क्या है इनका लक्ष्य? गठबंधन या महामिलावट


लक्ष्य देश का परम वैभव होना चाहिए, लक्ष्य देश का चहुमुखी विकास होना चाहिए, लक्ष्य देश की सामरिक सुदृढ़ता होना चाहिए।
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चुनाव से पहले एक डायलॉग सोशल मीडिया पर मशहूर था, शेर अकेला आता है, झुंड में तो गीदड़ आते है। और इसके साथ दो कोलैप्स बनाकर फोटो भी रहती थी, एक प्रधानमंत्री जी की ओर दूसरी उसके नीचे सारे विपक्ष की जिन्होंने गठबंधन का एलान किया था। हालांकि सोशल मीडिया के धुरंधर यह भूल जाते थे कि शेर को भी कई पार्टीयो का साथ मिला हुआ है जिनके साथ मिलकर उन्होंने चुनाव लड़ा है, यह अलग बात है कि देश की जनता ने उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत दिया है।

फिर चुनाव की घोषणा भी हो गई और सभी नेताओं ने अपनी सेफ जगह बनाने का उपक्रम चालू कर दिया, कई उलटफेर हुए। उसके बाद बारी पार्टीयो की आई। चूंकि सत्ता सबसे बड़ा टारगेट किसी भी पार्टी के लिए होता है तो सबने उसी टारगेट को अचीव करने के लिए विपरीत ध्रुवों के मिलन की भी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी।

उसी क्रम में लोकसभा में सात सीट वाली समाजवादी पार्टी ने ज़ीरो वाली मायावती से गठबंधन किया वही दिल्ली विधानसभा में 67 सीट वाली आम आदमी पार्टी ने ज़ीरो वाली कांग्रेस से गुहार लगाई, लेकिन अस्वीकार रही। मोदी के नाम पर पहले गठबंधन तोड़ चुके नीतीशकुमार तो पहले ही समझौता एक्सप्रेस में बैठ ही चुके थे। मतलब यहां पर न शेर अकेला आता है न कोई और, सब समय काल और परिस्थिति के हिसाब से साथ तय कर लेते है।

तभी तो जो प्रधानमंत्री महागठबंधन को महाविलावट कह रहे थे, एक इंटरव्यू में यह स्पष्ट करते है कि गठबंधन वो अच्छे से चला सकते है। मतलब खुद करे तो गठबंधन है और दूसरे करे तो महाविलावट, शायद उन्हें अभी भी सब गठबंधन भाजपा तथा पीडीपी के गठबंधन की तरह बेमेल ही लग रहे हो।

लेकिन अब सामने परिणाम सबको दिख रहा है। कुटुंब तारक, दुःख निवारक सत्ता सुखासन पर सभी बैठना चाहते है तो उसके लिए प्रयास भी कर रहे है। मोदीजी बीजद की तरफ पींगे बढ़ाते दिख रहे है तो सोनियाजी भी वाइएसआर ओर केसीआर की तरफ डोरे डाल रही है। बस कैसे भी करके कुर्सी पर काबिज हो जाये यही नेताओ का अंतिम लक्ष्य होता है।

हालांकि लक्ष्य देश का परम वैभव होना चाहिए, लक्ष्य देश का चहुमुखी विकास होना चाहिए, लक्ष्य देश की सामरिक सुदृढ़ता होना चाहिए, लक्ष्य देश के युवाओं को समुचित रोजगार होना चाहिए। दूसरे देशों में जनादेश के बाद पक्ष विपक्ष उसे शिरोधार्य करके मिलकर काम करते है उसके विपरीत यहां पर जनादेश के बाद भी सत्ता की सम्भावनाये तलाशी जाती है। यही हमारे देश की विडंबना है लोग भले ही कुछ भी कहे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय