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                <title>Supreme Court - Loktej</title>
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                <description>Supreme Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट लेडी एसोसिएशन ने बीसीजी के नवनियुक्त सदस्य एडवोकेट प्रीति जोशी का किया सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत : सुप्रीम कोर्ट लेडी एसोसिएशन द्वारा एडवोकेट प्रीति जिग्नेश जोशी को बार काऊन्सील ऑफ (बीसीजी) के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की नई सदस्य बनने पर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्हें शॉल और पुस्तक भेंट कर अभिनंदन किया गया।</p>
<p>सम्मान समारोह का आयोजन एडवोकेट प्रेरणा कुमारी और भक्ति सेठी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी ने एडवोकेट प्रीति जोशी को सम्मानित किया।</p>
<p>इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट की कई वरिष्ठ महिला अधिवक्ताएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में सूरत से एडवोकेट दीपिका चावड़ा की भी विशेष उपस्थिति रही।</p>
<p>समारोह के दौरान महिला अधिवक्ताओं ने न्यायिक क्षेत्र में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/147317/supreme-court-lady-association-honored-advocate-preeti-joshi"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-05/b26052026-04.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत : सुप्रीम कोर्ट लेडी एसोसिएशन द्वारा एडवोकेट प्रीति जिग्नेश जोशी को बार काऊन्सील ऑफ (बीसीजी) के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की नई सदस्य बनने पर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्हें शॉल और पुस्तक भेंट कर अभिनंदन किया गया।</p>
<p>सम्मान समारोह का आयोजन एडवोकेट प्रेरणा कुमारी और भक्ति सेठी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी ने एडवोकेट प्रीति जोशी को सम्मानित किया।</p>
<p>इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट की कई वरिष्ठ महिला अधिवक्ताएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में सूरत से एडवोकेट दीपिका चावड़ा की भी विशेष उपस्थिति रही।</p>
<p>समारोह के दौरान महिला अधिवक्ताओं ने न्यायिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उपलब्धियों की सराहना करते हुए एडवोकेट प्रीति जोशी के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 19:25:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीबीएसई की 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए त्रि-भाषा नीति के खिलाफ याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">23 मई (वेब वार्ता)। उच्चतम न्यायालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने की नई नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। यह याचिका नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुड़गांव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नोएडा और चेन्नई के अभिभावकों तथा शिक्षकों द्वारा दायर की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने दलील दी कि इस नियम को अचानक लागू करने से 10वीं कक्षा की बोर्ड</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/147264/6a116a1af0d27"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">23 मई (वेब वार्ता)। उच्चतम न्यायालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने की नई नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। यह याचिका नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुड़गांव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नोएडा और चेन्नई के अभिभावकों तथा शिक्षकों द्वारा दायर की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने दलील दी कि इस नियम को अचानक लागू करने से 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए छात्रों की तैयारी प्रभावित होगी और उन पर अनुचित शैक्षणिक बोझ पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वरिष्ठ अधिवक्ता रोहतगी ने तर्क दिया कि जो छात्र अब तक केवल दो भाषाएं पढ़ रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें अब अचानक 9वीं कक्षा के स्तर पर एक अतिरिक्त भाषा सीखनी होगी और 10वीं कक्षा में उसकी परीक्षा देनी होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे छात्रों के बीच भ्रम और शैक्षणिक अराजकता की स्थिति पैदा होगी। दलीलों पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा कि इस मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह चुनौती सीबीएसई द्वारा 15 मई को जारी एक परिपत्र (सर्कुलर) से जुड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके माध्यम से </span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अध्ययन योजना</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप लाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">संशोधित ढांचे के तहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1 जुलाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 से 9वीं कक्षा में प्रवेश करने वाले छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। विदेशी भाषा का विकल्प केवल तभी चुना जा सकता है जब शेष दो भाषाएं भारतीय हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अथवा इसे एक अतिरिक्त चौथे विषय के रूप में लिया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ताओं के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह नीति सीबीएसई की इससे पहले 9 अप्रैल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 को जारी अधिसूचना से बिल्कुल अलग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें 9वीं कक्षा के स्तर पर तीसरी भाषा की अनिवार्यता को शैक्षणिक सत्र 2029-30 तक के लिए टाल दिया गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">याचिका में दावा किया गया है कि इस नीति को अचानक लागू करने से उन छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ पड़ेगा जो पहले से ही बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि स्कूलों में बुनियादी ढांचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षित शिक्षकों और पर्याप्त अध्ययन सामग्री की कमी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें आरोप लगाया गया है कि 9वीं कक्षा के छात्रों को अतिरिक्त भाषा सीखने के लिए छठी कक्षा के स्तर की पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर रहने का निर्देश देना शिक्षण पद्धतियों की अपर्याप्तता को दर्शाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्थक भाषा ज्ञान को। याचिका में गैर-हिंदी भाषी राज्यों के छात्रों पर इस नीति के असमान प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई है और नई शुरू की गई तीसरी भाषा के लिए एक स्पष्ट मूल्यांकन ढांचे की अनुपस्थिति की ओर इशारा किया गया है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 14:20:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट से टीएमसी को बड़ा झटका: मतगणना कर्मियों की नियुक्ति पर चुनाव आयोग का फैसला बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 02 मई (वेब वार्ता)। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती के लिए कर्मचारियों के चयन पर सवाल उठाने वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की याचिका पर शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया।</p>
<p>जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को मतगणना के लिए अपनी पसंद के अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है।</p>
<p>अदालत ने कहा कि आयोग के 13 अप्रैल के सर्कुलर को गलत नहीं ठहराया जा सकता। टीएमसी ने आरोप लगाया था कि आयोग केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मचारियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146902/big-blow-to-tmc-from-supreme-court-election-commissions-decision"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 02 मई (वेब वार्ता)। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती के लिए कर्मचारियों के चयन पर सवाल उठाने वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की याचिका पर शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया।</p>
<p>जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को मतगणना के लिए अपनी पसंद के अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है।</p>
<p>अदालत ने कहा कि आयोग के 13 अप्रैल के सर्कुलर को गलत नहीं ठहराया जा सकता। टीएमसी ने आरोप लगाया था कि आयोग केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मचारियों को ही सुपरवाइजर बना रहा है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने टीएमसी की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने यह साफ कर दिया है कि मतगणना में केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों का मिश्रण (मिक्स) होगा, ऐसे में किसी भी प्रकार की धांधली का डर निराधार है।</p>
<p>आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास किसी भी सरकारी पूल से स्टाफ तैनात करने का अधिकार होता है। इस स्पष्टीकरण के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि इस मामले में अब किसी नए आदेश की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p>पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में मतदान संपन्न हो चुका है और अब सबकी नजरें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।</p>
<p>कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले ही 30 अप्रैल को टीएमसी की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि पीएसयू और केंद्र सरकार के कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने में कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब साफ हो गया है कि चुनाव आयोग अपने तय नियमों के अनुसार ही मतगणना प्रक्रिया पूरी कराएगा। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की थी, लेकिन अंततः उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 15:35:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस में बंधक बनाए गए 26 भारतीयों की वतन वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 11 अप्रैल (वेब वार्ता)। सुप्रीम कोर्ट रूस में कथित तौर पर हिरासत में लिए गए और यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किए गए 26 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी की याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को केंद्र सरकार से निर्देश लेने के आदेश दिए हैं।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि ये भारतीय नागरिक युद्ध के मैदान में बेहद असुरक्षित स्थितियों में फंसे हुए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146535/supreme-court-is-strict-for-the-return-of-26-indians"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 11 अप्रैल (वेब वार्ता)। सुप्रीम कोर्ट रूस में कथित तौर पर हिरासत में लिए गए और यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किए गए 26 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी की याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को केंद्र सरकार से निर्देश लेने के आदेश दिए हैं।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि ये भारतीय नागरिक युद्ध के मैदान में बेहद असुरक्षित स्थितियों में फंसे हुए हैं और उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध सैन्य गतिविधियों में शामिल होने के लिए विवश किया जा रहा है।</p>
<p>अदालत में दायर याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह रूस में भारतीय दूतावास के माध्यम से तुरंत कूटनीतिक और कॉन्सुलर कदम उठाए।</p>
<p>इसमें वियना कन्वेंशन (1963) और द्विपक्षीय समझौतों के तहत इन भारतीयों तक कॉन्सुलर पहुंच प्रदान करने की बात कही गई है, ताकि उनकी वर्तमान कानूनी स्थिति और सुरक्षा का सटीक पता लगाया जा सके।</p>
<p>सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को आश्वस्त किया है कि वह मामले की गहन जांच करेंगे और सरकार के निर्देशों के साथ अदालत को अवगत कराएंगे। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई इस महीने के अंत में तय की है।</p>
<p>याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहते हुए इन नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा और भारत में उनकी वापसी के लिए सभी आवश्यक प्रयास करने चाहिए।</p>
<p>यह मामला उस समय आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच कई भारतीयों के फंसे होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब यह उम्मीद जगी है कि केंद्र सरकार इन युवाओं के ठिकाने का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित घर लाने की प्रक्रिया में तेजी लाएगी।</p>
<p>आगामी सुनवाई में सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 15:06:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीजेआई सूर्यकांत ने ‘जनगणना 2027’ के लिए ‘स्वयं-गणना’ प्रक्रिया में हिस्सा लिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, 03 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। गृह मंत्रालय (एमएचए) के एक अधिकारी ने बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को अपने आवास पर ‘जनगणना </span>2027’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की जनगणना</span>, 2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस बात की पुष्टि की और नागरिकों को खुद अपनी गिनती करने के लिए प्रोत्साहित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय के तहत जनगणना </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> ने कहा</span>, <span style="font-family:'Times New Roman', serif;">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के मुख्य न्यायाधीश ने आज अपने आवास पर जनगणना </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> के पहले चरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी हाउसलिस्टिंग और आवास जनगणना के लिए खुद</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146396/cji-surya-kant-takes-part-in-self-enumeration-process-for-census"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2026-04/cji-suryakant.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दिल्ली</span>, 03 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल (वेब वार्ता)। गृह मंत्रालय (एमएचए) के एक अधिकारी ने बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को अपने आवास पर ‘जनगणना </span>2027’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की जनगणना</span>, 2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस बात की पुष्टि की और नागरिकों को खुद अपनी गिनती करने के लिए प्रोत्साहित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय के तहत जनगणना </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> ने कहा</span>, <span style="font-family:'Times New Roman', serif;">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के मुख्य न्यायाधीश ने आज अपने आवास पर जनगणना </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> के पहले चरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी हाउसलिस्टिंग और आवास जनगणना के लिए खुद अपनी गिनती का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें आगे कहा गया</span>, <span style="font-family:'Times New Roman', serif;">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिक कर्तव्य का एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश करते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीजेआई ने सुरक्षित सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल के जरिए अपने घर-परिवार का विवरण दर्ज किया।</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की ‘जनगणना </span>2027’ <span lang="hi" xml:lang="hi">ने आगे कहा</span>, <span style="font-family:'Times New Roman', serif;">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह भारत की अब तक की पहली डिजिटल जनगणना में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो नागरिकों को डेटा इकट्ठा करने की एक सुविधाजनक और पारदर्शी प्रक्रिया के साथ सशक्त बनाती है।</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें कहा गया</span>, <span style="font-family:'Times New Roman', serif;">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हम इस विशाल राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी और समर्थन के लिए सीजेआई के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। हम सभी से जोरदार अपील करते हैं कि वे भी जनगणना के आधिकारिक वेबसाइट के जरिए खुद अपनी गिनती करें और एक मजबूत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा-सशक्त ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान दें।</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले बुधवार को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी खुद अपनी गिनती का काम पूरा किया था। शुक्रवार को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी खुद अपनी गिनती की प्रक्रिया में भाग लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संदेश में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा</span>, <span style="font-family:'Times New Roman', serif;">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की ‘जनगणना-</span>2027’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का पहला चरण शुरू हो गया है। आज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली स्थित अपने आवास पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने खुद अपनी गिनती का पंजीकरण पूरा किया।</span><span lang="hi" style="font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">”</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जनगणना </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत की पहली पूरी तरह से ‘डिजिटल जनगणना’ बनने जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो </span>150<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक वर्षों से चली आ रही पारंपरिक कागज-आधारित प्रणाली से हटकर होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रक्रिया जनगणना अधिनियम</span>, 1948<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत दो चरणों में आयोजित की जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">पहला चरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हाउस लिस्टिंग और आवास जनगणना (एचएलओ) के नाम से जाना जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवास की स्थितियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू सुविधाओं और संपत्तियों से संबंधित डेटा इकट्ठा करने पर केंद्रित है। इस चरण में नागरिकों को </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi"> अधिसूचित प्रश्नों के उत्तर देने होंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/146396/cji-surya-kant-takes-part-in-self-enumeration-process-for-census</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 20:53:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली एम्स में हरीश राणा का निधन, कोर्ट ने दी थी इच्छामृत्यु की इजाजत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br />नई दिल्ली, 24 मार्च (वेब वार्ता)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती हरीश राणा का मंगलवार को निधन हो गया है। हरीश राणा देश के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय से पैसिव यूथेनेशिया, यानी इच्छामृत्यु, की अनुमति मिली थी।</p>
<p>दरअसल, हरीश राणा पिछले 13 साल से अधिक समय से कोमा में थे और उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था। लंबे समय तक जीवन रक्षक प्रणाली पर निर्भर रहने के कारण उनके परिवार ने अदालत से इच्छामृत्यु की अनुमति की मांग की थी। इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/146199/harish-rana-dies-in-delhi-aiims-court-had-given-permission"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-12/4586_dead-body-feature2.jpg" alt=""></a><br /><p><br />नई दिल्ली, 24 मार्च (वेब वार्ता)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती हरीश राणा का मंगलवार को निधन हो गया है। हरीश राणा देश के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय से पैसिव यूथेनेशिया, यानी इच्छामृत्यु, की अनुमति मिली थी।</p>
<p>दरअसल, हरीश राणा पिछले 13 साल से अधिक समय से कोमा में थे और उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था। लंबे समय तक जीवन रक्षक प्रणाली पर निर्भर रहने के कारण उनके परिवार ने अदालत से इच्छामृत्यु की अनुमति की मांग की थी। इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश राणा को इच्छामृत्यु देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। हरीश के परिवार की याचिका पर न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पूरी गरिमा के साथ इस प्रक्रिया को पूरा किया जाए।</p>
<p>जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह बेहद दुखद है। यह हमारे लिए मुश्किल फैसला है, लेकिन इस लड़के (हरीश) को यूं अपार दुख में नहीं रख सकते। हम उस स्टेज में है, जहां हमें आखिरी फैसला लेना होगा।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के परिवार की प्रशंसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि उनके परिवार ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा। किसी से प्यार करने का मतलब है, सबसे बुरे समय में भी उनकी देखभाल करना।</p>
<p>बता दें कि चंडीगढ़ में रह कर पढ़ाई कर रहे हरीश 2013 में अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं थी। उसके बाद से वह लगातार बिस्तर में अचेत हालत में है।</p>
<p>लगातार बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनके शरीर पर घाव हो गए हैं। लकवाग्रस्त हरीश को सांस लेने, भोजन करने और रोजमर्रा की देखभाल के लिए चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 21:13:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाई, यूजीसी और केंद्र सरकार को नोटिस </title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 29 जनवरी (वेब वार्ता)। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा वाले नियम, 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।</p>
<p>न्यायालय ने इन नियमों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके कई प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनका दुरुपयोग किया जा सकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस नियम का समाज और शैक्षिणक परिसर पर विभाजनकारी प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इन नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली तीन रिट याचिकाओं पर सुनवाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145310/supreme-court-bans-new-rules-of-ugc-notice-to-ugc"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 29 जनवरी (वेब वार्ता)। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा वाले नियम, 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।</p>
<p>न्यायालय ने इन नियमों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके कई प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनका दुरुपयोग किया जा सकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस नियम का समाज और शैक्षिणक परिसर पर विभाजनकारी प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इन नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली तीन रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। ये याचिकाएं मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने दायर की हैं।</p>
<p>पीठ ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि नोटिस का जवाब 19 मार्च तक देना है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि 2012 के पहले के यूजीसी नियम लागू रहेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्रों को बिना किसी शिकायत निवारण तंत्र के न छोड़ा जाए।</p>
<p>सुनवाई के दौरान, पीठ ने मौखिक रूप से कई चिंताओं को उठाया, जिसमें कहा गया कि इसके प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनके दुरुपयोग की संभावना है। याचिका में जाति-आधारित भेदभाव की अलग परिभाषा की आवश्यकता पर सवाल उठाया गया, जबकि भेदभावकी सामान्य परिभाषा पहले से मौजूद है। इसमें रैगिंग पर प्रावधानों की पूरी तरह अनुपस्थिति की कड़ी आलोचना की गई।</p>
<p>न्यायालय ने चिंता प्रकट करते कहा कि ये नियम एकता को बढ़ावा देने के बजाय छात्रों को जाति के आधार पर विभाजित कर सकते हैं। पीठ ने सुझाव दिया कि नियमों पर प्रतिष्ठित न्यायविदों की एक समिति द्वारा फिर से विचार किया जाना चाहिए जो सामाजिक वास्तविकताओं और मूल्यों को समझते हैं।</p>
<p>सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को संबोधित करते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय तुरंत अंतिम आदेश पारित करने के पक्ष में नहीं है और इसके बजाय विशेषज्ञ से इस पर पुनर्विचार चाहता है।</p>
<p>न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, एक ऐसी समिति होनी चाहिए जिसमें प्रतिष्ठित न्यायविद हों... ऐसे लोग जो सामाजिक मूल्यों और समाज जिन समस्याओं का सामना कर रहा है, उन्हें समझते हों। उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि समाज कैसे आगे बढ़ेगा और लोग कैसे व्यवहार करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/145310/supreme-court-bans-new-rules-of-ugc-notice-to-ugc</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 19:44:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों से जुड़े आदेश पर मेनका की टिप्पणियों को ‘अदालत की अवमानना’ बताया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 20 जनवरी (वेब वार्ता)। उच्चतम न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा आवारा कुत्तों के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के आदेशों की आलोचना करने वाली टिप्पणियों के संबंध में नाराजगी व्यक्त करते हुए मंगलवार को कहा कि उन्होंने अदालत की अवमानना ​​की।</p>
<p>न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने कहा कि पूर्व मंत्री ने बिना सोचे-समझे सभी के खिलाफ ‘हर तरह की टिप्पणियां’ की हैं।</p>
<p>गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से सवाल करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘आपने कहा कि अदालत को अपनी टिप्पणी में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/145187/supreme-court-termed-manekas-comments-on-the-order-related-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 20 जनवरी (वेब वार्ता)। उच्चतम न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा आवारा कुत्तों के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के आदेशों की आलोचना करने वाली टिप्पणियों के संबंध में नाराजगी व्यक्त करते हुए मंगलवार को कहा कि उन्होंने अदालत की अवमानना ​​की।</p>
<p>न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने कहा कि पूर्व मंत्री ने बिना सोचे-समझे सभी के खिलाफ ‘हर तरह की टिप्पणियां’ की हैं।</p>
<p>गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से सवाल करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘आपने कहा कि अदालत को अपनी टिप्पणी में सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन क्या आपने अपनी मुवक्किल से पूछा है कि उन्होंने किस तरह की टिप्पणियां की हैं? क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना<br />है? उन्होंने बिना सोचे-समझे सबके खिलाफ तरह-तरह की टिप्पणियां की हैं। क्या आपने उनके हाव- भाव देखे हैं?’<br /> ⁠<br />पीठ ने कहा कि अदालत की उदारता के कारण वह पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू नहीं कर रही है। न्यायमूर्ति मेहता ने रामचंद्रन से पूछा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों की समस्या को खत्म करने के लिए बजट में क्या आवंटन कराने में मदद की।</p>
<p>रामचंद्रन ने जवाब दिया कि वह आतंकवादी अजमल कसाब की ओर से भी पेश हो चुके हैं और बजट आवंटन एक नीतिगत मामला है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने टिप्पणी की, ‘अजमल कसाब ने अदालत की अवमानना ​​नहीं की, लेकिन आपके मुवक्किल ने की है।’</p>
<p>पीठ ने कहा कि कुत्तों को खाना देने वालों को जवाबदेह ठहराने के संबंध में उसकी टिप्पणी व्यंग्यपूर्ण नहीं, बल्कि गंभीर थी, हालांकि यह मामले की सुनवाई के दौरान हुए संवाद के दौरान की गई थी।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने 13 जनवरी को कहा था कि वह राज्यों को कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए ‘भारी मुआवजा’ देने को कहेगी और ऐसे मामलों के लिए कुत्तों को खाना देने वालों को जवाबदेह ठहराएगी। अदालत ने पिछले पांच वर्षों से आवारा पशुओं से संबंधित मानदंडों के लागू न होने पर भी<br />चिंता जताई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/145187/supreme-court-termed-manekas-comments-on-the-order-related-to</link>
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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 20:41:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली महिला आयोग के ‘बंद’ होने पर न्यायालय ने जताई चिंता, कहा- संकटग्रस्त महिलाएं कहां जाएंगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, दो दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) के 'बंद' होने पर चिंता जताते हुए मंगलवार को पूछा, ‘‘संकट में फंसी महिलाएं कहां जाएंगी?’’</p>
<p>न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से आयोग को बंद किये जाने से रोकने को लेकर कुछ उपाय करने को कहा।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने हाल ही में आई एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ‘‘यह बंद हो गया है। संकटग्रस्त महिलाएं कहां जाएंगी? उनके पास अध्यक्ष नहीं हैं। उनके पास कर्मचारी नहीं हैं। सब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144373/the-court-expressed-concern-over-the-closure-of-delhi-womens"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, दो दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) के 'बंद' होने पर चिंता जताते हुए मंगलवार को पूछा, ‘‘संकट में फंसी महिलाएं कहां जाएंगी?’’</p>
<p>न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से आयोग को बंद किये जाने से रोकने को लेकर कुछ उपाय करने को कहा।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने हाल ही में आई एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ‘‘यह बंद हो गया है। संकटग्रस्त महिलाएं कहां जाएंगी? उनके पास अध्यक्ष नहीं हैं। उनके पास कर्मचारी नहीं हैं। सब कुछ अव्यवस्थित है।’’</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि डीसीडब्ल्यू बंद हो गया है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी बाल तस्करी के एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जहां ऐसे मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए कई निर्देश दिए गए थे। दवे ने कहा कि वह आयोग को बंद करने के मुद्दे पर विचार करेंगी।</p>
<p>नई दिल्ली के विकास भवन में स्थित महिला आयोग का कार्यालय जनवरी 2024 से लगभग बंद है, क्योंकि इसका कोई अध्यक्ष नहीं है।</p>
<p>डीसीडब्ल्यू की वेबसाइट पर अध्यक्ष और सदस्य सचिव सहित चार सदस्यों का पद रिक्त दिखाया गया है।</p>
<p>वर्ष 1994 में संविधान और अन्य कानूनों के तहत महिलाओं के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच और परीक्षण के लिए गठित डीसीडब्ल्यू, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और शोषण से लेकर परामर्श, बचाव और कानूनी सहायता तक के मामलों को देखता है।</p>
<p>इसमें आगे कहा गया है कि डीसीडब्ल्यू का गठन संविधान और अन्य कानूनों के तहत महिलाओं के लिए प्रदान की गई सुरक्षा से संबंधित सभी मामलों की पड़ताल और परीक्षण करने के उद्देश्य से किया गया है।</p>
<p>आयोग की वेबसाइट पर कहा गया है, ‘‘आयोग एक दीवानी अदालत की तरह काम करता है और सहयोगिनी, महिला पंचायत, बलात्कार संकट प्रकोष्ठ, मोबाइल हेल्पलाइन और विवाह पूर्व परामर्श प्रकोष्ठ जैसे अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से अधिनियम में परिकल्पित उद्देश्यों को सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। आयोग का अधिकार क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के भीतर है।’’</p>
<p>आयोग का गठन दिल्ली महिला आयोग अधिनियम, 1994 के तहत किया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Dec 2025 21:30:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उच्चतम न्यायालय ने रेलवे से पूछा, दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदारों के लिए ही क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 27 नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय रेलवे से यह बताने को कहा है कि दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को ही क्यों प्रदान किया जाता है, ऑफलाइन टिकट बुक करने वालों को क्यों नहीं।</p>
<p>न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ को बताया गया कि दुर्घटनाओं के लिए बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को प्रदान किया जाता है।</p>
<p>अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी इस मामले में रेलवे की ओर से अदालत में पेश हुए।</p>
<p>पीठ ने 25 नवंबर को पारित अपने आदेश में कहा, "इसके अलावा,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144305/supreme-court-asks-railways-why-accident-insurance-cover-is-only"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-03/d15032024-13-railway.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 27 नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय रेलवे से यह बताने को कहा है कि दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को ही क्यों प्रदान किया जाता है, ऑफलाइन टिकट बुक करने वालों को क्यों नहीं।</p>
<p>न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ को बताया गया कि दुर्घटनाओं के लिए बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को प्रदान किया जाता है।</p>
<p>अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी इस मामले में रेलवे की ओर से अदालत में पेश हुए।</p>
<p>पीठ ने 25 नवंबर को पारित अपने आदेश में कहा, "इसके अलावा, न्याय मित्र ने बताया है कि दुर्घटनाओं को कवर करने के लिए ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बीमा कवर प्रदान किया जाता है, जो ऑफलाइन टिकट खरीदने वालों के लिए उपलब्ध नहीं है। श्री बनर्जी को निर्देश लेने की आवश्यकता है कि टिकट प्राप्त करने के इन दो माध्यमों के बीच इस अंतर का क्या कारण है।"</p>
<p>शीर्ष अदालत भारतीय रेलवे से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी।</p>
<p>पीठ ने राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट का अवलोकन किया और कहा कि शुरुआती चरण में, पटरियों और रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जिससे अन्य पहलू सामने आएंगे।</p>
<p>अदालत ने मामले को 13 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144305/supreme-court-asks-railways-why-accident-insurance-cover-is-only</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 15:36:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूरत : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शहर में आवारा श्वानों पर सख्ती, अस्पताल–स्कूलों में होगी बाड़बंदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सूरत।  सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 नवंबर को दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के बाद अब देशभर में राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों समेत संवेदनशील इलाकों से आवारा पशुओं को हटाना अनिवार्य हो गया है।</p>
<p>खासकर अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि पकड़े गए आवारा श्वानों को अब उनके पुराने स्थानों पर दोबारा नहीं छोड़ा जाएगा।</p>
<p>सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करवाने और तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/144158/after-the-instructions-of-surat-supreme-court-there-will-be"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-07/7334_dogs-attack.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत।  सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 नवंबर को दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के बाद अब देशभर में राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों समेत संवेदनशील इलाकों से आवारा पशुओं को हटाना अनिवार्य हो गया है।</p>
<p>खासकर अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि पकड़े गए आवारा श्वानों को अब उनके पुराने स्थानों पर दोबारा नहीं छोड़ा जाएगा।</p>
<p>सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करवाने और तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।</p>
<p>इसी संदर्भ में बुधवार को सूरत नगर निगम के उपायुक्त (स्वास्थ्य एवं अस्पताल) की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इसमें सरकारी और अर्धसरकारी अस्पतालों, रेलवे और बस स्टेशनों, जिला शिक्षा अधिकारियों, कार्यकारी अभियंताओं और उप स्वास्थ्य अधिकारियों ने भाग लिया।</p>
<p>बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सूरत शहर के सभी सरकारी-अर्धसरकारी संस्थानों, निजी स्कूल-कॉलेजों, अस्पतालों, रेलवे और बस स्टेशनों के परिसरों को आवारा श्वानों से सुरक्षित करने के लिए उचित बाड़बंदी या बाउंड्रीवॉल बनाई जाएगी।</p>
<p>इन जगहों के प्रवेश और निकास द्वार को नियंत्रित और सुरक्षित किया जाएगा।सभी संस्थानों में इस कार्य की निगरानी और सही क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। लोगों में जागरूकता लाने के लिए आईईसी गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश जारी हुए।</p>
<p>प्रत्येक संस्थान का हर तीन महीने पर निरीक्षण अनिवार्य होगा, ताकि इन परिसरों में आवारा श्वानों की संख्या बढ़ने या अड्डा बनने की स्थिति न हो।</p>
<p>बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि पूरे अभियान का एक संपूर्ण डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाए, जिससे सूरत में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की निरंतर निगरानी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सूरत नगर निगम ने तेज़ी से कदम उठाते हुए शहर के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/144158/after-the-instructions-of-surat-supreme-court-there-will-be</link>
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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 20:21:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, अपने ऊपर इसका बोझ न लें : उच्चतम न्यायालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अहमदाबाद में एअर इंडिया विमान दुर्घटना में मारे गए पायलट के 91 वर्षीय पिता से शुक्रवार को कहा कि उनके बेटे को इस दुर्घटना के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता और उन्हें इसका बोझ अपने ऊपर नहीं रखना चाहिए।</p>
<p>न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उनकी याचिका पर केंद्र और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को नोटिस जारी किया।</p>
<p>पीठ ने कहा, ‘‘आपको अपने ऊपर बोझ नहीं रखना चाहिए। विमान दुर्घटना के लिए पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह एक दुर्घटना थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में भी उनके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/143914/pilot-cannot-be-held-guilty-supreme-court-should-not-take"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-09/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, सात नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अहमदाबाद में एअर इंडिया विमान दुर्घटना में मारे गए पायलट के 91 वर्षीय पिता से शुक्रवार को कहा कि उनके बेटे को इस दुर्घटना के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता और उन्हें इसका बोझ अपने ऊपर नहीं रखना चाहिए।</p>
<p>न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उनकी याचिका पर केंद्र और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को नोटिस जारी किया।</p>
<p>पीठ ने कहा, ‘‘आपको अपने ऊपर बोझ नहीं रखना चाहिए। विमान दुर्घटना के लिए पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह एक दुर्घटना थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है।’’</p>
<p>पायलट के पिता पुष्कराज सभरवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल के संबंध में अमेरिकी प्रकाशन वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक समाचार लेख छपा था।</p>
<p>पीठ ने जवाब दिया, ‘‘यह केवल भारत को दोषी ठहराने के लिए घटिया रिपोर्टिंग थी।’’</p>
<p>पीठ ने 12 जुलाई को जारी विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट का एक पैराग्राफ पढ़ा और कहा कि इसमें कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि दुर्घटना के लिए पायलट को दोषी ठहराया जाना चाहिए और इसमें केवल विमान के दो पायलटों के बीच हुई बातचीत का उल्लेख है।</p>
<p>उसने कहा, ‘‘एएआईबी जांच का दायरा दोषारोपण करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचने के लिए निवारक उपाय सुझाना है। यदि आवश्यक हुआ तो हम स्पष्ट कर देंगे कि पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।’’</p>
<p>अदालत ने इस मामले को घटना से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ 10 नवंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।</p>
<p>गौरतलब है कि 12 जून को हुए विमान हादसे में 260 लोगों की जान चली गयी थी।</p>
<p>पिछले महीने, पुष्कराज सभरवाल और भारतीय पायलट संघ ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था और एअर इंडिया के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले की जांच अदालत की निगरानी में शीर्ष न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराने का अनुरोध किया था।</p>
<p>पुष्कराज सभरवाल ने इस दुखद घटना की ‘निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत’ जांच का अनुरोध किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/143914/pilot-cannot-be-held-guilty-supreme-court-should-not-take</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 13:08:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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