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                <title>Ayurveda - Loktej</title>
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                <description>Ayurveda RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महाकुंभ में 1.21 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आयुष सेवाओं का लाभ उठाया: आयुष मंत्रालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) महाकुंभ में राष्ट्रीय आयुष मिशन (उत्तर प्रदेश) के सहयोग से आयुष मंत्रालय द्वारा स्थापित विभिन्न केंद्रों पर 1.21 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आयुष सेवाओं का लाभ उठाया है।</p>
<p>प्रयागराज के महाकुंभ में आयुष ओपीडी, क्लीनिक, स्टॉल और सत्र श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए प्रमुख आकर्षण के रूप में उभर रहे हैं।</p>
<p>आयुष मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय आयुष मिशन (उत्तर प्रदेश) के सहयोग से उसने महाकुंभ में कई सुविधाओं का प्रबंध किया है जहां घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं।</p>
<p>महाकुंभ में तैनात आयुष टीम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/125102/more-than-1-21-lakh-devotees-availed-ayush-services-in-mahakumbh--ayush-ministry"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/mahakumbh-2025-01.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) महाकुंभ में राष्ट्रीय आयुष मिशन (उत्तर प्रदेश) के सहयोग से आयुष मंत्रालय द्वारा स्थापित विभिन्न केंद्रों पर 1.21 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आयुष सेवाओं का लाभ उठाया है।</p>
<p>प्रयागराज के महाकुंभ में आयुष ओपीडी, क्लीनिक, स्टॉल और सत्र श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए प्रमुख आकर्षण के रूप में उभर रहे हैं।</p>
<p>आयुष मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय आयुष मिशन (उत्तर प्रदेश) के सहयोग से उसने महाकुंभ में कई सुविधाओं का प्रबंध किया है जहां घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं।</p>
<p>महाकुंभ में तैनात आयुष टीम में 20 ओपीडी में 80 डॉक्टर शामिल हैं जो चौबीसों घंटे चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं। इन ओपीडी में कई तरह की सामान्य और पुरानी बीमारियों के इलाज की सुविधा है।</p>
<p>बयान के अनुसार विदेशी श्रद्धालु भी ओपीडी परामर्श सहित आयुष सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा, संगम क्षेत्र और सेक्टर-8 में निर्धारित शिविरों में प्रतिदिन चिकित्सीय योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका नेतृत्व आयुष मंत्रालय के दिल्ली स्थित मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) के प्रशिक्षक करते हैं।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि इन सत्रों में अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं की भागीदारी स्थानीय और वैश्विक जनता के बीच आयुष सेवाओं में बढ़ती रुचि और विश्वास को दर्शाती है।</p>
<p>महाकुंभ में आयुष के नोडल अधिकारी डॉ. अखिलेश सिंह ने कहा, ‘‘हमारी टीम न केवल मरीजों का इलाज करती है, बल्कि उन्हें औषधीय पौधों की आर्थिक संभावनाओं के बारे में भी बताती है। इनकी खेती को बढ़ावा देकर हमारा उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ उनके लिए आजीविका का स्रोत बनाना है।’’</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jan 2025 18:42:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झंडु मुग्ध रस - एक आयुर्वेदिक औषधि</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद केवल एक उपचार पद्धति नहीं है, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने की एक होलिस्टिक प्रणाली है। सदियों से, आयुर्वेद ने हमें ऐसे समाधान दिए हैं जो सिर्फ बीमारियों का इलाज नहीं करते बल्कि स्वास्थ्य का भी समग्र रूप से ध्यान रखते हैं। मुग्ध रस भी ऐसा ही एक प्रभावी आयुर्वेदिक उत्पाद है, जो अपनी खास चिकित्सीय गुणों के लिए जाना जाता है। यह पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूला पाचन संबंधी समस्याओं को हल करने में कारगर है| यह लेख मुग्धा रस के कई स्वास्थ्य लाभों और पाचन सम्बन्धी विकारों में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालता है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/106958/zandu-mugdha-ras-an-ayurvedic-medicine"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-12/k06122024-01.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद केवल एक उपचार पद्धति नहीं है, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने की एक होलिस्टिक प्रणाली है। सदियों से, आयुर्वेद ने हमें ऐसे समाधान दिए हैं जो सिर्फ बीमारियों का इलाज नहीं करते बल्कि स्वास्थ्य का भी समग्र रूप से ध्यान रखते हैं। मुग्ध रस भी ऐसा ही एक प्रभावी आयुर्वेदिक उत्पाद है, जो अपनी खास चिकित्सीय गुणों के लिए जाना जाता है। यह पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूला पाचन संबंधी समस्याओं को हल करने में कारगर है| यह लेख मुग्धा रस के कई स्वास्थ्य लाभों और पाचन सम्बन्धी विकारों में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालता है</p>
<p><strong>मुग्ध रस का परिचय: एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक फॉर्मूला </strong></p>
<p><strong><a href="https://zanducare.com/products/mugdha-rasa">मुग्ध रस</a></strong> "खरालिया रसायन" विधि से तैयार एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसके मुख्य घटक, पारद (शुद्ध पारा) और खटिका (शुद्ध चाक) है। मुग्ध रस द्वारा विभिन्न पाचन समस्याओं का प्रभावी उपचार किया जाता है। मुख्य रूप से यह अतिसार (दस्त) और वमन (उल्टी) के प्रबंधन में उपयोगी है, पाचन संबंधी विकारों और पेट के संक्रमणों में यह राहत प्रदान करता है।</p>
<p><strong>मुग्ध रस के चिकित्सीय लाभ </strong></p>
<p><a href="https://zanducare.com/products/mugdha-rasa"><strong>मुग्ध रस</strong></a> के लाभ सिर्फ दस्त और उल्टी के निवारण तक ही सीमित नहीं हैं; अपितु यह पाचन विकारों के मूल कारणों को दूर करने में भी सहायक है।</p>
<p>1. <strong>पाचन सम्बन्धी विकारों से राहत </strong></p>
<p>मुग्ध रस दस्त और उल्टी जैसी अजीर्ण की समस्याओं पर नियंत्रण कर राहत प्रदान करता है।</p>
<p>2. <strong>रोगाणुनाशक गुण स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए लाभदायक </strong></p>
<p>मुग्ध रस में पारद के कारण रोगाणुनाशक गुण होते हैं, जो बार-बार होने वाली पाचन की समस्याओं को रोकने में मददगार हैं।</p>
<p><strong>पाचन स्वास्थ्य को बनाए रखता है </strong></p>
<p>यह पाचन तंत्र में संतुलन बनाए रखकर समग्र पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, झंडू मुग्ध रस का चयन: आयुर्वेद में एक विश्वसनीय नाम</p>
<p>यदि आप प्रामाणिक आयुर्वेदिक उपचार चाहते हैं, तो ज़ंडू एक ऐसा ब्रांड है, जो गुणवत्ता और पारंपरिक चिकित्सा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। <strong>झंडू मुग्ध रस</strong> को “रस तरंगिनी” जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार तैयार किया गया है। इसके प्रत्येक टैबलेट को मानक गुणवत्ता जांच से गुजरना होता है, ताकि उपभोक्ताओं को एक उच्च गुणवत्ता वाला उत्पाद मिले।</p>
<p>● <strong>गुणवत्ता नियंत्रण</strong>: झंडू यह सुनिश्चित करता है कि उसका मुग्ध रस आयुर्वेदिक मानकों को पूरा करता है।</p>
<p>● <strong>प्रामाणिक और शास्त्रीय आयुर्वेद में वर्णित</strong> विधि के अनुसार तैयार होने के कारण, झंडू का मुग्ध रस गुणवत्ता युक्त है और समुचित लाभ प्रदान करता है।</p>
<p>● <strong>विश्वास की विरासत</strong>: दशकों के अनुभव के साथ, झंडू एक विश्वसनीय ब्रांड है, जो प्रभावी और उच्च गुणवत्ता वाले आयुर्वेदिक समाधान प्रदान करता है।</p>
<p><strong>सुरक्षित उपयोग और स्टोरेज के टिप्स </strong></p>
<p>मुग्ध रस को केवल किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से ही उपयोग करना चाहिए। इसे सुरक्षित और प्रभावी रूप से उपयोग करने के लिए यहां कुछ जरूरी सुझाव दिए गए हैं:</p>
<p>1. <strong>केवल चिकित्सकीय परामर्श पर ही उपयोग करें </strong></p>
<p>मुग्ध रस का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक के निर्देशानुसार करें। उचित खुराक और आवृत्ति सर्वोत्तम परिणामों के लिए आवश्यक हैं।</p>
<p>2. <strong>उचित भंडारण </strong></p>
<p>मुग्ध रस को कमरे के तापमान पर एवं सीधे धूप से दूर रखें। हर उपयोग के बाद इसकी बोतल का ढक्कन अच्छी तरह से बंद करना सुनिश्चित करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 22:41:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : अगले महीने देशभर में शुरू होगा प्रकृति परीक्षण अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 05 सितंबर (हि.स.)। आयुष मंत्रालय एक अक्टूबर से देश में प्रकृति परीक्षण अभियान चलाएगा। इस अभियान को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग पर रहेगी।<br /><br />गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में आयुष मंत्री प्रताप राव जाधव ने कहा कि प्रकृति का स्वास्थ्य रक्षण में बहुत महत्व होता है, प्रकृति की जानकारी से आम नागरिक खुद को स्वस्थ रखने के लिए दिनचर्या ,ऋतुचर्या के अनुरूप अपने नित्य कार्यों में छोटे-छोटे बदलाव लाकर स्वस्थ रह सकते हैं । इस बात को ध्यान में रखते हुए देश को सकारात्मक स्वास्थ्य की ओर बढ़ने में यह प्रकृति प्रशिक्षण अभियान मील</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/104199/new-delhi-nature-testing-campaign-will-start-across-the-country"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2024-09/b05062024-18.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 05 सितंबर (हि.स.)। आयुष मंत्रालय एक अक्टूबर से देश में प्रकृति परीक्षण अभियान चलाएगा। इस अभियान को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग पर रहेगी।<br /><br />गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में आयुष मंत्री प्रताप राव जाधव ने कहा कि प्रकृति का स्वास्थ्य रक्षण में बहुत महत्व होता है, प्रकृति की जानकारी से आम नागरिक खुद को स्वस्थ रखने के लिए दिनचर्या ,ऋतुचर्या के अनुरूप अपने नित्य कार्यों में छोटे-छोटे बदलाव लाकर स्वस्थ रह सकते हैं । इस बात को ध्यान में रखते हुए देश को सकारात्मक स्वास्थ्य की ओर बढ़ने में यह प्रकृति प्रशिक्षण अभियान मील का पत्थर साबित होगा।<br /><br />उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत देश भर के एक करोड़ से ज्यादा नागरिकों का प्रकृति परीक्षण देश के आयुर्वेद महाविद्यालयों के 1,35,000 विद्यार्थी 20,000 स्नातकोत्तर शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थी 18,000 अध्यापक तथा तीन लाख चिकित्सक ,ऐसे कुल मिलाकर साढ़े चार लाख लोगों के माध्यम से किया जाएगा, जिन्हें प्रकृति परीक्षण स्वयंसेवक कहा जाएगा। इस अभियान के तहत प्रकृति परीक्षण स्वयंसेवक घर घर जा कर लोगों की प्रकृति का परीक्षण करेंगे। इस अभियान के कारण आयुर्वेद के प्रति जन सामान्य का रुझान बढ़ेगा और आयुर्वेद की अर्थव्यवस्था को भी गतिमानता से विकास पथ पर आगे बढ़ाने में मदद होगी।<br /><br />प्रताप राव ने कहा कि इस माध्यम से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के पांच विश्व कीर्तिमान स्थापना करने का संकल्प आयोजन समिति ने किया है। इसके लिए एक एप भी विकसित किया गया है, जिसे अभियान की शुरुआत में लॉन्च किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने के अनुसार हर-घर ,जन-जन आयुर्वेद यह सपना संजोकर यह अभियान की रचना की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Sep 2024 21:10:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhatu Patil]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफ्रीकी देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों ने आयुर्वेद के गुणों को जाना, एआईआईए का किया दौरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 27 सितंबर (हि.स.)। जी-20 ब्लॉक में शामिल होने के बाद अफ्रीकी देश पारंपरिक चिकित्सा और एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल की भारतीय प्रणालियों में रुचि ले रहे हैं। इस कड़ी में मंगलावर को पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीकी देशों के उच्चायुक्तों और राजदूतों के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान(एआईआईए) का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने आयुर्वेद व एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में अत्याधुनिक विज्ञान और एआईआईए की भूमिका के बारे में जाना। इस दौरान उन्होंने एआईआईए अस्पताल, ओपीडी,और आयुर्वेद के माध्यम से प्राथमिक और मुख्य स्वास्थ्य देखभाल, सहायक चिकित्सा आदि में हुई प्रगति के बारे में प्रत्यक्ष रूप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/95935/ambassadors-and-high-commissioners-of-african-countries-visited-aiia-to"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-09/k27092023-12.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली, 27 सितंबर (हि.स.)। जी-20 ब्लॉक में शामिल होने के बाद अफ्रीकी देश पारंपरिक चिकित्सा और एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल की भारतीय प्रणालियों में रुचि ले रहे हैं। इस कड़ी में मंगलावर को पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीकी देशों के उच्चायुक्तों और राजदूतों के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान(एआईआईए) का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने आयुर्वेद व एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में अत्याधुनिक विज्ञान और एआईआईए की भूमिका के बारे में जाना। इस दौरान उन्होंने एआईआईए अस्पताल, ओपीडी,और आयुर्वेद के माध्यम से प्राथमिक और मुख्य स्वास्थ्य देखभाल, सहायक चिकित्सा आदि में हुई प्रगति के बारे में प्रत्यक्ष रूप से जाना।<br /><br />इस मौके पर अपने वीडियो संदेश में आयुष और बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की क्षमता के माध्यम से अफ्रीकी देशों में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के उद्देश्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। सर्बानंद सोणोवाल ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा ने हमेशा वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसकी क्षमता को पहचानता है। पारंपरिक चिकित्सा को मुख्य स्वास्थ्य देखभाल में शामिल करने से दुनिया भर में लाखों लोगों तक इसका लाभ पहुंचेगा। यह स्वास्थ्य और कल्याण के लिए जन केंद्रित और समग्र दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।<br /><br />एआईआईए की निदेशक डॉ. तनुजा नेसारी ने समूह को एआईआईए की मुख्य उपलब्धियों के बारे में बताया और कहा, "एआईआईए आयुर्वेद को वैश्विक समुदाय तक ले जाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है और 50 से अधिक संगठन,प्रतिष्ठित संस्थान एवं विश्वविद्यालय के साथ शोधों के लिए समझौता ज्ञापन में किया गया है, जिनमें से 17 अंतरराष्ट्रीय ख्याति के हैं। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव पुनीत आर कुंडल, विदेश मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ, आयुष मंत्रालय के प्रधान सलाहकार प्रमोद कुमार पाठक भी उपस्थित थे।<br /><br />उल्लेखनीय है कि एआईआईए को प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था और तब से एआईआईए आयुष मंत्रालय के तहत एक शीर्ष संस्थान होने के नाते उत्कृष्टता का केंद्र बन गया है जो आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक नैदानिक उपकरणों व प्रौद्योगिकी के बीच तालमेल का उदाहरण है। एआईआईए भारत भर में पहला ए एनएएसी मान्यता प्राप्त आयुर्वेद संस्थान है, और यह एनएबीएच मान्यता प्राप्त अत्याधुनिक, अद्वितीय अस्पताल है जो समग्र और एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। सेवाएं प्रदान करने में एकीकृत आयुष ओपीडी, 30 सामान्य और सुपर स्पेशलिटी ओपीडी, एकीकृत रुमेटोलॉजी, दंत चिकित्सा, ऑन्कोलॉजी ओपीडी आदि मुख्य भूमिका निभाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/95935/ambassadors-and-high-commissioners-of-african-countries-visited-aiia-to</link>
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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2023 19:29:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात में पैदा होने वाली औषधीय फसल इसबगोल को नियमित रूप से खाते हैं अमेरिकी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गांधीनगर, 22 अगस्त, (हि.स.)। स्थानीय भाषा में ‘घोड़ा जीरा’ के रूप में जाना जाने वाला इसबगोल, भारत में औषधीय फसलों में सर्वाधिक क्षेत्रफल में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसल है। पूरी दुनिया में भारत इसबगोल का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसबगोल के प्रसंस्करण में गुजरात देशभर में अव्वल है। भारत के कुल इसबगोल उत्पादन का 90 फीसदी प्रसंस्करण गुजरात में किया जाता है। राज्य के सिद्धपुर और ऊंझा में इसकी प्रसंस्करण इकाइयां कार्यरत हैं। ऊंझा और उसके आसपास के क्षेत्रों में इसबगोल प्रसंस्करण की लगभग 25 इकाइयां विकसित की गई हैं।<br /><br />इसबगोल सर्वाधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाली औषधीय फसल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/94908/americans-regularly-consume-isabgol-a-medicinal-crop-grown-in-gujarat"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2023-08/k22082023-10.jpg" alt=""></a><br /><p>गांधीनगर, 22 अगस्त, (हि.स.)। स्थानीय भाषा में ‘घोड़ा जीरा’ के रूप में जाना जाने वाला इसबगोल, भारत में औषधीय फसलों में सर्वाधिक क्षेत्रफल में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसल है। पूरी दुनिया में भारत इसबगोल का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसबगोल के प्रसंस्करण में गुजरात देशभर में अव्वल है। भारत के कुल इसबगोल उत्पादन का 90 फीसदी प्रसंस्करण गुजरात में किया जाता है। राज्य के सिद्धपुर और ऊंझा में इसकी प्रसंस्करण इकाइयां कार्यरत हैं। ऊंझा और उसके आसपास के क्षेत्रों में इसबगोल प्रसंस्करण की लगभग 25 इकाइयां विकसित की गई हैं।<br /><br />इसबगोल सर्वाधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाली औषधीय फसल है। भारत के कुल इसबगोल उत्पादन का 93 फीसदी हिस्सा पूरी दुनिया में निर्यात किया जाता है। अमेरिका भारतीय इसबगोल का सबसे बड़ा आयातक देश है। उसके बाद जर्मनी, इटली, यूके और कोरिया जैसे देश शामिल हैं। भारत से दुनिया के अनेक देशों में इसबगोल का निर्यात किया जाता है।<br /><br />मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात कृषि क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। सरकार की बागवानी और औषधीय फसलों की प्रोत्साहक नीतियों के परिणामस्वरूप गुजरात में बागवानी और औषधीय फसलों की बुवाई और उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सरकार की प्रोत्साहक उद्योग नीति तथा एग्रो इंडस्ट्रीज की नीतियों के कारण कृषि उत्पादनों के प्रसंस्करण और उनके निर्यात में भी वृद्धि हो रही है।<br /><br /><strong>गुजरात में पिछले पांच वर्षों में दोगुना हुआ इसबगोल उत्पादन</strong><br /><br />इसबगोल उत्पादन में गुजरात देश के अग्रणी राज्यों में शुमार है। वर्ष 2018-19 में राज्य में इसबगोल का बुवाई का रकबा 6754 हेक्टेयर और कुल उत्पादन 6817 मीट्रिक टन था। इसकी तुलना में वर्ष 2022-23 में कुल बुवाई का रकबा 13,303 हेक्टेयर और कुल उत्पादन 12,952 मीट्रिक टन दर्ज किया गया है। इस तरह, पिछले पांच वर्षों में गुजरात में इसबगोल का बुवाई का रकबा और उसका उत्पादन लगभग दुगुना हो गया है।<br /><br /><strong>बनासकांठा है गुजरात में इसबगोल का सबसे बड़ा उत्पादक जिला</strong><br /><br />गुजरात में बनासकांठा जिले में इसबगोल का सर्वाधिक अर्थात 47 फीसदी उत्पादन होता है। उसके बाद कच्छ में 34 फीसदी, मेहसाणा में 10 फीसदी और जूनागढ़ में 5 फीसदी इसबगोल का उत्पादन होता है। इस तरह, गुजरात में इसबगोल के कुल उत्पादन का 96 फीसदी हिस्सा इन चार जिलों में पैदा होता है।<br /><br /><strong>एशिया के सबसे बड़े एपीएमसी में इसबगोल की आवक में वृद्धि</strong><br /><br />ऊंझा की कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) में पिछले पांच वर्षों में इसबगोल की आवक में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2018-19 में ऊंझा के एपीएमसी में 65,413 मीट्रिक टन इसबगोल की आवक हुई थी, जो वर्ष 2022-23 में बढ़कर 87,050 मीट्रिक टन हो गई है। उल्लेखनीय है कि ऊंझा का गंज बाजार, इसबगोल, जीरा और सौंफ के लिए प्रसिद्ध है।<br /><br /><strong>कृषि विश्वविद्यालयों ने जारी की इसबगोल की चार किस्में</strong><br /><br />गुजरात के कृषि विश्वविद्यालयों ने गुजरात इसबगोल-1, गुजरात इसबगोल-2, गुजरात इसबगोल-3 और गुजरात इसबगोल-4 सहित इसबगोल की कुल चार उन्नत किस्में जारी की हैं। इन किस्मों का प्रति हेक्टेयर क्रमशः 800 से 900 किग्रा. और 1000 किग्रा. उत्पादन लिया जा सकता है।<br /><br /><strong>आयुर्वेदिक, यूनानी और एलोपैथी चिकित्सा में उपयोगी</strong><br /><br />इसबगोल के बीज की तासीर शीतल होती है और उसका उपयोग आयुर्वेदिक, यूनानी और एलोपैथी चिकित्सा में किया जाता है। इसके बीज और भूसी का उपयोग पाचन तंत्र एवं मूत्र-जननांग तंत्र के श्लेष्म झिल्ली की सूजन को कम करने में तथा आंतों के अल्सर, मस्से और गोनोरिया (सुजाक) जैसे यौन संचारित रोगों का उपचार करने के अलावा कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए किया जा सकता है।<br /><br />औषधीय उपयोगों के अतिरिक्त इसका उपयोग रंगाई, कपड़ा छपाई, आइसक्रीम उद्योग, मिठाई और सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में भी किया जाता है। इसबगोल के भूसी मुक्त बीज में 17 से 19 फीसदी प्रोटीन होता है, इसलिए इसका उपयोग पशु आहार में किया जाता है।<br /><br /><strong>भारतीय इसबगोल का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका</strong><br /><br />अमेरिका भारत से इसबगोल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो भारत से होने वाले कुल निर्यात में लगभग 75 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। वर्ष 2022-23 में भारत ने अमेरिका को 19,666 मीट्रिक टन इसबगोल का निर्यात किया था, जिसका मूल्य 1023.29 करोड़ रुपए है। वर्ष 2023-24 के लिए भी अप्रैल से जून तक की पहली तिमाही के दौरान अमेरिका को 343.20 करोड़ रुपए मूल्य के 4931.70 मीट्रिक टन इसबगोल का निर्यात किया गया है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि वर्तमान में भारतीय औषधीय फसल इसबगोल की अमेरिका में जबरदस्त मांग है।<br /><br /><strong>अमेरिका में बिकते हैं इसबगोल के विभिन्न उत्पाद</strong><br /><br />मार्केट रिसर्च कंपनी मिन्टेल के डेटा के अनुसार, इसबगोल के विभिन्न उत्पादों की अभी अमेरिका में जोरदार मांग है। वर्ष 2018 से वर्ष 2022 तक अमेरिका में इसबगोल के 249 नए उत्पाद बाजार में पेश किए गए थे। मास-मार्केट प्रोडक्ट मेटामुसिल के प्रवक्ता के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में इसबगोल उत्पादों की बिक्री दो अंकों की दर से बढ़ी है।<br /><br />इसबगोल के बहुत से नए उत्पादों का उपयोग अब अमेरिकी रसोईघरों में भी होने लगा है। कम कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने वाले लोग इसका बाइंडिंग के रूप में उपयोग करते हैं। रसोई के दौरान पतले सॉस को थोड़ा गाढ़ा बनाने के लिए इसबगोल का उपयोग होता है। वहीं, ग्लूटेन-फ्री बेकर्स ब्रेड और केक के बेकिंग में भी इसका उपयोग किया जाता है। अमेरिका में पाचन को आसान बनाने और भूख को नियंत्रित रखने के लिए भी इसबगोल का उपयोग किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Aug 2023 19:29:38 +0530</pubDate>
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                <title>एलोपैथी का विरोध कर रहे बाबा रामदेव की ये वाली फोटो वायरल हुई तो लोग लेने लगे मजे!</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">देश में आयुर्वेद की जड़ें मजबूत करने वाले बाबा रामदेव योग-प्राणायाम सिखाते-सिखाते अपना विशाल कारोबार भी खड़ा कर चुके हैं। देश-दुनिया में उनके करोडों प्रशंसक हैं। पतंजलि के विभिन्न उत्पाद भी बाजार में खूब बिकते हैं जिनमें आयुर्वेदिक औषधियों से लेकर रोज मर्रा के लिये उपयोग में आने वाले प्रोड्क्टस भी शामिल हैं। अपने प्रोडक्ट के प्रचार का भी जिम्मा मानो बाबा रामदेव के ही सिर पर हैं इसीलिये पतंजलि के विज्ञापनों में मानो ब्रांड एंबेसेडर के रूप में नजर आते हैं। लेकिन अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के चक्कर में कई बार बाबा रामदेव सीमा लांघ जाते हैं। इस</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/79538/when-this-photo-of-baba-ramdev-opposing-allopathy-went-viral-people-started-taking-fun"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-06/2419_k02062021-02.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश में आयुर्वेद की जड़ें मजबूत करने वाले बाबा रामदेव योग-प्राणायाम सिखाते-सिखाते अपना विशाल कारोबार भी खड़ा कर चुके हैं। देश-दुनिया में उनके करोडों प्रशंसक हैं। पतंजलि के विभिन्न उत्पाद भी बाजार में खूब बिकते हैं जिनमें आयुर्वेदिक औषधियों से लेकर रोज मर्रा के लिये उपयोग में आने वाले प्रोड्क्टस भी शामिल हैं। अपने प्रोडक्ट के प्रचार का भी जिम्मा मानो बाबा रामदेव के ही सिर पर हैं इसीलिये पतंजलि के विज्ञापनों में मानो ब्रांड एंबेसेडर के रूप में नजर आते हैं। लेकिन अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के चक्कर में कई बार बाबा रामदेव सीमा लांघ जाते हैं। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ। </span><br /></div><div>कोरोना काल में अपनी दवा कोरोनिल से महामारी का इलाज करने का दावा करने वाले बाबा रामदेव एक कार्यक्रम में एलोपैथिक के खिलाफ ऐसा कुछ कह गये कि देश भर के डॉक्टर उनसे खफा हो गये हैं। इंडियन मेडिकल एसोसियेशन ने तो बाबा रामदेव के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया है। बात बिगड़ते देख बाबा ने अपने स्वर कुछ शांत भी किये लेकिन आईएमए ने तेवर कड़े ही बनाये रखे। ऐसे में बाबा रामदेव भी इस बार लड़ाई लड़ लेने के मुड़ में नजर आ रहे है। </div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Baba Ramdev treating this poor doctor's ears with his heart <a href="https://t.co/uIPDoRBgfy">pic.twitter.com/uIPDoRBgfy</a></p>— Bodhisattva #DalitLivesMatter (@insenroy) <a href="https://twitter.com/insenroy/status/1399680432287805440?ref_src=twsrc%5Etfw">June 1, 2021</a></blockquote> <div>लेकिन इस बार मसला ये भी है कि बड़ी संख्या में आम लोग भी बाबा के एलोपैथि के खिलाफ दिये बयान से सहमत नहीं दिख रहे हैं। इसी क्रम में लोग भी बाबा को हिदायत देते सुने गये हैं कि वे अपने आपको आयुर्वेद तक ही सीमित रखें। खैर, सोशल मीडिया पर इस मसले पर टिप्पणियों की बाढ़ के बीच एक तस्वीर भी वायरल हो रही है। </div><div>इस वायरल तस्वीर में बाबा किसी मंच पर लेटे दिख रहे हैं और एक डॉक्टर साहब कान में स्टेथोस्कोप लगाये उनकी धड़कने जांच रहे हैं। इस तस्वीर पर लोग बड़े मजे ले रहे हैं। हालांकि ये तस्वीर कहां और कब की है यह तो पता नहीं चला है, लेकिन लोग रोचक टिप्पणियां कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने तो लिखा है कि बाबा रामदेव अपने दिल की धड़कनों से डॉक्टर के कान का इलाज करते हुए। अन्य यूजर ने लिखा है कि बाबा के दिल को खोजने के लिये पतंजलि के डॉक्टरों की जरूरत पड़ेगी। अन्य यूजर ने लिखा कि सुबह के भूले एलोपैथी को शाम को पतंजलि में बदला जा रहा है।</div><div>खैर, सोशल मीडिया पर मजाक-मस्ती तो चलती रहती है। जहां तक इस मसले का संबंध है, डॉक्टरों ने कल काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन भी किया। आईएमए का आरोप है कि बाबा रामदेव ने अपने बिजनेस को बढ़ावा देने के लिये कोरोना की मार्गदर्शिका का उल्लंघन किया है। देखना है, ये मसला कब सुलझता है।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ज़रा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 15:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>जानें प्रज्ञा ठाकुर को क्यों नहीं हुआ कोरोना, खुद बताई से बात</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:1rem;">कोरोना की लहर में आम और खास - कइयों ने अपनी जान गंवाई। कई नेता भी इस महामारी के दौरान मौत की नींद सो गये। कोरोना से बचने के लिये लोग नित निये उपाय भी करते दिखे। आयुर्वेद का भी चलन इस दौरान बढ़ चढ़ कर देखा गया। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ने खुद को कोरोना न होने का एक प्रमुख कारण बताया। </span><br /></div><div>राजधानी भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान साध्वी प्रज्ञा सिंह ने कहा कि वे नियमित रूप से गोमूत्र के अर्क का सेवन करती हैं। गोमुत्र का अर्क फेफडों में इन्फेक्शन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div><span style="font-size:1rem;">कोरोना की लहर में आम और खास - कइयों ने अपनी जान गंवाई। कई नेता भी इस महामारी के दौरान मौत की नींद सो गये। कोरोना से बचने के लिये लोग नित निये उपाय भी करते दिखे। आयुर्वेद का भी चलन इस दौरान बढ़ चढ़ कर देखा गया। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ने खुद को कोरोना न होने का एक प्रमुख कारण बताया। </span><br /></div><div>राजधानी भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान साध्वी प्रज्ञा सिंह ने कहा कि वे नियमित रूप से गोमूत्र के अर्क का सेवन करती हैं। गोमुत्र का अर्क फेफडों में इन्फेक्शन नहीं होने देता। आयुर्वेद में यह एक सिद्ध हुआ उपचार है। इसीलिये उन्हें कोरोना के लिये और कोई दवाई नहीं देनी पड़ी और उन्हें कोरोना भी नहीं हुआ।</div><div>साध्वी प्रज्ञा सिंह लंबे समय से बीमार भी चल रही हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि वे इन दिनों अपने स्टाफ के माध्यम से विभिन्न सेवा कार्यों में जुटी हुई हैं और प्रचार से दूर हैं। इसीलिये कुछ लोगों ने उनके गायब होने और ईनाम की घोषणाएं करके चुटकियां ली हैं लेकिन ऐसा करना संवैधानिक रूप से ठीक नहीं है। </div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">"I drink cow urine everyday, so I don't have covid," <a href="https://twitter.com/hashtag/BJP?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#BJP</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/MP?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#MP</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/SadhviPragyaSinghThakur?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#SadhviPragyaSinghThakur</a> said in a gathering and also mentioned how it protects people from lung infection. The video went viral on social media. <a href="https://t.co/VPkBmTxvlz">pic.twitter.com/VPkBmTxvlz</a></p>— Mojo Story (@themojostory) <a href="https://twitter.com/themojostory/status/1394268982971027464?ref_src=twsrc%5Etfw">May 17, 2021</a></blockquote>                                                                             ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/82273/learn-why-pragya-thakur-did-not-get-corona-talk-to-batya-herself</link>
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                <pubDate>Mon, 17 May 2021 16:37:32 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भगवान करे गुजरात के इस आयुर्वेदिक रिसर्चर की दवा कोरोना को मात दे दे, परिणाम तो अच्छे बता रहे!</title>
                                    <description><![CDATA[अगर सफल रही दवा तो बड़े तेजी से ठीक हो सकेंगे कोरोना मरीज, आयुर्वेदिक होने से इस दवा से कोई नुकसान भी सामने नहीं आया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/67012/may-god-defeat-the-medicine-of-this-ayurvedic-researcher-of-gujarat-corona-telling-the-results-good"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/5019_k19042021-01.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">बीते साल से दुनिया कोविड के आतंक से जूझ रहा है। हर देश अपने अपने स्तर पर कोरोना महामारी से निपने के लिए तरह तरह के दवाइयों पर काम कर रहे हैं। साथ ही कोई देशों की वैक्सीन्स को उपयोग में भी ले लिया गया है। भारत में भी कोविशिल्ड और कोवैक्सिन नामक वैक्सीन को मान्यता देकर देशभर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण शुरू किया है। ऐसे में देश के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। </span></div><div><span style="font-size:1rem;">अहमदाबाद के दो सरकारी अस्पतालों में एक नए दवा पर ट्रायल किया गया और परिणाम में इस दवा को कोरोना के खिलाफ कारगर पाया गया है।इस दवा का नाम 'आयुध एडवांस’ है और इसे इक्कीस प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों से निर्मित किया गया है। दवा के ट्रायल के दौरान पाया गया कि इसकी असरकार क्षमता मात्र चार दिन है और इतने ही समय में इस दवा ने वायरस के संक्रमण को काफी हद तक कम कर दिया।</span><br /></div><div>आपको बता दें कि इस दवा के परिक्षण में अहमदाबाद के एसवीपी अस्पताल के 60 जबकि सोला सिविल के 120 मरीजों को ये दवा दी गई और ये दवा उन पर काफी कारगर सिद्ध हुई। साथ ही इस दवा का कोई साइड इफेक्ट भी सामने नहीं आया है। परिक्षण के दौरान जिन मरीजों को ये दवा दी गई वे सभी नेगेटिव आए और बुखार, खांसी और सांस की तकलीफ जैसे लक्षणों में बेहद सुधार देखा गया।</div><div>आपको बता दें कि कंटेम्परेरी क्लिनिकल ट्रायल कम्युनिकेशन' मैग्जीन में छपी एक <a href="">रिसर्च </a>के मुताबिक आयुध कोरोना के इलाज में एडवांस स्टैंडर्ड ऑफ केयर पर खरी उतरी है। भारत के ट्रांसलेशन हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई) और भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी द्वारा रेमडेसिविर की तुलना में 'एएयूडीएच एडवांस' को 3 गुना अधिक प्रभावी पाया गया। साथ ही इस दवा पर अधिक रिसर्च के लिए इसके पेपर्स होवार्ड भेजे गये है। यह रिसर्च नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, अमेरिका की वेबसाइट पर भी प्रकाशित हुई है।</div><div>गुजरात में निर्मित यह आयुर्वेदिक दवा एक लिक्विड है जिसमें 21 तरह के पौधों के अर्क शामिल हैं। आयुर्वेदिक सामग्रियों इस दवा को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बताते हैं। इसका उपयोग 50,000 से अधिक लोगों द्वारा किया जा रहा है। वही ट्रायल की बात करें तो इस दवा को पहले रिसर्च के दौरान माइल्ड रोगियों पर इसको परखा गया। पहले क्लिनिकल रिसर्च के सफल परिणामों के बाद इसके बड़े परिक्षण किए गए। इसके बाद इसे गंभीर बीमारी वाले मरीजों पर जांचा गया। इन रोगियों को दिन में चार बार इसकी डोज दी गई और वे केवल चार दिनों के भीतर ही ठीक हो गए।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Apr 2021 09:54:18 +0530</pubDate>
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