्र की मेजबानी कर रहा है। इस समिति का 20वां सत्र लाल किले में आठ से 13 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p>यूनेस्को द्वारा दीपावली उत्सव को प्रतिष्ठित सूची में शामिल किए जाने की घोषणा के बाद ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे हवा में गूंज उठे।</p>
<p>विभिन्न पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने मुख्य मंच के सामने प्रस्तुति दी और एक बड़ी स्क्रीन पर दीपावली उत्सव के चित्र प्रदर्शित किए गए।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे त्योहार की वैश्विक लोकप्रियता में और वृद्धि होगी।</p>
<p>मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “भारत और दुनिया भर के लोग रोमांचित हैं।”</p>
<p>अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) के संरक्षण के लिए अंतरसरकारी समिति के 20वें सत्र के दौरान दीपावली के इस सूची में शामिल होने की घोषणा के तुरंत बाद केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश की ओर से एक बयान दिया।</p>
<p>यह मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने वाली भारत की 16वीं सांस्कृतिक परंपरा है।</p>
<p>भारत की 15 सांस्कृतिक परंपराएं वर्तमान में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल हैं, जिनमें कुंभ मेला, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा नृत्य, योग, वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा और रामलीला - महाकाव्य ‘रामायण’ का पारंपरिक प्रदर्शन शामिल हैं।</p>
<p>शेखावत और भारतीय दल के अन्य सदस्यों ने इस अवसर पर पारंपरिक पगड़ी पहनी।</p>
<p>प्रकाश का उत्सव दीपावली भारत के उन चिरस्थायी त्योहारों में से एक है जो अब दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी मनाया जाता है।</p>
<p>इस अवसर पर लोग अपने घरों को पारंपरिक दीयों से सजाते हैं और इमारतों को रोशन किया जाता है, जिससे रात में एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत होता है।</p>
<p>भारत ने 2024-25 के लिए 2023 में यूनेस्को को दीपावली नामांकन का दस्तावेज भेजा था।</p>
<p>शेखावत ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘हर भारतीय के लिए दीपावली बेहद भावनात्मक त्योहार है; इसे पीढ़ियों से मनाया जा रहा है, इसे महसूस किया जाता है और आत्मसात किया जाता है।’’</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दीपावली को इस सूची में शामिल करके ‘‘यूनेस्को ने नवीकरण, शांति और अच्छाई की जीत के लिए शाश्वत मानवीय अभिलाषा का सम्मान किया है।’’</p>
<p>शेखावत ने कहा कि कुम्हारों से लेकर कारीगरों तक लाखों हाथ इस विरासत को जीवित रखते हैं। उन्होंने कहा कि यूनेस्को का यह ‘टैग’ भी एक जिम्मेदारी है और ‘‘हमें सुनिश्चित करना होगा कि दीपावली हमेशा एक विरासत बनी रहे।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों को पता होना चाहिए कि दीपावली राम राज्य यानी सुशासन का त्योहार है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आगामी दीपावली पर लोगों को ‘‘एक अतिरिक्त दीपक जलाना चाहिए, कृतज्ञता का दीपक, शांति का दीपक, मानवता की साझेदारी का दीपक और सुशासन का दीपक।’’</p>
<p>शेखावत ने अपने संबोधन में 'तमसो मां ज्योतिर्गमय' (अंधेरे से मुझे प्रकाश की ओर ले चलो) के संस्कृत मंत्र का उच्चारण किया और इसे 'जय हिंद, भारत माता की जय, राजा राम चंद्र जी की जय' के साथ समाप्त किया।</p>
<p>यहां पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात पाकिस्तानी राजनयिक शोएब सरवर संधू ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘दीपावली के अवसर पर भारत को मेरी हार्दिक बधाई।’’</p>
<p>इससे एक दिन पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत का प्राचीन लोक संगीत वाद्ययंत्र बोरींडो और उसकी धुनें, पैराग्वे की प्राचीन चीनी मिट्टी की शिल्पकला और केन्या के दाईदा समुदाय के म्वाजिंडिका आध्यात्मिक नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची (आईसीएच) में शामिल किया गया था।</p>
<p>पेरिस स्थित विश्व निकाय के अनुसार, समिति इस सत्र के दौरान यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने के लिए लगभग 80 देशों द्वारा प्राप्त ‘कुल 67 नामांकनों’ पर विचार करेगी।</p>
<p>मंगलवार को यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में बांग्लादेश के तंगेल की पारंपरिक साड़ी बुनाई कला और अफगानिस्तान की बहजाद की लघु चित्रकला शैली को शामिल करने की मंजूरी दी थी।</p>
<p>कई अरब देशों द्वारा नामित ‘बिष्ट’ (पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला अबा या गाउन) बनाने के कौशल और तरीकों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल करने की मंजूरी दी गई।</p>
<p>बुधवार को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में अन्य नई चीजों में इराक से अल-मुहैबी: इससे जुड़ी सामाजिक प्रथाएं और परंपराएं; जॉर्डन से अल-मिहरास वृक्ष: इससे जुड़ा ज्ञान, कौशल और अनुष्ठान; और कुवैत में एक एकीकृत सांस्कृतिक प्रथा दीवानिया को शामिल किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 15:06:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरातियों के लिये खुशखबर; यूनेस्को की सांस्कृति विरासतों की सूची में गरबा शामिल करने की सिफारिश</title>
                                    <description><![CDATA[एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को कहा कि अगले साल के चक्र के लिए नवीनतम नामांकन पर विचार किया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/81565/good-news-for-gujaratis-recommendation-to-include-garba-in-unesco-s-list-of-cultural-heritage"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-08/4121_garba2.jpg" alt=""></a><br /><div>भारत अपनी अनोखी सांस्कृतिक विरासत और अनोखी परंपरा के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। अब भारत के गुजरात का प्रसिद्ध पारंपरिक नृत्य ‘गरबा’ यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने जा रहा है। एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को कहा कि अगले साल के चक्र के लिए नवीनतम नामांकन पर विचार किया जाएगा। यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत श्रेणी के सचिव टिम कर्टिस ने पिछले दिसंबर में कोलकाता के ‘दुर्गा पूजा उत्सव’ को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित करने के उपलक्ष्य में दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम में गरबा को नामित किए जाने से जुड़ा विवरण साझा किया था।</div><div><br /></div><h2>अगले साल के अंत तक नामों पर किया जाएगा फैसला</h2><div>आपको बता दें कि यूनेस्को के 2003 के सम्मेलन की अंतर सरकारी समिति ने पिछले साल दिसंबर में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा पर कोलकाता में दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था। नामांकन फाइलों की जांच 2023 के मध्य में मूल्यांकन संस्था द्वारा की जाएगी और अगले साल के अंत तक समिति के 2023 सत्र के लिए नामों पर फैसला किया जाएगा।’’ कर्टिस ने अपने संबोधन के दौरान भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रशंसा करते हुए कहा था कि ‘‘इसकी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में व्यापकता और विविधता है।’’</div><div>कर्टिस के इस प्रेजेंटेशन की एक स्लाइड में गरबा कलाकारों की तस्वीर थी और इसका शीर्षक था-‘गुजरात का गरबा : इंडियाज नेक्स्ट एलिमेंट।’ इसमें उल्लेख किया गया था कि ‘‘फाइल वर्तमान में सचिवालय की तकनीकी प्रक्रिया से गुजर रही है।’’  वर्तमान में भारत के 14 अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) तत्व इस सूची में अंकित हैं, जिनमें रामलीला, वैदिक मंत्र, कुंभ मेला और दुर्गा पूजा शामिल है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Aug 2022 16:59:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेलंगाना के मंदिर के बाद गुजरात का यह स्थान भी हुआ विश्व धरोहर की सूची में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात में अब तीन स्थान बन गए है विश्व धरोहर, सबसे अधिक 6 साइट्स है महाराष्ट्र में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67578/after-the-temple-of-telangana-this-place-of-gujarat-was-also-included-in-the-world-heritage"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-07/2666_s16-270721.jpg" alt=""></a><br /><div>गुजरात के कच्छ के रण में हड़प्पा-युग के शहर धोलावीरा को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा विश्व धरोहर स्थलों की सूची में जोड़ा गया है। पिछले दिनों तेलंगाना के रामप्पा मंदिर को विश्व धरोहर की सूची में डालने के बाद अब गुजरात के धोलावीरा को भी विश्व धरोहर की सूची में समाविष्ट किया गया था। इसके साथ ही अब भारत के 40 स्थल विश्व धरोहर की सूची में आ गए है, जिसमें से मात्र गुजरात में ही तीन है। यह निर्णय यूनेस्को के 44वें मीटिंग में लिया गया। </div><div>बता दे कि इसके पहले गुजरात में से पावागढ़ के नजदीक आया चांपानेर और पाटन में स्थित रानी की वाव पहले से ही इस सूची की शोभा बढ़ा रहे है। युनेस्को द्वारा धोलावीरा को विश्व धरोहर बताए जाते ही केंद्रीय सांस्कृतिक और प्रवासन मंत्री जी किशन रेड्डी ने इस बारे में ट्विटर पर जानकारी साझा की। बता दे कि भारत में जिन 40 स्थानों को विश्व धरोहर के तौर पर घोषित किया गया है, उसमें से 32 सांस्कृतिक और सात प्राकृतिक है।</div><div>भारत में जिन स्थानों को विश्व धरोहर के रूप में सूचित किया गया है कि उनकी सूची कुछ इस प्रकार है। </div><div><ul><li>धौलावीरा, गुजरात </li><li>रामप्पा मंदिर, तेलंगाना</li><li>ताज महल आगरा</li><li>खजुराहो, मध्य प्रदेश</li><li>हम्पी, कर्नाटक</li><li>अजंता गुफाएं, महाराष्ट्र</li><li>एलोरा गुफाएं, महाराष्ट्र</li><li>बोधगया, बिहार</li><li>सूर्य मंदिर, कोणार्क, उड़ीसा</li><li>लाल किला परिसर, दिल्ली</li><li>सांची, मध्य प्रदेश में बौद्ध स्मारक</li><li>चोल मंदिर, तमिलनाडु</li><li>काजीरंगा वन्य जीव अभ्यारण्य, असम</li><li>महाबलीपुरम, तमिलनाडु में स्मारकों का समूह</li><li>सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिम बंगाल</li><li>हुमायूं का मकबरा, नई दिल्ली</li><li>जंतर मंतर, जयपुर, राजस्थान</li><li>आगरा का किला, उत्तर प्रदेश</li><li>पट्टाडकल, कर्नाटक में स्मारकों का समूह</li><li>एलीफेंटा गुफाएं, महाराष्ट्र</li><li>भारत के पर्वतीय रेलवे</li><li>नालंदा महाविहार (नालंदा विश्वविद्यालय), बिहार</li><li>छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (पूर्व में विक्टोरिया टर्मिनस), महाराष्ट्र</li><li>कुतुब मीनार और उसके स्मारक, नई दिल्ली</li><li>चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान, गुजरात</li><li>ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, हिमाचल प्रदेश</li><li>राजस्थान के पहाड़ी किले</li><li>गोवा के चर्च और कॉन्वेंट</li><li>भीमबेटका, मध्य प्रदेश के रॉक शेल्टर्स</li><li>मानस वन्य जीव अभ्यारण्य, असम</li><li>फतेहपुर सीकरी, उत्तर प्रदेश</li><li>रानी की वाव, पाटन, गुजरात</li><li>केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर, राजस्थान</li><li>नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान, उत्तराखंड</li><li>पश्चिमी घाट</li><li>कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान, सिक्किम</li><li>कैपिटल कॉम्प्लेक्स, चंडीगढ़</li><li>अहमदाबाद का ऐतिहासिक शहर</li><li>मुंबई का विक्टोरियन और आर्ट डेको एनसेंबल</li><li>गुलाबी शहर - जयपुर</li></ul></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jul 2021 20:14:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऐतिहासिक धरोहर : बिना किसी आधार स्तंभ के खड़ा है यह मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडू के तंजौर में स्थित मंदिर की रौचक बातें जानकर रह जाएंगे दंग
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/82394/this-temple-stands-without-any-pillars-it-took-3000-elephants-to-build"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/9207_s5-31052021.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">हमारा देश धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। देश में कई धार्मिक स्थान ऐसे है जीके के साथ कई तरह की कहानियां जुड़ी है। भारत में प्राचीन समय से बड़े-बड़े मंदिर बने हैं और जिनके पीछे के कारण भी बहुत रोचक हैं। यह मंदिर अपने कला कारीगरी के लिए दुनिया भर में प्रख्यात है। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु के तंजौर में है। तंजोर में आए होने के कारण इसे तंजौर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। चोला शासन के दौरान राज राजा चोला ने ई.स 1003 से 1010 के बीच इसे बनाया था। उस समय के शासक के नाम पर से इस मंदिर का नाम राजराजेश्वर मंदिर के तौर पर दिया गया था। यह मंदिर आज भी उसी नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि उस समय के शासक श्रीलंका की यात्रा पर जा रहे थे तब यह मंदिर बनाने के लिए उन्हें सपना आया था। भगवान शिव के लिए बनाया गया यह मंदिर 13 मंजिल का है। जिसकी ऊंचाई 66 मीटर है। इसकी निर्माण कला लोगों को आश्चर्यचकित कर दे ऐसी है।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">सामान्य तौर पर कोई भी घर बिना आधार स्तंभ के नहीं बनाया जाता। किसी भी भवन को बनाने के लिए नीचे मजबूत आधार की जरूरत पड़ती है लेकिन इस मंदिर की खास बात यह है कि किसी आधार के बिना हजारों साल से खड़ा है। यह मंदिर संपूर्ण तौर से ग्रेनाइट से बना है। यह दुनिया का एकमात्र मंदिर है जो ग्रेनाइट से बना है। इस मंदिर के निर्माण में 130000 टन ग्रेनाइट का उपयोग किया गया है। जिसे लाने के लिए लगभग 3000 हाथी लगे थे। यह मंदिर अपनी भव्यता, स्थापत्य और गुंबज के कारण दुनिया भर में प्रख्यात है। इस मंदिर को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल किया गया है। इस मंदिर की दूसरी विशेषता यह है कि इस मंदिर के सबसे ऊंचाई पर एक स्वर्ण कलश स्थित है। यह स्वर्ण कलश जिस पत्थर पर है उसका वजन 80 टन है और एक ही पत्थर से बना हुआ है। इतना बड़ा पत्थर मंदिर के शिखर पर कैसे पहुंचाया गया। यह अभी भी एक रहस्य है। इसके अलावा मंदिर की एक और खास बात यह है की मंदिर के गुंबज का परछाई कभी भी धरती पर नहीं आती, जो की सभी को आकर्षित करती है।</span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 May 2021 15:34:07 +0530</pubDate>
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