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                <description>School RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पढ़ाई के लिए सायरन: विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक गांव की अनूठी पहल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बीड, 28 दिसंबर (भाषा) महाराष्ट्र के बीड जिले के परली तहसील स्थित नागापुर गांव ने मोबाइल, टेलीविजन और अन्य गैजेट्स में खोए छात्रों में पढ़ाई की आदत विकसित करने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है।</p>
<p>‘सायरन ब्लोज फॉर स्टडी’ अभियान के तहत, गांव में हर शाम सायरन बजते ही छात्र अपने गैजेट्स छोड़कर दो घंटे तक नियमित रूप से पढ़ाई में जुट जाते हैं।</p>
<p>उप सरपंच संतोष सोलंके ने कहा कि इस अभियान को अभिभावकों और छात्रों दोनों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।</p>
<p>सोलंके ने बताया कि उन्हें सांगली जिले के अग्रम धुलगांव गांव में इसी तरह के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144883/siren-for-studies-a-villages-unique-initiative-to-secure-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/students-college-school-board-exam.jpg" alt=""></a><br /><p>बीड, 28 दिसंबर (भाषा) महाराष्ट्र के बीड जिले के परली तहसील स्थित नागापुर गांव ने मोबाइल, टेलीविजन और अन्य गैजेट्स में खोए छात्रों में पढ़ाई की आदत विकसित करने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है।</p>
<p>‘सायरन ब्लोज फॉर स्टडी’ अभियान के तहत, गांव में हर शाम सायरन बजते ही छात्र अपने गैजेट्स छोड़कर दो घंटे तक नियमित रूप से पढ़ाई में जुट जाते हैं।</p>
<p>उप सरपंच संतोष सोलंके ने कहा कि इस अभियान को अभिभावकों और छात्रों दोनों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।</p>
<p>सोलंके ने बताया कि उन्हें सांगली जिले के अग्रम धुलगांव गांव में इसी तरह के एक सफल मॉडल से प्रेरणा मिली।</p>
<p>सोलंके ने कहा, "यह प्रक्रिया सरल लेकिन प्रभावी है। शाम सात बजे, पूरे गांव में सायरन बजता है। यह हर घर के लिए टेलीविजन बंद करने और मोबाइल फोन दूर रखने के आदेश जैसा होता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह पहल महज एक रस्म बनकर न रह जाए, एक समर्पित निगरानी समिति समय-समय पर निरीक्षण करती है।’’ उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत के सदस्य और स्वयंसेवक निगरानी के लिए सप्ताह में दो बार घरों का दौरा करते हैं।</p>
<p>इस पहल का सबसे उल्लेखनीय प्रभाव छोटे बच्चों में देखा गया है। सोलंके ने बताया कि माता-पिता के अनुसार बच्चों के व्यवहार में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जहां बच्चे स्वयं अपने परिवारों को इसके बारे में बताते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य अपने छात्रों को राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम बनाना और उनके लिए उच्च शिक्षा के द्वार खोलना है। हम चाहते हैं कि नागपुर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाए।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 20:43:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्कूल में '100 उठक-बैठक' कराने पर हुई छठी कक्षा की छात्रा की मौत के विरोध में लोगों ने किया प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पालघर, 16 नवंबर (भाषा) महाराष्ट्र के पालघर जिले में देर से स्कूल पहुंचने पर कथित तौर पर 100 उठक-बैठक लगवाने के कारण हुई 12 वर्षीय एक लड़की मौत पर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।</p>
<p>विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने शनिवार देर रात इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया।</p>
<p>एक अधिकारी ने बताया कि परिवार, गवाहों और स्कूल कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।</p>
<p>स्थानीय लोग शनिवार रात वसई पूर्व के सातीवली में बड़ी संख्या में एकत्र हुए और छठी कक्षा की एक छात्रा के शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। शुक्रवार रात मुंबई के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144095/people-protested-against-the-death-of-a-class-6-student"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/school-college-education-study-class.jpg" alt=""></a><br /><p>पालघर, 16 नवंबर (भाषा) महाराष्ट्र के पालघर जिले में देर से स्कूल पहुंचने पर कथित तौर पर 100 उठक-बैठक लगवाने के कारण हुई 12 वर्षीय एक लड़की मौत पर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।</p>
<p>विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने शनिवार देर रात इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया।</p>
<p>एक अधिकारी ने बताया कि परिवार, गवाहों और स्कूल कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।</p>
<p>स्थानीय लोग शनिवार रात वसई पूर्व के सातीवली में बड़ी संख्या में एकत्र हुए और छठी कक्षा की एक छात्रा के शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। शुक्रवार रात मुंबई के एक अस्पताल में इस छात्रा की मौत हो गई थी।</p>
<p>आठ नवंबर को स्कूल में देरी से पहुंचने पर इस लड़की से कथित तौर पर 100 उठक-बैठक करवाया गया था। उसकी मां ने आरोप लगाया है कि उसकी बेटी की मौत उसके शिक्षक द्वारा दी गई ‘‘अमानवीय सजा’’ के परिणामस्वरूप हुई, जिसने उसे स्कूल बैग पीठ पर रखकर उठक-बैठक करने के लिए मजबूर किया था।</p>
<p>स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और तत्काल जवाबदेही तय करने की मांग की।</p>
<p>जब लड़की का शव इलाके में लाया गया, तो सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए और स्कूल एवं संबंधित शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग करने लगे।</p>
<p>पुलिस द्वारा मामला दर्ज किये जाने और परिवार को सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिये जाने के बाद ही देर रात अंतिम संस्कार किया गया।</p>
<p>वसई के प्रखंड शिक्षा अधिकारी पांडुरंग गलांगे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि अधिकारी शनिवार को स्कूल गए थे, लेकिन कोई भी विद्यालय कर्मी मौजूद नहीं था।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा अधिकारी सोमवार को जांच के लिए स्कूल का दौरा करेंगे।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि विभाग पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेगा और निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144095/people-protested-against-the-death-of-a-class-6-student</link>
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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 19:42:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका के कैलिफोर्निया में दिवाली के दिन छुट्टी, स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तर रहेंगे बंद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वॉशिंगटन, 08 अक्टूबर (वेब वार्ता)। दीवाली का त्योहार जैसे-जैसे करीब आ रहा है, भारत के अलग-अलग हिस्सों में हलचल तेज हो रही है। बाजार और घरों की साफ-सफाई और सजावट शुरू हो चुकी है।</p>
<p>हालांकि, दीवाली के इस त्योहार की जगमगाहट भारत तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी दीवाली मनाई जाने लगी है। इसी क्रम में अमेरिका के कैलिफोर्निया में दीवाली के दिन छुट्टी की घोषणा की गई है।</p>
<p>मंगलवार को कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने असेंबली बिल 268 पर साइन करके इसे आधिकारिक तौर पर राज्य की छुट्टियों की लिस्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143493/school-college-and-government-offices-will-be-closed-on-diwali-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/usa-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन, 08 अक्टूबर (वेब वार्ता)। दीवाली का त्योहार जैसे-जैसे करीब आ रहा है, भारत के अलग-अलग हिस्सों में हलचल तेज हो रही है। बाजार और घरों की साफ-सफाई और सजावट शुरू हो चुकी है।</p>
<p>हालांकि, दीवाली के इस त्योहार की जगमगाहट भारत तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी दीवाली मनाई जाने लगी है। इसी क्रम में अमेरिका के कैलिफोर्निया में दीवाली के दिन छुट्टी की घोषणा की गई है।</p>
<p>मंगलवार को कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने असेंबली बिल 268 पर साइन करके इसे आधिकारिक तौर पर राज्य की छुट्टियों की लिस्ट में शामिल कर दिया है। इस कानून के तहत कैलिफोर्निया के सरकारी कार्यालय, कम्युनिटी कॉलेज और सरकारी स्कूलों में दीवाली की छुट्टी होगी। इसके अलावा स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को दिवाली के मौके पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति भी मिल गई है।</p>
<p>बता दें कि पेंसिल्वेनिया अमेरिका का पहला राज्य है, जहां दिवाली के मौके पर अवकाश घोषित किया गया था। इसके अलावा कनेक्टिकट और न्यूयॉर्क में भी दिवाली के मौके पर छुट्टी होती है।</p>
<p>पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के पूर्व सलाहकार और सिलिकॉन वैली के प्रसिद्ध उद्यमी और समाजसेवी अजय जैन भूटोरिया ने इस मौके पर कैलिफोर्निया के गवर्नर को धन्यवाद देते हुए कहा, “धन्यवाद गवर्नर न्यूसम, एबी 268 पर हस्ताक्षर करके दिवाली को कैलिफोर्निया का अवकाश बनाने के लिए सीनेट सदस्य अश कालरा और डॉ. दर्शन पटेल को इस विधेयक का समर्थन करने और इसे अंतिम रूप देने, प्रकाश, एकता और हमारे विविध समुदायों का जश्न मनाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।”</p>
<p>अश कालरा ने पिछले महीने कहा था, “कैलिफोर्निया भारतीय अमेरिकियों की सबसे बड़ी आबादी वाला स्थान है और दिवाली को आधिकारिक राजकीय अवकाश घोषित करने से लाखों कैलिफोर्निया वासियों तक इसका संदेश पहुंचेगा जो इसे मनाते हैं और विविधता से भरे हमारे राज्य में कई लोगों को इसे अपनाने में मदद मिलेगी।”</p>
<p>मॉरीशस में भारी संख्या में भारतीय मूल की आबादी होने की वजह से दीवाली के दिन राष्ट्रीय अवकाश है। इसके अलावा मलेशिया में हरी दीवाली के नाम से दीवाली की छुट्टी होती है। म्यांमार में भी दीवाली के दिन छुट्टी है।</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/143493/school-college-and-government-offices-will-be-closed-on-diwali-in</link>
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                <pubDate>Wed, 08 Oct 2025 15:36:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा निदेशालय ने निजी विद्यालयों में ईडब्ल्यूएस-वंचित विद्यार्थियों के प्रवेश के लिए एसओपी जारी की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, तीन जनवरी (भाषा) दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए निजी विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, वंचित समूह और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की श्रेणियों के तहत प्रवेश को सुव्यवस्थित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। बृहस्पतिवार को जारी एक परिपत्र में यह जानकारी दी।</p>
<p>परिपत्र के मुताबिक, यह प्रक्रिया विद्यालयों की स्वीकृत क्षमता पर डेटा के वार्षिक संग्रह के साथ शुरू हो गई है, जिसे पहले ही निदेशालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है।</p>
<p>शिक्षा विभाग रिक्त सीटों की पहचान करेगा और सात कार्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/117587/directorate-of-education-issues-sop-for-admission-of-ews-disadvantaged-students-in-private-schools"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/school-college-education-study-class.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, तीन जनवरी (भाषा) दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए निजी विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, वंचित समूह और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की श्रेणियों के तहत प्रवेश को सुव्यवस्थित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। बृहस्पतिवार को जारी एक परिपत्र में यह जानकारी दी।</p>
<p>परिपत्र के मुताबिक, यह प्रक्रिया विद्यालयों की स्वीकृत क्षमता पर डेटा के वार्षिक संग्रह के साथ शुरू हो गई है, जिसे पहले ही निदेशालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है।</p>
<p>शिक्षा विभाग रिक्त सीटों की पहचान करेगा और सात कार्य दिवसों के भीतर अपने पोर्टल पर जानकारी अद्यतन करेगा।</p>
<p>डीडीई जिले की अध्यक्षता वाली एक समिति सीट आवंटन के संबंध में स्कूल के अभ्यावेदन की देखरेख करेगी।</p>
<p>शिक्षा विभाग ने कहा कि अंतिम सीटों की गिनती सार्वजनिक की जाएगी और एक विस्तृत परिपत्र के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।</p>
<p>निदेशालय ने बताया कि प्रवेश कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे, जिसमें सफल बच्चों को टेक्स्ट मैसेज, ईमेल या फोन के माध्यम से सूचित किया जाएगा।</p>
<p>दस्तावेज़ सत्यापन अब अलग-अलग विद्यालयों के बजाय क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा प्रबंधित किया जाएगा।</p>
<p>परिपत्र में बताया गया कि आरटीई प्रावधानों पर प्रशिक्षित 29 क्षेत्रीय टीमें ड्रॉ के 10 कार्य दिवसों के भीतर दस्तावेजों की जांच करेंगी।</p>
<p>निदेशालय ने कहा, “अगर जमा किए गए दस्तावेजों में विसंगतियां पाई जाती हैं, तो उम्मीदवारों के पास उन्हें दूर करने के लिए 15 दिन होंगे। रिपोर्ट न किए गए उम्मीदवारों को अपने दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त पांच दिन मिलेंगे। ”</p>
<p>अस्वीकृति या किसी कारण से खाली सीटें बाद में कम्प्यूटरीकृत ड्रॉ के जरिये आवंटित की जाएंगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/117587/directorate-of-education-issues-sop-for-admission-of-ews-disadvantaged-students-in-private-schools</link>
                <guid>https://www.loktej.com/article/117587/directorate-of-education-issues-sop-for-admission-of-ews-disadvantaged-students-in-private-schools</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Jan 2025 22:07:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजब-गजब: ये हैं दुनिया के कुछ सबसे 'महंगे' स्कूल, हजारों-लाखों में नहीं बल्कि करोडों में है फीस</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">भारत में सरकार शिक्षा का निजीकरण कर रही है और माता-पिता निजी स्कूलों में महंगी फीस देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि निजी स्कूलों को कई लोगों के लिए प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। ये महंगे निजी स्कूल सिर्फ भारत में ही नहीं हैं। दुसरे देशों में भी ऐसे विद्यालय हैं, जहां दुनिया भर के अमीर लोगों के बच्चे पढ़ रहे हैं। ऐसे स्कूल कितनी फीस लेते हैं, इसकी जानकारी यहां दी जा रही है। ये ऐसे स्कूल हैं जहां आम आदमी बच्चों को पढ़ाने का सपना भी नहीं देख सकता। यहाँ की फीस इतनी है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p dir="ltr">भारत में सरकार शिक्षा का निजीकरण कर रही है और माता-पिता निजी स्कूलों में महंगी फीस देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि निजी स्कूलों को कई लोगों के लिए प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। ये महंगे निजी स्कूल सिर्फ भारत में ही नहीं हैं। दुसरे देशों में भी ऐसे विद्यालय हैं, जहां दुनिया भर के अमीर लोगों के बच्चे पढ़ रहे हैं। ऐसे स्कूल कितनी फीस लेते हैं, इसकी जानकारी यहां दी जा रही है। ये ऐसे स्कूल हैं जहां आम आदमी बच्चों को पढ़ाने का सपना भी नहीं देख सकता। यहाँ की फीस इतनी है कि किसी आम आदमी का घर कई सालों तक आराम से चल जाए।</p>
<p dir="ltr"><strong>ये हैं दुनिया के सबसे महंगे स्कूल</strong></p>
<p dir="ltr">आपको बता दें कि दुनिया में सबसे महंगे विद्यालय की सूची में ब्रिटेन का एग्लॉन कॉलेज का नाम है। ब्रिटिश वास्तुकार जॉन सी कारलेट द्वारा 1949 में स्थापित इस स्कूल में 65 देशों के 422 बच्चे पढ़ रहे हैं। यहां पढ़ने की सालाना फीस 1.20 लाख डॉलर यानी 98 लाख रुपए है। दुनिया के सबसे महंगे स्कूलों में स्विट्जरलैंड का ले रोजी इंस्टीट्यूट भी शामिल है। इस स्कूल की स्थापना 1880 में पॉल एमिल कर्नल ने की थी। इस स्कूल की सालाना फीस 1.25 लाख फ्रैंक यानी 1.12 करोड़ रुपए तक जाती है।</p>
<p dir="ltr"><strong>इन स्कूलों के बारे में भी जान लो..!</strong></p>
<p dir="ltr">इसके बाद एक और महंगे स्कूल में डाट स्कूल एल्पिन ब्यू सोलेल भी स्विट्जरलैंड में स्थित है। यह एक बोर्डिंग स्कूल है। जिसकी स्थापना 1910 में हुई थी। अमीर परिवारों के बच्चे भी यहां पढ़ने आते हैं। स्कूल में प्रत्येक वर्ष 11 से 18 वर्ष के बीच के केवल 250 बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। सालाना फीस 1.30 करोड़ रुपए है। बच्चों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म की कीमत पांच लाख रुपए है। इसके अलावा स्विट्जरलैंड का सेंट जॉर्ज इंटरनेशनल स्कूल दुनिया के सबसे महंगे स्कूलों में शुमार है। इसकी शुरुआत 1927 में हुई थी। यहां 60 देशों के 400 छात्र पढ़ते हैं। जिसकी सालाना फीस 96 लाख रुपए है। इसके अलावा प्रवेश शुल्क अलग से लिया जाता है।</p>
<p dir="ltr"><strong>एक और महंगा स्कूल</strong></p>
<p dir="ltr">लेयसिन अमेरिकन स्कूल भी स्विट्जरलैंड में स्थित है। इस स्कूल का नियम है कि स्कूल में पढ़ने वाले हर बच्चे के बैंक खाते में कम से कम आठ लाख रुपये होने चाहिए। इस स्कूल में अंग्रेजी भाषा में शिक्षा दी जाती है। यहां 350 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल अल्पाइन रिज़ॉर्ट गांव में स्थित है। जिनकी प्राकृतिक सुंदरता किसी का भी मन मोह लेती है। स्कूल की सालाना फीस 96 लाख रुपए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/91085/amazingly-these-are-some-of-the-most-expensive-schools-in</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Apr 2023 21:03:24 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वड़ोदरा : ध्यान रखें कहीं आपके बच्चे के बैग में वो न मिले जो इस स्कूल के बच्चों के बैग में मिला</title>
                                    <description><![CDATA[वडोदरा के इस स्कूल के कक्षा 7 के 4 छात्रों के बैग से निकला कुछ ऐसा कि मच गया हड़कंप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>आमतौर पर छोटे बच्चों के स्कूल बैग की जांच करने पर उसमें से खिलौने मिल जाते हैं,या फिर चॉकलेट या फिर खाने की कोई चीज या फिर ज्यादा से ज्यादा मोबाइल फोन मिला करते है लेकिन वड़ोदरा के एक विद्यालय में छात्रों के बस्ते से जो मिला है उसे जानने वाला हर एक शख्स हैरान है। वडोदरा के एक स्कूल में छात्रों के बैग की जांच की जा रही थी और ऐसी चीजें मिलीं, जिसने सभी के होश उड़ा दिए।</div><div><br /></div><h2>बैग में शराब की बोतल व सिगरेट मिली</h2><div><br /></div><div>मामले के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दे तो वड़ोदरा के अंबे विद्यालय में प्रबंधक द्वारा अचानक ही बच्चों की बैग की चेकिंग की गई। इसी दौरान छात्रों के बैग में शराब की बोतलें और सिगरेट पाई गई। इसके बाद हंगामा हो गया। अंबे विद्यालय में कक्षा 7 में पढ़ने वाले 4 छात्रों के बैग में शराब की बोतल-सिगरेट मिली।</div><div><br /></div><h2>चारों छात्र निलंबित</h2><div><br /></div><div>जिसके बाद अन्य छात्रों के अभिभावकों ने भी इन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रबंधन को अर्जी दी। व्यवस्थापक ने चारों छात्रों को निलंबित कर दिया है। इस बारे में अभिभावक ने कहा कि यह घटना माता-पिता के लिए चिंता का विषय है। ऐसी गलती करने वाले बच्चों की काउंसलिंग की जानी चाहिए और पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए और शराब और सिगरेट के स्रोत की जांच की जानी चाहिए।</div><div><br /></div><h2>कुछ ज्वलंत प्रश्न उठे</h2><div><br /></div><div>इस घटना के बाद कुछ बड़े सवाल पैदा हो गए हैं। सबसे पहले तो इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि बच्चों को शराब और सिगरेट किसने दी? स्कूल जाने वाले छात्र के पास शराब-सिगरेट कहां से आ गई? बच्चों को नशे की लत के बारे में कौन सिखा रहा है? एक चिंता का विषय ये है कि क्या बच्चे किसी शराब तस्करों के संपर्क में आ गए हैं? इससे बड़ा सवाल ये है कि शराब मुक्त गुजरात में शराब आई तो आई कहां से?</div><div><br /></div><h2>पुलिस पर भी उठ रहे सवाल</h2><div><br /></div><div>वहीं पुलिस व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल उठ रहा है। क्या पुलिस ठीक से पेट्रोलिंग नहीं कर रही है? क्या लट्ठकांड के बाद भी पुलिस की आंख नहीं खुली? नशा करने वालों पर कार्रवाई कब होगी? इन सबके बीच ये प्रश्न यथावत है कि गुजरात में शराबबंदी सख्ती से कब लागू होगी?</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>वड़ोदरा</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/88137/vadodara-be-careful-that-your-child-s-bag-does-not-contain-what-was-found-in-the-children-of-this-school</link>
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                <pubDate>Tue, 06 Dec 2022 07:59:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उच्चतम न्यायालय ने दी निजी विद्यालयों के शिक्षकों को बड़ी राहत, माना ग्रेच्युटी के हकदार</title>
                                    <description><![CDATA[पीएजी एक्ट के तहत किसी भी कारण संस्थान छोड़ने से पहले कम से कम 5 साल तक निरंतर नौकरी करने वाले कर्मचारी को ग्रेच्युटी का लाभ देने का प्रावधान ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/81568/supreme-court-gives-big-relief-to-teachers-of-private-schools-considered-entitled-to-gratuity"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/6192_news8.jpg" alt=""></a><br /><div>निजी स्कूल के शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि निजी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षक कर्मचारी हैं और केंद्र सरकार द्वारा ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन अधिनियम, 2009 के तहत ग्रेच्युटी के हकदार हैं।</div><div>आपको बता दें कि पीएजी एक्ट 16 सितंबर 1972 से लागू है। इस नियम के तहत उस कर्मचारी को ग्रेच्युटी का लाभ देने का प्रावधान है जिसने अपनी सेवानिवृत्ति, इस्तीफे या किसी भी कारण संस्थान छोड़ने से पहले कम से कम 5 साल तक निरंतर नौकरी की है। श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा 3 अप्रैल, 1997 को जारी एक अधिसूचना के माध्यम से इस अधिनियम को दस या अधिक कर्मचारियों वाले शैक्षणिक संस्थानों पर भी लागू किया गया था। ऐसे में ये अधिनियम निजी स्कूलों पर भी लागू होते हैं। हाई कोर्ट के कई केस हारने के बाद निजी स्कूलों ने 2009 के संशोधन को देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी। उनके अनुसार ग्रेच्युटी मुआवजा अधिनियम, 2009 की धारा 2 (ई) के तहत छात्रों को शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षकों को कर्मचारियों के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने अहमदाबाद निजी प्राथमिक शिक्षक संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2004 के फैसले पर भरोसा किया जिसने इस सिद्धांत को निर्धारित किया।</div><div><br /></div><h2>क्या है पूरा मामला</h2><div>न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने 29 अगस्त को यह अहम फैसला दिया। पीठ ने निजी स्कूलों और स्कूलों के संघ द्वारा अलग-अलग दायर की गई याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। स्कूलों के तर्क को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा, ''यह संशोधन पहले से जारी एक विधायी गलती के कारण शिक्षकों के साथ हुए अन्याय और भेदभाव को दूर करता है। इसे निर्णय की घोषणा के बाद समझा गया था।'' सुप्रीम कोर्ट ने 2004 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बताए गए संशोधन को लाने और दोष को दूर करने के लिए विधायी अधिनियम को बरकरार रखा।</div><div>स्कूलों ने समानता के अपने मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 14), व्यापार करने के अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(जी)), जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21), और संपत्ति के अधिकार (अनुच्छेद 300ए) के उल्लंघन का दावा किया। स्कूलों का कहना था कि वे शिक्षकों को ग्रेच्युटी देने के लिए वित्तीय रूप से साधन नहीं हैं। पीठ ने निजी स्कूलों को छह सप्ताह की अवधि के भीतर पीएजी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ब्याज सहित कर्मचारियों/शिक्षकों दी जाने वाली ग्रेच्युटी का भुगतान करने का निर्देश दिया है।</div><div><br /></div><h2>निजी स्कूलों ने खटखटाया था कई उच्च न्यायालयों का दरवाजा</h2><div>गौरतलब है कि इंडिपेंडेंट स्कूल्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और कई अन्य निजी स्कूलों ने आवेदन जमा किए। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, गुजरात उच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय, बॉम्बे उच्च न्यायालय, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णयों को चुनौती दी। इसके अलावा कई स्कूलों ने सीधे सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की। उनकी याचिका ने कर भुगतान (संशोधन) अधिनियम, 2009 की धारा 2 (ई) और 13 ए की वैधता को चुनौती दी। इस अधिनियम में 3 अप्रैल, 1997 से शिक्षकों को ग्रेच्युटी के लाभ का प्रावधान था।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Sep 2022 14:59:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस वसूली के संबंध में कलेक्टर के आदेश पर जानिए हाईकोर्ट ने क्यों रोक लगाई?</title>
                                    <description><![CDATA[<div>गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सूरत के जिला कलेक्टर द्वारा जारी एक परिपत्र और जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा निजी स्कूलों को फीस का भुगतान न करने पर छात्रों को परेशान न करने के आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी क्योंकि यह किशोर न्याय अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है।</div><div>राज्य सरकार निजी स्कूल फेडरेशन की याचिका के खिलाफ जिला कलेक्टर के परिपत्र का बचाव नहीं कर सकी। हालांकि ये बताया गया कि कलेक्टर ने परिपत्र तब जारी किया जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने स्कूल प्रशासन द्वारा बच्चों को प्रताड़ित करने की शिकायत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/74278/surat-know-why-the-high-court-put-a-stay-on-the-order-of-the-collector-regarding-the-collection-of-fees-by-private-schools"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/4139_gujarathighcoart.jpg" alt=""></a><br /><div>गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सूरत के जिला कलेक्टर द्वारा जारी एक परिपत्र और जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा निजी स्कूलों को फीस का भुगतान न करने पर छात्रों को परेशान न करने के आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी क्योंकि यह किशोर न्याय अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है।</div><div>राज्य सरकार निजी स्कूल फेडरेशन की याचिका के खिलाफ जिला कलेक्टर के परिपत्र का बचाव नहीं कर सकी। हालांकि ये बताया गया कि कलेक्टर ने परिपत्र तब जारी किया जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने स्कूल प्रशासन द्वारा बच्चों को प्रताड़ित करने की शिकायत मिलने पर उनके निवारण के लिए कार्य करने के लिए कहा। हालांकि सरकार न्यायमूर्ति भार्गव करिया द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकी, जिसके तहत कलेक्टर को फीस के भुगतान पर निजी स्कूलों को आदेश देने का अधिकार मिला। इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई 22 अप्रैल को पोस्ट की गई है।</div><div>आपको बता दें कि 31 मार्च को, सूरत कलेक्टर के परिपत्र ने फीस का भुगतान न करने पर निजी स्कूलों के छात्रों के उत्पीड़न के बारे में विभिन्न शिकायतों का उल्लेख किया और कहा कि एनसीपीसीआर के अनुसार, कोई भी जबरदस्त छात्रों को परेशान नहीं कर सकता। ऐसा करना किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 और आरटीई अधिनियम की धारा 13(1) का घोर उल्लंघन है। इस पर स्कूलों ने जेजे अधिनियम के प्रावधानों का सहारा लेने के लिए परिपत्र को चुनौती दी, जिसमें बच्चों के साथ क्रूरता, दुर्व्यवहार, परित्याग और उपेक्षा के लिए सजा का प्रावधान है। </div><div>अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि परिपत्र में आरटीई अधिनियम का संदर्भ भी बिना है। स्कूल द्वारा फीस के भुगतान के लिए केवल रिमाइंडर जारी करना एक बच्चे के साथ क्रूरता नहीं कहा जा सकता है। अदालत ने सर्कुलर पर रोक लगाते हुए कहा, "कलेक्टर ने प्रथम दृष्टया बिना किसी अधिकार क्षेत्र या कानून के अधिकार के आदेश जारी किया है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/74278/surat-know-why-the-high-court-put-a-stay-on-the-order-of-the-collector-regarding-the-collection-of-fees-by-private-schools</link>
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                <pubDate>Sat, 09 Apr 2022 18:29:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत  : प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस के तकादे के खिलाफ कलेक्टर के नोटिस पर जानिए अदालत ने क्या रुख अपनाया?</title>
                                    <description><![CDATA[ सूरत के जिला कलेक्टर आयुष ओक द्वारा एक परिपत्र जारी कर सूरत के स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि बच्चों को उनका बकाया भुगतान करने के लिए मजबूर न करें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>गुजरात उच्च न्यायालय ने पिछले साल जारी एक परिपत्र पर मंगलवार को सूरत के जिला कलेक्टर को एक नोटिस जारी किया, जिसमें जिसमें सभी स्व-वित्तपोषित स्कूलों को फीस का भुगतान न करने पर छात्रों को परेशान नहीं करने का आदेश दिया गया था। कलेक्टर ने कहा था कि </div><div>सूरत के जिला कलेक्टर द्वारा सूरत के स्कूलों को जारी परिपत्र को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। सूरत के जिला कलेक्टर आयुष ओक द्वारा एक परिपत्र जारी कर सूरत के स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि बच्चों को उनका बकाया भुगतान करने के लिए मजबूर न करें। जिसे सूरत प्राइवेट स्कूल बोर्ड ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में हाईकोर्ट ने सूरत के जिला कलेक्टर को नोटिस भेजकर जवाब दाखिल करने को कहा है।</div><div>बता दें कि जिला कलेक्टर द्वारा एक परिपत्र जारी कर सूरत जिले के निजी स्कूलों के प्रशासकों को निर्देश दिया गया है कि वे फीस वसूल कर बच्चों पर किसी भी तरह का दबाव न डालें। 31 मार्च के इस परिपत्र में कहा गया है, "फीस माता-पिता और प्रशासकों के बीच की बात है, इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि इसके लिए बच्चे पीड़ित न हों। इस तरह के उत्पीड़न को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम और बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा।</div><div>एनसीपीसीआर ने कहा, ' इस तरह के निर्देश परिपत्र के जरिए दिए गए हैं कि अगर कोई बच्चा फीस नहीं देता है तो उचित फोरम में कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन बच्चों को प्रताड़ित या शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। स्कूल सीधे अभिभावकों से निपटें और बच्चों को बीच में न लाएं। जिसे फेडरेशन ऑफ फाइनेंस स्कूल्स गुजरात ने गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने सूरत के जिला कलेक्टर को नोटिस भेजकर जवाब दाखिल करने को कहा है।</div><div>निजी स्कूल के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से कोर्ट में पेश किया गया है कि जिस राज्य में फीस रेगुलेशन कानून है, वहां फीस के मामले में जिला कलेक्टर ऐसा परिपत्र नहीं बना सकते। यह मामला उनके दायरे में नहीं आता है।</div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/74240/surat-know-the-stand-taken-by-the-court-on-the-notice-of-the-collector-against-the-charge-of-fees-by-private-schools</link>
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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 20:59:11 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात  : 2023 से 6 साल पूरे करने पर ही बच्चे को पहली कक्षा में दाखिला मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[यदि बच्चे ने 1 जून 2023 को छह साल पूरे नहीं किए हैं, तो बच्चे को फिर से प्री-प्राइमरी में पढ़ना होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा 2020 में अधिसूचना जारी कर जून 2023 से छह साल पूरे करने के बाद ही कक्षा 1 में प्रवेश का नियम बनाया गया है। हालांकि कई स्कूल-माता-पिता अभी भी इसके बारे में अनजान हैं। ऐसे में प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी डीईओ-डीपीओ को एक सर्कुलर जारी कर अभिभावकों-स्कूलों को सूचित करने का निर्देश दिया है।</div><div>आपको बता दें कि प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के परिपत्र के अनुसार इस नियम का इस प्रकार प्रचार करना है जिससे जिला स्तर से अभिभावकों-विद्यालयों तक पर्याप्त सूचना पहुंचे। डीईओ-डीपीओ को इस नए नियम के बारे में प्राथमिक विद्यालयों को तुरंत सूचित करने का निर्देश दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक अभिभावक को नर्सरी, जूनियर या सीनियर केजी समेत प्री-प्राइमरी में बच्चे को इस तरह से दाखिल करना होगा कि जून 2023 में बच्चे को छह साल पूरे होने पर ही पहले ही कक्षा में प्रवेश मिल सके।</div><div>बता दें कि यदि बच्चे ने 1 जून 2023 को छह साल पूरे नहीं किए हैं, तो बच्चे को फिर से प्री-प्राइमरी में पढ़ना होगा और छह साल पूरे होने पर ही कक्षा 1 में प्रवेश मिलेगा। सरकार की अधिसूचना के अनुसार ऐसा बच्चा होगा प्राथमिक विद्यालय में सामान्यत: कक्षा 1 में प्रवेश नहीं दिया जायेगा।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/68501/gujarat-only-after-completing-6-years-from-2023-the-child-will-get-admission-in-the-first-class</link>
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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 11:53:00 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश : विद्यालय ने कक्षा छः के प्रश्नपत्र में पूछ लिया करीना-सैफ के बेटे का नाम, मच गया बवाल, जानिए क्या है पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश के खंडवा के एक निजी स्कूल में छठी कक्षा के सामान्य परीक्षा में विद्यालय ने पूछा तैमुर का पूरा नाम, अभिभावक से लेकर शिक्षा विभाग हरकत में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>मध्य प्रदेश के खंडवा के एक निजी स्कूल में छठी कक्षा के बच्चों का परीक्षण किया गया। इस दौरान बच्चों से एक ऐसा प्रश्न पुच लिया गया जिस पर बवाल मच गया है। दरअसल परीक्षा में एक्ट्रेस करीना कपूर के बेटे के नाम को लेकर विवाद हुआ था। मामला सामने आने के बाद स्कूल के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है।</div><div>जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के खंडवानी एकेडमिक हाइट्स पब्लिक स्कूल में छठी कक्षा के बच्चों की परीक्षा ली गई जिसमें  जनरल नॉलेज कैटेगरी में  एक प्रश्न पूछा गया कि करीना कपूर और सैफ अली खान के बेटे का पूरा नाम लिखो! इस सवाल के बाद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि करीना कपूर, सैफ अली खान या उनके बेटे के बारे में ऐसा सवाल बिल्कुल भी उचित नहीं है। सामान्य ज्ञान श्रेणी में पूछने के लिए और भी कई प्रश्न हैं।</div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">An Exam for Class 6 students: Current Affairs.<br /><br />Question - 2) Write the full name of the son of Kareena Kapoor Khan and Saif Ali Khan?<br /><br />This is from Academic Heights Public School in Madhya Pradesh's Khandwa. <a href="https://t.co/fnIu2uCA6p">pic.twitter.com/fnIu2uCA6p</a></p>— Anshul Saxena (@AskAnshul) <a href="https://twitter.com/AskAnshul/status/1474977947152883715?ref_src=twsrc%5Etfw">December 26, 2021</a></blockquote> <div>मामला सामने आने के बाद इस संबंध में शिक्षा विभाग को प्रेजेंटेशन दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी संजीव भालेराव ने मामले में जाँच करने के बाद कहा कि स्कूल को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। स्कूल द्वारा आने वाले जवाब के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।</div><div>वहीं मध्य प्रदेश में अभिभावक संघ ने कहा कि बच्चों को सर्वांगीण विकास के लिए स्कूल में रखा जाता है। उनके लिए राष्ट्र और समाज के बारे में जागरूकता जरूरी है। बॉलीवुड की गॉसिप न्यूज से सामान्य ज्ञान के सवाल बनाना उचित नहीं है। इसके बजाय यदि भारत की महान हस्तियों, महान वैज्ञानिकों, महान खगोलविदों, ऋषियों या महान शासकों के बारे में प्रश्न हों, तो बच्चों का ज्ञान बढ़ता है। स्कूल निदेशक ने कहा कि सवाल उस संगठन द्वारा तय किए जाते हैं जिससे स्कूल संबद्ध है। यह सिर्फ प्रारंभिक जानकारी का सवाल था। स्कूल प्रशासक ने अनुरोध किया कि वह धर्म या सांप्रदायिक मुद्दों से जुड़ा नहीं है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/83157/madhya-pradesh-the-school-asked-the-name-of-kareena-saif-s-son-in-the-class-six-question-paper-there-was-a-ruckus-know-what-is-the-whole-matter</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Dec 2021 10:39:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>वडगाम : जरूरतमंद स्कूली बच्चों को बांटे गये स्वेटर और मोज़े-जूते</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई के रहने वाले नरेश भाई के बांटे, 2007 से कर रहे है दान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/68165/vadgam-sweaters-and-socks-and-shoes-distributed-to-needy-school-children"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/2059_1.png" alt=""></a><br /><div>इस दुनिया में जरूरतमंद इंसान की मदद करने से बड़ा कोई पुन्य नहीं हो सकता और ऐसे बहुत से लोग है जो इस बात को अपनी जीवन में उतार लेते है और जब भी मौका मिलता है जरूरतमंद लोगों की मदद करते है। ऐसा ही एक उदाहरण देखने को मिला वडगाम के भरोड़ गांव में जहाँ एक दानवीर ने स्कूल में पढ़ने वाले गरीब जरूरतमंद बच्चों को स्वेटर और जूते-मोजे बांटे। ऐसा करते हुए उन्होंने न सिर्फ जरूरतमंद बच्चों की मदद की बल्कि अन्य दानदाताओं के लिए एक नई उम्मीद जगाई।</div><div>जानकारी एक अनुसार मुंबई के रहने वाले पांचाल नरेश कुमार वीरचंदभाई ने अपने गृहनगर भारोद में वडगाम तालुका के भारोद प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले लगभग 150 बच्चों को स्वेटर ड्रेस बूट-सॉक्स वितरित किए। बनासकांठा जिले के वडगाम तालुका के भारोद के निवासी पांचाल नरेश कुमार वीरचंदभाई और वर्तमान में मुंबई में रह रहे हैं, उन्होंने अपने गृहनगर भरोद प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले लगभग 150 बच्चों को स्वेटर के कपड़े और जूते के मोज़े वितरित किए। पांचल नरेश कुमार 2007 से स्कूली बच्चों को दान कर रहे हैं। इस पुण्यकार्य के लिए भरोड़ प्राथमिक विद्यालय परिवार ने पांचाल नरेशभाई का आभार जताया</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Dec 2021 10:31:47 +0530</pubDate>
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