यह तकलीफ कब होगी दूर?


गाड़ियों का देरी से चलना तो आम बात है लेकिन उस पर भी इस भयानक जानलेवा गर्मी में ठूस ठूस कर भरे हुए यात्री कैसे सफर करते है?
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अभी हमारे देश मे भयानक गर्मी का असर है। मौषम विभाग रोज अलर्ट जारी करता है तथा दोपहर में पारा रोज 44℃ को छू रहा है। ऐसे में घर से बाहर निकलना कितना मुश्किल होता है यह कोई बताने वाली बात नही है। उस पर भी अगर सफर करना हो तो ऐसा लगता है कि जैसे शरीर में गर्मी से जान ही निकल जाएगी। लेकिन आप सोचिए कि सफर करना हो और वो भी पूर्वी उत्तर भारत की तरफ करना हो तो कैसा लगेगा। सोचने मात्र से ही उस व्यक्ति का शरीर सिहर उठता है जिसने कभी इस तरफ जाने वाली रेलगाड़ी में सफर किया हो।

अभी बच्चो का ग्रीष्मावकाश चल रहा है तथा विवाह की भी सीजन है। तो यह निश्चित है कि सभी लोग अपने मूलनिवास की ओर जाने की इच्छा तो जरूर रखते है। लेकिन हर बार की तरह उत्तर भारत के पूर्वी हिस्से में जाने वाली रेलगाड़ियों की स्थिति अगर आप देख ले तो आपको यही लगेगा कि यही पर रहे। गाड़ियों का देरी से चलना तो आम बात है लेकिन उस पर भी इस भयानक जानलेवा गर्मी में ठूस ठूस कर भरे हुए यात्री कैसे सफर करते है यह तो ऊपरवाला ही जानता है। सफर करना मजबूरी है, उसके लिए रेल के डब्बे में इस तरह से यात्री भरे रहते है जिनको देखकर ही ऐसा लगता है कि यह किसी नारकीय यातना से कम नही।

रेलगाड़ी के सामान्य श्रेणी के कोच को आप देखेंगे तो स्थिति और भी बुरी देखने को मिलेगी। क्षमता से चार पांच गुना भीड़ वाले इन डब्बो में सांस लेना भी दूभर हो जाता है। आरक्षित श्रेणी में तो एक निश्चित संख्या में टिकिट अलॉट करने के बाद बुकिंग बन्द हो जाती है लेकिन अनारक्षित श्रेणी के सामान्य कोच में जितने आये उतने पाए का सिस्टम रहता है। बाद में जब गाड़ी आ जाती है तो यात्रियों में चढ़ने की कसमकस होती है। जो बैठ पाए वो सिकन्दर , बाकी जो रह जाये वो घर जाए वाला सिस्टम रहता है।

सामान्य श्रेणी में भीड़ की वजह से यात्रियों को होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए रेलवे अब बायोमीट्रिक टोकन से एंट्री देगा। रेलवे इस व्यवस्था को जल्द लागू करने जा रहा है। रेलवे का कहना है कि इससे जनरल कोच में यात्रियों के बीच होने वाली खींचतान और पहले से पैसे लेकर लोगों को सीट देने वाले कुलियों और दूसरे कर्मचारियों पर लगाम लगेगी। बायोमीट्रिक टोकन टिकट निकालते समय ही यात्री को दे दिया जाएगा। यात्री को जनरल कोच के बाहर लगी स्कैनिंग मशीन पर यह टोकन स्कैन करना होगा। उसके बाद ही आरपीएफ के जवान यात्री को डिब्बे में एंट्री देंगे।

ट्रेनों के जनरल कोच में जितनी सीटें होंगी उतने ही टिकट जारी किए जाएंगे। इस सुविधा को सबसे पहले सेंट्रल रेलवे पुष्पक एक्सप्रेस में लागू करेगी। पश्चिम रेलवे अब यह विचार कर रही है कि पहले इसे किस डिवीजन में शुरू किया जाए। रेलवे को एक बार सूरत स्टेशन पर पूर्वी उत्तरप्रदेश तथा बिहार की ओर जाने वाली गाड़ियों का सर्वे करना चाहिए।

यात्रियों की असुविधा को देखते हुए उत्तर भारतीय रेल संघर्ष समिति की स्थापना की गई थी। समिति के द्वारा अब चुनाव परिणाम के बाद सत्ता के साथ तालमेल बैठा कर सकारात्मक प्रयास किया जाएगा। महाराष्ट्र में डबल लाइन बनने के बाद अब आशा भी जगी है कि कमसेकम एक नियमित गाड़ी उस क्षेत्र के लिए जरूर मिलेगी। लेकिन जब तक नही मिलती है तब तक यात्रियों को जो असुविधा हो रही है वो असहनीय है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय