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                <title>Mucoramycosis - Loktej</title>
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                <description>Mucoramycosis RSS Feed</description>
                
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                <title>सूरत : 4 साल के बालक को हुआ ब्लैक फंगस, पूरे राज्य में पहला मामला होने की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[सिविल और स्मीमेर अस्पताल में अब तक हो चुकी है 450 से भी अधिक सर्जरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div><span style="font-size:1rem;">राज्य भर में कोरोना की दूसरी लहर में केस काफी कम हो चुके है। हालांकि कोरोना के बाद ब्लैक फंगस के कई केस सामने आए है, जिसके चलते स्वास्थ्य तंत्र की नींद खराब हो चुकी है। इसी बीच सूरत सिविल अस्पताल में म्यूकरमायकोसिस के इलाज के लिए एक 4 साल के बच्चे को सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया था। छोटी सी उम्र में म्यूकरमायकोसिस की बीमारी का शायद यह पहला किस्सा होने की संभावना विकत की जा रही है। </span><br /></div><div>सिविल अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, हर दिन कोरोना के साथ-साथ म्यूकरमायकोसिस के केसों में भी इजाफा हुआ है। सिविल में आज कोरोना के नए 12 मरीज सामने आए थे, जिसमें से 5 पुरुष और 7 महिला थे। इन सभी में एक 14 साल का बालक भी शामिल था। जिसे सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया था। हालांकि अभी तक उसका RT-PCR टेस्ट नहीं आया है। </div><div>सूत्रों ने बताया कि कोरोना के साथ-साथ म्यूकरमायकोसिस के केसों में भी इजाफा हो रहा है। शनिवार को एक चार साल के बालक को भी म्यूकरमायकोसिस के रिपोर्ट के साथ अस्पताल में भर्ती किया गया था। बता दे कि नए तीन मरीजों के साथ अब सिविल और स्मिमेर में अब म्यूकरमायकोसिस के 50 मरीज भर्ती है। अब तक दोनों अस्पताल में मिलाकर 491 सर्जरी की जा चुकी है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/71050/surat-black-fungus-in-4-year-old-boy-likely-to-be-the-first-case-in-the-entire-state</link>
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                <pubDate>Sat, 24 Jul 2021 21:01:33 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नकली ब्लैक फंगस की दवा बेचने वाले की जमानत याचिका हुई खारिज, जानें क्या कहा कोर्ट ने</title>
                                    <description><![CDATA[जरूरत के समय नकली इंजेक्शन बेचने का कृत्य एक जघन्य अपराध - कोर्ट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div>कानपुर (यूपी), 21 जुलाई (आईएएनएस)| कानपुर की एक विशेष अदालत ने मधुरम बाजपेयी उर्फ सुमंत की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जमानत याचिका को विशेष न्यायाधीश, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट कोर्ट, कानपुर नगर, विकास गोयल ने खारिज कर दिया। <span style="font-size:1rem;">आरोपी ने अपनी जमानत अर्जी में दावा किया कि 27 मई, 2021 को उसके खिलाफ नहीं बल्कि ज्ञानेश कुमार और प्रकाश मिश्रा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और उसे व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के कारण मामले में फंसाया गया था।</span></div><div><span style="font-size:1rem;">उसने याचना की कि पुलिस ने उसके कब्जे से कुछ भी बरामद नहीं किया है और सह-आरोपी में से एक प्रकाश मिश्रा पहले ही जमानत पर रिहा हो चुका है, इसलिए अदालत को उसे भी जमानत देनी चाहिए। </span><span style="font-size:1rem;">अतिरिक्त जिला सरकारी वकील (एडीजीसी) संजय झा ने उनकी जमानत का विरोध करते हुए कहा कि ग्वालटोली पुलिस ने ज्ञानेश कुमार शर्मा और प्रकाश मिश्रा को गिरफ्तार किया था और कार के डैशबोर्ड से 68 लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन ब्रांड एम्फिनेक्स और 1.80 लाख रुपये की राशि बरामद की थी।</span></div><div><span style="font-size:1rem;">जांच के दौरान, उन्होंने पुलिस के सामने स्वीकार किया था कि बरामद इंजेक्शन पंकज अग्रवाल, मधुरम वाजपेयी और शुभम तिवारी द्वारा आपूर्ति किए गए थे। </span><span style="font-size:1rem;">अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर सीमा सिंह ने मौके से नमूने जमा किए थे, जिन्होंने लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन ब्रांड एम्फोनेक्स के 68 इंजेक्शन बरामद किए थे, जिसे आरोपी जरूरतमंद मरीजों के परिजनों को सप्लाई करता था। </span><span style="font-size:1rem;">एडीजीसी ने आगे कहा कि सरकारी लैब ने इंजेक्शन के नमूनों की जांच के बाद उन्हें नकली इंजेक्शन घोषित किया था।</span></div><div><span style="font-size:1rem;">कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "संकट के दौरान नकली इंजेक्शन बेचना मानवता के खिलाफ जघन्य अपराध है। यह अदालत दूसरी अदालत के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है। चूंकि ज्ञानेश कुमार शर्मा और विजय कुमार की जमानत अर्जी खारिज हो गई थी, इसलिए मधुरम बाजपेयी की जमानत याचिका भी खारिज की जा रही है क्योंकि उन्हें जमानत पर रिहा करने का कोई उचित आधार नहीं है।"</span></div><div>(Disclaimer: यह खबर सीधे समाचार एजेंसी की सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है। इसे लोकतेज टीम ने संपादित नहीं किया है।)<br /><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/82658/the-bail-plea-of-the-seller-of-fake-black-fungus-medicine-was-rejected-know-what-the-court-said</link>
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                <pubDate>Wed, 21 Jul 2021 15:11:43 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अहमदाबाद: अस्पताल में भर्ती होने वाले आधे से अधिक म्युकर माइकोसिस मरीजों को पड़ती है ऑपरेशन की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[दिन बा दिन कम हो रही है ब्लैकफंगस के मरीजों की संख्या]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/85952/ahmedabad-more-than-half-of-mucor-mycosis-patients-admitted-to-hospital-require-operation"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/9695_black-fungus-virus-mucormycosis2.jpg" alt=""></a><br /><div>कोरोना महामारी के असर के कम होने के साथ ही एक नई समस्या ने जन्म ले लिया। इस समय कोरोना के पीड़ित होने के बाद म्युकर माइकोसिस यानी ब्लैक फंगस के कई मामले सामने आ रहे है। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल सिविल अस्पताल के ईएनटी विभाग के डॉ कृष्ण कुमार ने बताया कि इस समय अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में म्युकर माइकोसिस के 215 मरीजों का इलाज चल रहा है। हालांकि म्युकर माइकोसिस के कारण रोजाना अस्पताल में भर्ती होने वाले नए मरीजों की संख्या में कमी आई है। वहीं सिविल सूत्रों ने बताया कि अब तक कुल 1250 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 50 फीसदी या इससे ज्यादा मरीजों की सर्जरी करनी ही पड़ी है। सिविल में अब तक म्यूकर माइकोसिस के 675 ऑपरेशन किए जा चुके हैं।</div><div>आपको बता दें कि सिविल अस्पताल के सूत्रों के अनुसार सिविल अस्पताल में रोजाना करीब 15 से 18 मरीज ठीक हो रहे हैं, जिन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल रही, जबकि प्रतिदिन चार-पांच तो कभी दस मरीज नए मरीज अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। ऐसे में डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ते हुए अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या करीब 215 हो गई है जो एक समय मई में कुल मरीजों की संख्या एक समय 450 को पार कर गई थी।</div><div>सिविल में हर दिन म्युकर माइकोसिस से एक मरीज की मौत होती है। वहीं सिविल कैंपस डेंटल अस्पताल में 250 से अधिक लोगों का ऑपरेशन किया गया है, जिसमें मरीजों के दांत और जबड़े समेत जबड़े या तालु को हटाना पड़ा, जबकि चार मरीजों की आंखों का ऑपरेशन करना पड़ा। वहीं सिविल अस्पताल में 15 से ज्यादा मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं। म्यूकर माइकोसिस में डेंटल सर्जरी की संख्या में वृद्धि के साथ, किडनी अस्पताल में दो और स्पाइन अस्पताल में एक ऑपरेशन थिएटर शुरू किया गया था, अब मामलों में गिरावट के कारण स्पाइन इंस्टीट्यूट में ऑपरेटिंग थिएटर बंद कर दिया गया है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jun 2021 15:35:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मरीज के सर में से निकली क्रिकेट बोल के साइज की फंगस, डॉक्टर भी हुए हैरान</title>
                                    <description><![CDATA[आंखो को नुकसान पहुंचाए बिना संक्रमण पहुंचा सीधा दिमाग में, तीन घंटे की सर्जरी के बाद निकला फंगस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/82479/the-cricket-ball-sized-fungus-that-came-out-of-the-patient-s-head-surprised-even-the-doctor"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/9695_black-fungus-virus-mucormycosis1.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश भर में कोरोना की दूसरी लहर कम होने लगी है। हालांकि एक महामारी के बाद दूसरी महामारी ने लोगों की तकलीफ़ों को बढ़ाए रखी है। कोरोना के बाद देश भर में ब्लैक फंगस के कहरे ने लोगो को परेशान कर रखा है। उसमें भी यह बीमारी अधिकतर कोरोना संक्रमित होकर ठीक हुये लोगों में ही अधिक देखने मिल रही है। जिसके चलते कोरोना के मरीजों को और भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बिहार से एक काफी हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक मरीज के सर में से एक क्रिकेट बोल के साइज़ की फंगस बाहर निकाली गई। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">विस्तृत जानकारी के अनुसार, पटना के इंदिरा गांधी मेडिकल इंस्टीट्यूट के ईएनटी विभाग के डॉक्टरों के अनुसार उनके यहाँ भर्ती 60 वर्षीय मरीज अनिल कुमार को आए दिन खींच आती रहती थी। जिसके चलते वह बार-बार बेहोश हो जाते थे। पिछले 15 दिनों से इस समस्या से परेशान अनिल कुमार की स्थिति काफी गंभीर थी। जिसके चलते उनके परिवार वाले उन्हें अस्पताल ले आए। जहां जांच करने पर पता चला की उनके सर में ब्लैक फंगस का संक्रमण पहुँच चुका है और उनकी जल्द से जल्द सर्जरी करवाने के निर्णय लिया गया। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">तीन घंटे की सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने उनके सर में से एक क्रिकेट के बोल जितनी बड़ी फंगस बाहर निकाली थी। अनिल कुमार के दिमाग में ब्लैक फंगस के अधिक संक्रमण के कारण ही उन्हें बार-बार खींच आती थी और वह बेहोश हो जाते थे। सर्जरी के बाद अब मरीज की स्थिति काफी अच्छी है। आम तौर पर फंगस दिमाग में पहुँचने के पहले आंखो को नुकसान करता है, पर इस केस में फंगस का संक्रमण आंखो की जगह सीधा दिमाग तक पहुँच गया था। </span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Jun 2021 20:11:25 +0530</pubDate>
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                <title>अहमदाबाद के अस्पताल में सर्वे; म्युकर मायकोसिस के 20% मरीज ऐसे जिन्हें कोरोना हुआ ही नहीं था!</title>
                                    <description><![CDATA[बीमारी के 70 प्रतिशत मरीज है डायाबिटिस का शिकार, 10 प्रतिशत मरीजों की उम्र 45 से नीचे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67331/survey-at-ahmedabad-hospital-20-of-patients-with-mucosal-mycosis-who-did-not-have-corona-at-all"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/9695_black-fungus-virus-mucormycosis.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश भर में कोरोना के बाद म्युकर मायकोसिस महामारी से लोग परेशान है। कोरोना से ठीक होने के बाद होने वाली इस महामारी के बारे में एक और सच्चाई सामने आई है। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में हुये एक सर्वे में पता चला है की कई मरीज तो ऐसे भी है, जिन्हें कोरोना बीमारी ही नहीं थी। बता दे की अहमदाबाद में सिविल अस्पताल में अब तक 1011 जीतने म्युकर मायकोसिस के मरीज दर्ज हो चुके है, जिसमें से 77 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">इन मरीजों के ऊपर किए एक सर्वे में सामने आया कि लगभग 20 प्रतिशत किस्सों में तो म्युकर मायकोसिस के मरीजों को कभी कोरोना हुआ ही नहीं था। मतलब कि हर पाँच में से एक आदमी बिना कोरोना संक्रमित हुये म्युकर मायकोसिस का शिकार हुआ है। हालांकि इसके बारे में ऐसा भी कहा जा रहा है कि हो सकता है कि इन लोगों को कोरोना हुआ भी हो और वह ठीक भी हो गए हो। पर उन्होंने कोरोना की रिपोर्ट निकलवाई ही ना हो। इन सभी मरीजों में 80 प्रतिशत मरीज ऐसे थे, जिन्हें डायाबिटिस की बीमारी भी है। इसके अलावा सभी मरीजों में 10 प्रतिशत मरीज 45 साल से कम उम्र के थे। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">सिविल में म्युकर मायकोसिस के अब तक के सभी मरीजों में 17 मरीजों की आँख निकालनी पड़ी है। वहीं 160 से भी अधिक लोगों के दाँत और जबड़े निकालने पड़े है। म्युकर मायकोसिस के 70 प्रतिशत मरीज 45 से 65 के बीच थी। जबकि 20 प्रतिशत मरीजों की उम्र 65 साल या उससे अधिक थी। फिलहाल तो सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या भी कम हुई है, जिसके चलते डॉक्टरों ने भी राहत की सांस ली है। जहां पहले हर दिन डॉक्टरों को 35 सर्जरी करनी पड़ती थी, वहीं अब अधिक से अधिक 15 सर्जरी करने की नौबत आती है। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">पहले हर दिन अस्पताल में म्युकर मायकोसिस के 40 से 50 नए मरीज भर्ती होते थे। पर अब हर दिन लगभग 10 या 20 मरीज ही आते है। इन सबके अलावा इलाज के लिए जरूरी इंजेक्शन की भी अब कमी नहीं है। </span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jun 2021 15:55:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कौन कहता है सरकारी अस्पताल के इलाज पर लोग भरोसा नहीं रखते? बीमा कंपनी के इस मैनेजर की कहानी जानें</title>
                                    <description><![CDATA[50 लाख का मेडिकल इन्स्योरंस होने के बावजूद इलाज के लिए पसंद किया अहमदाबाद की सिविल अस्पताल को]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/85915/who-says-people-don-t-trust-government-hospital-treatment-know-the-story-of-this-insurance-company-manager"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/7808_s10-02062021.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश भर में कोरोना और ब्लैक फंगस के केसों ने कोहराम मचा कर रखा है। एक और जहां कोरोना के केस कम होने लगे, वहीं दूसरी और ब्लैक फंगस के केसों ने लोगों की जान हलक में रखी हुई है। लगातार बढ़ रहे ब्लैक फंगस के केसों के कारण सरकार ने म्यूकरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस को महामारी भी घोषित कर दिया है। सरकार द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हालांकि अभी भी कई लोग सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने से डरते है, ऐसे में अहमदाबाद से सामने आए एक मामले के बाद लोग सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर हो जाएगे। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">न्यूज वैबसाइट Meranews.com की जानकारी के अनुसार, खेड़ा जिले के नडियाद में रहने वाले विलासभाई आंबेटकार जो की एक निजी बीमा कंपनी में आसिस्टनट डिवीज़नल मैनेजर के तौर पर काम करते थे। पिछली 20 अप्रैल को विलासभाई कोरोना संक्रमित हुये थे, जिसके चलते उन्होंने नडियाद की एक निजी अस्पताल में इलाज करवाया था। इस दौरान उन्हें काफी समय के लिए ऑक्सीज़न की जरूरत पड़ी थी और उन्हें रेमड़ेसिविर इंजेक्शन भी दिया गया था। इसके बाद वह ठीक हो गए थे। हालांकि 15 मई के आसपास उन्हें अचानक आँख के आसपास के हिस्सों में दर्द शुरू होने लगा और सूजन भी हो गया। जिसके चलते उन्होंने 16 मई को एक निजी डॉक्टर की सलाह के अनुसार एमआरआई और एंडोस्कोपि का रिपोर्ट करवाया, जिसमें उन्हे सायनस फंगस होने की जानकारी मिली। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">विलासभाई पहले से ही डायबिटिस, थाइरोइड और आर्थराइटिस जैसी बीमारी से परेशान थे। इसलिए वह बिना कुछ सोचे अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती हो गए। जहां उन्हें म्यूकरमाइकोसिस के लिए बनाए गए वोर्ड में ले जाया गया। जहां बायोप्सी के बाद 24 तारीख को उनकी सफलतापूर्वक चेकिंग की गई। सर्जरी के बाद अभी विलासभाई सिविल में ही भर्ती है। अपने इलाज के बारे में बात करते हुये विलासभाई कहते है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें एक सरकारी अस्पताल में इतना अच्छा इलाज मिल सकेगा। यहाँ डॉक्टर से लेकर सफाई कर्मचारी सभी अपना कार्य काफी बखूबी निभा रहे है। अस्पताल में सभी कर्मचारियों के ऊपर काम का काफी ज्यादा लोड है, इसके बावजूद वह मरीजों कि सेवा करने के लिए अपने सभी प्रयास कर रहे है। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">बता दे कि विलासभाई के पास कंपनी द्वारा दिया गया 50 लाख रुपए का जीवनरक्षक मेडिकल कवच था। जिसके चलते वह किसी भी निजी अस्पताल में आसानी से काम करवा सकते थे। हालांकि इसके बावजूद उन्होंने अपना इलाज करवाने के लिए सरकारी अस्पताल को ही चुना। उल्लेखनीय है कि अहमदाबाद के असरवा इलाके में आई सिविल अस्पताल एशिया की सबसे बड़ी अस्पताल है, जहां पिछले डॉ महीनों में ही 852 म्यूकरमाइकोसिस के मरीजों को भर्ती करवाया गया है। इन मरीजों में से 456 मरीजों की सफल सर्जरी भी हो चुकी है। </span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 18:06:56 +0530</pubDate>
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                <title>मरीज को हुई ब्लैक फंगस की बीमारी तो परिवार वालों ने बुलाया तांत्रिक, जानें फिर क्या हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी सहायता पर अस्पताल में इलाज करवाने की हुई थी व्यवस्था फिर भी परिवार अस्पताल से ले आया घर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/82415/the-patient-got-the-disease-of-black-fungus-then-the-family-members-called-tantric-find-out-what-happened-then"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/4314_s3-02062021.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश भर में कोरोना महामारी और उसके बाद फैली हुई ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस बीमारी ने काई लोगों को अपना शिकार बनाया है। हालांकि इन गंभीर बीमारियों का इलाज करवाने के लिए आज भी देश का एक वर्फ डॉक्टरों एक अलावा तांत्रिक और भूवा -भगत पर अधिक विश्वास रखता है। हालांकि इस अंधश्रद्धा के कारण कई लोगों की जान भी चली जाती है, फिर भी वह इन तांत्रिक लोगों पर अधिक भरोसा रखते है। कुछ ऐसा ही एक किस्सा राजस्थान के बाड़मेर जिले के कल्याणपुर इलाके में से सामने आया है। जहां परिजन ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज को अस्पताल में इलाज करवाने के बदले तांत्रिक के पास ले गए। खास बात तो यह मरीज का इलाज सरकारी सहाय से की जा रही थी। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">विस्तृत जानकारी के अनुसार, सांवलाराम देवासी नाम के इस 55 वर्षीय बुजुर्ग को 26 मई के दिन आंखो में जलन होने लगी। हालांकि इसके बाड़ तबीयत अधिक बिगड़ने के कारण परिजन बुजुर्ग को बालोतरा चिकित्सालय ले गए। जहां से बुजुर्ग को ब्लैक फंगस की जांच के लिए जोधपुर रिफर कर दिया गया। जहां डॉक्टरों ने इलाज के दौरान दोनों आंखो का तेज चले जाने की और जरूरत पड़ने पर जबड़ा निकाल देने की बात भी कही। जिसके चलते परिजन बिना इलाज करवाए ही मरीज को गाँव वापिस आ गए। अस्पताल में से मरीज के चले जाने की जानकारी मिलने पर सर्वे टीम द्वारा मरीज के घर जाकर जांच की गई। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">इसके बाद स्थानिक प्रशासन और अन्य अधिकारियों ने काफी परेशानियों के बाद बुजुर्ग को वापिस इलाज के लिए अस्पताल भेजे को मनाने में सफल हुए। जिसके चलते सरकारी सहायता द्वारा 30 मई को मरीज को फिर से एम्स में दाखिल किया गया। जहां फिर से डॉक्टरों ने उन्हें मरीज की आंखे और जबड़ा निकालने की जरूरत होने की बात कही। यह बात सुनते ही मरीज के परिजन उसे फिर से अस्पताल से वापिस ले आए। हालांकि इस बार गाँव वालों ने उन्हें गाँव में नहीं घुसने दिया। जिसके चलते परिजन मरीज को खेत में बनी हुई एक वाडी में ले गए, जहां तांत्रिक को बुलाकर उसके पास विधि करवाने लगे। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">इस बारे में मरीज के पुत्र हीरराम देवासी का कहना है की यदि जबड़ा और आँख ही निकाल दी जाये तो उनकी चेहरे में कुछ बचेगा ही नहीं। ऐसे में यदि शरीर के महत्वपूर्ण अंग ही निकाल देने से अच्छा वह उन्हें घर पर ही रखकर उनका इलाज कर लेंगे। </span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 16:38:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अहमदाबाद : ब्लैक फंगस के डर से बुजुर्ग ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में किया खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ ही समय पहले कोरोना से ठीक हुये थे बुजुर्ग मधुमेह की बीमारी से भी थे पीड़ित, मुंह में छाले पड़ने से हुई ब्लैक फंगस होने की हुई भीती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div><span style="font-size:1rem;">देश भर में कोरोना महामारी ने अपना कहर ढाया हुआ है। कोरोना के साथ-साथ अब ब्लैक फंगस ने भी अपना सर उठाना शुरू कर दिया है। आए दिन ब्लैक फंगस के कारण कई लोगों के मरने की खबरें सामने आ रही है। इस बीमारी का इलाज भी काफी मुश्किल साबित हो रहा है। क्योंकि इलाज के लिए इंजेक्शन के कमी की बात सामने आ रही है। कई मामलों में मरीज के इलाज के लिए उनके दाँत और जबड़े भी निकालने पड़े है। ऐसे में अहमदाबाद में एक बुजुर्ग ने ब्लैक फंगस के डर के कारण अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली होने की बात सामने आई है। </span><br /></div><div>पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद के पालड़ी इलाके के अमन अपार्टमेंट में रहने वाले बुजुर्ग ने गुरुवार के दिन छत पर जाकर किटनाशक पी लिया। जिसके बाद उनको इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान शनिवार को उनकी मौत हो गई। बुजुर्ग इसके पहले कोरोना से संक्रमित हो चुके थे, हालांकि इलाज के बाद अब वह कोरोना से उबर चुके थे। कोरोना से उबरने के बाद अचानक से उनके मुंह में छाले पड गए। जिसके चलते उन्हें खुद को ब्लैक फंगस होने की आशंका हुई।</div><div>आत्महत्या के पहले बुजुर्ग ने एक सुसाइड नोट लिखी थी, जिसमें सामने आया की बुजुर्ग को खुद को ब्लैक फंगस हो गए होने का डर सता रहा था। क्योंकि वह कुछ ही समय पहले कोरोना से ठीक हुये थे और वह मधुमेह से पीड़ित भी है। ऐसे में उन्हें ब्लैक फंगस के कारण खुद की परिस्थिति बिगड़ने का डर सता रहा था। जिसके चलते उन्होंने आत्महत्या कर ली। पूरे मामले में पुलिस ने दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। </div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अहमदाबाद</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/85911/ahmedabad-elderly-man-commits-suicide-for-fear-of-black-fungus-reveals-in-suicide-note</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Jun 2021 14:28:19 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी हैदराबाद ने ढूँढी ब्लैक फंगस की सबसे सस्ती दवा, कीमत मात्र 200 रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[60 मिलीग्राम दवा से किया जा सकेगा ब्लैक फंगस, क्लीनिकल ट्रायल की मांगी अनुमति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/82400/the-cheapest-medicine-for-black-fungus-found-by-iit-hyderabad-price-only-rs"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/9695_black-fungus-virus-mucormycosis1.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश भर में इस समय कोरोना के साथ-साथ काले फंगस का प्रकोप देखने रहा है। कोरोना काल में यह बीमारी अब तक कई लोगों की जान ले चुकी है। बता दे की ब्लैक फंगस का इलाज बहुत महंगा है और इसके अलावा इलाज के जरूरी इंजेक्शन भी काफी मुश्किल से मिलता है। इन सभी समस्याओं का निराकरण लाते हुये IIT हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी दवा ढूंढ निकली है, जो ब्लैक फंगस का इलाज कर सकेगी और इसकी कीमत भी अधिक नहीं है। </span><br /></div><div>आईआईटी हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने ब्लैक फंगस एक मरीजों के लिए ऐसी दवा का इजात किया है जो मुंह से दी जा सकेगी। इस रिसर्च के पीछे प्रोफेसर सप्तर्षि मजूमदार, डॉ. चंद्रशेखर शर्मा और उनके पीएचडी स्कॉलर मृणालिनी गेधाने और आनंदिता लाहा पिछले दो साल से काम कर रहे थे। अपनी दो साल की रिसर्च के बाद रिसर्चर्स को इस बात पर पूरा विश्वास है की इस दवा का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जा सकेगा। </div><div>बता दे की इस 60 मिलीग्राम के टेबलेट की कीमत मात्र 200 रुपए है। संस्था ने कहा, वर्तमान में देश में ब्लैक और अन्य प्रकार के फंगस के संक्रमण से परेशान है। जिसके लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शन काफी महंगे है। जिसके चलते जल्द से जल्द इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल को अनुमति देनी चाहिए। जिससे की जल्द ही लोगों के लिए यह दवा उपलब्ध करवाई जा सके। डॉ शर्मा ने कहा की यह तकनीक बौद्धिक संपदा अधिकारों से मुक्त है, ताकि इसे व्यावसायिक स्तर पर उत्पादित किया जा सके और जनता के लिए उचित और आसानी से उपलब्ध हो।"</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 May 2021 19:34:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मत पहनना पसीने या बारिश से भीगा मास्क, हो सकता है भारी नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश की सीजन में ब्लैक फंगस के केसों के बढ्ने की संभावना, पसीने या बारिश से भीगे मास्क को लगातार बदलने की सलाह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67259/do-not-wear-masks-soaked-with-sweat-or-rain-it-can-be-a-huge-loss"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/corona-virus-mask.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश भर में कोरोना की दूसरी लहर लोगों के लिए आफत का कारण बनी हुई है। ऐसे में सरकार द्वारा सभी को मास्क पहनने की हिदायत दी गई है। हालांकि कोरोना के अलावा अब ब्लैक फंगस के बढ़ते केसों के कारण दिन में एक से अधिक मास्क बदलने की नौबत आई है। कोरोना लहर की दूसरी लहर में कोरोना के केसों के अलावा ब्लैक फंगस के केस भी काफी बढ़ चुके है। ऐसे में ब्लैक फंगस के बढ़ते केसों के बारे में बात करते हुये राज्य आरोग्य विभाग के उच्च अधिकारी द्वारा मास्क पहनने में भी काफी सावधानी रखने की अपील की गई है।</span><br /></div><div>बता दे की कुछ ही समय में बारिश का सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में बारिश में मास्क का गीला हो जाना काफी आम बात है। जिसे लेकर लोगों को चेताया गया है। विशेषज्ञों ने लोगों को चेताते हुये बताया है की ब्लैक फंगस से बचने के लिए गीले मास्क का इस्तेमाल बिलकुल नहीं करना चाहिए। बारिश के दौरान लोगों को इस बारे में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि बारिश के दौरान ब्लैक फंगस के केसों के बढ्ने की संभावना व्यक्त की जा रही है।</div><div>उच्च अधिकारियों द्वारा सलाह दी गई है गर्मी में भी पसीने के कारण जब मास्क गीला हो जाये तो उसे बदल देना चाहिए। हमेशा एक ही मास्क पहनने से भी बचने की सलाह उच्च अधिकारियों द्वारा दी गई है। </div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 May 2021 18:22:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>संक्रमित मामलों में कमी पर लापरवाही ना दिखाए सरकार, शुरू करें तीसरी लहर की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य भर में म्यूकोरिया के इंजेक्शनों की कमी, सरकार की बनाई नीति निश्चित और स्पष्ट नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67241/government-should-not-show-negligence-on-reduction-in-infected-cases-start-preparations-for-third-wave"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/gujarat-high-court2.jpg" alt=""></a><br /><div>गुजरात में कोरोना की दूसरी लहर पर सुओमोटो के आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि कोरोना के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन सरकार को कमी को लेकर आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए और तीसरी लहर पर अंकुश लगाने के प्रयास करने चाहिए। आज अपलोड किए गए आदेश में न्यायमूर्ति बेलाबाहेन त्रिवेदी और न्यायमूर्ति भार्गव डी करिया की पीठ ने कहा कि म्यूकोरिया के इलाज के लिए इंजेक्शन की राज्यव्यापी कमी है और इसके वितरण के लिए सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसके वितरण को प्रभावी बनाने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है।</div><div>उच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य भर में कोविड के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इसलिए उम्मीद की एक किरण जगी है और स्थिति में सुधार होता दिख रहा है। हालांकि, कोरोना की लहरों और उसके उतार-चढ़ाव के बारे में कोई भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी। कोर्ट का मानना है कि सरकार को आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए और कोरोना मामलों के संक्रमण के प्रभाव और इसके प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए कोरोना की तीसरी लहर के लिए सर्वोत्तम प्रयास करने चाहिए। चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी तीसरी लहर की आशंका जताई है। साथ ही सरकार को अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं स्थापित करनी चाहिए। न केवल एक नया स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए बल्कि आवश्यक मशीनों और प्रशिक्षित कर्मचारियों को भी वहां नियुक्त किया जाना चाहिए।</div><div>म्यूकोर्मिकोसिस के इलाज के लिए एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की वितरण नीति के संबंध में उच्च न्यायालय ने कहा था कि राज्य भर में इन इंजेक्शनों की कमी है और इसके वितरण के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीति निश्चित और स्पष्ट नहीं लगती है। इसलिए प्रत्येक जिले में विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर उचित व्यवस्था की जाए। साथ ही किस अस्पताल में कितने इंजेक्शन का प्रयोग किया गया है, इसका डाटा भी स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाए।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 May 2021 11:52:51 +0530</pubDate>
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                <title>ब्लैक फंगस से झूझता परिवार : 41 लाख खर्च होने के बाद भी अभी ईलाज बाकी</title>
                                    <description><![CDATA[ब्लैक फंगस के कारण अब तक 6 बार हो चुकी है सर्जरी, बीमारी के खर्च से निपटने के लिए बेचना पड़ा घर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67228/family-struggling-with-black-fungus-even-after-spending-rs-41-lakh-treatment-is-still-pending"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-05/3768_s14-26052021.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश में कोरोना महामारी के बीच ब्लैक फंगस के केस भी बढ़ रहे है। दूसरी लहर में कोरोना से रिकवर हुये मरीजों पर ब्लैक फंगस का खतरा मंडरा रहे होने की संभावना काफी अधिक बनी हुई है। एक तरफ जहां कोरोना के केस कम हो रहे है, वही दूसरी और ब्लैक फंगस के केस बढ्ने लगे है। ऐसे में एक महामारी के खतम होने की बाद दूसरी महामारी से निपटना पड़े ऐसी स्थिति हो गई है। गुजरात में ब्लैक फंगस के केसों में असामान्य वृद्धि देखी गई है। ऐसे में आज हम एक ऐसे मरीज की बात करेंगे। जो पिछले 5 महीनो से ब्लैक फंगस से ठीक ही नहीं हुआ। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजकोट के रहने वाले विमल दोषी कुछ समय पहले कोरोना से संक्रमित हो गए थे। विमल ने कोरोना को तो मात दे दी, पर इसके बाद वह ब्लैक फंगस का शिकार हो गए। विमल को अब तक ब्लैक फंगस के लिए 39 इंजेक्शन दिये जा चुके है। पिछले पाँच महीनों में उन्होंने 6 बार सर्जरी करवा ली है और उनकी 7वीं सर्जरी भी होने जा रही है। इस बारे में जानकरी देते हुये विमल की पत्नी चाँदनी कहती है की काम के कारण वह लगातार अहमदाबाद रहते थे। जहां नवंबर 2020 में वह कोरोना संक्रमित हुये। जिसके चलते 15 दिन तक उनका इलाज किया गया।</span><br /></div><div>इस दौरान उन्हें ऑक्सीज़न के साथ-साथ स्टेरोइड भी दिया गया। पत्नी के अनुसार उन्हें नाक में ब्लैक फंगस का इन्फेक्शन हुआ था। उन्होंने अब तक 39 इंजेक्शन ले लिया है और 6 बार उनकी सर्जरी भी हो चुकी है। ब्लैक फंगस के कारण वह पिछले 5 महीनों से आनंद में रह रहे है। विमल की पत्नी का कहना है पति के इलाज में अब तक उनकी पूरी बचत खत्म हो चुकी है। यही नहीं उन्हे उनका घर भी बेचना पड़ा है। पति के इलाज में अब तक 41 लाख रुपए का खर्च हो चुका है और अभी भी 10 से 15 लाख रुपयों की जरूरत है। पत्नी ने बताया की अब तक उनकी चार लेप्रोस्कोपी, एक फॉरहेड सर्जरी और एक ब्रेन सर्जरी हो चुकी है। एक बार ठीक हो जाने के बाद भी फिर से उनके दिमाग में ब्लैक फंगस का इन्फेक्शन देखने मिला था। </div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 May 2021 18:34:12 +0530</pubDate>
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