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                <title>Indian Army - Loktej</title>
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                <description>Indian Army RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>1000 किलोग्राम के 600 एरियल बम की खरीद करेगी भारतीय वायुसेना</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">04 अप्रैल (वेब वार्ता)। स्वदेशी हथियारों के निर्माण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नए इकोसिस्टम के विकास में जुटी है। अधिकांश रक्षा खरीद अब स्वदेशी कंपनियों से की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी दिशा में विशेष जोर दिया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">सेना अपनी आवश्यकताओं की जानकारी देश की हथियार निर्माण कंपनियों को देती है। इसी क्रम में भारतीय वायुसेना ने 1000 किलोग्राम के एरियल बम के लिए स्वदेशी कंपनियों से जानकारी मांगी है। खास बात यह है कि वायुसेना को अमेरिकी एमके-84 जैसा शक्तिशाली एरियल बम चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए वायुसेना और रक्षा मंत्रालय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146425/indian-air-force-will-purchase-600-aerial-bombs-of-1000"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d27032024-03-army.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">04 अप्रैल (वेब वार्ता)। स्वदेशी हथियारों के निर्माण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नए इकोसिस्टम के विकास में जुटी है। अधिकांश रक्षा खरीद अब स्वदेशी कंपनियों से की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी दिशा में विशेष जोर दिया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">सेना अपनी आवश्यकताओं की जानकारी देश की हथियार निर्माण कंपनियों को देती है। इसी क्रम में भारतीय वायुसेना ने 1000 किलोग्राम के एरियल बम के लिए स्वदेशी कंपनियों से जानकारी मांगी है। खास बात यह है कि वायुसेना को अमेरिकी एमके-84 जैसा शक्तिशाली एरियल बम चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए वायुसेना और रक्षा मंत्रालय ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया है। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के तहत 1000 किलोग्राम के एमके-84 के समान एरियल बम के स्वदेशी डिजाइन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और खरीद के लिए रुचि की अभिव्यक्ति आमंत्रित की गई है। यह प्रोजेक्ट पहले मेक-</span>II (<span lang="hi" xml:lang="hi">इंडस्ट्री फंडेड) श्रेणी के तहत शुरू होगा और बाद में बाई (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी के तहत इसकी खरीद की जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस परियोजना को दो चरणों में विभाजित किया जाएगा। पहले चरण में प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि दूसरे चरण में स्वदेशी कंपनियों से इनकी खरीद की जाएगी। पहले चरण में कुल 6 प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें वास्तविक और डमी दोनों प्रकार के बम शामिल होंगे। इसके बाद उनका परीक्षण किया जाएगा और आवश्यक तकनीकी मानकों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस चरण में कम से कम 50 प्रतिशत सामग्री भारत में निर्मित होना अनिवार्य होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बम को इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि इसे भारतीय वायुसेना के स्वदेशी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूसी और अन्य विदेशी विमानों पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सके। यह बम अत्यधिक विस्फोटक क्षमता वाला होगा और दुश्मन पर अधिक प्रभाव डालने में सक्षम होगा। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास इस प्रकार के एरियल बम मौजूद हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे विदेशों से खरीदे जाते हैं। पहले चरण के बाद दूसरे चरण में लगभग 600 बमों की खरीद की जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईओआई जारी होने से लेकर कॉन्ट्रैक्ट साइन होने तक लगभग 2.5 वर्ष का समय लगेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें डिजाइन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूल्यांकन और अन्य प्रक्रियाएं शामिल होंगी। सभी परीक्षण भारत में ही वायुसेना की यूनिट्स या निर्धारित स्थानों पर किए जाएंगे। विभिन्न प्लेटफॉर्म से इन बमों का परीक्षण किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">एमके-84 अमेरिका का एक भारी एरियल बम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे लड़ाकू या भारी बमवर्षक विमानों से गिराया जाता है। इसका वजन लगभग 900-1000 किलोग्राम (2000 पाउंड) होता है। यह एक जनरल-पर्पस बम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों पर किया जा सकता है। इसकी विस्फोटक क्षमता बहुत अधिक होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बड़े स्तर पर नुकसान होता है। आमतौर पर इसका उपयोग दुश्मन के बंकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इमारतों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रनवे और गोदाम जैसे मजबूत ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। आधुनिक प्रणालियों के साथ इसे जोड़कर इसे प्रिसिजन (सटीक) बम में भी बदला जा सकता है। यह बम वियतनाम युद्ध के दौरान विकसित किया गया था।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनरल चौहान ने नियंत्रण रेखा के निकट सैन्य तैयारियों का जायजा लिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi"> 04 अप्रैल (वेब वार्ता)। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को श्रीनगर में चिनार कोर के अंतर्गत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों का दौरा किया और सैन्य तैयारियों का जायजा लिया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने उत्तर कश्मीर में नियंत्रण रेखा के साथ सुरक्षा परिदृश्य और परिचालन स्थिति की समीक्षा की तथा उत्कृष्ट परिचालन तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैद्धांतिक सामंजस्य और दृढ़ पेशेवर क्षमता की सराहना की। बारामूला में उन्हें भविष्य में सेनाओं की प्रौद्योगिकी समावेशन पर जानकारी दी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">चिनार कोर के अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध का</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi"> 04 अप्रैल (वेब वार्ता)। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को श्रीनगर में चिनार कोर के अंतर्गत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों का दौरा किया और सैन्य तैयारियों का जायजा लिया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने उत्तर कश्मीर में नियंत्रण रेखा के साथ सुरक्षा परिदृश्य और परिचालन स्थिति की समीक्षा की तथा उत्कृष्ट परिचालन तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैद्धांतिक सामंजस्य और दृढ़ पेशेवर क्षमता की सराहना की। बारामूला में उन्हें भविष्य में सेनाओं की प्रौद्योगिकी समावेशन पर जानकारी दी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">चिनार कोर के अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण क्षेत्र-केंद्रित दृष्टिकोण से बहु-क्षेत्रीय अभियानों की ओर बदलाव आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक सुदृढ़ और एकीकृत संरचना पर आधारित हो। उन्होंने संयुक्तता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि भूमि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष और अन्य संबंधित क्षेत्रों में निर्बाध एकीकरण निर्णायक परिणाम प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है। उन्होंने भविष्योन्मुख युद्ध के लिए त्वरित संयुक्त प्रशिक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिद्धांतों का सामंजस्य तथा परस्पर क्रियाशील कमान और नियंत्रण संरचनाओं के विकास का आह्वान किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सभी क्षेत्रों में समन्वित परिणाम हासिल किए जा सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जनरल चौहान ने उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए एक सुनियोजित रोडमैप की आवश्यकता पर बल दिया—जो प्रौद्योगिकी अनुकूलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुदृढ़ता और एकीकृत प्रयासों के माध्यम से सामूहिक तैयारी को बढ़ावा दे। उन्होंने दोहराया कि संभावित खतरों की तैयारी दूरदर्शिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एकीकृत युद्धक दर्शन और पूरे राष्ट्र के प्रयास पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच परिचालन तत्परता और लचीलेपन के महत्व को रेखांकित किया। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने सभी रैंकों से परिचालन उत्कृष्टता बनाए रखने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त भाव को जीवन का हिस्सा बनाने और भविष्य के संघर्ष के पूरे दायरे में प्रभुत्व के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने बारामूला में नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख व्यक्तियों और अधिकारियों के साथ भी बातचीत की तथा राष्ट्र निर्माण के प्रयासों की समीक्षा की।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 12:16:36 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय सेना के शौर्य और इंदिरा के साहसिक नेतृत्व की मिसाल है 1971 की विजय: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस ने विजय दिवस पर मंगलवार को कहा कि 1971 के युद्ध की विजय भारतीय सेना के शौर्य और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दूरदर्शी एवं साहसिक नेतृत्व की मिसाल है।</p>
<p>पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारतीय सैनिकों के शौर्य और बलिदान को नमन भी किया।</p>
<p>खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज ही के दिन 1971 में इतिहास रचा गया, जब भारत की वीर सशस्त्र सेनाओं ने पाकिस्तान को निर्णायक रूप से परास्त कर बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाई और विश्व के मानचित्र को नया स्वरूप दिया।’’</p>
<p>उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144624/the-victory-of-congress-of-1971-is-an-example-of"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-03/jammu-and-kashmir-security-agency-indian-army-jawan-soldier.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस ने विजय दिवस पर मंगलवार को कहा कि 1971 के युद्ध की विजय भारतीय सेना के शौर्य और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दूरदर्शी एवं साहसिक नेतृत्व की मिसाल है।</p>
<p>पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारतीय सैनिकों के शौर्य और बलिदान को नमन भी किया।</p>
<p>खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज ही के दिन 1971 में इतिहास रचा गया, जब भारत की वीर सशस्त्र सेनाओं ने पाकिस्तान को निर्णायक रूप से परास्त कर बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाई और विश्व के मानचित्र को नया स्वरूप दिया।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के दूरदर्शी, साहसिक और दृढ़ नेतृत्व में यह विजय मानवता और न्याय की एक महान मिसाल बनी।</p>
<p>खरगे ने कहा, ‘‘हम भारतीय सैन्य शक्ति और मुक्ति वाहिनी के अद्वितीय साहस, पराक्रम और बलिदान को शत-शत नमन करते हैं। भारत माता के इन वीर सपूतों का त्याग और समर्पण एक कृतज्ञ राष्ट्र सदैव याद रखेगा।’’</p>
<p>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘1971 के युद्ध में भारत की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने शौर्य, समर्पण और अटूट संकल्प से पूरे विश्व में इतिहास रचने वाले हमारे सशस्त्र बलों के वीरों को विजय दिवस पर नमन करता हूं।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘उनका अदम्य साहस, संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान हर एक भारतवासी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।’’</p>
<p>विजय दिवस हर वर्ष 16 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध लड़ने वाले सैनिकों के सम्मान में मनाया जाता है,जिसका समापन पाकिस्तान की सेना के आत्मसमर्पण के साथ हुआ था। जनरल ए ए खान नियाजी के नेतृत्व में लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने हथियार डाल दिए थे। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी सेना द्वारा किए गए सबसे बड़े आत्मसमर्पण में से एक था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 14:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कारगिल युद्ध के शूरवीर कैप्टन विजयंत थापर के घर पहुंचे सेना के जवान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 10 जून (वेब वार्ता)। कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर सैन्य अधिकारी सेना के शूरवीरों के घर पहुंच रहे हैं। कारगिल युद्ध में अपने प्राण न्योछावर कर सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के स्वजनों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। साथ ही सेना देश के नागरिकों को अवगत करा रही है कि इन वीर सपूतों ने अदम्य साहस और शौर्य की प्रकाष्ठा दिखाते हुए किस प्रकार मां भारती के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।</p>
<p>मंगलवार को भारतीय सेना के अधिकारी उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित भारतीय सेना के कैप्टन व वीर चक्र</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/141242/army-personnel-reached-the-house-of-captain-vijayant-thapar-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-08/5400_sena-armi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 10 जून (वेब वार्ता)। कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर सैन्य अधिकारी सेना के शूरवीरों के घर पहुंच रहे हैं। कारगिल युद्ध में अपने प्राण न्योछावर कर सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के स्वजनों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। साथ ही सेना देश के नागरिकों को अवगत करा रही है कि इन वीर सपूतों ने अदम्य साहस और शौर्य की प्रकाष्ठा दिखाते हुए किस प्रकार मां भारती के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।</p>
<p>मंगलवार को भारतीय सेना के अधिकारी उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित भारतीय सेना के कैप्टन व वीर चक्र से सम्मानित विजयंत थापर के घर पहुंचे। यहां सैन्य अधिकारियों ने उनके पिता व भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल वीएन थापर से मुलाकात की। सेना के अधिकारियों ने कारगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन विजयंत थापर के माता पिता को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।</p>
<p>सेना के मुताबिक,कारगिल युद्ध के सभी वीर सेनानियों के घर-घर जाकर सेना सम्मानपूर्वक स्मृति चिन्ह भेंट कर रही है। भारतीय सेना का कहना है, “इसके जरिए हमने अपने भावों को दर्शाया है कि हम अपने वीर साथियों को कभी नहीं भूलते और न कभी भूलेंगे। यह हमारा कर्तव्य और हमारी भावना है कि हम उनके परिजनों को बताएं कि हमारे वीर सेनानियों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया है। हमारे वीर बलिदानियों का परिवार अकेला नहीं है, भारतीय सेना उसका परिवार है और पूरी भारतीय सेना हमेशा उनके साथ खड़ी है।”</p>
<p>सेना का यह कदम स्वजनों को सम्मान देने के साथ-साथ यह बताने का भी प्रयास है कि देश अपने वीर बलिदानियों को कभी नहीं भूलता है । सेना के इस कदम से मां भारती के वीर बलिदानियों के परिवार भी भावुक हो उठे। इस दौरान हर चेहरा गर्व से भरा हुआ था। सभी ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वीर जवान अमर रहे’ के नारे लगाए।</p>
<p>गौरतलब है कि कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों के 545 परिवारों से सेना के प्रतिनिधि मुलाकात कर रहे हैं। कारगिल विजय दिवस यानी 26 जुलाई तक इन सभी शहीदों के परिजनों से मुलाकात की जाएगी। सेना के मुताबिक 26 जुलाई 2025 तक चलने वाले दो माह लंबे समारोह में उन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिन्होंने राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।</p>
<p>वर्ष 1999 में ‘ऑपरेशन विजय’ की सफलता और दुश्मन से कारगिल की चोटियों को पुन प्राप्त करने की याद में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल सैन्य जीत का प्रतीक है, बल्कि राजनीतिक, कूटनीतिक और सामरिक संतुलन का उदाहरण भी है। यहां कारगिल में भारत ने युद्ध को सीमित रखने की रणनीति अपनाते हुए वीरता और संयम का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jun 2025 15:28:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दिखेगी सेना के तीनों अंगों की संयुक्त झांकी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) छब्बीस जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में भव्य कर्तव्य पथ पर पहली बार सेना के तीनों अंगों की संयुक्त झांकी नजर आएगी। इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों के बीच ‘‘संयुक्तता’’ की व्यापक भावना को दर्शाना है।</p>
<p>वहीं, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की झांकी में भारत की सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मकता की झलक दिखाई देगी। झांकी का मुख्य आकर्षण काइनैटिक कल्पवृक्ष से लेकर कुम्हार के चाक पर याढ़ (तमिल वाद्ययंत्र) है।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सेना के तीनों अंगों की संयुक्त झांकी में स्वदेशी अर्जुन युद्ध टैंक, तेजस लड़ाकू विमान और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर के साथ जमीन, जल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/124446/for-the-first-time--a-joint-tableau-of-all-three-parts-of-the-army-will-be-seen-in-the-republic-day-parade"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d27032024-03-army.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) छब्बीस जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में भव्य कर्तव्य पथ पर पहली बार सेना के तीनों अंगों की संयुक्त झांकी नजर आएगी। इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों के बीच ‘‘संयुक्तता’’ की व्यापक भावना को दर्शाना है।</p>
<p>वहीं, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की झांकी में भारत की सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मकता की झलक दिखाई देगी। झांकी का मुख्य आकर्षण काइनैटिक कल्पवृक्ष से लेकर कुम्हार के चाक पर याढ़ (तमिल वाद्ययंत्र) है।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सेना के तीनों अंगों की संयुक्त झांकी में स्वदेशी अर्जुन युद्ध टैंक, तेजस लड़ाकू विमान और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर के साथ जमीन, जल और हवा में समकालिक अभियान के रूप में युद्ध की स्थिति का परिदृश्य प्रदर्शित किया जाएगा।</p>
<p>त्रि-सेवाओं की झांकी का विषय ‘सशक्त और सुरक्षित भारत’ होगा।</p>
<p>मंत्रालय ने बुधवार को कहा, ‘‘एक जनवरी को, मंत्रालय ने 2025 को रक्षा सुधारों के वर्ष के रूप में घोषित किया था और भारत की सैन्य शक्ति की मजबूती के लिए सेना के तीनों अंगों के बीच तालमेल को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। झांकी सशस्त्र बलों में संयुक्तता और एकीकरण के लिए वैचारिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करेगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और अभियानगत उत्कृष्टता सुनिश्चित होगी।’’</p>
<p>वहीं, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार इस बार मंत्रालय की झांकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विरासत भी, विकास भी’ मूलमंत्र से प्रेरित है और देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और सतत विकास की अपार संभावनाओं को प्रदर्शित करती है। इसमें कहा गया है कि यह झांकी भारत के विकसित राष्ट्र बनने के ‘विज़न 2047’ में संस्कृति और रचनात्मकता के योगदान को रेखांकित करती है।</p>
<p>बयान के अनुसार इस मौके पर संस्कृति सचिव अरुणीश चावला ने कहा, ''संस्कृति मंत्रालय की झांकी हमारे देश की अद्वितीय सांस्कृतिक विविधता, रचनात्मकता और सतत विकास की झलक है।...कुम्हार के चाक पर प्राचीन तमिल वाद्य यंत्र याढ़ हमारी परंपरा की गहराई और निरंतरता का प्रतीक है। वहीं, काइनैटिक कल्पवृक्ष जो ‘सोने की चिड़िया’ में बदलता है, हमारी रचनात्मकता और आर्थिक प्रगति का संदेश देता है।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jan 2025 21:59:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेना दिवस परेड: पहली बार महिलाओं के अग्निवीर दस्ते और ‘रोबोटिक खच्चरों’ ने हिस्सा लिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पुणे, 15 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के पुणे में बुधवार को 77वीं सेना दिवस परेड में कई चीजें पहली बार देखने को मिलीं, जिनमें राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की लड़कियों का मार्चिंग दस्ता, महिलाओं का अग्निवीर दस्ता और ‘रोबोटिक खच्चरों’ का एक समूह शामिल था।</p>
<p>वार्षिक परेड महाराष्ट्र के इस ऐतिहासिक शहर में ‘बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप’ (बीईजी) और सेंटर में हुई, जो सेना की दक्षिणी कमान के अंतर्गत आता है।</p>
<p>पुणे ने पहली बार प्रतिष्ठित परेड की मेजबानी की।</p>
<p>एनसीसी की बालिका कैडेट्स और बेंगलुरू स्थित ‘कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (सीएमपी), सेंटर एंड स्कूल’ में प्रशिक्षण लेने वालीं महिला अग्निवीर की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/121841/army-day-parade--for-the-first-time--women-s-agniveer-squad-and--robotic-mules--participated"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d27032024-03-army.jpg" alt=""></a><br /><p>पुणे, 15 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के पुणे में बुधवार को 77वीं सेना दिवस परेड में कई चीजें पहली बार देखने को मिलीं, जिनमें राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की लड़कियों का मार्चिंग दस्ता, महिलाओं का अग्निवीर दस्ता और ‘रोबोटिक खच्चरों’ का एक समूह शामिल था।</p>
<p>वार्षिक परेड महाराष्ट्र के इस ऐतिहासिक शहर में ‘बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप’ (बीईजी) और सेंटर में हुई, जो सेना की दक्षिणी कमान के अंतर्गत आता है।</p>
<p>पुणे ने पहली बार प्रतिष्ठित परेड की मेजबानी की।</p>
<p>एनसीसी की बालिका कैडेट्स और बेंगलुरू स्थित ‘कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (सीएमपी), सेंटर एंड स्कूल’ में प्रशिक्षण लेने वालीं महिला अग्निवीर की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।</p>
<p>सोलापुर जिले की अग्निवीर जी. समीक्षा विनोद ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘यह हमारे लिए एक उल्लेखनीय दिन है। हमने पिछले नवंबर में सीएमपी में प्रशिक्षण पूरा किया था और पिछले एक महीने से सेना दिवस परेड के लिए अभ्यास कर रहे हैं। हमने इसके लिए बहुत मेहनत की थी। हमें बहुत गर्व महसूस हुआ और यहां तक ​​कि नागरिक भी हमारा उत्साहवर्धन कर रहे थे।’’</p>
<p>अग्निवीर अंकिता पुजारी बसवराज भी परेड की समाप्ति के बाद उतनी ही प्रसन्न थीं तथा उन्होंने गौरवपूर्ण क्षणों का लुत्फ उठाया।</p>
<p>महिला अग्निवीरों ने जहां हरे और लाल रंग की टोपी के साथ काली वर्दी पहन रखी थी, वहीं एनसीसी कैडेट्स अपनी विशिष्ट खाकी वर्दी और लाल रंग की टोपी पहने हुए थीं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jan 2025 15:04:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात सैनिकों को अब मिलेगी हाई-स्पीड इंटरनेट सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>श्रीनगर, 13 जनवरी (भाषा) दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात सैन्यकर्मी अब हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। एक दूरसंचार कंपनी ने यह जानकारी दी।</p>
<p>रिलायंस जियो ने बताया कि 15 जनवरी को सेना दिवस से पहले, कंपनी ने भारतीय सेना के साथ मिलकर सियाचिन ग्लेशियर तक अपने 4 जी और 5 जी नेटवर्क का विस्तार करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।</p>
<p>रिलायंस जियो की प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ सेना के सिग्नल कर्मियों के सहयोग से, रिलायंस जियो इस दुर्गम क्षेत्र में निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करने वाली पहली दूरसंचार सेवा कंपनी बन गई है।’’</p>
<p>उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/120880/soldiers-deployed-on-siachen-glacier-will-now-get-high-speed-internet-facility"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-03/telephone-wifi-hotspot-social-media-smart-phone-internet-mobile-sms-chat-crime1.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर, 13 जनवरी (भाषा) दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात सैन्यकर्मी अब हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। एक दूरसंचार कंपनी ने यह जानकारी दी।</p>
<p>रिलायंस जियो ने बताया कि 15 जनवरी को सेना दिवस से पहले, कंपनी ने भारतीय सेना के साथ मिलकर सियाचिन ग्लेशियर तक अपने 4 जी और 5 जी नेटवर्क का विस्तार करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।</p>
<p>रिलायंस जियो की प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ सेना के सिग्नल कर्मियों के सहयोग से, रिलायंस जियो इस दुर्गम क्षेत्र में निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करने वाली पहली दूरसंचार सेवा कंपनी बन गई है।’’</p>
<p>उन्होंने बताया कि रिलायंस जियो ने अपनी स्वदेशी फुल-स्टैक 5जी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक अग्रिम चौकी पर ‘प्लग-एंड-प्ले प्री-कॉन्फ़िगर’ उपकरण को सफलतापूर्वक तैनात किया।</p>
<p>दूरसंचार कंपनी की प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यह उपलब्धि सेना के सिग्नल कर्मियों के साथ समन्वय से संभव हुई, जिसमें योजना से लेकर कई प्रशिक्षण सत्र, सिस्टम प्री-कॉन्फ़िगरेशन और व्यापक परीक्षण शामिल हैं। सियाचिन ग्लेशियर में जियो के उपकरणों को विमान से पहुंचाने सहित साजो-सामान के प्रबंधन में भारतीय सेना महत्वपूर्ण भूमिका में थी।’’</p>
<p>प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इस सहयोग से कराकोरम पर्वतमाला में 16,000 फुट की ऊंचाई पर कनेक्टिविटी सुनिश्चित हुई। यह ऐसा क्षेत्र है जहां तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर जाता है।’’</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/120880/soldiers-deployed-on-siachen-glacier-will-now-get-high-speed-internet-facility</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 19:09:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनसीसी कैडेट बड़े सपने देखें, परिवर्तनकर्ता और कल के नेता बनने का प्रयास करें : सेना प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट के रूप में अपने दिनों को याद किया और युवाओं से बड़े सपने देखने के साथ ही उनसे कल के ‘‘परिवर्तनकर्ता, नवप्रवर्तक और नेता’’ बनने का आग्रह किया।</p>
<p>जनरल द्विवेदी दिल्ली छावनी में जारी ‘राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) रिपब्लिक डे कैंप’ में शामिल हुए और उन्होंने वहां मौजूद कैडेट तथा अधिकारियों को संबोधित किया। जनरल द्विवेदी ने एनसीसी के एक अभियान दल को शुभकामनाएं भी दीं, जो इस वर्ष के अंत में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का प्रयास करेगा।</p>
<p>सेना प्रमुख ने कहा,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/119437/ncc-cadets-should-dream-big-and-strive-to-become-change"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/7354_ncc.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट के रूप में अपने दिनों को याद किया और युवाओं से बड़े सपने देखने के साथ ही उनसे कल के ‘‘परिवर्तनकर्ता, नवप्रवर्तक और नेता’’ बनने का आग्रह किया।</p>
<p>जनरल द्विवेदी दिल्ली छावनी में जारी ‘राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) रिपब्लिक डे कैंप’ में शामिल हुए और उन्होंने वहां मौजूद कैडेट तथा अधिकारियों को संबोधित किया। जनरल द्विवेदी ने एनसीसी के एक अभियान दल को शुभकामनाएं भी दीं, जो इस वर्ष के अंत में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का प्रयास करेगा।</p>
<p>सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘ एनसीसी का हिस्सा बनना जीवन जीने का एक तरीका है। कैडेट के रूप में बिताए गए प्रारंभिक वर्ष आपमें से प्रत्येक की एक विशिष्ट पहचान बनाएंगे और आगे चलकर आपके जीवन की उपलब्धियों की नींव रखेंगे।’’</p>
<p>जनरल द्विवेदी ने कहा कि यह जानना भी उत्साहवर्धक है कि 2024 में 100 छात्र कैडेट और 10 छात्रा कैडेट एनसीसी की प्रवेश योजनाओं के माध्यम से सेना की प्री-कमीशनिंग प्रशिक्षण अकादमियों में शामिल हुए, जबकि 8,800 से अधिक एनसीसी कैडेट अग्निवीर के रूप में सेना में शामिल हुए।</p>
<p>शिविर में पहुंचने पर सेना प्रमुख का एनसीसी कैडेटों ने स्वागत किया। बाद में, उन्होंने ध्वज क्षेत्र में उनमें से कुछ के साथ बातचीत भी की, साथ ही कुछ को स्मृति चिह्न भेंट किए।</p>
<p>कार्यक्रम स्थल पर सभागार में उन्हें सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखने को मिलीं।</p>
<p>उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ आप सभी को वर्दी पहने देखकर मुझे पुरानी यादें ताजा हो गईं। मुझे याद आ रहा है कि मेरा एनसीसी नामांकन नंबर -73727 था। मुझे वे दिन भी याद आ रहे हैं जो मैंने एनसीसी कैडेट के रूप में बिताए थे।’’</p>
<p>मध्य प्रदेश के रीवा स्थित सैनिक स्कूल के पूर्व छात्र जनरल द्विवेदी ने कहा कि उन्हें एनसीसी पूर्व छात्र संघ का हिस्सा बनकर गर्व महसूस हो रहा है।</p>
<p>उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘‘प्रिय कैडेट्स, आज जब मैं आपकी ओर देख रहा हूं तो मैं न केवल कल के नेताओं को देख रहा हूं, बल्कि हमारे देश की विरासत और भविष्य के संरक्षकों को भी देख रहा हूं। इस महान राष्ट्र के युवा नागरिकों के रूप में आप भारत के परिवर्तन और विकास की कहानी का अभिन्न अंग हैं।’’</p>
<p>सेना प्रमुख ने कैडेटों से आग्रह किया कि वे स्वयं पर विश्वास रखें तथा ‘‘उत्कृष्टता की खोज में कड़ी मेहनत और समर्पण को अपना साथी बनाएं।’’</p>
<p>जनरल द्विवेदी ने सामुदायिक सेवा, रक्तदान कार्यक्रम, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक मुद्दों पर जागरुकता फैलाने में कैडेटों के प्रयासों की प्रशंसा भी की।</p>
<p>जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना एनसीसी के साथ अपने सहयोग और समर्थन पर बहुत गर्व महसूस करती है। उन्होंने कहा कि एक समय में 12,500 से अधिक सैन्यकर्मी एनसीसी में स्टाफ के रूप में तैनात थे।</p>
<p>देश भर से कुल 2,361 एनसीसी कैडेट एक महीने तक जारी रहने वाले ‘रिपब्लिक डे कैंप’ में भाग ले रहे हैं। यह आयोजन 30 दिसंबर से शुरू हुआ और 27 जनवरी को प्रधानमंत्री की रैली के साथ समाप्त होगा।</p>
<p>इस वार्षिक कार्यक्रम में 917 छात्रा कैडेट भी भाग ले रही हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा दल है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/119437/ncc-cadets-should-dream-big-and-strive-to-become-change</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Jan 2025 15:43:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल : वायनाड के जमींदोज गांवों में तीनों सेनाओं ने पूरी तरह से मोर्चा संभा​ला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)।​ केरल के वायनाड में भूस्खलन के ​दूसरे दिन बुधवार को प्रभावित क्षेत्रों में​ तीनों सेनाओं ने पूरी तरह से मोर्चा संभाल लिया है। भूस्खलन​ से जमींदोज हुए गांवों में सेना की अतिरिक्त टुकड़ियों को लगातार ​भेजा जा रहा है, ताकि प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाई जा सके।​ सेना ने मानव निर्मित पुल और मानवीय प्रयासों का उपयोग करके अब तक एक हजार ​नागरिकों को बचाया है। वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने भी अभियान चलाकर जमीन की संकरी पट्टी ​में फंसे लोगों को ​एयरलिफ्ट किया है। नौसेना​ और भारतीय तटरक्षक बल ​ने भी वायनाड में​ चिकित्सा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103508/all-three-armies-took-full-charge-in-the-landlocked-villages"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b31072024-05.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)।​ केरल के वायनाड में भूस्खलन के ​दूसरे दिन बुधवार को प्रभावित क्षेत्रों में​ तीनों सेनाओं ने पूरी तरह से मोर्चा संभाल लिया है। भूस्खलन​ से जमींदोज हुए गांवों में सेना की अतिरिक्त टुकड़ियों को लगातार ​भेजा जा रहा है, ताकि प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाई जा सके।​ सेना ने मानव निर्मित पुल और मानवीय प्रयासों का उपयोग करके अब तक एक हजार ​नागरिकों को बचाया है। वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने भी अभियान चलाकर जमीन की संकरी पट्टी ​में फंसे लोगों को ​एयरलिफ्ट किया है। नौसेना​ और भारतीय तटरक्षक बल ​ने भी वायनाड में​ चिकित्सा दल​ और आपदा राहत टीम भेजी ​हैं।<br /><br />सेना की दक्षिणी कमान ने बताया कि एनडीआरएफ, राज्य बचाव दल, तटरक्षक, भारतीय नौसेना और ​वायु सेना के साथ भारतीय सेना की टुकड़ियां संकट से निपटने के लिए लगातार काम कर रही हैं। मानव निर्मित पुल और मानवीय प्रयासों का उपयोग करके अब तक एक हजार नागरिकाें को बचाया गया है। सेना की टुकड़ियों ​ने अब तक लगभग 70 शव बरामद किए हैं। वायनाड में बचाव अभियान के लिए 23 मराठा रेजिमेंट के 130 सैनिक बचाव प्रयासों में सहायता के लिए त्रिवेंद्रम से वायनाड पहुंच गए हैं।​ सेना की 122 इन्फैंट्री बटालियन के सैनिकों ने फंसे हुए नागरिकों को निकाला, जबकि प्रादेशिक सेना और डीएससी सेंटर ने संयुक्त बचाव अभियान में वनरानी चाय बागान में फंसे मध्य प्रदेश के 19 श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।<br /><br />मद्रास इंजीनियर ग्रुप और इंजीनियर टास्क फोर्स​ बुधवार तड़के 02:00 बजे मौके पर ​पहुंची।​ दरअसल, चूरलमाला में एक​ 24,170 फीट का पुल बनाने की योजना है​, ताकि यहां फंसे लोगों को निकाला जा सके। मेप्पाडी-चूरलमाला रोड पर टोही का काम चल रहा है। तीन बेली ब्रिज, जेसीबी और टाट्रा ट्रकों सहित आवश्यक ब्रिजिंग परिसंपत्ति​यों को वायनाड ​ले जाया जा रहा है, जिसके आज शाम तक पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा दिल्ली से ब्रिजिंग परिसंपत्तियां तीन खोजी कुत्तों के साथ भारतीय वायु सेना के ​परिवहन विमान सी​-130 ​के जरिये हवाई मार्ग से कन्नूर पहुंच गई हैं। जल्द ही वायनाड के लिए सड़क मार्ग से आवाजाही ​शुरू करने के लिए नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय​ किया जा रहा है। कमांडेंट पैरा रेजिमेंटल सेंटर​, मेपड्डी में राज्य प्रशासन नियंत्रण कक्ष के साथ सेना नियंत्रण केंद्र​ स्थापित किया गया है।<br /><br />भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने हवाई निकासी की। ​प्रभावित इलाकों की स्थिति का जायजा लेने के लिए आज सुबह से हवाई सर्वे किया जा रहा है। पंगोडे सैन्य स्टेशन से लगभग 130 सैनिक बचाव कार्यों के लिए शंखमुखम त्रिवेंद्रम से कोझिकोड के लिए भारतीय वायु सेना के विमान में सवार हुए।​ त्रिवेंद्रम के पंगोडे सैन्य स्टेशन से 130 सैनिकों की दूसरी टुकड़ी बचाव उपकरणों से सुसज्जित होकर कोझिकोड पहुंची तथा चल रहे अभियानों में सहायता के लिए तैयार है। भारतीय वायु सेना की दक्षिणी वायु कमान और भारतीय सेना की राहत टुकड़ियां प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए वायनाड भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव कार्य चला रही हैं।<br /><br />भारतीय वायु सेना की दक्षिणी वायु कमान ने नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए वायु सेना स्टेशन सुलूर से दो हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं।​ प्रतिकूल जलवायु परिस्थिति और खराब दृश्यता के बावजूद भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने मंगलवार शाम 6 बजे के आसपास वायनाड में खोज और बचाव अभियान चलाया और जमीन की संकरी पट्टी से फंसे लोगों को बचाया। वायु सेना के एएन-32 विमान ने मंगलवार शाम 5 बजे तक पहली टीम को कालीकट पहुंचाया। भारतीय वायु सेना के सी-130 हरक्यूलिस विमान ने रात 8:30 बजे तक महत्वपूर्ण बचाव सामग्री के साथ टीम को कालीकट पहुंचाया।​ भारतीय वायु सेना के विमान एएन-32 और सी​-130 ​के जरिये त्रिवेंद्रम से दो अतिरिक्त सेना टुकड़ियां कल रात 10:30 बजे कालीकट​ पहुंचीं। इन टुकड़ियों ​को आज सुबह 6:45 बजे वायनाड के लिए ​रवाना किया गया है।<br /><br />नौसेना ​की दक्षिणी कमान ने प्रभावित क्षेत्रों में सहायता के लिए आईएनएस ज़मोरिन से चिकित्सा दल और उपकरणों सहित 68 कर्मियों की आपदा राहत टीम भेजी ​हैं। अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर हैं। बचाव प्रयासों को बढ़ाने के लिए कोच्चि से कालीकट तक एएलएच टुकड़ी तैनात की गई है।​ भारतीय तटरक्षक बल वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए बचाव और राहत कार्यों में सक्रिय रूप से लगा हुआ है। कोच्चि और बेपोर से आईसीजी आपदा राहत दल ​मौके पर मौजूद है।वायनाड बचाव अभियान के दूसरे दिन आज सुबह 122 इन्फैंट्री बटालियन के सैनिक आपदा प्रभावित मेप्पाडी और वायनाड में बचाव कार्य जारी रखने के लिए स्थानीय स्कूल आश्रय स्थल से ​रवाना हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jul 2024 14:01:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : जल्द ही सेना को परीक्षण के लिए मिलेगा पहला प्रोटोटाइप लाइट टैंक जोरावर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 28 जुलाई (हि.स.)। चीन की सीमा पर पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त तेज़ बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों की तलाश पूरी हो गई है। लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने डीआरडीओ के सहयोग से ढाई साल के भीतर स्वदेशी लाइट टैंक जोरावर का पहला प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। दो साल तक परीक्षण होने के बाद 2027 तक इसे सेना में शामिल कर लिया जाएगा। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में उच्च ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों के साथ-साथ कच्छ के रण जैसे नदी क्षेत्रों में भी इन हल्के टैंकों को तेजी से तैनात किया जा सकता है।<br /><br />पूर्वी लद्दाख में टकराव के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103449/new-delhi-army-will-soon-get-its-first-prototype-light"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b28072024-08.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 28 जुलाई (हि.स.)। चीन की सीमा पर पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त तेज़ बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों की तलाश पूरी हो गई है। लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने डीआरडीओ के सहयोग से ढाई साल के भीतर स्वदेशी लाइट टैंक जोरावर का पहला प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। दो साल तक परीक्षण होने के बाद 2027 तक इसे सेना में शामिल कर लिया जाएगा। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में उच्च ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों के साथ-साथ कच्छ के रण जैसे नदी क्षेत्रों में भी इन हल्के टैंकों को तेजी से तैनात किया जा सकता है।<br /><br />पूर्वी लद्दाख में टकराव के बाद भारतीय सेना ने चीन को चौतरफा घेरने के लिए एलएसी पर 40 से 50 टन वजन वाले रूसी मूल के भीष्म टी-90, टी-72 अजय और मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन भी तैनात कर रखे हैं। लद्दाख के ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए सेना के जवानों को कई दर्रों से गुजरना पड़ता है। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन के दौरान आवश्यकता पड़ने पर टी-72 और अन्य भारी टैंक उस स्थान तक नहीं पहुंच सकते हैं। इसलिए उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए हल्के वजन वाले टैंकों की जरूरत महसूस की गई, ताकि इन्हें 8 से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर ले जाया जा सके।<br /><br />इसके बाद भारत ने खुद 'प्रोजेक्ट जोरावर' के तहत 25 टन से कम वजन वाले 354 टैंकों का निर्माण करने का फैसला लिया। सैद्धांतिक रूप से डीआरडीओ को 2021 के अंत तक 354 टैंकों की आवश्यकता में से 59 का निर्माण करने के लिए हरी झंडी दे दी गई थी। इसके बाद डीआरडीओ ने हल्के टैंकों को विकसित किया और एलएंडटी को इसके निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। डीआरडीओ और एलएंडटी ने टैंक की डिजाइन तैयार की है, के-9 वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टी 155 मिमी. की चेसिस पर आधारित है। एलएंडटी ने ही गुजरात के हजीरा में एलएंडटी के प्लांट में के-9 वज्र टैंक तैयार किया है।<br /><br />अब एलएंडटी ने डीआरडीओ के सहयोग से ढाई साल के भीतर स्वदेशी लाइट टैंक ज़ोरावर का पहला प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है, जिसका अनावरण 6 जुलाई को किया गया था। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में उच्च ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों के साथ-साथ कच्छ के रण जैसे नदी क्षेत्रों में भी इन हल्के टैंकों को तेजी से तैनात किया जा सकता है। ये सभी टैंक हल्के होने के साथ-साथ बेहतर मारक क्षमता और सुरक्षा प्रदान करने वाले होंगे। डीआरडीओ प्रमुख डॉ. कामत ने कहा कि पहला प्रोटोटाइप अगले छह महीनों में विकास परीक्षणों से गुजरेगा और फिर भारतीय सेना को दिसंबर तक उपयोगकर्ता परीक्षण के लिए सौंप दिया जाएगा। परीक्षण पूरे होने में संभवतः दो साल लगेंगे और इसके बाद 2027 तक इसे सेना के बेड़े में शामिल कर लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jul 2024 21:03:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुपवाड़ा : सेना प्रमुख ने केरन सेक्टर में अग्रिम इलाकों का किया दौरा, कमांडरों और सैनिकों से बातचीत की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कुपवाड़ा, 25 जुलाई (हि.स.)। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को चिनार कोर के अग्रिम ठिकानों का दौरा किया और नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कमांडरों और सैनिकों से भी बातचीत की। सीओएएस ने पेशेवरता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए सभी रैंकों की सराहना की और उन्हें उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में दृढ़ रहने के लिए प्रेरित किया।<br /><br />जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास अग्रिम इलाकों का दौरा किया और कमांडरों और सैनिकों से बातचीत की।<br /><br />सेना प्रमुख ने पेशेवरता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/103364/kupwara-army-chief-visited-forward-areas-in-keran-sector-and"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-07/b25072024-09.jpg" alt=""></a><br /><p>कुपवाड़ा, 25 जुलाई (हि.स.)। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को चिनार कोर के अग्रिम ठिकानों का दौरा किया और नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कमांडरों और सैनिकों से भी बातचीत की। सीओएएस ने पेशेवरता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए सभी रैंकों की सराहना की और उन्हें उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में दृढ़ रहने के लिए प्रेरित किया।<br /><br />जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास अग्रिम इलाकों का दौरा किया और कमांडरों और सैनिकों से बातचीत की।<br /><br />सेना प्रमुख ने पेशेवरता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए सभी रैंकों की सराहना की। सेना प्रमुख ने उन्हें उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में दृढ़ रहने के लिए प्रेरित किया। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने के साथ कमांडरों और सैनिकों से बातचीत भी की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 15:44:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहली बार 10 महिला अधिकारी सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल होंगी</title>
                                    <description><![CDATA[अगले समूह की पांच महिलाओं को इस साल के अंत में नियुक्ति दी जाएगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/91588/for-the-first-time-10-women-officers-will-join-the"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-04/d25042023-08.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली, 25 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय सेना पहली बार 10 महिला अधिकारियों को आर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल करेगी। चेन्नई के ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) के 5 अधिकारियों का पहला समूह 29 अप्रैल को शामिल किया जायेगा, जबकि शेष 5 को इस साल के अंत में नियुक्ति दी जाएगी। इस साल सेना में शामिल होने वाले प्रत्येक बैच की 10 प्रतिशत से अधिक महिला अधिकारियों को आर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल किया जाएगा।<br /><br />सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने इस साल जनवरी में महिला सैन्य अधिकारियों के लिए अपनी आर्टिलरी रेजिमेंट खोलने का फैसला लिया था। इसके बाद में सरकार ने भी पिछले महीने सेना के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। सेना की लड़ाकू इकाइयों में आर्टिलरी रेजिमेंट के रूप में नामित विभिन्न कैलिबर, मोर्टार, रॉकेट सिस्टम, मिसाइल, रिमोट से संचालित विमान, हथियार का पता लगाने वाले राडार, मध्यम श्रेणी के युद्धक्षेत्र निगरानी राडार, लंबी दूरी की निगरानी प्रणाली की बंदूकें शामिल हैं। सेना में इन्फैंट्री के बाद यह सबसे बड़ी शाखाओं में से एक है।<br /><br />ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई से हर साल लगभग 40 महिला अधिकारियों को सेना में कमीशन मिलता है। इस साल की पासिंग आउट परेड इस महीने चेन्नई में आयोजित की जाएगी और आर्टिलरी रेजिमेंट में पहली बार शामिल होने वाली महिला अधिकारी इसी बैच से होंगी। महिलाओं और पुरुषों का यह बैच किसी भी आर्टिलरी फील्ड रेजिमेंट या मीडियम रेजिमेंट पोस्ट कमीशनिंग में कुछ महीनों के लिए प्रशिक्षण लेगा। यहां के बाद सभी युवा अधिकारियों के पाठ्यक्रम से गुजरेंगे, जहां उन्हें गनरी पर विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।<br /><br />एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि छह महीने से कम समय तक आर्टिलरी रेजिमेंट के लिहाज से प्रशिक्षण दिया जायेगा। महिला आर्टिलरी अधिकारियों के लिए कोई अलग पाठ्यक्रम नहीं होगा और वे अपने पुरुष समकक्षों के समान पाठ्यक्रम से गुजरेंगी। यह ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें चीन और पाकिस्तान की सीमा सहित अन्य इकाइयों में तैनात किया जाएगा। यह भी संभावना है कि यूनिट में तैनात होने के बाद उन्हें गन पोजीशन ऑफिसर के रूप में तैनात किया जाए। अधिकारी ने समझाया कि प्रत्येक रेजिमेंट में एक बंदूक अधिकारी होता है, जो बंदूकों को निर्दिष्ट स्थान पर तैनात करने, फायरिंग करने और जरूरत पड़ने पर बंदूकों को एक अलग स्थान पर ले जाने के लिए जिम्मेदार होता है।<br /><br />इसके बाद उन्हें ऑब्जर्वेशन पोस्ट ऑफिसर के रूप में तैनात किया जा सकता है, जहां वे फ्रंटलाइन पर होते हैं। यहां बैटरी कमांडर, बैटरी या रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर और सैनिकों के कमांडरों के रूप में तैनाती की जा सकती है। सेना में 1,705 महिला अधिकारी हैं, जिन्होंने अब तक आर्मी एजुकेशन कॉर्प्स के अलावा आर्मी एयर डिफेंस, सिग्नल्स, इंजीनियर्स, आर्मी एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कॉर्प्स, आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स और इंटेलिजेंस कॉर्प्स में काम कर रही हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब महिलाओं को आर्टिलरी रेजिमेंट में तैनात किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Apr 2023 19:00:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Dharmendra Mishra]]></dc:creator>
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