हटेगा 35A या केवल चुनावी मुद्दा रहेगा?


अभी आजकल हमारे देश मे जो सर्वाधिक चर्चा में है वो संविधान का अनुच्छेद 370 तथा 35A है। हर कोई इन्हें हटाने की मांग कर रहा है।
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अभी आजकल हमारे देश मे जो सर्वाधिक चर्चा में है वो संविधान का अनुच्छेद 370 तथा 35A है। हर कोई इन्हें हटाने की मांग कर रहा है। वैसे अभी की जो सत्ताधारी पार्टी है उसका मुख्य चुनावी मुद्दा भी यही होता आया है। कमोबेश हर घोषणा पत्र में इसकी चर्चा जरूर होती है। लेकिन पार्टी दो बार सत्ता में रह चुकी है फिर भी इस पर कोई ठोस कदम नही उठाये गए है, न ही सोचा गया है। हां, पार्टी के समर्थक यह कहकर मन की भड़ास जरूर निकाल लेते है कि यह नेहरू का किया धरा है। अभी इसको हटाने की मांग भले ही पुरजोर में चल रही हो लेकिन सरकार के कान में अभी तक जूं भी नही रेंगी है।

हाँ हमारे देश के राष्ट्रवादी नागरिकों की एक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका जरूर दायर कर रखी है अनुच्छेद 35A के विषय मे, जिसकी सुनवाई मंगलवार को होने वाली है। लेकिन इस सुनवाई से पहले ही कश्मीर में तनाव की स्थिति है। ऐसा कोई नई बात नही है, पिछली सुनवाई के दौरान भी घाटी का वातावरण तंग हुआ था।
भारतीय संविधान की बहुचर्चित धारा 370 जम्मू-कश्मीर को कुछ विशेष अधिकार देती है। 1954 के जिस आदेश से अनुच्छेद 35A को संविधान में जोड़ा गया था, वह आदेश भी अनुच्छेद 370 की उपधारा (1) के अंतर्गत ही राष्ट्रपति द्वारा पारित किया गया था। दरअसल अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर की विधान सभा को स्थाई नागरिक की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है, जिसे कि राज्य में 14 मई 1954 को लागू किया गया था। यह अनुच्छेद संविधान की किताबों में देखने को नहीं मिलता है।

इतिहास की अगर माने तो इसे राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 14 मई 1954 को लागू किया था। इस आदेश के राष्ट्रपति द्वारा पारित किए जाने के बाद भारत के संविधान में इसे जोड़ दिया गया। अनुच्छेद 35A धारा 370 का हिस्सा है। इस धारा के तहत जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी भी राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में कोई संपत्ति नहीं खरीद सकता इसके साथ ही वहां का नागरिक भी नहीं बन सकता। जम्मू कश्मीर के नागरिक के बारे में भी यह उल्लेख है कि जो मई 1954 से पहले वहां का नागरिक रहा हो या उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो या इससे पहले या इसके दौरान वहां पहले ही संपत्ति हासिल कर रखी हो। उदाहरण के तौर पर इसके साथ ही अगर जम्मू-कश्मीर की लड़की किसी बाहरी लड़के से शादी करती है तो उसके सारे अधिकार समाप्त हो जाएंगे। इसके साथ ही उसके बच्चों को भी किसी तरह के अधिकार नहीं मिलेंगे।

इसे खत्म करने की बात इसलिए हो रही है क्योंकि इस अनुच्छेद को संसद के जरिए लागू नहीं किया गया है, दूसरा कारण ये है कि इस अनुच्छेद के ही कारण पाकिस्तान से आए शरणार्थी आज भी राज्य के मौलिक अधिकार और अपनी पहचान से वंचित हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अनुच्छेद 35A असंवैधानिक है तो सर्वोच्च न्यायालय ने 1954 के बाद से आज तक कभी भी इसे असंवैधानिक घोषित क्यों नहीं किया? यदि यह भी मान लिया जाए कि 1954 में नेहरु सरकार ने राजनीतिक कारणों से इस अनुच्छेद को संविधान में शामिल किया था तो फिर किसी भी गैर-कांग्रेसी सरकार ने इसे समाप्त क्यों नहीं किया?

हमेशा की तरह सवाल तो कई है पर जबाब बिल्कुल नही है। सभी को लग रहा है कि इस बार सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर फेसला लेकर इसे हटा देगा। इस फैसले के मद्देनजर अभी से ही घाटी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अलगाववादी नेता यासीन मलिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। देश की जनता आशान्वित है कि इस पर सकारात्मक फैसला जल्दी ही आएगा।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय