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                <title>Chaitra Navratri - Loktej</title>
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                <description>Chaitra Navratri RSS Feed</description>
                
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                <title>चैत्र नवरात्रि विशेष : जब अपना सर काट कर देवी ने मिटाई थी अपनी सखियों की भूख, झारखंड में स्थित छिन्नमस्तिका माता का यह मंदिर है काफी अनोखा</title>
                                    <description><![CDATA[माता का अंतिम विश्राम स्थल माना जाता है मंदिर, सप्तमी के दिन चढ़ाई जाती है बकरी की बाली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80600/chaitra-navratri-special-when-goddess-had-eradicated-the-hunger-of-her-friends-by-cutting-off-her-head-this-temple-of-chinnamastika-mata-located-in-jharkhand-is-quite-unique"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2022-04/3960_s1-040422.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">देश भर में फिलहाल चैत्री नवरात्रि मनाई जा रही है। आज तीसरे दिन चंद्रघंटा के रूप में मां दुर्गा की पूजा की जा रही है। सुबह से ही मां के मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखी जा सकती है। लाल फूल और लाल चुनर से मां की पूजा की जाती है। इस मौके पर झारखंड के छिन्नमस्तिका देवी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। राजधानी से करीब 80 किलोमीटर दूर रामगढ़ जिले के रजरप्पा में स्थित इस मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। माँ यहाँ बिना सिर के स्थित है और यह माँ कामाख्या मंदिर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शक्ति पीठ है। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">रजरप्पा का मां छिन्नमस्तिका का मंदिर भैरवी-भेदा और दामोदर नदियों के संगम पर स्थित है। वैसे तो यहां साल भर भक्तों की आवाजाही देखने को मिलती है, लेकिन नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर में माताजी बिना सिर के विराजमान हैं। मंदिर में माता की मूर्ति में गले से बहने वाली रक्त की धारा  देखी जा सकती है माताजी का कटा हुआ सिर उनके हाथ में है, और उनके गले से रक्त की धारा बह रही है। चट्टान में देवी की तीन आंखें हैं। गले में सांप और कण्ठमाला पाए जाते हैं। माताजी के बाल खुले हुए हैं और जीभ बाहर निकली हुई है। इस स्वरूप में माता कामदेव और रति के ऊपर नग्नाअवस्था में खड़ी है।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">यहां मां की मौजूदगी के पीछे एक पौराणिक गाथा है। कथा के अनुसार एक बार मां भवानी अपनी दो सहेलियों के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने गई थीं। नहाने के बाद उसकी सहेलियों को भूख लग गई। दोनों को इतनी अधिक भूख लगी थी की वह काली हो गई। उन्हों ने माताजी से कुछ खाने को माँगा। अपनिओ सहेलियों को तड़पता देख माई ने तलवार से अपना सिर काट लिया। कथा के अनुसार माताजी का कटा हुआ सिर फिर उनके हाथ पर गिरा और रक्त की धारा बहने लगी। माताजी ने अपने सिर से रक्त की दो धाराएँ अपनी सहेलियों की ओर बहा दीं। उनके इस रूप को तब से छिन्नमस्तिका के नाम से जाना जाता है।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">इस मंदिर का इतिहास छह हजार साल पुराना है। पुराणों में भी माताजी का वर्णन मिलता है। मंदिर की वास्तुकला इसकी प्राचीनता का प्रमाण है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाभारत के समय हुआ था। इस मंदिर के अलावा सात अन्य मंदिर हैं, जिनमें महाकाली मंदिर, सूर्य मंदिर, दास महाविद्या मंदिर, बाबाधाम मंदिर, बजरंगबली मंदिर, शंकर मंदिर और विराट रूप मंदिर शामिल हैं। मंदिर के पश्चिम से दामोदर नदी बहती है और भैरवी नदी दक्षिण से बहती है।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">माना जाता है कि मां रात के समय मंदिर में विचरण करती हैं। यही कारण है कि रात के समय एकांत दिखाई देता है और कई साधक तंत्र मंत्र की प्राप्ति में लग जाते हैं। नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में साधु यहां आते हैं और मंदिर में 13 हवन कुंडों में विशेष अनुष्ठान करके सिद्धि प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान माताजी का अंतिम विश्राम स्थल भी है। यहां चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन सुबह के समय एक बकरे का भोग लगाया जाता है। फिर कटे हुए सिर पर कपूर रखकर आरती की जाती है।</span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फिचर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 15:44:01 +0530</pubDate>
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                <title>सूरत : नवरात्री में गरबा खेलने की अनुमति मिलने के साथ ही गरबाप्रेमियों को आई इस चीज की याद</title>
                                    <description><![CDATA[माताजी के गरबा के लिए सजावटी मटके या गरबी की मांग तेज, तरह तरह की डिजाईन में बन रही गरबी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/71828/surat-with-the-permission-to-play-garba-in-navratri-garba-lovers-remembered-this-thing"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-09/4457_1.jpg" alt=""></a><br /><div>गणेशोत्सव के अमापन के साथ ही लोगों में अब नजदीक आ रहे नवरात्रि के पर्व को लेकर उत्सुकता देखी जा रही है। साथ ही इस बार सरकार द्वारा गलियों-मोहल्लों में गरबा करने की अनुमति मिल जाने से त्यौहार का रंग दुगना हो चला है। कोरोना के कारण पिछली साल गरबा नहीं खेल पाने वाले लोग इस बार गरबा खेलने के लिए बेताब हैं। ऐसे में अब माताजी के गरबा के लिए सजावटी मटके की मांग बढ़ गई है। पारंपरिक रूप से स्थापित मंडपों में गरबप्रेमियों के बीच विभिन्न रंग-बिरंगी, रोशनी वाली और माताजी की तस्वीरों, जैसी  मटकियों की मांग देखी गई है।</div><div>आपको बता दें कि पारंपरिक नवरात्रि में माताजी की गरबी यानि मटकी का बहुत महत्व रहा है और इसलिए माताजी की स्थापना के लिए गरबी की स्थापना की जाती है। पहले के समय में माताजी की साधारण गरबियों की स्थापना की गई थी। समय के साथ यह चलन बदल गया है और अब माताजी की फैंसी और डिजाइनर गरबियों की स्थापना हो रही है। इन मटकियों या गरबी को बनाने वालों का कहना है कि उनके पास इस समय माताजी की सजावट वाली गरबियों की अधिक मांग है। और तरह-तरह की सजावट इन गरबियों को अलग ही लुक देते है।</div><div>जानकारी के अनुसार इन मटकियों की सजावट में जरदोशी का काम, मोती का काम, माताजी के विभिन्न रूपों की पेंटिंग और रोशनी भी शामिल है। इनकी कीमत 700 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक हो सकती है। जबकि बाजार में साधारण गरबी 80 से 100 रुपये में मिल जाती है। सजावटी मटकी के लिए उनके पास भरूच और बड़ौदा के लोग भी हैं।</div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Sep 2021 21:29:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>बिहार : कोरोना के दूसरी लहर के बीच उदीयमान सूर्य के अर्घ्य के साथ चैती छठ संपन्न</title>
                                    <description><![CDATA[चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व संपन्न ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/82035/bihar-chaiti-chhath-concluded-with-the-rising-sun-in-the-second-wave-of-corona"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/6691_chhath-puja-patna-bihar-ganga.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">पटना, 19 अप्रैल (आईएएनएस)| कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए बिहार में नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस बीच, सोमवार को आस्था के महापर्व चैती छठ के चौथे और अंतिम दिन व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व संपन्न हो गया। कोरोना के कारण बिहार में प्रशासन ने लोगों को घर में रहकर ही छठ पूजा करने की अपील की थी। इसके बाद ज्यादातर लोगों ने अपने घर में ही भगवान भास्कर की पूजा की और अघ्र्य दिया। इस क्रम में रविवार की शाम अधिकांश व्रती अपने घरों की छत पर ही भगवान भास्कर को अघ्र्य दिया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखा गया।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">सोमवार की सुबह उदीयमान भगवान सूर्य को अघ्र्य देने के साथ ही लोकआस्था का महापर्व चैती छठ संपन्न हो गया। </span><span style="font-size:1rem;">छठव्रतियों ने सोमवार को उगते सूर्य को अघ्र्य दिया और भगवान भास्कर से सुख, समृद्धि के साथ कोरोना वायरस के समाप्त होने की कामना की और मन्नतें मांगी।</span></div><div><span style="font-size:1rem;">शनिवार की शाम में व्रतियों ने चावल-गुड़ की खीर, रोटी बनाकर फल-फूल से विधिवत पूजा कर भगवान भास्कर को भोग अर्पित किया और खरना किया। शुक्रवार को नहाय खाय के साथ चैती छठ प्रारंभ हुआ था। </span><span style="font-size:1rem;">राज्य के कुछ क्षेत्रों में छठ पूजा से संबंधित दुकानें अवश्य लगी थी, लेकिन आम छठ पर्व की तरह खरीददारी नहीं हुई। लॉकडाउन के कारण कई व्रती पहले ही छठ व्रत करने की योजना को रद्द कर चुके थे।</span></div><div><span style="font-size:1rem;">उल्लेखनीय है कि छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। एक चैत्र माह में दूसरा कार्तिक माह में। बिहार में इस पर्व को बड़ी ही धूमधाम और पूरी निष्ठा के साथ मनाया जाता है।</span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रादेशिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Apr 2021 13:18:13 +0530</pubDate>
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                <title>कल से शुरू हो रही है चैत्र नवरात्रि, जानें किस दिन होगी किस माताजी की पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[हिंदू मान्यताओं के अनुसार अनोखा है चैत्र नवरात्रि का पर्व, माता खुद आती है धरती पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/79855/chaitra-navratri-is-starting-from-tomorrow-knowing-which-day-will-be-the-worship-of-which-mother"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/9147_durga-mata-navratri.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">हिन्दू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन से ही हिंदूओं का नया साल शुरू होता है। इसके अलावा यह पर्व माता शक्ति की उपासना का भी है। इस दौरान माता दुर्गा की स्थापना कर उनकी पुजा की जाती है। इस साल चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू होकर 22 अप्रैल के दिन खतम होगी। बता दे की साल में दो बार नवरात्रि आती है, एक तो चैत्र नवरात्रि और दूसरी शरद नवरात्रि। इस दौरान माता दुर्गा की विधि पूर्वक स्थापना कर उनकी पुजा की जाती है। इस दौरान घटस्थापना भी की जाती है। तो आइये जानते है की इस बार चैत्र नवरात्रि के दौरान कौन सी तारीख को इस माता की पुजा की जाएगी। </span><br /></div><div>बता दे की नवरात्रियों की प्रमुख तिथियों में 15 अप्रैल को गणगौर पुजा, 19 अप्रैल को सप्तमी, 20 अप्रैल को दुर्गाष्टमी और 21 अप्रैल को रामनवमी की पुजा की जाएगी। इस दौरान 13 अप्रैल को घट स्थापना की जाएगी और साथ ही माँ शैलपुत्री की पुजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद 14 अप्रैल से 21 अप्रैल तक अनुक्रम माँ ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा, माँ कुष्मांडा, माँ स्कंदमाता, माँ कात्यायनी, माँ कालरात्री, माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री की पुजा की जाएगी। अंत में 22 अप्रैल को लोग अपने उपवास का अंत करेंगे। नव दिनों के दौरान माँ दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पुजा अर्चना की जाती है। </div><div>इन नव दिनों के दौरान यदि कोई बताए गए उपाय करता है तो उसे माता की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। </div><div>- नवरात्रि के पावन दिनों में अखंड दिया करने का काफी ज्यादा महत्व है। एक बात खास ध्यान दी जाए की अखंड दिया रखने के बाद घर को खाली नहीं छोडना चाहिए। </div><div>- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान माता धरती पर विचरण करती है। इसलिए नव दिनों तक माता को सात्विक चीजों का भोग चढ़ना चाहिए। </div><div>- नव दिनों के दौरान माताजी का ध्यान रखने से माता अत्याधिक खुश होती है। इस दौरान दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। </div><div>- माता को खुश करने के लिए हर रोज उनपर पुष्प अर्पित करे। यदि हो सके तो अधिकतर लाल फूल का प्रयोग करे, क्योंकि माता को लाल रंग के पुष्प अधिक प्रिय होते है। </div><div>- नवरात्रि के दौरान माता को सुहागनों का सामान भी अर्पित करना चाहिए। माता को सुहागनों का सामान अर्पित करना काफी शुभ माना जाता है। </div><div><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 12 Apr 2021 19:32:40 +0530</pubDate>
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                <title>सूरत : उमिया माता मंदिर कोरोना के कारण से 18 अप्रेल तक बंद रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने अंबाजी मंदिर में सिर्फ माताजी के चेहरे का दर्शन किया जा सकेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div><span style="font-size:1rem;">माता की भक्ति के लिए उत्तम माने जाने वाले चैत्र नवरात्रि का कल से शुभारंभ हो रहा है लेकिन, इस बार माता की भक्ति पर भी कोरोना का ग्रहण लग गया है। कोरोना के कारण माता के मंदिरों में सतर्कता के साथ कई प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। वराछा के उमिया माता मंदिर को कोरोना के कारण से 18 तारीख तक बंद करने का फैसला किया गया है। जबकि पुराने अंबाजी मंदिर में सिर्फ माताजी के चेहरे का दर्शन किया जा सकेगा। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">सूरत शहर में प्राचीन और कोटसफिल रोड पर स्थित पुराने अंबाजी मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां पर हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि के दिनों में तो यहां पांव रखने की भी जगह नहीं मिलती। लेकिन इस साल जिस तरह कोरोना फैल रहा है इसे देखते हुए मंदिर के मैनेजमेंट ने फुल हार सहित सामग्री लाने पर प्रतिबंध रख दिया है। साथ ही मंदिर के प्रांगण में से 20 फीट दूर से ही माता के मुख का दर्शन किया जा सकेगा। </span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">प्रथम दिन घट स्थापना और आठवें दिन यज्ञ जैसी धार्मिक विधी आदि तमाम धार्मिक विधियों का ऑनलाइन प्रसारण किया जाएगा। दूसरी ओर वराछा के उमिया मंदिर में भी बंद रहने के कारण भक्तों को निराशा हुई है। घट स्थापन, पूजा-पाठ, अनुष्ठान आदि पुजारी और ट्रस्टियों की उपस्थिति में किया जाएगा।</span><br /></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सूरत</category>
                                    

                <link>https://www.loktej.com/article/69925/surat-umiya-mata-temple-will-be-closed-till-april-18-due-to-corona</link>
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                <pubDate>Mon, 12 Apr 2021 12:30:09 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Loktej]]></dc:creator>
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                <title>भौमाश्विनी सर्वार्थसिद्धि योग में प्रारंभ होगा आनंद नाम का नया 2078 विक्रम वर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[नए वर्ष के राजा मंगल होंगे मंत्री भी मंगल होंगे; शास्येश शुक्र, दुर्गेश मंगल, धनेश शुक्र, रशेष सूर्य, रोहिणी का वास समुद्र में होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/80921/new-2078-vikram-year-named-anand-will-start-in-bhaumashwini-sarvarthasiddhi-yoga"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/6951_chaitra-navratri-hindu-new-year.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">भारतीय वैदिक एवं ज्योतिषीय परंपरा में बताया गया है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है क्योंकि इसी दिन सृष्टि का आरंभ हुआ है। </span><span style="font-size:1rem;">ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि जब सूर्य और चंद्रमा मीन राशि में एक समान अंशों पर गोचर कर रहे होते हैं तो हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। सामान्यतया ऐसी स्थिति प्रतिवर्ष मार्च-अप्रैल में बनती है, जब मौसम में भी सर्वत्र बदलाव आ रहा होता है। इस वर्ष 12 अप्रैल को सुबह 8 बजे भारतीय समयानुसार हिंदू नव-वर्ष की कुंडली बनेगी, जिसमें वृष लग्न उदय हो रहा है। तथा इस समय कुमार योग बनने से विद्यारंभ, साझेदारी, व्यापार आदि के विशेष संयोग। आजाद भारत की कुंडली भी वृष लग्न की है, जिसमें राहु विराजमान हैं। इस वर्ष नव-वर्ष की कुंडली में वृष लग्न में मंगल और राहु दो क्रूर ग्रह स्थित हैं, जो समाज में बेहद उथल-पुथल लाने वाले हो सकते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार नव-वर्ष का उदय लग्न उस राष्ट्र की स्थापना कुंडली के सामान हो तो वह वर्ष उस राष्ट्र विशेष के लिए ऐतिहासिक बदलाव लेकर आने वाला होता है, जैसा इस वर्ष भारत के लिए होने वाला है ।</span></div><div>चैत्र मास की प्रतिपदा इस वर्ष 13 अप्रैल मंगलवार के दिन होगी क्योंकि उस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि चल रही होगी अत: वर्ष का राजा ‘मंगल होगा’। संयोग से 13 अप्रैल को ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे जिस कारण से मंगलवार के दिन ‘मेष संक्रांति’ होने पर वर्ष के ‘मंत्री’ या ‘सेनापति’ का पद भी मंगल ग्रह की झोली में जा रहा है। ऐसा संभवता कई दशकों के बाद होने जा रहा है कि जब वर्ष के राजा और मंत्री का पद मंगल जैसे क्रूर ग्रह को मिलने जा रहा है जिसे भारतीय ज्योतिष में ‘युद्ध और उत्पात’ का कारक माना जाता है।</div><div>नवरात्र में विशेष साधना एवं देवी पूजन का फल प्राप्त होगा सर्वार्थ सिद्धि योगो में सबसे श्रेष्ठ भौमाश्विनि योग माना जाता है जोकि देवी की आराधना पूजा आदि के लिए उपयुक्त है कर्जे से दबे हुए लोग, लोन, ऋण आदि से मुक्ति के लिए भी इस नवरात्रि देवी की आराधना करें जिससे इन्हें विशेष लाभ होगा।</div><div>जनता के लिए ठीक नहीं ग्रहों का ऐसा संयोग जी हां भविष्य फल भास्कर और वर्ष प्रबोध जैसे ग्रंथों के अनुसार मंगल के राजा और मंत्री बनने पर “देश का राजा (यानि सरकार) बेहद कड़े और जनता के हितों के प्रतिकूल निर्णय लेता है। महंगाई, अग्निकांड, असामान्य वर्षा, बिजली गिरने जैसी घटनाएं अधिक होती हैं, और फसलों को नुकसान होता है। ऐसे वर्ष में लोग पित्त संबंधी रोग से अधिक परेशान होते हैं। आधुनिक मत से मंगल के राजा और मंत्री बनने पर देश में आपातकाल और युद्ध जैसे हालत बन सकते हैं।</div><div><span style="font-size:1rem;">बढ़ेगा निवेश लेकिन सीमा पर तनाव मित्रों नव वर्ष की कुंडली में लग्न में बैठे मंगल सप्तम और द्वादश स्थान के अधिपति हैं। जबकि इस वर्ष की कुंडली में लग्नेश शुक्र हैं जिनके साथ मंगल का स्थान परिवर्तन योग बन रहा है। यानी मंगल और शुक्र दोनों एक-दूसरे की राशि में होंगे। शुक्र मंगल का यह स्थान परिवर्तन भारत में जहां एक ओर विदेशी निवेश बढ़ाएगा तो वहीं विदेशी शक्तियों जैसे चीन और पाकिस्तान से टकराव भी करवा सकता है।</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;">संवत 2078 हिंदू नव-वर्ष की कुंडली में चतुर्थ भाव के अधिपति सूर्य पंचमेश बुध तथा तीसरे घर के स्वामी चंद्र के साथ लाभ स्थान यानी एकादश भाव में राज योग बना रहे हैं जिस पर नवम भाव से शनि की दृष्टि के चलते सरकार द्वारा जन-स्वस्थ्य सेवा का विस्तार होगा और कोरोना महामारी के उपचार में तेज़ी लाई जाएगी। नवम भाव में बैठे शनि और दशम भाव में बैठे गुरु हिंदू नव-वर्ष की कुंडली में सरकार और सर्वोच्च न्यायालय द्वार कुछ ऐतिहासिक निर्णय लिए जाने के संकेत दे रहे हैं। सरकार द्वार कुछ राज्यों में विशेष व्यवस्था भी लायी जा सकती है।</span><br /></div><div>इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब के कई स्थानों पर वर्षा और ओलावृष्टि हो सकती है फसलों के हानि के योग हैं दक्षिण व पूर्वी प्रांतों में तूफानी वायु, वेग, चक्रवात का भय व्याप्त रहेगा। समाजवादी विरोधी आतंकवादी तत्व बम विस्फोट, अग्निकांड आदि द्वारा भय एवं अशांति का वातावरण तैयार करेंगे। जीवन उपयोगी खाद्य वस्तुओं में विशेष महंगाई होने से साधारण जन में रोष व्याप्त होगा। शनि राहु के नव पंचक योग से अमेरिका और इंग्लैंड का अन्य महा शक्तियों के साथ मतभेद होगा। हवाएं चलेंगी लू और गर्मी का प्रकोप अधिक रहेगा।</div><div><div><b>डॉ मृत्युंजय कुमार तिवारी</b> (विभागाध्यक्ष ज्योतिष)</div><div>श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय निंबाहेड़ा चित्तौड़गढ़ राजस्थान।</div></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Apr 2021 15:18:06 +0530</pubDate>
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                <title>गुजरात : चैत्र नवरात्रि में यात्राधाम पावागढ़ में माँ काली का मंदिर बंद रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण लिया गया फैसला, नवरात्रि में आते हैं करीब १५ लाख भक्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.loktej.com/article/66979/gujarat-maa-kali-s-temple-in-yatradham-pavagadh-will-remain-closed-in-chaitra-navratri"><img src="https://www.loktej.com/media/400/2021-04/8399_kalika-mata-temple-pavagadh-gujarat.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:1rem;">गुजरात के सुप्रसिद्ध यात्रा धाम तथा शक्तिपीठ पावागढ़ में विराजित काली माता के मंदिर के पट चैत्र नवरात्रि के दौरान 17 दिनों तक बंद रखने का फैसला किया गया है। पावागढ़ में विराजित काली माता के दर्शन के लिए चैत्र नवरात्रि पर और आसो नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इस दिन माता के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।ं</span><br /></div><div><span style="font-size:1rem;"><b>इन दिनो 15 लाख भक्त आते हैं दर्शन को :</b> </span><span style="font-size:1rem;">एक अंदाज के अनुसार इस दिन लगभग 15 लाख लोग माता के दर्शन के लिए आते हैं। पिछले साल मार्च महीने से कोरोना पूरे दुनिया में हाहाकार मचा रखा है। इसके बाद भारत में भी फिर से कोरोनावायरस की दूसरी लहर चल रही है। जिसमें कि गुजरात में भी परिस्थिति अच्छी नहीं है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में माता के भक्त दर्शन के लिए आएंगे तो कोरोना गाइडलाइन का पालन कर पाना मुश्किल होगा और संक्रमण भी तेजी से फैल सकता है। इसलिए आगामी 12 तारीख से 28 तारीख तक भक्तजनों को माता का दर्शन नहीं मिल पाएगा। </span></div><div><span style="font-size:1rem;"><b>ऑनलाइन की गई है व्यवस्था : </b></span><span style="font-size:1rem;">नवरात्रि के दौरान मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों के दर्शन ऑनलाइन व्यवस्था की है। इसके बाद सरकार यदि कोई नई गाइडलाइन जारी करती है तो 29 तारीख से माता जी के मंदिर के पट भक्तों के दर्शन के लिए खुल जाएंगे। उल्लेखनीय है कि कोरोना के कारण पिछले साल भी चैत्र नवरात्रि और उसके पश्चात आसव के दौरान नवरात्रि के दिनों में भक्तों को माता के दर्शन नहीं हो सके थे और इस बार फिर से माता के दर्शन में कोरोना का ग्रहण लगने से भक्तों में नाराजगी है।</span></div>                                                                            ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>गुजरात</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Apr 2021 13:13:02 +0530</pubDate>
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