विचारधारा भिन्न तो क्या हुआ, बना रहे तालमेल


हमारे यहां काफी पार्टीया है, सबकी अपनी अपनी विचारधाराएं है, ओर सबके अपने किस्म के फॉलोवर भी है
Photo/Loktej

कभी कभी फिल्मों ओर सीरियलों में आपने देखा होगा कि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी और माँ के बीच मे रबड़ की तरह खींचता रहता है। मतलब पत्नी उसे एक तरफ खिंचती है तो परिवार उसे दूसरी तरफ। इस चक्कर मे बेचारा चक्करघिन्नी बन जाता है। कभी कभी सर इतना चकरा जाता है कि महसूस होता है कि करे क्या? मैं यहां कोई धारावाहिक या फ़िल्म की बात नही करूँगा। मैं तो हकीकत की ही बात करूंगा। बात चुनाव की करूँगा जो हाल में हमारे देश मे चल रहा है। लोकतंत्र का महापर्व। वैसे हमारे यहां काफी पार्टीया है, सबकी अपनी अपनी विचारधाराएं है, ओर सबके अपने किस्म के फॉलोवर भी है। एक ही परिवार में आपको दो दो पार्टी को फॉलो करने वाले मिल जाएंगे। यहां तक कि ऐसा भी मिलेगा की पति किसी पार्टी को समर्थन कर रहा है तो पत्नी किसी ओर को। अब व्यक्ति दो है तो विचारधाराएं, वो भी पार्टी पॉलिटिक्स के प्रति समान हो यह तो सम्भव हो जरूरी नही है।

मैं यहाँ बात पति पत्नी की नही कर रहा बल्कि ससुर बहु की कर रहा हूँ। क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी के बीजेपी में शामिल होने के लगभग एक महीने बाद पिता और बहन ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। पाटीदार कोटे के नेता हार्दिक पटेल की मौजूदगी में पिता अनिरुद्ध सिंह और बहन नयनाबा ने 14 अप्रैल को कांग्रेस का हाथ थाम लिया। कांग्रेस जॉइंन करने के बाद नयनाबा जडेजा ने कहा कि बीजेपी ने किसानों, महिलाओं और युवाओं से जो वादा किया था उसे नहीं निभा पाई।

अब रविन्द्र जडेजा की पत्नी बीजेपी के लिए वोट मांगती दिख सकती हैं। वहीं जडेजा के पिता और बहन कांग्रेस के लिए प्रचार करते नजर आ सकते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में ऐसे कई मामले देखने को मिल रहे है जहां एक ही परिवार के लोग अलग अलग पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं या अलग अलग पार्टी जॉइन की है। उत्तर प्रदेश में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव अलग पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में हैं। यूपी में ही केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बीजेपी से गठबंधन किया है वहीं उनकी मां की कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ रही हैं।

महाराष्ट्र में कांग्रेस के सीनियर नेता राधाकृष्ण लिखे पाटिल के बेटे सुजय पाटिल बीजेपी के टिकट पर अहमदनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
अब लोकतंत्र है तो सब सम्भव है। और जहाँ तक मैं मानता हूं हर व्यक्ति अपनी विचारधारा का अनुसरण करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। कोई अगर अपना अच्छा बुरा सोच किसी पार्टी का फॉलोवर है तो उसे इस बात का पूर्ण अधिकार है। सही मायने में यही लोकतंत्र है। बाकी शिव परिवार को देख लीजिएगा जिसमे सबके वाहन एक दूसरे के विरोधी है फिर भी साथ मे रहते है। वैसे ही हमारा सम्पूर्ण देश एक परिवार ही तो है, इसलिए विचारधाराएँ भले ही भिन्न हो पर तालमेल ओर प्रेम बना रहना चाहिए।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय