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                <title>Covid-19 - Loktej</title>
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                <description>Covid-19 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सितंबर 2022 के बाद से भारत में एक दिन में सबसे अधिक कोविड स्पाइक का रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 5 अप्रैल। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार मामलों के मंत्रालय के अनुसार, भारत में सितंबर 2022 के बाद से बुधवार को कोविड-19 के मामलों में सबसे अधिक एक दिन की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें 4,435 नए मामले सामने आए। आंकड़ों से पता चला कि सक्रिय मामलों की संख्या अब 23,091 है।</p>
<p>हालिया उछाल ने देश की कुल मामले संख्या को 4,47,33,719 तक पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, पिछले 24 घंटों में 15 मौतें हुईं, जिससे मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 5,30,916 हो गई। मंत्रालय के आंकड़ों ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रीय कोविड रिकवरी दर वर्तमान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90997/india-records-highest-single-day-covid-spike-since-september-2022"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/corona-vaccine-injection10.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 5 अप्रैल। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार मामलों के मंत्रालय के अनुसार, भारत में सितंबर 2022 के बाद से बुधवार को कोविड-19 के मामलों में सबसे अधिक एक दिन की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें 4,435 नए मामले सामने आए। आंकड़ों से पता चला कि सक्रिय मामलों की संख्या अब 23,091 है।</p>
<p>हालिया उछाल ने देश की कुल मामले संख्या को 4,47,33,719 तक पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, पिछले 24 घंटों में 15 मौतें हुईं, जिससे मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 5,30,916 हो गई। मंत्रालय के आंकड़ों ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रीय कोविड रिकवरी दर वर्तमान में 98.76% है।</p>
<p>दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, पुडुचेरी और राजस्थान में से प्रत्येक ने एक-एक कोविड से संबंधित मौत की सूचना दी, जबकि महाराष्ट्र और केरल से चार-चार मौतों की सूचना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Apr 2023 12:34:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेहत : तम्बाकू के सेवन और सिगरेट पीने से बढ़ सकता है कोविड-19 का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जापान में ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर काजुहिसा असई के नेतृत्व में एक शोध समूह ने इलेक्ट्रिक सिगरेट, तंबाकू उत्पादों, पारंपरिक सिगरेट और कोविड-19 के बीच संबंधों की जांच के लिए एक अध्ययन किया। इस समूह ने फरवरी 2022 में सामान्य आबादी से यादृच्छिक रूप से चुने गये 16-81 वर्ष की आयु के 30,130 प्रतिभागियों पर एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया, जिसमें एक चौंकाने वाले परिणाम सामने आये हैं। इस सर्वेक्षण का परिणाम ये बताता है कि जिन लोगों ने तम्बाकू या सिगरेट का सेवन करते हैं उनके द्वारा कोविड से संक्रमित होने के प्रमाण अधिक है।</p>
<p><strong>इलेक्ट्रिक सिगरेट और</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90708/consumption-of-tobacco-and-cigarette-smoking-can-increase-the-risk"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/2289_cigarette-stack-ash-smoking-tobacco-nicotine-pile.jpg" alt=""></a><br /><p>जापान में ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर काजुहिसा असई के नेतृत्व में एक शोध समूह ने इलेक्ट्रिक सिगरेट, तंबाकू उत्पादों, पारंपरिक सिगरेट और कोविड-19 के बीच संबंधों की जांच के लिए एक अध्ययन किया। इस समूह ने फरवरी 2022 में सामान्य आबादी से यादृच्छिक रूप से चुने गये 16-81 वर्ष की आयु के 30,130 प्रतिभागियों पर एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया, जिसमें एक चौंकाने वाले परिणाम सामने आये हैं। इस सर्वेक्षण का परिणाम ये बताता है कि जिन लोगों ने तम्बाकू या सिगरेट का सेवन करते हैं उनके द्वारा कोविड से संक्रमित होने के प्रमाण अधिक है।</p>
<p><strong>इलेक्ट्रिक सिगरेट और तम्बाकू के सेवन से बढ़ा कोविड का खतरा</strong></p>
<p>साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि तंबाकू उत्पादों के उपयोगकर्ताओं में गैर-उपयोगकर्ताओं की तुलना में कोविड-19 की दर काफी अधिक थी। इसके अतिरिक्त, सभी प्रकार के तम्बाकू उपयोगकर्ताओं के बीच, जो तम्बाकू उत्पादों और पारंपरिक सिगरेट दोनों का उपयोग करते थे, उनमें गंभीर बीमारी की संभावनाएं अधिक थीं। ऐसे लोगों को कोविड -19 के कारण अस्पताल में भर्ती और ऑक्सीजन की आवश्यकता थी।</p>
<p><strong>इलेक्ट्रिक सिगरेट को माना जाता था सुरक्षित विकल्प</strong></p>
<p>गौरतलब है कि इलेक्ट्रिक सिगरेट उत्पादों को पारंपरिक सिगरेट के सुरक्षित विकल्प के रूप में विपणन किया जाता है, लेकिन अध्ययन में कोरोनो वायरस संक्रमण के कारण अतिरिक्त जोखिमों पर प्रकाश डाला गया है। एसोसिएट प्रोफेसर असाई को उम्मीद है कि रिपोर्ट लोगों को कोविड-19 के संदर्भ में तंबाकू के उपयोग के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Mar 2023 07:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस के लिए कोरोना वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिक की हुई हत्या, आरोपी पुलिस के हिरासत में</title>
                                    <description><![CDATA[गामालेया नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड मैथमेटिक्स के 47 वर्षीय बोट्यकोव अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/90208/scientist-who-made-corona-vaccine-for-russia-murdered-accused-in"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-03/news-photo-(9)3.jpg" alt=""></a><br /><p>रूस के लिए कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक वी तैयार करने वाली वैज्ञानिकों की टीम में शामिल एंड्री बोटिकोव की उनके आवास पर बेल्ट से गला रेत कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह जानकारी रूसी मीडिया रिपोर्ट्स से मिली है।</p>
<p><strong>वरिष्ठ शोधकर्ता के रूप में किया था कार्य </strong></p>
<p>आपको बता दें कि रूसी संघ की जांच समिति की एक रिपोर्ट के अनुसार, गामालेया नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड मैथमेटिक्स में एक वरिष्ठ शोधकर्ता के रूप में काम करने वाले 47 वर्षीय बोट्यकोव गुरुवार को अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने बोट्यकोव को कोरोना वैक्सीन पर काम करने के लिए 2021 में ‘ऑर्डर ऑफ मेरिट फॉर द फादरलैंड’ अवॉर्ड से सम्मानित किया।</p>
<p><strong>बेल्ट से गला घोंटकर की गई थी हत्या</strong></p>
<p>गौरतलब है कि बोट्यकोव उन 18 वैज्ञानिकों में शामिल थे, जिन्होंने 2020 में स्पुतनिक वी वैक्सीन विकसित की थी। मामले की जांच कर रही कमेटी ने बताया कि मामले को हत्या का मामला मानकर जांच की गयी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 29 साल के युवक ने कहासुनी के बाद बोट्यकोव का बेल्ट से गला घोंटा और फिर फरार हो गया। संघीय जांच एजेंसी ने कहा कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/90208/scientist-who-made-corona-vaccine-for-russia-murdered-accused-in</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Mar 2023 23:44:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Premkumar Nishad]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वयस्कों के लिए कोविड की एहतियाती खुराक के अंतर को 9 से घटाकर 6 महीने किया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए COVID-19 एहतियाती खुराक, टीके की तीसरी या बूस्टर खुराक के अंतर को मौजूदा 9 महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) की सिफारिश पर यह फैसला लिया गया है।</span><br /></div><div>तीसरी खुराक का उद्देश्य प्रतिरक्षा को बढ़ावा देना है जो दूसरी खुराक के 7-8 महीने बाद कम होने की संभावना रहती है। इसलिए, अब यह निर्णय लिया गया है कि 18-59 वर्ष के सभी लाभार्थियों के लिए एहतियाती खुराक एक निजी टीकाकरण केंद्र में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div><span style="font-size:1rem;">केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए COVID-19 एहतियाती खुराक, टीके की तीसरी या बूस्टर खुराक के अंतर को मौजूदा 9 महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) की सिफारिश पर यह फैसला लिया गया है।</span><br /></div><div>तीसरी खुराक का उद्देश्य प्रतिरक्षा को बढ़ावा देना है जो दूसरी खुराक के 7-8 महीने बाद कम होने की संभावना रहती है। इसलिए, अब यह निर्णय लिया गया है कि 18-59 वर्ष के सभी लाभार्थियों के लिए एहतियाती खुराक एक निजी टीकाकरण केंद्र में दूसरी खुराक लिये जाने की तारीख से छह महीने या 26 सप्ताह पूरा होने के बाद ली जा सकेगी। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण द्वारा सभी राज्यों को लिखे पत्र के द्वारा साझा की गई है।</div><div>इस पत्र में कहा गया है, "60 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थियों के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों (एचसीडब्ल्यू) और फ्रंटलाइन वर्कर्स (एफएलडब्ल्यू) के लिए, सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर छह महीने पूरे होने के बाद एहतियात की खुराक मुफ्त में दी जाएगी।"</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/81524/covid-precautionary-dose-gap-for-adults-reduced-from-9-to-6-months</link>
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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 19:49:17 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना : जल्द ही नाक के सहारे लिया जा सकेगा वैक्सीन, भारत बायोटेक ने तैयार की दुनिया की पहली नोजल वैक्सीन</title>
                                    <description><![CDATA[भारत बायोटेक ने कोरोना के लिए दुनिया के पहले नाक के टीके (नोसल वैक्सीन) के क्लिनिकल परीक्षण के तीसरे चरण को भी पार कर लिया है, कंपनी अगले महीने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीए) को डेटा सौंपेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80706/corona-vaccine-can-soon-be-taken-with-the-help-of-nose-bharat-biotech-has-prepared-the-world-s-first-nozzle-vaccine"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/corona-vaccine-injection10.jpg" alt=""></a><br /><div>दो साल से दुनिया भर के डॉक्टर और वैज्ञानिक कोरोना के आने के बाद से इसके लिए सबसे असरदार दवा बनाने के प्रयास में लगे हुए है. अब भारत बायोटेक ने कोरोना के लिए दुनिया के पहले नाक के टीके (नोसल वैक्सीन) के क्लिनिकल परीक्षण के तीसरे चरण को भी पार कर लिया है। अगर सब कुछ सही रहा तो जल्द ही नाक के जरिए भी कोरोना की वैक्सीन दी जाएगी।  भारत बायोटेक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला ने शनिवार को कहा कि कोरोना की नाक के टीके का क्लिनिकल ट्रायल का तीसरा चरण भी पूरा हो चुका है और कंपनी अगले महीने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीए) को डेटा सौंपेगी।</div>
<div>आपको बता दें कि नैदानिक परीक्षण पूरा होने के बाद डेटा विश्लेषण किया जा रहा है। एक बार विश्लेषण पूरा हो जाने के बाद, डेटा डीजीसीए को सौंप दिया जाएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत दुनिया का पहला नेजल कोविड वैक्सीन लॉन्च कर सकता हैं। भारत में अब तक ज्यादातर वयस्कों को इंजेक्शन के जरिए कोरोना की वैक्सीन दी जा चुकी है। हालांकि, बच्चों में दर्दनाक इंजेक्शन के बजाय नाक के माध्यम से टीका लगाने का प्रस्ताव है। माना जाता है कि यह तरीका बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में ज्यादा कारगर है और इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं।</div>
<div>अगर इस पर बात करें कि नाक का टीका कैसे काम करता है? तो कोरोना वायरस सहित कई रोगाणु, नाक, मुंह, फेफड़े और पाचन तंत्र में मौजूद एक गीला, चिपचिपा पदार्थ म्यूकोसा के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं। नाक का टीका सीधे म्यूकोसा में एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करता है। यानी नाक का टीका एक तरह से एक पहरेदार खड़ा रखता है जहाँ वायरस शरीर में प्रवेश करता है। नाक का टीका आपके शरीर में इम्युनोग्लोबुलिन ए (आईजीए) पैदा करता है। प्रारंभिक अवस्था में आईजीए संक्रमण को रोकने में इसे अधिक प्रभावी माना जाता है। यह संक्रमण के साथ-साथ संचरण को भी रोकता है।</div>
<div>इस नोसल वैक्सीन या नाक के टीके के फायदों की बात करें तो यह सिंगल डोज वैक्सीन है, जो ट्रैकिंग को आसान बनाती है। इसके दुष्प्रभाव भी इंट्रामस्क्युलर टीकों की तुलना में कम होते हैं। इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि सुई और सीरिंज का मेडिकल वेस्ट भी कम होगा। फिलहाल भारत में वैक्सीन की दो डोज दी जा रही हैं। नाक का टीका 14 दिनों के भीतर प्रभावी होता है। प्रभावी नाक की खुराक न केवल कोरोनावायरस से रक्षा करेगी बल्कि अन्य बीमारियों के प्रसार को भी रोकेगी। रोगी में सामान्य लक्षण भी ध्यान देने योग्य नहीं होते हैं। वायरस शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान नहीं पहुंचा सकता है। हार्वर्ड इम्यूनोलॉजिस्ट जोस ऑर्डोज मोंटेस का कहना है कि अगर वायरस के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करना है, तो वैक्सीन दी जानी चाहिए जहां वायरस शरीर में प्रवेश कर रहा है। जोस बताते हैं कि हमारे हाथों में जो टीका होता है वह रक्त वाहिकाओं के आसपास एंटीबॉडी और टी-कोशिकाओं को उनमें मौजूद तत्वों तक ले जाता है। यदि टीका सीधे नाक के माध्यम से दिया जाता है, तो नाक, ऊपरी श्वसन पथ और फेफड़ों में एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली बन जाएगी। साथ ही एंटीबॉडी और टी-सेल भी अपना काम करेंगे। इसका फायदा यह है कि जब वायरस नाक से प्रवेश करता है, तो नाक में मौजूद प्रतिरक्षा प्रणाली इसे निष्क्रिय कर देगी। उम्मीद है कि नाक के टीके के बाद सकारात्मक मामलों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80706/corona-vaccine-can-soon-be-taken-with-the-help-of-nose-bharat-biotech-has-prepared-the-world-s-first-nozzle-vaccine</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Jun 2022 19:59:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने दी अपने यहाँ काम और पढ़ाई करने वाले भारतीयों को अच्छी खबर, दो साल पहले लगाए गए सख्त वीजा प्रतिबंधों को हटाया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास ने सोमवार को दो साल से अधिक समय से लागू अपनी कोविड 19 वीजा नीति में बदलाव की घोषणा की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/84603/china-gave-good-news-to-indians-working-and-studying-here-removed-strict-visa-restrictions-imposed-two-years-ago"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-06/2805_news28.jpg" alt=""></a><br /><div>चीन में काम करने वाले भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर आई है। चीन ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर दो साल पहले लगाए गए सख्त वीजा प्रतिबंधों को हटा लिया है। इस फैसले के बाद अब चीन में फंसे भारतीयों और वहां काम कर रहे उनके रिश्तेदारों को वीजा जारी किया जाएगा। इसके अलावा चीन के सरकारी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले और अपने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए लौटने की इच्छा व्यक्त करने वाले हजारों भारतीय छात्रों के आवेदनों पर भी चीन काम कर रहा है।</div><div>आपको बता दें कि नई दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास ने सोमवार को दो साल से अधिक समय से लागू अपनी कोविड 19 वीजा नीति में बदलाव की घोषणा की। जिसके तहत उन विदेशी नागरिकों और उनके रिश्तेदारों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं जो सभी क्षेत्रों में काम फिर से शुरू करने के लिए चीन लौटना चाहते हैं। यह कदम उन हजारों भारतीयों और उनके परिवारों के लिए राहत की खबर है जो 2020 से देश में फंसे हुए हैं। पिछले महीने, चीन में रहने वाले कई भारतीय कामगारों ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर दबाव डाला कि वे उन्हें चीन लौटने की अनुमति दें।</div><div>चीनी दूतावास ने कहा कि भारतीयों के अलावा, चीनी और विदेशी नागरिकों के परिवार के सदस्य अब अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए वीजा के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिनके पास चीन में स्थायी परमिट है। भारतीयों के अलावा, विभिन्न कंपनियों के लिए काम करने वाले कुछ चीनी कर्मचारी भी बीजिंग में वीजा प्रतिबंध और उड़ान रद्द होने के कारण भारत में फंसे हुए थे। वे भी जा सकेंगे।</div><div>हालांकि, चीनी दूतावास ने स्पष्ट किया कि पर्यटन और निजी उद्देश्यों के लिए वीजा सेवाएं फिलहाल बंद रहेंगी। चीन ने अप्रैल में लंबे समय से चली आ रही बातचीत के बाद कुछ भारतीय छात्रों को भारत से लौटने की इजाजत दे दी है। इसने नई दिल्ली में दूतावास से लौटने वाले भारतीयों का विवरण एकत्र करने को कहा। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, दिसंबर 1999 में चीन में जब कोरोना महामारी फैली, तब भारत में लगभग 23,000 भारतीय फंसे हुए थे। उनमें से ज्यादातर चीनी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र थे।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/84603/china-gave-good-news-to-indians-working-and-studying-here-removed-strict-visa-restrictions-imposed-two-years-ago</link>
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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 20:59:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राजकोट : पीडीयू मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 के रोगियों के शवों के परीक्षण से जानिए क्या तथ्य सामने आए</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">कोरोनावायरस फिलहाल तो नेपथ्य में है। इधर-उधर कुछ नए मामले दिखने लगे हैं लेकिन उम्मीद कर सकते हैं कि कोविड-19 का कोई नया चरण सामने ना आए। खैर, आज बात करनी है विगत महीनों में कोविड-19 संकट के दौरान गुजरात के राजकोट के एक मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 के शवों पर की गई रिसर्च के बारे में।</span><br /></div><div>राजकोट स्थित पीडीयू राजकीय मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 मरीजों के शवों के परीक्षण के बाद आए नतीजों को विगत 8 अप्रैल को इंडियन जर्नल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने इस रिसर्च के लिये मरीजों के शवों की एटोप्सी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div><span style="font-size:1rem;">कोरोनावायरस फिलहाल तो नेपथ्य में है। इधर-उधर कुछ नए मामले दिखने लगे हैं लेकिन उम्मीद कर सकते हैं कि कोविड-19 का कोई नया चरण सामने ना आए। खैर, आज बात करनी है विगत महीनों में कोविड-19 संकट के दौरान गुजरात के राजकोट के एक मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 के शवों पर की गई रिसर्च के बारे में।</span><br /></div><div>राजकोट स्थित पीडीयू राजकीय मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 मरीजों के शवों के परीक्षण के बाद आए नतीजों को विगत 8 अप्रैल को इंडियन जर्नल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने इस रिसर्च के लिये मरीजों के शवों की एटोप्सी को आधार बनाया है। इस बारे में राजकोट मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर हेतल क्यादा ने मीडिया को बताया है कि यह गुजरात का अपनी तरह का पहला अध्ययन है जिसमें कुल 33 रोगियों के शवों पर रिसर्च की गई थी। कुल मिलाकर यह पाया गया है कि एक सप्ताह से अधिक समय तक जिन मरीजों में कोरोनावायरस का संक्रमण रहा, उनकी किडनी में गहरी चोट, सांस का इन्फेक्शन और धमनियों में रक्त के थक्के दिखाई दिए।</div><div>यह रिसर्च कुल 33 कोविड-19 मरीजों के शवों पर की गई थी जिनमें 28 पुरुष और 5 महिलाएं थी। इन मरीजों की औसत आयु 61 साल थी। यह वह मरीज थे जो कम से कम एक सप्ताह तक कोरोनावायरस से ग्रस्त रहे थे। 33 मरीजों को उनके चिकित्सा काल के दौरान ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था और उनमें से कुछ को वेंटीलेटर पर भी ले जाना पड़ा था। इस प्रकार के अध्ययन दुनिया भर में किये गये हैं और इन्हीं के आधार पर चिकित्सा विशेषज्ञ इलाज के तौर-तरीके ढूंढते हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजकोट</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/87682/rajkot-know-what-facts-came-out-from-the-examination-of-dead-bodies-of-kovid-19-patients-in-pdu-medical-college</link>
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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 21:19:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानें विदेश से आने वालों के लिये क्या है नई कोरोना मार्गदर्शिका</title>
                                    <description><![CDATA[नए दिशानिर्देशों के अनुसार विदेश से आने वाले यात्रियों को सात दिनों तक होम क्वारंटाइन में नहीं रहना होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80531/know-what-is-the-new-corona-guide-for-those-coming-from-abroad"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-02/passenger-international-airport-coronavirus.jpg" alt=""></a><br /><div>कोरोना के घटते मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वालों और विदेश से आने वालों को बड़ी राहत देते हैं। सरकार की नई गाइडलाइन 14 फरवरी से प्रभावी होगी। कोरोना संकटग्रस्त देशों और अन्य देशों में कोई अंतर नहीं होगा। नए दिशानिर्देशों के अनुसार विदेश से आने वाले यात्रियों को सात दिनों तक होम क्वारंटाइन में नहीं रहना होगा। 14 दिनों तक उन्हें अपने स्वास्थ्य की निगरानी खुद करनी होगी।</div><div>हालांकि, भारत आने के इच्छुक यात्रियों को यात्रा से पहले हवाई सुविधा पोर्टल पर सेल्फ डिक्लेरेशन में जानकारी देनी होगी और पिछले 14 दिनों में की गई यात्रा की जानकारी देनी होगी। वहीं, यात्रा के 72 घंटे के भीतर टीके की दोनों डोज की नेगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट या सर्टिफिकेट जमा करना होगा। जिन यात्रियों में कोरोना के लक्षण नहीं होंगे, उन्हें ही विमान में चढ़ने की अनुमति दी जाएगी। विमान के चालक दल को यात्रा के दौरान कोरोना के लक्षण दिखने वाले किसी भी यात्री को भी आइसोलेट करना होगा।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Feb 2022 18:08:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो नर्सों ने फर्जी कोविड वैक्सीन कार्ड बनाकर करोड़ों कमाए</title>
                                    <description><![CDATA[दो नर्सों ने राज्य डेटाबेस में गलत तरीके से टीकाकरण विवरण दर्ज करके 1.5 मिलियन डॉलर या लगभग 11.20 मिलियन रूपये कमाए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>इस समय दुनिया भर के देश कोरोना के संक्रमण  से जूझ रहे है। बीते दो सालों से हर देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ देने वाले इस महामारी के नए वेरिएंट ने बीते साल के अंत से ही आतंक मचा रखा था। ऐसे में हर देश अपने नागरिकों की सलामती के लिए वैक्सीन की व्यवस्था कर रही है। साथ ही अस्पताल भी दिन रात टीकाकरण की प्रक्रिया में लगे हुए। हालांकि इन बड़े काम के बीच कभी कभार कुछ अनैतिक काम की जानकारी भी सामने आती है। एक बार फिर ऐसी ही कोई जानकारी सामने आई है पर इस बार ये खबर न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड से आई है, जहाँ की दो नर्सों ने राज्य डेटाबेस में गलत तरीके से टीकाकरण विवरण दर्ज करके 1.5 मिलियन डॉलर या लगभग 11.20 मिलियन रूपये कमाए।</div><div>जानकारी के अनुसार दोनों नर्सों ने न्यूयॉर्क स्टेट इम्यूनाइजेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम डेटाबेस में झूठे रिकॉर्ड दर्ज करके नवंबर 2021 और जनवरी 2022 के बीच कई नकली टीकाकरण कार्ड बनाए। इसके लिए उन्होंने वयस्कों से प्रति कार्ड 220 डॉलर या लगभग 16,439 रुपये और बच्चों से 85 डॉलर या लगभग 6,352 रुपये शुल्क भी वसूला। सफ़ोक काउंटी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ने एक शिकायत के आधार पर शुक्रवार को वाइल्ड चाइल्ड पीडियाट्रिक हेल्थकेयर की मालिक 49 वर्षीय जूली डेवोनो और उसकी 44 वर्षीय सहयोगी मारिसा उर्रा को गिरफ्तार किया।</div><div>आपको बता दें कि अभियोजकों ने कहा कि दो नर्सों ने रिकॉर्ड में एक से अधिक बार दिखाया था कि उन्होंने गुप्त जासूसों को टीका लगाया था, जबकि वास्तव में किसी को भी टीका नहीं लगाया गया था। डेटाबेस में दो नर्सों की गलत प्रविष्टि ने राज्य के लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर दिया और कोविड -19 के प्रसार को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों को धीमा कर दिया। अधिकारियों ने नर्स के घर की तलाशी ली, जहाँ से उन्होंने 9 लाख डॉलर या करीब 6.7 करोड़ रुपये नकद जब्त किया।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.loktej.com/article/84426/two-nurses-earned-crores-by-making-fake-covid-vaccine-cards</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Feb 2022 22:11:42 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना : संक्रमण से ठीक होने के बाद भी रखे अपना ख्याल</title>
                                    <description><![CDATA[संक्रमण से ठीक होने के बाद भी सावधानी जरुरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80483/corona-take-care-of-yourself-even-after-recovering-from-infection"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/7265_corona-virus-kappa-varient2.jpg" alt=""></a><br /><div>कोरोना संक्रमण ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा रखा है। इन दिनों ओमाइक्रोन के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि, कोरोना की दूसरी लहर की तरह इसमें कोई खतरा नहीं है। साथ ही ठीक होने की दर बढ़ रही है लेकिन इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि संक्रमण न बढ़े। साथ ही जो लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं उन्हें भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।</div><div>आपको बता दें कि कोरोना से ठीक होने के बाद ओरल हेल्थ का खास ख्याल रखना जरूरी है। सबसे पहले आपको टूथब्रश बदलना चाहिए। अगर आप कोरोना से ठीक होने के बाद अपना टूथब्रश नहीं बदलते हैं तो यह वाकई खतरनाक हो सकता है। साथ ही दूसरे लोग भी उसी बाथरूम का इस्तेमाल करते हैं जो आपके इस्तेमाल करने वालों के लिए हानिकारक होता है।</div><div>इस मामले में डॉ अंजना सत्यजीत का कहना है कि टूथब्रश को हर 3 महीने में बदलना चाहिए। लेकिन कोरोना के बाद टूथब्रश बदलने से न हिचकिचाएं क्योंकि कोरोना वायरस प्लास्टिक की सतह पर लंबे समय तक जीवित रहता है। जो आपको दोबारा संक्रमित कर सकता है। साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों को भी संक्रमण का खतरा है। आपको टंग क्लीनर को भी बदलना चाहिए। कोविड-19 हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है। साथ ही ओरल हेल्थ का भी ध्यान रखना जरूरी है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jan 2022 19:05:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना मरीज को बीमारी से ठीक होने के बाद नहीं कराना होगा टेस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[नए दिशानिर्देश के अनुसार अब से हल्के कोरोना संक्रमण मामलों में ठीक होने के बाद अब टेस्ट की जरूरत नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>एक बार फिर तेजी से देश में फ़ैल रहे कोरोना संक्रमण को लेकर सरकार तेजी के कार्यरत है और संक्रमण को लेकर आवश्यक कदम उठाएं जा रहे है। कोरोना की तीसरी लहर में भले ही संक्रमित मामलों की संख्या ज्यादा है पर बहुत कम ही लोगों को अस्पताल की आवश्यकता हो रही है। ऐसे में आगे की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि कोरोना के हल्के मामलों वाले लोगों को टेस्ट पॉजिटिव आने के सात दिन बाद डिस्चार्ज किया जा सकता है और ऐसे लोगों को दोबारा कोरोना टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।</div><div>आपको बता दें कि अब तक कोरोना संक्रमित व्यक्ति के ठीक होने पर भी कोरोना टेस्ट की जरुरत पड़ती थी लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत नए दिशानिर्देश के अनुसार अब से हल्के कोरोना संक्रमण मामलों में ठीक होने के बाद अब टेस्ट की जरूरत नहीं है।</div><div class="twitter-tweet twitter-tweet-rendered" style="max-width:550px;width:100%;margin-top:10px;margin-bottom:10px;"><iframe frameborder="0" allowfullscreen="" style="width:550px;height:971px;" title="Twitter Tweet" src="https://platform.twitter.com/embed/Tweet.html?dnt=false&amp;embedId=twitter-widget-0&amp;features=eyJ0ZndfZXhwZXJpbWVudHNfY29va2llX2V4cGlyYXRpb24iOnsiYnVja2V0IjoxMjA5NjAwLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X2hvcml6b25fdHdlZXRfZW1iZWRfOTU1NSI6eyJidWNrZXQiOiJodGUiLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X3NwYWNlX2NhcmQiOnsiYnVja2V0Ijoib2ZmIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH19&amp;frame=false&amp;hideCard=false&amp;hideThread=false&amp;id=1481218305549803520&amp;lang=en&amp;origin=https%3A%2F%2Fwww.loktej.com%2Fadmin_panel%2FNews%2Fadd&amp;sessionId=9461ace509a717026efc3fa6fe0d353e994851f3&amp;theme=light&amp;widgetsVersion=86e9194f%3A1641882287124&amp;width=550px"></iframe></div> <div class="twitter-tweet twitter-tweet-rendered" style="max-width:550px;width:100%;margin-top:10px;margin-bottom:10px;"><iframe frameborder="0" allowfullscreen="" style="width:550px;height:611px;" title="Twitter Tweet" src="https://platform.twitter.com/embed/Tweet.html?dnt=false&amp;embedId=twitter-widget-1&amp;features=eyJ0ZndfZXhwZXJpbWVudHNfY29va2llX2V4cGlyYXRpb24iOnsiYnVja2V0IjoxMjA5NjAwLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X2hvcml6b25fdHdlZXRfZW1iZWRfOTU1NSI6eyJidWNrZXQiOiJodGUiLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X3NwYWNlX2NhcmQiOnsiYnVja2V0Ijoib2ZmIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH19&amp;frame=false&amp;hideCard=false&amp;hideThread=false&amp;id=1481217268214538240&amp;lang=en&amp;origin=https%3A%2F%2Fwww.loktej.com%2Fadmin_panel%2FNews%2Fadd&amp;sessionId=9461ace509a717026efc3fa6fe0d353e994851f3&amp;theme=light&amp;widgetsVersion=86e9194f%3A1641882287124&amp;width=550px"></iframe></div> <div>बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी की कोरोना पर समीक्षा बैठक के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि बैठक के बाद सरकार ने अपनी डिस्चार्ज नीति में बदलाव करते हुए ये फैसला किया है। कोरोना के लक्षणों को हल्के और मध्यम में बांटा गया है।</div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Total 115 confirmed deaths globally due to Omicron and 1 death in India: Lav Agarwal, Joint Secretary, Health Ministry <a href="https://t.co/rbvpxeeEGO">pic.twitter.com/rbvpxeeEGO</a></p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1481215188187893761?ref_src=twsrc%5Etfw">January 12, 2022</a></blockquote> <div>वहीं देश में कोरोना मामलों की स्थिति की बात करें तो 30 दिसंबर को सकारात्मकता दर 1.1% थी, जो अब बढ़कर 11.05% हो गई। कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर तीन महानगर सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरे हैं। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 50 हजार कोरोना संक्रमित तो सिर्फ इन्हीं तीन शहरों में सामने आए हैं। बेंगलुरु के हालात भी ठीक नहीं हैं। दिल्ली में बुधवार को कोरोना के 27,561, मुंबई में 16,420 और कोलकाता में 7,060 लोग कोरोना संक्रमित आए हैं। पिछले दो सप्ताह में आठ यूरोपीय देश दोगुने से अधिक हो गए हैं। देश में सक्रिय मामलों की संख्या 9,55,319 के करीब है।</div><div>ICMR द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार अब से सभी कोरोना रोगियों के लिए टेस्ट की आवश्यकता नहीं है बल्कि केवल बुजुर्गों या गंभीर बीमारी वाले लोगों के साथ उच्च जोखिम वाले के संपर्कों में आने वालों का ही कोरोना टेस्ट होना चाहिए। साथ ही इस दिशानिर्देश में बताया गया है कि होम आइसोलेशन में रहने वालों का कोरोना टेस्ट जरूरी है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/80449/new-guidelines-surfaced-for-corona-know-which-people-will-not-need-test</link>
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                <pubDate>Thu, 13 Jan 2022 09:41:35 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>कोरोना : आईसीएमआर ने मोलनुपिरवीर को कोविड के लिए उपयोगी दवाइयों की सूची से हटाया</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले हप्ते ही मिली थी इस दवा को मजूरी, इस दवा के उपयोग से फायदे से अधिक नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80446/corona-icmr-removes-molnupiravir-from-the-list-of-useful-medicines-for-kovid"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-01/2954_molnupiravir.jpg" alt=""></a><br /><div>देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण का संकट छाया हुआ है। कोरोना की तीसरी लहर में कुछ ही दिनों से रोजाना संक्रमितों का ग्राफ डेढ़ लाख को पार कर रहा है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार को तेजी से बढ़ रहे ओमिक्रॉन और कोविड संक्रमण के मरीजों में इलाज को लेकर चिंता सता रही है। ऐसे में अब इंड‍ियन काउंस‍िल ऑफ मेड‍िकल र‍िसर्च ने हाल ही में कोविड की दवा के रूप में मंजूर हुई मोलनुपिरवीर को लेकर एक अहम फैसला करते हुए  मोलनुपिरवीर को क्लीडन‍िक मैनजमेंट प्रोटोकॉल से हटाने का फैसला ल‍िया है। </div><div>आपको बता दें कि टाइम्सा ऑफ इंड‍िया की जानकारी के अनुसार भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने के नेशनल कोरोना टॉस्कब फोर्स ने मोलनुपिरवीर को कोविड के लिए उपयोगी दवाइयों की सूची से हटा दिया है। इसका मतलबअब मोलनुपिरवीर कोरोना उपचार के ल‍िए न‍िर्धार‍ित की गई दवाओं की सूची से बाहर हो गई है। अंग्रेजी अखबार  ने आध‍िकार‍िक सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। दरअसल सोमवार को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के नेशनल कोरोना टॉस्कर फोर्स की आयोजि‍त बैठक में फोर्स के व‍िशेषज्ञों ने मोलनुपिरवीर से जुड़ी स्वाास्य्पर  च‍िंताओं पर चर्चा की। लम्बी बातचीत के बाद मोलनुपिरवीर को क्लीमन‍िक मैनजमेंट प्रोटोकॉल से हटाने का फैसला ल‍िया गया है।</div><div>गौरतलब है किड्रग रेगुलेटर जनरल इंडिया ने एंटीवायरल दवा और वायरल म्यूटेनेसिस द्वारा SARS-CoV-2 को रोकने में सक्षम मोलनुपिरवीर को  कोरोना रोधी गोली के आपातकालीन प्रयोग के ल‍िए 28 दिसंबर को ही मंजूरी दी थी। इस दवा को क्लीनन‍िक मैनजमेंट प्रोटोकॉल से हटाने के पीछे का मुख्य  कारण इसके उपयोग से होने वाले नुकसान है। मोलनुपिरवीर मनुष्यों की तेजी से विभाजित कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है। इससे पुरुष में प्रजनन अंगों की कोशिकाएं, गर्भवती महिलाओं में भ्रूण, युवा वयस्कों और बच्चों की हड्डी डैमेज हो सकती है। हालांक‍ि ICMR की तरफ से कोरोना उपचार के ल‍िए न‍िर्धारि‍त प्रोटोकॉल से हटाए जाने के बाद भी मोलनुपिरवीर की ब्रिीक्री बंद नहीं की जाएंगी। यह डॉक्टररों के परामर्श से उपलब्धन होगी।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jan 2022 14:19:48 +0530</pubDate>
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