महिला दिवस : 15 वर्ष में 5000 पोस्टमॉर्टम करने वाली सूरत की महिला चिकित्सक को सलाम


हरेक क्षेत्र में महिलाओं का अग्रिम स्थान रहा है। ऐसी ही एक महिला निशा चंद्रा, जो शहर की नई सिविल अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम में कार्यरत हैं।
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सूरत। आज 8 मार्च है। इस दिन को विश्वभर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाया जाता है। आज के युग में महिलाएं नए-नए शिखरों को पार कर रही हैं। आज ऐसी कितनी ही महिलाएं हैं, जो पुरूष समान बनी हैं। हरेक क्षेत्र में महिलाओं का अग्रिम स्थान रहा है। ऐसी ही एक महिला हैं निशा चंद्रा, जो सूरत शहर की न्यू सिविल अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम में कार्यरत हैं।

मूल झारखंड की निवासी और सूरत सिविल अस्पताल में कार्यरत डॉ. निशा चंद्रा ने एमबीबीएस तक की पढाई की है। सर्वप्रथम उन्होंने भरूच के हांसोट में डॉक्टर के तौर पर सेवाएं दी थी। उसके बाद वर्ष 2004 में सूरत की नई सिविल अस्पताल में जुड़ीं। जहां वह पिछले डेढ़ दशक से पोस्टमॉर्टम का कार्य कर रही हैं। अभी तक उन्होंने लगभग 5 हजार से अधिक पोस्टमॉर्टम किये हैं।

डॉ. निशा चंद्रा ने डेढ़ दशक के दौरान हुए अनुभव के बारे में कहा कि कई प्रकार के केसों के पोस्टमॉर्टम मेरे पास आते थे, तब महिला के तौर पर मुझे काफी दु:ख होता था। तो भी मैंने निर्भयता से पोस्टमॉर्टम किये हैं। शुरूआत में पोस्टमॉर्टम करना कठिन कार्य लगता था किंतु जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता गया, वैसे-वैसे यह कार्य सरल हो गया है।

इसी क्रम में एक महिला पुलिस ने बताया कि मैं महिला पुलिस होने के बावजूद भी पोस्टमॉर्टम रूम में कार्यरत हूं, जो मेरे लिए एक गौरव की बात है। जिस विभाग में पुरूषों को भी जाने के लिए काफी परेशानी और डर का अनुभव होता है, वैसी जगहों पर मैं आसानी से पोस्टमॉर्टम कर रही हूं।