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                <title>Diabetes - Loktej</title>
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                <description>Diabetes RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आईसीएमआर ने चेन्नई में भारत का पहला मधुमेह बायोबैंक स्थापित किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(पायल बनर्जी)</p>
<p>नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मद्रास मधुमेह अनुसंधान फाउंडेशन (एमडीआरएफ) के सहयोग से चेन्नई में देश का पहला मधुमेह बायोबैंक स्थापित किया है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान को समर्थन देने के उद्देश्य से जनसंख्या आधारित जैविक नमूनों का भंडार है।</p>
<p>चेन्नई में स्थापित बायोबैंक एमडीआरएफ का उद्देश्य आईसीएमआर की अनुमति से वैज्ञानिक अध्ययनों में सहायता के लिए जैव नमूनों को इकट्ठा करना, संसाधित करना, संग्रहित करना और वितरित करना है।</p>
<p>एमडीआरएफ और डॉ. मोहन मधुमेह विशेषज्ञ केंद्र के अध्यक्ष डॉ. वी. मोहन ने कहा कि बायोबैंक मधुमेह के कारणों, भारतीय प्रकार के मधुमेह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/110623/icmr-sets-up-india-s-first-diabetes-biobank-in-chennai"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/diabetes.jpg" alt=""></a><br /><p>(पायल बनर्जी)</p>
<p>नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मद्रास मधुमेह अनुसंधान फाउंडेशन (एमडीआरएफ) के सहयोग से चेन्नई में देश का पहला मधुमेह बायोबैंक स्थापित किया है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान को समर्थन देने के उद्देश्य से जनसंख्या आधारित जैविक नमूनों का भंडार है।</p>
<p>चेन्नई में स्थापित बायोबैंक एमडीआरएफ का उद्देश्य आईसीएमआर की अनुमति से वैज्ञानिक अध्ययनों में सहायता के लिए जैव नमूनों को इकट्ठा करना, संसाधित करना, संग्रहित करना और वितरित करना है।</p>
<p>एमडीआरएफ और डॉ. मोहन मधुमेह विशेषज्ञ केंद्र के अध्यक्ष डॉ. वी. मोहन ने कहा कि बायोबैंक मधुमेह के कारणों, भारतीय प्रकार के मधुमेह और संबंधित विकारों के विभिन्न रूपों पर उन्नत शोध की सुविधा प्रदान करेगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि बायोबैंक में रक्त के नमूने हैं, जिन पर आईसीएमआर वित्त पोषित दो अध्ययन किये जा चुके हैं । पहला अध्ययन इंडिया डायबिटीज (आईसीएमआर-इंडियाबी) अध्ययन जो 2008 से 2020 तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरणों में आयोजित किया गया था जबकि दूसरा ‘‘भारत में कम उम्र में मधुमेह से पीड़ित लोगों की रजिस्ट्री’’ है, जिसे 2006 में शुरू किया गया था और अब भी जारी है।</p>
<p>मोहन ने कहा कि युवाओं में विभिन्न प्रकार के मधुमेह, जैसे टाइप 1, टाइप 2 और गर्भावधि मधुमेह के रक्त के नमूनों को भविष्य के अध्ययन और शोध के लिए संग्रहित किया गया है।</p>
<p>बायोबैंक की स्थापना की प्रक्रिया लगभग दो साल पहले शुरू हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 10:31:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेहत : घर की रसोई में ही मौजूद है डायबिटीज का रामबाण इलाज</title>
                                    <description><![CDATA[ज्यादातर डायबिटीज के मामले खानपान की वजह से सामने आ रहे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80829/health-the-panacea-for-diabetes-is-present-in-the-kitchen-of-the-house-itself"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-11/3683_diabetes1.jpg" alt=""></a><br /><div>आज के समय में भागदौड़ भरी जिंदगी और अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण इंसान बड़ी और भयंकर बीमारियों का शिकार होते जा रहा हैं। इन बीमारियों में से डायबिटीज एक है है। असंतुलित जीवनशैली, तनाव और मोटापे के होने वाली बीमारी में ब्लड शुगर को कंट्रोल करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। ज्यादातर डायबिटीज के मामले खानपान की वजह से सामने आ रहे हैं। ऐसे में इस बीमारी से जूझ रहे मरीज को अपने खाने-पीने का खास ध्यान रखना बहुत जरुरी है। </div><div><br /></div><h2>अंग्रेजी दवाओं से नुकसान, रसोई में मौजूद इलाज</h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि इस बीमारी में इस्तेमाल होने वाले दवाएं खाने से शरीर पर भी कई साइड इफेक्ट होते हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक हर्ब्स की मदद से डायबिटीज को कंट्रोल करना हर तरीके से फायदेमंद है। साथ ही इनके इस्तेमाल से साइड इफेक्ट की आशंकाएं भी काफी कम होती है। कुछ चीजें तो ऐसी है जो हमारी रसोई में ही उपलब्ध है और इस भयंकर बीमारी के सामने एक इलाज भी! आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ हर्ब्स के बारे में जिनका उपयोग करके ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखा जा सकता है।</div><div><br /></div><h2>मेथी के बीज</h2><p><br /></p><div>हर घर के रसोई में मिलने वाली मेथी स्वाद में कड़वी होती है और ये ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकती है। खाली पेट इसका सेवन करना ब्लड सुगर को कण्ट्रोल करने में सहायक होता है। मेथी ग्लूकोज को पचाने में मदद करता है और बेड कोलेस्ट्रोल को कम करता है। मेथी के बीजों को पानी में उबाल कर पीया जा सकता हैं। साथ ही सब्जी बनाने में भी इसक इस्तेमाल किया जा सकता हैं।</div><div> </div><h2>दालचीनी</h2><p><br /></p><div>मेथी की ही तरह हर घर की रसोई का अहम हिस्सा दालचीनी डायबिटीज के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें पाए जाने वाले बायोएक्टिव घटक ब्लड शुगर लेबल को कम करने में मदद कर सकते हैं। दालचीनी का नियमित सेवन शरीर में अतिरिक्त शुगर को पचाने और इसे नियंत्रण में लाने में कारगर होता है। </div><div><br /></div><h2>काली मिर्च</h2><div><br /></div><div>किचन में रखी काली मिर्च भी डायबिटीज के लिए रामबाण विकल्प है। काली मिर्च में ‘पाइपरीन’ नामक तत्व मौजूद होता है जो ब्लड शुगर के लेवल  को सामान्य बनाए रखने में कारगर साबित होता है। आप काली मिर्च को सलाद, चाय या सब्जी में इस्तेमाल कर सकते हैं।</div><div><br /></div><h2>करी पत्ता</h2><p><br /></p><div>आमतौर पर सब्जी या ऐसे ही व्यंजनों में स्वाद वर्धन के लिए उपयोग में ली जाने वाली करी पत्ता हाई ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है। करी पत्ते में मौजूद मिनिरल्स शरीर में ग्लूकोज स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं। करी पत्ते के उपयोग से शरीर में  इंसुलिन की गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। आप सुबह सुबह खाली पेट करी पत्ता चबा सकते हैं और चाय में भी करी पत्ते को डाल सकते हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Nov 2022 08:59:01 +0530</pubDate>
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                <title>सेहत : मधुमेह के रोगियों के लिए किसी जहर से कम नहीं ये खाद्य चीजें</title>
                                    <description><![CDATA[डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए खान-पान में बदलाव करना जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80827/health-these-food-items-are-no-less-than-poison-for-diabetic-patients"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-11/3683_diabetes.jpg" alt=""></a><br /><div>आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में इंसान बहुत सी बीमारियों का घर बनता जा रहा हैं। इन बीमारियों में मधुमेह भी एक गंभीर बीमारी है, जो हृदय, गुर्दे और मस्तिष्क से संबंधित कई अन्य बीमारियों को जन्म दे सकती है। ऐसे में डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए खान-पान में बदलाव करना जरूरी हो जाता है।</div><div><br /></div><h2>मधुमेह के रोगियों को नहीं खानी चाहिए ये चीजें</h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि फल- कुछ फल जैसे अंजीर, अंगूर, आम, चेरी, केला आदि में चीनी की मात्रा अधिक होती है। इसलिए मधुमेह के रोगियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि, मधुमेह के रोगी जामुन, नशापति, मौसमी, प्लम का भरपूर मात्रा में सेवन करके आनंद ले सकते हैं। शकाक्र और मिठाइयों के साथ-साथ डायबिटीज में ये 7 चीजें भी नहीं खानी चाहिए। डायबिटीज के मरीजों के लिए ये चीजें किसी जहर से कम नहीं हैं और हमें इन्हें खाने से बचना चाहिए।</div><div><br /></div><h2>प्रोसेस्ड मीट</h2><div><br /></div><div>बेकन, हैम, सलामी या बीफ जैसे प्रोसेस्ड मीट में कई हानिकारक केमिकल होते हैं जो ताजा मीट में नहीं होते। कई अध्ययनों ने प्रोसेस्ड मीट को कैंसर और हृदय रोग जैसी बीमारियों का कारण माना जाता है। ऐसे में इनसे बचना चाहिए।</div><div><br /></div><h2>फुल-फैट डेयरी उत्पाद</h2><p><br /></p><div>फुल-फैट डेयरी उत्पाद मधुमेह रोगियों के लिए हानिकारक हैं, क्योंकि इनमें चीनी की मात्रा अधिक होती है। इससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही फुल फैट डेयरी उत्पाद भी मोटापे का कारण बनते हैं।</div><div><br /></div><h2>सफेद कार्बोहाइड्रेट</h2><p><br /></p><div>सफेद ब्रेड, चावल, चीनी और पास्ता- रक्त शर्करा और वजन बढ़ाने के साथ-साथ लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में हमें सफेद कार्बोहाइड्रेट को अपने आहार में शामिल नहीं करना चाहिए।</div><div><br /></div><h2>पैकेज्ड स्नैक्स</h2><p><br /></p><div>पैकेज्ड स्नैक्स मैदा से बने होते हैं और तेजी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट की मौजूदगी से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है।</div><div><br /></div><h2>शहद या मेपल सिरप</h2><p><br /></p><div>मधुमेह रोगी सफेद चीनी, कुकीज और कैंडी नहीं, बल्कि शहद, मेपल सिरप, ब्राउन शुगर आदि का सेवन करना चाहिए। जिससे ब्लड शुगर लेवल में स्पाइक्स देखने को मिलते हैं।</div><div><br /></div><h2>सूखे मेवे</h2><div><br /></div><div>हम जानते हैं कि सूखे मेवों में कई विटामिन, खनिज और पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन जब सूखे मेवे सूख जाते हैं तो उनमें पानी की कमी हो जाती है और शुगर लेवल भी बढ़ जाता है। किशमिश की बात करें तो इनमें अंगूर से 4 गुना ज्यादा कार्बोहाइड्रेट होता है। इसलिए सूखे मेवों में ताजे फलों की तुलना में अधिक कार्बोहाइड्रेट होते हैं। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को सूखे मेवे कम खाने चाहिए।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Nov 2022 07:59:01 +0530</pubDate>
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                <title>सेहत : अगर आपको है मधुमेह तो प्याज को जरुर करें अपने भोजन में शामिल, मिलेगा अविश्वसनीय लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[इस गंभीर बीमारी में बहुत लाभदायक है प्याज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80791/health-if-you-have-diabetes-then-definitely-include-onion-in-your-diet-you-will-get-incredible-benefits"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-10/8494_diabetes-onion.jpg" alt=""></a><br /><div>आज के समय अव्यवस्थित जीवन-शैली और अनियमित खानपान बहुत से बिमारियों को आकर्षित करता है। इन सभी में एक बीमारी हैं मधुमेह, जो की एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। बड़े-बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के समय बच्चे भी इसका शिकार बनते जा रहे है। बहुत छोटी उम्र में ही बच्चों का मधुमय का शिकार बनाना बहुत गंभीर विषय है। आज के समय में दुनिया में इसका चलन बढ़ता जा रहा है। मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।</div><div><br /></div><h2>सबसे ज्यादा डायबिटीक बच्चे भारत में</h2><p><br /></p><div>आंकड़ों की बात करें तो 2021 तक दुनियाभर में 12.11 लाख से ज्यादा बच्चे टाइप-2 डायबिटीज के शिकार हो चुके हैं। इनमें से आधे से ज्यादा किशोर 15 साल से कम उम्र के थे। इनमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीय हैं। तो इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है लेकिन इसे धीरे-धीरे ठीक किया जा सकता है।</div><div><br /></div><h2>शोध में सामने आई अहम जानकारी</h2><div><br /></div><div>हाल के एक अध्ययन के अनुसार, इस बीमारी में सही खानपान की बहुत जरुरत है। खाने में विशेष सामग्री को शामिल करने की आवश्यकता है। इसमें से एक है प्याज। प्याज का रस उच्च शर्करा के स्तर को कम कर सकता है। नाइजीरिया में डेल्टा स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह खोज सामने आई है। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता एंथनी ओजिहना के अनुसार, मधुमेह एक बहुत ही गंभीर बीमारी है। लेकिन इसमें प्याज फायदेमंद होता है। प्याज एक सस्ती और आसानी से मिलने वाली सब्जी है।</div><div><br /></div><h2>चूहों पर हुआ शोध</h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि शोधकर्ताओं ने सबसे पहले प्याज के रस का चूहों पर प्रयोग किया। यह पाया गया कि मधुमेह के चूहों में इसका अच्छा प्रभाव पड़ा। और प्याज के रस के कारण इन चूहों का रक्त शर्करा स्तर 50 से 35 प्रतिशत तक कम हो गया था और इतना ही नहीं प्याज के रस से कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम हो गया था। शोधकर्ताओं ने गैर-मधुमेह चूहों को दवा और प्याज का रस भी दिया। जिसका असर सकारात्मक भी देखने को मिला। इन चूहों का वजन बढ़ गया।</div><div><br /></div><h2>डायबिटीज की समस्या में खाएं सब्जियां</h2><div><br /></div><div>एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर आपको डायबिटीज की समस्या है तो आपको सब्जियों का सेवन करना चाहिए। स्वस्थ आहार वजन घटाने में मदद करता है। और यह टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह में भी सहायक है। यह ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखता है। यह दिल के दौरे और किडनी की बीमारी के खतरे को भी कम करता है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 02 Oct 2022 22:29:01 +0530</pubDate>
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                <title>मधुमेह : सरकार ने उठाया बड़ा कदम, इस गंभीर बीमारी के मरीजों को मिलेगी बहुत राहत</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने शुक्रवार को मधुमेह की सस्ती दवा सीटाग्लिप्टीन और इसके अन्य मिश्रणों को बाजार में उतारा जो दवा जेनरिक दवाओं की दुकान जनऔषधि केंद्रों पर मिलेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/81580/diabetes-government-has-taken-a-big-step-patients-of-this-serious-disease-will-get-a-lot-of-relief"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/1933_diabetes.jpg" alt=""></a><br /><div>देश में फैली प्रमुख बीमारियों में डायबिटीज भी एक हैं। देश में लगभग 10 करोड़ मरीज इसके शिकार है और महंगी-मंहगी दवाओं और चिकित्सा प्रक्रिया को लेने को मजबूर है। अब इन मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने शुक्रवार को मधुमेह की सस्ती दवा सीटाग्लिप्टीन और इसके अन्य मिश्रणों को बाजार में उतारा है। इसके 10 टैबलेट की कीमत 60 रुपये तक होगी और यह दवा जेनरिक दवाओं की दुकान जनऔषधि केंद्रों पर मिलेगी। साथ ही डायबिटीज की सबसे पॉपुलर दवा मेटफॉर्मिन पहले से जेनेरिक दवाओं की लिस्ट में शामिल है लेकिन सीटाग्लिप्टिन को उससे भी ज्यादा असरकारी दवा माना जाता है। इस दवा की खासियत ये है कि यह टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को काफी फायदा देती है। यह दवा ब्लड शुगर को बहुत ज्यादा लो नहीं करती। इसके अलावा इस दवा से दिल को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता जबकि डायबिटीज की कई दूसरी दवाओं में इस तरह के खतरे बने रहते हैं। </div><div><br /></div><h2>बाजार से बेहद कम कीमत पर उपलब्ध </h2><div><br /></div><div>आपको बता दें कि इस बारे में रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि फार्मास्यूटिकल एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) ने सीटाग्लिप्टीन और इसके मिश्रणों के नए संस्करण जनऔषधि केंद्रों में उतारे हैं। ऐसे में अब बाजार में ढाई सौ रूपए या इससे ज्यादा की कीमत पर मिलने वाली यह दवा बेहद सस्ती हो गई है। भारतीय जन औषधि परियोजना के सीईओ रवि दधीच ने बताया कि इस दवा के सभी प्रकार के दाम ब्रांडेड दवाओं से 60 से 70 प्रतिशत कम हैं। इसी दवा की ब्रांडेड दवाओं की कीमत 160 रुपये से लेकर 258 रुपये तक है। सीटाग्लिप्टीन फॉस्फेट के 50 मिलीग्राम(एमजी) वाले दस टैबलेट 60 रुपये में जबकि 100एमजी वाले 100 रुपये उपलब्ध हैं। वहीं सीटाग्लिप्टीन और मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड का 50एमजी/500एमजी अनुपात वाला मिश्रण 65 रुपये प्रति 10 टेबलेट जबकि 50एमजी/1000एमजी का मिश्रण 70 रुपये में उपलब्ध होगा। जेनेरिक दवा के तहत सीटाग्लिप्टिन और मेटफॉर्मिन का कॉन्बिनेशन भी जल्द ही जन औषधि स्टोर पर मिलने लगेगा।</div><div><br /></div><h2>देश में 8700 जितने जन औषधि स्टोर</h2><div><br /></div><div>भारत में फिलहाल 8700 जन औषधि स्टोर हैं, जहां 1600 दवाएं बिकती हैं। जल्द ही 138  और दवाओं को इसी श्रेणी में शामिल कर जेनेरिक दवा के तौर पर सस्ते दामों में बेचा जा सकेगा। 138 नई दवाओं की पहचान भी कर ली गई है। इस साल के अंत तक उनके जेनेरिक स्टोर पर पहुंच जाने की उम्मीद जताई जा रही है। </div><div><br /></div><h2>प्राइवेट अस्पताल की लूट</h2><div><br /></div><div>एक तरफ मोदी सरकार देश के लोगों को सस्ती-सुलभ दवाएं पहुंचाने में लगी है वहीं दूसरी ओर प्राइवेट अस्पताल मालिक अपने मुनाफे के लिए अपने कैंपस या अस्पताल के साथ खोले स्टोर पर केवल महंगी और ब्रांडेड दवाएं ही बेच रहे हैं। साथ ही डॉक्टर इन्हीं महंगी दवाओं को लिख रहे हैं। एकाध प्राइवेट अस्पताल को छोड़कर किसी में भी जनऔषधि केंद्र नहीं खोले गए हैं।</div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Sep 2022 07:59:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सेहत : भारत में मधुमेह के 80 प्रतिशत से अधिक रोगियों को कोलेस्ट्रॉल से संबंधित कम से कम एक समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं मधुमेह के मरीज, चिंता का विषय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80729/health-more-than-80-percent-of-diabetic-patients-in-india-have-at-least-one-cholesterol-related-problem"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/1933_diabetes.jpg" alt=""></a><br /><div>आज के समय उन्नत-अनियमित जीवन शैली और फास्ट फूड के कारण मधुमेह रोगियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। गुजरात देश के उन राज्यों में से एक है जहां मधुमेह के मरीजों की संख्या अधिक हैं। इंडिया डायबिटीज के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में मधुमेह के 80 प्रतिशत से अधिक रोगी कोलेस्ट्रॉल से संबंधित कम से कम एक समस्या से पीड़ित है।</div><div>आपको बता दें कि अपनी तरह का पहला अध्ययन एरिस लाइफसाइंसेज के सहयोग से किया गया था, जिसके सह-लेखक 16 डॉक्टर थे। यह अध्ययन वर्ष 2020-19 के बीच 1900 से अधिक चिकित्सकों के सहयोग से आयोजित किया गया था और भारत में 27 राज्यों में 48 वर्ष की आयु के औसतन 5080 रोगियों को कवर किया गया था। यह रिपोर्ट जर्नल ऑफ द पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस (पीएलओएस) में प्रकाशित हुई है। भारतीय मधुमेह अध्ययन (आईडीएस) ने खुलासा किया है कि भारत में टाइप -2 मधुमेह के नए निदान वाले 55% से अधिक रोगियों में एचडीएल-सी कम है। यह इंगित करता है कि वे अपने जीवनकाल में हृदय रोग के एक या दूसरे रूप के लिए उच्च जोखिम में हैं। इस अध्ययन के अनुसार, टाइप 2 मधुमेह के सभी रोगियों में से 42% में उच्च रक्तचाप का खतरा अधिक होता है। मरीजों का औसत बीएमआई 27.2 था। जिसे भारतीय सर्वसम्मति समूह के दिशानिर्देशों के अनुसार अधिक वजन के रूप में वर्गीकृत किया गया है।</div><div>इस संबंध में अहमदाबाद के डॉ पराग शाह ने कहा, ''मधुमेह रोगियों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि एक खतरे की तरह है। भारत मधुमेह अध्ययन रोगियों में हृदय संबंधी जोखिम कारकों पर केंद्रित है। मधुमेह को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए शारीरिक गतिविधि और आहार नियंत्रण महत्वपूर्ण कारक हैं। आहार परिवर्तन, शारीरिक गतिविधि और ग्लूकोज नियंत्रण उपचार का हिस्सा होना चाहिए।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 23:29:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात : कोरोना काल में बढ़े डायबिटीज के मरीज, सतर्क रहें</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना संक्रमित और अस्पताल में भर्ती होने वाले में से 14% से अधिक लोग मधुमेह के शिकार बने]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67352/gujarat-diabetes-patients-increased-during-the-corona-period-be-alert"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/5933_diabetes-blood-sugar-finger-glucose-diabetic-test-meter.jpg" alt=""></a><br /><div>गुजरात में फैला कोरोना संक्रमण धीरे धीरे नियंत्रण में आ रहा है। हालांकि अब कोरोना के बीच कई नए संकट पैदा हो रहे हैं। कोरोना के साथ साथ ब्लैक और फिर वाइट फंगस ने लोगों की जान आफत में डाल रखी हैं, इसी बीच एक नए संकट ने भी अपने पांव जमा लिए हैं. कोरोना से मुक्त होने के बाद से मधुमेह या डायबिटीज से मरने वालों की संख्या में इजाफा हुआ हैं। </div>
<div>टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, देश में मधुमेह की राजधानी के रूप में जाने जाने वाले गुजरात में कोविड -19 के बाद से इस बीमारी के रोगियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जर्नल ऑफ डायबिटीज, ओबेसिटी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना संक्रमित और अस्पताल में भर्ती होने वाले में से 14% से अधिक लोग मधुमेह के शिकार बने। विशेषज्ञों का अनुमान है कि देश में महामारी के दौरान एक करोड़ से अधिक लोग मधुमेह का शिकार हुए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, कोविड पैंक्रियाटिक इन्सुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं पर हमला कर उन कोशिकाओं को खराब कर सकता है। ये डायबिटीज या मधुमेह का कारण बनता है। इसके अलावा, स्टेरॉयड का अति प्रयोग भी मधुमेह को आमंत्रित कर सकता है।</div>
<div>कोरोना संकृत मामलों की बात करें तो गुजरात में पिछले कुछ दिनों में कोरोना के मामलों की संख्या में कमी देखी गई. शनिवार को 30 नए मामले सामने आए. उधर, 8 मार्च के बाद पहली बार कोरोना से सबसे कम छः लोगों की मौत हुई है. गुजरात में कोरोना से अब तक कुल 9991 मौतें हो चुकी हैं। इस तरह गुजरात में कोरोना से मरने वालों की कुल संख्या 10 हजार के करीब है. अब तक कुल 7,99,018 लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके हैं और ठीक होने की दर 97.5% है। राज्य में फिलहाल 10863 एक्टिव केस हैं और 272 मरीज वेंटिलेटर पर हैं।</div>
<div>वहीं टीकाकरण की बात करें तो गुजरात में कोरोना टीकाकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद अब गुजरात देश का तीसरा ऐसा राज्य बन गया है जहां टीकाकरण की संख्या 2 करोड़ को पार कर गई है। इस तरह गुजरात में प्रति 1 लाख की आबादी पर औसतन 22,500 लोगों ने कोरोना की वैक्सीन ली है। इनमें से दोनों डोज लेने वालों की संख्या 45 लाख है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Jun 2021 18:18:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार व स्वास्थ्य मंत्रालय सोशल मिडिया पर डायाबीटीज़ के इंसुलिन इंजेक्शन के प्रति गलत भ्रम फ़ैलाने वालों को रोके : यूनाइटेड डाईबीटीज़ फोरम</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">आजकल लोगों में डायाबिटीज़</span><span style="font-size:1rem;">  (मधुमेह) की बीमारी काफी देखने को मिलती, जोकि आगे चलकर अन्य बीमारियों का कारण बनती है। </span><span style="font-size:1rem;">डायाबिटीज़ </span><span style="font-size:1rem;">दो प्रकार की होती है - एक टाईप १ जो ५ प्रतिशत मरीज़ों को ही होती है और ज्यादातर बच्चों में पायी जाती है। उसका इलाज केवल नियमित तौर पर इंसुलिन इंजेक्शन ही है। वहीं टाईप २ </span><span style="font-size:1rem;">डायाबिटीज़</span><span style="font-size:1rem;">  ९५ प्रतिशत मरीज़ो को होता है और यह दवाई व खानपान से कंट्रोल होता है। साथ ही १० या १५ साल बाद इनमें से काफी लोगों को इंसुलिन इंजेक्शन की जरुरत पड़ती है। </span></div><div><span style="font-size:1rem;">टाईप १ </span>डायाबिटीज़ <span style="font-size:1rem;">ज्यादातर बच्चों में होता है।</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/82234/government-and-ministry-of-health-prevents-misreaders-of-diabetes-s-insulin-injection-on-social-media-united-diabetes-forum"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/5933_diabetes-blood-sugar-finger-glucose-diabetic-test-meter.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">आजकल लोगों में डायाबिटीज़</span><span style="font-size:1rem;"> (मधुमेह) की बीमारी काफी देखने को मिलती, जोकि आगे चलकर अन्य बीमारियों का कारण बनती है। </span><span style="font-size:1rem;">डायाबिटीज़ </span><span style="font-size:1rem;">दो प्रकार की होती है - एक टाईप १ जो ५ प्रतिशत मरीज़ों को ही होती है और ज्यादातर बच्चों में पायी जाती है। उसका इलाज केवल नियमित तौर पर इंसुलिन इंजेक्शन ही है। वहीं टाईप २ </span><span style="font-size:1rem;">डायाबिटीज़</span><span style="font-size:1rem;"> ९५ प्रतिशत मरीज़ो को होता है और यह दवाई व खानपान से कंट्रोल होता है। साथ ही १० या १५ साल बाद इनमें से काफी लोगों को इंसुलिन इंजेक्शन की जरुरत पड़ती है। </span></div><div><span style="font-size:1rem;">टाईप १ </span>डायाबिटीज़ <span style="font-size:1rem;">ज्यादातर बच्चों में होता है। उसका इलाज केवल नियमित तौर पर इंसुलिन इंजेक्शन है। देश-विदेश सभी जगह इसका इलाज एक ही है। लेकिन कुछ लोगों द्वारा सोशल मिडिया पर यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि इसका इलाज उनकी गोली , योग व ध्यान इत्यादि से ठीक हो सकता है। जिससे लोगों के झांसे में आने के कारण यदि बच्चों को इंसुलिन इंजेक्शन ना दिया गया या बंद कर दिया गया तो उनकी जान को खतरा पैदा हो सकता है।  इसलिए ' यूनाइटेड डाईबीटीज़ फोरम' के अध्यक्ष डॉ. मनोज चावला, सेक्रेटरी डॉ. राजीव कोविल व ट्रैज़रर डॉ. तेजस शाह ने स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार व अन्य संस्थाओं को लेटर भेजकर आग्रह किया गया कि भ्रम फ़ैलाने वालों को रोका जाय।</span></div><div><span style="font-size:1rem;">'यूनाइटेड डाईबीटीज़ फोरम' एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मनोज चावला कहते है," इंसुलिन पाचक ग्रंथि (पेंक्रिया) द्वारा बनाया जाता है। यह शरीर में कार्बोहाइड्रेट को एनर्जी में बदलने का काम इंसुलिन करती है। जब पेंक्रिया में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है, तो ग्लूकोज एनर्जी में परिवर्तित नहीं हो पाता है और ब्लड वेसेल्स में जमा होकर </span>डायाबिटीज़<span style="font-size:1rem;"> की बीमारी का रूप ले लेता है। टाईप १ </span>डायाबिटीज़<span style="font-size:1rem;"> का इलाज केवल इंसुलिन इंजेक्शन है। यदि लोग गलत अफवाहों या बिना पढ़े-लिखे के कहने में आकर इंसुलिन इंजेक्शन बंद करते हैं, तो बच्चों की जिंदगी खतरे में आ सकती है। इसलिए सरकार व स्वास्थ्य मंत्रालय सोशल मीडिया में ऐसे गलत भ्रम फ़ैलाने वालो को रोके,  इसलिए यह पत्र भेजा गया है। "</span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 May 2021 19:39:46 +0530</pubDate>
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