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                <title>Health - Loktej</title>
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                <description>Health RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सूरत : मलेरिया नियंत्रण के लिए एआई और क्लाइमेट रिसर्च का बड़ा कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत। सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन  अब मलेरिया और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में ग्लोबल मॉडल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>जलवायु परिवर्तन और तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के कारण बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों को देखते हुए नगर निगम ने आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय रिसर्च के सहारे महामारी नियंत्रण की नई रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।</p>
<p>इसी कड़ी में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल इंस्टिट्युट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) ने सूरत शहर में शहरी मलेरिया के प्रसार पर तापमान और हवा में नमी के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए विशेष रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/147215/a-big-step-for-ai-and-climate-research-in-surat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-05/b20052026-07.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत। सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन  अब मलेरिया और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में ग्लोबल मॉडल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>जलवायु परिवर्तन और तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के कारण बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों को देखते हुए नगर निगम ने आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय रिसर्च के सहारे महामारी नियंत्रण की नई रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।</p>
<p>इसी कड़ी में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल इंस्टिट्युट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) ने सूरत शहर में शहरी मलेरिया के प्रसार पर तापमान और हवा में नमी के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए विशेष रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया है।</p>
<p>इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य यह समझना है कि बदलते मौसम और क्लाइमेट पैटर्न का मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों पर कितना असर पड़ रहा है।</p>
<p>म्युनिसिपल कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई हाई-लेवल समीक्षा बैठक</p>
<p>इस अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा के लिए सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन  के म्युनिसिपल कमिश्नर एम. नागराजन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय वार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारत और अमेरिका के वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।</p>
<p>बैठक में शहरी मलेरिया ट्रांसमिशन के लिए “थर्मल सूटेबिलिटी” यानी तापमान और नमी की अनुकूलता को लेकर अब तक की रिसर्च, डेटा एनालिसिस और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।</p>
<p> एआई आधारित मॉडलिंग से होगी मलेरिया की लाइव ट्रैकिंग</p>
<p>बैठक को संबोधित करते हुए म्युनिसिपल कमिश्नर एम. नागराजन ने कहा कि महामारी नियंत्रण के लिए अब केवल पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं। आधुनिक शहरों में स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक रिसर्च और डेटा आधारित निर्णय बेहद जरूरी हो गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नगर निगम अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित डेटा एनालिसिस पर विशेष ध्यान दे रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत एक “हाइपर-लोकल क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट मॉडल” विकसित किया जा रहा है, जिसकी मदद से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में मच्छरों के पनपने के संभावित जोखिम का लाइव विश्लेषण किया जा सकेगा।</p>
<p>किस इलाके में बढ़ सकता है मच्छरों का खतरा, पहले ही मिल जाएगी जानकारी</p>
<p>इस नई तकनीक के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि शहर के किस इलाके, सोसाइटी या ज़ोन में तापमान और नमी का स्तर मच्छरों के लिए अनुकूल बन रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग को पहले से अलर्ट मिलने के साथ-साथ समय रहते रोकथाम के कदम उठाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>नगर निगम का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भविष्य में न केवल सूरत बल्कि देश के अन्य बड़े शहरों के लिए भी एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 14:53:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत: कामरेज बनेगा दक्षिण गुजरात का सबसे बड़ा 'मेडिकल हब',1450 करोड़ की लागत से बनेंगे 3 सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत। गुजरात सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में सूरत के कामरेज क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा 'ऐतिहासिक तोहफा' दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, कामरेज में लगभग 1450 करोड़ की लागत से एक विशाल 'स्टेट-ऑफ-द-आर्ट' हॉस्पिटल कैंपस के निर्माण को मंजूरी दी गई है।</p>
<p>इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही परिसर में जनरल अस्पताल के साथ तीन अलग-अलग सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाए जाएंगे।</p>
<p>जनरल ब्रॉड स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में 1500 बेड की क्षमता वाला विशाल अस्पताल। जिसमें कार्डियक और न्यूरो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145661/surat-kamrej-will-become-the-biggest-medical-hub-of-south"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-02/b19022026-05.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत। गुजरात सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में सूरत के कामरेज क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा 'ऐतिहासिक तोहफा' दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, कामरेज में लगभग 1450 करोड़ की लागत से एक विशाल 'स्टेट-ऑफ-द-आर्ट' हॉस्पिटल कैंपस के निर्माण को मंजूरी दी गई है।</p>
<p>इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही परिसर में जनरल अस्पताल के साथ तीन अलग-अलग सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाए जाएंगे।</p>
<p>जनरल ब्रॉड स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में 1500 बेड की क्षमता वाला विशाल अस्पताल। जिसमें कार्डियक और न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल 500 से अधिक बेड, हृदय और मस्तिष्क रोगों के लिए समर्पित। यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी अस्पताल में  500 से अधिक बेड, किडनी और संबंधित रोगों के उपचार के लिए। कैंसर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में  500 से अधिक बेड, कैंसर के आधुनिक इलाज और रिसर्च के लिए।</p>
<p> राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कुल 1500 करोड़ का खाका तैयार किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में शुरुआती तौर पर 250 करोड़ का प्रावधान कर दिया गया है, ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जा सके। </p>
<p>स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुलभाई पंशेरिया ने इस घोषणा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा "यह प्रोजेक्ट सूरत जिले को वैश्विक 'मेडिकल टूरिज्म' के मैप पर मजबूती से स्थापित करेगा। दक्षिण गुजरात के लोगों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।</p>
<p>यहाँ एक ही जगह पर वर्ल्ड-क्लास डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट, एजुकेशन और रिसर्च की सुविधाएं मिलेंगी। मरीजों को अलग-अलग बिल्डिंग्स के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे सभी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं एक ही छत के नीचे होंगी।</p>
<p>अस्पताल के साथ मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च सेंटर बनने से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। हाईवे से नजदीक होने के कारण कामरेज का यह केंद्र दुर्घटनाओं और आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक साबित होगा।</p>
<p>मंत्री प्रफुलभाई पानशेरिया ने कामरेज विधानसभा की जनता की ओर से मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल और वित्त मंत्री कनुभाई देसाई का आभार व्यक्त किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 19:57:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या आप भी महसूस करते हैं लगातार थकान? सावधान! ये हो सकती है प्रोटीन की कमी; जानें शरीर के ये गुप्त संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रोटीन हमारे शरीर के लिए केवल एक पोषक तत्व नहीं, बल्कि वह आधार है जिस पर हमारी पूरी शारीरिक संरचना टिकी है। मांसपेशियों के निर्माण से लेकर हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने तक, प्रोटीन हर स्तर पर अनिवार्य है। हालांकि, अक्सर लोग कैलोरी और फैट गिनने के चक्कर में पर्याप्त प्रोटीन लेना भूल जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप शरीर कई तरह के चेतावनी संकेत देने लगता है।</p>
<p>प्रोटीन की कमी केवल गंभीर कुपोषण का मामला नहीं है, बल्कि यह आधुनिक जीवनशैली में एक आम समस्या बनती जा रही है। इन रिपोर्टों में विशेषज्ञों ने उन 9</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>प्रोटीन हमारे शरीर के लिए केवल एक पोषक तत्व नहीं, बल्कि वह आधार है जिस पर हमारी पूरी शारीरिक संरचना टिकी है। मांसपेशियों के निर्माण से लेकर हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने तक, प्रोटीन हर स्तर पर अनिवार्य है। हालांकि, अक्सर लोग कैलोरी और फैट गिनने के चक्कर में पर्याप्त प्रोटीन लेना भूल जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप शरीर कई तरह के चेतावनी संकेत देने लगता है।</p>
<p>प्रोटीन की कमी केवल गंभीर कुपोषण का मामला नहीं है, बल्कि यह आधुनिक जीवनशैली में एक आम समस्या बनती जा रही है। इन रिपोर्टों में विशेषज्ञों ने उन 9 प्रमुख लक्षणों की पहचान की है जो यह दर्शाते हैं कि आपका शरीर पर्याप्त प्रोटीन न मिलने के कारण संघर्ष कर रहा है।</p>
<p><strong>मांसपेशियों और हड्डियों पर असर</strong></p>
<p>जब शरीर को डाइट से पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मांसपेशियों (Muscles) से प्रोटीन लेना शुरू कर देता है। इससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और शरीर की बनावट बिगड़ने लगती है। इसके अलावा, प्रोटीन की कमी से हड्डियों का घनत्व (Density) कम हो जाता है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा काफी बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>बाहरी सुंदरता और त्वचा की समस्याएं</strong></p>
<p>प्रोटीन की कमी का सबसे पहला असर आपकी त्वचा, बाल और नाखूनों पर दिखता है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रोटीन की कमी से बाल पतले होकर झड़ने लगते हैं, नाखून कमजोर होकर टूटने लगते हैं और त्वचा रूखी होकर फटने लगती है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर के बाहरी ऊतकों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है।</p>
<p><strong>एडिमा और फैटी लिवर का खतरा</strong></p>
<p>एक गंभीर लक्षण 'एडिमा' है, जिसमें रक्त में एल्ब्यूमिन प्रोटीन की कमी के कारण पैरों, हाथों और पेट में तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे सूजन आ जाती है। इसके अलावा, प्रोटीन की कमी से लिवर की कोशिकाओं में वसा (फैट) जमा होने लगता है, जिसे 'फैटी लिवर' कहा जाता है। यदि इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह लिवर की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।</p>
<p><strong>भूख, थकान और कमजोर इम्यूनिटी</strong></p>
<p>क्या आपको बार-बार भूख लगती है या मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है? यह भी प्रोटीन की कमी का एक संकेत हो सकता है, क्योंकि प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। इसके साथ ही, लगातार थकान महसूस होना और बार-बार बीमार पड़ना यह दर्शाता है कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर हो गई है। प्रोटीन की कमी से घाव भरने में भी सामान्य से अधिक समय लगता है।</p>
<p>विशेषज्ञों का सुझाव है कि बच्चों के शारीरिक विकास और वयस्कों की कार्यक्षमता के लिए प्रोटीन अनिवार्य है। एक औसत वयस्क को अपने वजन के प्रति किलोग्राम पर कम से कम 0.8 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। अपनी डाइट में दालें, अंडे, डेयरी उत्पाद, मांस और नट्स जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करके इन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 18:57:43 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार शीतकालीन सत्र में बीमा क्षेत्र में एफडीआई को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए विधेयक पेश करेगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 22 नवंबर (भाषा) सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने वाला विधेयक पेश करेगी।</p>
<p>संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र में कुल 15 कार्य दिवस होंगे।</p>
<p>लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, बीमा कानून (संशोधन) विधेयक 2025, संसद के आगामी सत्र में पेश किए जाने वाले 10 विधेयकों की सूची में शामिल है।</p>
<p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष के बजट भाषण में बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की मौजूदा 74 प्रतिशत सीमा को बढ़ाकर 100</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144207/government-to-introduce-bill-to-increase-fdi-in-insurance-sector"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-08/9629_health-insurance.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 22 नवंबर (भाषा) सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने वाला विधेयक पेश करेगी।</p>
<p>संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र में कुल 15 कार्य दिवस होंगे।</p>
<p>लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, बीमा कानून (संशोधन) विधेयक 2025, संसद के आगामी सत्र में पेश किए जाने वाले 10 विधेयकों की सूची में शामिल है।</p>
<p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष के बजट भाषण में बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की मौजूदा 74 प्रतिशत सीमा को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव नई पीढ़ी के वित्तीय क्षेत्र सुधारों का हिस्सा है।</p>
<p>अब तक बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के जरिए 82,000 करोड़ रुपये आकर्षित किए जा चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 20:55:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में निर्मित नयी पीढ़ी के हृदय स्टेंट को वैश्विक स्तर पर प्रमुख मान्यता मिली</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सैन फ्रांसिस्को, 30 अक्टूबर (भाषा) भारत में निर्मित नयी पीढ़ी के हृदय स्टेंट ने अमेरिका में निर्मित अंतरराष्ट्रीय बाजार के अग्रणी स्टेंट की तुलना में उच्च जोखिम वाले रोगियों के लिए बेहतर कार्य किया है। इसके साथ ही संबंधित भारतीय चिकित्सा नवाचार ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान हासिल कर ली है।</p>
<p>बुधवार को यहां संपन्न हुए हृदय रोग विशेषज्ञों के एक वैश्विक सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इसमें जाने-माने भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञ एवं दिल्ली के बत्रा अस्पताल के चैयरमैन एवं डीन डॉ. उपेन्द्र कौल ने भारत में ‘टक्सेडो-2’ नामक एक परीक्षण के परिणाम प्रस्तुत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143789/new-generation-heart-stent-manufactured-in-india-receives-major-recognition"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-08/4356_heart.jpg" alt=""></a><br /><p>सैन फ्रांसिस्को, 30 अक्टूबर (भाषा) भारत में निर्मित नयी पीढ़ी के हृदय स्टेंट ने अमेरिका में निर्मित अंतरराष्ट्रीय बाजार के अग्रणी स्टेंट की तुलना में उच्च जोखिम वाले रोगियों के लिए बेहतर कार्य किया है। इसके साथ ही संबंधित भारतीय चिकित्सा नवाचार ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान हासिल कर ली है।</p>
<p>बुधवार को यहां संपन्न हुए हृदय रोग विशेषज्ञों के एक वैश्विक सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इसमें जाने-माने भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञ एवं दिल्ली के बत्रा अस्पताल के चैयरमैन एवं डीन डॉ. उपेन्द्र कौल ने भारत में ‘टक्सेडो-2’ नामक एक परीक्षण के परिणाम प्रस्तुत किए, जिसमें भारत में निर्मित नयी पीढ़ी के हृदय स्टेंट ‘सुप्राफ्लेक्स क्रुज’ की तुलना अंतरराष्ट्रीय बाजार में अग्रणी अमेरिका के ‘एक्सिएंस’ नामक स्टेंट से की गई।</p>
<p>डॉक्टर कौल के नेतृत्व में यह परीक्षण 66 भारतीय हृदय रोग केंद्रों में आयोजित किया गया। इसमें विशेष रूप से अत्यधिक जटिल स्थिति वाले रोगियों, जैसे मधुमेह और उन्नत बहु-वाहिका रोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि परीक्षण में शामिल 80 प्रतिशत लोगों को त्रि-वाहिका रोग था।</p>
<p>भारतीय उपकरण के लिए परिणाम अत्यधिक सकारात्मक रहे, जिससे यह पता चला कि ‘सुप्राफ्लेक्स क्रुज़’ स्थापित अंतरराष्ट्रीय मानकों से कमतर नहीं है।</p>
<p>डॉ. कौल ने कहा कि सूरत की एक कंपनी द्वारा निर्मित भारतीय स्टेंट से एक वर्ष में हृदयाघात की दर में संख्यात्मक रूप से कमी देखी गई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सम्मेलन में इन परिणामों की सराहना भारतीय चिकित्सा उपकरण विनिर्माण की तकनीकी उत्कृष्टता के उदाहरण के रूप में की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 16:51:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वजन कम करने की सोच रहे हैं तो इन पांच बातों को ठीक से जान लें</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लिंकन (ब्रिटेन), चार सितंबर (द कन्वरसेशन) वजन कम करने को अक्सर व्यक्तिगत इच्छाशक्ति का मामला समझा जाता है और अक्सर अधिक वजन के लिए लोगों को ही दोषी ठहराया जाता है, लेकिन यह वास्तव में जैविक, आनुवंशिक, पर्यावरणीय और सामाजिक कारकों के एक जटिल संयोजन का परिणाम है।</p>
<p>चमत्कारिक तरीके से वजन कम करने वाले आहार लेने और बेहतर खाने या ‘ज्यादा चलने-फिरने’ के तरीकों के साथ ही एक और भी सूक्ष्म वैज्ञानिक सच्चाई है कि हमारा शरीर वजन कम होने का प्रतिरोध करता है।</p>
<p>‘वजन कम करने’ का वास्तविक अर्थ बेहतर ढंग से समझने के लिए पांच विचारों का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142878/if-you-are-thinking-of-losing-weight-then-know-these"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/7967_health-fitness-gym-health.jpg" alt=""></a><br /><p>लिंकन (ब्रिटेन), चार सितंबर (द कन्वरसेशन) वजन कम करने को अक्सर व्यक्तिगत इच्छाशक्ति का मामला समझा जाता है और अक्सर अधिक वजन के लिए लोगों को ही दोषी ठहराया जाता है, लेकिन यह वास्तव में जैविक, आनुवंशिक, पर्यावरणीय और सामाजिक कारकों के एक जटिल संयोजन का परिणाम है।</p>
<p>चमत्कारिक तरीके से वजन कम करने वाले आहार लेने और बेहतर खाने या ‘ज्यादा चलने-फिरने’ के तरीकों के साथ ही एक और भी सूक्ष्म वैज्ञानिक सच्चाई है कि हमारा शरीर वजन कम होने का प्रतिरोध करता है।</p>
<p>‘वजन कम करने’ का वास्तविक अर्थ बेहतर ढंग से समझने के लिए पांच विचारों का विश्लेषण जरूरी है।</p>
<p>स्वास्थ्य और पोषण पर लगभग पंद्रह वर्षों के अनुसंधान के बाद, मैंने देखा है कि वजन की समस्या को अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की तरह नहीं देखा जाता।</p>
<p>स्वास्थ्यवर्द्धक और किफायती भोजन की सीमित पहुंच, व्यायाम के अवसरों की कमी, विशेष रूप से उपयुक्त स्थानों की कमी, लंबे कार्य दिवस और लगातार तनाव जैसे कारक वजन कम रखने की प्रक्रिया को काफी मुश्किल कर सकते हैं।</p>
<p>मैं चाहता हूं कि वजन घटाने के बारे में ज्यादातर लोग ये पांच बातें समझें:</p>
<p>1. यह हमारे जीव विज्ञान के विरुद्ध है::</p>
<p>1990 के दशक से इंग्लैंड में मोटापे को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में मान्यता दी गई है, और इसे दूर करने के लिए कई नीतियां बनाई गई हैं। फिर भी मोटापे की दर में कमी नहीं आई है। इससे पता चलता है कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर देने वाले वर्तमान प्रयास काम नहीं कर रहे हैं।</p>
<p>वजन घटाने के तरीके प्रभावी होने पर भी, परिणाम अक्सर स्थायी नहीं होते। अध्ययनों से पता चलता है कि ज्यादातर लोग जो वजन कम करते हैं, अंततः उनका वजन फिर बढ़ जाता है और एक मोटे व्यक्ति के ‘सामान्य’ स्थिति तक पहुंचने और उसे बनाए रखने की संभावना बहुत कम होती है।</p>
<p>ऐसा आंशिक रूप से इसलिए होता है क्योंकि जब हम वजन कम करते हैं तो हमारे शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करते हैं। वे प्रतिरोध करते हैं। इस प्रक्रिया को चयापचय अनुकूलन कहते हैं। जब हम अपनी कैलोरी की मात्रा कम करते हैं और वजन कम करते हैं, तो हमारा चयापचय अपने ऊर्जा व्यय को समायोजित करता है, और घ्रेलिन जैसे भूख हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे हम ज्यादा खाते हैं और घटा हुआ वजन वापस आ जाता है।</p>
<p>2. यह इच्छाशक्ति का सवाल नहीं है::</p>
<p>कुछ लोग अपेक्षाकृत आसानी से अपना वजन उचित स्तर पर बनाए रखने में कामयाब हो जाते हैं, जबकि अन्य संघर्ष करते हैं। यह अंतर केवल इच्छाशक्ति का मामला नहीं है।</p>
<p>शरीर का वजन कई कारकों से निर्धारित होता है। उदाहरण के लिए, आनुवांशिकी एक प्रमुख भूमिका निभाती है, क्योंकि यह इस बात को प्रभावित करती है कि हम कितनी जल्दी कैलोरी बर्न करते हैं, हमें कितनी भूख लगती है और खाने के बाद हम कितना भरा हुआ महसूस करते हैं।</p>
<p>पर्यावरणीय और सामाजिक कारक भी भूमिका निभाते हैं। संतुलित भोजन तैयार करने, नियमित शारीरिक गतिविधि करने और अच्छी नींद लेने के लिए पर्याप्त समय और वित्तीय संसाधन होना, ये सभी बहुत मायने रखते हैं। हालांकि, ये संसाधन सभी के लिए सुलभ नहीं हैं।</p>
<p>3. कैलोरी ही सब कुछ नहीं हैं::</p>
<p>वजन घटाने के लिए कैलोरी गिनना अक्सर चूक वाली रणनीति होती है। वजन घटाने के लिए कैलोरी की कमी करना सैद्धांतिक रूप से आवश्यक है, व्यवहार में, यह कहीं अधिक जटिल है।</p>
<p>हमारी ऊर्जा की जरूरतें दिन-प्रतिदिन बदलती रहती हैं। यहां तक कि भोजन से हम जितनी ऊर्जा अवशोषित करते हैं, वह भी इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कैसे पकाया गया है, कैसे पचाया गया है, और हमारे पेट के बैक्टीरिया की संरचना कैसी है।</p>
<p>यह भी एक गलत धारणा है कि ‘‘कैलोरी तो कैलोरी होती है’’। ऐसा नहीं हैं। हमारा शरीर सभी कैलोरी को एक जैसा प्रसंस्कृत नहीं करता। एक कुकी और एक उबले अंडे में कैलोरी की मात्रा समान हो सकती है, लेकिन हमारी भूख, पाचन और ऊर्जा के स्तर पर इनका प्रभाव बहुत अलग होता है।</p>
<p>एक कुकी रक्त शर्करा में तेजी से वृद्धि और उसके बाद तेज गिरावट का कारण बन सकती है, जबकि एक अंडा लंबे समय तक तृप्ति (पूर्णता) का एहसास और अधिक पोषण मूल्य प्रदान करता है।</p>
<p>इसके अलावा प्रोटीन शेक जैसे आहार कैलोरी कम करके कुछ समय के लिए वजन घटा सकते हैं, लेकिन इनका असर दीर्घकालिक नहीं होता और इनमें आवश्यक पोषकों की कमी होती है।</p>
<p>अधिक यथार्थवादी और संतुलित दृष्टिकोण दीर्घकालिक परिवर्तनों पर ध्यान केंद्रित करना है: जैसे अधिक मात्रा में साबुत खाद्य पदार्थ खाना, बाहर से खाना कम करना, शराब का सेवन कम करना, और ऐसी आदतें अपनाना जो समग्र कल्याण को बढ़ावा देती हैं।</p>
<p>4. व्यायाम आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, लेकिन जरूरी नहीं कि वजन घटाने के लिए भी हो:</p>
<p>बहुत से लोग मानते हैं कि जितना ज्यादा वे व्यायाम करेंगे, उतना ही अधिक तेजी से वजन कम होगा। लेकिन विज्ञान हमें बताता है कि वास्तविकता ज्यादा जटिल है।</p>
<p>दरअसल, शोध बताते हैं कि शारीरिक गतिविधि बढ़ने से कुल दैनिक ऊर्जा व्यय नहीं बढ़ता। इसके बजाय, शरीर ज्यादा कुशल बनकर और अपनी ऊर्जा खपत को कम करके खुद को ढाल लेता है, जिससे सिर्फ व्यायाम से वजन कम करना इतना सरल नहीं है।</p>
<p>हालांकि, व्यायाम के कई फायदे हैं: यह हृदय स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, मांसपेशियों को बनाए रखता है, मेटाबॉलिज्म को मजबूत करता है, हड्डियों को मजबूत बनाता है और लंबे समय तक रहने वाली बीमारियों के जोखिम को कम करता है।</p>
<p>भले ही वजन कम न हो, शारीरिक गतिविधि हमारे स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक है।</p>
<p>5. स्वास्थ्य में सुधार का मतलब हमेशा वजन कम करना नहीं होता::</p>
<p>स्वस्थ रहने के लिए जरूरी नहीं कि वजन कम ही हो। हालांकि वजन कम करने से हृदय रोग और कुछ कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है, लेकिन अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि बेहतर आहार लेने और ज्यादा सक्रिय रहने से कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप, रक्त शर्करा जैसे स्वास्थ्य संकेतकों में काफी सुधार हो सकता है, भले ही आपका वजन वही रहे।</p>
<p>तो कुल मिलाकर वजन कम करने से ज्यादा ध्यान स्वास्थ्य सही रखने पर देना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Sep 2025 14:58:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हेयर ट्रांसप्लांट | मिथ (Myth) vs हकीकत (Reality)</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बाल झड़ना एक आम समस्या बनती जा रही है। आज कल हर तीसरा व्यक्ति बालों के गिरने से परेशान है। इस वजह से हेयर ट्रांसप्लांट की मांग बढ़ रही है। कई अच्छे क्लिनिक जैसे <a href="https://hairtransplantlucknow.in/"><strong>Hair Transplant Lucknow</strong></a> आज कल बालों की रोपाई को बहुत सुरक्षित (safe) और आसान तरीके से कर रहे हैं।</p>
<p>लेकिन इस प्रक्रिया (process) को लेकर लोगों के मन में कई गलत धारणाएं (misconceptions) हैं। आज हम इन मिथों (myths) और हकीकत (reality) के बारे में बात करेंगे।<br /><br /><strong>हेयर ट्रांसप्लांट क्या है?</strong></p>
<p>हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया (surgical procedure) है। इसमें डॉक्टर आपके सिर के पीछे या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/142063/hair-transplant-myth-myth-vs-reality-reality"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-07/k22072025-144520.jpg" alt=""></a><br /><p>बाल झड़ना एक आम समस्या बनती जा रही है। आज कल हर तीसरा व्यक्ति बालों के गिरने से परेशान है। इस वजह से हेयर ट्रांसप्लांट की मांग बढ़ रही है। कई अच्छे क्लिनिक जैसे <a href="https://hairtransplantlucknow.in/"><strong>Hair Transplant Lucknow</strong></a> आज कल बालों की रोपाई को बहुत सुरक्षित (safe) और आसान तरीके से कर रहे हैं।</p>
<p>लेकिन इस प्रक्रिया (process) को लेकर लोगों के मन में कई गलत धारणाएं (misconceptions) हैं। आज हम इन मिथों (myths) और हकीकत (reality) के बारे में बात करेंगे।<br /><br /><strong>हेयर ट्रांसप्लांट क्या है?</strong></p>
<p>हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया (surgical procedure) है। इसमें डॉक्टर आपके सिर के पीछे या बगल के हिस्से से बाल लेकर उन्हें गंजे (bald) वाले हिस्से में लगाते हैं। यह एक सुरक्षित (safe) और प्रभावी (effective) तरीका है।</p>
<p><strong>आम मिथ (Common Myths) और उनकी हकीकत (Reality)</strong></p>
<p><strong>मिथ 1: हेयर ट्रांसप्लांट बहुत दर्दनाक (painful) होता है</strong></p>
<p>हकीकत: आज के समय में लोकल एनेस्थीसिया (local anesthesia) का इस्तेमाल करते हैं। आपको प्रक्रिया के दौरान कोई दर्द नहीं होता। हल्की सी असुविधा (discomfort) हो सकती है जो दवाई से ठीक हो जाती है।</p>
<p><strong>मिथ 2: नए बाल प्राकृतिक (natural) नहीं लगते</strong></p>
<p>हकीकत: आधुनिक तकनीक (modern technology) से लगाए गए बाल बिलकुल प्राकृतिक (natural) लगते हैं। FUE और FUT जैसी तकनीकें (techniques) बहुत बेहतर परिणाम (results) देती हैं।</p>
<p><strong>मिथ 3: हेयर ट्रांसप्लांट महंगा (expensive) है</strong></p>
<p>हकीकत: शुरू में लागत (cost) ज्यादा लगती है, लेकिन यह एक बार का निवेश (investment) है। बाकी हेयर ट्रीटमेंट में जो पैसे सालों तक खर्च करते हैं, उससे यह सस्ता (cheaper) पड़ता है।</p>
<p><strong>मिथ 4: सभी बाल वापस गिर जाएंगे</strong></p>
<p>हकीकत: ट्रांसप्लांट किए गए बाल स्थायी (permanent) होते हैं। ये वही बाल हैं जो आपके सिर के पीछे से लिए गए हैं और प्राकृतिक रूप (naturally) से मजबूत होते हैं।</p>
<p><strong>मिथ 5: केवल पुरुष कराते हैं हेयर ट्रांसप्लांट</strong></p>
<p>हकीकत: आज कल महिलाएं भी हेयर ट्रांसप्लांट करा रही हैं। बालों का पतला होना या गंजापन (baldness) किसी भी लिंग (gender) में हो सकता है।</p>
<p><strong>मिथ 6: हेयर ट्रांसप्लांट के बाद तुरंत बाल आ जाते हैं</strong></p>
<p>हकीकत: बाल आने में समय लगता है। 2-3 सप्ताह में ट्रांसप्लांट किए बाल झड़ जाते हैं (यह सामान्य है), फिर 3-4 महीने बाद नए बाल उगना शुरू होते हैं। पूरा परिणाम 8-12 महीने में मिलता है।</p>
<p><strong>मिथ 7: हेयर ट्रांसप्लांट के बाद सामान्य जीवन नहीं जी सकते</strong></p>
<p>हकीकत: ट्रांसप्लांट के 7-10 दिन बाद आप सामान्य काम कर सकते हैं। तैराकी, व्यायाम, और अन्य गतिविधियां (activities) भी कुछ सप्ताह बाद शुरू कर सकते हैं।</p>
<p><strong>मिथ 8: हेयर ट्रांसप्लांट के दाग (scars) हमेशा दिखते हैं</strong></p>
<p>हकीकत: FUE तकनीक में कोई दाग नहीं रहते। FUT में छोटा सा निशान (mark) होता है जो बालों से छुप जाता है। आधुनिक तकनीकों से दाग बहुत कम या बिलकुल नहीं होते।</p>
<p><strong>मिथ 9: बूढ़े लोग हेयर ट्रांसप्लांट नहीं करा सकते</strong></p>
<p>हकीकत: उम्र कोई बाधा (barrier) नहीं है। 60-70 साल के लोग भी सफल हेयर ट्रांसप्लांट करा सकते हैं। बस सेहत अच्छी होनी चाहिए और पर्याप्त डोनर बाल होने चाहिए।<br />अगर आप भी चाहते हैं कि आपके सर के बाल वापस जवां हों तो आज ही हेयर ट्रांसप्लांट लखनऊ को कॉल करें +91 8858284438</p>
<p><img src="https://www.loktej.com/media/2025-07/k22072025-144520.jpg" alt="k22072025-144520" width="1280" height="720"></img></p>
<p><strong>हेयर ट्रांसप्लांट के फायदे (Benefits)</strong></p>
<p>●    स्थायी समाधान (Permanent Solution): एक बार हो जाने के बाद यह जिंदगी भर चलता है।<br />●    प्राकृतिक दिखावट (Natural Look): नए बाल बिलकुल असली लगते हैं।<br />●    आत्मविश्वास बढ़ता है (Boosts Confidence): बाल वापस आने से व्यक्तित्व (personality) में सुधार होता है।<br />●    कम रखरखाव (Low Maintenance): ट्रांसप्लांट के बाद सामान्य बालों की तरह धोना और काटना काफी है।<br />●    सुरक्षित प्रक्रिया (Safe Procedure): आधुनिक तकनीक से यह बहुत सुरक्षित है।</p>
<p><strong>हेयर ट्रांसप्लांट की तकनीकें (Techniques)</strong></p>
<ol>
<li>   FUE (Follicular Unit Extraction): इसमें एक-एक करके बालों को निकालकर लगाते हैं। कोई कटाव (incision) नहीं होता।<br />2.    FUT (Follicular Unit Transplantation): इसमें सिर के पीछे से त्वचा का एक टुकड़ा लेकर बालों को अलग करते हैं।<br />3.    DHI (Direct Hair Implantation): यह सबसे नई तकनीक है जिसमें बाल सीधे लगाए जाते हैं।</li>
</ol>
<p><strong>ठीक होने का समय (Recovery Time)</strong></p>
<p>●    पहले 2-3 दिन: हल्की सूजन (swelling) हो सकती है<br />●    1 सप्ताह: पपड़ी (scabs) बनती है जो अपने आप हट जाती है<br />●    2-3 सप्ताह: ट्रांसप्लांट किए बाल गिर सकते हैं (यह सामान्य है)<br />●    3-4 महीने: नए बाल उगना शुरू होते हैं<br />●    8-12 महीने: पूरे परिणाम दिखते हैं</p>
<p><strong>सही उम्मीदवार (Right Candidate) कौन है?</strong></p>
<p>●    25 साल से ज्यादा उम्र<br />●    स्थिर (stable) बाल झड़ना<br />●    पर्याप्त (sufficient) डोनर बाल<br />●    अच्छी सेहत (good health)<br />●    यथार्थवादी उम्मीदें (realistic expectations)</p>
<p><strong>देखभाल के टिप्स (Care Tips)</strong></p>
<p><strong>पहले सप्ताह में:</strong></p>
<p>●    सिर को धीरे से धोएं<br />●    भारी काम न करें<br />●    धूप से बचें<br />●    डॉक्टर की दवाई लें</p>
<p><strong>लंबी अवधि में:</strong></p>
<p>●    स्वस्थ आहार (healthy diet) लें<br />●    तनाव (stress) से बचें<br />●    नियमित व्यायाम करें<br />●    धूम्रपान न करें</p>
<p><strong>अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)</strong></p>
<p><strong>हेयर ट्रांसप्लांट में कितना समय लगता है? </strong></p>
<p>आमतौर पर 4-8 घंटे लगते हैं। यह ट्रांसप्लांट किए जाने वाले बालों की संख्या (number) पर निर्भर करता है।</p>
<p><strong>क्या हेयर ट्रांसप्लांट के बाद बाल काट सकते हैं? </strong></p>
<p>हां, 2-3 सप्ताह बाद आप सामान्य रूप से बाल काट सकते हैं।</p>
<p><strong>परिणाम कब तक दिखते हैं? </strong></p>
<p>3-4 महीने में नए बाल आना शुरू होते हैं। पूरे परिणाम 8-12 महीने में दिखते हैं।</p>
<p><strong>क्या हेयर ट्रांसप्लांट असफल हो सकता है? </strong></p>
<p>अनुभवी (experienced) डॉक्टर से कराने पर सफलता की दर 95% से ज्यादा होती है।</p>
<p><strong>कितनी उम्र में करा सकते हैं? </strong></p>
<p>25 साल के बाद करना बेहतर होता है क्योंकि तब बाल झड़ना स्थिर हो जाता है।</p>
<p><strong>क्या महिलाएं भी करा सकती हैं? </strong></p>
<p>हां, महिलाओं में भी यह सुरक्षित और प्रभावी है।</p>
<p><strong>ट्रांसप्लांट के बाद क्या सावधानियां रखनी चाहिए? </strong></p>
<p>पहले सप्ताह में सिर को सुरक्षित रखें, धीरे से धोएं, और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।</p>
<p><strong>क्या बाल दोबारा झड़ सकते हैं? </strong></p>
<p>ट्रांसप्लांट किए गए बाल स्थायी होते हैं, लेकिन प्राकृतिक बाल अभी भी झड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>लागत कितनी आती है? </strong></p>
<p>यह ट्रांसप्लांट की मात्रा (quantity) और तकनीक पर निर्भर करता है। डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।</p>
<p><strong>क्या साइड इफेक्ट्स होते हैं? </strong></p>
<p>कभी-कभार हल्की सूजन या संक्रमण (infection) हो सकता है, जो दवाई से ठीक हो जाता है।</p>
<p>हेयर ट्रांसप्लांट आज एक सुरक्षित और प्रभावी समाधान है। इसके बारे में फैली गलत धारणाओं (misconceptions) को दूर करना जरूरी है। सही जानकारी और अनुभवी डॉक्टर से सलाह लेकर आप इस समस्या का स्थायी समाधान पा सकते हैं।</p>
<p>याद रखें, हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है। इसलिए किसी भी फैसले से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</p>
<p><em>स्वास्थ्य अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें दी गई जानकारियाँ किसी चिकित्सकीय परामर्श, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। कृपया कोई भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले किसी योग्य और पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। लेख में वर्णित प्रक्रिया, परिणाम और अनुभव व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करते हैं। लोकतेज समाचार पोर्टल इस लेख में प्रस्तुत किसी भी दावे, सलाह या जानकारी की पुष्टि नहीं करता और इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।</em></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 14:46:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोज़ शैंपू करने से हो सकते है बाल कमजोर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पेरिस, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। रोज़ाना शैंपू करने से बालों और खोपड़ी की प्राकृतिक सेहत पर असर पड़ सकता है। शैंपू का काम गंदगी और तेल हटाना है, मगर यह खोपड़ी के नैचुरल ऑयल (सीबम) को भी साफ कर देता है, जो बालों को मॉइस्चराइज करता है।</p>
<p>इससे स्कैल्प ड्राई और बाल कमजोर हो सकते हैं। ताजा शोध के बाद वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। 2021 की एक स्टडी बताती है कि बार-बार शैंपू करने से सीबम प्रोडक्शन असंतुलित हो जाता है और स्कैल्प या तो बहुत सूखी या बहुत ऑयली हो सकती है।</p>
<p>डर्मेटोलॉजिस्ट सलाह देते हैं कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141817/shampooing-daily-can-weaken-hair"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/lady-woman-girl-back-pose-crime-victim-hairstyle-rape3.jpg" alt=""></a><br /><p>पेरिस, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। रोज़ाना शैंपू करने से बालों और खोपड़ी की प्राकृतिक सेहत पर असर पड़ सकता है। शैंपू का काम गंदगी और तेल हटाना है, मगर यह खोपड़ी के नैचुरल ऑयल (सीबम) को भी साफ कर देता है, जो बालों को मॉइस्चराइज करता है।</p>
<p>इससे स्कैल्प ड्राई और बाल कमजोर हो सकते हैं। ताजा शोध के बाद वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। 2021 की एक स्टडी बताती है कि बार-बार शैंपू करने से सीबम प्रोडक्शन असंतुलित हो जाता है और स्कैल्प या तो बहुत सूखी या बहुत ऑयली हो सकती है।</p>
<p>डर्मेटोलॉजिस्ट सलाह देते हैं कि रोज़ नहाना फायदेमंद हो सकता है, खासकर भारत जैसे गर्म और धूल भरे देशों में, लेकिन शैंपू हफ्ते में 2–3 बार ही करें। बाकी दिनों में पानी से धोने की सलाह दी जाती है ताकि प्राकृतिक ऑयल बना रहे।</p>
<p>जो लोग ज्यादा पसीना निकालते हैं, उन्हें रोज़ शैंपू की जरूरत हो सकती है। रोज़ शैंपू में मौजूद सर्फेक्टेंट्स जैसे सोडियम लॉरिल सल्फेट बालों के प्रोटीन को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। </p>
<p>इससे बाल पतले, कमजोर और दोमुंहे हो सकते हैं। कुछ लोगों की स्किन संवेदनशील होती है, जिनमें सल्फेट्स या कृत्रिम खुशबू वाले शैंपू से खुजली और जलन हो सकती है। दुनिया में शैंपू के इस्तेमाल की आदतें अलग हैं।</p>
<p>अमेरिका और जापान में लोग हफ्ते में 5–7 बार शैंपू करते हैं। अमेरिका में ड्राई शैंपू भी लोकप्रिय है। जापान में रोज़ाना नहाना और शैंपू करना साफ-सफाई का हिस्सा माना जाता है। ब्राजील जैसे गर्म देशों में लोग दिन में एक-दो बार भी शैंपू करते हैं। दक्षिण कोरिया में भी हेयर केयर बेहद अहम है।</p>
<p>भारत में शैंपू का चलन अब भी कम है। गांवों में रीठा, शिकाकाई और हर्बल नुस्खे चलते हैं और शैंपू हफ्ते में 1–2 बार किया जाता है। अफ्रीकी देशों में बालों की बनावट के कारण कभी-कभी 10–15 दिन में एक बार शैंपू किया जाता है। यूरोप में “लो-पू” (कम केमिकल वाला) और “नो-पू” (बिना शैंपू के) आंदोलन बढ़ा है। कोविड के दौरान लोग घर में रहे और कम शैंपू करने से बाल ज्यादा हेल्दी लगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 15:38:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-पाक तनाव: डर, सोशल मीडिया पर सूचनाओं की बाढ़ से मानसिक स्वास्थ्य हो रहा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="content-profession">
<p>नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) सात साल की हेजल के लिए इस हफ्ते की शुरुआत तक पाकिस्तान सिर्फ एक नाम था। अब दरवाजे पर हर दस्तक के साथ वह सशंकित हो जाती है और किसी आसन्न खतरे के बारे में सोचकर परेशान हो जाती है।</p>
<p>अन्नू मैथ्यू को अपनी बेटी हेजल को यह समझाने में मुश्किल हो रही है कि वह केरल के त्रिवेंद्रम में किसी सीधे खतरे की जद में नहीं है।</p>
<p>मैथ्यू ने कहा, ‘‘यह सब तब शुरू हुआ, जब उसके स्कूल में जागरूकता सत्र था और फिर उसने कक्षा में अपने दोस्तों से कुछ बातें सुनीं। अब</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140689/indo-pak-stress-fears-affected-by-flood-of-information-on-social"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/5323_artificial-intelligence-brain-think-mental-power.jpg" alt=""></a><br /><div class="content-profession">
<p>नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) सात साल की हेजल के लिए इस हफ्ते की शुरुआत तक पाकिस्तान सिर्फ एक नाम था। अब दरवाजे पर हर दस्तक के साथ वह सशंकित हो जाती है और किसी आसन्न खतरे के बारे में सोचकर परेशान हो जाती है।</p>
<p>अन्नू मैथ्यू को अपनी बेटी हेजल को यह समझाने में मुश्किल हो रही है कि वह केरल के त्रिवेंद्रम में किसी सीधे खतरे की जद में नहीं है।</p>
<p>मैथ्यू ने कहा, ‘‘यह सब तब शुरू हुआ, जब उसके स्कूल में जागरूकता सत्र था और फिर उसने कक्षा में अपने दोस्तों से कुछ बातें सुनीं। अब वह चाहती है कि मैं दरवाजा खोलने से पहले सावधान रहूं। वह कहती है कि पाकिस्तान हम पर हमला करेगा और हर कोई मर जाएगा।’’</p>
<p>हेजल अकेली नहीं है। सैकड़ों मील दूर दिल्ली में 36 वर्षीय महेंद्र अवस्थी ने कहा कि उन्हें नींद नहीं आती। बच्ची अपने आस-पास की बातचीत से परेशान है, तो युवा सोशल मीडिया का सहारा ले रहे, जिन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि किस तथ्य पर विश्वास करें और किस पर नहीं।</p>
<p>शनिवार शाम को पाकिस्तान और भारत के बीच सैन्य टकराव रोकने पर बनी सहमति के बावजूद लोग सहमे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव रोकने पर सहमति बन गई है। राहत की यह भावना जल्द ही नयी चिंता में बदल गई, जब पाकिस्तान द्वारा कई सीमावर्ती क्षेत्रों में विस्फोटों और ‘ब्लैकआउट’ के साथ उस समझौते का उल्लंघन करने की खबरें आईं।</p>
<p>हर कोई चिंतित है।</p>
<p>इसकी शुरुआत छह-सात मई की रात को हुई, जब भारत ने पहलगाम में हुए हमले के प्रतिशोध में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी अड्डों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। अगले दिनों में, दोनों देशों ने सीमा से लगे प्रमुख शहरों में गोलाबारी की।</p>
<p>इन सबका मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।</p>
<p>मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सैन्य तनाव, सूचनाओं की बाढ़, तथा झूठी और सच्ची खबरों में अंतर करने में असमर्थता, व्यक्तियों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।</p>
<p>क्लीनिकल ​​मनोवैज्ञानिक श्वेता शर्मा के अनुसार, संभावित युद्ध की निरंतर चर्चा लोगों में ‘‘प्रतिकूल आघात’’ प्रतिक्रिया को जन्म दे सकती है, यहां तक ​​कि उन लोगों में भी जो संघर्ष क्षेत्रों से दूर रहते हैं।</p>
<p>शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘लगातार मीडिया कवरेज, सोशल मीडिया और भावनात्मक विषय वस्तु मस्तिष्क के तनाव विनियमन तंत्र को प्रभावित कर सकती है। युद्ध से संबंधित भय अक्सर अनिश्चितता से उत्पन्न होते हैं-यह कितना आगे तक जाएगा, कौन प्रभावित होगा और इसके दीर्घकालिक परिणाम क्या होंगे?’’</p>
<p>अवस्थी जैसे लोगों के लिए यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है।</p>
<p>सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर खबरों और गलत सूचनाओं के भंवर में डूबे अवस्थी ने कहा कि वह लगातार भय की भावना से भरे हुए हैं, इस हद तक कि वह कभी-कभी अपने दिल की धड़कन को तेजी से धड़कते हुए सुन सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मैं सोशल मीडिया पर स्क्रॉल नहीं करना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि मैं कुछ जरूरी खबरों से चूक जाऊंगा। अगर दिल्ली अगला निशाना बन गई, तो मुझे अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए, क्या हम कल जागेंगे?’’</p>
<p>सुरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए, नागरिकों या सैनिकों की पीड़ा को देखना अपराधबोध और बेबसी का भाव पैदा कर सकता है।</p>
<p>शर्मा ने कहा, ‘‘युवा दिमाग बहुत जल्दी प्रभावित होते हैं। युद्ध की बातें डर पैदा कर सकती हैं, रूढ़िवादिता को मजबूत कर सकती हैं और उनकी सुरक्षा की भावना को बाधित कर सकती हैं।’’</p>
<p>ऐसे समय में जागरूक रहना महत्वपूर्ण है, लेकिन सूचनाओं के लिए विश्वसनीय स्रोतों का चयन करना और निरंतर कवरेज से ब्रेक लेना भी जरूरी है।</p>
<p>शर्मा ने कहा कि जब बात बच्चों की आती है, तो उन्हें उम्र के हिसाब से हालात के बारे में समझाना उचित है। उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाएं और ऑनलाइन प्रसारित हो रही सूचना पर ध्यान देने के बजाय खुली बातचीत के लिए प्रोत्साहित करें।’’</p>
<p>मैथ्यू ने अपनी बेटी को आश्वस्त करने के लिए एक योजना बनाई है। वह हेजल को बालकनी में ले जाती हैं और आसमान की ओर इशारा करते हुए उससे पूछती हैं कि क्या वह कोई विस्फोट या गोलीबारी देख रही है, जिससे वह डरती है। मैथ्यू ने कहा, ‘‘जब वह देखती है कि ऐसी कोई चीज यहां नहीं हो रही है, तो वह शांत हो जाती है।’’</p>
<p>आघात अलग-अलग रूप ले सकता है।</p>
<p>आसन्न युद्ध की आशंका से लगभग अस्वस्थ हो चुके जयपुर निवासी अनिकेत सिंह (बदला हुआ नाम) ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले के बाद आपात स्थिति की तैयारी शुरू कर दी थी।</p>
<p>पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिसके बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया।</p>
<p>अनिकेत सिंह ने तीन महीने का राशन, पूरी तरह चार्ज किए गए पावर बैंक, फ्लैशलाइट, पर्याप्त नकदी और जरूरी दवाइयां जमा कर लीं। फिर भी वह ‘‘बेहद चिंतित’’ और ‘‘बेबस’’ महसूस कर रहे हैं।</p>
<p>सिंह ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है और मैं अपना और अपने परिवार का ख्याल रखने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हूं। मुझे लगता है कि मैं जो कर रहा हूं, वह शायद काफी नहीं है। मैं वाकई ऐसा महसूस करने से खुद को नहीं रोक सकता।’’</p>
<p>युद्ध के खतरे के चलते अज्ञात स्थिति के बारे में चिंतित होना एक बात है, लेकिन किसी भी अप्रिय परिणाम के लिए तैयार रहना भी चिंता का कारण बन सकता है।</p>
<p>वरिष्ठ चिकित्सक मैत्री चंद ने कहा कि सायरन, ‘ब्लैकआउट’ अभ्यास और आवश्यक वस्तुओं का भंडारण करने पर ध्यान देना लोगों को तैयार होने का एहसास दिला सकता है और साथ ही चिंता भी पैदा कर सकता है।</p>
<p>चंद ने कहा, ‘‘यह ऐसी रस्सी है, जिस पर चलना मुश्किल है, जहां हमें अपना संतुलन खुद ही बनाना होता है। शांत और संयमित रहना मुश्किल है, खासकर तब जब आपके आस-पास के ज़्यादातर लोग चिंता और डर से प्रेरित उन्मादी माहौल में हों।’’</p>
<p>ऐसी परिस्थितियों में, लोगों को खुद को ‘‘सकारात्मक विचारों’’ के साथ शांत रहने का प्रयास करना चाहिए कि वे इससे बाहर निकल आएंगे और समय आने पर अपने प्रियजनों की देखभाल करने में सक्षम होंगे। चंद ने शांत रहने के लिए लोगों को योग, ध्यान करने की भी सलाह दी।</p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 May 2025 18:30:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी बढ़ने पर भी पहाड़ों पर चढ़ते समय ठंड क्यों बढ़ती है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>(जेम्स रेनविक, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ऑफ वेलिंगटन)</p>
<p>वेलिंगटन, 21 अप्रैल (द कन्वरसेशन) यदि गर्मी बढ़ती है, तो पहाड़ों पर चढ़ते समय ठंड क्यों बढ़ती है? ऐसा आखिर क्यों होता है।</p>
<p>दरअसल जब हवा गर्म होती है, तो यह ऊपर उठती है। इसकी मदद से ही ग्लाइडर ऊपर की ओर उड़ सकते हैं और दक्षिण अमेरिकी कोंडोर जैसे बड़े शिकारी पक्षी घंटों तक इसकी मदद से हवा में रह पाते हैं।</p>
<p>लेकिन हवा के तापमान को प्रभावित करने वाली कई अन्य चीजें भी हैं। जब हवा ऊपर उठती है, तो यह फैलती है क्योंकि ऊंचाई के साथ हवा का दबाव कम होता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140258/why-does-the-cold-grow-while-climbing-the-mountains-even"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mountaineer-couple-exercise-walking-tourism.jpg" alt=""></a><br /><p>(जेम्स रेनविक, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ऑफ वेलिंगटन)</p>
<p>वेलिंगटन, 21 अप्रैल (द कन्वरसेशन) यदि गर्मी बढ़ती है, तो पहाड़ों पर चढ़ते समय ठंड क्यों बढ़ती है? ऐसा आखिर क्यों होता है।</p>
<p>दरअसल जब हवा गर्म होती है, तो यह ऊपर उठती है। इसकी मदद से ही ग्लाइडर ऊपर की ओर उड़ सकते हैं और दक्षिण अमेरिकी कोंडोर जैसे बड़े शिकारी पक्षी घंटों तक इसकी मदद से हवा में रह पाते हैं।</p>
<p>लेकिन हवा के तापमान को प्रभावित करने वाली कई अन्य चीजें भी हैं। जब हवा ऊपर उठती है, तो यह फैलती है क्योंकि ऊंचाई के साथ हवा का दबाव कम होता जाता है। हवा में मौजूद ऊर्जा अधिक मात्रा में फैल जाती है और इसका तापमान कम हो जाता है।</p>
<p>गर्म हवा ऊपर उठने पर ठंडी हो जाती है, जब तक कि यह अपने आस-पास की हवा के तापमान तक नहीं पहुंच जाती।</p>
<p>लेकिन हमारे आस-पास हवा ऊपर क्यों उठती है?</p>
<p>ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे आस-पास की हवा नीचे से, पृथ्वी की सतह से गर्म होती है।</p>
<p>जब सूर्य चमक रहा होता है, तो यह वायुमंडल के सबसे निचले कुछ किलोमीटर (क्षोभमंडल) में हवा को गर्म नहीं करता है क्योंकि उस हवा में सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करने के लिए बहुत कम गैस होती हैं।</p>
<p>सूर्य की किरणें पृथ्वी को गर्म करती हैं, हवा को नहीं। फिर हवा नीचे से, जमीन से गर्म होती है, ठीक वैसे ही जैसे चूल्हे पर रखे बर्तन में पानी बर्तन के नीचे से गर्म होता है।</p>
<p>पृथ्वी का ग्रीनहाउस</p>
<p>पृथ्वी ज्यादातर ऊर्जा को ऊष्मा या अवरक्त विकिरण (दृश्य प्रकाश से अधिक लंबी लेकिन सूक्ष्म तरंगों से कम तरंगदैर्ध्य के साथ) के रूप में अंतरिक्ष में वापस भेजती है, और हवा में बहुत सारी गैस हैं जो इस तरह के विकिरण को अवशोषित करने में अच्छी हैं, भले ही वे सूर्य की ऊर्जा को महसूस न करें।</p>
<p>इन्हें हम ग्रीनहाउस गैस कहते हैं - जल वाष्प, कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन और इसी तरह की अन्य गैसें। चूंकि ये हवा में हैं, इसलिए अवरक्त ऊर्जा का अवशोषण हवा को गर्म करने का मुख्य तरीका है।</p>
<p>फिर से, जमीन के पास की हवा ऊर्जा के इस अवशोषण से सबसे अधिक गर्म होती है। पृथ्वी के पास की गर्म हवा उछालदार होती है, इसलिए यह अक्सर वायुमंडल में ‘उबलती’ है, ठीक वैसे ही जैसे चूल्हे पर रखे बर्तन में पानी।</p>
<p>लेकिन वायुमंडल में, ऊंचाई के साथ दबाव में कमी यह तय करती है कि जैसे-जैसे आप ऊपर जाते हैं, तापमान कम होता जाता है। जब हमारे पास हवा में जल वाष्प होती है, तो यह एक अलग कहानी होती है। जैसे-जैसे हवा ऊपर उठती है और ठंडी होती है, यह इतनी जल वाष्प को पकड़ नहीं पाती है, इसलिए कुछ वाष्प को वापस तरल पानी में संघनित होना पड़ता है।</p>
<p>बादल, बारिश और बिजली</p>
<p>बादल और बारिश इसलिए होते हैं क्योंकि ऊंचाई के साथ तापमान कम होता है। इस तरह से बनने वाले बादल, ऊष्मीय रूप से ऊपर उठने वाली हवा के माध्यम से, ‘क्यूमलस’ बादल के रूप में जाने जाते हैं। ‘क्यूमलस’ में बादल फूलगोभी की तरह दिखते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ऊपर उठने वाली हवा के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मात्रा में जल वाष्प होती है। इसलिए अलग-अलग मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जिससे हवा अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग बहती है।</p>
<p>सबसे नम, सबसे अधिक उछाल वाली हवा सबसे ऊपर उठती है, जबकि सूखी और कम उछाल वाली हवा इतनी ऊपर नहीं जा पाती। अगर बहुत अधिक नमी है, तो गरज और बिजली के साथ-साथ बहुत अधिक बारिश हो सकती है। सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि अक्सर ओले भी पड़ते हैं।</p>
<p>ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसे गहरे बादलों के ऊपरी हिस्सों में तापमान हिमांक से काफी नीचे होता है, इसलिए यह पानी की बूंदों के बजाय बर्फ के क्रिस्टल से बना होता है। ये बर्फ के क्रिस्टल आपस में चिपक कर ओले या बर्फ बना सकते हैं।</p>
<p>अब अपने मूल प्रश्न पर वापस आते हैं कि पहाड़ों में ठंड क्यों होती है? ऐसा इसलिए है क्योंकि जैसे-जैसे हम पहाड़ पर चढ़ते हैं, हम वायुमंडल की ठंडी परतों में जा रहे होते हैं। हम वायुमंडल की सतही परतों से ऊपर जा रहे होते हैं, कम दबाव में जा रहे होते हैं, और इससे तापमान गिरता है।</p>
<p>गर्म हवा अब भी पहाड़ की चोटी से ऊपर उठ सकती है, लेकिन यह समुद्र तल पर हवा की तुलना में शुरू में ठंडी होगी, क्योंकि यह कम दबाव पर है। माउंट एवरेस्ट जैसे बहुत ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ने वाले पर्वतारोही आमतौर पर अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाते हैं, क्योंकि ऐसी ऊंची चोटियों के पास हवा बहुत कम होती है।</p>
<p>यही कारण है कि पहाड़ों की चोटियों पर बर्फ जमी रहती है और साल भर ठंड रहती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Apr 2025 12:53:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जीवनशैली में छोटे बदलाव, मोटापे से राहत का बड़ा उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">तेज रफ्तार और असंतुलित जीवनशैली के इस दौर में मोटापा एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। इसकी जड़ें हमारे रोज़मर्रा के छोटे-छोटे निर्णयों में छुपी होती हैं। गलत खान-पान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता वजन बढ़ने की सबसे प्रमुख वजहें हैं, जो आगे चलकर मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और जोड़ों की समस्याएं जैसी कई बीमारियों को जन्म देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मोटापे से बचाव और नियंत्रण का पहला और सबसे कारगर उपाय है, स्वस्थ और संतुलित आहार। ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, ओट्स, ब्राउन राइस और ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। वहीं फास्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/140133/small-changes-in-vadodara-lifestyle"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2025-04/d15042025-04.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">तेज रफ्तार और असंतुलित जीवनशैली के इस दौर में मोटापा एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। इसकी जड़ें हमारे रोज़मर्रा के छोटे-छोटे निर्णयों में छुपी होती हैं। गलत खान-पान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता वजन बढ़ने की सबसे प्रमुख वजहें हैं, जो आगे चलकर मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और जोड़ों की समस्याएं जैसी कई बीमारियों को जन्म देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मोटापे से बचाव और नियंत्रण का पहला और सबसे कारगर उपाय है, स्वस्थ और संतुलित आहार। ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, ओट्स, ब्राउन राइस और ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। वहीं फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें, शक्कर और पैकेज्ड फूड से दूरी बनाना आवश्यक है। पानी भी वजन घटाने का एक सशक्त हथियार है। दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी पीना शरीर की चयापचय क्रिया को दुरुस्त रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक निष्क्रिय जीवनशैली वजन बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है। इसलिए हर दिन कम से कम 30 मिनट की कोई भी फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है,चाहे वह तेज चलना हो, योग, नृत्य या जिम जाना। एक ही जगह लंबे समय तक बैठे रहने से बचें और हर घंटे कुछ मिनट चलने-फिरने की आदत डालें। घरेलू कार्यों में सक्रिय भागीदारी या हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग भी शरीर को एक्टिव बनाए रखती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अक्सर लोग वजन बढ़ने की वजह के रूप में नींद की कमी और तनाव को नजरअंदाज कर देते हैं। मगर विशेषज्ञों के अनुसार, हर दिन 7-8 घंटे की गहरी नींद और ध्यान-प्राणायाम जैसे मानसिक व्यायाम न केवल हार्मोन संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि आपकी ऊर्जा और मूड को भी बेहतर करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ध्यान रखें, मोटापा कम करने की प्रक्रिया में जल्दबाज़ी नहीं, बल्कि निरंतरता और संयम की जरूरत होती है। छोटे बदलावों से शुरुआत करें,जैसे सीढ़ियों का उपयोग, खाना चबाकर खाना, मीठे पेय से परहेज आदि। यही छोटे कदम मिलकर एक स्थायी और स्वस्थ जीवन की दिशा में बड़ी छलांग बन जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी प्रकार की नई डाइट या एक्सरसाइज योजना शुरू करने से पहले एक डाइटीशियन या फिटनेस ट्रेनर से सलाह लेना जरूरी है। यह आपकी सेहत के अनुसार सबसे उपयुक्त योजना बनाने में मदद करता है। मोटापा कोई रातों-रात आने वाली समस्या नहीं है, और इससे छुटकारा पाने के लिए लगातार छोटे प्रयास और सकारात्मक सोच की आवश्यकता है। यदि आप आज से ही शुरुआत करते हैं, तो कल एक नया और स्वस्थ जीवन आपका इंतजार कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 19:30:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सूरत : त्वचा और आनुवंशिक रोगों के लिए वरदान साबित हो रही है होम्योपैथी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत। 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो होम्योपैथी के जनक डॉ. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैम्यूल हानेमैन की जयंती है। इस अवसर पर सूरत समेत देशभर में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता और प्रासंगिकता को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ती दिखाई दी।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, जहां एलोपैथी त्वरित राहत प्रदान करती है लेकिन रोगों को जड़ से नहीं समाप्त कर पाती, वहीं होम्योपैथी रोग की जड़ पर काम करके उसे स्थायी रूप से खत्म करने की क्षमता रखती है। इसी कारण अब दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित लोग होम्योपैथी की ओर रुख कर रहे हैं।</p>
<p>सूरत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/139996/surat-is-proving-to-be-a-boon-for-skin-and"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/6130_pulse-oximeter-oximeter-measurement-healthcare1.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत। 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो होम्योपैथी के जनक डॉ. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैम्यूल हानेमैन की जयंती है। इस अवसर पर सूरत समेत देशभर में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता और प्रासंगिकता को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ती दिखाई दी।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, जहां एलोपैथी त्वरित राहत प्रदान करती है लेकिन रोगों को जड़ से नहीं समाप्त कर पाती, वहीं होम्योपैथी रोग की जड़ पर काम करके उसे स्थायी रूप से खत्म करने की क्षमता रखती है। इसी कारण अब दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित लोग होम्योपैथी की ओर रुख कर रहे हैं।</p>
<p>सूरत के प्रसिद्ध होम्योपैथिक सलाहकार डॉ. क्रुनाल कोसाडा के अनुसार, "होम्योपैथी पद्धति विशेष रूप से त्वचा रोगों, आनुवंशिक विकारों, अस्थमा, एलर्जी, बाल रोगों और मानसिक विकास संबंधी समस्याओं में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।" यह चिकित्सा शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को सक्रिय करती है और रोग को भीतर से समाप्त करती है।</p>
<p>आज की भागदौड़ भरी और तनावयुक्त जीवनशैली में ऑटोइम्यून और जीवनशैली संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। होम्योपैथी न केवल इन रोगों के इलाज में कारगर है, बल्कि यह भविष्य में इनसे बचाव की भी दिशा दिखाती है।</p>
<p>डॉ. कश्यप सिंह, डीन, होम्योपैथी संकाय, ने कहा, "आज जरूरत है कि होम्योपैथी का प्रचार-प्रसार अधिक हो ताकि समाज के हर वर्ग तक यह पहुंचे और वे इसके समग्र लाभों को समझ सकें।"</p>
<p>अब शिक्षित वर्ग से लेकर आमजन तक होम्योपैथी की ओर आकर्षित हो रहे हैं, खासकर तब, जब अन्य उपचार पद्धतियाँ वांछित परिणाम नहीं दे पातीं। विश्व होम्योपैथी दिवस इस बात की याद दिलाता है कि जब बात समग्र, सुरक्षित और स्थायी उपचार की हो, तो होम्योपैथी एक प्रभावी विकल्प बन कर उभरती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Apr 2025 15:27:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
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