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                <description>Medical RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मेडिसिन के क्षेत्र में तीच चिकित्सकों को नोबल पुरस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>स्टॉकहोम, 07 अक्टूबर (वेब वार्ता)। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार अमेरिका की डॉ. मैरी ब्रन्को, डॉ. फ्रेड राम्सडेल और जापान के प्रसिद्ध इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. शिमोन सकागुची को प्रदान किया गया है। इन तीनों वैज्ञानिकों ने मानव प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) की कार्यप्रणाली को समझने में क्रांतिकारी योगदान दिया है। उनकी यह खोज “पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस” से जुड़ी है, जो बताती है कि मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला क्यों नहीं करती।</p>
<p>इम्यून सिस्टम के ‘शांति रक्षकों’ की खोज</p>
<p>रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जापान के शिमोन सकागुची ने 1990 के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143474/nobel-prize-for-three-doctors-in-the-field-of-medicine"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/antibiotic-medicine-capsule.jpg" alt=""></a><br /><p>स्टॉकहोम, 07 अक्टूबर (वेब वार्ता)। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार अमेरिका की डॉ. मैरी ब्रन्को, डॉ. फ्रेड राम्सडेल और जापान के प्रसिद्ध इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. शिमोन सकागुची को प्रदान किया गया है। इन तीनों वैज्ञानिकों ने मानव प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) की कार्यप्रणाली को समझने में क्रांतिकारी योगदान दिया है। उनकी यह खोज “पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस” से जुड़ी है, जो बताती है कि मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला क्यों नहीं करती।</p>
<p>इम्यून सिस्टम के ‘शांति रक्षकों’ की खोज</p>
<p>रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जापान के शिमोन सकागुची ने 1990 के दशक में रेगुलेटरी टी-सेल्स की पहचान की थी। ये कोशिकाएं शरीर की प्रतिरक्षा क्रियाओं को नियंत्रित करती हैं ताकि इम्यून सिस्टम अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला न करे। इन्हें इम्यून सिस्टम के “शांति रक्षक” कहा जाता है क्योंकि ये संतुलन बनाए रखने और ऑटोइम्यून रोगों को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</p>
<p>फॉक्सपी3 जीन की भूमिका उजागर की</p>
<p>अमेरिकी वैज्ञानिक मैरी ब्रन्को और फ्रेड राम्सडेल ने यह स्पष्ट किया कि टी-रेग्स कोशिकाओं का संचालन फॉक्सपी3 नामक जीन के माध्यम से होता है। यह जीन प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को संतुलित रखने के लिए आवश्यक है। अगर इस जीन में कोई गड़बड़ी होती है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही कोशिकाओं को विदेशी समझकर उन पर हमला करने लगता है, जिससे गंभीर ऑटोइम्यून रोग उत्पन्न होते हैं। यह खोज चिकित्सा जगत के लिए मील का पत्थर सिद्ध हुई, क्योंकि इससे इन रोगों की पहचान, निदान और उपचार की दिशा में नई संभावनाएं खुलीं।</p>
<p>बीमारियों के उपचार में नई उम्मीद</p>
<p>इन वैज्ञानिकों की खोज ने चिकित्सा क्षेत्र को नई दिशा दी है। अब इस शोध के आधार पर कैंसर इम्यूनोथेरेपी, अंग प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में अधिक सटीक और प्रभावी पद्धतियाँ विकसित की जा रही हैं। इस तकनीक से मरीजों को ऐसा उपचार मिल सकता है जिसमें साइड इफेक्ट्स कम हों और शरीर की स्वाभाविक रक्षा प्रणाली को नुकसान न पहुँचे।</p>
<p>मानवता के लिए नई उम्मीद</p>
<p>दुनियाभर में करोड़ों लोग ऐसे रोगों से पीड़ित हैं, जिनमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली ही शरीर पर हमला करने लगती है। इन बीमारियों में रूमेटाइड आर्थराइटिस, ल्यूपस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी स्थितियाँ शामिल हैं। अब इनकी चिकित्सा में यह शोध नई रोशनी लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्य न केवल वैज्ञानिक उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि आने वाले समय में लाखों मरीजों के लिए जीवनदायिनी उम्मीद भी बनेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 15:02:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी शुल्क से घरेलू चिकित्सकीय उपकरण उद्योग की वृद्धि हो सकती है प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका को चिकित्सकीय उपकरण निर्यात पर 27 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने से इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी उत्पादों पर वैश्विक स्तर पर लगाए गए उच्च शुल्कों का मुकाबला करने के लिए ऐतिहासिक उपाय के रूप में करीब 60 देशों पर जवाबी शुल्क की घोषणा की है।</p>
<p>एआईएमईडी फोरम के समन्वयक राजीव नाथ ने बयान में कहा, ‘‘ भारत ऐतिहासिक रूप से अमेरिका को सस्ते व उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सकीय उपकरणों का प्रमुख</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139807/us-fee-may-affect-domestic-medical-equipment-industry-growth"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-05/stethoscope-doctor-medical-hospital-clinic1.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका को चिकित्सकीय उपकरण निर्यात पर 27 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने से इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी उत्पादों पर वैश्विक स्तर पर लगाए गए उच्च शुल्कों का मुकाबला करने के लिए ऐतिहासिक उपाय के रूप में करीब 60 देशों पर जवाबी शुल्क की घोषणा की है।</p>
<p>एआईएमईडी फोरम के समन्वयक राजीव नाथ ने बयान में कहा, ‘‘ भारत ऐतिहासिक रूप से अमेरिका को सस्ते व उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सकीय उपकरणों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है। मुख्य रूप से कम मूल्य, उच्च मात्रा उपभोग्य श्रेणियों में...’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि नए शुल्क से संभवतः भारतीय चिकित्सकीय उपकरण निर्यात पर असर पड़ सकता है। साथ ही उद्योग को उन अवसरों की तलाश करनी होगी, जहां अमेरिका किसी एक देश पर अपनी आपूर्ति श्रृंखला निर्भरता में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>चिकित्सकीय उपकरणों के निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में अमेरिका को भारत का चिकित्सकीय उपकरण का निर्यात 71.438 करोड़ डॉलर था, जबकि अमेरिका से भारत में आयात काफी अधिक 1,51.994 करोड़ डॉलर था।</p>
<p>भारत को चीन (34 प्रतिशत), वियतनाम (46 प्रतिशत) और ताइवान 32 (प्रतिशत) जैसे अन्य देशों की तुलना में कम शुल्क का सामना करना पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Apr 2025 14:03:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वित्त मंत्री ने 36 जीवनरक्षक दवाओं को सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट देने का प्रस्ताव रखा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर पुरानी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 36 दवाओं पर सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट देने का प्रस्ताव रखा।</p>
<p>सरकार ने पूर्व में ‘ट्रैस्टुज़ुमैब डेरक्सटेकन’, ‘ओसिमर्टिनिब’ और ‘ड्यूरवालुमैब’ पर सीमा शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया था।</p>
<p>सीतारमण ने लगातार आठवां बजट पेश करते हुए कहा, ‘‘रोगियों, विशेष रूप से कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए, मैं 36 जीवनरक्षक दवाओं को बुनियादी सीमा शुल्क (बीसीडी) से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/128348/finance-minister-proposed-to-give-36-life-saving-drugs-completely-exempted-from-customs-duty"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/antibiotic-medicine-capsule.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर पुरानी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 36 दवाओं पर सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट देने का प्रस्ताव रखा।</p>
<p>सरकार ने पूर्व में ‘ट्रैस्टुज़ुमैब डेरक्सटेकन’, ‘ओसिमर्टिनिब’ और ‘ड्यूरवालुमैब’ पर सीमा शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया था।</p>
<p>सीतारमण ने लगातार आठवां बजट पेश करते हुए कहा, ‘‘रोगियों, विशेष रूप से कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए, मैं 36 जीवनरक्षक दवाओं को बुनियादी सीमा शुल्क (बीसीडी) से पूरी तरह छूट वाली दवाओं की सूची में जोड़ने का प्रस्ताव करती हूं।’’</p>
<p>उन्होंने सूची में छह जीवनरक्षक दवाओं को जोड़ने का भी प्रस्ताव रखा, जिन पर 5 प्रतिशत का रियायती सीमा शुल्क लगाया जाएगा।</p>
<p>सीतारमण ने कहा, ‘‘उपरोक्त के निर्माण के लिए थोक दवाओं पर क्रमशः पूर्ण छूट और रियायती शुल्क भी लागू होगा।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि दवा कंपनियों के रोगी सहायता कार्यक्रमों के तहत निर्दिष्ट दवाओं और औषधियों को बीसीडी से पूरी तरह छूट दी गई है, बशर्ते मरीजों को दवाएं मुफ्त में दी जाएं।</p>
<p>सीतारमण ने कहा, ‘‘मैं 13 नए रोगी सहायता कार्यक्रमों के साथ 37 और दवाएं जोड़ने का प्रस्ताव करती हूं।’’</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/128348/finance-minister-proposed-to-give-36-life-saving-drugs-completely-exempted-from-customs-duty</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 14:38:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नवंबर में गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे 111 दवाओं के नमूने</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 28 दिसंबर (भाषा) केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने नवंबर में केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं में जांचे गए 41 दवा नमूने 'मानक गुणवत्ता के नहीं' (एनएसक्यू) पाए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इसके अलावा, राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा जांचे गए 70 औषधि नमूनों को भी नवंबर में एनएसक्यू के रूप में चिन्हित किया गया है। एक या उससे ज्यादा निर्दिष्ट गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरने पर किसी औषधि को एनएसक्यू माना जाता है।</p>
<p>एक अधिकारी ने कहा, “सरकारी प्रयोगशाला में जिन औषधियों का परीक्षण किया गया, केवल वे मानकों पर खरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/115413/samples-of-111-medicines-did-not-meet-quality-standards-in-november"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/antibiotic-medicine-capsule.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 28 दिसंबर (भाषा) केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने नवंबर में केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं में जांचे गए 41 दवा नमूने 'मानक गुणवत्ता के नहीं' (एनएसक्यू) पाए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इसके अलावा, राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा जांचे गए 70 औषधि नमूनों को भी नवंबर में एनएसक्यू के रूप में चिन्हित किया गया है। एक या उससे ज्यादा निर्दिष्ट गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरने पर किसी औषधि को एनएसक्यू माना जाता है।</p>
<p>एक अधिकारी ने कहा, “सरकारी प्रयोगशाला में जिन औषधियों का परीक्षण किया गया, केवल वे मानकों पर खरी नहीं उतरीं और इससे बाजार में उपलब्ध अन्य औषधि के संबंध में किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है।”</p>
<p>नवंबर में दो औषधि नमूनों की पहचान नकली दवाओं के रूप में की गई थी। सूत्रों ने बताया कि इनमें से एक नमूना बिहार औषधि नियंत्रण प्राधिकरण और दूसरा सीडीएससीओ गाजियाबाद ने लिया था।</p>
<p>अनधिकृत और अज्ञात निर्माता दूसरी कंपनियों के ब्रांड नामों का उपयोग करके ये दवाएं बना रहे थे।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि एनएसक्यू और नकली दवाओं की पहचान के लिए राज्यों के नियामकों के सहयोग से नियमित रूप से कार्रवाई की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी दवाओं की पहचान करके बाजार से हटाया जाए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/115413/samples-of-111-medicines-did-not-meet-quality-standards-in-november</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2024 13:34:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन-फिलीपींस और यूक्रेन से वापस लौटे मेडिकल छात्रों की अधूरी पढ़ाई और परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लिया बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>युद्धग्रस्त यूक्रेन और कोरोना महामारी के कारण चीन-फिलीपींस से लौटे भारतीय एमबीबीएस छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 3 देशों से लौटने वाले छात्रों को देश के मेडिकल कॉलेज में अधूरी परीक्षा को पास करने की अनुमति दी है। साथ ही ये भी कहा है कि इन छात्रों में दो प्रयासों में एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। अदालत ने इसके लिए के लिए केंद्र सरकार को आदेश दिया है।</p>
<p>मंगलवार को हुई सुनवाई</p>
<p>आपको बता दें कि इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90831/supreme-court-took-a-big-decision-regarding-incomplete-studies-and"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/court-symbol5.jpg" alt=""></a><br /><p>युद्धग्रस्त यूक्रेन और कोरोना महामारी के कारण चीन-फिलीपींस से लौटे भारतीय एमबीबीएस छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 3 देशों से लौटने वाले छात्रों को देश के मेडिकल कॉलेज में अधूरी परीक्षा को पास करने की अनुमति दी है। साथ ही ये भी कहा है कि इन छात्रों में दो प्रयासों में एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। अदालत ने इसके लिए के लिए केंद्र सरकार को आदेश दिया है।</p>
<p>मंगलवार को हुई सुनवाई</p>
<p>आपको बता दें कि इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलीलें पेश कीं। ऐश्वर्या भट्टी ने बीआर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ के समक्ष राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (NMC) के साथ स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की अध्यक्षता वाली एक समिति की सिफारिशें प्रस्तुत कीं। ये सिफारिशें प्रदान करती हैं कि एमबीबीएस अंतिम वर्ष में लौटने वाले छात्र जिन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई ऑनलाइन पूरी कर ली है, उन्हें अंतिम एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने का अवसर दिया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>छात्र भारतीय मेडिकल कॉलेजों में उपस्थित हो सकेंगे</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार, मौजूदा NMC पाठ्यक्रम और दिशानिर्देशों के अनुसार, जो छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करके बिना परीक्षा दिए विदेश से लौटे हैं, उन्हें पहले MBBS फाइनल क्लियर करने का एक मौका दिया जा सकता है। ये छात्र किसी भी मौजूदा भारतीय मेडिकल कॉलेज में पंजीकरण कराए बिना भी 1 वर्ष की अवधि के भीतर परीक्षा दे सकते हैं। इसके अलावा मंत्रालय के हलफनामे में यह भी कहा गया है कि समिति ने इस बात पर जोर दिया है कि यह विकल्प केवल एक बार के लिए होना चाहिए और भविष्य में इस तरह के किसी अन्य मामले में इस मामले को सन्दर्भ नहीं बनाना चाहिए। छात्रों को 2 परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 2 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप भी पूरी करनी होगी, जिसमें से पहला साल मुफ्त होगा और दूसरे साल एनएमसी द्वारा नियमानुसार भुगतान किया जाएगा।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से छात्रों की समस्याओं पर विचार करने को कहा</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने एक हलफनामे के माध्यम से कहा है कि थ्योरी परीक्षा भारतीय एमबीबीएस परीक्षा की तरह आयोजित की जा सकती है, जबकि व्यावहारिक परीक्षा कुछ मान्यता प्राप्त सरकारी मेडिकल कॉलेजों द्वारा आयोजित की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट में लौटे छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और एस नागमुथु ने सुप्रीम कोर्ट को भारतीय पाठ्यक्रम और अन्य मुद्दों के बारे में रिटर्न छात्रों की चिंताओं के बारे में सूचित किया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि अदालत ने सामान्य संशोधन के साथ समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है कि एक छात्र को एमबीबीएस अंतिम, प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण करने का केवल एक मौका दिया जा रहा है, जिससे छात्रों को कठिनाई होगी। इस वजह से छात्रों को दोनों परीक्षाओं में पास होना जरूरी है।पास करने के लिए एक नहीं बल्कि 2 मौके दिए जाने चाहिए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी केंद्र से विदेश से लौटने वाले भारतीय छात्रों की समस्याओं पर गौर करने को कह चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/90831/supreme-court-took-a-big-decision-regarding-incomplete-studies-and</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 00:21:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटेन के शोधकर्ताओं को मिली बड़ी सफलता, घातक हड्डी के कैंसर पर अधिक असरकारक दवा पर चल रहे शोध का सकारात्मक परिणाम </title>
                                    <description><![CDATA[सर्जरी या कीमोथेरेपी की आवश्यकता के बिना जीवित रहने की दर को 50 प्रतिशत तक बढ़ा देगी ये दवा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>तकनीक के बढ़ते प्रयास के साथ दिन बा दिन हर क्षेत्र में तरक्की हो रही है। मेडिकल के क्षेत्र में भी ऐसा ही हो रहा है। अब ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने एक नई दवा विकसित की है जो सभी मुख्य प्रकार के प्राथमिक हड्डी के कैंसर के खिलाफ काम करती है और सर्जरी या कीमोथेरेपी की आवश्यकता के बिना जीवित रहने की दर को 50 प्रतिशत तक बढ़ा देती है।</p>
<p><strong>क्या है ये बीमारी और कैसे होता है इसका उपचार</strong></p>
<p>आपको बता दें कि जब कैंसर की कोशिकाएं हड्डियों के अंदर फैल जाती हैं, तो उसे हड्डियों (बोन्स) का कैंसर कहते है। बोन कैंसर किसी भी हड्डी के अंदर हो सकता है, लेकिन खासकर बोन कैंसर हाथों और पैरों की हड्डियों में ज्यादा होता है। हड्डियों में शुरू होकर हड्डियों में फैलने वाला ये कैंसर मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है। वर्तमान में इसके लिए कीमोथेरेपी कॉकटेल और अंग विच्छेदन ही उपचार है। इस सब के बावजूद, पांच साल की जीवित रहने की दर केवल 42 प्रतिशत कम है।  लेकिन जर्नल ऑफ बोन ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चलता है कि सीएडीडी 522 नामक एक नई दवा मानव हड्डी के कैंसर से प्रत्यारोपित चूहों में कैंसर के फैलाव को चलाने वाले जीन को कैसे अवरुद्ध करती है। कीमोथेरेपी के विपरीत, यह बालों के झड़ने, थकान और बीमारी जैसे जहरीले दुष्प्रभाव भी पैदा नहीं करता है।</p>
<p><strong>हर साल आते है इतने मामले सामने, क्या है नए शोध के अपेक्षित परिणाम</strong></p>
<p>इस बीमारी की गंभीरता के बारे में बात करें तो दुनिया भर में हर साल इसके लगभग 52,000 नए मामले सामने आते हैं। ऐसे में नई दवा CADD522-RUNX2 प्रोटीन को प्रभावी होने से रोकने के लिए असरकारक पाया गया। वहीं चूहों पर प्रीक्लिनिकल परीक्षणों से पता चला है कि "कैमोथेरेपी या सर्जरी के बिना, नई CADD522 दवा का उपयोग करके मेटास्टेसिस-मुक्त उत्तरजीविता में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इस शोध से जुड़े डॉक्टर ग्रीन ने कहा ‘मैं आशावादी हूं कि सर्जरी जैसे अन्य उपचारों के साथ मिलकर, यह इस बीमारी के लिए अधिक प्रभावशाली साबित होगा।" उन्होंने आगे कहा "महत्वपूर्ण रूप से, क्योंकि RUNX2 जीन की आमतौर पर सामान्य कोशिकाओं द्वारा आवश्यकता नहीं होती है, दवा कीमोथेरेपी जैसे दुष्प्रभावों का कारण नहीं बनती है। यह सफलता वास्तव में महत्वपूर्ण है क्योंकि हड्डी के कैंसर का इलाज 45 से अधिक वर्षों से नहीं बदला है।," </p>
<p><strong>अंतिम स्टेज पर है शोध</strong></p>
<p>गौरतलब है कि इस पर टीम के सभी डेटा को इकट्ठा करने और मानव नैदानिक ​​परीक्षण शुरू करने के अनुमोदन के लिए एमएचआरए से संपर्क करने से पहले दवा अब औपचारिक विज्ञान मूल्यांकन से गुजर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/90291/uk-researchers-get-major-breakthrough-positive-results-of-ongoing-research</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Mar 2023 06:59:28 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : यहां जहरीले सांपों से निकाला जाता है जहर, सर्पदंश के मरीजों के लिये संजीवनी</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात सरकार ने धरमपुर में 10 करोड़ की लागत पर स्थायी केंद्र शुरु करने ग्रांट मंजूर की ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में साल भर में सर्पदंश के कारण 1.38 लाख लोगों की मौत हो जाती है। अपने भारत में भी कई लोग सर्पदंश के शिकार होते हैं। इन्हीं मौतों को रोकने के शुभ आशय से गुजरात सरकार ने वलसाड जिले के धरमपुर के मालनपाडा गांव में 10 करोड़ रुपये की लागत पर विश्व स्तरीय सर्प संशोधन केंद्र शुरु किया जायेगा।</p>
<p><strong>वलसाड जिले में बारिश के दिनों में सर्पदंश के कई मामले सामने आते हैं</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वलसाड जिले के धरमपुर और कपराडा तहसील में बारिश की मौसम में सर्वाधिक सर्पदंश के मामले सामने आते हैं और कई लोगों की मौत हो जाती है। इसी के मद्देनजर सर्पदंश के विशेषज्ञ डॉ. धीरूभाई सी पटेल ने सर्पदंश के मरीजों की चिकित्सा एक सेवाकार्य के रूप में शुरु की थी। </p>
<p><strong>गुजरात सरकार ने की पहल, 10 करोड़ की ग्रांट मंजूर की</strong></p>
<p>गुजरात सरकार ने इसका संज्ञान लिया और आज भी इन्हें एन्टीवेनम इंजेक्शन निःशुल्क उपलब्ध करा रही है। अब रिजियन स्पेसिफिक एन्टीविनम इंजेक्शन का उत्पादन किया जा सके इसके लिये राज्य सरकार ने पहल करते हुए 2020 में 10 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी की है। इस धन राशि के उपयोग से धरमपुर के मालनपाडा में वन विभाग के पंचवटी मकान में अस्थायी रुप से चल रहे केंद्र को सांपों के संवर्धन के लिये विश्व स्तरीय सर्प संशोधन केंद्र में तब्दिल करना है। यहां अत्यंत जहरीले माने जाने वाले 3000 सांपों को रखने की मंजूरी प्रदान की गई है। </p>
<p><strong>जहरीले सांपों का संवर्धन कर उनसे जहर निकाल कर पाउडर बनाया जाता है</strong></p>
<p>निसंदेह आने वाले दिनों में ये स्पेक रिसर्च इंस्टीट्यूट न केवल भारत अपितु समग्र दुनिया के लिये उपयोग सिद्ध होगा। विभिन्न राज्यों में पाये जाने वाले सर्पदंश के मामलों में अलग-अलग प्रकार के जहर देखने को मिलते हैं। इस संबंध में डॉ. धीरुभाई पटेल कहते हैं कि गुजरात में रसेल वाइपर सांप ने किसी व्यक्ति को काटा हो और दूसरी ओर उत्तरप्रदेश या पंजाब में इसी जाति के सांप ने किसी को काटा हो तो दोनों ही मामलों में पीड़ित व्यक्ति में जहर में विविधता देखने को मिलती है। इसीलिये विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुसार रिजियन स्पेसिफिक एन्टिवेनम इंजेक्शन बनाये जायेंगे। इसके लिये गुजरात और पड़ौस के महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश राज्यों से अत्यंत जहरीले सांपों को केंद्र में लाकर उनका संवर्धन किया जायेगा। उसके बाद उनका जहर निकाल कर विशेष प्रक्रिया के माध्यम से लाइओफिलाइज्ड पाउडर तैयार करके सर्प जहर विरोधी दवाई बनाने वाली विभिन्न कंपनियों को दिया जायेगा। उसमें से बने इंजेक्शन सरकार निर्धारित नियमों के अनुसार अस्पतालों में मरीजों के लिये आवंटित करेगी। </p>
<p><strong>सांपों से निकलने  वाले जहर की मात्रा भी अलग</strong></p>
<p>किस सांप से कितना जहर निकाला जाता है इस संदर्भ में डॉ. पटेल ने बताया कि कोब्रा में से सप्ताह में एक बार में 250 से 300 मिलीग्राम, कोमन क्रेट में से पखड़े में एक बार में 0.026 मिलीग्राम, रसेल वाइपर में से महीने में तीन बार में 150 से 160 मिलीग्राम और सो स्केल वाइपर में से पखवाड़े में एक बार में 0.0026 मिलीग्राम जहर निकाल जायेगा। स्थानीय सांइनाथ होस्पीटल में ही पिछले साल 1200 सर्पदंश के मामले दर्ज हुए थे। कई मामलों में एक मरीज को ही 15 से 45 इंजेक्शन देने पड़ जाते हैं जिससे प्रति वर्ष 3 हजार इंजेक्शन की आवश्यकता रहती है। </p>
<p><strong>इस संस्थान को चाहिये और ढेर सारे सांप</strong></p>
<p>आपको जानकार आश्चर्य होगा कि मालनपाडा संशोधन केंद्र में फिलहाल 86 प्रजातियों के अत्यंत जहरीले सांप हैं जिनमें 24 कोब्रा (नाग), 33 रसेल वाइपर, 25 कोमन क्रेट और 4 सो स्केल्ड वाइपर। एन्टीवेनम बनाने के लिये कुल 580 सांपों की आवश्यकता है। इसके अनुसार 60 कोब्रा, 120 रसेल वाइपर, 160 कोमन क्रेट और 240 सो स्केल्ड वाइपर की आवश्यकता इस केंद्र को है। इसके लिये प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सांप एकत्रित करने की मंजूरी मांगी गई है। सबसे पहले प्रदेश के तटीय इलाकों के 8 जिलों से सांप एकत्रित किये जायेंगे।</p>
<p>आपको बता दें कि फिलहाल गुजरात में सर्पदंश विरोधी इंजेक्शन बाहर से मंगवाये जाते रहे हैं। अब इस केंद्र में तैयार पाउडर से बने इंजेक्शन सुलभ होंगे। गौरतलब है कि भारत में धरमपुर स्थित यह केंद्र विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइंस अनुसार बना एक मात्र संस्थान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jan 2023 13:27:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युद्ध के माहौल के बीच सैकड़ों छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने युक्रेन पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[भविष्य की चिंता के साथ विपरीत परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं भारतीय छात्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>कुछ महीने पहले भारत सरकार ने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बीच ऑपरेशन गंगा मेगा मिशन की शुरुआत करते हुए हजारों भारतीय छात्रों को यूक्रेन से भारत वापस लाया था। रूस के यूक्रेन पर हमले के साथ ही पैदा हुए युद्ध के माहौल के बीच मेडिकल की पढाई करने युक्रेन गये भारत के 20,000 से अधिक छात्रों को युद्ध के कारण यूक्रेन छोड़ना पड़ा। ये छात्र विभिन्न यूरोपीय देशों के माध्यम से भारत पहुंचे। लेकिन उनके मन में एक सवाल था कि भारत पहुंचने पर उनके भविष्य और मेडिकल की पढ़ाई का क्या होगा।</div>
<div> </div>
<h2>भारत में अपने भविष्य को लेकर चिंतित छात्र</h2>
<div> </div>
<div>डॉक्टर बनने की उम्मीद में इन छात्रों ने महीनों इंतजार किया और भारत सरकार से संपर्क किया। सियासी गलियारों में सड़कों से लेकर संसद तक चर्चा हो रही थी कि इन छात्रों का भविष्य अधर में न लटके. लेकिन जब उन्हें कहीं से भी भारतीय मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरण और प्रवेश मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी, तो अब ये छात्र वापस यूक्रेन लौटने लगे।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>इस बारे में गोरखपुर निवासी डॉ मोहन और यूक्रेन के विनित्सा मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे गया के निवासी डॉ रवि कुमार कहते हैं कि हमने महीनों इंतजार किया लेकिन भारत सरकार से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली कि हमारा अध्ययन कैसे आगे बढ़ेगा। साथ ही नेशनल मेडिकल काउंसिल हमें आगे ट्रांसफर या एडमिशन नहीं देना चाहती थी। सबसे बड़ी बात कि हमारे पास भारतीय निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने के लिए पैसे नहीं हैं क्योंकि हम गरीब परिवार से आते हैं। डॉ मोहन कहते हैं कि आज भी विश्वविद्यालय के बाहर अक्सर खतरे के सायरन बजते हैं और स्थिति के कारण खाना महंगा हो गया है लेकिन हम यहां भविष्य की चिंता के कारण हैं।</div>
<div> </div>
<h2>1500 जितने छात्र वापस युक्रेन आये</h2>
<p> </p>
<div>डॉक्टर रवि का कहना है कि अकेले विन्नित्सिया में 300 से अधिक छात्र आए हैं, और अगर यह संख्या यूक्रेन के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के साथ जोड़ दी जाए, तो यह लगभग 1500 हो जाती है। इन दोनों छात्रों का अनुमान है कि करीब 1500 भारतीय छात्र यूक्रेन लौट आए हैं और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। डॉ मोहन का कहना है कि उनके पास यूक्रेन का वीजा था इसलिए वे मोल्दोवा से ट्रांजिट वीजा के साथ यूक्रेन पहुंचे और अब उनकी कक्षाओं में भाग ले रहे हैं।</div>
<div> </div>
<h2>परिवार वाले परेशान</h2>
<div> </div>
<div>साथ ही परिवार के लोग भी परेशान हैं, स्थिति खराब है लेकिन अगर हम ऐसा करते हैं तो भविष्य का सवाल है? इस बीच, यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने सभी भारतीयों को एक एडवाइजरी जारी कर स्थिति को देखते हुए उन्हें जल्द से जल्द यूक्रेन छोड़ने को कहा है। इन दोनों छात्रों ने कहा है कि अब वे किसी भी परिस्थिति में भारत नहीं लौटेंगे जब तक कि उनके पास डॉक्टर की डिग्री न हो या भारत सरकार कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/81612/hundreds-of-students-arrived-in-ukraine-to-complete-their-studies-amid-the-atmosphere-of-war</link>
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                <pubDate>Thu, 27 Oct 2022 18:04:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली : सीके बिड़ला अस्पताल में डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक किया महिला का ऑपरेशन, पेट से निकाला फुटबॉल के आकार का ट्यूमर</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल की रहने वाली यह महिला पेट में तेज दर्द की शिकायत लेकर सीके बिड़ला अस्पताल पहुंची थी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सीके बिड़ला अस्पताल में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। डॉक्टरों ने लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए पेट दर्द से पीड़ित 32 वर्षीय महिला के पेट से फुटबॉल के आकार का कैंसरयुक्त ट्यूमर निकाला है। इस दुर्लभ मेसेंटेरिक ट्यूमर का वजन 4 किलो है।</div><div><br /></div><div><br /></div><div>मामले में मिली जानकारी के अनुसार नेपाल की रहने वाली यह महिला पेट में तेज दर्द की शिकायत लेकर सीके बिड़ला अस्पताल पहुंची थी। जब डॉक्टर ने उसकी जांच की, तो उसके पेट में 4 किलो वजन और 40 सेंटीमीटर आकार वाला एक कैंसरयुक्त ट्यूमर पाया गया। ऐसे में डॉक्टरों ने कीहोल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए इस विशाल कैंसरयुक्त ट्यूमर को निकालने का फैसला किया। इसके लिए डॉक्टरों ने महिला की आंत के निचले हिस्से में उसी तरह चीरा लगाया जैसा बच्चे को जन्म देते समय किया जाता है। इसके बाद डॉक्टरों ने इस तरह उसके शरीर से इस विशाल कैंसरयुक्त ट्यूमर को निकाल दिया। डॉक्टरों के मुताबिक इससे मरीज का दर्द भी कम हुआ।</div><div><br /></div><div><br /></div><div>इस महिला का सफलतापूर्वक ऑपरेशन करने वाले सीके बिड़ला अस्पताल के डॉ अमित जावेद का कहना है कि ट्यूमर के आकार के कारण यह एक बहुत ही जटिल सर्जरी थी। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी करने के लिए पेट में बहुत कम जगह छोड़ते हुए कैंसर का ट्यूमर पूरे उदर गुहा में फैल गया था। उनका कहना है कि इसके अलावा कैंसर का ट्यूमर बहुत बड़ा और भारी था जिसकी वजह से लेप्रोस्कोपिक तरीके से काटना और संभालना बहुत मुश्किल था। अब मरीज पूरी तरह से ठीक हो गया है और सामान्य जीवन जी रहा है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/83704/delhi-doctors-successfully-operated-on-a-woman-at-ck-birla-hospital-removed-a-football-sized-tumor-from-her-stomach</link>
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                <pubDate>Tue, 06 Sep 2022 14:19:00 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेडिकल के क्षेत्र में भारत की बड़ी उपलब्धि, सीरम इंस्टिट्यूट ने तैयार किया इस भयानक कैंसर की देशी दवा, जल्द ही बाजारों में होगी उपलब्ध</title>
                                    <description><![CDATA[सीरम इंस्टिट्यूट ने जानलेवा सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए स्वदेशी वैक्सीन तैयार कर ली है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>भारत की सीरम इंस्टिट्यूट ने मेडिकल  क्षेत्र बहुत बड़ा काम करते हुए जानलेवा सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए स्वदेशी वैक्सीन तैयार कर ली है जो अगले कुछ महीनों में बाजार में आ जाएगी। कल सीरम के प्रमुख अदार पूनावाला ने इससे जुड़ी कई बातों को लेकर जानकारी दी।</div><div><br /></div><h2>अभी कीमत निश्चित नहीं पर वैक्सीन नहीं होगी बहुत मंहगी</h2><div>आपको बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट के प्रमुख पूनावाला ने बताया कि अभी वैक्सीन की कीमत निश्चित नहीं की गई है। ये उत्पादकों व भारत सरकार से चर्चा के बाद तय की जाएगी। इसके बाद भी  अंदाजन इसकी कीमत 200 से 400 रुपये के बीच होगी। वैक्सीन की वैज्ञानिक पूर्णता के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह भी शामिल हुए। वैज्ञानिक पूर्णता से आशय यह है कि टीके से संबंधित शोध एवं विकास का काम पूरा गया है और टीके को जनता को उपलब्ध कराने का अगला चरण होगा।</div><div>कार्यक्रम के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत कम उम्र की महिलाओं में प्रचलित सर्वाइकल कैंसर के लिए स्वदेशी रूप से विकसित पहला टीका लेकर आया है। देश के पहले क्वाड्रिवेलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस वैक्सीन (क्यूएचपीवी) को लेकर अदार पूनावाला ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए यह देश में विकसित पहला टीका है। साथ ही उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के देश में बचावकारी दवाओं व टीकों के विकास की दिशा में किये जा रहे प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।</div><div><br /></div><h2>किनको दिया जाएगा टीका</h2><p><br /></p><div>सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस गंभीर बीमारी से बचाव का यह टीका पहले नौ से 14 वर्ष की लड़कियों को दिया जा सकता है। देश में इस समय एचपीवी के दो टीके मौजूद हैं और इस एचपीवी वैक्सीन की कीमत लगभग 2,000 रुपये से 3,000 रुपये प्रति खुराक है। इन वैक्सीन का निर्माण विदेशी कंपनियों द्वारा किया जाता है। इनमें एक टीका गार्डसिल है जिसे मर्क तैयार करती है, जबकि दूसरी सर्वेरिक्स है, जिसे ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन तैयार करती है। ऐसे में उम्मीद है कि सीरम के इस क्षेत्र में उतरने से कीमतें कम होंगी। सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में इस टीके को शामिल करना, महिलाओं में सर्विकल कैंसर की समस्या को कम करने की दिशा में यह अहम कदम साबित हो सकता है।</div><div><br /></div><h2>महिलाओं को होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर</h2><p><br /></p><div>इस बीमारी की बात करें तो यह ब्रेस्ट कैंसर के बाद देश में महिलाओं को होने वाला सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है। एचपीवी सेंटर के ताज़ा एस्टिमेट के मुताबिक, भारत में हर साल एक लाख 23 हजार से ज्यादा महिलाएं इस कैंसर का शिकार होती हैं और 77 हजार से ज्यादा की मौत होती है। ऐसे में आंकड़ों की माने तो इस समय पूरे देश में लगभग पांच फीसदी महिलाएं इस बीमारी से जूझ रही हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/81570/india-s-big-achievement-in-the-field-of-medicine-serum-institute-has-prepared-indigenous-medicine-for-this-terrible-cancer-will-soon-be-available-in-the-markets</link>
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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 08:03:30 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>चिकित्सकीय चमत्कार : जब क्लिनिकल ट्रायल में मरीजों के शरीर से कैंसर के कीटाणु गायब हो गए!</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में रेक्टल कैंसर यानी मलद्वार का कैंसर के कुछ मरीजों पर एक विशेष दवा डॉस्टरलिमैब का क्लिनिकल ट्रायल किया गया। इस प्रयोग से सिर्फ 6 महीने में ही कैंसर का ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गया ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>आज के समय में दुनिया में चिकित्सा पद्धति के इतने समृद्ध होने के बाद भी कैंसर एक लाइलाज बीमारी बनी हुई है। किसी कैंसर के मरीज को बहुत ही दर्दनाक चिकित्सा पद्धति से गुजरना पड़ता है। इस पर भी उसके पूरी तरह से ठीक होने की कोई गारंटी नहीं रहती। लेकिन अब चिकित्सा के क्षेत्र से आची खबर सामने आ रही है। वैज्ञानिकों को कैंसर के इलाज में बड़ी कामयाबी मिलती नजर आ रही है।</div><div>आपको बता दें कि हाल ही में रेक्टल कैंसर यानी मलद्वार का कैंसर के कुछ मरीजों पर एक विशेष दवा डॉस्टरलिमैब का क्लिनिकल ट्रायल किया गया। इस प्रयोग से सिर्फ 6 महीने में ही कैंसर का ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गया। यह रिसर्च न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुई है। फिलहाल ये दवा अभी अपने यह ट्रायल फेज में है। आम लोगों के लिए कब से यह बाजार में उपलब्ध होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। साथ ही यह खुले बाजार में मौजूद नहीं है, लेकिन दवाइयों के ऑनलाइन मार्केट में उपलब्ध है। वहीं कीमत की बात करें तो एएनआई की ओर से मिली जानकारी के अनुसार इस दवा की एक डोज की कीमत 11,000 डॉलर यानी 8.5 लाख रुपए है। भविष्य में ज्यादा प्रोडक्शन होने के बाद भी इसका किफायती होना मुश्किल है। साथ ही ड्रग अभी सिर्फ एंडोमीट्रियल कैंसर के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अन्य रोगियों पर इसका क्या असर होगा या क्या उन पर इसका प्रयोग करेंगे इसकी कोई जानकारी नहीं है।</div><div>इस बारे में इस स्टडी को करने वाले डॉ लुइस ए डियाज कहते है कि कैंसर के इतिहास में पहली बार किसी दवा से सभी मरीज ठीक हुए। भले ही यह स्टडी छोटी है, लेकिन इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ बड़ी कामयाबी है। वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डॉ एलन पी विनूक ने कहा कि किसी कैंसर रिसर्च में हर एक मरीज का ठीक हो जाना अपने आप में नई बात है। वर्तमान में प्रयोग के दौरान सभी मरीज क्लिनिकल ट्रायल से पहले कीमोथैरेपी, रेडिएशन और इनवेसिव सर्जरी जैसे इलाज करा चुके थे। साइड इफेक्ट के तौर पर उन्हें यूरीन, बॉवेल और सेक्स से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, किसी भी मरीज में डॉस्टरलिमैब ड्रग का कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखा।</div><div>टेसारो कंपनी द्वारा 2020 में तैयार और एक साल बाद में अमेरिका और यूरोप में मंजूर हुई डॉस्टरलिमैब लैब में बनाया जाने वाला एक ऐसा ड्रग है, जो इंसान के शरीर में एंटीबॉडीज के विकल्प की तरह काम करता है। कैंसर से जूझ रहे लोगों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है, जिससे उनमें एंटीबॉडीज का लेवल भी कम हो जाता है। ऐसे में बीमारी से लड़ने के लिए बाहरी दवा की जरूरत पड़ती है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80686/medical-miracle-when-cancer-germs-disappeared-from-patients-bodies-in-clinical-trials</link>
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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 23:29:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>मेडिकल क्षेत्र में देश की बड़ी सफलता, जल्द ही उपलब्ध होगी इस जानलेवा बीमारी की दवा</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय वैज्ञानिकों ने किया टीबी के खिलाफ एक कारगर टीका विकसित करने का दावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>भारत में ट्यूबरक्लोसिस यानी टीवी के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। यहाँ बहुत से लोग क्षय रोग यानी टीबी से पीड़ित हैं। इस बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलता है। ऐसे में टीबी के मरीजों के लिए राहत की खबर आई है। ऐसे में अब भारतीय वैज्ञानिकों ने टीबी के खिलाफ एक कारगर टीका विकसित करने का दावा किया है।</div><div>भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)द्वारा देश में 2 टीबी के टीकों का परीक्षण भी चल रहा है। इसका ट्रायल 6 राज्यों में किया जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत को 2024 तक टीबी का प्रभावी टीका मिल जाएगा। दरअसल पुणे में राष्ट्रीय एड्स अनुसंधान संस्थान (एनएआरआई) के वैज्ञानिक डॉ. सुचित कांबले ने कहा, "हमें विश्वास है कि भारत में एक अच्छा टीका उपलब्ध होगा और फिर भारत में टीबी के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी।"</div><div>प्राप्त जानकारी के अनुसार ICMR देश के 6 राज्यों में 18 स्थानों पर 3 चरणों में डबल ब्लाइंड प्लेसीबो कंट्रोल ट्रायल कर रहा है. इनमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, तेलंगाना और ओडिशा जैसे राज्य शामिल हैं। ICMR 2 टीबी टीकों, VPM1002 और Imuvac का परीक्षण कर रहा है। डॉ कांबले ने कहा कि परीक्षण में छह साल से अधिक उम्र के लोग शामिल थे।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80598/country-s-big-success-in-medical-field-medicine-for-this-deadly-disease-will-be-available-soon</link>
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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 20:59:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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