व्यापारी प्रगति संघ (वीपीएस) की रघुकुल मार्केट में बैठक, भुगतान संबंधी समस्याओं और वटाव पद्धति पर हुआ विचार-विमर्श


सूरत। स्थानीय व्यापार प्रगति संघ के पदाधिकारियों की एक बैठक गुरुवार को रघुकुल मार्केट में संपन्न हुई। इस बैठक में मुख्य रूप से कपड़ा व्यापारियों को अपने बकाया की वसूली में आने वाली दिक्कतों और विगत कुछ दिनों से ग्रे की खरीद में वटाव सिस्टम लागू करने संबंधी मार्केटों में हो रही चर्चाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

ग्रे की खरीद की पद्धति के संबंध में वीपीएस के पदाधिकारियों और रघुकुल मार्केट के उपस्थित व्यापारियों में गहन‌ विचार-विमर्श के बाद यह तथ्य उभर कर सामने आया कि चुंकि ग्रे की खरीद में व्यापारी और वीवर के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी ग्रे-ब्रोकर है, इसलिये सभी ग्रे-ब्रोकरों को इस पूरे मसले पर व्यापारियों की क्या राय बन रही है उसके विषय में समझाने का प्रयास किया जाए। ब्रोकरों से इस बाबत सलाह की जायेगी कि आखिर किन परिस्थितियों में व्यापारी पुरानी वटाव पद्धति पुनः बाजार में लागू करने का मन बना रहे हैं। व्यापारी यह चाहते हैं कि वटाव पद्धति का अमलीकरण इस प्रकार से हो कि व्यापारी और वीवर दोनों के हितों की रक्षा हो। दोनों वर्ग आपस में सरलता से व्यापार कर सें और व्यापारियों को पिछले दो वर्षों से आ रही दिक्कतों का समाधान भी हो जाए।

बैठक में बकाया भुगतान की समस्या पर भी विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में रघुकुल मार्केट में ही बैठक कर व्यापार करने वाली और फिर कई लोगों को करोड़ों को चूना लगाकर हाथ खड़े करके अब फिर से उसी मार्केट में कारोबार शुरू करने वाली एक पेढ़ी का मुद्दा भी उठा। कई भुग्तभोगियों ने यह भी बात ऊठाई कि इस प्रकार खूलेआम चिटिंग करने के बावजूद ऐसे कारोबारी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं होती यह बड़े दुःख का विषय है। ऐसे धोखाधड़ी करने वाले तत्व खुलेआम फिर से कारोबार करके आराम की जिंदगी जीते हैं, जबकि मेहनत की कमाई खाने वालों को अपनी पूंजी गंवाने का वक्त आता है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसे तत्वों के खिलाफ संगठन स्तर पर सक्रिय होकर उपयुक्त सरकारी महकमे के समक्ष मामला उठाना चाहिये।

बैठक में शामिल व्यापारियों को वीपीएस के संजय जगनानी ने आह्वान किया कि वे व्यापारी हित में संठगन से जुड़ें और हर रविवार होने वाली साप्ताहिक बैठक में हिस्सा लें और साथी व्यापारीबंधुओं की भुगतान संबंधी समस्याओं के निवारण के लिये निःस्वार्थ भाव से मदद के लिये आगे आएं।