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                <title>जर्मनी की दुल्‍हन और स्विट्जरलैंड का दूल्‍हा : यूं बंधे हिन्‍दू पाणिग्रहण संस्‍कार में</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भोपाल, 22 जुलाई (हि.स.)। भारतीय संस्‍कृति में ‘विवाह’ सोलह संस्‍कारों में से एक जीवन का वह महत्‍वपूर्ण संस्‍कार है, जिसके होने के बाद धर्म की पूर्ति के लिए अर्थ एवं कामनाओं के पुरुषार्थ की पूर्णाहुति देते हुए मोक्ष की प्राप्‍ति ये चार पुरुषार्थ प्रत्‍येक मनुष्‍य के जीवन के लिए अनिवार्य लक्ष्‍य हैं। इसके लिए मनुष्‍य जीवन को चार भागों में बांटकर आश्रम व्‍यवस्‍था की रचना हिन्‍दू धर्म में की गई है। इस जीवन दर्शन एवं विचार से ईसाई समाज में जन्‍में स्विट्जरलैंड के मार्टिन और जर्मनी की उलरिके इतने अधिक प्रभावित हुए कि वे विवाह संस्‍कार में बंधने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103282/german-bride-and-swiss-groom-tie-the-knot-in-hindu"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/d22072024-08.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल, 22 जुलाई (हि.स.)। भारतीय संस्‍कृति में ‘विवाह’ सोलह संस्‍कारों में से एक जीवन का वह महत्‍वपूर्ण संस्‍कार है, जिसके होने के बाद धर्म की पूर्ति के लिए अर्थ एवं कामनाओं के पुरुषार्थ की पूर्णाहुति देते हुए मोक्ष की प्राप्‍ति ये चार पुरुषार्थ प्रत्‍येक मनुष्‍य के जीवन के लिए अनिवार्य लक्ष्‍य हैं। इसके लिए मनुष्‍य जीवन को चार भागों में बांटकर आश्रम व्‍यवस्‍था की रचना हिन्‍दू धर्म में की गई है। इस जीवन दर्शन एवं विचार से ईसाई समाज में जन्‍में स्विट्जरलैंड के मार्टिन और जर्मनी की उलरिके इतने अधिक प्रभावित हुए कि वे विवाह संस्‍कार में बंधने के लिए अपने देशों को छोड़कर भारत आ पहुंचे, जहां गुरुपूर्ण‍िमा के शुभअवसर पर दोनों ने परिणय सूत्र में बंधते हुए अपने एक नए जीवन की शुरुआत की है।<br /><br />उल्‍लेखनीय है कि मार्टिन ज्यूरिख में रहते हैं और पेशे से लीगल ऑडिट कंपनी में अधिकारी हैं जबकि जर्मनी की म्यूनिख शहर की उलरिके एक नर्स हैं। दोनों की पहली मुलाकात एक यात्रा के दौरान स्पेन में हुई, जहां दोनों ही एक-दूसरे के विचारों से अत्‍यधिक प्रभावित हुए। यह यात्रा तो कुछ समय के बाद समाप्‍त हो गई लेकिन इसके साथ ही जीवन की एक नई यात्रा शुरू हो गई, वह यात्रा है प्रेम की यात्रा। दोनों की घण्‍टों फोन पर बातें होना शुरू हो गई थीं। किसे क्‍या अच्‍छा लगता है और क्‍या नहीं, इन सभी पहलुओं पर गहन विचार एवं चर्चा के बीच एक पक्ष जीवन को देखने का नजरिया भी था, जिसमें कि दोनों ने अपने दुनिया घूमने के दौरान भारतीय दर्शन को भी समझने की कोशिश की थी।<br /><br />दोनों को ही भारत का हिन्‍दू धर्म एवं सनातन व्‍यवस्‍था बहुत व्‍यवहारिक एवं तार्क‍िक लगी और इसके साथ ही ईसाई मत में पैदा होने के बाद भी इन दोनों ने तय किया कि अब हमें हिन्‍दू जीवन पद्धति के अनुसार साथ रहना चाहिए लेकिन विवाह हिन्‍दू रिति एवं परंपराओं के साथ कर विवाह संस्‍कार में बंधने के बाद। इस दौरान इन दोनों के जीवन में एक घटना और घट रही थी, वह थी अपने को जानने की, आगे इसी आध्‍यात्‍मिक खोज ने उन्‍हें मध्‍य प्रदेश के शिवपुरी के विश्‍व आध्यात्मिक संस्थान प्रमुख डॉ. रघुवीर सिंह गौर से ऑनलाइन मिलवा दिया। दोनों ने ही इन्‍हें अपना गुरु मान लिया, फिर वे गुरुजी के दर्शन करने भारत आने लगे। मार्टिन ने अपने गुरुजी के सानिध्य में विवाह करने की इच्‍छा जताई, जिस पर गुरु की आज्ञा मिलते ही उलरिके भी भारत आ गईं और फिर दोनों विवाह के पवित्र संस्‍कार में बंधकर दो से एक हो गए हैं ।<br /><br /><strong>इस तरह से जाना दोनों ने हिन्‍दू सनातन धर्म का महत्‍व</strong><br /><br />हिन्‍दू जीवन दर्शन, सनातन संस्‍कृति एवं ईसाईयत के बीच अपने को लेकर उलरिके कहती हैं कि मैं सोशल मीडिया के जरिए सबसे पहले हिन्दू धर्म के संपर्क में आई, भारत की ज्ञान परंपरा के बारे में जानने की जिज्ञासा समय बीतने के साथ बढ़ती ही जा रही थी, तभी मैं गुरुजी यानी कि डॉ. रघुवीर सिंह गौरजी से जुड़ी। मैंने भारत के बारे में उनके माध्‍यम से और अधिक जाना। उनके आध्यात्मिक प्रवचनों में बहुत गहराई है, वह व्‍यक्‍ति के होने के सही अर्थ बताते हैं। उनके इन प्रवचनों से भारतीय संस्कृति में रुचि दिन-प्रतिदिन बढ़ती रही । जब मार्टिन से विवाह करने का विचार आया, तो मुझे हिन्‍दू विवाह पद्धति सबसे अधिक व्‍यवहारिक एवं तर्क संगत लगी और तभी मैंने तय किया कि शादी मैं हिन्‍दू विधि से ही करूंगी। मार्ट‍िन भी इसके महत्‍व को समझ चुके थे, वे भी इस बात के लिए राजी थे कि हमारा विवाह हिन्‍दू संस्‍कार से ही होना चाहिए।<br /><br />वे कहती हैं कि जब मार्टिन से स्पेन में छुट्टियों में मुलाकात हुई थी, तब मैंने भी नहीं सोचा था कि भविष्‍य हमें यह संबंध कहां लेकर जाएगा लेकिन वह गुरुजी ही हैं, जिनकी प्रेरणा एवं आशीर्वाद से हम दोनों आज विवाह के बंधन में बंधे हैं। इस दौरान मार्टिन भी अपना अनुभव सुनाते हैं, वे बोले- उनका तीसरी बार भारत आना हुआ है। ईसाई मत में पैदा हुआ हूं, आज भी मत से तो ईसाई ही हूं किंतु विचारों में व्‍यापक विस्‍तार हुआ है, मुझे चर्च से शादी करना सही नहीं लगा, हिन्‍दू जीवन में विवाह एक संस्‍कार है, यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थ की पूर्ति के लिए जरूरी बताया गया है। हालांकि जीवन में जो ब्रह्मचर्य का संकल्‍प लेते हैं, उन्‍हें इससे मुक्‍ति दी गई है, किंतु यह सिर्फ विशेष स्‍थ‍िति में है।<br /><br /><strong>भारत है आध्‍यात्‍म का वह केंद्र, जहां आकर मिलती है परम शांति</strong><br /><br />मार्ट‍िन कहते हैं कि मेरी मुलाकात उलरिके से स्पेन में हुई थी। तब से हम दोनों के बीच बाते होने लगीं और फिर लगा कि हम दोनों को एक साथ रहना चाहिए, मैरिज कर लेनी चाहिए। उन्‍होंने बताया कि वे गुरुजी से पांच साल पहले जुड़ गए थे और उनके स्लोगन 'सेवकाई में प्रभुताई' शब्द का अर्थ ‎जाना तो पता चला कि हमने अपने जीवन के 45 साल व्‍यर्थ ही‎ गंवा दिए। इसके बाद गुरु जी के सानिध्य में अध्यात्म की दुनिया से जुड़ गए और उन्‍हीं की प्रेरणा से इससे पहले दो बार भारत आ चुके हैं, यहां आकर मुझे अत्‍यधिक मानसिक शांति मिलती है।<br /><br />उन्‍होंने कहा, अब शादी के लिए तीसरी बार भारत आया हूं। मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी इस शुभ निर्णय में गुरुजी का आशीर्वाद लेना था। उनसे मैंने अपने विवाह के बारे में जब बातचीत की तो उन्‍होंने मुझे भारतीय संस्कृति को जानने के लिए मेहर बाबा की एक पुस्‍तक पढ़ने को दी। पुस्‍तक का अध्‍ययन करते ही मेरे मन में सनातन धर्म और हिन्‍दू संस्‍कृति के बारे में जानने की अनेक जिज्ञासाएं जाग उठीं, जिनके समाधान में गुरुजी ने बड़ा कार्य किया। उन्‍होंने हिन्‍दू विवाह पद्धति‍ के बारे में बताया और मैं ऐसा करने के लिए तैयार हो गया। इसके लिए हम दोनों ही 11 जुलाई को शिवपुरी आ गए थे, यहां आने के बाद से लगातार हिन्‍दू विवाह रिति से जुड़े आयोजन चालू रहे और अंतत: अब हम दोनों पाणिग्रहण संस्कार से परिणय सूत्र में बंध गए हैं ।<br /><br /><strong>भारतीय रीति से हुए विवाह में पति-पत्नी मृत्‍यु पर्यन्‍त समर्पित रहते हैं एक-दूसरे के लिए</strong><br /><br />इनके साथ ही शक्तिपात के विशेषज्ञ गुरुजी डॉ. रघुवीर सिंह गौर का कहना है कि मार्टिन और उलरिके क्रिश्चियन हैं, लेकिन मार्टिन ने जब वसुधैव कुटुम्बकम का अर्थ जाना, तब से वह भारतीय हिन्‍दू संस्कृति के साथ स्‍वयं को एकाकार महसूस करने लगे । मार्टिन एक श्रेष्‍ठ व्‍यक्‍ति हैं, वे योग के महत्‍व को समझते हैं, उसे जीवन में धारण किए हुए हैं। संयोग से वे जब मेरे संपर्क में आए तो उन्‍हें लगा कि भारत जाकर मुलाकात करना चाहिए और वे फिर भारत आकर मुझसे मिले। लड़की भी मिलने आई। यहां जब भारतीय जीवन दृष्टि पर चिंतन एवं मंथन उनका चलता है तो वह दोनों ही सोलह संस्कार से प्रभावित हुए बिना न रह सके, इसलिए उन्‍होंने अपने लिए परिणय संस्कार का चुनाव किया, क्योंकि इसकी साक्षी अग्नि है। भारतीय रीति से शादी की जो पद्धति है, इसमें पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति मृत्‍यु पर्यन्‍त समर्पित रहते हैं।<br /><br />डॉ. गौर कहते बताते हैं कि इस बीच ये दोनों ही मुझे अपना गुरु स्‍वीकार कर चुके थे और तब यह मेरा दायित्‍व था कि मैं उनके लिए श्रेष्‍ठ मार्ग प्रशस्‍त करूं, अत: दोनों का ही वैदिक हिंदू रीति से मेरे सानिध्य में विवाह संपन्‍न हुआ है । वे बताते हैं कि कोरोना वक्‍त के पूर्व भी यहां एक विदेशी जोड़े को विवाह स्‍वरूप आशीर्वाद दिया गया था । उस वक्‍त एटलांटा के रहने वाले डेविड और मियामी के फ्लोरिडा की रहने वाली महिला ने भारतीय संस्कृति से प्रभावित होकर हिन्‍दू विवाह परंपरा के अनुसार विवाह किया था ।<br /><br />गौरतलब है कि इन दोनों का विवाह 21 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन शिवपुरी जिले में सम्‍पन्‍न हुआ है। अब नव दम्‍पति सात फेरे लेने के बाद अपने गुरु की प्रेरणा से आगामी दो हफ्ते तक भारत के आध्‍यात्‍म एवं जीवन दर्शन को अधिक नजदीक से जानने के लिए अलग-अलग जगहों पर घूमेंगे। दोनों का ही कहना है कि उन्‍हें भारत आकर बहुत अच्छा लग रहा है। यहां इस बीच मुख्य रूप से ध्यान शिविर का आयोजन किया गया । महोत्सव के तहत ही शादी का भी प्रबंध किया गया, जिसमें मुख्‍य तौर पर ढाई सौ के करीब मेहमान बुलाए गए थे, जिसमें कि 10 से अधिक विदेशी मेहमान भी इस विवाह के साक्षी बनने यहां आश्रम में पहुंचे थे ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 19:38:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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                <title>बदल गए नियम, कानून जो अब पहले से अधिक सख्त हैं</title>
                                    <description><![CDATA[न्याय केंद्रित तीनों नए आपराधिक कानून आज से हो गए लागू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102884/changed-rules-and-regulations-which-are-now-more-strict-than"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/d01072024-15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. मयंक चतुर्वेदी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल, 01 जुलाई (हि.स.)। एक जुलाई की सुबह देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में बदलाव लेकर आई है, जिसमें बच्चों और महिलाओं के जीवन में प्रत्यक्ष उजास भर देने वाले देशभर में नए कानून 01 जुलाई से लागू हो गए हैं। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के लागू होने के बाद अब उम्मीद यही की जाएगी कि प्रताड़ित को सही न्याय मिले और अपराधी को उतनी सख्त सजा मिले कि अपराध की दुनिया में ये तीनों कानून भय पैदा कर सकें।<br /><br /><strong>आईपीसी के तहत अंग्रेजों द्वारा बनाए गए औपनिवेशिक कानूनों से मिली मुक्त</strong><br /><br />देशभर में इन नए कानूनों को लेकर पिछले कई माह से तैयारी चल रही थी, इस संदर्भ में मध्य प्रदेश पुलिस भी पूरी तरह से सचेत, संवेदनशील और अपनी व्यवस्था को इन कानूनों के हिसाब से तैयार करने में जुटी थी। अब इसे लेकर राज्य कितना तैयार है, आइए जानते हैं, यहां । दरअसल, मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन तीनों कानूनों का उद्देश्य विभिन्न अपराधों और उनकी सजाओं को परिभाषित कर देश में आपराधिक न्याय प्रणाली को पूरी तरह से बदलना है। नए कानून लागू होने से भारत की न्याय प्रणाली आईपीसी के तहत अंग्रेजों द्वारा बनाए गए औपनिवेशिक कानूनों से मुक्त हो चुकी है।<br /><br />एडीजी लॉ एंड ऑर्डर जयदीप प्रसाद कहते हैं कि ये कानून दंड नहीं बल्कि न्याय केन्द्रित है। देशभर में लागू नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर मध्य प्रदेश पुलिस तैयार है। प्रदेश के सभी पुलिस थाना क्षेत्रों और जिला मुख्यालय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर नए कानूनों का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा चुका है। वे बताते हैं कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में विविध कार्यक्रमों के जरिए जन जागरण किया गया है और आगे भी किया जाएगा। आज से थाना क्षेत्र में किसी भी उपयुक्त जगह पर कार्यक्रम शुरू हो रहे हैं, जिनमें सेवानिवृत पुलिस अधिकारियों, महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को आमंत्रित किया जा रहा है।<br /><br /><strong>कानून के क्रियान्वयन के लिए तैयार हैं मप्र में 31 हजार से अधिक पुलिस विवेचक</strong><br /><br />उन्होंने बताया कि नए कानूनों के संबंध में प्रदेशभर में 60 हजार से अधिक पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया है। उन्हें बदलावों के संबंध में बताया गया है। इसके अतिरिक्त सॉफ्टवेयर में किस तरह से एंट्री की जानी है, साक्ष्य कैसे एकत्र किए जाने हैं, इन सभी बिंदुओं के बारे में भी पुलिसकर्मियों को जानकारी दी गई है। इसके साथ ही एडीजी लॉ एंड ऑर्डर जयदीप प्रसाद यह भी जोड़ते हैं कि प्रदेश पुलिस ने 31 हजार से अधिक विवेचकों को प्रशिक्षित किया है। वहीं, सीसीटीएनएस में भी नए कानूनों से संबंधित बदलाव कर लिए गए हैं। सभी जिलों में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) का संचालन करने वाले पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को भी बताया गया है कि वह दैनिक रिपोर्ट सीसीटीएनएस में किस तरह अंकित करेंगे।<br /><br /><strong>देशभर में सबसे ज्यादा घटित होते हैं बालकों एवं महिलाओं से जुड़े अपराध</strong><br /><br />इस संबंध में मप्र राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. निवेदिता शर्मा का कहना है कि ये नए कानून वास्तव में न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि अपराध और अपराधी से जुड़ें आंकड़े देखें तो न सिर्फ मप्र में बल्कि देश के प्रत्येक राज्य में सबसे अधिक बच्चों एवं महिलाओं से जुड़े मामले घटित होते हैं । वर्षों बरस विवेचना में समय जाता है। ऐसे कई बार जिसे न्याय मिलना चाहिए वह भी टूट जाता है या पलायन कर जाता है। इन स्थितियों में कहीं न कहीं जिसे न्याय चाहिए, उसे वह मिलता नहीं और कानून कमजोर होता है, ऐसे में स्वभाविक तौर पर भारतीय संविधानिक कानून व्यवस्था पर भी आए दिन प्रश्न खड़े होते रहते थे।<br /><br />डॉ. निवेदिता कहती हैं कि अब उम्मीद की जाएगी कि समय सीमा में न्याय मिले, इसके लिए किए गए इस विशेष प्रयास से और कठोरतम दंड विधान से कानून का भय अपराधियों में व्यापेगा और वे कई बार अपराध करने से पूर्व जरूर सोचेंगे कि बाद में पकड़े जाने पर पुलिस उनका इन कानूनों के तहत क्या हश्र करेगी। उन्होंने कहा कि निश्चित ही इन नए कानूनों को अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से लाने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एवं प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद है कि उन्होंने बच्चों एवं महिलाओं के हक में इतनी गहराई और गंभीरता से विचार किया है। अब आशा यही है कि देश की ये दोनों 70 प्रतिशत जनसंख्या (बाल एवं महिला) के साथ वास्तविक न्याय, कागजों तक सीमित नहीं धरातल पर पूरी तरह से साकार हो सकेगा।<br /><br /><strong>इसलिए खास हैं ये कानून महिलाओं और बच्चों के लिए</strong><br /><br />नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के लिए सख्त सजा के प्रावधान किए गए हैं। प्रस्तावित भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 में पहला अध्याय अब महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध से संबंधित सजा के प्रावधानों से संबंधित है। इन प्रावधानों के अनुसार जहां बच्चों से अपराध करवाना व उन्हें आपराधिक कृत्य में शामिल करना दंडनीय अपराध होगा, वहीं नाबालिग बच्चों की खरीद-फरोख्त जघन्य अपराधों में शामिल की जाएगी। नाबालिग से गैंगरेप किए जाने पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान है।<br /><br />नए कानूनों के अनुसार पीड़ित का अभिभावक की उपस्थिति में ही बयान दर्ज किया जा सकेगा। इसी प्रकार नए कानूनों में महिला अपराधों के संबंध में अत्यंत सख्ती बरती गई है। इसके तहत महिला से गैंगरेप में 20 साल की सजा और आजीवन कारावास, यौन संबंध के लिए झूठे वादे करना या पहचान छिपाना भी अब अपराध होगा। साथ ही पीड़िता के घर पर महिला अधिकारी की मौजूदगी में ही बयान दर्ज करने का भी प्रावधान है। इस प्रकार नए कानून में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध घटित करने वालों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में कड़ी सजा के प्रावधान हैं।<br /><br /><strong>ई-साक्ष्यों को अब नकारा नहीं जा सकेगा</strong><br /><br />अदालतों में पेश और स्वीकार्य साक्ष्य में इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड, ईमेल, सर्वर लॉग, कंप्यूटर, स्मार्टफोन, लैपटॉप, एसएमएस, वेबसाइट, स्थानीय साक्ष्य, मेल, उपकरणों के मैजेस को शामिल किया गया है। केस डायरी, एफआईआर, आरोप पत्र और फैसले सहित सभी रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड का कानूनी प्रभाव, वैधता और प्रवर्तनीयता कागजी रिकॉर्ड के समान ही होगी। अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भी न्यायालयों में पेशी हो सकेगी।<br /><br /><strong>हो गया किसी भी शिकायतकर्ता को 90 दिन में जांच रिपोर्ट देना अनिवार्य</strong><br /><br />इसके साथ ही 60 दिन के भीतर आरोप तय होंगे और मुकदमा समाप्त होने के 45 दिन में निर्णय देना होगा। वहीं सिविल सेवकों के खिलाफ मामलों में 120 दिन में निर्णय अनिवार्य होगा। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अंतर्गत मामलों की तय समय में जांच, सुनवाई और बहस पूरी होने के 30 दिन के भीतर फैसला देने का प्रावधान है। इसी प्रकार छोटे और कम गंभीर मामलों के लिए समरी ट्रायल अनिवार्य होगा। नए कानूनों में पहली बार अपराध पर हिरासत अवधि कम रखी जाने व एक तिहाई सजा पूरी करने पर जमानत का प्रावधान है। साथ ही किसी भी शिकायतकर्ता को 90 दिन में जांच रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा और गिरफ्तार व्यक्ति की जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी।<br /><br /><strong>फरियादी अब ले सकेगा पुलिस द्वारा आरोपित से हुई पूछताछ के बिंदु</strong><br /><br />ई-एफआईआर के मामले में फरियादी को तीन दिन के भीतर थाने पहुंचकर एफआईआर की कॉपी पर साइन करने होंगे। नए बदलावों के तहत जीरो एफआईआर को कानूनी तौर पर अनिवार्य कर दिया है। फरियादी को एफआईआर, बयान से जुड़े दस्तावेज भी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। फरियादी चाहे तो पुलिस द्वारा आरोपी से हुई पूछताछ के बिंदु भी ले सकता है। यानी वे पेनड्राइव में अपने बयान की कॉपी ले सकेंगे। इस प्रकार नए कानूनों में आमजन को बहुत सारे लाभ प्रदान किए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
         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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 20:45:06 +0530</pubDate>
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                <title>बुंदेलखंड की जमी पर कमलम की खेती से अब किसानों की चमकेगी तकदीर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 29 जून (हि.स.)। हमीरपुर समेत बुंदेलखंड की जमी पर कमलम की खेती से किसानों ने अपनी तकदीर बदलने की तैयारी की है। इसके लिए अबकी बार किसानों ने इसकी खेती का दायरा भी बढ़ाने का मन बनाया है। कमलम की खेती में कम लागत आती है,लेकिन कमाई मोटी होती है।<br /><br />बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले के कई गांवों में किसानों ने कमलम की खेती शुरू की है। मौदहा क्षेत्र के पाटनपुर गांव में ऋषि शुक्ला ने पहले एक एकड़ में कमलम के पौधे लगाए थे, लेकिन इस बार डेढ़ बीघे में इसकी खेती करने की तैयारी की है। जिले के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102837/now-the-fortunes-of-farmers-will-shine-with-the-cultivation"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d29062024-12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 29 जून (हि.स.)। हमीरपुर समेत बुंदेलखंड की जमी पर कमलम की खेती से किसानों ने अपनी तकदीर बदलने की तैयारी की है। इसके लिए अबकी बार किसानों ने इसकी खेती का दायरा भी बढ़ाने का मन बनाया है। कमलम की खेती में कम लागत आती है,लेकिन कमाई मोटी होती है।<br /><br />बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले के कई गांवों में किसानों ने कमलम की खेती शुरू की है। मौदहा क्षेत्र के पाटनपुर गांव में ऋषि शुक्ला ने पहले एक एकड़ में कमलम के पौधे लगाए थे, लेकिन इस बार डेढ़ बीघे में इसकी खेती करने की तैयारी की है। जिले के राठ क्षेत्र के गोहानी गांव में राजेन्द्र सिंह ने भी कमलम की खेती की तरफ कदम बढ़ाए है।<br /><br />किसान ऋषि शुक्ला ने बताया कि कमलम का फल बहुत महंगा बिकता है। इसकी डिमांड भी बाजार में लगातार बढ़ी है। तीन गुना तक मुनाफा मिलने से यहां अब कई किसानों ने कमलम की खेती करने की तैयारी इस साल की है। हमीरपुर में काफी समय तक तैनात रहे जिला उद्यान अधिकारी रमेश पाठक ने बताया कि कमलम फल ज्यादातर विदेशों में होता है। जो खाने में तरबूज की तरह मीठा होता है। फल में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। इसकी खेती महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ में पिछले कई सालों से किसान कर रहे है। इसकी खेती में बड़ा मुनाफा होता है।<br /><br />उन्होंने बताया कि हमीरपुर समेत बुंदेलखंड की जमी पर किसानों ने कमलम की खेती की तरफ कदम बढ़ाए है। एक एकड़ में करीब तीन सौ पौधे कमलम के लगाने पर छह लाख रुपये तक का मुनाफा किसानों को मिलता है जबकि लागत दो लाख रुपये के करीब आती है। इसका फल पोषक तत्वों का खजाना है जिसकी बाजार में डिमांड लगातार बढ़ी है।<br /><br />हमीरपुर के तत्कालीन जिला उद्यान निरीक्षक जीएस सोनकर का कहना है कि एक हेक्टेयर में कमलम की खेती पर किसान को डिपार्टमेंट से तीस हजार रुपये मिलता रहा है। दो साल पहले अनुदान पर कमलम के पौधे किसानों ने लगाए थे। बताया कि मई और जून में कमलम के पौधे में फूल खिलने लगते है। इसके बाद जुलाई से दिसम्बर तक इसमें फल आते है।<br /><br /><strong>कमलम की खेती करने से किसानों में आएगी खुशहाली</strong><br /><br />कमलम की खेती का इस बार डेढ़ बीघे में करने वाले ऋषि शुक्ला ने बताया कि पिछले बार इसकी खेती करने पर बड़ा फायदा मिला था। इसीलिए इस बार इसकी खेती का रकबा बढ़ाया गया है। बताया कि इस बार डेढ़ एकड़ में कमलम के पौधे लगाए जा रहे है। पाटनपुर गांव में एकरिटायर्ड बैंक अफसर ने भी कमलम की खेती पहली बार शुरू की है। इन्होंने दो एकड़ में कमलम के पौधे लगाए है। किसानों ने बताया कि पिछले बार कमलम के पौधे लगाने में उद्यान विभाग से अनुदान मिला था। किसानों ने कहा कि इसकी खेती करने से आने वाले समय में किसानों की किस्मत चमकेगी।<br /><br /><strong>अस्थमा और शुगर के लिए रामबाण है कमलम के फल</strong><br /><br />उद्यान विभाग के अधिकारी रमेश पाठक का कहना है कि कमलम एक औषधि वाला फल है जो बुंदेलखंड की जलवायु के लिए उपयुक्त है। इसमें विटामिन्स,आयरन,कैल्शियम,पोटैशियम, सोडियम व जिंक समेत तमाम अन्य पोषक तत्व होते हैं। कमलम के फल खाने से सेहत दुरुस्त रहती है।<br /><br />आयुर्वेदिक डॉक्टर दिलीप त्रिपाठी व फिजीशियन डॉ.वीके श्रीवास्तव ने बताया कि इस फल को खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसमें विटामिन सी फाइबर व फाइबर होने से जख्म जल्दी भरते हैं। पेट सम्बन्धी बीमारी के साथ ही अस्थमा और शुगर बीमारी के लिए कमलम फल रामबाण है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jun 2024 17:20:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खरीफ की फसलों की बोआई करने की तैयारी में जुटे किसानों को लगा बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 28 जून (हि.स.)। जिले में मानसून की प्री बारिश होने के बाद खरीफ की बोआई की तैयारियों को बड़ा झटका लग रहा है। क्योंकि किसानों को सरकारी बीज भंडार से बीज नहीं मिल रहा है। हजारों किसान बीज भंडार के चक्कर लगा रहे है। इस बार खरीफ की फसलों में मोटा अनाज के भी बीज सरकारी बीज भंडारों से गायब है। डिपार्टमेंट भी टेंशन में है।<br /><br />हमीरपुर समेत बुंदेलखंड क्षेत्र में मानसून की पहली झमाझम बारिश हो चुकी है। ऐसे में किसानों ने खरीफ की फसलों की बोआई कराने की तैयारी पूरी कर ली है। झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102812/farmers-preparing-to-sow-kharif-crops-got-a-big-shock"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d28062024-10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 28 जून (हि.स.)। जिले में मानसून की प्री बारिश होने के बाद खरीफ की बोआई की तैयारियों को बड़ा झटका लग रहा है। क्योंकि किसानों को सरकारी बीज भंडार से बीज नहीं मिल रहा है। हजारों किसान बीज भंडार के चक्कर लगा रहे है। इस बार खरीफ की फसलों में मोटा अनाज के भी बीज सरकारी बीज भंडारों से गायब है। डिपार्टमेंट भी टेंशन में है।<br /><br />हमीरपुर समेत बुंदेलखंड क्षेत्र में मानसून की पहली झमाझम बारिश हो चुकी है। ऐसे में किसानों ने खरीफ की फसलों की बोआई कराने की तैयारी पूरी कर ली है। झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा और चित्रकूट के अलावा जालौन व हमीरपुर में कई बार अच्छी बारिश हुई है। बुंदेलखंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान खरीफ में ज्वार, बाजरा, धान और अरहर की फसलों की बोआई करता है। यह क्षेत्र अरहर और ज्वार के लिए हब माना जाता है। इस साल दलहनी में मूंग, तिल, उड़द और मूंगफली की फसलों की बोआई का रकबा बढ़ाने की तैयारी भी किसानों ने की है। शासन ने भी सवा लाख से अधिक हेक्टेयर में खरीफ की बोआई कराने का लक्ष्य डिपार्टमेंट को दिया है। जो पिछले साल की तुलना में चार हजार से अधिक हेक्टेयर है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपनिदेशक कृषि हरीशंकर भार्गव के मुताबिक अबकी बार 136070 हेक्टेयर में फसलों की बोआई होनी है। जिसमें बीस हजार नौ सौ बाइस हेक्टेयर में उड़द, तीन हजार सात पन्द्रह हेक्टेयर में मूंग, बीस हजार एक सौ पैंसठ हेक्टेयर में अरहर की बोआई होगी। इसके अलावा आठ सौ अड़सठ हेक्टेयर में मूंगफली व सात हेक्टेयर में सोयाबीन की बोआई कराई जाएगी। बताया कि मोटा अनाज में ग्यारह हजार पांच सौ तैंतालीस हेक्टेयर में ज्वार, चौरानवे हेक्टेयर में बाजरा और पांच हेक्टेयर में मक्का की बोआाई कराने की लक्ष्य है। इसके अलावा मोटा अनाज में तीन सौ इक्कीस हेक्टेयर में श्री अन्न मिलेट्स की फसलों की बोआई होगी।<br /><br /><strong>सरकारी बीज भंडार में ही ज्वार, बाजरा, तिल, अरहर व उड़द के बीज के पड़े लाले</strong><br /><br />सरकारी बीज भंडार में खरीफ की फसलों की बोआई के लिए बीज के लाले पड़े है। अमोल सिंह, रामसागर, रणविजय सिंह, जयकरन सिंह, यशवंत सिंह समेत तमाम किसानों ने बताया कि सुमेरपुर क्षेत्र के राजकीय बीज भंडार में ज्वार, तिल, मूंगफली के बीज नहीं है। पिछले कई दिनों से किसान बीज के लिए भटक रहे है। किसानों का कहना है कि फसलों की बोआई 15 जुलाई से पहले बोनी चाहिए तभी किसानों को इससे लाभ मिलेगा लेकिन किसानों को बीज ही नहीं मिल रहे है।<br /><br /><strong>सावा, कोदो, काकुन, रागी, मक्का के अलावा मूंगफली के भी बीज भंडार से हैं गायब</strong><br /><br />राजकीय बीज भंडार में इस बार मोटा अनाज के बीज भी नदारत है। किसानों ने बताया कि सोयाबीन, मूंगफली, ढेंचा, हरा उड़द, तिल, अरहर, सनई के अलावा सांवा, रागी, मक्का, कोदो, काकुन के भी बीज राजकीय बीज भंडार से गायब हैं।<br /><br />बीज भंडार प्रभारी विक्रम सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में काला उड़द, मूंग धान का पंत चौबीस बीज उलपब्ध है। यह सभी बीज पचास फीसदी अनुदान में किसानों को मिलेगा। अन्य फसलों के बीजों की डिमांड शासन को भेजी जा चुकी है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jun 2024 18:56:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आईआईटी ने बनाई डाई युक्त जल को साफ करने की नई तकनीक</title>
                                    <description><![CDATA[ पर्यावरण प्रदूषण को रोकने और स्थायी जल का पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इस अपशिष्ट जल का प्रभावी उपचार महत्वपूर्ण है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102727/iit-creates-new-technology-to-clean-dye-containing-water"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d25062024-10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जोधपुर, 25 जून (हि.स.)। आईआईटी जोधपुर ने कपड़ा रंगाई उद्योग से निकलने वाले दूषित व अपशिष्ट (डाई युक्त) जल को साफ करने की नई तकनीक विकसित की है, इससे अब पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा। यह नई विधि 222 नैनोमीटर वाले पर्यावरण अनुकूल पराबैंगनी (यूवी) प्रकाश का विकास करके बनाई गई है, जो 254 नैनोमीटर पर पारंपरिक पारा-आधारित पराबैंगनी प्रकाश की तुलना में महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है।<br /><br />दरअसल कपड़ा रंगाई और विनिर्माण उद्योग द्वारा बड़ी मात्रा में अपशिष्ट जल नदी-नालों में छोड़ जा रहा है जिसमें एज़ो डाई जैसे लगातार दूषित पदार्थ होते हैं। उन्हें पारंपरिक तरीकों का उपयोग करके निकालना चुनौतीपूर्ण होता है। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने और स्थायी जल का पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इस अपशिष्ट जल का प्रभावी उपचार महत्वपूर्ण है। आईआईअी जोधपुर के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर रामप्रकाश के नेतृत्व में पीएचडी शोधार्थी किरण अहलावत और रामावतार जांगड़ा ने मिलकर 222 नैनोमीटर क्रिप्टोन क्लोराइड एक्साइमर पराबैंगनी प्रकाश स्रोत का विकास करके एक नया तरीका विकसित किया है। इस विधि से रिएक्टिव ब्लैक 5 जैसी डाईज को तोडऩे में उल्लेखनीय प्रभावशीलता दिखाई है। इनके द्वारा हाल ही में नेचर: साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन में टाइटेनियम डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन पेरोक्साइड का उपयोग करके प्रत्यक्ष फोटोलिसिस और एक उन्नत ऑक्सीकरण प्रक्रिया पता लगाया है। पारंपरिक अल्ट्रावॉयलेट-सी आधारित विधियों की तुलना में उनके डिज़ाइन किए गए एक्साइमर-222 प्रकाश और हाइड्रोजन पेरोक्साइड के साथ बनाये गए उन्नत ऑक्सीकरण प्रक्रिया के साथ आरबीजेड की गिरावट दर लगभग 27 गुना ज्यादा पाई गई। आईआईटी जोधपुर की टीम इस प्रक्रिया को अनुकूलित करने और वास्तविक दुनिया की औद्योगिक परिस्थितियों में इसके अनुप्रयोग का पता लगाने के लिए और अधिक शोध करने की योजना बना रही है। इसके अतिरिक्त, उनका लक्ष्य अन्य पर्यावरणीय सफाई कार्यों और टिकाऊ कृषि प्रथाओं के लिए अनुकूल पराबैंगनी (यूवी) प्रकाश के उपयोग की जांच करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 21:43:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी स्कूलों की छात्राओं को अब जूडो-कराटे सिखाने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 24 जून (हि.स.)। जिले में अब सरकारी स्कूलों की छात्राओं को जूडो कराटे सिखाने की तैयारी बेसिक शिक्षा विभाग ने की है। छह हजार बेटियों को आत्मरक्षा करने के लिए जूडो कराटे की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए डिपार्टमेंट ने सवा सौ अनुदेशकों की तैनाती करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लगातार लड़कियों पर हो रही उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर सरकार तमाम योजनाएं चला रही है। नारी शक्ति अभियान चलाकर पुलिस युवतियों को जागरूक भी कर रही है फिर भी युवतियों के अगवा करने के मामले कम नहीं हो रहे हैं। शासन ने स्कूल कालेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को खुद की रक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102694/preparation-to-teach-judo-karate-to-girl-students-of-government-schools"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d24062024-19.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 24 जून (हि.स.)। जिले में अब सरकारी स्कूलों की छात्राओं को जूडो कराटे सिखाने की तैयारी बेसिक शिक्षा विभाग ने की है। छह हजार बेटियों को आत्मरक्षा करने के लिए जूडो कराटे की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए डिपार्टमेंट ने सवा सौ अनुदेशकों की तैनाती करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लगातार लड़कियों पर हो रही उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर सरकार तमाम योजनाएं चला रही है। नारी शक्ति अभियान चलाकर पुलिस युवतियों को जागरूक भी कर रही है फिर भी युवतियों के अगवा करने के मामले कम नहीं हो रहे हैं। शासन ने स्कूल कालेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को खुद की रक्षा करने के लिए रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। जिसमें बेटियों को जूडो कराटे सिखाकर उन्हें खुद की रक्षा के लिए तैयार किया जाएगा।<br /><br />पहले दौर में हमीरपुर जिले के तीन सौ उनतीस विद्यालयों की सूची फाइनल की गई हैं। इन स्कूलों में चौबीस शिक्षण दिवसों तक नियमित रूप से रोजाना एक घंटे की ट्रेनिंग छात्राओं को दी जाएगी। स्पोर्ट्स टीचरों को विद्यालय भी आवंटित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जुलाई से दिसम्बर के बीच छात्राओं को जूडो कराटे की ट्रेनिगं देने की तैयारी भी डिपार्टमेंट ने की है। जूडो कराटे का प्रशिक्षण देने वाले अनुदेशकों को ढाई हजार रुपये मानदेय के तौर पर दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।<br /><br /><strong>आत्मरक्षा के तरीके सीखने को छात्राओं ने किया आवेदन</strong><br /><br />हमीरपुर जिले में उनहत्तर स्कूलों में पढ़ने वाली दो हजार आठ सौ दो छात्राओं ने जूडो कराटे सीखने के लिए आनलाइन आवेदन किए हैं जबकि अस्सी स्कूलों की तीन हजार दो सौ छात्राओं ने आफ लाइन आवेदन किया हैं। इसके अलावा सात कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अध्यनरत छह सौ पचास छात्राओं को व्यायाम टीचर आत्मरक्षा के लिए जूडो कराटे की ट्रेनिंग देंगे। पीटीआई स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा के अनुदेशक, व्यायाम टीचर के अलावा केजीबीबी के स्पोर्ट्स टीचर भी प्रतिदिन छात्राओं को खुद की रक्षा के लिए प्रशिक्षण देंगे।<br /><br /><strong>सवा सौ अनुदेशक छात्राओं को जूडो कराटे की देंगे ट्रेनिंग</strong><br /><br />बीएसए आलोक सिंह के मुताबिक जिले में चयनित स्कूलों के छह हजार छात्राओं ने जूडो कराटे सीखने के लिए आवेदन किए थे जिन्हें आत्मरक्षा करने के लिए ट्रेनिगं दी जाएगी। इसके लिए सवा सौ अनुदेशकों की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि चौबीस दिन की ट्रेनिंग देने के एवज में प्रशिक्षकों को ढाई हजार रुपये मानदेय के तौर पर दिया जाएगा। इसकी भुगतान विद्यालय स्तर से किया जाएगा। बताया कि शासन से आए कार्यक्रम की जानकारी चयनित स्कूलों के टीचरों को दे दी गई है। एक जुलाई से छात्राओं को जूडो और कराटे की ट्रेनिंग दी जाएगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jun 2024 20:10:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डॉक्टर बनने का सपना टूटने पर छोड़ा घर, बन गए संत</title>
                                    <description><![CDATA[बैराग लेने के बाद अपनी लाखों रुपये की चल, अचल सम्पत्ति छोड़ी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102615/after-losing-his-dream-of-becoming-a-doctor-he-left"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d21062024-16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर, 21 जून (हि.स.)। बुंदेलखंड की जमी से एक शख्स की बड़े संत बनने की कहानी बड़े ही हैरान करने वाली है। डॉक्टर बनने के लिए बीएससी में दाखिला लिया, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें एग्जाम देने पर रोक लगाई तो छात्र जीवन में ही उन्होंने बैरागी जीवन जीने का ऐसा फैसला लिया कि आज उनके सत्संग सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोगों का तांता लगता है। बीच में पढ़ाई छूटने के बाद घर छोड़ा और कड़ी साधना करने के लिए जंगल निकल गए। अब ये दंडी स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती महाराज के नाम से पहचाने जाते हैं।<br /><br />दंडी स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती के पिता फतेहपुर जिले के रहने वाले थे। इनका जन्म हमीरपुर जिले के इंगोहटा गांव में हुआ था। बचपन गांव में खेलकूद में बिताया। मौदहा के नेशनल इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की फिर ये बीएससी की पढ़ाई करने के लिए उन्नाव चले गए। किराए के मकान में रहकर इन्होंने बीएससी की पढ़ाई की। लेकिन फाइनल एग्जाम ये नहीं दे पाए। क्योंकि कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें एग्जाम देने से रोक दिया था। बस यहीं से इन्होंने घर छोड़ने का फैसला किया। बैराग जीवन जीने के लिए राजस्थान के मंदसौर चल गए, जहां जंगल में कड़ी साधना की।<br /><br />कई सालों तक कुटिया बनाकर ये नदी किनारे साधना करते रहे। ये नदी का पानी ही पीकर काम चलाते थे। दंडी स्वामी ने बताया कि इनकी जन्मकुंडली ऐसे महा विद्धान ने बनाई थी, जिसमें लिखी गई सारी बातें सच निकली है। पढ़ने लिखने का बड़ा शौक होने के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना फिलहाल साकार नहीं हो पाया, लेकिन आज जिस रास्ते पर जीवन का सफर जारी है उसमें श्रीनारायण की बड़ी कृपा है।<br /><br />दंडी स्वामी महाराज कन्नौज राजस्थान समेत तमाम स्थानों पर महायज्ञ और रामकथा कह चुके हैं। अब हमीरपुर शहर के ऐतिहासिक पातालेश्वर मंदिर में ये श्री शक्ति शिवात्मक महायज्ञ और रामकथा का आयोजन कराने की तैयारी कर रहे हैं। नौ दिवसीय महायज्ञ और रामकथा का आयोजन 24 जून से प्रारम्भ होगा।<br /><br /><strong>बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर खुद करते थे बीएससी की पढ़ाई</strong></p>
<p style="text-align:justify;">दंडी स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि उनकी पढ़ाई लिखाई में माता पिता से कोई सहयोग नहीं मिला। यहां तक गुरुओं से भी कोई सहयोग नहीं मिला। जन्मकुंडली में भी ये लिखा था कि इसके जीवन में माता—पिता और गुरु का सहयोग नहीं मिलेगा। पढ़ाई भी बीच में अधूरी रह जाएगी। बताया कि बीएससी की पढ़ाई के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया गया। अभावग्रस्त जीवन में भी सारे सपने दिल में रह गए। इसीलिए गृहस्थ जीवन छोड़ बैराग लेना पड़ा।<br /><br /><strong>28 साल की उम्र में ही कठिन साधना कर बन गए थे संत</strong><br /><br />दंडी स्वामी 28 साल की उम्र में संत बन गए थे। उन्होंने बताया कि पढ़ने लिखने की उम्र में जंगलों में साधना की फिर रोटीराम बाबा के सानिध्य में आकर उन्हें गुरु बनाया। बताया कि उत्तर भारत के संत रोटीराम बाबा की हत्या होने से उन्हें बहुत दु:ख हुआ। बताया कि दंडी स्वामी बनने के बाद पिछले कई दशकों से यज्ञ और रामकथा कर एक स्वस्थ समाज बनाने का प्रयास जारी है। कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन से लोगों में धर्म के प्रति आस्था भी बढ़ रही है।<br /><br /><strong>बैराग लेने के बाद छोड़ी लाखों रुपये की अचल सम्पत्ति</strong><br /><br />दंडी स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती महाराज के शिष्यों ने बताया कि स्वामी जी ब्रह्मचारी है। जिन्होंने अपनी लाखों रुपये की चल और अचल सम्पत्ति भी छोड़ दी। अब इनकी सम्पत्ति पर परिवार के लोग ही राज करते हैं। बताया कि इनके पिता छत्तीसगढ़ में एक अधिकारी के पद पर तैनात थे। स्वामी जी इकलौते पुत्र थे जो विज्ञान वर्ग के छात्र थे। बीएससी की पढ़ाई छूटने के बाद ये समाजसेवा के लिए संत बन गए। इन्हें किसी ने जहर भी दिया था, लेकिन इनका कुछ नहीं बिगड़ा।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Jun 2024 20:26:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बुंदेलखंड की जमी पर कोदो की फसल से किसानों की बदलेगी तकदीर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर 18 जून (हि.स.)। बुंदेलखंड की जमी पर इस बार किसानों ने अपनी तकदीर बदलने के लिए कोदों की खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी की है। कम लागत में मोटा मुनाफा देने वाली कोदो की फसल से आने वाले समय में किसानों की आमदनी भी दोगुनी होगी। कोदो डायबिटीज और असाध्य बीमारी के लिए बड़ी ही मुफीद है।<br /><br />बुन्देलखंड के हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, जालौन, ललितपुर और झांसी समेत पड़ोसी एमपी के तमाम इलाकों में किसी जमाने में किसान कोदो की फसल बड़े स्तर पर करते थे। लेकिन उपज का सही मूल्य न मिलने के कारण परम्परागत खेती में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102541/the-fate-of-farmers-will-change-due-to-the-crop"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d18062024-15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर 18 जून (हि.स.)। बुंदेलखंड की जमी पर इस बार किसानों ने अपनी तकदीर बदलने के लिए कोदों की खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी की है। कम लागत में मोटा मुनाफा देने वाली कोदो की फसल से आने वाले समय में किसानों की आमदनी भी दोगुनी होगी। कोदो डायबिटीज और असाध्य बीमारी के लिए बड़ी ही मुफीद है।<br /><br />बुन्देलखंड के हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, जालौन, ललितपुर और झांसी समेत पड़ोसी एमपी के तमाम इलाकों में किसी जमाने में किसान कोदो की फसल बड़े स्तर पर करते थे। लेकिन उपज का सही मूल्य न मिलने के कारण परम्परागत खेती में दलहन, तिलहन और धान की खेती की तरफ किसानों को कदम बढ़ाने पड़े थे।<br /><br />किसान रघुवीर सिंह बताते हैं कि पिछले तीन दशक पहले कोदो और काकुन की फसलें किसान बड़े क्षेत्रफल में करते थे, लेकिन नई प्रजाति के बीज बाजार में आने के कारण किसान अन्य फसलों की खेती करने लगे हैं। किसानों ने बताया कि पिछले कुछ सालों से परम्परागत खेती में भी किसानों को कोई खास फायदा नहीं मिला है, इसीलिए अब बुन्देलखंड में किसान औषधीय खेती की तरफ रुख किया है। खासकर कोदों की फसल का रकबा भी बढ़ाए जाने की तैयारी गांव के लोग कर रहे हैं।<br /><br />हमीरपुर के उपनिदेशक कृषि हरिशंकर भार्गव ने बताया कि कोदो की खेती से किसान अपनी आमदनी तीन से चार गुनी कर सकते हैं क्योंकि इस फसल की उपज के लिए बहुत ही कम खर्च आता है। बताया कि जिले में राठ और गोहांड के गांवों में किसान इसकी खेती शुरू की है। बताते हैं कि इस समय बाजार में दस से चौदह हजार रुपये क्विंटल कोदो के भाव है।<br /><br /><strong>गांवों में इस बार कोदो की फसल के लिए रकबा बढ़ाने की तैयारी</strong><br /><br />हमीरपुर जिले के गोहांड और राठ क्षेत्र में किसानों ने इस बार कम क्षेत्रफल में कोदो की फसलें की है। गोहांड के चिल्ली गांव निवासी रघुुवीर सिंह ने बताया कि छह बीघा खेत में कोदों की फसलें की है। कई किसानों ने भी इसकी खेती की है जिससे लागत से कई गुना फायदा किसानों को मिल रहा है। बताया कि मानसून की पहली बारिश के बाद जुलाई तक कोदो की बुआई कराई जाती है फिर चार महीने के अंदर यह फसल तैयार हो जाती है। बताया कि कोदो की फसल तैयार होने के बाद इसके बीज गोहानी, मुस्करा, वहर, इकटौर, गिरवर सहित अन्य गांवों के बीस किसानों को उपलब्ध कराकर अबकी बार कोदो की फसल का रकबा बढ़ाया जाएगा। किसानों में भी इसकी खेती की तरफ दिलचस्पी बढ़ी है।<br /><br /><strong>कोदो की फसल से बुंदेलखंड के किसानों को होगा मोटा मुनाफा</strong><br /><br />कोदो की खेती करने वाले रघुवीर, राजेन्द्र समेत अन्य किसानों ने बताया कि एक बीघा भूमि पर चार से पांच क्विंटल कोदो का उत्पादन आसानी से हो जाता है। गांव स्तर पर भले ही बीस से तीस रुपये किलो कोदो मिलता हो लेकिन शहरों में इसकी डिमांड ज्यादा बढ़ने के कारण इस समय पांच से छह हजार रुपये क्विंटल कोदो बिक रहा है।<br /><br />प्रगतिशील किसान रघुवीर सिंह ने बताया कि एक बीघा खेत में कोदो की फसल का उत्पादन करने में सात हजार रुपये के करीब खर्च आता है। और तीन महीने बाद चार से पांच क्विंटल कोदो की उपज आसानी से हो जाती है। स्थानीय स्तर पर पचास से अस्सी रुपये किलो में कोदो बिकता है लेकिन शहरों में इसे बेचने पर कई गुना फायदा मिलता है।<br /><br /><strong>कोदो से डायबिटीज और अन्य असाध्य बीमारी भी होगी छूमंतर</strong><br /><br />आयुर्वेद चिकित्सा में एक्सपर्ट डा. आत्म प्रकाश ने बताया कि कोदो में प्रोटीन, कार्बाेहाईड्रेड, आयरन, कैल्शियम, फाइबर व फास्फोरस प्रचुर मात्रा में होता है जिससे डायबिटीज कन्ट्रोल रहती है। जाने माने वैद्य लखन प्रजापति व डा.दिलीप त्रिपाठी ने बताया कि लीवर, आमदोष व बात रोग में कोदो रामबाण है। हड्डियों में बुखार बस जाने पर कोदो का सेवन लगातार करने से रोगी ठीक हो जाता है। बताया कि लिकोरिया व पित्त सम्बन्धी बीमारी में कोदो फायदेमंद है। आयुर्वेद चिकित्सक डा. दिलीप त्रिपाठी, डा.अवधेश मिश्रा ने बताया कि कोदो खाने से डायबिटीज रोगी कुछ ही दिनों में पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jun 2024 21:13:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोलर संचालित चाक ने बदल दी सेमरटोली के नथन महतो के परिवार की जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">खूंटी, 16 जून (हि.स.)। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर सुंदारी पंचायत के सेमरटोली गांव के नथन कुम्हार(महतो) के परिवार की जिंदगी सोलर संचालित चाक ने बदल दी। सेमरटोली गांव में कुम्हार समुदाय के लगभग 60 परिवार रहते हैं और लगभग सभी की माली हालत एक समान है।<br /><br />कुम्हार समुदाय के लोग मुख्य रूप से मिट्टी के वर्तन बनाकर अपना जीवन यापन करते हैं। साथ ही कुछ खेतीबारी भी कर लेते हैं। इन्हीं में से एक है नथन कुम्हार, जो अपनी पत्नी और चार चार बच्चों और वृद्ध मां के साथ रहते हैं। नथन अपने खनदानी पेशा मिट्टी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102495/solar-powered-chalk-changed-the-life-of-semartolis-nathan-mahatos"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d16062024-10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">खूंटी, 16 जून (हि.स.)। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर सुंदारी पंचायत के सेमरटोली गांव के नथन कुम्हार(महतो) के परिवार की जिंदगी सोलर संचालित चाक ने बदल दी। सेमरटोली गांव में कुम्हार समुदाय के लगभग 60 परिवार रहते हैं और लगभग सभी की माली हालत एक समान है।<br /><br />कुम्हार समुदाय के लोग मुख्य रूप से मिट्टी के वर्तन बनाकर अपना जीवन यापन करते हैं। साथ ही कुछ खेतीबारी भी कर लेते हैं। इन्हीं में से एक है नथन कुम्हार, जो अपनी पत्नी और चार चार बच्चों और वृद्ध मां के साथ रहते हैं। नथन अपने खनदानी पेशा मिट्टी के वर्तन, दीयो खिलौने आदि बनाकर बाजार मे बिक्री कर परिवार की गाड़ी खींच रह हैं। उनके पास अधिक खेत भी नहीं है। उनके पास जितनी जमीन है, उसे भूमिहीन कहना ही उचित है। कुम्हार नथन महतो बताते हैं कि वे मिट्टी के बर्तन, दीये आदि बनाने का काम 2001 से कर रहे हैं। वैसे मिट्टी के बर्तन बनाना उनका पुश्तैनी धंधा है।<br /><br />नथन महतो ने बताया कि मिट्टी के सामान बनाने के लिए पहले वे हाथ के चाक का उपयोग करते थे। इसके कारण अधिक सामान बनाना और फिर उन्हें बाजार में बचना कठिन होता था। हाथ से संचालित चाक में काम करने में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कम सामान बनाने से उन्हें लाभ भी कम होता था। बाद में उन्होंने बिजली के चाक का उपयोग करना शुरू किया,लेकिन इससे भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, क्योंकि ग्रामीण इलाके में बिजली की समस्या हमेशा बनी रहती है और बिजली बिल भी अधिक लगने लगा। ऐसे में जब लीड्स संस्था द्वारा रेस परियोजना अंतर्गत सेमरटोली गांव मे ग्रामसभा की बैठक का आयोजन कर स्वच्छ ऊर्जा आधारित ग्रीन बिजनेस चैलेंज के तहत सोलर संचालित चाक की जानकारी दी गई। स्वयंसेवी संस्था लीड्स द्वारा रेस परियोजना के तहत ग्रामीण कुम्हारों को आगे बढ़ने के लिए तथा स्वच्छ ऊर्जा के संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।<br /><br />बैठक में कुम्हार नथन महतो भी शामिल हुए थे। नथन ने सोलर संचालित चाक लेने की इच्छा जाहीर की। इसके लिए उन्होंने सोलर संचालित चाक के लिए लीड्स के नाम से आवेदन दिया। लीड्स संस्था द्वारा ग्रीन बिजनेस चैलेंज के तहत कुम्हार को सोलर संचालित चाक उपलब्ध कराया गया। इसमे एक सोलर पैनल, दो बैटरी, एक कंट्रोलर और दो बल्ब दिये गये। अब सौर ऊर्जा संचालित चाक से कुम्हार अधिक से अधिक मिट्टी के वर्तन और अन्य सामान बनाकर बिक्री करने लगे हैं। अब बिजली बिल में भी कमी आ गई है। बिजली कट जाने के बाद भी काम करने मे परेशानी नहीं हो रही है, जिससे अब कुम्हार नथन महतो अपनी सहूलियत के अनुसार मिट्टी का सामान ज्यादा से ज्यादा बनाने लगे हैं। इससे कुम्हार की आय दोगुनी हो गई है।<br /><br />नथन महतो बताते हैं की पहले उनकी मासिक आय लगभग पांच हजार रुपये होती थी लेकिन अब सोलर चाक लग जाने से महीने मे लगभग 20 हजार रुपये से अधिक की कमाई हो जाती है। इसके कारण उनके परिवार की आय बढ़ी और जीवन स्त्र में भी सुधार होने गला। नथन के बच्चे भी अब अच्छे स्कूलों में पढ़ने लगे हैं। नथन ने इसके लि लीड्स संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि छोटे व्यवसायियों और किसानों को भी सरकार की योजनाओं का लाभ लेना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Jun 2024 19:28:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्राम पंचायतों के सचिवालयों में 40 पंचायत सहायकों ने छोड़ी नौकरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हमीरपुर 12 जून (हि.स.)। हमीरपुर जिले में सैकड़ों ग्राम पंचायतों के सचिवालयों में चालीस पंचायत सहायकों के नौकरी छोड़ने से ग्रामीण परेशान हैं। पेंशन, आवास और आनलाइन आवेदन के कार्य भी अब ठप है। एक पंचायत सहायक ने तो नियुक्ति होने के बाद ही इस्तीफा दे दिया है। इतनी बड़ी संख्या में पंचायत सहायकों के पद खाली होने से डिपार्टमेंट भी टेंशन में है।<br /><br />हमीरपुर जनपद में तीन सौ तीस ग्राम पंचायतें हैं। वहीं सुमेरपुर, कुरारा, मौदहा, मुस्करा, राठ, गोहांड और सरीला विकास खंड हैं। मौदहा, हमीरपुर, राठ और सरीला आदि चार तहसीलों के तहत सैकड़ों ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102389/40-panchayat-assistants-left-jobs-in-gram-panchayat-secretariats"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d12062024-12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमीरपुर 12 जून (हि.स.)। हमीरपुर जिले में सैकड़ों ग्राम पंचायतों के सचिवालयों में चालीस पंचायत सहायकों के नौकरी छोड़ने से ग्रामीण परेशान हैं। पेंशन, आवास और आनलाइन आवेदन के कार्य भी अब ठप है। एक पंचायत सहायक ने तो नियुक्ति होने के बाद ही इस्तीफा दे दिया है। इतनी बड़ी संख्या में पंचायत सहायकों के पद खाली होने से डिपार्टमेंट भी टेंशन में है।<br /><br />हमीरपुर जनपद में तीन सौ तीस ग्राम पंचायतें हैं। वहीं सुमेरपुर, कुरारा, मौदहा, मुस्करा, राठ, गोहांड और सरीला विकास खंड हैं। मौदहा, हमीरपुर, राठ और सरीला आदि चार तहसीलों के तहत सैकड़ों ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को जाति, पेंशन, निवास, आय समेत अन्य जरूरी प्रमाणपत्रों के लिए पंचायतों के सचिवालयों में सुविधाएं हैं, जहां आनलाइन आवेदन भरने सहित अन्य जरूरी काम होते हैं। शुरू में पंचायत स्तर से ये कार्य न होने से ग्रामीणों को ब्लाक, तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। पेंशन, आवास, जाति और निवास सहित अन्य आवश्यक कामों के लिए गांव के लोगों को सारा दिन लगता था। धन भी खर्च होता था लेकिन शासन की मंशा के तहत ग्राम पंचायतों में ही यह पंचायतों के सचिवालयों में ही मुहैया कराई जा रही है।<br /><br />इधर, तीन सौ तीस ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के जरूरी काम करने के लिए तीन सौ तीस पंचायत सहायकों की तैनाती की थी। ये पंचायत सहायक ग्राम पंचायतों के सचिवालयों में बैठकर काम करते थे। लेकिन मौजूदा में चालीस पंचायत सहायकों ने नौकरी ही छोड़ दी है। इतनी बड़ी संख्या में पंचायत सहायकों के नौकरी छोड़ने से ग्रामीण अब परेशान हैं।<br /><br /><strong>छह हजार रुपये के मानदेय पर तीन सौ तीस ग्राम पंचायतों में रखे गए पंचायत सहायक</strong><br /><br />सुमेरपुर ब्लाक के चंदपुरवा व कल्ला ग्राम पंचायतों के सचिवालयों में नियुक्ति के बाद पंचायत सहायकों के इस्तीफा देने से पद खाली हो गए हैं। इससे ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिला पंचायतराज अधिकारी जितेन्द्र मिश्रा ने बताया कि हमीरपुर जिले की तीन सौ तीस ग्राम पंचायतों में इतनी ही संख्या में पंचायत सहायकों की तैनाती थीं, जिन्हें छह हजार रुपये मानदेय के तौर पर मिलता था। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में चालीस पंचायत सहायकों के पद खाली हो गए हैं। जिन्हें शासन के आदेश आते ही भरने की प्रक्रिया जल्द ही प्रारम्भ होगी।<br /><br /><strong>पंचायत सहायकों के चालीस पद खाली होने से ग्रामीणों के पेंशन व अन्य कार्य हो गए ठप</strong><br /><br />हमीरपुर जिले के गोहांड विकास खंड क्षेत्र में सर्वाधिक पंचायत सहायकों के आठ पद खाली हैं। अमगांव, चंदवारी डांडा, चिकासी, नहदौरा, पतखुरी, रिहुंटा, सैना, उमरिया ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक नहीं हैं। कुरारा क्षेत्र के झलोखर व शेखूपुर, मौदहा विकास खंड क्षेत्र में भमौंरा, खैरी, मसगांव, सायर, टोलामाफ में भी पंचायत सहायकों के पद खाली होने से पेंशन, जाति, निवास, आवास और आय समेत अन्य जरूरी काम ठप हो गए हैं। सुमेरपुर क्षेत्र के बरुआ, बिरखेरा, कलौलीजार, चंदपुरवा बुजुर्ग, कल्ला और मवई जार ग्राम पंचायतों में भी पंचायत सहायक नहीं हैं।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jun 2024 16:16:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खरगोनः अफ्रीकी देश तंजानिया की तर्ज पर वलका पंचायत में हो रहा जल संरक्षण का कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">खरगोन, 11 जून (हि.स.)। खरगोन जिले के भीकनगांव विकासखण्ड की ग्राम पंचायत वलका में जल संरक्षण के लिए अनूठी पहल की जा रही है। अफ्रीकी देश तंजानिया में जस्ट डिग ईट फाउंडेशन द्वारा जल संरक्षण के लिए किये गए कार्यों से प्रेरित होकर वलका पंचायत में यह कार्य किया जा रहा है।<br /><br />भीकनगांव जनपद की मुख्य कार्यपालन अधिकारी पूजा मालाकार सैनी ने मंगलवार को बताया कि जिला पंचायत सीईओ आकाश सिंह द्वारा अफ्रीकी देश तंजानिया में जल संरक्षण के लिए किये जा रहे कार्यों का एक वीडियो शेयर किया गया था और खरगोन जिले में भी ऐसे कार्य करवाने के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102370/khargone-water-conservation-work-is-being-done-in-valka-panchayat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d11062024-16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">खरगोन, 11 जून (हि.स.)। खरगोन जिले के भीकनगांव विकासखण्ड की ग्राम पंचायत वलका में जल संरक्षण के लिए अनूठी पहल की जा रही है। अफ्रीकी देश तंजानिया में जस्ट डिग ईट फाउंडेशन द्वारा जल संरक्षण के लिए किये गए कार्यों से प्रेरित होकर वलका पंचायत में यह कार्य किया जा रहा है।<br /><br />भीकनगांव जनपद की मुख्य कार्यपालन अधिकारी पूजा मालाकार सैनी ने मंगलवार को बताया कि जिला पंचायत सीईओ आकाश सिंह द्वारा अफ्रीकी देश तंजानिया में जल संरक्षण के लिए किये जा रहे कार्यों का एक वीडियो शेयर किया गया था और खरगोन जिले में भी ऐसे कार्य करवाने के निर्देश दिए गए थे। इस वीडियो से प्रेरणा लेकर खरगोन जिले में तंजानिया की तर्ज पर जल संरक्षण का कार्य करने वाली भीकनगांव जनपद खरगोन जिले की पहली जनपद एवं वलका पंचायत जिले की पहली पंचायत बन गई है।<br /><br />उन्होंने बताया कि तंजानिया में जल संरक्षण के लिए जस्ट डिग ईट फाउंडेशन द्वारा वीरान एंव बंजर भूमि पर जल संरक्षण के लिए अर्द्ध चन्द्राकार आकार के गड्ढे खोदे जाते हैं। इन गड्ढों में घास के बीज डाल दिये जाते हैं। वर्षा होने पर इन गड्ढों में पानी एकत्र हो जाता है और घास ऊग आती है। यही घास जल संरक्षण में मदद करती है और वर्षा के पानी को रोकने में मदद करती है और पानी को व्यर्थ में बहने नहीं देती है।<br /><br />जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वलका पंचायत में वीरान एवं बंजर भूमि पर तंजानिया की तर्ज पर मनरेगा से बड़ी संख्या में अर्द्ध चन्द्राकार गड्ढे बनाएं जा रहे हैं। मनरेगा से किया जा रहा है यह कार्य पूरी तरह मजदूरी पर आधारित है। इसमें किसी भी तरह की अन्य सामग्री नहीं लग रही है। इन गड्ढों में घास के बीज डाले जाएंगे। जिससे वर्षा होने पर जल संरक्षण में मदद मिलेगी और गांव की वीरान बंजर भूमि हरियाली से लहलहाने लगेगी। इस काम से गांव के गरीब लोगों को रोजगार मिल रहा है और इससे गांव का जलस्तर ऊपर उठेगा। गांव का जलस्तर बेहतर होगा तो गांव की तकदीर भी बदलने लगेगी।<br /><br /><strong>वर्षा से पूर्व जल संरक्षण के लिए तालाब गहरीकरण का कार्य शुरू</strong><br /><br />इधर, जल गंगा संवर्धन अभियान के अन्तर्गत मंगलवार को भीकनगांव विकासखण्ड ग्राम पंचायत कोदला जागीर के अम्बाबाड़ी में वर्षा से पूर्व जल संरक्षण के लिए तालाब गहरीकरण का कार्य किया गया। अभियान के तहत ग्राम के 15 सदस्यों ने जल संरक्षण के लिए तालाब गहरीकरण का काम शुरू किया है। अभियान अंतर्गत श्रमदान करते हुए जन अभियान परिषद के तत्वावधान में ब्लाक समन्वयक कालुसिंह मंडलोई, नवांकुर संस्था अध्यक्ष सुनीता चौहान, मेंटर्स भागीरथ मुजाल्दे, पुजा मुजाल्दे, सरपंच जगन्नाथ चौहान, सचिव दिनेश गौड़, सह सचिव मदन सिंह, उपसरपंच लच्छु राठौड़, मानक चौहान, सुरज, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनिता चौहान, सहायिका शिवानी उपस्थित रही।<br /><br /><strong>कृषि, उद्यान, वन एवं खाद्य विभाग के अमले ने कुंदा नदी की सफाई के लिए किया श्रमदान</strong><br /><br />वहीं, जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत मंगलवार को कृषि, उद्यान, वन एवं खाद्य विभाग के अमले ने कुंदा नदी की सफाई के लिए श्रमदान किया और आमजन को संदेश दिया कि नदी में गंदगी व प्लास्टिक आदि सामग्री न फेंके। 05 जून से प्रारंभ होकर 16 जून तक चलने वाले जल गंगा संर्वधन अभियान के अंतर्गत खरगोन जिले में जल स्त्रोतों की सफाई, मरम्मत एवं जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। कुंदा नदी की सफाई के लिए विभिन्न विभागों के अमले द्वारा प्रतिदिन श्रमदान कर अपना योगदान दिया जा रहा है।<br /><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jun 2024 20:47:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शराब जो आपको मार रही है पल-पल, फिर भी चाह कर भी नहीं छूट पा रही, क्या कहते हैं एक्सपर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>  मनोहर यडवट्टि</strong></p>
<p style="text-align:justify;">बेंगलुरु, 9 जून (हि.स.)। जॉन, जोकि 45 वर्षीय दो बच्चों का पिता है, हमेशा काम के बाद शराब पीता था। जब तक कि उसे थकान महसूस नहीं होने लगी, पेट में दर्द शुरू नहीं हुआ और उसका चेहरा जब तक पीला नहीं पड़ा, उसे ये शराब कभी हानिकारक नहीं लगी, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने पर जॉन को पता चला कि उसे कई सालों से बहुत ज़्यादा शराब पीने की वजह से लीवर की गंभीर बीमारी है। अब वह हैरान और डरा हुआ है, उसे लगता है कि काश पहले ही इसके जोखिम के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/102314/alcohol-which-is-killing-you-every-moment-but-you-are"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-06/d09062024-06.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> मनोहर यडवट्टि</strong></p>
<p style="text-align:justify;">बेंगलुरु, 9 जून (हि.स.)। जॉन, जोकि 45 वर्षीय दो बच्चों का पिता है, हमेशा काम के बाद शराब पीता था। जब तक कि उसे थकान महसूस नहीं होने लगी, पेट में दर्द शुरू नहीं हुआ और उसका चेहरा जब तक पीला नहीं पड़ा, उसे ये शराब कभी हानिकारक नहीं लगी, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने पर जॉन को पता चला कि उसे कई सालों से बहुत ज़्यादा शराब पीने की वजह से लीवर की गंभीर बीमारी है। अब वह हैरान और डरा हुआ है, उसे लगता है कि काश पहले ही इसके जोखिम के बारे में पता होता।<br /><br />दरअसल, भारत समेत दुनिया के कई देशों से जुड़ी ऐसी अनगिनत कहानियां आज मौजूद हैं। व्यक्ति ने अपने मजे के लिए शराब पी, लेकिन आज उसकी इस आदत से पूरा परिवार संघर्ष कर रहा है। जॉन जैसी और एक नई कहानी हमारे समाज में न घटे इसके लिए चिकित्सकों ने इससे बचने के कई उपाय बताए हैं। इतना ही नहीं यदि कोई शराब नहीं छोड़ पा रहा है, तो उससे होने वाले नुकसान के साथ कैसे उससे बचाव करें यह भी आज समझाया जा रहा है।<br /><br />इस संबंध में डॉ. चंद्रम्मा दयानंद सागर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, देवराकाग्गलहल्ली, कनकपुरा तालुक, जिला रामनगर में फार्माकोलॉजी विभाग में प्रोफेसर, डॉ. शिवमूर्ति एन. से हिस ने बातचीत की एवं जाना कि कैसे शराब से बचें और अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागृत किया जा सकता है।<br /><br />डॉ. शिव मूर्ति एन. का कहना है, वास्तव में शराब से होने वाली बीमारियाँ स्वास्थ्य की ऐसी स्थितियाँ हैं जो अत्यधिक शराब के सेवन के परिणामस्वरूप विकसित होती हैं। ये स्थितियाँ शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों को प्रभावित करती हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएँ सामने आती हैं और अगर समय रहते इनका इलाज न किया जाए तो मृत्यु भी हो जाती है।<br /><br /><strong>इस तरह से शराब लीवर को प्रभावित करती है</strong><br /><br />उन्होंने कहा कि शरीर के पाचन क्रिया का मुख्य केंद्र लीवर, एक बार में केवल एक निश्चित शराब की मात्रा को ही संसाधित कर सकता है। अत्यधिक शराब का सेवन लीवर को प्रभावित करती है, जिससे वसा जमा हो जाती है, सूजन हो जाती है और निशान पड़ जाते हैं। समय के साथ, यह फैटी लीवर रोग, अल्कोहलिक हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी स्थितियों को जन्म दे देता है। लीवर के ठीक से काम न कर पाने के कारण शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं, जिससे और भी स्वास्थ्य समस्याएँ होने एवं उनके बढ़ने की संभावना बढ़ जाती हैं ।<br /><br /><strong>फैटी लीवर से होनेवाले रोग</strong><br /><br />फैटी लीवर रोग तब होता है जब लीवर में बहुत ज़्यादा शराब पीने के कारण अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है। यह अक्सर बिना लक्षण वाला होता है, लेकिन अगर शराब पीना जारी रहता है, तो यह लीवर को और भी ज़्यादा नुकसान पहुँचा सकता है। जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो उनमें थकान, कमज़ोरी और पेट के ऊपरी दाएँ हिस्से में तकलीफ़ होने लगती है। इसके साथ ही अल्कोहलिक हेपेटाइटिस अत्यधिक शराब के सेवन के कारण लीवर की सूजन है। लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और इसमें पीलिया (त्वचा और आँखों का पीला पड़ना), बुखार, मतली, उल्टी और पेट दर्द शामिल हैं। गंभीर मामलों में लीवर फेलियर और मौत हो सकती है।<br /><br />डॉ. शिव मूर्ति एन. कहते हैं कि लीवर से संबंधित सिरोसिस क्रोनिक लीवर रोग का अंतिम चरण है जहाँ स्वस्थ लीवर ऊतक को निशान ऊतक द्वारा बदल दिया जाता है। यह निशान लीवर की कार्य करने की क्षमता को बाधित करता है, जिससे पीलिया, गंभीर थकान, पैरों और पेट में सूजन और भ्रम जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सिरोसिस से लीवर कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है और लीवर ट्रांसप्लांट के बिना यह जानलेवा भी हो सकता है।<br /><br />जब हिस संवाददाता ने उनसे शराब से दिल की समस्याएं होने को लेकर प्रश्न किया तो उनका कहना था कि लगातार शराब के सेवन से दिल से जुड़ी कई समस्याएँ होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। इससे रक्तचाप बढ़ सकता है, कार्डियोमायोपैथी (हृदय की मांसपेशियों की बीमारी) हो सकती है और अतालता (अनियमित दिल की धड़कन) हो सकती है। इन स्थितियों से दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।<br /><br /><strong>अग्न्याशय को बुरी तरह से प्रभावित करती है शराब</strong><br /><br />डॉ. शिव मूर्ति एन. कहते हैं कि शराब अक्सर अग्न्याशय (पैंक्रियास) की सूजन का कारण बन जाती है, जिसे अग्नाशयशोथ के रूप में जाना जाता है। तीव्र अग्नाशयशोथ से पेट में गंभीर दर्द, मतली और उल्टी होती है। क्रोनिक पैन्क्रियाटाइटिस पाचन को खराब कर सकता है और लंबे समय तक दर्द, मधुमेह और अग्नाशय के कैंसर का कारण बन सकता है। अधिकांश कैंसर के मरीजों में ऐसा होता हुआ बड़ी संख्या में इस वक्त देखा भी जा रहा है। शराब पाचन तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित करती है और गैस्ट्रिटिस (पेट की परत की सूजन), अल्सर और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर जैसे कि अन्नप्रणाली, पेट और कोलन कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है।<br /><br />सिर्फ शरीर के अंगों को ही नहीं यह शराब हमारे मस्तिष्क को भी बुरी तरह से प्रभावित करती है। चिकित्सक ने कहा कि लंबे समय तक शराब के सेवन से मस्तिष्क को काफी नुकसान हो सकता है, जिससे संज्ञान, स्मृति और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इससे वर्निक-कोर्साकॉफ सिंड्रोम जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जो एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार है और मनोभ्रंश विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है। शराब अवसाद और चिंता जैसे मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों को बढ़ा सकती है। यह मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन पैदा कर सकता है और आत्महत्या के जोखिम को बढ़ा सकता है। लगातार शराब के सेवन से अक्सर सामाजिक अलगाव और रिश्तों और काम में समस्याएँ होती हैं।<br /><br /><strong>कमजोर हो जाती है शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली</strong><br /><br />प्रो. शिव मूर्ति एन. ने कहा कि अत्यधिक शराब का सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है, जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। यह भारी शराब पीने वालों को निमोनिया और तपेदिक जैसी बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। यकृत रोग होने की संभावना बढ़ जाती है, इसके लक्षणों में पीलिया, थकान, पैरों और पेट में सूजन (एडिमा और जलोदर), आसानी से चोट लगना या खून बहना, गहरे रंग का मूत्र, पीला मल और पुरानी खुजली शामिल हैं। ये लक्षण गंभीर यकृत विकार का संकेत देते हैं और इसके लिए तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।<br /><br />इतना ही नहीं तो डॉ. शिव मूर्ति एन. का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान शराब पीने से भ्रूण शराब सिंड्रोम (कई जन्म दोष) (FAS) हो सकता है, जिससे बच्चों में शारीरिक, व्यवहारिक और सीखने की समस्याएँ हो सकती हैं। वास्तव में एफएएस के परिणामस्वरूप विकास संबंधी कमियाँ, चेहरे की असामान्यताएँ और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की समस्याएँ हो जाती हैं।<br /><br />जब डॉ. शिव मूर्ति एन. से शराब से मुक्त होकर जीवन में वापसी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वापसी के लक्षण तब होते हैं जब शराब पर निर्भर व्यक्ति अचानक शराब पीना बंद कर देता है। इन लक्षणों में कंपन, पसीना आना, मतली, चिंता, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा शामिल हो सकते हैं। गंभीर वापसी, जिसे डेलिरियम ट्रेमेन के रूप में जाना जाता है, मतिभ्रम और दौरे का कारण बन सकती है, और जीवन के लिए खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इसके जोखिम को कम करने के लिए, अनुशंसित दिशा-निर्देशों के अनुसार शराब का सेवन सीमित करें, स्वस्थ आहार बनाए रखें, नियमित रूप से व्यायाम करें और अत्यधिक शराब पीने से बचें। यदि आपको अपने पीने को नियंत्रित करने में कठिनाई हो रही है, तो समय रहते मदद लेना महत्वपूर्ण है।<br /><br />इसके साथ ही अपनी बातचीत में हिस से डॉ. शिव मूर्ति एन. का कहना यह भी रहा है कि गर्भवती महिलाओं को शराब से पूरी तरह बचना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान शराब पीने से भ्रूण शराब सिंड्रोम (कई जन्म दोष) (FAS) हो सकता है, जिससे बच्चों में शारीरिक, व्यवहार संबंधी और सीखने संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।<br /><br />उन्होंने कहा कि मदद माँगने की शुरुआत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करके की जा सकती है। अल्कोहलिक्स एनोनिमस, काउंसलिंग और पुनर्वास कार्यक्रम जैसे सहायता समूह संरचित मदद प्रदान करते हैं। पेशेवर उपचार में अक्सर चिकित्सा पर्यवेक्षण, चिकित्सा और दीर्घकालिक सुधार के लिए सहायता शामिल होती है। वहीं, उनका कहना रहा कि व्यायाम, शौक, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना और मॉकटेल, हर्बल चाय और फ्लेवर्ड पानी जैसे गैर-अल्कोहल पेय पदार्थों का उपयोग जैसी गतिविधियों में शामिल होना फायदेमंद हो सकता है। ये विकल्प न केवल स्वास्थ्य में सुधार करते हैं बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jun 2024 20:19:31 +0530</pubDate>
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