वीपीएस ने उत्तर भारत की कपड़ा मंडियों के स्थानीय संगठनों-प्रशासनिक अधिकारियों से जोड़े तार


सूरत के कपड़ा व्यापारियों के बकाया-वसूली के मामलों में पूर्ण सहयोग का मिला आश्वासन

लोकतेज संवाददाता

(धर्मेन्द्र मिश्रा)

सूरत। सूरत के कपड़ा व्यापारियों के कारोबार में बकाया-राशि के भुगतान की समस्याओं के निवारण के लिये सक्रिय संगठन व्यापार प्रगति संघ, सूरत की एक बैठक प्रत्येक रविवार को रामचौक स्थित शिवाजी गार्डन में सुबह 8 से 9 बजे तक आहूत की जाती है। आज दिनांक 9/06/2019 को वीपीएस द्वारा आयोजित इस बैठक  में बड़ी संख्या में व्यापारियों ने हिस्सा लिया। व्यापारियों ने अपनी पेमेन्ट सम्बंधी शिकायतें तथा अपनी वीपीएस के सहयोग से वसूल हुई रकम की बातें शेयर की। बैठक में व्यापारियों ने अपनी समस्याएं मीटिंग स्थल पर बताई, जिनके निराकरण के लिए  वहीं पंच मनोनीत हुये। पंचों को 1 हफ्ते में विभिन्न शिकायतों पर अपनी रिपोर्ट अगली बैठक में देनी है।

वीपीएस के सेवा मित्र उत्तर प्रदेश के कानपुर, बिहार, मप्र और दिल्ली होकर वापस लौटे। टीम का मुख्य उद्देश्य लोगों को जोडऩा और देश के विविध शहरों में वीपीएस के नए प्रभारी नियुक्त करना है। सेवा मित्र  राजीव ओमर, अशोक बाजारी एवं राज चिरानिया ने वहाँ पहुँचकर कपड़ा कमेटी व प्रशासनिक अधिकारी से बातचीत की। दोनों ही लोगों ने हर तरीके की मदद करने का अश्वासन दिया। साथ ही  जो व्यापारिक भुगतान समस्या है, उसके निवारण के लिए जल्द ही प्रयास सभी के द्वारा किये जायेंगे, ऐसा आश्वासन दिया। कई सारे भुगतान संबंधित केस निपटाये गए और करीब 15 से 17 लाख की रिकवरी की गई। आगामी दिनों में अधिक से अधिक हिसाब मिलान करने के बाद भुगतान मिलने की संभावना बताई गई। जिन व्यापारियों से भुगतान की समस्या ज़्यादा है, उनके खिलाफ उचित समय आने पर कड़ी से कड़ी करवाई प्रारम्भ की जाएगी।

सूरत के कपड़ा कारोबारी अब एक-दूसरों की कर रहे मदद

वीपीएस बिना जाति-धर्म पूछे व्यापारियों का सहयोग पिछले तीन वर्ष से करती आ रही है। 125 वाट्स ग्रुप एवं 25 हजार व्यापारियों के सहयोग से अनेकों व्यापारी लाभान्वित हुए हैं। व्यापारी तथा व्यापार हित में सतत प्रयासरत रहने से वीपीएस कुशल कपड़ा व्यापारियों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जबकि अव्यवस्थित व्यापार करने वाले अथवा ठगने के उद्देश्य से कपड़ा मार्केट में दुकान खोलकर बैठने वाले ऐसे लोगों के लिए वीपीएस अभिशाप समान है।

व्यापार प्रगति संघ से सूरत की लगभग सभी मार्केटों से व्यापारी जुड़ चुके हैं और संगठन को मजबूत बनाने में हर संभव प्रयासरत हैं। व्यापार प्रगति संघ से जुड़े व्यापारियों के समर्पण का प्रभाव अब अन्य शहरों में भी दिखने लगा है। जहां एक ओर अन्य राज्यों के विविध शहरों के व्यापारी संघ के अग्रणियों के साथ मैसेज शेयर कर रहें है और जुड़ रहे हैं, वहीं सूरत के कपड़ा उद्यमी अब एक-दूसरे का सहयोग भी करने लगे हैं, जो व्यापार एवं व्यापारी हित के लिए शुभ संकेत है।

सूरत के इतिहास में पहली बार हो रहा है, जब व्यापारी एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। पहले अपना पैसा निकालने के लिए गलत रेफरन्स भी दे देते थे, लेकिन अब सामने से रुपये रोकने वाले व्यापारियों एवं एजेंटों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं। वाट्सअप ग्रुप में अधूरा नाम घुमाने मात्र से बंगलौर का कारोबारी सूरत के व्यापारी के बकाया रुपये देने को तैयार हो गया।

वीपीएस के न्यु टेक्सटाइम मार्केट के पंच मनोज अग्रवाल ने कहा कि व्यापारियों के लिए व्यापार प्रगति संघ एक प्लेटफार्म है। वीपीएस से व्यापारियों को काफी बल मिलता है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की ईमान बिल्कुल डगमगा गया है। ऐसे में बहुत ही संभल कर व्यापार करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि एनटीएम के तमाम मसले सामने आये, जिसमें से कुछ का निपटान हो गया और कुछ का चल रहा है। एक व्यापारी का पचास हजार रुपया आ गया है और शेष रुपये भी देने के लिए सामने वाला राजी हो गया है।

वीपीएस के आनंद शर्मा ने बताया कि जैसे राम की महिमा में हनुमान सेवक रुप होते हैं, वैसे ही वीपीएस की व्यापार में एक सेवक की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि कपड़ा मार्केट में व्यापार को प्रभावित यानी नुकसान पहुंचाने वालों को पहचानना नितांत आवश्यक है। ताकि कुशल व्यापारी अच्छे से व्यापार कर सके।

व्यापारियों की प्रति क्रियाएं एवं सुझाव

नीचे सूरत के कुछ ऐसे व्यापारियों की प्रतिक्रियाएं दी गई हैं, जिनका भुगतान लंबे समस से बकाया था और वीपीएस के प्रयासों से उन्हें भुगतान प्राप्त करने में सफलता मिली।

मालिनी वाड़ी गली नंबर-1 के व्यापारी वैभवभाई ने बताया कि दिल्ली के व्यापारियों के यहां उनका लंबे समय से बकाया था। बीते महीने 20 मई को दिल्ली गया था तो व्यपारी 25 पैसे में सेटल करने की बात करता था। एक सप्ताह बाद फिर एक बार गये तो 50 पैसे यानी आधे पर सेटलमेन्ट करने की मंशा जताई। लेकिन मैंने नहीं किया। वापस आने के बाद वीपीएस के संजय जगनानी की सलाह से सलाबतपुर थाने  में अर्जी की। संभवत: पुलिस शिकायत की खबर हो जाने के बाद अब व्यापारी की सामने से फोन आ रहा है और बोल रहा है, ‘आओ रुपये का निपटान कर लेते है।’ यह सब वीपीएस जैसे संगठन और संगठित व्यापारियों की जीत है।

अनुपम मार्केट के व्यापारी अनूपभाई ने बताया कि सिवान के व्यापारी के यहां 2 लाख बकाया था। वीपीएस के पंच की मदद से 50 हजार रुपये का आरटीजीएस कर दिया और 50 हजार रुयये जल्द देने का आश्वासन दिया है।

एम-2 मार्केट के व्यापारी रामगोपाल केडिया ने बताया कि कटिहार (बिहार) में एक व्यापारी के यहां 78 हजार रुपये बकाया था। वीपीएस के पंच ओम प्रकाश अग्रवाल से बात करने के बाद रुपये आ गये।

तिरुपति मार्केट के व्यापारी एवं वीपीएस के पंच संजय राजपूत व्यापार के सिलसिले में रांची गये हुए। सूरत के दो व्यापारियों ने उनसे संपर्क किया और व्यापारी का लोकेशन बताया तो वे दोनों व्यापारियों के अटके  रुपये लेकर आये। साथ ही रांची से छपरा गये जहां से अशोक बाजारी   पेमेन्ट भी लेकर आये।

मिलेनियम मार्केट के व्यापारी चेतनभाई का पुणे (महाराष्ट्र) के व्यापारी के यहां एजेंट के माध्यम से 5.35 लाख रुपये बकाया था। वह व्यापारी दूसरे फर्म के नाम से व्यापार कर रहा है। वीपीएस ने एजेंट पर दबाव बनाने की जरुरत बताई।

ग्लोबल मार्केट के व्यापारी चित्रांश चांडक ने बताया कि सूरत के सनराईज मार्केट के व्यापारी के यहां बकाया है। बार-बार तकादा करने के बावजूद बकाया रुपये नहीं दे रहा है। वीपीएस ने व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही।

एनटीएम मार्केट के व्यापारी मनोज टावरी का जापान मार्केट के व्यापारी के यहां 1 लाख रुपये बकाया है। 15-15 हजार का  6 चेक दिया है, लेकिन मंदी का हवाला देते हुए डालने से मना करता है। परंतु हाल में न्यू क्रेटा कार खरीदा है। कार के बारे में कहता है मेरे ससुर ने दिया है। वीपीएस से कानूनी कार्रवाई करने तथा सुसर के नाम से दामाद के यहां बकाये रुपये को लेकर पत्र लिखने की बात कही।

शिवकृपा टेक्सटाइल मार्केट के व्यापारी का दिल्ली के व्यापारी के यहां 5 लाख रुपये बकाया है। वीपीएस ने कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।


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