क्या जिनेवा समझौते को मानेगा पाकिस्तान?


हमारे भारत के जाबांज किसी भी परिणाम की परवाह किये बिना माँ भारती के लिए अपना सर्वस्व समर्पण करने की भावना अपने मन मे रखते है।
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जब सीमा पर तनाव का माहौल बनता है तब नुकसान दोनो तरफ ही होता है। हमारे भारत के जाबांज जवानों में इतना हौसला है कि वो किसी भी परिणाम की परवाह किये बिना माँ भारती के लिए अपना सर्वस्व समर्पण करने की भावना अपने मन मे रखते है। तभी बालाकोट में एयर स्ट्राइक जैसे कदम को वो अंजाम दे सके थे।

कल पाकिस्तान ने भी जबाबी कार्यवाही करनी चाही थी, लेकिन सेना ने इसे नाकामयाब कर दिया था। उसके 3 विमानों ने पुंछ और राजौरी में भारतीय वायुक्षेत्र का उल्लंघन किया था। वायुसेना ने घुसपैठ का जवाब देने के लिए 2 मिग 21 और 3 सुखोई30 विमान भेजे। मिग के पायलट ने एक पाकिस्तानी एफ16 मार गिराया। हालांकि इस दौरान हमारा एक मिग क्रैश हो गया, जिसके चलते पायलट विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तान ने बंदी बना लिया। भारत ने पाकिस्तान से कहा कि हमारे पायलट को किसी भी तरह का नुकसान ना पहुंचे और पाकिस्तान उसे सुरक्षित वापस लौटाए।

अभिनंदन से जुड़े काफी सारे वीडियोज भी सोशल मीडिया में वायरल हैं। मगर देश की चिंता इस वक्त यही है कि अभिनंदन सुरक्षित वापस भारत आ जाएं। दावा किया जा रहा है कि अभिनंदन सुरक्षित रहेंगे,क्योंकि पाकिस्तान उन्हें प्रिजनर ऑफ वॉर की तरह ट्रीट करेगा।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पायलट अभिनंदन के साथ पाकिस्तान के अभद्र व्यवहार को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। यह अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार और जिनेवा समझौते का उल्लंघन है। पाकिस्तान को साफ तौर पर यह बता दिया गया है कि वह इस बात को सुनिश्चित करे कि हमारे घायल अधिकारी को कोई नुकसान ना पहुंचे।

दरअसल प्रिजनर ऑफ वॉर मतलब युद्धबंदी को कुछ खास छूट और सहूलियतें मिलती हैं। उसके साथ आम दुश्मन की तरह व्यवहार नही किया जाता। प्रताड़ित नहीं किया जाता। इसके लिए पहली बार गाइडलाइंस बनी थीं 1929 में हुए जिनेवा कन्वेंशन में, फिर 1949 में हुए तीसरे जिनेवा कन्वेंशन में द्वितीय विश्व युद्ध की गलतियों को देखते हुए इसको पुनर्निर्धारित किया गया था। हालांकि ये प्रिजनर ऑफ वॉर का स्टेटस सबको नहीं मिलता है।यह सिर्फ उन 174 राष्ट्रों पर लागू होता है, जिन्होंने 1977 में हुए फर्स्ट ऐडिशनल प्रोटोकॉल को माना था। जिसमे भारत और पाकिस्तान दोनो शामिल है।

अभी तक पाक की मीडिया रिपोर्ट्स में विंग कमांडर अभिनंदन के जो वीडियो आए हैं, उनमें भी अभिनंदन को युद्धबंदी की तरह ही ट्रीट करता दिखाया जा रहा है। वो चाय पीते दिख रहे हैं,अपनी सलामती की बात कह रहे हैं। इसी तरह पहले आए एक वीडियो में अभिनंदन से जब जानकारी मांगी गईं तो उन्होंने सिर्फ नाम, उम्र, रैंक और सर्विस नंबर ही बताया और पूछने पर उन्होंने बताने से इनकार कर दिया। इसके बाद पाक सेना उन्हें फोर्स करती नहीं दिखी।

अभी देशवासियों को विंग कमांडर अभिनन्दन की काफी चिंता है। सभी उनकी सलामती की दुआ कर रहे है क्योकि कही न कही सबको लग रहा है कि पाकिस्तान का कोई भरोषा नही की वो जिनेवा समझौते के अनुसार चले। अगर पाकिस्तान इस समझौते का पालन नही करता है तो हिंदुस्तान को इजराइल जैसे होने में देर नही करनी चाहिए जिसने ईदी अमीन के चंगुल से अपने नागरिकों को निकालने के लिए उसके ही देश मे सफल ऑपरेशन कर दिखाया था। हमारे हर जवान की जान कीमती है। हर नागरिक भारत माता का प्रिय पुत्र है। उसकी हिफाजत करना तथा उसे दुश्मन के चंगुल से किसी भी प्रकार छुड़ाना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय